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  • पीले पड़ चुके हैं पुराने स्विच बोर्ड? अपनाएं ये आसान घरेलू तरीके.. फिर दिखेंगे नए जैसे..?

    पीले पड़ चुके हैं पुराने स्विच बोर्ड? अपनाएं ये आसान घरेलू तरीके.. फिर दिखेंगे नए जैसे..?

    पीले पड़ चुके हैं पुराने स्विच बोर्ड? अपनाएं ये आसान घरेलू तरीके.. फिर दिखेंगे नए जैसे..?

    घर की सफाई करते समय लोग फर्श, फर्नीचर और खिड़कियों पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन स्विच बोर्ड अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं. समय के साथ इन पर धूल, उंगलियों के निशान, तेल और पीलेपन की परत जम जाती है, जिससे पूरा कमरा साफ होने के बावजूद गंदा दिखने लगता है. अच्छी बात यह है कि इन्हें चमकाने के लिए महंगे क्लीनर खरीदने की जरूरत नहीं है. घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों की मदद से ही स्विच बोर्ड को आसानी से साफ किया जा सकता है. चलिए जानते हैं कैसे…

    सफेद टूथपेस्ट से करें सफाई
    अगर स्विच बोर्ड पर हल्की गंदगी या पीलेपन की परत जम गई है, तो साधारण सफेद टूथपेस्ट सबसे आसान उपाय है. पुराने टूथब्रश पर थोड़ा-सा टूथपेस्ट लगाकर स्विच बोर्ड के किनारों और कोनों को धीरे-धीरे साफ करें. इसके बाद सूखे और साफ कपड़े से पोंछ लें. इससे स्विच बोर्ड पहले की तुलना में ज्यादा साफ और चमकदार नजर आएगा.

    नींबू और नमक हटाएंगे जिद्दी गंदगी
    अगर स्विच बोर्ड पर काफी समय से गंदगी जमी हुई है, तो नींबू और नमक का मिश्रण मददगार साबित हो सकता है. आधे कटे नींबू पर थोड़ा नमक छिड़ककर दाग वाली जगह पर हल्के हाथों से रगड़ें. नींबू का प्राकृतिक एसिड मैल को ढीला करता है, जबकि नमक हल्के स्क्रबर की तरह काम करता है. सफाई के बाद सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछ लें.

    नेल पॉलिश रिमूवर से हटाएं दाग
    स्याही के निशान या पुराने काले दाग हटाने के लिए कॉटन पर थोड़ी-सी नेल पॉलिश रिमूवर लेकर दाग वाली जगह को धीरे-धीरे साफ करें. इसमें मौजूद एसीटोन जिद्दी दाग हटाने में मदद करता है. हालांकि इसका इस्तेमाल बहुत कम मात्रा में करें और पहले किसी छिपी हुई जगह पर टेस्ट जरूर कर लें, ताकि प्लास्टिक की फिनिश खराब न हो.

    इन बातों का रखें ध्यान
    स्विच बोर्ड की सफाई शुरू करने से पहले बिजली सप्लाई बंद कर दें. हमेशा सूखे हाथों और सूखी जगह पर खड़े होकर ही सफाई करें. गीले कपड़े या ज्यादा पानी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें. किसी भी तरल पदार्थ का उपयोग करने के बाद स्विच बोर्ड पूरी तरह सूखने दें, उसके बाद ही बिजली चालू करें. साथ ही गीले हाथों या नंगे पैर कभी भी स्विच बोर्ड, प्लग या बिजली के तारों को न छुएं. इससे सफाई भी सुरक्षित रहेगी और किसी दुर्घटना का खतरा भी नहीं होगा.

  • जमीन की खुदाई में मिले 29 गोले, पुरातत्व विभाग की जांच से खुलेगा राज

    जमीन की खुदाई में मिले 29 गोले, पुरातत्व विभाग की जांच से खुलेगा राज

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    उत्तर प्रदेश के जनपद अमेठी में घर के लिए टैंक बनाने के लिए कराई जा रही जमीन की खुदाई के दौरान 29 धातु के गोले मिलने से हड़कंप मच गया. गोले मिलने की सूचना मिलते ही प्रशासन ने मौके कर पहुंचकर जमीन को बैरिकेडिंग कर पुरातत्व विभाग को सूचना देकर पूरे मामले में जांच पड़ताल शुरू कर दी है.

    जमीन की खुदाई में मिले 29 गोले-
    पूरा मामला जनपद के मुसाफिरखाना थाना क्षेत्र के भनौली गांव का है, जहां बताया जा रहा है कि घर में टैंक निर्माण के लिए जमीन की खुदाई कराई जा रही थी. इसी दौरान मजदूरों को जमीन के अंदर धातु के कई गोले दिखाई दिए. जिसके बाद जमीन की खुदाई करते हुए सभी गोलों को निकाल दिया गया. अधिकारियों ने जब इसकी गिनती की तो ये कुल 29 गोले थे.

    कितने पुराने हैं गोले? जांच के बाद पता चलेगा-
    वहीं, गोले मिलने की सूचना के बाद राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जिस स्थान पर ये धातु के गोले मिले हैं, उस जमीन की बैरिकेडिंग कराकर उसे अपने कब्जे में ले लिया. प्रशासन ने मामले की जानकारी पुरातत्व विभाग को भी दे दी है. अब पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर इन धातु के गोलों की जांच करेगी. जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि ये गोले कितने पुराने हैं और इनका ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व क्या है.

    वहीं, जमीन की खुदाई के दौरान एक साथ 29 धातु के गोले मिलने की खबर गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है. स्थानीय लोगों में भी इन गोलों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं. फिलहाल प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षित कर लिया है और पुरातत्व विभाग की जांच का इंतजार किया जा रहा है.

    प्रशासन ने काम रुकवा दिया- इकबाल
    ग्रामीण मो. इकबाल ने बताया कि हमारे घर पर एक ठेकेदार काम करवा रहे थे. उस दौरान खुदाई के समय कुछ दिखाई दिया. जिसके बाद देखा गया तो वह गोला निकला. इसके बाद कुल 29 गोले निकाले गए. जिसके बाद मौके पर पहुंची प्रशासन की टीम ने घर पर हो रहे काम को रुकवा दिया.

    वहीं, इसको लेकर उपजिलाधिकारी नितेश राज ने बताया की गांव में गड्ढा खुदाई के दौरान कुल 29 गोले मिले हैं. जिसके बाद पुरातत्व विभाग को सूचना दे दी गई है. अभी टीम पहुंची नहीं है. बाकी जांच के बाद ही पता चल पाएगा.

  • ‘साहब चले गए हैं…’, पिछले एक साल से ट्राई साइकिल के लिए ऑफिसों के चक्कर लगा रहा दिव्यांग

    ‘साहब चले गए हैं…’, पिछले एक साल से ट्राई साइकिल के लिए ऑफिसों के चक्कर लगा रहा दिव्यांग

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    उत्तर प्रदेश में एक ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जो सरकारी सिस्टम से जुड़ा है. इस वीडियो में एक दिव्यांग है, जो ट्राई साइकिल के लिए पिछले एक साल से कलेक्ट्रेट का चक्कर लगा रहा है. लेकिन अब तक उसको सिर्फ आश्वासन ही मिला है. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. ये वायरल वीडियो सरकारी सिस्टम पर एक सवाल बन गया है.

    ‘साहब चले गए गए हैं’
    इस वायरल वीडियो में दिव्यांग अपना दर्द सुना रहा है. इस दिव्यांग का मानना है कि अधिकारियों की तरफ से सिर्फ आश्वासन मिलता है. दिव्यांग का आरोप है कि हर बार ऑफिस पहुंचने पर उसे एक ही जवाब मिलता है कि “साहब चले गए हैं”.

    एक साल पहले किया था आवेदन- दिव्यांग
    ये मामला कौशांबी जिलाधिकारी अमित पाल कार्यालय के बाहर की हैं, जहां एक दिव्यांग व्यक्ति अपनी परेशानी वीडियो में बयां कर रहा है. सिराथू तहसील के निजामपुर नौगिरा निवासी दीनानाथ मिश्र का कहना है कि उसने ट्राई साइकिल के लिए करीब एक साल पहले आवेदन किया था, लेकिन अभी तक उसे ट्राई साइकिल नहीं मिल सकी.

    वायरल वीडियो में दिव्यांग दीनानाथ कहते नजर आ रहे हैं कि वह कई बार कलेक्ट्रेट आ चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ यही कहा जाता है कि अधिकारी मौजूद नहीं हैं या साहब चले गए हैं.

    8 साल पहले मिली थी ट्राई साइकिल-
    दीनानाथ का कहना है कि करीब 8 साल पहले तत्कालीन डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने उन्हें ट्राई साइकिल दी थी, जो अब खराब हो चुकी है. मजबूरी में वह नई ट्राई साइकिल के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं.

    जल्द उपलब्ध कराई जाएगी ट्राई साइकिल- प्रशासन
    इस मामले में ज़ब विकलांग कल्याण अधिकारी विकास वर्मा से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया की 13/7/2026 को इनका फॉर्म भरवा दिया गया था और 3 अगस्त को इनका शारीरिक परीक्षण करवाया गया है. जैसे ही हमें साइकिल प्राप्त होती है, इन्हें सबसे पहले उपलब्ध कराई जाएगी.

  • सुहागरात पर दुल्हन ने पति से कहा- ‘मैं किसी और की अमानत हूं…फिर पति ने जो किया वो कोई नहीं कर पाता

    सुहागरात पर दुल्हन ने पति से कहा- ‘मैं किसी और की अमानत हूं…फिर पति ने जो किया वो कोई नहीं कर पाता

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    उत्तर प्रदेश में पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है. शादी के बाद पहली ही रात दुल्हन ने अपने पति को बताया कि वह किसी और से प्यार करती है और परिवार के दबाव में उसकी शादी हुई है. उसने पति के साथ वैवाहिक जीवन बिताने से इनकार कर दिया. इसके बाद दोनों परिवारों ने आपसी बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश की. आखिरकार तीन दिन बाद युवती को उसके प्रेमी के साथ भेज दिया गया.

    25 जू. को हुई थी शादी, सुहागरात पर खुला राज
    जानकारी के अनुसार, युवक और युवती की शादी 25 जू. 2026 को परिवार की मौजूदगी में पूरे रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुई थी. शादी के बाद सुहागरात पर दुल्हन ने पति से साफ शब्दों में कहा कि वह किसी और की अमानत है. उसका कहना था कि परिवार की इच्छा के कारण उसे यह शादी करनी पड़ी और वह इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाना चाहती.

    पति ने विवाद करने के बजाय परिवार को दी पूरी जानकारी
    दुल्हन की बात सुनने के बाद पति ने कोई हंगामा या विवाद नहीं किया. उसने पूरे मामले की जानकारी अपने परिजनों और पत्नी के परिवार को दी. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत हुई. परिवारों ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन युवती अपने फैसले पर कायम रही और प्रेमी के साथ ही रहने की इच्छा जताई.

    दोनों परिवारों की सहमति से प्रेमी को बुलाया गया
    जब बातचीत से कोई समाधान नहीं निकला तो 28 जू. को दोनों परिवारों की सहमति से युवती के प्रेमी को बुलाया गया. सभी पक्षों की मौजूदगी में निर्णय लिया गया कि युवती अपनी इच्छा के अनुसार प्रेमी के साथ जाएगी. इसके बाद वह उसके साथ चली गई.

    कानूनी विवाद से बचने के लिए महिला थाने पहुंचे परिजन
    भविष्य में किसी तरह की कानूनी परेशानी से बचने के लिए दूल्हे और उसके पिता ने हापुड़ महिला थाने में लिखित शिकायत दी. शिकायत में पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई, ताकि बाद में किसी प्रकार का आरोप-प्रत्यारोप या कानूनी विवाद खड़ा न हो.

    पुलिस बोली- दोनों पक्षों की सहमति से सुलझा मामला
    महिला थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अरुणा राय के अनुसार, युवक के परिजनों की ओर से शिकायत प्राप्त हुई थी. जांच के दौरान सामने आया कि युवती विवाह के बाद पति के साथ नहीं रहना चाहती थी और किसी अन्य युवक से प्रेम करती थी. दोनों परिवारों की सहमति से मामले का शांतिपूर्ण निस्तारण करा दिया गया. फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से कोई आपराधिक आरोप नहीं लगाया गया है और मामला आपसी सहमति से समाप्त हो गया है.

  • गले में 10 फीट का किंग कोबरा लपेटकर निकलीं ‘स्नेक लेडी’, जहरीले सांप का ऐसा रेस्क्यू देख दंग रह गए लोग..

    गले में 10 फीट का किंग कोबरा लपेटकर निकलीं ‘स्नेक लेडी’, जहरीले सांप का ऐसा रेस्क्यू देख दंग रह गए लोग..

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      बिहार के बगहा स्थित वाल्मीकिनगर थाना क्षेत्र के विशाहा गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब मुन्नी लाल के घर के अंदर करीब 10 फीट लंबा जहरीला किंग कोबरा दिखाई दिया. विशालकाय सांप को देखते ही परिवार के लोग जान बचाने के लिए तुरंत घर से बाहर निकल आए. कुछ ही देर में पूरे गांव में खबर फैल गई और मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुट गई. लोग दूर खड़े होकर सांप को देखने लगे, जबकि परिवार दहशत में था.

      ‘स्नेक लेडी’ ने सुरक्षित किया रेस्क्यू
      घटना की सूचना मिलते ही वाल्मीकिनगर की प्रसिद्ध स्नेक रेस्क्यूअर जानकी देवी मौके पर पहुंचीं. इलाके में उन्हें ‘स्नेक लेडी’ के नाम से जाना जाता है. उन्होंने पूरी सावधानी और प्रशिक्षित तरीके से किंग कोबरा का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया. इसके बाद सांप को सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ दिया गया. समय रहते रेस्क्यू होने से किसी भी तरह की जनहानि या दुर्घटना नहीं हुई.

      बारिश में बढ़ जाती है सांपों की आवाजाही
      वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार के मुताबिक, बारिश और मौसम में बदलाव के दौरान जहरीले सांप अक्सर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे गांवों और रिहायशी इलाकों की ओर आ जाते हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि घर या आसपास सांप दिखाई दे तो घबराएं नहीं और न ही खुद उसे पकड़ने की कोशिश करें. इसकी सूचना तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को दें.

      दुनिया के सबसे विषैले सांपों में गिना जाता है किंग कोबरा
      किंग कोबरा दुनिया के सबसे विषैले सांपों में शामिल है. इसका न्यूरोटॉक्सिक जहर इंसान के तंत्रिका तंत्र पर तेजी से असर करता है. ऐसे सांप के काटने पर बिना समय गंवाए मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना और एंटी-वेनम उपचार शुरू करना जरूरी होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने से जान बचाई जा सकती है.

      12 साल की उम्र से कर रही हैं सांपों का रेस्क्यू
      वाल्मीकिनगर की रहने वाली जानकी देवी पिछले कई वर्षों से सांपों का रेस्क्यू कर रही हैं. उन्होंने महज 12 साल की उम्र में यह काम शुरू किया था. अब तक वह हजारों जहरीले और गैर-जहरीले सांपों को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ चुकी हैं. कई बार रेस्क्यू के दौरान उन्हें सांप ने काट भी लिया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने यह काम नहीं छोड़ा. आज वह लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण के लिए भी लगातार सक्रिय हैं.

    • पानी में गिरा डिलीवरी बॉय का मोबाइल, घंटों तलाशने पर भी नहीं मिला तो रो पड़ा, बोला- इसी फोन से चलता है घर..

      पानी में गिरा डिलीवरी बॉय का मोबाइल, घंटों तलाशने पर भी नहीं मिला तो रो पड़ा, बोला- इसी फोन से चलता है घर..

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      मुजफ्फरनगर में मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद शहर के शिव चौक पर भारी जलभराव हो गया. सड़कों पर भरे पानी के बीच एक डिलीवरी बॉय का मोबाइल फोन गिर गया. युवक घंटों तक पानी में अपना फोन तलाशता रहा. काफी कोशिश के बाद भी जब फोन नहीं मिला तो उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

      पानी में गिरा मोबाइल, घंटों तलाशता रहा युवक
      पीड़ित युवक की पहचान रामपुरी निवासी विशाल के रूप में हुई है. विशाल डिलीवरी बॉय का काम करता है और इसी से अपने परिवार का खर्च चलाता है. मंगलवार को वह खाना लेकर डिलीवरी के लिए जा रहा था. इसी दौरान शिव चौक पर जलभराव के बीच उसका मोबाइल फोन पानी में गिर गया. मोबाइल गिरते ही विशाल ने पानी में उसे तलाशना शुरू कर दिया. वह कभी पानी में हाथ डालकर फोन खोजता तो कभी सड़क किनारे खड़े होकर पानी को देखता रहा. काफी देर तक तलाश करने के बाद भी जब मोबाइल नहीं मिला तो वह रोने लगा.

      45 हजार का फोन अभी सिर्फ 3 किस्तें चुकाई थीं
      विशाल के लिए यह मोबाइल सिर्फ महंगा फोन नहीं था, बल्कि उसकी रोजी-रोटी का अहम साधन था. डिलीवरी के ऑर्डर इसी मोबाइल पर आते थे. इन्हीं ऑर्डर को पूरा करके वह कमाई करता था. जानकारी के मुताबिक, विशाल ने करीब तीन महीने पहले ही लगभग 45 हजार रुपए का मोबाइल किस्तों पर खरीदा था. अब तक वह इसकी सिर्फ तीन किस्तें जमा कर पाया है.

      फोन ढूंढते युवक का वीडियो हुआ वायरल
      विशाल को पानी में मोबाइल तलाशते देख वहां मौजूद एक व्यक्ति ने उसका वीडियो बना लिया. वीडियो में विशाल जलभराव के बीच फोन तलाशता नजर आ रहा है. काफी देर तक फोन नहीं मिलने के बाद वह परेशान होकर रोता दिखाई देता है. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों का ध्यान विशाल की परेशानी की ओर गया. जब उससे उसकी स्थिति के बारे में पूछा गया तो वह अपने आंसू नहीं रोक सका.

      नगरपालिका से आर्थिक मदद की गुहार
      विशाल ने बताया कि वह गरीब परिवार से है और डिलीवरी का काम करके घर चलाता है. मोबाइल उसके काम के लिए बेहद जरूरी है. फोन के बिना उसके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है. विशाल ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए नगरपालिका से भी मदद की गुहार लगाई है. उसका कहना है कि अगर मोबाइल वापस नहीं मिलता या उसकी भरपाई नहीं होती तो उसके लिए परिवार का खर्च चलाना और बाकी किस्तें चुकाना मुश्किल हो जाएगा.

    • खाने में मंडराती हैं मक्खियां? एक बार अपना लें ये आसान घरेलू उपाय… कभी नहीं आएंगी वापस..?

      खाने में मंडराती हैं मक्खियां? एक बार अपना लें ये आसान घरेलू उपाय… कभी नहीं आएंगी वापस..?

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      बारिश का मौसम आते ही घर में मक्खियों का आतंक बढ़ जाता है. किचन, डाइनिंग टेबल और खाने की चीजों के आसपास मंडराती मक्खियां सिर्फ परेशानी ही नहीं, बल्कि कई बीमारियों की वजह भी बन सकती हैं. अगर आप भी इनसे छुटकारा पाने के लिए केमिकल स्प्रे का इस्तेमाल करते-करते परेशान हो चुके हैं, तो कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी बड़ी समस्या को मिनटों में कम कर सकते हैं. तो चलिए आपको बताते हैं कुछ ऐसे उपायों के बारे में जिससे आपके घर से मक्खियां गायब हो जाएंगी.

      सिरका
      मक्खियां खमीर जैसी गंध की ओर जल्दी आकर्षित होती हैं. इसके लिए एक छोटे बर्तन में सेब का सिरका डालें और उसमें एक बूंद डिशवॉश लिक्विड मिला दें. अब बर्तन को प्लास्टिक रैप से ढककर उसमें छोटे-छोटे छेद कर दें. मक्खियां अंदर तो चली जाएंगी, लेकिन बाहर नहीं निकल पाएंगी.

      नींबू और लौंग
      एक नींबू को दो हिस्सों में काट लें और उसमें 6 से 10 लौंग लगा दें. इसे खिड़की, डाइनिंग टेबल या किचन काउंटर पर रखें. नींबू और लौंग की तेज खुशबू मक्खियों को दूर रखने में मदद करती है.

      तुलसी या पुदीना
      तुलसी और पुदीने की खुशबू मक्खियों को पसंद नहीं होती. इसलिए इन पौधों को घर के दरवाजों, खिड़कियों या रसोई के पास रखें. इससे मक्खियां कम आएंगी और घर का वातावरण भी ताजा बना रहेगा.

      कपूर
      कपूर की तेज गंध मक्खियों को दूर रखने में मदद करती है. इसे किसी कटोरी में रखकर या कपड़े में बांधकर खिड़कियों और दरवाजों के पास रखा जा सकता है. बरसात के मौसम में यह उपाय काफी उपयोगी माना जाता है.

      सफाई का रखें खास ध्यान
      घरेलू उपाय तभी पूरी तरह असर दिखाते हैं, जब घर की साफ-सफाई का भी ध्यान रखा जाए. खाने को हमेशा ढककर रखें. किचन की सतहों को नियमित रूप से साफ करें और डस्टबिन समय पर खाली करें. इससे मक्खियां घर की ओर कम आकर्षित होंगी और परिवार भी संक्रमण के खतरे से सुरक्षित रहेगा.

    • पाइप में पानी का प्रेशर है कम, तो प्लंबर के खर्च को कहें टाटा..

      पाइप में पानी का प्रेशर है कम, तो प्लंबर के खर्च को कहें टाटा..

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      अगर घर के नल से पानी बहुत धीरे आने लगे, तो रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में कई लोग बिना वजह तुरंत प्लंबर को बुला लेते हैं. जबकि कई बार यह परेशानी बहुत छोटी होती है और इसे कुछ आसान तरीकों से घर पर ही ठीक किया जा सकता है. इन तरीकों से आप प्लंबर पर खर्च होने वाले पैसे भी बच सकते हैं और पानी का प्रेशर भी पहले जैसा कर सकते हैं.

      एयर बैंड से मिलेगी मदद

      अगर आपके घर की पाइपलाइन पहले से लगी हुई है और उसे बदलना नहीं चाहते, तो एयर बैंड एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. इसे पाइप के मोड़ वाली जगह पर लगाया जाता है. कई मामलों में इससे पानी का बहाव बेहतर हो जाता है और नल से पानी पहले की तुलना में तेज आने लगता है. यह तरीका आसान भी है और ज्यादा खर्चीला भी नहीं होता.

      वॉटर प्रेशर बूस्टर पंप

      अगर सिर्फ एयर बैंड से काम नहीं बनता, तो वॉटर प्रेशर बूस्टर पंप का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह एक ऑटोमैटिक मशीन होती है, जिसे पानी की लाइन या ओवरहेड टैंक से जोड़ा जाता है. जैसे ही आप नल खोलते हैं, यह अपने आप चालू हो जाती है और पानी का प्रेशर बढ़ाने में मदद करती है. इससे बाथरूम, किचन और दूसरे नलों में भी पानी का बहाव बेहतर हो सकता है.

      क्यों कम होता है पानी का प्रेशर?

      पानी का प्रेशर कम होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. सबसे आम कारण पाइपलाइन में लीकेज होना है. अगर कहीं से पानी बाहर निकल रहा है, तो नल तक पूरा प्रेशर नहीं पहुंच पाता.

      इसके अलावा पाइप के अंदर मिट्टी, कचरा या दूसरी गंदगी जमा होने से भी पानी का रास्ता रुक सकता है. कई बार नल का एरेटर जाम हो जाता है, जिससे पानी कम निकलता है. वहीं अगर घर की पानी की टंकी में पानी का लेवल कम हो, तब भी नल का प्रेशर घट सकता है.

      कब बुलाएं प्लंबर को?

      अगर बार-बार पानी का प्रेशर कम हो रहा है और आसान तरीके अपनाने  के बाद भी परेशानी लगातार बनी रहती है, तो प्लंबर की मदद लेना सही रहेगा. अगर पानी की मोटर ठीक से काम कर रही है, फिर भी नल से पानी कम आ रहा है, तो पाइपलाइन की जांच जरूरी हो सकती है. इसी तरह अगर पाइप में लीकेज हो या किसी हिस्से में बड़ी खराबी हो, तो खुद ठीक करने की बजाय किसी प्लंबर को बुलाना बेहतर रहेगा.

    • बहन की शादी के लिए कर्ज, मां बीमार, टीचर की नौकरी छोड़ी… नियुक्तियां रद्द होने से सड़क पर आने वालों का दर्द

      बहन की शादी के लिए कर्ज, मां बीमार, टीचर की नौकरी छोड़ी… नियुक्तियां रद्द होने से सड़क पर आने वालों का दर्द

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      रांची में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों के प्रदर्शन के बाद झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने TDPL समेत कई दूसरी परीक्षाओं को रद्द कर दिया. सरकार ने परीक्षाएं रद्द किए जाने की अधिसूचना भी जारी कर दी है. लेकिन अब परीक्षाओं में पास हुए अभ्यर्थी सड़क पर उतर गए हैं. झारखंड मंत्रालय के बाहर सरकार द्वारा TDPL समेत अन्य परीक्षाओं के रद्द किए जाने के अधिसूचना के बाद माहौल बिल्कुल गमगीन है.

      पास अभ्यर्थियों का रो रोहकर बुरा हाल
      एक उम्मीदवार मनीषा का रो रो कर बुरा हाल है. पहले स्टेशन मास्टर के पद पर रेलवे में नियुक्ति मिली थी. वहां से नौकरी छोड़कर आई. मनीषा हमारी टीम के कैमरे के सामने ही बेहोश होकर गिर पड़ी. उनको दोस्तों ने संभालने की कोशिश की. इनका महिला सुपरवाइजर में भी नियुक्ति मिली थी. फिलहाल ASO वित्त विभाग में हैं. मनीषा हजारीबाग की रहने वाली हैं. 15दिनों से तनाव में थी. कर्नाटक में नौकरी में थी. ट्रेनिंग कर रही हैं. मानसिक तनाव इसलिए भी कि आरोप गड़बड़ी के लगे थे. यानी कलंक लगे थे. ब उसे मिटाना है. इळ्जाम और कलंक को झेलने में मुश्किल है.

      भीड़तंत्र में आगे झुक गई सरकार- उम्मीदवार
      एक उम्मीदवार का कहना है कि प्रतिभा रो रही है और भीड़तंत्र के दबाव में सरकार झुक रही है. गुड्डू कुमार राय साहेबगंज से हैं और पुलिस मुख्यालय में कार्यरत थे. सहायक प्रशाखा अधिकारी थे. लेकिन अब उसी दफ्तर में नहीं घुसने दिया जा रहा है. भारतीय रेल में सीनियर गुड्स ट्रेन मैनेजर की नौकरी छोड़कर आए थे. शादी हो गई है. कोर्ट ने कहा था, जिसके खिलाफ सबूत होंगे, उन्हीं को नौकरी से निकाला जाएगा. ये कोर्ट की अवमानना है.

      नौकरी छोड़कर बने थे अधिकारी- उम्मीदवार
      एक  उम्मीदवार पहले 2014 से ही  शिक्षक थे. लेकिन नौकरी छोड़कर ग्रामीण विकास विभाग में सहायक प्रशाखा अधिकारी बने थे. ये सोचकर कि ये नौकरी को मिनी IAS कहा जाता है. अब तक सड़क पर हैं.

      बहन की शादी के  लिए लिया कर्ज- उम्मीदवार
      श्याम सुंदर मंडल कहते है कि वो भी रेलवे में ऑफिस सुपरिंटेंडेंट थे. यहां एग्जाम दिया कि रांची में रहेंगे, लेकिन अब तो कहीं नहीं है. सबको नौकरी से निकाला जाएगा. शादी हुई है, लेकिन आगे पूरी जिंदगी है, पूरे परिवार का बोझ है, कैसे जीवन चलेगा, पता नहीं. बहन की शादी के लिए कर्ज भी ले रखा है. कोर्ट के शरण में जाएंगे.

      मां को नहीं बता सकता नौकरी चली गई- विकास
      हज़ारीबगा के विकास कुमार की भी कहानी मिलती जुलती है. ये लेबर इन्फोर्समेंट ऑफिसर थे. इनकी माँ की तबियत खराब रहती है. लिहाजा मां को नौकरी जाने की बात बताई ही नहीं है. अगर उन्हें पता चला तो सदमा लगेगा. हार्ट अटैक भी आ सकता है. उसकी जिम्मेवारी क्या सरकार लेगी?

    • फिल्मों में ताजमहल बिकता था, प्रयागराज में तो पूरा पहाड़ ही बेच दिया… जानिए कैसे हुआ करोड़ों की सरकारी जमीन का खेल..

      फिल्मों में ताजमहल बिकता था, प्रयागराज में तो पूरा पहाड़ ही बेच दिया… जानिए कैसे हुआ करोड़ों की सरकारी जमीन का खेल..

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      • सरकारी रिकॉर्ड में कैसे हुई हेराफेरी?

      • ‘पहाड़’ की जमीन इतनी खास क्यों होती है?

      बॉलीवुड फिल्मों में आपने कई बार सुना होगा कि जालसाजों ने ताजमहल, लाल किला तक बेच दिया. ऐसी बातें पर्दे पर मजेदार लगती हैं, लेकिन प्रयागराज में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हकीकत और फिल्मों के बीच की दूरी कम कर दी. यहां भू-माफियाओं ने राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी ‘पहाड़’ के नाम दर्ज करोड़ों रुपये की जमीन को पहले अपने नाम कराया और फिर उसे बेच भी दिया. मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस दोनों हरकत में आ गए हैं.

      क्या है पूरा मामला?
      यह मामला प्रयागराज की बारा तहसील के गोल्हैया गांव का है. यहां आराजी संख्या-1 की करीब 83 बीघा 19 बिस्वा (लगभग 19.16 हेक्टेयर) जमीन राजस्व रिकॉर्ड में ‘पहाड़’ यानी सार्वजनिक सरकारी भूमि के रूप में दर्ज थी. आरोप है कि कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर इस सरकारी जमीन को अपने नाम दर्ज करा लिया. इसके बाद जमीन की खरीद-फरोख्त भी शुरू कर दी गई.

      सरकारी रिकॉर्ड में कैसे हुई हेराफेरी?
      जमीन किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि सरकारी खाते में दर्ज थी. लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर राजस्व अभिलेखों में बदलाव कर खुद को जमीन का मालिक दिखा दिया. जब रिकॉर्ड में नाम दर्ज हो गए, तो उसी आधार पर जमीन की रजिस्ट्री और बिक्री भी होती रही. यानी कागजों पर सरकारी पहाड़ निजी संपत्ति बन गया.

      मामला सामने कैसे आया?
      प्रशासन को जमीन में गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद जांच शुरू हुई. जांच में पाया गया कि जमीन को गलत तरीके से निजी खातों में दर्ज कराया गया था.इसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी फर्जी नाम निरस्त कर दिए और जमीन को दोबारा सरकारी खाते में दर्ज कर दिया.

      कितने लोगों पर केस दर्ज हुआ?
      लेखपाल प्राची सिंह परिहार की शिकायत पर लालापुर थाने में 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. इनमें पूर्व खाताधारक, जमीन खरीदने वाले लोग और एके ड्रीम सिटी प्राइवेट लिमिटेड नाम की निजी कंपनी के निदेशक भी शामिल हैं. पुलिस ने सभी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी संपत्ति से जुड़े गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया है.

      ‘पहाड़’ की जमीन इतनी खास क्यों होती है?
      राजस्व रिकॉर्ड में ‘पहाड़’ के रूप में दर्ज जमीन सार्वजनिक संपत्ति मानी जाती है. इसका इस्तेमाल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सार्वजनिक हित के लिए होता है. ऐसी जमीन को कोई व्यक्ति अपने नाम नहीं करा सकता और न ही उसकी खरीद-बिक्री की जा सकती है. इसलिए इस तरह की हेराफेरी को गंभीर अपराध माना जाता है.

      अब आगे क्या होगा?
      पुलिस का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है. जांच में राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण (म्यूटेशन), रजिस्ट्री, जमीन के हस्तांतरण और सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच होगी. यदि किसी सरकारी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है.

      पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
      देश के अलग-अलग राज्यों में पहले भी सरकारी जमीन, तालाब, चारागाह और ग्राम समाज की जमीन पर फर्जी तरीके से कब्जा करने या रिकॉर्ड बदलने के मामले सामने आते रहे हैं. हालांकि किसी ‘पहाड़’ को ही कागजों में निजी संपत्ति बनाकर बेचने का मामला बेहद दुर्लभ माना जा रहा है. यही वजह है कि प्रयागराज का यह मामला चर्चा में है.