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  • प्राचीन काल की ईंटें, मिट्टी की सुराही, हैंडल वाली धूपदानी… रायबरेली में मिली रहस्यमयी सुरंग

    प्राचीन काल की ईंटें, मिट्टी की सुराही, हैंडल वाली धूपदानी… रायबरेली में मिली रहस्यमयी सुरंग

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    उत्तर प्रदेश में रायबरेली जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र के ओई गांव में मिली रहस्यमयी सुरंग और प्राचीन अवशेष मिले हैं. पिछले हफ्ते ओई गांव में बारिश के बाद अचानक जमीन धंस गई. जमीन धंसने से वहां एक रहस्यमयी सुरंग और पक्की दीवार जैसी संरचना दिखाई दी है. इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है.

    अचानक खेत में हो गया गड्ढा-
    मामला रायबरेली जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र का है, यहां स्थित ओई गांव में एक निजी खेत के अंदर अचानक एक मीटर चौड़ा गड्ढा हो गया. जब लोगों ने पास जाकर देखा, तो वहां पक्की दीवार से बनी एक प्राचीन सुरंग जैसी आकृति नजर आई. इस अनोखी संरचना को देखने के लिए देखते ही देखते पूरे गांव की भीड़ जमा हो गई.

    कई ऐतिहासिक चीजें मिली-
    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन तुरंत एक्शन में आया. एसडीएम महराजगंज और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI लखनऊ मंडल की टीम मौके पर पहुंची. सहायक पुरातत्वविद डॉ. मनोज कुमार यादव के नेतृत्व में टीम सीढ़ी के सहारे इस रहस्यमयी सुरंग के अंदर उतरी. उन्हें बताया की सुरंग के अंदर जांच के दौरान पुरातत्व विभाग की टीम को कई ऐतिहासिक चीजें मिली हैं. यहां से प्राचीन काल की पुरानी ईंटें, मिट्टी की सुराही और एक हैंडल वाली धूपदानी बरामद की गई है.

    कुषाण कालीन अवशेष मिले-
    एक्सपर्ट्स के शुरुआती आकलन के मुताबिक, ये सभी अवशेष कुषाण कालीन बताए जा रहे हैं. इतना ही नहीं, इस मामले में आज एक बड़ा अपडेट सामने आया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लखनऊ मंडल की टीम ने आज गांव के ही निवासी अशोक प्रताप मौर्य के घर पहुंचकर उनके पास मौजूद प्राचीन अवशेषों का बारीकी से निरीक्षण किया. गौरतलब है कि अशोक प्रताप मौर्य 1985 से इन ऐतिहासिक अवशेषों को सहेज कर रख रहे हैं. उनके दावे के अनुसार, यह ओई भीट पुरातत्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज एक ऐतिहासिक स्थल है.

    फिलहाल, सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने पूरे इलाके को सील कर दिया है. मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और ग्रामीणों को गड्ढे के पास जाने से साफ मना किया गया है. एएसआई की विस्तृत वैज्ञानिक रिपोर्ट आने के बाद ही इस प्राचीन और ऐतिहासिक सुरंग का पूरा सच सामने आ सकेगा.


    डॉ कुमार ने बताया कि निरीक्षण के दौरान हम लोगों ने यहां पर देखा कि तकरीबन 15 से 20 फीट की जमीन धंसी हुई है. जिसके अंदर कुछ ईंटों के संरचना मिले, जिनका ओरियंटेशन उत्तर से लेकर दक्षिण की तरफ है और जब हम लोगों ने नीचे जाकर ईंटों को देखा तो उनकी साइज 40 /28 /8 सेंटीमीटर है, जो कुषाण कालीन संरचना से मिलती-जुलती है और बहुत सारे अवशेष देखने को मिले, जो सरफेस पर भी है और यहां के स्थानीय लोगों के द्वारा संग्रह भी किया गया है और इन्हें बनाने में जो ड्राइव है, जो मूर्तियां हैं, कुछ अवशेष हैं, जो यह सारी संरचनाओं हैं, कुषाण कल के समय जो बनती थी, यह उससे मिलती-जुलती हैं. यह 2000 साल पहले का है और अभी इसकी रिपोर्ट सबमिट की जाएगी. फिर उसके बाद जैसे शासन निर्देश करेगी, उसी हिसाब से कार्यवाही की जाएगी.

