दिल्ली के द्वारका सेक्टर-7 स्थित जेजे कॉलोनी के काली माता मंदिर के पास रविवार शाम एक महिला की छुरा घोंपकर हत्या कर दी गई। 27 सितंबर को शाम करीब 4:49 बजे पालम गांव पुलिस स्टेशन पर पीसीआर कॉल आई, जिसमें महिला पर चाकू से हमले की सूचना दी गई थी।
घायल महिला को तुरंत आईजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शी के बयान के आधार पर पालम विलेज थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस आरोपी पति की तलाश में जुटी
पुलिस के अनुसार आरोपी महिला का पति प्रदीप है। दिल्ली पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही है।
सहजन देखकर नखरे करने वाले बच्चों के लिए रोज की सब्जी से अलग बनाएं यह चटपटी मोरिंगा डिश. यह रेसिपी बच्चे उंगलियां चाटकर खाएंगे ही साथ ही जिन्हें मोरिंगा पसंद नहीं वह भी नखरे नहीं दिखाएंगे.
मोरिंगा यानी सहजन की सब्जी बच्चों को बिल्कुल पसंद नहीं आती. प्लेट में देखते ही बच्चे इसे खाने से मना करने लगते हैं. इसकी वजह से घर में मोरिंगा बनाना भी कई बार मुश्किल हो जाता है. लेकिन अगर इसे रोज की सब्जी की तरह बनाने के बजाय थोड़ा चटपटा ट्विस्ट दिया जाए, तो इसका स्वाद काफी अलग लग सकता है. अगर आपके घर में भी बच्चे मोरिंगा खाने में नखरे करते हैं, तो इस आसान तरीके से इसे बनाकर देख सकते हैं. इसमें किसी खास चीज की जरूरत नहीं है. घर में आसानी से मिलने वाले कुछ मसालों से ही मोरिंगा को चटपटा बनाया जा सकता है. इसे बच्चे तो पसंद करते ही हैं, बड़े भी स्वाद लेकर खाते हैं.
सबसे पहले मोरिंगा को करें तैयार रेसिपी शुरू करने के लिए सबसे पहले मोरिंगा लें और उसे अच्छे से धो लें. इसके बाद इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. टुकड़े बहुत बड़े न रखें, ताकि आगे इसे तैयार करना आसान रहे. अब एक बर्तन में पानी लें और उसमें अच्छे से नमक डालें. कटे हुए मोरिंगा के टुकड़ों को इसी नमक वाले पानी में डालकर करीब आधे घंटे के लिए छोड़ दें. इससे मोरिंगा आगे पकाने के लिए तैयार हो जाएगा.
नमक वाले पानी में ही करें बॉयल आधे घंटे बाद मोरिंगा को उसी नमक वाले पानी में करीब 25 मिनट तक बॉयल कर लें. इसे अच्छी तरह उबालना जरूरी है, ताकि मोरिंगा नरम हो जाए और इसमें मसाले आसानी से मिल सकें.
जब मोरिंगा बॉयल हो जाए, तो इसे पानी से छानकर निकाल लें. अब इसमें चटपटे मसाले डालने की बारी है.
इन मसालों से आएगा चटपटा स्वाद बॉयल किए हुए मोरिंगा में सबसे पहले काला नमक डालें. इसके बाद चाट मसाला, अमचूर पाउडर और लाल मिर्च डालें. इसमें थोड़ा सा गरम मसाला भी मिला दें. आखिर में स्वाद के हिसाब से सादा नमक डालें. अगर आपको नींबू का खट्टा-चटपटा स्वाद पसंद है, तो इसमें थोड़ा नींबू भी निचोड़ सकते हैं. अब सभी मसालों को मोरिंगा के साथ अच्छे से मिला लें, ताकि मसालों का स्वाद हर टुकड़े में आ जाए. फिर ऊपर थोड़ा धनिया की पत्तियों को बारीक काटकर डालें.
बस, इतने आसान तरीके से मोरिंगा की यह चटपटी डिश तैयार हो जाएगी. रोज की सब्जी से अलग इसका स्वाद बच्चों को भी पसंद आ सकता है. ऐसे में जो बच्चे मोरिंगा खाने से दूर भागते हैं, वे भी इसे चटपटे अंदाज में उंगली चाटकर खा सकते हैं. बड़े भी इसे मजे से खाएंगे.
उत्तम नगर इलाके में कम आय और बढ़ते कर्ज को लेकर पति-पत्नी के बीच चल रहा विवाद हत्या तक पहुंच गया। आरोप है कि पत्नी जीनत ने पहले सो रहे पति अकबर अली के सिर पर हथौड़े से वार किया। वार के बाद अकबर के चिल्लाने की आवाज को रोकने के लिए जीनत ने उसका मुंह तकिये से दबा दिया, जिससे उसकी सिर में लगे गंभीर चोट और दम घुटने से मौत हो गई। पुलिस ने आरोपित पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है।घटना 23 सितंबर की देर रात खेड़ा वाली मस्जिद के पास की है। पुलिस के अनुसार, अकबर पेशे से दर्जी था। अकबर और जीनत की शादी करीब आठ वर्ष पहले हुई थी और उनकी दो बेटियां हैं।उसकी आय काफी कम थी, जिसके कारण दंपती पर धीरे-धीरे कर्ज बढ़ गया था। करीब 20 दिन पहले अकबर की नौकरी भी छूट गई थी। इसके बाद परिवार की आर्थिक समस्या और बढ़ गई।
कर्ज चुकाने को लेकर दोनों के बीच था तनाव
घर का खर्च चलाने और कर्ज चुकाने को लेकर दोनों के बीच तनाव बना हुआ था। घटना की रात भी पैसों और कर्ज को लेकर दोनों में काफी झगड़ा हुआ था। विवाद के बाद अकबर सो गया। आरोप है कि इसके बाद जीनत ने उसके सिर पर हथौड़े से वार कर दिया। घायल होने के बाद अकबर चिल्लाने लगा तो जीनत ने उसके मुंह पर तकिया रखकर उसे दबा दिया। दम घुटने से उसकी मौत हो गई।
वारदात में इस्तेमाल हथौड़ा भी बरामद किया गया
हत्या के बाद जीनत ने रात करीब 12:37 बजे अपने भाई को फोन कर घर बुलाया। मौके पर पहुंचे जीनत के भाई ने अपने बहनोई की खून से लथपथ लाश देख कर इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो अकबर का शव खून से लथपथ मिला। शव के पास से वारदात में इस्तेमाल हथौड़ा भी बरामद किया गया।
पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जीनत को गिरफ्तार कर लिया है। फोरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। साथ ही दोनों के स्वजनों से पूछताछ कर हत्या के कारणों के बारे में जानने का प्रयास किया जा रहा है।
फिरोजपुर में ऑनलाइन साइबर ठगों द्वारा आम लोगों को अपना शिकार बनाकर लाखों रुपये की ठगी करने के तीन मामले सामने आए हैं। स्टेट साइबर क्राइम पंजाब और स्थानीय पुलिस ने प्राप्त शिकायतों के आधार पर तरसेम सिंह, सुनील कुमार सचदेवा और अनुज शर्मा के साथ हुई लाखों रुपये की धोखाधड़ी के संबंध में अज्ञात तथा एक व्यक्ति के खिलाफ बीएनएस की धाराओं के तहत मामले दर्ज किए हैं। जिला फिरोजपुर में साइबर अपराधियों ने अलग-अलग हथकंडे अपनाकर तीन व्यक्तियों से कुल 20.91 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी की है।थाना लक्खो के बहराम के तहत आते गांव मिर्जा के निवासी तरसेम सिंह पुत्र बलवंत सिंह ने बताया कि उन्हें एक नंबर 18002662 से कॉल आई। कॉल में कहा गया कि यदि आपने भुगतान (पेमेंट) किया है तो 1 दबाएं और यदि नहीं किया तो 9 दबाएं। जैसे ही उन्होंने 9 दबाया, उनके बैंक खाते से 2 लाख रुपये कटने का मैसेज आ गया।
फिरोजपुर शहर के बाजार दुर्गा दास के रहने वाले सुनील कुमार सचदेवा पुत्र मनोहर लाल सिंह (निवासी मकान नंबर 16, गली कुमारां वाली, बाजार दुर्गा दास, फिरोजपुर शहर) ने बताया कि उन्हें एक व्हाट्सएप कॉल आई कि उनके बेटे का कैलगरी (कनाडा) में एक्सीडेंट हो गया है और वह अस्पताल में भर्ती है। इलाज के लिए पैसों की मांग करने पर उन्होंने घबराहट में आकर अलग-अलग खातों में 11 लाख 50 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। सुनील कुमार सचदेवा ने बताया कि बाद में बेटे के सुरक्षित होने का पता चलने पर उन्होंने 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
इसी तरह सहायक थानेदार जसबीर सिंह ने बताया कि अनुज शर्मा पुत्र पवन शर्मा (निवासी मकान नंबर 21, पाम सिटी, धवन कॉलोनी के पास) ने एक वेबसाइट पर फ्रेंचाइजी देने का विज्ञापन देखकर संपर्क किया था। अनुज शर्मा ने बताया कि ठगों ने झांसे में लेकर फॉर्म भरवाया और अलग-अलग किस्तों में कुल 7 लाख 41 हजार 930 रुपये ट्रांसफर करवा लिए। अनुज शर्मा ने बताया कि फ्रेंचाइजी न मिलने पर उन्होंने 1930 पर शिकायत की।पुलिस जांच में कॉल करने वाले मोबाइल नंबर का रिकॉर्ड कोलकाता (पश्चिम बंगाल) के एक व्यक्ति प्राणकृष्णा मोहंती पुत्र शुकादेब मोहंती (निवासी बालेश्वर, धामनगर, भद्रक, ओडिशा / कोलिन लेन, पार्क स्ट्रीट) के नाम पर पाया गया, जिसके बाद कानूनी राय लेकर केस दर्ज कर लिया गया है। इन तीनों मामलों की जांच सहायक थानेदार जसबीर सिंह कर रहे हैं।
पालम इलाके में पति के कथित प्रेम संबंध का विरोध करना एक महिला को भारी पड़ गया। आरोप है कि पति ने पत्नी के सीने में चाकू घोंपकर उसकी हत्या कर दी और वारदात के बाद फरार हो गया। पुलिस ने हत्या की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
मृतका की पहचान 30 वर्षीय सोनिया के रूप में हुई है। वारदात रविवार शाम पालम द्वारका सेक्टर-7 स्थित जेजे कॉलोनी में हुई। पुलिस के अनुसार, सोनिया और प्रदीप की करीब आठ वर्ष पहले शादी हुई थी और उनके दो बेटे हैं। प्रदीप ढोल के साथ वेज बिरयानी की दुकान भी चलाता है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि प्रदीप का किसी अन्य युवती से कथित प्रेम संबंध था। इसका सोनिया विरोध करती थी और इसी बात को लेकर दोनों में अक्सर विवाद होता था। रविवार को विवाद बढ़ने पर प्रदीप ने चाकू से सोनिया के सीने पर वार कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और सीसीटीवी फुटेज खंगालकर आरोपी की तलाश कर रही है।
सोशल मीडिया पर रील्स देखना आजकल लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। लेकिन यही आदत कभी-कभी साइबर ठगों के लिए लोगों तक पहुंचने का आसान रास्ता बन जाती है। राजस्थान के पाली जिले के सादड़ी कस्बे में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां इंस्टाग्राम पर रील देखते समय एक महिला को लुभावना ऑफर दिखाई दिया। महिला ने जैसे ही विज्ञापन में दिए गए लिंक पर क्लिक किया, उसके बैंक खाते से रकम निकल गई।
मामले की शिकायत पीड़िता ने सादड़ी थाने में दर्ज कराई है। इसके बाद साइबर ठगी के इस तरीके को लेकर लोगों को सावधान रहने की सलाह दी जा रही है।
रील में दिखा ऑफर और एक क्लिक ने बढ़ा दिया खतरा
पीड़िता के मुताबिक वह मोबाइल पर इंस्टाग्राम रील्स देख रही थी। इसी दौरान उसे एक ऐसा विज्ञापन दिखाई दिया, जिसमें आकर्षक ऑफर का दावा किया गया था। ऑफर को देखकर उसने विज्ञापन में दिए गए लिंक पर क्लिक कर दिया।
आरोप है कि लिंक पर जाने के बाद उसके बैंक खाते से पैसे निकल गए। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले हर विज्ञापन और ऑफर पर भरोसा करना कितना जोखिम भरा हो सकता है।
APK फाइल के जरिए ठगी का नया तरीका
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ठग सोशल मीडिया पर लोगों को आकर्षित करने के लिए बेहद सस्ते सामान, इनाम, ऑनलाइन कमाई या दूसरे लुभावने ऑफर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
लिंक पर क्लिक करने के बाद यूजर को किसी दूसरी वेबसाइट पर भेजा जा सकता है या ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जा सकता है। कई मामलों में संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड करवाने की कोशिश की जाती है।
अगर कोई व्यक्ति ऐसी फाइल को इंस्टॉल कर देता है और उसे जरूरत से ज्यादा परमिशन दे देता है, तो फोन में मौजूद निजी जानकारी जोखिम में पड़ सकती है। इसमें मैसेज, कॉन्टैक्ट्स, फोटो और अन्य संवेदनशील डेटा शामिल हो सकते हैं।
बैंकिंग ऐप और OTP भी हो सकते हैं निशाने पर
साइबर अपराधी केवल बैंक खाते से पैसे निकालने तक सीमित नहीं रहते। अगर किसी संदिग्ध ऐप को फोन की संवेदनशील परमिशन मिल जाती है, तो वह डिवाइस पर आने वाले मैसेज और दूसरी जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता है।
यही वजह है कि केवल किसी अनजान व्यक्ति को OTP बताने से बचना ही पर्याप्त नहीं है। संदिग्ध ऐप इंस्टॉल करना, अनजान लिंक खोलना और किसी वेबसाइट को बिना जांचे बैंकिंग जानकारी देना भी बड़ा जोखिम बन सकता है।
500 रुपये में 5000 का सामान जैसे ऑफर से रहें सावधान
रील्स और सोशल मीडिया विज्ञापनों में ठग अक्सर ऐसे ऑफर दिखा सकते हैं जो पहली नजर में बेहद आकर्षक लगते हैं। उदाहरण के लिए महंगा सामान बहुत कम कीमत में देने का दावा, घर बैठे हजारों रुपये कमाने का ऑफर, फर्जी स्क्रैच कार्ड या महंगे इनाम जीतने का लालच दिया जा सकता है।
ऐसे ऑफर का मकसद यूजर को जल्दी फैसला लेने के लिए मजबूर करना हो सकता है। इसलिए किसी भी ऑफर पर क्लिक करने से पहले उसकी वेबसाइट, कंपनी और भुगतान प्रक्रिया की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है।
साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
सोशल मीडिया रील या विज्ञापन में दिखने वाले अनजान लिंक पर तुरंत क्लिक न करें।
किसी भी थर्ड पार्टी वेबसाइट से APK या अन्य संदिग्ध फाइल डाउनलोड न करें।
ऐप हमेशा आधिकारिक Google Play Store या Apple App Store से ही डाउनलोड करें।
किसी ऐप को जरूरत से ज्यादा परमिशन देने से बचें।
बहुत ज्यादा सस्ते ऑफर और असामान्य डिस्काउंट को लेकर सतर्क रहें।
बैंकिंग जानकारी, UPI PIN, पासवर्ड या OTP किसी के साथ साझा न करें।
फोन में संदिग्ध ऐप दिखाई दे तो उसे तुरंत हटाएं और जरूरी सुरक्षा जांच करें।
बैंक खाते में किसी अनजान लेनदेन की जानकारी मिलते ही बैंक से संपर्क करें और साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराएं।
सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला हर विज्ञापन भरोसेमंद हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए रील देखते समय किसी ऑफर के लालच में जल्दबाजी में क्लिक करने के बजाय पहले उसकी विश्वसनीयता जांचना ही सबसे जरूरी सावधानी है।
यादद्री भोंगिर समाचार: यादद्री भोंगिर जिले के बिबिनगर मंडल के कोंडामदुगु के पास तड़के सुबह एक भीषण दुर्घटना घटी। काजीपेट से नामपल्ली जा रही दक्षिण एक्सप्रेस ट्रेन पटरी पर चल रहे जानवरों से टकरा गई। इस दुर्घटना में लगभग तीन सौ भेड़ें मौके पर ही मर गईं। एक साथ इतने सारे जानवरों की मौत से इलाके में गहरा शोक छा गया।
कुत्ते के हमले के कारण पटरियों पर भागना
आधी रात को अचानक रेल पटरी के किनारे चर रही भेड़ों के झुंड पर कुत्तों ने हमला कर दिया। जान के डर से भाग रही भेड़ें अचानक रेल पटरी पर आ गईं। उसी समय, पास आ रही दक्षिण एक्सप्रेस ट्रेन अंधेरे में उन्हें देख नहीं पाई और तेज रफ्तार से उनसे टकरा गई। इससे चरवाहे बेहद चिंतित हो गए और अविश्वास से रोने लगे।
यादद्री भोंगिर समाचार: सरकार ने पीड़ितों की मदद की अपील की
दुर्घटना में जान गंवाने वाले चरवाहों की पहचान पोचमपल्ली मंडल के जुलुरु के अलीनगर क्षेत्र के निवासी के रूप में हुई है। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें लगभग पचास लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। स्थानीय सरकारी अधिकारी बिरला इलय्या ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पीड़ितों से मुलाकात की। भेड़ पालक सरकार से पर्याप्त सहायता और समर्थन प्रदान करने की गुहार लगा रहे हैं।
आज के समय में जब शहरों में खाना ज्यादातर आधुनिक किचन और रेस्टोरेंट के माहौल में तैयार होता है, वहीं राजस्थान के भीलवाड़ा में एक ऐसी जगह है जहां भोजन का अनुभव बिल्कुल अलग है। यहां खेतों के बीच बैठकर मिट्टी के बर्तनों में तैयार किया गया देसी खाना परोसा जाता है।
खास बात यह है कि इस भोजनालय में इस्तेमाल होने वाली कई सब्जियां और अनाज उसी फार्म पर उगाए जाते हैं। देसी गाय के घी, मिट्टी के बर्तन और पत्तल-दोने में परोसा जाने वाला भोजन इस जगह को पारंपरिक ग्रामीण खान-पान का अनुभव देता है।
10 एकड़ बंजर जमीन को बनाया जैविक फार्म
भीलवाड़ा शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर ओज्यारा गांव में यह फार्म स्थित है। इसे भीलवाड़ा की पूर्वा जिंदल ने विकसित किया है।
पूर्वा ने मुंबई से एमबीए की पढ़ाई करने के बाद अपने परिवार के पारंपरिक कारोबार से अलग खेती और एग्रोटूरिज्म की दिशा में काम करने का फैसला किया। करीब 10 एकड़ बंजर और पथरीली जमीन को उन्होंने धीरे-धीरे खेती के लिए तैयार किया।
साल 2021 से जमीन को उपजाऊ बनाने का काम शुरू किया गया। मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया। पानी बचाने के लिए ड्रिप इरिगेशन और मल्चिंग जैसी तकनीकों को भी अपनाया गया।
आज इसी जमीन पर कई तरह की सब्जियां और फसलें उगाई जाती हैं।
खेत में ही उगती हैं कई सब्जियां
फार्म पर मौसम के अनुसार अलग-अलग फसलें तैयार की जाती हैं। इनमें ब्रोकली, गाजर, मूली, फूलगोभी, पत्तागोभी, टमाटर, मटर, तरबूज, भिंडी और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलें शामिल हैं।
इन्हीं खेतों में उगाई गई सामग्री से भोजन तैयार करने की कोशिश की जाती है। इससे खेत और भोजन के बीच सीधा जुड़ाव दिखाई देता है।
मिट्टी के बर्तनों में तैयार होता है खाना
पूर्वा ने फार्म हाउस में ही सात्विक भोजन के लिए एक रसोई तैयार करवाई है। यहां खाना पारंपरिक तरीके से मिट्टी के बर्तनों में पकाया जाता है।
भोजन को पत्तल में और दाल-सब्जियों को दोने में परोसने की व्यवस्था है। खेतों के बीच प्राकृतिक वातावरण में बैठकर खाना इस अनुभव को और खास बनाता है।
खाने में देसी गाय के घी का इस्तेमाल किया जाता है। फार्म पर कुछ गिर गाय भी पाली गई हैं, जिनके दूध से घी और छाछ जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
मेन्यू में क्या-क्या मिलता है?
यहां का मेन्यू मौसम के हिसाब से बदलता रहता है। उपलब्ध व्यंजनों में मक्के की रोटी, मेथी का पराठा, ब्रोकली-लेटिस सलाद, ताजी पत्तागोभी की सब्जी, हरे टमाटर की सब्जी, मूली का अचार और चुकंदर का हलवा शामिल हैं।
इसके अलावा ऑर्गेनिक दाल, आलू-मटर की सब्जी और गाय के दूध से तैयार छाछ भी परोसी जाती है। देसी घी से बनाया जाने वाला चुकंदर का हलवा भी यहां के खास व्यंजनों में शामिल है।
गायों से लेकर खेत तक जुड़ा है पूरा मॉडल
इस फार्म की एक और खासियत यह है कि यहां खेती और पशुपालन को एक-दूसरे से जोड़ा गया है। फार्म पर पाली गई गायों से मिलने वाले गोबर का इस्तेमाल खाद तैयार करने में किया जाता है, जबकि दूध से छाछ और घी जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
फार्म पर उगाई जाने वाली सब्जियां भी भीलवाड़ा शहर में ऑर्डर पर भेजी जाती हैं। यानी यहां सिर्फ भोजन परोसने का काम नहीं है, बल्कि खेती से लेकर खाने की थाली तक एक पूरा स्थानीय मॉडल तैयार किया गया है।
सिर्फ रविवार को मिलता है खेत वाला खाना
अगर कोई व्यक्ति इस खास माहौल में भोजन करना चाहता है तो उसे पहले से योजना बनानी पड़ती है। यहां भोजन हर दिन उपलब्ध नहीं होता। फार्म पर रविवार को भोजन करवाया जाता है।
फार्म पर जाने से करीब दो दिन पहले ऑर्डर देना होता है और कितने लोगों के लिए भोजन चाहिए, इसकी जानकारी पहले से देनी होती है। इससे उसी हिसाब से ताजा भोजन तैयार किया जा सके।
खाना ही नहीं, खेती का अनुभव भी
यहां आने वाले लोगों के लिए अनुभव सिर्फ खाना खाने तक सीमित नहीं रहता। कई लोग खेतों में घूमते हैं, खेती के काम को करीब से देखते हैं और ग्रामीण जीवन का अनुभव लेते हैं।
शहर की भागदौड़ से दूर खेतों के बीच बैठकर मिट्टी के बर्तनों में तैयार पारंपरिक भोजन करना उन लोगों के लिए अलग अनुभव हो सकता है, जो प्राकृतिक माहौल और देसी खान-पान को करीब से महसूस करना चाहते हैं।
भीलवाड़ा का यह फार्म इस बात का उदाहरण है कि खेती को सिर्फ फसल उत्पादन तक सीमित न रखकर उसे भोजन, ग्रामीण अनुभव और एग्रोटूरिज्म से भी जोड़ा जा सकता है। यहां की खासियत खेत में उगी सामग्री, पारंपरिक तरीके से तैयार भोजन और प्रकृति के बीच बैठकर खाने का अनुभव है।
धनबाद के “नटवरलाल” पंकज कुमार गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद वैसे तो उसे जेल भेज दिया गया है, लेकिन पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि पंकज अपने भाई और मां के साथ मिलकर ठगी का गिरोह चलाता था. वह झारखंड की एक बड़े अधिकारी और एक पूर्व मंत्री का भी बेधड़क नाम लेता था. 22 सितंबर को झरिया भूतगढ़िया की रहने वाली कुमारी रेणु की शिकायत पर धनबाद थाना में पंकज के अलावा उसके भाई यश कुमार गुप्ता और मां पूनम गुप्ता के खिलाफ ठगी मामले की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. उसके बाद सोमवार को उसकी गिरफ्तारी हुई है.
पिता ने भी ठगी का आरोप लगाने वालो का किया है समर्थन
पता चला है कि ठगी करने के लिए वह झारखंड की एक बड़े अधिकारी और मंत्री रहे नेता को अपना संबंधी बताता था. लोग बहुत आसानी से उसके झांसे में आ जाते थे और वह ठगी के शिकार हो जाते थे. पंकज के पिता का कहना है कि दोनों बेटे और उसकी पत्नी ठगी गिरोह चलाते है. विरोध करने पर मारपीट कर पंकज ने उसकी हड्डी तोड़ दी थी. पंकज घर का सामान निकाल कर बेच रहा है. छिनतई की घटना के दौरान पंकज का अंगूठा कट गया था. बाद में उसका इलाज कराया गया. एक दो नहीं बल्कि कई लोगों ने पंकज, उसके भाई पर ठगी के आरोप लगाए है.
पलामू से बगोदर तक के लोग लगा चुके है ठगी के आरोप जानकारी के अनुसार झरिया रजवाड़ी रोड निवासी पूजा सिंघल को सहायक प्रोटोकॉल पदाधिकारी बनाने का झांसा देकर रुपए लिए गए. डाल्टनगंज निवासी इंदेश कुमार तिवारी से नौकरी के नाम पर ठगी की गई. पलामू के शिवाकांत तिवारी से नौकरी के नाम पर पैसे वसूले गए. भोजपुर जिले के उदय शंकर राय से बीसीसीएल में नौकरी दिलाने के नाम पर रुपए लिए गए. झरिया स्टेशन रोड के रहने वाले राजकिशोर चौरसिया से जमीन बिक्री करने के लिए पैसे ठगे गए. झरिया कतरास रोड चौथाई कुल्ही निवासी मोदक से जमीन का फर्जी इकरारनामा करके पंकज ने उन्हें चूना लगाया. बगोदर गोपाल डीह निवासी प्रमोद कुमार ठाकुर से नौकरी लगाने के नाम पर पैसे लिए गए. झरिया के किशन कुमार पांडे से आईएसएम में नौकरी लगाने के नाम पर रुपए लिए गए. सरायढेला के देव दत्ता से मेडिकल कॉलेज अस्पताल में नौकरी लगाने के नाम पर रुपए लिए गए थे.
दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं, जिनसे जुड़ी कहानियां सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं। मेक्सिको का टिल्टेपेक गांव भी ऐसी ही जगहों में गिना जाता है। लंबे समय से इस गांव को लेकर यह चर्चा रही है कि यहां रहने वाले लोगों में बड़ी संख्या में अंधेपन की समस्या देखी गई और इसके पीछे एक रहस्यमयी पेड़ को जिम्मेदार माना जाता था।
कहा जाता था कि गांव में मौजूद एक खास पेड़ को देखने से इंसान की आंखों की रोशनी चली जाती है। हालांकि, बाद में वैज्ञानिक जांच में इस रहस्य के पीछे एक बीमारी की बात सामने आई।
रहस्यमयी पेड़ को माना जाता था वजह
स्थानीय मान्यता के मुताबिक, टिल्टेपेक में बाविन या लावलेजा नाम के एक विशेष पेड़ को लेकर डर की कहानी प्रचलित थी। लोगों के बीच यह धारणा थी कि इस पेड़ को देखने से आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।
कहानी इतनी प्रचलित हुई कि गांव में होने वाले अंधेपन को भी इसी पेड़ से जोड़कर देखा जाने लगा। लेकिन वैज्ञानिक नजरिए से अंधेपन की वजह कुछ और बताई गई।
बीमारी ने खोला अंधेपन का राज
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस इलाके में अंधेपन की समस्या का संबंध ओन्कोसिएरसीस नामक परजीवी संक्रमण से हो सकता है। इसे आम भाषा में रिवर ब्लाइंडनेस भी कहा जाता है।
यह बीमारी Onchocerca volvulus नामक परजीवी के कारण होती है। इसका संक्रमण संक्रमित ब्लैक फ्लाई यानी एक तरह की काली मक्खी के काटने से फैलता है।
बार-बार संक्रमित मक्खियों के काटने से शरीर में परजीवी का संक्रमण बढ़ सकता है और इसके गंभीर प्रभाव त्वचा तथा आंखों पर पड़ सकते हैं। आंखों को प्रभावित करने की स्थिति में यह बीमारी दृष्टि को नुकसान पहुंचा सकती है।
पेड़ नहीं, संक्रमण बना वजह
यानी जिस अंधेपन को कभी गांव के रहस्यमयी पेड़ से जोड़कर देखा जाता था, उसके पीछे वैज्ञानिक जांच में संक्रामक बीमारी को प्रमुख कारण माना गया।
रिवर ब्लाइंडनेस आमतौर पर उन इलाकों में पाई जाती है जहां संक्रमण फैलाने वाली ब्लैक फ्लाई का प्रकोप होता है। इन मक्खियों का संबंध बहते पानी वाले क्षेत्रों से भी होता है।
क्या गांव का हर व्यक्ति अंधा है?
टिल्टेपेक को लेकर इंटरनेट और लोकप्रिय कहानियों में अक्सर इसे ऐसा गांव बताया जाता है जहां सभी लोग अंधे हैं। लेकिन इस तरह का दावा बिना संदर्भ के करना सही नहीं है।
असल कहानी यह है कि गांव लंबे समय से रिवर ब्लाइंडनेस और उससे जुड़े दृष्टि संबंधी मामलों की चर्चा के कारण जाना जाता रहा है। बीमारी की मौजूदगी को लेकर वैज्ञानिक कारण सामने आने के बाद रहस्यमयी पेड़ वाली कहानी की जगह संक्रमण की वैज्ञानिक व्याख्या ने ले ली।
यह कहानी एक दिलचस्प उदाहरण है कि किसी बीमारी के कारणों की जानकारी उपलब्ध न होने पर उसके साथ किस तरह लोक-विश्वास और रहस्यमयी कहानियां जुड़ सकती हैं। वैज्ञानिक जांच के बाद उसी घटना की एक बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आ सकती है।