Category: Gazab

  • दुनिया का सबसे लंबे नाम वाला रेलवे स्टेशन, 58 अक्षरों का नाम पढ़ना आसान नहीं; लोग शॉर्ट फॉर्म से बुलाते हैं..

    दुनिया का सबसे लंबे नाम वाला रेलवे स्टेशन, 58 अक्षरों का नाम पढ़ना आसान नहीं; लोग शॉर्ट फॉर्म से बुलाते हैं..

    दुनिया का सबसे लंबे नाम वाला रेलवे स्टेशन, 58 अक्षरों का नाम पढ़ना आसान नहीं; लोग शॉर्ट फॉर्म से बुलाते हैं..

    नई दिल्ली: दुनिया में कई रेलवे स्टेशन अपने इतिहास और वास्तुकला के लिए मशहूर हैं, लेकिन एक स्टेशन ऐसा भी है जो अपने बेहद लंबे नाम की वजह से पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस स्टेशन का आधिकारिक नाम इतना लंबा है कि अधिकांश लोग इसे एक बार में पढ़ भी नहीं पाते।

    58 अक्षरों का है स्टेशन का नाम

    दुनिया के सबसे लंबे नाम वाले रेलवे स्टेशन का नाम है Llanfair­pwllgwyngyllgogerychwyrndrobwllllantysiliogogogoch। यह नाम 58 अक्षरों से मिलकर बना है और इसी वजह से इसे दुनिया के सबसे लंबे आधिकारिक रेलवे स्टेशन नामों में गिना जाता है।

    कहां स्थित है यह स्टेशन?

    यह अनोखा रेलवे स्टेशन यूनाइटेड किंगडम (UK) के वेल्स (Wales) क्षेत्र के एंगलसी (Anglesey) द्वीप पर स्थित है। यह स्टेशन पर्यटकों के बीच भी काफी लोकप्रिय है, जहां लोग इसके लंबे नाम वाले साइनबोर्ड के साथ तस्वीरें खिंचवाने पहुंचते हैं।

    लोग कैसे पुकारते हैं इसका नाम?

    इतना लंबा नाम रोजमर्रा की बातचीत में बोलना आसान नहीं है। इसलिए स्थानीय लोग और यात्री इसे संक्षेप में Llanfairpwll या Llanfair PG कहकर पुकारते हैं। यही नाम आम बोलचाल और यात्रा संबंधी जानकारी में भी अधिक इस्तेमाल किया जाता है।

    इतना लंबा नाम क्यों रखा गया?

    बताया जाता है कि 19वीं सदी में इस स्थान का लंबा नाम प्रचार और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लोकप्रिय बनाया गया था। वेल्श भाषा में इस नाम का अर्थ उस स्थान के भौगोलिक और धार्मिक इतिहास से जुड़ा है।

    भारत में कौन सा स्टेशन है सबसे लंबे नाम वाला?

    भारत में सबसे लंबे नाम वाले रेलवे स्टेशन का रिकॉर्ड पुरट्चि तलैवर डॉ. एम.जी. रामचंद्रन सेंट्रल रेलवे स्टेशन (चेन्नई सेंट्रल) के नाम है। इसके आधिकारिक नाम में 57 अक्षर हैं, जिसके कारण इसे दुनिया के सबसे लंबे रेलवे स्टेशन नामों में शामिल किया जाता है।

    दुनिया के इस अनोखे रेलवे स्टेशन का लंबा नाम आज भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और हर साल हजारों पर्यटक केवल इसे देखने और इसके साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए वेल्स पहुंचते हैं।

  • सावन और तीज पर घर में बनाएं प्राकृतिक गुड़ वाली मेहंदी, जानिए गहरा रंग पाने के 2 आसान तरीके..

    सावन और तीज पर घर में बनाएं प्राकृतिक गुड़ वाली मेहंदी, जानिए गहरा रंग पाने के 2 आसान तरीके..

    सावन और तीज पर घर में बनाएं प्राकृतिक गुड़ वाली मेहंदी, जानिए गहरा रंग पाने के 2 आसान तरीके..

    सावन, हरियाली तीज, रक्षाबंधन और जन्माष्टमी जैसे त्योहारों पर मेहंदी लगाना शुभ माना जाता है। हर महिला चाहती है कि उसकी मेहंदी का रंग गहरा, खूबसूरत और लंबे समय तक टिके। अगर आप इस बार बाजार के केमिकल वाले कोन की बजाय घर पर प्राकृतिक मेहंदी बनाना चाहती हैं, तो गुड़ वाली मेहंदी एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है।

    गुड़ में मौजूद प्राकृतिक शर्करा मेहंदी के पेस्ट को कुछ समय तक नम बनाए रखने में मदद कर सकती है, जिससे रंग और भी बेहतर उभर सकता है।

    गुड़ वाली मेहंदी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री

    100 ग्राम शुद्ध मेहंदी पाउडर

    1 छोटा चम्मच कद्दूकस किया हुआ गुड़

    आधा कप हल्का गुनगुना पानी

    1 छोटा चम्मच नींबू का रस (इच्छानुसार)

    कुछ बूंदें नीलगिरी या लैवेंडर एसेंशियल ऑयल (इच्छानुसार)

    पहला तरीका

    सबसे पहले मेहंदी पाउडर को अच्छी तरह छान लें ताकि उसमें कोई गांठ न रहे।

    अब गुनगुने पानी में गुड़ डालकर पूरी तरह घोल लें।

    इस मिश्रण को थोड़ा-थोड़ा करके मेहंदी में मिलाएं और चिकना पेस्ट तैयार करें।

    यदि चाहें तो इसमें नींबू का रस और कुछ बूंदें नीलगिरी या लैवेंडर ऑयल भी मिला सकते हैं।

    अब बर्तन को ढककर 6 से 8 घंटे या पूरी रात के लिए रख दें ताकि मेहंदी अच्छी तरह तैयार हो जाए।

    इसके बाद तैयार पेस्ट को मेहंदी कोन में भरकर हाथों पर लगाएं।

    दूसरा पारंपरिक तरीका

    एक बर्तन में 4 चम्मच गुड़ का बूरा या पाउडर लें।

    उसमें 1 चम्मच चायपत्ती और 2 चम्मच चीनी मिलाएं।

    इस मिश्रण को एक धातु के डिब्बे में रखें।

    डिब्बे के बीच में एक छोटी कटोरी या गिलास में थोड़ा पानी रखें।

    अब डिब्बे को अच्छी तरह ढक दें ताकि भाप बाहर न निकल सके।

    इसे धीमी आंच पर कुछ समय तक गर्म करें।

    जब गुड़ पिघल जाए तो गैस बंद कर दें और डिब्बे को ठंडा होने दें।

    ठंडा होने के बाद अंदर बनने वाला गाढ़ा प्राकृतिक अर्क तैयार होगा।

    इस अर्क को रुई या कॉटन स्वैब की सहायता से हाथों पर लगाया जा सकता है।

    मेहंदी का रंग गहरा करने के आसान उपाय

    मेहंदी लगाने से पहले हाथ अच्छी तरह साफ कर लें।

    मेहंदी को कम से कम 6 से 8 घंटे तक हाथों पर लगा रहने दें।

    मेहंदी सूखने के बाद पानी से तुरंत न धोएं।

    सूखी मेहंदी को धीरे-धीरे रगड़कर हटाएं।

    मेहंदी हटाने के बाद 10 से 12 घंटे तक हाथों को पानी से बचाने की कोशिश करें।

    नींबू और चीनी का हल्का मिश्रण लगाने से मेहंदी कुछ समय तक नम रह सकती है।

    मेहंदी हटाने के बाद सरसों, नारियल या लौंग के हल्के धुएं की गर्माहट लेने से भी रंग बेहतर उभर सकता है।

    ध्यान रखने योग्य बातें

    हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाला शुद्ध मेहंदी पाउडर ही इस्तेमाल करें।

    यदि आपकी त्वचा संवेदनशील है, तो किसी भी नए मिश्रण का पहले हाथ के छोटे हिस्से पर परीक्षण कर लें।

    केमिकल युक्त रंग या डाई मिलाने से बचें।

    निष्कर्ष

    यदि आप इस सावन या तीज पर प्राकृतिक तरीके से गहरे रंग की मेहंदी चाहती हैं, तो घर पर बनी गुड़ वाली मेहंदी एक अच्छा विकल्प हो सकती है। सही विधि, थोड़ा धैर्य और उचित देखभाल के साथ आपकी मेहंदी का रंग अधिक खूबसूरत और लंबे समय तक टिक सकता है।

  • Instagram का बड़ा अपडेट! अब पुराने पोस्ट का Music बदल सकेंगे यूजर्स, दोबारा Upload करने की नहीं होगी जरूरत,,

    Instagram का बड़ा अपडेट! अब पुराने पोस्ट का Music बदल सकेंगे यूजर्स, दोबारा Upload करने की नहीं होगी जरूरत,,

    Instagram का बड़ा अपडेट! अब पुराने पोस्ट का Music बदल सकेंगे यूजर्स, दोबारा Upload करने की नहीं होगी जरूरत,,

    Instagram New Feature: Instagram ने अपने यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक नया फीचर लॉन्च किया है। अब यूजर्स पहले से पब्लिश किए गए फीड पोस्ट का म्यूजिक आसानी से बदल सकेंगे। इसके लिए पोस्ट डिलीट करके दोबारा अपलोड करने की जरूरत नहीं होगी। कंपनी ने इस नए फीचर का नाम Replace Audio रखा है, जिसकी मदद से कुछ आसान स्टेप्स में पुराने पोस्ट का ऑडियो बदला जा सकेगा।

    क्या है Replace Audio फीचर?

    अब तक अगर किसी यूजर को अपने पोस्ट का म्यूजिक बदलना होता था, तो उसे पोस्ट हटाकर फिर से अपलोड करना पड़ता था। ऐसा करने से पोस्ट की रीच, लाइक्स और व्यूज पर असर पड़ सकता था। लेकिन Replace Audio फीचर आने के बाद पोस्ट अपनी जगह पर ही रहेगा और केवल उसका म्यूजिक बदला जा सकेगा। इससे पोस्ट का एंगेजमेंट भी प्रभावित नहीं होगा।

    कंटेंट क्रिएटर्स को होगा बड़ा फायदा

    यह फीचर खासतौर पर कंटेंट क्रिएटर्स के लिए काफी उपयोगी साबित होगा। अगर किसी पोस्ट में गलत ऑडियो लग गया हो या किसी ट्रेंडिंग सॉन्ग को जोड़ना हो, तो अब पोस्ट दोबारा अपलोड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे समय की बचत होगी और पोस्ट की परफॉर्मेंस भी बनी रहेगी।

    प्रोफाइल ग्रिड को भी कर सकते हैं कस्टमाइज

    Instagram ने हाल ही में प्रोफाइल ग्रिड को रीऑर्डर करने का फीचर भी पेश किया है। इसकी मदद से यूजर्स अपनी प्रोफाइल पर दिखाई देने वाले पोस्ट को अपनी पसंद के अनुसार ऊपर-नीचे या आगे-पीछे कर सकते हैं। हालांकि इससे पोस्ट की मूल अपलोड डेट में कोई बदलाव नहीं होगा।

    पुराने पोस्ट का म्यूजिक कैसे बदलें?

    1. Instagram ऐप खोलें और उस पोस्ट पर जाएं जिसका म्यूजिक बदलना है।
    2. पोस्ट के ऊपर दिए गए तीन डॉट (More) पर टैप करें।
    3. इसके बाद Edit विकल्प चुनें।
    4. अब Replace Audio पर टैप करें।
    5. अपनी पसंद का नया म्यूजिक चुनें।
    6. आखिर में Save पर टैप करें।

    इसके बाद आपका पोस्ट पहले की तरह प्रोफाइल पर रहेगा, लेकिन उसका म्यूजिक बदल जाएगा।

    ध्यान दें

    Replace Audio फीचर धीरे-धीरे सभी यूजर्स के लिए जारी किया जा रहा है। अगर आपके Instagram ऐप में यह विकल्प अभी दिखाई नहीं दे रहा है, तो ऐप को लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करें या फीचर उपलब्ध होने का इंतजार करें।

  • रेस्टोरेंट्स की मनमानी पर सरकार सख्त! जबरन Service Charge वसूला तो होगी कार्रवाई, जानिए आपके अधिकार..

    रेस्टोरेंट्स की मनमानी पर सरकार सख्त! जबरन Service Charge वसूला तो होगी कार्रवाई, जानिए आपके अधिकार..

    रेस्टोरेंट्स की मनमानी पर सरकार सख्त! जबरन Service Charge वसूला तो होगी कार्रवाई, जानिए आपके अधिकार..

    Restaurant Service Charge Rule: अगर किसी रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद आपके बिल में बिना आपकी अनुमति के सर्विस चार्ज जोड़ दिया जाता है, तो अब ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई हो सकती है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि ग्राहकों से जबरन सर्विस चार्ज वसूलना स्वीकार्य नहीं है और नियमों का उल्लंघन करने वाले रेस्टोरेंट्स पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

    सरकार ने दिए सख्त निर्देश

    केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि देश के कई शहरों से बिना सहमति के सर्विस चार्ज वसूलने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।

    मंत्री ने बताया कि उनके साथ भी एक रेस्टोरेंट में ऐसा हुआ था। जब उन्होंने बिल में जोड़े गए सर्विस चार्ज पर आपत्ति जताई, तो रेस्टोरेंट ने वह राशि हटाकर माफी मांगी।

    बिना अनुमति सर्विस चार्ज जोड़ना गलत

    सरकार का कहना है कि ग्राहक की सहमति के बिना बिल में सर्विस चार्ज जोड़ना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। ग्राहक चाहे तो अपनी इच्छा से टिप दे सकता है, लेकिन रेस्टोरेंट इसे अनिवार्य नहीं बना सकता।

    41 रेस्टोरेंट्स पर कार्रवाई शुरू

    केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने देशभर के 41 रेस्टोरेंट्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इन प्रतिष्ठानों पर ग्राहकों से जबरन सर्विस चार्ज वसूलने का आरोप है।

    सरकार ने रेस्टोरेंट्स को यह भी निर्देश दिया है कि यदि उनके बिलिंग सिस्टम में सर्विस चार्ज अपने आप जुड़ता है, तो उसे तुरंत हटाया जाए।

    दिल्ली हाई कोर्ट ने भी दिए स्पष्ट निर्देश

    दिल्ली हाई कोर्ट ने भी CCPA की गाइडलाइंस को सही ठहराया है। अदालत ने कहा कि होटल और रेस्टोरेंट ग्राहकों की अनुमति के बिना बिल में सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकते। इस मामले में दायर याचिकाओं को भी अदालत ने खारिज कर दिया।

    किन रेस्टोरेंट्स पर हुई कार्रवाई?

    CCPA ने कई प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें चायोस (Sunshine Teahouse) पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया और ग्राहक से वसूला गया सर्विस चार्ज लौटाने का आदेश दिया गया।

    इसके अलावा कैफे ब्लू बॉटल (पटना), चाइना गेट रेस्टोरेंट, फिएस्टा बार्बेक्यू नेशन, FOO अहमदाबाद, ल’ओपेरा फ्रेंच बेकरी, ज़ोरो और द लक्ज़री नाइट क्लब सहित कई रेस्टोरेंट्स जांच के दायरे में हैं।

    अगर जबरन सर्विस चार्ज लिया जाए तो क्या करें?

    यदि किसी रेस्टोरेंट ने आपकी अनुमति के बिना सर्विस चार्ज वसूला है, तो आप इसकी शिकायत कर सकते हैं। शिकायत करते समय बिल की कॉपी और अन्य जरूरी जानकारी अपने पास रखें।

    सरकार के मुताबिक, ग्राहक नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915) या ईमेल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

    जानिए आपके अधिकार

    • रेस्टोरेंट आपकी सहमति के बिना सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकता।
    • टिप देना पूरी तरह ग्राहक की इच्छा पर निर्भर है।
    • जबरन सर्विस चार्ज वसूलना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना जा सकता है।
    • ऐसे मामलों में ग्राहक शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग कर सकता है।

  • क्या इंसान के दिमाग की भी होती है स्टोरेज लिमिट? जानिए कितनी जानकारी संभाल सकता है हमारा मस्तिष्क..

    क्या इंसान के दिमाग की भी होती है स्टोरेज लिमिट? जानिए कितनी जानकारी संभाल सकता है हमारा मस्तिष्क..

    क्या इंसान के दिमाग की भी होती है स्टोरेज लिमिट? जानिए कितनी जानकारी संभाल सकता है हमारा मस्तिष्क..

    नई दिल्ली: क्या आपने कभी सोचा है कि इंसान का दिमाग आखिर कितनी जानकारी याद रख सकता है? जिस तरह मोबाइल और कंप्यूटर की स्टोरेज की एक सीमा होती है, क्या हमारे दिमाग की भी कोई मेमोरी कैपेसिटी होती है? वैज्ञानिकों का कहना है कि मानव मस्तिष्क की क्षमता किसी भी आधुनिक कंप्यूटर से कहीं अधिक जटिल और शक्तिशाली है।

    क्या वास्तव में 2.5 पेटाबाइट होती है दिमाग की क्षमता?

    कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों और लोकप्रिय वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार, मानव मस्तिष्क की जानकारी संग्रहीत करने की क्षमता का अनुमान लगभग 2.5 पेटाबाइट (Petabyte) तक लगाया जाता है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि दिमाग को कंप्यूटर की तरह निश्चित स्टोरेज क्षमता में मापना पूरी तरह सटीक नहीं है, क्योंकि मस्तिष्क जानकारी को डिजिटल फाइलों की तरह नहीं, बल्कि न्यूरॉन्स के बीच बनने वाले जटिल नेटवर्क और संबंधों के रूप में संग्रहीत करता है।

    2.5 पेटाबाइट का मतलब कितना होता है?

    यदि इस अनुमान को समझें, तो 1 पेटाबाइट = लगभग 10 लाख (1 मिलियन) गीगाबाइट (GB) होता है। यानी 2.5 पेटाबाइट करीब 25 लाख GB के बराबर है। यह इतनी विशाल क्षमता है कि इसमें सैद्धांतिक रूप से लाखों फिल्में या विशाल डिजिटल पुस्तकालय के बराबर जानकारी समा सकती है।

    दिमाग जानकारी कैसे याद रखता है?

    मानव मस्तिष्क में अरबों न्यूरॉन्स (Neurons) होते हैं, जो आपस में ट्रिलियनों कनेक्शन (Synapses) बनाते हैं। नई जानकारी सीखने पर इन कनेक्शनों की मजबूती और संरचना बदलती है। यही प्रक्रिया हमारी यादों और सीखने की क्षमता का आधार बनती है। जिन चीजों का हम बार-बार अभ्यास करते हैं, वे अधिक मजबूत यादों के रूप में सुरक्षित हो जाती हैं।

    फिर हम कई बातें क्यों भूल जाते हैं?

    विशेषज्ञों के अनुसार, भूलने का कारण आमतौर पर दिमाग की स्टोरेज खत्म होना नहीं होता। कई बार जानकारी को दोबारा याद (Recall) करने में कठिनाई होती है, या समय, तनाव, नींद की कमी, बढ़ती उम्र अथवा कुछ बीमारियों के कारण याददाश्त प्रभावित हो सकती है।

    क्या दिमाग की मेमोरी कभी फुल हो जाती है?

    अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार, ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि इंसान का दिमाग मोबाइल या कंप्यूटर की तरह “फुल” हो जाता है। उम्र बढ़ने या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से याददाश्त कमजोर हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मस्तिष्क की स्टोरेज क्षमता समाप्त हो गई है। मानव मस्तिष्क लगातार नई जानकारी सीखने और पुराने अनुभवों के आधार पर खुद को बदलने की अद्भुत क्षमता रखता है।

  • अब बिना इंटरनेट के भी होगा UPI पेमेंट! NPCI ला रहा नया Tap-to-Pay फीचर, जानें कैसे करेगा काम..

    अब बिना इंटरनेट के भी होगा UPI पेमेंट! NPCI ला रहा नया Tap-to-Pay फीचर, जानें कैसे करेगा काम..

    अब बिना इंटरनेट के भी होगा UPI पेमेंट! NPCI ला रहा नया Tap-to-Pay फीचर, जानें कैसे करेगा काम..

    अगर आप ऐसी जगह रहते हैं जहां इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क बार-बार गायब हो जाता है, तो जल्द ही UPI पेमेंट करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) एक नए ऑफलाइन Tap-to-Pay फीचर पर काम कर रहा है, जिसकी मदद से बिना इंटरनेट के भी दुकानों पर UPI भुगतान किया जा सकेगा।

    कैसे करेगा काम?

    इस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए यूजर को पहले इंटरनेट उपलब्ध होने पर अपने UPI Lite Wallet में पैसे जोड़ने होंगे। इसके बाद इंटरनेट न होने पर भी उसी बैलेंस से ऑफलाइन पेमेंट किया जा सकेगा।

    पेमेंट के दौरान यूजर को केवल अपने NFC सपोर्ट वाले स्मार्टफोन को दुकानदार की PoS (Point of Sale) मशीन पर टैप करना होगा। इस प्रक्रिया में फोन और PoS मशीन दोनों का ऑनलाइन होना जरूरी नहीं होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआती चरण में 2,000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकेगा और इसके लिए UPI PIN दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होगी।

    किन जगहों पर होगा सबसे ज्यादा फायदा?

    यह फीचर खासतौर पर उन इलाकों के लिए उपयोगी माना जा रहा है जहां नेटवर्क की समस्या रहती है, जैसे—

    • हवाई जहाज के अंदर
    • मेट्रो या अंडरग्राउंड ट्रेन
    • पहाड़ी और दूर-दराज के क्षेत्र
    • कमजोर मोबाइल नेटवर्क वाले इलाके

    PoS मशीनों को मिलेगा NPCI सर्टिफिकेशन

    इस सुविधा का उपयोग करने के लिए दुकानदारों की PoS मशीनों को NPCI से प्रमाणित (Certified) होना होगा। ऑफलाइन स्थिति में मशीन ट्रांजैक्शन की जानकारी सुरक्षित रखेगी और इंटरनेट उपलब्ध होते ही बैंक व नेटवर्क को भेजकर भुगतान का सत्यापन पूरा करेगी।

    बैंक और UPI ऐप भी कर रहे तैयारी

    रिपोर्ट्स के अनुसार, कई बैंक और थर्ड-पार्टी UPI ऐप कंपनियां भी अपने प्लेटफॉर्म पर इस फीचर को जोड़ने की तैयारी कर रही हैं। यानी भविष्य में यह सुविधा अलग-अलग UPI ऐप्स पर उपलब्ध हो सकती है।

    UPI Lite X से कितना अलग होगा?

    NPCI पहले UPI Lite X लॉन्च कर चुका है, जिससे सीमित परिस्थितियों में बिना मोबाइल नेटवर्क के कुछ ऑफलाइन भुगतान संभव हैं।

    नया Tap-to-Pay फीचर इससे एक कदम आगे माना जा रहा है क्योंकि इसमें सीधे दुकानों की PoS मशीन पर ऑफलाइन भुगतान करने की सुविधा मिलेगी, जिससे ऑफलाइन डिजिटल पेमेंट का दायरा और बढ़ जाएगा।

    2,000 रुपये की लिमिट क्यों?

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सुविधा के तहत फिलहाल एक बार में 2,000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकेगा। हालांकि, अंतिम सीमा और अन्य नियम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ऑफलाइन डिजिटल पेमेंट दिशा-निर्देशों और NPCI की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगे।

    लगातार बढ़ रहा है UPI का इस्तेमाल

    भारत में UPI का उपयोग लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में UPI के जरिए 22.72 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 28.92 लाख करोड़ रुपये रही।

    अगर यह नया ऑफलाइन Tap-to-Pay फीचर लागू होता है, तो नेटवर्क की समस्या वाले इलाकों में भी डिजिटल भुगतान करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और सुविधाजनक हो सकता है।

    नोट: फिलहाल यह सुविधा विकास और परीक्षण के चरण में बताई जा रही है। इसके लॉन्च की तारीख और अंतिम नियमों की आधिकारिक घोषणा NPCI द्वारा की जानी बाकी है।

  • 15 नहीं, 30 किलो तक होता है इस अनोखे नारियल का वजन! दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक बीज देखने आते हैं पर्यटक

    15 नहीं, 30 किलो तक होता है इस अनोखे नारियल का वजन! दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक बीज देखने आते हैं पर्यटक

    15 नहीं, 30 किलो तक होता है इस अनोखे नारियल का वजन! दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक बीज देखने आते हैं पर्यटक

    नई दिल्ली: आमतौर पर बाजार में मिलने वाले नारियल का वजन 1 से 2 किलो के बीच होता है, लेकिन दुनिया में एक ऐसा भी नारियल है जिसका वजन 15 से 30 किलो तक पहुंच सकता है। अपने विशाल आकार और वजन के कारण यह पूरी दुनिया में बेहद खास माना जाता है। यही वजह है कि इसे दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक बीज भी कहा जाता है।

    इस अनोखे नारियल का नाम कोको डे मेर (Coco de Mer) है। यह सामान्य नारियल से न केवल आकार में कई गुना बड़ा होता है, बल्कि इसका बीज भी दुनिया के किसी भी अन्य पौधे के बीज से बड़ा माना जाता है।

    कहां पाया जाता है यह दुर्लभ नारियल?

    कोको डे मेर प्राकृतिक रूप से केवल सेशेल्स (Seychelles) के कुछ चुनिंदा द्वीपों पर पाया जाता है। यह दुर्लभ पाम प्रजाति दुनिया के सबसे अनोखे पेड़ों में गिनी जाती है और इसकी सुरक्षा के लिए वहां की सरकार ने विशेष नियम लागू किए हैं।

    फल पकने में लग जाते हैं 6 से 7 साल

    इस पेड़ की सबसे खास बात यह है कि इसे विकसित होने में कई वर्ष लगते हैं। वहीं, एक फल को पूरी तरह पकने में भी करीब 6 से 7 साल का समय लग सकता है। इसी कारण इसे दुनिया के सबसे धीमी गति से विकसित होने वाले बीजों में भी शामिल किया जाता है।

    दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक बीज

    वनस्पति वैज्ञानिकों के अनुसार, कोको डे मेर का बीज पृथ्वी पर पाया जाने वाला सबसे बड़ा प्राकृतिक बीज है। इसका वजन कई बार एक छोटे बच्चे के वजन के बराबर यानी 30 किलोग्राम तक पहुंच जाता है।

    सरकार ने बनाए हैं सख्त नियम

    कोको डे मेर की दुर्लभता को देखते हुए सेशेल्स सरकार ने इसके संरक्षण के लिए कड़े नियम बनाए हैं। बिना अनुमति इसके फल या बीज को देश से बाहर ले जाना प्रतिबंधित है। इसके अवैध व्यापार पर भी सख्त निगरानी रखी जाती है।

    अपनी अनोखी बनावट और विशाल आकार के कारण यह नारियल दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हर साल हजारों लोग सेशेल्स पहुंचकर इस दुर्लभ पेड़ और इसके विशाल फलों को देखने आते हैं।

  • राख के ढेर में मिला 2,000 साल पुराना अनोखा खजाना, घास से बनी चप्पलों ने वैज्ञानिकों को चौंकाया..

    राख के ढेर में मिला 2,000 साल पुराना अनोखा खजाना, घास से बनी चप्पलों ने वैज्ञानिकों को चौंकाया..

    राख के ढेर में मिला 2,000 साल पुराना अनोखा खजाना, घास से बनी चप्पलों ने वैज्ञानिकों को चौंकाया..

    स्पेन में पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान एक ऐसी खोज मिली है, जिसने प्राचीन इतिहास की कई परतें खोल दी हैं। शोधकर्ताओं को 2,000 वर्ष से अधिक पुरानी घास से बनी चप्पलें एक प्राचीन खदान के पास राख और कचरे के ढेर में मिली हैं। आश्चर्य की बात यह है कि सदियों तक राख में दबे रहने के बावजूद ये चप्पलें काफी हद तक सुरक्षित मिलीं।

    यह खोज स्पेन के उरियम (Urium) क्षेत्र में हुई, जो सेविल से करीब 55 मील दूर स्थित एक प्राचीन खनन स्थल है। पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान आठ चप्पलों के अवशेष मिले, जिन्हें एस्पार्टो (Esparto) घास से तैयार किया गया था। माना जाता है कि इनका इस्तेमाल रोमन साम्राज्य के आने से पहले आयरन एज के मजदूर किया करते थे।

    इस खोज पर आधारित अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका Pyrenae में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं के अनुसार, चप्पलें पहली शताब्दी ईसा पूर्व (BCE) की एक धातु कार्यशाला के पास स्थित राख के ढेर में मिलीं। उसी क्षेत्र में कई भट्टियां, कार्यस्थल और अन्य संरचनाएं भी मिली हैं, जिससे संकेत मिलता है कि यह स्थान उस समय औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था।

    शोध में सामने आया कि ये चप्पलें कार्यशाला के अंदर नहीं, बल्कि पास के उस स्थान पर मिलीं जहां भट्टियों की राख और अन्य बेकार सामग्री फेंकी जाती थी। चप्पलों पर अधिक इस्तेमाल के स्पष्ट निशान मिले हैं, जिससे माना जा रहा है कि टूट-फूट जाने के बाद इन्हें कचरे के साथ फेंक दिया गया था।

    रेडियोकार्बन डेटिंग से चप्पलों की अलग-अलग आयु का भी पता चला। एक चप्पल का समय 28 से 124 ईस्वी (CE) के बीच का पाया गया, जबकि दूसरी 360 से 205 ईसा पूर्व (BCE) और तीसरी 175 से 56 ईसा पूर्व (BCE) की बताई गई। इससे संकेत मिलता है कि इस खनन क्षेत्र में कई सदियों तक लगातार काम होता रहा।

    पुरातत्वविदों का मानना है कि यह खोज आयरन एज के लोगों के दैनिक जीवन, उनके पहनावे, कार्य संस्कृति और उस समय इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक सामग्रियों को समझने में महत्वपूर्ण साबित होगी। राख की परतों ने इन जैविक वस्तुओं को लंबे समय तक सुरक्षित रखा, जिससे शोधकर्ताओं को प्राचीन मानव जीवन का एक दुर्लभ प्रमाण मिला है।

  • फटा हुआ दूध फेंकें नहीं, इससे बन सकती हैं 20 स्वादिष्ट मिठाइयाँ, जानिए एक आसान रेसिपी..

    फटा हुआ दूध फेंकें नहीं, इससे बन सकती हैं 20 स्वादिष्ट मिठाइयाँ, जानिए एक आसान रेसिपी..

    फटा हुआ दूध फेंकें नहीं, इससे बन सकती हैं 20 स्वादिष्ट मिठाइयाँ, जानिए एक आसान रेसिपी..

    घर में दूध फट जाए तो उसे बेकार समझकर फेंकने की जरूरत नहीं है। यदि दूध केवल गर्मी, नींबू या सिरके की वजह से फटा है और उसमें किसी तरह की खराब गंध नहीं है, तो उससे कई तरह की स्वादिष्ट मिठाइयाँ बनाई जा सकती हैं।

    फटे हुए दूध को छानने के बाद जो नरम हिस्सा बचता है, उसे छेना कहा जाता है। यही छेना कई लोकप्रिय भारतीय मिठाइयों का मुख्य आधार होता है।

    फटे हुए दूध से बनने वाली 20 लोकप्रिय मिठाइयाँ

    रसगुल्ला

    रसमलाई

    संदेश

    छेना मुरकी

    छेना की खीर

    छेना टोस्ट

    छेना बर्फी

    कलाकंद

    छेना लड्डू

    छेना मालपुआ

    छेना जलेबी

    राजभोग

    कमलाभोग

    छेना पोड़ा

    छेना गाजा

    छेना रोल

    छेना पेड़ा

    छेना हलवा

    मैंगो छेना मिठाई

    चॉकलेट छेना बाइट्स

    घर पर बनाएं स्वादिष्ट कलाकंद

    आवश्यक सामग्री

    फटे हुए दूध से तैयार छेना

    500 मिली फुल क्रीम दूध

    आधा कप चीनी

    आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर

    2 से 3 बड़े चम्मच दूध पाउडर (इच्छानुसार)

    कटे हुए बादाम और पिस्ता

    कुछ केसर के रेशे (इच्छानुसार)

    थोड़ा सा घी

    बनाने की विधि

    सबसे पहले फटे हुए दूध को सूती कपड़े में छान लें।

    छेने को एक बार साफ पानी से धो लें ताकि नींबू या सिरके का स्वाद निकल जाए।

    हल्का निचोड़ें लेकिन पूरी तरह सूखा न करें। छेने में थोड़ी नमी रहने दें।

    अब एक भारी तले की कड़ाही में फुल क्रीम दूध डालकर मध्यम आंच पर पकाएं।

    दूध लगभग आधा रह जाए तो उसमें तैयार छेना मिला दें।

    धीरे-धीरे चलाते रहें ताकि मिश्रण अच्छी तरह मिल जाए, लेकिन छेना पूरी तरह पेस्ट न बने। हल्का दानेदार टेक्सचर ही कलाकंद की खास पहचान है।

    अब इसमें चीनी डालें और लगातार चलाते रहें।

    जब मिश्रण दोबारा गाढ़ा होने लगे, तब इलायची पाउडर और चाहें तो दूध पाउडर मिला दें।

    एक प्लेट या ट्रे में हल्का घी लगाकर तैयार मिश्रण फैला दें।

    ऊपर से बादाम, पिस्ता और केसर डालकर हल्के हाथ से दबा दें।

    इसे कमरे के तापमान पर 2 से 3 घंटे या फ्रिज में लगभग 1 घंटे के लिए सेट होने दें।

    इसके बाद मनचाहे आकार में काटकर परोसें।

    स्वाद बढ़ाने के आसान टिप्स

    अंत में एक छोटा चम्मच देसी घी मिलाने से स्वाद और खुशबू बढ़ जाती है।

    यदि दानेदार कलाकंद पसंद है, तो छेने को ज्यादा न मसलें।

    केसर मिलाने से रंग और स्वाद दोनों बेहतर हो जाते हैं।

    कम मीठा पसंद हो तो चीनी की मात्रा अपनी पसंद के अनुसार कम रख सकते हैं।

    ध्यान रखें

    यदि दूध से बदबू आ रही हो या वह खराब हो चुका हो, तो उससे कोई भी मिठाई न बनाएं। केवल ताजा फटा हुआ दूध ही मिठाई बनाने के लिए इस्तेमाल करें।

    निष्कर्ष

    अगली बार यदि घर में दूध फट जाए तो उसे फेंकने की बजाय स्वादिष्ट मिठाइयों में बदलें। थोड़ी सी मेहनत और सही विधि अपनाकर आप घर पर ही बाजार जैसी लाजवाब मिठाइयाँ तैयार कर सकते हैं।

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  • बारिश में लोहे के तवे और कड़ाही पर लग जाती है जंग? अपनाएं ये 4 आसान किचन हैक्स,,

    बारिश में लोहे के तवे और कड़ाही पर लग जाती है जंग? अपनाएं ये 4 आसान किचन हैक्स,,

    बारिश में लोहे के तवे और कड़ाही पर लग जाती है जंग? अपनाएं ये 4 आसान किचन हैक्स,,

    बरसात के मौसम में किचन की सबसे आम समस्याओं में से एक है लोहे के तवे और कड़ाही पर जंग लग जाना। कई बार बर्तन धोने के कुछ ही घंटों बाद उन पर लाल-भूरे रंग की परत दिखाई देने लगती है। इससे न केवल बर्तन की उम्र कम होती है, बल्कि उसमें खाना बनाना भी सुरक्षित और सुविधाजनक नहीं रहता।

    अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो ये आसान घरेलू उपाय आपके लोहे के बर्तनों को लंबे समय तक जंग से बचाने में मदद कर सकते हैं।

    लोहे के बर्तनों पर जंग क्यों लगती है?

    जब लोहे के बर्तन लंबे समय तक नमी और हवा के संपर्क में रहते हैं, तो उनकी सतह पर आयरन ऑक्साइड बनने लगता है। यही परत जंग कहलाती है।

    बरसात के मौसम में हवा में नमी अधिक होने के कारण यह प्रक्रिया तेजी से होती है। यदि बर्तन धोने के बाद ठीक से न सुखाए जाएं, तो जंग और जल्दी लग सकती है।

    पहला उपाय

    बर्तन धोने के बाद उन्हें केवल सुखाने के लिए न छोड़ें।

    पहले साफ और सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछें।

    इसके बाद 1 से 2 मिनट तक हल्की आंच पर गर्म करें ताकि अंदर बची हुई नमी भी पूरी तरह खत्म हो जाए।

    दूसरा उपाय

    बर्तन पूरी तरह सूख जाने के बाद उस पर खाने वाले किसी भी तेल की बहुत हल्की परत लगा दें।

    सरसों का तेल, रिफाइंड ऑयल या कोई भी कुकिंग ऑयल इस्तेमाल किया जा सकता है।

    यह पतली परत नमी और लोहे के बीच सुरक्षा कवच का काम करती है और जंग लगने की संभावना कम कर देती है।

    तीसरा उपाय

    लोहे के बर्तनों को कभी भी गीले सिंक में लंबे समय तक न छोड़ें।

    उन्हें हमेशा सूखी और हवादार जगह पर रखें।

    नम वातावरण में रखने से जंग तेजी से फैल सकती है।

    चौथा उपाय

    समय-समय पर लोहे के तवे और कड़ाही की सीजनिंग करें।

    इसके लिए बर्तन को अच्छी तरह साफ करके हल्का तेल लगाएं और कुछ मिनट तक गर्म करें।

    यह प्रक्रिया बर्तन की सतह पर प्राकृतिक सुरक्षा परत बना देती है, जिससे जंग लगने का खतरा कम होता है और खाना भी कम चिपकता है।

    यदि जंग लग जाए तो क्या करें?

    यदि बर्तन पर हल्की जंग दिखाई दे, तो उसे नमक और नींबू या बेकिंग सोडा की मदद से अच्छी तरह साफ करें।

    इसके बाद बर्तन को धोकर पूरी तरह सुखाएं, हल्का तेल लगाएं और दोबारा सीजनिंग करें।

    बहुत अधिक जंग लगे या सतह खराब हो चुके बर्तनों का उपयोग करने से बचें।

    कुछ जरूरी बातें

    लोहे के बर्तन धोने के बाद तुरंत सुखाएं।

    लंबे समय तक पानी में भिगोकर न रखें।

    बारिश के मौसम में नियमित रूप से तेल की हल्की परत लगाते रहें।

    समय-समय पर सीजनिंग करना न भूलें।

    निष्कर्ष

    बरसात के मौसम में थोड़ी सी सावधानी अपनाकर आप अपने लोहे के तवे और कड़ाही को लंबे समय तक जंग से सुरक्षित रख सकते हैं। सही तरीके से सुखाना, तेल लगाना, सूखी जगह पर रखना और नियमित सीजनिंग करना इन बर्तनों की उम्र बढ़ाने के सबसे आसान और प्रभावी उपाय हैं।