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  • प्रेमी से मिलने पहुंची महिला के टूट गए सारे अरमान, घर पहुंचते ही हुआ बड़ा खुलासा…

    प्रेमी से मिलने पहुंची महिला के टूट गए सारे अरमान, घर पहुंचते ही हुआ बड़ा खुलासा…

    प्रेमी से मिलने पहुंची महिला के टूट गए सारे अरमान, घर पहुंचते ही हुआ बड़ा खुलासा…

    (इमेज- सोशल मीडिया)

    दिल की धड़कन बढ़ाने वाली मुलाकात कभी-कभी दिल तोड़ देने वाली भी साबित हो सकती है. ऐसी ही एक घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें एक प्रेमिका बन-ठन कर अपने प्रेमी के घर पहुंची लेकिन गंदगी देखकर उसके सारे अरमान चूर-चूर हो गए. एनी नाम की युवती अपने प्रेमी क्रिस से बेहद प्यार करती थी. दोनों की मुलाकातें बाहर होती रहती थीं. रोमांटिक बातें, घूमना-फिरना और सपने देखना जारी था. एनी सोचती थी कि एक दिन क्रिस के घर जाकर उनके रिश्ते को और मजबूत बनाएगी. आखिरकार वह दिन आ गया.

    एनी खूब सज-संवर कर, उम्मीदों से भरी अपने प्रेमी के घर पहुंची थी. लेकिन दरवाजा खुलते ही जो नजारा सामने आया, उसने एनी को सन्न कर दिया. घर के अंदर कबाड़ और गंदगी का अंबार लगा हुआ था. कमरा पूरी तरह अस्त-व्यस्त था. कपड़े, खाने के बर्तन, कचरा और अनगिनत सामान बिखरा पड़ा था. सफाई का नामोनिशान तक नहीं था. एनी के पैरों तले से जमीन खिसक गई. वह कुछ पल तो स्तब्ध रह गई. टीएलसी के एक शो में इस पूरी घटना को टेलीकास्ट किया गया.

    टूट गए अरमान
    एनी ने इस घटना को शेयर करते हुए कहा, “मैं बन-ठन कर गई थी, सपने देख रही थी कि हम साथ समय बिताएंगे. लेकिन अंदर घुसते ही गंदगी देखकर मेरा दिल टूट गया. क्रिस गंदगी में रहने का आदी था. उसका कमरा कबाड़खाना बन गया था.” उसने कुछ तस्वीरें भी पोस्ट की हैं जिनमें गंदगी साफ नजर आ रही है.

    रिश्तों पर असर
    साफ-सफाई ना सिर्फ स्वास्थ्य के लिए जरूरी है बल्कि व्यक्तित्व को भी दर्शाती है. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, गंदगी में रहने वाले लोग अक्सर अनुशासनहीन या तनावग्रस्त होते हैं. एनी जैसी कई लड़कियां रिश्ते में आने से पहले दूसरी आदतों पर ध्यान नहीं दे पाती. बाहर मिलने पर सब कुछ परफेक्ट लगता है, लेकिन घर की सच्चाई अलग होती है. सोशल मीडिया यूजर्स इस पोस्ट पर भारी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, “प्यार अंधा नहीं होना चाहिए, घर देखकर ही अंदाजा लग जाता है कि इंसान कैसा है?” दूसरे ने कहा, “एनी भाग गई तो सही किया, गंदगी में रहने वाला साथ नहीं निभा सकता.” कई लड़कियां अपनी कहानियां शेयर कर रही हैं जहां उन्हें प्रेमी के घर की गंदगी का सामना करना पड़ा.

    क्रिस की आदतें
    क्रिस गंदगी में रहने का आदि था. उसके कमरे में बर्तन दिन-दिन भर पड़े रहते थे. कपड़े धोने की बजाय नये खरीद लेता था. सफाई का कोई समय नहीं था. एनी ने बताया कि वह कई बार क्रिस को सफाई के लिए कह चुकी थी लेकिन उसने गंभीरता नहीं दिखाई. यह घटना युवाओं के लिए सबक है. आज की भागती जिंदगी में कई लोग घर को नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन जब रिश्ता गंभीर होने लगता है तो छोटी-छोटी आदतें बड़ी समस्या बन जाती हैं. लोग सफाई को रिश्तों की बुनियाद बताते हुए कह रहे हैं कि गंदा इंसान ना सिर्फ खुद को बल्कि पार्टनर को भी प्रभावित करता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी जोर देकर कह रहे हैं कि गंदे माहौल में रहने से तनाव, बीमारियां और डिप्रेशन बढ़ता है. एनी अब इस रिश्ते पर दोबारा सोच रही है. उसने कहा, “प्यार तो है लेकिन गंदगी बर्दाश्त नहीं हो सकती.”

  • कैसे बना आगरे का ‘पागलखाना’, क्यों हैं इतना मशहूर; जानिए इसका इतिहास..

    कैसे बना आगरे का ‘पागलखाना’, क्यों हैं इतना मशहूर; जानिए इसका इतिहास..

    कैसे बना आगरे का ‘पागलखाना’, क्यों हैं इतना मशहूर; जानिए इसका इतिहास..

    आगरा: आप सभी ने ताजमहल तो देखा होगा परंतु आगरे का पागलखाना नहीं देखा होगा. आखिर क्या वजह है कि आगरे का पागलखाना इतना मशहूर है? हमने इसके इतिहास के बारे में जानने की कोशिश की. आगरा ताजमहल, पेठा और जूते के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. पर क्या आप जानते हैं कि पहले इसे पागलखाने के नाम से जाना जाता था?

    अब मानसिक आरोग्यशाला कहिए
    आपको बता दें कि अब इसे मानसिक आरोग्यशाला के नाम से जाना जाता है. इसके निर्माण की कहानी भी एकदम अलग है. ऐसा कहा जाता है कि क्रांतिकारियों के विद्रोह के चलते एक अंग्रेज अफसर पागल हो गए. इसके साथ उस अंग्रेज अफसर को हैजा हो गया और उसकी मौत हो गई. इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने यह निर्णय लिया आगरा में मानसिक आरोग्यशाला का निर्माण कराया जाए.

    लेफ्टिनेंट जनरल जॉन रेचल केल्विन विद्रोह से घबरा गया
    आगरा क्रांतिकारियों का गढ़ पहले से ही रहा है. 1857 की लड़ाई शुरू हो गई थी. झांसी में रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों को लोहे के चने चबा दिए थे. इधर मेरठ में सैनिक विद्रोही हो गए थे और आगरा में भी विद्रोह के बादल गरज रहे थे. विद्रोह देख आगरा किले का प्रभारी और लेफ्टिनेंट जनरल जॉन रेचल केल्विन पूरी तरह घबरा गया.

    केल्विन पागल हो गया
    क्रांतिकारियों की रणनीति से केल्विन पागल हो गया और उसकी दिमागी हालत खराब हो गई और फिर कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो जाती है. अंग्रेज अफसरों ने केल्विन को आगरा किले में ही दफना दिया. आज भी उसकी कब्र आगरा किले के दीवाने आम के सामने मौजूद है.

    कोलकाता में जन्मे कैल्विन
    केल्विन का जन्म 19 मई 1807 को कोलकाता में हुआ था. तब कोलकाता बंगाल प्रेसिडेंसी का हिस्सा था. केल्विन का परिवार एग्लो इंडियन मूल का था. केल्विन की पढ़ाई ईस्ट इंडिया कंपनी कॉलेज में हर्डफोटशायर से इंग्लैंड में हुई.

    क्वीन विक्टोरिया ने बनवाया अस्पताल
    मानसिक चिकित्सालय क्वीन विक्टोरिया ने बनवाया था. इतिहासकार राजकिशोर राज्य के मुताबिक क्रांतिकारियों के डर से घबराए अंग्रेज अफसरों ने कैल्विन को आगरा किला में दफना दिया. कब्र के पास एक ब्रिटिश जमाने की तोप भी रखी हुई है.

  • 9 पत्नियों का एक पति, सबको बराबर वक्त देने के लिए बनाया टाइम टेबल; अब गिफ्ट को लेकर बढ़ी परेशानी.

    9 पत्नियों का एक पति, सबको बराबर वक्त देने के लिए बनाया टाइम टेबल; अब गिफ्ट को लेकर बढ़ी परेशानी.

    9 पत्नियों का एक पति, सबको बराबर वक्त देने के लिए बनाया टाइम टेबल; अब गिफ्ट को लेकर बढ़ी परेशानी.

    दुनिया में रिश्तों को लेकर तरह-तरह के मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन इस शख्स की शादीशुदा जिंदगी की कहानी कुछ अलग ही है। उसकी एक या दो नहीं, बल्कि नौ पत्नियां हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि सभी को समय देने के लिए उसने बाकायदा एक रूटीन तक बना रखा था।

    शुरुआत में उसे लगा कि इस तरीके से वह अपनी सभी पत्नियों के साथ बराबर समय बिता पाएगा और किसी को शिकायत का मौका नहीं मिलेगा। लेकिन कुछ समय बाद यही व्यवस्था उसके लिए परेशानी का कारण बन गई।

    बताया जाता है कि यह शख्स खुद को खुले रिश्तों की सोच रखने वाला व्यक्ति मानता है। इसी सोच के चलते उसने अलग-अलग महिलाओं के साथ विवाह किया। जब पत्नियों की संख्या बढ़ती गई तो सभी के लिए समय निकालना उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया।

    इसके बाद उसने एक टाइम टेबल तैयार किया।

    किस दिन किस पत्नी के साथ समय बिताना है, किसके साथ बाहर जाना है और किसके साथ निजी वक्त गुजारना है, इसका पूरा हिसाब रखने की कोशिश की गई। उसका मकसद था कि किसी पत्नी को ऐसा न लगे कि उसे बाकी के मुकाबले कम महत्व दिया जा रहा है।

    लेकिन कुछ समय बाद उसे महसूस हुआ कि रिश्तों को सिर्फ एक तय रूटीन के हिसाब से चलाना उतना आसान नहीं है।

    उसने बताया कि शुरुआत में यह व्यवस्था ठीक लग रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसे ऐसा महसूस होने लगा जैसे वह अपनी इच्छा से नहीं बल्कि एक तय कार्यक्रम के दबाव में रिश्ते निभा रहा हो।

    आखिरकार उसने इस टाइम टेबल को छोड़ दिया।

    हालांकि टाइम टेबल खत्म होने के बाद भी उसकी परेशानियां पूरी तरह खत्म नहीं हुईं। अब उसके सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है—तोहफों को लेकर।

    अगर वह किसी एक पत्नी के लिए महंगा या खास गिफ्ट खरीदता है तो दूसरी पत्नियों को बुरा लगने लगता है। उसे डर रहता है कि कहीं किसी को यह महसूस न हो कि उसे कम महत्व दिया जा रहा है।

    यानी नौ रिश्तों को बराबरी से संभालने की कोशिश में अब सबसे मुश्किल काम यह तय करना हो गया है कि किसे क्या दिया जाए।

    मामला इतना बढ़ चुका है कि एक पत्नी के नाराज होकर अलग होने की धमकी देने की बात भी सामने आई है।

    इस पूरी कहानी में सबसे दिलचस्प बात यही है कि जिस व्यक्ति ने अपने रिश्तों को व्यवस्थित रखने के लिए टाइम टेबल बनाया था, वही व्यवस्था आखिरकार उसके लिए तनाव का कारण बन गई। अब वह बिना किसी तय शेड्यूल के अपनी शादीशुदा जिंदगी को संभालने की कोशिश कर रहा है।

  • नर से मादा बन’ जाते हैं ये जीव, जानिए क्यों बदलते हैं अपना जेंडर.

    नर से मादा बन’ जाते हैं ये जीव, जानिए क्यों बदलते हैं अपना जेंडर.

    नर से मादा बन’ जाते हैं ये जीव, जानिए क्यों बदलते हैं अपना जेंडर.

    प्रकृति अपने अंदर ऐसे कई रहस्य छिपाए हुए है, जिन्हें जानकर इंसान भी हैरान रह जाता है। धरती पर कुछ जीव ऐसे भी हैं जो अपनी जिंदगी के दौरान नर से मादा में जैविक रूप से बदल सकते हैं। यह कोई अचानक होने वाली प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उनके शरीर में धीरे-धीरे होने वाला एक प्राकृतिक बदलाव है।

    इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में सीक्वेंशियल हर्माफ्रोडिटिज्म (Sequential Hermaphroditism) कहा जाता है। इसमें कोई जीव अपने जीवन के एक चरण में एक लिंग के रूप में प्रजनन करता है और बाद में दूसरे लिंग में बदल सकता है।

    क्लाउनफिश है इसका सबसे दिलचस्प उदाहरण

    समुद्र में पाई जाने वाली क्लाउनफिश इस प्रक्रिया का एक जाना-पहचाना उदाहरण है। क्लाउनफिश आमतौर पर समूह में रहती हैं और उस समूह में प्रजनन की एक खास व्यवस्था होती है।

    समूह में एक प्रमुख मादा होती है और उसके साथ नर रहते हैं। अगर किसी कारण से समूह की प्रमुख मादा की मौत हो जाती है, तो समूह में मौजूद सबसे बड़ा और प्रमुख नर धीरे-धीरे मादा में बदलने लगता है।

    यह बदलाव सिर्फ बाहरी रूप में नहीं होता, बल्कि उसके शरीर में प्रजनन से जुड़े जैविक बदलाव भी होते हैं। कुछ समय बाद वह मादा की भूमिका निभाने लगती है और समूह की प्रजनन व्यवस्था आगे जारी रहती है।

    आखिर जेंडर बदलने की जरूरत क्यों पड़ती है?

    इसके पीछे सबसे बड़ी वजह प्रजनन को जारी रखना और समूह का संतुलन बनाए रखना मानी जाती है।

    अगर समूह की एकमात्र प्रजनन करने वाली मादा की मौत के बाद कोई दूसरा जीव उसकी जगह नहीं लेता, तो समूह की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में नर का मादा में बदलना प्रकृति की एक ऐसी रणनीति है, जो उपलब्ध जीवों के बीच प्रजनन की व्यवस्था को बनाए रखने में मदद करती है।

    यानी यहां जेंडर परिवर्तन किसी संयोग की बजाय उस जीव की जीवन-रणनीति का हिस्सा है।

    सिर्फ क्लाउनफिश ही नहीं हैं ऐसे जीव

    सीक्वेंशियल हर्माफ्रोडिटिज्म केवल क्लाउनफिश तक सीमित नहीं है। समुद्री दुनिया में कई अन्य प्रजातियों में भी जीवन के दौरान लिंग बदलने की क्षमता पाई जाती है।

    कुछ प्रजातियां पहले नर और बाद में मादा बनती हैं, जबकि कुछ में इसका उल्टा होता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस प्रजाति के लिए किस परिस्थिति में कौन-सी प्रजनन रणनीति ज्यादा उपयोगी है।

    प्रकृति के अनुकूल ढलने का अनोखा तरीका

    जीवों में होने वाला यह बदलाव दिखाता है कि प्रकृति में प्रजनन की रणनीतियां कितनी विविध हो सकती हैं। बदलती परिस्थितियों, समूह की संरचना और उपलब्ध साथी के अनुसार कुछ जीव अपने शरीर में ऐसे जैविक बदलाव कर सकते हैं, जो उनकी प्रजाति के अस्तित्व और प्रजनन की संभावना को बनाए रखने में मदद करते हैं।

    इसलिए जब हम सुनते हैं कि कोई जीव नर से मादा बन गया, तो यह किसी चमत्कार की बात नहीं, बल्कि लाखों वर्षों में विकसित हुई एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया का उदाहरण है।

  • नींद में अचानक क्यों होता’ है गिरने का एहसास? जानें इसके पीछे क्या है विज्ञान’

    नींद में अचानक क्यों होता’ है गिरने का एहसास? जानें इसके पीछे क्या है विज्ञान’

    नींद में अचानक क्यों होता’ है गिरने का एहसास? जानें इसके पीछे क्या है विज्ञान’

    क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि रात में बिस्तर पर लेटते ही नींद आने लगी और अचानक महसूस हुआ कि आप किसी ऊंची जगह से नीचे गिर रहे हैं? इसी एहसास के साथ शरीर एकदम से झटके के साथ हिल जाता है और आंख खुल जाती है। कई लोगों को ऐसा अनुभव इतना अचानक होता है कि कुछ पल के लिए समझ ही नहीं आता कि आखिर हुआ क्या।

    अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं है। विज्ञान में इस घटना को हाइपनिक जर्क (Hypnic Jerk) या स्लीप स्टार्ट (Sleep Start) कहा जाता है। यह नींद में जाने के दौरान होने वाली एक सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया है।

    आखिर अचानक क्यों लगता है कि गिर रहे हैं?

    जब हमारा शरीर जागने की अवस्था से नींद की ओर बढ़ता है, तो मांसपेशियां धीरे-धीरे आराम की स्थिति में जाने लगती हैं और दिमाग की गतिविधियों में भी बदलाव होने लगता है। इसी संक्रमण के दौरान कभी-कभी तंत्रिका तंत्र में अचानक गतिविधि होती है, जिसकी वजह से हाथ, पैर या पूरा शरीर झटके से हिल सकता है।

    कुछ लोगों को इस झटके के साथ ऐसा महसूस होता है जैसे वे सीढ़ियों से फिसल गए हों या किसी ऊंची जगह से नीचे गिर रहे हों। यह अनुभव वास्तविक गिरने की वजह से नहीं होता, बल्कि नींद में जाने के दौरान दिमाग और शरीर के बीच होने वाले बदलाव से जुड़ा होता है।

    नींद में जाते समय शरीर के साथ क्या होता है?

    सोने से पहले शरीर धीरे-धीरे रिलैक्स होने लगता है। मांसपेशियों का तनाव कम होता है और शरीर आराम की अवस्था में पहुंचता है। इस दौरान दिमाग अभी पूरी तरह नींद में नहीं गया होता।

    ऐसे संक्रमण के दौरान कभी-कभी दिमाग मांसपेशियों के अचानक ढीला पड़ने को किसी तरह की हलचल या गिरने के संकेत के रूप में महसूस कर सकता है। इसके जवाब में मांसपेशियों में अचानक संकुचन होता है और शरीर झटके से हिल जाता है।

    किन परिस्थितियों में ज्यादा महसूस हो सकता है?

    यह अनुभव कभी-कभार लगभग किसी को भी हो सकता है। हालांकि, तनाव, नींद की कमी, ज्यादा थकान और कैफीन का अधिक सेवन कुछ लोगों में ऐसे झटकों की संभावना बढ़ा सकते हैं। देर रात तक जागना और अनियमित नींद का पैटर्न भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

    इसलिए अगर आपको यह समस्या बार-बार महसूस होती है तो पर्याप्त नींद लेना, सोने-जागने का समय नियमित रखना और रात में ज्यादा कैफीन से बचना मददगार हो सकता है।

    क्या हाइपनिक जर्क किसी बीमारी का संकेत है?

    अधिकांश मामलों में कभी-कभार होने वाला हाइपनिक जर्क सामान्य शारीरिक घटना माना जाता है और इसके लिए किसी खास इलाज की जरूरत नहीं होती।

    हालांकि, अगर नींद में बार-बार तेज झटके लगते हैं, इसकी वजह से लगातार नींद टूटती है या इसके साथ अन्य असामान्य लक्षण भी दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है। क्योंकि हर तरह के मांसपेशियों के झटके को हाइपनिक जर्क मान लेना सही नहीं है।

    कुल मिलाकर, सोते समय अचानक गिरने जैसा महसूस होना और शरीर का झटके से हिल जाना आमतौर पर नींद और जागने के बीच होने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए कभी-कभार ऐसा होने पर डरने की बजाय यह समझना जरूरी है कि शरीर उस समय जागने से नींद की अवस्था में बदलाव कर रहा होता है।

  • किचन की टाइल्स पर जम: गई है तेल की मोटी परत? आजमाएं ये घरेलू नुस्खे शीशे की तरह चमकेगा फर्श!

    किचन की टाइल्स पर जम: गई है तेल की मोटी परत? आजमाएं ये घरेलू नुस्खे शीशे की तरह चमकेगा फर्श!

    किचन की टाइल्स पर जम: गई है तेल की मोटी परत? आजमाएं ये घरेलू नुस्खे शीशे की तरह चमकेगा फर्श!

    सिर्फ पानी और कपड़े से टाइल्स साफ करना मुश्किल हो जाता है. अगर आपके किचन की टाइल्स पर भी पुरानी चिकनाई जम गई है, तो कुछ आसान घरेलू तरीकों से इसे साफ किया जा सकता है. चलिए जानते हैं कैसे…

    भारतीय किचन में रोजाना कुछ न कुछ स्वादिष्ट बनता रहता है. तड़के का तेल, सब्जियों के छींटे और मसालों की चिकनाई धीरे-धीरे गैस के पीछे लगी टाइल्स पर जमने लगती है. शुरुआत में तो इसे कपड़े से आसानी से साफ किया जा सकता है, लेकिन कई दिनों तक सफाई न होने पर तेल की परत मोटी और चिपचिपी हो जाती है. ऐसे में सिर्फ पानी और कपड़े से टाइल्स साफ करना मुश्किल हो जाता है.

    अगर आपके किचन की टाइल्स पर भी पुरानी चिकनाई जम गई है, तो कुछ आसान घरेलू तरीकों से इसे साफ किया जा सकता है. चलिए जानते हैं कैसे…नींबू और नमक से साफ करें हल्की चिकनाई टाइल्स पर जमी हल्की या मध्यम चिकनाई के लिए नींबू और नमक काम आ सकते हैं. इसके लिए आधे नींबू पर थोड़ा नमक लगाकर तेल वाले हिस्से पर हल्के हाथ से रगड़ें. इसे करीब 5 से 7 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर गीले कपड़े से पोंछ दें. नींबू चिकनाई को ढीला करने में मदद करता है, जबकि नमक हल्की स्क्रबिंग करता है.बेकिंग सोडा का पेस्ट आएगा काम अगर टाइल्स पर तेल की पुरानी और चिपचिपी परत जम गई है, तो बेकिंग सोडा इस्तेमाल कर सकते हैं.

    दो चम्मच बेकिंग सोडा में थोड़ा पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें. इसे दाग वाली जगह पर लगाकर करीब 15 मिनट के लिए छोड़ दें. इसके बाद गीले कपड़े से धीरे-धीरे साफ करें. जरूरत पड़ने पर इस प्रक्रिया को दोबारा किया जा सकता है.सिरका और पानी का स्प्रे हल्की और ताजा चिकनाई के लिए बराबर मात्रा में पानी और सफेद सिरका मिलाकर स्प्रे बनाया जा सकता है. इसे टाइल्स पर छिड़कें और कुछ मिनट बाद मुलायम कपड़े से साफ कर दें. हालांकि मार्बल या प्राकृतिक पत्थर जैसी संवेदनशील सतहों पर सिरका इस्तेमाल करने से पहले सतह के निर्देश जरूर देखें.गर्म भाप से नरम करें पुराना तेल बहुत पुरानी चिकनाई को हटाने से पहले उसे नरम करना जरूरी हो सकता है.

    गर्म पानी की भाप तेल की परत को ढीला करने में मदद कर सकती है. करीब 10 मिनट तक भाप देने के बाद मुलायम कपड़े से टाइल्स को साफ करें. गर्म भाप के दौरान हाथ और चेहरे को सुरक्षित रखें.ध्यान रखें ये बात बहुत ज्यादा जोर से रगड़ने के बजाय पहले तेल की परत को नरम करें और फिर साफ करें. इससे टाइल्स पर खरोंच आने का खतरा कम रहेगा. खाना बनाने के बाद गैस के पीछे की टाइल्स को नियमित रूप से पोंछते रहें.

  • दामाद के प्यार में पड़ी: 5 बच्चों की मां, परिवार ने रोका तो पहुंच गई थाने, प्रेमी बोला- सास के बिना नहीं लगता मन

    दामाद के प्यार में पड़ी: 5 बच्चों की मां, परिवार ने रोका तो पहुंच गई थाने, प्रेमी बोला- सास के बिना नहीं लगता मन

    दामाद के प्यार में पड़ी: 5 बच्चों की मां, परिवार ने रोका तो पहुंच गई थाने, प्रेमी बोला- सास के बिना नहीं लगता मन

    मैनपुरी से रिश्तों को हैरान करने वाला मामला आया सामने, यहां पांच बच्चों की मां को अपने ही दामाद से प्रेम हो गया. महिला अपने दामाद के साथ रहने की जिद पर अड़ गई, जबकि परिवार ने उसे समझाने की कोशिश.

    मैनपुरी से बड़ा ही अजब-गजब मामला सामने आया है, यहां पांच बच्चों की करीब 35 साल की मां का अपने ही दामाद पर दिल आ गया. इतना ही नहीं बात सिर्फ प्रेम संबंधों तक नहीं रुकी, महिला दामाद के साथ रहने की जिद पर अड़ गई. परिवार ने समझाने की कोशिश की, लेकिन दोनों अपनी बात पर कायम रहे.

    इसके बाद जो हुआ हैरान कर देने वाला था. चलिए आपको बताते हैं कि पूरा मामला क्या है. दरअसल, मामला मैनपुरी के घिरोर थाना क्षेत्र के एक गांव का है. जानकारी के मुताबिक, महिला के पति की करीब दो साल पहले मौत हो गई थी. महिला के पांच बच्चे हैं. बताया जा रहा है कि इसके बाद महिला और उसके करीब 20 वर्षीय दामाद के बीच नजदीकियां बढ़ गईं. पिछले एक-दो महीने से दोनों के साथ रहने की बात भी सामने आई है. जब परिवार को दोनों के रिश्ते की जानकारी हुई तो घर में विरोध शुरू हो गया. रिश्तेदारों और परिवार के लोगों ने दोनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन मामला सुलझने के बजाय और उलझता चला गया.रिश्तेदारी में पहुंचे तो बच्चों ने किया विरोध बताया जा रहा है कि बुधवार को दोनों मैनपुरी में एक रिश्तेदारी में पहुंचे थे.

    वहां महिला के बच्चे भी मौजूद थे. बच्चों ने जब अपनी मां और दामाद को साथ देखा तो विरोध किया. परिवार के लोगों ने भी महिला को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह दामाद के साथ रहने की जिद पर अड़ गई. मामला बढ़ा तो दोनों को पुलिस थाने ले जाया गया. यहां पुलिस ने काफी देर तक दोनों को समझाया. लेकिन थाने में भी दोनों अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं हुए.दामाद बोला- सास के बिना नहीं लगता मन पुलिस के सामने युवक ने कहा कि महिला के जो बच्चे उसके साथ रहना चाहें, वे भी साथ रह सकते हैं. युवक का कहना था कि उसे अपनी सास के बिना मन नहीं लगता.

    वहीं महिला भी दामाद के साथ रहने की बात पर कायम रही. युवक महिला को अपनी सास और अपनी बहन की सास भी बताता नजर आया. फिलहाल पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर घर भेज दिया है. पुलिस का कहना है कि शिकायत या तहरीर मिलने पर मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

  • 5 दिन के नवजात : का ब्लड ग्रुप कैसे बदल गया? एक लैब ने बताया A+, दूसरी ने B+, इंदौर में हैरान करने वाला मामला..

    5 दिन के नवजात : का ब्लड ग्रुप कैसे बदल गया? एक लैब ने बताया A+, दूसरी ने B+, इंदौर में हैरान करने वाला मामला..

    5 दिन के नवजात : का ब्लड ग्रुप कैसे बदल गया? एक लैब ने बताया A+, दूसरी ने B+, इंदौर में हैरान करने वाला मामला..

    मध्य प्रदेश के इंदौर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पैथोलॉजी लैब की जांच और रिपोर्टिंग प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज 5 दिन के नवजात बच्चे के ब्लड ग्रुप की जांच दो अलग-अलग लैब में कराई गई तो दोनों की रिपोर्ट में ब्लड ग्रुप अलग-अलग बताया गया।

    पहली लैब की रिपोर्ट में बच्चे का ब्लड ग्रुप A+ बताया गया, जबकि दूसरी लैब में जांच कराने पर वही ब्लड ग्रुप B+ आया। रिपोर्ट में इतना बड़ा अंतर सामने आने के बाद बच्चे के परिजन हैरान रह गए।

    बच्चे के पिता ने पहली लैब से इस विरोधाभास को लेकर सवाल किया तो कथित तौर पर उन्हें रिपोर्ट में गलती होने की बात बताई गई और बाद में दूसरी रिपोर्ट जारी की गई। परिवार ने अब मामले की जांच की मांग की है।

    पहले सैंपल को बताया गया खराब, फिर दोबारा लिया गया ब्लड

    शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्होंने अपने 5 दिन के नवजात बच्चे की जांच ढक्कनवाला कुआं स्थित नीरज डायग्नोस्टिक्स में कराई थी। सैंपल देने के कुछ समय बाद लैब की ओर से बताया गया कि पहला सैंपल सही नहीं आया है और बच्चे का दोबारा ब्लड सैंपल लेना होगा।

    इसके बाद लैब का एक तकनीशियन कथित तौर पर बच्चे का दोबारा सैंपल लेने के लिए उनके घर पहुंचा। दोबारा जांच के बाद जारी रिपोर्ट में बच्चे का ब्लड ग्रुप A+ दर्ज किया गया।

    परिजनों के मुताबिक, उस समय उन्हें रिपोर्ट को लेकर किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।

    पीलिया की जांच के दौरान सामने आया बड़ा अंतर

    बच्चे का इलाज कर रहे डॉक्टर ने रिपोर्ट देखने के बाद पीलिया की स्थिति को लेकर आगे जांच की सलाह दी। इसके बाद परिजनों ने बच्चे के खून की दोबारा जांच बंगाली चौराहा स्थित यूनिपैथ स्पेशियलिटी लैब में कराई।

    यहां से मिली रिपोर्ट में बच्चे का ब्लड ग्रुप B+ बताया गया।

    एक ही बच्चे के ब्लड ग्रुप की दो अलग-अलग रिपोर्ट सामने आने के बाद परिजनों की चिंता बढ़ गई। उन्होंने पहली लैब से संपर्क कर इस अंतर का कारण पूछा।

    पहली लैब ने बताई रिपोर्ट में गलती

    परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने पहली रिपोर्ट में A+ और दूसरी रिपोर्ट में B+ आने को लेकर सवाल किया, तो लैब की ओर से इसे रिपोर्ट की प्रिंटिंग या टाइपिंग की गलती बताया गया।

    इसके बाद कथित तौर पर पहली लैब की ओर से संशोधित रिपोर्ट जारी की गई, जिसमें ब्लड ग्रुप B+ दर्ज किया गया।

    अब परिवार का सवाल है कि अगर पहली रिपोर्ट में सिर्फ टाइपिंग की गलती थी, तो सैंपल और टेस्टिंग की पूरी प्रक्रिया में इसे पहले क्यों नहीं पकड़ा गया?

    नवजात के मामले में क्यों गंभीर है यह मामला?

    ब्लड ग्रुप की सही पहचान चिकित्सा उपचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। खासकर नवजात बच्चे के मामले में किसी भी रिपोर्टिंग गलती को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

    अगर किसी आपात स्थिति में गलत ब्लड ग्रुप की जानकारी के आधार पर इलाज या रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो जाए, तो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकता है। हालांकि, इस मामले में बच्चे को गलत ब्लड चढ़ाया गया या इससे कोई नुकसान हुआ, ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिर भी दो अलग-अलग रिपोर्ट में अलग ब्लड ग्रुप सामने आने से सैंपल कलेक्शन, टेस्टिंग, रिपोर्ट तैयार करने और अंतिम वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    पिता ने CMHO से जांच की मांग की

    मामले के बाद बच्चे के पिता ने इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव हासानी के समक्ष शिकायत

  • कुत्तों को घुमाकर लाखों : कमा रही ये लड़की, छोड़ी पैरालीगल की नौकरी तो एक दिन की कमाई जानकर चौंक गए लोग..

    कुत्तों को घुमाकर लाखों : कमा रही ये लड़की, छोड़ी पैरालीगल की नौकरी तो एक दिन की कमाई जानकर चौंक गए लोग..

    कुत्तों को घुमाकर लाखों : कमा रही ये लड़की, छोड़ी पैरालीगल की नौकरी तो एक दिन की कमाई जानकर चौंक गए लोग..

    किसी ने शायद ही सोचा होगा कि कुत्तों को घुमाने का काम किसी के लिए इतनी बड़ी कमाई का जरिया बन सकता है। ब्रिटेन की 30 वर्षीय लिज ईस्ट ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। कभी क्रिमिनल डिफेंस से जुड़े मामलों में पैरालीगल के तौर पर काम करने वाली लिज ने अपनी नौकरी छोड़कर डॉग-वॉकिंग का बिजनेस शुरू किया।

    शुरुआत में लोगों ने उनके फैसले का मजाक भी उड़ाया। कुछ लोगों का कहना था कि इतनी पढ़ाई-लिखाई करने के बाद आखिर वह कुत्ते घुमाने का काम क्यों कर रही हैं। लेकिन लिज के मुताबिक, इस फैसले ने उनकी जिंदगी ही बदल दी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह अब डॉग-वॉकिंग के जरिए एक दिन में करीब 400 से 530 डॉलर तक कमा लेती हैं, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 38 हजार से 50 हजार रुपये के आसपास बैठता है।

    12 से 14 घंटे की नौकरी ने कर दिया था परेशान

    लिज ने करीब चार साल तक क्रिमिनल केसों से जुड़े मामलों में पैरालीगल के रूप में काम किया। उनकी नौकरी में लंबे समय तक काम करना और लगातार व्यस्त रहना शामिल था।

    रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें रोजाना ऑफिस आने-जाने में करीब दो घंटे लग जाते थे और कई बार 12 से 14 घंटे तक काम करना पड़ता था। देर रात तक ऑफिस के काम और सामाजिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहने के कारण उन्हें महसूस होने लगा था कि उनकी निजी जिंदगी लगभग खत्म हो रही है।

    लिज के मुताबिक, वह खुद को अपनी उम्र से कहीं ज्यादा थका हुआ महसूस करने लगी थीं। लगातार काम के दबाव ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वह इसी तरह की जिंदगी आगे भी जीना चाहती हैं।

    पति को कुत्तों के साथ देखकर आया आइडिया

    लिज के पति पहले से ही कुत्तों को घुमाने और उनकी देखभाल से जुड़े काम करते थे। लिज ने देखा कि उनका पति इस काम को करते हुए खुश रहता है और उसे अपने काम में संतुष्टि मिलती है।

    यहीं से लिज को अपने करियर को लेकर एक नया विचार आया। उन्होंने महसूस किया कि काम ऐसा भी हो सकता है जिसमें कम तनाव हो और साथ ही उससे अच्छी कमाई भी की जा सके।

    इसके बाद उन्होंने अपनी पैरालीगल की नौकरी छोड़ दी और डॉग-वॉकिंग बिजनेस शुरू करने का फैसला किया।

    लोगों ने उड़ाया मजाक, लेकिन लिज ने नहीं मानी हार

    नौकरी छोड़ने के बाद जब लिज ने डॉग-वॉकिंग को अपना करियर बनाया तो कई लोगों ने सवाल उठाए। उन्हें यह तक सुनना पड़ा कि इतनी पढ़ाई करने के बाद क्या सिर्फ कुत्ते घुमाने के लिए नौकरी छोड़ी है?

    लेकिन लिज ने लोगों की बातों पर ध्यान देने के बजाय अपने काम पर फोकस किया। धीरे-धीरे उनका बिजनेस बढ़ने लगा और कुत्तों की देखभाल तथा उन्हें घुमाने के लिए लोगों से उन्हें लगातार काम मिलने लगा।

    एक दिन में 400 से 530 डॉलर तक कमाई का दावा

    लिज की कहानी का सबसे ज्यादा चर्चा में आने वाला हिस्सा उनकी कमाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह डॉग-वॉकिंग के जरिए रोजाना करीब 400 से 530 डॉलर तक कमा रही हैं।

    भारतीय रुपये में यह रकम लगभग 38 हजार से 50 हजार रुपये प्रतिदिन के बराबर होती है। हालांकि, यह कमाई काम की मात्रा, ग्राहकों की संख्या और बिजनेस के खर्चों के आधार पर बदल सकती है।

    लिज का कहना है कि अब वह पहले की तुलना में कम समय और कम मानसिक दबाव में काम कर रही हैं, जबकि उनकी कमाई भी अच्छी हो गई है।

    सिर्फ कुत्ते घुमाना नहीं, पूरा बिजनेस मॉडल

    लिज की कहानी यह भी दिखाती है कि डॉग-वॉकिंग को केवल पार्ट-टाइम काम समझना जरूरी नहीं है। सही ग्राहक आधार और व्यवस्थित तरीके से इसे एक बिजनेस के तौर पर चलाया जा सकता है।

    कुत्तों के मालिक अक्सर ऐसे लोगों की तलाश में रहते हैं जो उनके पालतू जानवरों को समय पर घुमाएं, उनकी देखभाल करें और उनके साथ कुछ समय बिताएं। खासकर व्यस्त पेशेवरों के लिए ऐसी सेवाओं की मांग हो सकती है।

    लिज ने इसी जरूरत को अपने काम का आधार बनाया।

    लिज की कहानी से क्या सीख मिलती है?

    लिज की कहानी का सबसे बड़ा पहलू यह है कि उन्होंने पारंपरिक करियर छोड़कर अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से नया रास्ता चुना। उनके लिए सफलता का मतलब सिर्फ बड़ी नौकरी या ज्यादा सैलरी नहीं था, बल्कि ऐसी जिंदगी पाना भी था जिसमें उन्हें अपने समय और काम पर ज्यादा नियंत्रण मिले।

    उनकी कहानी उन लोगों के लिए भी एक उदाहरण बन गई है जो करियर बदलने के बारे में सोचते हैं, लेकिन समाज की प्रतिक्रिया के डर से कदम नहीं उठा पाते।

    हालांकि, हर व्यक्ति के लिए ऐसा बिजनेस समान कमाई की गारंटी नहीं देता। इसमें ग्राहक जुटाना, जानवरों की सुरक्षा, जिम्मेदारी, यात्रा और बिजनेस से जुड़े दूसरे खर्च भी शामिल होते हैं।

    नौकरी छोड़कर बनाया अपना रास्ता

    लिज ईस्ट की कहानी इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने एक पूरी तरह अलग क्षेत्र में जाने का फैसला किया। जिस काम को कुछ लोगों ने शुरुआत में छोटा समझकर उनका मजाक उड़ाया, उसी को उन्होंने अपने लिए कमाई और बेहतर जीवनशैली का जरिया बना लिया।

    उनकी कहानी यह सवाल जरूर खड़ा करती है कि क्या सफलता का मतलब हमेशा पारंपरिक नौकरी और बड़ा पद ही होता है? शायद कई बार अपने समय, पसंद और मानसिक संतुष्टि के हिसाब से काम चुनना भी किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं होता।

  • ताबूत से आई गुनगुनाने : की आवाज, खोला तो जिंदा थी बुजुर्ग महिला! परिवार के उड़ गए होश

    ताबूत से आई गुनगुनाने : की आवाज, खोला तो जिंदा थी बुजुर्ग महिला! परिवार के उड़ गए होश

    ताबूत से आई गुनगुनाने : की आवाज, खोला तो जिंदा थी बुजुर्ग महिला! परिवार के उड़ गए होश

    कभी-कभी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जिन पर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है। चीन के हेबेई से जुड़ी एक ऐसी ही हैरान करने वाली खबर सोशल मीडिया पर चर्चा में है। यहां एक बुजुर्ग महिला को मृत समझकर ताबूत में रखा गया था। लेकिन अगले दिन परिवार के लोगों को ताबूत के अंदर से गुनगुनाने जैसी आवाज सुनाई दी।

    आवाज सुनते ही परिवार के लोग घबरा गए। जब उन्होंने ताबूत खोलकर देखा तो महिला के शरीर में सांसें चल रही थीं। यह देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए।

    महिला को मृत समझकर ताबूत में रखा गया था

    वायरल जानकारी के मुताबिक, चीन के हेबेई में एक बुजुर्ग महिला को मृत समझ लिया गया था। इसके बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी और महिला को ताबूत में रख दिया।

    परिवार को बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि अगले दिन उनके सामने ऐसा नजारा आने वाला है, जिसे देखकर उनके होश उड़ जाएंगे।

    अचानक ताबूत से सुनाई दी आवाज

    अगले दिन परिवार के लोग जब ताबूत के आसपास मौजूद थे, तभी उन्हें अंदर से कुछ आवाज सुनाई दी। बताया गया कि यह आवाज गुनगुनाने जैसी लग रही थी।

    पहले तो लोगों को अपनी सुनने पर ही यकीन नहीं हुआ। लेकिन जब आवाज दोबारा सुनाई दी तो परिवार के लोग घबरा गए और उन्होंने तुरंत ताबूत खोलने का फैसला किया।

    ताबूत खोला तो चल रही थीं सांसें

    ताबूत खुलते ही परिवार के लोगों की आंखें खुली की खुली रह गईं। जिस महिला को मृत समझा जा चुका था, उसके शरीर में सांसें चल रही थीं।

    महिला को तुरंत बाहर निकालकर चिकित्सा सहायता दिलाने की कोशिश की गई। इस घटना ने परिवार के लोगों को बुरी तरह हैरान कर दिया।

    आखिर ऐसा कैसे हो सकता है?

    कुछ दुर्लभ चिकित्सकीय परिस्थितियों में किसी व्यक्ति की सांस और दिल की धड़कन बेहद धीमी हो सकती है। ऐसी स्थिति में बाहर से देखने पर व्यक्ति मृत जैसा दिखाई दे सकता है।

    इसी वजह से मृत्यु की पुष्टि के लिए चिकित्सकीय जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, इस खास घटना के सभी विवरण और इसके पीछे की वास्तविक चिकित्सकीय वजह की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

    सोशल मीडिया पर चर्चा में आई घटना

    इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोगों ने इसे बेहद डरावना और हैरान करने वाला बताया, जबकि कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि महिला की मृत्यु की पुष्टि किस तरह की गई थी।

    फिलहाल यह घटना वायरल जानकारी पर आधारित है और इसके सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे पूरी तरह प्रमाणित घटना मानने से पहले आधिकारिक या विश्वसनीय चिकित्सकीय जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।

    यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु की पुष्टि कितनी सावधानी से की जानी चाहिए, क्योंकि बेहद दुर्लभ परिस्थितियों में जीवन के संकेत बहुत कमजोर दिखाई दे सकते हैं।