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  • शराब पार्टी के बाद OYO होटल में मची अफरा-तफरी, 23 साल की युवती और 19 वर्षीय युवक से जुड़ा मामला चर्चा में..

    शराब पार्टी के बाद OYO होटल में मची अफरा-तफरी, 23 साल की युवती और 19 वर्षीय युवक से जुड़ा मामला चर्चा में..

    शराब पार्टी के बाद OYO होटल में मची अफरा-तफरी, 23 साल की युवती और 19 वर्षीय युवक से जुड़ा मामला चर्चा में..

    छत्तीसगढ़ के भिलाई से दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। कोहका स्थित ओयो होटल के एक कमरे में ठहरे 19 वर्षीय प्रेमी ने अपनी 23 वर्षीय प्रेमिका के सामने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस खौफनाक कदम से पहले दोनों के बीच तीखी बहस हुई थी। पुलिस ने…

    छत्तीसगढ़ के भिलाई से दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। कोहका स्थित ओयो होटल के एक कमरे में ठहरे 19 वर्षीय प्रेमी ने अपनी 23 वर्षीय प्रेमिका के सामने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस खौफनाक कदम से पहले दोनों के बीच तीखी बहस हुई थी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल को फिलहाल सील कर दिया है और साथ में रुकी युवती को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ शुरू कर दी है।

    मिली जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान वैशाली नगर (कैंप) निवासी शादाब शेख (19 वर्ष) के रूप में हुई है जो पेशे से DJ का काम करता था। वह बुधवार शाम करीब 6 बजे अपनी प्रेमिका के साथ होटल कुणाल में आकर ठहरा था। पुलिस के मुताबिक दोनों ने रात में कमरे के अंदर बैठकर शराब का सेवन किया था। 

    इसी दौरान शादाब के मोबाइल पर उसकी Ex-Girlfriend का फोन आ गया। इस फोन कॉल को लेकर दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से और नशे की हालत में प्रेमिका ने अपने हाथ की नस काट ली और खून बहने की वजह से वह बेहोश (गश खाकर) होकर जमीन पर गिर गई। प्रेमिका को लहूलुहान हालत में देखकर घबराए शादाब ने कमरे में ही प्रेमिका की चुन्नी का फंदा बनाया और फांसी पर लटक गया।

    घटना के समय युवती कमरे में ही बेहोश पड़ी थी। सुबह जब उसे होश आया तो सामने का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए। शादाब का शव फंदे पर लटक रहा था। युवती ने तुरंत हिम्मत जुटाकर शादाब को फंदे से नीचे उतारा और अपने परिचितों को फोन कर बुलाया। इसके बाद वे युवक को लेकर तुरंत एक निजी अस्पताल पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद शादाब को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल से सूचना मिलने के बाद होटल संचालक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

    वहीं घटना की जानकारी मिलते ही स्मृति नगर पुलिस और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। फिलहाल पुलिस ने होटल के उस कमरे को सील कर दिया है और वहां से उंगलियों के निशान (Fingerprints) व अन्य जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं जिसकी जांच जारी है।

  • गुप्तधन का लालच और मौत का डर, रिटायर्ड कर्मचारी से ₹3.75 लाख ठगने वाला बाबा बेनकाब

    गुप्तधन का लालच और मौत का डर, रिटायर्ड कर्मचारी से ₹3.75 लाख ठगने वाला बाबा बेनकाब

    गुप्तधन का लालच और मौत का डर, रिटायर्ड कर्मचारी से ₹3.75 लाख ठगने वाला बाबा बेनकाब

    Yavatmal Hidden Treasure Fraud Scam: यवतमाल घर के परिसर और खेत में गुप्तधन होने तथा उसे नहीं निकालने पर नाती की जान को खतरा होने का डर दिखाकर एक तांत्रिक (भोंदूबाबा) ने सेवानिवृत्त कर्मचारी से 3 लाख 75 हजार 500 रुपये ठग लिए, यह मामला गुरुवार को यादव लेआउट, लोहारा परिसर में सामने आया। इस मामले में लोहारा पुलिस थाने में भोंदूबाबा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

    आरोपी का नाम संजय कवडेवार, निवासी दहेली, तहसील किनवट, जिला नांदेड है। जबकि ठगी का शिकार हुए व्यक्ति का नाम सतीश सोपान पाटिल (62), निवासी यादव लेआउट है। सतीश पाटील रजिस्टर ऑफिस से सेवानिवृत्त हुए हैं।

    उनकी बेटी प्रिया का दो वर्षीय बेटा हमेशा बीमार रहता था। उसके इलाज के लिए वह यवतमाल आई थी। 30 अगस्त 2025 को एक बाल अस्पताल में प्रिया की मुलाकात एक अज्ञात महिला से हुई।

    गुप्तधन और नाती की जान का डर दिखाकर लाखों की ठगी

    उस महिला ने कहा कि यदि अस्पताल में इलाज से फायदा नहीं हो रहा है तो बाहर किसी को दिखाएं और उसने किनवट के संजय कवडेवार का नाम सुझाया। अक्टूबर 2025 में सतीश पाटिल काम के सिलसिले में किनवट गए थे। वहां उन्होंने आरोपी से मुलाकात की।

