Category: Dharam

  • आंखें बंद, हाथों में रंग और सामने गणपति… 30 सेकंड में तस्वीर बनाकर हैरान करते हैं काशी के विजय..

    आंखें बंद, हाथों में रंग और सामने गणपति… 30 सेकंड में तस्वीर बनाकर हैरान करते हैं काशी के विजय..

    आंखें बंद, हाथों में रंग और सामने गणपति… 30 सेकंड में तस्वीर बनाकर हैरान करते हैं काशी के विजय..

    भगवान शिव की नगरी काशी में भगवान गणेश की लगातार 35 वर्षों से साधना करने वाले मूर्तिकार विजय की चर्चा हो रही है. विजय आंखों में पट्टी बांधकर महज 30 – 40 सेकंड में गणपति की आकृति उकेर देते हैं. कई बार एक चित्र तैयार करने में उन्हें एक मिनट का समय लग जाता है. विजय इसे 20 – 25 सेकेंड के अंदर करना चाहते है.

    आंखों पर काली पट्टी बंधी है. सामने सफेद कैनवास रखा है और हाथों में रंग हैं. देखने वाले यही सोचते रह जाते हैं कि आखिर बिना देखे कोई तस्वीर कैसे बना सकता है. लेकिन कुछ ही सेकेंड में कैनवास पर भगवान गणेश की खूबसूरत आकृति उभर आती है. यह अनोखी कला है काशी के मूर्तिकार और चित्रकार विजय कुमार की. पिछले करीब 35 साल से कला की साधना कर रहे विजय आंखों पर पट्टी बांधकर महज 30 से 40 सेकेंड में गणपति की तस्वीर बना देते हैं. उनकी इस कला को देखने के लिए लोग खास तौर पर पहुंच रहे हैं. विजय कुमार के लिए यह सिर्फ चित्रकारी नहीं, बल्कि भगवान गणेश की साधना है. वह बताते हैं कि जब आंखों पर पट्टी बंधी होती है, तब उनका पूरा ध्यान अपने आराध्य गणपति पर रहता है.

    उनके मन में गणेश की तस्वीर इतनी स्पष्ट होती है कि हाथ अपने आप कैनवास पर आकृति बनाने लगते हैं. कई बार विजय को एक तस्वीर बनाने में करीब एक मिनट का समय लगता है, लेकिन अब उनका लक्ष्य इसे 20 से 25 सेकेंड में पूरा करना है. बचपन से ही भगवान गणेश की पूजा करने वाले विजय रोज अपनी दुकान पर पहुंचने के बाद सबसे पहले गणपति की साधना और चित्र बनाने का अभ्यास करते हैं.भतीजे की चुनौती ने दिखाई नई राह विजय कुमार का परिवार कई पीढ़ियों से मूर्ति निर्माण के काम से जुड़ा रहा है. बचपन से ही उन्हें पत्थरों को तराशने और चित्र बनाने का शौक था. करीब 35 साल पहले उन्होंने कला को अपनी साधना बना लिया. आंखों पर पट्टी बांधकर चित्र बनाने की शुरुआत भी एक दिलचस्प घटना से हुई. विजय के भतीजे ने एक दिन मजाक में उन्हें आंखों पर पट्टी बांधकर तस्वीर बनाने की चुनौती दी.

    विजय ने चुनौती स्वीकार की और धीरे-धीरे बिना देखे सही आकृति बनाने में माहिर हो गए. अब वह आंखें खोलकर और बंद करके, दोनों तरह से गणपति की तस्वीर बना लेते हैं.काशी के 56 विनायकों को भी कैनवास पर उतारा विजय कुमार की कला को देशभर में पहचान मिल चुकी है. उन्होंने काशी के प्रसिद्ध मंदिरों में चित्रकारी करने के साथ काशी के 56 विनायकों की तस्वीरें भी कैनवास पर उतारी हैं. देश के अलग-अलग हिस्सों में उनकी पेंटिंग की प्रदर्शनियां लग चुकी हैं. कला के क्षेत्र में उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं और उन्हें ‘काशी रत्न’ सम्मान से भी नवाजा गया है.

    महाराष्ट्र के सिद्धिविनायक मंदिर में विजय ने 51 और 56 घंटे तक लगातार तस्वीर बनाने का रिकॉर्ड भी बनाया है. उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज होने की बात भी सामने आती है.बप्पा की इच्छा तक जारी रहेगी साधना विजय कहते हैं कि उन्होंने अपना जीवन कला को समर्पित कर दिया है. जब तक बप्पा की इच्छा होगी, उनकी यह साधना जारी रहेगी. वह तेजपत्ता, रुद्राक्ष जैसी छोटी-छोटी चीजों पर भी भगवान गणेश की आकृति उकेर चुके हैं. उनके लिए रंग और रेखाएं सिर्फ चित्रकारी के साधन नहीं, बल्कि गणपति के चरणों में अर्पित की जाने वाली कला-अंजलि हैं.

