Category: Dharam

  • भगवान को भोग लगाने के बाद कितनी देर में उठाना चाहिए प्रसाद? भूलकर भी न करें ये गलती..

    भगवान को भोग लगाने के बाद कितनी देर में उठाना चाहिए प्रसाद? भूलकर भी न करें ये गलती..

    भगवान को भोग लगाने के बाद कितनी देर में उठाना चाहिए प्रसाद? भूलकर भी न करें ये गलती..

    प्रत्येक भक्त और साधक पूरी श्रद्धा और आस्था से भगवान की पूजा करता है और भोग लगाता है. भोग के रूप में भगवान शुद्ध और सात्विक चीजें, कुछ देवों को छोड़कर, अर्पित की जाती है. लेकिन हिन्दू धर्म में भोग को लेकर भी कई नियम हैं. शास्त्रों के मुताबिक, भगवान को भोग लगाने के बाद उसे एक निश्चित और सही अंतराल पर उठाना भी जरूरी होता है. इस सीमा के पार करने के बाद भोग भी नकारात्मक ऊर्जा का केंद्र बन सकता है, ऐसा व्रतराज जैसे ग्रंथों में वर्णन मिलता है. आइए जानते हैं, कितनी देर में भोग लगाने के बाद प्रसाद को उठा लेना चाहिए और कौन-सी गलती नहीं करनी चाहिए?

    भोग कितनी देर में उठाएं?

    ज्योतिषाचार्य और पंडित बताते हैं कि यदि भोग को लंबे समय तक या रात भर मंदिर या पूजा स्थल पर छोड़ दिया जाए, तो उसमें चांडाल या अदृश्य नकारात्मक शक्तियों को वास हो सकता है. इसलिए भगवान के भोग को कम से 5 मिनट भगवान के समक्ष अवश्य रखें और अधिकतम 15 से 20 मिनट के भीतर उस प्रसाद को अवश्य उठा लेना चाहिए और ग्रहण कर लेना चाहिए.

    न करें भोग-प्रसाद से जुड़ी ये गलतियां

    देर तक या रात भाग भोग न छोड़ें – कई बार भक्त-साधक जाने-अनजाने पूजा या आरती के बाद प्रसाद को रात भर भी छोड़ देते हैं. यह गलत है, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार इससे प्रसाद के अमृत तत्व ‘दोषयुक्त’ हो सकते हैं, जो फलदायी नहीं रहता है.

    भोग को सीधे जमीन पर न रखें – भोग के पात्र को सीधे भूमि पर नहीं रखनी चाहिए. नियम के अनुसार, भोग को किसी थाली, स्टैन्ड और पूजा की चौकी पर ही रखना चाहिए.

    गलत पात्र (बर्तन) का इस्तेमाल – पंडित हर्षवर्द्धन शांडिल्य कहते हैं कि भगवान को एल्यूमिनीयम, कांच और प्लास्टिक आदि के पात्रों और बर्तनों में भोग नहीं लगाना चाहिए. जहां तक हो सके यह कांसा, पीतल, चांदी, तांबा और सोने के पात्रों में रखना चाहिए.

    भोग के बाद जरूर करें ये काम

    • प्रचलित मान्यता और पूजा-पाठ के नियमों के मुताबिक, जब भी भगवान को भोग लगाएं, तो उन्हें अवश्य ढक देना चाहिए. भोग के साथ जल रखना भी अनिवार्य है.
    • कुछ मिनटों के लिए मंदिर का पर्दा भी गिरा देना चाहिए, ताकि भगवान एकांत में भोग को ग्रहण कर सकें.
    • भोग उठाने के बाद उसे घर-परिवार और खानदान के सभी सदस्यों में श्रद्धापूर्वक वितरित कर देना चाहिए. प्रसाद को कभी छुपाकर नहीं रखना चाहिए.
    • यदि प्रसाद जमीन पर गिर जाए, तो उसे तुरंत उठा लेना चाहिए और उस जगह को साफ कर देना चाहिए, ताकि कि वह किसी पांव में न लगे.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • रसोई के इन मसालों से दूर हो सकता है ग्रहों का अशुभ प्रभाव! जानिए ज्योतिषीय उपाय.

    रसोई के इन मसालों से दूर हो सकता है ग्रहों का अशुभ प्रभाव! जानिए ज्योतिषीय उपाय.

    रसोई के इन मसालों से दूर हो सकता है ग्रहों का अशुभ प्रभाव! जानिए ज्योतिषीय उपाय.

    Astro Tips: भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाले मसाले केवल खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि ज्योतिष शास्त्र में भी इनका विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि कुछ मसालों और अनाज का सेवन या उनसे जुड़े उपाय करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।

    हल्दी, सौंफ, काली मिर्च और जौ जैसे खाद्य पदार्थों को अलग-अलग ग्रहों से संबंधित माना जाता है। हालांकि, ये सभी उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

    सौंफ और मिश्री का उपाय

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सौंफ का संबंध शुक्र और चंद्रमा से माना जाता है। कहा जाता है कि सौंफ के साथ मिश्री का सेवन करने से शुक्र और चंद्रमा से जुड़े शुभ प्रभाव प्राप्त हो सकते हैं।

    वहीं, सौंफ के साथ गुड़ का सेवन मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव को कम करने वाला माना जाता है। इसे ज्योतिष में एक सरल और पारंपरिक उपाय के रूप में बताया गया है।

    काली मिर्च से जुड़ा शनि का उपाय

    काली मिर्च का इस्तेमाल आमतौर पर भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इसका संबंध शनि ग्रह से माना गया है। मान्यता है कि काली मिर्च का सेवन करने से शनि ग्रह से जुड़े नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है।

    हालांकि, किसी भी चीज का सेवन अपनी सेहत और जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए।

    जौ से सूर्य और बृहस्पति को मजबूती

    जौ को भी ज्योतिषीय उपायों में काफी महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि जौ का सेवन करने से सूर्य और बृहस्पति ग्रह से जुड़े शुभ प्रभाव बढ़ सकते हैं।

    इसके अलावा, दक्षिणावर्ती महाकाली की प्रतिमा के सामने बैठकर रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप करने का भी उल्लेख मिलता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के पांचवें मंत्र का जाप करना भी लाभकारी हो सकता है।

    आस्था के अनुसार करें उपाय

    इन सभी उपायों को धार्मिक आस्था और ज्योतिषीय परंपराओं से जोड़कर देखा जाता है। इन्हें अपनाने से पहले अपनी व्यक्तिगत परिस्थिति, स्वास्थ्य और आस्था का ध्यान रखना जरूरी है।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। इन उपायों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं की गई है।

  • Kuber Story: कुबेर कैसे बने धन के देवता, क्यों होती है धनतेरस पर उनकी पूजा, जानिए धन देवता की कथा

    Kuber Story: कुबेर कैसे बने धन के देवता, क्यों होती है धनतेरस पर उनकी पूजा, जानिए धन देवता की कथा

    Kuber Story: कुबेर कैसे बने धन के देवता, क्यों होती है धनतेरस पर उनकी पूजा, जानिए धन देवता की कथा

    Kuber Story: कुबेर का नाम सुनते ही धन-दौलत के स्वामी की एक छवि मन-मस्तिष्क में बन जाती है. हिन्दू धर्म के पौराणिक कहानियों में भी उनका कई जिक्र हुआ है. वे देवताओं के कोषाध्यक्ष या खजांची हैं, जिसे अंग्रेजी में ट्रेजरर कहते हैं. वे धन के स्वामी और मैनेजर यानी प्रबंधक माने जाते हैं. आइए जानते हैं, कुबेर कौन हैं, वे धन के देवता कैसे बने और धनतेरस-दीवाली पर उनकी पूजा क्यों होती है?

    रावण के सौतेले भाई हैं कुबेर

    धन समृद्धि के देवता कुबेर यक्षों के राजा भी है और उन्हें यक्षराज भी कहते हैं. पौराणिक कथाओं के मुताबिक, उनके पिता महर्षि विश्रवा थे, जो रावण, कुंभकरण और विभीषण के पिता भी थे. लेकिन रावण और कुबेर सौतेले भाई थे और दोनों ही महादेव शिव के महभक्त हैं. कहते हैं, सोने की नगरी लंका का निर्माण देवशिल्पी विश्वकर्मा ने कुबेर के लिए किया था, लेकिन रावण ने उनसे यह छीन लिया. इसके बाद, कुबेर ने भगवान शिव के आशीर्वाद से कैलाश के पास अलकापुरी नगरी को अपना घर बनाया.

    कुबेर कैसे बने धन के देवता?

    शिव पुराण की एक कथा के अनुसार, अपने पूर्वजन्म में कुबेर गुणानिधि नामक एक चोर थे। एक दिन वे अनजाने में शिवमंदिर में चोरी के लिए घुस गए। घनघोर अंधेरा होने से उन्होंने अपने धोती का एक टुकड़ा जलाकर कर मंदिर में प्रकाश फैला दिया। उस दिन महाशिवरात्रि थी। इससे भगवान शिव बेहद प्रसन्न हुए और अगले जन्म वे महर्षि विश्रवा के पुत्र बने।

    इस जन्म में उन्होंने हजारों सालों तक ब्रह्मा जी पूजा कर अपनी दृढ़ निष्ठा और अटूट भक्ति से उन्हें प्रसन्न कर लिया। ब्रह्माजी ने उन्हें उत्तर दिशा का रक्षक यानी दिक्पाल बनाया। साथ ही भगवान शिव के सुझाव से देवताओं का धनाध्यक्ष यानी खजाने का रक्षक नियुक्त किया।

    धनतेरस पर क्यों होती है कुबेर की पूजा?

    धनतेरस का पर्व प्रकाश और धन के त्योहार दीवाली की शुरूआत माना जाता है। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से कुबेर भगवान की पूजा की जाती है। इस दिन नई वस्तुओं, विशेषकर सोने-चांदी के आभूषण, जेवर, सिक्के और शुभ धातु के बर्तनों को कुबेर देव मानकर पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी चंचला हैं, लेकिन कुबेर संग उनकी पूजा करने से धन और समृद्धि का वास होता है। इसलिए धनतेरस और दीवाली के दिन उनकी पूजा होती है।

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • मंदिर में भगवान की परिक्रमा क्यों करते हैं? जानिए प्रदक्षिणा की परंपरा का धार्मिक महत्व और लाभ.

    मंदिर में भगवान की परिक्रमा क्यों करते हैं? जानिए प्रदक्षिणा की परंपरा का धार्मिक महत्व और लाभ.

    मंदिर में भगवान की परिक्रमा क्यों करते हैं? जानिए प्रदक्षिणा की परंपरा का धार्मिक महत्व और लाभ.

    हिन्दू धर्म में हजारों सालों से मंदिर जाने, भगवान के समक्ष सिर झुकाने और दंडवत प्रणाम करने के साथ मूर्ति के चारों ओर घूमकर परिक्रमा करने की परंपरा चली आ रही है. भगवान के पूजा-पाठ के इन नियमों में आज भी कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है. लेकिन क्या आपने ये कभी सोचा या गौर किया है कि मंदिर और भगवान की प्रदक्षिणा या परिक्रमा क्यों की जाती है. यदि इसे आप सिर्फ एक रस्म मानते हैं, तो आपको धर्म ग्रंथों की लॉजिक और भक्तों-श्रद्धालुओं की बात एक बार जरूर समझनी चाहिए. आइए जानते हैं, इस परंपरा का महत्व और लाभ क्या है?

    किस देवी-देवता की कितनी परिक्रमा?

    हिन्दू धर्म के ग्रंथों में इसका स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि किस देवी और देवता की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए. नारद पुराण के एक श्लोक के मुताबिक, देवी चंडी यानी मां दुर्गा की एक, सूर्यदेव की सात, गणेश जी की तीन, भगवान विष्णु की चार और महादेव शिव की आधी परिक्रमा करनी चाहिए. आपको बता दें कि शिवलिंग के सोमसूत्र यानी जलहरी को नहीं लांघा जाता है. प्राचीन ऋषि-मुनियों ने इसे संचित कर्मों को काटने की विधि बताया है.

    प्रदक्षिणा का धार्मिक महत्व

    हिन्दू धर्म की मान्यता है कि मंदिर, पूजा स्थल या देवालय के गर्भगृह की सकारात्मक ऊर्जा के क्षेत्र में घूमने यानी परिक्रमा करने से व्यक्ति मात्र का आभामंडल शुद्ध होता है. ग्रंथों में उल्लेख है कि हमसे जाने-अनजाने इस जन्म या पिछले जन्मों में जो भी पाप या बुरे कर्म हुए हैं, वे प्रदक्षिणा के हर कदम के साथ नष्ट हो जाते हैं.

    परिक्रमा हमेशा दाईं ओर ही क्यों?

    ईश्वर की परिक्रमा को संस्कृत में ‘प्रदक्षिणा’ कहते हैं. यहां ‘प्र’ का अर्थ है- प्रमुख या मुख्य या प्रधान, वहीं ‘दक्षिणा’ का अर्थ है- दक्षिण दिशा और दाहिना भाग. दाहिनी ओर से परिक्रमा करने के कारण इसे ‘प्रदक्षिणा’ कहते हैं. दाहिनी ओर से परिक्रमा क्यों करनी चाहिए, इसके बारे में ऋग्वेद में कहा गया है कि हमारी दाहिनी ओर सकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय होती हैं. शास्त्रों में यह नियम भी मिलता है कि हमारे चलते समय भगवान को हमेशा दाहिनी ओर और हमें भगवान की बायीं ओर उनसे थोड़ा पीछे ही होना चाहिए.

    अश्वमेध यज्ञ जैसा फल

    स्कन्द पुराण के वैष्णव खंड के एक श्लोक में प्रदक्षिणा के महत्व और उसके लाभ को काफी अच्छे ढंग से समझाया गया है. इसके अनुसार, पदे पदे यानी परिक्रमा का हर कदम से भक्त को तत्काल अश्वमेध यज्ञ जैसा फल प्राप्त होता है. यह भी उल्लेख मिलता है कि इससे समस्त पापों का क्षय हो जाता है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है

  • मृत्यु से जुड़े अलग-अलग सपने आना देता है कई संकेत, स्वप्न शास्त्र से जानिए इसका मतलब

    मृत्यु से जुड़े अलग-अलग सपने आना देता है कई संकेत, स्वप्न शास्त्र से जानिए इसका मतलब

    मृत्यु से जुड़े अलग-अलग सपने आना देता है कई संकेत, स्वप्न शास्त्र से जानिए इसका मतलब

    Swapna Shastra: स्वप्न शास्त्र के अनुसार, नींद में आने वाले सपनों के संकेतों से भविष्य के बारे में जान सकते हैं. नींद में नजर आने वाले सपने भविष्य से जुड़े कई संकेत देते है. इसी प्रकार व्यक्ति को अगर मौत से जुड़े सपने आते हैं, तो यह शुभ-अशुभ घटनाओं की ओर इशारा करते हैं. मृत्यु से जुड़े अलग-अलग प्रकार के सपने देखने का क्या अर्थ होता है. आप इसके बारे में स्वप्न शास्त्र के अनुसार, विस्तार से जान सकते हैं.

    मृत व्यक्ति का सपने में दिखना

    आप किसी मृत पूर्वज को सपने में देखते हैं, तो यह इस ओर इशारा करता है कि आपकी कोई इच्छा पूरी होने वाली है. इस प्रकार का सपना आना उस व्यक्ति के साथ भावनात्मक जुड़ाव की ओर इशारा करता है. कई बार ऐसे सपने आना पुरानी यादों के कारण होता है. आपको ऐसे सपने आने पर शांत मन के लिए प्रार्थना और दान करना चाहिए.

    सपने में किसी की मृत्यु देखना

    जीवन में तनाव के कारण कई बार किसी व्यक्ति की मृत्यु का सपना आ सकता है. हालांकि, स्वप्न शास्त्र में किसी परिजन की मृत्यु का सपना देखना उनकी लंबी आयु या उनके जीवन में सुधार की ओर इशारा करता है. आप इस प्रकार के सपने आने से डरना नहीं चाहिए. यह सपना उस व्यक्ति के जीवन पर चल रहे संकट के टलने की ओर इशारा करता है.

    सपने में खुद की मृत्यु देखना

    स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में खुद की मृत्यु देखना सेहत में सुधार और लंबी उम्र होने की ओर इशारा करता है. स्वप्न शास्त्र में इस प्रकार का सपना उल्टा माना जाता है. इस प्रकार का सपना आना जीवन में सकारात्मक बदलावों का संकेत होता है.

    सपने में अर्थी देखना

    सपने में अर्थी देखने पर लोग अक्सर डर जाते हैं. हालांकि, ऐसा सपना आना जीवन की मुश्किलों के खत्म होने की ओर इशारा करता है. किसी बीमार व्यक्ति को अर्थी पर देखना उसके जल्दी सही होने का संकेत हो सकता है. इसके अलावा आपको कोई मृत व्यक्ति बार-बार सपने में दिखता है, तो यह उसकी इच्छा अधूरी रहने की वजह से हो सकता है. आपको ऐसी स्थिति में दान करना चाहिए.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और स्वप्न शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • बेड के नीचे इन 5 चीजों को रखना माना जाता है अशुभ, जानिए वास्तु से जुड़े जरूरी नियम..

    बेड के नीचे इन 5 चीजों को रखना माना जाता है अशुभ, जानिए वास्तु से जुड़े जरूरी नियम..

    बेड के नीचे इन 5 चीजों को रखना माना जाता है अशुभ, जानिए वास्तु से जुड़े जरूरी नियम..

    Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में चीजों की दिशा और दशाओं को लेकर कई नियम बताए गए है. वास्तु के अनुसार, घर में चीजों को यहां-वहां रख देने से वास्तु दोष लगता है. इसके कारण जीवन में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. कुछ गलतियां घर में नकारात्मकता को बढ़ाने का कारण बन सकती है. वास्तु के अनुसार, बेड के नीचे कई चीजों को रखने से बचना चाहिए. अक्सर लोग घर में बिस्तर के नीचे सामान रख देते हैं. लेकिन आप ऐसी भूल न करें.

    इन चीजों को रखने से होगा नुकसान

    वास्तु की दृष्टि से बिस्तर के नीचे कई चीजों को रखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और वास्तु दोष लगता है. यह घर में अशांति और दुख का कारण बन सकती है. इसका सेहत के ऊपर भी बुरा असर पड़ सकता है. आप लोगों को किन चीजों को बेड के नीचे नहीं रखना चाहिए, इसके बारे में आप यहां विस्तार से जान सकते हैं.

    जूते-चप्पल – अक्सर घरों में जूते-चप्पलों को लोग बेड के नीचे रखते हैं. आपको ऐसी गलती करने से बचना चाहिए. इसके कारण तनाव बढ़ सकता है. वास्तु के अनुसार, यह अशुभ माना जाता है.

    खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान – बिजली के खराब हुए सामान को लोग घर में कहीं भी छोड़ देते हैं. कई बार लोग इसे बेड के नीचे रख देते हैं. ऐसा करने से बचना चाहिए. पुराने फोन, चार्जर या पंखा कोई भी बिजली का खराब सामान बिस्तर के नीचे न रखें.

    झाड़ू – आप घर में बेड के नीचे झाड़ू रखते हैं, तो इसके कारण घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. आपको ऐसी गलती करने से बचना चाहिए. यह अनिद्रा और व्यर्थ के खर्च का कारण बन सकता है. इसके कारण रिश्तों में तनाव भी आता है.

    नुकीली चीजें और औजार – बेड के नीचे लोहे के औजार, कांच, कीलें, कैंची आदि नहीं रखना चाहिए. इन चीजों को रखने से आप लोगों को रिश्तों में तनाव का सामना करना पड़ सकता है. इसके कारण परिवार का माहौल तनावपूर्ण बनता है.

    पूजा का सामान – बेड के नीचे या पलंग के अंदर देवी-देवताओं की मूर्तियां और पूजा की सामग्री नहीं रखनी चाहिए. इससे भगवान नाराज होते हैं. आपको अशुभ परिणााम झेलने पड़ सकते हैं.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • मनी प्लांट के अलावा ये 5 पौधे घर में बढ़ाते हैं सुख-शांति, सोख लेती है नेगेटिव एनर्जी..

    मनी प्लांट के अलावा ये 5 पौधे घर में बढ़ाते हैं सुख-शांति, सोख लेती है नेगेटिव एनर्जी..

    मनी प्लांट के अलावा ये 5 पौधे घर में बढ़ाते हैं सुख-शांति, सोख लेती है नेगेटिव एनर्जी..

    Indoor Plant Vastu: जब भी घर के अंदर इंडोर प्लांट से सजावट, सुख-शांति और धन बढ़ाने की बात आती है, तो सबसे पहले ‘मनी प्लांट’ का नाम सामने आता है. लेकिन प्रकृति की गोद में कुछ ऐसे बेमिसाल पौधे भी हैं, जो मनी प्लांट से कई गुना तेजी में घर की नेगेटिव एनर्जी को सोख लेते हैं. आइए जानते हैं, ऐसे 5 जादुई इंडोर प्लांट के बारे में, जो न केवल घर को एक मॉडर्न लुक देते हैं, बल्कि जीवन में सुख, शांति और धन की आमद का रास्ता भी सुगम बनाने में मदद करते हैं.

    स्नेक प्लांट

    स्नेक प्लांट की खासियत यह है कि यह पौधा पीपल की तरह रात में भी ऑक्सीजन छोड़ता है. साथ ही यह हवा में व्याप्त टॉक्सिक यानी हानिकारक कणों को सबसे अधिक जल्दी से सोखता है. इससे घर में पाजिटिव एनर्जी बनी रहती है. मान्यता है कि इसे घर के पूर्वी, दक्षिणी और दक्षिणी-पूर्वी कोने में रखने से तनाव कम होता है.

    पीस लिली

    पीस लिली के बारे में कहा जाता है कि यह कार्बन डाइऑक्साइड के अलावा बेंजीन, फॉर्मेल्डिहाइड और जाइलीन के हानिकारक कणों को भी सोख लेता है. साथ ही यह भी रात में ऑक्सीजन बनाता है. कहते हैं, घर में पॉजिटिव झगड़ा-क्लेश दूर कर शांति के लिए पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना चाहिए.

    जेड प्लांट

    जेड प्लांट को ‘धन का पौधा’ और ‘फ्रेंडशिप ट्री’ भी कहा जाता है. इसके बारे में मान्यता है कि यह वातावरण में ‘फ्रेशनेस’ बनाए रखता है. साथ ही यह मानसिक तनाव को पास फटकने भी नहीं देता है. लोग अपने घर में सुख-समृद्धि और धन की आमद बढ़ाने के लिए मुख्य द्वार के पास या उत्तर-पूर्व दिशा में रखते हैं.

    स्पाइडर प्लांट

    स्पाइडर प्लांट के बारे में कहा है कि यह 24 घंटे में हवा की 95 फीसदी नेगेटिव वाइब्स यानी अशुद्धियों को सोख लेता है. इस प्रकार हवा को शुद्ध बनाने में यह पौधा लाजवाब है. तनाव और नेगेटिव थॉट्स को दूर करने और रिश्तों में सुधार के लिए इस पौधे को घर उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व कोने में रखते हैं.

    लकी बैम्बू

    यह पौधा केवल पानी में उगाया जाता है, जो घर के भीतर की हवा को साफ कर वातावरण को सकारात्मक बनाता है. यह एक डंठल वाला पौधा है, जिसकी संख्या के आधार पर फल अलग-अलग होते हैं. कहते हैं, सुख-शांति के लिए 3 डंठल और धन-संपत्ति के लिए 5 डंठल वाले बैम्बू सबसे अधिक लकी होते हैं. कहते हैं, इसे घर की पूर्व या दक्षिण दिशा में रखने घर के सदस्यों की सेहत भी अच्छी रहती है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • इस मंदिर में स्टाम्प पेपर पर मनोकामना लिख टांगते हैं भक्त, मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं ये चीज

    इस मंदिर में स्टाम्प पेपर पर मनोकामना लिख टांगते हैं भक्त, मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं ये चीज

    Temples-of-India

    भारत को मदिरों और आश्रमों का देश कहा जाता है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक, पूरब से लेकर पश्चिम विविध प्रकार के देवता और उनके अनोखे मंदिर और उससे जुड़ी लाखों रहस्यमय कथा-कहानियां हैं, जहां के रीति-रिवाज और नियम भी अनूठे हैं। ऐसा ही एक मंदिर लोककथाओं और प्राकृतिक सुंदरता की नगरी अल्मोड़ा की घाटियों में है।

    चितई गोलू देवता मंदिर

    हिमालय की गोद में बसे इस मंदिर का नाम है चितई गोलू देवता मंदिर, जिसमें स्थानीय लोगों की जबरदस्त आस्था और विश्वास है। कुमाऊं क्षेत्र में चितई गोलू देवता को ‘न्याय का देवता और परम न्यायाधीश’ के रूप में इनकी पूजा की जाती हैं। कहते हैं, जब लोग हर जगह निराश हो जाते हैं, कोर्ट-कचहरी आदि से सब कुछ हार जाते हैं, तब लोग यहां आखिरी उम्मीद लेकर आते हैं।

    कौन थे चितई गोलू देवता?

    अल्मोड़ा के चंपावत (धूमाकोट) के इतिहासे के अनुसार, चितई गोलू देवता कत्यूरी राजवंश के राजकुमार थे, जो महादेव शिव के ‘गौर भैरव’ रूप के अवतार थे। उन्होंने न्यायप्रिय कत्यूरी राजा झाल राय की आठवीं रानी कालिंका के गर्भ से जन्म लिया था। लेकिन सात अन्य रानियों ने उसे षडयंत्र कर एक सन्दूक में बंद कर काली नदी की धारा में बहा दिया और राजा से कहा कि रानी ने पत्थर के सिलबट्टे को जन्म दिया है।

    मछुआरे ने किया पालन-पोषण

    नदी में बहता वह सन्दूक भाना नाम के मछुआरे को मिला, जिसने बालक का पालन-पोषण किया और नाम रखा गोलू। यह बालक विलक्षण था। बड़े होने पर एक दिन गोलू एक लकड़ी का घोड़ा लेकर राजा के घाट पर उसे पानी पिलाने पहुंचा। रानियों ने उपहास किया लकड़ी का घोड़ा पानी कैसे पी सकता है। तब गोलू ने पलट कर जवाब दिया, ‘जब एक रानी सिलबट्टे को जनम दे सकती है, तो लकड़ी घोड़ा पानी क्यों नहीं पी सकता है?’

    ऑन द स्पॉट निष्पक्ष न्याय

    जब यह बात राजा के पास पहुंची, तो राजा ने गहन जांच करवाई और अपनी भूल सुधारते हुए रानी कालिंका और उसके पुत्र गोलू को अपनाया। बाद में गोलू चंपावत के राजा बने और गोलू दरबार लगाकर लोगों को न्याय देते थे। कहते हैं, आज के फास्ट ट्रैक कोर्ट से अधिक फास्ट थे। वे ऑन द स्पॉट निष्पक्ष निर्णय करते थी और सही और सटीक न्याय देते थे। प्रजा-प्रेम और उनकी न्यायप्रियता से वे जन-जन के राजा बन गए और ‘न्याय के देवता’ के रूप में पूजे जानए लगे।

    क्या है स्टांप पर अर्जी लिखने का रहस्य

    कुमाऊं क्षेत्र के लोग गोलू देवता को अपना राजा और न्याय देने वाले देवता मानते हैं। कहते हैं, जब कोई आदमी अदालत का दरवाजा खट-खटा के परेशान और निराश हो जाता है, तो वह आखिरी उम्मीद लेकर इस ‘दिव्य न्यायालय’ में हाजिरी भरता है। मान्यता है कि लोगों की लिखित अर्जी सीधी के देवता का पहुंचती है। यह अर्जी स्टांप पेपर और सादे कागज पर भी लिखी जा सकती है।

    लाखों घंटियों का मंदिर

    चितई गोलू देवता का मंदिर का परिसर अर्जियों और घंटियों से भरा पड़ा है, जिसे आभार और न्याय की गूंज माना जाता है। मंदिर में प्रवेश करते ही छोटी-बड़ी लाखों घंटिया देख हृदय विस्मित हो जाता है। कहते हैं, ये घंटियां उन लोगों ने अर्पित की हैं, जिनकी अर्जियां और मनोकामनाएं पूरी हो गई थी।

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. 

  • रिश्तों में कड़वाहट घोल देती हैं ये 5 गलतियां, चाणक्य की इन बातों को हमेशा रखें ध्यान..

    रिश्तों में कड़वाहट घोल देती हैं ये 5 गलतियां, चाणक्य की इन बातों को हमेशा रखें ध्यान..

    रिश्तों में कड़वाहट घोल देती हैं ये 5 गलतियां, चाणक्य की इन बातों को हमेशा रखें ध्यान..

    Chanakya Niti: रिश्ते जिंदगी का बेहद अहम हिस्सा होते हैं। परिवार और रिश्तेदारों के साथ अच्छे संबंध बने रहें, इसके लिए सिर्फ प्यार और सम्मान ही नहीं, बल्कि व्यवहार का भी ध्यान रखना जरूरी है। कई बार हमारी छोटी-छोटी आदतें ही सामने वाले को बुरी लग जाती हैं और धीरे-धीरे रिश्तों में दूरी बढ़ने लगती है।

    आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में व्यक्ति के व्यवहार और सामाजिक जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। उनके अनुसार, दूसरों के घर जाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसी 5 गलतियों के बारे में, जिनसे रिश्तों में कड़वाहट पैदा हो सकती है।

    1. बिना बताए किसी के घर न पहुंचें

    किसी रिश्तेदार या परिचित के घर जाने से पहले उन्हें इसकी जानकारी देना बेहतर माना जाता है। बिना बताए अचानक पहुंचने से सामने वाला असहज हो सकता है या उसकी दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।

    इसलिए अगर किसी के घर जाना हो तो पहले फोन या मैसेज करके बता देना चाहिए। इससे आपके रिश्ते में सम्मान और अपनापन बना रहता है।

    2. खाली हाथ जाने से बचें

    पुराने समय से ही किसी के घर जाते समय अपनी क्षमता के अनुसार कुछ लेकर जाने की परंपरा रही है। यह जरूरी नहीं कि उपहार महंगा ही हो। आप फल, मिठाई या घर में इस्तेमाल होने वाली कोई छोटी चीज भी ले जा सकते हैं।

    ऐसा व्यवहार सामने वाले के प्रति आपके सम्मान और अपनापन को दर्शाता है।

    3. दूसरों के निजी मामलों में दखल न दें

    रिश्तेदारों के घर जाकर उनके निजी मामलों में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। परिवार के आपसी संबंध, घरेलू खर्च या किसी व्यक्तिगत फैसले पर बिना पूछे अपनी राय देना कई बार परेशानी खड़ी कर सकता है।

    अगर कोई व्यक्ति खुद आपसे सलाह मांगे, तभी अपनी बात रखें। हर मामले में अपनी राय देना रिश्ते में तनाव पैदा कर सकता है।

    4. किसी के घर जरूरत से ज्यादा न रुकें

    रिश्तेदारों के यहां जाना और समय बिताना अच्छी बात है, लेकिन लंबे समय तक रुकने से बचना चाहिए, खासकर तब जब सामने वाले की दिनचर्या प्रभावित हो रही हो।

    किसी के घर जाते समय उनकी सुविधा का भी ध्यान रखना जरूरी है। समय पर वापस लौटने से आपका सम्मान भी बना रहता है और सामने वाले को असुविधा भी नहीं होती।

    5. दिखावे और चुगली से दूर रहें

    रिश्तों में सबसे ज्यादा दूरी पैदा करने वाली आदतों में दिखावा और दूसरों की बुराई करना भी शामिल है। अपनी संपत्ति, कमाई या उपलब्धियों का जरूरत से ज्यादा प्रदर्शन करने से सामने वाला असहज महसूस कर सकता है।

    इसी तरह किसी तीसरे रिश्तेदार की बुराई उसके सामने करने से भी बचना चाहिए। सामने वाला यह सोच सकता है कि आप उसकी गैरमौजूदगी में उसकी बातें भी दूसरों से साझा कर सकते हैं।

    रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है समझदारी

    रिश्ते सिर्फ बातचीत से नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार से भी मजबूत होते हैं। इसलिए दूसरों की भावनाओं, निजी जीवन और सुविधाओं का सम्मान करना चाहिए। चाणक्य की इन बातों को आज के समय में भी व्यवहार और सामाजिक संबंधों के संदर्भ में समझा जा सकता है।

    डिस्क्लेमर: चाणक्य नीति से जुड़ी ये बातें पारंपरिक मान्यताओं और उपलब्ध व्याख्याओं पर आधारित हैं। इन्हें सामान्य जानकारी के तौर पर पढ़ें।

  • सोफे के पीछे दीवार पर न टांगें ये 3 तस्वीरें, बन सकती हैं कंगाली और डिप्रेशन का कारण..

    सोफे के पीछे दीवार पर न टांगें ये 3 तस्वीरें, बन सकती हैं कंगाली और डिप्रेशन का कारण..

    सोफे के पीछे दीवार पर न टांगें ये 3 तस्वीरें, बन सकती हैं कंगाली और डिप्रेशन का कारण..

    वास्तु शास्त्र में घर से जुड़ी हर चीज के लिए नियम बेहद स्पष्ट हैं, चाहे वह पूजा घर, किचन, बेडरूम, बालकनी हो या लिविंग रूम. लिविंग रूम के बारे में यह शास्त्र कहता है कि यह घर की वह जगह है, जहां ऊर्जा का सबसे अधिक आदान-प्रदान होता है. इस रूम में सोफे के पीछे की जगह को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. इसका कारण यह बताया जाता है कि यहां बैठने वाले लोगों और पूरे घर के माहौल पर इस दीवाल का डायरेक्ट असर पड़ता है. आइए वास्तु नियमों से जानते है कि लिविंग रूम में सोफे के पीछे वॉल पर कौन-सी 3 प्रकार की पेंटिंग भूल से भी नहीं टांगनी चाहिए?

    डूबता हुआ सूरज

    वास्तु शास्त्र में उगते हुए सूरज को नई शुरुआत, शुभ ऊर्जा, उत्थान और विकास का प्रतीक माना गया है. वहीं, डूबते सूरज को जीवन में पतन, ठहराव और निराश से जोड़ा गया है. डूबते सूरज वाली तस्वीरों में चीजों को अक्सर धुंधले और फीके पड़ते हुए प्रकाश और रंगों में दिखाया जाता है. ऐसी तस्वीरें सोफे के पीछे लगाने के घर मेम्बर का आपस में विश्वास कम हो सकता है. घर लोग बेवजह उदास या डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं. यह करियर और व्यापार में गिरावट का भी कारण भी बन सकता है.

    यद्ध, हिंसा या महाभारत की तस्वीर

    वास्तु शास्त्र में युद्ध और हिंसा को विनाश और क्रोध का प्रतीक माना गया है. मान्यता है कि इस प्रकार की तस्वीरें या पेंटिंग लगाने से घर के लोगों में अग्रेसिवनेस और नेगेटिविटी बढ़ सकती है. कलह और झगड़े हो सकते हैं. बेवजह तनाव रह सकता है, जो डिप्रेशन की ओर धकेल सकता है. महाभारत युद्ध की तस्वीर भी नहीं लगानी चाहिए, क्योंकि ये भी नकारात्मकता फैला सकती है.

    डूबते जहाज/नाव की तस्वीर

    किसी तूफान में फंसे नाव, पानी में डूबता जहाज, टाइटैनिक या टूटे हुए जहाज की फोटो को वास्तु शास्त्र में बेहद नेगेटिव असर वाला माना गया है. इस प्रकार को तस्वीरों और पेंटिंग को नुकसान, बर्बादी और बुरे वक्त का प्रतीक माना गया है. इसे सोफे के पीछे लगाने से मनःस्थिति और घर-परिवार की आर्थिक स्थति पर असर होता है. इससे घर में कंगाली भी आ सकती है. इस दीवाल पर मुरझाए फूल वाले चित्र, सूखे पेड़ और जंगल में आग लगने जैसे फोटो आदि भी नही लगाने चाहिए।

    ऐसी फोटो लाती है खुशहाली

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस प्रकार की फोटो का सही विकल्प है सकारात्मक तस्वीर और पेंटिंग, जैसे- दौड़ते हुए 7 सफेद घोड़े, हरे भरे जंगल, ऊंचे ऊंचे पर्वत, उगता हुआ सूर्य. मान्यता है कि ये सुख-समृद्धि को घर-परिवार की आकर्षित करती हैं.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.