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Category: Gazab

  • 14 लाख फीस और 3 लाख बस का किराया…, महिला ने बताया बेटी का स्कूल खर्च, बयां किया दर्द

    14 लाख फीस और 3 लाख बस का किराया…, महिला ने बताया बेटी का स्कूल खर्च, बयां किया दर्द

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    भारत में किसी मिडिल क्लास फैमिली से जब आप उनके बड़े खर्चों के बारे में पूछेंगे तो बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर होने वाला खर्चा उसमें जरूर शामिल होगा। स्कूल की फीस, ट्यूशन की फीस और बच्चों के आने-जाने के लिए बस या फिर वैन पर होने वाले खर्चे का जिक्र जरूर किया जाएगा, लेकिन अगर आप दुबई में स्कूल की पढ़ाई पर होने वाले खर्च के बारे में जान लेंगे तो आपके होश उड़ जाएंगे।

    जी हां, दुबई में रहने वाली एक महिली ने हाल फिलहाल में सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड कर अपनी बेटी के स्कूल खर्च की जानकारी सभी को दी है। महिला ने जो खर्चा बताया उसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया।

    दुबई में रहने वाली इस महिला की बेटी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ती है और उसने बताया कि उसके ट्यूशन का सालाना खर्चा लगभग 14.34 लाख रुपये होता है। इसके अलावा बच्ची के ट्रांसपोर्ट पर वह महिला करीब 3.12 लाख रुपये खर्च करती है। महिला के इस दावे ने एक ऑनलाइन डिबेट शुरू कर दी है। लोगों का कहना है कि इससे अच्छा तो अपने बच्चों के यूएस या यूरोपीय देशों में पढ़ा लो।

    ‘तुमसे करी जैसी बदबू आती है’, भारतीय शख्स पर विदेशी महिला का कमेंट, Video वायरल होते ही फूटा लोगों का गुस्सा

    कौन सा स्कूल है इतना महंगा?

    दुबई में रहने वाली इस महिला का नाम वेरोनिका है, महिला अपने इंस्टाग्राम पर रेगुलर तौर पर अपनी फैमिली लाइफ की कुछ बातें शेयर करती हैं। हाल ही में एक इंस्टाग्राम वीडियो में उसने अपनी बेटी को दुबई के GEMS इंटरनेशनल स्कूल में भेजने में आने वाले अलग-अलग खर्चों के बारे में बताया। उसने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चे के असेसमेंट से पहले लगभग 13,000 रुपये की असेसमेंट फीस देनी होती है। फिर सालाना ट्यूशन लगभग 14.34 लाख रुपये है जिसे वह किस्तों में चुकाती है।

    26 हजार यूनिफॉर्म का खर्चा

    महिला ने बताया कि उसके यह खर्चे यहीं खत्म नहीं होते। स्कूल ट्रांसपोर्ट का खर्च भी 3.12 लाख रुपये सालाना होता है। वेरोनिका ने कहा कि बस सर्विस बच्चों को घर से पिक करती है और स्कूल के बाद उन्हें वापस छोड़ती है। इसके अलावा यूनिफॉर्म की कीमत भी लगभग 26 हजार रुपये है।

    खाने के लिए स्कूल से कुछ नहीं मिलता

    रजिस्ट्रेशन, री-एनरोलमेंट और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज से कुल बिल में और खर्च जुड़ सकता है। एक खर्च जिसने उन्हें खास तौर पर हैरान किया है बच्ची का खाना जिसे ट्यूशन फीस में शामिल नहीं किया है। वह रोजना अपनी बेटी का लंच घर पर बनाती है और उसे हर दिन लंच बॉक्स साथ में देती है।

    लोगों की प्रतिक्रियाएं

    वेरोनिका के इस वीडियो ने लोगों को हैरान करने का काम किया है। इस वीडियो को देखने के बाद दुबई में इंटरनेशनल एजुकेशन के महंगे खर्च पर बहस शुरू हो गई है। एक यूजर ने लिखा है, “सिर्फ एक बच्चे के लिए यह बहुत सारा पैसा है; यह ऐसा है जैसे आप यूनिवर्सिटी ट्यूशन के लिए पैसे दे रहे हों।”

    एक और अन्य यूजर ने लिखा, “क्रेजी, इससे तो USA में पढ़ाई करना सस्ता है, कभी-कभी तो यह फ्री भी होता है।” एक तीसरे ने कमेंट किया, “खाड़ी देशों में पढ़ाई बहुत महंगी है, इसीलिए हर कोई अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए यूरोप और US जा रहा है।”

    कुछ यूजर्स ने इस खर्चे को सही ठहराया है। एक यूजर ने लिखा है कि इस तरह के स्कूल से निकलने वाले बच्चे कर्मचारी नहीं बनते या वो नौकरी नहीं करते बल्कि वह भविष्य के लिए एंटरप्रेन्योर और साइंटिस्ट बनाते हैं, यही हमारे बच्चों में असली इन्वेस्टमेंट है।


     

     
     
     
     
     
    Term Insurance for a 
    August 21, 2026
  • 15 हजार कमाने वाले दर्जी को 974 करोड़ का टैक्‍स जमा करने का नोटिस, ईमेल से भेज द‍िया जवाब..

    15 हजार कमाने वाले दर्जी को 974 करोड़ का टैक्‍स जमा करने का नोटिस, ईमेल से भेज द‍िया जवाब..

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    अजमेर के गोव‍िंदगढ़ में रहने वाले दर्जी रेखराज ठाड़ा (62) को आयकर व‍िभाग से 974 करोड़ 97 लाख 25 हजार 457 रुपये की टैक्स रिकवरी का नोटिस मिला. ज‍िसे देखकर उनका स‍र चकरा गया. उन्होंने कहा क‍ि महीने में 15 हजार रुपये कमाने वाला इतना टैक्‍स कैसे देगा. उनके पास नोट‍िस सूरत आयकर व‍िभाग से आया. उन्होंने पुल‍िस से इसकी श‍िकायत की है.

