Blog

  • दिमाग को हमेशा रखना है जवान, तो पहेलियों से करो दोस्ती, इन टिप्स को आजमाएं..?

    दिमाग को हमेशा रखना है जवान, तो पहेलियों से करो दोस्ती, इन टिप्स को आजमाएं..?

    दिमाग को हमेशा रखना है जवान, तो पहेलियों से करो दोस्ती, इन टिप्स को आजमाएं

    बुढ़ापे में भी अगर दिमाग को चुस्त-दुरुस्त रखना है, तो उसे खाली मत छोड़िए। उसे काम में लगाए रखिए। ऐसा हमारा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार का कहना है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि अपने मस्तिष्क को व्यस्त रखना बहुत जरूरी है।

    मंत्रालय ने लिखा, “अपने मस्तिष्क को व्यस्त रखें। मानसिक प्रेरणा (उद्दीपन) से स्मृति और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य बेहतर होता है। पहेलियां हल करें, दिमागी खेल खेलें और जिज्ञासु बने रहें।” मंत्रालय का कहना है कि जैसे शरीर को फिट रखने के लिए कसरत जरूरी है, वैसे ही दिमाग को फिट रखने के लिए उसकी भी कसरत जरूरी है।

    दिमाग की कसरत का सबसे आसान तरीका पहेलियां, दिमागी खेल और नई-नई चीजों के बारे में जानने की इच्छा है।अक्सर देखा जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ लोग चीजें भूलने लगते हैं। रखा हुआ सामान याद नहीं रहता, किसी का नाम याद करने में वक्त लगता है। ये सब संज्ञानात्मक स्वास्थ्य कमजोर होने की निशानी है।

    अगर आप पहले से ही अपने दिमाग को एक्टिव रखेंगे, तो इस परेशानी से काफी हद तक बचा जा सकता है।सुबह अखबार में जो सुडोकू या क्रॉसवर्ड आता है, वो सिर्फ टाइमपास नहीं है। वो आपके दिमाग के लिए जिम जैसा है। जब आप कोई पहेली हल करते हैं, तो आपके दिमाग की नसें ज्यादा तेजी से काम करती हैं। इससे आपकी याददाश्त तेज होती है और सोचने-समझने की क्षमता बढ़ती है।इसी तरह शतरंज, कैरम, लूडो जैसे दिमागी खेल भी बहुत फायदेमंद हैं। ये खेल आपको रणनीति बनाना सिखाते हैं और आपके फोकस को बढ़ाते हैं। घर में दादा-दादी, नाना-नानी के साथ बच्चे अगर ये खेल खेलें, तो दोनों को फायदा होगा।

    इसके साथ ही जिज्ञासु बने रहना भी बहुत जरूरी है। सीखना कभी बंद नहीं करना चाहिए। नई किताबें पढ़िए, नई जगहों के बारे में जानिए, लोगों से बातचीत कीजिए, कुछ नया करने की कोशिश कीजिए। जब आप जिज्ञासु रहते हैं, तो आपका दिमाग नई चीजों को सीखने के लिए हमेशा तैयार रहता है। इससे बुढ़ापे में भी आपका दिमाग जवान बना रहता है।

  • इतनी खास क्यों है 4500 साल पुरानी ‘डांसिंग गर्ल’ की मूर्ति, यूं ही नहीं मचा है बवाल..

    इतनी खास क्यों है 4500 साल पुरानी ‘डांसिंग गर्ल’ की मूर्ति, यूं ही नहीं मचा है बवाल..

    इतनी खास क्यों है 4500 साल पुरानी ‘डांसिंग गर्ल’ की मूर्ति, यूं ही नहीं मचा है बवाल

    दिलचस्प बात यह है कि जिस मूर्ति पर आज पूरा देश बहस कर रहा है, उसकी ऊंचाई महज 10.5 सेंटीमीटर है. कमर पर हाथ रखे खड़ी यह आकृति किसी साधारण कलाकृति की तरह नहीं दिखती.

    सोशल मीडिया पर इन दिनों 4500 साल पुरानी एक छोटी-सी मूर्ति को लेकर बड़ी बहस छिड़ी हुई है. ये वही मशहूर ‘डांसिंग गर्ल’ है, जिसे सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे पहचान योग्य धरोहरों में गिना जाता है. हाल ही में एक किताब में इसकी तस्वीर को अलग तरीके से प्रकाशित किए जाने के बाद लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई. कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि ऐतिहासिक विरासत को उसके मूल स्वरूप में ही दिखाया जाना चाहिए या नहीं. दिलचस्प बात यह है कि जिस मूर्ति पर आज पूरा देश बहस कर रहा है, उसकी ऊंचाई महज 10.5 सेंटीमीटर है. आकार में छोटी होने के बावजूद यह भारतीय उपमहाद्वीप के प्राचीन इतिहास की सबसे प्रभावशाली कलाकृतियों में शामिल है.

    अपने आप में बेहद खास है ये मूर्ति

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मूर्ति करीब 2500 ईसा पूर्व की है और उस दौर की तकनीकी समझ तथा कलात्मक कौशल का शानदार उदाहरण पेश करती है. इस मूर्ति की सबसे बड़ी खासियत इसकी आत्मविश्वास से भरी मुद्रा है. कमर पर हाथ रखे खड़ी यह आकृति किसी साधारण कलाकृति की तरह नहीं दिखती. यही वजह है कि दशकों से इतिहासकार, कलाकार और शोधकर्ता इसके अर्थ और पहचान को लेकर अलग-अलग राय रखते आए हैं.

    क्या मानते हैं एक्सपर्ट्स

    कुछ इसे डांसिंग गर्ल मानते हैं, जबकि कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह किसी प्रभावशाली महिला या धार्मिक परंपरा का प्रतीक भी हो सकती है. सोशल मीडिया पर चल रही बहस का एक बड़ा कारण यह भी है कि यह मूर्ति केवल धातु से बनी एक पुरानी वस्तु नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास की पहचान मानी जाती है. लोगों का मानना है कि ऐसी ऐतिहासिक धरोहरें आने वाली पीढ़ियों को अतीत से जोड़ने का काम करती हैं. इसलिए इनके स्वरूप या प्रस्तुति में किसी भी बदलाव को लेकर संवेदनशीलता स्वाभाविक है.

  • समंदर ने 300 साल तक संभालकर रखा 2 लाख करोड़ का खजाना, अब दुनिया ने देखी पहली झलक>?

    समंदर ने 300 साल तक संभालकर रखा 2 लाख करोड़ का खजाना, अब दुनिया ने देखी पहली झलक>?

    समंदर ने 300 साल तक संभालकर रखा 2 लाख करोड़ का खजाना, अब दुनिया ने देखी पहली झलक

    समंदर की गहराई में 300 साल से छिपे एक बड़े राज से अब पर्दा उठना शुरू हो गया है. कैरेबियन सागर में डूबे एक पुराने जहाज सैन होजे (San Jose) से पहली बार कुछ कीमती चीजें बाहर निकाली गई हैं. इस जहाज को दुनिया के सबसे बड़े डूबे हुए खजानों में से एक माना जाता है. माना जा रहा है कि इसमें करीब 20 अरब डॉलर यानी लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का खजाना हो सकता है. ये जहाज साल 1708 में डूब गया था. उस समय यह स्पेन के राजा के लिए सोना, चांदी और कीमती पत्थर लेकर जा रहा था. लेकिन सफर के दौरान ब्रिटिश जहाजों के हमले में यह समुद्र में समा गया. इसके साथ ही इसमें रखा अरबों रुपये का खजाना भी पानी की गहराई में चला गया.

    300 साल बाद दिखी खजाने की झलक

    करीब 300 साल बाद इस जहाज से पहली बार कुछ चीजें बाहर निकाली गई हैं. इनमें कांसे की एक तोप, चीनी मिट्टी का एक कप, सोने के तीन पुराने सिक्के और मिट्टी के बर्तनों के कुछ टुकड़े शामिल हैं. इन चीजों को देखकर वैज्ञानिक और इतिहासकार काफी उत्साहित हैं. इस जहाज को समुद्र की करीब 2000 फीट गहराई में खोजा गया था. इतनी गहराई में जाकर चीजों को बाहर निकालना आसान काम नहीं था. इसके लिए खास रोबोट मशीनों और आधुनिक तकनीक की मदद ली गई. वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी पूरा खजाना बाहर नहीं निकाला गया है. समुद्र की तह में अब भी बड़ी संख्या में सोना, चांदी और दूसरी कीमती चीजें मौजूद हो सकती हैं.

    ऐतिहासिक चीजें मिलने की उम्मीद

    खोजकर्ताओं का अनुमान है कि आगे की खोज में और भी कई ऐतिहासिक चीजें मिलने की उम्मीद है. मालूम हो कि जहाज सिर्फ खजाने की वजह से खास नहीं है, बल्कि यह 300 साल पुराने इतिहास को समझने का एक बड़ा जरिया भी है. इससे उस समय के व्यापार, समुद्री यात्राओं और लोगों की जिंदगी के बारे में नई जानकारी मिल सकती है. इस खजाने को लेकर अलग-अलग देशों के बीच अधिकार को लेकर विवाद भी चल रहा है. कई पक्ष इस जहाज और इसमें मौजूद चीजों पर अपना दावा करते हैं. फिलहाल बरामद की गई चीजों को सुरक्षित रखा गया है और उनकी जांच की जा रही है. समंदर ने सदियों तक इस जहाज के राज को अपने अंदर छिपाकर रखा था. अब धीरे-धीरे दुनिया के सामने इसकी कहानी और इसमें छिपे खजाने की झलक सामने आ रही है.

  • कपड़े धोने का समय भी बदल सकता है घर की ऊर्जा! जानें सुबह क्यों माना जाता है शुभ और रात में क्यों है मनाही..

    कपड़े धोने का समय भी बदल सकता है घर की ऊर्जा! जानें सुबह क्यों माना जाता है शुभ और रात में क्यों है मनाही..

    Featured Image

    आज की व्यस्त जिंदगी में घर के काम करने का कोई तय समय नहीं रह गया है। कई लोग सुबह समय न मिलने पर रात में कपड़े धोना पसंद करते हैं। लेकिन क्या आपने जानते हैं कि कपड़े धोने का असर घर की ऊर्जा पर हो सकता है? वास्तु शास्त्र में घर के कामों के लिए सही समय और दिशा का महत्व बताया गया है। इसी आधार पर कपड़े धोने के लिए भी सुबह का समय सबसे बेहतर माना जाता है। वहीं, शाम और रात के समय इस काम को करने से बचने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं इसके पीछे क्या मान्यता है।

    सुबह क्यों माना जाता है शुभ

    वास्तु शास्त्र  अनुसार सुबह का समय सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा होता है। सूर्योदय के बाद वातावरण में रोशनी और ताजगी रहती है, इसलिए इस समय कपड़े धोना अच्छा माना जाता है। इसका एक व्यावहारिक फायदा भी है। सुबह धोए गए कपड़ों को दिनभर धूप और ताजी हवा मिलती है, जिससे वे अच्छी तरह सूख जाते हैं।

    सुबह न मिले समय तो

    हर किसी के लिए सुबह कपड़े धोना संभव नहीं होता। अगर आपकी दिनचर्या काफी व्यस्त है तो दोपहर का समय भी चुना जा सकता है। दिन के इस हिस्से में धूप पर्याप्त तेज रहती है, जिससे कपड़े जल्दी सूख सकते हैं। इसलिए सुबह के बाद दोपहर को कपड़े धोना बेहतर विकल्प माना जाता है।

    सूर्यास्त के बाद क्यों बचें

    वास्तु में सूर्यास्त के बाद कपड़े धोने को शुभ नहीं माना गया है। इसके पीछे एक वजह रात के समय सकारात्मक प्राकृतिक ऊर्जा का कम होना भी माना जाता है। मान्यता है कि इस समय धोए गए कपड़ों में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव रह सकता है।

    रात में नमी बन सकती है परेशानी

    रात में कपड़े धोने से कपड़ों को पर्याप्त धूप और हवा न मिले तो वे देर से सूखते हैं। लंबे समय तक नमी रहने से कपड़ों में दुर्गंध आ सकती है। वास्तु शास्त्र में भी नमी और गंदगी को नकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए रात में कपड़े धोने के लिए मना किया जाता है।

    इन बातों का रखें ध्यान

    वास्तु मान्यताओं में घर में साफ सफाई का सीधा संबंध सकारात्मक वातावरण से माना जाता है। ऐसे में गीले कपड़ों को लंबे समय तक कमरे के अंदर या अंधेरे स्थान पर रखने से बचना चाहिए। वास्तु अनुसार कपड़े धोने के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • कार का बोनट खोला तो उड़ गए होश, अंदर कुंडली मारकर बैठा था 7 फीट लंबा अजगर; रेस्क्यू का वीडियो वायरल..

    कार का बोनट खोला तो उड़ गए होश, अंदर कुंडली मारकर बैठा था 7 फीट लंबा अजगर; रेस्क्यू का वीडियो वायरल..

    मुंबई: बारिश के मौसम में सांप और दूसरे जीव सुरक्षित और सूखी जगह की तलाश में अक्सर इंसानी बस्तियों तक पहुंच जाते हैं। लेकिन मुंबई के दहिसर इलाके में एक कार के बोनट के अंदर जो नजारा देखने को मिला, उसने वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया।

    दहिसर के कांदरपाड़ा स्थित बापू बागवे रोड पर एक रिहायशी परिसर में खड़ी कार के बोनट के अंदर करीब 7 फीट लंबा अजगर घुस गया। अजगर को कार के भीतर जाते देख आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    कार के बोनट में कैसे पहुंचा अजगर?

    बताया गया कि शनिवार दोपहर कार को परिसर में पार्क किया गया था। इसी दौरान कुछ लोगों की नजर एक विशाल अजगर पर पड़ी, जो धीरे-धीरे कार के निचले हिस्से की तरफ बढ़ रहा था। देखते ही देखते वह कार के बोनट के अंदर चला गया।

    जब लोगों को इसका पता चला तो उन्होंने तुरंत कार मालिक को जानकारी दी। इसके बाद सांप पकड़ने वाले विशेषज्ञ को बुलाया गया।

    इंजन के पुर्जों के बीच फंसा था अजगर

    रेस्क्यू एक्सपर्ट समीर गुप्ता मौके पर पहुंचे और कार का बोनट खोला। अंदर का नजारा देखकर हर कोई हैरान रह गया। विशालकाय अजगर इंजन के पुर्जों के बीच मजबूती से कुंडली मारकर बैठा हुआ था।

    रेस्क्यू टीम ने काफी सावधानी से अजगर को बाहर निकाला। वायरल हो रहे वीडियो में विशेषज्ञ को अजगर को कार के इंजन से सुरक्षित तरीके से निकालते हुए देखा जा सकता है।

    सुरक्षित जगह पर छोड़ा गया अजगर

    कड़ी मशक्कत के बाद अजगर को कार से बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद उसे सुरक्षित तरीके से संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ दिया गया।

    इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कार के बोनट से निकलता विशाल अजगर देखकर लोग हैरानी जता रहे हैं। बारिश के मौसम में सांपों के सुरक्षित जगहों की तलाश में घरों और वाहनों तक पहुंचने की घटनाएं सामने आती रहती हैं।

  • धरती का ‘सर्वाइवल एक्सपर्ट’ है बिच्छू! महीनों बिना खाना और कई दिनों तक पानी में रह सकता है जिंदा.

    धरती का ‘सर्वाइवल एक्सपर्ट’ है बिच्छू! महीनों बिना खाना और कई दिनों तक पानी में रह सकता है जिंदा.

    Viral News : धरती का ‘सर्वाइवल एक्सपर्ट’ है बिच्छू! महीनों बिना खाना और कई दिनों तक पानी में रह सकता है जिंदा

    धरती पर कई ऐसे जीव पाए जाते हैं, जिनकी क्षमताएं इंसानों को हैरान कर देती हैं। इन्हीं में से एक है बिच्छू। दिखने में खतरनाक यह जीव सिर्फ अपने जहरीले डंक के लिए ही मशहूर नहीं है, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में लंबे समय तक जिंदा रहने की अपनी क्षमता के कारण भी बेहद खास माना जाता है। बिच्छू की सबसे हैरान करने वाली खूबियों में से एक है उसका लंबे समय तक बिना भोजन के रहना।

    जब उसे खाने की कमी का सामना करना पड़ता है, तो उसका मेटाबॉलिज्म काफी धीमा हो जाता है। इससे शरीर की ऊर्जा की खपत कम हो जाती है और वह लंबे समय तक उपलब्ध ऊर्जा के सहारे जीवित रह सकता है। इसी वजह से बिच्छू कई महीनों तक भोजन के बिना भी जिंदा रह सकता है। पानी में भी दिखाता है जबरदस्त सहनशक्तिबिच्छू के शरीर में सांस लेने से जुड़े विशेष अंग होते हैं, जिनकी मदद से वह कठिन परिस्थितियों में अपनी श्वसन गतिविधियों को बेहद कम कर सकता है।

    इसी कारण उसके अंदर कुछ समय तक पानी के भीतर भी जीवित रहने की क्षमता देखी गई है। हालांकि, पानी में कितने समय तक कोई बिच्छू जीवित रह सकता है, यह उसकी प्रजाति और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए छह दिनों तक बिना सांस लिए जिंदा रहने का दावा हर बिच्छू पर लागू नहीं किया जा सकता।

    यूवी लाइट में चमकने लगता है शरीरबिच्छू की एक और दिलचस्प विशेषता है कि कई प्रजातियां अल्ट्रावायलेट (UV) रोशनी में चमकती हुई दिखाई देती हैं। अंधेरे में जब उन पर UV लाइट डाली जाती है, तो उनका शरीर नीले-हरे रंग की चमक जैसा दिखाई दे सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह चमक बिच्छू के बाहरी शरीर की परत में मौजूद कुछ रासायनिक यौगिकों के कारण होती है।करोड़ों साल से धरती पर मौजूद है यह जीव.बिच्छुओं का विकासवादी इतिहास भी काफी पुराना है। इनके पूर्वजों के जीवाश्म करोड़ों साल पुराने हैं। बदलते पर्यावरण और कठिन परिस्थितियों के बीच इनके जीवित रहने की क्षमता इन्हें प्रकृति के बेहद सफल सर्वाइवर्स में शामिल करती है।

    हालांकि, बिच्छू को लेकर सोशल मीडिया पर कई बार ऐसे दावे भी वायरल होते रहते हैं जिनमें उसकी क्षमताओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। मसलन, हर बिच्छू का एक बार भोजन करके ठीक एक साल तक जीवित रहना या हर प्रजाति का छह दिन तक पानी के भीतर बिना सांस लिए रहना वैज्ञानिक रूप से सार्वभौमिक तथ्य नहीं माना जा सकता।फिर भी, बिच्छू की कम ऊर्जा में लंबे समय तक जीवित रहने की क्षमता, कठिन परिस्थितियों को सहने की ताकत और UV रोशनी में चमकने वाला शरीर उसे दुनिया के सबसे दिलचस्प जीवों में जरूर शामिल करता है। यही खूबियां बताती हैं कि प्रकृति ने अलग-अलग जीवों को परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की कितनी अद्भुत क्षमता दी है।

  • पूरी सृष्टि में केवल पुष्कर में है ब्रह्मा जी का मंदिर, जानिए कारण

    पूरी सृष्टि में केवल पुष्कर में है ब्रह्मा जी का मंदिर, जानिए कारण

    पूरी सृष्टि में केवल पुष्कर में है ब्रह्मा जी का मंदिर, जानिए कारण

    पुष्कर,। ब्रह्मा, विष्णु और महेश को सृष्टि का निर्माता, पालनकर्ता और संहारक माना गया है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि विष्णु और शिव जी के तो पूरे देश में कई मंदिर हैं और लोग घर में भी उनकी पूजा करते हैं, जबकि ब्रह्मा जी की पूजा लगभग कभी नहीं होती।

    उनका केवल एक ही मंदिर है जो पुष्कर में स्थित है। पुराणों के अनुसार, इसका कारण देवी सावित्री का दिया हुआ श्राप है। कहा जाता है कि एक बार ब्रह्मा जी अपने हाथ में कमल का फूल लिए हुए अपने वाहन हंस पर सवार होकर यज्ञ के लिए जगह तलाश रहे थे। इसी दौरान उनका कमल का फूल हाथ से गिर गया और उस जगह पर तीन झरने बन गए। इन्हें ब्रह्म पुष्कर, विष्णु पुष्कर और शिव पुष्कर के नाम से जाना गया।

    ब्रह्मा जी ने यही यज्ञ करने का निर्णय लिया, लेकिन यज्ञ में उनकी पत्नी का होना जरूरी था।उस समय देवी सावित्री वहां नहीं थीं और शुभ मुहूर्त निकल रहा था, इसलिए ब्रह्मा जी ने उसी समय वहां मौजूद एक सुंदर स्त्री से विवाह कर यज्ञ संपन्न कर लिया। जब यह बात देवी सावित्री को पता चली, तो वे बहुत नाराज हुईं और उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दे दिया कि पूरी सृष्टि में उनकी पूजा नहीं की जाएगी।

    यही वजह है कि ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर पुष्कर में है। इसके बाद ब्रह्मा जी ने यहीं दस हजार साल तक रहकर सृष्टि की रचना की और पांच दिनों तक यज्ञ किया। यहीं तपस्या के दौरान सावित्री देवी वहां पहुंचीं और उनकी नाराजगी शांत हुई।श्रद्धालु आज भी ब्रह्मा जी से दूर से ही प्रार्थना करते हैं। कहा जाता है कि श्राप की वजह से पूरी दुनिया में ब्रह्मा की पूजा नहीं होती। वहीं, देवी सावित्री तपस्या के लिए पुष्कर की पहाड़ियों पर चली गईं और आज भी वहां मंदिर में विराजमान हैं। वे भक्तों का कल्याण करती हैं और उनकी कृपा से ही श्रद्धालु लाभ पाते हैं-

  • क्या समंदर में समा जाएंगे ब्रिटेन के शहर! वैज्ञानिकों ने दी डराने वाली चेतावनी,,

    क्या समंदर में समा जाएंगे ब्रिटेन के शहर! वैज्ञानिकों ने दी डराने वाली चेतावनी,,

    क्या समंदर में समा जाएंगे ब्रिटेन के शहर! वैज्ञानिकों ने दी डराने वाली चेतावनी

    अगर आपको बताया जाए कि भविष्य में ब्रिटेन के कई बड़े शहर समंदर में समा सकते हैं. शायद किसी को भी इस बात पर यकीन नहीं होगा. मगर वैज्ञानिकों ने एक ऐसी चेतावनी दी है जो किसी के भी होश उड़ा देगी. वैज्ञानिकों ने एक शोध के हवाले से बताया कि अगर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन तेजी से नहीं रुका, तो आने वाले समय में समंदर का बढ़ता जलस्तर ब्रिटेन के कई शहरों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि साल 2300 तक ब्रिटेन के कई तटीय इलाके पानी में डूब सकते हैं और करीब 17 लाख लोग समुद्री बाढ़ के खतरे वाले क्षेत्रों में रहने को मजबूर हो सकते हैं.

    मौसम ने दी डराने वाली जानकारी

    मालूम हो कि ये चेतावनी ब्रिटेन के मौसम विभाग (Met Office) और यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में दी गई है. शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर मॉडल की मदद से यह समझने की कोशिश की कि आने वाले सालों में समुद्र का जलस्तर कितना बढ़ सकता है और इसका असर किन इलाकों पर पड़ेगा. स्टडी के मुताबिक, अगर दुनिया मौजूदा जलवायु लक्ष्यों को भी पूरा कर ले, तब भी साल 2200 तक करीब 14 लाख लोग समुद्री बाढ़ के खतरे में होंगे. वहीं 2300 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 17 लाख हो सकती है.

    धीरे-धीरे बढ़ा समुद्र का जलस्तर

    वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन एक बार यह प्रक्रिया शुरू हो जाए तो इसका असर कई सदियों तक बना रहता है. यही वजह है कि इसे जलवायु परिवर्तन का ‘स्लीपिंग जायंट’ यानी धीरे-धीरे बढ़ने वाला बड़ा खतरा माना जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2100 तक ब्रिटेन के तटीय इलाकों में समुद्र का जलस्तर करीब 40 से 60 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है. इससे बाढ़ प्रभावित जमीन का दायरा लगभग 13 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा. सबसे ज्यादा खतरा द वॉश, हम्बर एस्ट्यूरी और ब्रिस्टल चैनल जैसे निचले इलाकों को बताया गया है.

    1.8 मीटर जलस्तर बढ़ने का अनुमान

    वैज्ञानिकों का अनुमान है कि साल 2300 तक समुद्र का जलस्तर 1.2 से 1.8 मीटर तक बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र 56 प्रतिशत तक बढ़ जाएंगे. लंदन, लिवरपूल, ब्लैकपूल, नॉरफोक और दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड के कई हिस्सों में भी समुद्री पानी घुसने का खतरा बढ़ जाएगा. रिसर्चरों ने एक और गंभीर संभावना भी जताई है. अगर अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड की बर्फ तेजी से पिघलने लगी, तो 2300 तक समुद्र का जलस्तर 15 मीटर से भी ज्यादा बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में मौजूदा समुद्री सुरक्षा दीवारों और बाढ़ सुरक्षा व्यवस्थाओं का बड़ा हिस्सा बेअसर हो जाएगा.

  • क्या आपका ऑफिस बैग बन रहा है आर्थिक परेशानियों की वजह? वास्तु में बताए गए हैं ये खास नियम..

    क्या आपका ऑफिस बैग बन रहा है आर्थिक परेशानियों की वजह? वास्तु में बताए गए हैं ये खास नियम..

    Featured Image

    ऑफिस से घर लौटते ही ज्यादातर लोग अपना बैग कहीं भी रख देते हैं। कई बार बैग सीधे जमीन पर रख दिया जाता है। यह आदत सामान्य लग सकती है, लेकिन वास्तु शास्त्र में इसे शुभ नहीं माना गया है । काम से जुड़ा बैग केवल सामान रखने का साधन नहीं होता, बल्कि यह आपकी आय, करियर और समृद्धि से भी जुड़ा होता है। इसे जमीन पर रखने से कई तरह के दोष लग सकते हैं। ऐसे में यहां जानिए बैग रखने से जुड़े कुछ वास्तु जरूरी नियम।

    बैग का वास्तु से संबंध

    वास्तु अनुसार हमारे रोजमर्रा के इस्तेमाल की हर वस्तु अपने साथ एक विशेष ऊर्जा लेकर चलती है। ऑफिस बैग भी उन्हीं वस्तुओं में शामिल है। इसमें लैपटॉप, जरूरी दस्तावेज, डायरी, पर्स और अन्य काम से जुड़ी चीजें रखी जाती हैं। इसलिए इसे धन और कार्यक्षेत्र से जुड़ा प्रतीक भी माना जाता है।

    जमीन पर न रखें बैग

    ऑफिस बैग को सीधे जमीन पर रखने से बचना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है और आर्थिक मामलों में रुकावट आने की आशंका बढ़ती है। इसके बजाय बैग को टेबल, शेल्फ या किसी साफ और ऊंचे स्थान पर रखें।

    फिजूलखर्ची का कारण

    अगर व्यक्ति अपने काम से जुड़ी चीजों का सम्मान नहीं करता, तो इसका असर उसकी आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। मान्यता है कि बैग को जमीन पर रखने से धन की बचत में कठिनाई आ सकती है और मेहनत के अनुसार लाभ मिलने में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

    करियर पर पड़ता है असर

    भारतीय परंपरा में ऊंचाई को उन्नति और सफलता का प्रतीक माना गया है। इसलिए बैग को व्यवस्थित और ऊंची जगह पर रखना शुभ माना जाता है। वहीं, इसे जमीन पर रखने की आदत करियर की गति को धीमा करने और कार्यक्षेत्र में चुनौतियां बढ़ाने वाली मानी जाती है।

    नकारात्मक ऊर्जा

    वास्तु के अनुसार जमीन पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक माना जाता है। ऐसे में ऑफिस बैग को सीधे फर्श पर रखने से वह इस ऊर्जा के संपर्क में आ सकता है। मान्यता है कि इसका असर कामकाज, आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति पर भी दिखाई दे सकता है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • सितंबर में बढ़ सकता है पेट और संक्रमण का खतरा? डॉक्टर ने बताए 7 फूड्स, डाइट में करें शामिल..

    सितंबर में बढ़ सकता है पेट और संक्रमण का खतरा? डॉक्टर ने बताए 7 फूड्स, डाइट में करें शामिल..

    सितंबर में बढ़ सकता है फीवर, टाइफाइड और पाचन का खतरा; डॉक्टर से जानें पेट और इम्यूनिटी सुरक्षित रखने वाले 5 फूड्स

    Health Tips: मानसून की विदाई के साथ सितंबर में मौसम तेजी से बदलता है। उमस, तापमान में उतार-चढ़ाव और कई जगहों पर पानी व भोजन के दूषित होने का जोखिम बढ़ने से कुछ लोगों को पेट संबंधी परेशानी और संक्रमण का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सितंबर में हर व्यक्ति को वायरल फीवर, टाइफाइड या पाचन संबंधी समस्या होना तय है।

    ऐसे मौसम में साफ पानी, ताजा भोजन, अच्छी नींद और संतुलित डाइट शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। डॉक्टरों और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स की सलाह के मुताबिक कुछ पौष्टिक खाद्य पदार्थों को नियमित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    मूंग दाल है हल्का और पौष्टिक विकल्प

    मूंग दाल को आमतौर पर आसानी से पचने वाली दालों में शामिल किया जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं।

    अगर मौसम बदलने के दौरान गैस, पेट फूलने या भारीपन जैसी समस्या होती है, तो हल्की मूंग दाल या मूंग दाल की खिचड़ी एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

    हल्दी वाला दूध भी कर सकते हैं डाइट में शामिल

    हल्दी में करक्यूमिन नामक सक्रिय यौगिक पाया जाता है, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों पर शोध हुआ है।

    हल्दी को दूध में मिलाकर लिया जा सकता है। इसमें थोड़ी काली मिर्च मिलाने से करक्यूमिन के अवशोषण में मदद मिल सकती है।

    हालांकि, हल्दी वाला दूध किसी बीमारी का इलाज नहीं है। वहीं जिन लोगों को दूध से एलर्जी या लैक्टोज इनटॉलरेंस है, उन्हें इसका सेवन अपनी सहनशीलता के अनुसार करना चाहिए।

    बादाम से मिलेंगे हेल्दी फैट और विटामिन E

    बादाम में प्रोटीन, फाइबर, हेल्दी फैट, विटामिन E और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।

    इन्हें भिगोकर या सामान्य रूप से भी खाया जा सकता है। बादाम को भिगोना जरूरी नहीं है, लेकिन अगर आपको भीगे हुए बादाम पसंद हैं तो उन्हें संतुलित मात्रा में डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    दही आंतों की सेहत के लिए हो सकता है उपयोगी

    ताजा और सही तरीके से रखा गया दही प्रोटीन, कैल्शियम और कुछ जीवित बैक्टीरियल कल्चर का स्रोत हो सकता है। ऐसे प्रोबायोटिक कल्चर कुछ लोगों की गट हेल्थ को सपोर्ट कर सकते हैं।

    हालांकि, हर व्यक्ति की पाचन क्षमता अलग होती है। अगर दही खाने से गैस, पेट फूलना या दूसरी परेशानी होती है तो इसका सेवन कम करना या डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

    मौसमी फल जरूर खाएं

    पपीता, अमरूद, सेब और नाशपाती जैसे फल फाइबर, विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट यौगिकों के अच्छे स्रोत हो सकते हैं।

    इनमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और कब्ज की समस्या में मदद कर सकता है। इस मौसम में फल खरीदते समय उनकी ताजगी का ध्यान रखें और खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह धो लें।

    अदरक को खाने में कर सकते हैं शामिल

    अदरक में जिंजरोल सहित कई जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। शोध में अदरक को मतली और कुछ पाचन संबंधी लक्षणों में संभावित मदद से जोड़ा गया है।

    इसे सब्जी, दाल या चाय में सीमित मात्रा में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, ज्यादा अदरक खाने से कुछ लोगों को सीने में जलन या पेट में परेशानी हो सकती है।

    नींबू के साथ पर्याप्त पानी पिएं

    नींबू विटामिन C का अच्छा स्रोत है और विटामिन C शरीर के सामान्य इम्यून सिस्टम के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    नींबू का रस भोजन में शामिल करने से पौधों से मिलने वाले नॉन-हीम आयरन के अवशोषण में भी मदद मिल सकती है।

    लेकिन सिर्फ नींबू पानी पीने से किसी संक्रमण से सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती। सितंबर और मानसून के दौरान सबसे जरूरी है कि पीने का पानी साफ और सुरक्षित हो।

    टाइफाइड से बचाव में साफ पानी और भोजन जरूरी

    टाइफाइड समेत कई संक्रमण दूषित पानी या भोजन के जरिए फैल सकते हैं। इसलिए सड़क किनारे खुले में रखे कटे फल, खुले जूस, अधपका भोजन और लंबे समय से बाहर रखा खाना खाने से बचना बेहतर है।

    फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाएं और पीने के लिए सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें। भोजन को अच्छी तरह पकाकर और उचित तरीके से स्टोर करना भी जरूरी है।

    सिर्फ फूड्स पर निर्भर न रहें

    संतुलित डाइट शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करती है, लेकिन कोई एक फूड इम्यूनिटी को अचानक ‘बूस्ट’ करके संक्रमण से पूरी सुरक्षा नहीं देता।

    पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, साफ-सफाई, सुरक्षित पानी और संतुलित आहार मिलकर बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करते हैं।

    अगर लगातार बुखार, तेज पेट दर्द, उल्टी, दस्त, कमजोरी या संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई दें तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। किसी भी खाद्य पदार्थ को बीमारी की दवा या इलाज न समझें। टाइफाइड या किसी अन्य संक्रमण के लक्षण होने पर डॉक्टर से जांच और उचित उपचार कराएं। अपनी एलर्जी, बीमारी या व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डाइट में बदलाव करने से पहले हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह लें।