Category: Gazab

  • पत्नी से अलग होना गेमिंग​​​​​ कंपनी के अरबपति मालिक को पड़ा महंगा, देने पड़े 14260 करोड़ रुपये,,?

    पत्नी से अलग होना गेमिंग​​​​​ कंपनी के अरबपति मालिक को पड़ा महंगा, देने पड़े 14260 करोड़ रुपये,,?

    पत्नी से अलग होना गेमिंग​​​​​ कंपनी के अरबपति मालिक को पड़ा महंगा, देने पड़े 14260 करोड़ रुपये,,?

    आपने अक्सर सुना होगा कि दुनिया में अरबपतियों का जब तलाक होता है तो उन्हें मेंटेनेन्स के तौर पर अलग रह रही पत्नी को अरबों रुपये का भत्ता देना पड़ता है. चाहे वो अमेजॉन के अरबपति जेफ बेजोस हों या माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापर बिल गेट्स, अरबपतियों को पत्नी से अलग होने के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ती है. हाल ही में साउथ कोरिया में भी अब तक का सबसे महंगा तलाक हुआ है, जिसने कॉरपोरेट और गेमिंग जगत में हलचल मचा दी है. यहां के अरबपति बिजनेसमैन क्वोन ह्युक-बिन ने अपनी पत्नी को तलाक के लिए 2 ट्रिलियन वॉन (लगभग 1.5 अरब डॉलर) की राशि देनी होगी.

    देनी होगी कंपनी की 35 फीसदी हिस्सेदारी

    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, साउथ कोरिया स्थित सियोल की एक फैमिली कोर्ट ने गेमिंग कंपनी स्माइलगेट के संस्थापक और अरबपति बिजनेसमैन क्वोन ह्युक-बिन को अपनी पूर्व पत्नी को करीब 2 ट्रिलियन वॉन (भारतीय रुपये में करीब 14,260 करोड़ रुपये) से अधिक की संपत्ति देने का आदेश दिया है. इसे साउथ कोरिया में अब तक का सबसे बड़ा तलाक बताया जा रहा है. कोर्ट के आदेश के मुताबिक क्वेन को अपनी कंपनी की 35 फीसदी हिस्सेदारी पूर्व पत्नी के नाम ट्रांसफर करनी होगी. इस हिस्सेदारी की कीमत लगभग 2.5 ट्रिलियन वॉन आंकी गई है. इसके अलावा कारोबारी क्वेन को अपनी पूर्व पत्नी को 65 अरब वॉन नकद भी देने का आदेश दिया गया है.

    कौन हैं क्वोन ह्युक-बिन?

    क्वोन ह्युक-बिन ने साल 2002 में स्माइलगेट (Smilegate) गेमिंग कंपनी की स्थापना की थी. कंपनी ने आगे चलकर साउथ कोरिया की दिग्गज वीडियो गेम कंपनियों में अपनी जगह बनाई. उनकी पूर्व पत्नी ली ने नवंबर 2022 में तलाक के लिए अदालत का रुख किया था. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कंपनी में क्वोन की आधी हिस्सेदारी पर दावा किया था. ली ने दावा किया कि कंपनी की स्थापना में उनका भी योगदान था और इसके साथ ही उन्होंने घर की जिम्मेदारियों को भी संभाला. इसी आधार पर उन्होंने तलाक के बाद क्वेन की संपत्ति में बड़ी हिस्सेदारी की मांग की थी.

  • गर्लफ्रेंड पर पैसे लुटाने के​​​​​ लिए बेटे ने घर में ही कर डाली 50 लाख की चोरी! महंगा iPhone भी किया गिफ्ट..

    गर्लफ्रेंड पर पैसे लुटाने के​​​​​ लिए बेटे ने घर में ही कर डाली 50 लाख की चोरी! महंगा iPhone भी किया गिफ्ट..

    गर्लफ्रेंड पर पैसे लुटाने के​​​​​ लिए बेटे ने घर में ही कर डाली 50 लाख की चोरी! महंगा iPhone भी किया गिफ्ट..

    असम के जोरहाट से चोरी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां पुलिस ने जिस चोरी की जांच शुरू की, उसमें शक किसी बाहरी चोर पर नहीं बल्कि परिवार के ही सदस्य पर गया। आरोप है कि एक युवक ने अपने ही घर से करीब 50 लाख रुपये की नकदी और सोने के गहने चोरी कर लिए।

    पुलिस के मुताबिक, चोरी की रकम का एक हिस्सा युवक ने अपनी गर्लफ्रेंड/महिला मित्र पर खर्च किया। आरोप है कि उसने महंगे सामान खरीदने के साथ करीब 1.5 लाख रुपये का iPhone भी गिफ्ट किया। मामला सामने आने के बाद परिवार के साथ-साथ पुलिस भी हैरान रह गई।

