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  • Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में घर के बाहर दिखें ये जीव तो न भगाएं, जानें भोजन कराने की धार्मिक मान्यता.

    Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में घर के बाहर दिखें ये जीव तो न भगाएं, जानें भोजन कराने की धार्मिक मान्यता.

    Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में घर के बाहर दिखें ये जीव तो न भगाएं, जानें भोजन कराने की धार्मिक मान्यता.

    पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान कई परिवार पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। साथ ही पशु-पक्षियों को भोजन कराने की भी परंपरा कई जगहों पर देखने को मिलती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में कुछ विशेष जीवों को भोजन कराने को पितरों के प्रति श्रद्धा और तर्पण से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से यदि इन जीवों में से कोई घर के आंगन, छत या आसपास दिखाई दे तो उसे भोजन कराने की परंपरा बताई गई है।

    1. कौआ

    पितृ पक्ष में कौए को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कौए को पितरों से जुड़ा हुआ और उनका संदेशवाहक माना गया है।

    इसी कारण कई परिवार श्राद्ध का भोजन सबसे पहले कौए के लिए निकालते हैं। मान्यता है कि कौए के भोजन ग्रहण करने से पितरों को अर्पित भोजन स्वीकार होने का संकेत माना जाता है।

    2. गाय

    पितृ पक्ष में गाय को भोजन कराने की भी परंपरा रही है। कई परिवार श्राद्ध के भोजन का एक हिस्सा गाय के लिए अलग रखते हैं।

    धार्मिक परंपरा में गाय को सम्मान देने और उसे भोजन कराने को पुण्य कर्म माना जाता है। इसे पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने से भी जोड़ा जाता है।

    3. कुत्ता

    श्राद्ध कर्म से जुड़ी पंचबलि परंपरा में कुत्ते को भी भोजन कराने का उल्लेख मिलता है। पितृ पक्ष के दौरान कई लोग भोजन का एक हिस्सा कुत्ते के लिए निकालते हैं।

    इसके पीछे जीवों के प्रति दया, करुणा और सम्मान का भाव भी माना जाता है। धार्मिक मान्यता में इसे पितरों की शांति के लिए किए जाने वाले कर्मों से जोड़ा गया है।

    4. चींटी

    चींटियों को भोजन कराने की परंपरा भी कुछ धार्मिक कर्मकांडों में बताई गई है। इसके लिए आटे और चीनी से छोटी-छोटी गोलियां बनाकर चींटियों को खिलाने की बात कही जाती है।

    इसे छोटे जीवों को भोजन कराने और सभी प्राणियों के प्रति दया रखने के भाव से जोड़ा जाता है।

    5. अन्य जीवों को भोजन कराने की परंपरा

    पितृ पक्ष में पशु-पक्षियों को भोजन कराने का उद्देश्य केवल किसी एक जीव तक सीमित नहीं माना जाता। कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार पक्षियों और अन्य जीवों के लिए भी भोजन या दाना रखते हैं।

    धार्मिक दृष्टि से इसे जीवों के प्रति करुणा और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम माना जाता है।

    सांप दिखाई दे तो क्या मानते हैं?

    पितृ पक्ष के दौरान सांप दिखाई देने को लेकर कुछ लोक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे पितरों से जुड़े संकेत के रूप में देखते हैं। हालांकि, सांप पंचबलि के पांच पारंपरिक जीवों में शामिल नहीं है।

    इसलिए सांप के दिखाई देने को किसी निश्चित धार्मिक नियम या पितर के आगमन का प्रमाण नहीं माना जा सकता। यह मुख्य रूप से लोक-विश्वास से जुड़ी धारणा है।

    पितृ पक्ष में भोजन कराने का मूल भाव

    पितृ पक्ष में पशु-पक्षियों को भोजन कराने की परंपरा का मूल भाव पूर्वजों का स्मरण, जीवों के प्रति दया और

  • सेहतमंद रहने के 17 आसान तरीके, जिनका समर्थन करता है वैज्ञानिक शोध.

    सेहतमंद रहने के 17 आसान तरीके, जिनका समर्थन करता है वैज्ञानिक शोध.

    सेहतमंद रहने के 17 आसान तरीके, जिनका समर्थन करता है वैज्ञानिक शोध.

    आजकल इंटरनेट और सोशल मीडिया पर हेल्थ से जुड़ी तमाम तरह की सलाह देखने को मिलती है। कई बार अलग-अलग विशेषज्ञों की राय भी एक-दूसरे से अलग होती है, जिससे यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आखिर स्वस्थ रहने के लिए किन आदतों को अपनाना चाहिए।

    हालांकि, कुछ ऐसी आदतें हैं जिनके फायदे को वैज्ञानिक शोध का अच्छा समर्थन मिला है। अच्छी नींद से लेकर संतुलित खान-पान और नियमित व्यायाम तक, रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे बदलाव लंबे समय में सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

    1. भरपूर और अच्छी नींद लें

    स्वस्थ शरीर और दिमाग के लिए पर्याप्त नींद बेहद जरूरी है। लगातार कम या खराब नींद लेने से शरीर में इंसुलिन संवेदनशीलता, भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन और मानसिक तथा शारीरिक प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।

    हर व्यक्ति के लिए नींद की जरूरत अलग हो सकती है, लेकिन अपनी दिनचर्या के अनुसार पर्याप्त और नियमित नींद लेना जरूरी है।

    2. सोने से पहले तेज रोशनी और स्क्रीन से दूरी रखें

    रात में मोबाइल, कंप्यूटर और दूसरे डिजिटल उपकरणों की तेज रोशनी नींद के प्राकृतिक चक्र को प्रभावित कर सकती है। खासतौर पर स्क्रीन से मिलने वाली नीली रोशनी शरीर में मेलाटोनिन के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।

    इसलिए सोने से पहले कुछ समय स्क्रीन से दूरी बनाना और कमरे में बहुत तेज रोशनी न रखना नींद की गुणवत्ता के लिए मददगार हो सकता है।

