आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब धीरे-धीरे जिंदगी के लगभग हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रहा है। पढ़ाई, ऑफिस के काम और बिजनेस से लेकर कई तरह के तकनीकी कामों में AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है। लेकिन क्या AI को एक बार्बर यानी नाई का काम भी सिखाया जा सकता है? सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो इसी वजह से लोगों का ध्यान खींच रहा है।
AI बना बार्बर का नया शागिर्द
वायरल वीडियो में एक बार्बर अपने माथे पर एक AI-सपोर्टेड कैमरा लगाए नजर आता है। उसके सामने एक ग्राहक बैठा है और बार्बर उसके बाल काट रहा है। कैमरा बार्बर की हर गतिविधि को रिकॉर्ड कर रहा है, ताकि AI उसके काम करने के तरीके को समझ सके।
खास बात यह है कि बार्बर सिर्फ बाल काटने की प्रक्रिया ही नहीं दिखा रहा, बल्कि फेशियल और मसाज जैसे सैलून से जुड़े दूसरे कामों के बारे में भी AI को जानकारी देता नजर आ रहा है।
यानी जिस तरह कोई अनुभवी व्यक्ति किसी नए शागिर्द को काम सिखाता है, उसी अंदाज में यह बार्बर अपनी रोजमर्रा की प्रोफेशनल गतिविधियों को कैमरे के जरिए रिकॉर्ड करता दिखाई दे रहा है।
सोशल मीडिया पर लोगों की दिलचस्प प्रतिक्रियाएं
यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @Rainmaker1973 नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। वीडियो सामने आने के बाद यूजर्स इसके भविष्य से जुड़े पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि आने वाले समय में AI और रोबोट कई ऐसे काम कर सकते हैं, जिनके बारे में अभी कल्पना करना भी मुश्किल है। वहीं कुछ यूजर्स ने मजाक में कहा कि भविष्य में सैलून में AI बार्बर भी नजर आ सकते हैं।
हालांकि, तकनीक कितनी भी आगे क्यों न बढ़ जाए, किसी काम को सही तरीके से करने में इंसानी अनुभव, हाथों की सफाई और ग्राहक की जरूरत को समझने की क्षमता की अपनी अहमियत रहती है।
फिलहाल यह वीडियो इसी वजह से चर्चा में है कि AI को रोजमर्रा के एक बिल्कुल अलग तरह के काम को सीखते हुए दिखाने का विचार लोगों के लिए काफी दिलचस्प है।
Mass A.I training is happening in India. It is hard to imagine what the world will look like in the next 5-10 years. pic.twitter.com/p1PJoV712N
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले करतला थाना क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां के केराकछार गांव की रहने वाली एक महिला अपने मोबाइल पर रील्स देख रही थी, तभी उसे फोन का नेटवर्क गायब हो गया. महिला इस बात से नाराज हो गई और गुस्से में उसने अपना मोबाइल फोन उठाकर जोर से जमीन पर दे मारा, जिससे फोन टूटकर चकनाचूर हो गया. लेकिन महिला का गुस्सा इतने पर ही खत्म नहीं हुआ. फोन तोड़ने के कुछ देर बाद ही आवेश में आकर उसने घर में रखा जहरीला कीटनाशक पी लिया. परिजनों द्वारा आनन-फानन में अस्पताल ले जाने के बाद इलाज के दौरान रविवार रात उसकी दर्दनाक मौत हो गई. यह दुखद हादसा शनिवार दोपहर का है, जिसका खुलासा मंगलवार को हुआ. महिला का नाम मंगलो बाई है, जिसकी उम्र 52 साल थी.
बताया जाता है कि घटना के समय घर में मंगलो बाई की छोटी बेटी मौजूद थी. रील बंद होने के गुस्से में फोन तोड़ने के बाद मंगलो अपने कमरे में चली गई और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. वहीं, उसने कीटनाशक गटक लिया. बेटी को घटना की भनक तब लगी, जब कमरे के भीतर से मंगलो के उल्टी करने की आवाजें आने लगीं. जब परिजन कमरे में पहुंचे तो वहां कीटनाशक की खाली शीशी पड़ी मिली, जिसके बाद परिजनों में हड़कंप मच गया. हैरानी की बात यह रही कि घटना के तुरंत बाद परिजन महिला को डॉक्टर या अस्पताल ले जाने के बजाय खुद ही घरेलू नुस्खों से जहर बाहर निकालने के प्रयास में जुट गए. इस दौरान महिला की जान बचाने के अंधविश्वास और गलत तरीके के तहत पति द्वारा उसे गोबर मिला पानी भी पिलाया गया. घरेलू हथकंडों के चक्कर में काफी कीमती समय बर्बाद हो गया और जब महिला की स्थिति बिगड़ने लगी, तब जाकर डायल-112 की मदद से उसे करतला स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया.
प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए उसे कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद महिला ने दम तोड़ दिया. इस मामले में दैनिक भास्कर से बात करते हुए मनोवैज्ञानिक डॉ कमलेश रात्रे ने सोशल मीडिया और रील की लत को लेकर गंभीर चेतावनियां दी हैं. उन्होंने बताया कि लगातार शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट देखने से मस्तिष्क का रिवॉर्ड सिस्टम अत्यधिक सक्रिय हो जाता है, जिसमें डोपामाइन न्यूरोट्रांसमीटर की मुख्य भूमिका होती है. ऐसी स्थिति में अचानक नेटवर्क चले जाने या फोन हटा लिए जाने जैसी रुकावट आने पर कुछ लोगों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, घबराहट और बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं. मनोचिकित्सकों ने सलाह दी है कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल की समय-सीमा तय करना बेहद जरूरी है. भोजन के दौरान और सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल का प्रयोग बिल्कुल बंद कर देना चाहिए.
सतना शहर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के प्रेमनगर इलाके में सोमवार शाम दिनदहाड़े स्नेचिंग की वारदात से सनसनी फैल गई. हरतालिका तीज का सामान लेकर बाजार से घर लौट रही महिला के हाथ से बाइक सवार बदमाशों ने पर्स छीन लिया. बदमाश पर्स लेकर एमपीईबी पावर हाउस की तरफ भागने लगे, लेकिन स्थानीय लोगों की सतर्कता से दोनों को मौके पर ही पकड़ लिया गया.
पर्स छीनते ही महिला ने मचाया शोर जानकारी के मुताबिक, प्रेमनगर निवासी महिला बाजार से हरतालिका तीज का सामान खरीदकर घर लौट रही थी. घर के पास पहुंचते ही बाइक पर सवार दो बदमाशों ने उसे निशाना बनाया. बाइक पर पीछे बैठे बदमाश ने महिला के हाथ से पर्स झपटा और दोनों भागने लगे. महिला ने तुरंत शोर मचाना शुरू कर दिया. आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए. लोगों ने भाग रहे बाइक सवार दोनों आरोपियों को घेर लिया और पकड़ लिया. इसके बाद 112 पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों आरोपियों को सिटी कोतवाली थाने ले गई.
CCTV में कैद हुई पूरी वारदात दिनदहाड़े हुई स्नेचिंग की पूरी घटना आसपास लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई. फुटेज में बाइक सवार बदमाश महिला के पास पहुंचते और उसका पर्स छीनकर भागते दिखाई दे रहे हैं. वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है.
151 के तहत कार्रवाई, पुलिस पर सवाल मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर महिला और उसके परिजनों ने नाराजगी जताई है. उनका आरोप है कि स्नेचिंग जैसे गंभीर मामले में पीड़िता का बयान दर्ज किए बिना आरोपियों के खिलाफ केवल धारा 151 के तहत कार्रवाई की गई और उन्हें जेल भेज दिया गया. परिजनों का कहना है कि जब CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर सामने आया, तब पुलिस ने आनन-फानन में बाइक सवार अज्ञात बदमाशों के खिलाफ 304 के तहत मामला दर्ज किया. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आरोपी मौके पर ही पकड़ लिए गए थे और पूरी घटना CCTV में कैद थी, तो शुरुआत में स्नेचिंग के मामले में उचित कार्रवाई क्यों नहीं की गई.
पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल मामले में अब पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है. पीड़ित महिला का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद भी पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया. वहीं, CCTV फुटेज सामने आने के बाद केस दर्ज किया गया. अब सवाल यह है कि पुलिस ने आरोपियों पर शुरुआत में सामान्य धारा के तहत कार्रवाई क्यों की और स्नेचिंग की घटना में तत्काल कानूनी प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई.
35 लाख साल से जमीन के नीचे दफन था एक ऐसा रहस्य, जिसने वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है. क्या आप जानते हैं कि जिस जापान को हम आज देखते हैं, लाखों साल पहले वहां खौफनाक और विशालकाय ‘जल-दानव’ राज करते थे? लगभग 30 साल पहले मिली 3 हड्डियों के विश्लेषण से अब एक ऐसा सच सामने आया है, जिसने जीव विज्ञान के इतिहास को बदल कर रख दिया है. आइए जानते हैं इस 35 लाख साल पुराने रहस्यमयी जीव की पूरी कहानी.
30 साल पुराना रहस्य और अजिमू क्षेत्र का चमत्कार
जापान के अजिमू (Ajimu) इलाके में 1995 से 1997 के बीच खुदाई के दौरान 3 दुर्लभ हड्डियां पाई गई थीं. ये अवशेष त्सुबुसुगावा फॉर्मेशन (Tsubusugawa Formation) नाम की प्राचीन झील की परतों में मिले थे. उस समय वैज्ञानिकों को अंदाजा नहीं था कि ये हड्डियां किसकी हैं, इसलिए इन्हें अस्थायी रूप से एंड्रियास जीनस (Andrias Genus) में रख दिया गया था. ये सैलामैंडर (Giant Salamanders) की एक बहुत बड़ी प्रजाति है. इसमें दुनिया के सबसे बड़े जीवित उभयचर शामिल हैं.
रीढ़ की हड्डी से खुला नई प्रजाति का राज
हाल ही में क्योटो यूनिवर्सिटी (Kyoto University) के शोधकर्ताओं ने आधुनिक तकनीक और व्यापक अध्ययनों की मदद से इन जीवाश्मों की बारीकी से जांच की. जांच में पता चला कि इस सैलामैंडर की बीच वाले शरीर की रीढ़ की हड्डी यानी Mid-Trunk Vertebra की बनावट अब तक मिले किसी भी विशाल सैलामैंडर से पूरी तरह अलग थी. इसी वजह से वैज्ञानिकों ने इसे एक बिल्कुल नई प्रजाति और जीनस घोषित किया और नाम दिया- ‘लिम्नोस्पोंडिलस अजिमुएन्सिस’ (Limnospondylus Ajimuensis).
3.6 फीट लंबा विशालकाय उभयचर
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह रहस्यमयी जीव बहती नदियों की जगह शांत झीलों और दलदली इलाकों में रहता था. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जीव करीब 3.6 फीट यानी 1.1 मीटर तक लंबा रहा होगा. ये खोज एशिया के जीवाश्म रिकॉर्ड में पिछले 2 करोड़ सालों से चली आ रही कमी को पूरा करती है.
टोरंटो की प्रोडक्ट डिजाइनर हेइगी जियोंग ने 1.5 करोड़ की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर कंटेंट क्रिएशन चुना. जानिए क्यों एक साल के इस जोखिम भरे फैसले की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है.
क्या आप अपनी 1.5 करोड़ रुपए सालाना की आरामदायक नौकरी सिर्फ अपने शौक और क्रिएटिविटी के लिए छोड़ सकते हैं? ज्यादातर लोग ऐसा करने से पहले हजार बार सोचेंगे. लेकिन टोरंटो में रहने वाली एक प्रोडक्ट डिजाइनर हेइगी जियोंग (Heigi Jeong) ने बिना एक पल गंवाए यह बड़ा कदम उठा लिया.
जून 2026 में जब हेइगी ने अपनी टेक कंपनी की सुरक्षित नौकरी छोड़ी, तो हर कोई हैरान रह गया. उनके पास 9 से 5 की एक बेहतरीन जॉब थी, जिसमें शानदार सैलरी 1,73,000 डॉलर (यानी करीब 1.5 करोड़ रुपए) मिलती थी, लाइफस्टाइल अच्छा था और छुट्टियों में घूमने की पूरी आजादी भी थी. फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने कॉर्पोरेट दुनिया को अलविदा कह दिया?
क्यों छोड़ी 1.5 करोड़ की शानदार नौकरी?
हेइगी को अपनी नौकरी से कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन उनकी लाइफ में काम बहुत ज्यादा बढ़ गया था. एक तरफ फुल-टाइम प्रोडक्ट डिजाइनर की नौकरी, दूसरी तरफ सोशल मीडिया के लिए कंटेंट बनाना और साथ में एक किताब लिखने का बड़ा प्रोजेक्ट भी चल रहा था.
इन तीनों चीजों को एक साथ संभालना उनके लिए किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं था. उन्होंने खुद माना कि यह स्थिति तीन फुल-टाइम नौकरियां एक साथ करने जैसी हो गई थी. इसलिए उन्होंने अपने करियर के सबसे सुरक्षित हिस्से यानी कॉर्पोरेट जॉब को छोड़ने का फैसला किया.
अब महीने में कमा रही हैं सिर्फ 500 रुपए!
नौकरी छोड़ने के बाद हेइगी की जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है. कॉर्पोरेट के फिक्स और भारी-भरकम वेतन के उलट अब उनकी कमाई अनिश्चित हो गई है. जुलाई महीने में कंटेंट क्रिएशन से उन्हें सिर्फ 6 डॉलर (लगभग 500 रुपए) ही मिल पाए. हालांकि किताब के एडवांस पैसों से उन्हें थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन हर महीने मिलने वाले पैसों में भारी उतार-चढ़ाव रहता है. कभी कमाई शून्य होती है, तो कभी उम्मीद से ज्यादा. इसके बावजूद वह इसे अपनी नाकामी नहीं मानतीं.
खुद को दिया है 1 साल का समय
बिना किसी फिक्स सैलरी के रहना आसान नहीं है. इस्तीफे से पहले हेइगी को भी काफी घबराहट और चिंता हुई थी कि क्या उनका यह फैसला गलत साबित होगा. इस डर को कम करने के लिए उन्होंने खुद को एक साल की समय सीमा दी है.
सोशल मीडिया पर वायरल होने और कुछ लाइक्स पाने के चक्कर में लोग कई बार ऐसी लापरवाही कर बैठते हैं, जो उनके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग से सामने आया एक ऐसा ही मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है। यहां कुछ युवकों ने कथित तौर पर रील बनाने के लिए अपनी SUV को सिंध नदी के तेज बहाव में उतार दिया। कुछ ही देर में गाड़ी पानी के बीच फंस गई और उसमें सवार लोग खुद मुश्किल में घिर गए।
तेज बहाव में फंस गई SUV
वायरल वीडियो में एक महिंद्रा स्कॉर्पियो नदी के पानी के बीच फंसी हुई दिखाई दे रही है। आसपास पानी का बहाव काफी तेज नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि यह घटना होटल सिंध रिसॉर्ट्स के पास हुई।
जानकारी के मुताबिक, युवक सोशल मीडिया के लिए कंटेंट बनाने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने SUV को नदी के तल में उतार दिया। लेकिन पानी का बहाव उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज था। देखते ही देखते वाहन नदी के बीच फंस गया और उसमें मौजूद लोग भी परेशानी में पड़ गए।
हालात बिगड़ने के बाद घटना की जानकारी पुलिस को दी गई।
पुलिस और स्थानीय लोगों ने शुरू किया रेस्क्यू
सूचना मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया और SUV में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
राहत की बात यह रही कि घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। बाद में SUV को भी नदी से बाहर निकाल लिया गया।
वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने जताई नाराजगी
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यूजर्स ने युवकों के इस कदम पर सवाल उठाए। कई लोगों ने इसे खतरनाक लापरवाही बताया। यूजर्स का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए इस तरह अपनी और दूसरों की सुरक्षा को खतरे में डालना भारी पड़ सकता है।
नदी और पहाड़ी इलाकों में पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है। ऐसे में किसी वाहन को नदी के भीतर उतारना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। यह घटना भी इसी बात की याद दिलाती है
#Watch | SUV gets stuck in Nallah #Sindh during reported stunt attempt near Sonamarg A Scorpio vehicle became stranded in Nallah Sindh near #Sonamarg after its occupants allegedly attempted a stunt. Police and locals launched a rescue operation to retrieve the vehicle. pic.twitter.com/WLtCIZdpD5
लंदन.
कल्पना कीजिए कि आप दीवार के भीतर बनी एक ऐसी तंग और अंधेरी कालकोठरी में खड़े हैं, जहां न आप ठीक से सांस ले सकते हैं और न ही हिल-डुल सकते हैं. बाहर आपकी तलाश में हथियारबंद शिकारी घूम रहे हैं, जो कमरों की नपाई कर रहे हैं. अगर आप जरा सा भी खांसे या जमीन पर पैर की सरसराहट हुई, तो सीधी मौत आपका इंतजार कर रही है. यह कोई थ्रिलर फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि 16वीं सदी के इंग्लैंड की वह भयावह हकीकत है, जिसने प्रीस्ट होल्स (Priest Holes) यानी पादरियों के गुप्त ठिकानों को जन्म दिया. 16वीं शताब्दी में यूरोप धार्मिक कट्टरता की आग में जल रहा था. इंग्लैंड के राजा हेनरी आठवें और उनके बाद एडवर्ड छठे ने कैथोलिक चर्च से नाते तोड़कर प्रोटेस्टेंट धर्म को बढ़ावा दिया. लेकिन इसके बाद गद्दी पर बैठीं रानी मैरी, जिन्होंने बड़ी बेरहमी से प्रोटेस्टेंटों को जिंदा जलवा दिया और इतिहास में ‘ब्लडी मैरी’ के नाम से कुख्यात हुईं.
मैरी के बाद उनकी बहन रानी एलिजाबेथ प्रथम सत्ता में आईं, तो पादरियों और कैथोलिकों पर कहर टूट पड़ा. पोप ने एलिजाबेथ को धर्मद्रोही घोषित कर दिया, जिसके बाद रानी को मारने की साजिशें रची जाने लगीं. गुस्से में आई रानी ने कैथोलिक पादरियों के इंग्लैंड में घुसने पर सख्त रोक लगा दी और जासूसों व प्रीस्ट हंटर्स का खौफनाक जाल बिछा दिया. जो भी पादरी पकड़ा जाता, उसे अमानवीय यातनाएं दी जातीं और सरेआम फांसी पर लटका दिया जाता. ऐसे दौर में पादरियों की जान बचाने के लिए रईस कैथोलिक परिवारों ने अपने बड़े-बड़े महलों और हवेलियों में गुप्त कमरे बनवाने शुरू किए, जिन्हें प्रीस्ट होल्स कहा गया. ये ठिकाने अक्सर सीढ़ियों के नीचे, अंगीठी के पीछे या नकली दीवारों के अंदर बनाए जाते थे. जब प्रीस्ट हंटर्स घर पर छापा मारते, तो वे हफ्तों तक वहीं डेरा डालते. वे कमरों की लंबाई-चौड़ाई नापते, ताकि गुप्त जगह का पता चल सके.
इस दौरान पादरी उस बेहद तंग जगह में बिना हिले-डुले, अपनी सांसें रोककर कई दिनों तक पड़े रहते थे. कई बार खाने-पानी की कमी या ऑक्सीजन न मिलने के कारण पादरी उस गुप्त ठिकाने के अंदर ही तड़प-तड़पकर दम तोड़ देते थे. इन नामुमकिन से दिखने वाले सीक्रेट चेम्बर्स को बनाने के पीछे एक मास्टरमाइंड जेसुइट निकोलस ओवेन थे. ओवेन ने अपना पूरा जीवन इन गुप्त कमरों को तराशने में लगा दिया. उनकी कारीगरी इतनी बेमिसाल थी कि सदियों बाद भी मकानों के जीर्णोद्धार के दौरान ये कमरे आसानी से नहीं खोजे जा सके. ओवेन ने वॉर्स्टरशायर के हारविंगटन हॉल जैसे महलों में सात-सात प्रीस्ट होल्स बनाए. 1606 में अपने साथी पादरियों को बचाने के लिए ओवेन ने खुद को दुश्मनों के हवाले कर दिया और टॉवर ऑफ लंदन में यातनाएं सहते हुए दम तोड़ दिया. आज ये प्रीस्ट होल्स इतिहास के उस खूनी अध्याय की गवाही देते हैं.
लखनऊ के निगोहां इलाके से मोबाइल की किस्त वसूली के नाम पर युवक को बंधक बनाने और उसका खून निकलवाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. आरोप है कि राजारामखेड़ा गांव निवासी नेवल को मोबाइल दुकानदार के लोगों ने अपने साथ ले जाकर लखनऊ के एक ब्लड बैंक में उसका खून निकलवाया. इसके बाद उसे सदर इलाके के एक मकान में बंधक बनाकर कुछ दिनों तक जबरन मजदूरी भी कराई गई.
पहली किस्त बकाया होने पर फोन छीना पीड़ित की मां बुजुर्ग जदूराई के मुताबिक, उनके छोटे बेटे नेवल ने करीब एक साल पहले निगोहां कस्बे की गीता मोबाइल शॉप से 21,500 रुपये का सैमसंग मोबाइल जीरो डाउन पेमेंट पर खरीदा था. इसकी 12 महीने की किस्त 2,799 रुपये तय हुई थी. आरोप है कि पहली किस्त बकाया होने पर दुकान के कुछ लोग उनके घर पहुंचे और मोबाइल छीनकर ले गए. इसके करीब एक साल बाद 8 सितंबर को दो लोग स्कूटी से गांव पहुंचे और नेवल को अपने साथ ले गए.
फोन भी छीना और खून भी लिया नेवल का आरोप है कि उसे लखनऊ के एक ब्लड बैंक ले जाया गया, जहां उसका एक यूनिट खून निकलवाया गया. इसके बाद उसे सदर इलाके के एक मकान में बंधक बनाकर रखा गया और उससे जबरन मजदूरी कराई गई. इसी दौरान आरोपियों ने उसके बड़े भाई राजकुमार को फोन किया और मोबाइल की किस्त के नाम पर 2,799 रुपये ऑनलाइन मंगवा लिए. परिवार ने जब नेवल को छोड़ने की गुहार लगाई तो आरोपियों ने कथित तौर पर 12 हजार रुपये और मांगे.
रैपिड कैब का किराया भी भरवाया परिजनों का आरोप है कि पैसे नहीं देने पर आरोपियों ने नेवल को जान से मारकर गोमती नदी में फेंकने की धमकी दी. डर के कारण परिवार ने निगोहां थाने में शिकायत की. आरोप है कि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद पांचवें दिन नेवल को रैपिड कैब से थाने भेजा गया और उसका किराया भी उसके भाई से ही भरवाया गया. थाने पहुंचने पर नेवल बदहवास हालत में था. परिवार का दावा है कि जब उन्होंने कार्रवाई की मांग की तो उन्हें ही डराया गया और कहा गया कि कार्रवाई करने पर नेवल को भी फंसा दिया जाएगा.
मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश घर लौटने के बाद नेवल ने परिजनों को पूरी आपबीती बताई, जिसके बाद उसकी बुजुर्ग मां सोमवार को डीसीपी दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक के पास पहुंचीं. उनका आरोप है कि निगोहां थाने में शिकायत के बावजूद उन्हें वहां से लौटा दिया गया. डीसीपी दक्षिणी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निगोहां थाना प्रभारी को तत्काल मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि पुलिस की लापरवाही की भी जांच कराई जाएगी.
एक साल बाद पैसे के लिए दबाव बनाया पीड़ित के बड़े भाई राजकुमार ने बताया कि नेवल ने 21,500 रुपये का सैमसंग फोन लिया था और उसकी 2,799 रुपये की 12 महीने की किस्त बनी थी. राजकुमार के मुताबिक, फोन लेने के अगले ही महीने दुकान के लड़के मोबाइल वापस ले गए थे, लेकिन करीब एक साल बाद आरोपियों ने दोबारा परिवार पर दबाव बनाया. अब पुलिस पूरे मामले में आरोपियों की भूमिका, युवक को बंधक बनाए जाने, ब्लड बैंक में खून निकलवाने और कथित वसूली के आरोपों की जांच करेगी.
विश्व प्रसिद्ध तिरुमाला स्थित भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी (बालाजी) मंदिर अपनी भव्यता, चमत्कारों और अनूठी परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. अमूमन हर हिंदू मंदिर के गर्भगृह में पूजा-आरती के समय बजाने के लिए छोटी घंटियां जरूर होती हैं, लेकिन तिरुमाला के मुख्य गर्भगृह में ऐसा नहीं है. गर्भगृह के भीतर घंटी न होने के पीछे जहां एक ओर भगवान के परम भक्त और वैष्णव संत श्री वेदांत देशिका से जुड़ी एक बेहद सुंदर लोककथा प्रचलित है. वहीं, दूसरी ओर इसके पीछे प्राचीन ‘वैखानस आगम’ शास्त्र के कड़े नियम भी शामिल हैं. आइए जानते हैं इस रहस्य की पूरी इनसाइड स्टोरी.
पारंपरिक मान्यताओं और स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, तिरुमाला के गर्भगृह में घंटी न होने का संबंध वैष्णव परंपरा के महान संत श्री वेदांत देशिका के जन्म से जुड़ा हुआ है. प्राचीन काल में द्रोथम्बा और अनंत सूर्य नामक एक परम भक्त विवाहित जोड़ा रहता था. विवाह के बारह वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई संतान नहीं हुई थी. संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर दोनों ने तिरुमाला में भगवान वेंकटेश्वर की कड़ी आराधना की.
उनकी निश्चल भक्ति से प्रसन्न होकर एक रात भगवान वेंकटेश्वर स्वामी ने दोनों को स्वप्न में दर्शन दिए. भगवान ने अपने हाथ की दिव्य घंटी द्रोथम्बा को प्रसाद स्वरूप देते हुए उसे निगलने का आदेश दिया और आशीर्वाद दिया कि उनके घर एक महान दिव्य पुत्र का जन्म होगा. सुबह जागने पर पति-पत्नी ने पाया कि दोनों को एक जैसा ही स्वप्न आया था.
गायब हो गई मंदिर की मुख्य घंटी
अगली सुबह जब मंदिर के पुजारियों ने पट खोले, तो गर्भगृह की मुख्य घंटी वहां से गायब थी. शुरुआत में पुजारियों को लगा कि दंपत्ति ने घंटी चुराई है. लेकिन तभी ध्यानमग्न मुख्य पुजारी को भगवान ने दर्शन देकर समझाया कि वह घंटी उन्होंने स्वयं द्रोथम्बा को दी है और उसी दिव्य अंश से एक महापुरुष का जन्म होगा. मान्यता है कि इसी घटना के बाद से तिरुमाला के गर्भगृह में दोबारा कोई छोटी घंटी नहीं रखी गई.
घंटी के अवतार थे महान संत श्री वेदांत देशिका!
भगवान के कहे अनुसार द्रोथम्बा और अनंत सूर्य के घर वेदांत देशिका नाम के अद्भुत बालक का जन्म हुआ, जिन्हें साक्षात भगवान की घंटी का अवतार माना गया. बालक देशिका ने बचपन से ही विलक्षण बुद्धि का प्रदर्शन किया. उन्होंने तमिल और संस्कृत में महान ग्रंथों की रचना की. जगद्गुरु रामानुजाचार्य के बाद उन्हें वैष्णव परंपरा को सुदृढ़ करने वाला सबसे महान स्तंभ माना गया. अपने मामा के निर्देश पर देशिका ने तमिलनाडु के तिरुवाहिंद्रपुरम की एक पहाड़ी पर गरुड़ मंत्र का कठोर जाप किया. गरुड़ देव ने प्रकट होकर उन्हें भगवान हयग्रीव (ज्ञान के देवता) की मूर्ति और मंत्र दिया. हयग्रीव देव के आशीर्वाद से उन्होंने तुरंत 32 श्लोकों वाली ‘हयग्रीव स्तुति’ रच दी, जिसके बाद उन्हें ‘कवितार्किक केसरी’ की उपाधि मिली.
चमत्कारों से शत्रुओं को किया परास्त
उन्होंने देवी लक्ष्मी की आराधना में श्री स्तुति का पाठ कर कनकधारा (सोने के सिक्कों) की वर्षा कराई. जब शत्रुओं ने उन्हें एक रात में हजार श्लोक रचने की चुनौती दी, तो उन्होंने भोर होने से पहले ही ‘पादुका सहस्रम्’ की रचना कर दी. जब शत्रुओं ने उन पर विषैला सांप छोड़ा, तो उन्होंने गरुड़ दंडकम का पाठ किया, जिसे सुनकर साक्षात गरुड़ पक्षी ने आकर सांप को उठा लिया. श्रीरंगम पर मुगलों के आक्रमण के दौरान उन्होंने शवों के ढेर के नीचे छिपकर पवित्र वैष्णव साहित्य की रक्षा की थी.
वैज्ञानिक और आगम शास्त्र का क्या है विधिक नियम?
लोककथाओं से इतर, यदि मंदिर के प्रशासनिक और शास्त्रीय पहलुओं को देखा जाए, तो गर्भगृह में घंटी न होने का एक ठोस तकनीकी कारण भी सामने आता है. तिरुमाला मंदिर प्रशासन (TTD) ने आधिकारिक रूप से घंटी न होने का कोई विशिष्ट कारण घोषित नहीं किया है. हालांकि, आगम शास्त्रों के अनुसार, हर मंदिर की निर्माण शैली और पूजा पद्धतियां अलग होती हैं. तिरुमाला मंदिर में प्राचीन वैखानस आगम परंपरा का अक्षरशः पालन किया जाता है, जिसके नियमों के तहत ही गर्भगृह की आंतरिक व्यवस्था का संचालन होता है.
विजयनगर काल का घंटा मंडपम: जहां आज भी बजती हैं विशाल घंटियां
भले ही मुख्य गर्भगृह के भीतर घंटी न हो, लेकिन मंदिर के ठीक बाहर एक ऐतिहासिक घंटा मंडपम मौजूद है, जिसे ‘महामणि मंडपम’ भी कहा जाता है. यह मंडपम मंदिर के ‘बंगारू वकीली’ (गोल्डन गेट) के ठीक सामने स्थित है. इसका निर्माण 1461 ईस्वी में विजयनगर साम्राज्य के तत्कालीन मंत्री चंद्रगिरि वासी मल्लन्ना ने करवाया था. इस मंडपम के दक्षिणी हिस्से में लकड़ी के चबूतरे पर लोहे की भारी जंजीरों से दो बहुत विशाल घंटियां लटकी हुई हैं. इन घंटियों को बजाने वाले विशेष ब्राह्मण को ‘घंटापानी’ कहा जाता है. जब भगवान वेंकटेश्वर स्वामी को महाप्रसाद (नैवेद्य) भोग लगाया जाता है, तब ये घंटियां जोर-शोर से बजाई जाती हैं.
विजयनगर साम्राज्य के इतिहास के अनुसार, जब सम्राट चंद्रगिरि के किले में डेरा डालते थे, तो तिरुमाला से लेकर चंद्रगिरि तक की पहाड़ियों के बीच कई उप-घंटा मंडप बनाए गए थे. तिरुमाला में घंटी बजते ही श्रृंखला बद्ध तरीके से अन्य मंडपों की घंटियाँ बजती थीं. चंद्रगिरि किले में इन घंटियों की आवाज सुनकर ही राजा अपना भोजन ग्रहण करते थे. आज भी कई श्रद्धालु तिरुमाला में इन घंटियों के बजने के बाद ही भोजन करते हैं.
डिस्क्लेमर: आध्यात्मिक और लोक मान्यताओं की दृष्टि से तिरुमाला गर्भगृह में घंटी न होने और संत वेदांत देशिका की यह कहानी बेहद रोचक और आस्था से भरी है. हालांकि, ऐतिहासिक और विधिक स्रोतों के अनुसार, इस कथा का कोई प्रामाणिक या लिखित दस्तावेज उपलब्ध नहीं है. यह कहानी तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के आधिकारिक इतिहास, वेंकटचल महात्म्यम, वराह पुराण या प्रामाणिक वैष्णव पारंपरिक ग्रंथों में दर्ज नहीं है. संत वेदांत देशिका की प्रामाणिक जीवनी में भी इस विशिष्ट घटना का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है. इसलिए इसे ऐतिहासिक सत्य के बजाय भक्तों की अटूट आस्था और लोक-परंपरा का हिस्सा मानना ही न्यायसंगत होगा.
जवानी और खूबसूरती बनाए रखने का क्रेज किस हद तक जा सकता है, इसकी एक हैरान करने वाली दास्तान चीन से सामने आई है. जहां एक 75 साल की बुजुर्ग महिला ने अपनी जिंदगीभर की कमाई यानी करीब 4 करोड़ रुपए सिर्फ ब्यूटी ट्रीटमेंट और सैलून के चक्कर में फूंक डाले. जब तक इस बात की भनक परिवार को लगी, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
75 की उम्र में ब्यूटी पार्लर का अजीबोगरीब जुनून
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, शंघाई की रहने वाली 75 साल की ‘यू’ सरनेम की एक बुजुर्ग महिला को साल 2016 से एक स्थानीय सैलून और मेडिकल ब्यूटी क्लिनिक जाने की ऐसी लत लगी कि उन्होंने अपनी रिटायरमेंट की सारी सेविंग्स वहां लुटा दी. उन्होंने अपनी स्किन को टाइट रखने, थ्रेड लिफ्टिंग और मालिश जैसी कई कॉस्मेटिक प्रोसीजर पर आंख मूंदकर पैसे खर्च किए. मामला तब खुला जब उनकी बेटी ने घर में पड़े बिल और ट्रीटमेंट के कागजातों की फाइल खंगाली, जिसके बाद पैरों तले जमीन खिसक गई.
मार्केट रेट से 20 गुना ज्यादा वसूले गए दाम
इस हैरान करने वाले मामले का सबसे बड़ा पहलू यह है कि उस ब्यूटी सैलून ने बुजुर्ग महिला के भोलेपन का जमकर फायदा उठाया. बिलिंग रिकॉर्ड के मुताबिक, सैलून ने सामान्य बाजार दरों से 10 से 20 गुना ज्यादा कीमतें वसूलीं. सिर्फ एक बार के लिप टैटू सेशन के लिए महिला से 39,800 युआन (करीब 5.7 लाख रुपए) वसूले गए, जो कि आम कीमत से कई गुना ज्यादा था. आइब्रो टैटू और कई छोटी-मोटी थेरेपी पर भी लाखों रुपए पानी की तरह बहाए गए.
इस अजीबोगरीब घटना पर छिड़ी बहस
जब बेटी ने इस धोखाधड़ी के खिलाफ शंघाई के एक टीवी शो से मदद मांगी, तो यह मामला सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया. इस अजीबोगरीब घटना ने अब पूरी दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या बुजुर्ग ग्राहकों को ऐसे ठग सैलून से बचाने के लिए कोई कड़े उपभोक्ता संरक्षण कानून नहीं होने चाहिए? क्या अकेलेपन या उम्र के इस पड़ाव पर लोग ऐसी आक्रामक मार्केटिंग का आसानी से शिकार बन जाते हैं?