    इसके बाद 8 नवंबर 2025 को आरोपी कवडेवार पाटिल के लोहारा स्थित घर पहुंचा। उसने बीमार नाती को देखकर अगरबत्ती जलाई और कुछ मंत्र पढ़ने का नाटक किया। इसके बाद उसने कहा कि घर के परिसर और खेत में गुप्तधन दबा हुआ है। उसे निकालने के लिए पूजा करनी होगी और जड़ी-बूटी लानी पड़ेगी।

    ऐसा नहीं करने पर नाती की जान को खतरा होने की बात कहकर उसने परिवार को डराया। नाती की चिंता में डूबे पाटिल ने शुरुआत में आरोपी को 45 हजार रुपये दिए। इसके बाद आरोपी ने समय-समय पर पैसों की मांग शुरू कर दी। पाटिल ने 16 दिसंबर 2025 से 23 मार्च 2026 के बीच फोन पे के माध्यम से कुल 2 लाख 90 हजार रुपये आरोपी को भेजे।

    पूजा कर ढोंग रचकर घर में पेटी गाड़ी

    बाद 7 जनवरी 2026 को आरोपी पाटिल के घर आया और गुप्तधन निकालने की पूजा का ढोंग रचा। उसने एक छोटी पेटी लाई और उसमें पाटिल की 40 हजार रुपये कीमत की 5 ग्राम सोने की अंगूठी तथा 500 रुपये नकद रखने को कहा। इसके बाद उसने वह पेटी घर के परिसर में गड्डा खोदकर जमीन में दबा दी।

    साथ ही पेटी से छेड़छाड़ करने पर जान को खतरा होने की धमकी दी। डर के कारण परिवार ने उस पेटी को हाथ नहीं लगाया। कुछ दिनों बाद आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया। ठगी का एहसास होने के बाद सतीश पाटिल ने लोहारा पुलिस थाने में भोंदूबाबा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

  • सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी गैंगस्टरों से जुड़े होने के शक में 10 युवक हिरासत में..

    सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी गैंगस्टरों से जुड़े होने के शक में 10 युवक हिरासत में..

    सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी गैंगस्टरों से जुड़े होने के शक में 10 युवक हिरासत में..

    महाराष्ट्र में पाकिस्तान से संचालित कथित सोशल मीडिया नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई की है. महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने नागपुर समेत पांच जिलों में एक साथ छापेमारी कर 10 युवकों को हिरासत में लिया है. जांच एजेंसियों को संदेह है कि इन युवकों के संपर्क पाकिस्तान में बैठे कुख्यात गैंगस्टरों से थे और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए उनसे लगातार संवाद हो रहा था. शुरुआती जांच में इंस्टाग्राम और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए संपर्क स्थापित किए जाने के संकेत मिले हैं. सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि युवाओं को लालच और बहकावे के जरिए भविष्य में आपराधिक या देशविरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही थी.

    पांच जिलों में एक साथ ATS की कार्रवाई

    गुरुवार सुबह महाराष्ट्र ATS ने नागपुर, गोंदिया, गड़चिरोली, चंद्रपुर और वर्धा जिलों में एक साथ छापेमारी की. इस कार्रवाई के दौरान 10 युवकों को हिरासत में लिया गया. सूत्रों के अनुसार पूरे महाराष्ट्र में अलग-अलग स्थानों से 160 से ज्यादा युवकों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है. फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां उनके डिजिटल कनेक्शन और गतिविधियों की जांच कर रही हैं.

    पाकिस्तानी गैंगस्टरों से जुड़े संपर्कों के संकेत

    प्रारंभिक जांच में जिन नामों का उल्लेख सामने आया है, उनमें पाकिस्तान के कुख्यात गैंगस्टर शहजाद भट्टी, आबिद जाट और राणा हनेने शामिल बताए जा रहे हैं. जांच एजेंसियों को युवकों के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल चैट रिकॉर्ड में ऐसे संकेत मिले हैं, जो इन गैंगस्टरों या उनसे जुड़े नेटवर्क के साथ संपर्क की ओर इशारा करते हैं.

    सोशल मीडिया का जाल

    ATS सूत्रों के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस पूरे नेटवर्क का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम था. बताया जा रहा है कि युवाओं को पहले इंस्टाग्राम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए जोड़ा गया. इसके बाद उनसे लगातार संपर्क बनाकर उनकी व्यक्तिगत, आर्थिक और सामाजिक जानकारी जुटाई गई. अधिकारियों को आशंका है कि ऐसे नेटवर्क कमजोर आर्थिक स्थिति वाले या आसानी से प्रभावित होने वाले युवाओं को निशाना बनाते हैं.

    पहले दोस्ती, फिर शुरू होता था देशविरोधी गतिविधियों का नेटवर्क

    जांच एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से काम करता है. पहले युवाओं से दोस्ती की जाती है, फिर उन्हें अलग-अलग लिंक और संवाद माध्यमों से जोड़ा जाता है. इसके बाद उनकी सोच, आर्थिक स्थिति और दैनिक गतिविधियों का आकलन किया जाता है. सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि भविष्य में ऐसे युवाओं का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों, धन उगाही या देशविरोधी कार्यों के लिए किया जा सकता है.

