Blog

  • कूवर की Sam Kee Building क्यों है इतनी पतली? इसके पीछे छिपी है हैरान कर देने वाली वजह…

    कूवर की Sam Kee Building क्यों है इतनी पतली? इसके पीछे छिपी है हैरान कर देने वाली वजह…

    Featured Image

    Sam Kee Building कनाडा के Vancouver शहर में स्थित एक अनोखी इमारत है, जो अपनी असाधारण पतली बनावट के कारण दुनियाभर में मशहूर है। पेंडर स्ट्रीट पर बनी यह इमारत Guinness World Records में दुनिया की सबसे संकरी व्यावसायिक इमारत के रूप में दर्ज है। इसकी चौड़ाई मात्र 4 फीट 11 इंच है, जो इसे एक अनोखा वास्तु उदाहरण बनाती है। बता दें कि एक चीनी व्यापारी के अपमान और गुस्से से उपजा विरोध का प्रतीक है, जिसने सरकार को अपनी जिद के आगे झुकने पर मजबूर कर दिया।

    जानें इस इमारत की कहानी

    इस इमारत की कहानी 1902 से शुरू होती है, जब चीनी मूल के व्यापारी Chang Toy, जिन्हें सैम की के नाम से जाना जाता था, ने एक बड़ा प्लॉट खरीदा था, लेकिन 1912 में नगर प्रशासन ने सड़क चौड़ीकरण के लिए उनकी जमीन का बड़ा हिस्सा अधिग्रहित कर लिया। मुआवजा न मिलने पर टॉय ने इसे अपमान माना और बची हुई बेहद पतली जमीन पर ही इमारत बनाने का निश्चय किया। Chang Toy आर्किटेक्ट ब्राउन और गिलम की मदद से एक स्टील-फ्रेम संरचना तैयार करवाई, जो सीमित जगह में भी खड़ी हो सके। इमारत का निचला हिस्सा बेहद संकरा है, जबकि ऊपर की मंजिल पर बाहर की ओर निकली खिड़कियों (बे विंडो) के कारण चौड़ाई करीब 6 फीट तक पहुंच जाती है। इसके अलावा, इसका बेसमेंट फुटपाथ के नीचे तक फैला हुआ है, जिससे उपयोगी जगह बढ़ाई गई।

    दुकानों के रूप में किया जाता है उपयोग

    शुरुआत में ऊपरी मंजिलों का इस्तेमाल रहने के लिए और निचले हिस्से का उपयोग दुकानों के रूप में किया जाता था। बेसमेंट खासतौर पर स्थानीय चीनी समुदाय के लिए उपयोगी था, जहां सार्वजनिक स्नानघर और नाई की सेवाएं उपलब्ध थीं। समय के साथ इस इमारत से जुड़ी कई अफवाहें भी फैलीं, जैसे कि इसके नीचे गुप्त सुरंगें हैं, हालांकि इसका कोई प्रमाण नहीं मिला।

    पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र

    यह इमारत न केवल अपने अनोखे डिजाइन के लिए, बल्कि चाइनाटाउन के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसे 1966 और 1986 में पुनर्स्थापित किया गया। आज भी यह इमारत पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है और वास्तुकला की दुनिया में एक अनोखी मिसाल मानी जाती है।

  • ज्वेलरी शॉप लूटकांड में चौंकाने वाला खुलासा! ‘आंखें’ फिल्म से प्रेरित होकर रची वारदात, 2 आरोपी दबोचे गए..

    ज्वेलरी शॉप लूटकांड में चौंकाने वाला खुलासा! ‘आंखें’ फिल्म से प्रेरित होकर रची वारदात, 2 आरोपी दबोचे गए..

    ज्वेलरी शॉप लूटकांड में चौंकाने वाला खुलासा! ‘आंखें’ फिल्म से प्रेरित होकर रची वारदात, 2 आरोपी दबोचे गए..

    जिले के कटघोरा थाना क्षेत्र के छुरी स्थित राज ज्वेलर्स में बीते 1 जुलाई को हुई सनसनीखेज लूट की वारदात का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि तीसरा आरोपी अब भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।

    पुलिस ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपियों ने ‘आंखें’ फिल्म की कहानी से प्रेरित होकर लूट की साजिश रची थी। तीनों की दोस्ती पहले जेल में हुई थी, जहां उन्होंने वारदात की योजना बनाई।

    ग्राहक बनकर पहुंचे, महिला का भी बनाया भेष

    पुलिस के मुताबिक, घटना के दिन दोपहर करीब 1 बजे दुकान संचालक राजकुमार अग्रवाल दुकान में अकेले मौजूद थे। इसी दौरान बिना नंबर प्लेट वाली मोटरसाइकिल पर सवार तीन लोग ग्राहक बनकर दुकान पहुंचे। तीनों ने गमछे से अपना चेहरा ढक रखा था, जबकि एक आरोपी महिला के भेष में था।

    आरोपियों ने चांदी की अंगूठी दिखाने के बहाने दुकानदार को काउंटर तक बुलाया और मौका मिलते ही दुकान का दरवाजा बंद कर दिया। इसके बाद एक आरोपी ने देशी कट्टा तान दिया, जबकि दूसरे ने दुकानदार की आंखों में मिर्च पाउडर डालने की कोशिश की।

    हालांकि, दुकान के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी तो आरोपी घबरा गए और देशी कट्टा तथा चोरी की मोटरसाइकिल मौके पर छोड़कर फरार हो गए।

    दो आरोपी गिरफ्तार, एक की तलाश जारी

    मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की। जशपुर, पत्थलगांव, धरमजयगढ़, सीतापुर और अंबिकापुर के जंगलों से लगे इलाकों में लगातार दबिश दी गई।

    मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गोपाल सिंह गोंड (38 वर्ष), निवासी घुचापुर, थाना पसान और परदेशी राठिया (40 वर्ष), निवासी जिलगा बरपाली, थाना श्यांग के रूप में हुई है। वहीं विष्णु प्रसाद राठिया, निवासी कोलगा, थाना करतला अभी फरार है।

    जेल में हुई दोस्ती, फिल्म देखकर बनाया प्लान

    पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि तीनों पहले हत्या, दुष्कर्म सहित अन्य गंभीर मामलों में जेल जा चुके हैं। जेल में ही उनकी दोस्ती हुई और वहीं उन्होंने फिल्म ‘आंखें’ की कहानी से प्रेरणा लेकर ज्वेलरी शॉप में लूट की योजना बनाई। वारदात को अंजाम देने के लिए चोरी की मोटरसाइकिल और देशी कट्टे का इस्तेमाल किया गया था।

    पुलिस टीम की रही अहम भूमिका

    इस पूरे मामले का खुलासा पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीतीश ठाकुर और सीएसपी विमल पाठक के मार्गदर्शन में किया गया। कार्रवाई में कटघोरा थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम शामिल रही।

    इस अभियान में थाना प्रभारी मोतीलाल पटेल, निरीक्षक धर्मनारायण तिवारी, साइबर उपनिरीक्षक अजय सोनवानी सहित कटघोरा पुलिस की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपी की तलाश जारी है और जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

  • सौतेली बेटी से दुष्कर्म के आरोपी की पुलिस हिरासत में तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में हुई मौत; परिजनों ने पुलिस पर मारपीट का लगाया आरोप..

    सौतेली बेटी से दुष्कर्म के आरोपी की पुलिस हिरासत में तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में हुई मौत; परिजनों ने पुलिस पर मारपीट का लगाया आरोप..

    सौतेली बेटी से दुष्कर्म के आरोपी की पुलिस हिरासत में तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में हुई मौत; परिजनों ने पुलिस पर मारपीट का लगाया आरोप..

     शाहजहांपुर जिले में अपनी सौतेली बेटी से दुराचार करने के आरोपी एक व्यक्ति की पुलिस हिरासत में तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गयी। घटना के बाद परिजनों ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया है। परिजनों ने पुलिस की पिटाई से मौत होने का आरोप लगाया। 

    पुलिस ने आरोपों से किया इंकार 
    वहीं पुलिस ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि आरोपी की अचानक तबीयत बिगड़ी थी और उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने सोमवार को बताया कि इस मामले में एक जांच टीम गठित की गई है जो पूरे मामले की जांच कर रही है और इस मामले में कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया गया तो उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी। 

    बेटी को ससुराल में रहने नहीं दे रहा था आरोपी पिता
    दीक्षित ने बताया कि सिधौली क्षेत्र की रहने वाली 17 वर्षीय एक लड़की ने रविवार शाम को थाने में दी गयी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसका सौतेला पिता प्रदीप (36) पिछले तीन साल से उसके साथ दुराचार कर रहा है। पुलिस अधीक्षक के अनुसार लड़की ने बताया कि इसी साल अप्रैल में उसकी शादी हो गई, जिसके बाद से सौतेला पिता उसे ससुराल में रहने नहीं दे रहा है। दीक्षित ने बताया कि शिकायत के बाद रविवार शाम को आरोपी को पूछताछ के लिए थाने लाया गया लेकिन रात में सांस लेने में दिक्कत की वजह से उसकी तबीयत बिगड़ने लगी जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसे स्थानीय सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया मगर वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। 

    प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉक्टर जफर सैफी ने बताया कि पुलिस रात में प्रदीप को लेकर आई थी। उन्होंने बताया कि वह उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) का मरीज था और जब उसे स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था तब उसका रक्तचाप काफी बढ़ा था और वह बेहोशी की हालत में था। सैफी ने बताया कि प्राथमिक उपचार के बाद ऑक्सीजन लगाकर उसे मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया था। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया है। 

  • किडनी के मरीजों के लिए कौन-से फल हैं सुरक्षित और किनसे बचना चाहिए? डॉक्टर ने बताया

    किडनी के मरीजों के लिए कौन-से फल हैं सुरक्षित और किनसे बचना चाहिए? डॉक्टर ने बताया

    किडनी के मरीजों के लिए कौन-से फल हैं सुरक्षित और किनसे बचना चाहिए? डॉक्टर ने बताया

