Category: Gazab

  • शाम होते ही लाइट के​​​​​ पास जमा हो जाते हैं कीड़े? इन उपायों से पाएं मच्छर-मक्खियों और कीड़ों से छुटकारा..

    शाम होते ही लाइट के​​​​​ पास जमा हो जाते हैं कीड़े? इन उपायों से पाएं मच्छर-मक्खियों और कीड़ों से छुटकारा..

    शाम होते ही लाइट के​​​​​ पास जमा हो जाते हैं कीड़े? इन उपायों से पाएं मच्छर-मक्खियों और कीड़ों से छुटकारा..

    मानसून का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इस दौरान घर में छोटे-छोटे कीड़ों की परेशानी बढ़ जाती है. शाम होते ही लाइट के आसपास मच्छर, छोटी मक्खियां और दूसरे उड़ने वाले कीड़े मंडराने लगते हैं. कई बार ये कीड़े घर के अंदर भी पहुंच जाते हैं और खाने-पीने की चीजों पर बैठकर गंदगी के साथ बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं.

    हालांकि, कुछ आसान उपायों की मदद से इनकी परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है. चलिए जानते हैं कैसे…ऐसी लाइट का इस्तेमाल करें उड़ने वाले कीड़े रात के समय तेज रोशनी की ओर आकर्षित होते हैं. खासकर तेज सफेद रोशनी के आसपास इनकी संख्या ज्यादा दिखाई दे सकती है. ऐसे में बालकनी, दरवाजे या गार्डन में कम UV वाली LED लाइट लगाना बेहतर विकल्प हो सकता है. इसके अलावा, बाहर की जगहों पर वॉर्म या पीली रोशनी वाली LED का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.नेचुरल रिपेलेंट आजमाएं कुछ पौधों और एसेंशियल ऑयल की तेज खुशबू कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है. लैवेंडर, पेपरमिंट, सिट्रोनेला और यूकेलिप्टस जैसे ऑयल का इस्तेमाल किया जा सकता है.

    इन्हें इस्तेमाल करने से पहले लेबल के निर्देश जरूर पढ़ें और त्वचा या पालतू जानवरों के संपर्क से बचाएं. बालकनी या गार्डन में तुलसी, रोजमेरी और लेमनग्रास जैसे पौधे लगाना भी एक आसान विकल्प है.पानी जमा न होने दें मानसून में घर के आसपास पानी जमा न होने दें. गमलों की प्लेट, बाल्टी, कूलर और पुराने डिब्बों में जमा पानी मच्छरों के लिए पनपने की जगह बन सकता है. इसलिए इन्हें नियमित रूप से खाली और साफ करते रहें.खिड़की-दरवाजों के गैप करें सील खिड़की, दरवाजे, दीवार या छत में छोटे गैप दिखाई दें तो उन्हें सील कर दें. साथ ही लाइट, खिड़की और आसपास की जगह को साफ रखें. इन आसान उपायों से मानसून में घर को साफ रखने के साथ कीड़ों की परेशानी भी कम की जा सकती है.

  • नदी में आराम कर रहा​​​​​ था बच्चा, तभी पास आ गया विशाल मगरमच्छ; आगे जो हुआ उसे देखकर हैरान रह गए लोग

    नदी में आराम कर रहा​​​​​ था बच्चा, तभी पास आ गया विशाल मगरमच्छ; आगे जो हुआ उसे देखकर हैरान रह गए लोग

    नदी में आराम कर रहा​​​​​ था बच्चा, तभी पास आ गया विशाल मगरमच्छ; आगे जो हुआ उसे देखकर हैरान रह गए लोग

    Viral Video: सोशल मीडिया पर एक हैरान करने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें एक बच्चा नदी के पानी में एक छोटे फ्लोटिंग बोर्ड पर आराम करता नजर आ रहा है। इसी दौरान एक मगरमच्छ तैरता हुआ उसके बेहद करीब पहुंच जाता है। इसके बाद बच्चे की प्रतिक्रिया देखकर लोग हैरान रह गए।

    पानी में आराम कर रहा था बच्चा, तभी पहुंचा मगरमच्छ

    वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि बच्चा नदी के पानी में एक छोटी नाव के पास बने फ्लोटिंग बोर्ड पर लेटा हुआ है। वह बिल्कुल आराम से नजर आ रहा है और आसपास का माहौल भी शांत दिखाई देता है।

    तभी पानी में हलचल होती है और एक मगरमच्छ धीरे-धीरे तैरते हुए बच्चे की ओर बढ़ने लगता है। जैसे-जैसे मगरमच्छ बच्चे के करीब आता है, यह दृश्य देखने वालों के लिए काफी डरावना हो जाता है।

    मगरमच्छ के बेहद करीब पहुंच गया बच्चा

    वीडियो के अगले हिस्से में बच्चा मगरमच्छ के साथ बेहद सहज नजर आता है। वह उसके करीब जाता हुआ दिखाई देता है और मगरमच्छ भी कुछ समय तक शांत रहता है। इसी वजह से वीडियो देखने वाले लोग हैरान रह गए।

    हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली स्थिति को देखकर इसे सुरक्षित व्यवहार नहीं माना जा सकता। मगरमच्छ जंगली और बेहद ताकतवर शिकारी होते हैं। उनका शांत दिखाई देना इस बात की गारंटी नहीं है कि वे इंसानों के लिए सुरक्षित हैं।

    सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए अलग-अलग रिएक्शन

    वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने बच्चे के आत्मविश्वास को देखकर हैरानी जताई, जबकि कई यूजर्स ने उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की।

    लोगों का कहना है कि मगरमच्छ के साथ इस तरह करीब जाना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे जंगली जानवरों से हमेशा सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है।

    वायरल वीडियो देखकर न करें ऐसी गलती

    सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो में अक्सर पूरी परिस्थिति दिखाई नहीं देती। इसलिए किसी वीडियो को देखकर उसी तरह का स्टंट या प्रयोग करना खतरनाक हो सकता है।

    खासकर बच्चों को मगरमच्छ जैसे जंगली जानवरों से दूर रखना बेहद जरूरी है। जानवर शांत नजर आए, तब भी उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आ सकता है।

     

     

     

    डिस्क्लेमर: यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और उससे जुड़ी प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। वीडियो में दिखाई देने वाली घटना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

  • नारियल तेल असली है या​​​​​ मिलावटी? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान..

    नारियल तेल असली है या​​​​​ मिलावटी? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान..

    नारियल तेल असली है या​​​​​ मिलावटी? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान..

    नारियल तेल का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है, कोई इसे खाना बनाने के लिए रखता है, तो कोई बालों और त्वचा की देखभाल के लिए. लेकिन क्या जो नारियल तेल आप इस्तेमाल कर रहे हैं, वह वाकई शुद्ध है?

    बाजार में कई बार मिलावट वाला तेल भी मिल सकता है. तो चलिए आपको कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बताते हैं जिससे आप असली और नकली नारियल तेल की पहचान कर सकते हैं.फ्रिज टेस्ट से करें जांच नारियल तेल को आप फ्रिज टेस्ट कर सकते हैं. इसके लिए थोड़ा सा तेल साफ कांच की कटोरी में डालकर कुछ घंटों के लिए फ्रिज में रखें. शुद्ध नारियल तेल ठंडे तापमान में जमने लगता है और सफेद या ठोस दिखाई देता है. हालांकि, केवल इस टेस्ट से तेल की शुद्धता तय नहीं की जा सकती,

    क्योंकि तापमान और तेल की प्रोसेसिंग का भी असर पड़ता है.रंग और बनावट पर दें ध्यान नारियल तेल सामान्य तौर पर साफ और एक समान दिखाई देता है. ठंडे मौसम में यह सफेद और ठोस हो सकता है, जबकि गर्म वातावरण में पारदर्शी या हल्का पीला नजर आ सकता है. तेल को पारदर्शी कांच के बर्तन में डालकर रोशनी में देखें. अगर इसमें असामान्य कण, गंदगी या बहुत ज्यादा अलग-अलग परतें नजर आएं, तो सावधान रहें.खुशबू से भी मिल सकता है संकेत वर्जिन या अनरिफाइंड नारियल तेल में नारियल की प्राकृतिक खुशबू होती है. थोड़ी मात्रा हथेली पर लेकर हल्का गर्म करें और इसकी गंध महसूस करें. अगर तेल से तेज केमिकल जैसी गंध, बासीपन या कोई असामान्य महक आ रही है, तो इसकी क्वालिटी पर सवाल उठ सकता है.

    वहीं, रिफाइंड नारियल तेल की खुशबू काफी हल्की हो सकती है.कागज पर डालकर देखें एक साफ सफेद कागज पर नारियल तेल की कुछ बूंदें डालकर थोड़ी देर छोड़ दें. इसके फैलने और बचे हुए अवशेष को देखें. अगर असामान्य रंग या गंदा अवशेष नजर आए, तो यह गुणवत्ता को लेकर संकेत हो सकता है. हालांकि, यह भी केवल शुरुआती घरेलू जांच है.तेल खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान नारियल तेल खरीदते समय पैकेट पर लिखे Ingredients जरूर पढ़ें. पैक की सील, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और FSSAI से जुड़ी जानकारी भी जांचें. सबसे जरूरी बात यह है कि घरेलू टेस्ट मिलावट की पक्की पुष्टि नहीं करते. अगर तेल की गंध, स्वाद या बनावट असामान्य लगे, तो खाने या त्वचा पर लगाने से बचें.

  • घर पर बनाएं कोका-कोला, डायबिटीज​​​​​ मरीज़ों के लिए भी सेफ.. जानें कैसे करें तैयार..

    घर पर बनाएं कोका-कोला, डायबिटीज​​​​​ मरीज़ों के लिए भी सेफ.. जानें कैसे करें तैयार..

    घर पर बनाएं कोका-कोला, डायबिटीज​​​​​ मरीज़ों के लिए भी सेफ.. जानें कैसे करें तैयार..

    गर्मी के मौसम लोग जहां तपिश से तप रहे होते हैं और पसीने से चू रहे होते हैं. ऐसे में वह ऐसी ड्रिंक्स की तलाश करते हैं, जो उनके शरीर तो ठंडक पहुंचा सकें. इसमें जूस, ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक जैसी ड्रिंक शामिल होती हैं. सबसे आम ड्रिंक की बात करें तो वह कोल्ड ड्रिंक होती है. घर पर मेहमान आ जाएं तो फौरन मार्केट से एक कोल्ड ड्रिंक की बोतल आ जाती है. या फिर कहीं बाहर से आप आएं तो कोल्ड ड्रिंक पीने का मन करता है.

    बेशक कोल्ड ड्रिंक ठंडक देती है, लेकिन एक बात यह भी सच है कि कोल्ड ड्रिंक हमारी सेहत के लिए फायदेमंद नहीं. दरअसल इसमें केमिकल्स होते हैं और काफी ज्यादा मात्रा में शुगर होती है, जो हमारी सेहत पर एक बड़ा हथौड़ा मारती है. खासतौर पर डायबिटीज के पेशेंट्स के लिए यह बिलकुल भी फायदे का सौदा नहीं. ऐसे में आप घर पर खुद सेफ तरीके से कोल्ड ड्रिंक बना सकते हैं.

    किन इंग्रीडिएंट्स की है जरूरत

    घर पर कोल्ड ड्रिंक बनाने के लिए आपको 1 गिलास ठंडा पानी या सोडा, 1 छोटा चम्मच कॉफी, आधा छोटा चम्मच कोको पाउडर, 1 छोटा चम्मच शहद या स्टेविया, आधा छोटा चम्मच नींबू का रस, चुटकी भर काला नमक और कुछ बर्फ के टुकड़े चाहिए होंगे.

    कैसे आएगा कोला जैसा कलर

    सबसे पहले एक गिलास में कॉफी और कोको पाउडर डालें. अब इसमें थोड़ा सा गर्म पानी मिलाकर अच्छे से घोल लें. ध्यान रखें कि मिक्चर स्मूद और हल्का गाढ़ा हो जाए. यही बेस आपके ड्रिंक को कोला जैसा रंग और गहराई देता है. अब इस तैयार मिक्सचर में शहद या स्टेविया डालें और अच्छी तरह से मिक्स करें. यह ड्रिंक को हल्की और बैलेंस्ड मिठास देता है. आप अपनी पसंद के अनुसार मिठास को एडजस्ट कर सकते हैं.

    नींबू से ड्रिंक बनेगी रिफ्रेशिंग

    इसके बाद इसमें नींबू का रस और एक चुटकी काला नमक डालें. यह स्टेप ड्रिंक के फ्लेवर को पूरी तरह बराबर करता है और इसे और ज्यादा रिफ्रेशिंग बनाता है. अब धीरे-धीरे इसमें ठंडा सोडा डालें और हल्के हाथों से मिलाएं. ध्यान रखें कि ज्यादा जोर से न चलाएं, वरना सोडा की फिज खत्म हो सकती है.

    कैसे करें इसे सर्व

    आखिर में बर्फ के टुकड़े डालें और चाहें तो नींबू स्लाइस या पुदीने की पत्तियों से गार्निश करें. आपकी टेस्टी और हेल्दी देसी कोल्ड ड्रिंक तैयार है. आप इसे फौरन सर्व करें जिससे यह फ्रेश रहे और आप पूरा टेस्ट लें सकें.

  • 15 फुट के विशाल अजगर​​​​​ के साथ खेलती दिखी छोटी बच्ची, मुंह पर किया किस! वीडियो देख लोगों की बढ़ी चिंता.

    15 फुट के विशाल अजगर​​​​​ के साथ खेलती दिखी छोटी बच्ची, मुंह पर किया किस! वीडियो देख लोगों की बढ़ी चिंता.

    15 फुट के विशाल अजगर​​​​​ के साथ खेलती दिखी छोटी बच्ची, मुंह पर किया किस! वीडियो देख लोगों की बढ़ी चिंता.

    Viral Video: सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो तेजी से चर्चा में है, जिसे देखकर लोग हैरान भी हैं और बच्ची की सुरक्षा को लेकर चिंतित भी। वायरल क्लिप में एक छोटी बच्ची एक विशालकाय अजगर के बेहद करीब नजर आ रही है। बच्ची सांप के साथ इस तरह खेलती दिखाई देती है, जैसे वह किसी खिलौने के साथ खेल रही हो।

    वीडियो में बच्ची घर के लिविंग रूम में सोफे पर बैठी दिखाई देती है। उसके सामने करीब 15 फुट लंबा अजगर नजर आता है। बच्ची कभी उसके शरीर पर लेटती है तो कभी उसके आसपास लिपटती हुई दिखाई देती है। एक जगह वह अजगर के सिर और मुंह के पास जाती हुई भी नजर आती है।

    विशाल अजगर के साथ बच्ची का खतरनाक खेल

    अजगर जहरीला सांप नहीं होता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह इंसानों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। अजगर अपने मजबूत शरीर और मांसपेशियों की मदद से शिकार को जकड़ सकता है।

    ऐसे में इतनी छोटी बच्ची का बिना किसी स्पष्ट सुरक्षा व्यवस्था के इतने बड़े सांप के बेहद करीब जाना जोखिम भरा हो सकता है। वीडियो में भले ही अजगर शांत दिखाई दे रहा हो, लेकिन जंगली या बड़े जानवरों के व्यवहार का अनुमान हमेशा पहले से नहीं लगाया जा सकता।

    किसने शेयर किया वीडियो?

    बताया जा रहा है कि इस वीडियो को अमेरिकी इन्फ्लुएंसर माइक होल्स्टन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। माइक होल्स्टन वन्यजीवों और खतरनाक जानवरों से जुड़े कंटेंट के लिए जाने जाते हैं।

    वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर होते ही तेजी से वायरल हो गया और इसे देखने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    बच्ची की सुरक्षा को लेकर चिंतित हुए लोग

    वीडियो देखने वाले कई यूजर्स ने बच्ची की सुरक्षा पर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर व्यूज और मनोरंजन के लिए बच्चों को खतरनाक जानवरों के इतने करीब ले जाना उचित नहीं है।

    कुछ लोगों ने यह भी कहा कि सांप शांत दिखाई दे रहा हो, तब भी उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आ सकता है। इसलिए बच्चों को बड़े या संभावित रूप से खतरनाक जानवरों से हमेशा सुरक्षित दूरी पर रखना जरूरी है।

    यह वीडियो भले ही सोशल मीडिया पर मनोरंजन या हैरानी का विषय बना हुआ है, लेकिन इसे देखकर ऐसे खतरनाक स्टंट को दोहराना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।

     

     

     

     

  • क्या सच में पूरा Golden​​​​​ Temple सोने का बना है? कीमत सुनकर उड़ जाएंगे होश! जानिए पूरी कहानी..

    क्या सच में पूरा Golden​​​​​ Temple सोने का बना है? कीमत सुनकर उड़ जाएंगे होश! जानिए पूरी कहानी..

    क्या सच में पूरा Golden​​​​​ Temple सोने का बना है? कीमत सुनकर उड़ जाएंगे होश! जानिए पूरी कहानी..

    भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल अमृतसर का Golden Temple अपनी खूबसूरती और आध्यात्मिक महत्व के लिए दुनियाभर में जाना जाता है. इसे श्री हरमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है. हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं. मंदिर की सुनहरी चमक देखकर अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या पूरा Golden Temple असली सोने से बना है? चलिए आपको बताते हैं इसका सही जवाब…महाराजा रणजीत सिंह ने कराई थी सोने की सजावट Golden Temple के स्वर्णीकरण में सिख साम्राज्य के संस्थापक महाराजा रणजीत सिंह की अहम भूमिका मानी जाती है. साल 1830 के आसपास उन्होंने मंदिर के प्रमुख हिस्सों को सोने से सजाने की पहल की थी. उस समय करीब 150 से 162 किलोग्राम 24 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया गया था. उस दौर में इस सोने की कीमत करीब 65 लाख रुपये बताई जाती है. खास बात यह है कि उस समय इस्तेमाल किया गया सोना 24 कैरेट था, जो सामान्य गहने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने से ज्यादा शुद्ध होता है.

    बाद में फिर चढ़ाया गया सैकड़ों किलो सोना समय के साथ मंदिर की मरम्मत और सजावट का काम भी किया गया. साल 1995 से 1999 के बीच Golden Temple के नवीनीकरण के दौरान करीब 500 किलोग्राम अतिरिक्त 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई गई. यह सोना मंदिर के गुंबद, दरवाजों, दीवारों और अंदर की छत जैसे कई हिस्सों पर लगाया गया.पूरा मंदिर सोने का है? Golden Temple की पूरी इमारत सोने से नहीं बनी है. इसमें संगमरमर और तांबे का भी इस्तेमाल हुआ है.

    सोने की परत इसकी सुंदरता और भव्यता को बढ़ाती है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार मंदिर में कुल मिलाकर करीब 662 से 750 किलोग्राम तक 24 कैरेट सोने के इस्तेमाल का अनुमान लगाया जाता है. आज के समय में इसकी कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये हो सकती है. यही सुनहरी आभा Golden Temple को दुनिया के सबसे आकर्षक और आध्यात्मिक धार्मिक स्थलों में खास पहचान देती है.

  • फल-फूल नहीं, इस मंदिर में​​​​​ देवी को चढ़ाए जाते हैं 5 पत्थर, जानें पूरी कहानी और इतिहास..

    फल-फूल नहीं, इस मंदिर में​​​​​ देवी को चढ़ाए जाते हैं 5 पत्थर, जानें पूरी कहानी और इतिहास..

    फल-फूल नहीं, इस मंदिर में​​​​​ देवी को चढ़ाए जाते हैं 5 पत्थर, जानें पूरी कहानी और इतिहास..

    छत्तीसगढ़ के मां बगदाई वनदेवी मंदिर में फल-फूल नहीं, बल्कि 5 पत्थर अर्पित कर मन्नत मांगी जाती है. सदियों पुरानी यह अनोखी परंपरा आज भी लोगों की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र है. आइए जानते हैं, यह परंपरा कैसे शुरू हुई, कथा और इतिहास क्या है?

    लोग मंदिर में क्या-क्या नहीं चढ़ाते हैं, सोने-चांदी के आभूषण, छत्र, छप्पन भोग, लेकिन क्या आपने ये देखा और सुना है केवल 5 पत्थर अर्पित करने से लोगों की मुराद पूरी हो जाती है. जी हां, छत्तीसगढ़ में के ऐसा मंदिर है, जहां ऐसी ही अनोखी परंपरा निभाई जाती है, भक्ति विधान के लिए अलबेला है. आइए जानते हैं, छत्तीसगढ़ में में यह मंदिर कहां है, किस देवी को समर्पित है और सदियों पुरानी इस परंपरा के पीछे कहानी और इतिहास क्या है, जो आज भी आस्था का एक सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है?

    मां बगदाई वनदेवी मंदिर

    छत्तीसगढ़ का यह मंदिर खमतराई के घने जंगलों में है, जो बिलासपुर जिले में स्थित है. जहां देश के बाकी मंदिरों और पूजा स्थलों पर फूल, पान, मिठाई, फल, नारियल और आभूषण आदि चढ़ाएं जाते हैं, वहीं मां बगदाई वनदेवी को समर्पित इस मंदिर में 5 पत्थर चढ़ाने की अनूठी परंपरा है, जिसे लोग वहां ‘गोटा’ और ‘कंकड़’ कहते हैं.

    साधारण नहीं हैं ‘गोटा पत्थर’

    मां बगदाई वनदेवी के मंदिर में चढ़ाए जाने वाले ये पत्थर साधारण नहीं हैं. ये पत्थर खेतों में मिलते हैं, जिसे भक्तों को विशेष ध्यान से खोजना पड़ता है. ये चिकने और गोल होते हैं, जिसे ‘गोटा’ या ‘गोल कंकड़’ कहा जाता है. मान्यता है कि वनदेवी मां बगदाई को चुने हुए ये बेहद प्रिय हैं.

    मन्नत पूरी होने पर भी चढ़ाते हैं 5 पत्थर

    मां बगदाई वनदेवी के इस मंदिर में श्रद्धालुओं के मन्नत पूरी करने की प्रक्रिया 2 चरणों में होती है. पहला यह कि पहली बार मन्नत मांगते समय भक्त मन में अपनी मनोकामना दोहराते हु 5 पत्थर और एक फूल चढ़ाते हैं. दूसरी बार, मन्नत पूरी होने पर भी श्रद्धालु आभार व्यक्त करते हुए मंदिर में माता को 5 गोटा पत्थर चढ़ाते हैं.

    कैसे शुरू हुई यह परंपरा?

    कहते हैं, प्राचीन काल में लोग जब खमतराई के घने जंगलों से गुजरते थे तो वे हिंसक वन्य पशुओं और डाकुओं से रक्षा के लिए वे वनदेवी मां की प्रार्थना करते थे. कुछ पास न होने पर वे माता को 5 पत्थर ही चढ़ा देते थे. एक दूसरी कथा एक चरवाहे की है. कहते हैं, एक चरवाहे को जंगल वनदेवी की मूर्ति मिली थी. उसके पास भोग लगाने को कुछ नहीं था. तब देवी मां ने उसे दर्शन देकर कहा कि वह कीमती वस्तुओं की नहीं सच्ची श्रद्धा और प्रेम भूखी है, वह बस 5 पत्थर ही अर्पित कर दें. कहते हैं, तभी से ये परंपरा बदस्तूर चली आ राय रही है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है

  • मुंह की बदबू से परेशान​​​​​ हैं? लौंग और दालचीनी का ये घरेलू नुस्खा आ सकता है काम..

    मुंह की बदबू से परेशान​​​​​ हैं? लौंग और दालचीनी का ये घरेलू नुस्खा आ सकता है काम..

    मुंह की बदबू से परेशान​​​​​ हैं? लौंग और दालचीनी का ये घरेलू नुस्खा आ सकता है काम..

    मुंह से आने वाली बदबू यानी बैड ब्रीदिंग ऐसी समस्या है, जो कई बार लोगों के बीच असहज महसूस करा सकती है. इससे बचने के लिए लोग च्युइंग गम, माउथ फ्रेशनर और माउथवॉश का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनका असर अक्सर कुछ समय तक ही रहता है. तो चलिए आपको बताते हैं कि मुंह से गंदी बदबू आने से कैसे बच सकते हैं और इसका कारण क्या है.मुंह से बदबू क्यों आती है?

    मुंह में मौजूद बैक्टीरिया बदबू की एक बड़ी वजह हो सकते हैं. दांतों के बीच फंसा खाना और जीभ पर जमा गंदगी बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका देती है. इसके अलावा मुंह में सूखापन भी बदबू की समस्या को बढ़ा सकता है.लौंग और दालचीनी का पानी कैसे बनाएं? इसके लिए करीब 250 मिलीलीटर पानी लें और इसमें 4 से 5 लौंग को हल्का कूटकर डालें. अब इसमें करीब 1 इंच दालचीनी का टुकड़ा डालकर पानी को लगभग 5 मिनट तक मध्यम आंच पर उबालें. इसके बाद गैस बंद करके बर्तन को ढक दें.

    पानी गुनगुना होने पर इसे छान लें.इस पानी से कैसे करें कुल्ला? गुनगुने पानी का एक घूंट मुंह में लें और इसे करीब 30 से 40 सेकंड तक पूरे मुंह में अच्छी तरह घुमाएं. इसके बाद पानी को थोड़ा गले की तरफ ले जाकर करीब 20 सेकंड तक गरारे करें और फिर थूक दें.क्यों फायदेमंद हो सकते हैं लौंग और दालचीनी? लौंग में यूजीनोल नाम का यौगिक पाया जाता है, जिसमें बैक्टीरिया के खिलाफ काम करने वाले गुण होते हैं.

    वहीं, दालचीनी में सिनेमल्डिहाइड पाया जाता है, जो भी कुछ बैक्टीरिया के खिलाफ असर दिखा सकता है. हालांकि, इसे मुंह की बदबू का स्थायी इलाज नहीं माना जाना चाहिए.इन बातों का भी रखें ध्यान मुंह की बदबू से बचने के लिए रोज जीभ की अच्छी तरह सफाई करें. दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें, क्योंकि मुंह का सूखापन बदबू बढ़ा सकता है. दांतों के बीच फंसे खाने को साफ करने के लिए फ्लॉस का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. अगर नियमित सफाई के बावजूद बदबू लंबे समय तक बनी रहती है, तो डेंटिस्ट से सलाह लेना बेहतर है.

  • एक्स गर्लफ्रेंड ने धोखे से​​​​​ हड़पे 52 लाख तो बंदे chatgpt को बनाया वकील, अदालत में पेश की ऐसी दलिल जीत लिया केस..

    एक्स गर्लफ्रेंड ने धोखे से​​​​​ हड़पे 52 लाख तो बंदे chatgpt को बनाया वकील, अदालत में पेश की ऐसी दलिल जीत लिया केस..

    एक्स गर्लफ्रेंड ने धोखे से​​​​​ हड़पे 52 लाख तो बंदे chatgpt को बनाया वकील, अदालत में पेश की ऐसी दलिल जीत लिया केस..

    अगर कोई आपसे कहे कि एक AI चैटबॉट की मदद से कोर्ट में केस जीता जा सकता है, तो शायद पहला रिएक्शन यही होगा कि ये बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात है, लेकिन ब्रिटेन में रहने वाले एक फायरफाइटर की कहानी इस सोच को चुनौती देती है. यहां बंदे ने महंगे वकीलों की जगह ChatGPT की मदद ली, खुद कोर्ट में अपनी पैरवी की और आखिरकार अपने लाखों रुपये वापस हासिल कर लिए. ये हैरान करने वाला मामला ब्रिटेन के रहने वाले 40 वर्षीय क्रेग टिटचेनर का है, जो हीथ्रो एयरपोर्ट पर फायरफाइटर के तौर पर काम करते हैं. कुछ साल पहले उनकी किस्मत ने ऐसा साथ दिया कि उन्होंने एक स्क्रैचकार्ड लॉटरी में करीब 2.58 करोड़ रुपये का जैकपॉट जीत लिया.

    अचानक मिली इस बड़ी रकम ने उनकी जिंदगी बदल दी, लेकिन आगे चलकर यही पैसा उनके लिए एक लंबे कानूनी विवाद की वजह भी बन गया. साल 2022 में क्रेग ने अपनी गर्लफ्रेंड हीदर डगलस को करीब 52 लाख रुपये दिए. हीदर पेशे से साइकियाट्रिक नर्स हैं और उन्हें निवेश और वित्तीय मामलों की अच्छी जानकारी थी. दोनों के बीच ये समझौता हुआ था कि इस रकम से प्रीमियम बांड खरीदे जाएंगे और फ्यूचर में होने वाले फायदे को दोनों बराबर बांटेंगे. उस समय दोनों के रिश्ते अच्छे थे, इसलिए क्रेग को इस फैसले पर कोई शक नहीं था, लेकिन समय के साथ दोनों का रिश्ता टूट गया.

    AI ने ऐसे की बंदे की मदद?

    ब्रेकअप के बाद जब क्रेग ने अपनी दी हुई रकम वापस मांगी, तो मामला पूरी तरह बदल गया. हीदर ने पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया. उनका कहना था कि ये रकम उन्हें गिफ्ट के तौर पर दी गई थी, इसलिए उसे वापस करने का कोई सवाल ही नहीं उठता. क्रेग के लिए ये सिचुएशन बेहद मुश्किल थी. उन्होंने कानूनी सलाह लेने की कोशिश की और कई वकीलों से कॉन्टैक्ट किया, लेकिन जब उन्हें पता चला कि केस लड़ने की फीस ही इतनी ज्यादा होगी कि वह उनके लिए भारी पड़ जाएगी, तो उनका हौसला टूटने लगा. एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने सोचा कि शायद पैसे वापस मिलना अब संभव नहीं है. इसी दौरान उनके मन में ChatGPT का इस्तेमाल करने का विचार आया. उन्होंने AI टूल से अपनी पूरी स्थिति शेयर की और कानूनी प्रक्रिया को समझने की कोशिश की.

    इसके बाद ChatGPT ने उन्हें आसान भाषा में समझाया कि कोर्ट की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है, कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी होंगे, किन फॉर्म्स को भरना होगा और बिना वकील के अदालत में अपनी बात किस तरह रखी जा सकती है. हालांकि उन्होंने ये भी माना कि AI ने उन्हें कानूनी Representative की तरह सलाह नहीं दी, बल्कि मेरे लिए चीजें आसान कर दी.

    इसी जानकारी के आधार पर उन्होंने खुद अदालत में अपनी पैरवी करने का फैसला किया. ये कदम आसान नहीं था, क्योंकि अदालत में बिना वकील के अपना पक्ष रखना जोखिम भरा माना जाता है. फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. क्रेग ने बाद में कहा कि उनके पास खोने के लिए बहुत कम बचा था. अगर वे कोशिश भी नहीं करते, तो पैसे वापस मिलने की कोई उम्मीद नहीं थी. इसलिए उन्होंने पूरी तैयारी के साथ कोर्ट में अपना पक्ष रखा.

    मामले की सुनवाई सेंट्रल लंदन काउंटी कोर्ट में हुई. कोर्ट में हीदर डगलस ने दावा किया कि क्रेग ने उन्हें यह रकम खुशी-खुशी गिफ्ट के रूप में दी थी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रिश्ते के दौरान क्रेग का व्यवहार कंट्रोल करने वाला था और वे उन्हें परेशान करते थे, लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत ने इन दावों की गहराई से जांच की. डिस्ट्रिक्ट जज शेर्लोट हार्ट ने पाया कि हीदर अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकीं.

    वो ये साबित नहीं कर पाईं कि ये पैसे सच में गिफ्ट था. इतना ही नहीं, उन्होंने अपने बैंक स्टेटमेंट जैसे अहम दस्तावेज भी अदालत में जमा नहीं किए. सभी तथ्यों और सबूतों पर विचार करने के बाद अदालत ने फैसला क्रेग के पक्ष में सुनाया और हीदर को आदेश दिया कि वह 52 लाख रुपये वापस करें. इस फैसले के बाद क्रेग ने राहत की सांस ली. उनका कहना है कि अगर उन्होंने हार मान ली होती या एआई की मदद से प्रक्रिया को समझने की कोशिश नहीं की होती, तो शायद यह मुकदमा कभी नहीं जीत पाते.

  • एक छत के नीचे 6​​​​​ सास और 14 बहुएं, परिवार में कुल 83 सदस्य; आंध्र के नागप्पा फैमिली की कहानी कर देगी हैरान.

    एक छत के नीचे 6​​​​​ सास और 14 बहुएं, परिवार में कुल 83 सदस्य; आंध्र के नागप्पा फैमिली की कहानी कर देगी हैरान.

    एक छत के नीचे 6​​​​​ सास और 14 बहुएं, परिवार में कुल 83 सदस्य; आंध्र के नागप्पा फैमिली की कहानी कर देगी हैरान.

    आज के दौर में जहां परिवार छोटे होते जा रहे हैं और नौकरी-रोजगार के चलते लोग अलग-अलग शहरों में बस रहे हैं, वहीं आंध्र प्रदेश का एक परिवार आज भी संयुक्त परिवार की पुरानी परंपरा को मजबूती से निभा रहा है. जिसने लोगों को हैरान कर दिया है. अनंतपुर जिले के कुरलापल्ली गांव का नागप्पा परिवार अपने आप में खास है. इस परिवार में 83 सदस्य और छह पीढ़ियां एक साथ रहती हैं. परिवार में छह सास, 14 बहुएं और 20 बच्चे भी हैं.

    परिवार के सदस्य चार आस-पास बने घरों में रहते हैं, लेकिन इनके बीच घरों की दीवारें रिश्तों के बीच दूरी नहीं बनातीं. रोजमर्रा की जिंदगी में परिवार खुद को एक ही इकाई मानता है. खाना एक साथ बनता है, घर का खर्च भी आपस में बांटा जाता है और घरेलू काम से लेकर खेती-बाड़ी तक की जिम्मेदारियां मिल-जुलकर संभाली जाती हैं. परिवार के बड़े सदस्य कई अहम फैसले सामूहिक रूप से लेते हैं.

    सुबह की बैठक में तय होता है दिनभर का काम

    इतने बड़े परिवार को संभालने के लिए यहां काम का बंटवारा भी व्यवस्थित तरीके से किया जाता है. परिवार के मुखिया हनुमंतरायडु ने बताया कि बुजुर्ग सदस्य हर सुबह चाय-कॉफी के दौरान बैठते हैं. इसी दौरान दिनभर के काम, खाने के मेन्यू और खेती से जुड़े कार्यों की योजना बनाई जाती है.

    टॉप न्यूज़

    परिवार के कुछ सदस्य खेतों में काम करने निकल जाते हैं, जबकि कुछ लोग घर पर रहकर खाना बनाने और दूसरे घरेलू कामों की जिम्मेदारी संभालते हैं. घर की जरूरत का सामान खरीदने की जिम्मेदारी भी परिवार के बड़े सदस्यों के पास होती है.

    एक ही रसोई में तैयार होता है खाना

    नागप्पा परिवार की सबसे खास बात इसकी साझा रसोई है. चार अलग-अलग मकानों में रहने के बावजूद परिवार के लिए भोजन एक साथ तैयार किया जाता है. परिवार की बहुएं मिलकर खाना बनाती हैं, जबकि बुजुर्ग सदस्य राशन और दूसरी जरूरी चीजों की व्यवस्था देखते हैं. परिवार की आमदनी भी साझा व्यवस्था का हिस्सा है. खेती के अलावा परिवार के पास चार बसें भी हैं, जो कल्याणदुर्गम और कर्नाटक के कुछ इलाकों के बीच चलती हैं. खेती और परिवहन से होने वाली आय को परिवार मिलकर संभालता है.

    बात बढ़े तो उसी दिन कर लेते हैं सुलह

    83 लोगों के इतने बड़े परिवार में विचारों का टकराव होना कोई असामान्य बात नहीं है. परिवार के बुजुर्ग भी मानते हैं कि कभी-कभी सदस्यों के बीच मतभेद हो जाते हैं, लेकिन कोशिश रहती है कि नाराजगी को ज्यादा देर तक न रखा जाए. दिन खत्म होने से पहले परिवार के लोग साथ बैठकर बातचीत करते हैं और आपसी विवाद को सुलझाने की कोशिश करते हैं. उनका मानना है कि सम्मान, सहयोग और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी की भावना ही परिवार को जोड़े रखने की सबसे बड़ी ताकत है. यही पारिवारिक समझ छह पीढ़ियों को आज भी एक साथ रहने की वजह बनी हुई है.

    चौथी पीढ़ी संभालती है परिवार की जिम्मेदारी

    नागप्पा परिवार की चौथी पीढ़ी के सदस्य महेश पर अब पूरे परिवार की कई अहम जिम्मेदारियां हैं. उनके मुताबिक, परिवार में एक साथ रहने की परंपरा नागप्पा के समय से चली आ रही है और अब यह छह पीढ़ियों तक पहुंच गई है. बुजुर्गों ने बाहरी कामकाज की जिम्मेदारी काफी हद तक महेश को सौंप दी है.

    महेश बताते हैं कि परिवार के लिए रोजमर्रा का राशन जुटाने से लेकर किसी सदस्य के इलाज, बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्च और किताबों की व्यवस्था तक का काम उन्हें देखना होता है. इसके अलावा वाहनों की देखरेख और बैंक से जुड़े काम भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल हैं. उनका कहना है कि इतने बड़े परिवार की जरूरतों को संभालना चुनौती जरूर है, लेकिन इसे लेकर उन्हें गर्व महसूस होता है. परिवार में उम्र और जिम्मेदारियों के स्तर पर अंतर हो सकता है, लेकिन एक-दूसरे के प्रति सम्मान और अपनापन आज भी बना हुआ है.

    खेती से लेकर बसों के कारोबार तक, आय के कई साधन

    नागप्पा परिवार की आर्थिक व्यवस्था का बड़ा हिस्सा खेती पर टिका है. करीब 120 एकड़ जमीन पर परिवार खेती करता है, जिसमें मूंगफली, टमाटर, बैंगन, तरबूज, पपीता और मिर्च जैसी फसलें उगाई जाती हैं. इसके अलावा परिवार मिलकर ‘श्री कृष्णा हनुमान ट्रेवल्स’ की पांच बसों का संचालन भी करता है.

    परिवार के पास पशुधन और खेती से जुड़े संसाधनों की भी अच्छी व्यवस्था है. इनके पास करीब 1000 भेड़ें, 70 भैंसें, तीन ट्रैक्टर, एक बोलेरो और एक आयशर ट्रक हैं. यानी परिवार की आजीविका केवल एक ही काम पर निर्भर नहीं है.

    चूल्हे पर बनता है खाना

    बड़े परिवार की रसोई में आज भी आधुनिक साधनों के साथ पारंपरिक खान-पान की झलक देखने को मिलती है. यहां मिट्टी और लकड़ी के चूल्हे पर खाना पकाने की परंपरा आज भी चली आ रही है. सुबह और शाम रागी संगटी और ज्वार की रोटियां तैयार की जाती हैं, जो परिवार के नियमित भोजन का हिस्सा हैं.

    त्योहारों और खास मौकों पर परिवार की रसोई का काम और भी बढ़ जाता है. ऐसे अवसरों पर जब पूरा परिवार एक जगह जुटता है, तो बड़ी मात्रा में खाना तैयार किया जाता है. परिवार के सदस्यों के मुताबिक, एक ही भोजन के लिए कई किलो चिकन और करीब तीन बकरे तक पकाए जाते हैं.