    माता-पिता के बाहर जाते ही गायब हुए कैश और गहने

    पुलिस के अनुसार, जोरहाट निवासी यश धनुका के माता-पिता किसी काम से घर से बाहर गए हुए थे। इसी दौरान घर के लॉकर में रखी नकदी और सोने के गहने गायब हो गए।

    जब माता-पिता वापस लौटे तो उन्हें चोरी का पता चला। इसके बाद यश के पिता ने 24 अगस्त को जोरहाट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। मामले में यश धनुका के साथ जितेंद्र सोमानी, रोहित प्रसाद और पबाली दत्ता के नाम भी FIR में शामिल किए गए।

    पुलिस को घर के किसी जानकार पर हुआ शक

    जांच के दौरान पुलिस को लगा कि यह सामान्य चोरी का मामला नहीं है। घर में नकदी और गहने कहां रखे हैं, इसकी जानकारी किसी करीबी या परिवार के सदस्य को ही हो सकती थी।

    इसी आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा आगे बढ़ाया। पूछताछ के दौरान यश ने कथित तौर पर बताया कि उसने अपने दोस्तों जितेंद्र सोमानी और रोहित प्रसाद के साथ मिलकर चोरी की योजना बनाई थी।

    आरोप है कि दोस्तों ने उसे चोरी के लिए उकसाया और योजना बनाने में मदद की। यश ने कथित तौर पर यह भी बताया कि लॉकर या सामान तक पहुंचने के लिए लॉकस्मिथ की मदद ली गई थी।

    चोरी के पैसों से महिला मित्र पर खर्च करने का आरोप

    पूछताछ में सामने आई जानकारी के मुताबिक, चोरी की रकम का एक हिस्सा यश ने अपनी महिला मित्र पबाली दत्ता पर खर्च किया। आरोप है कि करीब 5 लाख रुपये उस पर खर्च किए गए।

    बताया जा रहा है कि यश ने पबाली को लगभग 1.5 लाख रुपये कीमत का iPhone भी गिफ्ट किया। इसके अलावा उसे नकद पैसे देने की बात भी सामने आई है।

    हालांकि पुलिस अभी यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी की बाकी रकम कहां गई और सोने के गहने किसके पास पहुंचे।

    पूछताछ में युवक ने जताया अफसोस

    मीडिया से बातचीत में यश ने कथित तौर पर अपनी गलती पर अफसोस जताया। उसने अपने दोस्त जितेंद्र सोमानी पर बहकाने का आरोप लगाया।

    यश का दावा है कि सोमानी और रोहित प्रसाद चोरी की योजना में शामिल थे और बाद में चोरी किए गए गहनों को ठिकाने लगाने में भी उनकी भूमिका रही।

    अहमदाबाद कनेक्शन की भी हो रही जांच

    इस मामले में अहमदाबाद का नाम भी सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 4 अगस्त को जितेंद्र सोमानी के अहमदाबाद जाने की बात सामने आई है, जबकि यश के असम में ही रहने की जानकारी है।

    पुलिस ने यश को हिरासत में लेकर अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब पुलिस चोरी की पूरी कड़ी जोड़ने के साथ-साथ सभी आरोपियों की भूमिका और गायब नकदी व गहनों का पता लगाने में जुटी है।

    डिस्क्लेमर: इस खबर में बताए गए आरोप पुलिस जांच और उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। मामले में अंतिम सत्य अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • ‘गुड़ का खान’ कहलाता भारत​​​​​ का ये जिला, हर घर में चलता है गुड़ का कारोबार; विदेशों तक पहुंचती है मिठास..

    ‘गुड़ का खान’ कहलाता भारत​​​​​ का ये जिला, हर घर में चलता है गुड़ का कारोबार; विदेशों तक पहुंचती है मिठास..

    ‘गुड़ का खान’ कहलाता भारत​​​​​ का ये जिला, हर घर में चलता है गुड़ का कारोबार; विदेशों तक पहुंचती है मिठास..

    भारत का हर शहर अपनी किसी न किसी खास पहचान के लिए जाना जाता है। यहां बनने वाला देशी गुड़ देश के कई राज्यों और विदेशों तक पहुंचता है। यही वजह है कि इस जिले को ‘गुड़ की खान’ के नाम से भी जाना जाता है। जिले की पहचान गुड़ के बड़े उत्पादन और कारोबार से जुड़ी हुई है। यहां की गुड़ मंडी को एशिया की बड़ी गुड़ मंडियों में गिना जाता है। खास बात यह है कि इस जिले का गुड़ एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना में भी शामिल है।

    कौन सा जिला है?
    यूपी के मुजफ्फरनगर जिले को गुड़ उत्पादन के लिए खास तौर पर जाना जाता है। यहां पर नुनाखेड़ा गांव में 50 से ज्यादा गुड़ के कोल्हू संचालित होने की बात कही जाती है। यहां लगभग हर परिवार किसी न किसी रूप में गुड़ के कारोबार से जुड़ा हुआ है। गांव में प्रवेश करते ही जगह-जगह कोल्हू और गुड़ तैयार करने की प्रक्रिया दिखाई देती है। कई इकाइयों में लंबे समय तक काम चलता है और कारीगर शिफ्ट में गुड़ तैयार करते हैं।

    गन्ने से तैयार होता है देसी गुड़
    पश्चिमी यूपी गन्ने की खेती के लिए देश के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। खेतों से गन्ना आने के बाद उसे कोल्हू में पेरकर रस निकाला जाता है। इसके बाद रस को गर्म कर साफ किया जाता है और धीरे-धीरे उसे गाढ़ा करके गुड़ का रूप दिया जाता है । मुजफ्फरनगर में अलग-अलग स्वाद और आकार के गुड़ की कई किस्में तैयार की जाती हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाला गुड़ व्यापारियों के जरिए देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचता है।

    देश के कई राज्यों में जाती है मुजफ्फरनगर की मिठास
    मुजफ्फरनगर का गुड़ राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, बिहार और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में भेजा जाता है। इसकी मांग देश के बाहर भी है और गुणवत्ता व स्वाद के कारण इसका निर्यात भी किया जाता है। जिले में गुड़ के कारोबार का पुराना इतिहास है। यहां गुड़ की थोक मंडी की स्थापना 1954 में की गई थी। इसके बाद धीरे-धीरे मुजफ्फरनगर देश के बड़े गुड़ व्यापार केंद्रों में अपनी पहचान बनाता गया।

    सिर्फ कारोबार नहीं, पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा
    मुजफ्फरनगर और आसपास के गांवों में गुड़ बनाना केवल रोजगार का साधन नहीं है, बल्कि कई परिवारों के लिए पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा भी है। गन्ने के सीजन में कोल्हुओं पर काम तेज हो जाता है और गांवों में गुड़ बनाने की भट्टियों की गर्माहट के साथ इसकी खास खुशबू भी चारों तरफ महसूस होती है। यही वजह है कि मुजफ्फरनगर को गुड़ के कारोबार से जोड़कर देखा जाता है। गन्ने से शुरू होकर कोल्हू और मंडी के रास्ते देश-विदेश तक पहुंचने वाली यही मिठास मुजफ्फरनगर की खास पहचान बन चुकी है।

  • ‘रात 2 बजे काजल-लिपस्टिक लगाती​​​​​ है…’, पति को पत्नी पर हुआ शक, मांगा तलाक, कोर्ट सुनाया ये फैसला.

    ‘रात 2 बजे काजल-लिपस्टिक लगाती​​​​​ है…’, पति को पत्नी पर हुआ शक, मांगा तलाक, कोर्ट सुनाया ये फैसला.

    ‘रात 2 बजे काजल-लिपस्टिक लगाती​​​​​ है…’, पति को पत्नी पर हुआ शक, मांगा तलाक, कोर्ट सुनाया ये फैसला.

    झारखंड हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति की याचिका खारिज कर दी। पति ने अपनी पत्नी पर मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की थी। उसका कहना था कि एक रात करीब 2 बजे उसने पत्नी को काजल और लिपस्टिक लगाते हुए देखा, जिसके बाद उसे पत्नी के व्यवहार पर शक हुआ।

    अदालत ने साफ कहा कि देर रात मेकअप करना या सजना-संवरना अपने आप में मानसिक बीमारी का प्रमाण नहीं हो सकता। किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से बीमार बताने के लिए ठोस मेडिकल साक्ष्य जरूरी हैं।

    रात 2 बजे मेकअप करते देख पति को हुआ शक

    मामला साल 2015 में हुई शादी से जुड़ा है। पति के मुताबिक, शादी के कुछ समय बाद एक रात करीब 2 बजे उसकी नींद खुली। उसने देखा कि उसकी पत्नी अलमारी के सामने खड़ी होकर काजल और लिपस्टिक लगा रही थी।

    पति का दावा था कि पत्नी के इस व्यवहार से वह घबरा गया और उसे लगा कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है। उसने यह भी आरोप लगाया कि शादी से पहले पत्नी की कथित बीमारी की जानकारी उससे छिपाई गई थी। इसी आधार पर उसने तलाक की मांग की।

    कोर्ट ने कहा- मेडिकल सबूत कहां हैं?

    मामला जब अदालत पहुंचा तो पति यह दावा करता रहा कि पत्नी का इलाज कई अस्पतालों में कराया गया था। लेकिन सुनवाई के दौरान वह किसी डॉक्टर की रिपोर्ट, पर्ची या अन्य मेडिकल रिकॉर्ड

  • ‘बॉयफ्रेंड से बात मत करो..’,​​​​​ मां की डांट से भड़की लड़की, 100 फीट ऊंची पानी टंकी पर चढ़ गई..

    ‘बॉयफ्रेंड से बात मत करो..’,​​​​​ मां की डांट से भड़की लड़की, 100 फीट ऊंची पानी टंकी पर चढ़ गई..

