Category: Gazab

  • इंसान नहीं, इस महिला ने ‘बहती नदी’ से रचा ली शादी, सालगिरह पर मिला ऐसा तोहफा..?

    इंसान नहीं, इस महिला ने ‘बहती नदी’ से रचा ली शादी, सालगिरह पर मिला ऐसा तोहफा..?

    इंसान नहीं, इस महिला ने ‘बहती नदी’ से रचा ली शादी, सालगिरह पर मिला ऐसा तोहफा..?

    लंदन. दुनियाभर में कई ऐसे लोग हैं, जो अपने अजीबोगरीब फैसलों की वजह से चर्चा में आ जाते हैं. इनमें से कोई कबाड़ की चीजों को नीलामी में करोड़ों में खरीद लेता है, तो कोई अपने अजीब रिश्ते की वजह से सुर्खियों में आ जाता है. इतना ही नहीं, कोई भूत से शादी कर लेता है, तो कोई खुद को जिंदा पिशाच बतलाता है. लेकिन इन सबसे इतर आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने बहती हुई नदी से ही शादी रचा ली. लेकिन इस शादी का मकसद जानने के बाद आपको भी खुशी होगी. हम बात कर रहे हैं इंग्लैंड की रहने वाली 30 साल की मेग एवन की. पर्यावरण कार्यकर्ता और कवियित्री के तौर पर पहचानी जाने वाली मेग ने साल 2023 में एवन नदी से शादी कर सबको चौंका दिया था. उनकी शादी की खबरें देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी सुर्खियों में आई थी. अब शादी की तीसरी सालगिरह पर उन्हें अनमोल तोहफा मिला है.

    लेकिन उन्होंने किसी नदी से शादी का फैसला क्यों लिया? यह सवाल किसी के भी जेहन में आ सकता है. ऐसे में बता दें कि मेग ने एवन नदी के साथ प्रतीकात्मक विवाह किया था, जिसकी एक खास वजह भी थी. दरअसल, एवन नदी कई सालों से प्रदूषण और सीवेज की गंदगी जैसी समस्याओं से जूझ रही है. मेग लंबे समय से इस मुद्दे पर काम कर रही थीं, लेकिन उन्हें लगा कि विरोध प्रदर्शन या अभियान उतना असर नहीं छोड़ पा रहे हैं. ऐसे में उन्होंने एक अलग रास्ता चुना और नदी के साथ प्रतीकात्मक शादी का फैसला कर लिया. इसके बाद एवन नदी की साफ-सफाई को लेकर पहले से ज्यादा चर्चा होने लगी. करीब तीन साल बाद मेग और उनके साथियों की कोशिशों का असर भी दिखाई दिया. इंग्लैंड की बाथ एंड नॉर्थ ईस्ट समरसेट काउंसिल ने हाल ही में एक विशेष चार्टर को मंजूरी दे दी, जिसका उद्देश्य एवन नदी के संरक्षण को नई कानूनी और नैतिक पहचान देना है.

    काउंसिल की बैठक में पूर्ण बहुमत से यह प्रस्ताव पारित हुआ और सभी सदस्यों ने इसका समर्थन किया. इस बारे में मेग ने कहा कि यह नदी की जीत है. लोगों को धीरे-धीरे समझ आने लगा है कि नदियां पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की आधारशिला हैं. बता दें कि चार्टर में 83 मील लंबी इस नदी के लिए कई महत्वपूर्ण अधिकारों का जिक्र है, जिसमें नदी के प्राकृतिक स्वरूप की रक्षा, जैव विविधता को सुरक्षित रखने और आवाज उठाने की व्यवस्था शामिल है. आसान भाषा में समझें तो यदि भविष्य में कोई गतिविधि नदी को नुकसान पहुंचाती है, तो उसके संरक्षण के लिए जिम्मेदार लोग प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के सामने पक्ष रख सकेंगे. मेग के संगठन ‘वी आर एवन’ ने करीब 120 स्वयंसेवकों की एक टीम भी तैयार की है, जिन्हें ‘रिवर गार्डियंस’ नाम दिया गया है. काउंसिल ने एंडी वेट को नदी का आधिकारिक प्रतिनिधि भी नियुक्त किया है.

  • आखिरी सांस तक बेटे का इंतजार करती रही बुजुर्ग मां, मौत के बाद भी नहीं पहुंचा बेटा; समाजसेवियों ने किया अंतिम संस्कार..

    आखिरी सांस तक बेटे का इंतजार करती रही बुजुर्ग मां, मौत के बाद भी नहीं पहुंचा बेटा; समाजसेवियों ने किया अंतिम संस्कार..

    आखिरी सांस तक बेटे का इंतजार करती रही बुजुर्ग मां, मौत के बाद भी नहीं पहुंचा बेटा; समाजसेवियों ने किया अंतिम संस्कार..

    बस्ती: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक ऐसी मार्मिक घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत और पारिवारिक रिश्तों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 70 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला अपने बेटे का इंतजार करते-करते दुनिया से विदा हो गईं। दुखद बात यह रही कि उनकी मौत के बाद भी बेटा अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंचा। आखिरकार एक सामाजिक संस्था ने बेटे का फर्ज निभाते हुए पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया।

    बेसहारा हालत में मिली थीं बुजुर्ग महिला

    जानकारी के अनुसार, हर्रैया नगर पंचायत स्थित आसरा आवास में रहने वाली बुजुर्ग महिला और एक वृद्ध पुरुष कई दिनों से बिना भोजन और इलाज के असहाय अवस्था में पड़े थे। पड़ोसियों की सूचना मिलने पर सामाजिक संस्था ‘सेवा समर्पण भाव परिवार’ की टीम मौके पर पहुंची और पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की मदद से दोनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

    अस्पताल में बेटे को पुकारती रहीं

    अस्पताल में इलाज के दौरान बुजुर्ग महिला की हालत लगातार गंभीर बनी रही। संस्था के कार्यकर्ता उनकी देखभाल करते रहे, लेकिन उनकी जुबान पर बार-बार सिर्फ अपने बेटे का नाम था। हर बार दरवाजे की आहट सुनकर उन्हें उम्मीद होती कि बेटा उन्हें लेने आएगा, लेकिन उनका यह इंतजार कभी पूरा नहीं हो सका। 29 जुलाई को उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली।

    पांच दिन तक नहीं पहुंचा कोई परिजन

    महिला की मौत के बाद प्रशासन और समाजसेवी संस्था ने परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए कोई सामने नहीं आया। शव करीब पांच दिनों तक मर्चरी में रखा रहा, फिर भी बेटा या परिवार का कोई सदस्य अंतिम विदाई देने नहीं पहुंचा।

    समाजसेवियों ने निभाया बेटे का फर्ज

    जब कोई अपना नहीं आया, तब ‘सेवा समर्पण भाव परिवार’ संस्था ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली। संस्था के प्रमुख दिलीप पाण्डेय ने बस्ती के पौराणिक मुड़घाट पर वैदिक रीति-रिवाज से बुजुर्ग महिला को मुखाग्नि दी। इस दौरान संस्था के सदस्य और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। यह भावुक दृश्य देखकर कई लोगों की आंखें नम हो गईं।

    समाज के सामने छोड़ गई कई सवाल

    यह घटना सिर्फ एक बुजुर्ग महिला की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलते पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक मूल्यों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस मां ने अपने बेटे के लिए पूरी जिंदगी समर्पित कर दी, उसे अंतिम समय में अपनों का साथ नहीं मिला। वहीं, एक सामाजिक संस्था ने यह संदेश दिया कि सच्चे रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि संवेदनाओं और इंसानियत से भी बनते हैं।

  • अफ्रीका महाद्वीप के बीच फटी धरती, 60KM लंबी दरार, जन्म ले रहा छठा महासागर!..

    अफ्रीका महाद्वीप के बीच फटी धरती, 60KM लंबी दरार, जन्म ले रहा छठा महासागर!..

    अफ्रीका महाद्वीप के बीच फटी धरती, 60KM लंबी दरार, जन्म ले रहा छठा महासागर!..

    अदीस अबाबा. उत्तरी इथियोपिया के सुदूर अफार डिप्रेशन (Afar Depression) में प्रकृति का एक ऐसा दुर्लभ और अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है, जो अमूमन लाखों-करोड़ों सालों में घटित होता है. यहां अफ्रीकी महाद्वीप धीरे-धीरे दो हिस्सों में बंट रहा है और एक नए महासागर का जन्म हो रहा है. आमतौर पर नदियों, समुद्रों और पर्वतों के निर्माण जैसी भूगर्भीय प्रक्रियाएं बहुत धीमी गति से होती हैं, लेकिन हॉर्न ऑफ अफ्रीका के पास अफार ट्राएंगल में यह बदलाव बेहद हैरान करने वाली रफ्तार से देखने को मिला है. सितंबर 2005 में डब्बाहु ज्वालामुखी में हुए विस्फोट और उसके बाद आए तीव्र भूकंपीय झटकों ने पृथ्वी की ऊपरी परत को चीर दिया. इस दौरान जिपर की तरह खुलती हुई लगभग 60 किलोमीटर लंबी और 8 मीटर चौड़ी एक विशाल दरार महज कुछ ही दिनों के भीतर बन गई. यही नहीं, दोनों तरफ की जमीन के बीच का हिस्सा 2 मीटर तक नीचे धंस गया.

    इसके बाद के कुछ महीनों में रेगिस्तान की सतह पर सैकड़ों छोटी-बड़ी दरारें उभरीं और जमीन 100 मीटर तक नीचे धंस गई. इसी दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि धरती की गहराइयों से पिघला हुआ मैग्मा ऊपर आ रहा है, जो आगे चलकर बेसाल्टिक समुद्री तल का रूप ले रहा है. भूवैज्ञानिक इतिहास के पन्नों को पलटें तो लगभग 3 करोड़ साल पहले तक अफ्रीका एक ही बड़ी विवर्तनिक प्लेट (Tectonic Plate) हुआ करता था. तब पृथ्वी के भीतर से उठे पिघले पत्थरों के तेज बहाव ने अफ्रीकी प्लेट को चीरना शुरू किया, जिससे अरब प्रायद्वीप अफ्रीका से अलग हो गया और लाल सागर का निर्माण हुआ. वर्तमान में इस अफार ट्रिपल जंक्शन पर तीन अलग-अलग प्लेटें मिलती हैं, वो हैं अरेबियन, सोमालियन और अफ्रीकी प्लेट. ये तीनों प्लेटें हर साल लगभग 1 सेंटीमीटर की गति से एक-दूसरे से दूर खिसक रही हैं.

    हालिया अध्ययनों से पता चला है कि अफार और तुर्काना रिफ्ट क्षेत्र में पृथ्वी की ऊपरी परत खिंचकर बेहद पतली (लगभग 13 किमी) हो चुकी है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में नेकिंग कहा जाता है. यह इस बात का संकेत है कि महाद्वीप का विभाजन अब तय हो चुका है. जब अरेबियन और अफ्रीकी प्लेट के बीच का यह गैप पर्याप्त बड़ा हो जाएगा, तो लाल सागर और अदन की खाड़ी का पानी इस नए डिप्रेशन में समा जाएगा. दोनों महासागर आपस में मिलकर एक विशाल नए महासागर का निर्माण करेंगे. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस पूरी प्रक्रिया को मुकम्मल होने में लगभग 50 लाख से 1 करोड़ साल का समय लगेगा. आमतौर पर नए समुद्री तल बनने की प्रक्रिया समुद्र की गहराइयों में छिपी रहती है, लेकिन अफार में यह सब धरती की सतह पर प्रत्यक्ष रूप से हो रहा है, जिससे वैज्ञानिकों को एक नए महासागर के पैदा होने का अध्ययन करने का अनूठा अवसर मिला है.

  • फुटबॉल जितना बड़ा था सिर, जानिए इस 1 साल के बच्चे को कैसे मिली नई जिंदगी?

    फुटबॉल जितना बड़ा था सिर, जानिए इस 1 साल के बच्चे को कैसे मिली नई जिंदगी?

    फुटबॉल जितना बड़ा था सिर, जानिए इस 1 साल के बच्चे को कैसे मिली नई जिंदगी?

    नेशविले (अमेरिका). दुनियाभर में कई ऐसी दुर्लभ बीमारियां हैं, जिनके बारे में जानकर हैरानी होती है. कभी कोई बिना हाथ-पैर के पैदा हो जाता है, तो कभी किसी के दिल में ही जन्मजात दोष होते हैं. जब मां-बाप को इन खामियों के बारे में पता चलता है, तो उनके होश उड़ जाते हैं. उन्हें समझ नहीं आता है कि आखिर कैसे वो अपने नवजात को सामान्य जिंदगी दें. ऐसा ही एक दुर्लभ मामला अमेरिका के नेशविले शहर से सामने आया है. यहां पर एक ऐसे बच्चे का जन्म हुआ, जिसके सिर का आकार सामान्य से दोगुना या यूं कहें कि फुटबॉल जितना बड़ा था. बच्चे का नाम नोआ बेकर है. नोआ की मां मैडिसन जब 4 महीने की गर्भवती थी, तभी उसे अपने होने वाले बच्चे की इस दुर्लभ बीमारी के बारे में पता चल गया था. लेकिन पैदा होने के बाद नोआ का सिर लगातार बढ़ता रहा.

    हालत ऐसी हो गई थी कि एक साल का मासूम नोआ न ठीक से बैठ पाता था, न अपना सिर संभाल पाता था और न ही सामान्य तरीके से खाना खा पाता था. उसकी जिंदगी बद से बदतर होती जा रही थी. आखिरकार डॉक्टरों ने एक बेहद जोखिम भरा फैसला लिया. उन्होंने नोआ के सिर की सर्जरी करने का फैसला किया. उन्होंने सर्जरी में नोआ की खोपड़ी का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा हटाकर उसका आकार कम कर दिया. नोआ की मां मैडिसन बेकर बताती हैं कि गर्भावस्था के दौरान ही डॉक्टरों ने उन्हें चेतावनी दे दी थी कि उनके होने वाले बच्चे को हाइड्रोसिफलस है. यह ऐसी स्थिति होती है, जिसमें दिमाग के भीतर जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ जमा होने लगता है. इसका दबाव बढ़ने पर शिशु का सिर तेजी से फैलने लगता है. इस तरह मार्च 2025 में जब नोआ का जन्म हुआ, तभी डॉक्टरों ने उसे नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती कर लिया.

    महज दो सप्ताह की उम्र में नोआ की पहली सर्जरी हुई. डॉक्टरों ने दिमाग में जमा अतिरिक्त तरल निकालने के लिए शंट लगाया, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई. अगले कुछ महीनों में उसे कई बार ऑपरेशन थिएटर जाना पड़ा. कुल मिलाकर छह ब्रेन सर्जरी करनी पड़ीं. समय के साथ नोआ का सिर इतना बड़ा हो गया कि उसकी परिधि करीब 26 इंच तक पहुंच गई. तुलना करें तो सामान्य नवजात के सिर की परिधि लगभग 13 से 14 इंच होती है. बढ़ते वजन की वजह से वह अपना सिर तक नहीं उठा पाता था. डॉक्टरों के मुताबिक अगर समय रहते इलाज नहीं किया जाता, तो आगे चलकर उसकी जान को भी खतरा हो सकता था. इसी वजह से 1 मई 2026 को डॉक्टरों की टीम ने क्रेनियल रिडक्शन सर्जरी की. यह बेहद जटिल प्रक्रिया थी, जिसमें खोपड़ी का बड़ा हिस्सा हटाकर उसका आकार कम किया गया, ताकि दिमाग पर पड़ने वाला दबाव नियंत्रित हो सके और बच्चे का शारीरिक विकास बेहतर हो.

    डॉक्टरों द्वारा की गई सफल सर्जरी के बाद अब एक साल का मासूम नोआ सामान्य जिंदगी जीने की ओर बढ़ रहा है. वह अब पहले की तुलना में ज्यादा सहज महसूस कर रहा है और धीरे-धीरे रिकवरी कर रहा है. हालांकि, उसकी मां कहती हैं कि बेटे का बदला हुआ चेहरा देखकर उन्हें अभी भी थोड़ा अलग महसूस होता है. वह प्यार से उसके बड़े सिर को “बिग नोगिन” कहकर बुलाती थीं. मैडिसन ने आगे कहा कि उन्हें अपने बच्चे के बड़े सिर वाले रूप के साथ जीने की आदत हो गई थी, इसलिए बदलाव को स्वीकार करने में थोड़ा समय लग रहा है. लेकिन सबसे बड़ी खुशी यह है कि अब मेरा बेटा सामान्य जिंदगी की ओर बढ़ रहा है. वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि हाइड्रोसिफलस का समय पर इलाज बेहद जरूरी है. सही इलाज मिलने पर कई बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं. नोआ का मामला भी इसी बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियों में भी समय पर चिकित्सा और लगातार देखभाल से उम्मीद कायम रह सकती है.

  • क्या आप जानते हैं Gen Z के इन 4 फिंगर जेस्चर का सीक्रेट? हर इशारे का है अलग मतलब..

    क्या आप जानते हैं Gen Z के इन 4 फिंगर जेस्चर का सीक्रेट? हर इशारे का है अलग मतलब..

    क्या आप जानते हैं Gen Z के इन 4 फिंगर जेस्चर का सीक्रेट? हर इशारे का है अलग मतलब..

    जेन जी जनरेशन के स्लैंग तो खूब वायरल हुए और लोगों ने इसके मतलब भी खोज कर निकाल लिए। लेकिन केवल स्लैंग ही नहीं जेन जी बगैर बोलें भी काफी कुछ बोल जाते हैं और वो आपकी समझ से बाहर हो सकता है। इसलिए जान लें जेन जी के इन हाथ के इशारों का असली मतलब।

    जेन जी हाथ से कर रहे ऐसे 4 इशारे तो समझें इनका मतलब

    जेन जी वो जनरेशन है जो इस समय सबका ध्यान खींच रही है। लेकिन लोग इनकी अच्छी सोच की बजाय इनके स्लैंग और उंगलियों के इशारों पर फोकस कर रहे हैं। सीजेपी वाले प्रोटेस्ट में इनके स्लैंग तो सबकी जुबान पर चढ़ गए लेकिन इनके हाथ वालों इशारों को लोगों ने गंदा समझकर इग्नोर किया। जबकि ये हाथ के इशारे गंदे नहीं बल्कि इशारों-इशारों में अपनी बात को कहने का तरीका हैं। अब कम शब्दों में तो जेन जी अपनी बात बोलते हैं ये तो सभी जान गए लेकिन कई बार ये बिना बोले भी बहुत कुछ बोल जाते हैं, वो भी केवल हाथ के इशारे करके। तो यहां समझें ऐसे ही 4 हैंड गेस्चर जो जेन जी मन की बातों को बताने के लिए करते हैं।जेन जी के हाथ के इशारों की मीनिंग

    दोनों हाथ की पहली उंगली को एक दूसरे से लड़ाना

    अब इस इशारे को देखकर किसी भी तरह की गंदी बात को मन में ना लाएं क्योंकि ये इशारा तो वो ये बताने के लिए करते हैं कि उन्हें शर्म आ रही है। अब मिलेनियल्स की तरह दोनों हथेलियों के बीच शर्माने वाला फैशन तो आउट हो चुका है। तो अब अगर इन्हें शर्म आती है तो ये दोनों हाथ की इंडेक्स फिगर को आपस में टकराकर दिखाते हैं।

    दोनों हथेलियों को ऊपर नीचे हिलाना

    फर्स्ट फिंगर और अंगूठे को टच कर रहे तो ये ‘क्लॉक इट’ है

    दोनों हाथ की इंडेक्स फिंगर और अंगूठे को आपस में मिलाकर बार-बार इशारे करते हैं तो इसे गलत ना समझें, इसका मतलब है क्लॉक इट, यानि कि वो आपकी बात से पूरी तरह सहमत हैं। तो अगली बार कोई जेन जी सामने आकर यूं उंगलियां हिलाए और बोले क्लॉक इट, तो इसे गलत ना समझें, वो आपकी बातों से सहमत होकर ऐसे इशारे कर रहा।

    मिडिल फिंगर और थंब को जोड़कर बोलते हैं ये

    वहीं अगर पहली उंगली की बजाय वो मिडिल फिंगर और थंब को एक दूसरे से जल्दी-जल्दी मिलाते हैं तो ऐसे इशारे का मतलब बिल्कुल बदल जाता है। दरअसल, जब जेन जी मिडिल फिंगर और थंब को आपस में टकरा रहे होते हैं तो इसका मतलब है कि वो आपकी तारीफ कर रहे हैं। एक तरह से वो आपके लिए ताली बजा रहे हैं। तो बस वो अपनी दो उंगलियों से ही आपके लिए ताली बजा देते हैं। अगली बार आसपास कोई जेनजी आपके लिए इस तरह से उंगलियों को हिलाए तो समझ जाएं कि वो आपकी तारीफ कर रहा और ताली बजा रहा।

  • नजर उतारने में न करें ये गलती! जानें कितनी बार हाथ घुमाने से माना जाता है असरदार..

    नजर उतारने में न करें ये गलती! जानें कितनी बार हाथ घुमाने से माना जाता है असरदार..

    नजर उतारने में न करें ये गलती! जानें कितनी बार हाथ घुमाने से माना जाता है असरदार..

    बुरी नजर कैसे करें दूर

    नजर उतारने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। लोग बच्चों से लेकर बड़ों की नजर उतारी जाती है। हालांकि आज भी नजर उतारने की विधि को लेकर तमाम लोग कन्फ्यूज रहते हैं। तमाम लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर नजर उतारते हुए हाथ कितनी बार घुमाना चाहिए या सही माना जाता है? तो चलिए जानते हैं कि आखिर धार्मिक मान्यता के अनुसार नजर उतारने का सही तरीका क्या है? साथ में जानें इससे जुड़ी और भी जरूरी नियमों को।

    इतनी बार घुमाएं हाथ

    धार्मिक मान्यता के आधार पर नजर उतारते समय 7 बार हाथ घुमाया जाए तो ये सबसे अच्छा होता है। दरअसल 7 नंबर को बहुत ही खास महत्व दिया जाता है। जैसे 7 फेरे हो गए ये फिर 7 ऋषि हो गए और हमारे शरीर में भी 7 चक्र होते हैं। इन्हीं मान्याताओं के चलते ही नजर उतारते वक्त भी 7 बार हाथ घुमाया जाना सही माने लगा। सदियों से चली आ रही इस नियम को कई लोग आज भी फॉलो करते हैं और यही सही तरीका भी है।

    नजर उतारने का सही तरीका

    आपको जिस भी व्यक्ति की नजर उतारनी है सबसे पहले उसे अपने सामने आराम से बैठा दें। कोशिश करें कि नजर उतरवाने वाले का चेहरा उत्तर या फिर पूर्व दिशा की ओर हो। अब आप मुट्ठी में सूखी लाल मिर्च, पीली सरसों, सेंधा नमक लें। ध्यान रखें कि इसे दाहिने हाथ में ही लेना है। अब सामने वाले व्यक्ति के सिर से पैर तक 7 बार हाथ घुमाएं। हाथ आप नियम के हिसाब से एंटी क्लॉकवाइज दिशा में घुमाने की कोशिश करें। मान्यता है कि ऐसा करने से बुरी नजर सही तरीके से दूर होती है और घर से भी नेगेटिविटी हटती है।

    नजर उतारने के बाद करें ये काम

    अब जिन चीजों को आपने हाथ में लिया था उसे आग में डाल दें। बाद में राख को आप किसी बहते हुए पानी में प्रवाहित कर दें। इसके बाद आप अपने हाथ को अच्छे से साफ कर लें। बस इस बात का ध्यान रखें कि नजर उतारते वक्त आपको बात नहीं करनी है और ना ही मन में उलटे-सीधे ख्याल लाने हैं। मन ही मन अपने ईष्ट देवता को याद करने की कोशिश करें और सही मंत्र का उच्चारण करें। इस दौरान नजर उतरवाने वाले व्यक्ति को भी शांत रहना चाहिए। बात की जाए टाइमिंग की तो सूर्यास्त के बाद ही इस काम को करना सही माना जाता है।

  • ‘रात 2 बजे काजल-लिपस्टिक लगाती है’, कहकर पति ने मांगा तलाक; हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज..

    ‘रात 2 बजे काजल-लिपस्टिक लगाती है’, कहकर पति ने मांगा तलाक; हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज..

    ‘रात 2 बजे काजल-लिपस्टिक लगाती है’, कहकर पति ने मांगा तलाक; हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज..

    रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि देर रात मेकअप करना या सजना-संवरना किसी महिला को मानसिक रूप से अस्वस्थ साबित नहीं करता। अदालत ने पति की तलाक याचिका खारिज करते हुए कहा कि केवल ऐसे आरोपों के आधार पर विवाह समाप्त नहीं किया जा सकता।

    क्या था मामला?

    मामला वर्ष 2015 में हुए विवाह से जुड़ा है। पति ने अदालत में दावा किया कि शादी के कुछ समय बाद एक रात करीब 2 बजे उसकी नींद खुली तो उसने पत्नी को अलमारी के सामने खड़े होकर काजल और लिपस्टिक लगाते देखा। उसका आरोप था कि इस व्यवहार से उसे पत्नी के मानसिक रूप से बीमार होने का संदेह हुआ और यह बात शादी से पहले उससे छिपाई गई थी।

    हाईकोर्ट ने क्या कहा?

    हाईकोर्ट ने पति के तर्कों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को मानसिक रोगी मानने के लिए सक्षम मनोचिकित्सक की मेडिकल रिपोर्ट और ठोस चिकित्सीय साक्ष्य आवश्यक हैं।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि नई-नवेली दुल्हन का किसी भी समय सजना-संवरना असामान्य व्यवहार नहीं माना जा सकता। केवल इस आधार पर मानसिक बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    मेडिकल सबूत पेश नहीं कर सका पति

    सुनवाई के दौरान पति ने दावा किया कि उसने पत्नी का कई अस्पतालों में इलाज कराया था, लेकिन वह अदालत में कोई मेडिकल रिकॉर्ड, डॉक्टर की रिपोर्ट या अन्य साक्ष्य पेश नहीं कर सका। इसी आधार पर अदालत ने उसके दावे को पर्याप्त नहीं माना।

    पत्नी ने लगाए दहेज प्रताड़ना के आरोप

    सुनवाई के दौरान पत्नी ने आरोप लगाया कि शादी के बाद उससे अतिरिक्त दहेज की मांग की गई और मांग पूरी नहीं होने पर उसे मानसिक रूप से बीमार बताकर प्रताड़ित किया गया।

    महिला का कहना था कि उसके पिता ने पति के खाते में एक लाख रुपये भी भेजे थे, लेकिन बाद में अतिरिक्त रकम की मांग की गई। आरोप है कि मांग पूरी नहीं होने पर पति उसे मायके छोड़ आया और इसके बाद तलाक की याचिका दायर कर दी।

    कोर्ट की अहम टिप्पणी

    अदालत ने कहा कि मध्यस्थता के दौरान पत्नी ने वैवाहिक संबंध बनाए रखने की इच्छा जताई थी, जबकि पति साथ रहने के लिए तैयार नहीं हुआ। कोर्ट ने माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर विवाह टूटने के लिए पति स्वयं जिम्मेदार प्रतीत होता है और वह अपनी ही परिस्थितियों का लाभ उठाकर तलाक का दावा नहीं कर सकता।

  • किस उम्र के लोग छोड़ते हैं सबसे ज्यादा गैस? वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आए दिलचस्प तथ्य..

    किस उम्र के लोग छोड़ते हैं सबसे ज्यादा गैस? वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आए दिलचस्प तथ्य..

    किस उम्र के लोग छोड़ते हैं सबसे ज्यादा गैस? वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आए दिलचस्प तथ्य..

    क्या आपने कभी सोचा है कि एक स्वस्थ व्यक्ति दिनभर में कितनी बार गैस छोड़ता है? ऑस्ट्रेलिया में किए गए एक अध्ययन में इस सवाल का जवाब खोजने की कोशिश की गई। शोध में यह भी पता लगाया गया कि किस उम्र के लोगों में गैस पास करने की औसत संख्या सबसे अधिक होती है।

    6,400 लोगों के डेटा पर आधारित अध्ययन

    आंतों के स्वास्थ्य (Gut Health) को बेहतर ढंग से समझने के लिए ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने “Chart Your Fart” नाम का एक ऐप तैयार किया। इसके जरिए लगभग 6,400 प्रतिभागियों का डेटा एकत्र किया गया, जिसमें करीब 3.6 लाख बार गैस पास करने के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया।

    औसतन दिन में कितनी बार गैस छोड़ते हैं लोग?

    अध्ययन के अनुसार, एक व्यक्ति औसतन दिन में लगभग 5 बार गैस छोड़ता है।

    • पुरुष: औसतन 5.2 बार प्रतिदिन
    • महिलाएं: औसतन 4.8 बार प्रतिदिन

    शोध में शामिल लगभग 79% प्रतिभागियों ने बताया कि वे दिनभर में 2 से 7 बार गैस पास करते हैं, जिसे सामान्य माना जाता है।

    किस उम्र में सबसे ज्यादा गैस बनती है?

    उम्र के आधार पर किए गए विश्लेषण में पाया गया कि—

    • 14 से 25 वर्ष के युवा औसतन 4.4 बार गैस छोड़ते हैं।
    • 26 से 45 वर्ष के लोग सबसे अधिक, यानी 5 से ज्यादा बार गैस पास करते हैं।
    • 46 से 65 वर्ष के लोगों में यह औसत करीब 5 बार प्रतिदिन रहा।

    दिन के किस समय ज्यादा होती है गैस?

    शोध के अनुसार, गैस बनने और निकलने का संबंध भोजन और पाचन प्रक्रिया से जुड़ा है।

    • सुबह और दोपहर में गैस अपेक्षाकृत कम होती है।
    • रात 8 से 10 बजे के बीच गैस पास करने की संभावना सबसे अधिक देखी गई, क्योंकि इस समय तक रात का भोजन पचने की प्रक्रिया सक्रिय रहती है।

    कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

    विशेषज्ञों के अनुसार, दिन में कुछ बार गैस निकलना सामान्य पाचन प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन यदि गैस के साथ बार-बार पेट फूलना, तेज दर्द, लगातार असहजता, वजन घटना या मल त्याग की आदतों में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    इसके अलावा, लैक्टोज असहिष्णुता, गेहूं से एलर्जी, IBS (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम), थायरॉयड, डायबिटीज, कार्बोनेटेड पेय, धूम्रपान और कुछ उच्च-फाइबर खाद्य पदार्थ भी अधिक गैस बनने का कारण बन सकते हैं।

  • चीन में ‘फुट जूस’ बेचने का अजीब ट्रेंड वायरल, नींबू पानी में पैर डुबोकर 670 रुपये प्रति कप में बेचा पेय..

    चीन में ‘फुट जूस’ बेचने का अजीब ट्रेंड वायरल, नींबू पानी में पैर डुबोकर 670 रुपये प्रति कप में बेचा पेय..

    चीन में ‘फुट जूस’ बेचने का अजीब ट्रेंड वायरल, नींबू पानी में पैर डुबोकर 670 रुपये प्रति कप में बेचा पेय..

    सोशल मीडिया पर चीन का एक अनोखा और विवादित मामला तेजी से चर्चा में है। ग्वांगझोउ शहर में आयोजित एक कॉमिक कन्वेंशन के दौरान कुछ महिला कॉस्प्लेयर्स ने कथित तौर पर नींबू पानी से भरे टब में अपने पैर डुबोकर उसी पेय को ‘फुट जूस’ के नाम से बेचना शुरू कर दिया। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद इंटरनेट पर तीखी बहस छिड़ गई।

    कॉमिक इवेंट में लगाया गया अनोखा स्टॉल

    रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला दक्षिणी चीन के ग्वांगझोउ में आयोजित फायरफ्लाई कॉमिक कन्वेंशन का है। बताया गया कि कुछ महिला कॉस्प्लेयर्स कुर्सियों पर बैठी थीं और उनके पैर पानी तथा कटे हुए नींबू से भरे एक बड़े टब में थे। वहीं मौजूद लोग उसी टब से पेय निकालकर आगंतुकों को बेच रहे थे।

    एक कप की कीमत करीब 670 रुपये

    बताया जा रहा है कि इस पेय की कीमत 50 युआन (करीब 670 भारतीय रुपये) प्रति कप रखी गई थी। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और दावों के अनुसार, कई लोगों ने इसे खरीदा, जबकि कुछ लोग स्टॉल के पास अलग-अलग तरह की हरकतें करते भी दिखाई दिए। स्टॉल पर एक बोर्ड भी लगाया गया था, जिस पर लिखा था कि यह “केवल मनोरंजन के उद्देश्य से” है।

    वायरल होने के बाद मचा विवाद

    घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठाए। कई यूजर्स ने इस तरह की गतिविधि की आलोचना की, जबकि कुछ ने इसे केवल प्रचार पाने का तरीका बताया।

    आयोजकों ने की कार्रवाई

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद बढ़ने के बाद कार्यक्रम के आयोजकों ने संबंधित स्टॉल को बंद करा दिया और इसमें शामिल कॉस्प्लेयर्स को इवेंट से बाहर कर दिया।

    नोट: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों, वीडियो और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। घटना से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

  • हिमालय की ऊंचाइयों में खिलता है विशालकाय फूल, ‘हिमालयी हीरा’ की खूबसूरती देख रह जाएंगे दंग..

    हिमालय की ऊंचाइयों में खिलता है विशालकाय फूल, ‘हिमालयी हीरा’ की खूबसूरती देख रह जाएंगे दंग..

    हिमालय की ऊंचाइयों में खिलता है विशालकाय फूल, ‘हिमालयी हीरा’ की खूबसूरती देख रह जाएंगे दंग..

    4,000 मीटर की ऊंचाई पर खिलता है हिमालय का दुर्लभ ‘डायमंड फ्लावर’, 7 से 15 साल में एक बार देखने का मिलता है मौका

    प्रकृति अपने अनोखे चमत्कारों से हमेशा लोगों को हैरान करती रही है। इन दिनों हिमालय में पाए जाने वाले एक दुर्लभ पौधे ‘डायमंड फ्लावर’ को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता देखने को मिल रही है। अपनी अनोखी बनावट और दुर्लभता के कारण यह पौधा प्रकृति प्रेमियों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

    क्या है ‘डायमंड फ्लावर’?

    जिसे सोशल मीडिया पर ‘डायमंड फ्लावर’ कहा जा रहा है, उसका वैज्ञानिक नाम Rheum nobile है। इसे कई स्थानों पर पदमचाल या केन्जो (Kenjo) के नाम से भी जाना जाता है। इसकी चमकदार संरचना और विशिष्ट आकार के कारण इसे प्यार से ‘हिमालयी हीरा’ भी कहा जाता है।

    7 से 15 साल में एक बार खिलता है

    इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत इसका लंबा जीवन चक्र है। विशेषज्ञों के अनुसार, Rheum nobile एक मोनोकार्पिक (Monocarpic) पौधा है, यानी यह अपने जीवनकाल में केवल एक बार फूल देता है। इसे पूरी तरह विकसित होकर फूल आने में लगभग 7 से 15 वर्ष लग सकते हैं। फूल और बीज बनने के बाद इसका जीवन चक्र समाप्त हो जाता है।

    ऊंचाई और बनावट बनाती है इसे खास

    यह पौधा लगभग 1 से 2 मीटर (करीब 3.2 से 6.5 फीट) तक ऊंचा हो सकता है। इसकी पारदर्शी, हल्के पीले रंग की पत्तीनुमा संरचनाएं इसे अन्य पौधों से बिल्कुल अलग पहचान देती हैं। यही विशेषता इसे दूर से भी बेहद आकर्षक बनाती है।

    कहां पाया जाता है?

    यह दुर्लभ पौधा समुद्र तल से लगभग 4,000 मीटर (करीब 13,000 फीट) या उससे अधिक ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में उगता है। अत्यधिक ठंड, तेज हवाओं और सीमित ऑक्सीजन जैसी कठिन परिस्थितियों में भी इसका विकसित होना प्रकृति की अद्भुत क्षमता का उदाहरण माना जाता है।

    संरक्षण भी है जरूरी

    दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियों का संरक्षण पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों से अपील की जाती है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में भ्रमण के दौरान पौधों और प्राकृतिक आवास को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस अनमोल प्राकृतिक धरोहर को देख सकें।