  • हजारों दीपों से जगमगाएगी रामनगरी, 7 नवंबर को अयोध्या में दिखेगा दीपोत्सव का भव्य और दिव्य नजारा

    हजारों दीपों से जगमगाएगी रामनगरी, 7 नवंबर को अयोध्या में दिखेगा दीपोत्सव का भव्य और दिव्य नजारा

    हजारों दीपों से जगमगाएगी रामनगरी, 7 नवंबर को अयोध्या में दिखेगा दीपोत्सव का भव्य और दिव्य नजारा

    रामनगरी अयोध्या में इस साल 7 नवंबर को होने वाला दीपोत्सव भव्यता और आध्यात्मिकता का खास संगम बनने जा रहा है. दीपोत्सव को यादगार बनाने के लिए प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं.

    एक ओर जहां दीपों के जरिए नया विश्व कीर्तिमान बनाने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर सरयू घाटों को भी बेहद खूबसूरत बनाने की योजना पर काम चल रहा है. शाम होते ही दीपों की रोशनी से सरयू तट का नजारा बेहद खास दिखाई देगा.एक किलोमीटर तक सजेंगे सरयू के घाट दीपोत्सव के दौरान सरयू नदी के पुल से लेकर लक्ष्मण घाट तक करीब एक किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र को आकर्षक तरीके से सजाया जाएगा. घाटों पर रंग-बिरंगी लाइटिंग के साथ फूलों की विशेष सजावट की जाएगी. दीप जलने के बाद पूरा सरयू तट रोशनी से जगमगा उठेगा. प्रशासन की कोशिश है कि यहां आने वाले

    श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक अलग और यादगार अनुभव मिले.महाआरती में दिखेगी अवध की संस्कृति मुख्य आयोजन के दिन सरयू घाटों पर भव्य महाआरती भी प्रस्तावित है. इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मां सरयू की आरती की जाएगी. हजारों दीपों की रोशनी और सरयू की लहरों का नजारा श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहेगा. महाआरती के जरिए अवध की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की खूबसूरत झलक भी देखने को मिलेगी.घाटों के रिनोवेशन का काम जारी दीपोत्सव को लेकर अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में अभी से उत्साह देखने को मिल रहा है. सरयू घाटों पर रिनोवेशन का काम भी जारी है. काम पूरा होने के बाद घाटों को और भव्य रूप देने की तैयारी है. इससे दीपोत्सव के दौरान सरयू तट की खूबसूरती और बढ़

    जाएगी.प्रशासन ने शुरू की तैयारियां जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी के मुताबिक, इस बार दीपोत्सव का आयोजन 7 नवंबर को किया जाना है. इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. अधिकारियों की बैठकें हो रही हैं और अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं. प्रशासन का लक्ष्य है कि इस बार अयोध्या का दीपोत्सव भव्य आयोजन के साथ श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक और यादगार अनुभव भी बने.

  • फल-फूल नहीं, इस मंदिर में​​​​​ देवी को चढ़ाए जाते हैं 5 पत्थर, जानें पूरी कहानी और इतिहास..

    फल-फूल नहीं, इस मंदिर में​​​​​ देवी को चढ़ाए जाते हैं 5 पत्थर, जानें पूरी कहानी और इतिहास..

    फल-फूल नहीं, इस मंदिर में​​​​​ देवी को चढ़ाए जाते हैं 5 पत्थर, जानें पूरी कहानी और इतिहास..

    छत्तीसगढ़ के मां बगदाई वनदेवी मंदिर में फल-फूल नहीं, बल्कि 5 पत्थर अर्पित कर मन्नत मांगी जाती है. सदियों पुरानी यह अनोखी परंपरा आज भी लोगों की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र है. आइए जानते हैं, यह परंपरा कैसे शुरू हुई, कथा और इतिहास क्या है?

    लोग मंदिर में क्या-क्या नहीं चढ़ाते हैं, सोने-चांदी के आभूषण, छत्र, छप्पन भोग, लेकिन क्या आपने ये देखा और सुना है केवल 5 पत्थर अर्पित करने से लोगों की मुराद पूरी हो जाती है. जी हां, छत्तीसगढ़ में के ऐसा मंदिर है, जहां ऐसी ही अनोखी परंपरा निभाई जाती है, भक्ति विधान के लिए अलबेला है. आइए जानते हैं, छत्तीसगढ़ में में यह मंदिर कहां है, किस देवी को समर्पित है और सदियों पुरानी इस परंपरा के पीछे कहानी और इतिहास क्या है, जो आज भी आस्था का एक सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है?

    मां बगदाई वनदेवी मंदिर

    छत्तीसगढ़ का यह मंदिर खमतराई के घने जंगलों में है, जो बिलासपुर जिले में स्थित है. जहां देश के बाकी मंदिरों और पूजा स्थलों पर फूल, पान, मिठाई, फल, नारियल और आभूषण आदि चढ़ाएं जाते हैं, वहीं मां बगदाई वनदेवी को समर्पित इस मंदिर में 5 पत्थर चढ़ाने की अनूठी परंपरा है, जिसे लोग वहां ‘गोटा’ और ‘कंकड़’ कहते हैं.

    साधारण नहीं हैं ‘गोटा पत्थर’

    मां बगदाई वनदेवी के मंदिर में चढ़ाए जाने वाले ये पत्थर साधारण नहीं हैं. ये पत्थर खेतों में मिलते हैं, जिसे भक्तों को विशेष ध्यान से खोजना पड़ता है. ये चिकने और गोल होते हैं, जिसे ‘गोटा’ या ‘गोल कंकड़’ कहा जाता है. मान्यता है कि वनदेवी मां बगदाई को चुने हुए ये बेहद प्रिय हैं.

    मन्नत पूरी होने पर भी चढ़ाते हैं 5 पत्थर

    मां बगदाई वनदेवी के इस मंदिर में श्रद्धालुओं के मन्नत पूरी करने की प्रक्रिया 2 चरणों में होती है. पहला यह कि पहली बार मन्नत मांगते समय भक्त मन में अपनी मनोकामना दोहराते हु 5 पत्थर और एक फूल चढ़ाते हैं. दूसरी बार, मन्नत पूरी होने पर भी श्रद्धालु आभार व्यक्त करते हुए मंदिर में माता को 5 गोटा पत्थर चढ़ाते हैं.

    कैसे शुरू हुई यह परंपरा?

    कहते हैं, प्राचीन काल में लोग जब खमतराई के घने जंगलों से गुजरते थे तो वे हिंसक वन्य पशुओं और डाकुओं से रक्षा के लिए वे वनदेवी मां की प्रार्थना करते थे. कुछ पास न होने पर वे माता को 5 पत्थर ही चढ़ा देते थे. एक दूसरी कथा एक चरवाहे की है. कहते हैं, एक चरवाहे को जंगल वनदेवी की मूर्ति मिली थी. उसके पास भोग लगाने को कुछ नहीं था. तब देवी मां ने उसे दर्शन देकर कहा कि वह कीमती वस्तुओं की नहीं सच्ची श्रद्धा और प्रेम भूखी है, वह बस 5 पत्थर ही अर्पित कर दें. कहते हैं, तभी से ये परंपरा बदस्तूर चली आ राय रही है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है

  • 10 दिन अंधेरी सुरंग में​​​​​ फंसे रहे इंजीनियर संजय साह, ‘हरे कृष्ण महामंत्र’ का जाप बना सहारा; जानिए क्या है इसकी शक्ति..

    10 दिन अंधेरी सुरंग में​​​​​ फंसे रहे इंजीनियर संजय साह, ‘हरे कृष्ण महामंत्र’ का जाप बना सहारा; जानिए क्या है इसकी शक्ति..

    10 दिन अंधेरी सुरंग में​​​​​ फंसे रहे इंजीनियर संजय साह, ‘हरे कृष्ण महामंत्र’ का जाप बना सहारा; जानिए क्या है इसकी शक्ति..

    नेपाल के रसुवा में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में करीब 10 दिनों तक फंसे रहने के बाद इंजीनियर संजय साह को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इतने लंबे समय तक अंधेरी सुरंग में बिना सामान्य सुविधाओं के जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करना किसी के लिए भी बेहद मुश्किल स्थिति थी।

    संजय साह के मुताबिक, इस कठिन समय में उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी। वह लगातार ‘हरे कृष्ण महामंत्र’ का जाप करते रहे। उनका कहना है कि महामंत्र के जाप से उन्हें मानसिक हिम्मत मिली और मुश्किल हालात में धैर्य बनाए रखने की ताकत मिली। रेस्क्यू के बाद उन्होंने इस अनुभव को जिंदगी का दूसरा मौका बताया।

    क्या है हरे कृष्ण महामंत्र?

    हरे कृष्ण महामंत्र वैष्णव परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण और भगवान राम के नामों का स्मरण करने वाला प्रसिद्ध मंत्र है। इसे आमतौर पर इस तरह जपा जाता है—

    हरे कृष्ण हरे कृष्ण,
    कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
    हरे राम हरे राम,
    राम राम हरे हरे।।

    यह मंत्र 16 नामों से मिलकर बना है और गौड़ीय वैष्णव परंपरा में इसका विशेष महत्व माना जाता है।

    यह महामंत्र किसने दिया?

    इस मंत्र को किसी एक व्यक्ति द्वारा नया बनाया गया मंत्र नहीं माना जाता। इसकी परंपरा प्राचीन वैष्णव भक्ति से जुड़ी हुई है। हालांकि, इसे व्यापक रूप से जन-जन तक पहुंचाने का विशेष श्रेय श्री चैतन्य महाप्रभु को दिया जाता है।

    चैतन्य महाप्रभु ने भगवान के नाम-स्मरण और संकीर्तन को भक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया। बाद में श्रील ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने इसी महामंत्र को दुनिया के कई देशों तक पहुंचाया और 1966 में इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्ण कॉन्शसनेस यानी ISKCON की स्थापना की।

    महामंत्र की शक्ति क्या मानी जाती है?

