Category: Gazab

  • K2 की 8611 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंचकर शेरपा ने किए Push-ups, देखकर लोग रह गए हैरान.

    K2 की 8611 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंचकर शेरपा ने किए Push-ups, देखकर लोग रह गए हैरान.

    K2 की 8611 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंचकर शेरपा ने किए Push-ups, देखकर लोग रह गए हैरान.

    दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटियों पर पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जाता है। लेकिन कुछ पर्वतारोही शिखर पर पहुंचने के बाद ऐसा कारनामा कर देते हैं, जो लंबे समय तक लोगों को याद रहता है। ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें नेपाली पर्वतारोही छिरिंग नामगेल शेरपा K2 की चोटी पर पहुंचकर Push-ups करते नजर आ रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि यह घटना साल 2021 की गर्मियों की है। उस दौरान K2 के शिखर पर पहुंचने के बाद छिरिंग नामगेल शेरपा ने कुछ Push-ups किए थे। इस पल का वीडियो अब सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो रहा है और इसे देखकर यूजर्स उनकी फिटनेस और हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं।

    8611 मीटर की ऊंचाई पर किया Push-ups

    K2 समुद्र तल से 8,611 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यह दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। इतनी ऊंचाई पर पहुंचना ही पर्वतारोहियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में शिखर पर पहुंचने के बाद Push-ups करना लोगों के लिए हैरानी की वजह बना हुआ है।

    वीडियो में शेरपा बर्फ से ढकी चोटी पर नीचे झुककर Push-ups करते दिखाई देते हैं। कुछ ही सेकंड का यह नजारा सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।

    K2 पर चढ़ाई आसान नहीं

    K2 पाकिस्तान और चीन की सीमा के पास काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित है। इस चोटी पर चढ़ाई के दौरान पर्वतारोहियों को बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की उपलब्धता कम होती जाती है, जबकि तेज हवाएं, बर्फबारी, खड़ी चट्टानें और अचानक बदलता मौसम मुश्किलें और बढ़ा सकते हैं।

    ऐसे वातावरण में शरीर को सामान्य तरीके से काम करने में भी परेशानी हो सकती है। इसलिए K2 तक पहुंचने के लिए पर्वतारोहियों को लंबे समय तक प्रशिक्षण और कठिन परिस्थितियों में अभ्यास करना पड़ता है।

    कुछ सेकंड के वीडियो के पीछे लंबी तैयारी

    शिखर पर खड़े होकर Push-ups करना देखने में भले ही कुछ सेकंड का काम लगे, लेकिन K2 जैसे पर्वत की चढ़ाई पूरी करने के लिए जरूरी शारीरिक तैयारी और पर्वतारोहण का अनुभव काफी महत्वपूर्ण होता है।

    छिरिंग नामगेल शेरपा का यह वीडियो इसी वजह से सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है। यूजर्स इस अनोखे पल को देखकर हैरानी जता रहे हैं और

     

     

     

     

     

  • दालचीनी खरीदते समय न करें सिर्फ रंग पर भरोसा, इन चीजों को देखकर तुरंत पहचानें असली मसाला

    दालचीनी खरीदते समय न करें सिर्फ रंग पर भरोसा, इन चीजों को देखकर तुरंत पहचानें असली मसाला

    दालचीनी खरीदते समय न करें सिर्फ रंग पर भरोसा, इन चीजों को देखकर तुरंत पहचानें असली मसाला

    बाजार में दालचीनी जैसी दिखने वाली कैसिया भी बिकती है, जिसे पहली नजर में पहचानना आसान नहीं होता. दोनों का रंग और आकार काफी मिलता-जुलता है, खासकर जब मसाला पाउडर के रूप में हो.

    रसोई में रखी दालचीनी को देखकर क्या आप पक्के तौर पर कह सकते हैं कि यह असली दालचीनी ही है? अगर आपका जवाब हां है, तो जरा रुकिए. बाजार में दालचीनी जैसी दिखने वाली कैसिया भी बिकती है, जिसे पहली नजर में पहचानना आसान नहीं होता. दोनों का रंग और आकार काफी मिलता-जुलता है, खासकर जब मसाला पाउडर के रूप में हो. हालांकि, साबुत दालचीनी खरीदते समय उसकी मोटाई, परतों, बनावट और खुशबू पर ध्यान देकर आप काफी हद तक दोनों में फर्क कर सकते हैं.

