
पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में कुछ विशेष वस्तुओं को घर लाना और पूजा-पाठ में उनका इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है।
साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से होगी। ऐसे में आइए जानते हैं उन 3 चीजों के बारे में, जिन्हें पितृपक्ष के दौरान घर लाने की परंपरा बताई जाती है।
1. तांबे, कांसे या पीतल के बर्तन
पितृपक्ष के दौरान तांबे, कांसे और पीतल के बर्तन खरीदना कुछ धार्मिक मान्यताओं में शुभ माना जाता है। इन धातुओं के बर्तनों का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में भी किया जाता है। मान्यता है कि इन बर्तनों से पितरों का तर्पण करने से पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त होती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
2. घर लाएं गंगाजल
हिंदू धर्म में गंगाजल को पवित्र माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान इसे घर लाना और धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। मान्यता के अनुसार, गंगाजल से तर्पण करने और पूजा के दौरान इसका उपयोग करने से धार्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है। कुछ परिवार इस अवधि में गंगाजल का छिड़काव भी करते हैं।
3. काले तिल का करें इस्तेमाल
पितृपक्ष में काले तिल का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। श्राद्ध और तर्पण के दौरान काले तिल का इस्तेमाल करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काले तिल का दान करना भी शुभ माना जाता है। कई लोग पितृपक्ष के दौरान इन्हें घर लाकर पूजा और तर्पण से जुड़े कार्यों में इस्तेमाल करते हैं।
पितृपक्ष में इन बातों का भी रखें ध्यान
पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों का स्मरण करना, श्रद्धापूर्वक श्राद्ध और तर्पण करना तथा जरूरतमंदों की सहायता करना धार्मिक परंपराओं का हिस्सा है। इन दिनों सात्विक आचरण और परिवार की परंपराओं के अनुसार पूजा-पाठ करने पर भी जोर दिया जाता है।
ध्यान दें: तांबे, कांसे या पीतल के बर्तन, गंगाजल और काले तिल से जुड़ी बातें धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें जीवन में खुशियां आने या पितृदोष दूर होने की वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।


















