जब आप रेलवे प्लेटफार्म पर जल्दी पहुंच जाते हैं, तो देखा होगा कि प्लेटफार्म पर खड़ी ट्रेनों के खिड़की दरवाजे लॉक रहते हैं? क्या आपने सोचा आखिर ऐसा क्यों? दरअसल, इंडियन रेलवे ने ट्रेनों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए ये बड़ा कदम उठाया है। रेलवे बोर्ड की ओर से सभी जोनल रेलवे को निर्देश दिया गया है कि यार्ड या प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेनों के कोचों के दरवाजे और खिड़ियां लॉक की जाएं। साथ ही रखरखाव या स्टेबलिंग के दौरान कोचों की नियमित जांच भी सुनिश्चित की जाए। सुरक्षा से जुड़ी कुछ घटनाओं के सामने आने के बाद रेलवे ने इस तरह का फैसला लिया। यहां जानते हैं इस बारे में विस्तार से-
2025 में ही जारी किए गए थे निर्देश
रेलवे बोर्ड ने 10 जुलाई 2025 को जारी एक आदेश में सभी जोनल रेलवे को कोचों की सुरक्षा व्यवस्था और सख्त करने के निर्देश दिए हैं। बोर्ड ने कहा है कि पहले भी कोचों को यार्ड और प्लेटफॉर्म पर खड़ा करने के दौरान ताला लगाने और रेलवे सुरक्षा बल (RPF), मैकेनिकल और ऑपरेटिंग स्टाफ द्वारा संयुक्त जांच के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ मामलों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होने की शिकायतें मिली हैं।
टर्मिनल पहुंचे ही लॉक हो जाते हैं खिड़की और दरवाजे
रेलवे के दिशा-निर्देशानुसार, ट्रेन के टर्मिनल स्टेशन पहुंचते ही कोचों के दरवाजे और खिड़कियों को लॉक करने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। यार्ड में खड़े सभी कोचों पर सही तरीके से ताला लगाया जाएगा, ताकि किसी भी अनधिकृत व्यक्ति की आवाजाही रोकी जा सके।
रेलवे बोर्ड ने यह भी कहा है कि मेंटेनेंस या सर्विसिंग पूरी होने के बाद यार्ड में खड़ी रेक को नियमित रूप से लॉक किया जाए। इस प्रक्रिया को RPF और मैकेनिकल स्टाफ संयुक्त रूप से प्रमाणित करेंगे। जहां मैकेनिकल स्टाफ उपलब्ध नहीं होगा, वहां यह जिम्मेदारी ऑपरेटिंग स्टाफ निभाएगा।
इसके अलावा यार्ड में तैनात सुपरवाइजर और इंस्पेक्टर नियमित जांच करेंगे। अधिकारियों को भी समय-समय पर औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन हो सके। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे से इन निर्देशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।
क्या होगा फायदा?
यार्ड में खड़ी ट्रेनों में अनधिकृत प्रवेश रोका जा सकेगा। यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े जोखिम कम होंगे। कोचों में चोरी, तोड़फोड़ और संदिग्ध गतिविधियों पर रोक लगेगी। RPF और रेलवे कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ेगी.
अभिनेता राजपाल यादव पिछले कई वर्षों से पैसों के लेन-देन से जुड़े कानूनी मामलों को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर उनके नाम से कई चेक वायरल होने और अलग-अलग लोगों द्वारा पैसे वापस न करने के आरोप लगाए जाने के बाद अब अभिनेता ने इस पूरे मामले पर खुलकर बात की है।
एक खास बातचीत में राजपाल यादव ने बताया कि पिछले करीब 25 वर्षों में उनके ऊपर कुल मिलाकर लगभग 25-30 करोड़ रुपये की देनदारी रह गई है। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय यह रकम करीब 50 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी, लेकिन समय के साथ उन्होंने कई मामलों का निपटारा किया।
’25-30 करोड़ रुपये अभी बाकी हैं’
जब राजपाल यादव से पूछा गया कि पिछले 25 वर्षों में उनका कितना पैसा बकाया रह गया है, तो उन्होंने कहा कि कई लोगों के साथ उनका लेन-देन रहा है। कुछ लोगों का भुगतान उन्होंने कर दिया, जबकि कुछ मामले अभी बाकी हैं।
उन्होंने बताया कि फिलहाल करीब 25-30 करोड़ रुपये की देनदारी बाकी है। राजपाल के मुताबिक, इसमें कोर्ट में चल रहे मामले भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले 15-20 वर्षों में एक समय उनकी देनदारी करीब 50 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी, लेकिन धीरे-धीरे कई मामलों का निपटारा होता गया।
‘मैं डूबा नहीं हूं, उलझा हुआ हूं’
राजपाल यादव ने अपनी स्थिति को लेकर एक खास बात कही। उन्होंने कहा कि वह पिछले कई वर्षों से यही कहते आए हैं कि ‘मैं उलझा हुआ हूं, डूबा हुआ नहीं हूं।’
उनका कहना है कि उनके पास संपत्ति और काम दोनों हैं, लेकिन कई कानूनी और आर्थिक मामलों के चलते वह लंबे समय से परेशानियों में उलझे हुए हैं।
उन्होंने हाल में उनकी शाहजहांपुर की संपत्ति की नीलामी की खबर का जिक्र करते हुए कहा कि कम से कम इससे लोगों को यह तो पता चला कि उनके पास संपत्ति है और वह पूरी तरह से डूबे हुए नहीं हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे चेक पर क्या बोले?
राजपाल यादव ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उनके नाम के चेक को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर किसी को चेक दिया गया है या कोई एग्रीमेंट हुआ है तो यह इस बात का संकेत है कि लेन-देन दस्तावेजों के साथ हुआ है।
उन्होंने कहा कि जिंदगी में बड़ा काम करने के दौरान आर्थिक उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। उनके मुताबिक, उन्होंने कई लोगों से पैसे लिए भी हैं और कई लोगों को पैसे दिए भी हैं। कई लेन-देन पूरे हुए, जबकि कुछ अभी बाकी हैं।
‘जिसने मदद की, उसका धन्यवाद’
राजपाल यादव से जब पूछा गया कि मुश्किल वक्त में कई कलाकारों ने उनकी आर्थिक मदद की और सोशल मीडिया पर 70-80 करोड़ रुपये मिलने की बातें सामने आई थीं, तो उन्होंने इसका सीधा आंकड़ा बताने के बजाय कहा कि जिन लोगों ने मदद की, वह उनके आभारी हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों और युवाओं तक कई लोगों ने उनका साथ दिया। इसी मदद ने उन्हें मुश्किल दौर में हौसला दिया।
राजपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि मदद का सही इस्तेमाल किया गया है और यह मदद वापस भी की जाएगी।
‘पैसों का लेन-देन जिंदगी का हिस्सा है’
राजपाल यादव ने कहा कि आज के दौर में बिजनेस और जिंदगी में पैसों का लेन-देन आम बात है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि छोटे कारोबार से लेकर बड़ी कंपनियों, बैंकों और रियल एस्टेट तक हर जगह आर्थिक लेन-देन होता है।
उनके मुताबिक, परेशानी तब होती है जब किसी कारोबार या प्रोजेक्ट में पैसा फंस जाता है। ऐसे मामलों में भुगतान करने में समय लग सकता है।
30-35 मुकदमों का सामना करने का दावा
राजपाल यादव ने बताया कि पिछले करीब 15 वर्षों में उन्हें अलग-अलग जगहों पर करीब 30-35 मुकदमों का सामना करना पड़ा। इनमें कुछ मामले उनकी पत्नी से जुड़े होने की बात भी उन्होंने कही।
उन्होंने कहा कि मुश्किलें धीरे-धीरे कम होती गईं और कई मामलों का समाधान भी हुआ।
राजपाल यादव की बातों से साफ है कि…
उनके मुताबिक वर्तमान में करीब 25-30 करोड़ रुपये की देनदारी बाकी है।
एक समय यह रकम करीब 50 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।
पिछले वर्षों में उन्होंने कई मामलों का निपटारा किया।
सोशल मीडिया पर वायरल चेक और नए मामलों को लेकर उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की।
उनका कहना है कि वह आर्थिक रूप से डूबे नहीं हैं, बल्कि कानूनी और वित्तीय मामलों में उलझे हुए हैं।
मुश्किल वक्त में मिली आर्थिक मदद के लिए उन्होंने लोगों का आभार जताया और कहा कि मदद वापस की जाएगी।
अक्सर लोगों को लगता है कि पुराने घरों को नया जैसा नहीं बनाया जा सकता है। क्योंकि पहले के समय में बने घरों के डिजाइन आज के मॉडर्न डिजाइन से काफी अलग होते हैं। अक्सर लोग पुराने घर को तोड़कर नया घर बनवाने की सोचते हैं या किसी दूसरे घर में शिफ्ट होने का विचार करते हैं। लेकिन कुछ ऐसे तरीके हैं, जिनकी मदद से आप अपने पुराने घर को भी बिना तोड़फोड़ किए अंदर से नया जैसा बना सकते हैं। आइए जानते हैं किस तरह पुराने घर को नया जैसा सजाया जा सकता है।
1- दीवारों को दें नया लुक
आप अपने पुराने घर को नया जैसा लुक देने के लिए सबसे आसान तरीकों में से एक दीवारों के रंग में बदलाव कर सकते हैं। अगर घर छोटा या कम रोशनी वाला है तो क्रीम, ऑफ-व्हाइट, हल्का बेज या हल्का पीला जैसा रंग चुनें। इससे कमरा खुला और रोशन दिखाई देता है। आप चाहें तो आमने-सामने की दो दीवारों पर अलग-अलग रंग का पेंट करवा सकते हैं, इससे कमरा थोड़ा आकर्षक लगता है।
2- दरवाजे और खिड़कियों को दें नया रंग
आप जिन पुराने दरवाजों और खिड़कियों को बदलने की सोच रहे हैं वही आपके घर की खूबसूरती बढ़ाने में मदद कर सकते हैं और आपकी पुरानी वस्तु वैसे की वैसे बनी रहेगी। अगर दरवाजे और खिड़कियां खराब नहीं हैं तो इन पर आप मैट फिनिश या प्राकृतिक लकड़ी की पॉलिश करवाकर क्लासिक लुक दे सकते हैं।
3- फर्श का नया लुक कैसे दें
अगर आपके घर का फर्श काफी पुराना हो चुका है तो उसे तोड़कर नया बनवाने के बजाय कुछ हिस्सों में विनाइल फ्लोरिंग, लैमिनेट या नए टाइल्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर पुरानी टाइलें खराब नहीं हुई हैं तो आप उनकी सफाई कर, ग्राउट की मरम्मत कर एक खूबसूरत कालीन या दरी बिछाकर फर्श की रूपरेखा बदल सकते हैं।
4- लाइटिंग से घर को बनाएं आकर्षक
आप अपने पुराने जमाने के घर को क्लासिक लुक देने के लिए लाइटिंग का काम करवा सकते हैं। किसी भी कमरे या जगह को खूबसूरत बनाने में बेहतर लाइटिंग अहम भूमिका निभा सकती है। आप सोफे के पास फ्लोर लैंप, साइड टेबल पर टेबल लैंप, दीवार पर वॉल लाइट और तस्वीरों या सजावटी वस्तुओं के लिए सॉफ्ट लाइट लगा सकते हैं। इससे घर आकर्षक लगता है और लुक काफी हद तक बदल जाता है। पीली या वॉर्म लाइट पुराने लकड़ी के फर्नीचर और दीवारों के साथ अच्छी लग सकती है।
5- फर्नीचर को नया कैसे बनाएं
अगर आपके घर में पुरानी कुर्सी, मेज, सोफा या अलमारी है तो, इनमें थोड़े बदलाव करके विंटेज लुक दिया जा सकता है। अगर ये चीजें ज्यादा खराब नहीं हुई हैं, तो इनका लुक आसानी से बदला जा सकता है। पुरानी लकड़ी की अलमारी और अन्य चीजों को नई पॉलिश, नए हैंडल और अंदर नए रैक लगवाकर नया लुक दिया जा सकता है। सोफे पर नया कवर और कुछ कुशन रख देने से भी लुक बदल सकता है।
6- शीशे से बढ़ाएं घर की खूबसूरती
आजकल नए घरों में बड़े शीशे का चलन बढ़ गया है। यह जगह को खुला और आकर्षक बनाने में मदद करता है। आप अपने पुराने घर के किसी कमरे की दीवार पर एक बड़े आकार का शीशा लगवा सकते हैं। शीशे को और आकर्षक बनाने के लिए उसके किनारे वॉर्म लाइट लगवा सकते हैं। आप अपने पुराने घर के लिए लकड़ी के फ्रेम वाला बड़ा शीशा चुन सकते हैं।
7- तस्वीरों का कमाल
घर की किसी दीवार को आप गैलरी वॉल के रूप में बदल सकते हैं। इसमें परिवार की तस्वीरों के साथ पेंटिंग, किसी लोक कला की तस्वीर, पुराने शहरों की तस्वीरों और ब्लैक एंड व्हाइट फोटोग्राफ से पूरे कमरे का लुक बदल सकते हैं।
इस तरह आप कम बजट में भी बिना तोड़फोड़ किए अपने पुराने घर को आधुनिक और आकर्षक लुक दे सकते हैं।
अक्सर कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि अनजान व्यक्ति से बात करने, अपनी बातों को स्पष्टता से रखने, नौकरी के लिए इंटरव्यू देने के दौरान घबरा जाते हैं। कई बार सही बात पता होने के बावजूद उसे स्पष्ट तरीके से कह नहीं पाते, बातचीत के दौरान घबराहट होने लगती है। यहां तक कि सामने वाले की बात भी ठीक से सुन नहीं पाते। ऐसे लोगों में कम्युनिकेशन स्किल कमजोर हो सकती है। साफ बोलना, ध्यान से सुनना, सही सवाल पूछना और अपनी बात को आत्मविश्वास से रखना बेहतर कम्युनिकेशन स्किल का हिस्सा है।
अगर आप भी इस तरह बात करने में झिझक महसूस करते हैं या अपने आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं तो अपनी कम्युनिकेशन स्किल को सुधारने के लिए कुछ तरीके अपना सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे अपनी कम्युनिकेशन स्किल बेहतर करें:
1- ध्यान से सुनें बात
अक्सर ऐसा होता है कि जब कोई हमसे बात कर रहा होता है, तो हम उसकी बात सुनने की बजाय मन ही मन अपने जवाब के बारे में सोचने लगते हैं। लेकिन अच्छा कम्युनिकेटर सिर्फ अच्छा बोलता नहीं, बल्कि अच्छा श्रोता भी होता है। बातचीत के दौरान पहले से अपना जवाब सोचने के बजाए सामने वाली की बात पूरी होने दें और उसे ध्यान से सुनें। बीच में इधर-उधर देखना, फोन देखना या बार-बार बीच में बोलना सामने वाले को यह महसूस करा सकता है कि आप उसकी बातों में रुचि नहीं रख रहे हैं। वहीं, जवाब देने से पहले कुछ सेकंड रुकें। रुककर सोचने के बाद दिया गया जवाब अक्सर जल्दबाजी में दिए गए जवाब से कहीं बेहतर होता है।
2- सरल और स्पष्ट बात करें
अक्सर लोगों के साथ ऐसा होता है कि जिस मुद्दे पर बात कर रहे हैं उसे बहुत घुमा फिरा कर रखते हैं। लेकिन अच्छी कम्युनिकेशन का मतलब अपनी बात को सरल और स्पष्ट तरीके से रखना होता है। आपकी बात जितनी सरल और स्पष्ट होगी उसे समझने में उतनी ही आसानी होगी। जितना जरूरी हो उतना ही बताएं।
3- बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान दें
बातचीत के दौरान शब्द जितना प्रभाव डालते हैं, उतना ही काम बॉडी लैंग्वेज यानी शारीरिक हाव-भाव का भी होता है। जब कोई आपसे बात करे तो उस दौरान बार-बार फोन देखने, घड़ी और इधर-उधर देखने से सामने वाले को संदेश जाता है कि आपका ध्यान उसकी बात में नहीं है। जरूरी नहीं है कि आप सामने वाले की आंखों में देखकर बात करें, लेकिन इस दौरान पूरी तरह मौजूद और ध्यान से सुनने वाला व्यक्ति बनना बहुत फर्क पैदा करता है।
4- ओपन-एंडेड सवाल पूछें
ओपन-एंडेड सवाल का मतलब कि ऐसे सवाल पूछें जिनका जवाब केवल ‘हां’ या ‘नहीं’ में न दिया जा सके। इससे बातचीत जल्दी खत्म हो सकती है। अगर आप सच में यह समझना चाहते हैं कि सामने वाला क्या सोच रहा है, खासकर काम से जुड़ी किसी मुश्किल बातचीत में, तो ऐसे सवाल पूछें जिनका जवाब थोड़ा विस्तार से देना पड़े।
5- बोलने का तरीका
किसी भी सवाल का जवाब देने से पहले अपने आत्मविश्वास को मजबूत करें। क्योंकि, घबराहट होने पर लोग अक्सर तेजी से बोलने लगते हैं। इससे शब्द अस्पष्ट हो सकते हैं और आपकी बात का प्रभाव भी कम हो सकता है। अगर आप शांत और आत्मविश्वासी दिखना चाहते हैं, तो बोलने की गति थोड़ी धीमी रखें। साथ ही अंत तक अपनी आवाज को स्थिर और स्पष्ट रखें। जो बात आप कह रहे हैं, उसे आत्मविश्वास के साथ कहें।
6- जवाब देने से पहले सवाल समझें
चाहे नौकरी के लिए इंटरव्यू हो या किसी और को जवाब देना हो, लेकिन जवाब देने से पहले सवाल को समझना जरूरी है। अगर सवाल स्पष्ट न हो तो दोबारा पूछ सकते हैं। घबराहट दिखाने के बजाए सावधानी और समझदारी से जवाब दें। इससे आप अपनी बात को स्पष्ट रूप से रख पाएंगे।
7- कहने का अभ्यास करें
केवल पढ़ने से कम्युनिकेशन स्किल बेहतर नहीं होती। इसके लिए नियमित अभ्यास भी जरूरी है। अपनी कम्युनिकेशन स्किल को बेहतर करने के लिए हर दिन किसी विषय पर 2-5 मिनट अपनी बात बोलकर अभ्यास कर सकते हैं। मोबाइल में अपनी आवाज रिकॉर्ड करके उसे सुनें और देखें कि आप बहुत तेज तो नहीं बोल रहे, बार-बार कोई शब्द तो नहीं दोहरा रहे या बात को अनावश्यक रूप से लंबा तो नहीं कर रहे।
बॉलीवुड एक्टर सुरेश ओबेरॉय जो खुद साल 2004 में बीजेपी में शामिल हुए थे, उन्होंने अब उसी पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने राजनीतिक पार्टी के प्रति अपनी निराशा जताई है और अपने खुद के राजनीतिक सफर के अनुभव को साझा किया है। उनका कहना है कि उन्हें समझ आ गया है कि वो राजनीति के लिए नहीं बने हैं। उन्होंने पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी में ज्यादातर लोग सिर्फ पैसा बना रहे हैं, वो भी झूठ बोलकर।
सुरेश ओबेरॉय क्यों हुए थे बीजेपी में शामिल
80 और 90 के दशक के पॉपुलर बॉलीवुड स्टार सुरेश ओबेरॉय ने हाल ही में निधि वसनदानी के साथ एक पॉडकास्ट किया जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने बीजेपी क्यों ज्वाइन की थी। सुरेश ओबेरॉय बताते हैं कि वह एक कॉलेज फ्रैंड के कहने पर बीजेपी में शामिल हुए थे।
अभिनेता ने बताया कि हैदराबाद में कॉलेज के दिनों का उनका एक दोस्त एक दिन उनके घर आया और उन्हें BJP में शामिल होने के लिए कहा। दोस्त के कहने पर वह उसके साथ पार्टी में चले गए। उन्होंने 2004 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले BJP की सदस्यता ली थी और इसके बाद पार्टी के लिए चुनाव प्रचार भी किया था।
जब गुरू से पड़ी थी राजनीति के लिए डांट
सुरेश ओबेरॉय ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी से उनके जुड़ाव का कारण लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे वरिष्ठ नेता थे। एक्टर ने कहा कि आडवाणी जी और अटल जी ने मुझे माला पहनाई, लेकिन इसके बाद जब मैं अपने गुरू से मिला तो उन्होंने मुझे डांटा। वो मुझे बहुत प्यार करते थे तो उन्होंने मुझे सावधान रहने को कहा और बोले कि इन लोगों से संपर्क मत रखो। उन्होंने इस तरह किसी को नहीं डांटा था लेकिन उन्होंने मुझे सच में बहुत डांटा।
बीजेपी में ज्यादातर लोग पैसा कमा रहे हैं
सुरेश ओबेरॉय ने कहा कि वो समाजसेवा में काफी रुचि रखते हैं, इसी वजह से उन्होंने जवसेवा की सोच से पार्टी ज्वाइन की थी लेकिन वहां के अनुभव से उन्हें काफी निराशा मिली। एक्टर ने बात खत्म करते हुए कहा कि उन्हें लगता था कि राजनीति का मतलब देश के लिए कुछ करना है।
“बाद में मुझे एहसास हुआ कि ज्यादातर लोग पैसा कमा रहे थे। झूठ बोलकर और पैसा बना रहे थे। दो-चार लोगों को छोड़कर- जैसे मोदी जी, उनके आस पास के एक दो बड़े नेता और योगी जी को छोड़कर। मैं उनकी बात नहीं कर रहा हूं लेकिन उनके अलावा ज्यादातर लोग पैसे बना रहे हैं।” सुरेश ओबेरॉय ने कहा
राजनीति से खुश नहीं थे एक्टर सुरेश ओबेरॉय
साथ ही एक्टर ने बताया कि अपने गुरू की चेतावनी के बाद भी वह राजनेताओं के संपर्क में रहे लेकिन उन्हें अंदर से खुशी नहीं मिलती थी। वो राजनीतिक माहौल में असहज महसूस करते थे। उन्होंने कहा कि “मैं अंदर से खुश नहीं था। मुझे अच्छी एनर्जी नहीं मिली।”
एक्टर ने कहा, “मोदी जी और अमित शाह तो ठीक थे लेकिन वहां कई और ऐसे नेता थे जो मुझे अजीब लगे। कुछ बनावटी सा लगा। फिल्मों में, आप एक फिल्म पर काम करते हो और फिर आगे बढ़ जाते हो लेकिन यहां ऐसा नहीं था। आपको चीजों को लेकर साथ चलना पड़ता है, उसका हिस्सा बनना होता है, मैं वो हिस्सा नहीं बन सका।”
Vastu Tips for Kitchen:
वास्तु और हिंदू घरेलू परंपराओं में रसोई को अन्न, अग्नि और शुद्धता का स्थान माना गया है। इतना ही नहीं इस स्थान पर भोजन बनता है जो पूरे परिवार के लोग खाते हैं। भारतीय परंपरा के अनुसार घर में मौजूद किचन को हद्य माना जाता है, क्योंकि ये परिवार के सेहत, सुख-शांति, ऊर्जा पर असर डालता है। इसलिए किचन को हमेशा साफ-सुथरा रखने के साथ-साथ कुछ चीजों का ध्यान रखना बेहद जरूर है। मनुस्मृति 4.65 में टूटे बर्तन में भोजन न करने की बात कही गई है। इसके अलावा कुछ और चीजों को किचन में रखने की मनाही होती है, क्योंकि इसके कारण नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है। आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन में किन चीजों को रखने की मनाही होती है…
टूटी-फूटी बर्तन
वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन में बिल्कुल भी ऐसे बर्तन रखें, जो टूटे-फूटे, दरार आदि पड़ी हो। ऐसे बर्तन नकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं। इसके साथ ही घर में दरिद्रता और कलह फैला सकते हैं। परिवार के सदस्यों के बीच खटास बनी रहती हैं। इसलिए ऐसे बर्तनों को घर से तुरंत हटा दें।
जंग लगे औजार
किचन में इस्तेमाल होने वाले चाकू, कैंची या अन्य लोहे से बनी चीजों में अगर जंग लग गई है या फिर टूट-फूट गया है, तो उसे तुरंत हटा दें या फिर अच्छे से साफ कर लें। वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसी चीजें घर में होने से नकारात्मक ऊर्जा में बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में घर में लड़ाई-झगड़े के साथ-साथ सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।
दवाइयां
आधुनिक वास्तु शास्त्र में मान्यता है कि किचन में दवाइयां नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि ये अग्नि और अन्न का स्थान है। वहीं दवाएं रोग-निवारण से संबंधित हैं। हालांकि, इसे प्राचीन धर्मशास्त्रों का स्पष्ट नियम नहीं माना जा सकता।
झाड़ू और सफाई का सामान
आधुनिक वास्तु या घरेलू परंपरा के अनुसार किचन में झाड़ू या फिर सफाई से संबंधित चीजों को नहीं रखना चाहिए। एक तरफ को ये स्वच्छता की दृष्टि से बेहतर नहीं है। इसके अलावा इसे किचन में रखने से नकारात्मकता में बढ़ोतरी हो सकती है। रसोई घर को सबसे ज्यादा पवित्र स्थान माना जाता है। जबकि झाड़ू को गंदगी से संबंधित माना जाता है। इसलिए इसे किचन में रखने से बरकत कम होती हैं और धन का नाश हो सकता है। इसके अलावा सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।
पितरों की तस्वीर
घर की किचन में कभी भी पितरों की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से घर-परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इसके साथ ही धन संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
किचन को पॉजिटिव बनाए रखने के आसान उपाय:
किचन में हमेशा साफ रखें। समय-समय पर डिब्बों की भी सफाई करते रहें। रोजाना पूजा के समय किचन में धूपबत्ती जलाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा हटेगी। किचन को हल्का और रोशन रखें ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे। किचन में कभी भी चूल्हे के पास पानी से संबंधित चीजें न रखें।
गोविंदा और सुनीता आहूजा का रिश्ता लंबे समय से चर्चा में बना हुआ है। हाल ही में सुनीता को उनके बेटे यशवर्धन के साथ फैमिली कोर्ट के बाहर देखा गया। जिसके बाद गोविंदा के मैनेजर ने जानकारी दी सुनीता ने तलाक की अर्जी वापस ले ली है। इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि हर परिवार में मतभेद होते हैं। अगर तलाक की अर्जी वापस लेनी थी तो ये तमाशा क्यों किया गया।
मीडिया से बात करते हुए गोविंदा के मैनेजर ने सुनीता द्वारा तलाक की अर्जी वापस लिए जाने पर खुशी जताई। मगर साथ ही ये भी सवाल उठाये कि इस मुद्दे को इतना बढ़ाया क्यों गया?
गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने कहा कि कपल के बीच ये विवाद लगभग डेढ़ से दो साल से चल रहा है। इसके कारण दोनों की छवि को भी नुकसान पहुंचा है। उनका कहना है कि किसी भी रिश्ते में विवाद होना आम बात है लेकिन अगर मामला अदालत तक पहुंच जाए तो ये पब्लिक हो जाता है।
इसके अलावा शशि सिन्हा ने कहा कि इस मामले को लेकर अदालत तक नहीं जाना चाहिए था। इस मामले को घर में बात करके खत्म किया जा सकता था। बैठकर बात करके बहुत सी चीजें ठीक हो सकती हैं। जब केस वापस लेना था तो किया क्यों था। उन्होंने कहा, “इस बात का मुझे दुख हो गया। काहे को फिर हम लोग तमाशा बन गए?”
शशि ने गोविंदा के बारे में बात करते हुए कहा कि उनका इस पर कोई रिएक्शन नहीं है। शशि ने कहा, “भगवान सबको सद्बुद्धि दें, सब लोग बुद्धि से चलें। बस यही अच्छा है, परिवार के अंदर कन्फ्यूजन और गलतफहमियां आपस में बैठकर सुलझाई जा सकती हैं। समस्याएं बड़ी हो सकती हैं, लेकिन उन्हें सुलझाना नामुमकिन नहीं होता।”
बता दें कि कुछ दिन पहले गोविंदा को उनकी को-एक्ट्रेस के साथ एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया था। जिसके बाद सुनीता ने पैपराजी से बात करते हुए कहा था, “एक कहावत सुनी है कभी… विनाश काले, विपरीत बुद्धि। उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। इसलिए ये सब करता है वो, क्या बोलूं।” इसके बाद गोविंदा ने भी पैपराजी से बात करते हुए कहा, “काम जो बाहर मुझे मिलता है वो मैं करता नहीं हूं और जो मैं कर रहा हूं, उसमें आप हस्तक्षेप कर रही हैं। जब आप अपना काम कर रही थीं, चाहें वो खाने का शो हो या वो लॉकडाउन हो, आपने टीना से कहकर दोनों शो में आप ऐसे-वैसे करके मुझे बुलवाया।”
इसके बाद गोविंदा ने कहा, ““मैं ये दोबारा कहूंगा कि सुनीता जी आप बहुत ज्यादा गालियां देने लगी हैं और ईश्वर से आप मनाइए कि लोग आपसे प्रेरित हो, यंगस्टर्स आपको देखकर आपको फॉलो करेंगे। कहीं आपके साथ ही लोग गालियां देने लग जाएंगे तो हम सब लज्जित हो जाएंगे।” पूरी खबर के लिए यहां क्लिक करें…
कभी-कभी किसी घटना का संयोग इतना अजीब होता है कि लोगों को यकीन करना मुश्किल हो जाता है। उत्तर प्रदेश के एक गांव से सामने आया ऐसा ही मामला इन दिनों चर्चा में है। एक युवक ने गांव के एक कार्यक्रम में नागिन की धुन पर जमकर डांस किया। अगले ही दिन उसके साथ कुछ ऐसा हुआ कि पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
दरअसल, गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान युवक ने नागिन की धुन पर खूब डांस किया था। वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने उसका वीडियो बना लिया और बाद में उसे सोशल मीडिया पर डाल दिया। वीडियो में युवक नागिन की तरह हरकतें करते हुए डांस करता नजर आ रहा था।
लेकिन अगले दिन सुबह करीब 10 बजे युवक अपने घर में बिस्तर पर आराम कर रहा था। इसी दौरान अचानक एक जहरीला सांप उसके पास पहुंच गया और उसने युवक को डस लिया। सांप के काटने के बाद युवक की हालत बिगड़ने लगी।
परिजनों ने बिना समय गंवाए उसे नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के दौरान एंटी-वेनम इंजेक्शन दिया। हालत गंभीर होने के कारण युवक को आगे के इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
गांव में फैल गई तरह-तरह की बातें
नागिन के गाने पर डांस करने और अगले दिन सांप के काटने की घटना का संयोग सामने आने के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोग इसे नाग के बदले से जोड़कर देखने लगे, तो कुछ लोगों ने इसे धार्मिक मान्यताओं से जोड़ दिया।
हालांकि ऐसी बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। सांप के काटने की घटना को महज संयोग माना जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सांप के काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या अंधविश्वास के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना और उचित चिकित्सकीय उपचार कराना बेहद जरूरी है।
फिलहाल युवक का इलाज चल रहा है। वहीं नागिन डांस का वीडियो और उसके अगले दिन हुई सांप के काटने की घटना को लेकर पूरे इलाके में चर्चा बनी हुई है। संयोग ऐसा है कि जिसने भी पूरी कहानी सुनी, वह एक पल के लिए जरूर हैरान रह गया।
साइबर क्राइम लगातार बढ़ता जा रहा है. साइबर ठगी के एक से बढ़कर एक तरीके सामने आ रहे हैं. साइबर ठगी के एक नए और बेहद खतरनाक तरीके ने देशभर में कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, सीएफओ और वित्तीय विभाग से जुड़े कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है. साइबर ठग अब WhatsApp, SMS और ई-मेल के जरिए अकाउंट स्टेटमेंट या सरकारी नियामकीय नोटिस के नाम पर ऐसी फाइलें भेज रहे हैं, जिन्हें खोलते ही कंप्यूटर और WhatsApp अकाउंट उनके नियंत्रण में जा सकता है. इस पूरे खेल को साइबर सुरक्षा एजेंसियां ‘Boss Scam’ या CEO Impersonation Fraud के तौर पर देख रही हैं.
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी I4C, गृह मंत्रालय की साइबर अपराध नियंत्रण इकाई, ने इस खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है. हाल के दिनों में दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्यों से इस तरह के एक जैसे मामलों की शिकायतें सामने आई हैं. I4C के मुताबिक National Cyber Crime Reporting Portal यानी NCRP पर इस तरह की शिकायतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है.
एक ZIP फाइल और पूरा WhatsApp अकाउंट खतरे में-
इस साइबर ठगी की शुरुआत बेहद सामान्य दिखाई देने वाले संदेश से होती है. पीड़ित को WhatsApp, SMS या ई-मेल पर ‘Statement of Account.zip’, तारीख के साथ ‘0714 Statement of Account.zip’, ‘RBI.zip’ या ‘MCA.zip’ जैसी फाइल भेजी जाती है.
कई मामलों में संदेश इस तरह तैयार किया जाता है कि वह किसी कंपनी के नियमित अकाउंट स्टेटमेंट जैसा लगे. वहीं कुछ संदेशों में RBI यानी भारतीय रिजर्व बैंक या MCA यानी कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की ओर से तत्काल अनुपालन करने का दावा किया जाता है. साइबर अपराधी जानबूझकर ऐसा माहौल बनाते हैं कि सामने वाला व्यक्ति बिना ज्यादा सोच-विचार किए फाइल खोल दे.
I4C के मुताबिक इन ZIP फाइलों के भीतर एक खतरनाक Windows executable यानी .exe फाइल और उसके साथ एक .dll फाइल होती है। जैसे ही पीड़ित इसे Windows कंप्यूटर या लैपटॉप पर extract करके खोलता है, सिस्टम में Trojan प्रकार का malware सक्रिय हो जाता है.
WhatsApp Web को बनाया जा रहा निशाना-
इस हमले की सबसे गंभीर बात यह है कि malware सिर्फ कंप्यूटर को संक्रमित करने तक सीमित नहीं रहता. यह पीड़ित के सक्रिय WhatsApp Web session को hijack कर सकता है. इसके बाद साइबर अपराधी पीड़ित के WhatsApp अकाउंट का इस्तेमाल उसी व्यक्ति के संपर्कों और ग्रुपों तक पहुंचने के लिए करते हैं.
संक्रमित WhatsApp अकाउंट से वही malicious file आगे दूसरे लोगों को भेजी जाती है. कई बार संदेश में लिखा होता है कि फाइल को कंपनी के Finance Manager से verification के लिए साझा करें और कंप्यूटर पर खोलें. इस तरह एक संक्रमित कंप्यूटर से शुरू हुआ हमला धीरे-धीरे पूरी कंपनी के नेटवर्क और कर्मचारियों तक पहुंच सकता है.
यानी जिस व्यक्ति को फाइल भेजी गई, उसके भरोसेमंद WhatsApp अकाउंट से वही फाइल आगे भेजे जाने के कारण दूसरे लोग भी इसे असली समझकर खोल सकते हैं. यही इस पूरे अभियान को बेहद खतरनाक बनाता है.
‘बॉस’ बनकर होती है पैसे की मांग-
साइबर ठगों का अंतिम लक्ष्य अक्सर वित्तीय धोखाधड़ी होता है. I4C के अनुसार इस चरण में अपराधी किसी वरिष्ठ अधिकारी या कंपनी के CEO के वास्तविक WhatsApp अकाउंट का इस्तेमाल कर सकते हैं. कुछ मामलों में हमलावर अपने नियंत्रण वाले नंबर को मोबाइल में ‘CEO’ के नाम से सेव कर देते हैं.
इसके बाद कंपनी के अकाउंट्स या फाइनेंस कर्मचारियों को बेहद जरूरी और तत्काल भुगतान करने का निर्देश दिया जाता है. संदेश में कहा जा सकता है कि किसी खाते में तुरंत रकम ट्रांसफर करनी है या किसी विशेष बैंक अकाउंट में भुगतान करना है.
कंपनी का कर्मचारी जब संदेश को अपने वरिष्ठ अधिकारी का समझकर निर्देश का पालन करता है तो रकम साइबर अपराधियों के mule bank accounts में पहुंच जाती है. इसीलिए इसे ‘Boss Scam’ कहा जा रहा है, क्योंकि अपराधी कंपनी के ‘बॉस’ या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का फायदा उठाकर कर्मचारियों को ठगी का शिकार बनाते हैं.
22 जून को I4C ने जारी किया था एडवाइजरी-
I4C ने इस उभरते खतरे को लेकर 22 जून 2026 को भी विस्तृत एडवाइजरी जारी की थी. इसका विषय “Regulatory and Executive Impersonation for WhatsApp Account Takeover using Malicious Windows Executables and High Value Financial Fraud” था.
इस एडवाइजरी में बताया गया था कि किस तरह regulatory communication और executive impersonation की आड़ में WhatsApp अकाउंट takeover और उसके बाद high-value financial fraud को अंजाम दिया जा रहा है.
हाल में दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित कई राज्यों से समान modus operandi सामने आने के बाद साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने इस खतरे को लेकर फिर से चेतावनी दी है.
DLL Sideloading से बच निकलने की कोशिश-
I4C की National Cybercrime Threat Analytics Unit यानी NCTAU की तकनीकी जांच में सामने आया है कि इस अभियान के पीछे संगठित नेटवर्क काम कर रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक ये नेटवर्क राष्ट्रीय सीमाओं के पार भी सक्रिय हो सकते हैं और अभियान में ऐसे advanced malware का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनमें propagation और detection-evasion की क्षमता है.
इस malware में DLL Sideloading जैसी तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है. इसका उद्देश्य सुरक्षा प्रणालियों की नजर से बचते हुए malware को सिस्टम में सक्रिय करना और संक्रमण को आगे बढ़ाना है.
इस मामले की जांच संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों और तकनीकी एजेंसियों के साथ समन्वय में की जा रही है.
CA, CFO और Finance टीम सबसे ज्यादा जोखिम में-
I4C ने विशेष रूप से उन लोगों को सावधान किया है जो कंपनियों के वित्तीय लेन-देन से जुड़े हैं. चूंकि malware Windows कंप्यूटरों को निशाना बनाता है और भेजी जाने वाली फाइलें अकाउंट स्टेटमेंट तथा regulatory compliance से जुड़ी होती हैं, इसलिए Chartered Accountants, Company Directors, CFOs और Finance & Accounts personnel विशेष जोखिम में हैं.
कॉरपोरेट कंपनियों को सलाह दी गई है कि वे अपने कर्मचारियों, खासकर finance teams को तत्काल इस खतरे के बारे में जागरूक करें.
सबसे महत्वपूर्ण सलाह यह है कि WhatsApp या ई-मेल पर किसी वरिष्ठ अधिकारी की ओर से आया urgent fund transfer या account-change request मिलने पर सिर्फ संदेश के आधार पर कार्रवाई न की जाए. ऐसे निर्देशों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि सीधे फोन कॉल या व्यक्तिगत रूप से बातचीत करके की जानी चाहिए.
10 हजार से ज्यादा लोगों को बचाया गया-
I4C ने इस अभियान से जुड़े malware के threat signals और technical indicators CERT-In, Microsoft Defender तथा भारतीय antivirus कंपनियों—Quick Heal, K7 Computing और Net Protector—के साथ साझा किए हैं।इसका उद्देश्य malicious files की तेजी से पहचान, blocking और removal सुनिश्चित करना है. I4C के मुताबिक इन coordinated interventions के जरिए अब तक 10,000 से अधिक भारतीयों को इस अभियान से सुरक्षित किया जा चुका है. इसके अलावा Sahyog Portal के जरिए malware को लगातार block किया जा रहा है.
58 हजार से ज्यादा संभावित पीड़ितों को SMS अलर्ट-
I4C की ओर से संभावित प्रभावित लोगों को ‘I4CMHA-G’ SMS header के जरिए अलर्ट भेजे जा रहे हैं. पिछले 30 दिनों में इस माध्यम से 58,000 से ज्यादा संभावित पीड़ितों को सूचना दी गई है. I4C ने नागरिकों से अपील की है कि अगर उन्हें ‘I4CMHA-G’ से कोई चेतावनी मिलती है तो उसे गंभीरता से लें और उसमें दिए गए सुरक्षा निर्देशों का पालन करें.
RBI या कोई regulator WhatsApp पर ZIP फाइल नहीं भेजता-
I4C ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अज्ञात या unverifed source से मिली .zip फाइल या executable को download, extract या open न करें. किसी regulatory communication के नाम पर भेजी गई फाइल को खोलने से पहले उसके स्रोत की पुष्टि जरूरी है. खास तौर पर वित्तीय और सरकारी संस्थाओं के नाम पर आने वाले ऐसे संदेशों से सावधान रहने की जरूरत है.
WhatsApp की Settings > Linked Devices में जाकर समय-समय पर यह भी जांचना चाहिए कि कौन-कौन से डिवाइस WhatsApp अकाउंट से जुड़े हुए हैं. जिन sessions की जरूरत नहीं है, उन्हें तुरंत log out करना चाहिए.
कंपनियों के सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर के लिए भी अलर्ट-
I4C ने कंपनियों के system administrators को भी जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी है. Unknown .exe और .dll files को user profile directories से execute होने से रोकने के लिए software restriction policies लागू की जानी चाहिए. साथ ही सभी Windows endpoints पर updated anti-malware solutions सुनिश्चित किए जाने चाहिए. कर्मचारियों को यह भी समझाना जरूरी है कि सिर्फ antivirus installed होना पर्याप्त नहीं है; suspicious files को खोलने से बचना सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है.
अगर WhatsApp अकाउंट हैक हो जाए तो क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति का WhatsApp अकाउंट compromised होने का संदेह है तो सबसे पहले सभी linked devices को log out करना चाहिए. इसके बाद अपने सभी contacts और WhatsApp groups को तुरंत चेतावनी दें कि उनके अकाउंट से भेजी गई किसी भी file को न खोलें. जिस Windows कंप्यूटर पर संदिग्ध ZIP या executable file खोली गई हो, उसे updated antivirus से तुरंत scan कराया जाना चाहिए. जरूरत पड़ने पर संबंधित तकनीकी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क करना चाहिए. अगर इस तरह की साइबर ठगी में आर्थिक नुकसान हुआ है या संदिग्ध communication मिला है तो तत्काल National Cyber Crime Helpline 1930 पर शिकायत करनी चाहिए या National Cyber Crime Reporting Portal के माध्यम से रिपोर्ट दर्ज करनी चाहिए.
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव-
‘Boss Scam’ की सबसे बड़ी ताकत तकनीक से ज्यादा भरोसा है. साइबर अपराधी किसी अजनबी नंबर से नहीं, बल्कि कई बार उसी WhatsApp अकाउंट से संदेश भेजते हैं, जिस पर कर्मचारी पहले से भरोसा करता है. यही वजह है कि कंपनी के भीतर cybersecurity awareness बेहद जरूरी हो गई है. अकाउंट स्टेटमेंट, RBI या MCA notice, Income Tax communication या CEO के नाम पर आया कोई भी urgent message हो, बिना स्वतंत्र पुष्टि के फाइल न खोलें और पैसे ट्रांसफर न करें. एक ZIP फाइल खोलने की छोटी-सी गलती न सिर्फ WhatsApp अकाउंट को खतरे में डाल सकती है, बल्कि पूरी कंपनी के वित्तीय नेटवर्क को साइबर अपराधियों के लिए खोल सकती है. ऐसे में I4C की चेतावनी साफ है- संदिग्ध फाइल से दूरी, हर वित्तीय निर्देश की दोहरी पुष्टि और समय रहते शिकायत ही इस नए साइबर खतरे से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है.
भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल अमृतसर का Golden Temple अपनी खूबसूरती और आध्यात्मिक महत्व के लिए दुनियाभर में जाना जाता है. इसे श्री हरमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है. हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं. मंदिर की सुनहरी चमक देखकर अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या पूरा Golden Temple असली सोने से बना है? चलिए आपको बताते हैं इसका सही जवाब…
महाराजा रणजीत सिंह ने कराई थी सोने की सजावट
Golden Temple के स्वर्णीकरण में सिख साम्राज्य के संस्थापक महाराजा रणजीत सिंह की अहम भूमिका मानी जाती है. साल 1830 के आसपास उन्होंने मंदिर के प्रमुख हिस्सों को सोने से सजाने की पहल की थी. उस समय करीब 150 से 162 किलोग्राम 24 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया गया था. उस दौर में इस सोने की कीमत करीब 65 लाख रुपये बताई जाती है. खास बात यह है कि उस समय इस्तेमाल किया गया सोना 24 कैरेट था, जो सामान्य गहने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने से ज्यादा शुद्ध होता है.
बाद में फिर चढ़ाया गया सैकड़ों किलो सोना
समय के साथ मंदिर की मरम्मत और सजावट का काम भी किया गया. साल 1995 से 1999 के बीच Golden Temple के नवीनीकरण के दौरान करीब 500 किलोग्राम अतिरिक्त 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई गई. यह सोना मंदिर के गुंबद, दरवाजों, दीवारों और अंदर की छत जैसे कई हिस्सों पर लगाया गया.
पूरा मंदिर सोने का है?
Golden Temple की पूरी इमारत सोने से नहीं बनी है. इसमें संगमरमर और तांबे का भी इस्तेमाल हुआ है. सोने की परत इसकी सुंदरता और भव्यता को बढ़ाती है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार मंदिर में कुल मिलाकर करीब 662 से 750 किलोग्राम तक 24 कैरेट सोने के इस्तेमाल का अनुमान लगाया जाता है. आज के समय में इसकी कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये हो सकती है. यही सुनहरी आभा Golden Temple को दुनिया के सबसे आकर्षक और आध्यात्मिक धार्मिक स्थलों में खास पहचान देती है.