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  • मेकअप और ज्वेलरी के बिना ही क्यों होती है डिलीवरी? गायनोकोलोजिस्ट से जानिए लेबर रूम में क्यों जरूरी है आपका नेचुरल लुक..

    मेकअप और ज्वेलरी के बिना ही क्यों होती है डिलीवरी? गायनोकोलोजिस्ट से जानिए लेबर रूम में क्यों जरूरी है आपका नेचुरल लुक..

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    अस्पताल के लेबर रूम में दाखिल होने से पहले जब नर्स या डॉक्टर आपसे गहने उतारने और मेकअप साफ करने को कहती हैं, तो अक्सर मन में सवाल उठता है कि इसका मेडिकल प्रोसीजर से क्या लेना-देना? क्या यह सिर्फ एक पुरानी परंपरा है या इसके पीछे कोई गंभीर वैज्ञानिक कारण है? दरअसल, डिलीवरी के दौरान आपका नेचुरल लुक आपकी और आपके बच्चे की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा लाइफ-सेविंग टूल साबित होता है।

    सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट Dr Shafali Dadhich Tungaria ने हाल ही इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि डिलीवरी या किसी भी सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती होते समय किन चीजों से बचना चाहिए। डॉक्टर ने बताया जब आप डिलीवरी या सर्जरी के लिए आएं तो मेकअप या किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल न करें। नाखून काट लें। अच्छे से नहाकर आएं और बाल भी धो लें। ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें। चूड़ियां, अंगूठियां और नेकलेस न पहनें। इन्हें आप डिलीवरी के 4-5 दिन बाद दोबारा पहन सकती हैं। अब सवाल ये उठता है कि डिलीवरी से पहले ऐसा हुलिया क्यों मायने रखता है,इसकी पुष्टि डॉक्टर से बातचीज करके करते हैं।

    डिलीवरी से पहले महिला की सादगी दिखना क्यों है जरूरी?

    मुंबई सेंट्रल स्थित वोकहार्ट हॉस्पिटल्स की कंसल्टेंट प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. ऋचा भारद्वाज ने बताया डिलीवरी के दौरान साफ-सफाई और सादगी बनाए रखना बेहद जरूरी है। एक्सपर्ट ने बताया नाखून छोटे कटे होने चाहिए और उन पर नेल पॉलिश या एक्सटेंशन नहीं लगे होने चाहिए। डॉक्टर अक्सर प्रक्रियाओं के दौरान उंगलियों पर पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन का स्तर जांचते हैं। अस्पताल पहुंचने से पहले ठीक से स्नान करने से संक्रमण का खतरा कम होता है। ढीले और आरामदायक कपड़े पहनने और सिर्फ जरूरी सामान लाने से प्रक्रिया आसान हो जाती है।

    मेकअप, गहने और परफ्यूम से बचने की सलाह क्यों दी जाती है?

    डॉ. भारद्वाज के मुताबिक चेहरे और नाखूनों पर लगाया गया मेकअप ट्रीटमेंट के दौरान स्किन के रंग और ऑक्सीजन लेवल जैसे जरूरी संकेतों को समझने में बाधा डाल सकता है। एक्सपर्ट ने बताया गहनों को हटाना जरूरी होता है ताकि सर्जरी के दौरान मेडिकल उपकरणों से जलने जैसे किसी भी जोखिम से बचा जा सकता है। तेज परफ्यूम या डियोड्रेंट का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि अस्पताल के माहौल में इससे एलर्जी या असहजता हो सकती है।

    डिलीवरी के दौरान क्या खाने-पीने को लेकर भी कुछ सावधानियां जरूरी हैं?

    डॉक्टर ने बताया कि ज्यादातर सर्जरी और प्लान्ड डिलीवरी से पहले कुछ घंटों तक खाली पेट रहने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर ने बताया एनेस्थीसिया के दौरान जटिलताओं से बचने के लिए यह जरूरी होता है। कब तक खाना-पीना बंद करना है, इस बारे में डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना सबसे बेहतर होता है।

    लोग अक्सर कौन-सी गलतियां करते हैं?

    डॉ. भारद्वाज के अनुसार, कई लोग डॉक्टर को अपनी नियमित दवाओं या सप्लीमेंट्स के बारे में बताना भूल जाते हैं। एक्सपर्ट ने बताया कुछ लोग बिना डॉक्टर की सलाह के ब्लड थिनर या हर्बल प्रोडक्ट्स लेते रहते हैं, जिससे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है। वहीं कुछ लोग पर्याप्त आराम किए बिना अस्पताल पहुंचते हैं या बहुत ज्यादा तनाव में रहते हैं, जिसका असर रिकवरी पर पड़ सकता है।

    आसान और सुरक्षित डिलीवरी के लिए ये नियम है जरूरी

    डॉक्टर का कहना है कि शांत रहना, डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना और किसी भी बात को लेकर भ्रम होने पर सवाल पूछना पूरी प्रक्रिया को आसान बना सकता है। डॉक्टर ने बताया घर से थोड़ी-सी तैयारी सुरक्षा और आराम दोनों को बेहतर बना सकती है, जिससे सर्जरी या डिलीवरी और उसके बाद की रिकवरी ज्यादा सहज हो जाती है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक स्रोतों और विशेषज्ञों से मिली जानकारी पर आधारित है। किसी भी मेडिकल प्रक्रिया या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  • मौत के 7 मिनट बाद लौटी जिंदगी! शख्स ने बताया परलोक, चांद और उल्कापिंड का हैरान करने वाला अनुभव..

    मौत के 7 मिनट बाद लौटी जिंदगी! शख्स ने बताया परलोक, चांद और उल्कापिंड का हैरान करने वाला अनुभव..

    कई बार ऐसे अनुभव सामने आते हैं, जिन्हें सुनकर इंसान सोचने पर मजबूर हो जाता है कि आखिर मौत के बाद क्या होता है? ब्रिटेन के एक स्टेज अभिनेता ने अपनी जिंदगी से जुड़ा ऐसा ही एक बेहद असामान्य अनुभव साझा किया है। उनका दावा है कि कार्डियक अरेस्ट के दौरान करीब सात मिनट तक वह मौत जैसी स्थिति में रहे और इस दौरान उन्हें अपने शरीर से अलग होने, अंतरिक्ष में जाने और चांद व उल्कापिंड देखने जैसा अनुभव हुआ।

    इस शख्स का नाम शिव ग्रेवाल बताया जाता है। भारतीय मूल के इस ब्रिटिश अभिनेता ने करीब एक दशक पहले हुए अपने अनुभव को हाल में सार्वजनिक रूप से साझा किया। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए परलोक या अंतरिक्ष से जुड़े अनुभव व्यक्तिगत अनुभव हैं और इन्हें वैज्ञानिक रूप से मौत के बाद जीवन का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    दोपहर के खाने के बाद अचानक आया कार्डियक अरेस्ट

    रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना 9 फरवरी 2013 की है। उस समय शिव ग्रेवाल अपनी पत्नी एलिसन के साथ दक्षिण-पूर्व लंदन में अपने घर के पास दोपहर का खाना खाकर लौट रहे थे।

    अचानक उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया और उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई। उनकी पत्नी ने तुरंत आपातकालीन सहायता के लिए एंबुलेंस को फोन किया।

    ग्रेवाल के मुताबिक, उस दौरान उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि उनका शरीर और चेतना एक-दूसरे से अलग हो गए हैं। उन्होंने अपने अनुभव को बेहद अलग और अवास्तविक बताया।

    ‘मुझे पता था कि मैं मर चुका हूं’

    शिव ग्रेवाल ने अपने अनुभव को याद करते हुए बताया कि उन्हें किसी तरह यह एहसास हो गया था कि उनकी मृत्यु हो चुकी है।

    उनके अनुसार, वह खुद को एक तरह के शून्य में महसूस कर रहे थे। उन्हें ऐसा लग रहा था कि उनका कोई भौतिक शरीर नहीं है और वह किसी चीज में तैर रहे हैं।