    डिजिटल डेटा की गहन जांच जारी

    ATS ने हिरासत में लिए गए युवकों के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया प्रोफाइल, ऑनलाइन लेन-देन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड जब्त कर लिए हैं. विशेषज्ञ टीमें अब डेटा का तकनीकी विश्लेषण कर रही हैं. जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि संपर्क कितने गहरे थे और नेटवर्क की पहुंच किन-किन क्षेत्रों तक थी.

    गोपनीयता के साथ आगे बढ़ रही जांच

    फिलहाल ATS पूरे मामले में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी. जांच एजेंसियां नेटवर्क की अन्य कड़ियों तक पहुंचने और इसके संभावित अंतरराष्ट्रीय संबंधों का पता लगाने में जुटी हैं.

  • रकारी कार्यालय में चोरों का तांडव, CCTV क्षतिग्रस्त कर टोटियां तक चुरा ले गए..

    रकारी कार्यालय में चोरों का तांडव, CCTV क्षतिग्रस्त कर टोटियां तक चुरा ले गए..

    रकारी कार्यालय में चोरों का तांडव, CCTV क्षतिग्रस्त कर टोटियां तक चुरा ले गए..

    Moradabad : थाना नागफनी क्षेत्र स्थित मोहल्ला दांग में बने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय को अज्ञात चोरों ने लगातार निशाना बनाया। चोरी के कई प्रयास करने के साथ-साथ चोरों ने कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों में तोड़फोड़ कर दी, जबकि परिसर में लगी पानी की टोटियां भी उखाड़कर चोरी कर लीं। मामले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    तहरीर के अनुसार, बीएसए कार्यालय में बीते दिनों दो से तीन बार चोरी का प्रयास किया गया। चोर कार्यालय में रखी पुस्तकों और अन्य सामान पर हाथ साफ करने की फिराक में थे। घटना को अंजाम देने के दौरान उन्होंने कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया और वहां लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया, ताकि उनकी पहचान न हो सके। इतना ही नहीं, अज्ञात चोर कार्यालय परिसर में लगी पानी की टोटियां भी उखाड़कर अपने साथ ले गए।

    लगातार हो रही घटनाओं से विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों में चिंता का माहौल है। सरकारी कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर थाना नागफनी पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के साथ-साथ अन्य साक्ष्य भी जुटा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।

  • पारिवारिक विवाद में खूनी वारदात, चाचा की मौत के बाद आरोपी भतीजा गिरफ्तार..

    पारिवारिक विवाद में खूनी वारदात, चाचा की मौत के बाद आरोपी भतीजा गिरफ्तार..

    पारिवारिक विवाद में खूनी वारदात, चाचा की मौत के बाद आरोपी भतीजा गिरफ्तार..

    झालावाड़. जिले के सारोला थाना क्षेत्र के नूरजी गाडरवाड़ा गांव में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है. यहां आपसी पारिवारिक विवाद के चलते एक भतीजे ने अपने ही चाचा पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया. हमले में गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग की इलाज के दौरान मौत हो गई. घटना के बाद आरोपी भतीजा मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है.

    सारोला थाना पुलिस के अनुसार नूरजी गाडरवाड़ा गांव निवासी बुजुर्ग जगन्नाथ बैरवा का परिवार के कुछ सदस्यों के साथ किसी घरेलू बात को लेकर विवाद चल रहा था. इसी विवाद को लेकर परिवार के बीच बहस शुरू हो गई. देखते ही देखते कहासुनी इतनी बढ़ गई कि आरोपी भतीजे कुलदीप ने अपना आपा खो दिया और अपने काका जगन्नाथ बैरवा पर धारदार हथियार से हमला कर दिया. हमले के बाद जगन्नाथ बैरवा गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना के बाद आसपास के लोगों और परिजनों में हड़कंप मच गया. परिजन तत्काल घायल अवस्था में उन्हें उपचार के लिए झालावाड़ जिला अस्पताल लेकर पहुंचे.

    इलाज के दौरान बुजुर्ग ने तोड़ा दम

    जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने जगन्नाथ बैरवा की गंभीर हालत को देखते हुए उपचार शुरू किया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया. घटना की सूचना मिलते ही सारोला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है. मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा. पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि घटना के पीछे पारिवारिक विवाद मुख्य कारण हो सकता है. पुलिस घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है. फिलहाल सारोला थाना पुलिस आरोपी भतीजे कुलदीप की तलाश में जुटी हुई है. पुलिस का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों और पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

  • बेटा दिलाने का झांसा, लाखों में नवजातों का सौदा… चाइल्ड ट्रैफिकिंग का खौफनाक खेल बेनकाब..

    बेटा दिलाने का झांसा, लाखों में नवजातों का सौदा… चाइल्ड ट्रैफिकिंग का खौफनाक खेल बेनकाब..

    बेटा दिलाने का झांसा, लाखों में नवजातों का सौदा… चाइल्ड ट्रैफिकिंग का खौफनाक खेल बेनकाब..

    दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय चाइल्ड ट्रैफिकिंग सिंडिकेट का खुलासा किया है, जो गरीब और मजबूर परिवारों से नवजात बच्चों को लेकर उन्हें लाखों रुपये में निसंतान दंपतियों या बेटा चाहने वाले परिवारों को बेचता था. पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें बिचौलिए, अस्पताल संचालक, लैब टेक्नीशियन, आशा वर्कर, ड्राइवर, बच्चों के सप्लायर, खरीदार दंपति और यहां तक कि कुछ मामलों में बच्चों के जैविक माता-पिता भी शामिल थे.

