Category: Gazab

  • कोबरा-वाइपर ने बदल दी गांव की किस्मत, इस खास ट्रिक से भर-भरकर नोट कमा रहे लोग…

    कोबरा-वाइपर ने बदल दी गांव की किस्मत, इस खास ट्रिक से भर-भरकर नोट कमा रहे लोग…

    कोबरा-वाइपर ने बदल दी गांव की किस्मत, इस खास ट्रिक से भर-भरकर नोट कमा रहे लोग…

    Strange Snake Village China : भारत में कहीं पर भी सांप को पालने का चलन नहीं है. महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में स्थित शेतफल गांव सांपों के प्रसिद्ध है. गांव के घरों में सांपों के आराम करने और आने-जाने के लिए एक खास जगह बनाई जाती है, जिसे ‘देवस्थानम’ कहा जाता है. दुनिया का एक ऐसा गांव भी है जिसने लोगों की किस्मत बदल दी. यह गांव पड़ोसी देश चीन में है. इसका नाम जिसिकियाओ है. यह गांव स्नेक फार्मिंग के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है.

    जिसिकियाओ गांव चीन में है. यहां के लोग पहले जैसे-तैसे गुजारा करते थे. अब हालात बदल गए हैं. गांव के लोग अब मोटा पैसा कमा रहे हैं. सांपों से झुर्रियां हटाने के लिए क्रीम, मर्दाना ताकत बढ़ाने वाला पाउडर और वाइन बना रहे हैं. इस गांव में हर साल तीस लाख सांप ब्रीड किए जाते हैं.

    जिसिकियाओ गांव नहर के किनारे बसा हुआ है. यहां पर कभी बहुत गरीबी थी. यहां के लोग खेतीबाड़ी-मछली पकड़कर करके गुजारा करते थे. अब यहां सांपों से शराब बनाई जाती है. धूप में उन्हें सुखाकर सांपों से दवा तैयार करते हैं. चीन में इसे सांपों का गांव कहते हैं. इसी गांव के यांग होंग चांग बीते 40 साल से सांपों का कारोबार कर रहे हैं. यहां पर सांपों को शराब में डुबोकर भी रखा जाता है ताकि ड्रिंक बनाई जा सके. माना जाता है सापों से तैयार की गई शराब से जोड़ों का दर्द ठीक हो जाता है.

    जिसिकियाओ गांव में सांपों की खेती 1980 के दशक में शुरू हुई. शुरुआत में जंगली सांपों का इस्तेमाल बीमारियों को ठीक करने में होता था. फिर गांव वालों ने इसे अपना पेशा बना लिया और सांपों की खेती करने लगे. अपनी किस्मत बदल ली. ये सांप इतने जहरीले हैं कि 10 मिनट की भी मोहलत नहीं देते. सांपों के बिजनेस की इतनी डिमांड है कि कंपनिया दोगुना मुनाफा कमा रही हैं.

    स्नेक फार्म में लकड़ी और शीशे के छोटे-छोटे बक्सों में सांपों को पाला जाता है. जब वो बड़े हो जाते हैं तो सबसे पहले जहर निकालते हैं. जहर को सूखाते हैं. सूखे हुए जहर को दवा कंपनियां खरीदती हैं. इसके अलावा सांपों से स्नेक पाउडर, स्नेक क्रीम और स्नेक वाइन भी बनाई जाती है. ये चीजें बढ़ती उम्र के असर को रोकने, स्किन को बेहतर बनाने में इस्तेमाल होती हैं. कोरोना के समय यहां सांपों की फार्मिंग पर रोक लगा दी गई. पूरी दुनिया से डिमांड में भी कमी आई.

  • कुदरत का अनोखा करिश्मा! महिला ने दिया 4 हमशक्ल बच्चियों को जन्म, अब लोगों के सामने रखी ये मजेदार शर्त..

    कुदरत का अनोखा करिश्मा! महिला ने दिया 4 हमशक्ल बच्चियों को जन्म, अब लोगों के सामने रखी ये मजेदार शर्त..

    कुदरत का अनोखा करिश्मा! महिला ने दिया 4 हमशक्ल बच्चियों को जन्म, अब लोगों के सामने रखी ये मजेदार शर्त..

    सोचिए, अगर आपका परिवार एक ही दिन में चार नए नन्हे मेहमानों के आने से सीधे दोगुना हो जाए, तो खुशियों के साथ-साथ जिम्मेदारियों का कितना बड़ा पहाड़ टूट पड़ेगा? ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में कुछ ऐसा ही हुआ है. 34 वर्षीय जेनिटर नामोआना (Jenitar Na’amoana) ने एक बेहद दुर्लभ और कुदरत का करिश्मा माने जाने वाले मामले में एक साथ 4 जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया है. इस अनोखे जन्म ने न केवल इस परिवार की दुनिया बदल दी है, बल्कि इनके सामने रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी एक बड़ी व्यावहारिक चुनौती भी खड़ी कर दी है.

