इंदौर।
मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के हीरानगर थाना क्षेत्र में कथित ऑनर किलिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, प्रेम संबंध का विरोध करने पर एक युवती की हत्या कर दी गई। आरोप है कि उसके भाई ने विवाद के दौरान उसका सिर दीवार से पटक दिया और गंभीर रूप से घायल होने के बाद मां के साथ मिलकर उसे जहर खिलाकर मामले को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की।
मृतका की पहचान ज्योति अग्रवाल के रूप में हुई है। पुलिस ने मामले में उसके भाई प्रकाश अग्रवाल और मां शीतल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि घटना वाली रात ज्योति अपने प्रेमी से मिलने घर से निकल रही थी, तभी परिवार ने उसे रोक लिया और विवाद हिंसक हो गया।
पुलिस के मुताबिक, ज्योति के घायल होने के बाद आरोपी उसे अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में परिजनों के बयान संदिग्ध लगे, जिसके बाद पुलिस ने अलग-अलग पूछताछ, फॉरेंसिक साक्ष्य और घर में लगे सीसीटीवी फुटेज की मदद से पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि घटना को आत्महत्या दिखाने के लिए जहर खिलाने की कोशिश की गई थी। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और पुलिस प्रारंभिक तौर पर इसे ऑनर किलिंग का मामला मान रही है।
फतेहपुर :
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को तार-तार कर दिया है। यहां औंग थाना क्षेत्र के परसदेपुर गांव में एक पत्नी की ऐसी ‘दरिंदगी’ देखने को मिली, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। शराब के नशे में धुत होकर घर पहुंचे पति से नाराज पत्नी इस कदर हैवान बन गई कि उसने अपने ही सुहाग को चारपाई से बांध दिया। इसके बाद उसे बेरहमी से पीटा और तड़पाने के लिए बिजली का करंट लगा दिया। चीख-पुकार सुनकर दौड़े पड़ोसियों ने किसी तरह गेट तुड़वाकर युवक की जान बचाई। पुलिस ने आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि लहूलुहान पति को गंभीर हालत में कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर किया गया है।
नशे में घर लौटा था पति, विवाद बढ़ा तो पत्नी बनी हैवान
जानकारी के मुताबिक, परसदेपुर गांव के रहने वाले संजीव तिवारी पेशे से हलवाई का काम करते हैं। रविवार रात वह अत्यधिक शराब के नशे में धुत्त होकर अपने घर पहुंचे थे। घर आते ही किसी बात को लेकर उनका अपनी पत्नी रन्नो देवी से विवाद हो गया। देखते ही देखते बहस इतनी बढ़ गई कि रन्नो देवी अपना आपा खो बैठी। उसने खौफनाक साजिश रचते हुए पहले संजीव को रस्सी से चारपाई पर जकड़ दिया ताकि वह हिल भी न सके। इसके बाद उसने डंडे से ताबड़तोड़ वार कर संजीव का सिर फोड़ दिया, जिससे पूरे घर में खून की नदियां बह गईं।
पैर के अंगूठे में बांधा बिजली का तार, तड़पाकर दिया करंट
हैवानियत की हदें तो तब पार हो गईं जब पत्नी ने तड़प रहे संजीव को बिजली के झटके देना शुरू किया। वारदात के बाद जब लोग अंदर पहुंचे तो संजीव के दाहिने पैर के अंगूठे और दाहिने हाथ की उंगली में बिजली का नंगा तार बंधा हुआ था। करंट लगने की वजह से पैर का अंगूठा पूरी तरह से काला पड़ चुका था। बेडरूम के अंदर लहूलुहान डंडा और बिजली के तार बिखरे पड़े थे, जो इस बात की गवाही दे रहे थे कि अंदर किस कदर खौफनाक यातनाएं दी गईं।
चीखें सुनकर दौड़े पड़ोसी, बंद दरवाजा देख उड़ गए होश
रात करीब 10:30 बजे जब संजीव के घर से असहनीय चीखें और रोने की आवाजें आने लगीं, तो परिवार के राहुल तिवारी और पड़ोसी शुभम द्विवेदी व भोले तिवारी समेत कई ग्रामीण वहां इकट्ठा हो गए। राहुल ने जब रन्नो से दरवाजा खोलने को कहा तो उसने अंदर से साफ मना कर दिया। भीतर से संजीव की चीखें और तेज होने पर ग्रामीणों ने अनहोनी की आशंका में जबरन दरवाजा खुलवाया। अंदर का नजारा देखकर वहां मौजूद हर शख्स के होश उड़ गए। ग्रामीणों ने तुरंत इस खौफनाक मंजर का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