    दिल्ली पुलिस के मुताबिक इस मामले में अब तक 23 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें अस्पताल संचालक, बच्चे सप्लाई करने वाले एजेंट, खरीदार दंपति, बिचौलिए और जैविक माता-पिता शामिल हैं. वहीं, 9 मासूम बच्चों को इस नेटवर्क से मुक्त कराया गया है. पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

    एक आम नागरिक की सूचना से खुला पूरा नेटवर्क

    डीसीपी रोहित राजबीर सिंह के मुताबिक पूरे मामले की शुरुआत किसी बड़ी एजेंसी की सूचना से नहीं बल्कि एक आम नागरिक की सतर्कता से हुई. एक व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि पहाड़गंज इलाके में एक महिला अक्सर अलग-अलग नवजात बच्चों के साथ दिखाई देती है. कभी उसके पास लड़का होता, कभी लड़की. कुछ दिनों बाद वही महिला फिर किसी दूसरे बच्चे के साथ नजर आती थी. उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो सूचना पुलिस तक पहुंची.

    सूचना मिलते ही सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की ऑपरेशन यूनिट सक्रिय हो गई. पुलिस ने सबसे पहले पहाड़गंज और आसपास के इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की. कई दिनों तक फुटेज देखने के बाद महिला की पहचान ज्योति उर्फ कमलेश के रूप में हुई.

    सीसीटीवी के बाद शुरू हुई गुप्त निगरानी

    महिला की पहचान होने के बाद पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई नहीं की. उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई. उसके मिलने-जुलने वाले लोगों की जानकारी जुटाई गई और यह पता लगाने की कोशिश की गई कि वह बच्चों के साथ आखिर करती क्या है. जांच के दौरान पता चला कि वह नवजात बच्चों के सौदे में शामिल है. इसके बाद पुलिस ने उसे रंगे हाथों पकड़ने के लिए डिकॉय ऑपरेशन की योजना बनाई.

    पुलिस बनी ग्राहक, 20 हजार में तय हुई पहली डील

    एक पुलिसकर्मी को ग्राहक बनाकर ज्योति से संपर्क कराया गया. बातचीत के दौरान ज्योति ने दावा किया कि वह नवजात बच्चा उपलब्ध करा सकती है. दोनों के बीच सौदा तय हुआ और आरोपी ने 20 हजार रुपये एडवांस मांगे. इसके बाद पुलिस ने पूरी योजना तैयार की और तय समय पर आर.के. आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास जाल बिछा दिया.

    5 जून को रंगे हाथों पकड़े गए आरोपी

    5 जून 2026 को ज्योति उर्फ कमलेश अपने दो साथियों शालू और ललित के साथ चार से पांच दिन के एक नवजात लड़के को लेकर आर.के. आश्रम मेट्रो स्टेशन पहुंची. जैसे ही बच्चे को ग्राहक के हवाले किया जाने लगा, पहले से मौजूद पुलिस टीम ने तीनों को घेर लिया. मौके से चार-पांच दिन का नवजात सुरक्षित बरामद कर लिया गया. पुलिस ने 20 हजार रुपये की टोकन राशि भी बरामद की. इसी मामले में पहाड़गंज थाने में बीएनएस और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई.

    पूछताछ में खुला करोड़ों के नेटवर्क का राज

    शुरुआत में पुलिस को लगा कि यह सिर्फ एक बच्चे की खरीद-बिक्री का मामला है. लेकिन जैसे-जैसे तीनों आरोपियों से पूछताछ आगे बढ़ी, पुलिस के सामने हैरान करने वाली जानकारी आती गई. पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय है और पिछले करीब डेढ़ साल से बच्चों की खरीद-फरोख्त कर रहा है.

    इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल डीसीपी-2 प्रशांत चौधरी की अगुवाई में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया. इस टीम में एसीपी, एसएचओ, स्पेशल स्टाफ, महिला पुलिस अधिकारी और कानूनी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया, ताकि जांच के दौरान किसी भी कानूनी पहलू की अनदेखी न हो.

    सात राज्यों तक फैला था नेटवर्क

    एसआईटी ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में एक साथ जांच शुरू की. मोबाइल लोकेशन, बैंक खातों, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल भुगतान और तकनीकी निगरानी के जरिए एक-एक कड़ी जोड़ी गई धीरे-धीरे पुलिस के सामने पूरा नेटवर्क खुलता चला गया.

    हर सदस्य की अलग जिम्मेदारी

    जांच में पता चला कि गिरोह पूरी तरह संगठित तरीके से काम करता था.

    • कुछ लोग गरीब परिवारों की तलाश करते थे.
    • कुछ लोग गर्भवती महिलाओं पर नजर रखते थे.
    • कुछ लोग अस्पतालों से संपर्क रखते थे.
    • कुछ नवजात बच्चों को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाते थे.
    • कुछ लोग खरीदार ढूंढते थे.
    • कुछ बैंक खातों के जरिए पैसों का लेनदेन संभालते थे.
    • जबकि कुछ लोग फर्जी दस्तावेज तैयार कराने का काम करते थे.