    15 मिलियन में एक दुर्लभ मामला

    डॉक्टरों के मुताबिक, एक ही फर्टिलाइज्ड एग से बिना किसी मेडिकल ट्रीटमेंट के चार एक जैसी बच्चियों (Identical Quadruplets) का जन्म होना लगभग 1.5 करोड़ मामलों में से एक में होता है. जेनिटर की सिजेरियन डिलीवरी करीब 28 हफ्तों की प्रेग्नेंसी के बाद सफलतापूर्वक हुई. चारों नवजात बहनें एकदम स्वस्थ हैं.

    5 से सीधे 10 सदस्यों का परिवार

    बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस असाधारण जन्म से पहले कपल के घर में पहले से ही तीन छोटे बच्चे थे. चार नन्हीं प्रिंसेस एमिली, हैरियट, कैथरीन और एलेक्सा के आने के बाद अब यह परिवार कुल 10 सदस्यों का बड़ा कुनबा बन चुका है.

    10 सीटों वाली वैन खरीदने के लिए मांगा क्राउडफंडिंग से सहारा

    परिवार की सबसे बड़ी समस्या अब यात्रा को लेकर आ रही है. उनकी पुरानी कार में 10 लोगों के एक साथ बैठने या सुरक्षित रूप से ट्रैवल करने की जगह ही नहीं है. अस्पताल के चक्कर काटने, बच्चों को स्कूल छोड़ने और परिवार को बाहर ले जाने के लिए अब एक 10 या 12 सीटों वाली बड़ी वैन बेहद जरूरी हो गई है.

    डायपर, मिल्क फॉर्मूला और अन्य रोजमर्रा के खर्चों के भारी बोझ को देखते हुए, मां ने एक ऑनलाइन क्राउडफंडिंग कैंपेन (GoFundMe) शुरू किया है. इस अभियान को लोगों का भारी समर्थन मिल रहा है और कई मददगार उनके साथ आ खड़े हुए हैं.

  • शादीशुदा जिंदगी छोड़ महिला सहकर्मी के साथ रहने लगी पत्नी, पति ने घर चलने को बोला तो खोल दिए राज

    शादीशुदा जिंदगी छोड़ महिला सहकर्मी के साथ रहने लगी पत्नी, पति ने घर चलने को बोला तो खोल दिए राज

    शादीशुदा जिंदगी छोड़ महिला सहकर्मी के साथ रहने लगी पत्नी, पति ने घर चलने को बोला तो खोल दिए राज

    यूपी के गाजियाबाद में एक महिला अचानक घर से गायब हो गई. घरवालों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. उसकी तलाश करते रहे. एक दिन पता चला कि महिला अपनी महिला सहकर्मी के साथ खोड़ा में रह रही है. जब पति पहुंचा और घर चलने को कहा तो उसने महिला सहकर्मी के साथ रहने की बात कही.

    उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 4 साल की शादी के बाद एक महिला ने पति से अलग होकर अपनी महिला सहकर्मी के साथ रहने का फैसला किया. महिला पिछले करीब एक महीने से अपनी साथी सहकर्मी युवती के साथ खोड़ा के वंदना एनक्लेव इलाके में किराए का कमरा लेकर रह रही थी. पत्नी के लापता होने के बाद गुमशुदगी दर्ज कराकर उसकी तलाश कर रहा पति रविवार को खोड़ा पहुंचा और उसे ढूंढ लिया. पति ने पत्नी को वापस साथ चलने के लिए कहा, लेकिन महिला ने अपने पति के साथ जाने से साफ इनकार कर दिया और अपनी महिला सहकर्मी के साथ ही रहने की बात कही. महिला ने पति पर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं.

    एक ही कंपनी में काम करती हैं दोनों महिलाएं- बताया गया कि प्रिया और नीलम एक ही निजी कंपनी में काम करती हैं. कंपनी में काम करने के दौरान दोनों के बीच दोस्ती हुई और धीरे-धीरे उनकी नजदीकियां बढ़ गईं. इसी बीच महिला प्रिया और उसके पति के बीच विवाद होने लगा. 12 अगस्त को हुए विवाद के बाद प्रिया घर से चली गई. काफी तलाश के बाद भी उसका पता नहीं चला तो पति ने ईकोटेक थाने में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया.

    खोड़ा में रहने की मिली जानकारी- नीलम के परिजन भी उसकी तलाश कर रहे थे. दोनों परिवारों को सोशल मीडिया के जरिए दोनों के खोड़ा में साथ रहने की जानकारी मिली. रविवार को परिवार के लोग खोड़ा पहुंचे तो वंदना एनक्लेव इलाके में दोनों एक साथ मिलीं जहां वह किराए के मकान में रह रही है. परिजनों ने उन्हें समझाने और घर वापस चलने के लिए कहा, लेकिन दोनों ने अलग होने से इनकार कर दिया. प्रिया ने पति के साथ जाने से भी मना कर दिया और नीलम के साथ ही रहने की बात कही.