    ‘बॉयफ्रेंड से बात मत करो..’,​​​​​ मां की डांट से भड़की लड़की, 100 फीट ऊंची पानी टंकी पर चढ़ गई..

    उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 9वीं क्लास में पढ़ने वाली एक लड़की को उसकी मां ने बॉयफ्रेंड से बात करने के लिए डांट दिया तो वह 100 फीट ऊंची पानी टंकी पर चढ़ गई. लड़की 3 घंटे तक पानी टंकी पर बैठी रही. इसके बाद उसने वहां से छलांग लगा दी. लेकिन मौके पर मौजूद दारोगा ने लड़की को बचा लिया.

    लड़की पानी की टंकी पर चढ़ गई- मां से नाराज लड़की पानी की टंकी पर चढ़ गई. ये देखकर लोगों की भीड़ जुट गई. किसी ने पुलिस को फोन किया और मौके पर पुलिस भी आ गई. पुलिस ने भी लड़की को काफी देर तक समझने का प्रयास किया. लेकिन वह नीचे आने को तैयार नहीं हुई.

    20 मिनट तक हवा में लटकी रही लड़की- पुलिस की टीम में महिला दरोगा जागृति खरवार ने रिस्क लेकर पानी टंकी पर पहुंची और उसे पीछे से पकड़ लिया. पकड़े जाने के बाद लड़की टंकी से छलांग लगा दी. लेकिन महिला दरोगा ने उसका हाथ और कपड़ा मजबूती से पकड़ लिया था. करीब 20 मिनट तक वह हवा में लटकी रही और पीछे से आकर अन्य पुलिसकर्मियों ने लड़की को सुरक्षित ऊपर खींच लिया.

    बॉयफ्रेंड से बात करने से रोका तो उठाया कदम- यह घटना दोपहर 1:00 बजे गोरखपुर महादेव झारखंडी कॉलोनी की है. लड़की की मां ने बॉयफ्रेंड से बात करने से मना कर दिया था. इसी बात से नाराज लड़की ने यह कदम उठाया था.

    9वीं क्लास की छात्रा 15 साल की है. वो आवास विकास कॉलोनी शिवपुर की रहने वाली है. वह रोजाना अपने मोबाइल से बॉयफ्रेंड से बात किया करती थी. रविवार को मां ने लड़के से बातचीत करके मना कर दिया तो लड़की को यह बात नागवार गुजरी और उसने यह कदम उठा लिया.

    महिला दारोगा ने बचाई जान- एम्स थाना अंतर्गत तैनात महिला दरोगा जागृति खरवार लड़की को बातचीत करते हुए टंकी पर पहुंची. किसी तरह उसे विश्वास में लिया. मौका मिलते ही उसने लड़की को पकड़ लिया. पकड़े जाने के बाद लड़की ने नीचे की ओर छलांग लगा दी. महिला दरोगा ने उसका हाथ और मजबूती से पकड़ लिया. जिससे लड़की नीचे नहीं गिरी और 20 मिनट तक हवा में लटका रही. इसके बाद दूसरे पुलिसकर्मी सीढ़ियों से ऊपर पहुंचे और उसे ऊपर खींच लिया. इसके बाद पुलिस कर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से लड़की को नीचे उतारा.

  • क्या WhatsApp पर नजर रख​​​​​ रही सरकार? Red Tick और Blue Tick वाले मैसेज का सच जानकर रह जाएंगे हैरान..

    क्या WhatsApp पर नजर रख​​​​​ रही सरकार? Red Tick और Blue Tick वाले मैसेज का सच जानकर रह जाएंगे हैरान..

    क्या WhatsApp पर नजर रख​​​​​ रही सरकार? Red Tick और Blue Tick वाले मैसेज का सच जानकर रह जाएंगे हैरान..

    WhatsApp Viral Message Fact Check: WhatsApp पर वायरल हो रहे उस मैसेज का सच सामने आ गया है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि सरकार आपकी कॉल और चैट मॉनिटर कर रही है। PIB Fact Check ने इस दावे को फर्जी बताया है। जानिए Red Tick, Blue Tick और WhatsApp निगरानी से जुड़े वायरल दावे की पूरी सच्चाई।

    WhatsApp Government Monitoring News: अगर आप WhatsApp इस्तेमाल करते हैं तो आपने भी शायद ऐसा कोई मैसेज देखा होगा, जिसमें दावा किया जा रहा है कि सरकार अब आपकी WhatsApp कॉल और चैट पर नजर रख रही है।

    वायरल मैसेज में कहा जा रहा है कि WhatsApp पर नए मॉनिटरिंग नियम लागू हो गए हैं। इसके तहत सरकार यूजर्स के निजी मैसेज पढ़ सकती है, कॉल सुन सकती है और कुछ खास तरह के टिक आने पर बातचीत की जानकारी मिल सकती है,लेकिन अब इस दावे की सच्चाई सामने आ गई है। सरकार की फैक्ट चेक एजेंसी PIB Fact Check ने इस वायरल मैसेज को पूरी तरह फर्जी बताया है।