    अगली बार बाजार से दालचीनी खरीदने जाएं, तो इन आसान तरीकों को जरूर याद रखें.मोटाई से करें पहचान असली दालचीनी की छाल आमतौर पर काफी पतली और नाजुक होती है. इसमें छाल की कई पतली परतें एक-दूसरे के ऊपर लिपटी हुई दिखाई देती हैं. वहीं कैसिया की छाल मोटी और सख्त होती है. अगर कोई स्टिक बहुत मोटी, भारी और कड़ी महसूस हो रही है, तो उसे खरीदने से पहले ध्यान से देखें.परतों पर दें ध्यान दालचीनी और कैसिया में अंतर पता करने का एक आसान तरीका इसकी परतें देखना है. असली दालचीनी में कई पतली परतें होती हैं, जो स्टिक को करीब से देखने पर साफ नजर आ सकती हैं.

    दूसरी तरफ कैसिया में आमतौर पर एक मोटी छाल को रोल करके स्टिक का आकार दिया जाता है. इसलिए ज्यादा बारीक परतें दिखाई दें तो वह दालचीनी होने की संभावना ज्यादा है.छाल की बनावट भी बताएगी फर्क कैसिया की छाल आमतौर पर ज्यादा खुरदरी, मोटी और सख्त होती है. वहीं दालचीनी पतली और नाजुक होती है. इसलिए खरीदते समय सिर्फ उसका भूरा रंग देखकर फैसला न करें. स्टिक को देखकर उसकी मोटाई और बनावट पर भी ध्यान दें.खुशबू से भी मिल सकता है संकेत अच्छी दालचीनी में मीठी, गर्म और मसालेदार खुशबू होती है.

    अगर खुशबू बेहद हल्की है या दालचीनी जैसी खास सुगंध महसूस नहीं हो रही, तो थोड़ा सावधान रहें. हालांकि, सिर्फ खुशबू के आधार पर दालचीनी और कैसिया की पक्की पहचान नहीं की जा सकती.पाउडर की जगह साबुत दालचीनी खरीदें अगर आप दालचीनी की गुणवत्ता खुद जांचना चाहते हैं, तो पाउडर की बजाय साबुत स्टिक खरीदना बेहतर है. पाउडर में यह पता लगाना मुश्किल होता है कि उसमें सिर्फ दालचीनी है, कैसिया है या दोनों का मिश्रण. पैकेट खरीदते समय लेबल, इंग्रीडिएंट्स और प्रोडक्ट की जानकारी जरूर पढ़ें. केवल सस्ता देखकर मसाला खरीदने से बचें.’

  • जब सम्राट विक्रमादित्य नहीं ले जा सके प्रतिमा तो जमीन से प्रकट हुए गणेश, जानें 2000 साल पुराने मंदिर की कथा..

    जब सम्राट विक्रमादित्य नहीं ले जा सके प्रतिमा तो जमीन से प्रकट हुए गणेश, जानें 2000 साल पुराने मंदिर की कथा..

    जब सम्राट विक्रमादित्य नहीं ले जा सके प्रतिमा तो जमीन से प्रकट हुए गणेश, जानें 2000 साल पुराने मंदिर की कथा..

    मध्य प्रदेश के सीहोर में स्थित प्राचीन चिंतामन सिद्ध गणेश मंदिर अपनी पुरानी परंपराओं और भक्तों की गहरी आस्था के लिए जाना जाता है. मान्यता के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास करीब दो हजार वर्ष पुराना है. गणेश चतुर्थी के मौके पर यहां देशभर से श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर की सबसे खास बात यहां विराजित गणेश प्रतिमा है, जिसका आधा हिस्सा आज भी जमीन के अंदर है.

    सीवन नदी से कमल पुष्प के रूप में प्रकट हुए गणेश मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार, सम्राट विक्रमादित्य सीवन नदी से कमल पुष्प के रूप में प्रकट हुए भगवान गणेश को रथ में लेकर जा रहे थे. रास्ते में सुबह होने पर उनका रथ इसी स्थान पर जमीन में धंस गया. रथ में रखा कमल पुष्प धीरे-धीरे गणेश प्रतिमा में बदलने लगा और प्रतिमा भी जमीन के अंदर धंसती चली गई. इसके बाद इसी जगह पर मंदिर का निर्माण कराया गया. आज भी गणेश जी की प्रतिमा का आधा हिस्सा जमीन में धंसा हुआ है और भक्त इसी स्वरूप के दर्शन करते हैं.