    जब बॉडी को हेल्दी रखने के लिए हेल्दी डाइट का जिक्र आता है तो फलों को सबसे बेहतरीन और हेल्दी विकल्प माना जाता है। लेकिन आप जानते हैं कि इन हेल्दी फलों का सेवन भी तब तक हेल्दी है जबतक आपकी बॉडी में कोई मेडिकल कंडीशन नहीं है। जी हां, अगर किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीज बॉडी को हेल्दी रखने के लिए लगातार फलों का सेवन करते हैं तो उनकी बॉडी को फायदे की जगह नुकसान पहुंच सकता है। किडनी मरीजों के लिए पोटैशियम रिच फूड्स का सेवन उनकी मुश्किलें बढ़ा सकता है, क्योंकि खराब किडनी अतिरिक्त पोटैशियम को शरीर से बाहर नहीं निकाल पाती। इससे खून में पोटैशियम बढ़ने का खतरा रहता है, जो दिल और मांसपेशियों पर गंभीर असर डाल सकता है।

    कर्मा आयुर्वेदा के फाउंडर, आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर पुनीत धवन ने बताया फल बेहतरीन फूड हैं लेकिन किडनी की परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए ये नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। पोटैशियम रिच फूड्स का सेवन करने से खून में पोटैशियम का स्तर बढ़ सकता है, जिसे हाइपरकलेमिया (Hyperkalemia) कहा जाता है। यह स्थिति दिल की धड़कन और मांसपेशियों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि पोटैशियम का शरीर में क्या रोल है और किडनी के मरीजों को पोटैशियम से भरपूर कौन-कौन से फलों से परहेज करने की जरूरत है।

    किडनी के मरीजों के लिए पोटैशियम क्यों है अहम?

    डॉ. बताते हैं कि पोटैशियम शरीर के लिए एक जरूरी मिनरल है जो मांसपेशियों के संकुचन, नसों के कार्य, दिल की धड़कन को सामान्य रखने और शरीर में फ्लूइड बैलेंस बनाए रखने में मदद करता है। लेकिन जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो अतिरिक्त पोटैशियम शरीर से बाहर नहीं निकल पाता और खून में इसकी मात्रा बढ़ने लगती है। ज्यादा पोटैशियम होने पर दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है और मांसपेशियों में कमजोरी या दूसरी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। डॉ. धवन ने बताया हर किडनी मरीज को पोटैशियम पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं होती। कुछ स्टेज में जैसे

    1. CKD स्टेज 1 और स्टेज 2 के मरीजों को आमतौर पर पोटैशियम पर बहुत सख्त नियंत्रण की आवश्यकता नहीं होती।
    2. CKD स्टेज 3, स्टेज 4, स्टेज 5 या डायलिसिस कराने वाले मरीजों को पोटैशियम का सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार सीमित रखना चाहिए।

    किन फलों में ज्यादा है पोटैशियम?

    डॉ. धवन के मुताबिक कुछ फलों में पोटैशियम ज्यादा होता है इसलिए किडनी के मरीजों को इन फलों का सेवन सीमित करना चाहिए या डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। कुछ फल जैसे
    केला, संतरा, आम, कीवी, खरबूजा, स्ट्रॉबेरी, बादाम,किशमिश और अंजीर का सेवन करने से परहेज करना चाहिए। इन खाद्य पदार्थों में पोटैशियम अधिक होता है, जिससे शरीर में इसका स्तर तेजी से बढ़ सकता है।

    किडनी के मरीज कौन से फलों का कर सकते हैं सेवन

    किडनी के मरीजों के लिए कम पोटैशियम वाले फल फायदेमंद होते हैं। इन फलों में सेब, लाल अंगूर,नाशपाती,पपीता, जामुन और तरबूज शामिल है। बात करें सेब की तो

    1. 100 ग्राम सेब में लगभग 107 मिलीग्राम पोटैशियम होता है। यह फाइबर से भरपूर होता है, पाचन बेहतर बनाता है और ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में मदद करता है। इसे छीलकर खाना बेहतर माना जाता है।
    2. लाल अंगूर:
      एक कप (करीब 151 ग्राम) लाल अंगूर में लगभग 110 मिलीग्राम पोटैशियम होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो सूजन कम करने और दिल की सेहत बनाए रखने में मदद करते हैं।
    3. नाशपाती:
      100 ग्राम नाशपाती में लगभग 116 मिलीग्राम पोटैशियम होता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन सुधारने और वजन कंट्रोल रखने में मदद करता है।
    4. पपीता:
      100 ग्राम पपीते में लगभग 182 मिलीग्राम पोटैशियम होता है। यह पाचन और इम्यूनिटी के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन किडनी मरीजों को इसे सीमित मात्रा में और डॉक्टर की सलाह पर ही खाना चाहिए।
    5. जामुन:
      100 ग्राम जामुन में लगभग 55 मिलीग्राम पोटैशियम होता है। यह खासकर डायबिटीज से पीड़ित किडनी मरीजों के लिए फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद कर सकता है।
    6. तरबूज:
      एक कप तरबूज में लगभग 170 मिलीग्राम पोटैशियम होता है। इसमें पानी की मात्रा भी अधिक होती है, इसलिए किडनी मरीजों को इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए। यदि मरीज डायलिसिस पर है या पेशाब कम बन रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    किडनी मरीजों के लिए फल खाने का तरीका

    • डॉ. धवन ने बताया कि किडनी के मरीज फलों का सेवन बहुत सावधानी से करें। फल हमेशा अच्छी तरह धोकर खाएं और संभव हो तो छीलकर खाएं।
    • फलों के जूस की बजाय साबुत फल खाएं।
    • हफ्ते में 2-3 बार ही फल खाएं या डॉक्टर की सलाह के अनुसार सेवन करें।
    • समय-समय पर ब्लड टेस्ट करवाकर पोटैशियम की जांच कराएं।
    • कुछ फलों को उबालने से उनमें मौजूद पोटैशियम की मात्रा कुछ हद तक कम की जा सकती है।

    किडनी मरीजों के लिए जरूरी सलाह

    डॉ. का कहना है कि किडनी रोगियों को नियमित रूप से किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) करवाते रहना चाहिए और अपनी डाइट किसी सर्टिफाइड डाइटिशियन से बनवानी चाहिए। इसके अलावा वजन, पानी की मात्रा और भोजन पर भी नजर रखना जरूरी है। एक्सपर्ट ने बताया किडनी की बीमारी में फलों को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं होती। सही फल, सही मात्रा और डॉक्टर की सलाह का पालन करके मरीज संतुलित आहार ले सकते हैं।

    डिस्क्लेमर: यह लेख डॉक्टर द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है। किडनी की बीमारी, डायलिसिस या पोटैशियम से जुड़ी किसी भी डाइट में बदलाव करने से पहले अपने नेफ्रोलॉजिस्ट या सर्टिफाइड डाइटिशियन से सलाह जरूर लें।

  • पहलगाम आतंकी हमले में बड़ा खुलासा, NIA ने हाफिज सईद को बनाया मुख्य साजिशकर्ता

    पहलगाम आतंकी हमले में बड़ा खुलासा, NIA ने हाफिज सईद को बनाया मुख्य साजिशकर्ता

    पहलगाम आतंकी हमले में बड़ा खुलासा, NIA ने हाफिज सईद को बनाया मुख्य साजिशकर्ता

    जम्मू: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए खौफनाक आतंकी नरसंहार के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार को एक बहुत बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है। एनआईए ने पाकिस्तान में छिपकर बैठे वैश्विक आतंकवादी और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सरगना हाफिज सईद के खिलाफ अदालत में सप्लीमेंट्री (पूरक) चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी ने साफ किया है कि इस पूरे खूनी खेल का असली मास्टरमाइंड हाफिज सईद ही था, जिसने सीमा पार पाकिस्तान से इस बड़े हमले की साजिश रची थी।

    याद दिला दें कि पिछले साल 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में छुट्टियों का लुत्फ उठा रहे बेगुनाह लोगों पर आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं, जिसमें 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक समेत 26 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।

    हाफिज सईद पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और UAPA के तहत गंभीर धाराएं

    जम्मू की विशेष एनआईए अदालत में दाखिल की गई इस पूरक चार्जशीट में आतंकवाद-रोधी एजेंसी ने हाफिज सईद पर चौतरफा शिकंजा कसा है। उस पर व्यक्तिगत रूप से और साथ ही प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा व उसके मुखौटा संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) के आका के रूप में गंभीर आरोप तय किए गए हैं।

    एनआईए के मुताबिक, हाफिज सईद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA), 1967 की कई बेहद सख्त धाराएं लगाई गई हैं। चार्जशीट में उस पर मुख्य रूप से भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और विदेशी धरती से कश्मीर में आतंक फैलाने का आरोपी बनाया गया है।

    डिजिटल और वैज्ञानिक सबूतों से सजी 1,597 पन्नों की मूल चार्जशीट का विस्तार

    एनआईए ने मीडिया को बताया कि यह नई सप्लीमेंट्री चार्जशीट पहले दाखिल की जा चुकी 1,597 पन्नों की मुख्य चार्जशीट का ही एक अहम हिस्सा है। इस चार्जशीट में पाकिस्तान की गहरी साजिश, हमले में हाफिज सईद की सीधी संलिप्तता और एनआईए की ग्राउंड व वैज्ञानिक जांच से जुटाए गए ऐसे पुख्ता डिजिटल सबूत शामिल किए गए हैं, जिन्हें अदालत में झुठलाया नहीं जा सकता। जांच एजेंसी ने बताया कि यह कार्रवाई पाकिस्तान के नापाक चेहरे को बेनकाब करने के लिए उसकी पिछली जांच को और ज्यादा मजबूत करती है।

    ऑपरेशन महादेव में ढेर हो चुके हैं हमले में शामिल तीन दुर्दांत आतंकी

    गौरतलब है कि इससे पहले दिसंबर 2025 में एनआईए ने पाकिस्तान में बैठे एक और हैंडलर साजिद जट्ट के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसके साथ ही उन तीन स्थानीय आतंकियों को भी मुख्य चार्जशीट में नामजद किया गया था, जिन्हें भारतीय सुरक्षाबलों ने जुलाई 2025 में ‘ऑपरेशन महादेव’ के दौरान एक भीषण मुठभेड़ में मार गिराया था। मामले में दो अन्य मददगार आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।

    एजेंसी ने लश्कर और टीआरएफ (TRF) को कानूनी संस्थाओं के रूप में आरोपी बनाते हुए स्पष्ट किया है कि इन्हीं संगठनों ने मिलकर पहलगाम हमले के लिए फंड मुहैया कराया, रेकी की और पूरी साजिश को अंजाम तक पहुंचाया। मामले की कड़ियां जोड़ने के लिए एनआईए की तफ्तीश अभी भी जारी है।

  • व्रत में साधारण नमक नहीं, सेंधा नमक ही क्यों? जानिए इसके पीछे की धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता..

    व्रत में साधारण नमक नहीं, सेंधा नमक ही क्यों? जानिए इसके पीछे की धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता..

    व्रत में साधारण नमक नहीं, सेंधा नमक ही क्यों? जानिए इसके पीछे की धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता..

    Sendha Namak in Vrat: व्रत से जुड़े अनेक नियम है जिनका ध्यान रखने से व्रत का संकल्प पूरा होता है और पूरा फल प्राप्त होता है. कुछ व्रत में केवल फलाहार किया जाता है तो कुछ व्रत में एक बार भोजन किया जाता है, कुछ व्रत ऐसे होते हैं जिसमें तय समय तक न तो कुछ खाया जाता है और न ही कुछ पीया जाता है. इसी तरह से व्रत के भोजन को लेकर नियम है की सफेद नमक का सेवन व्रत में नहीं करना चाहिए. वहीं, सेंधा नमक का सेवन वर्जित नहीं होता है.

    व्रत उपवास में साधारण नमक के बजाए केवल सेंधा नमक का सेवन किया जाता है. ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सेंधा नमक का उपायोग करने का बड़ा महत्व हैं. आइए यहां जानें सेंधा नमक का किस ग्रह से संबंध है.

    व्रत में सेंधा नमक का ज्योतिषीय महत्व

    मान्यता है कि सेंधा नमक जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है. इस नमक के उपयोग से ग्रहों के अशुभ प्रभाव को दूर करता है. पूजा के समय सात्विक ऊर्जा को बनाए रखने में भी सेधा नमक मदद करता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्रत हों से मिलने वाली ऊर्जा को संतुलित करता है और यह पृथ्वी तत्व से जुड़ा होता है.

    सेंधा नमक का किस ग्रह से है संबंध

    ज्योतिष अनुसार सेंधा नमक का संबंध चंद्रमा और शुक्र ग्रह से है . चंद्रमा मन का कारक है और शुक्र सुख व समृद्धि का कारक है. व्रत के दौरान सेंधा नमक का सेवन करने से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है और मानसिक तनाव दूर होता है. बेचैनी या निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है. शुक्र ग्रह मजबूत होता है और धन वृद्धि होता है.

    व्रत में सेंधा नमक का धार्मिक महत्व

    वहीं धार्मिक मान्यता है कि इसके अलावा सकारात्मकता बनाए रखने में सेंधा नमक मदद करता है. साधारण नमक को कई प्रक्रिया से तैयार किया जाता है. जिससे इस नमक उतना शुद्ध नहीं माना जाजा है. यही कारण है कि व्रत और पूजा में सेंधा नमक के उपयोग को मान्यता दी जाती है. इसके सेवन से मन शांत रहता है और भक्ति भाव करने में ध्यान लगता है. सेंधा नमक सात्विक आहार का भाग होता है.

    व्रत में सेंधा नमक से जुड़ी धार्मिक मान्यता

    पुराणों और धार्मिक परंपराओं में बताया जाता है कि व्रत का भोजन सरल और प्राकृतिक होना चाहिए. यह पुण्य प्राप्ति का रास्ता हो सकता है. सेंधा नमक प्राकृतिक रूप से चट्टानों से आते हैं. इसी कारण इसे शुद्ध माना जाता है. एकादशी, नवरात्रि, महाशिवरात्रि, सोमवार से लेकर अन्य कई व्रतों में सेंधा नमक का उपयोग किया जाता रहा है.

    (डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

  • इतिहास की अनोखी खोज! चार पंखों वाले डायनासोर से सुलझ सकती है उड़ान की पहेली..

    इतिहास की अनोखी खोज! चार पंखों वाले डायनासोर से सुलझ सकती है उड़ान की पहेली..

    इतिहास की अनोखी खोज! चार पंखों वाले डायनासोर से सुलझ सकती है उड़ान की पहेली..

    चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे प्राचीन डायनासोर का जीवाश्म खोजा है जिसने जीवों में उड़ने की क्षमता के विकास को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस अनोखी खोज ने वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि इस डायनासोर के केवल आगे के अंगों पर ही नहीं, बल्कि पीछे के पैरों पर भी पंख मौजूद थे। इस वजह से इसके शरीर में कुल चार पंखों जैसी संरचना दिखाई देती थी।

    विशेषज्ञों ने कही ये बात

    विशेषज्ञों के अनुसार यह जीवाश्म पंखों वाले छोटे डायनासोरों के समूह ड्रोमियोसॉर से संबंधित है, जिसका संबंध वेलोसिरैप्टर जैसे शिकारी डायनासोरों से भी माना जाता है। इसके शरीर की बनावट यह संकेत देती है कि पक्षियों की उड़ान क्षमता कैसे विकसित हुई होगी, इसे समझने में यह खोज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    शोध में ये बात आई सामने

    शोधकर्ताओं का मानना है कि यह जीव आधुनिक पक्षियों की तरह लंबी दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम नहीं था। हालांकि इसके चारों पंख पेड़ों के बीच फिसलकर जाने, ऊंचाई से नीचे उतरते समय संतुलन बनाए रखने और हवा में दिशा नियंत्रित करने में सहायक रहे होंगे। घने जंगलों में चलते समय यह अपने अतिरिक्त पंखों का उपयोग किसी स्टीयरिंग सिस्टम की तरह करता होगा, जिससे गिरने का खतरा कम होता था और दिशा बदलना आसान हो जाता था।

    डायनासोरों के व्यवहार को समझने में चीन सबसे आगे

    डायनासोरों के विकास और उनके व्यवहार को समझने के लिए चीन आज दुनिया के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है। यहां से प्राप्त कई जीवाश्म असाधारण रूप से सुरक्षित अवस्था में मिले हैं, जिनमें पंखों की संरचना, त्वचा के निशान और कुछ मामलों में कोमल ऊतकों के अवशेष भी संरक्षित पाए गए हैं।

    नई खोज ने बदले डायनासोरों के पारंपरिक धारणा को

    हाल के वर्षों में हुई ऐसी खोजों ने वैज्ञानिकों की उस पारंपरिक धारणा को बदल दिया है, जिसमें डायनासोरों को केवल विशाल और रेंगने वाले जीव माना जाता था। अब पर्याप्त प्रमाण सामने आ चुके हैं कि कई डायनासोर रंगीन पंखों से ढके हुए थे और वर्तमान पक्षियों के विकासक्रम से उनका गहरा संबंध था।

  • उम्रकैद का आरोपी 13 साल से बदल चुका था पहचान, गिरफ्तारी के लिए पहुंची पुलिस के हाथ फिर भी नहीं आया..

    उम्रकैद का आरोपी 13 साल से बदल चुका था पहचान, गिरफ्तारी के लिए पहुंची पुलिस के हाथ फिर भी नहीं आया..

    उम्रकैद का आरोपी 13 साल से बदल चुका था पहचान, गिरफ्तारी के लिए पहुंची पुलिस के हाथ फिर भी नहीं आया..

    फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर का नाम देशभर में चर्चित रहा है, लेकिन अब इसी वासेपुर से जुड़े एक सनसनीखेज मामले ने छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर को भी सुर्खियों में ला दिया है। झारखंड में दो महिलाओं की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पा चुका एक फरार आरोपी पिछले करीब 13 वर्षों से अंबिकापुर में पहचान बदलकर रह रहा था। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय तक वह स्थानीय स्तर पर सामान्य जीवन जीता रहा और उसकी मौजूदगी की भनक पुलिस को भी नहीं लग सकी।

    वासेपुर डबल मर्डर केस में उम्रकैद की सजा

    जानकारी के अनुसार, साबीर आलम पर झारखंड के धनबाद स्थित वासेपुर में 18 अक्टूबर 2001 को कथित तौर पर अपने साथियों के साथ मिलकर वासेपुर के चर्चित शख्स फहीम खान की मां और मौसी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या करने का आरोप था। मामले की सुनवाई के बाद झारखंड की अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई और उसे भगोड़ा घोषित करते हुए उसकी संपत्ति कुर्क करने के आदेश भी जारी किए थे।

    सजा के बाद आरोपी झारखंड से फरार हो गया। आरोप है कि वह वर्ष 2013 से अंबिकापुर के मोमिनपारा क्षेत्र में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। इस दौरान वह बस संचालन और सिलाई की दुकान की आड़ में सामान्य जीवन व्यतीत करता रहा। बताया जा रहा है कि उसने स्थानीय लोगों के बीच अपनी नई पहचान बना ली थी।

    आश्रय देने के आरोप में बस संचालक पर भी कार्रवाई

    प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपी को अंबिकापुर में छिपकर रहने में राजहंस बस के संचालक वैदुल खान, निवासी मोमिनपारा, की अहम भूमिका रही। आरोप है कि वैदुल खान ने आरोपी को अपने यहां आश्रय दिलाया और उसकी पहचान छिपाने में मदद की। इस मामले में पुलिस ने वैदुल खान और अन्य अज्ञात सहयोगियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    झारखंड पुलिस पहुंची, लेकिन आरोपी फिर चकमा देकर भाग निकला

    सूत्रों के मुताबिक, झारखंड पुलिस को सूचना मिली थी कि उम्रकैद का सजायाफ्ता आरोपी अंबिकापुर में रह रहा है। इसी सूचना के आधार पर झारखंड पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए अंबिकापुर पहुंची। हालांकि कार्रवाई के दौरान आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया।

    बताया जा रहा है कि आरोपी के फरार होने के बाद ही झारखंड पुलिस ने सिटी कोतवाली अंबिकापुर पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद स्थानीय पुलिस भी मामले में सक्रिय हुई।

    कई सवाल खड़े कर रहा मामला

    यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आजीवन कारावास की सजा पा चुका और भगोड़ा घोषित आरोपी आखिर 13 वर्षों तक अंबिकापुर में कैसे रह रहा था? यदि आरोपी लंबे समय से शहर में मौजूद था तो उसकी जानकारी स्थानीय पुलिस और अन्य एजेंसियों को क्यों नहीं मिल सकी?

    साथ ही यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि झारखंड पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई स्थानीय पुलिस को साथ लिए बिना क्यों की। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक रूप से कोई बयान सामने नहीं आया है।

    फिलहाल, झारखंड और सरगुजा पुलिस संयुक्त रूप से फरार आरोपी की तलाश में जुटी हुई हैं। वहीं आरोपी को संरक्षण देने के आरोपों की भी विस्तृत जांच की जा रही है।

  • प्रेमिका की सोते समय हत्या, शव के किए कई टुकड़े; 14 घंटे के भीतर पुलिस एनकाउंटर के बाद आरोपी गिरफ्तार..

    प्रेमिका की सोते समय हत्या, शव के किए कई टुकड़े; 14 घंटे के भीतर पुलिस एनकाउंटर के बाद आरोपी गिरफ्तार..

    प्रेमिका की सोते समय हत्या, शव के किए कई टुकड़े; 14 घंटे के भीतर पुलिस एनकाउंटर के बाद आरोपी गिरफ्तार..

    उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में मड़ियाहूं कोतवाली क्षेत्र में महिला की हत्या कर शव को टुकड़े कर फेंकने वाले आरोपी को पुलिस ने वारदात के 14 घंटे के अंदर ही एक सशस्त्र मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण आतिश कुमार सिंह ने बताया कि….

    Jaunpur News: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में मड़ियाहूं कोतवाली क्षेत्र में महिला की हत्या कर शव को टुकड़े कर फेंकने वाले आरोपी को पुलिस ने वारदात के 14 घंटे के अंदर ही एक सशस्त्र मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण आतिश कुमार सिंह ने बताया कि थाना मड़ियाहूं पुलिस टीम ने रविवार को महिला की हत्या कर शव को टुकड़ों में फेंकने वाले शातिर अभियुक्त को घटना के मात्र 14 घंटे के भीतर एक पुलिस मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया है। मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगने से अभियुक्त घायल हुआ है। उन्होंने बताया कि 5 जुलाई को थाना मड़ियाहूं क्षेत्र के रानीपुर बाईपास (भदोही मुख्य मार्ग) के पास झाड़ियों में एक अज्ञात महिला का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ था।

    प्रभारी निरीक्षक दीपेन्द्र सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम शव की शिनाख्त और वांछित अभियुक्तों की सुरागकसी में जुटी थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि घटना से जुड़ा संदिग्ध व्यक्ति रामनगर ब्लॉक गेट की तरफ आ रहा है।  उन्होंने बताया कि पुलिस टीम द्वारा घेराबंदी कर जब उसे रोकने का प्रयास किया गया, तो आरोपी तेजी से रामनगर गांव की सड़क की तरफ भागा। पुलिस बल ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने नदी की तरफ भागते हुए पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से से फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की, जिसमें एक गोली बदमाश के दाहिने पैर में लगी और वह घायल होकर गिर पड़ा। पुलिस ने घेराबंदी कर रविवार की रात समय करीब 11.50 बजे हिरासत में ले लिया। अभियुक्त के कब्जे से अवैध पिस्टल व कारतुस बरामद किया गया। गिरफ्तार अभियुक्त को उपचार हेतु चिकित्सालय भेजा गया।

    सिंह ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्त हेमल खखरिया उर्फ दिलीप (42) मूलत: भावनगर, गुजरात का निवासी है जो यहां टीचर्स कॉलोनी, कस्बा व थाना मड़ियाहूं में निवास कर रहा है। पूछताछ में अभियुक्त ने बताया कि वह 4 जुलाई को मृतका रेशमा खां उर्फ सना को बाबतपुर (वाराणसी) से अपने किराए के कमरे (टीचर्स कॉलोनी, मड़ियाहूं) लेकर आया था। वहां मोबाइल चैट देखने को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। गुस्साए अभियुक्त ने सना के सोते समय चाकू से गला रेतकर उसकी हत्या कर दी। घनी आबादी के बीच शव को ठिकाने लगाने के डर से अभियुक्त ने बाजार से काली पॉलिथीन खरीदी और गड़ासे से मृतका के दोनों हाथ व पैर काटकर शव को तीन हिस्सों में बांट दिया। धड़ को उसने रानीपुर बाईपास पर और पैर व अन्य अंगों को रामनगर ब्लॉक मोड़ के पास पुलिया के आगे फेंक दिया था। पुलिस द्वारा धड़ बरामद कर शिनाख्त करने की भनक लगते ही वह बचे हुए अंगों को छिपाने भाग रहा था, तभी पुलिस मुठभेड़ में पकड़ा गया।

  • उमस में एसिडिटी और अपच से हैं परेशान? आयुर्वेदिक डॉक्टर ने सुझाया धनिया पानी का आसान उपाय

    उमस में एसिडिटी और अपच से हैं परेशान? आयुर्वेदिक डॉक्टर ने सुझाया धनिया पानी का आसान उपाय

    उमस में एसिडिटी और अपच से हैं परेशान? आयुर्वेदिक डॉक्टर ने सुझाया धनिया पानी का आसान उपाय

    मसालेदार खाना, चाय-कॉफी की अधिकता और बिगड़ती लाइफस्टाइल के कारण आज एसिडिटी, सीने में जलन और अपच (Indigestion) जैसी समस्याएं बेहद आम हो चुकी हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर इन समस्याओं को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो यह क्रॉनिक अपच (Chronic Indigestion), पोषक तत्वों के खराब अवशोषण (Poor Nutrient Absorption) और बार-बार पेट में असहजता जैसी दिक्कतों का कारण बन सकती हैं।  इन तकलीफों से तुरंत राहत पाने के लिए अक्सर लोग दवाइयों का रुख करते हैं, लेकिन हमारे भारतीय किचन में ही कई ऐसे नेचुरल उपाय मौजूद हैं जो इस समस्या को शांत कर सकते हैं। पारंपरिक चिकित्सा और आयुर्वेद में धनिए के बीजों को पेट के लिए बेहद गुणकारी और ठंडा माना गया है। लेकिन क्या सच में धनिया का पानी पीने से पाचन से जुड़ी परेशानियां दूर हो सकती है, क्या ये पानी एसिडिटी को हमेशा के लिए शांत कर सकता है?

    आयुर्वेद विशेषज्ञ भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र (Hansa Yogendra) के मुताबिक पेट की समस्याओं में धनिया का पानी अमृत की तरह असर करता है। आयुर्वेद में धनिया के बीज (Coriander Seeds) का इस्तेमाल लंबे समय से शरीर की अतिरिक्त गर्मी कम करने, पाचन बेहतर बनाने और एसिडिटी को शांत करने के लिए किया जाता रहा है। एक्सपर्ट के मुताबिक, सही तरीके से तैयार किया गया धनिया का पानी गर्मी और उमस के मौसम में पेट को राहत पहुंचाने में मददगार हो सकता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि धनिया का पानी कैसे उमस भरी गर्मी में पेट को राहत देता है।

    Also Read

    धनिया के बीज क्यों माने जाते हैं फायदेमंद?

    विशेषज्ञों के अनुसार, धनिया के बीजों में प्राकृतिक कूलिंग (Cooling) गुण पाए जाते हैं। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने बताया गर्मी में धनिया के बीज का पानी बनाकर पीने से शरीर की अतिरिक्त गर्मी कंट्रोल रहती है। इसका सेवन करने से एसिडिटी और एसिड रिफ्लक्स से राहत मिलती है। पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में ये पानी असरदार साबित होता है। इसका सेवन कई तरह की मेडिकल कंडीशन में भी असरदार साबित होता है। ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में ये पानी बेहद मददगार साबित होता है। इसका सेवन करने से बॉडी से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और इम्यूनिटी मजबूत होती है।

    Also Read

    धनिया का पानी कैसे तैयार करें

    गर्मी में साबुत धनिया का पानी बनाने के लिए आप एक बड़ा चम्मच साबुत धनिया और एक गिलास नॉर्मल पानी लें। अब धनिया के बीजों को हल्का कूट लें और उन्हें पानी में रात भर भिगो दें। सुबह पानी छानकर खाली पेट पी लें। यह धनिया का पानी पीने का सबसे आसान और पारंपरिक तरीका माना जाता है।

    धनिया का पानी का काढ़ा बनाएं

    अगर गर्मी और उमस ज्यादा हो तो धनिया का पानी उबालकर भी तैयार किया जा सकता है। एक बड़ा चम्मच धनिया लें और दो कप पानी में उबालें। पानी आधा रह जाए तो गैस बंद कर दें। इसे सामान्य तापमान तक ठंडा होने दें और छानकर गुनगुना पिएं। एक्सपर्ट ने बताया इस पानी को आप गुनगुना ही पिएं, इसमें बर्फ या ठंडा करके नहीं पिएं। आप चाहें तो इस पानी में ताजे पुदीने के पत्ते, भीगी हुई सौंफ और नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर पी सकते हैं। यह मिश्रण गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक पहुंचाने और पाचन को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है।

    पाचन की इन समस्याओं से मिलेगी राहत

    गर्मी में 7 दिनों तक अगर इस ड्रिंक का सेवन किया जाए तो बार-बार एसिडिटी से राहत मिलेगी। इसका सेवन करने से पेट या छाती में जलन कंट्रोल रहती है। जिन लोगों को खाना खाने के बाद ब्लोटिंग होती है उनके लिए ये पानी बेहद उपयोगी है।  गर्मी और उमस में सिरदर्द या भारीपन से राहत दिलाने में ये पानी उपयोगी है। विशेषज्ञ के अनुसार, इसे लगातार लगभग 7 दिन तक सुबह खाली पेट पीने से कुछ लोगों में पाचन संबंधी परेशानियों में सुधार महसूस हो सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख आयुर्वेदिक विशेषज्ञ द्वारा साझा की गई जानकारी और पारंपरिक उपयोगों पर आधारित है। धनिया का पानी किसी बीमारी का इलाज नहीं है। यदि आपको लगातार एसिडिटी, सीने में तेज जलन, पेट दर्द या अन्य गंभीर लक्षण हैं, तो स्वयं उपचार करने के बजाय गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या योग्य चिकित्सक से सलाह लें।