  • होटल और ट्रेन में हमेशा क्यों होती सफेद चादर… कोई दूसरे रंग से क्यों बचा जाता, जानिए इसके पीछे की असली वजह

    होटल और ट्रेन में हमेशा क्यों होती सफेद चादर… कोई दूसरे रंग से क्यों बचा जाता, जानिए इसके पीछे की असली वजह

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    अगर आपने कभी होटल में ठहरने या ट्रेन में सफर किया है, तो आपने एक बात जरूर नोटिस की होगी. ज्यादातर जगहों पर बिस्तर पर सफेद चादर ही बिछी होती है. रंगीन चादरें बहुत कम देखने को मिलती हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर सफेद चादर का ही इस्तेमाल क्यों किया जाता है. क्या यह सिर्फ देखने में अच्छी लगती है या इसके पीछे कोई और वजह भी है? सच यह है कि सफेद चादर चुनने के पीछे कई कारण होते हैं.

    तुरंत पता चल जाती है सफाई

    सफेद चादर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उस पर धूल, दाग या गंदगी तुरंत दिखाई देती है. इससे होटल और रेलवे के कर्मचारियों को भी आसानी से पता चल जाता है कि चादर पूरी तरह साफ है या नहीं. अगर उस पर हल्का सा भी दाग दिख जाए, तो उसे दोबारा धोया जाता है या नई चादर बिछा दी जाती है.

    धोने और साफ रखने में होती है आसानी

    होटलों और ट्रेनों में हर दिन बड़ी संख्या में चादरों की धुलाई होती है. सफेद चादरों को एक साथ मशीन में धोया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर उन पर ब्लीच का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे जिद्दी दाग आसानी से निकल जाते हैं. अगर रंगीन चादरों पर ब्लीच का इस्तेमाल किया जाए, तो उनका रंग फीका पड़ सकता है. यही वजह है कि सफेद चादरों को साफ रखना ज्यादा आसान और सस्ता पड़ता है.

    सफेद रंग देता है सुकून का एहसास

    रंगों का असर हमारे मन पर भी पड़ता है. सफेद रंग को साफ-सफाई, शांति और सादगी का प्रतीक माना जाता है. जब कोई व्यक्ति सफेद चादर वाला बिस्तर देखता है, तो उसे वह ज्यादा साफ और आरामदायक लगता है. इससे मन को सुकून मिलता है और ठहरने का अनुभव भी बेहतर बन जाता है. यही कारण है कि बड़े और लग्जरी होटल भी सफेद चादरों को ही पसंद करते हैं.

    रखरखाव में होती है समय और खर्च की बचत

    अगर होटल या रेलवे अलग-अलग रंगों की चादरें इस्तेमाल करें, तो उन्हें अलग-अलग धोना पड़ेगा. इससे समय, मेहनत और खर्च तीनों बढ़ जाएंगे. सफेद चादरों के साथ यह परेशानी नहीं होती. सभी चादरों को एक साथ धोया जा सकता है, जिससे काम आसान हो जाता है. इसके अलावा सफेद रंग रोशनी को अच्छी तरह लौटाता है, जिससे होटल का कमरा या ट्रेन का केबिन ज्यादा उजला और साफ दिखाई देता है.

  • Aadhaar Bometric Lock: कर लें इस सेटिंग को ऑन… नहीं कर पाएगा कोई आधार का गलत इस्तेमाल, बायोमेट्रिक रहेंगे पूरी तरह सेफ

    Aadhaar Bometric Lock: कर लें इस सेटिंग को ऑन… नहीं कर पाएगा कोई आधार का गलत इस्तेमाल, बायोमेट्रिक रहेंगे पूरी तरह सेफ

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    आधार कार्ड आज बैंक, सरकारी स्कीम, सिम कार्ड खरीदने और कई जरूरी कामों में इस्तेमाल होता है. ऐसे में अगर आपके आधार का गलत इस्तेमाल हो जाए तो बड़ी परेशानी हो सकती है. इसी खतरे को कम करने के लिए नए Aadhaar App में एक खास फीचर दिया गया है. अब यूजर अपने फिंगरप्रिंट और आइरिस (आंखों की पहचान) को जब चाहें लॉक और जरूरत पड़ने पर अनलॉक कर सकते हैं. इससे आपकी बायोमेट्रिक जानकारी ज्यादा सेफ रहती है.

    बायोमेट्रिक लॉक क्यों जरूरी है?

    आधार से जुड़ी बायोमेट्रिक जानकारी में आपके फिंगरप्रिंट और आइरिस की जानकारी होती है. अगर यह जानकारी लॉक रहती है, तो कोई भी व्यक्ति आपकी पर्मिशन के बिना बायोमेट्रिक से आधार का इस्तेमाल नहीं कर सकता. इससे धोखाधड़ी की आशंका काफी कम हो जाती है.

    नए Aadhaar App से कैसे करें लॉक?

    अगर आप अपने फिंगरप्रिंट और आइरिस को लॉक करना चाहते हैं, तो सबसे पहले नया Aadhaar App खोलें. इसके बाद अपने आधार खाते में लॉग इन करें. ऐप के होम पेज पर आपको Biometric Lock का ऑप्शन दिखाई देगा. इस पर टैप करें और स्क्रीन पर दी गई जानकारी को पूरा करें. प्रोसेस पूरा होते ही आपका बायोमेट्रिक डेटा लॉक हो जाएगा. इसके बाद किसी भी बायोमेट्रिक जांच के लिए पहले इसे अनलॉक करना जरूरी होगा.

    जरूरत पड़ने पर ऐसे करें अनलॉक

    जब आपको बैंक, आधार सेवा केंद्र या किसी अन्य जगह फिंगरप्रिंट या आइरिस से पहचान करानी हो, तब Aadhaar App खोलें. फिर Biometric Unlock ऑप्शन चुनें और पहचान की प्रोसेस पूरी करें. आपका बायोमेट्रिक कुछ समय के लिए अनलॉक हो जाएगा. काम पूरा होने के बाद आप इसे दोबारा लॉक भी कर सकते हैं.

    किनके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद?

    अगर आपका आधार कई सेवाओं से जुड़ा है, आप अक्सर बैंक या सरकारी काम करते हैं या आपको आधार के गलत इस्तेमाल की चिंता रहती है, तो यह सुविधा आपके लिए काफी फायदेमंद है. जरूरत न होने पर बायोमेट्रिक लॉक रखने से सेफ्टी बढ़ जाती है और आपकी निजी जानकारी सेफ रहती है. नए Aadhaar App में यह सुविधा अब पहले से ज्यादा आसान और तेज तरीके से होती है.

  • AI कैमरों को भी कर सकते हैं कन्फ्यूज ये खास कपड़े! आखिर क्यों बढ़ रही है इनकी चर्चा?

    AI कैमरों को भी कर सकते हैं कन्फ्यूज ये खास कपड़े! आखिर क्यों बढ़ रही है इनकी चर्चा?

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    सोचिए, आपने एक ऐसी टी-शर्ट या जैकेट पहन रखी हो जिसे देखकर AI कैमरे आपकी पहचान करने में मुश्किल महसूस करें. सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन अब ऐसे खास कपड़ों की चर्चा हो रही है. इन्हें Adversarial Clothing कहा जाता है. इन कपड़ों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि कुछ फेस रिकग्निशन सिस्टम के लिए किसी व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल हो सकता है.

    Adversarial Clothing ऐसे कपड़े होते हैं जिन पर खास तरह के पैटर्न और डिजाइन बनाए जाते हैं. इनका मकसद कुछ AI कैमरों और फेस रिकग्निशन सिस्टम को भ्रम में डालना है. कुछ डिजाइनर ऐसे जैकेट भी बना रहे हैं जिनमें इंफ्रारेड LED का इस्तेमाल किया जाता है. दावा है कि इससे कुछ कैमरों के लिए चेहरा साफ पहचानना कठिन हो सकता है. लेकिन, यह तकनीक हर जगह एक जैसी असरदार नहीं मानी जाती.

    आखिर लोग क्यों खरीदना चाहते हैं ऐसे कपड़े?

    आज दुनिया के कई शहरों में AI कैमरों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मॉल और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर फेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में कई लोग अपनी प्राइवेसी को लेकर चिंता जताते हैं. इसी वजह से कुछ लोग ऐसे कपड़ों को सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि अपनी निजता से जोड़कर भी देख रहे हैं.

    क्या सच में AI कैमरों को धोखा दे सकते हैं?

    इस सवाल का जवाब पूरी तरह ‘हां’ नहीं है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक अलग-अलग कंपनियों के कैमरे और AI सिस्टम अलग तरीके से काम करते हैं. इसलिए कोई भी कपड़ा हर जगह या हर सिस्टम को चकमा दे देगा, ऐसा कहना सही नहीं होगा. कई बार कैमरे फिर भी व्यक्ति की पहचान कर सकते हैं.

    क्या आगे बढ़ेगा यह ट्रेंड?

    फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर बड़े फैशन ब्रांड और मशहूर लोग ऐसे डिजाइन अपनाते हैं, तो यह ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो सकता है. वहीं, अगर भविष्य में ऐसे कपड़े निगरानी तकनीक को बड़े स्तर पर प्रभावित करने लगते हैं, तो सरकारें इनके इस्तेमाल को लेकर नए नियम भी बना सकती हैं.

  • शादी के दो साल बाद तक संबंध बनाने से कतराता रहा पति, स्पर्म जांच कराने ले गई पत्नी तो घर से पीट कर निकाला, सैंपल भी नहीं दिया,,?

    शादी के दो साल बाद तक संबंध बनाने से कतराता रहा पति, स्पर्म जांच कराने ले गई पत्नी तो घर से पीट कर निकाला, सैंपल भी नहीं दिया,,?

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    गोरखपुर में 30 वर्षीय महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई है. महिला का आरोप है कि शादी के बाद से उसके पति ने कभी भी उसके साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाए. जब भी उसने इसकी वजह पूछी, पति हर बार यह कहकर बात टाल देता था कि उसका दवा का कोर्स चल रहा है और कोर्स पूरा होने के बाद सब सामान्य हो जाएगा. महिला का कहना है कि इसी भरोसे में दो साल बीत गए, लेकिन पति का व्यवहार नहीं बदला.

    जांच कराने ले गई, पति ने सैंपल देने से किया इनकार
    शिकायत के मुताबिक, पति के व्यवहार पर शक होने के बाद महिला उसे एक निजी अस्पताल लेकर गई. वहां डॉक्टर ने जांच के लिए स्पर्म सैंपल देने को कहा, लेकिन पति ने सैंपल देने से साफ इनकार कर दिया. इसके बाद महिला ने दोबारा इलाज कराने की बात कही तो मामला और बिगड़ गया. महिला का आरोप है कि इसके बाद पति और ससुराल के अन्य लोगों ने मिलकर उससे 5 लाख लाने की मांग की. कहा गया कि इलाज तभी कराया जाएगा और अगर पैसे नहीं लाई तो घर में रहने की अनुमति भी नहीं मिलेगी.

    शादी में 15 लाख खर्च होने का भी दावा
    महिला ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी दो साल पहले नगर क्षेत्र निवासी युवक से हुई थी. शादी में उसके परिवार ने करीब 15 लाख रुपए खर्च किए थे. इसके बावजूद शादी के पहले दिन से ही उसे अनदेखा किया गया. आरोप है कि उसे जरूरत की चीजें तक नहीं दी जाती थीं और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था.

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  • धनबाद की दो बहनों ने गीता के श्लोक पाठ से बनाया विश्व रिकॉर्ड, Guinness World Records में नाम हुआ दर्ज..

    धनबाद की दो बहनों ने गीता के श्लोक पाठ से बनाया विश्व रिकॉर्ड, Guinness World Records में नाम हुआ दर्ज..

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    आज के दौर में बच्चों का काफी समय मोबाइल और सोशल मीडिया पर गुजर रहा है लेकिन धनबाद के धैय्या की रहने वाली दो बहनों ने अपनी प्रतिभा और संस्कारों के दम पर एक खास पहचान बनाई है. प्रांजल मित्तल और आन्या मित्तल ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का नियमित पाठ करते हुए विश्व स्तर पर अपनी पहचान कायम की है. दोनों बहनों की इस उपलब्धि को Guinness World Records में दर्ज किया गया है. इस खास सफलता के लिए उन्हें आधिकारिक प्रमाण पत्र के साथ गोल्ड मेडल भी प्रदान किया गया है. इस उपलब्धि के पीछे परिवार के संस्कार और उनकी मां प्रीति अग्रवाल की अहम भूमिका रही है.

    किया गया सम्मानित
    प्रांजल मित्तल और आन्या मित्तल ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों के नियमित पाठ को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया और इसी साधना ने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई. गीता के श्लोकों के पाठ में उनकी निरंतरता और लगन का परिणाम है कि दोनों बहनों की भागीदारी Guinness World Records में दर्ज हुई है. इस उपलब्धि के लिए उन्हें आधिकारिक प्रमाण पत्र और गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया है.

    सिर्फ 5 मिनट में पूरा किया पाठ
    प्रांजल और आन्या की इस सफलता में उनके परिवार के संस्कारों की बड़ी भूमिका रही है. खास तौर पर उनकी मां प्रीति अग्रवाल ने दोनों बेटियों को नियमित रूप से गीता पाठ के लिए प्रेरित किया और उनका हौसला बढ़ाया. आज दोनों बहनों की यह उपलब्धि सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि धनबाद के लिए भी गर्व का विषय है. आधुनिक दौर में जहां बच्चों का रुझान तेजी से दूसरी चीजों की ओर बढ़ रहा है, वहीं इन दोनों बहनों ने भारतीय संस्कृति, संस्कार और श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति अपनी आस्था को अपनी पहचान बनाया है. प्रांजल और आन्या की कहानी यह संदेश देती है कि अगर संस्कार, अनुशासन और निरंतर मेहनत साथ हों, तो छोटी-सी शुरुआत भी दुनिया के मंच तक पहुंच सकती है. प्रांजल मित्तल और प्रांजल मित्तल ने बताया कि उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय का पाठ करीब पांच मिनट में पूरा किया. गीता के श्लोकों का सही उच्चारण हो, इसके लिए उन्होंने लगातार अभ्यास किया. प्रांजल अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देती हैं. उनका कहना है कि मां बचपन से ही उन्हें गीता का पाठ सिखाती थीं. घर में गीता के श्लोकों की ऑडियो रिकॉर्डिंग चलती रहती थी और वह लगातार उन्हें सुनती थीं. इसी तरह सुनते-सुनते श्लोक याद होते चले गए.

    श्रीमद्भगवद्गीता सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं
    आन्या मित्तल ने कहा कि गीता का पाठ उनके लिए कोई नई चीज नहीं है. उन्होंने बचपन से ही अपनी मां से गीता के श्लोक सीखना शुरू कर दिया था. मां को देखकर उनमें भी गीता पढ़ने और उसके श्लोकों का सही उच्चारण करने की रुचि पैदा हुई.आज यही अभ्यास उनकी पहचान बन चुका है. प्रीति अग्रवाल का कहना है कि श्रीमद्भगवद्गीता में 700 श्लोक हैं और यह सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की सीख भी देती है. उनका मानना है कि बच्चों को गीता से जोड़ने से उनमें अनुशासन, संस्कार और अपनी संस्कृति के प्रति समझ विकसित होती है.पिता सुनील अग्रवाल के कहते हैं कि प्रांजल और आन्या की उपलब्धि आज उन अभिभावकों के लिए भी एक उदाहरण है, जो अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना चाहते हैं. मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में इन दोनों बहनों ने गीता के श्लोकों को अपना साथी बनाया और अपनी मेहनत के दम पर विश्व स्तर पर पहचान बनाई. धैय्या की गलियों से शुरू हुई यह यात्रा अब Guinness World Records तक पहुंच चुकी है.

  • रिश्ते में खुद को कम समझना छोड़ें, सीखें अपनी वैल्यू कराना दोबारा नहीं टूटेगा दिल, रिलेशनशिप वाले जरूर पढ़ें..?

    रिश्ते में खुद को कम समझना छोड़ें, सीखें अपनी वैल्यू कराना दोबारा नहीं टूटेगा दिल, रिलेशनशिप वाले जरूर पढ़ें..?

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    कुछ लोग बार-बार लोगों को माफ कर देते हैं, जो सबसे बड़ा कारण होता अपनी वैल्यू कम करवाने का. कई बार ऐसा भी होता है कि लोग आपकी माफी की इज्जत करते हैं, लेकिन कई बार ऐसा देखा गया है कि कुछ लोग इसे अपना हक समझकर आपको बार-बार परेशान करते हैं. वहीं बार-बार दिल टूटना सिर्फ रिश्ते को कमजोर नहीं करता, बल्कि इंसान का आत्मविश्वास और भरोसा भी कमजोर कर देता है. अगर आप चाहते हैं कि कोई आपको हल्के में न ले और आपकी भावनाओं से खिलवाड़ भी न करे, तो सबसे पहले आपको खुद की अहमियत समझनी होगी. रिश्ते तभी मजबूत रहते हैं, जब सामने वाला आपकी इज्जत करे और आप अपनी सीमाएं तय करना जानते हों.


    किसी भी रिश्ते में इतना भी मत खो जाइए कि सामने वाले को लगे आप उसके बिना नहीं रह सकते. अपनी भावना, समय और निजी जिंदगी की एक सीमा तय करें. जब लोग समझते हैं कि आप खुद की कद्र करते हैं, तो वे भी आपको हल्के में नहीं लेते.


    किसी दूसरे या तीसरे इंसान में भी अपनी खुशी ढूंढना बंद कर दें. जब दिल टूटता है तो दिल किसी और से वेलिडेशन चाहता है, ऐसे में आप फिर से गलत इंसान को चुन सकते हैं. जिससे बाहर के लोग ऐसे मौके का फायदा उठाते हैं. पहले खुद को वक्त दें. खुद को कभी भी किसी एक इंसान पर निर्भर मत होने दीजिए. जब आपकी दुनिया सिर्फ एक रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमने लगती है, तब दिल टूटने का असर सबसे ज्यादा होता है. अपनी फैमिली, दोस्तों, काम और खुद के साथ भी उतना ही जुड़ाव बनाए रखें.


    अगर किसी ने आपका भरोसा तोड़ा है, तो बार-बार उसे समझाने या मनाने की बजाय खुद को समय दें. कम से कम 30 दिनों तक उससे कोई संपर्क न रखें. फोन, मैसेज और सोशल मीडिया से दूरी बनाएं. इससे आपका मन भी शांत होगा और सामने वाले को आपकी अहमियत का एहसास भी होगा.

    दर्द को दबाएं नहीं, बाहर आने दें
    दिल टूटने के बाद मजबूत बनने का मतलब यह नहीं कि आप रोएं ही नहीं. अगर रोना आता है तो रोइए, गुस्सा है तो उसे स्वस्थ तरीके से बाहर निकालिए. भावनाओं को दबाने से दर्द समय के साथ बढ़ता है, जबकि उन्हें स्वीकार करना आगे बढ़ने की पहली सीढ़ी होती है.

    खुद पर समय और मेहनत लगाइए
    ब्रेकअप या रिश्ते की तकलीफ को अपनी जिंदगी का अंत मत मानिए. अपना फोकस करियर, पढ़ाई, फिटनेस और नई स्किल सीखने पर लगाइए. जिम जाएं, किताबें पढ़ें, यात्रा करें या कोई नया शौक अपनाएं. जब आप खुद को बेहतर बनाने में जुटते हैं, तो आपका आत्मविश्वास अपने आप लौट आता है.

    अपनी कीमत पहचानिए
    याद रखिए, आपकी पहचान किसी रिश्ते से नहीं, बल्कि आपके व्यक्तित्व से बनती है. अगर कोई आपको बार-बार नजरअंदाज करता है, आपकी भावनाओं की कद्र नहीं करता या सिर्फ जरूरत पड़ने पर याद करता है, तो ऐसे लोगों से दूरी बनाना ही बेहतर है. जो इंसान आपकी इज्जत नहीं कर सकता, उसे अपनी जिंदगी में जगह देने की जरूरत नहीं है.

    मजबूत बनिए, बदला लेना नहीं है
    किसी को उसकी औकात दिखाने का सबसे अच्छा तरीका लड़ाई या बदला नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाना है. जब आप खुद को महत्व देना शुरू कर देते हैं, तब वही लोग आपकी अहमियत समझने लगते हैं जिन्होंने कभी आपको हल्के में लिया था. सबसे बड़ा जवाब आपकी चुप्पी, सफलता, आत्मसम्मान और सुकून भरी जिंदगी होती है. एक बार ये ट्राय करें, आप खुश रहना सिख जाएंगे और खुद को जिम्मेदार मानना बंद कर देंगे. 

  • भूतिया माने जाने वाले घर खरीदने के लिए लग रही है लोगों की लाइन, जापान का नया ट्रेंड जानकर रह जाएंगे हैरान..

    भूतिया माने जाने वाले घर खरीदने के लिए लग रही है लोगों की लाइन, जापान का नया ट्रेंड जानकर रह जाएंगे हैरान..

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    क्या आप ऐसे घर में रहने की हिम्मत करेंगे, जहां कभी हत्या, आत्महत्या या किसी की रहस्यमयी मौत हुई हो? ज्यादातर लोगों का जवाब ‘नहीं’ होगा. लेकिन जापान में अब हजारों लोग ऐसे घरों को खुद खरीद रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि इसकी वजह कोई रोमांच नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई और महंगे घर हैं. तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर लोग ऐसा कर क्यों रहे हैं.

    बता दें कि, जापान में ऐसे घरों को जिको बुकेन कहा जाता है. ये वे प्रॉपर्टी होती हैं जहां कभी हत्या, आत्महत्या या किसी व्यक्ति की अकेले मौत हुई हो. लंबे समय तक जापानी समाज में इन घरों को अशुभ और डरावना माना जाता था. लोग इन्हें खरीदने या किराए पर लेने से बचते थे. लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और इन घरों की मांग तेजी से बढ़ रही है.

    महंगाई ने बदली लोगों की सोच
    जापान में रहने का खर्च लगातार बढ़ रहा है. खासकर टोक्यो जैसे बड़े शहरों में घर खरीदना आम लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में जिको बुकेन प्रॉपर्टी बाजार कीमत से करीब 20 से 50 प्रतिशत तक सस्ती मिल जाती हैं. यही वजह है कि युवा, पहली बार घर खरीदने वाले लोग और निवेशक इन घरों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. अब लोग अंधविश्वास से ज्यादा अपनी आर्थिक जरूरतों को महत्व दे रहे हैं.

    इस बदलते ट्रेंड को लोकप्रिय बनाने में जापानी कॉमेडियन तानीशी मात्सुबारा का भी बड़ा योगदान माना जाता है. वह पिछले कई वर्षों से जानबूझकर ऐसी प्रॉपर्टी में रह रहे हैं जहां पहले कोई दर्दनाक घटना हो चुकी थी. उन्होंने इसे अपने करियर का हिस्सा बना लिया है और लोगों के बीच यह संदेश देने की कोशिश की है कि हर ऐसी जगह डरावनी नहीं होती.

    बढ़ती बुजुर्ग आबादी भी बनी वजह
    जापान की बदलती आबादी भी इस ट्रेंड की एक बड़ी वजह है. वहां बड़ी संख्या में बुजुर्ग अकेले रहते हैं. कई बार उनकी मौत का पता कई दिनों बाद चलता है. ऐसे मामलों की संख्या बढ़ने से जिको बुकेन प्रॉपर्टी की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. इससे बाजार में ऐसे घरों की उपलब्धता पहले से ज्यादा हो गई है.

    इन घरों की मांग बढ़ने के साथ जापान में एक नया कारोबार भी तेजी से बढ़ रहा है. कई कंपनियां ऐसे घरों की सफाई, मरम्मत और रिनोवेशन का काम करती हैं. कुछ कंपनियां बौद्ध भिक्षुओं से विशेष धार्मिक अनुष्ठान भी कराती हैं ताकि घर को लेकर लोगों का डर कम हो सके. वहीं कुछ रियल एस्टेट एजेंट थर्मल कैमरे और सेंसर की मदद से यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि घर में किसी तरह की असामान्य गतिविधि नहीं है.

    आर्थिक मजबूरी ने बदली परंपरा
    जापानी संस्कृति में आत्माओं और भूत-प्रेत से जुड़ी मान्यताएं काफी पुरानी हैं. इसके बावजूद बढ़ती महंगाई और महंगे घरों ने लोगों की प्राथमिकताएं बदल दी हैं. अब कई लोग ऐसे घरों को डर की नजर से नहीं, बल्कि कम कीमत में अच्छा घर खरीदने का मौका मान रहे हैं. यही वजह है कि कभी बदनाम मानी जाने वाली ये प्रॉपर्टी आज जापान के रियल एस्टेट बाजार का नया ट्रेंड बनती जा रही हैं.

  • लोगों से कहा पति घर छोड़कर चला गया, बच्चों को भेजा मौसी के घर, और फिर प्रेमी संग मिलकर की पति की हत्या, 11 महीने बाद खुला राज..

    लोगों से कहा पति घर छोड़कर चला गया, बच्चों को भेजा मौसी के घर, और फिर प्रेमी संग मिलकर की पति की हत्या, 11 महीने बाद खुला राज..

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    नवी मुंबई के ऐरोली स्थित यादव नगर में करीब 11 महीने पहले हुई एक सनसनीखेज हत्या का राबले एमआईडीसी पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि दोनों ने मिलकर पति की हत्या की, शव के टुकड़े किए और सबूत मिटाने के लिए उन्हें जंगल में अलग-अलग जगह फेंक दिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुनीता कुशवाहा (40) और दशरथ प्रजापति (30) के रूप में हुई है. स्थानीय अदालत ने दोनों को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

    प्रेम संबंध का विरोध बना हत्या की वजह
    पुलिस जांच के अनुसार, मृतक बलिराम सूर्यनाथ कुशवाहा (50) अपनी पत्नी सुनीता और राहुल के कथित प्रेम संबंध का विरोध करता था. इसी कारण दोनों ने उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची. वारदात से पहले की रात दंपति के दोनों बच्चों को उनकी मौसी के घर भेज दिया गया ताकि हत्या के समय वे घर में मौजूद न रहें.

    सोते समय गला घोंटा, फिर सिर धड़ से अलग किया
    जांच में सामने आया कि बलिराम की पहले सोते समय गला घोंटकर हत्या की गई. इसके बाद तेज धारदार हथियार से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया गया. पहचान छिपाने और सबूत मिटाने के इरादे से शव के तीन टुकड़े किए गए. आरोपियों ने शव के हिस्सों को अलग-अलग बोरियों और चादरों में लपेटा और राहुल के ऑटो रिक्शा से गावली देव पहाड़ी के जंगल में तीन अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया.

    लोगों से कहा- पति घर छोड़कर चला गया
    हत्या के बाद सुनीता अपने बच्चों को लेकर घंसोली चली गई और राहुल के साथ रहने लगी. पड़ोसियों और परिचितों को बताया गया कि बलिराम घर छोड़कर कहीं चला गया है. इस कहानी के चलते कई महीनों तक किसी को हत्या की भनक नहीं लगी.


  • पत्थर पर चढ़ाए गए प्रसाद को अपनी जीभ से चाटते हैं इस गांव के लोग…बारिश लाने की इस परंपरा के बारे में सुना है आपने?

    पत्थर पर चढ़ाए गए प्रसाद को अपनी जीभ से चाटते हैं इस गांव के लोग…बारिश लाने की इस परंपरा के बारे में सुना है आपने?

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    तेलंगाना में कमजोर मानसून और सूखे जैसे हालात के बीच गांव ने सदियों पुरानी परंपरा को फिर से जीवित किया है. महबूबाबाद जिले के गुंडमराजुपल्ली गांव के लोगों ने अच्छी बारिश की कामना के लिए करीब 20 साल बाद ‘वरदापाशम’ नाम की अनोखी धार्मिक रस्म निभाई. इस परंपरा में गांव के बच्चे, महिलाएं और पुरुष एक बड़े पत्थर पर चढ़ाए गए प्रसाद को अपनी जीभ से चाटते हैं. ग्रामीणों का मानना है कि ऐसा करने से वर्षा के देवता प्रसन्न होते हैं और अच्छी बारिश होती है.

    20 साल बाद दोबारा निभाई गई परंपरा
    महबूबाबाद जिले के चिन्नागुडूर मंडल के गुंडमराजुपल्ली गांव में यह परंपरा तब निभाई जाती है, जब लंबे समय तक बारिश नहीं होती. ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले करीब 20 सालों से इस रस्म की जरूरत नहीं पड़ी थी, क्योंकि हर साल पर्याप्त बारिश हो जाती थी. लेकिन इस बार मानसून कमजोर रहने और फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ने के बाद गांव वालों ने फिर से इस प्राचीन परंपरा का सहारा लिया.

    पहले देवी की पूजा, फिर पत्थर पर चढ़ाया प्रसाद
    इस अनोखी रस्म की शुरुआत गांव के तालाब के पास स्थित कट्टा मैसम्मा देवी की विशेष पूजा-अर्चना से हुई. इसके बाद गांव वालों ने चावल, गुड़ और दूध से एक मीठा प्रसाद तैयार किया. इस प्रसाद को एक बड़े पवित्र पत्थर पर फैलाया गया. फिर गांव के पुरुष, महिलाएं और बच्चे बिना हाथ लगाए केवल अपनी जीभ से उस प्रसाद को चाटते हैं. ग्रामीणों का मानना है कि यह प्रकृति, धरती माता और वर्षा के देवता भगवान वरुण के प्रति श्रद्धा और विनम्रता प्रकट करने का प्रतीक है.

    पीढ़ियों से चली आ रही है मान्यता
    गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है. इसे केवल तब किया जाता है, जब गांव में लंबे समय तक बारिश नहीं होती और सूखे जैसी स्थिति बन जाती है. इस बार गांव के कई युवाओं ने पहली बार इस अनोखी रस्म को अपनी आंखों से देखा. उनके लिए यह सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपने गांव की सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का भी अवसर बना.

    गांव में आज भी जीवित हैं पारंपरिक रीति-रिवाज
    ग्रामीणों ने बताया कि ‘वरदापाशम’ के अलावा गांव में ‘वनभोजनालु’ की भी परंपरा है. इसमें अलग-अलग समुदाय जंगल में सामूहिक भोज का आयोजन करते हैं. यह आयोजन सामाजिक एकता और पारंपरिक संस्कृति को मजबूत करने का माध्यम माना जाता है.