    यानी पूरे नेटवर्क में हर व्यक्ति की भूमिका पहले से तय थी.

    ज्योति थी पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी

    पुलिस जांच में सामने आया कि ज्योति उर्फ कमलेश इस पूरे नेटवर्क की सबसे महत्वपूर्ण सदस्य थी. वह हरियाणा में आशा वर्कर के रूप में काम करती थी. लेकिन पुलिस के मुताबिक उसकी असली भूमिका बच्चों की खरीद-फरोख्त कराना थी. वह अलग-अलग राज्यों से बच्चों की व्यवस्था करती और फिर उन्हें खरीदने वाले परिवारों तक पहुंचाती थी. दिल्ली पुलिस के मुताबिक ज्योति पहले भी मानव तस्करी के मामलों में गिरफ्तार हो चुकी है. उसके खिलाफ पंजाबी बाग थाने में आईपीसी की धारा 363, 370, 370A और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज है.

    प्रतिभा और विपिन की गिरफ्तारी से मिले नए सुराग

    ज्योति से पूछताछ के बाद पुलिस ने प्रतिभा और विपिन को गिरफ्तार किया. दोनों एक और बच्चे की डील करने जा रहे थे. जब पुलिस ने उन्हें पकड़ा तो उनके पास से 2 लाख 92 हजार 400 रुपये नकद मिले. पूछताछ में पता चला कि यह रकम नवजात बच्चे की खरीद के लिए रखी गई थी.
    प्रतिभा पेशे से फ्रीलांस लैब टेक्नीशियन थी और हीरा मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल से जुड़ी हुई थी. वहीं विपिन पूरे नेटवर्क का ड्राइवर था. वह बच्चों और आरोपियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम करता था.

    अस्पताल से लेकर आदिवासी गांवों तक फैला था नेटवर्क

    जांच आगे बढ़ी तो पुलिस के सामने सबसे चौंकाने वाला खुलासा दिल्ली के बेगमपुर स्थित हीरा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल को लेकर हुआ. पुलिस का आरोप है कि यह अस्पताल सिर्फ इलाज का केंद्र नहीं था, बल्कि नवजात बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त के इस नेटवर्क की एक अहम कड़ी बन चुका था. जांच के मुताबिक अस्पताल की संचालक डॉ. विवेकी कपूर गिरोह के अन्य सदस्यों के संपर्क में थी. आरोप है कि अस्पताल में ऐसे नवजात बच्चों को रखा जाता था, जिन्हें गिरोह विभिन्न राज्यों से लेकर आता था.

    पुलिस का दावा है कि अस्पताल में इलाज या आईवीएफ और स्त्री रोग संबंधी परामर्श के लिए आने वाले निसंतान दंपतियों की पहचान की जाती थी और बाद में उन्हें अवैध तरीके से बच्चे उपलब्ध कराने की पेशकश की जाती थी. पुलिस का आरोप है कि अस्पताल के जरिए कई सौदे तय हुए और बच्चों के जन्म से जुड़े दस्तावेज, अस्पताल रिकॉर्ड और अन्य कागजात तैयार कर उनकी पहचान बदलने की कोशिश भी की गई. फिलहाल अस्पताल से बरामद दस्तावेजों, जन्म रिकॉर्ड और मेडिकल फाइलों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है.

    गुरुग्राम से गुजरात तक फैला था सप्लाई नेटवर्क

    जांच में सामने आया कि गिरोह का सबसे बड़ा सप्लायर साहिबा उर्फ कालिया गमार और उसका सहयोगी शंकर गमार थे. दोनों गुजरात और राजस्थान के गरीब तथा आदिवासी इलाकों में जाकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की तलाश करते थे. पुलिस के मुताबिक कई परिवारों को कुछ लाख रुपये का लालच देकर उनके नवजात बच्चे ले लिए जाते थे. इसके बाद बच्चों को दिल्ली और अन्य राज्यों में भेज दिया जाता था, जहां पहले से तैयार खरीदार उनका इंतजार करते थे.

    तकनीकी निगरानी और लगातार पीछा करने के बाद पुलिस ने शंकर गमार और अन्य आरोपियों तक पहुंच बनाई. गुजरात के साबरकांठा जिले से जैविक माता-पिता कांतीभाई गमार और सुग्नाबेन गमार को भी गिरफ्तार किया गया. जांच में सामने आया कि उन्होंने पैसों के बदले अपना नवजात बच्चा गिरोह को सौंप दिया था. बाद में उसी बच्चे को कई गुना अधिक कीमत पर दूसरे परिवार को बेच दिया गया. पुलिस का दावा है कि कालिया गमार अब तक 30 से अधिक बच्चों को इस नेटवर्क तक पहुंचा चुका है. उसके पूरे नेटवर्क की जांच अभी जारी है.