    3. डाइट में नट्स और बीज शामिल करें

    बादाम, अखरोट और दूसरे नट्स के साथ-साथ अलग-अलग बीज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें प्रोटीन, फाइबर, स्वस्थ वसा, विटामिन और कई जरूरी मिनरल पाए जाते हैं।

    शोध में नट्स के नियमित सेवन को हृदय स्वास्थ्य और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम से जुड़े बेहतर स्वास्थ्य परिणामों से जोड़ा गया है।

    4. फैटी फिश खाएं

    सैल्मन जैसी फैटी फिश उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत होती है।

    संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में मछली का सेवन हृदय स्वास्थ्य समेत कई पहलुओं के लिए फायदेमंद हो सकता है।

    5. फल और सब्जियां ज्यादा खाएं

    फल और सब्जियां फाइबर, विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्वों के अच्छे स्रोत हैं।

    डाइट में पर्याप्त मात्रा में फल और सब्जियां शामिल करने को बेहतर हृदय स्वास्थ्य और कई पुरानी बीमारियों के कम जोखिम से जोड़ा गया है।

    6. शरीर को पर्याप्त पानी दें

    शरीर के सामान्य कामकाज के लिए पर्याप्त पानी जरूरी है। पानी की जरूरत व्यक्ति की उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

    इसलिए केवल किसी तय संख्या के पीछे जाने के बजाय शरीर की प्यास और अपनी परिस्थितियों के अनुसार पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहतर है।

    7. पर्याप्त प्रोटीन लें

    प्रोटीन शरीर में कोशिकाओं और ऊतकों के निर्माण और मरम्मत के लिए जरूरी पोषक तत्व है।

    डाइट में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करने से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है और यह वजन को संतुलित रखने में भी मदद कर सकता है। अंडे, मछली, दालें, बीन्स, डेयरी और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ इसके अच्छे स्रोत हो सकते हैं।

    8. एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करें

    एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल में मुख्य रूप से मोनोअनसैचुरेटेड फैट और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं।

    इसे संतुलित आहार में शामिल करना हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, किसी भी तेल की तरह इसकी मात्रा भी संतुलित रखना जरूरी है।

    9. मीठे पेय पदार्थों का सेवन कम करें

    सोडा, मीठी चाय, मीठे ड्रिंक और दूसरे शुगर-स्वीटेंड बेवरेज शरीर में अतिरिक्त चीनी की मात्रा बढ़ा सकते हैं।

    इनका ज्यादा सेवन मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय संबंधी समस्याओं के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा पाया गया है।

    इनकी जगह बिना चीनी वाली चाय, सादा या स्पार्कलिंग पानी और बिना अतिरिक्त चीनी वाली कॉफी जैसे विकल्प लिए जा सकते हैं।

    10. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड कम खाएं

    पैकेज्ड स्नैक्स, कई तरह के फास्ट फूड, पैकेज्ड कुकीज, चिप्स और कुछ तैयार भोजन अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की श्रेणी में आ सकते हैं।

    इनमें अक्सर ज्यादा नमक, अतिरिक्त चीनी, रिफाइंड तेल और अन्य एडिटिव्स होते हैं, जबकि फाइबर और कुछ जरूरी पोषक तत्व अपेक्षाकृत कम हो सकते हैं।

    ऐसे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन वजन बढ़ने और कई पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़े जोखिम से जुड़ा पाया गया है।

    11. अतिरिक्त चीनी पर नियंत्रण रखें

    आज कई पैकेज्ड खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों में अतिरिक्त चीनी मौजूद होती है। ज्यादा मात्रा में अतिरिक्त चीनी का सेवन वजन बढ़ने और टाइप-2 डायबिटीज तथा हृदय रोग जैसे स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा है।

    खरीदारी करते समय फूड लेबल पढ़ना और ऐसे उत्पादों का चयन करना उपयोगी हो सकता है जिनमें अतिरिक्त चीनी कम हो।

    12. रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट कम करें

    सभी कार्बोहाइड्रेट एक जैसे नहीं होते। रिफाइंड कार्ब्स से प्रोसेसिंग के दौरान फाइबर और कुछ पोषक तत्व कम हो सकते हैं।

    मैदा और अत्यधिक प्रोसेस्ड अनाज से बने खाद्य पदार्थों की जगह साबुत अनाज, फल, सब्जियां और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

    13. हर सप्ताह नियमित शारीरिक गतिविधि करें

    व्यायाम शरीर के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। तेज चलना, साइकिल चलाना, तैराकी या अन्य एरोबिक गतिविधियां नियमित रूप से करने से फिटनेस और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

    अमेरिकी Physical Activity Guidelines के अनुसार वयस्कों के लिए हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि एक सामान्य लक्ष्य माना जाता है।

    14. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को दिनचर्या में शामिल करें

    मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए रेजिस्टेंस या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग उपयोगी है। इसके लिए जिम में भारी वजन उठाना जरूरी नहीं है।

    बॉडीवेट एक्सरसाइज, रेजिस्टेंस बैंड और अन्य प्रतिरोध वाले व्यायाम भी किए जा सकते हैं। नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मांसपेशियों की ताकत और शरीर की संरचना को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है।

    15. विटामिन D का ध्यान रखें

    विटामिन D हड्डियों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। शरीर में इसकी कमी होने पर डॉक्टर से सलाह लेकर जांच और जरूरत के अनुसार सप्लीमेंट लेने पर विचार किया जा सकता है।

    बिना जरूरत या बिना चिकित्सकीय सलाह के विटामिन D की ज्यादा मात्रा लेना उचित नहीं है।

    16. परिवार और दोस्तों से जुड़े रहें

    स्वस्थ रहने का मतलब केवल सही खाना और व्यायाम करना नहीं है। परिवार, दोस्तों और करीबी लोगों के साथ अच्छे सामाजिक संबंध मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

    सामाजिक जुड़ाव तनाव को संभालने और मानसिक कल्याण को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    17. तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन करें

    तनाव रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसे संभालने के लिए स्वस्थ तरीके अपनाना जरूरी है।

    मेडिटेशन और माइंडफुलनेस जैसी गतिविधियां कुछ लोगों में तनाव और चिंता को कम करने में मदद कर सकती हैं। रोजाना कुछ मिनट शांत बैठकर सांस पर ध्यान देना एक आसान शुरुआत हो सकती है।

    निष्कर्ष

    स्वस्थ रहने के लिए किसी एक सुपरफूड या एक खास नुस्खे पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। अच्छी नींद, संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और तनाव को नियंत्रित करने जैसी छोटी-छोटी आदतें मिलकर बेहतर लाइफस्टाइल बनाने में मदद कर सकती हैं।

    हालांकि, हर व्यक्ति की पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें अलग होती हैं। किसी बीमारी, पोषक तत्वों की कमी या सप्लीमेंट से जुड़ी समस्या होने पर डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

  • नमक के पानी से पोछा लगाने का क्या है सही तरीका? वास्तु मान्यता के अनुसार इन बातों का रखें ध्यान.

    नमक के पानी से पोछा लगाने का क्या है सही तरीका? वास्तु मान्यता के अनुसार इन बातों का रखें ध्यान.

    नमक के पानी से पोछा लगाने का क्या है सही तरीका? वास्तु मान्यता के अनुसार इन बातों का रखें ध्यान.

    घर की साफ-सफाई को लेकर वास्तु शास्त्र में कई तरह की मान्यताएं बताई गई हैं। माना जाता है कि साफ-सुथरा और व्यवस्थित घर सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में मदद करता है। इसी वजह से कई लोग घर में पोछा लगाने के पानी में नमक का इस्तेमाल करते हैं।

    वास्तु परंपरा में नमक को नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, सिर्फ पानी में नमक डालकर पोछा लगाने के बजाय इसे एक विशेष तरीके से इस्तेमाल करने की मान्यता बताई गई है।

    नमक को नकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार, नमक को घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को सोखने वाला माना जाता है। इसी कारण घर की सफाई के दौरान नमक के पानी का इस्तेमाल करने की परंपरा कुछ परिवारों में देखने को मिलती है।

    हालांकि, यह धार्मिक और वास्तु मान्यता है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

    नमक का पोछा लगाने का बताया गया तरीका

    वास्तु से जुड़ी मान्यता के अनुसार, पोछा लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पानी में सेंधा नमक या समुद्री नमक मिलाया जा सकता है।

    कुछ वास्तु जानकारों के अनुसार, नमक को पानी में डालने के बाद उसे अच्छी तरह गर्म या उबालने की सलाह दी जाती है, ताकि नमक पूरी तरह घुल जाए। इसके बाद पानी को सामान्य तापमान तक ठंडा होने दिया जाता है।

    पानी ठंडा होने के बाद इससे घर में पोछा लगाने की बात कही जाती है। मान्यता है कि इस तरह इस्तेमाल किए गए नमक के पानी से घर के वातावरण में सकारात्मकता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    पोछे के बाद बचे पानी का क्या करें?

    वास्तु मान्यता के अनुसार, पोछा लगाने के बाद बचे हुए पानी को घर के अंदर लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए। इसे घर से बाहर किसी उचित नाली या ऐसी जगह बहाने की सलाह दी जाती है, जहां पानी आसानी से निकल सके।

    हालांकि, स्वच्छता के लिहाज से यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि नमक वाला पानी ऐसी जगह न बहाया जाए जहां इससे पौधों, मिट्टी या आसपास के पर्यावरण को नुकसान हो।

    क्या सिर्फ नमक डालना जरूरी है?

    वास्तु के नजरिए से नमक का पोछा एक धार्मिक मान्यता है, लेकिन घर की साफ-सफाई का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नियमित स्वच्छता और व्यवस्थित रहना है। नमक का इस्तेमाल करने से किसी समस्या या नकारात्मक ऊर्जा के दूर होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

    इसलिए इसे वास्तु परंपरा के एक उपाय के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, किसी निश्चित परिणाम की गारंटी के रूप में नहीं।

  • टैनिंग और डल स्किन से परेशान हैं? भुनी हल्दी से बनाएं ये आसान फेस पैक, ऐसे करें इस्तेमाल.

    टैनिंग और डल स्किन से परेशान हैं? भुनी हल्दी से बनाएं ये आसान फेस पैक, ऐसे करें इस्तेमाल.

    टैनिंग और डल स्किन से परेशान हैं? भुनी हल्दी से बनाएं ये आसान फेस पैक, ऐसे करें इस्तेमाल.

    चेहरे की टैनिंग, डलनेस और मुंहासों की वजह से त्वचा की चमक कम नजर आ सकती है। ऐसे में कई लोग महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स और तरह-तरह के स्क्रब का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जरूरत से ज्यादा स्क्रबिंग करने से त्वचा में जलन और लालिमा भी हो सकती है।

    ऐसे में कुछ लोग घर पर मौजूद चीजों से तैयार फेस पैक का इस्तेमाल करते हैं। भुनी हुई हल्दी से तैयार किया जाने वाला ऐसा ही एक घरेलू फेस पैक है, जिसमें हल्दी के साथ कॉफी, नींबू और शहद का इस्तेमाल किया जाता है।

    आखिर क्यों होती है चेहरे पर टैनिंग?

    टैनिंग का सबसे बड़ा कारण सूरज की UV किरणों के संपर्क में आना है। धूप के संपर्क में आने पर त्वचा में मेलेनिन का उत्पादन बढ़ सकता है, जिससे त्वचा का रंग कुछ हिस्सों में गहरा नजर आने लगता है।

    सन प्रोटेक्शन का इस्तेमाल न करना और लंबे समय तक धूप में रहना इस समस्या को बढ़ा सकता है। इसलिए घरेलू उपायों के साथ धूप से बचाव और सनस्क्रीन का इस्तेमाल भी जरूरी है।

    त्वचा के लिए हल्दी क्यों की जाती है इस्तेमाल?

    हल्दी में करक्यूमिन नाम का प्राकृतिक यौगिक पाया जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। इसी वजह से पारंपरिक तौर पर हल्दी का इस्तेमाल त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता रहा है।

    हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हल्दी हर व्यक्ति की त्वचा पर एक जैसा असर करे। टैनिंग, मुंहासों या दाग-धब्बों के लिए इसे किसी चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

    भुनी हल्दी का फेस पैक कैसे बनाएं?

    इस फेस पैक को बनाने के लिए सबसे पहले थोड़ी सी हल्दी को तवे पर धीमी आंच पर हल्का भून लें। इसे ठंडा होने के बाद एक कटोरी में निकालें।

    अब इसमें थोड़ी मात्रा में कॉफी पाउडर मिलाएं। इसके बाद थोड़ा शहद और नींबू का रस डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें। जब गाढ़ा पेस्ट तैयार हो जाए तो इसे फेस पैक की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

    चेहरे पर कैसे लगाएं?

    फेस

  • छोटी-छोटी बातों पर आता है गुस्सा? ज्योतिष में बताए गए ये आसान उपाय मन को शांत रखने में कर सकते हैं मदद.

    छोटी-छोटी बातों पर आता है गुस्सा? ज्योतिष में बताए गए ये आसान उपाय मन को शांत रखने में कर सकते हैं मदद.

    छोटी-छोटी बातों पर आता है गुस्सा? ज्योतिष में बताए गए ये आसान उपाय मन को शांत रखने में कर सकते हैं मदद.

    कई लोगों को छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है या उनका स्वभाव पहले की तुलना में ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाता है। लगातार गुस्सा रहने का असर व्यक्ति के रिश्तों और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ सकता है। ज्योतिष शास्त्र में स्वभाव और भावनाओं को मंगल और चंद्रमा जैसे ग्रहों से जोड़कर देखा जाता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मंगल को ऊर्जा और क्रोध से तथा चंद्रमा को मन और भावनाओं से संबंधित माना जाता है। इसी आधार पर मन को शांत रखने और क्रोध पर नियंत्रण के लिए कुछ धार्मिक और ज्योतिषीय उपाय बताए जाते हैं।

    रोज सुबह सूर्य को दें अर्घ्य

    ज्योतिषीय परंपरा में सूर्यदेव को अर्घ्य देना मानसिक स्थिरता और अनुशासन से जोड़कर देखा जाता है। इसके लिए सुबह सूर्योदय के समय तांबे के पात्र से सूर्यदेव को जल अर्पित किया जा सकता है।

    इस दौरान सूर्य मंत्र का जाप करने की भी धार्मिक मान्यता है। नियमित रूप से इस पूजा को करने से मन को शांत और सकारात्मक रखने में मदद मिलने की मान्यता है।

    मंगलवार को करें हनुमान जी की पूजा

    गुस्से और चिड़चिड़ेपन को नियंत्रित करने के लिए मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करने की परंपरा भी बताई गई है। इस दिन हनुमान जी को गुड़-चना या बूंदी का भोग लगाया जा सकता है।

    ज्योतिषीय मान्यता में हनुमान जी की उपासना को मंगल से जुड़े नकारात्मक प्रभावों को शांत करने से जोड़ा जाता है। पूजा के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है।

    माथे पर चंदन का तिलक लगाएं

    मन को शांत रखने के लिए माथे पर चंदन का तिलक लगाने की धार्मिक परंपरा रही है। चंदन को शीतलता से जोड़कर देखा जाता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा के बाद माथे पर चंदन का तिलक लगाने से मन को शांति और सकारात्मकता का अनुभव हो सकता है।

    सोमवार को सफेद चीजों का करें दान

    ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है। चंद्रमा से संबंधित उपायों में सोमवार के दिन सफेद वस्तुओं का दान करने की परंपरा बताई गई है।

    जरूरतमंद व्यक्ति को दूध, चावल, चीनी या सफेद वस्त्र का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे मन की शांति और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

    मोती पहनने की भी है मान्यता

    मोती को ज्योतिष में चंद्रमा से संबंधित रत्न माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, चांदी में मोती धारण करने से मन और भावनाओं को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है।

    हालांकि, रत्न हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए मोती या कोई अन्य रत्न पहनने से पहले अपनी कुंडली के अनुसार किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह लेना उचित माना जाता है।

    जरूरी बात

    ऊपर बताए गए उपाय ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं

  • चेहरे की टैनिंग और डलनेस: से परेशान हैं? भुनी हल्दी में मिलाएं ये 3 चीजें, ऐसे तैयार करें घरेलू फेस पैक

    चेहरे की टैनिंग और डलनेस: से परेशान हैं? भुनी हल्दी में मिलाएं ये 3 चीजें, ऐसे तैयार करें घरेलू फेस पैक

    चेहरे की टैनिंग और डलनेस: से परेशान हैं? भुनी हल्दी में मिलाएं ये 3 चीजें, ऐसे तैयार करें घरेलू फेस पैक

    धूप में ज्यादा समय बिताने की वजह से चेहरे पर टैनिंग और असमान स्किन टोन की समस्या हो सकती है। इसके अलावा धूल, प्रदूषण और त्वचा की सही देखभाल न करने से चेहरा बेजान भी नजर आने लगता है। ऐसे में लोग महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स के साथ-साथ घर पर मौजूद चीजों से बने फेस पैक भी इस्तेमाल करते हैं।

    ऐसा ही एक घरेलू नुस्खा भुनी हुई हल्दी से तैयार किया जाने वाला फेस पैक है। इसमें हल्दी के साथ कॉफी, नींबू और शहद का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, किसी भी घरेलू नुस्खे से टैनिंग या दाग-धब्बे पूरी तरह खत्म होने की गारंटी नहीं होती।

    हल्दी को भूनकर क्यों किया जाता है इस्तेमाल?

    हल्दी में करक्यूमिन नाम का प्राकृतिक यौगिक पाया जाता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं। त्वचा पर हल्दी का इस्तेमाल कुछ लोगों को सूजन या जलन जैसी समस्या में राहत देने में मदद कर सकता है।

    हालांकि, संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को हल्दी या किसी भी नए फेस पैक का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए।

    फेस पैक बनाने के लिए चाहिए ये चीजें

    इस घरेलू फेस पैक को बनाने के लिए आपको हल्दी, कॉफी पाउडर, नींबू का रस और शहद की जरूरत होगी।

    सबसे पहले थोड़ी सी हल्दी लें और उसे तवे पर धीमी आंच पर हल्का भून लें। इसके बाद इसे ठंडा होने दें। अब एक कटोरी में भुनी हुई हल्दी लें और उसमें थोड़ी मात्रा में कॉफी पाउडर मिलाएं।

    इसके बाद इसमें थोड़ा नींबू का रस और शहद डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं। जब मिश्रण गाढ़े पेस्ट जैसा हो जाए तो इसे फेस पैक की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

    चेहरे पर कैसे लगाएं?

    फेस पैक लगाने से पहले चेहरे को साफ पानी से धो लें। इसके बाद तैयार मिश्रण को चेहरे पर हल्के हाथों से लगाएं। इसे करीब 10 से 15 मिनट तक लगा रहने दें।

    जब पैक सूखने लगे तो चेहरे को हल्के गुनगुने पानी से धो लें। इसके बाद त्वचा पर अपनी जरूरत के अनुसार मॉइश्चराइजर लगाएं।

    नींबू इस्तेमाल करते समय रखें सावधानी

    इस फेस पैक में नींबू का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यह हर व्यक्ति की त्वचा के लिए उपयुक्त नहीं होता। नींबू कुछ लोगों में जलन, लालिमा या संवेदनशीलता बढ़ा सकता है।

    इसलिए चेहरे पर लगाने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर है। अगर जलन, खुजली या लालिमा महसूस हो तो इसे तुरंत धो दें और दोबारा इस्तेमाल न करें।

    अगर त्वचा पहले से संवेदनशील है या कोई स्किन कंडीशन है, तो घरेलू नुस्खे आजमाने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

  • पितृ पक्ष में कितने प्रकार’ के होते हैं श्राद्ध? जानिए 12 प्रमुख रूप और उनका धार्मिक महत्व.

    पितृ पक्ष में कितने प्रकार’ के होते हैं श्राद्ध? जानिए 12 प्रमुख रूप और उनका धार्मिक महत्व.

    पितृ पक्ष में कितने प्रकार’ के होते हैं श्राद्ध? जानिए 12 प्रमुख रूप और उनका धार्मिक महत्व.

    हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन कर्मों के माध्यम से व्यक्ति अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करता है और उनकी आत्मिक शांति की कामना करता है।

    शास्त्रीय परंपराओं में श्राद्ध के अलग-अलग प्रकार बताए गए हैं। भविष्य पुराण में भी श्राद्ध के विभिन्न रूपों का उल्लेख मिलता है। इनका संबंध अलग-अलग अवसरों, उद्देश्यों और परिस्थितियों से बताया गया है।

    आइए जानते हैं श्राद्ध के बताए गए 12 प्रमुख प्रकारों के बारे में।

    1. नित्य श्राद्ध

    नित्य श्राद्ध नियमित रूप से किए जाने वाले श्राद्ध कर्म को कहा जाता है। इसमें जल या अन्न के माध्यम से पितरों का स्मरण और तर्पण किया जाता है। धार्मिक परंपरा में माता-पिता और गुरुजनों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने को भी इससे जोड़ा गया है। अन्न उपलब्ध न होने की स्थिति में जल से तर्पण करने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है।

    2. नैमित्तिक श्राद्ध

    किसी विशेष व्यक्ति या विशेष निमित्त को ध्यान में रखकर किया जाने वाला श्राद्ध नैमित्तिक श्राद्ध कहलाता है। इसे किसी खास अवसर या परिस्थिति से संबंधित श्राद्ध के रूप में बताया गया है।

    3. काम्य श्राद्ध

    किसी विशेष इच्छा या कामना की पूर्ति के उद्देश्य से किया जाने वाला श्राद्ध काम्य श्राद्ध कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में इसे किसी मनोकामना से जोड़कर देखा गया है।

    4. वृद्ध श्राद्ध

    विवाह या किसी शुभ अवसर पर परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने के लिए किए जाने वाले श्राद्ध को वृद्ध श्राद्ध कहा गया है। इसे विशेष रूप से शुभ अवसरों से संबंधित माना जाता है।

    5. सपिंडित श्राद्ध

    सपिंडित श्राद्ध का संबंध पितरों को सम्मान देने और पारिवारिक परंपरा से जुड़ा हुआ बताया जाता है। श्राद्ध की इस विधि का उल्लेख पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान के संदर्भ में किया जाता है।

    6. पार्वण श्राद्ध

    किसी पर्व या विशेष तिथि पर विधि-विधान और मंत्रों के साथ किया जाने वाला श्राद्ध पार्वण श्राद्ध कहलाता है। अमावस्या जैसे पर्वों पर किए जाने वाले श्राद्ध को भी इस श्रेणी में बताया जाता है।

    7. गोष्ठ श्राद्ध

    गौशाला या गोसम्बंधित स्थान पर किए जाने वाले श्राद्ध को गोष्ठ श्राद्ध कहा गया है। हिंदू धार्मिक परंपरा में गाय को विशेष महत्व प्राप्त है और इसी कारण श्राद्ध कर्म में भी गोसेवा और दान की परंपराएं देखने को मिलती हैं।

    8. शुद्धि श्राद्ध

    शुद्धि के उद्देश्य से किए जाने वाले श्राद्ध को शुद्धि श्राद्ध कहा जाता है। इसका संबंध धार्मिक रूप से शुद्धिकरण और विशेष परिस्थितियों में किए जाने वाले कर्मकांड से जोड़ा जाता है।

    9. कर्मांग श्राद्ध

    विभिन्न संस्कारों के अंग के रूप में किए जाने वाले श्राद्ध को कर्मांग श्राद्ध कहा जाता है। गर्भाधान, सोमयाग और सीमान्तोन्नयन जैसे संस्कारों के संदर्भ में इसका उल्लेख मिलता है।

    10. दैविक श्राद्ध

    देवताओं के प्रति श्रद्धा और धार्मिक अनुष्ठान के उद्देश्य से किए जाने वाले श्राद्ध को दैविक श्राद्ध कहा गया है। इसमें देवताओं की आराधना और उनसे संबंधित धार्मिक कर्मों का महत्व बताया जाता है।

    11. यात्रार्थ श्राद्ध

    किसी यात्रा या तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले किए जाने वाले श्राद्ध को यात्रार्थ श्राद्ध कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में यात्रा से पहले शुभकामना और मंगल की भावना से कुछ विशेष कर्म करने की मान्यता रही है।

    12. पुष्टि श्राद्ध

    किसी व्यक्ति की भलाई, मंगल और उन्नति की कामना से किए जाने वाले दान-पुण्य एवं धार्मिक कर्मों को पुष्टि श्राद्ध से जोड़ा गया है। परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों या प्रियजनों के कल्याण की कामना से किए जाने वाले कर्मों का भी इसमें उल्लेख मिलता है।

    श्राद्ध का मूल भाव क्या है?

    श्राद्ध की विभिन्न विधियों और परंपराओं में सबसे प्रमुख भाव पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता का है। पितृ पक्ष के दौरान परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों को याद करता है और अपनी परंपरा के अनुसार तर्पण, पिंडदान, दान और अन्य धार्मिक कर्म करता है।

    अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में श्राद्ध की विधि तथा नियमों में अंतर भी हो सकता है। इसलिए किसी विशेष श्राद्ध की विधि करने से पहले अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक आचार-विचार के अनुसार किसी योग्य आचार्य से मार्गदर्शन लेना उचित माना जाता है।

  • वनस्पति घी vs देसी घी: सेहत के लिए कौन सा है बेहतर विकल्प? जानें डॉक्टरों की राय और गाइडलाइंस

    वनस्पति घी vs देसी घी: सेहत के लिए कौन सा है बेहतर विकल्प? जानें डॉक्टरों की राय और गाइडलाइंस

    वनस्पति घी vs देसी घी: सेहत के लिए कौन सा है बेहतर विकल्प? जानें डॉक्टरों की राय और गाइडलाइंस

    भारतीय रसोई में सदियों से देसी घी का इस्तेमाल भोजन, पारंपरिक व्यंजनों, आयुर्वेद और धार्मिक कार्यों में होता रहा है। वहीं पिछले कुछ दशकों में कम कीमत और लंबी शेल्फ लाइफ के कारण वनस्पति घी जैसे डालडा का चलन भी बढ़ा है। ऐसे में लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या देसी घी और वनस्पति घी सेहत के लिए एक जैसे फायदेमंद हैं, या फिर दोनों में से कौन-सा विकल्प स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर माना जाता है।

    गैस्ट्रो लीवर हॉस्पिटल, स्वरूप नगर, कानपुर के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. वी.के. मिश्रा के मुताबिक देसी घी गाय या भैंस के दूध से तैयार किया जाता है। इसमें प्राकृतिक रूप से सैचुरेटेड फैट, वसा में घुलनशील विटामिन A, D, E और K मौजूद होता है। इसके अलावा घी में दूसरे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। सेहत के लिए फायदेमंद है फिर भी डॉक्टर इसका सीमित सेवन करने की सलाह देते हैं। दूसरी तरफ वनस्पति घी की बात करें तो इसे वनस्पति तेलों जैसे सोयाबीन, पाम (ताड़), कपास के बीज या दूसरे वनस्पति ऑयल से बनाया जाता है। इन तेलों को प्रोसेस करके घी जैसी बनावट दी जाती है। इसे कई जगह वेजिटेबल घी या डालडा भी कहा जाता है।

    देसी घी और वनस्पति घी में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

    देसी घी में मुख्य रूप से सैचुरेटेड फैट होता है, जबकि वनस्पति घी में ट्रांस फैट हो सकता है, अगर ये घी खासतौर पर हाइड्रोजेनेटेड तेल (Partially Hydrogenated Oil) से बना हो तो। दोनों घी के बीच यहीं सबसे बड़ा अंतर है। डॉक्टर ट्रांस फैट को सेहत के लिए नुकसानदायक मानते है। ये दिल की सेहत के लिए खतरा है। इस घी का सेवन करने से  खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ सकता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) का स्तर कम हो सकता है। लंबे समय तक अधिक मात्रा में ट्रांस फैट का सेवन करने से दिल के रोग, मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

    क्या देसी घी पूरी तरह सुरक्षित है?

    गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. वी.के. मिश्रा के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को घी से एलर्जी या कोई विशेष चिकित्सा समस्या नहीं है, तो रोजाना सीमित मात्रा में लगभग 1 चम्मच गाय के घी का सेवन सेहत को कई तरह से फायदा पहुंचा सकता है। देसी घी में ट्रांस फैट न के बराबर होता है, लेकिन इसमें सैचुरेटेड फैट अधिक होता है। इसलिए इसका अत्यधिक सेवन भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है। डॉक्टर देसी घी का सेवन भी सीमित मात्रा में करने की सलाह देते हैं। देसी घी और पारंपरिक हाइड्रोजेनेटेड वनस्पति घी के बीच देसी घी को बेहतर विकल्प माना जाता हैं।

    डॉ. मिश्रा के अनुसार घी आंतों की कोशिकाओं के लिए फायदेमंद माना जाता है। यह आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और पाचन प्रक्रिया को सुचारू रखने में मदद कर सकता है। इसका सेवन करने से बॉडी को एनर्जी मिलती है और बॉडी गर्म रहती है। सर्दी में घी का सेवन खासतौर पर करने की सलाह दी जाती है। घी में कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्व होते हैं जिनमें सूजन कम करने वाले गुण मौजूद होते हैं। अक्सर लोगों को सर्दी में जोड़ों के दर्द और अकड़न की शिकायत होती है ऐसे में घी का सेवन जोड़ों और हड्डियों की सेहत को सहारा दे सकता है। आयुर्वेद और मेडिकल साइंस दोनों ही घी को सेहत के लिए फायदेमंद मानते हैं। घी में मौजूद हेल्दी फैटी एसिड मस्तिष्क के कामों को सपोर्ट देते हैं। ये मानसिक स्पष्टता, याददाश्त और एकाग्रता के लिए लाभकारी माना गया है।

    क्या कहती है गाइड लाइन

    ICMR-NIN के अनुसार डाइट में किसी एक तरह के फैट पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग स्रोतों से संतुलित मात्रा में फैट लेना चाहिए। सैचुरेटेड फैट का सेवन सीमित रखें और ट्रांस फैट से जितना हो सके बचें। WHO के मुताबिक ट्रांस फैट का सेवन कुल दैनिक ऊर्जा का 1% से कम होना चाहिए। ट्रांस फैट हृदय रोग का खतरा बढ़ाता है, इसलिए इससे बचना चाहिए। FSSAI ने भी खाद्य उद्योग में ट्रांस फैट की मात्रा कम करने के लिए नियम बनाए हैं और उपभोक्ताओं को पैकेट पर Partially Hydrogenated Vegetable Oil या ट्रांस फैट की जानकारी पढ़कर उत्पाद चुनने की सलाह दी जाती है।

    दिल के लिए क्यों वनस्पति घी से दूरी जरूरी है?

    डॉक्टरों के मुताबिक, हाइड्रोजेनेटेड वनस्पति घी में मौजूद ट्रांस फैट हमारी धमनियों (arteries) को ब्लॉक कर सकता है। इससे न केवल दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ता है, बल्कि यह शरीर में सूजन (inflammation) को भी बढ़ावा देता है। इसके विपरीत, देसी घी में मौजूद ब्यूटिरिक एसिड (Butyric Acid) हमारी आंतों और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। देसी घी का सेवन करने से इम्यूनिटी मजबूत होती है और पाचन दुरुस्त रहता है। वनस्पति घी में मौजूद ट्रांस फैट से मोटापे का खतरा बढ़ जाता है। ट्रांस फैट आपको दूसरे फूड्स के मुकाबले ज़्यादा मोटा करता है बेशक दोनों में कैलोरी की मात्रा ज्यादा हो। वनस्पति घी का सेवन कमर और पेट के आसपास अधिक फैट बढ़ता है।

    देसी घी और वनस्पति घी दोनों का कितना सेवन करें?

    देसी घी और वनस्पति घी में, सीमित मात्रा में देसी घी को आमतौर पर बेहतर विकल्प माना जाता है। देसी घी प्राकृतिक रूप से दूध से बनाया जाता है और इसमें वसा में घुलनशील विटामिन तथा लाभकारी फैटी एसिड पाए जाते हैं। वहीं पारंपरिक वनस्पति घी हाइड्रोजेनेटेड वेजिटेबल ऑयल में ट्रांस फैट हो सकता है, जो दिल के रोग, खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) और दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम को बढ़ा सकता है। इसलिए संतुलित मात्रा में देसी घी का सेवन अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी प्रकार के घी का सेवन आपकी उम्र, स्वास्थ्य, कोलेस्ट्रॉल स्तर और अन्य चिकित्सा स्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। यदि आपको हृदय रोग, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा या डायबिटीज है, तो अपने डॉक्टर या क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह के अनुसार ही घी का सेवन करें।

  • पितृ पक्ष में अकाल मृत्यु: वालों के लिए क्यों खास है चतुर्दशी? जानें श्राद्ध से जुड़े जरूरी नियम और उपाय’

    पितृ पक्ष में अकाल मृत्यु: वालों के लिए क्यों खास है चतुर्दशी? जानें श्राद्ध से जुड़े जरूरी नियम और उपाय’

    पितृ पक्ष में अकाल मृत्यु: वालों के लिए क्यों खास है चतुर्दशी? जानें श्राद्ध से जुड़े जरूरी नियम और उपाय’

    अकाल मृत्यु वाले परिजनों की आत्मा की शांति के लिए कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं। पितृ पक्ष में इन परिजनों के श्राद्ध के लिए चतुर्दशी तिथि को विशेष माना गया है। जानिए इस तिथि का धार्मिक महत्व और दिवंगत की शांति के लिए किए जाने वाले उपाय।

    पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का समय माना जाता है। इस दौरान लोग पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान-पुण्य करते हैं। पितृ पक्ष में हर तिथि का अपना अलग महत्व है। आमतौर पर लोग दिवंगत परिजनों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध और तर्पण करते हैं। लेकिन जिनका निधन अल्प आयु में या किसी अप्रत्याशित कारण से हो जाता है, उनके लिए पितृ पक्ष में कुछ विशेष कर्म करने का विधान है। आइए जानते हैं अकाल मृत्यु वालों के लिए चतुर्दशी क्यों खास है और इस दिन कौन से उपाय करने चाहिए।

    क्या है अकाल मृत्यु?

    जब किसी व्यक्ति की मृत्यु निर्धारित उम्र से पहले हो जाती है, तो धार्मिक परंपराओं में इसे अकाल मृत्यु कहा जाता है। दुर्घटना, आग, गंभीर बीमारी, विष आदि कारणों से कम आयु में होने वाली मृत्यु को इससे जोड़कर देखा जाता है। ऐसे दिवंगत परिजनों के लिए पितृ पक्ष में चतुर्दशी श्राद्ध का विधान बताया गया है।

    चतुर्दशी तिथि क्यों खास?

    अकाल मृत्यु वाले पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए पितृ पक्ष की चतुर्दशी तिथि निर्धारित है, जिसे चतुर्दशी श्राद्ध कहा जाता है। इस तिथि का संबंध भगवान शिव से होने के कारण इस दिन शिव पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है।। ऐसे में इस दिन शिव आराधना करके दिवंगत परिजन की शांति और मोक्ष के लिए प्रार्थना की जाती है।

    ऐसे करें अभिषेक

    चतुर्दशी श्राद्ध के दिन सुबह स्नान के बाद एक लोटे में गंगाजल और पवित्र जल लें। इसमें काले तिल डालें। इसके बाद अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए परिजन के नाम से शिव जी का अभिषेक करें। इस दौरान महादेव से दिवंगत आत्मा की शांति और मोक्ष की प्रार्थना करें। मान्यता है कि इस कर्म का पुण्य फल दिवंगत को समर्पित किया जा सकता है।

    श्रीमद्भागवत पुराण का पाठ

    पितृ पक्ष के दौरान अकाल मृत्यु वाले परिजन के लिए श्रीमद्भागवत पुराण के महात्म्य का पाठ करना या उसे सुनना भी विशेष माना गया है। पितृ पक्ष के 15 दिनों में इसका पाठ या श्रवण करने से दिवंगत जीवात्मा की शांति और मोक्ष के लिए प्रार्थना की जाती है।

    श्राद्ध का शुभ समय

    पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर रात 10:15 बजे से 9 अक्टूबर रात 9:35 बजे तक रहेगी। चतुर्दशी श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। इसके बाद रौहिण मुहूर्त 12:31 से 1:18 बजे तक और अपराह्न काल 1:18 से 3:38 बजे तक रहेगा। इन्हीं समयावधियों में श्राद्ध और तर्पण से जुड़े कर्म किए जा सकते हैं।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • हरियाणा के 4 वर्षीय’ मयन सैनी ने रचे दो विश्व रिकॉर्ड, 195 देशों के झंडे और मानचित्र पहचानकर बढ़ाया देश का मान

    हरियाणा के 4 वर्षीय’ मयन सैनी ने रचे दो विश्व रिकॉर्ड, 195 देशों के झंडे और मानचित्र पहचानकर बढ़ाया देश का मान

    हरियाणा के 4 वर्षीय’ मयन सैनी ने रचे दो विश्व रिकॉर्ड, 195 देशों के झंडे और मानचित्र पहचानकर बढ़ाया देश का मान

    मुलाना के महमूदपुर गांव के नन्हे मयन सैनी ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से छोटी उम्र में ही दो विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। महज चार साल की उम्र में मयन ने एक के बाद एक दो रिकॉर्ड बनाकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।पहले मयन ने 195 देशों के झंडों को पहचानकर उनके नाम बताने का विश्व रिकॉर्ड बनाया।

    इसके बाद महाद्वीपवार सभी देशों की पहचान कर उनके नाम बताकर दूसरा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया।मयन की इस उपलब्धि के पीछे उसके माता-पिता के प्रोत्साहन के साथ उसकी मां मधू सैनी की अहम भूमिका रही। खेल-खेल में सीखने की शुरुआत करने वाले मयन ने 2 मिनट 19.8 सेकंड में रंगीन विश्व के ब्लैक मैप से महाद्वीपवार देशों की पहचान कर यह रिकॉर्ड बनाया।मयन की इस प्रतिभा ने न सिर्फ उसके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।

    मुलाना के गांव महमूदपुर निवासी चार वर्षीय मयन सैनी ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर छोटी उम्र में ही दो विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। मयन की इस उपलब्धि के पीछे उसके माता-पिता के प्रोत्साहन के साथ- साथ उसकी माता मधू सैनी की अहम भूमिका रही है।मयन के पिता रोहित सैनी और माता मधू सैनी ने बताया कि मयन को शुरू से ही देशों, झंडों और विश्व मानचित्र को जानने में रुचि थी।

    उसकी इसी रुचि को देखते हुए उसकी मां मधू सैनी ने उसे पढ़ाई के दबाव के बजाय खेल-खेल में देशों और उनके झंडों की पहचान करना सिखाया । मयन ने भी इसे खेल की तरह लिया और धीरे-धीरे इतनी आसानी से सीखता चला गया कि कम उम्र में ही उसने रिकॉर्ड कायम कर दिए।मयन सैनी ने 12 मई 2026 को अंबाला में 195 देशों के झंडों को पहचानकर और उनके नाम बोलकर विश्व रिकॉर्ड बनाया, जिसके चलते मयंक का नाम वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में दर्ज किया गया।

    मयन ने यह उपलब्धि 1 मिनट 44 सेकंड में हासिल की। उस समय उसकी उम्र करीब साढ़े चार वर्ष थी। इसके बाद 10 जुलाई 2026 को मयन ने एक और उपलब्धि हासिल की। मयन महज 4 वर्ष, 8 माह और 10 दिन की उम्र में मयन ने रंगीन विश्व के ब्लैक मैप से महाद्वीपवार सभी देशों की पहचान कर उनके नाम बताए। उसने यह कार्य 2 मिनट 19.8 सेकंड में पूरा किया और नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह विश्व रिकार्ड इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकार्ड्सअब महाद्वीपवार देशों की पहचान में दर्ज किया गया ।