    पति पर लगाए मारपीट के आरोप- पुलिस के मुताबिक, बातचीत के दौरान प्रिया ने पति के व्यवहार को ठीक नहीं होने की बात भी कही और उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया. हालांकि इस मामले में उसका मुख्य रुख नीलम के साथ रहने का ही रहा. देर शाम तक पुलिस की मौजूदगी में दोनों युवतियों और उनके परिजनों के बीच बातचीत चलती रही. वहीं, इस पूरे मामले एसीपी इंदिरापुरम सूर्यबली मौर्य ने बताया कि शिकायत मिलने पर मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.

  • पति-पत्नी साथ रहते हैं, फिर​​​​​ भी खाते हैं अलग! जानें क्या है Food Divorce और क्यों बढ़ रहा ट्रेंड.

    पति-पत्नी साथ रहते हैं, फिर​​​​​ भी खाते हैं अलग! जानें क्या है Food Divorce और क्यों बढ़ रहा ट्रेंड.

    पति-पत्नी साथ रहते हैं, फिर​​​​​ भी खाते हैं अलग! जानें क्या है Food Divorce और क्यों बढ़ रहा ट्रेंड.

    आज के समय में कपल्स की लाइफस्टाइल तेजी से बदल रही है. किसी की डाइट फिटनेस के हिसाब से है, तो कोई अपनी पसंद का खाना पसंद करता है. किसी का ऑफिस टाइम अलग है, तो किसी को देर रात खाना अच्छा लगता है. ऐसे में एक ही घर में रहने वाले कई कपल्स अब अलग-अलग खाना खरीदने, बनाने और खाने लगे हैं. इसी नए चलन को ‘Food Divorce’ कहा जा रहा है. इसका मतलब रिश्ता या शादी खत्म होना बिल्कुल नहीं है.

    क्या होता है फूड डायवोर्स?

    फूड डायवोर्स का आसान मतलब है कि कपल्स एक साथ रहते हुए भी अपनी-अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से खाना खाते हैं. दोनों अलग सामान खरीद सकते हैं, अलग खाना बना सकते हैं और अलग समय पर खाना खा सकते हैं. इसकी एक बड़ी वजह अलग डाइट, अलग खाने की पसंद और बिजी रूटीन है.

    खाने को लेकर क्यों बढ़ रही है परेशानी?

    खाना सिर्फ भूख मिटाने का जरिया नहीं है. यह हमारी बचपन की आदतों, परिवार और इमोशंस से भी जुड़ा होता है. इसलिए जब पार्टनर की खाने की पसंद अलग होती है, तो छोटी बात भी बहस में बदल सकती है. कई बार एक व्यक्ति को लगता है कि उसकी पसंद को महत्व नहीं मिल रहा, जबकि दूसरा खुद को जज या कंट्रोल किए जाने जैसा महसूस कर सकता है.

    क्या अलग-अलग खाना रिश्ते के लिए खराब है?

    हर बार ऐसा नहीं होता. अगर दोनों के ऑफिस का समय अलग है, किसी को खास डाइट की जरूरत है या दोनों की पसंद बिल्कुल अलग है, तो अलग-अलग खाना एक आसान रास्ता हो सकता है. हर दिन एक ही खाना खाने की मजबूरी रिश्ते के लिए जरूरी नहीं है.

    असली परेशानी कब शुरू होती है?

    समस्या तब हो सकती है जब अलग-अलग खाने के साथ कपल्स का साथ बिताया समय भी कम होने लगे. अगर डिनर के साथ बातचीत बंद हो जाए या कोई पार्टनर जानबूझकर साथ बैठने से बचने लगे, तो यह रिश्ते में इमोश्नल दूरी बढ़ने का इशारा हो सकता है.

    Food Divorce के बीच रिश्ता कैसे मजबूत रखें?

    अलग खाना खाने के बावजूद रिश्ते में अपनापन बनाए रखा जा सकता है. कपल्स सुबह साथ चाय पी सकते हैं, वीकेंड पर मिलकर खाना बना सकते हैं या कभी-कभी बाहर साथ खाना खा सकते हैं. डिनर के बाद साथ टहलना और एक-दूसरे की पसंद का सम्मान करना भी मददगार हो सकता है.

  • किचन में चूहे क्यों आते​​​​​ हैं? इन छोटी-छोटी गलतियों को तुरंत सुधारें… चूहों की एंट्री रोकने के आसान तरीके जानें

    किचन में चूहे क्यों आते​​​​​ हैं? इन छोटी-छोटी गलतियों को तुरंत सुधारें… चूहों की एंट्री रोकने के आसान तरीके जानें

    किचन में चूहे क्यों आते​​​​​ हैं? इन छोटी-छोटी गलतियों को तुरंत सुधारें… चूहों की एंट्री रोकने के आसान तरीके जानें

    किचन में चूहों का आना सिर्फ गंदगी की समस्या नहीं है. चूहे खाने, बर्तनों और किचन की सतह को गंदा कर सकते हैं. इसके अलावा वे तार, पाइप और दूसरी चीजों को भी कुतर सकते हैं. इसलिए अगर किचन में चूहों की आवाज या उनके आने के निशान दिख रहे हैं, तो समय रहते जरूरी कदम उठाना चाहिए.

    सबसे पहले चूहों का रास्ता खोजें

    चूहों को भगाने के लिए सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि वे किचन में कहां से आ रहे हैं. खिड़की, दरवाजे, पाइप, वेंट और दीवारों में बने छोटे छेद भी उनके आने का रास्ता हो सकते हैं. चूहे बहुत छोटी जगह से भी अंदर आ सकते हैं. इसलिए हर छोटे गैप और दरार को ध्यान से जांचें और मजबूत सामान से बंद करें.

    खाने को खुले में न रखें

    किचन में रखा खुला खाना चूहों को आसानी से अपनी ओर खींचता है. आटा, अनाज, बिस्किट, पास्ता और दूसरी सूखी चीजों को खुले पैकेट में रखने के बजाय एयरटाइट डिब्बों में रखें. कांच, धातु या मजबूत प्लास्टिक के डिब्बे बेहतर विकल्प हो सकते हैं. खाने की खुशबू बाहर कम जाएगी तो चूहों के आने की संभावना भी घटेगी.

    किचन की सफाई का रखें ध्यान

    खाना बनाने के बाद किचन काउंटर और फर्श को अच्छी तरह साफ करें. फर्श पर गिरे खाने के टुकड़े तुरंत हटा दें. कूड़ेदान को खुला न छोड़ें और खाने का कचरा समय पर बाहर करें. ढक्कन वाले डस्टबिन का इस्तेमाल करना भी बेहतर रहेगा.

    रात में सिंक में बर्तन न छोड़ें

    रातभर सिंक में गंदे बर्तन छोड़ने से भी चूहे आकर्षित हो सकते हैं. बर्तनों पर बचा खाना और उसकी गंध उन्हें किचन तक खींच सकती है. इसलिए सोने से पहले बर्तन साफ करें और सिंक को भी धो लें. किचन में कहीं पानी का रिसाव हो तो उसे भी जल्द ठीक कराएं.

    छोटे गैप को भी करें बंद

    पाइप, खिड़की, दरवाजे और वेंट के आसपास बने छोटे छेदों को नजरअंदाज न करें. इन्हें स्टील वूल, वायर मेश या दूसरी मजबूत सामग्री से बंद किया जा सकता है. अगर घर में लगातार चूहों की आवाज सुनाई दे या कई जगह उनके निशान दिखें, तो एक्सपर्ट की मदद लेना बेहतर है.

  • किस्मत ने किया अजीब खेल,​​​​​ करोड़ों की लॉटरी जीतने के बाद भी खाली हाथ रह गई महिला.

    किस्मत ने किया अजीब खेल,​​​​​ करोड़ों की लॉटरी जीतने के बाद भी खाली हाथ रह गई महिला.

    किस्मत ने किया अजीब खेल,​​​​​ करोड़ों की लॉटरी जीतने के बाद भी खाली हाथ रह गई महिला.

    किस्मत का खेल हर किसी के समझ में आ जाए ये इतना आसान नहीं होता है. यहां एक छोटी सी चूक इंसान की जिंदगी बदल सकती है. सोचिए, अगर किसी को अचानक पता चले कि उसने करोड़ों रुपये की लॉटरी जीत ली है और अगले ही पल मालूम हो कि जीत का टिकट गलती से कूड़े में फेंका जा चुका है, तो उस पर क्या बीतेगी? ब्रिटेन के साउथ वेल्स में रहने वाली 46 वर्षीय कैथ मेन के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. वे करोड़पति बनने से बस एक कदम दूर थीं, लेकिन एक गलतफहमी ने उनकी खुशियों को पलभर में मातम में बदल दिया.

    कैथ दो बच्चों की मां हैं और एक रग्बी क्लब में ट्रेजरर के तौर पर काम करती हैं. उन्होंने बताया कि पिछले करीब 20 सालों से वे हर बार एक ही नंबरों के कॉम्बिनेशन के साथ लॉटरी टिकट खरीदती आ रही थीं. उन्हें इन नंबरों पर इतना भरोसा था कि उन्होंने कभी इन्हें बदला ही नहीं. 6 जून की ड्रॉ के लिए भी उन्होंने वही नंबर चुने और इस बार उनकी मां फियोना ने उनके लिए टिकट खरीद लिया.

    कुछ दिन बाद जब लॉटरी के नतीजे आए, तो खबरों में बताया गया कि करीब 12 मिलियन पाउंड यानी लगभग 150 करोड़ रुपये का जैकपॉट अब तक किसी ने क्लेम नहीं किया है. यह खबर सुनकर कैथ के मन में उत्सुकता जगी. उन्होंने अपने पुराने नंबरों का मिलान किया और देखते ही उनकी आंखें खुशी से चमक उठीं. सभी नंबर पूरी तरह मैच कर रहे थे. उन्हें यकीन हो गया कि इस बार उनकी किस्मत खुल गई है.

    एक पल में किस्मत ने छोड़ा साथ

    खुशी से भरी कैथ ने तुरंत अपनी मां फियोना को फोन किया और पूछा कि क्या उन्होंने टिकट संभालकर रखा है. मां ने पहले तो कहा कि टिकट खरीदा था, लेकिन जब कैथ ने बताया कि वही टिकट करोड़ों रुपये का विजेता निकला है, तो फियोना के पैरों तले जमीन खिसक गई. उन्होंने बताया कि टिकट अब उनके पास नहीं है. दरअसल, नतीजे आने के बाद फियोना टिकट लेकर उसे चेक कराने एबरसीनन इलाके की एक लॉटरी दुकान पर गई थीं. वहां मौजूद कर्मचारी ने टिकट मशीन में स्कैन किया, लेकिन मशीन से कोई ऐसी आवाज नहीं आई जिससे यह पता चलता कि टिकट विजेता है. कर्मचारी ने उन्हें बताया कि इस टिकट पर कोई इनाम नहीं निकला. इसके बाद उसने पूछा कि क्या वे टिकट वापस ले जाना चाहती हैं.

    फियोना ने सोचा कि जब टिकट बेकार है तो उसे रखने का क्या फायदा. उन्होंने कर्मचारी से कहा कि टिकट फेंक दिया जाए. कर्मचारी ने भी बिना किसी शक के टिकट को डस्टबिन में डाल दिया. उस समय किसी को अंदाजा भी नहीं था कि जिस कागज को बेकार समझकर फेंका जा रहा है, वही करोड़ों रुपये की चाबी है. जब कैथ को अपनी जीत का पता चला और उन्होंने टिकट ढूंढने की कोशिश की, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. दुकान का कूड़ा साफ किया जा चुका था और टिकट हमेशा के लिए गायब हो चुका था. यही वजह है कि अब वे अपनी जीत साबित करने की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रही हैं.

    हालांकि, कैथ ने हार नहीं मानी. उन्होंने लॉटरी चलाने वाली आधिकारिक कंपनी ऑलविन को कई अहम सबूत दिए हैं. उन्होंने टिकट खरीदने का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध कराया है. इसके अलावा पड़ोस के एक सैलून के डोरबेल कैमरे की सीसीटीवी फुटेज भी जमा की है, जिसमें उनकी मां टिकट लेकर दुकान में जाती हुई दिखाई दे रही हैं. कैथ को उम्मीद है कि इन सबूतों के आधार पर कंपनी उनकी बात पर भरोसा करेगी.

    नहीं पढ़ा जा सकता टिकट

    दूसरी ओर, दुकान के मालिक करण कुमार ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि जिस समय यह घटना हुई, उस दौरान दुकान में मरम्मत और रेनोवेशन का काम चल रहा था. इसी वजह से अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे. उन्होंने यह भी संभावना जताई कि उस दिन लॉटरी स्कैन करने वाली मशीन में तकनीकी खराबी आ गई होगी, जिसके कारण टिकट सही तरीके से पढ़ा नहीं जा सका.

    मामला सामने आने के बाद ऑलविन कंपनी ने इसे गंभीरता से लिया है. कंपनी ने संबंधित लॉटरी टर्मिनल को जांच के लिए सीज कर दिया है और पूरे मामले की हाई लेवल जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों ने बताया है कि जांच पूरी करने के लिए करीब 30 दिनों का समय लगेगा. इस दौरान मशीन की तकनीकी स्थिति, टिकट स्कैनिंग प्रक्रिया और उपलब्ध सभी सबूतों की बारीकी से जांच की जाएगी.

    कैथ मेन का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी इस तरह उनके हाथ से निकल जाएगी. उनकी आंखों में आज भी उम्मीद है कि जांच के बाद उन्हें इंसाफ मिलेगा, लेकिन साथ ही यह दर्द भी साफ दिखाई देता है कि सिर्फ एक कागज का टुकड़ा न होने की वजह से वे अपनी सबसे बड़ी जीत से दूर हो गईं.

    .

  • 1 लीटर जहर की कीमत​​​​​ 100 करोड़ रुपये! कोबरा से भी ज्यादा खतरनाक है इस बिच्छू का विष; क्यों है इतना महंगा.?

    1 लीटर जहर की कीमत​​​​​ 100 करोड़ रुपये! कोबरा से भी ज्यादा खतरनाक है इस बिच्छू का विष; क्यों है इतना महंगा.?

    1 लीटर जहर की कीमत​​​​​ 100 करोड़ रुपये! कोबरा से भी ज्यादा खतरनाक है इस बिच्छू का विष; क्यों है इतना महंगा.?

    दुनिया में कई ऐसी चीजें हैं जिनकी कीमत सोने और हीरे से भी कहीं ज्यादा है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किसी जीव का जहर करोड़ों रुपये में बिक सकता है? आपको जानकर हैरानी होगी कि डेथस्टॉकर स्कॉर्पियन का जहर किंग कोबरा से भी ज्यादा खतरनाक होता है और इसकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाती है. जहर की इतनी ज्यादा कीमत होने का कारण यही है कि डेथस्टॉकर स्कॉर्पियन का विष बहुत कम मात्रा में पाया जाता है और इसे हासिल करना भी बेहद मुश्किल प्रक्रिया है.

    एक बिच्छू से कितना मिलता है जहर

    उत्तरी अफ्रीका और मध्य-पूर्व के कुछ हिस्सों में पाए जाने वाले डेथस्टॉकर स्कॉर्पियन के जहर की सबसे बड़ी खासियत इसकी जटिल रासायनिक संरचना है. एक बिच्छू से एक बार में औसतन सिर्फ 0.006 मिलीलीटर के आसपास जहर निकाला जा सकता है, यानी एक गैलन जहर इकट्ठा करने के लिए लाखों बिच्छुओं की जरूरत पड़ेगी. इसके अलावा जहर निकालने, सुरक्षित रखने और रिसर्च के लिए शुद्ध रूप में तैयार करने की प्रक्रिया भी काफी कठिन है.

    कैसे निकाला जाता है डेथस्टॉकर स्कॉर्पियन का जहर?

    आपको बता दें कि बिच्छू के जहर को हासिल करने के लिए उन्हें हाथ से ‘मिल्क’ किया जाता है. इस प्रक्रिया में हल्के इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन की मदद से बिच्छू को उसके डंक से जहर छोड़ने के लिए उकसाया जाता है. वैज्ञानिक और ट्रेंड वर्कर्स इस प्रक्रिया को बहुत सावधानी से पूरा करते हैं, जिससे बिच्छू को नुकसान न पहुंचे. एक बार जब जहर निकल जाता है तो उसे बेहद सावधानी से स्टोर किया जाता है, क्योंकि इसकी संरचना में मौजूद अलग-अलग प्रोटीन और पेप्टाइड रिसर्च के लिहाज से महत्वपूर्ण होते हैं.

    ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी में मददगार हो सकता है जहर

    डेथस्टॉकर के जहर को लेकर वैज्ञानिकों की दिलचस्पी इसकी जहरीली क्षमता से ज्यादा इसके मेडिकल इस्तेमाल की संभावनाओं को लेकर है. जहर में मौजूद कुछ कंपाउंड्स पर रिसर्च की गई है, जो ब्रेन ट्यूमर की कोशिकाओं को पहचानने और उन्हें सर्जरी के दौरान ‘लाइट अप’ करने में मदद कर सकते हैं.

  • 150000 रुपये के बिटकॉइन खरीदकर​​​​​ भूल गया था शख्स, 12 साल बाद देखा तो उड़ गए होश; बन गया करोड़पति

    150000 रुपये के बिटकॉइन खरीदकर​​​​​ भूल गया था शख्स, 12 साल बाद देखा तो उड़ गए होश; बन गया करोड़पति

    150000 रुपये के बिटकॉइन खरीदकर​​​​​ भूल गया था शख्स, 12 साल बाद देखा तो उड़ गए होश; बन गया करोड़पति

    ब्रिटेन के रहने वाला एक शख्स अचानक से करोड़पति बन गया. उसे भी पता नहीं था कि 12 साल पहले की गई उसकी एक इन्वेस्टमेंट अचानक उसको करोड़पति बना देगी. हैरान करने वाली बात तो ये है कि 2012 में एक क्रिप्टो एक्सचेंज के बंद हो जाने के बाद शख्स ने ये मान लिया था कि उसके द्वारा खरीदे गए बिटकॉइन अब ब्लॉक हो गए और उसे कभी नहीं मिल पाएंगे. अपने निवेश को डूबा हुआ मानकर शख्स आगे बढ़ गया और उन बिटकॉइन्स को भूल गया. हालांकि किस्मत को कुछ और मंजूर था, शख्स द्वारा खरीदे गए बिटकॉइन अनब्लॉक कर दिए गए, जिसके बाद उसकी किस्मत ही बदल गई.

    2012 में डेढ़ लाख रुपये का किया था निवेश

    ये कहानी बिट्रेन के रहने वाले ‘क्रिस’ की है, जिन्होंने 2011 में अपने दोस्त की सलाह पर शुरुआती दौर में ब्रिटेन के ‘इंटरसंगो’ एक्सचेंज से बिटकॉइन खरीदे थे. उस समय उन्होंने इसमें लगभग 1,500 पाउंड (करीब डेढ़ लाख रुपये) लगाए थे. हालांकि, 2012 आते-आते उनका क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पूरी तरह ठप हो गया और क्रिस के खाते में जमा 61 बिटकॉइन पूरी तरह ब्लॉक हो गए. उस दौरान इन डिजिटल कॉइन्स की कुल कीमत सिर्फ $5,400 (लगभग 4.5 लाख रुपये) थी.

    टॉप न्यूज़

    बिटकॉइन को डूबा हुआ निवेश मान बैठे क्रिस

    एक्सचेंज के बंद होने के बाद अगले एक दशक तक बिटकॉइन का बाजार कई बार चढ़ा और गिरा, जैसे-जैसे बिटकॉइन की कीमतें आसमान छूने लगीं, क्रिस को और भी बुरा फील होने लगा. उन्होंने उस दौर को याद करते हुए बताया कि जब भी क्रिप्टो के दाम बढ़ते थे, तो ऐसा लगता था जैसे किसी ने पेट में लात मार दी हो. आखिरकार उन्होंने इसे पूरी तरह किस्मत का लिखा मानकर क्रिप्टो बाजार की खबरों को देखना ही बंद कर दिया.

    पत्नी की सलाह ने बदली क्रिस की किस्मत

    साल 2026 की शुरुआत में उनकी पत्नी ने हिम्मत बंधाई और एक्सपर्ट क्रिप्टो रिकवरी, वकीलों से संपर्क करने की सलाह दी. टेक्निकल एक्सपर्ट्स की एक टीम ने पुराने ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड्स और ब्लॉकचैन ट्रेसिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके बंद हो चुके एक्सचेंज में मौजूद 61 बिटकॉइन को वापिस क्रिस के नाम कर दिया. मई 2026 में रिकवरी का पूरा प्रोसेस खत्म हुआ और 12 साल बाद क्रिप्टो खजाना वापस क्रिस के वॉलेट में ट्रांसफर हो गया.

    अब क्या है आगे का प्लान?

    12 साल तक क्रिप्टोकरेंसी के ब्लॉक रहने के कारण क्रिस चाहकर भी इसे बेच नहीं सके. हालांकि अच्छा ही हुआ कि वो अपने क्रिप्टो को निकाल नहीं सके और उनका निवेश लॉन्ग टर्म के लिए बना रहा, जिसकी वजह से उन्हें करोड़ों का फायदा हुआ. रिकवर किए गए 61 बिटकॉइन की मौजूदा कीमत करीब 5 मिलियन डॉलर (भारतीय रुपये में 36 करोड़ से अधिक) आंकी गई है. क्रिस का कहना है कि वे इस रकम के एक हिस्से से बड़ा घर खरीदेंगे, जबकि बाकी के बचे हुए बिटकॉइन को वो निवेश करके ही रखेंगे.

  • पत्नी को दूसरे युवक के​​​​​ साथ देखकर पति ने किया विरोध, मारपीट और गला दबाने का आरोप; बोला- खाने में दी जाती थी नींद की दवा

    पत्नी को दूसरे युवक के​​​​​ साथ देखकर पति ने किया विरोध, मारपीट और गला दबाने का आरोप; बोला- खाने में दी जाती थी नींद की दवा

    पत्नी को दूसरे युवक के​​​​​ साथ देखकर पति ने किया विरोध, मारपीट और गला दबाने का आरोप; बोला- खाने में दी जाती थी नींद की दवा

    उत्तर प्रदेश से पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। चिरगांव थाना क्षेत्र के रहने वाले एक युवक ने अपनी पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पति का दावा है कि शादी के कुछ ही समय बाद उसे पत्नी के व्यवहार पर शक होने लगा था। उसने आरोप लगाया कि पत्नी खाने-पीने की चीजों में नींद की दवा मिलाकर देती थी और इसके बाद अपने कथित प्रेमी से बातचीत करती थी।

    मामला तब और गंभीर हो गया जब पति ने घर पहुंचकर पत्नी को एक युवक के साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक स्थिति में देखने का दावा किया। पति के मुताबिक, विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और गला दबाने की कोशिश भी हुई। इसके बाद वह अपने माता-पिता के साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के कार्यालय पहुंचा और कार्रवाई के साथ सुरक्षा की मांग की।

    24 जून को हुई थी शादी

    शिकायतकर्ता युवक के मुताबिक, उसकी शादी 24 जून को मध्य प्रदेश के भांडेर की रहने वाली युवती से हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार हुई थी। शादी के करीब दो-तीन सप्ताह बाद उसे पत्नी के व्यवहार में बदलाव महसूस हुआ।

    पति का आरोप है कि उसे चाय, दूध या खाने में कोई ऐसी चीज मिलाकर दी जाती थी, जिससे उसे काफी नींद आने लगती थी और तबीयत भी खराब महसूस होती थी। लगातार ऐसा होने के बाद उसे शक हुआ कि उसके खाने-पीने की चीजों में नींद की दवा मिलाई जा रही है।

    हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मोहल्ले वालों ने युवक के आने की जानकारी दी

    पति के अनुसार, 19 तारीख को कुछ लोगों ने उसे बताया कि उसकी पत्नी से मिलने एक युवक घर आया था। जब उसने पत्नी से इस बारे में पूछा तो उसने किसी युवक के घर आने से इनकार कर दिया।

    इसके कुछ दिन बाद 23 तारीख को पति को फिर उस युवक के घर आने की जानकारी मिली। इसके बाद वह तुरंत अपने घर पहुंचा।

    पति का दावा है कि घर का दरवाजा खोलकर अंदर जाने पर उसने पत्नी और एक युवक को कथित तौर पर आपत्तिजनक स्थिति में देखा।

    विरोध करने पर मारपीट का आरोप

    पति के मुताबिक, उसने दोनों का विरोध किया तो विवाद बढ़ गया। उसका आरोप है कि पत्नी ने उसके हाथ पकड़ लिए और साथ आए युवक ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी।

    शिकायत में युवक ने गला दबाने की कोशिश किए जाने का भी आरोप लगाया है। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद स्थिति संभली। इसके बाद पुलिस को मामले की जानकारी दी गई।

    सुरक्षा की मांग लेकर SSP कार्यालय पहुंचा पति

    घटना के बाद पति अपने माता-पिता के साथ झांसी के SSP कार्यालय पहुंचा। उसने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की है।

    पति ने अपनी जान को खतरा बताते हुए पुलिस से सुरक्षा देने की भी गुहार लगाई है।

    मोंठ क्षेत्राधिकारी के मुताबिक, घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची थी। पुलिस को शिकायत भी मिली है और मामले की जांच की जा रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    डिस्क्लेमर: खबर में बताए गए आरोप शिकायतकर्ता के दावों और उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।

  • क्या 90 साल पुरानी पेटिंग​​​​​ में था स्मार्टफोन? तस्वीर ने इंटरनेट को कर दिया हैरान, हो रहा जमकर वायरल!

    क्या 90 साल पुरानी पेटिंग​​​​​ में था स्मार्टफोन? तस्वीर ने इंटरनेट को कर दिया हैरान, हो रहा जमकर वायरल!

    क्या 90 साल पुरानी पेटिंग​​​​​ में था स्मार्टफोन? तस्वीर ने इंटरनेट को कर दिया हैरान, हो रहा जमकर वायरल!

    Viral Video : करीब 90 साल पुरानी एक पेंटिंग इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. वजह है इसमें दिखाई देने वाली एक छोटी सी वस्तु, जो आज के स्मार्टफोन जैसी नजर आती है. तस्वीर सामने आते ही इंटरनेट पर लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि आखिर 1937 में बनी इस पेंटिंग में स्मार्टफोन जैसा दिखने वाला उपकरण आया कहां से?

    यह पेंटिंग इतालवी-अमेरिकी कलाकार Umberto Romano ने 1937 में बनाई थी. इसका नाम ‘Mr Pynchon and the Settling of Springfield’ है. पेंटिंग में 17वीं सदी के मैसाचुसेट्स में अंग्रेजी बसने वालों और स्थानीय स्वदेशी समुदाय के बीच हुई मुलाकात को दर्शाया गया है.

    पेंटिंग के बीचोंबीच एक स्वदेशी व्यक्ति अपने हाथों में एक छोटी, गहरे रंग की वस्तु को बेहद ध्यान से देखता नजर आता है. उसका बैठने और वस्तु को देखने का अंदाज बिल्कुल वैसा लगता है, जैसे आज कोई व्यक्ति स्मार्टफोन की स्क्रीन पर कुछ देख रहा हो.

    बस फिर क्या था, सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे आधुनिक फोन से जोड़ना शुरू कर दिया. कुछ लोगों ने मजाक में इसे टाइम ट्रैवल का सबूत तक बता दिया. वहीं कुछ यूजर्स ने सवाल किया कि स्मार्टफोन के अस्तित्व में आने से सदियों पहले आखिर ऐसी वस्तु पेंटिंग में कैसे दिखाई दे सकती है.

    स्मार्टफोन नहीं, शायद आईना है वजह

    हालांकि, इस रहस्य का जवाब काफी सामान्य हो सकता है. इतिहास से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, उस दौर में यूरोपीय व्यापारियों द्वारा स्वदेशी समुदायों के साथ आईनों जैसी कई वस्तुओं का आदान-प्रदान किया जाता था. ऐसे में विशेषज्ञों के अनुसार, पेंटिंग में दिखाई दे रही वस्तु छोटा हाथ वाला आईना हो सकती है.

    आज के नजरिए से देखने पर उसका आकार, चमकदार किनारे और व्यक्ति का उसे देखने का अंदाज उसे स्मार्टफोन जैसा बना देता है. कुछ इंटरनेट यूजर्स ने इसे छोटी किताब, धार्मिक पुस्तक या किसी अन्य वस्तु के रूप में भी देखा है, लेकिन ऐतिहासिक संदर्भ में आईने की संभावना ज्यादा स्वाभाविक लगती है.

    पेंटिंग का इतिहास भी है खास

    यह पेंटिंग 1937 में Springfield Main Post Office के लिए बनाई गई छह म्युरल में से एक थी. बाद में यह इमारत Commonwealth of Massachusetts State Office Building का हिस्सा बन गई. Romano ने यह काम उस दौर में कलाकारों को रोजगार देने वाले Federal Art Project के तहत किया था.

    Smithsonian National Postal Museum के अनुसार, Romano ने इस म्युरल को तैयार करने में स्थानीय इतिहासकारों और लेखकों से भी सलाह ली थी.  फिलहाल, पेंटिंग में दिख रही वस्तु को स्मार्टफोन मानने का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है. लेकिन करीब 90 साल पुरानी इस कलाकृति में नजर आई छोटी सी वस्तु ने इंटरनेट पर जरूर एक दिलचस्प बहस छेड़ दी है.