    WhatsApp मॉनिटरिंग के नाम पर फैलाया जा रहा झूठ

    PIB Fact Check ने साफ किया है कि भारत सरकार की ओर से WhatsApp निगरानी को लेकर ऐसी कोई नई गाइडलाइन या नियम जारी नहीं किया गया है।वायरल मैसेज में किए गए दावे गलत हैं और लोगों को भ्रमित करने के लिए फैलाए जा रहे हैं।सरकार ने लोगों से अपील की है कि ऐसे मैसेज पर भरोसा न करें और बिना पुष्टि किए इन्हें आगे शेयर भी न करें।

    Red Tick और Blue Tick को लेकर भी झूठा दावा

    वायरल मैसेज में WhatsApp के टिक सिस्टम को लेकर भी कई दावे किए जा रहे हैं।इसमें कहा जा रहा है कि ज्यादा Blue Tick आने का मतलब सरकार ने मैसेज देख लिया है।Red Tick दिखने पर कार्रवाई हो सकती है।कुछ खास टिक से सरकारी निगरानी का पता चलता है।PIB Fact Check ने इन सभी दावों को गलत बताया है।WhatsApp के टिक केवल मैसेज की डिलीवरी और पढ़े जाने की स्थिति बताते हैं। इनका सरकार की किसी निगरानी व्यवस्था से कोई संबंध नहीं है।

    क्या सरकार WhatsApp कॉल रिकॉर्ड कर रही है?

    वायरल मैसेज का सबसे बड़ा दावा यही है कि सरकार WhatsApp कॉल रिकॉर्ड कर रही है।लेकिन फैक्ट चेक में सामने आया है कि ऐसा कोई आधिकारिक आदेश या नई व्यवस्था लागू नहीं की गई है।WhatsApp पर होने वाली बातचीत को लेकर इस तरह के दावे पहले भी कई बार वायरल हो चुके हैं, लेकिन उनकी पुष्टि नहीं हुई है,इसलिए सिर्फ किसी वायरल मैसेज के आधार पर यह मान लेना कि सरकार आपकी हर कॉल सुन रही है या चैट पढ़ रही है, गलत है।

  • ‘लस्सी का शहर’ कहलाता है​​​​​ यूपी का ये जिला, एक बार चख लिया स्वाद तो जिंदगी भर नहीं भूलेंगे!

    ‘लस्सी का शहर’ कहलाता है​​​​​ यूपी का ये जिला, एक बार चख लिया स्वाद तो जिंदगी भर नहीं भूलेंगे!

    ‘लस्सी का शहर’ कहलाता है​​​​​ यूपी का ये जिला, एक बार चख लिया स्वाद तो जिंदगी भर नहीं भूलेंगे!

    क्या आप जानते हैं कि यूपी के किस जिले को ‘लस्सी का शहर’ कहा जाता है, ऐसा कहा जाता है कि यहां कि लस्सी का स्वाद इतना खास होता है कि इसे एक बार चखने वाला लंबे समय तक इसका स्वाद नहीं भूलता।

    City of Lassi in UP: उत्तर प्रदेश अपनी संस्कृति, खानपान और पारंपरिक स्वाद के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों की अपनी खास पहचान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यूपी के किस जिले को ‘लस्सी का शहर’ कहा जाता है? जवाब है वाराणसी, जहां की गाढ़ी, मलाईदार और कुल्हड़ में परोसी जाने वाली पारंपरिक लस्सी देश ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटकों के बीच भी काफी लोकप्रिय है। कहा जाता है कि बनारस की गलियों में मिलने वाली लस्सी का स्वाद इतना खास होता है कि इसे एक बार चखने वाला लंबे समय तक इसका स्वाद नहीं भूलता।

    कुल्हड़ में मिलने वाली मलाईदार लस्सी है खास
    वाराणसी की पारंपरिक लस्सी अपनी गाढ़ी बनावट और ऊपर जमी मलाई के लिए जानी जाती है। यहां कई दुकानों पर लस्सी को मिट्टी के कुल्हड़ में परोसा जाता है, जो इसके स्वाद और अनुभव को और खास बना देता है। शहर में दशकों पुरानी कई दुकानें आज भी पारंपरिक तरीके से लस्सी तैयार करती हैं। यहां केसर, आम और सूखे मेवों समेत अलग-अलग फ्लेवर की लस्सी भी लोगों को खूब पसंद आती है।

    गर्मियों में प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक
    लस्सी मुख्य रूप से दही से बनाई जाती है। ठंडी और ताजगी देने वाली यह ड्रिंक गर्मियों में काफी लोकप्रिय रहती है। दही आधारित होने के कारण इसे शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला पारंपरिक पेय माना जाता है। गर्मियों में लोग इसे खाने के साथ या दिन के बीच में ताजगी के लिए पीना पसंद करते हैं। खासतौर पर उत्तर भारत के कई इलाकों में लस्सी गर्मी के मौसम का पसंदीदा पेय है।

