दवाइयां हमारी रोजमर्रा की जरूरतों का हिस्सा हैं। अक्सर लोग सुविधा के लिए इन्हें ऐसी जगह रख देते हैं, जहां जरूरत पड़ने पर तुरंत मिल जाएं। खासकर रात में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां लोग अपने बिस्तर या सिरहाने के पास रख लेते हैं। हालांकि, वास्तु शास्त्र में दवाइयों को रखने की जगह को लेकर कुछ मान्यताएं बताई गई हैं। वास्तु अनुसार, सही स्थान पर रखी गई चीजें घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करती हैं
। जानिए कहां दवाइयां रखना चाहिए और कहां नहीं।
सिरहाने रखने की क्यों है मनाही?
कई लोग रात में जरूरत पड़ने की वजह से दवाइयों को अपने बिस्तर के पास या तकिए के नीचे रख लेते हैं। लेकिन वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि दवाइयां बीमारी से जुड़ी वस्तु होती हैं, इसलिए इन्हें सोने की जगह के आसपास रखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है। इससे मानसिक तनाव, बेचैनी और चिंता जैसी परेशानियां बढ़ने की मान्यता है।
रसोई में न रखें दवाइयां
वास्तु शास्त्र में रसोई को घर का महत्वपूर्ण और पवित्र स्थान माना गया है, क्योंकि यहीं भोजन तैयार होता है। इसलिए यहां दवाइयां रखना उचित नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे घर के स्वास्थ्य और सुख-शांति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
पूजा स्थल से रखें दूर
पूजा घर को सकारात्मक ऊर्जा का स्थान माना जाता है। ऐसे में दवाइयों को पूजा घर या उसके आसपास रखने से बचने की सलाह दी जाती है। इन्हें किसी साफ और व्यवस्थित अलमारी में रखना बेहतर माना जाता है।
धन रखने वाली जगह पर न रखें
वास्तु मान्यताओं के अनुसार जिस स्थान पर पैसे, गहने या अन्य कीमती चीजें रखी जाती हैं, वहां दवाइयां रखना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इससे आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं
और अनावश्यक खर्च की स्थिति बन सकती है।
दवाई रखने की सही जगह
दवाइयों को घर में ऐसी जगह रखना चाहिए, जहां साफ-सफाई बनी रहे और जरूरत के समय आसानी से मिल जाएं। व्यवस्थित तरीके से रखी गई दवाइयां न केवल घर में सुविधा बनाए रखती हैं, बल्कि सामान को सही तरीके से रखने की आदत भी विकसित करती हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
बरसात के दिनों में बिलों में पानी भर जाने पर अक्सर कई जीव-जंतु बाहर निकलकर लोगों के घरों में घुसने लगते हैं. ऐसा ही एक जीव छछूंदर है, जो बरसात के सीजन में बहुत परेशान करता है. उसकी गंदी स्मेल और अजीब लोग हर किसी को परेशान करता है. जब वह अजीब आवाज निकालता हुआ घरों में घुसता है तो बच्चे उससे डर जाते हैं. वह ऐसा जीव है, जो आसानी से पिंजरे में भी नहीं घुसता. ऐसे में लोग इस बात से परेशान हो जाते हैं कि उसे बिना मारे घर से कैसे दूर भगाया जाए. आइए, आज हम आपको ऐसा ही एक घरेलू नुस्खा बताने जा रहे हैं. जिसे आजमाकर आप छछूंदर की समस्या से हमेशा के लिए निजात पा सकते हैं.
घर से छछूंदरों को भगाने का उपाय
छछूंदर भगाने के लिए आप घर में ही देसी उपाय (Chuchundar Bhagane Ke Upay) कर सकते हैं. इसके लिए आप पुदीने की पत्तियों या उसकी डंडियों का इस्तेमाल करें. असल में पुदीने की खास गंध छछूंदरों को बिल्कुल रास नहीं आती है. वे इसकी गंध महसूस करते ही दूर भाग खड़े होते हैं. ऐसे में आप अपने घर के अंदर, बाहर, खिड़की, रसोई और प्रमुख जगहों पर पुदीने को रख दें. ऐसा करने से छछूंदर आपके घर में घुसने की कभी सोचेंगे भी नहीं.
पुदीने की पत्तियों का करें इस्तेमाल
इस ट्रिक को इस्तेमाल करने के लिए आप पुदीने की ताजा पत्तियां लें. इसके बाद उन्हें घर के हर कोने पर एक-एक पत्ता रख दें. आप चाहें तो पुदीने की पत्तियों को सुखाकर उसका पाउडर भी घर की प्रमुख जगहों पर रख सकते हैं. इन दो तरीकों के अलावा तीसरा तरीका स्प्रे बनाने का है. आप पुदीने की पत्तियों और डंडियों को उबालकर उसके गर्म पानी को स्प्रे बोतल में भर लें.
स्प्रे से दूर भागते हैं छछूंदर
इसके बाद आप घर के तमाम एंट्री पॉइंट्स पर समय-समय पर इस स्प्रे को छिड़कते रहें. खासकर उन जगहों पर जरूर छिड़कें, जहां से चूहों और छछूंदरों के आने का अंदेशा हो. इस ट्रिक की वजह से उनके आवागमन के सारे रास्ते ब्लॉक हो जाएंगे और वे आपके घर की ओर झांकेंगे भी नहीं. इस उपाय से आपको छछूंदरों के साथ ही चूहों से भी निजात मिल जाएगी.
घर में पनपने न दें गंदगी
इसके साथ ही आप छछूंदरों से निजात पाने के लिए कुछ ओर भी उपाय कर सकते हैं. सबसे पहले तो आप दरवाजों और खिड़कियों के आसपास जाली लगवा लें. दरवाजे के नीचे इतनी जगह न छोड़ें कि वहां से चूहे या छछूंदर अंदर घुस सकें. घर में कूड़ा इकट्ठा न होने दें. कूड़े की गंध चूहों और छछूंदरों को बहुत आकर्षित करती है. अगर गंदगी नहीं होगी तो उनका आना भी काफी हद तक रुक जाएगा.
अगर आप अक्सर ट्रैवल करते हैं और होटल या एयरपोर्ट पर फ्री वाई-फाई का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. माइक्रोसॉफ्ट की थ्रेट इंटेलिजेंस टीम ने एक खतरनाक साइबर अटैक अभियान ‘CaptiveCrunch’ को लेकर दुनिया भर के यात्रियों को अलर्ट जारी किया है. रूसी हैकर्स का एक ग्रुप होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के वाई-फाई नेटवर्क को निशाना बना रहा है. यह हैकिंग हमला इतना खतरनाक है कि हैकर्स आपके लैपटॉप या फोन का पासवर्ड चुराने के साथ-साथ ऑडियो और वीडियो भी रिकॉर्ड कर सकते हैं.
क्या है ‘CaptiveCrunch’ और यह कैसे काम करता है?
माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, इस हैकिंग अभियान को Storm-2945 नाम का ग्रुप चला रहा है, जो रूस के कुख्यात हैकर ग्रुप ‘माइडनाइट ब्लिजार्ड’ (APT29 या Cozy Bear) से जुड़ा हुआ है. यह हमला मुख्य रूप से कॉर्पोरेट ट्रैवलर्स को निशाना बनाकर किया जा रहा है.
नेटवर्क हैक करना: हैकर्स सबसे पहले होटल के राउटर या उस सिस्टम को हैक करते हैं जिससे वाई-फाई का लॉगिन पेज (Captive Portal) खुलता है.
नकली लॉगिन पेज: जब कोई यूजर वाई-फाई से कनेक्ट करता है, तो उसके सामने गूगल या माइक्रोसॉफ्ट 365 जैसा दिखने वाला फर्जी लॉगिन पेज आ जाता है.
पासवर्ड चोरी: यूजर जैसे ही अपना पासवर्ड डालता है, उसकी ईमेल, वनड्राइव फाइल्स और कंपनी के डेटा का एक्सेस सीधे हैकर्स के पास चला जाता है.
फर्जी अपडेट के नाम पर मालवेयर का जाल
इस हमले की सबसे खतरनाक बात यह है कि हैकर्स यूजर्स को धोखा देने के लिए कई तरह के फर्जी पॉप-अप और यूटिलिटीज का सहारा लेते हैं.
यूजर के स्क्रीन पर ‘ब्राउजर अपडेट’, ‘विंडोज सिक्योरिटी चेक’ या ‘डायरेक्टएक्स/विजुअल सी++ इंस्टॉल’ करने के मैसेज आते हैं.
ये मैसेज बिल्कुल असली विंडोज या गूगल सर्विस की तरह दिखाई देते हैं.
जैसे ही यूजर इन फर्जी अपडेट्स पर क्लिक करता है, उसके डिवाइस में खतरनाक मालवेयर (Malware) डाउनलोड हो जाता है.
हैकर्स आपके डिवाइस में क्या-क्या कर सकते हैं?
माइक्रोसॉफ्ट ने चेतावनी दी है कि इस मालवेयर के जरिए हैकर्स आपके कंप्यूटर पर लगभग पूरा कंट्रोल हासिल कर लेते हैं.
ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग: हैकर्स आपके वेबकैम और माइक को चालू करके आपकी बातें और वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं.
पासवर्ड और कुकीज चोरी: ब्राउजर में सेव किए गए सभी पासवर्ड और बैंकिंग कुकीज चुरा सकते हैं.
स्क्रीनशॉट और की-स्ट्रोक्स: आप कीबोर्ड पर क्या टाइप कर रहे हैं (Keylogging), हैकर्स उसे ट्रैक कर सकते हैं और आपकी स्क्रीन के स्क्रीनशॉट ले सकते हैं.
होटल वाई-फाई अटैक से कैसे बचें?
माइक्रोसॉफ्ट ने यात्रियों और कंपनियों के लिए कुछ बेहद जरूरी सुरक्षा उपाय बताए हैं:
पब्लिक वाई-फाई से बचें: जब भी संभव हो, होटल या एयरपोर्ट के वाई-फाई के बजाय अपने फोन का पर्सनल मोबाइल हॉटस्पॉट इस्तेमाल करें.
कोई अपडेट न डाउनलोड करें: वाई-फाई कनेक्ट करते ही अगर कोई ब्राउजर या सॉफ्टवेयर अपडेट करने का मैसेज आए, तो उस पर भूलकर भी क्लिक न करें.
ऑफिशियल वेबसाइट का इस्तेमाल करें: किसी भी अपडेट के लिए हमेशा सॉफ्टवेयर की आधिकारिक वेबसाइट या सिस्टम सेटिंग्स का ही उपयोग करें.
एन्क्रिप्टेड प्राइवेट कनेक्शन (VPN): अगर पब्लिक वाई-फाई इस्तेमाल करना बहुत जरूरी हो, तो हमेशा एक सुरक्षित और भरोसेमंद VPN का उपयोग करें.
मानसून का मौसम जहां एक ओर चिलचिलाती गर्मी से राहत दिलाता है, तो वहीं दूसरी तरफ कई बार यह आपके इंटरनेट और WiFi नेटवर्क की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा देता है. बारिश के मौसम में कई बार जब तेज बरसात होती है, तो स्मार्टफोन से लेकर ब्रॉडबैंड की इंटरनेट स्पीड अचानक कम हो जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बादलों के बरसते ही आपका इंटरनेट अचानक सुस्त क्यों हो जाता है?
टेक्नोलॉजी की दुनिया में इस समस्या को रेन फेड कहते हैं. आइए जानते हैं इस समस्या के पीछे क्या कारण होता है और इससे बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए.
बारिश में इंटरनेट स्लो होने के कारण
रेन फेड
वाई-फाई, सैटेलाइट और मोबाइल नेटवर्क रेडियो तरंगों के जरिए काम करते हैं. जब हवा में बारिश की बूंदें होती हैं, तो वे इन तरंगों के रास्ते में बाधा बनती हैं. पानी की बूंदें सिग्नल को सोख लेती हैं और उन्हें फैला देती हैं, जिससे सिग्नल कमजोर होने लगता है.
वहीं 5G और वाई-फाई सिग्नल काफी हाई फ्रीक्वेंसी पर काम करते हैं. ये सिग्नल बहुत तेज स्पीड तो देते हैं, लेकिन बारिश और नमी के संपर्क में आते ही सबसे जल्दी प्रभावित होते हैं.
भारी बारिश के कारण अंडरग्राउंड या बाहरी केबलों में पानी घुसने का भी खतरा बना रहता है. तारों में नमी आने से न सिर्फ स्पीड स्लो होती है, बल्कि नेटवर्क में बार-बार रुकावट भी आने लगती है.
तेज आंधी-तूफान और बारिश के कारण इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के बाहरी डिवाइसों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे पूरे इलाके का नेटवर्क प्रभावित हो जाता है.
कौन-सा कनेक्शन है बारिश में बेस्ट?
फाइबर ऑप्टिक
बारिश के मौसम में फाइबर इंटरनेट सबसे ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है. इसमें डेटा रेडियो वेव की जगह लाइट सिग्नल के जरिए केबल से यात्रा करता है, जिस पर बारिश या हवा का कोई असर नहीं पड़ता.
5G और 4G मोबाइल डेटा
बारिश के दिनों में मोबाइल डेटा की स्पीड में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. 5G की फ्रीक्वेंसी ज्यादा होने के कारण यह बारिश से जल्दी प्रभावित होता है.
सैटेलाइट इंटरनेट
खराब मौसम में सैटेलाइट कनेक्शन सबसे ज्यादा कमजोर साबित होते हैं, क्योंकि बादलों और बारिश के बीच से सिग्नल आने-जाने में भारी रुकावट होती है.
बारिश के मौसम में स्लो इंटरनेट की समस्या को कैसे ठीक करें?
अगर बारिश के दौरान आपका वाई-फाई ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो आप कुछ आसान टिप्स की मदद से इंटरनेट स्पीड को तेज कर सकते हैं-
5GHz बैंड पर स्विच करें
अगर आपका राउटर डुअल-बैंड है, तो अपने डिवाइस को 2.4GHz की जगह 5GHz बैंड से कनेक्ट करें. यह कम भीड़भाड़ वाला बैंड है और बेहतर स्पीड देता है.
राउटर को रीस्टार्ट करें
किसी भी तकनीकी गिल्च या अस्थाई सिग्नल समस्या को दूर करने के लिए अपने मोडेम और राउटर को कुछ सेकेंड के लिए बंद करके फिर से ऑन करें.
राउटर की जगह बदलें
राउटर को किसी ऊंची जगह पर रखें. इसे मोटी दीवारों, धातु की चीजों और बंद कोनों से दूर रखें जिससे सिग्नल घर में सही तरीके से फैल सके.
गैर-जरूरी डिवाइसेज को हटाएं
नेटवर्क पर लोड कम करने के लिए उन फोन, टीवी या गैजेट्स का वाई-फाई बंद कर दें जिनका आप उस समय इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.
वाई-फाई एक्सटेंडर
अगर घर के किसी हिस्से में सिग्नल कमजोर आ रहा है, तो सिग्नल रेंज बढ़ाने के लिए एक्सटेंडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
चीन अपनी टेक ताकत और सस्ती मैन्युफैक्चरिंग के दम पर ह्यूमनॉइड रोबोट्स यानी इंसानों जैसे दिखने और काम करने वाले रोबोट्स के ग्लोबल हब बनने की अंधी दौड़ में शामिल हो चुका है. फैक्ट्रियों की असेंबली लाइन से लेकर बड़े-बड़े वेयरहाउस तक चीन इन मशीनी इंसानों को असल दुनिया के कामों में उतार रहा है. इसी बूम के बीच चीन की दिग्गज रोबोटिक्स कंपनी Unitree अब IPO की रेस में है. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि आखिर चीन रोबोट्स पर इतना बड़ा दांव क्यों लगा रहा है? क्या वो अमेरिका की टेस्ला जैसी कंपनियों को पछाड़कर रोबोटिक्स का दुनिया में किंग बनने की कोशिश कर रहा है? और क्या ये रोबोट्स सच में हमारी फैक्ट्रियों और आम जिंदगी में एंट्री करने के बहुत ही करीब आ चुके हैं?
चीन की रोबोटिक्स कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स ह्यूमनॉइड रोबोट की रेस में एक बड़ा नाम बनकर उभर रही है. भले ही चीन से बाहर लोग इस कंपनी का नाम ज्यादा न जानते हों, लेकिन इसके रोबोट्स के वीडियो इंटरनेट पर छाए हुए हैं. सुपरह्यूमन जैसे स्टंट और बैकफ्लिप करते यूनिट्री के रोबोट्स को करोड़ों लोग देख चुके हैं. अब यूनिट्री रोबोटिक्स एक बड़ा फाइनेंसियल कदम उठाने जा रही है. अब ये कंपनी शंघाई स्टॉक एक्सचेंज में अपना IPO लाने की तैयारी में है. द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, गुरुवार को यूनिट्री ने अपने शेयरों की कीमत लगभग 22 डॉलर प्रति शेयर तय की है, जिससे वह करीब 900 मिलियन डॉलर जुटाने की योजना बना रही है.
9 अरब डॉलर की वैल्यूएशन
इस डील के साथ ही यूनिट्री रोबोटिक्स की वैल्यूएशन करीब 9 अरब डॉलर पहुंच जाएगी. हालांकि, टेक जगत के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह टेक्नोलॉजी सच में एक बड़े बिजनेस में बदल सकती है? भले ही यूनिट्री के रोबोट तेजी से बेहतर हो रहे हैं, लेकिन क्या आने वाले समय में आम लोग और कंपनियां लाखों की संख्या में ये रोबोट खरीदेंगी, यह अभी साफ नहीं है.
रिसर्च फर्म Omdia के एक्सपर्ट्स लियान जी सू के मुताबिक, यूनिट्री का यह स्टॉक सेल पूरे रोबोटिक्स सेक्टर के लिए एक बड़ा टेस्ट साबित होगा. इससे यह समझ आएगा कि शेयर मार्केट ह्यूमनॉइड रोबोट्स जैसे उभरते और शुरुआती टेक सेक्टर को किस नजरिए से देखता है.
फिजिकल AI का बढ़ता मार्केट
रोबोट्स को इंसानों, सामानों, कमरों और डेली के कामों को समझने के लिए असल दुनिया में सीखना पड़ता है. इस टेक्नोलॉजी को एम्बॉडीड एआई या फिजिकल एआई कहा जाता है.
इन्वेस्टमेंट रिसर्च फर्म CLSA की हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोट मार्केट साल 2030 तक 69 अरब डॉलर का हो सकता है, जो इस साल मात्र 2 अरब डॉलर के करीब है.
बढ़ती टक्कर और घटता मुनाफा
2026 के पहले क्वाटर में कड़ी टक्कर और कम मांग के कारण यूनिट्री की ग्रोथ थोड़ी धीमी रही. बढ़ती टक्कर और रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर ज्यादा खर्च करने की वजह से पहली तिमाही में कंपनी का मुनाफा 55% तक कम हो गया.
चीन बनाम अमेरिका: रोबोटिक्स की जंग
यूनिट्री की यह लिस्टिंग इसलिए खास है क्योंकि यह चीन के मेनलैंड स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने वाली पहली ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स कंपनी है.
चीन रोबोट्स के मास प्रोडक्शन में काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है:
Omdia के अनुमान के अनुसार, चीनी निर्माताओं ने इस साल की पहली छमाही में करीब 18,500 ह्यूमनॉइड रोबोट बेचे.
वहीं इस पीरियड में अमेरिकी कंपनियों ने सिर्फ 4,000 रोबोट शिप किए.
अगर चीन इसी रफ्तार से कम लागत में रोबोट बनाता रहा, तो वह अमेरिकी कंपनियों के मास प्रोडक्शन में पहुंचने से पहले ही एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग बेस तैयार कर लेगा. लेकिन, अमेरिका की टेस्ला, Figure AI, एजिलिटी रोबोटिक्स जैसी कंपनियां बड़ा निवेश कर रही हैं. वहीं Nvidia फिजिकल एआई के लिए जरूरी चिप्स और एआई सिस्टम का नेतृत्व कर रही है.
चीन ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स में इतना भारी निवेश क्यों कर रहा है?
चीन रोबोटिक्स सेक्टर में दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनना चाहता है. ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोट मार्केट 2026 में करीब 2 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 69 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है, जैसा पहले बताया गया है. चीन चाहता है कि अमेरिका के बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन शुरू करने से पहले पहले वह कम लागत और तेज स्पीड में रोबोट बनाकर दुनिया के बाजार पर बढ़त बना ले.
यूनिट्री दूसरे चीनी रोबोटिक्स कंपनियों से अलग क्यों है?
यूनिट्री चीन के शेयर मार्केट में लिस्ट होने वाली पहली ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स कंपनी रेस में है. इसके रोबोट्स के वायरल स्टंट्स इंटरनेट पर काफी चर्चा का विषय बने हैं. इसके साथ ही बीते साल 2025 में यूनिट्री ने दुनिया में सबसे ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट्स बेचे, इसका रेवेन्यू 4 गुना बढ़कर 250 मिलियन डॉलर पहुंचा और यह एक प्रॉफिटेबल यानी लाभ कमाने वाली कंपनी बन गई है.
फैक्ट्रियों और दूसरे बिजनेस में ह्यूमनॉइड रोबोट्स बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने के कितने करीब हैं?
रोबोट्स का हुनर और AI तेजी से सुधर रहा है, लेकिन बड़े पैमाने पर इनका इस्तेमाल होने में अभी समय लग सकता है. हालांकि चीन ने 2026 की पहली छमाही में 18,500 रोबोट्स की डिलीवरी की है, लेकिन कंपनियां और दूसरे कस्टमर्स इन्हें महंगे दामों में खरीदने और रोजाना के काम में इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं या नहीं, यह टेस्ट होना बाकी है.
क्या चीनी कंपनियां अमेरिकी फर्मों को पीछे कर सकती हैं?
चीन के पास प्रोडक्शन की तेजी और सस्ती मैन्युफैक्चरिंग जैसी शक्ति है. इसका उदाहरण है कि साल 2026 के पहले 6 महीनों में चीन ने 18,500 रोबोट बनाए, वहीं अमेरिका ने सिर्फ 4,000. लेकिन अमेरिका के पास बेहतर AI और एडवांस्ड चिप्स की ताकत है. अगर चीन इसी रफ्तार से प्रोडक्शन बढ़ाता रहा, तो वह मैन्युफैक्चरिंग में अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है, लेकिन एआई और सॉफ्टवेयर में अमेरिका अभी भी कड़ी टक्कर दे रहा है.
ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स की दौड़ में भारत कहां खड़ा है?
ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स की रेस में भारत फिलहाल उभरते हुए फेस में है. अमेरिका और चीन जैसे देश एडवांस फिजिकल AI, हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग और बड़े पैमाने पर फंडिंग के कारण इस सेक्टर में आगे हैं. हालांकि, भारत सॉफ्टवेयर टैलेंट, स्पेस टेक्नोलॉजी और सर्विस रोबोटिक्स में तेजी से कदम बढ़ा रहा है.
इस सेक्टर में भारत ने ISRO के गगनयान मिशन के लिए AI-संचालित हाफ-ह्यूमनॉइड रोबोट व्योममित्र तैयार किया है, जो गगनयान के अनक्रू टेस्ट मिशनों में हिस्सा लेगा. भारत के पास विश्वस्तरीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और AI रिसर्चर्स का नेटवर्क है, जो Embodied AI तैयार करने में मदद करेगा.
भारत का लक्ष्य तुरंत पश्चिमी या चीनी कंपनियों से सीधे एडवांस दो पैरों वाले इंडस्ट्रियल ह्यूमनॉइड्स में टक्कर लेने के जगत पर अपने स्पेशल तकनीक वाले रोबोट तैयार करना है. IndiaAI मिशन, PLI योजनाओं और IITs में R&D हब्स के विस्तार के साथ भारत इस अंतर को तेजी से छोटा कर रहा है.
हर साल 12 अगस्त को इंटरनेशनल यूथ डे मनाया जाता है
इस मौके पर जानिए जेन-जी की डिक्शनरी के 60 शब्द और उनके मायने
अगर आपको कोई CEO कहे तो इसका सीधा का मतलब समझेंगे कि वो आपको चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कह रहा है. अगर कोई आपके लिए G.O.A.T. शब्द का इस्तेमाल करे तो शायब आप भी इसका मतलब बकरी समझेंगे. लेकिन Gen-Z की भाषा में इनका यह मतलब नहीं है. इनकी भाषा में अगर आपको किसी चीज का CEO बताया जाता है तो इसका मतलब है कि आप उस क्षेत्र में माहिर है. वहीं, G.O.A.T. द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम का शॉर्ट फॉर्म है. इसका इस्तेमाल किसी अविश्वसनीय इंसान के बारे में बताने में किया जाता है. आज Gen-Z की डिक्शनरी की चर्चा इसलिए क्योंकि हर साल 12 अगस्त को दुनियाभर में इंटरनेशनल यूथ डे मनाया जाता है.
दुनियाभर में जेन-जी अपनी ताकत का लोहा मनवा रही है. सरकार पर सवाल खड़ा कर रही है. अपनी आवाज बुलंद कर रही है. आइए इंटरनेशनल यूथ डे के बहाने जानें जेन-जी की डिक्शनरी के 60 खास शब्द और उनका मतलब.
Glow Up: इसका अर्थ है बुरे से अच्छे में चीजों का बदलना.
CEO: अगर आप किसी चीज के सीईओ हैं, तो इसका मतलब है कि आपने उसमें महारत हासिल कर ली है, या आप उस क्षेत्र में माहिर हैं.
Fam: ‘फैम’ परिवार का शॉर्ट फॉर्म है, लेकिन इसका इस्तेमाल दोस्तों के लिए किया जाता है. या जिस तरह से मिलेनियल्स “ब्रो” का इस्तेमाल करते हैं, उस तरह से किया जा सकता है.
Cancel Culture: कैंसल कल्चर किसी बड़ी हस्ती, कंपनी या संगठन के कामों या विचारों को शर्मिंदा करने का एक रूप है.
स्टैन: यह स्टेनली का शॉर्ट फॉर्म नहीं है. यह “स्टॉकर” और “फैन” का कॉम्बिनेशन है. अगर आप किसी को ‘स्टैन’ कहते हैं, तो इसका मतलब है कि आप उसके प्रति जुनूनी हैं.
E-boy or E-girl: ये ऐसे यंगस्टर्स होते हैं जो एक खास “एस्थेटिक” फॉलो करते हैं जिसमें एनीमे, गोथ, पंक, स्केटर और K-pop कल्चर का मिक्स दिखता है.
W: ज्यादातर लोगों के लिए यह सिर्फ वर्णमाला का एक अक्षर है, लेकिन जेन-जी के लिए इसका सीधा सा मतलब है विन यानी “जीत”.
Dank: अगर कोई चीज डैंक है, तो वह हाई क्वालिटी वाली चीज है.
Ghosting: रिश्ते की शुरुआती बातचीत के दौरान यह शब्द आम है. घोस्टिंग का मतलब है कि आप उन्हें नजरअंदाज करना शुरू कर देते हैं या उनके संदेशों का जवाब देना बंद कर देते हैं.
Salty: Gen Z इस शब्द का इस्तेमाल तब करते हैं जब उन्हें जलन महसूस होती है।
Finna: फिन्ना, “मैं जा रहा हूं” कहने का एक संक्षिप्त रूप है.
Big Yikes: इस मुहावरे में बोलचाल की भाषा अपने आप में सब कुछ बयां करती है. ‘बिग यिक्स’ का इस्तेमाल तब किया जाता है जब आप इतने शर्मिंदा हों कि ‘यिक्स’ शब्द उसे पूरी तरह से व्यक्त न कर पाए.
Boujee: इस शब्द का प्रयोग तब किया जा सकता है जब आप किसी ऐसी चीज या व्यक्ति को बयां कर रहे हों जो असाधारण या दिखावटी हो.
Cap: कैप एक पुराना लेकिन आज भी प्रासंगिक शब्द है, जिसका अर्थ है झूठ बोलना. यदि आप “नो कैप” कहते हैं, तो इसका मतलब है कि आप सच्चे हैं.
High-Key: हाई-की होना लो-की होने का ठीक विपरीत है.
Cheugy: जो चीज भद्दी होती है और बिल्कुल भी चलन में नहीं होती.
Simp: कोई ऐसा व्यक्ति जो अपने क्रश के लिए हद से ज्यादा कुछ करता है.
Camp: कोई बहुत ओवर-द-टॉप, ड्रामैटिक फैशन आउटफिट जो जानबूझकर “बहुत एक्स्ट्रा” लगे, उसे “camp” कहा जा सकता है.
Woke: ‘वोके’ का अर्थ है राजनीतिक रूप से जागरूक होना.
TFW: इसका मतलब है “वह एहसास जब.” यानी जब आपको शुक्रवार को काम से जल्दी छुट्टी मिल जाती है.
Snack: स्नैक वह व्यक्ति होता है जो आपको आकर्षक लगता है.
Sip Tea: चाय की चुस्की लेना “गपशप फैलाने” का एक विकल्प है, जिसका अर्थ है कि आप गपशप में भाग लेने के बजाय आराम से बैठकर उसे सुन रहे हैं.
L: इसका मतलब है हार.
Take Several Seats: अगर कोई आपको वाकई परेशान कर रहा है, तो आप उनसे कह सकते हैं कि वे कुछ देर के लिए बैठ जाएं.
Drip: स्वैग कहने का एक और तरीका है. ड्रिप कूल या सेक्सी ट्रेंड/स्टाइल के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है.
Bop: जब कोई गाना या एल्बम असाधारण रूप से अच्छा हो.
Sheesh: अगर कोई अच्छा दिख रहा हो या कुछ अच्छा कर रहा हो तो उसकी तारीफ करने के लिए ‘शीश’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है.
Iykyk: यह संक्षिप्त रूप “अगर आप जानते हैं, तो आप जानते हैं” का संक्षिप्त रूप है. इसका प्रयोग आमतौर पर किसी मजाक या ऐसी बात के संदर्भ में किया जाता है जिसे केवल एक विशिष्ट समुदाय ही समझ सकता है.
Living Rent-Free: अगर कोई चीज आपके दिमाग में “बिना किराए के रह रही है”, तो इसका मतलब है कि आप उसके बारे में सोचना बंद नहीं कर सकते.
Bet: सरल शब्दों में कहें तो, इस बोलचाल के शब्द का अर्थ है “हां”। इसका प्रयोग किसी बात की पुष्टि करने के लिए किया जा सकता है और इसकी तुलना मिलेनियल्स के शब्द “वर्ड” से की जा सकती है.
Vibe Check: किसी व्यक्ति की एनर्जी या सायकोलॉजी की जांच करना.
Hits Different: जब कोई चीज अनोखी हो या सामान्य से बेहतर हो.
Periodt: किसी कथन के अंत में इसका प्रयोग करने से कही गई बात पर जोर या तीव्रता आती है.
Catch These Hands: झगड़ा शुरू करना. यह शब्द आम तौर पर विवादपूर्ण मामले में प्रयोग किया जाता है.
Drag: किसी को घसीटना या उसका मजाक उड़ाना, ये सब उसकी आलोचना या उपहास करने जैसा है। इसे किसी को चिढ़ाने के बराबर माना जा सकता है।
Finesse: का मतलब है किसी व्यक्ति या परिस्थिति को धोखा देना या हेरफेर करना ताकि आप जो चाहते हैं वह हासिल कर सकें.
Im Weak: मैं मर गया की तरह ही, यह भी एक ऐसा ही मुहावरा है जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब आपको कोई बात बेहद मजेदार लगती है.
Main Character: यह मुहावरा किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में बयां करने के लिए प्रयोग किया जाता है जो आमतौर पर लोकप्रिय और आकर्षक पर्सनैलिटी वाला होता है. इसका प्रयोग किसी ऐसे व्यक्ति के लिए भी किया जा सकता है जो हंगामा कर रहा हो, लेकिन जरूरी नहीं कि वह बुरे तरीके से ही हो.
Sis: “बहन” का संक्षिप्त रूप , इस शब्द का प्रयोग आमतौर पर किसी मित्र का अभिवादन करने के लिए किया जाता है, चाहे वह पुरुष हो या महिला.
Sending Me: अगर आपको कोई बात बेहद मजेदार लगे तो आप इस शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं.
Slaps: किसी चीज की असाधारणता का वर्णन करने के लिए प्रयोग किया जाता है.
Bussin: किसी स्वादिष्ट चीज का स्वाद चखने पर इस्तेमाल करने के लिए एक अनोखा शब्द.
Sus: “सस्पिशियस” का संक्षिप्त रूप, सस का आमतौर पर मतलब होता है कि कुछ उम्मीद के मुताबिक नहीं है, या संदिग्ध है.
Snatched: अगर कोई व्यक्ति आकर्षक दिख रहा है, तो वह वाकई में बहुत अच्छा लग रहा है, खासकर उसका पहनावा.
Guap: पैसा, और वो भी बहुत सारा.
Smol: कोई ऐसी चीज जो छोटी हो और ज्यादातर मामलों में बेहद प्यारी हो.
This Aint It, Chief: किसी बात के प्रति असहमति व्यक्त करने का एक और तरीका.
Extra: कोई ऐसा व्यक्ति जो सबसे अलग हो और चीजों को एक नए स्तर की भव्यता तक ले जाने का आनंद लेता हो.
Clapback: किसी बात पर आलोचना होने के बाद दिया गया जवाब या पलटवार.
G.O.A.T.: द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम का संक्षिप्त रूप है. एक ऐसा शॉर्ट फॉर्म जिसका उपयोग किसी अविश्वसनीय व्यक्ति का वर्णन करने के लिए किया जाता है.
Gatekeep: किसी जानकारी को छिपाकर रखना या किसी प्रवृत्ति, स्थान या वस्तु को दूसरों से गुप्त रखना ताकि उसकी विशिष्टता बनी रहे.
Red Flag: यहएक चेतावनी संकेत जो बताता है कि किसी व्यक्ति (आमतौर पर प्रेम संबंध में दिलचस्पती रखने वाले व्यक्ति) में समस्याग्रस्त लक्षण या व्यवहार मौजूद है.
Situationship: एक ऐसा रोमांटिक रिश्ता जो दोस्ती से बढ़कर तो है , लेकिन एक निश्चित, प्रतिबद्ध रिश्ते से कम है.
Delulu: भ्रमित का संक्षिप्त रूप. इसका प्रयोग अक्सर हास्यपूर्ण ढंग से अवास्तविक आशाओं या कल्पनाओं से चिपके रहने का वर्णन करने के लिए किया जाता है (जैसे, भ्रमित होना ही एकमात्र तरीका है या भ्रमित होना ही जीने का एकमात्र तरीका है).
Pick Me: एक ऐसा व्यक्ति जो किसी विशिष्ट समूह (आमतौर पर विपरीत लिंग) से मान्यता या स्वीकृति पाने के लिए बेताब रहता है और ऐसा व्यवहार करता है जैसे वह “अन्य लड़कियों/लड़कों जैसा नहीं है”.
Touch Grass: यह एक ऐसा वाक्यांश है जिसका इस्तेमाल किसी को इंटरनेट से दूर रहने और वास्तविक दुनिया से फिर से जुड़ने के लिए कहने के लिए किया जाता है, आमतौर पर इसलिए क्योंकि वे अलग तरह से व्यवहार कर रहे होते हैं या ऑनलाइन ड्रामा के प्रति जुनूनी होते हैं.
Era: जीवन में एक ऐसे समय को बताना करना जो किसी विशिष्ट लक्ष्य, सौंदर्यबोध या माहौल द्वारा परिभाषित हो (उदाहरण के लिए, “मैं अपने स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के दौर में हूं”)
Ick: किसी ऐसे व्यक्ति के प्रति अचानक घृणा या अरुचि की भावना, जिसके प्रति आप पहले आकर्षित थे, अक्सर किसी छोटी सी आदत या क्रिया के कारण उत्पन्न होती है.
Its Giving: किसी चीज़ के माहौल या खूबसूरती का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला यह शब्द है.
Real: किसी दूसरे व्यक्ति की बात से पूरी तरह सहमति या समर्थन व्यक्त करने का एक संक्षिप्त तरीका, जिसका अर्थ है “मैं समझता हूं और मैं भी ऐसा ही महसूस करता हूंं.”
रातभर सोने के बाद भी सुबह उठते समय थकान और सुस्ती महूसस होती है. 7 से 8 घंटे सोने के बाद भी सुबह थकान महसूस होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. जैसे खराब स्लीव क्वालिटी, तनाव, हिहाइड्रेशन, अनहेल्दी लाइफस्टाइल और शरीर में पोषण की कमी.
आप लाइफस्टाइल में कुछ आदतों में बदलाव करके सुबह उठने के बाद खुद को फ्रेश और एनर्जेटिक महसूस कर सकते हैं. आइए जानते हैं सुबह की थकान दूर करने के लिए क्या करना चाहिए.
सुबह उठने के बाद थकान क्यों महसूस होती है
रात में बार-बार नींद टूटना
7 से 8 घंटे सोना केवल काफी नहीं होता है, खराब स्लीप क्वालिटी की वजह से भी सुबह के समय सुस्ती महसूस होती है.
शरीर में आयरन, विटामिन्स की कमी
तनाव और चिंता
देर रात तक लैपटॉप या मोबाइल का इस्तेमाल करना
शरीर में पानी की कमी
सोने और जागने का अलग-अलग समय
थकान कैसे दूर करें
रोज एक ही समय पर सोएं और जागें
अच्छी नींद के लिए रोज एक ही तय समय पर सोना और उठना चाहिए. इससे शरीर का बॉडी क्लॉक बैलेंस रहता है. ऐसा करने से नींद की गुणवत्ता अच्छी होती है. रोजाना एक ही समय सोने और उठने पर सुबह के साथ सुस्ती और थकान महसूस नहीं होती है. छुट्टी के दिन भी अपने स्लीप शेड्यूल में बदलाव ना करें.
पानी पिएं
रातभर सोने के दौरान शरीर में पानी की कमी हो सकती है. सुबह उठते ही 1 से 2 गिलास पानी का सेवन करना चाहिए. पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है. जिस वजह से मेटाबॉलिज्म काफी एक्टिव रहता है. आप दिन की शुरुआत गुनगुने पाने से भी कर सकते हैं.
धूप
रोजाना 15 से 20 मिनट की हल्की धूप लें. रोजाना हल्की धूप में बैठने से शरीर को विटामिन डी मिलता है. विटामिन डी की मदद से रात को अच्छी नींद आती है.
हल्का वर्कआउट
सुबह उठते ही हल्का वर्कआउट कर सकते हैं जैसे योग, वॉक, ब्रीदिंग एक्सरसाइज आदि. इन एक्सरसाइज को करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है. जिससे मांसपेशियों में जकड़न कम होती है. पूरा दिन शरीर एक्टिव रहता है.
हेल्दी ब्रेकफास्ट
सुबह का नाश्ता नहीं छोड़ना चाहिए. नाश्ते में प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स जैसे अंडे, ओट्स, दही और फल का सेवन करना चाहिए. इससे शरीर को एनर्जी मिलती है. शरीर को सुस्ती भी कम होती है.
मॉड्युलर और आसानी से रिपेयर होने वाले लैपटॉप बनाने के लिए दुनियाभर में मशहूर कंपनी Framework के ग्राहकों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है. अगस्त की शुरुआत में कंपनी ने अपने सभी पंजीकृत यूजर्स को एक ईमेल भेजकर जानकारी दी कि उनके डेटाबेस में एक बड़ी सुरक्षा सेंधमारी (Data Breach) हुई है. अगर आपने कभी भी Framework से कोई प्रोडक्ट या एसेसरीज खरीदी है, तो आपकी निजी और संवेदनशील जानकारी अब हैकर्स के हाथ लग चुकी हो सकती है.
पहली नजर में ऐसा लग सकता है कि जब बैंक अकाउंट या पासवर्ड चोरी नहीं हुए, तो खतरा कैसा? लेकिन साइबर अपराध की दुनिया में केवल आपकी पहचान से जुड़ी जानकारी भी आपको आर्थिक रूप से कंगाल बनाने के लिए काफी होती है. आइए आसान और विस्तार से समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है, हैकिंग कैसे हुई, और बिना बैंक डेटा के भी आपके ऊपर क्या खतरे मंडरा रहे हैं.
हैकर्स के हाथ क्या लगा और क्या बच गया?
कंपनी द्वारा जारी आधिकारिक बयान और ईमेल के अनुसार, इस साइबर हमले में हैकर्स ग्राहकों के एक बड़े डेटाबेस को एक्सेस करने में कामयाब रहे हैं.
चुराई गई जानकारियां:
–
ग्राहकों का पूरा नाम (Full Name) –
ईमेल एड्रेस (Email Address) –
फोन नंबर (Phone Number) –
डिलीवरी और बिलिंग एड्रेस (Address) –
लॉगिन IP एड्रेस (Login IP Address)
सुरक्षित रही जानकारियां:
राहत की बात केवल इतनी है कि हैकर्स ग्राहकों के क्रेडिट/डेबिट कार्ड डिटेल्स, बैंक अकाउंट की जानकारी, यूपीआई आईडी या पासवर्ड तक नहीं पहुंच पाए हैं. यानी सीधे तौर पर हैकर्स आपके बैंक खाते से पैसे गायब नहीं कर सकते. लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप पूरी तरह सुरक्षित हैं.
हैकिंग कहां हुई: क्या Framework का खुद का सिस्टम कमजोर था?
इस पूरी घटना का सबसे अहम और तकनीकी पहलू यह है कि यह सेंधमारी सीधे Framework कंपनी के अपने प्राइमरी सर्वर पर नहीं हुई. Framework अपने बिजनेस डेटा एनालिसिस और रिपोर्टिंग के लिए ‘Metabase’ नाम की एक पॉपुलर थर्ड-पार्टी बिजनेस इंटेलिजेंस (Business Intelligence) कंपनी की सेवाओं का इस्तेमाल करता है. 3 अगस्त को Metabase के सिस्टम में एक बहुत ही गंभीर खामी का पता चला, जिसका फायदा उठाकर हैकर्स ने Metabase के क्लाउड पर मौजूद Framework के डेटाबेस में सेंध लगा दी. टेक और साइबर सिक्योरिटी की दुनिया में इस तरह के अटैक को ‘सप्लाई चेन अटैक’ (Supply Chain Attack) कहा जाता है. इसमें हैकर्स मुख्य कंपनी के मजबूत सिक्योरिटी वॉल को तोड़ने के बजाय, उससे जुड़े छोटे वेंडर्स, थर्ड-पार्टी ऐप्स या सर्विस प्रोवाइडर्स को निशाना बनाते हैं, जिनके पास मुख्य कंपनी का डेटा मौजूद होता है.
जीरो-डे (Zero-Day Vulnerability) क्या होता है?
Metabase के सिस्टम में जिस खामी के जरिए हैकर्स घुसे, उसे साइबर सुरक्षा में ‘जीरो-डे’ (Zero-Day) कहा जाता है. आसान शब्दों में समझें तो ‘जीरो-डे’ सॉफ्टवेयर या कोड में मौजूद एक ऐसी अज्ञात सुरक्षा खामी (Bug) होती है, जिसके बारे में खुद उस सॉफ्टवेयर को बनाने वाली कंपनी या उसकी सिक्योरिटी टीम को कोई जानकारी नहीं होती.
क्योंकि डेवलपर को इस कमी का पता ही नहीं होता, इसलिए इसके लिए कोई सुरक्षा पैच या अपडेट उपलब्ध नहीं होता. जब तक कंपनी को इस खामी की भनक लगती है और वे इसे ठीक करने का काम शुरू करते हैं, तब तक हैकर्स इसका फायदा उठाकर सिस्टम से डेटा चोरी कर चुके होते हैं. Metabase के वर्शन 1.58 और उससे ऊपर के सिस्टम इसी जीरो-डे की चपेट में आए थे.
बिना बैंक डिटेल चुराए भी आपको कंगाल कैसे बना सकते हैं हैकर्स?
कई लोगों को लगता है कि जब तक कार्ड नंबर या सीवीवी (CVV) लीक न हो, तब तक घबराने की जरूरत नहीं है. लेकिन हैकर्स के लिए नाम, पता, फोन नंबर और खरीदारी का इतिहास (Purchase History) सोने की खदान की तरह होता है.
चुराए गए डेटा के जरिए हैकर्स आपको इन तरीकों से नुकसान पहुंचा सकते हैं:
1. टारगेटेड फिशिंग अटैक (Targeted Phishing/Spear Phishing)
अब हैकर्स को पता है कि आपने Framework से लैपटॉप खरीदा है. वे आपको Framework की आधिकारिक दिखने वाली ईमेल आईडी से एक फर्जी ईमेल भेजेंगे. ईमेल में लिखा हो सकता है: “आपके लैपटॉप के मदरबोर्ड/बैटरी में खराबी पाई गई है, इसे मुफ्त में बदलने के लिए तुरंत अपनी डिटेल्स अपडेट करें.” इस तरह के ईमेल पर असली नाम और सही पते की वजह से कोई भी आसानी से विश्वास कर लेता है.
2. फेक डिलीवरी या कस्टम्स स्कैम
चूंकि हैकर्स के पास आपका डिलीवरी एड्रेस और फोन नंबर है, वे कूरियर कंपनी या कस्टम्स अधिकारी बनकर आपको एसएमएस या कॉल कर सकते हैं. वे दावा करेंगे कि आपका एक पार्सल अटका हुआ है और इसे री-रिलीज करने के लिए ₹50 या ₹100 की छोटी सी फीस देनी होगी. जैसे ही आप उस लिंक पर क्लिक करके पेमेंट करेंगे, आपकी बैंकिंग डिटेल्स उनके फर्जी पेमेंट पेज पर कैप्चर हो जाएंगी.
3. सोशल इंजीनियरिंग (Social Engineering)
हैकर्स आपके नाम, फोन नंबर और ईमेल का इस्तेमाल करके किसी टेलीकॉम कंपनी या बैंक के कस्टमर केयर को कॉल कर सकते हैं और आपकी पहचान बताकर आपका सिम कार्ड (SIM Swap) ब्लॉक या नया जारी कराने की कोशिश कर सकते हैं.
4. कस्टमाइज्ड मेलवेयर और फर्जी अपडेट
हैकर्स आपको Framework सपोर्ट टीम बताकर लैपटॉप का कोई “अति-आवश्यक सुरक्षा अपडेट” डाउनलोड करने के लिए कह सकते हैं. उस लिंक में छुपा मेलवेयर आपके लैपटॉप में इंस्टॉल होकर आपके पूरे कीबोर्ड (Keylogger) को ट्रैक कर सकता है, जिससे आपके सारे असली पासवर्ड और बैंकिंग पिन हैकर्स तक पहुँच जाएंगे.
अब आपको क्या करना चाहिए? (बचाव के जरूरी कदम)
अगर आपका अकाउंट भी इस डेटा लीक से प्रभावित हुआ है या आप Framework के यूजर हैं, तो तुरंत ये सावधानियां बरतें:
– संदिग्ध ईमेल से सावधान रहें:
Framework के नाम से आने वाले किसी भी ऐसे ईमेल पर भरोसा न करें जिसमें आपसे पासवर्ड, पर्सनल जानकारी या किसी लिंक पर क्लिक करने को कहा गया हो.
– सेंडर की ईमेल आईडी जांचें:
केवल Framework की आधिकारिक वेबसाइट या डोमेन से आए ईमेल ही सही होते हैं. किसी भी स्पेलिंग मिस्टेक वाले डोमेन से सतर्क रहें.
वसुरक्षा के लिहाज से अपने Framework अकाउंट का पासवर्ड तुरंत बदल दें और अगर आप वही पासवर्ड किसी दूसरी जगह इस्तेमाल करते हैं, तो उसे भी बदलें.
– टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) ऑन करें:
अपने सभी महत्वपूर्ण अकाउंट्स (जीमेल, बैंक ऐप्स आदि) पर 2FA चालू रखें.
– अज्ञात कॉल/एसएमएस पर प्रतिक्रिया न दें:
कूरियर, डिलीवरी या सपोर्ट के नाम से आने वाले किसी भी संदिग्ध फोन कॉल पर कोई व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी शेयर न करें.
सोचिए अगर किसी अपने के गुजर जाने के बाद भी आपके मोबाइल की स्क्रीन पर उनका वीडियो कॉल आने लगे. वे स्क्रीन पर बिल्कुल उसी तरह मुस्कुराएं, उसी जानी-पहचानी आवाज में बात करें, आपकी पुरानी यादों को ताजा करें और आपके नए सवालों का जवाब भी दें. सुनने में यह किसी हॉलीवुड या साइंस फिक्शन फिल्म का सीन लग सकता है, लेकिन आज की आधुनिक दुनिया में यह एक ठोस हकीकत बन चुका है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से अब उन लोगों के भी डिजिटल रूप या ‘AI Avatars’ बनाए जा रहे हैं, जो इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं. इस पूरी तकनीक और बिजनेस को दुनिया भर में ‘Grief Tech’ (दुख से उबरने वाली तकनीक) या ‘Deadbots’ कहा जा रहा है. यह तकनीक जहां एक तरफ गहरे सदमे में डूबे परिजनों को सुकून और सहारा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ इंसान की प्राइवेसी, कानूनी अधिकारों, नैतिकता और मानसिक सेहत पर बेहद गंभीर सवाल भी खड़े कर रही है. आइए इस पूरे विषय को बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं….
AI कंपनियां मृत लोगों के डिजिटल अवतार कैसे तैयार करती हैं?
आज के डिजिटल दौर में जब भी कोई व्यक्ति जीवित रहता है, तो वह जाने-अनजाने में इंटरनेट की दुनिया में अपना एक बहुत बड़ा ‘डिजिटल नक्शा’ छोड़ जाता है. इसे तकनीकी भाषा में डिजिटल फुटप्रिंट (Digital Footprint) कहते हैं. इसमें उस व्यक्ति की तस्वीरें, इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब पर अपलोड किए गए वीडियो, वॉट्सएप चैट्स, ईमेल, वॉयस नोट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स शामिल होते हैं. AI कंपनियां इसी पूरे डेटा को जमा करके मृत व्यक्ति का एक रोबोटिक या वर्चुअल रूप तैयार करती हैं. यह पूरी प्रक्रिया मुख्य रूप से तीन बड़े स्टेप्स में काम करती है:
स्टेप 1: डेटा कलेक्शन (Data Collection)
सबसे पहले परिजन या टेक कंपनियां उस व्यक्ति का हर संभव डेटा जुटाती हैं. इसमें उसके बोलने के ऑडियो रिकॉर्डिंग्स, पुराने वीडियो क्लिप्स, लिखे हुए मैसेज और हाई-क्वालिटी तस्वीरें शामिल होती हैं. जितना ज्यादा डेटा मिलेगा, AI अवतार उतना ही असली और सटीक बनेगा.
स्टेप 2: वॉयस क्लोनिंग और जनरेटिव AI (Voice Cloning & LLM)
डेटा मिलने के बाद एडवांस्ड AI सॉफ्टवेयर उस इंसान की आवाज के पैटर्न को गहराई से समझता है. वह यह देखता है कि व्यक्ति बोलते समय कहां रुकता था, उसकी आवाज का उतार-चढ़ाव कैसा था और वह किन शब्दों का इस्तेमाल ज्यादा करता था. इसके बाद ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल’ (LLM) को व्यक्ति की पुरानी चैट्स से ट्रेन किया जाता है ताकि AI जब भी कोई जवाब लिखे, तो उसकी भाषा और सोचने का तरीका बिल्कुल उसी व्यक्ति जैसा लगे.
स्टेप 3: 3D अवतार क्रिएशन (3D Avatar Creation)
आखिरी स्टेप में तस्वीरों और वीडियो की मदद से 3D डिजिटल मॉडल तैयार किया जाता है. यह मॉडल स्क्रीन पर दिखने में बिल्कुल असली इंसान जैसा लगता है. जब AI बोलता है, तो इस डिजिटल मॉडल के होंठ और चेहरे के एक्सप्रेशन उसी के हिसाब से हिलते हैं.
सबसे हैरान करने वाली बात: यह AI अवतार सिर्फ पुरानी रिकॉर्ड की गई बातें ही नहीं दोहराता, बल्कि अगर आप उससे कोई बिल्कुल नया सवाल पूछेंगे, तो वह उस मृत इंसान की सोच और स्वभाव के हिसाब से सोचकर नया जवाब भी दे सकता है.
‘Grief Tech’ क्या है और यह इंडस्ट्री कितनी तेजी से बढ़ रही है?
जब किसी इंसान के किसी बेहद करीबी (जैसे माता-पिता, बच्चा या दोस्त) की मृत्यु हो जाती है, तो वह इंसान बेहद गहरे शोक और डिप्रेशन से गुजरता है. इस दुख (Grief) को कम करने और लोगों को भावनात्मक सहारा देने के नाम पर जो मार्केट खड़ा हुआ है, उसे ही ‘Grief Tech’ कहा जाता है.
आज दुनिया भर में कई ऐसे स्टार्टअप्स और टेक प्लेटफॉर्म्स आ चुके हैं जो यह सर्विस दे रहे हैं और इसका कारोबार अरबों डॉलर तक पहुंच रहा है:
StoryFile: यह एक बहुत ही अनोखा प्लेटफॉर्म है. यह लोगों के जीवित रहते ही उनके जीवन के अनुभव, यादें और जवाब वीडियो फॉर्मेट में रिकॉर्ड कर लेता है. व्यक्ति के जाने के बाद परिवार वाले स्क्रीन पर उससे कोई भी सवाल पूछ सकते हैं. AI उनके रिकॉर्डेड वीडियो में से सबसे सही जवाब निकालकर स्क्रीन पर प्ले कर देता है.
HereAfter AI: यह एक वॉयस-बेस्ड ऐप है. इसमें इंसान जीवित रहते अपनी आवाज में अपनी जीवन कहानी रिकॉर्ड करता है. उसके जाने के बाद बच्चे या पोते-पोतियाँ एक ऐप के जरिए उससे बातचीत कर सकते हैं और किस्से सुन सकते हैं.
Somnium Space: यह मेटावर्स की दुनिया का एक प्लेटफॉर्म है जो ‘Live Forever’ (हमेशा जीवित रहें) नाम के फीचर पर काम कर रहा है. इसमें इंसान के चलने-फिरने, हाथ हिलाने और बोलने के तरीके का पूरा 3D अवतार बना दिया जाता है, जिससे आप वर्चुअल रियलिटी (VR) हेडसेट पहनकर मिल सकते हैं.
लोग अपने खोए हुए प्रियजनों की कमी को पूरा करने के लिए भावनात्मक रूप से कुछ भी खर्च करने को तैयार हो जाते हैं, इसी वजह से यह इंडस्ट्री दुनिया भर में बहुत तेजी से पैर पसार रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्लोबल लेवल पर ‘ग्रीफ टेक’ (Grief Tech) और मृत्यु के बाद डिजिटल पहचान सुरक्षित रखने वाला ‘डिजिटल आफ्टरलाइफ’ मार्केट तेजी से बढ़ रहा है. इस पूरे बाजार का कुल वैल्यूएशन लगभग 123 अरब डॉलर से 126 अरब डॉलर (यानी 1,17,36,30,94,50,000 रुपये से ज्यादा) का हो चुका है. इसमें बड़ा हिस्सा डेथ-टेक और डिजिटल लेगेसी बनाने वाली इंडस्ट्री का है. वहीं दूसरी तरफ, तकनीक की मदद से दी जाने वाली पारंपरिक शोक परामर्श (Grief Counseling) सर्विसेज का बाजार करीब 4.03 अरब डॉलर (लगभग 3,84,53,11,14,500 करोड़ रुपये) का है.
मौत के बाद आपकी आवाज, फोटो और डेटा का असली मालिक कौन है?
यह इस पूरी बहस का सबसे उलझा हुआ, संवेदनशील और कानूनी रूप से पेचीदा हिस्सा है. जब तक हम जीवित रहते हैं, तब तक हमारी फोटो, आवाज और पर्सनल डेटा पर हमारा अपना मालिकाना हक होता है. लेकिन इंसान की मृत्यु के बाद उस डेटा का क्या होगा, इस पर दुनिया के ज्यादातर देशों में कोई साफ कानून नहीं है.
डिजिटल लेगेसी (Digital Legacy) का न होना
जैसे लोग अपनी जमीन, मकान या बैंक बैलेंस के लिए वसीयत (Will) बनाते हैं, वैसे डिजिटल जायदाद के लिए अभी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. ज्यादातर देशों के कानूनों में यह साफ नहीं है कि मौत के बाद किसी व्यक्ति के सोशल मीडिया अकाउंट्स, पर्सनल चैट्स और फोटोज का लीगल मालिक कौन बनेगा.
टेक कंपनियों की अपनी शर्तें
गूगल, मेटा (फेसबुक/इंस्टाग्राम) और एप्पल जैसी बड़ी कंपनियों की नीतियां अलग हैं. वे आमतौर पर मृत व्यक्ति के पासवर्ड या डेटा को उनके परिवार वालों को भी नहीं देतीं. वे सुरक्षा कारणों से उस अकाउंट को बंद कर देती हैं या उसे ‘मेमोरियलाइज्ड’ (यादगार) पेज में बदल देती हैं.
सबसे बड़ा सवाल: सहमति (Consent) का मुद्दा
सोचिए कि अगर कोई व्यक्ति जीते-जी यह बिल्कुल नहीं चाहता था कि उसकी मौत के बाद उसका कोई AI रोबोट बनाया जाए, लेकिन उसके जाने के बाद उसके परिवार वाले या दोस्त उसका AI अवतार बनवा लेते हैं – तो क्या यह सही है? किसी की मर्जी के बिना उसकी आवाज और चेहरे का इस्तेमाल करके AI अवतार बनाना उसकी प्राइवेसी और सम्मान का सीधा हनन माना जा रहा है.
AI अवतार से बात करना: दुख में राहत या दिमागी सेहत के लिए खतरा?
मनोवैज्ञानिकों (Psychologists) और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर बहुत तीखी बहस छिड़ी हुई है कि क्या मृत प्रियजनों से AI के जरिए बात करना मानसिक सेहत के लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह.
राहत देने वाले पहलू
अधूरेपन का अहसास खत्म होना: कई बार हादसों या अचानक हुई मौतों में लोग अपने प्रियजनों से आखिरी बार बात भी नहीं कर पाते. ऐसे में AI अवतार से बात करके वे अपनी भावनाएं जाहिर कर पाते हैं, जिससे उन्हें मन का बोझ हल्का महसूस होता है.
यादों को संजोकर रखना: छोटे बच्चों के लिए, जिन्होंने बहुत कम उम्र में अपने माता-पिता या दादा-दादी को खो दिया है, यह तकनीक उनके पूर्वजों को जानने और उनकी आवाज सुनने का एक माध्यम बन सकती है.
खतरे और मानसिक नुकस
सच को स्वीकार न कर पाना: मनोविज्ञान के नियम कहते हैं कि इंसान के मानसिक विकास के लिए यह बेहद जरूरी है कि वह ‘मौत’ के कड़वे सच को स्वीकार करे और अपनी जिंदगी में आगे बढ़े. लेकिन अगर सामने फोन पर वही इंसान रोज बात कर रहा हो, तो दिमाग इस सच को कभी स्वीकार ही नहीं कर पाएगा.
डिजिटल लत और आभासी दुनिया में खो जाना: लोग असली दुनिया के अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से कट सकते हैं और दिन-रात उस AI अवतार से बात करने के आदी हो सकते हैं. इससे वे बहुत गहरे अवसाद (Depression) और मानसिक भ्रम (Hallucinations) का शिकार हो सकते हैं.
गलत बातें बोलने का खतरा: AI आखिरकार एक सॉफ्टवेयर है. अगर बातचीत के दौरान वह अवतार कोई अजीब, डरावनी या गलत बात बोल दे, तो इससे परिजनों को ऐसा दिमागी सदमा लग सकता है जिससे उबरना नामुमकिन हो जाए.
इस टेक्नोलॉजी की भविष्य की चुनौतियां
‘Grief Tech’ सिर्फ एक भावुक सर्विस नहीं है, इसके पीछे कई बड़े नैतिक और सामाजिक खतरे छिपे हुए हैं:
Commercial Exploitation: कई AI कंपनियां लोगों के दुख और लाचारी का फायदा उठाकर उनसे भारी-भरकम सब्सक्रिप्शन फीस वसूल सकती हैं. सोचिए कितना अजीब और दर्दनाक होगा अगर कोई AI अवतार आपसे बात करते-करते बीच में किसी प्रोडक्ट का विज्ञापन (Advt) करने लगे.
Deepfake & Cyber Fraud: अगर किसी मृत व्यक्ति की आवाज और चेहरे का डेटा गलत हाथों में चला जाए, तो साइबर अपराधी उसका गलत वीडियो बनाकर रिश्तेदारों से पैसे ठग सकते हैं या कोई बड़ा अपराध अंजाम दे सकते हैं.
Digital Immortality का डर: क्या इंसान को हमेशा के लिए एक रोबोट के रूप में जीवित रखना सही है? कई दार्शनिकों और विचारकों का मानना है कि जीवन और मृत्यु प्रकृति का एक स्वाभाविक चक्र है. तकनीक के जरिए ‘डिजिटल आत्माएं’ बनाना प्रकृति के नियमों से खिलवाड़ करने जैसा है.
क्या आप मानसिक रूप से तैयार हैं यह सुनने के लिए कि केवल ₹50 की दैनिक बचत से ही नहीं, बल्कि ₹35 लाख का विशाल धनराशि जमा करने का जादू भी संभव है? यह कोई जादू नहीं, बल्कि वित्तीय विज्ञान की सच्चाई है जहाँ ‘कंपाउंडिंग’ (सूद) और ‘समय’ की ताकत मिलकर साधारण बचत को करोड़ों के बराबर धनराशि में बदल सकती है। यह केवल एक कथन नहीं, बल्कि वित्तीय विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई एक गणितीय वास्तविकता है।
₹50 से 35 लाख: गणितीय जादू का रहस्य
आपके सामने जो ‘जादुई सूत्र’ पेश किया जा रहा है, वह सीधा और सरल है। यदि आप रोजाना केवल ₹50 बचाकर या निवेश करके भी बड़े सपने सफ़लता पा सकते हैं, तो यह संभव है। गणित की भाषा में इसे समझें तो, यदि आप रोजाना ₹50 की बचत को मासिक स्तर पर ₹1,500 (₹50 x 30) के SIP (Systematic Investment Plan) में बदल दें, तो परिणाम चौकूर हो सकते हैं।
मान लीजिए आप एक ऐसे म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं जो ऐतिहासिक रूप से 15% वार्षिक रिटर्न देता है। ऐसे में, यदि आप लगातार 21 वर्षों तक हर महीने ₹1,500 का निवेश करते हैं, तो आपकी कुल जमा राशि (रू. 3,78,000) केवल एक छोटा हिस्सा होगी। वास्तविक जादिया तो तब पता चलता है जब आप 21 वर्ष बाद देखते हैं कि आपकी निवेश राशि 35.40 लाख रुपये से भी अधिक की हो गई है। यह अंतर ही ‘कंपाउंडिंग’ या ‘सूद-दर-सूद’ की ताकत है, जहाँ ब्याज भी ब्याज कमाता है।
कंपांडिंग और अनुशासन: असली जादू कहां है?
इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण तत्व है ‘अनुशासन’। रोजाना ₹50 बचाना किसी भी व्यक्ति के बस की बात है, लेकिन उसे निरंतरता से निवेश करना कठिन है। म्यूचुअल फंड की SIP विधि में ‘ Rupee लागत औसत’ (Rupee Cost Averaging) की तकनीक का भी उपयोग होता है, जिससे बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूक आपका औसत लागत कम रखी जा सकेती है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि यह आसानी से संभव है। म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं और 15% का वार्षिक रिटर्न गारंटी नहीं है। फिर भी, इतिहास गवाहिक है कि लंबी अवधि में इक्विटी बाजार ने अच्छा रिटर्न दिया है।
शुरुआत कैसे करें?
शुरुआत करने के लिए आपको किसी विशेष बैंक या ब्रोकरेज पर जमीन करने की आवश्यकता नहीं है। आप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे Groww, Zerodha, या सीधे ब्रोकरेज के माध्यम से भी SIP शुरू कर सकते हैं। कई वित्तीय प्लेटफॉर्म पर आप SIP कैल्कुलेटर का उपयोग करके अपनी लक्ष्य और निवेश राशि के आधार पर अनुमानित रिटर्न देख सकते हैं।
हालांकि, याद रखें कि यह एक दीर्कालीन निवेशक की रणनीति है। छोटी बचत को लंबे समय तक निवेशित रखने पर ही कंपाउंडिंग का जादू काम करता है।