    भक्ति परंपरा में भगवान के नाम का जाप मन को एकाग्र करने और भीतर से शांति व साहस पाने का माध्यम माना जाता है। लगातार मंत्र का स्मरण करने से व्यक्ति का ध्यान डर और तनाव से हटकर एक आध्यात्मिक केंद्र पर टिक सकता है।

    संजय साह के मामले में भी यह महामंत्र उनके लिए कठिन परिस्थितियों में मानसिक सहारे का माध्यम बना। करीब 10 दिनों तक सुरंग में फंसे रहने के दौरान उन्हें न तो यह पता था कि मदद कब पहुंचेगी और न ही बाहर की स्थिति की पूरी जानकारी थी। ऐसे समय में जाप ने उन्हें उम्मीद और धैर्य बनाए रखने में मदद की।

    हालांकि, महामंत्र की आध्यात्मिक शक्ति आस्था का विषय है। इसे वैज्ञानिक रूप से किसी आपदा में जीवन बचाने वाला प्रमाणित उपाय नहीं कहा जा सकता। लेकिन प्रार्थना, मंत्र-जाप और ध्यान जैसी आध्यात्मिक गतिविधियां कई लोगों को कठिन परिस्थितियों में मानसिक संबल और उम्मीद देने का अनुभव कराती हैं।

    संजय साह की कहानी में सबसे खास बात

    हादसे के समय सुरंग में करीब 40 से 45 लोग मौजूद बताए गए। संजय के पास कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी थी। अचानक बाढ़ का पानी और मलबा सुरंग में घुसने लगा तो उन्होंने पहले वहां मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थान की ओर जाने के लिए कहा।

    दूसरों को सुरक्षित रास्ते की ओर भेजने के दौरान वह खुद सुरंग के अंदर फंस गए। इसके बाद करीब 10 दिनों तक उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया।

    इन मुश्किल दिनों में उन्होंने जिस तरह उम्मीद बनाए रखी और लगातार महामंत्र का जाप किया, वह उनकी कहानी का सबसे भावुक पहलू बन गया।

    कभी-कभी मुश्किल समय में इंसान के पास परिस्थितियां बदलने का कोई रास्ता नहीं होता, लेकिन उम्मीद बनाए रखने का एक सहारा जरूर होता है। संजय साह के लिए उस अंधेरी सुरंग में ‘हरे कृष्ण महामंत्र’ का जाप ऐसा ही एक सहारा बना।

  • नीम करोली बाबा की समाधि कहां है, कैसे विलीन हुए ‘महाराज जी’? जानें गुप्त सच.

    नीम करोली बाबा की समाधि कहां है, कैसे विलीन हुए ‘महाराज जी’? जानें गुप्त सच.

     यह जानना वाकई में रोचक है कि नीम करौली बाबा की समाधि कैंची धाम में नहीं है. हालिया फिल्म ‘हनुमान अंश’ से चर्चा में आए महाराज जी की वास्तविक महासमाधि कहां है, यह बहुत लोगों के लिए आज भी एक रहस्य है. आइए जानते हैं, कहां है यह महासमाधि, जहां अब भी ‘महाराज जी’ की मौजूदगी का अहसास होता है?

    Neem Karoli Baba Samadhi: बहुत ये लोग ये मानते हैं कि कैंची धाम में ही नीम करोली बाबा की समाधि है. ऐसा मानने वाले लोग वाकई भ्रम में हैं। एप्पल के स्टीव जॉब्स, फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग और महान क्रिकेटर विराट कोहली जैसी नामचीन हस्तियों के स्पिरिचुअल गुरु रहे नीम करोली बाबा के चमत्कारों से पूरी दुनिया वाकिफ है. आजकल उनके जीवन पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने धूम मचा रखी है. आइए जानते हैं, ‘महाराज जी’ कहे जाने वाले नीम करोली बाबा पंचतत्व में कहां विलीन हुए थे और उनकी वास्तविक समाधि कहां है? कुछ लोग कहते हैं, इस पावन स्थल पर पहुंचने पर अब भी बाबा के होने का एहसास होता है.

    यहां है नीम करोली बाबा की समाधि

    वाकई में इस बात से बहुत लोग अनजान हैं कि नीम करोली बाबा की असली समाधि कैंची धाम में नहीं है. महाराज जी की मुख्य समाधि उत्तर प्रदेश के पवित्र धाम वृंदावन में है. यह भी कैंची धाम की तरह एक आश्रम है, जो मथुरा रोड के पास परिक्रमा मार्ग पर स्थित है. इसके भीतर बाबा का भव्य महासमाधि मंदिर बना हुआ है. आपको बता दें कि असल में कैंची धाम महाराज जी का तपोस्थल रहा है.

    कैंची धाम को लेकर भ्रम क्यों?

    कैंची धाम उत्तराखंड में नैनीताल के पास नीम करोली बाबा का सबसे प्रसिद्ध आश्रम है. इसे ‘महाराज जी’ ने स्वयं 1964 में स्थापित किया था. हर साल यहां 15 जून को एक विशाल मेला लगता है. संभवतः इसी पॉपुलैरिटी के कारण दुनिया भर के श्रद्धालु और लोग अनजाने में कैंची धाम को ‘महाराज जी’ की समाधि स्थल समझ लेते हैं.

    ऐसे विलीन हुए थे ‘महाराज जी’

    कहते हैं, ‘महाराज जी’ ने विदा लेने से पहले ही संकेत दे दिया था. उनका महासमाधि में विलीन होगा को सामान्य मृत्यु नहीं, बल्कि एक उच्च कोटि के संत द्वारा अपनी इच्छा से शरीर त्यागने की अलौकिक घटना थी. कहते हैं, उन्होंने दिन और स्थान खुद चुना था, जिसे लोग आज भी नहीं जानते है. बाबा ने अपने महाप्रयाण का दिन अनंत चतुर्दशी और स्थान पावन भूमि वृद्धावन को चुना था. आपको बता दें कि नीम करोली बाबा ने 11 सितंबर, 1073 की रात में महानिर्वाण किया था.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है

  • रविवार को जरूर करें आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ, करियर में मिलेगी सफलता, पढ़ें संपूर्ण लिरिक्स.

    रविवार को जरूर करें आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ, करियर में मिलेगी सफलता, पढ़ें संपूर्ण लिरिक्स.

    रविवार को जरूर करें आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ, करियर में मिलेगी सफलता, पढ़ें संपूर्ण लिरिक्स.

    जीवन में सफलता और समृद्धि के लिए सूर्यदेव की उपासना करनी चाहिए. सूर्यदेव को आत्मविश्वास, पिता और मान-सम्मान का कारक माना जाता है. रविवार के दिन सूर्य की सूर्य करना बेहद शुभ होता है. यह दिन सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है. आज रविवार के दिन सूर्यदेव को जल से अर्घ्य दें. इसके साथ ही आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करें. आप यहां आदित्य ह्रदय स्तोत्र के संपूर्ण लिरिक्स पढ़ सकते हैं.

    आदित्य ह्रदय स्तोत्र (Aditya Hridaya Stotra Lyrics in Hindi)

    ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम् ।रावणं चाग्रतो दृष्टवा युद्धाय समुपस्थितम् ॥दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम् ।उपगम्याब्रवीद् राममगरत्यो भगवांस्तदा ॥राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्यं सनातनम् ।येन सर्वानरीन् वत्स समरे विजयिष्यसे ॥आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम् ।जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम् ॥सर्वमंगलमांगल्यं सर्वपापप्रणाशनम् ।चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वधैनमुत्तमम् ॥रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम् ।पूजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम् ॥सर्वदेवतामको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावनः ।एष देवासुरगणाँल्लोकान् पाति गभस्तिभिः ॥एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिवः स्कन्दः प्रजापतिः ।महेन्द्रो धनदः कालो यमः सोमो ह्यपां पतिः ॥पितरो वसवः साध्या अश्विनौ मरुतो मनुः ।वायुर्वन्हिः प्रजाः प्राण ऋतुकर्ता प्रभाकरः ॥आदित्यः सविता सूर्यः खगः पूषा गर्भास्तिमान् ।सुवर्णसदृशो भानुहिरण्यरेता दिवाकरः ॥

    हरिदश्वः सहस्रार्चिः सप्तसप्तिर्मरीचिमान् ।तिमिरोन्मथनः शम्भूस्त्ष्टा मार्तण्डकोंऽशुमान् ॥हिरण्यगर्भः शिशिरस्तपनोऽहरकरो रविः ।अग्निगर्भोऽदितेः पुत्रः शंखः शिशिरनाशनः ॥व्योमनाथस्तमोभेदी ऋम्यजुःसामपारगः ।घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवंगमः ॥आतपी मण्डली मृत्युः पिंगलः सर्वतापनः ।कविर्विश्वो महातेजा रक्तः सर्वभवोदभवः ॥नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावनः ।तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन् नमोऽस्तु ते ॥नमः पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नमः ।ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नमः ॥जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नमः ।नमो नमः सहस्रांशो आदित्याय नमो नमः ॥नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नमः ।नमः पद्मप्रबोधाय प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते ॥ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सूरायदित्यवर्चसे ।भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नमः ॥तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने ।कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नमः ॥