    गरीबी, मजबूरी और सामाजिक दबाव का उठाया जाता था फायदा

    जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह केवल गरीब परिवारों को ही निशाना नहीं बनाता था, बल्कि उन महिलाओं की भी पहचान करता था जो अविवाहित थीं या किसी कारणवश बच्चे का पालन-पोषण नहीं करना चाहती थीं. ऐसे ही एक मामले में दिल्ली की रहने वाली एक युवती ने अविवाहित होने के कारण बच्चा अपने पास रखने से इनकार कर दिया. पुलिस के मुताबिक डिलीवरी के बाद बच्चे को मां को वापस देने के बजाय गिरोह के कब्जे में रखा गया और बाद में उसे दूसरे परिवार को बेच दिया गया. जैविक मां को कोई पैसा भी नहीं दिया गया.

    डिमांड पहले, बच्चा बाद में

    पुलिस की जांच में सबसे अहम खुलासा यह हुआ कि यह गिरोह पहले बच्चे नहीं ढूंढता था, बल्कि पहले ग्राहक तलाशता था. जिन दंपतियों की संतान नहीं थी, या जिनके घर पहले से बेटियां थीं और वे बेटा चाहते थे, उनसे संपर्क किया जाता था. जब खरीदार तैयार हो जाता था, तब गिरोह अपने नेटवर्क के जरिए नवजात बच्चे की व्यवस्था करता था. यानी पूरा कारोबार डिमांड एंड सप्लाई के मॉडल पर चल रहा था.

    बच्चों की कीमत कैसे तय होती थी?

    पुलिस जांच के मुताबिक गिरोह गरीब परिवारों से नवजात बच्चों को डेढ़ से दो लाख रुपये में हासिल करता था. इसके बाद वही बच्चा 6 से 8 लाख रुपये में बेच दिया जाता था. कुछ मामलों में कीमत 9 लाख रुपये तक पहुंच जाती थी. कीमत इस बात पर निर्भर करती थी कि बच्चा कितना छोटा है, लड़का है या लड़की, खरीदार कितना संपन्न है और उसकी जरूरत कितनी ज्यादा है.

    बेटे की चाह में बने आरोपी

    पुलिस जांच में कई ऐसे परिवार सामने आए जो वर्षों से निसंतान थे, जबकि कुछ परिवारों के पास पहले से बेटी थी, लेकिन वे बेटा चाहते थे. रोहिणी निवासी गरिमा जैन और उसके परिवार पर आरोप है कि उन्होंने करीब 8 लाख रुपये देकर नवजात बच्चा लिया.

    • ऋषिकेश की केतकी गुप्ता ने कथित तौर पर लगभग 4 लाख रुपये देकर एक बच्चा खरीदा.
    • हरिद्वार के अमित प्रताप सिंह और उनकी पत्नी अभा सिंह पर लगभग 5 लाख रुपये देकर बेटा खरीदने का आरोप है.
    • ग्वालियर निवासी मुकेश पाल और रीमा पाल को दो बच्चों की खरीद के आरोप में गिरफ्तार किया गया.
    • पानीपत के सनी अरोड़ा, रितु अरोड़ा और सरिता के खिलाफ भी बच्चों की खरीद के आरोप में कार्रवाई की गई.
    • पुलिस ने साफ किया है कि बच्चों की खरीद-फरोख्त में शामिल खरीदारों को भी आरोपी बनाया गया है.

    चार और बच्चों का रेस्क्यू, कुल 9 मासूम सुरक्षित

    ताजा कार्रवाई में पुलिस ने चार और बच्चों को सुरक्षित बरामद किया. रोहिणी से 16 दिन का एक नवजात लड़का, ऋषिकेश से एक महीने का नवजात. मथुरा से लगभग एक साल एक महीने का बच्चा और हरिद्वार से करीब आठ महीने का बच्चा बरामद किया गया है.

    इससे पहले भी पांच बच्चों को हरियाणा, पानीपत और ग्वालियर समेत विभिन्न स्थानों से मुक्त कराया जा चुका था. इनमें 27 दिन के जुड़वां बच्चों सहित कई नवजात शामिल थे. पुलिस के अनुसार रेस्क्यू किए गए चार बच्चे आदिवासी परिवारों से जुड़े हुए हैं.

    अब तक कुल 9 बच्चों को सुरक्षित बचाया जा चुका है. सभी बच्चों को CWC की निगरानी में भेजा गया है. रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) के समक्ष पेश किया गया. समिति के निर्देश पर सभी बच्चों की देखभाल, चिकित्सा, सुरक्षा और पुनर्वास की व्यवस्था की गई है. पुलिस जैविक माता-पिता की पहचान, डीएनए मिलान और कानूनी प्रक्रिया भी पूरी कर रही है.

    IVF और सरोगेसी का एंगल नहीं मिला

    जांच के दौरान पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक आईवीएफ या सरोगेसी से जुड़े किसी संगठित रैकेट के सबूत नहीं मिले हैं. पुलिस के अनुसार आरोपी सीधे जैविक माता-पिता से बच्चे लेकर उन्हें जरूरतमंद दंपतियों को बेचते थे. यानी पूरा नेटवर्क केवल अवैध खरीद-फरोख्त पर आधारित था.

    बैंक खातों से खुल रही है करोड़ों की मनी ट्रेल

    पुलिस को जांच के दौरान कई बैंक खातों में लाखों रुपये के लेनदेन के सबूत मिले हैं. अब इन खातों की गहन जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे नेटवर्क से किसने कितना पैसा कमाया और रकम किन-किन लोगों तक पहुंची. मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट, डिजिटल पेमेंट, अस्पताल रिकॉर्ड और जन्म प्रमाणपत्र से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं.

