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  • High Protein Breakfast: जिम लवर्स​​​​​ नोट कर लें ये 4 आसान रेसिपीज, 10 मिनट में बनेगा प्रोटीन से भरपूर नाश्ता

    High Protein Breakfast: जिम लवर्स​​​​​ नोट कर लें ये 4 आसान रेसिपीज, 10 मिनट में बनेगा प्रोटीन से भरपूर नाश्ता

    High Protein Breakfast: जिम लवर्स​​​​​ नोट कर लें ये 4 आसान रेसिपीज, 10 मिनट में बनेगा प्रोटीन से भरपूर नाश्ता

    जिम करने वाले लोगों की सबसे बड़ी समस्या होती है कि ऑफिस जाते वक्त क्या खाकर जाएं, जिसमें प्रोटीन भी बहुत हो और टेस्टी भी. अगर आप जिम जाते हैं या दिन की शुरुआत प्रोटीन वाले नाश्ते से करना चाहते हैं, तो हर दिन कुछ अलग और आसान रेसिपी घर पर ट्राई कर सकते हैं. ऐसी रेसिपी के लिए घंटों किचन में खड़े रहने की जरूरत नहीं है. बल्कि कुछ देर में ये बनकर तैयार हो जाएगी. यहां चार झटपट बनने वाले नाश्ते हैं, जिन्हें आप अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं.

    1. मूंग दाल चीला बनाने का सामान:- भिगोई हुई मूंग दाल, प्याज, हरी मिर्च, धनिया, नमक और थोड़ा तेल.

    बनाने का तरीका: मूंग दाल को पीसकर बैटर तैयार कर लें. इसमें प्याज, हरी मिर्च, धनिया और नमक मिला दें. गर्म तवे पर थोड़ा तेल लगाकर बैटर फैलाएं और दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंक लें. इसे दही के साथ खा सकते हैं.

    2. पनीर एग भुर्जी टोस्ट बनाने का सामान:- पनीर, अंडे, प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, नमक और दो ब्रेड स्लाइस.

    बनाने का तरीका: पैन में थोड़ा तेल डालकर प्याज और टमाटर भूनें. अब अंडे फोड़कर डालें और अच्छी तरह चलाएं. इसमें क्रम्बल किया हुआ पनीर और नमक डालकर कुछ मिनट पकाएं. तैयार भुर्जी को ब्रेड पर रखकर गर्मागर्म खाएं.

    3. बेसन पनीर चीला बनाने का सामान:- बेसन, पनीर, प्याज, टमाटर, धनिया, हरी मिर्च और नमक.

    बनाने का तरीका: बेसन में पानी डालकर घोल तैयार करें. इसमें कटी हुई सब्जियां और नमक मिला दें. तवे पर बैटर फैलाएं और ऊपर से पनीर डालें. दोनों तरफ से सेंकने के बाद चीला तैयार है.

    4. दही ओट्स बाउल बनाने का सामान:- ओट्स, गाढ़ा दही, भुने चने, मूंगफली, केला या सेब और थोड़े बीज.

    बनाने का तरीका: एक बाउल में ओट्स और दही डालकर मिला लें. ऊपर से भुने चने, मूंगफली, फल और बीज डालें. इसे कुछ मिनट रखने के बाद खा सकते हैं. सुबह जल्दी हो तो यह सबसे आसान विकल्पों में से एक है.

  • प्रकृति का अद्भुत करिश्मा है​​​​​ ये हेवन लेक, जहां ज्वालामुखी, बर्फ और रहस्य एक साथ नजर आते हैं.

    प्रकृति का अद्भुत करिश्मा है​​​​​ ये हेवन लेक, जहां ज्वालामुखी, बर्फ और रहस्य एक साथ नजर आते हैं.

    प्रकृति का अद्भुत करिश्मा है​​​​​ ये हेवन लेक, जहां ज्वालामुखी, बर्फ और रहस्य एक साथ नजर आते हैं.

    दुनिया में ऐसी कई जगहें हैं जो अपनी खूबसूरती के साथ-साथ रहस्यों के लिए भी मशहूर हैं. इन्हीं में से एक है हेवन लेक, जिसे चीन में तियांची कहा जाता है. यह झील चीन और उत्तर कोरिया की सीमा पर स्थित है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ वैज्ञानिकों और पर्यटकों, दोनों को अट्रैक्ट करती है. खास बात यह है कि यह कोई साधारण झील नहीं, बल्कि एक विशाल ज्वालामुखी के मुहाने पर बनी क्रेटर लेक है. हेवन लेक माउंट चांगबाईशान की चोटी पर करीब 7,200 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है. यह ज्वालामुखी लाखों साल पहले हुए कई बड़े विस्फोटों के बाद बना था. यूनेस्को के अनुसार, यह उत्तर-पूर्व एशिया की सबसे ऊंची और सबसे बड़ी क्रेटर लेक मानी जाती है. हाल ही में मार्च में प्रकाशित एक साइंटिफिक रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि यह चीन की सबसे गहरी झील है. इसकी अधिकतम गहराई करीब 1,224 फीट दर्ज की गई है, जबकि इसका टोटल एरिया लगभग 9.2 वर्ग किलोमीटर है.

    इस झील की सबसे खास बात इसका प्राकृतिक नजारा है. चारों ओर फैली 16 पहाड़ियां इसे एक प्राकृतिक कटोरे जैसा रूप देती हैं. साल के अलग-अलग मौसमों में इसका रंग और आसपास का सीन बदलता रहता है. सर्दियों में यह इलाका बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है, जबकि गर्मियों में यहां हरियाली और साफ नीला पानी देखने वालों का मन मोह लेता है. हेवन लेक जिस जगह पर बनी है, वह एक काल्डेरा है. काल्डेरा उस बड़े गड्ढे को कहा जाता है जो किसी ज्वालामुखी के भीषण विस्फोट के बाद बनता है. माना जाता है कि माउंट चांगबाईशान में सबसे विनाशकारी विस्फोट वर्ष 946 ईस्वी में हुआ था. इस घटना को “मिलेनियम इरप्शन” के नाम से जाना जाता है और इसे आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े ज्वालामुखीय विस्फोटों में गिना जाता है. इस विस्फोट ने पूरे इलाके की geographical बनावट बदल दी थी.

    प्राकृतिक बनावट सिर्फ नहीं है कारण

    वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे भी पहले, करीब 70 हजार से 40 हजार साल पहले हुए एक प्राचीन विस्फोट के बाद इस पर्वत की चोटी पर पानी जमा होना शुरू हुआ था. धीरे-धीरे यहां एक विशाल झील का निर्माण हुआ. समय के साथ कई बार इसका जलस्तर घटा और बढ़ा. बारिश, बर्फ के पिघलने और अन्य प्राकृतिक प्रक्रियाओं ने इस झील को लगातार नया रूप दिया. इस क्षेत्र के नीचे आज भी एक एक्टिव जियोथर्मल सिस्टम मौजूद है. यानी धरती के भीतर गर्मी और दबाव लगातार काम कर रहे हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, फॉल्ट लाइनों के जरिए भूमिगत पानी ऊपर की ओर आता रहता है, जिससे झील के जलस्तर पर भी असर पड़ता है. यही वजह है कि यह इलाका भूवैज्ञानिकों के लिए शोध का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है.

    हेवन लेक सिर्फ अपनी प्राकृतिक बनावट के कारण ही नहीं, बल्कि इससे जुड़ी रहस्यमयी कहानियों के कारण भी चर्चा में रहती है. साल 2000 के शुरुआती वर्षों में इस झील को लेकर कई चौंकाने वाले दावे सामने आए थे. कई लोगों ने दावा किया कि उन्होंने झील के भीतर एक विशाल और अजीब जीव देखा है. कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि उस जीव का सिर घोड़े जैसा दिखाई देता था और उसका शरीर पानी में तेजी से तैरता था. इन दावों ने दुनिया भर के लोगों का ध्यान खींचा और झील को रहस्यमयी जगहों की सूची में शामिल कर दिया.

    हालांकि वैज्ञानिक इन दावों से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि इतनी ऊंचाई पर स्थित और बेहद ठंडे पानी वाली झील में किसी बड़े जीव का लंबे समय तक जीवित रह पाना लगभग असंभव है. अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो इन रहस्यमयी जीवों की मौजूदगी की पुष्टि करता हो. इसलिए ज्यादातर विशेषज्ञ इन्हें लोककथाओं या लोगों की कल्पना का हिस्सा मानते हैं. यूनेस्को का कहना है कि माउंट चांगबाईशान दुनिया के सबसे अच्छी तरह सुरक्षित स्ट्रैटोवोल्केनो में से एक है. यहां ज्वालामुखी के विकास और उसके अलग-अलग विस्फोटों के स्पष्ट प्रमाण आज भी मौजूद हैं. इसी वजह से इसे कई बार “ओपन एयर क्लासरूम” भी कहा जाता है. यहां आने वाले वैज्ञानिक धरती के इतिहास और ज्वालामुखीय गतिविधियों को समझने के लिए लगातार स्टडी करते रहते हैं.

    इस पर्वत का महत्व सिर्फ विज्ञान तक सीमित नहीं है. उत्तर कोरिया में इसे माउंट पेक्टू कहा जाता है, जिसका अर्थ है “सफेद चोटी वाला पहाड़”. वहीं चीन में इसे चांगबाईशान कहा जाता है, जिसका मतलब है “हमेशा सफेद रहने वाला पहाड़”. दोनों देशों की संस्कृति और इतिहास में इस पर्वत का खास स्थान है. यही वजह है कि अतीत में इस इलाके को लेकर चीन, उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच कई बार मतभेद भी सामने आए.

  • इंसानों ने बनाई दुनिया की​​​​​ सबसे महंगी चीज, अब पृथ्वी पर नहीं है मौजूद; कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान.

    इंसानों ने बनाई दुनिया की​​​​​ सबसे महंगी चीज, अब पृथ्वी पर नहीं है मौजूद; कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान.

    इंसानों ने बनाई दुनिया की​​​​​ सबसे महंगी चीज, अब पृथ्वी पर नहीं है मौजूद; कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान.

    Amazing Facts: इंसानों ने समय के साथ ऐसी कई विशाल और अत्याधुनिक चीजें बनाई हैं, जिनकी कीमत सुनकर किसी को भी हैरानी हो सकती है। इनमें से एक है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS), जिसे अंतरिक्ष में इंसानों की सबसे बड़ी और महंगी परियोजनाओं में गिना जाता है।

    इसे कई देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों ने मिलकर तैयार किया था। पृथ्वी की कक्षा में स्थापित यह स्टेशन कई वर्षों तक अंतरिक्ष में वैज्ञानिक शोध और प्रयोगों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

    कितना महंगा है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन?

    इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को तैयार करने में अमेरिका की NASA के साथ रूस, यूरोप, जापान और कनाडा की अंतरिक्ष एजेंसियों का भी योगदान रहा। अलग-अलग रिपोर्टों में इसकी कुल लागत का अनुमान अलग-अलग बताया गया है, लेकिन इसे आमतौर पर करीब 150 अरब डॉलर की लागत वाली इंसानों की सबसे महंगी परियोजनाओं में शामिल किया जाता है।

    इस विशाल स्टेशन को एक साथ अंतरिक्ष में नहीं भेजा गया था। इसके अलग-अलग हिस्सों को कई मिशनों के जरिए पृथ्वी से अंतरिक्ष तक पहुंचाया गया और फिर कक्षा में जोड़कर ISS का निर्माण किया गया।

    अंतरिक्ष में बना था इंसानों का घर

    ISS पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित एक तरह की अंतरिक्ष प्रयोगशाला और रहने की जगह थी। यहां अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक रहकर अलग-अलग वैज्ञानिक प्रयोग करते रहे।

    माइक्रोग्रैविटी यानी बेहद कम गुरुत्वाकर्षण वाले वातावरण में किए गए प्रयोगों से विज्ञान, चिकित्सा, जीव विज्ञान और अंतरिक्ष तकनीक से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने में मदद मिली।

    क्या अब ISS पृथ्वी पर नहीं है?

    इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन अभी भी अंतरिक्ष में मौजूद है, इसलिए इसे “आज पृथ्वी पर मौजूद नहीं है” कहना थोड़ा भ्रामक है। यह पृथ्वी की कक्षा में घूम रहा है और पृथ्वी की सतह पर मौजूद नहीं है।

    ISS को भविष्य में रिटायर करने और नियंत्रित तरीके से कक्षा से हटाने की योजना बनाई गई है। इसके बाद इसका बड़ा हिस्सा पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय नष्ट हो जाएगा, जबकि बचा हुआ मलबा समुद्र के एक निर्धारित क्षेत्र में गिराने की योजना है।

    क्यों खास है ISS?

    इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन केवल एक अंतरिक्ष स्टेशन नहीं है, बल्कि कई देशों के सहयोग का बड़ा उदाहरण भी है। अलग-अलग देशों के वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री यहां मिलकर शोध करते रहे हैं।

    इसकी विशाल लागत, जटिल निर्माण प्रक्रिया और अंतरिक्ष में लंबे समय तक संचालन की वजह से ISS को मानव इतिहास की सबसे महंगी और महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक परियोजनाओं में गिना जाता है।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध वैज्ञानिक और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की लागत के आंकड़े अलग-अलग स्रोतों में अलग हो सकते हैं।

  • Colgate और Eno से फेशियल​​​​​ का वायरल ट्रेंड, चेहरे पर लगाने से पहले जान लें कितना सुरक्षित है ये तरीका.

    Colgate और Eno से फेशियल​​​​​ का वायरल ट्रेंड, चेहरे पर लगाने से पहले जान लें कितना सुरक्षित है ये तरीका.

    Colgate और Eno से फेशियल​​​​​ का वायरल ट्रेंड, चेहरे पर लगाने से पहले जान लें कितना सुरक्षित है ये तरीका.

    Skin Care Tips: सोशल मीडिया पर इन दिनों Colgate और Eno को मिलाकर चेहरे पर लगाने का एक अजीबोगरीब ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस मिश्रण से चेहरे की डलनेस, पिंपल्स और ब्लैकहेड्स कम हो जाते हैं और स्किन पर तुरंत ग्लो आने लगता है। कुछ पोस्ट में इसे चेहरे के पोर्स को छोटा या बंद करने वाला नुस्खा भी बताया जा रहा है।

    लेकिन सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की त्वचा में तुरंत बदलाव दिखाई देना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह तरीका सुरक्षित या असरदार है। चेहरे की त्वचा पर किसी भी घरेलू या वायरल नुस्खे को आजमाने से पहले उसके संभावित नुकसान को समझना जरूरी है।

    Colgate दांतों के लिए है, चेहरे के लिए नहीं

    टूथपेस्ट का इस्तेमाल दांतों की सफाई और ओरल हाइजीन के लिए किया जाता है। इसमें ऐसे पदार्थ हो सकते हैं जो दांतों से प्लाक और दाग हटाने में मदद करते हैं। इनमें एब्रेसिव, डिटर्जेंट और फ्लेवरिंग एजेंट जैसे तत्व शामिल हो सकते हैं।

    यही वजह है कि टूथपेस्ट को चेहरे की त्वचा के लिए तैयार नहीं किया जाता। इसे चेहरे पर लगाने से कुछ लोगों को जलन, लालिमा, खुजली या त्वचा में इरिटेशन की समस्या हो सकती है।

    टूथपेस्ट लगाने के बाद चेहरा कुछ समय के लिए साफ या चमकदार नजर आ सकता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि टूथपेस्ट स्किन के लिए फायदेमंद है।

    Eno भी स्किन केयर प्रोडक्ट नहीं है

    Eno का इस्तेमाल आमतौर पर एसिडिटी, सीने में जलन और अपच जैसी समस्याओं में राहत के लिए किया जाता है। इसमें सोडियम बाइकार्बोनेट जैसे तत्व होते हैं, जो पेट के अतिरिक्त एसिड को न्यूट्रलाइज करने में मदद करते हैं।

    लेकिन पेट की एसिडिटी के लिए बनाया गया प्रोडक्ट चेहरे पर लगाने के लिए नहीं होता। इसे त्वचा पर इस्तेमाल करने से स्किन में जलन या रूखापन जैसी परेशानी हो सकती है। इसके अलावा त्वचा का प्राकृतिक pH बैलेंस भी प्रभावित हो सकता है।

    क्या Colgate और Eno से Open Pores हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे?

    चेहरे के पोर्स त्वचा की सामान्य संरचना का हिस्सा हैं। उन्हें हमेशा के लिए पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता। पोर्स ज्यादा दिखाई देने के पीछे जेनेटिक्स, उम्र, त्वचा में अधिक तेल का उत्पादन, धूप से होने वाला नुकसान और स्किन केयर रूटीन जैसे कई कारण हो सकते हैं।

    ऑयली स्किन वाले लोगों में पोर्स अक्सर अधिक नजर आ सकते हैं। सही स्किन केयर रूटीन से उनकी appearance को कम किया जा सकता है, लेकिन किसी घरेलू नुस्खे से उन्हें हमेशा के लिए गायब करना संभव नहीं है।

    वायरल पोस्ट देखकर चेहरे पर न करें ऐसे एक्सपेरिमेंट

    सोशल मीडिया पर वायरल किसी पोस्ट को देखकर सीधे अपने चेहरे पर प्रयोग करना नुकसानदायक हो सकता है। Colgate और Eno को मिलाकर लगाने से पोर्स बंद होते हैं या चेहरे पर लंबे समय तक ग्लो आता है, इसका कोई भरोसेमंद वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

    उल्टा, ऐसे प्रयोग से कुछ लोगों की त्वचा पर लालिमा, जलन, खुजली, रूखापन या संवेदनशीलता बढ़ सकती है। खासकर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को ऐसे वायरल नुस्खों से बचना चाहिए।

    चेहरे की समस्या के लिए अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार बनाए गए स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना बेहतर है। अगर पिंपल्स, ब्लैकहेड्स, जलन या अन्य त्वचा संबंधी समस्या लगातार बनी हुई है, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। त्वचा पर किसी भी नए प्रोडक्ट या घरेलू नुस्खे का इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है। किसी वायरल पोस्ट में दिखने वाला परिणाम हर व्यक्ति की त्वचा पर समान नहीं हो सकता।

  • मौत के 10 घंटे बाद​​​​​ भी जिंदा रहती हैं आंखें? वैज्ञानिकों का हैरान करने वाला दावा!

    मौत के 10 घंटे बाद​​​​​ भी जिंदा रहती हैं आंखें? वैज्ञानिकों का हैरान करने वाला दावा!

    मौत के 10 घंटे बाद​​​​​ भी जिंदा रहती हैं आंखें? वैज्ञानिकों का हैरान करने वाला दावा!

    क्या कोई इंसान मरने के बाद भी देख सकता है या उसकी आंखें मौत के कई घंटों बाद भी रोशनी को महसूस कर सकती हैं? सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने एक ऐसा हैरान करने वाला दावा किया है जिसने मेडिकल साइंस की दुनिया में हलचल मचा दी है. एक नए रिसर्च में सामने आया है कि इंसान की मौत के 10 घंटे बाद तक भी उसकी आंखें रोशनी के प्रति प्रतिक्रिया दे सकती हैं. आइए जानते हैं कि वैज्ञानिकों ने यह करिश्मा कैसे किया और इससे अंधापन दूर करने में कैसे मदद मिलेगी.

    मरने के बाद आंखों में कैसे लौटी जान?

    हमारी आंख के पिछले हिस्से में रेटिना (Retina) नाम की एक परत होती है. इसका काम रोशनी को पकड़ना और उसे बिजली के सिग्नलों में बदलकर हमारे दिमाग तक पहुंचाना है, जिससे हम देख पाते हैं. आमतौर पर मौत होते ही शरीर में खून का बहाव रुक जाता है, जिससे रेटिना को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाती है और वो तुरंत काम करना बंद कर देती है.

    लेकिन सेंटर फॉर जीनोमिक रेगुलेशन (CRG) के वैज्ञानिकों ने एक कमाल की तरकीब निकाली. उन्होंने लैब में एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जो बिल्कुल हमारे शरीर के ब्लड सर्कुलेशन की तरह काम करता है. इस सिस्टम के जरिए उन्होंने डोनेट की गई आंखों के रेटिना तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व पहुंचाए. नतीजा यह हुआ कि मौत के 10 घंटे बाद भी रेटिना ने रोशनी की चमक पर रिस्पॉन्स देना शुरू कर दिया.

    तो क्या मरने के बाद इंसान देख सकता है?

    इस खोज का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि इंसान मरने के बाद दोबारा देखने लगेगा या उसकी आंखों की रोशनी वापस आ जाएगी. वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह रेटिना शरीर से बाहर एक मशीन के सहारे काम कर रही थी. चूंकि यह आंख दिमाग से जुड़ी नहीं थी, इसलिए कोई भी इंसान सचेत होकर कुछ देख नहीं सकता. यह सिर्फ एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जहां कोशिकाएं जिंदा रहीं.

    अंधापन दूर करने में मिलेगी बड़ी मदद

    भले ही इससे मरे हुए इंसान को रोशनी न मिले, लेकिन यह खोज उन लाखों लोगों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है जो आंखों की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं.

    24 घंटे तक सुरक्षित रहेगी रेटिना

    वैज्ञानिकों ने पाया कि इस तकनीक से रेटिना की बनावट को 24 घंटे तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इससे डॉक्टरों को प्रयोगशाला में इंसानी रेटिना पर रिसर्च करने का लंबा समय मिल जाएगा.

    नई दवाओं का टेस्ट आसान

    अब तक वैज्ञानिक आंखों की दवाओं का टेस्ट जानवरों पर करते थे, लेकिन अब वे सीधे इंसानी रेटिना पर नई दवाओं और इलाजों का असर देख सकेंगे.

    गंभीर बीमारियों का इलाज

    इससे बढ़ती उम्र में धुंधला दिखने (Macular Degeneration) और डायबिटीज के कारण आंखें खराब होने जैसी लाइलाज बीमारियों का तोड़ खोजने में मदद मिलेगी.

    क्या मुमकिन है आंखों का ट्रांसप्लांट?

    वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज भविष्य में विजन रीस्टोरेशन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है. हालांकि, आंखों को पूरी तरह से ट्रांसप्लांट करना और उसे दिमाग की नसों से जोड़ना अभी भी एक बहुत बड़ी चुनौती है. फिर भी इस रिसर्च ने दुनिया भर के डॉक्टरों और आंखों की रोशनी खो चुके करोड़ों लोगों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगा दी है.

  • धरती की सबसे सुनसान जगह,​​​​​ जहां इंसानों का पहुंचना बेहद मुश्किल; ‘सैटेलाइट्स का कब्रिस्तान’ भी है ये जगह.

    धरती की सबसे सुनसान जगह,​​​​​ जहां इंसानों का पहुंचना बेहद मुश्किल; ‘सैटेलाइट्स का कब्रिस्तान’ भी है ये जगह.

    धरती की सबसे सुनसान जगह,​​​​​ जहां इंसानों का पहुंचना बेहद मुश्किल; ‘सैटेलाइट्स का कब्रिस्तान’ भी है ये जगह.

    Amazing Facts: धरती पर कई ऐसी जगहें हैं, जहां पहुंचना इंसानों के लिए बेहद मुश्किल है। इन्हीं में से एक है प्वाइंट निमो (Point Nemo), जिसे समुद्र में मौजूद सबसे दूरस्थ स्थानों में गिना जाता है। यह जगह इतनी सुनसान है कि इसके आसपास सैकड़ों-हजारों किलोमीटर तक कोई बड़ा आबादी वाला इलाका नहीं मिलता।

    प्वाइंट निमो दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित है और इसे Oceanic Pole of Inaccessibility यानी समुद्र का वह स्थान माना जाता है, जो किसी भी जमीन से सबसे अधिक दूरी पर है।

    जमीन से 2,000 किलोमीटर से ज्यादा दूर

    प्वाइंट निमो के आसपास सबसे नजदीकी जमीन भी करीब 2,688 किलोमीटर दूर है। यानी इस जगह के आसपास समुद्र के विशाल क्षेत्र में कोई महाद्वीप या बड़ा द्वीप नहीं है।

    इसकी बेहद अलग भौगोलिक स्थिति की वजह से इसे धरती की सबसे सुनसान जगहों में गिना जाता है। यहां सामान्य परिस्थितियों में इंसानों की मौजूदगी भी बेहद कम होती है।

    अंतरिक्ष से जुड़ा है खास कनेक्शन

    प्वाइंट निमो की एक और खास बात इसे बेहद दिलचस्प बनाती है। यह क्षेत्र अंतरिक्ष में घूमने वाली कुछ वस्तुओं के लिए एक तरह का नियंत्रित ‘स्पेसक्राफ्ट कब्रिस्तान’ बन चुका है।

    जब कुछ पुराने अंतरिक्ष यान या सैटेलाइट दोबारा इस्तेमाल के लायक नहीं रहते, तो उन्हें नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में वापस लाया जाता है। ऐसे अंतरिक्ष यानों के बचे हुए हिस्सों को समुद्र के बेहद दूरस्थ क्षेत्र में गिराने की योजना बनाई जाती है।

    इसी वजह से प्वाइंट निमो के आसपास का क्षेत्र आम बोलचाल में ‘स्पेसक्राफ्ट ग्रेवयार्ड’ यानी अंतरिक्ष यानों का कब्रिस्तान भी कहा जाता है।

    कभी-कभी इंसान यहां से भी ज्यादा करीब होते हैं अंतरिक्ष में

    प्वाइंट निमो की सबसे रोचक बात यह है कि कुछ परिस्थितियों में पृथ्वी की सतह पर मौजूद किसी इंसान की तुलना में अंतरिक्ष में मौजूद अंतरिक्ष यात्री इस जगह के ज्यादा करीब हो सकते हैं।

    जब इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) इस क्षेत्र के ऊपर से गुजरता है, तो वहां मौजूद अंतरिक्ष यात्री प्वाइंट निमो से जमीन पर मौजूद किसी व्यक्ति की तुलना में कम दूरी पर हो सकते हैं। यही वजह है कि यह जगह विज्ञान और अंतरिक्ष की दुनिया में खास दिलचस्पी रखती है।

    यहां पहुंचना इतना मुश्किल क्यों है?

    प्वाइंट निमो किसी शहर या पर्यटन स्थल की तरह कोई स्थायी आबादी वाला स्थान नहीं है। यह खुले समुद्र में स्थित एक भौगोलिक बिंदु है। चारों ओर विशाल समुद्र और आसपास जमीन का बेहद दूर होना इसे दुनिया के सबसे अलग-थलग स्थानों में शामिल करता है।

    यही कारण है कि प्वाइंट निमो को पृथ्वी के सबसे रहस्यमयी और सुनसान स्थानों में गिना जाता है। यह जगह दिखाती है कि हमारी धरती पर आज भी ऐसे विशाल क्षेत्र मौजूद हैं, जहां इंसानों की पहुंच बेहद सीमित है।

  • शोरूम में घुसा चोर, 4​​​​​ घंटे तक नहाया-कॉफी पी और डांस किया; जाते-जाते 4.71 लाख की KTM बाइक ले उड़ा.

    शोरूम में घुसा चोर, 4​​​​​ घंटे तक नहाया-कॉफी पी और डांस किया; जाते-जाते 4.71 लाख की KTM बाइक ले उड़ा.

    शोरूम में घुसा चोर, 4​​​​​ घंटे तक नहाया-कॉफी पी और डांस किया; जाते-जाते 4.71 लाख की KTM बाइक ले उड़ा.

    Viral Crime Story: उत्तर प्रदेश के वाराणसी से चोरी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है। यहां एक चोर बाइक शोरूम में चोरी करने के इरादे से दाखिल हुआ, लेकिन चोरी करने से पहले उसने करीब साढ़े चार घंटे तक शोरूम के अंदर आराम से वक्त बिताया।

    इस दौरान उसने कॉफी बनाई और पी, शोरूम में ही नहाया, अपने कपड़े धोकर सुखाए और गाने पर डांस भी किया। इसके बाद वह शोरूम से करीब 4.71 लाख रुपये कीमत की KTM बाइक लेकर फरार हो गया।

    शटर काटकर शोरूम में घुसा था चोर

    जानकारी के मुताबिक, यह मामला वाराणसी के मंडुआडीह थाना क्षेत्र का है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने शोरूम का शटर काटकर अंदर प्रवेश किया था। शोरूम में दाखिल होने के बाद उसने जल्दबाजी में चोरी करने के बजाय काफी समय वहीं बिताया।

    सीसीटीवी फुटेज में उसकी कई गतिविधियां कैद हुई हैं। बताया जा रहा है कि उसने शोरूम के अंदर कॉफी बनाई और आराम से पी। इसके बाद उसने नहाया और अपने कपड़े सुखाए।

    ‘लुंगी डांस’ पर करने लगा डांस

    चोर की हरकतें यहीं नहीं रुकीं। शोरूम के अंदर वह बॉलीवुड के मशहूर गाने ‘लुंगी डांस’ पर डांस करता हुआ भी नजर आया। करीब साढ़े चार घंटे तक शोरूम में रहने के बाद उसने आखिरकार वहां से बाइक ले जाने का फैसला किया।

    आरोपी शोरूम के मैनेजर की करीब 4.71 लाख रुपये कीमत वाली KTM बाइक लेकर वहां से फरार हो गया। घटना सामने आने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस ने दर्ज की FIR

    घटना को लेकर वाराणसी पुलिस ने भी जानकारी दी है। पुलिस के मुताबिक, मंडुआडीह थाना क्षेत्र में संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच की जा रही है।

    पुलिस आरोपी की पहचान करने और उसे पकड़ने के लिए उपलब्ध सुरागों की जांच कर रही है। चोरी की इस घटना में आरोपी का शोरूम के अंदर इतने लंबे समय तक रहना और चोरी से पहले इस तरह की गतिविधियां करना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट और पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। मामले की जांच जारी है और पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी।

  • चाणक्य नीति से ढूंढे गए​​​​​ सक्सेस के ये 5 फॉर्मूले, केवल स्टूडेंट नहीं आएंगे आपके भी काम

    चाणक्य नीति से ढूंढे गए​​​​​ सक्सेस के ये 5 फॉर्मूले, केवल स्टूडेंट नहीं आएंगे आपके भी काम

    चाणक्य नीति से ढूंढे गए​​​​​ सक्सेस के ये 5 फॉर्मूले, केवल स्टूडेंट नहीं आएंगे आपके भी काम

    दिन-रात कर पूरी मेहनत झोंक देने के बाद कुछ लोग सफलता की दहलीज पर रुक जाते हैं. यदि आप भी उन लोगों में हैं, तो आपको आचार्य चाणक्य की नीतियों में से ढूंढे गए ये 5 खास बातें जरूर समझनी चाहिए, जो स्टूडेंट के साथ-साथ सबके लिए उपयोगी है. आपको बता दें कि आचार्य चाणक्य भारतीय इतिहास की वो शख्सियत हैं, जिसने लगभग 2300 साल पहले अपनी बुद्धि के बल पर एक शक्तिशाली साम्राज्य का तख्तापलट दिया और एक आम बालक को अखंड भारतवर्ष का सम्राट बना दिया. कहते हैं, उन्होंने सफलता के उन गूढ़ रहस्यों को डिकोड कर लिया था, जो के मॉडर्न एज में उतने ही कारगर हैं। आइए जानते हैं, क्या हैं सफलता के ये सूत्र?

    योजनाओं को गुप्त रखें

    आचार्य चाणक्य के अनुसार, आप अगला कदम क्या लेने जा रहे हैं, इस प्रकार की महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा किसी के सामने न करें. जब तक उद्देश्य की प्राप्ति न हो जाए, लक्ष्य न मिल जाए यानी काम बन जानें तक अपनी योजनाओं का खुलासा न करें, क्योंकि कई बार लोग आपकी सफलता से अधिक विफलता पर नजर रखते हैं.

    दूसरों की गलतियों से सीखें

    यह जीवन बहुत लंबा और बड़ा नहीं है. खुद एक्सपेरिमेंट करके के गलती करने पर और उसमें सीखने में बहुत टाइम बर्बाद होता है. आचार्य चाणक्य कहते हैं कि बुद्धिमान और समझदार वही है, जो दूसरों नाकामियों और गलतियों से सीख और सबक लेकर काम करता है और खुद वैसी गलतियां नहीं करता है.

    काम के रिजल्ट पर फोकस

    व्यावहारिक दुनिया में, चाहे वह पढ़ाई हो या कॉरपोरेट लाइफ, यहां कोरी बातों और वादों से काम नहीं होता है, इससे पहचान नहीं बनती है. आचार्य चाणक्य कहते हैं कि इंसान की असली पहचान उसके असल काम और उसके प्रत्यक्ष रिजल्ट यानी परिणाम से बनती है। इसलिए हमेशा काम के रिजल्ट पर फोकस रखें.

    सीखना बंद न करें

    आचार्य चाणक्य कहते है कि ज्ञान और अनुभव का कोई विकल्प नहीं है. यह सबसे बड़ी पूंजी और ताकत है। किसी दूसरे का ज्ञान हमेशा आपके काम आए ये जरूरी नहीं है. वे कहते हैं, कि किसी भी विद्यार्थी (स्टूडेंट) और मनुष्य को सीखना बंद नहीं करना चाहिए. यह देखा गया है कि जो व्यक्ति सीखना छोड़ देता है, उसकी ग्रोथ वहीं रुक जाती है.

    डिसिप्लिन और समय की कीमत

    डिसिप्लिन एक मौलिक गुण है, लेकिन यह साधा जाता है, जो एक कठिन काम है. वहीं, समय के अवसर की तरह है, जो एक बार आता है, तो दुबारा कब आएगा पता नहीं. इस लिए समय का सम्मान करना जरूरी है, वरना सफलता नहीं मिलती है. चाणक्य नीति के अनुसार, हर काम को उसके तय समय पर पूरा करना चाहिए, क्योंकि आज के काम को कल पर टालना असफलता की पहली सीढी है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है

  • दुनिया का अनोखा द्वीप, जहां​​​​​ हर 6 महीने में बदलता है देश का प्रशासन; जानिए क्या है इसकी पूरी कहानी

    दुनिया का अनोखा द्वीप, जहां​​​​​ हर 6 महीने में बदलता है देश का प्रशासन; जानिए क्या है इसकी पूरी कहानी

    दुनिया का अनोखा द्वीप, जहां​​​​​ हर 6 महीने में बदलता है देश का प्रशासन; जानिए क्या है इसकी पूरी कहानी

    दुनिया में सीमा विवाद को लेकर कई देशों के बीच तनाव और संघर्ष की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं. भारत-पाकिस्तान समेत कई देशों के बीच जमीन और सीमाओं को लेकर लंबे समय से विवाद चले आ रहे हैं. लेकिन दुनिया में एक ऐसा छोटा सा द्वीप भी है, जिसे लेकर दो देशों के बीच कोई झगड़ा नहीं है. उल्टा, दोनों देश तय व्यवस्था के तहत हर छह महीने में बारी-बारी से इसका नियंत्रण एक-दूसरे को सौंपते हैं. यह अनोखा द्वीप फीजंट आइलैंड (Pheasant Island) है, जो फ्रांस और स्पेन के बीच स्थित है. साल के छह महीने यह फ्रांस के प्रशासन में रहता है और अगले छह महीने स्पेन इसकी जिम्मेदारी संभालता है. दोनों देशों के बीच इस व्यवस्था को लेकर किसी तरह का विवाद नहीं है. इस अनोखी व्यवस्था के कारण फीजंट आइलैंड दुनिया के सबसे दिलचस्प इलाकों में गिना जाता है.

    यह छोटा सा द्वीप बिदासोआ नदी के बीच स्थित है. यही नदी फ्रांस और स्पेन के बीच प्राकृतिक सीमा का काम करती है और आगे जाकर अटलांटिक महासागर में मिल जाती है. नदी के एक तरफ फ्रांस का हेंदाए शहर है, जबकि दूसरी ओर स्पेन का इरुन क्षेत्र पड़ता है. करीब 200 मीटर लंबा यह छोटा-सा भूभाग स्थायी रूप से किसी एक देश का हिस्सा नहीं है. अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में इसे कंडोमिनियम कहा जाता है, यानी दो देशों के बीच साझा संप्रभुता वाला क्षेत्र.

    1659 की संधि से जुड़ा है इतिहास

    फीजंट आइलैंड का इतिहास भी काफी दिलचस्प है. साल 1659 में फ्रांस और स्पेन के प्रतिनिधि इसी द्वीप पर मिले थे. यहां दोनों देशों के बीच ट्रीटी ऑफ द पाइरेनीज नाम की महत्वपूर्ण संधि हुई थी. इस समझौते के साथ दोनों देशों के बीच करीब 30 साल से चला आ रहा युद्ध खत्म हुआ था.

    संधि में सीमा तय करने के लिए बिदासोआ नदी के बीच को आधार माना गया. ऐसे में नियम के हिसाब से द्वीप को भी दो हिस्सों में बांटा जा सकता था, क्योंकि इसका क्षेत्रफल करीब 1.6 एकड़ ही है. एक हिस्सा फ्रांस और दूसरा स्पेन के पास जा सकता था. लेकिन दोनों देशों ने ऐसा करने के बजाय एक अलग और शांतिपूर्ण व्यवस्था बनाई. उन्होंने पूरे द्वीप को ‘कंडोमिनियम’ घोषित कर दिया. इसका मतलब है कि इस इलाके पर दोनों देशों का साझा अधिकार रहेगा.

    छह महीने बाद बदल जाता है नियंत्रण

    इस द्वीप का प्रशासन हर साल दो बार बदलता है. 1 फरवरी से 31 जुलाई तक स्पेन इसकी जिम्मेदारी संभालता है, जबकि 1 अगस्त से 31 जनवरी तक नियंत्रण फ्रांस के पास रहता है. यानी अगस्त की शुरुआत में फ्रांस को प्रशासन मिलता है और फरवरी में यह जिम्मेदारी फिर स्पेन को सौंप दी जाती है.

    नियंत्रण बदलने की प्रक्रिया भी सामान्य प्रशासनिक बदलाव जैसी नहीं है. दोनों देशों के अधिकारी औपचारिक रूप से एक-दूसरे को जिम्मेदारी सौंपते हैं. यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और दोनों देशों के बीच सहयोग का प्रतीक मानी जाती है.

    आम लोगों के लिए नहीं खुलता

    इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका होने के बावजूद फीजेंट आइलैंड में आज के समय में लोग नहीं रहते हैं. यहां आम लोगों की आवाजाही भी सामान्य रूप से नहीं होती है. द्वीप की देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी दोनों देशों के संबंधित अधिकारी संभालते हैं.

    दिलचस्प बात यह है कि नाम भले ही ‘फीजेंट आइलैंड’ यानी तीतर के द्वीप का हो, लेकिन यहां तीतर नहीं पाए जाते. यही वजह है कि यह छोटा-सा द्वीप अपने आकार से कहीं ज्यादा अपने इतिहास और अनोखी राजनीतिक व्यवस्था के लिए जाना जाता है. फ्रांस और स्पेन के बीच इसका छह-छह महीने का प्रशासन आज भी दुनिया में साझा संप्रभुता का एक दुर्लभ उदाहरण है.

  • बार-बार धुंधला दिखता है चश्मा?​​​​​ लेंस साफ करते समय न करें ये गलतियां… सही तरीका जानें और खरोंच से भी बचाएं.

    बार-बार धुंधला दिखता है चश्मा?​​​​​ लेंस साफ करते समय न करें ये गलतियां… सही तरीका जानें और खरोंच से भी बचाएं.

    बार-बार धुंधला दिखता है चश्मा?​​​​​ लेंस साफ करते समय न करें ये गलतियां… सही तरीका जानें और खरोंच से भी बचाएं.

    चश्मे के लेंस पर धूल, तेल और उंगलियों के निशान जमने से दिखाई देने में परेशानी हो सकती है. जानिए चश्मे को साफ करने का सही तरीका, माइक्रोफाइबर कपड़े का इस्तेमाल कैसे करें और किन चीजों से लेंस को साफ करने से बचना चाहिए.

    चश्मा रोज इस्तेमाल करने वालों के लिए उसके लेंस की सफाई बेहद जरूरी है. लेंस पर धूल, तेल और उंगलियों के निशान जमा होने से साफ दिखाई देना मुश्किल हो सकता है. कई लोग जल्दी में चश्मे को शर्ट, रुमाल या टिशू से पोंछ देते हैं. ऐसा करने से लेंस पर छोटी-छोटी खरोंच आ सकती हैं. इसलिए चश्मे की सफाई सही तरीके से करना जरूरी है.

    सबसे पहले पानी से लेंस साफ करें

    चश्मा साफ करने से पहले अपने हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धो लें. इसके बाद लेंस को सामान्य या हल्के गुनगुने पानी से धोएं. इससे लेंस पर जमा धूल और छोटे कण हट जाएंगे. सूखे लेंस को सीधे कपड़े से रगड़ने से बचें, क्योंकि धूल के कण लेंस पर खरोंच डाल सकते हैं.

    माइक्रोफाइबर कपड़े का करें इस्तेमाल

    लेंस साफ करने के लिए हमेशा साफ माइक्रोफाइबर कपड़े का इस्तेमाल करें. यह कपड़ा लेंस पर मौजूद गंदगी और निशान को आसानी से साफ करने में मदद करता है. चश्मे को शर्ट, तौलिया या सामान्य रुमाल से साफ करने की आदत छोड़ दें. सफर के दौरान भी माइक्रोफाइबर कपड़ा अपने बैग में रखें.

    लेंस क्लीनिंग स्प्रे से हटाएं तेल और निशान

    अगर लेंस पर तेल या उंगलियों के निशान हैं, तो चश्मे के लिए बनाए गए लेंस क्लीनिंग स्प्रे का इस्तेमाल किया जा सकता है. क्लीनर लगाने के बाद माइक्रोफाइबर कपड़े से लेंस को हल्के हाथों से साफ करें. अगर आपके चश्मे पर खास कोटिंग है, तो उसी के लिए सही क्लीनर चुनना बेहतर है.

    ज्यादा गंदे चश्मे को ऐसे करें साफ

    अगर चश्मा बहुत गंदा है, तो पहले पानी से लेंस धोएं. इसके बाद हल्के डिशवॉशिंग लिक्विड की सिर्फ एक छोटी बूंद लगाकर धीरे से साफ कर सकते हैं. फिर साफ पानी से अच्छी तरह धोकर माइक्रोफाइबर कपड़े से सुखाएं.

    इन चीजों से लेंस को रखें दूर

    चश्मे के लेंस पर घरेलू ग्लास क्लीनर, थिनर, नेल पॉलिश रिमूवर या थूक का इस्तेमाल न करें. इन चीजों से लेंस की खास परत खराब हो सकती है. साथ ही धूल लगे लेंस को जोर से रगड़ने से बचें. ऑफिस या सफर में चश्मे के लिए बने लेंस वाइप्स भी रख सकते हैं.