    पैन कार्ड का किया दुरुपयोग

    जांच कराने पर खुलासा हुआ कि शातिर जालसाजों ने उनके पैन कार्ड का दुरुपयोग कर वर्ष 2011 से उन्हें ‘रूप रजत डायमंड प्राइवेट लिमिटेड’ का डायरेक्टर बना रखा था. पीड़ित का दावा है कि वे कभी गुजरात गए ही नहीं, और ना ही उन्हें इन कंपनियों की कोई जानकारी थी. यह मामला सीधे तौर पर पहचान की चोरी और बड़े पैमाने पर चल रहे सेल कंपनियों के नेटवर्क की पोल खोलता है.

    ​पुलिस ने शुरू की जांच

    आयकर नोटिस मिलने के बाद जब परिजनों ने एक सीए की मदद से पड़ताल कराई, तो रेखराज का नाम ‘जय बाबेरी डायम प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक और फर्जी कंपनी में भी डायरेक्टर के तौर पर सामने आया. इसके बाद रेखराज ने पीसांगन थाने और अजमेर एसपी कार्यालय पहुंचकर एडिशनल एसपी ग्रामीण लालचंद कयाल को पूरी आपबीती सुनाई. पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए परिवाद दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. रेखराज ने नोटिस का स्पष्टीकरण ईमेल के जरिए आयकर विभाग को भेज दिया है.

    August 21, 2026
  • दीवार टूटी और बाहर आया 90 करोड़ का सच! जानिए कैसे रातों-रात बदली इस 18 साल के लड़के की दुनिया..

    दीवार टूटी और बाहर आया 90 करोड़ का सच! जानिए कैसे रातों-रात बदली इस 18 साल के लड़के की दुनिया..

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    जब आप गर्मियों की छुट्टियों में पॉकेट मनी कमाने के लिए मजदूरी कर रहे हों, और अचानक फावड़े के नीचे से ऐसा खजाना निकल आए, जिसकी आपने सपने में भी कल्पना न की हो तो सोचिए आपका क्या हाल होगा? बेल्जियम में एक 18 साल के छात्र के साथ बिल्कुल ऐसा ही हुआ हैय सीवेज खोदते वक्त इस लड़के के हाथ ऐसा खजाना लगा कि उसकी रातों-रात किस्मत ही चमक गई.

    क्या है पूरा मामला?

    द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, बेल्जियम के सिंट-गिलिस-डेंडर्मोंडे शहर में एक पूर्व शराब बनाने वाली पुरानी फैक्ट्री की जमीन पर री-डेलवपमेंट का काम चल रहा था. गर्मियों की छुट्टियों में कोबे नाम का 18 साल का एक छात्र वहां मजदूरी कर रहा था. वह सीवेज सिस्टम के लिए जमीन में गड्ढे खोद रहा था, तभी उसे जमीन के नीचे कुछ अजीब सी चीज दिखाई दी.

    शुरुआत में कोबे और उसके साथियों को लगा कि शायद ये आम 1 यूरो के सिक्के हैं. लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने मिट्टी हटाई और गहराई से खुदाई की, तो उनके होश उड़ गए. वहां ईंटों से बंद एक पुराने तहखाने की दीवार के अंदर छिपा हुआ सोने का भारी-भरकम जखीरा मिला. इस खजाने में सोने के सिक्के, सोने के टुकड़े और कई सोने की छड़ें शामिल थीं. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस पूरे खजाने की कीमत करीब 90 लाख यूरो यानी लगभग 90 करोड़ रुपए है.

    क्यों और कैसे छिपाया गया था यह खजाना?

    जांच में सामने आया कि यह जगह 19वीं शताब्दी के अंत में फैक्ट्री के मालिक थियोफिलस वैन एशे के लिए बनाई गई थी. इतिहास के पन्नों को खंगालने पर पता चला कि यह पुरानी शराब की फैक्ट्री 1899 से 1970 के बीच चलती थी. अधिकारियों का मानना है कि सोने को किसी आम तिजोरी में रखने के बजाय जानबूझकर ईंटों की दीवार के पीछे बेहद चालाकी से सील किया गया था ताकि कोई इसे ढूंढ न सके.

    अब आगे क्या होगा? कानूनी पेंच में फंसा खजाना

    इस ऐतिहासिक और चौंकाने वाली खोज के बाद कोबे और उसके साथियों ने बिना देर किए तुरंत पुलिस और निर्माण कार्य की देखरेख कर रही संस्था को इसकी सूचना दी. फिलहाल, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने सारा सोना ब्रुसेल्स की एक सुरक्षित जगह पर शिफ्ट कर दिया है.

    अब अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यह सोना किसी पुरानी चोरी, किसी आपराधिक गतिविधि या फिर किसी अनसुलझे वारिस के दावों से जुड़ा हुआ है. इतनी बड़ी रकम सामने आने के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि इस खजाने के कानूनी मालिक को लेकर एक लंबी और पेचीदा कानूनी लड़ाई छिड़ने वाली है.

    August 21, 2026
  • मुंढे जी! अब तो कॉकरोच घर पर आ रहे हैं’, ग्रॉसरी डिलीवरी ऐप पर फूटा श्वेता तिवारी का गुस्सा, FDA कमिश्नर से लगाई गुहार..

    मुंढे जी! अब तो कॉकरोच घर पर आ रहे हैं’, ग्रॉसरी डिलीवरी ऐप पर फूटा श्वेता तिवारी का गुस्सा, FDA कमिश्नर से लगाई गुहार..

    shweta tiwari- India TV Hindi

    बॉलीवुड और टीवी जगत की जानी-मानी अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने हाल ही में ऑनलाइन ग्रॉसरी शॉपिंग के दौरान हुए एक बेहद अप्रिय अनुभव को प्रशंसकों के साथ साझा किया। अभिनेत्री ने जब क्विक-कॉमर्स डिलीवरी प्लेटफॉर्म से ड्रिंक मंगवाया तो उसके साथ एक जिंदा कॉकरोच भी उनके घर पहुंच गया। इस लापरवाही से नाराज श्वेता ने सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के कमिश्नर तुकाराम मुंढे का ध्यान इस ओर आकर्षित किया।

    सोफे पर टहलता दिखा कीड़ा, श्वेता ने शेयर किया वीडियो

    श्वेता तिवारी ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो पोस्ट कर पूरी घटना का खुलासा किया। वीडियो में एक छोटा कॉकरोच उनके घर के सोफे और फर्नीचर पर घूमता हुआ साफ नजर आ रहा है। वीडियो साझा करते हुए उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्होंने तो बस ड्रिंक का ऑर्डर दिया था, लेकिन साथ में यह बिन-बुलाया मेहमान भी आ गया, जो अब पूरे घर में भाग रहा है। जब उनके साथ मौजूद किसी शख्स ने उसे मारने की कोशिश की तो श्वेता ने उन्हें रोक दिया। इस पूरी स्थिति को उन्होंने और उनके दोस्तों ने थोड़े मजाकिया अंदाज में लिया, लेकिन खाद्य सुरक्षा पर सवाल भी उठाए।

    Shweta tiwari posted an Instagram story explaining what to do when u see a cockroach 🪳

    She is in full mood to stay relevant these days 👀 pic.twitter.com/ZsAYPzYzjx

    — Chota Don (@choga_don) August 19, 2026

    एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे से लगाई गुहार

    वीडियो के अंत में श्वेता ने सीधे एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे को टैग करते हुए उनसे इस लापरवाही पर कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अब ऑनलाइन डिलीवरी के जरिए घरों तक कॉकरोच पहुंच रहे हैं, इसलिए प्रशासन को इस दिशा में तुरंत ध्यान देना चाहिए। श्वेता के स्टाइलिस्ट विक्टर रोबिन्सन ने भी उनके साथ फोटो शेयर करते हुए इस घटना पर अपना विरोध दर्ज कराया।

    चर्चा में हैं एफडीए कमिश्नर ‘असली सिंघम’ तुकाराम मुंढे

    आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे इन दिनों खाद्य सुरक्षा और नियमों के सख्त पालन को लेकर पूरे महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर अभियान चला रहे हैं। होटलों, रेस्टोरेंटों और क्विक-कॉमर्स कंपनियों के वेयरहाउस में मिली कमियों के बाद वह लगातार कड़े कदम उठा रहे हैं। हाल ही में एफडीए की टीमों ने लाखों रुपये मूल्य के मिलावटी डेयरी उत्पाद और प्रतिबंधित सामग्रियां जब्त की थीं, जिसके चलते आम जनता उन्हें सोशल मीडिया पर ‘असली सिंघम’ कहकर बुला रही है।

    श्वेता तिवारी के आगामी प्रोजेक्ट्स

    काम की बात करें तो श्वेता तिवारी इन दिनों ओटीटी प्लेटफॉर्म के लोकप्रिय रियलिटी शो ‘द ट्रेटर्स इंडिया’ के दूसरे सीजन में नजर आ रही हैं। इससे पहले वह साल 2024 में ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘सिंघम अगेन’ और वेब सीरीज ‘इंडियन पुलिस फोर्स’ में अहम भूमिकाएं निभा चुकी हैं। आने वाले समय में वह सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया और सुनील ग्रोवर जैसे सितारों के साथ थ्रिलर फिल्म ‘वन – फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ में दिखाई देंगी।

    August 21, 2026
  • दिवाली-छठ पर दोगुने-तिगुने नहीं होंगे फ्लाइट टिकट के दाम, हवाई किराये पर सरकार ला रही नया प्‍लान.

    दिवाली-छठ पर दोगुने-तिगुने नहीं होंगे फ्लाइट टिकट के दाम, हवाई किराये पर सरकार ला रही नया प्‍लान.

    फेस्टिव सीजन और छुट्टियों में फ्लाइट के टिकट के दाम अप्रतयाशित रूप से न बढ़ें, इसके लिए केंद्र सरकार नियम बनाने की तैयारी में है. केंद्र के मुताबिक, एयर फेयर यानी हवाई किराये और चार्जेस से जुड़े नियम बनाने की प्रक्रिया चल रही है और इसे तैयार होने में 3 हफ्ते का समय लग सकता है. इन नियमों में हवाई किराये और चार्जेस से जुड़े ऐसे प्रावधान शामिल होंगे, जिनसे हवाई यात्रियों को राहत मिलेगी. दरअसल, फ्लाइट्स टिकटों के दाम अचानक बढ़ने को लेकर एयर पैसेंजर्स लंबे समय से शिकायतें करते रहे हैं. जैसे कि नॉर्मल डेज यानी सामान्‍य दिनों में दिल्‍ली में मुंबई का किराया 6,000 रुपये है तो गर्मी की छुट्टियों या फिर दिवाली जैसे फेस्टिवल के टाइम यही टिकट 12 से 14 हजार रुपये का हो जाता है.

    ऐसे मामलों की एक शिकायती याचिका पहुंची, सुप्रीम कोर्ट के पास और फिर कोर्ट ने सख्‍ती दिखाते हुए सरकार से रुख स्‍पष्‍ट करने को कहा. कोर्ट में सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने बताया कि सरकार इस पर नियम बना रही है.

    नियम नहीं मानें एयरलाइंस तो फ्लाइट्स रोक दें: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों में टिकटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी को लेकर सख्‍ती से कहा है कि एयरलाइंस अगर नियम नहीं मानतें तो उनकी उड़ाने रोक दी जाएं. त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों के दाम अचानक बढ़ने पर दायर सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई की. उन्‍होंने कहा कि यात्रियों के हित में जो व्यवस्थाएं बनाई गई हैं, उसके पालन और नियमन को लेकर फिलहाल स्थिति साफ नहीं है.

    याचिकाकर्ता ने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने संसद में कहा है कि हम कुछ नहीं कर सकते. हम कोई कैपिंग नहीं लगा सकते. पिछली सुनवाई में पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किराया तय करने में एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी यात्रियों का शोषण करने जैसा है और सरकार को यात्रियों को राहत देने के लिए कदम उठाने चाहिए.

    7 सितंबर को अगली सुनवाई, सामने आ सकता है नियम

    कोर्ट में सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल कौशिक ने बताया कि हवाई किराये और शुल्क से जुड़े नियम बनाने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है. इसे पूरा होने में 3 हफ्तों का समय लगेगा. उन्होंने कहा कि अंतिम रूप में तैयार नियमों को कोर्ट के सामने रखा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ्ते की मांग की दलील स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर तय कर दी है.

    सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर एयरलाइंस पर किराया तय करने में मनमानी का आरोप लगाते हुए कोर्ट के दखल की मांग की थी. याचिका में कहा गया है कि प्राइवेट एयरलाइंस कंपनियां अनुचित तरीके से हवाई किराया तय करती हैं. उनकी तरफ से कई अतिरिक्त शुल्क लगाए जाते हैं. इस बारे में स्पष्ट नियम बनाने और उन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक नियामक संस्था के गठन की जरूरत है.

    August 21, 2026
  • 12 साल की मेहनत, 40 परीक्षाओं में फेल, कहानी मनोज पाल के अफसर बनने की..

    12 साल की मेहनत, 40 परीक्षाओं में फेल, कहानी मनोज पाल के अफसर बनने की..

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    Success Story: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के ग्राम खपरिया निवासी मनोज पाल की कहानी उन अभ्यर्थियों के लिए मिसाल है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार असफल होने के बाद हार मान लेते हैं. मनोज पाल ने करीब 12 सालों तक लगातार प्रतियोगी परीक्षाएं दीं. इस दौरान उन्होंने लगभग 40 परीक्षाओं में किस्मत आजमाई, लेकिन लंबे समय तक अंतिम सफलता उनके हाथ नहीं लगी. आखिरकार मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा 2024 में उनका चयन सहायक संचालक, वित्त विभाग के पद पर हुआ. मनोज की यह सफलता वर्षों के संघर्ष, आर्थिक मुश्किलों और लगातार असफलताओं के बीच खुद पर विश्वास बनाए रखने का परिणाम है.

    12वीं में मिले सिर्फ 50 प्रतिशत अंक

    मनोज पाल की शुरुआती पढ़ाई गांव में ही हुई. उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई गांव से की और परीक्षा करीब 50 प्रतिशत अंकों के साथ पास की. सीमित संसाधनों वाले परिवार से आने वाले मनोज के सामने आगे की पढ़ाई जारी रखना भी आसान नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और नर्मदापुरम जाकर कॉलेज की पढ़ाई शुरू की. पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने बच्चों को पढ़ाकर अपनी जरूरतों के लिए पैसे जुटाए और खुद भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते रहे.

    मनोज पाल की शुरुआती पढ़ाई गांव में ही हुई. उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई गांव से की और परीक्षा करीब 50 प्रतिशत अंकों के साथ पास की.

    मनोज कहते हैं कि परिवार ने उनकी मेहनत पर हमेशा भरोसा रखा. सफलता के बाद परिवार की पहली प्रतिक्रिया थी. भगवान के यहां देर है, अंधेर नहीं. मेहनत की है तो सफलता मिलनी ही थी. अंतिम चयन की खबर परिवार के लिए भावुक कर देने वाली थी.

    कोरोना काल में मजदूरी कर जुटाए पैसे

    मनोज के संघर्ष का सबसे कठिन दौर कोरोना महामारी के दौरान आया. महामारी के कारण काम और आय के साधन प्रभावित हुए और उनके पास जो कुछ था, वह भी खत्म हो गया. आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखना मुश्किल हो गया. ऐसे समय में मनोज ने गांव लौटकर मजदूरी की और पैसे जुटाए. इसके बाद उन्होंने इंदौर जाकर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की तैयारी शुरू की. वहां भी उन्होंने बच्चों को पढ़ाया और कोचिंग में काम किया, ताकि अपनी पढ़ाई का खर्च निकाल सकें.

    लगभग 40 परीक्षाएं दीं, लेकिन सफलता नहीं मिली

    मनोज ने अपने लंबे सफर में लगभग 40 प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लिया. इनमें विभिन्न भर्ती परीक्षाएं शामिल रहीं. उन्होंने पुलिस आरक्षक, वनरक्षक, पटवारी, लेखापरीक्षक और संचालक जैसी परीक्षाएं दीं. इसके अलावा कर्मचारी चयन आयोग की बहु-कार्य कर्मचारी, संयुक्त उच्चतर माध्यमिक और संयुक्त स्नातक स्तर की परीक्षाओं में भी प्रयास किया. मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा, पंजीयक, सहायक प्राध्यापक सहित अन्य परीक्षाओं में भी उन्होंने किस्मत आजमाई. कई परीक्षाओं में वह आगे तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया.

    MPPSC परीक्षा में मनोज ने नौ प्रयास किए. इन नौ प्रयासों में वह नौ बार प्रीलिम्स परीक्षा में सफल हुए.

    MPPSC परीक्षा में नौ प्रयास

    MPPSC परीक्षा में मनोज ने नौ प्रयास किए. इन नौ प्रयासों में वह नौ बार प्रीलिम्स परीक्षा में सफल हुए. आठ बार मुख्य परीक्षा पास कर इंटरव्यू तक पहुंचे और सात बार इंटरव्यू भी दिया. इसके बावजूद अंतिम चयन नहीं हो पाया. लगातार परिणाम अपने पक्ष में न आने के बावजूद मनोज ने तैयारी जारी रखी. आखिरकार राज्य सेवा परीक्षा 2024 में उनका चयन हुआ और वर्षों की मेहनत का परिणाम सामने आया.

    परिवार कहता था-अब कुछ काम करके घर संभालो

    मनोज निम्न-मध्यमवर्गीय कृषक परिवार से आते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी. परिवार ने तैयारी के दौरान उनका पूरा साथ दिया, लेकिन लंबे समय तक नौकरी नहीं मिलने के कारण घरवालों की चिंता भी बढ़ती जा रही थी. मनोज बताते हैं कि परिवार की चिंता थी कि उम्र बढ़ रही है और बहनों की शादी भी करनी है, इसलिए उन्हें कोई काम करके कमाई शुरू करनी चाहिए. परिवार चाहता था कि वह कुछ छोटा-मोटा काम शुरू करें, जिससे घर की आर्थिक स्थिति थोड़ी बेहतर हो सके.

    समाज के तानों के बीच खुद को संभाला

    लगातार असफलताओं के बीच मनोज को सामाजिक दबाव का भी सामना करना पड़ा. उनका कहना है कि वह पशुपालक गड़रिया समाज से आते हैं और उनके आसपास के लोगों को उनसे बहुत बड़ी उम्मीद भी नहीं थी. कई बार परीक्षा का परिणाम नकारात्मक आने पर उन्हें लगा कि शायद आगे भी सफलता नहीं मिलेगी, लेकिन उनके पास पीछे हटने का विकल्प नहीं था. वह कहते हैं कि गांव लौटकर खेती या मजदूरी करने के साथ-साथ वह यह भी नहीं चाहते थे कि उनके परिवार को लोगों के ताने सुनने पड़ें. यही सोच उन्हें आगे बढ़ाती रही.

    मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा 2024 में उनका चयन सहायक संचालक, वित्त विभाग के पद पर हुआ.

    6 से 8 घंटे पढ़ाई, मॉक टेस्ट और आत्मविश्लेषण पर जोर

    मनोज की तैयारी का तरीका बेहद अनुशासित रहा. वह सुबह 6 बजे उठकर लाइब्रेरी चले जाते थे. दिन में खाना बनाने और खाने के लिए लौटते और फिर लाइब्रेरी चले जाते थे. रात 12 से 1 बजे तक लाइब्रेरी में पढ़ाई करने के बाद वह सुबह कोचिंग में बच्चों को पढ़ाने चले जाते थे. वह रोजाना लगभग 6 से 8 घंटे पढ़ाई करते थे. तैयारी के दौरान उन्होंने बड़ी संख्या में मॉक टेस्ट दिए, अपनी गलतियों का आत्मविश्लेषण किया और दोस्तों के साथ विषयों पर चर्चा की. पुराने प्रश्नपत्रों के आधार पर उन्होंने परीक्षा की रणनीति तैयार की.

    ‘अपनी स्थिति बदलनी है तो पूरी ताकत से मेहनत करें’

    मनोज पाल उन अभ्यर्थियों के लिए संदेश देते हैं जो लगातार असफलताओं से निराश हो जाते हैं. उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने अपनी स्थिति बदलने का फैसला किया है, तो उसे पूरी ताकत के साथ मेहनत करनी होगी. अपनी ताकत और कमजोरियों को पहचानना होगा और लगातार खुद में सुधार करते रहना होगा. उनका मानना है कि असफलताओं के बावजूद खुद पर विश्वास बनाए रखना जरूरी है. करीब 40 परीक्षाओं में प्रयास करने के बाद मिली यह सफलता मनोज के लिए सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि सालों के संघर्ष और धैर्य की जीत है.

    August 21, 2026
  • EMI, घर के खर्चे, किराया और बिलों की टेंशन कर सकती है बीमार, ऐसे करें फाइनेंशियल स्ट्रेस कम..

    EMI, घर के खर्चे, किराया और बिलों की टेंशन कर सकती है बीमार, ऐसे करें फाइनेंशियल स्ट्रेस कम..

    सैलरी आते ही घर की ईएमआई, रेंट, क्रेडिट कार्ड्स के बिल और रोजमर्रा के खर्चे जोड़-जोड़कर लोग अक्सर परेशान हो जाते हैं. कई बार लोग बढ़ती महंगाई को देखकर अपने घर की रोजमर्रा के खर्चों के बारे में बार-बार सोचते रहते हैं, जिसका असर न सिर्फ हमारी सेहत पर भी पड़ने लगता है. कई हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि लंबे समय तक अगर आप आर्थिक तनाव से जूझते हैं, तो इससे शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है. ऐसी स्थिति में नींद, कमजोर इम्यूनिटी और मेंटल हेल्थ प्रभावित हो सकता है. यह हम आपको विस्तार से समझाएंगे कि फाइनेंशियल हेल्थ आपके शरीर को किस तरह से प्रभावित करता है?

    फाइनेंशियल स्ट्रेस शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

    एक्सपर्ट का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति पैसों को लेकर परेशान रहता है, तो उसके शरीर में कॉर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है. कुछ समय में य जाता है. थोड़े समय के लिए बाद ये नॉर्मल हो जाता है, लेकिन आप लंबे समय तक पैसों को लेकर सोचते रहते हैं, तो इसकी वजह से कई तरह की परेशानियां होने का खतरा रहता है, जैसे-

    • अनिद्रा की होती है शिकायत
    • कमजोर हो सकती है इम्यूनिटी
    • एसिडिटी, ब्लोटिंग और मतली जैसी पाचन से जुड़ी परेशानी
    • लगातार थकान होना
    • बार-बार सिरदर्द की शिकायत

    तनाव न सिर्फ हेल्थ बल्कि फाइनेंशियल डिसीजन पर भी डालता है असर

    फाइनेंशियल प्रेशर न सिर्फ हेल्थ पर असर डालती है, बल्कि फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता पर भी असर डाल सकती है. दरअसल, स्ट्रेस की वजह से अक्सर लग खर्चों को इग्नोर करने लग जाते हैं, वो डर की वजह से अकाउंट या बिल चेक करने से बचते हैं और कई बार जरूरी फैसले भी टाल देते हैं. इससे फाइनेंशियल स्थिति और खराब हो सकती है, जो फिर स्ट्रोस को बढ़ा सकती है.

    फाइनेंशियल स्ट्रेस को कैसे करें कम?

    अगर आप फाइनेंशियल स्ट्रेस को कम करना चाहते हैं, तो आपको कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है, जैसे-

    महीने के शुरुआत में बनाएं बजट

    जब भी सैलरी आए या फिर आने वाली हो, तो सबसे पहले एक बजट तैयार कर लें. हर व्यक्ति को अपने महीनेभर का हिसाब अच्छे से पता होना चाहिए. कोशिश करें कि हर महीने आने और जाने वाले पैसों का रिकॉर्ड रखें. इससे आपको ये समझने में आसानी होती है कि आपका पैसा कहां और कितना खर्च हो रहा है और आप कहां के खर्चों की कटौती कर सकते हैं.

    इमरजेंसी फंड करें तैयार

    सैलरी कम हो या ज्यादा हर किसी को इमरजेंसी फंड तैयार करके रखनी चाहिए. भले ही इसकी शुरुआत छोटी रकम से करें. अगर आप हर महीने धीरे-धीरे महीनों के खर्च से बचत करके इमर्जेंसी फंड जमा करते हैं, तो फ्यूचर में अचानक से होने वाली परेशानी से निपटना आसान हो जाता है.

    हर सप्ताह करें फाइनेंशियल रिव्यू

    अधिकतर एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि अगर आप फाइनेंशियल स्ट्रेस से बचना चाहते हैं, तो हर सप्ताह फाइनेंशियल रिव्यू करने की आदत डालें. कोशिश करें कि सप्ताह में एक बार अपने बैंक खाते, खर्चों और बचत के रिव्यू के लिए कुछ समय निकालें. इससे अनिश्चितता कम होती है और फाइनेंशियल कंट्रोल महसूस होता है

    समय पर भरें बिल

    कभी भी बिल भरने में टाल-मटोल न करें. हमेशा किराया, ईएमआई, बिजली का बिल समय पर भरें. कोशिश करें कि ऑटो-पे जैसी सुविधा का इस्तेमाल करें. इससे आप लेट फीस और अतिरिक्त स्ट्रेस से बच सकते हैं.

    उपलब्ध सुविधाओं का पूरा करें इस्तेमाल

    हेल्थ इंश्योरेंस, फाइनेंशियल एडवाइजरी सर्विसेज और बैंकिंग ऐप्स में उपलब्ध बजटिंग टूल्स का इस्तेमाल करें. ऐसा करने से आर्थिक और मानसिक तनाव कम करने में मददगार मिल सकती है.

    August 21, 2026
  • कमाई नहीं, आदत पर डिपेंड करता है बचत, सैलरी कम हो फिर भी ऐसे बचा सकते हैं पैसे..

    कमाई नहीं, आदत पर डिपेंड करता है बचत, सैलरी कम हो फिर भी ऐसे बचा सकते हैं पैसे..

    Money Saving Tips : बदलते लाइफस्टाइल और भागदौड़ भरी जिंदगी की वजह से अच्छी से अच्छी कमाई करने वाले लोग भी महीने के अंत तक पैसों की कमी महसूस करने लग जाते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है, कमाई के साथ बढ़ता खर्च. ऐसे में अगर आप ये सोच रहे हैं कि जब आपकी कमाई अच्छी होगी, तब ही बचत होगा, तो आप गलत हो सकते हैं. क्योंकि बचत कमाई पर डिपेंड नहीं करता है, बल्कि बचत करने की आदत होती है. जिस भी व्यक्ति में बचत की आदत विकसित हो जाए, वह खर्च से पहले बचत करता है. इससे फ्यूचर में छोटे-छोटे बचत से एक अच्छी खासी रकम जमा होने लगती है. ऐसे में बचत करने की आदत डालें, भले ही आपकी कमाई कम हो. यहां जानते हैं बचत करने में क्यों होती है परेशानी और कैसे करें बचत?

    क्यों होती है बचत करने में परेशानी?

    बचत की सबसे बड़ी चुनौती कम कमाई नहीं होती, बल्कि हमारी मानसिकता होती है. अक्सर लोगों को लगता है कि बचत करने से उनका प्रसेंट लाइफ प्रभावित होगी और वे अपनी पसंद की चीजों पर खर्च नहीं कर पाएंग. लेकिन अगर आप लंबे समय के फायदों पर ध्यान देंगे, तो बचत आपको इकोनॉमिक फ्रीडम देती है.

    खर्च करने की आदतों को समझें

    बचत शुरू करने से पहले हर किसी को ये जानना जरूरी होता है कि पैसा कहां और कितना खर्च हो रहा है. इसके लिए आपको हर 1-2 महीने तक अपने खर्चों पर नजर रखने की जरूरत होती है. इसके लिए अपने बैंक स्टेटमेंट और क्रेडिट कार्ड बिल को अच्छे देखिए, कहां और कितना खर्च हो रहा है. इससे आपको समझ आएग, कौन सा खर्च कितना जरूरी है और कौन सा फिजूलखर्ची.

    कर्ज से पहले पाएं छुटकारा

    अगर आपके पास किसी तरह का लोग है, जैसे- पर्सनल लोन, क्रेडिक कार्ड लोन या फिर एजुकेशन लोन, इन्हें सबसे पहले प्राथमिकता के आधार पर चुकाएं. दरअसल, कर्ज पर लगने वाला ब्याज आपकी बचत की क्षमता पर असर डाल सकती हैं. इसे चुकाने के लिए आप बोनस और अतिरिक्त इनकम का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे आपका कर्ज जल्द से जल्द चुक सकता है.

    छोटी-छोटी फिजूलखर्ची पर लगाएं रोक

    रोजाना कैब का इस्तेमाल, बार-बार ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना या अनावश्यक खरीदारी जैसे खर्च समय के साथ बड़ी रकम में बदल जाते हैं. अगर आप कारपूलिंग, घर का खाना या जरूरत के अनुसार खरीदारी जैसी आदतें अपनाते हैं, तो हर महीने अच्छी-खासी बचत कर सकते हैं. हालांकि, सभी आदतें एक साथ बदलने की बजाय धीरे-धीरे बदलाव करना अधिक प्रभावी माना जाता है.

    मासिक बजट बनाना है जरूरी

    बजट बनाना बचत की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है. आप स्प्रेडशीट, मोबाइल ऐप या डायरी की मदद से अपने खर्चों का रिकॉर्ड रख सकते हैं. महीने के अंत में रिव्यू करने से पता चलता है कि किन खर्चों में कटौती की जा सकती है और कितनी बचत संभव है.

    अपनाएं 50-30-20 नियम

    फाइनेंशियल प्लानिंग की दुनिया में 50-30-20 नियम काफी ज्यादा मशहूर है. इसके तहत 50 प्रतिशत जरूरतें,  30 प्रतिशत इच्छाएं और 20 प्रतिशत बचत-निवेश में करना चाहिए. इस नियम का पालन करने से बजट संतुलित रहता है और नियमित बचत की आदत भी बनती है.

    बचत की शुरुआत कहां से करें?

    बचत की शुरुआत किस तरह करें, अगर आप इस बात को लेकर कंफ्यूज हैं, तो यहां जानते हैं इस बारे में-

    1. इमरजेंसी फंड बनाएं

    बचत की शुरुआत सबसे पहले इमरजेंसी फंड से करें. दरअसल, किसी भी व्यक्ति को कभी भी आर्थिक संकट या नौकरी छूटने जैसी स्थितियों से जूझना पड़ सकता है. इस संकट से बचने के लिए सबसे पहले करीब 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड रखें. ये फंड मुश्किल समय में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है.

    2. रिटायरमेंट प्लानिंग जल्द शुरू करें

    कई युवा रिटायरमेंट को बहुत दूर की बात मानकर इसकी योजना टाल देते हैं. लेकिन निवेश और बचत की दुनिया में समय सबसे बड़ा हथियार होता है. जितनी जल्दी रिटायरमेंट फंड बनाना शुरू करेंगे, कंपाउडिंग का उतना अधिक लाभ मिलेगा. सिर्फ EPF या EPS पर निर्भर रहने की बजाय अन्य इंवेस्टमेंट विकल्प पर जोर दें.

    August 21, 2026
  • 58 लाख का पैकेज, अपना घर और कार फिर भी नहीं मिला कोई दूल्हा…’दुल्हन की मंडी’ में फूट-फूटकर रोई महिला..

    58 लाख का पैकेज, अपना घर और कार फिर भी नहीं मिला कोई दूल्हा…’दुल्हन की मंडी’ में फूट-फूटकर रोई महिला..

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    आज के समय में भले ही महिलाएं अपने दम पर हर मुकाम हासिल कर रही हैं, लेकिन शादी के मार्केट में आज भी पुरानी सोच का दबदबा कायम है. चीन के एक फेमस ब्राइड मार्केट से सामने आए इस वीडियो ने इसी कड़वी सच्चाई को दिखाया है. यहां एक 38 साल की महिला अपने लिए लाइफ पार्टनर ढूंढने आई थी, लेकिन स्ट्रांगली फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट होने के बाद भी उसका दिल टूट ही गया.

    58 लाख का पैकेज भी नहीं दिला पाया जीवनसाथी (High Salary of 58 Lakhs Fails to Find Match)

    वायरल वीडियो में दिखाया गया है कि, महिला काफी एजुकेटेड है और एक बड़ी कंपनी में काम करती है. उसके पास अपना घर, शानदार कार और करीब 58 लाख रुपये का सालाना पैकेज है, लेकिन जब वो अपनी डिटेल्स लेकर मंडी में पहुंची, तो वहां मौजूद लड़कों और उनके फैमिली मेंबर्स ने उसकी एज सुनते ही शादी से मना कर दिया. इस सोशल शेमिंग (Social Shaming) और रिजेक्शन से दुखी होकर वो सबके सामने ही फफक-फफक कर रो पड़ी.

    ये भी पढ़ें:-सिर्फ 5 मिनट नहाना पड़ा इतना महंगा! महिला को लगा 1.30 लाख का जुर्माना, जानिए पूरा माजरा

    क्या है चीन का ‘ब्राइड मार्केट’ और कैसे करता है काम? (What is China’s ‘Bride Market’ and How Does Work?)

    चीन का ब्राइड मार्केट (Marriage Market) पब्लिक पार्कों में लगने वाला एक ट्रेडिशनल मार्केट है, जहां पैरेंट्स अपने बैचलर (Bachelor) बच्चों (खासकर 25 से 30 साल से अधिक उम्र के) के लिए लाइफ पार्टनर की तलाश करते हैं. सबसे फेमस ब्राइड मार्केट शंघाई के पीपुल्स पार्क (People’s Park) में हर वीकेंड को ये लगता है. यहां काम करने का तरीका बेहद यूनिक है. पैरेंट्स एक छाते पर अपने बेटे या बेटी का पूरा बायोडाटा (जैसे एज, हाइट, एजुकेशन, जॉब, सैलरी, घर और कार की डिटेल) कागज पर लिखकर टांग देते हैं. इसके बाद वो पार्क में घूम-घूमकर दूसरे बायोडाटा पढ़ते हैं. आपस में बातचीत करते हैं और सब कुछ मैच होने पर ही बात आगे बढ़ाते हैं, लेकिन यहां यूथ और कम उम्र की महिलाओं को पहली प्राथमिकता मिलती है, जबकि 30 पार कर चुकी सक्सेस महिलाओं को शेंग नू (Sheng Nu) यानी ‘लेफ्टओवर वुमन’ मानकर अक्सर रिजेक्ट कर दिया जाता है.

    इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस छिड़ गई कि, ‘समाज में महिलाओं की सक्सेस को शादी के बीच क्यों लाया जाता है. कई लोगों ने महिला का सपोर्ट करते हुए कहा कि, ‘एज के आधार पर किसी की कैपेबिलिटी को रिजेक्ट गलत है.’ वहीं कुछ लोग ट्रेडिशन सोच का बचाव करते दिखे कि, ‘शादी में उम्र और परिवार बसाने की कैपेसिटी सबसे ज्यादा मायने रखती है.’

     

     

    August 21, 2026
  • अब ज्यादा SIM रखने वालों पर लगाम कसेगी DoT, आपकी ये 1 गलती कनेक्शन कर सकती है सस्पेंड.

    अब ज्यादा SIM रखने वालों पर लगाम कसेगी DoT, आपकी ये 1 गलती कनेक्शन कर सकती है सस्पेंड.

    क्या आपके पास 1 से ज्यादा सिम है? क्या आप जानते हैं कि एक व्यक्ति अपने पास कितनी सिम रख सकता है? अगर नहीं, तो इस बारे में जरूर जान लें. दरअसल, दूरसंचार विभाग (DoT) ने साइबर फ्रॉड, डिजिटल धोखाधड़ी और फर्जी मोबाइल कनेक्शन पर लगाम कसने के लिए सिम कार्ड नियमों के सख्त पालन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है.

    विभाग की ओर से टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि निर्धारिक सीमा पूरी कर चुके ग्राहकों को नया मोबाइल कनेक्शन जारी न किया जाए. इसके लिए डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) का इस्तेमाल किया जाएगा, जहां सीमा तक पहुंच चुके ग्राहकों की पहचान और फोटो उपलब्ध रहेगी.

    क्या है DoT का नया नियम?

    हमारे देश में मोबाइल कनेक्शनों की अधिकतम सीमा पहले से ही तय है. सामान्य राज्यों में एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है. वहीं, असम, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में ये सीमा 6 तय की गई है. अब DoT ने इस नियम को सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए नया मॉनिटरिंग मैकेनिज्म लागू करने का फैसला किया है.

    कैसे काम करेगा नया सिस्टम?

    दूरसंचार विभाग के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) में विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए ग्राहक डेटा का विश्लेषण किया जाता है. इससे पता चलता है कि किसी व्यक्ति के नाम पर कुल कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं. अब इस प्लेटफॉर्म पर उन ग्राहकों की प्रतिनिधि तस्वीर भी उपलब्ध कराई जाएगी, जो तय सीमा तक पहुंच चुके हैं. इससे नया सिम जारी करने से पहले ग्राहक की पहचान आसान हो जाएगी.

    लिमिट से ज्यादा सिम होने पर क्या होगा?

    DoT ने इस बारे में स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी व्यक्ति का लिमिट से ज्यादा सिम है और कोई नया कनेक्शन एक्टिव हो गया है, तो उसे तुरंत सस्पेंड कर दिया जाए. ये कनेक्शन तब तक बंद रहेगा, जब तक अतिरिक्त सिम से जुड़े मामले का समाधान नहीं हो जाता.

    30 नवंबर तक पूरा होगा इंटीग्रेशन

    सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे 30 नवंबर 2026 तक इस व्यवस्था को अपने सब्सक्राइबर एनरोलमेंट और सिम एक्टिवेशन सिस्टम के साथ पूरी तरह जोड़ दें. इसके बाद नया सिम जारी करने की प्रक्रिया में रियल टाइम जांच की जा सकेगी.

    क्यों उठाया जा रहा है ये कदम

    पिछले कुछ सालों में फर्जी सिम कार्ड के जरिए बैंकिंग फ्रॉड, साइबर ठगी, फर्जी कॉल और ऑनलाइन क्रिमिनल तेजी से बढ़े हैं. कई मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम पर बड़ी संख्या में मोबाइल कनेक्शन लेकर उनका गलत इस्तेमाल किया गया. सरकार का मानना है कि मोबाइल कनेक्शनों पर बेहतर निगरानी से ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी.

    August 21, 2026
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