    तप्तचामीकराभाय हस्ये विश्वकर्मणे ।नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे ॥नाशयत्येष वै भूतं तमेव सृजति प्रभुः ।पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभिः ॥एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठितः ।एष चैवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम् ॥देवाश्च क्रतवश्चैव क्रतूनां फलमेव च ।यानि कृत्यानि लोकेषु सर्वेषु परमप्रभुः ॥एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च ।कीर्तयन् पुरुषः कश्चिन्नावसीदति राघव ॥पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगत्पतिम् ।एतत् त्रिगुणितं जप्तवा युद्धेषु विजयिष्ति ॥अस्मिन् क्षणे महाबाहो रावणं त्वं जहिष्यसि ।एवमुक्त्वा ततोऽगस्त्यो जगाम स यथागतम् ॥एतच्छ्रुत्वा महातेजा, नष्टशोकोऽभवत् तदा ।धारयामास सुप्रीतो राघवः प्रयतात्मवान् ॥आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वेदं परं हर्षमवाप्तवान् ।त्रिराचम्य शुचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान् ॥रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा जयार्थे समुपागमत् ।सर्वयत्नेन महता वृतस्तस्य वधेऽभवत् ॥अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितनाः परमं प्रहृष्यमाणः ।निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति ॥

    कैसे करें आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ?

    आप सुुबह उठकर सूर्योदय के समय स्नान करके सूर्य देव को जल से अर्घ्य दें. इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं. सूर्य के समक्ष खड़े होकर या आसन लगाकर बैठकर आप आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर सकते हैं.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • वैवाहिक जीवन का तनाव दूर करने के लिए अपनाएं ये उपाय, रिश्तों में आएगी मधुरता..

    वैवाहिक जीवन का तनाव दूर करने के लिए अपनाएं ये उपाय, रिश्तों में आएगी मधुरता..

    वैवाहिक जीवन का तनाव दूर करने के लिए अपनाएं ये उपाय, रिश्तों में आएगी मधुरता..

    पति-पत्नी के रिश्ते में कभी-कभी छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव और मतभेद पैदा हो जाते हैं। लगातार विवाद होने से रिश्तों में दूरी भी बढ़ सकती है। ज्योतिष शास्त्र में वैवाहिक जीवन में प्रेम और आपसी तालमेल बढ़ाने के लिए कुछ आसान उपाय बताए गए हैं।

    मान्यता है कि घर में कुछ खास चीजों को सही दिशा में रखने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और पति-पत्नी के बीच रिश्ते बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ये उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

    बेडरूम में रखें जोड़े वाली तस्वीरें

    ज्योतिष और वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ाने के लिए बेडरूम में जोड़े वाली तस्वीरें या प्रतिमाएं रखी जा सकती हैं।

    मोर, हंस, बत्तख, तोता और हिरण के जोड़े की तस्वीरों को शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि तस्वीर या प्रतिमा में इन पक्षियों और पशुओं को शांत अवस्था में दिखाया गया हो। हिंसक या आक्रामक तस्वीरें बेडरूम में लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।

    किस दिशा में रखें प्रतिमाएं?

    मान्यता के अनुसार, मोर, हंस, बत्तख, तोता या हिरण के जोड़े की प्रतिमाओं को घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखा जा सकता है। प्रतिमाओं को इस तरह रखने की सलाह दी जाती है कि उनका मुख एक-दूसरे की ओर हो।

    ज्योतिषीय मान्यताओं में कहा जाता है कि ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम और आपसी समझ बढ़ सकती है। साथ ही, रिश्ते में चल रहे तनाव और मनमुटाव को कम करने में भी यह उपाय सहायक माना जाता है।

    रिश्तों में मधुरता के लिए रखें ध्यान

    सिर्फ ज्योतिषीय उपायों पर निर्भर रहने के बजाय पति-पत्नी के बीच खुलकर बातचीत, एक-दूसरे की भावनाओं को समझना और सम्मान बनाए रखना भी जरूरी है। रिश्तों में किसी भी तरह का गंभीर तनाव हो तो आपसी बातचीत या जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। इन उपायों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं की गई है।

  • घर में बिना तोड़फोड़ ऐसे दूर करें वास्तु दोष, इन 3 तस्वीरों को लगाने से मिलेंगे शुभ परिणाम.

    घर में बिना तोड़फोड़ ऐसे दूर करें वास्तु दोष, इन 3 तस्वीरों को लगाने से मिलेंगे शुभ परिणाम.

    घर में बिना तोड़फोड़ ऐसे दूर करें वास्तु दोष, इन 3 तस्वीरों को लगाने से मिलेंगे शुभ परिणाम.

    घर में वास्तु दोष है, तो इसे दूर करने के लिए लोग अक्सर अनेकों उपायों को करते हैं. रसोई और बाथरूम की गलत स्थिति होने पर कई बार इन्हें लोगों को तुड़वाकर सही करना पड़ता है. हालांकि, आप वास्तु के अनुसार घर में कुछ तस्वीरों को लगाकर वास्तु दोष को दूर कर सकते हैं. ऐसा करने से आपको घर में तोड़फोड़ करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. आइये वास्तु के मुताबिक इन शुभ तस्वीरों के बारे में जानते हैं.

    सूर्य की तस्वीर

    सूर्य को नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. दिन की शुरुआत सूर्योदय के साथ होती है. घर में सूर्य की तस्वीर लगाने बेहद शुभ माना जाता है. घर में पूर्व दिशा में सूर्य की तस्वीर लगाने से शुभ परिणाम मिलते हैं. वास्तु की दृष्टि से यह बहुत ही अच्छा माना जाता है. सूर्य की तस्वीर लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मान-सम्मान व तरक्की प्राप्त होती है. इससे वास्तु दोष से होने वाले अशुभ प्रभाव से बचे रह सकते हैं.

    झरने और नदी की तस्वीर

    उत्तर दिशा में झरने और नदी की तस्वीर लगाना शुभ माना जाता है. इस दिशा को जल तत्व की तस्वीर माना जाता है. यह दिशा करियर, उन्नति और आर्थिक वृद्धि से संबंधित मानी जाती है. इस दिशा में पानी से जुड़ी तस्वीर लगाना अच्छा होता है. ऐसा करने से जीवन में नए अवसर मिलते हैं. आप घर की उत्तर दिशा में यह तस्वीर लगा सकते हैं. इसके साथ ही इस दिशा में हल्का नीला, हरा या सफेद रंग करना अच्छा होता है.

    पहाड़ों की तस्वीर

    अक्सर लोग घरों में पहाड़ों की सुंदर सीनरी यानी हरी-भरी घाटियों की सुंदर फोटो लगाते हैं. घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में यह तस्वीर लगाना शुभ होता है. पहाड़ों को स्थिरता और मजबूती का प्रतीक मानते हैं. ऐसा करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. धन में ठहराव आता है. वास्तु दोष के अशुभ प्रभाव को कम कर सकते हैं. आप वास्तु के अनुसार, घर में इन तस्वीरों को लगा सकते हैं.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • महात्मा विदुर का ये श्लोक है मनी अट्रैक्ट करने का तरीका, इन बातों को अपनाने से होगा लाभ.

    महात्मा विदुर का ये श्लोक है मनी अट्रैक्ट करने का तरीका, इन बातों को अपनाने से होगा लाभ.

    महात्मा विदुर का ये श्लोक है मनी अट्रैक्ट करने का तरीका, इन बातों को अपनाने से होगा लाभ.

    महात्मा विदुर ने अपनी नीतियों और श्लोक के जरिए व्यक्ति के जीवन में फायदों के बारे में बताया है. विदुर नीति के श्लोक के जरिए सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं. उनके एक श्लोक में ऐसी आदतों के बारे में बताया गया है. जिन्हें अपनाने से लाभ मिल सकता है. इन्हें अपनाने से सफलता की राह आसान होगी. धन आकर्षित करने और मां लक्ष्मी की कृपा के लिए इन उपायों को करना चाहिए. आइये इस श्लोक और नियमों के बारे में जानते हैं.

    धृतिः शमो दमः शौचं कारुण्यं वागनिष्ठुरा।मित्राणां चानभिद्रोहः सप्तैताः समिधः श्रियः॥

    महात्मा विदुर के इस श्लोक में महत्वपूर्ण शिक्षाओं के बारे में बताया गया है. जीवन में सुख, समृद्धि और मान-सम्मान के लिए आपको इस श्लोक में बताई बातों को अपनाना चाहिए. आइये इसके बारे में जानते हैं.

    मां लक्ष्मी की कृपा के लिए इन 7 बातों का रखें ध्यान

    धैर्य – व्यक्ति को हर परिस्थिति में धैर्य रखना चाहिए. जल्दबाजी में अक्सर व्यक्ति के काम खराब होते हैं. आप लोगों को धैर्य के साथ काम करना चाहिए. धैर्यवान व्यक्ति पर मां लक्ष्मी की कृपा रहती है.

    इच्छाओं पर नियंत्रण – अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना बहुत ही जरूरी होता है. अपनी भावनाओं और इच्छाओं को काबू में रखने की कोशिश करनी चाहिए. इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

    इंद्रियों पर संयम – इंद्रियों पर काबू रखकर सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलना चाहिए. इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है. गलत काम को करने से बचना चाहिए.

    पवित्रता – शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए. जहां सफाई होती है मां लक्ष्मी का वास वहीं होता है. इसलिए आपको घर को और अपने शरीर को स्वच्छ रखना चाहिए.

    दया दृष्टि – मनुष्य को सभी के प्रति दयादृष्टि का भाव रखना चाहिए. दूसरों के प्रति दयालुता रखना बहुत ही अच्छा होता है. ऐसे व्यक्ति पर मां लक्ष्मी की कृपा होती है.

    अच्छा बोलना – कड़वा बोलने और किसी से विवाद करने से बचना चाहिए. आप लोगों को गलत काम नहीं करना चाहिए. इससे रिश्तों में दरार आती है. सभी के साथ अच्छे संबंध रखें.

    दूसरों से वैर न रखें – कई लोग दूसरों की तरक्की देखकर जलते हैं. व्यक्ति का स्वभाव ऐसा नहीं होना चाहिए. आपको दूसरों के सुख में खुश होना चाहिए. मित्रों से द्वेष भावना नहीं रखनी चाहिए.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • Bhog ke Niyam: पूजा में भोग चढ़ाने में कहीं आप भी तो नहीं करते ये भूल? जानें बीज वाले फल अर्पण की सही विधि

    Bhog ke Niyam: पूजा में भोग चढ़ाने में कहीं आप भी तो नहीं करते ये भूल? जानें बीज वाले फल अर्पण की सही विधि

    Bhog ke Niyam: पूजा में भोग चढ़ाने में कहीं आप भी तो नहीं करते ये भूल? जानें बीज वाले फल अर्पण की सही विधि

    भगवान की पूजा में बीज वाले फलों को केवल धोकर साबुत चढ़ाना कभी कभी पुण्य की जगह दोष का भागी बना सकता है. आइए जानते हैं, हिन्दू धर्म में बीज वाले फलों को अर्पित किए जाने के नियम क्या है?

    Written By: Shyamnandan|Updated: Sep 10, 2026 00:15

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    Bhog ke Niyam: हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा में भोग लगाने महत्व बहुत अधिक है। इसमें भी फल अधिक अर्पित किए जाते हैं। लेकिन फल को लेकर अनजाने में वैसी भूल हो जाती है, पुण्य की जगह की अनकही दोष का भागी बना सकता है। इसमें भी बीज वाले फलों, जैसी- पपीता, संतरा, सेब, अनार, नाशपाती, बब्बूगोसा, नाक, खरबूज या तरबूज की आती है, तो व्रतराज आदि धर्म ग्रंथों में बेहद स्पष्ट नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं, फल को बाजार से लाने के बाद केवल धोकर चढ़ाने से भोग नहीं लग जाता है, कहीं ये लापरवाही खुशियों के लिए संकट न बन जाएं?

    कड़े बीज वाले फल

    जब हम खुद हम को और अपने अतिथि को पूरा पपीता या खरबूज-तरबूज खाने के लिए नहीं देते हैं, तो भगवान को इस प्रकार से कोई फल का भोग कैसे पेश कर सकते हैं। इसलिए जब कोई ऐसा फल भगवान को अर्पित करें, तो उसका बीज निकालकर और काटकर चढ़ाना चाहिए। भूल से भी इन फलों को कभी पूरा साबुत नहीं चढ़ाना चाहिए।

    छोटे बीज वाले फल

    अनार, संतरा, मौसम्बी, सेब आदि छोटे बीज वाले फलों को भी साबुत चढ़ाने के बजाय सही से सलीके से अर्पित करना चाहिए। संतरा-मौसम्बी के बीज निकाल के फांक में चढ़ाना चाहिए। अनार के दाने निकालकर चढ़ाना उत्तम है। इसी प्रकार, सेब, बब्बूगोसा और नाशपाती के बीज को निकालकर चढ़ाना चाहिए।

    आम, केला और अंगूर फल के नियम

    पूजा के फलों में आम, केला और अंगूर का विशेष स्थान है। इन बीज वाले फलों को हमेशा साबुत ही अर्पित करना चाहिए। इन्हें विशेष परिस्थितियों में ही काटकर अर्पित करना चाहिए। अंगूर को प्रायः दाना-दाना धोकर कटोरे में सलीके से अर्पित करना चाहिए। अमरूद को भी साबुत चढ़ा सकते हैं, लेकिन इसे सही से साफ कर लेना चाहिए।

    भोग के इन नियमों का रखें ध्यान

    • फल काटने के चाकू, हंसिया जैसे साधन शुद्ध और साफ होने चाहिए। ये तामसिक चीजें काटने वाली नहीं होनी चाहिए।
    • फल को ताजा ही काटकर चढ़ाना चाहिए। काटने से इसे फल को अवश्य धो लेना चाहिए। जो फल छीलकर काटने वाले हैं, उसे छील लेना चाहिए। बहुत देर पहले कटे फल नहीं चढ़ाना चाहिए।
    • भगवान को फल का भोग लगाने के लिए फल को हमेशा कांसा, पीतल, तांबा, सोना, चांदी और मिट्टी से शुद्ध और साफ बर्तनों में ही रखकर अर्पित करना चाहिए।
    • पूजा के भोग में सड़े-गले, दागदार, पक्षियों और कीड़ों द्वारा खाए गए फलों इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
    • भगवान विष्णु और उनके रूपों जैसे सत्यनारायण, राम, कृष्ण, वामन आदि को हमेशा तुलसी दल के फल का भोग लगाना चाहिए। ध्यान रहे कि शिवजी और गणेशजी को तुलसी नहीं चढ़ाया जाता है।

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.