    गणेश चतुर्थी पर लगता है 10 दिन का मेला चिंतामन गणेश मंदिर में हर साल गणेश चतुर्थी के दौरान दस दिवसीय भव्य मेले का आयोजन किया जाता है. इस दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान गणेश के दर्शन करते हैं. दूर-दराज से आने वाले भक्त बप्पा के सामने अपनी मनोकामना रखते हैं और आशीर्वाद मांगते हैं. गणेशोत्सव के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना भी होती है.

    मन्नत मांगने के लिए बनाते हैं उल्टा स्वास्तिक इस मंदिर से जुड़ी एक खास परंपरा भक्तों के बीच काफी प्रसिद्ध है. मान्यता के अनुसार, श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं. मन्नत पूरी होने के बाद वे दोबारा मंदिर पहुंचकर सीधा स्वास्तिक बनाकर भगवान गणेश के प्रति आभार जताते हैं. इसी वजह से मंदिर की दीवारों पर बड़ी संख्या में स्वास्तिक के निशान दिखाई देते हैं.

    रोज बदलता है बप्पा का श्रृंगार गणेशोत्सव के दिनों में यहां भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है. भक्तों के लिए हर दिन बप्पा का नया श्रृंगार और नया रूप देखने को मिलता है. इसी खास श्रृंगार के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं. मंदिर के पुजारी पंडित दुबे के अनुसार, सच्चे मन से भगवान गणेश से मांगी गई मन्नत पूरी होने की भक्तों में मान्यता है.

    देश में चार स्थानों पर चिंतामन सिद्ध गणेश पंडित जे. दुबे के अनुसार, देशभर में चिंतामन सिद्ध गणेश की चार स्वयंभू प्रतिमाएं मानी जाती हैं. इनमें राजस्थान के रणथंभौर, मध्य प्रदेश के उज्जैन, गुजरात के सिद्धपुर और मध्य प्रदेश के सीहोर का चिंतामन गणेश मंदिर शामिल है. सीहोर के इस मंदिर में सालभर श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, जबकि गणेश चतुर्थी के दौरान यहां भक्तों की संख्या और भी बढ़ जाती है.

  • मैथ्स के डर ने बनाया जीनियस! जानिए कैसे सबसे कम उम्र का प्रोग्रामर बना 8 साल का यह बच्चा..

    मैथ्स के डर ने बनाया जीनियस! जानिए कैसे सबसे कम उम्र का प्रोग्रामर बना 8 साल का यह बच्चा..

    मैथ्स के डर ने बनाया जीनियस! जानिए कैसे सबसे कम उम्र का प्रोग्रामर बना 8 साल का यह बच्चा..

    क्या आपने कभी सोचा है कि जिस उम्र में बच्चे कार्टून देखने या पार्क में खेलने की जिद करते हैं, उस उम्र में कोई बच्चा कोडिंग सीखकर दुनिया का सबसे कम उम्र का प्रोफेशनल प्रोग्रामर बन जाए? जी हां, ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में रहने वाले 8 साल के नोआ विलियम्स (Noah Williams) ने कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है. उनकी यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है, जहां एक छोटी सी परेशानी ने एक बच्चे को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Records) तक पहुंचा दिया.

    होमवर्क से बचने के लिए सीखी C++ जैसी खतरनाक कोडिंग

    कहानी शुरू होती है जब नोआ सिर्फ 6 साल के थे. बाकी बच्चों की तरह नोआ को भी मैथ्स के लंबे-लंबे कैलकुलेशन और होमवर्क से चिढ़ थी. उन्हें मैथ्स के पैटर्न समझने में दिक्कत होती थी. लेकिन नोआ ने हार मानने के बजाय एक गजब का जुगाड़ निकाला. उन्होंने सोचा कि क्यों न एक ऐसा प्रोग्राम बनाया जाए जो उनका सारा मैथ्स का होमवर्क झटपट सॉल्व कर दे.

    इस सोच के साथ उन्होंने दुनिया की सबसे टफ प्रोग्रामिंग लैंग्वेजों में से एक C++ को सीखना शुरू कर दिया. बड़े-बड़े सॉफ्टवेयर इंजीनियर जिस लैंग्वेज को सीखने में पसीना बहाते हैं, उसे इस नन्हे बच्चे ने खेल-खेल में सीख लिया.

    सिर्फ 7 साल की उम्र में Mensa IQ टेस्ट में गाड़े झंडे

    गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, नोआ का दिमाग आम बच्चों से अलग और बेहद तेज है. जब वे महज 7 साल के थे, तब उन्होंने दुनिया की सबसे कठिन मानी जाने वाली IQ सोसाइटी मेंसा (Mensa) का टेस्ट दिया. नोआ ने इस टेस्ट में 99.9th परसेंटाइल स्कोर करके सबको हैरान कर दिया. उनकी इस जीनियस प्रतिभा ने यह साबित कर दिया था कि वह आने वाले समय में टेक वर्ल्ड में बड़ा धमाका करने वाले हैं.

    गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम

    कोडिंग के बाद अब रोबोटिक्स और ड्रोन्स पर कब्जा!

    नोआ सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन तक ही सीमित नहीं रहे. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, अब वे रोबोटिक्स और ड्रोन्स की दुनिया में भी नए-नए कारनामे कर रहे हैं. वर्चुअल कोडिंग से निकलकर वे फिजिकल वर्ल्ड की टेक्नोलॉजी को भी तेजी से सीख रहे हैं

  • एक ही शरीर पर Tattoo की 40 लेयर! 90% बॉडी पर बनी स्याही की परतें, इस शख्स के नाम Guinness World Record.

    एक ही शरीर पर Tattoo की 40 लेयर! 90% बॉडी पर बनी स्याही की परतें, इस शख्स के नाम Guinness World Record.

    एक ही शरीर पर Tattoo की 40 लेयर! 90% बॉडी पर बनी स्याही की परतें, इस शख्स के नाम Guinness World Record.

    टैटू बनवाना आज के दौर में युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है। लोग अपनी पसंद के डिजाइन, नाम या किसी खास याद को शरीर पर टैटू के रूप में बनवाते हैं। लेकिन कनाडा के जेरेमी ‘रेमी’ स्कोफील्ड का टैटू के प्रति जुनून सामान्य शौक से कहीं आगे निकल चुका है। उनके शरीर का ज्यादातर हिस्सा टैटू से ढका हुआ है और इसी वजह से उनका नाम Guinness World Records में दर्ज हो चुका है।

    शरीर पर टैटू की करीब 40 परतें

    जेरेमी सोशल मीडिया पर ‘@Ephemeral Remy’ के नाम से जाने जाते हैं। Guinness World Records ने उन्हें ‘Most Tattooed Person Living (Multiple Layers) – Male’ रिकॉर्ड से सम्मानित किया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, उनके शरीर की करीब 90 फीसदी त्वचा टैटू से ढकी हुई है। खास बात यह है कि उनके शरीर के कई हिस्सों पर एक टैटू के ऊपर दोबारा और फिर उसके ऊपर भी टैटू बनवाया गया है। कुछ जगहों पर स्याही की करीब 40 परतें तक बताई जाती हैं। वहीं, शरीर के कुछ हिस्सों पर 100 से ज्यादा बार टैटू किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    बेटे के नाम से शुरू हुआ था सफर

    रेमी ने कभी नहीं सोचा था कि टैटू बनवाने का उनका शौक एक दिन उन्हें वर्ल्ड रिकॉर्ड तक पहुंचा देगा। उनके टैटू सफर की शुरुआत साल 2005 में हुई थी। उस समय उन्होंने अपने बाएं हाथ के अंदरूनी हिस्से पर अपने बेटे का नाम टैटू के रूप में बनवाया था।

    इसके बाद धीरे-धीरे उनका यह शौक बढ़ता गया। उन्होंने शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर टैटू बनवाने शुरू किए और समय के साथ यह उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया।

    1000 घंटे से ज्यादा टैटू चेयर पर बैठे

    रेमी पहले शेफ के तौर पर काम कर चुके हैं। अब वह टैटू शॉप्स और सोशल मीडिया से जुड़े काम संभालते हैं। वह बॉडी मॉडिफिकेशन के भी शौकीन हैं और उनके शरीर पर 100 से ज्यादा पियर्सिंग होने की बात कही जाती है।

    टैटू बनवाने के इस लंबे सफर में रेमी ने 1000 घंटे से ज्यादा समय टैटू चेयर पर बिताया है। उनके शरीर पर अलग-अलग टैटू बनाने में 40 से ज्यादा कलाकारों ने भी योगदान दिया है।

    रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं बनवाए थे टैटू

    रेमी के मामले की सबसे दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के इरादे से टैटू बनवाना शुरू नहीं किया था। उनके मुताबिक, उन्हें टैटू और बॉडी आर्ट का शौक था और वह इसी जुनून के चलते लगातार आगे बढ़ते गए।

    बाद में जब लोगों ने उनके टैटू की संख्या और शरीर पर बनी कई परतों के बारे में सवाल करना शुरू किया, तब उन्हें पता चला कि उनका नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए दर्ज किया जा सकता है। अब उनका नाम Guinness World Records में शामिल है।

     

     

     

  • प्रमोशन सुनते ही लोग कहते हैं हां, इस महिला ने 3 बार ठुकराया ऑफर; वजह जान आप भी कहेंगे- बात तो सही है.!

    प्रमोशन सुनते ही लोग कहते हैं हां, इस महिला ने 3 बार ठुकराया ऑफर; वजह जान आप भी कहेंगे- बात तो सही है.!

    प्रमोशन सुनते ही लोग कहते हैं हां, इस महिला ने 3 बार ठुकराया ऑफर; वजह जान आप भी कहेंगे- बात तो सही है.!

    क्या आपने कभी सोचा है कि कोई कर्मचारी प्रमोशन ठुकरा सकता है? आमतौर पर कॉर्पोरेट वर्ल्ड में ऊंची कुर्सी और बड़ा पद पाना ही हर किसी के करियर का अल्टीमेट गोल माना जाता है. लेकिन आज की जनरेशन इस पुरानी धारणा को पूरी तरह बदल रही है. चीन से लेकर पूरी दुनिया तक युवा अब यह सोचने लगे हैं कि क्या थोड़ी सी एक्स्ट्रा सैलरी और ढेरों जिम्मेदारियां सचमुच उस मानसिक तनाव के लायक हैं? सोशल मीडिया पर आजकल एक महिला की कहानी वायरल हो रही है, जिसने अपने 10 साल के करियर में एक या दो नहीं बल्कि पूरे 3 बार प्रमोशन ठुकरा दिया. आइए जानते हैं इसके पीछे की असली वजह.

    प्रमोशन क्यों ठुकराया जा रहा है?

    साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों लोग प्रमोशन को विनम्रता से अस्वीकार करने के तरीके शेयर कर रहे हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि नई जिम्मेदारियों के साथ मिलने वाला वेतन बहुत मामूली होता है, जबकि काम का बोझ और मानसिक दबाव कई गुना बढ़ जाता है.

    जून नाम की एक महिला कर्मचारी ने अपने 10 साल के करियर में तीन बार प्रमोशन को ना कहा. उसने बताया कि एक बार जब उसे अंतरिम टीम लीडर बनाया गया, तो सैलरी में केवल नाममात्र की बढ़ोतरी हुई, लेकिन जरा सी गलती पर गाज उसी पर गिरती थी. युवाओं का मानना है कि मिडिल मैनेजमेंट की नौकरी में इंसान ऊपर के अधिकारियों और नीचे के कर्मचारियों के बीच पिसकर रह जाता है.

    कॉन्शस अनबॉसिंग’…एक नया ग्लोबल ट्रेंड

    कंपनी कल्चर पर खड़े होते सवाल

    विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं का यह रुख कंपनियों के लिए चेतावनी है. अगर कॉर्पोरेट सेक्टर अपने कर्मचारियों को बेहतर इंसेंटिव, काम की आजादी और सही तरीके से उनके काम का सम्मान नहीं देगा, तो आने वाले समय में लीडरशिप के लिए लोग मि

  • लोहे की रेलिंग में फंसा गाय का सिर, CISF जवान ने सूझबूझ से बचाई जान

    लोहे की रेलिंग में फंसा गाय का सिर, CISF जवान ने सूझबूझ से बचाई जान

    सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में एक गाय मुसीबत में फंसी नजर आ रही है। गाय का सिर लोहे की रेलिंग के बीच अटक गया था और वह खुद को बाहर निकालने के लिए लगातार कोशिश कर रही थी। काफी प्रयास के बावजूद जब गाय बाहर नहीं निकल पाई, तो मौके पर मौजूद CISF जवान ने उसकी मदद करने का फैसला किया।

    बताया जा रहा है कि गाय ने किसी वजह से अपना सिर लोहे के गेट की सलाखों के बीच डाल दिया था। बाहर निकलने की कोशिश में उसका सिर वहीं फंस गया। परेशानी बढ़ने पर गाय घबराने लगी और बार-बार खुद को छुड़ाने का प्रयास करने लगी।

    CISF जवान ने स्थिति को समझते हुए बिना जल्दबाजी किए गाय को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। उसने गाय को जोर से खींचने के बजाय उसके सिर और सींगों को सावधानी से संभाला, ताकि उसे किसी तरह की चोट न पहुंचे।

    धैर्य और सूझबूझ से गाय को कराया आजाद

    पोस्ट में दिखाई दे रहा है कि जवान जमीन पर बैठकर बेहद सावधानी से गाय के सिर को सही दिशा में मोड़ने की कोशिश कर रहा है। वह लगातार धैर्य बनाए रखता है और धीरे-धीरे गाय के सिर को सलाखों के बीच से बाहर निकाल देता है।

    कुछ देर की मेहनत के बाद गाय पूरी तरह आजाद हो जाती है और वहां से आगे बढ़ जाती है। जवान ने इस दौरान खास ध्यान रखा कि घबराई हुई गाय को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

    CISF जवान की इस संवेदनशीलता की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। लोगों का कहना है कि ड्यूटी निभाने के साथ-साथ बेजुबान जानवर की मदद करना इंसानियत और जिम्मेदारी की मिसाल है।

    इस घटना से यह भी सीख मिलती है कि मुसीबत में फंसे जानवर को बचाते समय जल्दबाजी के बजाय धैर्य और सावधानी से काम लेना चाहिए। CISF जवान की सूझबूझ से गाय सुरक्षित बाहर निकल सकी।

  • OMG! किताबों में नहीं, अपनी आंखों से देखी दुनिया, 33 साल में घूमने के लिए बंदे ने खर्च किए 15 करोड़..

    OMG! किताबों में नहीं, अपनी आंखों से देखी दुनिया, 33 साल में घूमने के लिए बंदे ने खर्च किए 15 करोड़..

    OMG! किताबों में नहीं, अपनी आंखों से देखी दुनिया, 33 साल में घूमने के लिए बंदे ने खर्च किए 15 करोड़..

    Getty Images

    दुनिया घूमने का सपना बहुत से लोग देखते हैं, लेकिन उसे पूरा करने के लिए सालों तक लगातार सफर करते रहना हर किसी के बस की बात नहीं होती. चीन के 53 वर्षीय चेन जिनवेई ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. उन्होंने 33 साल तक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा की और हाल ही में पेरू से लौटने के साथ 233 देशों, क्षेत्रों और इलाकों की अपनी यात्रा पूरी कर ली.

    चेन चीन के झेजियांग प्रांत के झूजी शहर के रहने वाले हैं और एक मशीनरी कंपनी चलाते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में अब तक करीब 70 लोग ही 233 देशों और क्षेत्रों की यात्रा कर पाए हैं. अपने इस लंबे सफर पर चेन ने करीब 10 मिलियन युआन यानी लगभग 15 लाख अमेरिकी डॉलर खर्च किए. उनकी दुनिया घूमने की शुरुआत साल 1993 में हुई थी. सबसे पहले उन्होंने सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड की यात्रा की. उस दौर में इंटरनेट आज की तरह आम नहीं था. चेन बताते हैं कि उनके मन में हमेशा यह जानने की इच्छा थी कि दुनिया के दूसरे हिस्से में असल जिंदगी कैसी है. वह किताबों या दूसरों की बातों के बजाय खुद वहां जाकर चीजों को देखना चाहते थे.

    33 साल में घूम डाली पूरी दुनिया

    हालांकि, बिजनेस और परिवार की जिम्मेदारियां भी उनके साथ थीं. इसलिए उन्होंने अपने सफर का एक अलग तरीका बनाया. वह करीब एक महीना घर पर रहते और अगले महीने यात्रा पर निकल जाते. इस तरह उन्होंने धीरे-धीरे अपने काम, परिवार और दुनिया घूमने के सपने के बीच संतुलन बनाए रखा. चेन ने जानबूझकर कई मुश्किल जगहों को शुरुआत में ही अपनी लिस्ट में शामिल किया. इनमें ध्रुवीय इलाके भी थे. अंटार्कटिका पहुंचने की उनकी पहली कोशिश नवंबर 2015 में नाकाम हो गई.

    जिस फ्रांसीसी अभियान क्रूज जहाज से वह जा रहे थे, उसमें तीसरे दिन बिजली की समस्या आ गई और जहाज से काला धुआं निकलने लगा. उन्हें यात्रा बीच में ही छोड़नी पड़ी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. जनवरी 2016 में वह दोबारा निकले और इस बार सफलतापूर्वक अंटार्कटिका पहुंच गए. चेन के मुताबिक, न्यूजीलैंड का छोटा सा द्वीप क्षेत्र टोकेलाउ उनकी सबसे मुश्किल मंजिलों में से एक था. 2019 में तमाम तैयारियों और जरूरी प्रक्रियाओं के बावजूद उन्हें वहां की यात्रा रद्द करनी पड़ी. इस साल उन्होंने फिर कोशिश की और आखिरकार टोकेलाउ के एटोल पर कदम रख दिया. वहां पहुंचकर उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह बेहद उत्साहित थे.

    इस लंबे सफर के दौरान चेन को कई मुश्किल हालातों का भी सामना करना पड़ा. अफ्रीका में उन्हें मलेरिया हो गया, जबकि ग्रीस में उन्होंने भूकंप तक झेला. उनका कहना है कि ऐसे अनुभवों ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में खुद को संभालना सिखाया. वह कहते हैं कि किसी समस्या के सामने आने पर पहले शांत रहना चाहिए और फिर उसका हल सोचना चाहिए. चेन के लिए दुनिया घूमना सिर्फ मशहूर जगहों पर जाकर फोटो खिंचवाना नहीं था. वह जहां भी जाते, वहां की संस्कृति और लोगों को करीब से समझने की कोशिश करते और ज्यादा से ज्यादा समय बिताते. उन्होंने 198 देशों की मुद्राएं भी इकट्ठी कीं, जिन्हें बाद में शू शियाके मेमोरियल हॉल को दान कर दिया.

    चीन के मशहूर भूगोलवेत्ता और यात्री शू शियाके को चीन का शुरुआती ट्रैवल ब्लॉगर भी कहा जा सकता है. चेन खुद भी मानते हैं कि यात्रा और बिजनेस में काफी समानताएं हैं. उनके मुताबिक, जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन जो काम शुरू किया है, उसमें लगातार लगे रहना जरूरी है. दुनिया घूमने की इच्छा रखने वाले उन लोगों के लिए, जो अक्सर समय या पैसे की कमी का बहाना बनाते हैं, चेन की सलाह सीधी है कि इंतजार मत करो. समय किसी का इंतजार नहीं करता.

    अब 33 साल के इस सफर के बाद चेन अपने बच्चों और माता-पिता के साथ ज्यादा वक्त बिताना चाहते हैं. इसके अलावा उनकी योजना पर्यटन और आउटडोर इंडस्ट्री से जुड़े 100 प्रमुख लोगों का इंटरव्यू करने और उनकी जिंदगी की कहानियां दर्ज करने की भी है. हालांकि, इंटरनेट पर कुछ लोगों ने यह भी कहा कि चेन जैसा सफर पूरा करने के लिए समय और पैसा दोनों चाहिए, जो आम लोगों के लिए बड़ी सुविधाएं हैं.

  • इस मुर्गी की कीमत है बाइक-कार जितनी, हजारों रुपये का मिलता है एक अंडा, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान.

    इस मुर्गी की कीमत है बाइक-कार जितनी, हजारों रुपये का मिलता है एक अंडा, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान.

    इस मुर्गी की कीमत है बाइक-कार जितनी, हजारों रुपये का मिलता है एक अंडा, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान.

    इंडोनेशिया की दुर्लभ आयाम सेमानी मुर्गी अपनी काली त्वचा और अनोखे रूप के लिए मशहूर है. चलिए आपको बताते हैं इसके अंडे की खासियत, कीमत और सेहत से जुड़े दावों के बारे में.

    अंडा सुनते ही आमतौर पर हमारे दिमाग में प्रोटीन और हेल्दी डाइट का ख्याल आता है. लेकिन क्या आपने कभी ऐसी मुर्गी के बारे में सुना है, जिसकी कीमत एक अच्छी मोटरसाइकिल या कार जितनी हो सकती है? जी हां, इंडोनेशिया की आयाम सेमानी (Ayam Cemani) ऐसी ही दुर्लभ मुर्गी है. इसे दुनिया की सबसे अनोखी नस्लों में गिना जाता है और इसकी खासियत के कारण इसे ‘लैंबोर्गिनी ऑफ चिकन’ भी कहा जाता है.

    इसकी कीमत और अंडों की खासियत इसे आम मुर्गियों से बिल्कुल अलग बनाती है.पूरी तरह काले रंग की होती है यह मुर्गी आयाम सेमानी मुर्गी को देखकर पहली नजर में ही इसकी अलग पहचान हो जाती है. इसके पंख, त्वचा, पैर, मांस और यहां तक कि हड्डियां और अंदरूनी अंग भी गहरे काले रंग के होते हैं.

    इसके पीछे फाइब्रोमेलानोसिस नाम का जेनेटिक बदलाव जिम्मेदार है. इसकी वजह से शरीर में मेलेनिन पिगमेंट का उत्पादन बहुत ज्यादा होता है, जिससे इसका शरीर काला दिखाई देता है. आयाम सेमानी को लेकर एक दिलचस्प बात यह है कि इसके अंडे मुर्गी की तरह काले नहीं होते. इनके अंडे आमतौर पर हल्के क्रीम या ऑफ-व्हाइट रंग के होते हैं. हालांकि, यह नस्ल दुर्लभ होने के कारण इसके अंडों की कीमत सामान्य अंडों की तुलना में काफी ज्यादा हो सकती है.क्या इसका अंडा ज्यादा पौष्टिक है?

    आयाम सेमानी के अंडे को लेकर कई जगहों पर इसे ज्यादा प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट वाला सुपरफूड बताया जाता है. हालांकि, इन दावों को लेकर मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं. इसलिए इसे सामान्य अंडे से कई गुना ज्यादा हेल्दी मानना सही नहीं होगा. अंडे में प्रोटीन, विटामिन और कई जरूरी पोषक तत्व जरूर पाए जाते हैं.शौकीनों के लिए है लग्जरी ब्रीड आयाम सेमानी मुर्गी कम संख्या में अंडे देती है और इसकी ब्रीडिंग भी आसान नहीं मानी जाती. इसकी दुर्लभता और अनोखे रूप के कारण दुनिया के कई हिस्सों में इसे शौक के तौर पर पाला जाता है. बड़े फार्म हाउस और ब्रीडिंग के शौकीन लोगों के बीच इसकी खास मांग है. यही वजह है कि इसे सिर्फ मुर्गी नहीं, बल्कि लग्जरी और स्टेटस सिंबल के तौर पर भी देखा जाता है.

  • हजारों दीपों से जगमगाएगी रामनगरी, 7 नवंबर को अयोध्या में दिखेगा दीपोत्सव का भव्य और दिव्य नजारा

    हजारों दीपों से जगमगाएगी रामनगरी, 7 नवंबर को अयोध्या में दिखेगा दीपोत्सव का भव्य और दिव्य नजारा

    हजारों दीपों से जगमगाएगी रामनगरी, 7 नवंबर को अयोध्या में दिखेगा दीपोत्सव का भव्य और दिव्य नजारा

    रामनगरी अयोध्या में इस साल 7 नवंबर को होने वाला दीपोत्सव भव्यता और आध्यात्मिकता का खास संगम बनने जा रहा है. दीपोत्सव को यादगार बनाने के लिए प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं.

    एक ओर जहां दीपों के जरिए नया विश्व कीर्तिमान बनाने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर सरयू घाटों को भी बेहद खूबसूरत बनाने की योजना पर काम चल रहा है. शाम होते ही दीपों की रोशनी से सरयू तट का नजारा बेहद खास दिखाई देगा.एक किलोमीटर तक सजेंगे सरयू के घाट दीपोत्सव के दौरान सरयू नदी के पुल से लेकर लक्ष्मण घाट तक करीब एक किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र को आकर्षक तरीके से सजाया जाएगा. घाटों पर रंग-बिरंगी लाइटिंग के साथ फूलों की विशेष सजावट की जाएगी. दीप जलने के बाद पूरा सरयू तट रोशनी से जगमगा उठेगा. प्रशासन की कोशिश है कि यहां आने वाले

    श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक अलग और यादगार अनुभव मिले.महाआरती में दिखेगी अवध की संस्कृति मुख्य आयोजन के दिन सरयू घाटों पर भव्य महाआरती भी प्रस्तावित है. इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मां सरयू की आरती की जाएगी. हजारों दीपों की रोशनी और सरयू की लहरों का नजारा श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहेगा. महाआरती के जरिए अवध की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की खूबसूरत झलक भी देखने को मिलेगी.घाटों के रिनोवेशन का काम जारी दीपोत्सव को लेकर अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में अभी से उत्साह देखने को मिल रहा है. सरयू घाटों पर रिनोवेशन का काम भी जारी है. काम पूरा होने के बाद घाटों को और भव्य रूप देने की तैयारी है. इससे दीपोत्सव के दौरान सरयू तट की खूबसूरती और बढ़

    जाएगी.प्रशासन ने शुरू की तैयारियां जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी के मुताबिक, इस बार दीपोत्सव का आयोजन 7 नवंबर को किया जाना है. इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. अधिकारियों की बैठकें हो रही हैं और अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं. प्रशासन का लक्ष्य है कि इस बार अयोध्या का दीपोत्सव भव्य आयोजन के साथ श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक और यादगार अनुभव भी बने.