कानपुर हैलट अस्पताल रेफर, आरोपी पत्नी सलाखों के पीछे
ग्रामीणों की सूचना पर डायल 112 और औंग थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने गंभीर रूप से घायल संजीव को तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) भिजवाया, जहां से डॉक्टरों ने उसकी नाजुक हालत को देखते हुए जिला अस्पताल और फिर वहां से कानपुर के हैलट अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
औंग थाना प्रभारी निरीक्षक दिनेश कुमार शुक्ला ने बताया कि पीड़ित के भाई (देवर) मनीष की तहरीर पर आरोपी महिला रन्नो देवी के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मौके से साक्ष्य जुटाकर कानूनी कार्रवाई में जुटी है। घायल पति की हालत में थोड़ा सुधार होने के बाद उसके मजिस्ट्रेट बयान दर्ज कराए जाएंगे।
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित मोदीनगर के पूठरी गांव में एक मामूली से मजाक का बदला लेने के लिए एक सनकी युवक ने गद्दा फैक्टरी के कर्मचारी की दरांती से गोदकर निर्मम हत्या कर दी। मृतक की पहचान तरुण उर्फ नमित के रूप में हुई है, जो मूल रूप से मुजफ्फरनगर के खतौली का निवासी था और पिछले दो साल से पूठरी गांव में सपरिवार किराए पर रह रहा था।
तरुण रविवार शाम को टहलने निकला था, जिसके बाद वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया। सोमवार सुबह गांव से करीब 500 मीटर दूर एक गन्ने के खेत में उसका लहूलुहान और क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। आरोपी ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए तरुण की दोनों आंखें फोड़ दीं और उसके चेहरे, गर्दन, पेट तथा निजी अंगों पर दरांती से अनगिनत वार कर उसकी आंतें तक बाहर निकाल दीं। वह शव को बोरे में भरकर ठिकाने लगाने की फिराक में था, लेकिन नाकाम रहने पर वहीं छोड़कर भाग गया।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूठरी गांव के ही निवासी निरांचल उर्फ ‘मंत्री'(33) को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। आरोपी ने बताया कि कुछ दिन पहले तरुण और उसके दोस्तों ने उसे ‘भंगजी बाबा’ कहकर उसका मजाक उड़ाया था, जिससे वह बेहद आक्रोशित था।
रविवार शाम को जब तरुण अकेले निवाड़ी रोड की तरफ जा रहा था, तब उसने फिर से निरांचल पर वही तंज कस दिया, जिससे गुस्साए आरोपी ने अपने पास छिपाई दरांती से उस पर हमला कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी निरांचल बेहद सनकी प्रवृत्ति का है, मजदूरी करता है और नशे का आदी होने के साथ-साथ तांत्रिक क्रियाओं में भी रुचि रखता है।
उसने बताया कि हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद उसने शव के पास खड़े होकर संस्कृत के श्लोक भी पढ़े थे। वह इस मजाक से इतना आहत था कि गांव के कुछ अन्य लड़कों को भी ठिकाने लगाने की फिराक में था और तीन दिन पहले उसने प्रिंस नाम के एक अन्य युवक पर भी हमला किया था, लेकिन बीच-बचाव के कारण वह बच गया था।
वारदात के बाद आरोपी मृतक का मोबाइल फोन अपने साथ घर ले गया था, जिसकी लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर पुलिस ने उसे दबोच लिया और उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई दरांती भी बरामद कर ली है। इस खौफनाक घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
मृतक तरुण अपने घर का सबसे बड़ा बेटा था और परतापुर की एक गद्दा फैक्टरी में काम कर अपने गरीब परिवार का भरण-पोषण करने में मदद करता था। उसके पिता निर्दोष सैन मजदूरी करते हैं और तरुण की मौत के बाद से मां मधुबाला, भाई और दोनों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़ित परिवार ने पुलिस-प्रशासन से आरोपी को सख्त से सख्त सजा देने की मांग की है।
तेलंगाना के निजामाबाद से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला ने प्रेम प्रसंग की वजह से अपने पति की हत्या कर दी। हत्या का तरीका बेहद चौंकाने वाला था। जानकारी के मुताबिक महिला ने पहले अपने पति की एक बिल्डिंग से धक्का देकर हत्या करने की कोशिश की। हालांकि बिल्डिंग से गिरने के बाद पति बच गया था। बाद में महिला ने प्रेमी के कहने पर पति को कैनुला के जरिए टॉयलेट क्लीनर का इंजेक्शन दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
मृतक की मां ने बहू पर जताया शक
पुलिस ने सोमवार को बताया कि तेलंगाना के निजामाबाद जिले में एक महिला ने कथित तौर पर अपने पति को कैनुला के जरिए टॉयलेट क्लीनर का इंजेक्शन देकर मार डाला, जब उसका इलाज चल रहा था। मृतक की मां ने 1 जुलाई को शिकायत की कि उन्हें 30 जून को अपने बेटे प्रशांत (35) की मौत के बारे में पता चला, जो खाड़ी देश में काम करता था। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उन्हें अपने बेटे के घर आने और उसकी मौत से पहले हुई घटनाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। मृतक की मां ने कहा कि उनके बेटे की मौत रहस्यमयी तरीके से हुई और उन्होंने अपनी बहू संध्या पर शक जताया।
बिल्डिंग से धकेलकर हत्या की कोशिश
पुलिस जांच में सामने आए तकनीकी सबूतों और तथ्यों के अनुसार, संध्या (32) का अनिल (35) नाम के व्यक्ति के साथ अवैध संबंध था। पुलिस की एक विज्ञप्ति के अनुसार, संध्या और अनिल ने प्रशांत को रास्ते से हटाने की योजना बनाई थी क्योंकि उन्हें लगता था कि वह उनके रिश्ते में बाधा है। उनकी साजिश के तहत, उन्होंने प्रशांत को मारने की योजना को अंजाम देने के लिए वेंकटा साईं की मदद ली। योजना के अनुसार, वेंकटा साईं 29 जून को प्रशांत के घर गया और उसे बहुत ज़्यादा शराब पिलाई। इसके बाद उसने प्रशांत को इमारत से नीचे धकेल दिया।
कैनुला के जरिए दिया टॉयलेट क्लीनर का इंजेक्शन
हालांकि, प्रशांत को गंभीर चोटें आईं, लेकिन उसकी मौत नहीं हुई। संध्या और वेंटका साईं, प्रशांत को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल ले गए। यहां, उन्होंने उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन बाद में घर ले आए। अनिल के उकसाने पर, संध्या ने कैनुला के जरिए प्रशांत को टॉयलेट क्लीनर और एनेस्थीसिया की दवा का इंजेक्शन दिया। संध्या ने प्रशांत को खाट से नीचे भी धकेल दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। आरोपियों ने जांच के दौरान अपनी मर्जी से अपना अपराध कबूल कर लिया। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जिसने उन्हें जेल भेज दिया।
ग्वालियर के आरती हत्याकांड में आरोपी धर्मेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है. वो आरती के साथ लिव-इन में रहने के बीच उसके फुफेरे भाई से बढ़ती नजदीकियों को लेकर नाराज था. उसने बताया कि वो अलग रहकर भी मेरे डोक्यूमेंट का इस्तेमाल कर रही थी
Gwalior Aarti Murder Case: ग्वालियर के बहुचर्चित आरती हत्याकांड के मुख्य आरोपी और पूर्व लिव-इन पार्टनर धर्मेंद्र को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. इस केस में आए दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे थे लेकिन अब धर्मेंद्र की दबिश के बाद उसके आरती के अपने फुफेरे भाई से बढ़ती नजदीकियों का राज खोला है. पुलिस को दिए बयान में धर्मेंद्र ने बताया कि किस तरह बेरहमी से उसने आरती का गला घोंटकर हत्या कर दी थी. आरोपी ने आरती की निर्मम हत्या के लिए जिम्मेदार वजह का भी खुलासा किया और मृतका आरती पर उसे धोखा देने के आरोप लगाए हैं.
धर्मेंद्र को धोखा दे रही थी आरती
पुलिस को दिए बयान में आरती के पूर्व बॉयफ्रेंड धमेंद्र ने खुलासा किया कि आरती उसके साथ लिव-इन में रहने के बावजूद धोखा दे रही थी. धर्मेंद्र ने कहा कि आरती मुझे धोखा देकर पीछे से मेरे फुफेरे भाई संजू के साथ संबंध बना रही थी. फिर उसी के साथ रहने लगी. उसके सरकारी कागज और आधार कार्ड में मेरा नाम था जिसका वो फायदा उठा रही थी. धर्मेंद्र ने बताया कि आरती का इस कदर बदलता रवैया उससे बर्दाश्त नहीं हुआ, इसलिए गला घोंटकर आरती को मौत के घाट उतार दिया.
जब समाज का सबसे पढ़ा-लिखा बौद्धिक तबका भी अंधविश्वास के जाल में फंस जाए, तो मामला गंभीर हो जाता है. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां ‘चावल वाले बाबा’ के नाम से मशहूर एक कथित तांत्रिक ने नोएडा निवासी एक बड़े डॉक्टर को अपना शिकार बना लिया. दरअसल भाई की संदिग्ध मौत का सच जानने और अपने बेटों को ‘प्रेत बाधा’ से बचाने के फेर में डॉक्टर इस शातिर बाबा के जाल में ऐसे उलझे कि उन्होंने अपनी जिंदगी की गाढ़ी कमाई के 40 लाख रुपये लुटा दिए. नोएडा के डॉक्टर ऋषभ चौबे की शिकायत पर रायपुर की खम्हारडीह थाना पुलिस ने अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं.
यहां से शुरू हुआ ‘माइंड गेम’
यह पूरी कहानी एक डॉक्टर की उस लाचारी और दुख से जुड़ी है, जिसका फायदा इस ढोंगी बाबा ने उठाया. दरअसल, डॉक्टर ऋषभ चौबे के छोटे भाई दिव्य देव चौबे की 11 अगस्त 2024 को मध्य प्रदेश के इंदौर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी, उनका शव एक कार में मिला था.
भाई की इस रहस्यमयी मौत से टूट चुके डॉक्टर ऋषभ अक्टूबर 2024 में रायपुर के गीतांजलि नगर में अपने एक परिचित के यहां आए थे. यहीं उन्हें ‘चावल वाले बाबा’ उर्फ नरेंद्र नयन शास्त्री के बारे में पता चला, जो तंत्र-मंत्र से सब कुछ ठीक करने का दावा करता था. भाई की मौत का सच जानने की चाहत में जब डॉक्टर बाबा के पास पहुंचे, तो बाबा ने उनकी लाचारी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया.
बेटों पर ‘प्रेत साए’ का खौफ और लाखों की वसूली
डॉक्टर की कमजोरी भांपते ही कथित बाबा नरेंद्र नयन शास्त्री ने एक खौफनाक ताना-बाना बुना. उसने दावा किया कि वह अपनी शक्तियों से भाई की मौत की वजह तो बता देगा, लेकिन डॉक्टर के पूरे परिवार पर एक भयानक प्रेत बाधा का साया है. बाबा ने डॉक्टर को डराते हुए कहा कि अगर तुरंत इसका उपाय नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में उनके बेटों पर भी इस प्रेत आत्मा का संकट आ जाएगा. एक पिता और भाई के रूप में डॉक्टर ऋषभ इस कदर डर गए कि उन्होंने बाबा की हर बात माननी शुरू कर दी. इसके बाद अक्टूबर 2024 से लेकर जनवरी-फरवरी 2026 के बीच बाबा ने डॉक्टर से लाखों रुपये ऐंठना शुरू कर दिया. ये भी पढ़ें:घर भी संवारा, खेत भी महकाया: मिलिए छत्तीसगढ़ की इस कमाल की सास-बहू की जोड़ी से, परिवार को ऐसे दी आर्थिक मजबूती
लग्जरी कार, कैश और हवाई सफर: बाबा के ठाठ-बाठ का खर्च
बताया जा रहा है कि तंत्र-मंत्र की आड़ में इस कथित बाबा के शौक बेहद आलीशान थे. मई 2025 में बाबा ने अपनी सुख-सुविधा के लिए एक महंगी कार खरीदने के नाम पर डॉक्टर से सीधे अपने बैंक खाते में 20 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए. इसके अलावा, अलग-अलग समय पर पूजा-पाठ, तांत्रिक अनुष्ठान और प्रेत बाधा दूर करने के नाम पर करीब 10 लाख रुपये नकद (कैश) वसूले गए. इतना ही नहीं, बाबा के दौरों, वीआईपी ट्रीटमेंट और एयर टिकट्स (हवाई यात्राओं) के नाम पर भी डॉक्टर से करीब 10 लाख रुपये खर्च करवाए गए. कुल मिलाकर करीब 40 लाख रुपये फूंकने के बाद जब डॉक्टर को ठगी का अहसास हुआ, तब तक पानी सिर से ऊपर जा चुका था.
मुजफ्फरपुर में कथित अपहरण का हाई-प्रोफाइल मामला अब महज किडनैपिंग की कहानी नहीं, बल्कि इश्क, इंतकाम और कानून के टकराव की दास्तान बनता नजर आ रहा है। जिस थार गाड़ी पर राजद का बैनर और पोस्टर लगा था, उससे युवक के अपहरण की सूचना ने पहले पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया। लेकिन जैसे-जैसे तहकीकात आगे बढ़ी, वैसे-वैसे कहानी का रुख बदलता गया। अब जांच की सुई प्रेम प्रसंग की तरफ घूम गई है, जहां एक युवती के प्यार ने कथित तौर पर एक युवक को अस्पताल और दूसरे को हवालात पहुंचा दिया।
पूरा घटनाक्रम काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के सर्किट हाउस के पास का है। रविवार की शाम करीब चार बजे पुलिस को सूचना मिली कि राजद के झंडे और पोस्टर लगी एक थार गाड़ी से एक युवक का अपहरण कर लिया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी गई। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और संदिग्ध थार की पहचान कर ली गई।
इसी बीच दूसरी सूचना आई कि जिस युवक को कथित तौर पर अगवा किया गया था, उसे चांदनी चौक के पास घायल अवस्था में छोड़कर थार सवार फरार हो गए हैं। पुलिस मौके पर पहुंची, घायल युवक को अस्पताल में भर्ती कराया और उसके बयान के आधार पर जांच का दायरा और तेज कर दिया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी किया गया। वाहन जांच अभियान शुरू हुआ और महज तीन घंटे के भीतर पुलिस ने सरैया थाना क्षेत्र से संदिग्ध थार को जब्त कर लिया। साथ ही कांटी थाना क्षेत्र के दामोदरपुर निवासी मोहम्मद रहमान को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि उसके कुछ साथी मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए। गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि फरार लोगों की तलाश जारी है।टाउन डीएसपी सुरेश कुमार के अनुसार, प्रारंभिक जांच में मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। पुलिस सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है और घटना के पीछे की असली वजह तलाशने में जुटी है।
सूत्रों की मानें तो इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में शहर की एक युवती है, जिससे दोनों युवकों का प्रेम संबंध होने की बात सामने आई है। जब एक युवक को दूसरे के रिश्ते की भनक लगी तो दोनों के बीच पहले भी मारपीट हुई थी। लेकिन इस बार मामला कथित तौर पर अपहरण और हमले तक पहुंच गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब जज़्बात पर कानून भारी पड़ता है, तो अंजाम अदालत और अस्पताल के बीच ही तय होता है। मोहब्बत अगर भरोसे और तहज़ीब की राह छोड़कर ज़बरदस्ती, हिंसा और बदले की शक्ल अख्तियार कर ले, तो वह इश्क नहीं, जुर्म की दास्तान बन जाती है।फिलहाल पुलिस इस कथित लव ट्रायंगल के हर पहलू की पड़ताल कर रही है। कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर फरार आरोपियों की तलाश जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि यह मामला केवल प्रेम प्रसंग की रंजिश था या इसके पीछे कोई और गहरी साजिश भी छिपी हुई है।
जयपुर में 4 जुलाई को महिला नीरज शर्मा की हादसे में मौत नहीं हुई थी, ब्लकि उसकी हत्या कराई गई थी. हत्या कराने वाला कोई और नहीं, बल्कि उसकी बेटी आयुषी, जेठ मोहन और जेठ का बेटा बलराम है. जयपुर पुलिस ने आज हत्याकांड का खुलासा किया. पुलिस ने आयुषी, मोहन सहित 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. बलराम फरार चल रहा है. कांस्टेबल दयाराम और गणेश की हत्याकांड के खुलासे में विशेष भूमिका रही.
स्कॉर्पियो से कुचलवाया
डीसीपी जयपुर ईस्ट रंजिता शर्मा ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि 4 जुलाई को प्रताप नगर थाना क्षेत्र में स्कॉर्पियो की टक्कर से महिला नीरज शर्मा की मौत हो गई थी. जांच में सामने आया कि हादसा नहीं, बल्कि हत्या है. महिला नीरज शर्मा के पति एक कोर्ट में LDC के पद पर थे. एक साल पहले उनकी मौत हो गई थी. नीरज शर्मा अपने पति की जगह नौकरी पाई थी. नीरज की बेटी आयुषी (24) मां की नौकरी पाना चाहती थी, इस लिए उसकी हत्या करवा दी.
बेटी ने हत्या की रची साजिश
पुलिस ने बताया कि आयुषी ने ताऊ मोहन और ताऊ के बेटे बलराम के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची. इन्होंने अपने नजदीकी रिश्तेदार हेमंत को 7 लाख रुपये की सुपारी दी. इसके बाद हेमंत ने अपने साथियों आकाश, अरविंद, रोहित और मोहित के साथ मिलकर हत्या को अंजाम दिया. पुलिस ने बताया कि इनकी क्राइम कुंडली की तलाश की जा रही है. सभी आरोपी भरतपुर के रहने वाले हैं.
महिला के भाई को हुआ था शक
महिला नीरज शर्मा के भाई राकेश कुमार शर्मा को हादसे की कहानी हजम नहीं हुई. वे पुलिस के पास पहुंचे और मामला दर्ज करवाया. उन्होंंने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उनकी भांजी आयुषी शर्मा ने फोन करके हादसे में मौत की जानकारी दी थी. राकेश ने बताया कि उसकी बहन बहुत दिनों से परेशान थी और कई बार फोन करके बताया था कि उसकी बेटी, जेठ और जेठ का बेटा संपत्ती के लिए टॉचर्र करते थे.
हत्या की जताई आशंका
राकेश ने पुलिस से संदेह जताया कि उसकी बहन की जान हादसे में नहीं गई, बल्कि हत्या कराई गई है. इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की तो पूरा मामला खुल गया. पुलिस ने घटना स्थल पर पूछताछ की तो लोगों ने बताया कि तेज रफ्तार गाड़ी आई और उसने महिला को टक्कर मार दी. इसके बाद पुलिस ने गाड़ी और उसके ड्राइवर को पकड़कर शक्ति से पूछताछ की तो उसने पूरा राज उगल दिया, और हत्याकांड का खुलासा हो गया.
दिल्ली के अरुणा आसफ अली अस्पताल से रविवार सुबह एक बंद कमरे से युवा डॉक्टर की लाश बरामद हुई. जीवन रक्षक दवाओं से मरीजों को दर्द से निजात दिलाने वाले एनेस्थीसिया एक्सपर्ट ने खुद को ही मौत का इंजेक्शन लगा लिया. डॉ. सिमरप्रीत आनंद (30) की इस खौफनाक सुसाइड मिस्ट्री ने न सिर्फ अस्पताल प्रशासन बल्कि पूरी मेडिकल सोसायटी को हिलाकर रख दिया है. मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब मृतक के परिजनों ने अस्पताल की ही एक साथी महिला डॉक्टर पर हत्या की साजिश रचने का संगीन आरोप लगा दिया.
दरअसल, डॉ सिमरप्रीत आनंद मूल रूप से पंजाब के लुधियाना के रहने वाले थे. वर्तमान में वह दिल्ली के लाजपत नगर में रहते थे. साल 2023 में दिल्ली सरकार की चिकित्सा सेवा में चयनित होने वाले सिमरप्रीत पिछले दो वर्षों से इस अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे थे. शनिवार रात 8 बजे से उनकी नाइट ड्यूटी शुरू हुई थी, जो रविवार सुबह 8 बजे खत्म होनी थी.
ड्यूटी बदलने के वक्त मचा हड़कंप
सुबह जब ड्यूटी बदलने का वक्त आया, तो डॉ. सिमरप्रीत अपने कमरे से बाहर नहीं निकले. स्टाफ ने फोन मिलाया, घंटियां गूंजती रहीं पर कोई जवाब नहीं आया. अनहोनी की आशंका में जब दरवाजा खटखटाया गया, तो भीतर खामोशी थी. आखिरकार अस्पताल प्रशासन की मौजूदगी में दरवाजा तोड़ा गया. बिस्तर पर डॉ सिमरप्रीत बेहोश पड़े थे. उन्हें तुरंत इमरजेंसी ले जाया गया, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं.
सुसाइड नोट में छिपी टूटे दिल की दास्तान
उत्तरी दिल्ली के डीसीपी राजा बांठिया ने बताया कि सिविल लाइंस थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जब कमरे की तलाशी ली, तो वहां से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ. यह सुसाइड नोट किसी गहरी मानसिक उलझन और टूटे हुए रिश्ते की गवाही दे रहा था. पुलिस के मुताबिक, नोट में डॉ सिमरप्रीत ने अपनी निजी जिंदगी, पारिवारिक तनाव और एक पेचीदा प्रेम प्रसंग का जिक्र किया है. प्यार में मिले धोखे और रिश्तों की कशमकश से तंग आकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया.
डीसीपी राजा बांठिया के मुताबिक, “शुरुआती जांच और सुसाइड नोट से मामला प्रेम प्रसंग में उपजे तनाव का लग रहा है. शव पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं हैं, जिससे प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का ही मामला प्रतीत होता है.”
परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप
घटना की सूचना मिलते ही मृतक डॉक्टर के परिवार में कोहराम मच गया. मृतक के चाचा ने इस मामले में सीधे अस्पताल की ही एक महिला डॉक्टर की तरफ इशारा करते हुए सनसनीखेज आरोप लगाया है. परिजनों का दावा है कि यह महज आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है.
फॉरेंसिक जांच और मेडिकल बोर्ड पर टिकी निगाहें
परिजनों के आरोप और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने पूरे क्राइम सीन कमरे को सील कर दिया है. पुलिस की जांच टीम ने क्राइम सीन से एनेस्थीसिया के इंजेक्शन, सिरिंज और अन्य जरूरी सबूत जुटाए गए हैं, जिन्हें FSL फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया है. मौत के सटीक कारणों और एनेस्थीसिया के ओवरडोज की पुष्टि के लिए डॉक्टरों के एक स्पेशल मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने का फैसला लिया गया है.
स्टाफ और करीबी दोस्तों से हो रही पूछताछ
पुलिस फिलहाल अस्पताल के स्टाफ, साथी डॉक्टरों और डॉ. सिमरप्रीत के करीबी दोस्तों से पूछताछ कर रही है. आखिर उस रात ऐसा क्या हुआ था जिसने एक काबिल डॉक्टर को मौत गले लगाने पर मजबूर कर दिया? इसका मुकम्मल सच फॉरेंसिक रिपोर्ट और पुलिसिया तफ्तीश के बाद ही सामने आ पाएगा.
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में स्कूटी से प्रतिबंधित मांस के कथित अवैध परिवहन का मामला सामने आया है. बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक युवक का पीछा कर उसे पकड़ लिया और आरोप लगाया कि उसकी स्कूटी की डिग्गी से करीब 30 किलो प्रतिबंधित मांस बरामद हुआ है. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, युवक को हिरासत में लिया और मांस को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी. इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
20 किलोमीटर पीछा करने का दावा
जानकारी के मुताबिक, मंझनपुर कोतवाली क्षेत्र के आजाद नगर निवासी मुस्तकीम अहमद स्कूटी से कथित तौर पर प्रतिबंधित मांस लेकर जा रहा था. आरोप है कि वह इसे प्रयागराज से लाकर सप्लाई करने वाला था. इसी दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उसका करीब 20 किलोमीटर तक पीछा किया और भड़ेसर गांव के पास उसे रोक लिया.
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि स्कूटी की डिग्गी की तलाशी लेने पर उसमें करीब 30 किलो प्रतिबंधित मांस मिला. इसके बाद युवक की पिटाई भी की गई. बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया.
पुलिस ने क्या कहा?
डीएसपी सदर शिवांक सिंह ने बताया कि सूचना मिली थी कि एक संदिग्ध व्यक्ति स्कूटी से प्रतिबंधित मांस का अवैध परिवहन कर रहा है. सूचना मिलते ही मंझनपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मांस को कब्जे में ले लिया.
उन्होंने बताया कि पशु चिकित्सा अधिकारी के निर्देशन में गठित डॉक्टरों की टीम ने वीडियोग्राफी के साथ मांस की सैंपलिंग कराई है. अब इसकी जांच कराई जाएगी.
पूछताछ में क्या सामने आया?
डीएसपी के मुताबिक, हिरासत में लिए गए व्यक्ति की पहचान मुस्तकीम अहमद पुत्र इश्तियाक के रूप में हुई है, जो मंझनपुर का रहने वाला है. प्रारंभिक पूछताछ में उसने बताया कि वह यह मांस प्रयागराज जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र स्थित मंसूराबाद से व्यवसायिक उद्देश्य से लेकर आया था.
पुलिस के अनुसार, बरामद मांस की मात्रा करीब 30 किलो है. इस मामले में थाना मंझनपुर में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
Note: पुलिस ने मांस को जांच के लिए सैंपलिंग कराई है. प्रतिबंधित मांस होने की पुष्टि जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी.