Trending News: रेलवे स्टेशन का नाम आते ही भारत के बड़े स्टेशनों का ख्याल आता है। भारत में हावड़ा जंक्शन और गोरखपुर जैसे स्टेशन अपनी खासियतों के लिए मशहूर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा प्लेटफॉर्म वाला रेलवे स्टेशन कौन सा है?
यह स्टेशन भारत में नहीं, बल्कि अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में मौजूद है। इसका नाम ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल है और यह अपनी विशालता तथा ऐतिहासिक इमारत के लिए दुनियाभर में जाना जाता है।
44 प्लेटफॉर्म वाला दुनिया का विशाल स्टेशन
Grand Central Terminal की सबसे बड़ी खासियत इसके प्लेटफॉर्म हैं। यहां कुल 44 प्लेटफॉर्म मौजूद हैं, जो अलग-अलग ट्रेनों के संचालन के लिए इस्तेमाल होते हैं।
इतने ज्यादा प्लेटफॉर्म होने के कारण ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल को दुनिया के सबसे बड़े रेलवे स्टेशनों में गिना जाता है। इसका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है।
करीब 48 एकड़ में फैला है पूरा टर्मिनल
ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल का निर्माण 1903 से 1913 के बीच हुआ था। यह परिसर करीब 48 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
स्टेशन की इमारत अपनी भव्य वास्तुकला के लिए भी मशहूर है। यहां यात्रियों के लिए कई तरह की सुविधाएं मौजूद हैं और स्टेशन का एक बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे भी बना हुआ है।
रोजाना लाखों यात्रियों की आवाजाही
रिपोर्टों के अनुसार, ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। यहां से सैकड़ों ट्रेनें गुजरती हैं और न्यूयॉर्क के परिवहन नेटवर्क में इसकी अहम भूमिका है।
स्टेशन के नीचे दो भूमिगत स्तर भी हैं। यही वजह है कि ऊपर दिखाई देने वाले विशाल स्टेशन के मुकाबले इसका पूरा ढांचा कहीं ज्यादा बड़ा है।
स्टेशन से जुड़ा है एक गुप्त प्लेटफॉर्म
ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल से जुड़ी सबसे दिलचस्प बातों में एक इसका एक गुप्त प्लेटफॉर्म भी बताया जाता है। यह प्लेटफॉर्म पास के वाल्डोर्फ एस्टोरिया होटल के नीचे स्थित है।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस गुप्त हिस्से का इस्तेमाल अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था के दौरान किया गया था।
बताया जाता है कि राष्ट्रपति को सार्वजनिक नजरों से बचाते हुए होटल से इस भूमिगत हिस्से तक पहुंचाया गया था। हालांकि, इस कहानी से जुड़े कई विवरण अलग-अलग रिपोर्टों में अलग तरह से सामने आते हैं।
भारत का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन कौन सा है?
अगर भारत की बात करें तो हावड़ा जंक्शन देश के सबसे बड़े और व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल है। यहां 23 प्लेटफॉर्म और 25 ट्रैक हैं।
वहीं, गोरखपुर जंक्शन अपने लंबे प्लेटफॉर्म के लिए जाना जाता है। यार्ड के री-मॉडलिंग का काम पूरा होने के बाद इसका प्लेटफॉर्म लंबे समय तक दुनिया के सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म के रूप में रिकॉर्ड में दर्ज रहा।
यानी भारत भी रेलवे के मामले में पीछे नहीं है, लेकिन सबसे ज्यादा प्लेटफॉर्म वाले स्टेशन की बात करें तो न्यूयॉर्क का ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल दुनिया के सबसे चर्चित नामों में शामिल है।
अगर कोई आपसे कहे कि पीठ खुजाने की एक घंटे की सर्विस के लिए लोग हजारों रुपये खर्च कर रहे हैं, तो शायद आपको यकीन न हो। लेकिन चीन में एक शख्स ने इसी अजीबोगरीब आइडिया को बिजनेस में बदल दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के शेनझेन शहर में रहने वाले 32 वर्षीय झांग शियाओचियाओ ने एक ऐसी दुकान शुरू की है, जहां ग्राहक पैसे देकर अपनी पीठ और शरीर पर खुजली करवाते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस अनोखे कारोबार से वह हर महीने करीब 1 लाख युआन यानी लगभग 14 से 15 लाख रुपये की कमाई करने का दावा करते हैं।
शेनझेन में खुली ‘इचिंग शॉप’
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, झांग ने इस साल मई की शुरुआत में शेनझेन के बाओआन जिले में अपनी पहली ‘इचिंग शॉप’ शुरू की थी।
दुकान का सेटअप किसी सामान्य मसाज सेंटर जैसा बताया जाता है। ग्राहक एक बेड पर पेट के बल लेटते हैं और कर्मचारी खास तरह के उपकरण या डिजाइन किए गए नेल्स की मदद से उनकी पीठ और शरीर पर धीरे-धीरे खुजली करते हैं।
यानी जिस काम को लोग आमतौर पर घर में किसी परिवार के सदस्य से करवाते हैं, उसे झांग ने बाकायदा एक पेड सर्विस बना दिया।
एक घंटे की सर्विस के लिए 300 युआन
इस अनोखी सेवा की कीमत भी तय है।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्राहक से एक घंटे के लिए करीब 300 युआन, यानी लगभग 3,500 रुपये लिए जाते हैं।
झांग का दावा है कि इस सर्विस का मकसद सिर्फ खुजली मिटाना नहीं है। उनके मुताबिक, कुछ ग्राहकों को इससे आराम महसूस होता है और वे तनाव कम करने या बेहतर नींद के लिए भी इस सेवा का इस्तेमाल करते हैं।
हालांकि, तनाव या नींद की समस्या के इलाज के तौर पर इस सर्विस को वैज्ञानिक उपचार नहीं माना जाना चाहिए।
दुकान पर आने वालों में 70 फीसदी पुरुष
इस बिजनेस की एक और दिलचस्प बात सामने आई है।
झांग के मुताबिक, उनकी दुकान पर आने वाले करीब 70 फीसदी ग्राहक पुरुष हैं। इनमें कई लोग काम के बाद आराम और रिलैक्सेशन के लिए यहां पहुंचते हैं।
सोशल मीडिया पर इस अनोखे बिजनेस की चर्चा होने के बाद लोगों के बीच भी इसे लेकर काफी उत्सुकता देखने को मिली।
सोशल मीडिया वीडियो से आया आइडिया
झांग के लिए यह बिजनेस आइडिया अचानक नहीं आया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, वह इससे पहले ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया से जुड़े काम कर चुके थे, लेकिन उन्हें वहां अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
इसके बाद एक दिन सोशल मीडिया पर शॉर्ट वीडियो देखते हुए उनकी नजर एक वीडियो पर पड़ी। उसमें एक महिला अपने पति की पीठ खुजा रही थी।
वीडियो के कमेंट सेक्शन में कुछ लोगों ने ऐसी बातें लिखीं कि अगर कोई उनके लिए इस तरह पीठ खुजा दे तो वे इसके लिए पैसे देने को भी तैयार हैं।
यही बात झांग के दिमाग में बैठ गई।
बचपन की याद ने दिया बिजनेस का आइडिया
इस वीडियो ने उन्हें अपने बचपन की याद भी दिला दी।
झांग के मुताबिक, बचपन में उनके पिता उनकी पीठ खुजाया करते थे और उन्हें इससे काफी सुकून मिलता था।
उन्होंने इसी व्यक्तिगत अनुभव और सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया को मिलाकर एक ऐसा बिजनेस मॉडल तैयार किया, जिसके बारे में शायद ही किसी ने पहले सोचा होगा।
एक महीने में खोल दी दूसरी ब्रांच
शुरुआत में यह आइडिया भले ही अजीब लगा हो, लेकिन झांग का दावा है कि उनकी पहली दुकान को ग्राहकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली।
इसके करीब एक महीने के भीतर उन्होंने शेनझेन के फुतियान इलाके में दूसरी ब्रांच भी शुरू कर दी।
उनके मुताबिक, दोनों आउटलेट अब मुनाफे में चल रहे हैं और मिलकर करीब 1 लाख युआन प्रति महीने का कारोबार कर रहे हैं।
भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 14 से 15 लाख रुपये बैठती है।
अब पूरे चीन में 100 दुकानें खोलने का सपना
झांग अब इस बिजनेस को सिर्फ दो दुकानों तक सीमित नहीं रखना चाहते।
उनका लक्ष्य आने वाले समय में पूरे चीन में 100 इचिंग शॉप्स खोलना है।
वह चाहते हैं कि पीठ खुजाने जैसी साधारण लगने वाली सेवा भी एक व्यवस्थित और प्रोफेशनल सर्विस के रूप में पहचान बनाए।
अजीब आइडिया, लेकिन बिजनेस का बड़ा सबक
झांग की कहानी भले ही सुनने में मजाकिया लगे, लेकिन इसमें बिजनेस की एक दिलचस्प सीख भी छिपी है।
कई सफल बिजनेस ऐसे कामों से बने हैं, जिन्हें लोग पहले सामान्य या मामूली जरूरत समझते थे। झांग ने भी लोगों की एक छोटी-सी जरूरत और सोशल मीडिया पर दिखाई गई दिलचस्पी को कारोबार में बदलने की कोशिश की।
हालांकि, इस तरह की सर्विस में साफ-सफाई, त्वचा की सुरक्षा और ग्राहक की सहमति जैसे पहलुओं का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
आखिरकार, बिजनेस आइडिया कितना भी अनोखा क्यों न हो, ग्राहक की सुरक्षा और हाइजीन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट में प्रकाशित जानकारी पर आधारित है। झांग शियाओचियाओ की कमाई और कारोबार से जुड़े आंकड़े रिपोर्ट में किए गए दावों के अनुसार हैं। इस सेवा को किसी बीमारी, तनाव या नींद की समस्या का चिकित्सकीय इलाज न समझें। Satyareport.com उपलब्ध दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।
अमेरिका के एक किसान ने बिना सिंचाई के 40 साल तक टमाटर, आलू, लहसुन और बीन्स उगाईं. उनकी ड्राई फार्मिंग तकनीक मिट्टी की नमी बचाकर कम पानी में खेती का रास्ता दिखाती है.
हम अक्सर बाजार में टमाटर, आलू या दूसरी सब्जियों की बढ़ी हुई कीमत देखकर परेशान हो जाते हैं. लेकिन इन सब्जियों को खेत से हमारी रसोई तक पहुंचाने के पीछे किसान की कितनी मेहनत होती है, इसका अंदाजा शायद ही हमें होता है. बदलते मौसम और पानी की कमी के बीच खेती करना आसान नहीं है. ऐसे में अमेरिका के एक किसान ने खेती का ऐसा तरीका अपनाया है, जो खासा दिलचस्प है. उन्होंने बिना सिंचाई के टमाटर, आलू, लहसुन और बीन्स जैसी फसलें उगाकर दिखा दी हैं. इस तरीके को ड्राई फार्मिंग कहा जाता है.
अमेरिका के ऑरिगन राज्य में रहने वाले इस किसान के लिए ड्राई फार्मिंग कोई नया प्रयोग नहीं है. वह करीब 40 साल से इस तरीके से खेती कर रहे हैं. उनका अनुभव बताता है कि अगर मिट्टी को सही तरीके से तैयार किया जाए और फसल का चुनाव सोच-समझकर किया जाए, तो कम पानी में भी खेती की जा सकती है.
पानी नहीं फिर भी फसल तैयार!
ड्राई फार्मिंग में सबसे ज्यादा ध्यान मिट्टी की तैयारी पर दिया जाता है. खेत की मिट्टी को इस तरह तैयार किया जाता है कि उसमें मौजूद नमी लंबे समय तक बनी रहे. किसान ने वसंत के मौसम में खेत की जुताई की थी. उस समय मिट्टी में इतनी नमी थी कि वह आपस में जुड़ी रह सके, लेकिन इतनी सूखी भी थी कि आसानी से बिखर रही थी. जुताई के बाद खेत को करीब तीन हफ्तों तक छोड़ दिया गया. इससे मिट्टी बीज बोने के लिए बेहतर स्थिति में आ गई और उसमें मौजूद नमी भी संरक्षित रही.
इस खेती में मिट्टी का प्रकार भी काफी मायने रखता है. किसान ने ऐसी चिकनी मिट्टी का इस्तेमाल किया, जो पानी को ज्यादा समय तक अपने भीतर रोककर रख सकती है. इसके अलावा मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए दलहन जैसी फसलों को भी खेती का हिस्सा बनाया गया. किसान ने शुरुआत में ड्राई फार्मिंग कैलिफोर्निया में की थी. बाद में साल 2007 में वह ऑरिगन चले गए और करीब 9.6 एकड़ जमीन पर खेती शुरू की. यहां सबसे बड़ी चुनौती पानी की थी, क्योंकि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने खेती जारी रखी और सफल भी रहे.
ऑरिगन यूनिवर्सिटी की 2014 में प्रकाशित एक स्टडी में भी उनके लंबे अनुभव का जिक्र किया गया था. इसके मुताबिक, 1974 से 2014 तक उन्होंने बिना सिंचाई के ऑर्गेनिक टमाटर, आलू, लहसुन और बीन्स जैसी कई फसलें उगाईं. ड्राई फार्मिंग में बीज बोने का तरीका भी काफी अहम है. बीजों को मिट्टी में इस तरह रखा जाता है कि वे जमीन की नमी के ज्यादा करीब रहें. पौधों के आसपास की मिट्टी को कुछ इंच तक ढीला रखा जाता है, ताकि जड़ों को फैलने की जगह मिले. पौधों के बीच उचित दूरी भी रखी जाती है, जिससे सीमित पानी और पोषक तत्वों के लिए उनके बीच ज्यादा प्रतिस्पर्धा न हो.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ड्राई फार्मिंग हर जगह आसानी से की जा सकती है. फसल का चुनाव, मिट्टी, मौसम और बारिश का पैटर्न इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं. तेज बारिश या ऊपर से लगातार पानी डालना इस सिस्टम को बिगाड़ सकता है. फिर भी, जहां पानी की कमी है या सिंचाई का खर्च बहुत ज्यादा है, वहां ड्राई फार्मिंग खेती का एक उपयोगी विकल्प जरूर बन सकती है.
हार्ट अटैक को लेकर अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि दिल की नस में कितना ब्लॉकेज होने पर खतरा बढ़ जाता है। आम धारणा है कि जब कोरोनरी आर्टरी में बहुत ज्यादा रुकावट हो तभी हार्ट अटैक आता है, लेकिन मामला इतना सीधा नहीं है।
दिल की धमनियों में जमा प्लाक की मात्रा के साथ-साथ उसकी प्रकृति और स्थिरता भी महत्वपूर्ण हो सकती है। कभी-कभी अपेक्षाकृत कम संकुचन वाला प्लाक भी टूट सकता है और उसके आसपास खून का थक्का बनने से रक्त प्रवाह अचानक बाधित हो सकता है। इसलिए केवल ब्लॉकेज का प्रतिशत देखकर किसी व्यक्ति को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
साओल हार्ट सेंटर के संस्थापक एवं निदेशक और पूर्व एम्स कंसल्टेंट डॉ. बिमल छाजेड़ ने दिल की बीमारी के जोखिम कारकों को नियंत्रित करने और समय रहते जीवनशैली में सुधार करने पर जोर दिया है।
कितना ब्लॉकेज माना जाता है ज्यादा?
कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज को प्रतिशत के आधार पर अलग-अलग स्तरों में देखा जाता है, लेकिन इसका मतलब हर व्यक्ति में एक जैसा खतरा होना नहीं है।
25–49% ब्लॉकेज: इसे आमतौर पर हल्की रुकावट की श्रेणी में रखा जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि तुरंत हार्ट अटैक होने वाला है, लेकिन ऐसी स्थिति को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए।
50–69% ब्लॉकेज: इसे मध्यम स्तर की रुकावट माना जा सकता है। डॉक्टर मरीज के लक्षण, अन्य जोखिम कारकों और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त जांच से यह आकलन करते हैं कि रक्त प्रवाह कितना प्रभावित हो रहा है।
70% या उससे ज्यादा ब्लॉकेज: कई मामलों में इसे महत्वपूर्ण रुकावट माना जाता है। ऐसी स्थिति में रक्त प्रवाह प्रभावित होने की संभावना बढ़ सकती है और आगे का उपचार मरीज की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है।
लेकिन एक जरूरी बात यह है कि हार्ट अटैक का जोखिम केवल ब्लॉकेज के प्रतिशत से तय नहीं होता।
30–40% ब्लॉकेज को भी क्यों नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
दिल की धमनियों में बनने वाला प्लाक हमेशा एक जैसा नहीं होता। कुछ प्लाक अपेक्षाकृत स्थिर होते हैं, जबकि कुछ अस्थिर हो सकते हैं। यदि अस्थिर प्लाक टूट जाए तो उसके ऊपर तेजी से खून का थक्का बन सकता है और आर्टरी में रक्त प्रवाह अचानक बाधित हो सकता है।
इसी वजह से कम ब्लॉकेज का मतलब हमेशा शून्य जोखिम नहीं होता। हालांकि, इसका यह अर्थ भी नहीं है कि 30–40% ब्लॉकेज वाले हर व्यक्ति को हार्ट अटैक जरूर होगा।
जोखिम का सही आकलन उम्र, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, धूम्रपान, पारिवारिक इतिहास, वजन और अन्य मेडिकल स्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ाने वाले 10 प्रमुख कारण
1. बढ़ा हुआ LDL कोलेस्ट्रॉल
खून में LDL यानी ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक रहने पर धमनियों में प्लाक बनने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए लिपिड प्रोफाइल की जांच और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से उपचार महत्वपूर्ण है।
2. ट्राइग्लिसराइड बढ़ना
ट्राइग्लिसराइड का बढ़ा हुआ स्तर भी हृदय रोग के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा हो सकता है। खासकर जब इसके साथ मोटापा, डायबिटीज या अन्य मेटाबॉलिक समस्याएं मौजूद हों।
3. हाई ब्लड प्रेशर
लंबे समय तक अनियंत्रित हाई BP रक्त वाहिकाओं और हृदय पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इसलिए नियमित BP जांच और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा लेना जरूरी है।
4. ब्लड शुगर या डायबिटीज
लंबे समय तक बढ़ी हुई ब्लड शुगर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है और हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकती है। डायबिटीज वाले लोगों के लिए शुगर का उचित नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण है।
5. मोटापा
अधिक वजन, खासकर पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी, हाई BP, डायबिटीज और असामान्य कोलेस्ट्रॉल जैसे कई जोखिम कारकों से जुड़ी होती है। स्वस्थ वजन बनाए रखना हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
6. शारीरिक गतिविधि की कमी
लगातार बैठे रहना और पर्याप्त व्यायाम न करना हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है। नियमित वॉकिंग और व्यक्ति की क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद कर सकती है।
7. अनहेल्दी फैट और ज्यादा कैलोरी वाली डाइट
बार-बार अत्यधिक तला हुआ भोजन, ट्रांस फैट और ज्यादा संतृप्त वसा वाली डाइट हृदय स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है। खाने में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को उचित मात्रा में शामिल करना बेहतर विकल्प है।
8. लगातार तनाव
लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव नींद, खान-पान, शारीरिक गतिविधि और BP जैसी चीजों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए तनाव को मैनेज करना भी हृदय स्वास्थ्य का हिस्सा है।
9. धूम्रपान
स्मोकिंग रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है और हृदय रोग का एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। धूम्रपान छोड़ना हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
10. शराब का अत्यधिक सेवन
अत्यधिक शराब का सेवन हाई BP और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। इसलिए शराब से दूरी रखना या सेवन को लेकर डॉक्टर की सलाह मानना बेहतर है।
ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट होते हैं?
हर व्यक्ति को बिना कारण हार्ट की सभी जांच कराने की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर मरीज के लक्षण और जोखिम को देखकर टेस्ट की सलाह देते हैं।
स्थिति के अनुसार ECG, ट्रेडमिल टेस्ट (TMT), इकोकार्डियोग्राफी, CT Coronary Angiography या इनवेसिव कोरोनरी एंजियोग्राफी जैसी जांचों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
कौन सा टेस्ट जरूरी है, इसका फैसला डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और शुरुआती जांच के आधार पर करते हैं।
हार्ट अटैक से बचाव के लिए क्या करें?
दिल को स्वस्थ रखने के लिए केवल ब्लॉकेज की जांच कराना पर्याप्त नहीं है। रोजमर्रा की जीवनशैली में बदलाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नियमित वॉक या डॉक्टर की सलाह के अनुसार एक्सरसाइज करें।
BP, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड और ब्लड शुगर की नियमित जांच कराएं।
फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ डाइट में शामिल करें।
ज्यादा तला हुआ भोजन, ट्रांस फैट और अत्यधिक संतृप्त वसा को सीमित करें।
वजन को स्वस्थ सीमा में रखने की कोशिश करें।
धूम्रपान छोड़ें।
शराब का सेवन करते हैं तो इसे लेकर डॉक्टर की सलाह लें।
पर्याप्त नींद लें और तनाव को मैनेज करने की कोशिश करें।
डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं को नियमित रूप से लें।
सीने में दर्द हो तो इसे गैस समझकर न टालें
अगर अचानक सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी या दर्द का हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना जैसे लक्षण हों, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
ऐसे लक्षण हार्ट अटैक समेत कई गंभीर स्थितियों में दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में घर पर इंतजार करने के बजाय तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज का प्रतिशत अकेले हार्ट अटैक के खतरे का सटीक अनुमान नहीं बताता। जांच और उपचार का निर्णय मरीज की व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर डॉक्टर करते हैं। कोई भी दवा खुद से शुरू, बंद या उसकी खुराक में बदलाव न करें।
चीन के महजोंग पार्लर की मालकिन ने बुजुर्ग की जान बचाने की कोशिश की तो परिवार ने 2.6 लाख रुपए का जुर्माना वसूल लिया. जानिए कैसे कानून ने दिलाई इंसाफ की जीत.
चीन से एक ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसे सुनकर लोग सोच में पड़ गए हैं. यहां एक महिला ने बुजुर्ग कस्टमर की जान बचाने की कोशिश की, लेकिन इसके बदले उसे अपनी जेब से 19,000 युआन (यानी 2.68 लाख रुपए से अधिक) का मुआवजा देना पड़ गया. जानिए आखिर ऐसा क्या हुआ कि भलाई करने वाली महिला गुनहगार बन गई और फिर पूरा इंसाफ कैसे हुआ?
पार्लर में अचानक बिगड़ी बुजुर्ग की तबीयत
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के हुनान प्रांत की यह घटना 17 अगस्त की है. शियाओ ऐहुआ नाम की महिला एक महजोंग पार्लर (एक तरह का गेमिंग क्लब) चलाती है. उनके पार्लर में 60 साल के लूओ नाम के एक बुजुर्ग नियमित तौर पर आते थे. उस दिन अचानक लूओ पार्लर में ही बेहोश होकर गिर पड़े. शियाओ ने बिना एक पल गंवाए मदद के लिए दौड़ लगाई. उन्हें लगा कि शायद गर्मी या लू लगने से ऐसा हुआ है, इसलिए उन्होंने बुजुर्ग को ताजी हवा में लाने की कोशिश की. हालांकि, घबराहट की वजह से वह तुरंत एम्बुलेंस नहीं बुला पाईं, लेकिन एक पड़ोसी ने समय पर फोन कर दिया और एम्बुलेंस आ गई. अस्पताल ले जाते समय वह जिंदा थे, लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई.
’14 लाख दो वरना शव रखकर प्रदर्शन करेंगे’
अस्पताल में मौत के बाद बुजुर्ग के परिवार ने अजीबोगरीब ड्रामा शुरू कर दिया. सीसीटीवी फुटेज देखकर परिवार ने आरोप लगाया कि पार्लर मालकिन की लापरवाही और गलत तरीके से संभालने की वजह से मौत हुई है. परिवार ने पार्लर पर यह कहकर दबाव बनाया कि ग्राहक की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी थी. हद तो तब हो गई जब उन्होंने 1,00,000 युआन (यानी 14 लाख रुपए से अधिक) की मांग की और मुआवजा न मिलने पर पार्लर के बाहर बुजुर्ग का शव रखकर प्रदर्शन करने की धमकी दी. शियाओ और उनके पति इस मानसिक तनाव को झेल नहीं पाए और मजबूरी में डरकर 19,000 युआन दे दिए. इस सदमे से शियाओ की रातों की नींद उड़ गई और उनकी तबीयत बिगड़ने लगी.
सोशल मीडिया पर वायरल हुई आपबीती
जब शियाओ के परिवार ने इस ज्यादती की पूरी कहानी सोशल मीडिया पर शेयर की, तो इंटरनेट पर तूफान आ गया. लोग भड़क उठे और कहने लगे कि अब कोई किसी की जान बचाने आगे नहीं आएगा. जनता का भारी दबाव देखकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस हरकत में आई. पुलिस ने तुरंत मामले की नए सिरे से जांच शुरू की और पाया कि बुजुर्ग की मौत नेचुरल थी. इसमें पार्लर मालकिन शियाओ की कोई गलती नहीं थी.
क्या आपको भी सुबह उठते ही थकान महसूस होती है? शरीर में दर्द, जोड़ों में दर्द, कमजोरी, हाथ-पैरों में झुनझुनी, हेयर फॉल, मूड स्विंग्स या मेमोरी से जुड़ी परेशानी जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो इन्हें सिर्फ कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें। ये विटामिन B12 और विटामिन D3 की कमी से भी जुड़ी हो सकती हैं। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर रूपाली जैन ने बताया जब बॉडी में विटामिन बी12, विटामिन डी या दूसरे विटामिन की कमी होती है तो मरीज को दवा दी जाती है। लेकिन आयुर्वेद में विटामिन का कोई नाम नहीं है लेकिन आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से शरीर में पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग के लिए पाचन यानी ‘अग्नि’ को महत्वपूर्ण माना जाता है। कमजोर पाचन की स्थिति में शरीर के विभिन्न धातुओं के पोषण पर असर पड़ सकता है। इसलिए संतुलित आहार के साथ पाचन को बेहतर रखने, नियमित दिनचर्या अपनाने और शरीर में वात, पित्त व कफ के संतुलन पर जोर दिया गया है।
आयुर्वेद के अनुसार, विटामिन B12 और D3 की कमी में दिखाई देने वाले कुछ लक्षणों को रस, रक्त, अस्थि और मज्जा धातु के क्षय से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में शरीर की जठराग्नि यानी पाचन शक्ति को बेहतर रखना, धातुओं का उचित पोषण करना और वात, पित्त व कफ के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी माना जाता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, इन सभी पहलुओं पर ध्यान देने से ओवर ऑल हेल्थ को बेहतर बनाया जा सकता है। आयुर्वेद में बॉडी में होने वाली इन सभी समस्याओं का इलाज देसी चीजों में मौजूद है। बॉडी में विटामिन बी 12 और विटामिन डी की कमी पूरा करने के लिए आप इन चीजों को अपनी डाइट में शामिल करें तो आपको फायदा होगा। आइए जानते हैं बॉडी में विटामिन बी 12 की कमी को कैसे पूरा करें।
विटामिन B12 की कमी के लिए खजूर की मिठाई
बॉडी में बी 12 की कमी को पूरा करने के लिए आप खजूर की मिठाई का सेवन करें। एक कटोरी खजूर लेकर उनके बीज निकालने के बाद उसे घी में हल्का भून लें। इसके बाद इसमें खसखस, सूखा नारियल, मुनक्का, तरबूज के बीज, कद्दू के बीज, नट्स और उपलब्ध ड्राई फ्रूट्स को धीमी आंच पर भून लें। अब इस सारे मिश्रण को ठंडा कर लें और इसे रोल, लड्डू या बर्फी का आकार देकर मिठाई बना लें। इसे सर्व करने से पहले ऊपर से भुनी हुई खसखस पर रोल कर लें।
खजूर की मिठाई कैसे बी 12 की कमी को पूरा करती है?
बॉडी में विटामिन बी 12 की कमी को पूरा करने के लिए खजूर और ड्राई फ्रूट्स से बनी ये मिठाई बेहद असरदार साबित होती है। इसका सेवन रोज करने से बॉडी को एनर्जी मिलती है। इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, कुछ खनिज और हेल्दी फैट का स्रोत है। खजूर की इस मिठाई का सेवन करके आप आसानी से बॉडी में बी 12 की कमी की भरपाई कर सकते हैं।
रागी और चौलाई से बना चीला खाएं
रागी और चौलाई के पत्तों से तैयार चीला बी 12 की कमी से होने वाली परेशानियों में राहत दे सकता है। इसके लिए रागी के आटे में तिल, अजवाइन और बारीक कटे चौलाई के पत्ते मिलाएं। इसमें स्वाद के अनुसार हल्दी, धनिया, जीरा, लाल या हरी मिर्च और सेंधा नमक डालकर पानी से बैटर तैयार करें। इसे कुछ देर ढक कर रखने के बाद चीले बना सकते हैं। इन्हें दही, अलसी की चटनी या आंवले के अचार के साथ खा सकते हैं।
रागी-चौलाई चीले के फायदे
रागी कैल्शियम और दूसरे पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है, जबकि तिल और चौलाई भी पोषक तत्वों का पावरहाउस है। आप इसे खाएं तो बॉडी में होने वाली विटामिन बी 12 की कमी की भरपाई हो सकती है।
फर्मेंटेड फूड से B12 की कमी करें पूरा
विटामिन B12 की कमी को पूरा करने के लिए इडली, डोसा, ढोकला, कांजी और घर की बनी छाछ जैसे फर्मेंटेड फूड का सेवन करें। फर्मेंटेशन से बने ये फूड पर्याप्त मात्रा में विटामिन B12 देते हैं। बहुत अधिक मात्रा में या लंबे समय तक फर्मेंट किए गए खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें।
चतुर्बीज चूर्ण का करें सेवन
चतुर्बीज चूर्ण एक ऐसा डाइजेस्टिव मिक्सचर है जो भोजन के पाचन और अवशोषण में मदद करता है। इसका सेवन करने से मोटापा, बेली फैट, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, जोड़ों के दर्द और सूजन को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। इसे बनाने के लिए मेथी के बीज, चंद्रशूर यानी हलीम के बीज, कलौंजी और अजवाइन को समान मात्रा में लेकर हल्का गर्म करें और फिर पीसकर उसका चूर्ण तैयार कर लें। इस चूर्ण को खाने से आधा से एक घंटे पहले करीब 2–3 ग्राम गुनगुने पानी के साथ लें आपको फायदा होगा।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी दिए गए वीडियो में बताए गए आयुर्वेदिक दृष्टिकोण पर आधारित है। विटामिन B12 और D3 की कमी की पुष्टि केवल लक्षणों के आधार पर नहीं की जा सकती। इसके लिए डॉक्टर की सलाह और आवश्यक ब्लड टेस्ट जरूरी हैं। किसी भी कमी का इलाज या सप्लीमेंट लेने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श करें।
मध्य प्रदेश के दतिया में यातायात पुलिस की चेकिंग के दौरान उस वक्त अजीब स्थिति बन गई, जब एक महिला ने वाहन रोके जाने पर कहा कि उसे ‘माता आ गई हैं।’ महिला की इस बात के बाद मौके पर हंगामा खड़ा हो गया और कुछ देर के लिए ट्रैफिक पुलिस भी हैरान रह गई।
मामला शहर में चल रहे विशेष यातायात चेकिंग अभियान के दौरान का बताया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस वाहन और यातायात नियमों की जांच कर रही थी, तभी यह घटना सामने आई।
चेकिंग के दौरान अचानक बदला माहौल
दरअसल, ट्रैफिक पुलिस अभियान के तहत वाहनों को रोककर जरूरी दस्तावेज और यातायात नियमों की जांच कर रही थी। इसी दौरान एक वाहन को पुलिस ने रोका।
वाहन में मौजूद महिला ने अचानक कहा कि ‘मुझे माता आ गई हैं।’ महिला के इस कथन के बाद मौके पर मौजूद लोग भी उसकी ओर देखने लगे और स्थिति सामान्य चेकिंग से अलग हो गई।
महिला की बात सुनकर पुलिस भी रह गई हैरान
महिला के इस तरह कहने के बाद मौके पर मौजूद यातायात कर्मियों के सामने भी स्थिति कुछ देर के लिए असमंजस वाली बन गई। आसपास मौजूद लोगों की भी भीड़ जमा होने लगी।
मामले को लेकर मौके पर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में महिला के इस दावे की किसी स्वतंत्र या चिकित्सकीय पुष्टि की जानकारी नहीं दी गई है।
आस्था और पुलिस चेकिंग के बीच बना अजीब माहौल
घटना के बाद मौके पर कुछ देर तक हंगामा जैसी स्थिति बनी रही। एक तरफ यातायात पुलिस अपनी नियमित चेकिंग कर रही थी, वहीं दूसरी ओर महिला के ‘माता आने’ के दावे ने लोगों का ध्यान खींच लिया।
ऐसे मामलों में किसी धार्मिक या आध्यात्मिक दावे को तथ्य मानने से पहले उसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होती है। केवल किसी व्यक्ति के कहने या मौके पर मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया के आधार पर इसे चमत्कार या किसी अलौकिक घटना के रूप में प्रमाणित नहीं किया जा सकता।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा की संभावना
इस तरह की घटनाएं अक्सर मौके पर मौजूद लोगों के मोबाइल कैमरों में रिकॉर्ड हो जाती हैं और बाद में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनती हैं। हालांकि, किसी वीडियो के वायरल होने मात्र से उसमें दिखाई गई घटना की पूरी सच्चाई साबित नहीं होती।
दतिया की यह घटना भी इसी वजह से लोगों के बीच चर्चा में आई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मामला यातायात पुलिस की चेकिंग के दौरान हुए घटनाक्रम से जुड़ा है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। महिला के ‘माता आने’ संबंधी दावे की स्वतंत्र चिकित्सकीय या वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे तथ्यात्मक रूप से प्रमाणित अलौकिक घटना के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।
अमेरिका में एक मरीज 271 दिनों तक जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर की किडनी के सहारे बिना डायलिसिस के रहा… बाद में उसे इंसानी किडनी मिली, जिससे ट्रांसप्लांट की नई उम्मीद जगी.
कल्पना कीजिए, किसी मरीज की दोनों किडनियां ठीक से काम नहीं कर रही हैं और उसकी जिंदगी डायलिसिस मशीन के भरोसे चल रही है. ऐसे में अगर डॉक्टर उसे इंसानी किडनी की जगह सूअर की किडनी लगा दें और वह किडनी करीब नौ महीने तक काम करती रहे, तो यह किसी मेडिकल चमत्कार से कम नहीं लगेगा. अमेरिका में डॉक्टरों ने ऐसा ही एक प्रयोग किया है, जिसने ट्रांसप्लांट की दुनिया में नई उम्मीद पैदा की है.
अमेरिका में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल से जुड़े डॉक्टरों ने एक ऐसे मरीज का मामला सामने रखा है, जिसने जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर की किडनी के सहारे 271 दिन तक बिना डायलिसिस के जिंदगी बिताई. खास बात यह है कि बाद में इस मरीज को इंसानी डोनर की किडनी भी मिल गई और उसका सफल ट्रांसप्लांट किया गया. The Lancet में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, मरीज का नाम टिम एंड्रयूज़ है. वह एंड-स्टेज किडनी फेल्योर से जूझ रहे थे और उन्हें लंबे समय से डायलिसिस की जरूरत थी. जनवरी 2025 में डॉक्टरों ने उन्हें जेनेटिकली एडिट की गई सूअर की किडनी ट्रांसप्लांट की. ट्रांसप्लांट के बाद किडनी ने काम करना शुरू कर दिया और टिम को डायलिसिस से राहत मिल गई.
सूअर की किडनी ने दिया 9 महीने का जीवनदान
सबसे बड़ी बात यह रही कि यह किडनी करीब 271 दिनों तक उनके शरीर में काम करती रही यानी लगभग नौ महीने तक उन्हें डायलिसिस मशीन पर निर्भर नहीं रहना पड़ा. हालांकि बाद में सूअर की किडनी ने काम करना बंद कर दिया, लेकिन तब तक डॉक्टरों को इंसानी डोनर की किडनी मिल चुकी थी. इसके बाद टिम का मानव किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया. डॉक्टरों के मुताबिक, यह दुनिया का पहला ऐसा मामला है जिसमें किसी मरीज ने जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर की किडनी के सहारे इतने लंबे समय तक रहने के बाद सफलतापूर्वक इंसानी किडनी ट्रांसप्लांट कराया. इस पूरे प्रयोग की सबसे अहम उपलब्धि यही मानी जा रही है कि मरीज कई महीनों तक डायलिसिस से दूर रह सका.
हालांकि सूअर की किडनी हमेशा के लिए काम नहीं कर पाई. ट्रांसप्लांट के करीब छह महीने बाद डॉक्टरों ने उसकी रक्त वाहिकाओं में नुकसान के संकेत देखे. धीरे-धीरे यह समस्या बढ़ती गई और किडनी की Efficiency प्रभावित होने लगी. आखिरकार डॉक्टरों को उसे निकालना पड़ा. स्टडी में शामिल डॉक्टर लियोनार्डो रिएला के मुताबिक, दुनियाभर में जरूरतमंद मरीजों की तुलना में डोनर किडनी की संख्या काफी कम है. यही वजह है कि वैज्ञानिक लंबे समय से जानवरों के अंगों को इंसानों में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं. इसे मेडिकल भाषा में जेनोट्रांसप्लांटेशन कहा जाता है.
फिलहाल सूअर की किडनी इंसानी किडनी का स्थायी विकल्प नहीं बनी है. लेकिन इस मामले ने यह जरूर दिखाया है कि जेनेटिकली एडिट किए गए जानवरों के अंग भविष्य में उन मरीजों के लिए एक तरह का ‘ब्रिज’ बन सकते हैं, जिन्हें इंसानी डोनर का इंतजार करना पड़ रहा है. अगर इस तकनीक को और सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सका, तो आने वाले समय में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए इंतजार कर रहे लाखों मरीजों के लिए यह बड़ी राहत साबित हो सकती है.
क्या आपकी थाली में रोजाना सिर्फ एक-दो तरह की सब्जियां होती हैं? अगर हां, तो डाइट में थोड़ा रंग जोड़ना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। Rainbow Diet इसी सोच पर आधारित है, जिसमें अलग-अलग रंगों के फल और सब्जियों को खाने में शामिल किया जाता है।
सब्जियों का रंग उनमें मौजूद अलग-अलग प्राकृतिक प्लांट कंपाउंड यानी फाइटोकेमिकल्स से जुड़ा होता है। इसलिए अलग-अलग रंगों की सब्जियां खाने से शरीर को कई तरह के विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट मिल सकते हैं।
हालांकि, किसी एक रंग की सब्जी को किसी बीमारी का इलाज या उससे बचाव की गारंटी नहीं माना जा सकता। असल फायदा संतुलित और विविध आहार से मिलता है।
हरी सब्जियां: फोलेट और विटामिन K का अच्छा स्रोत
पालक, मेथी, सरसों का साग और ब्रोकली जैसी हरी सब्जियों में फोलेट, विटामिन K, फाइबर और कैरोटेनॉयड्स जैसे पोषक तत्व और प्लांट कंपाउंड पाए जाते हैं।
हरी पत्तेदार सब्जियों को नियमित डाइट में शामिल करना संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। इनमें मौजूद फाइबर पाचन स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है, जबकि कुछ कैरोटेनॉयड्स आंखों के स्वास्थ्य में भूमिका निभाते हैं।
कुछ अध्ययनों में हरी पत्तेदार सब्जियों के सेवन और बेहतर संज्ञानात्मक स्वास्थ्य के बीच संबंध भी देखा गया है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हरी सब्जियां उम्र बढ़ने से होने वाली दिमागी कमजोरी को पूरी तरह रोक देती हैं।
नारंगी सब्जियां: बीटा-कैरोटीन से भरपूर
गाजर, कद्दू, शकरकंद और नारंगी शिमला मिर्च जैसी सब्जियों में कैरोटेनॉयड्स पाए जाते हैं। गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में विटामिन A में परिवर्तित हो सकता है।
विटामिन A आंखों की सामान्य कार्यप्रणाली और इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी पोषक तत्व है। इसलिए डाइट में गाजर और अन्य नारंगी रंग की सब्जियों को शामिल करना पोषण की दृष्टि से अच्छा विकल्प हो सकता है।
ध्यान रखें कि इन सब्जियों को खाने का मतलब यह नहीं है कि आंखों से जुड़ी बीमारियों या संक्रमण से पूरी तरह बचाव हो जाएगा। आंखों की किसी समस्या में चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
लाल सब्जियां: टमाटर में खास है लाइकोपीन
टमाटर, लाल शिमला मिर्च और कुछ अन्य लाल रंग की सब्जियों में अलग-अलग एंटीऑक्सीडेंट और प्लांट कंपाउंड पाए जाते हैं। टमाटर में लाइकोपीन प्रमुख प्राकृतिक कंपाउंड है।
लाइकोपीन पर कई शोध हुए हैं और इसे एंटीऑक्सीडेंट गुणों वाला कंपाउंड माना जाता है। कुछ अध्ययनों में लाइकोपीन के सेवन और हृदय स्वास्थ्य तथा कुछ कैंसर के जोखिम के बीच संभावित संबंध पाया गया है।
हालांकि, इसे इस तरह नहीं समझना चाहिए कि टमाटर खाने से कैंसर या हार्ट अटैक से निश्चित रूप से बचा जा सकता है। बीमारी का जोखिम कई कारकों पर निर्भर करता है।
बैंगनी सब्जियां: एंथोसायनिन का स्रोत
बैंगन, बैंगनी पत्ता गोभी, बैंगनी गाजर और बैंगनी शकरकंद जैसी सब्जियों में एंथोसायनिन जैसे प्राकृतिक पिगमेंट पाए जाते हैं। यही कंपाउंड इन सब्जियों को बैंगनी या गहरे रंग का रूप देते हैं।
एंथोसायनिन में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं और इसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर शोध जारी है। डाइट में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करने से पोषक तत्वों और प्लांट कंपाउंड की विविधता बढ़ सकती है।
लेकिन यह दावा करना सही नहीं होगा कि एंथोसायनिन मस्तिष्क की कोशिकाओं की मरम्मत करता है या अकेले हाई BP, डायबिटीज, अल्जाइमर या कैंसर को रोक सकता है।
सफेद सब्जियां: लहसुन और प्याज भी हैं जरूरी
फूलगोभी, प्याज, लहसुन, मूली, मशरूम और शलजम जैसी सफेद या हल्के रंग की सब्जियों को भी डाइट में जगह मिलनी चाहिए।
लहसुन और प्याज में सल्फर कंपाउंड और अन्य प्राकृतिक प्लांट कंपाउंड पाए जाते हैं। फूलगोभी जैसी क्रूसिफेरस सब्जियों में भी ग्लूकोसिनोलेट्स जैसे कंपाउंड मौजूद होते हैं।
इन सब्जियों में फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं। इसलिए सिर्फ हरी सब्जियों पर निर्भर रहने के बजाय सफेद, लाल, नारंगी और बैंगनी रंग की सब्जियों को भी भोजन में शामिल करना बेहतर डाइट विविधता दे सकता है।
Rainbow Diet को कैसे अपनाएं?
रेनबो डाइट के लिए कोई बहुत जटिल नियम अपनाने की जरूरत नहीं है। कोशिश करें कि पूरे दिन के भोजन में अलग-अलग रंगों की सब्जियां और फल शामिल हों।
उदाहरण के लिए:
हरा: पालक, मेथी, ब्रोकली
नारंगी/पीला: गाजर, कद्दू, शिमला मिर्च
लाल: टमाटर, लाल शिमला मिर्च
बैंगनी: बैंगन, बैंगनी पत्ता गोभी
सफेद: फूलगोभी, प्याज, लहसुन, मूली
इस तरह खाने में रंगों की विविधता बढ़ाने से अलग-अलग पोषक तत्व और प्लांट कंपाउंड मिलने की संभावना बढ़ती है।
सिर्फ रंग नहीं, पूरी डाइट का संतुलन जरूरी
Rainbow Diet का मतलब यह नहीं है कि सिर्फ रंग-बिरंगी सब्जियां खाना ही पर्याप्त है। शरीर को प्रोटीन, साबुत अनाज, स्वस्थ वसा, फल, सब्जियां और पर्याप्त पानी समेत संतुलित आहार की जरूरत होती है।
इसके अलावा सब्जियों को बहुत ज्यादा तेल में तलने के बजाय भाप में पकाना, हल्का भूनना या सामान्य तरीके से पकाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
डिस्क्लेमर: अलग-अलग रंगों की सब्जियों में मौजूद विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और प्लांट कंपाउंड स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन किसी एक सब्जी या रंग से कैंसर, डायबिटीज, हाई BP या किसी अन्य बीमारी से बचाव या इलाज की गारंटी नहीं होती। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह लें।
अमेरिका की मशहूर बीयर कंपनी Pabst Blue Ribbon इन दिनों एक बेहद अजीब चोरी की वजह से चर्चा में है। कंपनी का करीब 40,000 पाउंड यानी लगभग 18,000 किलो बीयर का शिपमेंट चोरी हो गया। मामला सामने आने के बाद कंपनी ने पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ सोशल मीडिया का भी सहारा लिया और कथित चोरों के लिए ऐसी अपील कर दी, जिसने इंटरनेट पर लोगों का ध्यान खींच लिया।
कंपनी ने सोशल मीडिया पर चोरी हुए माल को वापस करने के लिए चोर को बाकायदा 18 दिन और 44 मिनट की डेडलाइन दे दी। इतना ही नहीं, कंपनी ने संकेत दिया कि अगर पूरा ट्रक वापस कर दिया जाए तो वह इस मामले में ज्यादा सवाल-जवाब नहीं करेगी।
सोशल मीडिया पर चोर को दिया सीधा संदेश
Pabst Blue Ribbon ने सोशल मीडिया पर चोरी हुए शिपमेंट को लेकर एक पोस्ट शेयर की। पोस्ट में एक डिलीवरी ट्रक की तस्वीर दिखाई गई, जिस पर बड़े अक्षरों में ‘STOLEN’ लिखा था।
कंपनी ने अपने संदेश में कथित चोर को सीधे संबोधित करते हुए मजाकिया लेकिन गंभीर अंदाज अपनाया। कंपनी का कहना था कि अगर कोई अपने दोस्तों के सामने इस बात की शेखी बघारना चाहता है कि उसके पास कितनी बीयर है, तो यह उसकी बात है, लेकिन समस्या यह है कि यह बीयर ईमानदारी से उसके हाथ नहीं लगी।
इसके बाद कंपनी ने चोरी का माल वापस करने के लिए 18 दिन और 44 मिनट की समयसीमा रख दी।
‘बिना सवाल-जवाब के ट्रक लौटा दो’
कंपनी की सोशल मीडिया अपील का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही था।
Pabst ने कथित चोर से कहा कि अगर वह पूरा ट्रक वापस कर देता है तो कंपनी इस मामले में ज्यादा सवाल-जवाब नहीं करेगी। साथ ही, कंपनी ने ऐसे लोगों के लिए इनाम की बात भी कही जो चोरी हुए शिपमेंट को खोजने में मदद कर सकते हैं।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि मामला किसी प्रचार अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि वास्तव में चोरी हुई है।
34 हजार बीयर कैन लेकर फरार हुए चोर
रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना 17 अगस्त को कैलिफोर्निया के मोंटक्लेयर में हुई।
बताया गया कि वहां स्थित Anheuser-Busch के एक डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर से कार्गो चोरी की घटनाएं हुईं। पुलिस के अनुसार, चोरों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके शिपमेंट हासिल की।
चोरी हुए माल में करीब 34,000 बीयर कैन बताए गए हैं। इन सभी का कुल वजन लगभग 40,000 पाउंड यानी करीब 18,000 किलो था।
यानी मामला कुछ बीयर की पेटियों की चोरी का नहीं, बल्कि एक बड़े कमर्शियल शिपमेंट के गायब होने का था।
पुलिस कर रही है मामले की जांच
पुलिस के मुताबिक, उस दिन दो अलग-अलग कार्गो चोरी की घटनाओं की जानकारी सामने आई थी। दोनों मामलों में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर शिपमेंट उठाई गई।
चोरी के बाद कंपनी ने मामले को सार्वजनिक किया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जानकारी पहुंच सके और गायब माल का पता लगाने में मदद मिल सके।
KitKat की चोरी से क्यों होने लगी तुलना?
Pabst की चोरी की यह कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो लोगों को इस साल सामने आए एक दूसरे चर्चित कार्गो चोरी के मामले की याद आ गई।
यूरोप में करीब 12 टन KitKat चॉकलेट की चोरी की खबर ने भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं। बताया गया था कि इटली से पोलैंड जा रहे एक ट्रक से बड़ी संख्या में KitKat बार गायब हो गए थे।
उस मामले में भी चॉकलेट कंपनी की ओर से चोरी हुए माल को खोजने के लिए लोगों से मदद मांगी गई थी।
KitKat ने भी Pabst की पोस्ट पर किया कमेंट
Pabst Blue Ribbon की चोरी की पोस्ट पर KitKat ने भी मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी।
KitKat ने संकेत दिया कि उसे भी ऐसी चोरी की घटनाओं का अनुभव है। इसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स के बीच दोनों मामलों की तुलना और ज्यादा होने लगी।
एक तरफ हजारों किलो बीयर और दूसरी तरफ टनों चॉकलेट—दोनों मामलों में चोरी हुए खाने-पीने के सामान की बड़ी मात्रा ने इंटरनेट यूजर्स का ध्यान खींचा।
मार्केटिंग स्टंट या असली चोरी?
सोशल मीडिया पर इस तरह की मजेदार भाषा देखकर कुछ लोगों को यह किसी विज्ञापन या मार्केटिंग कैंपेन जैसा भी लग सकता है। लेकिन कंपनी ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि मामला वास्तविक है और वह चोरी हुए शिपमेंट को वापस पाने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर कंपनी की मजाकिया अपील ने गंभीर चोरी के मामले को एक वायरल इंटरनेट स्टोरी जरूर बना दिया।
अब देखना यह है कि कंपनी की 18 दिन और 44 मिनट वाली डेडलाइन के बाद चोरी हुआ बीयर शिपमेंट वापस मिलता है या नहीं।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और कंपनी की सोशल मीडिया पोस्ट में साझा किए गए विवरणों पर आधारित है। चोरी के मामले में अंतिम तथ्य पुलिस जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होंगे। Satyareport.com किसी भी अपुष्ट आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।