    अभी और बढ़ सकती है गिरफ्तारियों की संख्या

    दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है. कई अन्य राज्यों में भी इस गिरोह के तार मिलने की संभावना है. पुलिस उन अस्पतालों, एजेंटों, ट्रांसपोर्टरों, दस्तावेज तैयार करने वालों और अन्य सहयोगियों की पहचान कर रही है जो इस नेटवर्क का हिस्सा रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. साथ ही कई और बच्चों को इस गिरोह के चंगुल से मुक्त कराए जाने की संभावना है.

    दिल्ली पुलिस का मानना है कि यह हाल के सालों में सामने आए नवजात बच्चों की तस्करी के सबसे संगठित और बड़े मामलों में से एक है, जिसमें गरीबी, सामाजिक दबाव, बेटे की चाह और अवैध कमाई की लालच ने मिलकर मासूम बच्चों को खरीद-फरोख्त का सामान बना दिया था.

  • शादी से पहले हवस का खेल… 13 साल की मासूम से दुष्कर्म के आरोप में NRI अमन गिरफ्तार..

    शादी से पहले हवस का खेल… 13 साल की मासूम से दुष्कर्म के आरोप में NRI अमन गिरफ्तार..

    शादी से पहले हवस का खेल… 13 साल की मासूम से दुष्कर्म के आरोप में NRI अमन गिरफ्तार..

    शादी से पहले दुष्कर्म के आरोप में NRI गिरफ्तार, श्रीगंगानगर पुलिस का बड़ा एक्शन

    Sriganganagar minor rape case: श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय नाबालिगा के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म के मामले में स्थानीय पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. पुलिस ने इस सनसनीखेज प्रकरण के मुख्य आरोपी और NRI अमन रामगढ़िया को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी अमन रामगढ़िया पिछले कुछ समय से विदेश में रह रहा था और वह अपनी शादी के लिए करीब डेढ़ महीने पहले ही न्यूजीलैंड से लौटा था. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद था, क्योंकि आरोपी की शादी आगामी 14 जुलाई को तय थी, जिसके लिए तैयारियां भी चल रही थीं. हालांकि, अपराध की गंभीरता और पुलिस की सख्त कार्रवाई के चलते उसे शादी के बंधन में बंधने से पहले ही सलाखों के पीछे जाना पड़ा.

    पुलिस जांच के दौरान सामने आया है कि आरोपी अमन ने होटल में बतौर ग्राहक रुककर इस पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया था. उसने एक नाबालिग बच्ची को अपना शिकार बनाया, जो कानूनन एक बहुत ही गंभीर अपराध है. घटना की सूचना मिलने के बाद से ही पुलिस ने मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा था. होटल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों को जुटाने के बाद पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया.

    अब तक 20 गिरफ्तारियां, SIT कर रही जांच
    इस पूरे प्रकरण में श्रीगंगानगर पुलिस के द्वारा अब तक कुल 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. मामले की संवेदनशीलता और इसमें शामिल विभिन्न पहलुओं को देखते हुए, राजस्थान पुलिस ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है. यह SIT टीम लगातार जांच पड़ताल कर रही है ताकि घटना में संलिप्त हर एक चेहरे को बेनकाब किया जा सके. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले में साक्ष्यों के आधार पर सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे. आरोपी का NRI होना और विदेश से आना इस पूरे केस को और भी अधिक संवेदनशील बनाता है, लेकिन पुलिस की टीमें पूरी तरह से साक्ष्यों को मजबूत करने में लगी हैं ताकि न्यायालय में दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके.

  • सरकारी स्कूल के शिक्षक पर किशोर के यौन शोषण का आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार..

    सरकारी स्कूल के शिक्षक पर किशोर के यौन शोषण का आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार..

    सरकारी स्कूल के शिक्षक पर किशोर के यौन शोषण का आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार..

    बलिया जिले के सिकंदरपुर क्षेत्र के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को 14 वर्षीय लड़के से कुकर्म के प्रयास के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) मनीष सिंह ने बताया…

    Ballia News: बलिया जिले के सिकंदरपुर क्षेत्र के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को 14 वर्षीय लड़के से कुकर्म के प्रयास के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) मनीष सिंह ने बताया कि सिकंदरपुर शिक्षा क्षेत्र के सिसोटार गांव स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक गुलाम मुस्तफा उर्फ पप्पू (50) को गुरुवार को निलंबित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि इस मामले में अनुशासनात्मक जांच के आदेश दिए गए हैं और सीयर क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारी को जांच अधिकारी बनाया गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आरोपी शिक्षक के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस के अनुसार, सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर कस्बे के डोमनपुरा मोहल्ले के गुलाम मुस्तफा उर्फ पप्पू ने 5 जुलाई को अपने घर पर फर्नीचर का काम करने के बहाने किशोर को बुलाया। किशोर को घर बुलाकर गुलाम ने दरवाजा बंद कर उससे कुकर्म करने का प्रयास किया। इस मामले में पीड़ित किशोर की तहरीर पर गुलाम मुस्तफा के विरुद्ध बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की सुसंगत धारा में नामजद मुकदमा दर्ज किया गया तथा पुलिस ने आरोपी शिक्षक को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया।

  • 13 वर्षीय बच्ची को बंधक बनाकर किया दुष्कर्म, आरोपी को मरते दम तक जेल की सजा..

    13 वर्षीय बच्ची को बंधक बनाकर किया दुष्कर्म, आरोपी को मरते दम तक जेल की सजा..

    13 वर्षीय बच्ची को बंधक बनाकर किया दुष्कर्म, आरोपी को मरते दम तक जेल की सजा..

     बिहार के दरभंगा जिले में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो कोर्ट) के विशेष न्यायाधीश ने एक नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म करने के आरोप में एक दुष्कर्मी को जीवन पर्यंत सश्रम कारावास और एक लाख रूपया अर्थ दंड की सजा सुनाई है। 

    लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 अधिनियम के विशेष अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुलेखा झा ने 13 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म करने बाले सिंहवारा थाना क्षेत्र के पैगंबरपुर गांव निवासी दुष्कर्मी विवेक कुमार शर्मा को जीवन पर्यंत सश्रम आजीवन कारावास और एक लाख रूपया अर्थ दंड की सजा सुनाई है। प्रभारी विशेष लोक अभियोजक अमर प्रकाश ने बताया कि 21 सितंबर 2022 को दर्ज प्राथमिक संख्या 201/22 में आरोपी ने 13 वर्षीय बालिका को बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था और विरोध करने पर उसने पीड़िता के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया था, जिससे वह बेहोश हो गई अगले दिन उसके कराहने की आवाज सुनकर लोगों ने संज्ञान लिया और उसे पानी पिलाकर होश में लाया और उससे घटना की जानकारी ली। परिवार वालों के द्वारा पुलिस में दी गई सूचना के बाद अभियुक्त को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। 

    पीड़िता को मिलेगा 6 लाख मुआवजा
    प्रकाश ने बताया कि गुरुवार को अदालत ने सजा निर्धारण के बिंदु पर सुनवाई के दौरान इस सामाजिक अपराध बताते हुए दुष्कर्मी सिंहवारा थाना क्षेत्र के पैगंबरपुर गांव निवासी विवेक कुमार शर्मा को पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत जीवन पर्यंत सश्रम कारावास एवं 50 हजार रूपया अर्थदंड, पोक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत 25 वर्षों का सश्रत्म कारावास और 50 हजार रूपया अर्थ दंड तथा भारतीय दंड विधान की धारा 341 में एक माह का कारावास और धारा 342 में 6 माह के कारावास की सजा सुनाई है। वही अर्थ दंड नहीं देने पर दोषी को 6 माह का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतान पड़ेगी। इसके अतिरिक्त न्यायालय ने बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पीड़िता को सहायतार्थ 6 लाख रुपए मुआवजा भुगतान करने का आदेश भी पारित किया है। 

  • रोजगार के नाम पर लोगों को ठगने वाला गैंग गिरफ्तार, 5 आरोपी दबोचे गए..

    रोजगार के नाम पर लोगों को ठगने वाला गैंग गिरफ्तार, 5 आरोपी दबोचे गए..

    रोजगार के नाम पर लोगों को ठगने वाला गैंग गिरफ्तार, 5 आरोपी दबोचे गए..

    Moradabad : नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने और विरोध करने पर फायरिंग कर जान से मारने की कोशिश करने वाले गिरोह का सिविल लाइंस पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अवैध तमंचा, कारतूस, नकदी, मोबाइल फोन और घटना में प्रयुक्त कार बरामद की है।

    पुलिस के अनुसार, फतेहपुर निवासी महेंद्र कुमार को उनके परिचित ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर मुरादाबाद बुलाया था। यहां आरोपियों ने उन्हें अपनी कार में बैठाकर बंधक जैसा बना लिया और उनके खाते से जबरन रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा ली। जब पीड़ित ने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की, जान से मारने की धमकी दी और फायरिंग कर दी।

    घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइंस थाना पुलिस सक्रिय हो गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह और क्षेत्राधिकारी सिविल लाइंस अभिनव द्विवेदी के नेतृत्व में टीम गठित की गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए देर रात पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान काव्यांश शर्मा, अक्षय, दीपक, गुलशेर उर्फ इरशाद अली और सूरज बोहरा के रूप में हुई है। सभी आरोपी उत्तराखंड के जनपद ऊधम सिंह नगर के विभिन्न क्षेत्रों के निवासी बताए गए हैं। इनमें से चार आरोपी आईटीआई थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं।

    पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक अवैध तमंचा, दो जिंदा कारतूस, एक खोखा कारतूस, चार मोबाइल फोन, एक लाख आठ हजार रुपये नकद और उत्तराखंड नंबर की बलेनो कार बरामद की है। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और लेन-देन की भी जांच कर रही है, ताकि ठगी की रकम और अन्य पीड़ितों की जानकारी सामने आ सके।

    एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अक्षय पहले से पीड़ित महेंद्र कुमार को जानता था। इसी परिचय का फायदा उठाकर उसे नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से उसे बुलाकर ठगी और फायरिंग की वारदात को अंजाम दिया गया।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है। आशंका है कि यह गिरोह नौकरी दिलाने के नाम पर अन्य लोगों को भी निशाना बना चुका है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।