    पाचन के लिए भी मानी जाती है फायदेमंद
    दही में मौजूद प्रोबायोटिक तत्व पाचन तंत्र के लिए उपयोगी माने जाते हैं। लस्सी का सेवन पाचन को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसके फायदे व्यक्ति की सेहत और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर भी निर्भर करते हैं।

    पोषक तत्वों से भरपूर है लस्सी
    दही से बनने वाली लस्सी में कैल्शियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व शरीर के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। हालांकि, बाजार में मिलने वाली मीठी लस्सी में चीनी की मात्रा अधिक हो सकती है, इसलिए इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है।

    दशकों पुरानी दुकानों में आज भी बरकरार है स्वाद
    वाराणसी की पहचान सिर्फ घाटों, मंदिरों और बनारसी संस्कृति तक सीमित नहीं है। यहां का पारंपरिक खानपान भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। लस्सी की कई पुरानी दुकानें आज भी अपने पारंपरिक स्वाद के कारण स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हैं। अगर आप कभी काशी घूमने जाएं, तो यहां की गलियों में मिलने वाली गाढ़ी और मलाईदार कुल्हड़ वाली लस्सी का स्वाद जरूर चख सकते हैं। संभव है कि बनारस की यह मिठास आपको लंबे समय तक याद रहे।

  • बिच्छू घास छूते ही होती है तेज जलन, फिर भी औषधीय गुणों के लिए है बेहद खास.

    बिच्छू घास छूते ही होती है तेज जलन, फिर भी औषधीय गुणों के लिए है बेहद खास.

    बिच्छू घास छूते ही होती है तेज जलन, फिर भी औषधीय गुणों के लिए है बेहद खास.

    उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में कई ऐसी जड़ी-बूटियां और वनस्पतियां पाई जाती हैं, जिनका इस्तेमाल स्थानीय लोग लंबे समय से पारंपरिक उपचार और भोजन में करते आए हैं। इन्हीं में एक नाम बिच्छू घास का भी है। इसे कई जगहों पर कंडाली के नाम से जाना जाता है।

    इस पौधे की खासियत यह है कि इसे छूने पर त्वचा में तेज चुभन, जलन और खुजली महसूस हो सकती है। यही वजह है कि लोग इससे दूरी बनाकर रखते हैं। हालांकि, सही तरीके से प्रसंस्करण करने के बाद इस पौधे का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से भोजन और कई अन्य उपयोगों में किया जाता रहा है।

    छूते ही क्यों होती है जलन?

    बिच्छू घास की पत्तियों और तनों पर बेहद बारीक बाल जैसे ढांचे होते हैं, जिन्हें ट्राइकोम कहा जाता है। इनके संपर्क में आने पर त्वचा में जलन और खुजली हो सकती है। इन संरचनाओं से निकलने वाले कुछ रसायन इस प्रतिक्रिया के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।

    यह पौधे की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है, जो इसे जानवरों और कीड़ों से बचाने में मदद करती है।

    पोषक तत्वों से भरपूर मानी जाती है बिच्छू घास

    बिच्छू घास की पत्तियों में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन ए, सी व के जैसे पोषक तत्व मौजूद हो सकते हैं। इसमें प्रोटीन भी पाया जाता है।

    इसी कारण कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी पत्तियों को उचित तरीके से तैयार करके साग, सूप और अन्य पारंपरिक व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है।

    हालांकि, इसे सीधे कच्चा खाना या बिना सही तरीके से तैयार किए इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं माना जाता, क्योंकि इसके रेशों और बालों से त्वचा तथा मुंह में जलन हो सकती है।

    पारंपरिक चिकित्सा में भी होता रहा है इस्तेमाल

    पहाड़ी क्षेत्रों की पारंपरिक चिकित्सा में बिच्छू घास का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। खासतौर पर जोड़ों और मांसपेशियों से जुड़ी तकलीफों के लिए इसके विभिन्न पारंपरिक प्रयोग बताए जाते हैं।

    कुछ जगहों पर इसके पत्तों को प्रभावित हिस्से से संपर्क कराने की पारंपरिक विधि का भी उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि इससे स्थानीय स्तर पर रक्त संचार बढ़ सकता है और दर्द में कुछ राहत महसूस हो सकती है।

    हालांकि, ऐसे पारंपरिक उपायों को आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

    सूजन और अन्य स्वास्थ्य लाभों पर हो रही है रिसर्च

    बिच्छू घास में कई जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं और इसके संभावित एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभावों पर शोध हुआ है। कुछ अध्ययनों में इसके अर्क को सूजन और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के संदर्भ में जांचा गया है।

    इसके अलावा, रक्त शर्करा, मूत्रवर्धक प्रभाव और त्वचा व बालों से जुड़े संभावित उपयोगों पर भी शोध मौजूद है। लेकिन इन सभी दावों को पक्के इलाज के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। इंसानों में इसके प्रभाव, सही मात्रा और लंबे समय तक इस्तेमाल की सुरक्षा को लेकर अभी और वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत है।

    कैंसर को लेकर क्या है दावा?

    बिच्छू घास के कुछ यौगिकों पर प्रयोगशाला स्तर पर शोध हुआ है और उनमें संभावित जैविक गतिविधियां देखी गई हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बिच्छू घास कैंसर का इलाज करती है।

    कैंसर रोधी प्रभाव से जुड़े दावों के लिए अभी पर्याप्त मानव-आधारित प्रमाण नहीं हैं। इसलिए इसे कैंसर के इलाज या दवा के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

    कपड़े और दूसरे उत्पादों में भी हो सकता है इस्तेमाल

    बिच्छू घास की एक और खासियत इसके मजबूत रेशे हैं। इनसे धागे और कपड़ा तैयार करने की संभावनाओं पर भी काम हुआ है। पहाड़ी क्षेत्रों में इसके रेशों से पारंपरिक रूप से अलग-अलग वस्तुएं तैयार किए जाने की जानकारी मिलती है।

    पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच प्राकृतिक रेशों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में बिच्छू घास भविष्य में स्थानीय लोगों के लिए छोटे स्तर के उद्योग और रोजगार का जरिया बन सकती है।

    उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों के लिए बन सकता है रोजगार का साधन

    अगर इसकी खेती, कटाई और प्रसंस्करण को वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से विकसित किया जाए तो बिच्छू घास स्थानीय समुदायों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकती है।

    इससे खाद्य उत्पाद, प्राकृतिक फाइबर और पारंपरिक उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि, इसके लिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सुरक्षित प्रसंस्करण पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा।

    बिच्छू घास देखने में भले ही आम और चुभने वाला पौधा लगे, लेकिन इसके पोषण, पारंपरिक उपयोग और प्राकृतिक रेशों की वजह से इसमें कई संभावनाएं छिपी हैं। यही वजह है कि पहाड़ी इलाकों में पाई जाने वाली यह वनस्पति अब सिर्फ एक जंगली घास नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, खाद्य और स्थानीय रोजगार के लिहाज से संभावनाओं वाला पौधा मानी जा रही है।

  • पतियों को छोड़ फरार हुईं दो सहेलियां? आपस में शादी का दावा, ‘माई वाइफ’ चैट से खुला राज!

    पतियों को छोड़ फरार हुईं दो सहेलियां? आपस में शादी का दावा, ‘माई वाइफ’ चैट से खुला राज!

    पतियों को छोड़ फरार हुईं दो सहेलियां? आपस में शादी का दावा, ‘माई वाइफ’ चैट से खुला राज!

    भगढ़ की लक्ष्मण कॉलोनी निवासी मंजू (25) की शादी वर्ष 2020 में पलवल के सन्नी से हुई थी. वहीं, मंजू की बचपन की सहेली रीना की शादी भी 2020 में गुरुग्राम (पटौदी) के मुमताजपुर निवासी वेदपाल के साथ हुई थी.

    हरियाणा में दो शादीशुदा सहेलियों के अपने पतियों और परिवार को छोड़कर एक साथ फरार होने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. दोनों महिलाएं अपने चार बच्चों के साथ घर से गायब हुई हैं. परिजनों का आरोप है कि वे अपने साथ करीब 9 लाख रुपए के सोने के गहने और नकदी भी ले गईं. पतियों का दावा है कि दोनों महिलाओं के बीच पिछले डेढ़ साल से प्रेम संबंध था और अब उन्होंने आपस में शादी कर ली है. हालांकि, पुलिस ने इस दावे की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.

    21 अगस्त को दोनों घरों से हुईं गायब पलवल के रहने वाले सन्नी की शादी 2020 में बल्लभगढ़ की लक्ष्मण कॉलोनी निवासी मंजू (25) से हुई थी. दोनों के दो बच्चे हैं. 21 अगस्त को मंजू अपने 4 साल के बेटे और 2 साल की बेटी के साथ अचानक घर से गायब हो गई. परिजनों के मुताबिक, वह करीब 4 लाख रुपए के गहने और नकदी भी साथ ले गई.

    जब परिवार ने उसकी तलाश शुरू की तो मंजू की बचपन की सहेली रीना का भी पता नहीं चला. रीना की शादी 2020 में गुरुग्राम के पटौदी इलाके के मुमताजपुर निवासी वेदपाल से हुई थी. वह भी अपनी 4 साल की बेटी और डेढ़ साल के बेटे के साथ घर से गायब थी. परिवार का कहना है कि रीना करीब 5 लाख रुपए के गहने और नकदी लेकर गई.

    WhatsApp चैट ने बढ़ाया शक दोनों महिलाओं के एक साथ गायब होने के बाद परिजनों को उनके रिश्ते पर शक हुआ. इसके बाद कॉल रिकॉर्ड और WhatsApp चैट की जांच की गई. पतियों के मुताबिक, चैट में दोनों एक-दूसरे को ‘माई क्यूट वाइफ’, ‘माई लव’ और ‘बाबू’ जैसे नामों से बुलाती थीं. दोनों के बीच घंटों बातचीत भी होती थी.

    परिजनों के मुताबिक, मंजू और रीना 12वीं तक साथ पढ़ी थीं. इसलिए दोनों की दोस्ती को परिवार सामान्य मानता रहा. लेकिन चैट सामने आने के बाद पतियों ने दोनों के बीच प्रेम संबंध होने और शादी करने का दावा किया.

    पति बोले- साथ रहें तो कोई ऐतराज नहीं दोनों पतियों ने कहा कि अगर उनकी पत्नियां साथ रहना चाहती हैं तो उन्हें इस पर ऐतराज नहीं है. उनकी सबसे बड़ी चिंता चारों बच्चों को लेकर है. उन्होंने पुलिस से बच्चों को सुरक्षित वापस लाने की गुहार लगाई है.

    पुलिस कर रही मोबाइल लोकेशन की जांच मामले में पलवल की भवन कुंड चौकी और गुरुग्राम के पटौदी थाने में गुमशुदगी समेत संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है. पुलिस दोनों महिलाओं की मोबाइल लोकेशन और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों की मदद से तलाश कर रही है.

  • जीरो फिगर का ‘खतरनाक नशा’; 15 दिन की डाइट के बाद महिला का हुआ ऐसा हाल, लगी पेंगुइन की तरह चलने!

    जीरो फिगर का ‘खतरनाक नशा’; 15 दिन की डाइट के बाद महिला का हुआ ऐसा हाल, लगी पेंगुइन की तरह चलने!

    आज के समय में स्लिम और सुंदर दिखने की दीवानगी लोगों पर इस कदर हावी हो गई है कि वे अपनी सेहत की कीमत पर जानलेवा नुस्खे अपनाने से भी नहीं कतराते. हाल ही में चीन के हेनान प्रांत से एक ऐसी ही झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने सबको हैरान कर दिया है.

    क्या है पूरा मामला?

    5 फीट 3 इंच की एक 31 वर्षीय महिला का वजन 70 किलो था. उसे जल्दी वेट लॉस करना था. इसके लिए उसने ऐसा खतरनाक रास्ता चुना जिसने उससे उसका चलना-फिरना ही छीन लिया. महिला ने लगातार 15 दिनों तक बिना कुछ खाए सिर्फ पानी के सहारे रहने का फैसला किया. इस क्रैश डाइट से उसने 20 किलो वजन तो घटा लिया, लेकिन उसकी हालत ऐसी हो गई कि आज वह अपने पैरों पर ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही है और उसकी चाल बिल्कुल पेंगुइन जैसी हो गई है.

    जानलेवा बीमारी ‘वर्निके एन्सेफेलोपैथी’ का शिकार

    जीरो फिगर का ‘खतरनाक नशा’; 15 दिन की डाइट के बाद महिला का हुआ ऐसा हाल, लगी पेंगुइन की तरह चलने!

    साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, जब हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, तो डॉक्टरों की रिपोर्ट देख पैरों तले जमीन खिसक गई. महिला को ‘वर्निके एन्सेफेलोपैथी’ (Wernicke Encephalopathy) नाम की गंभीर दिमागी बीमारी हो गई थी. यह बीमारी शरीर में विटामिन B1 की भारी कमी और अत्यधिक कुपोषण की वजह से होती है. इसकी चपेट में आने के बाद महिला को भ्रम होने लगा, याददाश्त कमजोर हो गई, आंखों को हिलाने में दिक्कत आने लगी और शरीर का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया.

    क्या कभी ठीक हो पाएगी उसकी चाल?

    डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक भूखा रहने और पोषण न मिलने से महिला के नर्वस सिस्टम को बहुत गहरा नुकसान पहुंचा है. न्यूरोलॉजिस्ट का कहना है कि तमाम इलाज के बाद भी इस बात की आशंका है कि उसकी यह पेंगुइन जैसी चाल उम्रभर के लिए ऐसी ही बनी रह सकती है.

    सोशल मीडिया पर चल रहा ये खतरनाक ट्रेंड

    पूछताछ में पता चला कि वह महिला चीन की एक प्राचीन ताओवादी प्रथा ‘बिगु’ (Bigu) का पालन कर रही थी, जिसमें बिना खाना खाए सिर्फ हवा या ऊर्जा के सहारे जीने का दावा किया जाता है. आजकल सोशल मीडिया पर ऐसे एक्सट्रीम वाटर फास्टिंग ट्रेंड्स धड़ल्ले से वायरल हो रहे हैं, जिन्हें देखकर लोग बिना सोचे-समझे अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं