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  • बारिश शुरू होते ही क्यों स्लो हो जाता है आपका Internet? Wi-Fi से 5G तक पर पड़ता है असर, जानें बचने का तरीका..

    बारिश शुरू होते ही क्यों स्लो हो जाता है आपका Internet? Wi-Fi से 5G तक पर पड़ता है असर, जानें बचने का तरीका..

    बारिश शुरू होते ही क्यों स्लो हो जाता है आपका Internet? Wi-Fi से 5G तक पर पड़ता है असर, जानें बचने का तरीका..

    मानसून का मौसम जहां एक ओर चिलचिलाती गर्मी से राहत दिलाता है, तो वहीं दूसरी तरफ कई बार यह आपके इंटरनेट और WiFi नेटवर्क की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा देता है. बारिश के मौसम में कई बार जब तेज बरसात होती है, तो स्मार्टफोन से लेकर ब्रॉडबैंड की इंटरनेट स्पीड अचानक कम हो जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बादलों के बरसते ही आपका इंटरनेट अचानक सुस्त क्यों हो जाता है?

    टेक्नोलॉजी की दुनिया में इस समस्या को रेन फेड कहते हैं. आइए जानते हैं इस समस्या के पीछे क्या कारण होता है और इससे बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए.

    बारिश में इंटरनेट स्लो होने के कारण

    रेन फेड
    वाई-फाई, सैटेलाइट और मोबाइल नेटवर्क रेडियो तरंगों के जरिए काम करते हैं. जब हवा में बारिश की बूंदें होती हैं, तो वे इन तरंगों के रास्ते में बाधा बनती हैं. पानी की बूंदें सिग्नल को सोख लेती हैं और उन्हें फैला देती हैं, जिससे सिग्नल कमजोर होने लगता है.

    वहीं 5G और वाई-फाई सिग्नल काफी हाई फ्रीक्वेंसी पर काम करते हैं. ये सिग्नल बहुत तेज स्पीड तो देते हैं, लेकिन बारिश और नमी के संपर्क में आते ही सबसे जल्दी प्रभावित होते हैं.

    भारी बारिश के कारण अंडरग्राउंड या बाहरी केबलों में पानी घुसने का भी खतरा बना रहता है. तारों में नमी आने से न सिर्फ स्पीड स्लो होती है, बल्कि नेटवर्क में बार-बार रुकावट भी आने लगती है.

    तेज आंधी-तूफान और बारिश के कारण इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के बाहरी डिवाइसों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे पूरे इलाके का नेटवर्क प्रभावित हो जाता है.

    कौन-सा कनेक्शन है बारिश में बेस्ट?

    फाइबर ऑप्टिक
    बारिश के मौसम में फाइबर इंटरनेट सबसे ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है. इसमें डेटा रेडियो वेव की जगह लाइट सिग्नल के जरिए केबल से यात्रा करता है, जिस पर बारिश या हवा का कोई असर नहीं पड़ता.

    5G और 4G मोबाइल डेटा
    बारिश के दिनों में मोबाइल डेटा की स्पीड में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. 5G की फ्रीक्वेंसी ज्यादा होने के कारण यह बारिश से जल्दी प्रभावित होता है.

    सैटेलाइट इंटरनेट
    खराब मौसम में सैटेलाइट कनेक्शन सबसे ज्यादा कमजोर साबित होते हैं, क्योंकि बादलों और बारिश के बीच से सिग्नल आने-जाने में भारी रुकावट होती है.

    बारिश के मौसम में स्लो इंटरनेट की समस्या को कैसे ठीक करें?

    अगर बारिश के दौरान आपका वाई-फाई ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो आप कुछ आसान टिप्स की मदद से इंटरनेट स्पीड को तेज कर सकते हैं-

    5GHz बैंड पर स्विच करें
    अगर आपका राउटर डुअल-बैंड है, तो अपने डिवाइस को 2.4GHz की जगह 5GHz बैंड से कनेक्ट करें. यह कम भीड़भाड़ वाला बैंड है और बेहतर स्पीड देता है.

    राउटर को रीस्टार्ट करें
    किसी भी तकनीकी गिल्च या अस्थाई सिग्नल समस्या को दूर करने के लिए अपने मोडेम और राउटर को कुछ सेकेंड के लिए बंद करके फिर से ऑन करें.

    राउटर की जगह बदलें
    राउटर को किसी ऊंची जगह पर रखें. इसे मोटी दीवारों, धातु की चीजों और बंद कोनों से दूर रखें जिससे सिग्नल घर में सही तरीके से फैल सके.

    गैर-जरूरी डिवाइसेज को हटाएं
    नेटवर्क पर लोड कम करने के लिए उन फोन, टीवी या गैजेट्स का वाई-फाई बंद कर दें जिनका आप उस समय इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.

    वाई-फाई एक्सटेंडर
    अगर घर के किसी हिस्से में सिग्नल कमजोर आ रहा है, तो सिग्नल रेंज बढ़ाने के लिए एक्सटेंडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

  • फिल्मों में ताजमहल बिकता था, प्रयागराज में तो पूरा पहाड़ ही बेच दिया… जानिए कैसे हुआ करोड़ों की सरकारी जमीन का खेल..

    फिल्मों में ताजमहल बिकता था, प्रयागराज में तो पूरा पहाड़ ही बेच दिया… जानिए कैसे हुआ करोड़ों की सरकारी जमीन का खेल..

    फिल्मों में ताजमहल बिकता था, प्रयागराज में तो पूरा पहाड़ ही बेच दिया… जानिए कैसे हुआ करोड़ों की सरकारी जमीन का खेल..
    • सरकारी रिकॉर्ड में कैसे हुई हेराफेरी?

    • ‘पहाड़’ की जमीन इतनी खास क्यों होती है?

    बॉलीवुड फिल्मों में आपने कई बार सुना होगा कि जालसाजों ने ताजमहल, लाल किला तक बेच दिया. ऐसी बातें पर्दे पर मजेदार लगती हैं, लेकिन प्रयागराज में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हकीकत और फिल्मों के बीच की दूरी कम कर दी. यहां भू-माफियाओं ने राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी ‘पहाड़’ के नाम दर्ज करोड़ों रुपये की जमीन को पहले अपने नाम कराया और फिर उसे बेच भी दिया. मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस दोनों हरकत में आ गए हैं.

    क्या है पूरा मामला?
    यह मामला प्रयागराज की बारा तहसील के गोल्हैया गांव का है. यहां आराजी संख्या-1 की करीब 83 बीघा 19 बिस्वा (लगभग 19.16 हेक्टेयर) जमीन राजस्व रिकॉर्ड में ‘पहाड़’ यानी सार्वजनिक सरकारी भूमि के रूप में दर्ज थी. आरोप है कि कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर इस सरकारी जमीन को अपने नाम दर्ज करा लिया. इसके बाद जमीन की खरीद-फरोख्त भी शुरू कर दी गई.

    सरकारी रिकॉर्ड में कैसे हुई हेराफेरी?
    जमीन किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि सरकारी खाते में दर्ज थी. लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर राजस्व अभिलेखों में बदलाव कर खुद को जमीन का मालिक दिखा दिया. जब रिकॉर्ड में नाम दर्ज हो गए, तो उसी आधार पर जमीन की रजिस्ट्री और बिक्री भी होती रही. यानी कागजों पर सरकारी पहाड़ निजी संपत्ति बन गया.

    मामला सामने कैसे आया?
    प्रशासन को जमीन में गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद जांच शुरू हुई. जांच में पाया गया कि जमीन को गलत तरीके से निजी खातों में दर्ज कराया गया था.इसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी फर्जी नाम निरस्त कर दिए और जमीन को दोबारा सरकारी खाते में दर्ज कर दिया.

    कितने लोगों पर केस दर्ज हुआ?
    लेखपाल प्राची सिंह परिहार की शिकायत पर लालापुर थाने में 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. इनमें पूर्व खाताधारक, जमीन खरीदने वाले लोग और एके ड्रीम सिटी प्राइवेट लिमिटेड नाम की निजी कंपनी के निदेशक भी शामिल हैं. पुलिस ने सभी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी संपत्ति से जुड़े गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया है.

    ‘पहाड़’ की जमीन इतनी खास क्यों होती है?
    राजस्व रिकॉर्ड में ‘पहाड़’ के रूप में दर्ज जमीन सार्वजनिक संपत्ति मानी जाती है. इसका इस्तेमाल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सार्वजनिक हित के लिए होता है. ऐसी जमीन को कोई व्यक्ति अपने नाम नहीं करा सकता और न ही उसकी खरीद-बिक्री की जा सकती है. इसलिए इस तरह की हेराफेरी को गंभीर अपराध माना जाता है.

    अब आगे क्या होगा?
    पुलिस का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है. जांच में राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण (म्यूटेशन), रजिस्ट्री, जमीन के हस्तांतरण और सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच होगी. यदि किसी सरकारी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है.

    पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
    देश के अलग-अलग राज्यों में पहले भी सरकारी जमीन, तालाब, चारागाह और ग्राम समाज की जमीन पर फर्जी तरीके से कब्जा करने या रिकॉर्ड बदलने के मामले सामने आते रहे हैं. हालांकि किसी ‘पहाड़’ को ही कागजों में निजी संपत्ति बनाकर बेचने का मामला बेहद दुर्लभ माना जा रहा है. यही वजह है कि प्रयागराज का यह मामला चर्चा में है.

  • रोबोटिक्स की जंग में अमेरिका को पछाड़ेगा चीन? क्या ड्रैगन बनेगा सिकंदर, जानिए भारत की स्थिति..

    रोबोटिक्स की जंग में अमेरिका को पछाड़ेगा चीन? क्या ड्रैगन बनेगा सिकंदर, जानिए भारत की स्थिति..

    रोबोटिक्स की जंग में अमेरिका को पछाड़ेगा चीन? क्या ड्रैगन बनेगा सिकंदर, जानिए भारत की स्थिति..

    चीन अपनी टेक ताकत और सस्ती मैन्युफैक्चरिंग के दम पर ह्यूमनॉइड रोबोट्स यानी इंसानों जैसे दिखने और काम करने वाले रोबोट्स के ग्लोबल हब बनने की अंधी दौड़ में शामिल हो चुका है. फैक्ट्रियों की असेंबली लाइन से लेकर बड़े-बड़े वेयरहाउस तक चीन इन मशीनी इंसानों को असल दुनिया के कामों में उतार रहा है. इसी बूम के बीच चीन की दिग्गज रोबोटिक्स कंपनी Unitree अब IPO की रेस में है. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि आखिर चीन रोबोट्स पर इतना बड़ा दांव क्यों लगा रहा है? क्या वो अमेरिका की टेस्ला जैसी कंपनियों को पछाड़कर रोबोटिक्स का दुनिया में किंग बनने की कोशिश कर रहा है? और क्या ये रोबोट्स सच में हमारी फैक्ट्रियों और आम जिंदगी में एंट्री करने के बहुत ही करीब आ चुके हैं?

    चीन की रोबोटिक्स कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स ह्यूमनॉइड रोबोट की रेस में एक बड़ा नाम बनकर उभर रही है. भले ही चीन से बाहर लोग इस कंपनी का नाम ज्यादा न जानते हों, लेकिन इसके रोबोट्स के वीडियो इंटरनेट पर छाए हुए हैं. सुपरह्यूमन जैसे स्टंट और बैकफ्लिप करते यूनिट्री के रोबोट्स को करोड़ों लोग देख चुके हैं. अब यूनिट्री रोबोटिक्स एक बड़ा फाइनेंसियल कदम उठाने जा रही है. अब ये कंपनी शंघाई स्टॉक एक्सचेंज में अपना IPO लाने की तैयारी में है. द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, गुरुवार को यूनिट्री ने अपने शेयरों की कीमत लगभग 22 डॉलर प्रति शेयर तय की है, जिससे वह करीब 900 मिलियन डॉलर जुटाने की योजना बना रही है.

    9 अरब डॉलर की वैल्यूएशन

    इस डील के साथ ही यूनिट्री रोबोटिक्स की वैल्यूएशन करीब 9 अरब डॉलर पहुंच जाएगी. हालांकि, टेक जगत के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह टेक्नोलॉजी सच में एक बड़े बिजनेस में बदल सकती है? भले ही यूनिट्री के रोबोट तेजी से बेहतर हो रहे हैं, लेकिन क्या आने वाले समय में आम लोग और कंपनियां लाखों की संख्या में ये रोबोट खरीदेंगी, यह अभी साफ नहीं है.

    रिसर्च फर्म Omdia के एक्सपर्ट्स लियान जी सू के मुताबिक, यूनिट्री का यह स्टॉक सेल पूरे रोबोटिक्स सेक्टर के लिए एक बड़ा टेस्ट साबित होगा. इससे यह समझ आएगा कि शेयर मार्केट ह्यूमनॉइड रोबोट्स जैसे उभरते और शुरुआती टेक सेक्टर को किस नजरिए से देखता है.

    फिजिकल AI का बढ़ता मार्केट

    रोबोट्स को इंसानों, सामानों, कमरों और डेली के कामों को समझने के लिए असल दुनिया में सीखना पड़ता है. इस टेक्नोलॉजी को एम्बॉडीड एआई या फिजिकल एआई कहा जाता है.

    इन्वेस्टमेंट रिसर्च फर्म CLSA की हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोट मार्केट साल 2030 तक 69 अरब डॉलर का हो सकता है, जो इस साल मात्र 2 अरब डॉलर के करीब है.

    बढ़ती टक्कर और घटता मुनाफा

    2026 के पहले क्वाटर में कड़ी टक्कर और कम मांग के कारण यूनिट्री की ग्रोथ थोड़ी धीमी रही. बढ़ती टक्कर और रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर ज्यादा खर्च करने की वजह से पहली तिमाही में कंपनी का मुनाफा 55% तक कम हो गया.

    चीन बनाम अमेरिका: रोबोटिक्स की जंग

    यूनिट्री की यह लिस्टिंग इसलिए खास है क्योंकि यह चीन के मेनलैंड स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने वाली पहली ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स कंपनी है.

    चीन रोबोट्स के मास प्रोडक्शन में काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है:

    Omdia के अनुमान के अनुसार, चीनी निर्माताओं ने इस साल की पहली छमाही में करीब 18,500 ह्यूमनॉइड रोबोट बेचे.

    वहीं इस पीरियड में अमेरिकी कंपनियों ने सिर्फ 4,000 रोबोट शिप किए.

    अगर चीन इसी रफ्तार से कम लागत में रोबोट बनाता रहा, तो वह अमेरिकी कंपनियों के मास प्रोडक्शन में पहुंचने से पहले ही एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग बेस तैयार कर लेगा. लेकिन, अमेरिका की टेस्ला, Figure AI, एजिलिटी रोबोटिक्स जैसी कंपनियां बड़ा निवेश कर रही हैं. वहीं Nvidia फिजिकल एआई के लिए जरूरी चिप्स और एआई सिस्टम का नेतृत्व कर रही है.

    चीन ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स में इतना भारी निवेश क्यों कर रहा है?

    चीन रोबोटिक्स सेक्टर में दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनना चाहता है. ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोट मार्केट 2026 में करीब 2 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 69 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है, जैसा पहले बताया गया है. चीन चाहता है कि अमेरिका के बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन शुरू करने से पहले पहले वह कम लागत और तेज स्पीड में रोबोट बनाकर दुनिया के बाजार पर बढ़त बना ले.

    यूनिट्री दूसरे चीनी रोबोटिक्स कंपनियों से अलग क्यों है?

    यूनिट्री चीन के शेयर मार्केट में लिस्ट होने वाली पहली ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स कंपनी रेस में है. इसके रोबोट्स के वायरल स्टंट्स इंटरनेट पर काफी चर्चा का विषय बने हैं. इसके साथ ही बीते साल 2025 में यूनिट्री ने दुनिया में सबसे ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट्स बेचे, इसका रेवेन्यू 4 गुना बढ़कर 250 मिलियन डॉलर पहुंचा और यह एक प्रॉफिटेबल यानी लाभ कमाने वाली कंपनी बन गई है.

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    फैक्ट्रियों और दूसरे बिजनेस में ह्यूमनॉइड रोबोट्स बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने के कितने करीब हैं?

    रोबोट्स का हुनर और AI तेजी से सुधर रहा है, लेकिन बड़े पैमाने पर इनका इस्तेमाल होने में अभी समय लग सकता है. हालांकि चीन ने 2026 की पहली छमाही में 18,500 रोबोट्स की डिलीवरी की है, लेकिन कंपनियां और दूसरे कस्टमर्स इन्हें महंगे दामों में खरीदने और रोजाना के काम में इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं या नहीं, यह टेस्ट होना बाकी है.

    क्या चीनी कंपनियां अमेरिकी फर्मों को पीछे कर सकती हैं?

    चीन के पास प्रोडक्शन की तेजी और सस्ती मैन्युफैक्चरिंग जैसी शक्ति है. इसका उदाहरण है कि साल 2026 के पहले 6 महीनों में चीन ने 18,500 रोबोट बनाए, वहीं अमेरिका ने सिर्फ 4,000. लेकिन अमेरिका के पास बेहतर AI और एडवांस्ड चिप्स की ताकत है. अगर चीन इसी रफ्तार से प्रोडक्शन बढ़ाता रहा, तो वह मैन्युफैक्चरिंग में अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है, लेकिन एआई और सॉफ्टवेयर में अमेरिका अभी भी कड़ी टक्कर दे रहा है.

    ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स की दौड़ में भारत कहां खड़ा है?

    ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स की रेस में भारत फिलहाल उभरते हुए फेस में है. अमेरिका और चीन जैसे देश एडवांस फिजिकल AI, हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग और बड़े पैमाने पर फंडिंग के कारण इस सेक्टर में आगे हैं.  हालांकि, भारत सॉफ्टवेयर टैलेंट, स्पेस टेक्नोलॉजी और सर्विस रोबोटिक्स में तेजी से कदम बढ़ा रहा है.  
    इस सेक्टर में भारत ने ISRO के गगनयान मिशन के लिए AI-संचालित हाफ-ह्यूमनॉइड रोबोट व्योममित्र तैयार किया है, जो गगनयान के अनक्रू टेस्ट मिशनों में हिस्सा लेगा. भारत के पास विश्वस्तरीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और AI रिसर्चर्स का नेटवर्क है, जो Embodied AI तैयार करने में मदद करेगा.

    भारत का लक्ष्य तुरंत पश्चिमी या चीनी कंपनियों से सीधे एडवांस दो पैरों वाले इंडस्ट्रियल ह्यूमनॉइड्स में टक्कर लेने के जगत पर अपने स्पेशल तकनीक वाले रोबोट तैयार करना है. IndiaAI मिशन, PLI योजनाओं और IITs में R&D हब्स के विस्तार के साथ भारत इस अंतर को तेजी से छोटा कर रहा है.

  • लोगों से कहा पति घर छोड़कर चला गया, बच्चों को भेजा मौसी के घर, और फिर प्रेमी संग मिलकर की पति की हत्या, 11 महीने बाद खुला राज..

    लोगों से कहा पति घर छोड़कर चला गया, बच्चों को भेजा मौसी के घर, और फिर प्रेमी संग मिलकर की पति की हत्या, 11 महीने बाद खुला राज..

    लोगों से कहा पति घर छोड़कर चला गया, बच्चों को भेजा मौसी के घर, और फिर प्रेमी संग मिलकर की पति की हत्या, 11 महीने बाद खुला राज..

    नवी मुंबई के ऐरोली स्थित यादव नगर में करीब 11 महीने पहले हुई एक सनसनीखेज हत्या का राबले एमआईडीसी पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि दोनों ने मिलकर पति की हत्या की, शव के टुकड़े किए और सबूत मिटाने के लिए उन्हें जंगल में अलग-अलग जगह फेंक दिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुनीता कुशवाहा (40) और दशरथ प्रजापति (30) के रूप में हुई है. स्थानीय अदालत ने दोनों को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

    प्रेम संबंध का विरोध बना हत्या की वजह
    पुलिस जांच के अनुसार, मृतक बलिराम सूर्यनाथ कुशवाहा (50) अपनी पत्नी सुनीता और राहुल के कथित प्रेम संबंध का विरोध करता था. इसी कारण दोनों ने उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची. वारदात से पहले की रात दंपति के दोनों बच्चों को उनकी मौसी के घर भेज दिया गया ताकि हत्या के समय वे घर में मौजूद न रहें.

    सोते समय गला घोंटा, फिर सिर धड़ से अलग किया
    जांच में सामने आया कि बलिराम की पहले सोते समय गला घोंटकर हत्या की गई. इसके बाद तेज धारदार हथियार से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया गया. पहचान छिपाने और सबूत मिटाने के इरादे से शव के तीन टुकड़े किए गए. आरोपियों ने शव के हिस्सों को अलग-अलग बोरियों और चादरों में लपेटा और राहुल के ऑटो रिक्शा से गावली देव पहाड़ी के जंगल में तीन अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया.

    लोगों से कहा- पति घर छोड़कर चला गया
    हत्या के बाद सुनीता अपने बच्चों को लेकर घंसोली चली गई और राहुल के साथ रहने लगी. पड़ोसियों और परिचितों को बताया गया कि बलिराम घर छोड़कर कहीं चला गया है. इस कहानी के चलते कई महीनों तक किसी को हत्या की भनक नहीं लगी.


  • Gen Z की डिक्शनरी के दिमाग घुमा देने वाले 60 शब्द और उनका मतलब समझें…

    Gen Z की डिक्शनरी के दिमाग घुमा देने वाले 60 शब्द और उनका मतलब समझें…

    Gen Z की डिक्शनरी के दिमाग घुमा देने वाले 60 शब्द और उनका मतलब समझें…
    • दुनियाभर में जेन-जी अपनी ताकत का लोहा मनवा रही है
    • इसके साथ उनके कई खास शब्‍द भी पॉपुलर हो रहे हैं
    • Rizz, Delulu, Gyat…ये Gen-Z के बोलचाल के शब्द हैं
    • हर साल 12 अगस्‍त को इंटरनेशनल यूथ डे मनाया जाता है
    • इस मौके पर जानिए जेन-जी की डिक्‍शनरी के 60 शब्‍द और उनके मायने

    अगर आपको कोई CEO कहे तो इसका सीधा का मतलब समझेंगे कि वो आपको चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कह रहा है. अगर कोई आपके लिए G.O.A.T. शब्द का इस्तेमाल करे तो शायब आप भी इसका मतलब बकरी समझेंगे. लेकिन Gen-Z की भाषा में इनका यह मतलब नहीं है. इनकी भाषा में अगर आपको किसी चीज का CEO बताया जाता है तो इसका मतलब है कि आप उस क्षेत्र में माहिर है. वहीं, G.O.A.T. द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम का शॉर्ट फॉर्म है. इसका इस्तेमाल किसी अविश्वसनीय इंसान के बारे में बताने में किया जाता है. आज Gen-Z की डिक्शनरी की चर्चा इसलिए क्योंकि हर साल 12 अगस्त को दुनियाभर में इंटरनेशनल यूथ डे मनाया जाता है.

    दुनियाभर में जेन-जी अपनी ताकत का लोहा मनवा रही है. सरकार पर सवाल खड़ा कर रही है. अपनी आवाज बुलंद कर रही है. आइए इंटरनेशनल यूथ डे के बहाने जानें जेन-जी की डिक्शनरी के 60 खास शब्द और उनका मतलब.

    1. Glow Up:
      इसका अर्थ है बुरे से अच्छे में चीजों का बदलना.
    2. CEO:
      अगर आप किसी चीज के सीईओ हैं, तो इसका मतलब है कि आपने उसमें महारत हासिल कर ली है, या आप उस क्षेत्र में माहिर हैं.
    3. Fam:
      ‘फैम’ परिवार का शॉर्ट फॉर्म है, लेकिन इसका इस्तेमाल दोस्तों के लिए किया जाता है. या जिस तरह से मिलेनियल्स “ब्रो” का इस्तेमाल करते हैं, उस तरह से किया जा सकता है.
    4. Cancel Culture:
      कैंसल कल्चर किसी बड़ी हस्ती, कंपनी या संगठन के कामों या विचारों को शर्मिंदा करने का एक रूप है.
    5. स्टैन:
      यह स्टेनली का शॉर्ट फॉर्म नहीं है. यह “स्टॉकर” और “फैन” का कॉम्बिनेशन है. अगर आप किसी को ‘स्टैन’ कहते हैं, तो इसका मतलब है कि आप उसके प्रति जुनूनी हैं.
    6. E-boy or E-girl:
      ये ऐसे यंगस्टर्स होते हैं जो एक खास “एस्थेटिक” फॉलो करते हैं जिसमें एनीमे, गोथ, पंक, स्केटर और K-pop कल्चर का मिक्स दिखता है.
    7. W:
      ज्यादातर लोगों के लिए यह सिर्फ वर्णमाला का एक अक्षर है, लेकिन जेन-जी के लिए इसका सीधा सा मतलब है विन यानी “जीत”.
    8. Dank:
      अगर कोई चीज डैंक है, तो वह हाई क्वालिटी वाली चीज है.
    9. Ghosting: रिश्ते की शुरुआती बातचीत के दौरान यह शब्द आम है. घोस्टिंग का मतलब है कि आप उन्हें नजरअंदाज करना शुरू कर देते हैं या उनके संदेशों का जवाब देना बंद कर देते हैं.
    10. Salty:
      Gen Z इस शब्द का इस्तेमाल तब करते हैं जब उन्हें जलन महसूस होती है।
    11. Finna:
      फिन्ना, “मैं जा रहा हूं” कहने का एक संक्षिप्त रूप है.
    12. Big Yikes:
      इस मुहावरे में बोलचाल की भाषा अपने आप में सब कुछ बयां करती है. ‘बिग यिक्स’ का इस्तेमाल तब किया जाता है जब आप इतने शर्मिंदा हों कि ‘यिक्स’ शब्द उसे पूरी तरह से व्यक्त न कर पाए.
    13. Boujee:
      इस शब्द का प्रयोग तब किया जा सकता है जब आप किसी ऐसी चीज या व्यक्ति को बयां कर रहे हों जो असाधारण या दिखावटी हो.
    14. Cap:
      कैप एक पुराना लेकिन आज भी प्रासंगिक शब्द है, जिसका अर्थ है झूठ बोलना. यदि आप “नो कैप” कहते हैं, तो इसका मतलब है कि आप सच्चे हैं.
    15. High-Key:
      हाई-की होना लो-की होने का ठीक विपरीत है.
    16. Cheugy:
      जो चीज भद्दी होती है और बिल्कुल भी चलन में नहीं होती.
    17. Simp:
      कोई ऐसा व्यक्ति जो अपने क्रश के लिए हद से ज्यादा कुछ करता है.
    18. Camp:
      कोई बहुत ओवर-द-टॉप, ड्रामैटिक फैशन आउटफिट जो जानबूझकर “बहुत एक्स्ट्रा” लगे, उसे “camp” कहा जा सकता है.
    19. Woke:
      ‘वोके’ का अर्थ है राजनीतिक रूप से जागरूक होना.
    20. TFW:
      इसका मतलब है “वह एहसास जब.” यानी जब आपको शुक्रवार को काम से जल्दी छुट्टी मिल जाती है.
    21. Snack:
      स्नैक वह व्यक्ति होता है जो आपको आकर्षक लगता है.
    22. Sip Tea:
      चाय की चुस्की लेना “गपशप फैलाने” का एक विकल्प है, जिसका अर्थ है कि आप गपशप में भाग लेने के बजाय आराम से बैठकर उसे सुन रहे हैं.
    23. L: इसका मतलब है हार.
    24. Take Several Seats:
      अगर कोई आपको वाकई परेशान कर रहा है, तो आप उनसे कह सकते हैं कि वे कुछ देर के लिए बैठ जाएं.
    25. Drip:
      स्वैग कहने का एक और तरीका है. ड्रिप कूल या सेक्सी ट्रेंड/स्टाइल के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है.
    26. Bop:
      जब कोई गाना या एल्बम असाधारण रूप से अच्छा हो.
    27. Sheesh:
      अगर कोई अच्छा दिख रहा हो या कुछ अच्छा कर रहा हो तो उसकी तारीफ करने के लिए ‘शीश’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है.
    28. Iykyk:
      यह संक्षिप्त रूप “अगर आप जानते हैं, तो आप जानते हैं” का संक्षिप्त रूप है. इसका प्रयोग आमतौर पर किसी मजाक या ऐसी बात के संदर्भ में किया जाता है जिसे केवल एक विशिष्ट समुदाय ही समझ सकता है.
    29. Living Rent-Free:
      अगर कोई चीज आपके दिमाग में “बिना किराए के रह रही है”, तो इसका मतलब है कि आप उसके बारे में सोचना बंद नहीं कर सकते.
    1. Bet:
      सरल शब्दों में कहें तो, इस बोलचाल के शब्द का अर्थ है “हां”। इसका प्रयोग किसी बात की पुष्टि करने के लिए किया जा सकता है और इसकी तुलना मिलेनियल्स के शब्द “वर्ड” से की जा सकती है.
    2. Vibe Check:
      किसी व्यक्ति की एनर्जी या सायकोलॉजी की जांच करना.
    3. Hits Different:
      जब कोई चीज अनोखी हो या सामान्य से बेहतर हो.
    4. Periodt:
      किसी कथन के अंत में इसका प्रयोग करने से कही गई बात पर जोर या तीव्रता आती है.
    5. Catch These Hands:
      झगड़ा शुरू करना. यह शब्द आम तौर पर विवादपूर्ण मामले में प्रयोग किया जाता है.
    1. Drag:
      किसी को घसीटना या उसका मजाक उड़ाना, ये सब उसकी आलोचना या उपहास करने जैसा है। इसे किसी को चिढ़ाने के बराबर माना जा सकता है।
    2. Finesse:
      का मतलब है किसी व्यक्ति या परिस्थिति को धोखा देना या हेरफेर करना ताकि आप जो चाहते हैं वह हासिल कर सकें.
    1. Im Weak:
      मैं मर गया की तरह ही, यह भी एक ऐसा ही मुहावरा है जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब आपको कोई बात बेहद मजेदार लगती है.
    2. Main Character:
      यह मुहावरा किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में बयां करने के लिए प्रयोग किया जाता है जो आमतौर पर लोकप्रिय और आकर्षक पर्सनैलिटी वाला होता है. इसका प्रयोग किसी ऐसे व्यक्ति के लिए भी किया जा सकता है जो हंगामा कर रहा हो, लेकिन जरूरी नहीं कि वह बुरे तरीके से ही हो.
    3. Sis:
      “बहन” का संक्षिप्त रूप , इस शब्द का प्रयोग आमतौर पर किसी मित्र का अभिवादन करने के लिए किया जाता है, चाहे वह पुरुष हो या महिला.
    4. Sending Me:
      अगर आपको कोई बात बेहद मजेदार लगे तो आप इस शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं.
    5. Slaps:
      किसी चीज की असाधारणता का वर्णन करने के लिए प्रयोग किया जाता है.
    6. Bussin:
      किसी स्वादिष्ट चीज का स्वाद चखने पर इस्तेमाल करने के लिए एक अनोखा शब्द.
    7. Sus:
      “सस्पिशियस” का संक्षिप्त रूप, सस का आमतौर पर मतलब होता है कि कुछ उम्मीद के मुताबिक नहीं है, या संदिग्ध है.
    8. Snatched:
      अगर कोई व्यक्ति आकर्षक दिख रहा है, तो वह वाकई में बहुत अच्छा लग रहा है, खासकर उसका पहनावा.
    9. Guap:
      पैसा, और वो भी बहुत सारा.
    10. Smol:
      कोई ऐसी चीज जो छोटी हो और ज्यादातर मामलों में बेहद प्यारी हो.
    11. This Aint It, Chief:
      किसी बात के प्रति असहमति व्यक्त करने का एक और तरीका.
    12. Extra:
      कोई ऐसा व्यक्ति जो सबसे अलग हो और चीजों को एक नए स्तर की भव्यता तक ले जाने का आनंद लेता हो.
    13. Clapback:
      किसी बात पर आलोचना होने के बाद दिया गया जवाब या पलटवार.
    14. G.O.A.T.:
      द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम का संक्षिप्त रूप है. एक ऐसा शॉर्ट फॉर्म जिसका उपयोग किसी अविश्वसनीय व्यक्ति का वर्णन करने के लिए किया जाता है.
    15. Gatekeep:
      किसी जानकारी को छिपाकर रखना या किसी प्रवृत्ति, स्थान या वस्तु को दूसरों से गुप्त रखना ताकि उसकी विशिष्टता बनी रहे.
    16. Red Flag:
      यहएक चेतावनी संकेत जो बताता है कि किसी व्यक्ति (आमतौर पर प्रेम संबंध में दिलचस्पती रखने वाले व्यक्ति) में समस्याग्रस्त लक्षण या व्यवहार मौजूद है.
    17. Situationship:
      एक ऐसा रोमांटिक रिश्ता जो दोस्ती से बढ़कर तो है , लेकिन एक निश्चित, प्रतिबद्ध रिश्ते से कम है.
    18. Delulu:
      भ्रमित का संक्षिप्त रूप. इसका प्रयोग अक्सर हास्यपूर्ण ढंग से अवास्तविक आशाओं या कल्पनाओं से चिपके रहने का वर्णन करने के लिए किया जाता है (जैसे, भ्रमित होना ही एकमात्र तरीका है या भ्रमित होना ही जीने का एकमात्र तरीका है).
    19. Pick Me:
      एक ऐसा व्यक्ति जो किसी विशिष्ट समूह (आमतौर पर विपरीत लिंग) से मान्यता या स्वीकृति पाने के लिए बेताब रहता है और ऐसा व्यवहार करता है जैसे वह “अन्य लड़कियों/लड़कों जैसा नहीं है”.
    20. Touch Grass:
      यह एक ऐसा वाक्यांश है जिसका इस्तेमाल किसी को इंटरनेट से दूर रहने और वास्तविक दुनिया से फिर से जुड़ने के लिए कहने के लिए किया जाता है, आमतौर पर इसलिए क्योंकि वे अलग तरह से व्यवहार कर रहे होते हैं या ऑनलाइन ड्रामा के प्रति जुनूनी होते हैं.
    21. Era:
      जीवन में एक ऐसे समय को बताना करना जो किसी विशिष्ट लक्ष्य, सौंदर्यबोध या माहौल द्वारा परिभाषित हो (उदाहरण के लिए, “मैं अपने स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के दौर में हूं”)
    22. Ick:
      किसी ऐसे व्यक्ति के प्रति अचानक घृणा या अरुचि की भावना, जिसके प्रति आप पहले आकर्षित थे, अक्सर किसी छोटी सी आदत या क्रिया के कारण उत्पन्न होती है.
    23. Its Giving:
      किसी चीज़ के माहौल या खूबसूरती का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला यह शब्द है.
    24. Real:
      किसी दूसरे व्यक्ति की बात से पूरी तरह सहमति या समर्थन व्यक्त करने का एक संक्षिप्त तरीका, जिसका अर्थ है “मैं समझता हूं और मैं भी ऐसा ही महसूस करता हूंं.”
  • घर में चोरी और खुद बेहोश होने का किया नाटक, प्रेमी संग भागने की थी प्लानिंग! पुलिस ने ऐसे पकड़ा झूठ..​​​​

    घर में चोरी और खुद बेहोश होने का किया नाटक, प्रेमी संग भागने की थी प्लानिंग! पुलिस ने ऐसे पकड़ा झूठ..​​​​

    घर में चोरी और खुद बेहोश होने का किया नाटक, प्रेमी संग भागने की थी प्लानिंग! पुलिस ने ऐसे पकड़ा झूठ..​​​​

    उत्तर प्रदेश से रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ भागने के लिए अपने ही घर में लाखों रुपये के गहने और नकदी चोरी कराने की साजिश रच डाली. इतना ही नहीं, घटना को असली चोरी दिखाने के लिए उसने बेहोश होने का नाटक भी किया. लेकिन पुलिस की बारीकी से की गई जांच में पूरी सच्चाई सामने आ गई. पुलिस ने महिला और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर चोरी का सामान भी बरामद कर लिया है.

    पति ने दर्ज कराई थी चोरी की शिकायत
    यह मामला गोंडा जिले के खरगूपुर थाना क्षेत्र के विशुनापुर बाजार का है. पीड़ित लवकुश ने पुलिस को सूचना दी कि रात में अज्ञात चोर उनके घर में घुस आए. चोर सोने-चांदी के आभूषण, नकदी, मोबाइल और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी.

    पूछताछ में पत्नी पर हुआ शक
    जांच के दौरान पुलिस ने घर के सभी लोगों से अलग-अलग पूछताछ की. इसी दौरान लवकुश की पत्नी पूनम कसौधन की गतिविधियां संदिग्ध लगीं. महिला पुलिसकर्मियों ने जब पूनम से अलग से पूछताछ की तो वह ज्यादा देर तक अपनी कहानी पर कायम नहीं रह सकी और पूरी साजिश कबूल कर ली.

    मौसेरे भाई से था प्रेम संबंध
    पुलिस जांच में पता चला कि पूनम का अपनी मौसी के बेटे विकास कसौधन से प्रेम संबंध था. दोनों साथ भागकर नई जिंदगी शुरू करना चाहते थे. इसके लिए उन्हें पैसों की जरूरत थी. इसी वजह से दोनों ने अपने ही घर में चोरी की योजना बनाई. योजना के मुताबिक, रात में पूनम ने विकास को घर बुलाया. दोनों ने मिलकर संदूक और बक्सों में रखे सोने-चांदी के आभूषण, नकदी और मोबाइल निकाल लिए. इसके बाद कमरे का सामान बिखेर दिया ताकि मामला असली चोरी जैसा लगे. चोरी का पूरा सामान विकास अपने साथ लेकर चला गया.

    बेहोशी का ड्रामा भी नहीं आया काम
    चोरी के बाद पूनम ने खुद को पीड़ित दिखाने के लिए बेहोश होने का नाटक किया. वह घर के बेड के नीचे जाकर लेट गई. अगली सुबह उसने परिवार वालों को बताया कि कुछ अज्ञात बदमाश घर में घुसे, उसके साथ मारपीट की और चोरी करके फरार हो गए. हालांकि पुलिस को उसकी कहानी पर शुरू से ही शक था. पूछताछ और घटनास्थल की जांच में कई ऐसे सुराग मिले, जिन्होंने पूरे मामले का खुलासा कर दिया.

    50 हजार नकद और गहने बरामद
    सीओ सिटी योगेश्वर सिंह ने बताया कि चोरी का पूरा सामान विकास कसौधन के घर से बरामद कर लिया गया है. पुलिस ने दोनों आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण और 50 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं. पुलिस ने पूनम कसौधन और विकास कसौधन को गिरफ्तार कर लिया है. दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर न्यायालय भेजा जा रहा है.

  • रातभर सोने के बाद भी सुबह नहीं जाती सुस्ती, अपना लें ये आदत..

    रातभर सोने के बाद भी सुबह नहीं जाती सुस्ती, अपना लें ये आदत..

    रातभर सोने के बाद भी सुबह नहीं जाती सुस्ती, अपना लें ये आदत..

    रातभर सोने के बाद भी सुबह उठते समय थकान और सुस्ती महूसस होती है. 7 से 8 घंटे सोने के बाद भी सुबह थकान महसूस होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. जैसे खराब स्लीव क्वालिटी, तनाव, हिहाइड्रेशन, अनहेल्दी लाइफस्टाइल और शरीर में पोषण की कमी.

    आप लाइफस्टाइल में कुछ आदतों में बदलाव करके सुबह उठने के बाद खुद को फ्रेश और एनर्जेटिक महसूस कर सकते हैं.  आइए जानते हैं सुबह की थकान दूर करने के लिए क्या करना चाहिए.

    सुबह उठने के बाद थकान क्यों महसूस होती है

    रात में बार-बार नींद टूटना 
    7 से 8 घंटे सोना केवल काफी नहीं होता है, खराब स्लीप क्वालिटी की वजह से भी सुबह के समय सुस्ती महसूस होती है. 
    शरीर में आयरन, विटामिन्स की कमी 
    तनाव और चिंता 
    देर रात तक लैपटॉप या मोबाइल का इस्तेमाल करना 
    शरीर में पानी की कमी 
    सोने और जागने का अलग-अलग समय

    थकान कैसे दूर करें

    रोज एक ही समय पर सोएं और जागें 
    अच्छी नींद के लिए रोज एक ही तय समय पर सोना और उठना चाहिए. इससे शरीर का बॉडी क्लॉक बैलेंस रहता है. ऐसा करने से नींद की गुणवत्ता अच्छी होती है. रोजाना एक ही समय सोने और उठने पर सुबह के साथ सुस्ती और थकान महसूस नहीं होती है. छुट्टी के दिन भी अपने स्लीप शेड्यूल में बदलाव ना करें.

    पानी पिएं

    रातभर सोने के दौरान शरीर में पानी की कमी हो सकती है. सुबह उठते ही 1 से 2 गिलास पानी का सेवन करना चाहिए. पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है. जिस वजह से मेटाबॉलिज्म काफी एक्टिव रहता है. आप दिन की शुरुआत गुनगुने पाने से भी कर सकते हैं.

    धूप

    रोजाना 15 से 20 मिनट की हल्की धूप लें. रोजाना हल्की धूप में बैठने से शरीर को विटामिन डी मिलता है. विटामिन डी की मदद से रात को अच्छी नींद आती है.

    हल्का वर्कआउट

    सुबह उठते ही हल्का वर्कआउट कर सकते हैं जैसे योग, वॉक, ब्रीदिंग एक्सरसाइज आदि. इन एक्सरसाइज को करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है. जिससे मांसपेशियों में जकड़न कम होती है. पूरा दिन शरीर एक्टिव रहता है.

    हेल्दी ब्रेकफास्ट

    सुबह का नाश्ता नहीं छोड़ना चाहिए. नाश्ते में प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स जैसे अंडे, ओट्स, दही और फल का सेवन करना चाहिए. इससे शरीर को एनर्जी मिलती है. शरीर को सुस्ती भी कम होती है.

  • Google पर महिलाओं की ये सर्च देखकर मचा हड़कंप! 16 करोड़ बार पूछा- मर्द को बिना सबूत कैसे मारें?

    Google पर महिलाओं की ये सर्च देखकर मचा हड़कंप! 16 करोड़ बार पूछा- मर्द को बिना सबूत कैसे मारें?

    आज के डिजिटल युग में छोटी-बड़ी हर जानकारी के लिए लोग सबसे पहले गूगल की शरण लेते हैं. चाहे मौसम हो, रेसिपी हो या कोई खबर, सर्च बार में टाइप करते ही जवाब मिल जाता है. लेकिन हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला दावा तेजी से वायरल हो रहा है. इस दावे के मुताबिक साल 2025 में महिलाओं ने गूगल पर सबसे ज्यादा “मर्द को बिना सबूत कैसे मारें” जैसे शब्द सर्च किए. कहा जा रहा है कि इस वाक्य को महिलाओं ने 16 करोड़ पचास लाख से अधिक बार सर्च किया.

    पोस्ट में अक्सर एक फाइल फोटो के साथ लिखा जाता है कि महिलाएं मर्दों को मारने के तरीके ढूंढती नजर आ रही हैं. यह दावा देखकर कई लोग हैरान और चिंतित हो गए. कुछ ने इसे समाज की सोच का आईना बताया तो कुछ ने इसे पुरुष विरोधी मानसिकता से जोड़ा. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गूगल ने ऐसा कोई आंकड़ा जारी नहीं किया है.

    फेक है खबर


    गूगल हर साल “Year in Search” रिपोर्ट जारी करता है जिसमें उस साल के टॉप ट्रेंडिंग सर्च बताए जाते हैं. 2025 की रिपोर्ट में भारत में टॉप सर्च में इंडियन प्रीमियर लीग यानी IPL सबसे ऊपर रहा. उसके बाद गूगल जेमिनी, एशिया कप, आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी, प्रो कबड्डी लीग, महाकुंभ, महिला विश्व कप, ग्रोक, सैयारा और धर्मेंद्र जैसे नाम शामिल थे. महिलाओं से जुड़ी सर्च में क्रिकेटर जेमिमा रोड्रिग्ज, स्मृति मंधाना जैसी हस्तियां टॉप पर रहीं. मर्डर या हिंसा के तरीकों से जुड़ी कोई भी क्वेरी टॉप लिस्ट में नहीं थी. वैश्विक स्तर पर भी चार्ली कर्क, के-पॉप, लैबुबू, आईफोन जैसे विषय छाए रहे. इस वायरल दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है. गूगल अपनी सर्च वॉल्यूम के सटीक आंकड़े इस तरह सार्वजनिक नहीं करता कि कोई विशेष वाक्य कितनी बार सर्च हुआ. गूगल ट्रेंड्स सिर्फ सापेक्ष रुचि दिखाता है, पूर्ण संख्या नहीं. इसलिए 16 करोड़ का आंकड़ा पूरी तरह निराधार है.

    फैक्ट चेक में सामने आई सच्चाई


    ब्राजील सहित कई देशों में “महिला को बिना निशान मारे कैसे” जैसे समान दावे पहले भी वायरल हुए थे. उन्हें फैक्ट-चेकर्स और खुद गूगल ने खारिज कर दिया था. उन मामलों में भी कहा गया था कि आंकड़े कंपनी के डेटा पर आधारित नहीं हैं. सोशल मीडिया पर ऐसे दावे फैलने की कई वजहें हैं. सबसे बड़ी वजह है क्लिक और इंगेजमेंट की होड़. चौंकाने वाले, डरावने या विवादित शीर्षक ज्यादा लाइक, शेयर और कमेंट पाते है. एल्गोरिदम ऐसे कंटेंट को आगे बढ़ाता है. कई बार बिना स्रोत के स्क्रीनशॉट या पोस्ट बनाकर फैला दिए जाते हैं. लोग उन्हें सच मानकर आगे शेयर कर देते हैं. कभी-कभी यह जेन्डर वॉर को भड़काने के लिए भी किया जाता है. एक तरफ महिला सुरक्षा और हिंसा के आंकड़े चर्चा में रहते हैं तो दूसरी तरफ पुरुषों के खिलाफ झूठे आरोपों की बातें भी उठती हैं. ऐसे में संतुलित और सत्यापित जानकारी की कमी और बढ़ जाती है.

  • क्या इंसान के दिमाग की भी होती है स्टोरेज लिमिट? जानिए कितनी जानकारी संभाल सकता है हमारा मस्तिष्क..

    क्या इंसान के दिमाग की भी होती है स्टोरेज लिमिट? जानिए कितनी जानकारी संभाल सकता है हमारा मस्तिष्क..

    क्या इंसान के दिमाग की भी होती है स्टोरेज लिमिट? जानिए कितनी जानकारी संभाल सकता है हमारा मस्तिष्क..

    नई दिल्ली: क्या आपने कभी सोचा है कि इंसान का दिमाग आखिर कितनी जानकारी याद रख सकता है? जिस तरह मोबाइल और कंप्यूटर की स्टोरेज की एक सीमा होती है, क्या हमारे दिमाग की भी कोई मेमोरी कैपेसिटी होती है? वैज्ञानिकों का कहना है कि मानव मस्तिष्क की क्षमता किसी भी आधुनिक कंप्यूटर से कहीं अधिक जटिल और शक्तिशाली है।

    क्या वास्तव में 2.5 पेटाबाइट होती है दिमाग की क्षमता?

    कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों और लोकप्रिय वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार, मानव मस्तिष्क की जानकारी संग्रहीत करने की क्षमता का अनुमान लगभग 2.5 पेटाबाइट (Petabyte) तक लगाया जाता है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि दिमाग को कंप्यूटर की तरह निश्चित स्टोरेज क्षमता में मापना पूरी तरह सटीक नहीं है, क्योंकि मस्तिष्क जानकारी को डिजिटल फाइलों की तरह नहीं, बल्कि न्यूरॉन्स के बीच बनने वाले जटिल नेटवर्क और संबंधों के रूप में संग्रहीत करता है।

    2.5 पेटाबाइट का मतलब कितना होता है?

    यदि इस अनुमान को समझें, तो 1 पेटाबाइट = लगभग 10 लाख (1 मिलियन) गीगाबाइट (GB) होता है। यानी 2.5 पेटाबाइट करीब 25 लाख GB के बराबर है। यह इतनी विशाल क्षमता है कि इसमें सैद्धांतिक रूप से लाखों फिल्में या विशाल डिजिटल पुस्तकालय के बराबर जानकारी समा सकती है।

    दिमाग जानकारी कैसे याद रखता है?

    मानव मस्तिष्क में अरबों न्यूरॉन्स (Neurons) होते हैं, जो आपस में ट्रिलियनों कनेक्शन (Synapses) बनाते हैं। नई जानकारी सीखने पर इन कनेक्शनों की मजबूती और संरचना बदलती है। यही प्रक्रिया हमारी यादों और सीखने की क्षमता का आधार बनती है। जिन चीजों का हम बार-बार अभ्यास करते हैं, वे अधिक मजबूत यादों के रूप में सुरक्षित हो जाती हैं।

    फिर हम कई बातें क्यों भूल जाते हैं?

    विशेषज्ञों के अनुसार, भूलने का कारण आमतौर पर दिमाग की स्टोरेज खत्म होना नहीं होता। कई बार जानकारी को दोबारा याद (Recall) करने में कठिनाई होती है, या समय, तनाव, नींद की कमी, बढ़ती उम्र अथवा कुछ बीमारियों के कारण याददाश्त प्रभावित हो सकती है।

    क्या दिमाग की मेमोरी कभी फुल हो जाती है?

    अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार, ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि इंसान का दिमाग मोबाइल या कंप्यूटर की तरह “फुल” हो जाता है। उम्र बढ़ने या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से याददाश्त कमजोर हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मस्तिष्क की स्टोरेज क्षमता समाप्त हो गई है। मानव मस्तिष्क लगातार नई जानकारी सीखने और पुराने अनुभवों के आधार पर खुद को बदलने की अद्भुत क्षमता रखता है।

  • QR कोड स्कैन करते ही पैसे पहुंचे दूसरे खाते में? वायरल वीडियो का सच जानकर रह जाएंगे हैरान,,

    QR कोड स्कैन करते ही पैसे पहुंचे दूसरे खाते में? वायरल वीडियो का सच जानकर रह जाएंगे हैरान,,

    QR कोड स्कैन करते ही पैसे पहुंचे दूसरे खाते में? वायरल वीडियो का सच जानकर रह जाएंगे हैरान,,

    ऑनलाइन पेमेंट के इस दौर में एक वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है। वीडियो में एक युवक ऐसा कारनामा करता दिखाई देता है, जिसे देखकर पहली नजर में कोई भी हैरान रह जाए।

    वीडियो में दिखाया गया है कि युवक सबसे पहले अपने बैंक खाते से जुड़ा QR कोड कई कॉपी में प्रिंट कराता है। इसके बाद वह अलग-अलग दुकानों पर ग्राहक बनकर पहुंचता है। मौका मिलते ही दुकानदार के असली QR कोड के ऊपर अपना QR कोड चिपका देता है। इसके बाद जब दूसरे ग्राहक पेमेंट करते हैं, तो पैसा कथित तौर पर दुकानदार की बजाय उसके खाते में पहुंचने लगता है।

    वीडियो के अंत में युवक घर पहुंचता है और उसके मोबाइल पर लगातार ऑनलाइन पेमेंट के नोटिफिकेशन आने लगते हैं। कुछ मैसेज 2 हजार रुपये के होते हैं, तो कुछ में 1 लाख रुपये तक की रकम दिखाई जाती है। वीडियो में ऐसा दिखाने की कोशिश की गई है कि उसने कुछ ही घंटों में लाखों रुपये कमा लिए।

    हालांकि, इस वीडियो की सच्चाई कुछ और ही नजर आती है। यह कंटेंट मनोरंजन और सोशल मीडिया एंटरटेनमेंट के उद्देश्य से बनाया गया प्रतीत होता है। वास्तविक जीवन में अधिकांश ग्राहक ऑनलाइन भुगतान करने से पहले स्क्रीन पर दिखाई देने वाले प्राप्तकर्ता (Recipient) का नाम जरूर जांचते हैं। बड़ी रकम का भुगतान करते समय नाम की पुष्टि करना आम बात है, जिससे ऐसी धोखाधड़ी का तुरंत पता चल सकता है।

    यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने भी इस वीडियो पर सवाल उठाए हैं। किसी ने इसे पूरी तरह फर्जी बताया, तो किसी ने लिखा कि पेमेंट से पहले नाम देखना जरूरी होता है। वहीं कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में भी प्रतिक्रिया दी।

    यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो चुका है और करोड़ों बार देखा जा चुका है। लेकिन इसे किसी वास्तविक घटना की बजाय मनोरंजन के रूप में ही देखा जाना चाहिए। साथ ही ऑनलाइन भुगतान करते समय हमेशा QR कोड और प्राप्तकर्ता का नाम ध्यान से जांचना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।