    यह अनुभव उनके लिए बेहद वास्तविक था। उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें अपने आसपास की भौतिक दुनिया से अलग होने जैसा महसूस हो रहा था, लेकिन भावनाओं और संवेदनाओं का अनुभव बना हुआ था।

    चांद और उल्कापिंड देखने का किया दावा

    ग्रेवाल के अनुभव का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा उनका अंतरिक्ष से जुड़ा दावा है।

    उन्होंने बताया कि उस अवस्था में उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वह चांद की ओर यात्रा कर रहे हों। उन्होंने अंतरिक्ष और उल्कापिंड जैसी चीजों को देखने का भी दावा किया।

    हालांकि, उन्होंने कहा कि वह उस स्थिति में अंतरिक्ष की यात्रा नहीं करना चाहते थे। उनके मन में वापस अपने शरीर और अपनी पत्नी के पास लौटने की इच्छा थी।

    यानी उनके लिए यह अनुभव सिर्फ किसी दूसरी दुनिया को देखने जैसा नहीं था, बल्कि वह लगातार अपने जीवन में वापस लौटना चाहते थे।

    फिर एंबुलेंस पहुंची और दोबारा धड़कने लगा दिल

    ग्रेवाल के मुताबिक, कुछ समय बाद उन्हें महसूस हुआ कि घटनास्थल पर एंबुलेंस पहुंच चुकी है और मेडिकल टीम उनकी मदद कर रही है।

    आपातकालीन उपचार के बाद उनका दिल दोबारा धड़कने लगा। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आगे इलाज शुरू किया।

    जांच में उनकी मुख्य धमनी पूरी तरह ब्लॉक मिली थी। इसके बाद इसे खोलने के लिए स्टेंट डालने की प्रक्रिया की गई।

    मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी और लंबे समय तक कोमा

    कार्डियक अरेस्ट के दौरान मस्तिष्क तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचने से उनकी हालत और गंभीर हो गई थी।

    रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टरों ने उन्हें करीब एक महीने तक कोमा में रखने का फैसला किया। इस दौरान उनके शरीर और दिमाग को गंभीर नुकसान से उबरने का समय दिया गया।

    बाद में ग्रेवाल को मिर्गी की समस्या भी हुई। यानी उनका अनुभव सिर्फ कुछ मिनटों तक चले किसी रहस्यमय एहसास तक सीमित नहीं था, बल्कि इस घटना का उनकी आगे की जिंदगी पर भी गहरा असर पड़ा।

    इस अनुभव ने बदल दी जिंदगी को देखने की नजर

    शिव ग्रेवाल ने बताया कि इस घटना के बाद जिंदगी को लेकर उनका नजरिया बदल गया।

    मौत का इतना करीब से सामना करने के बाद उन्होंने जीवन, शरीर और अस्तित्व को पहले की तुलना में अलग नजर से देखना शुरू किया।

    उनके लिए यह अनुभव बेहद वास्तविक था, लेकिन विज्ञान की नजर से ऐसे अनुभवों को आमतौर पर Near-Death Experience (NDE) यानी मृत्यु-समीप अनुभव के तौर पर देखा जाता है।

    क्या सच में मौत के बाद परलोक देखा?

    यहां एक जरूरी बात समझना बेहद जरूरी है। शिव ग्रेवाल ने जो कुछ बताया, वह उनका व्यक्तिगत अनुभव है। इससे यह वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं होता कि मृत्यु के बाद इंसान वास्तव में परलोक, स्वर्ग, चांद या अंतरिक्ष की यात्रा करता है।

    कार्डियक अरेस्ट और मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी के दौरान चेतना से जुड़े असामान्य अनुभवों पर वैज्ञानिक और चिकित्सकीय क्षेत्र में लंबे समय से अध्ययन होता रहा है। इसलिए ऐसे अनुभवों को सीधे तौर पर पुनर्जन्म या परलोक का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा।

    मौत के 7 मिनट का अनुभव बना चर्चा का विषय

    करीब एक दशक पुरानी इस घटना को शिव ग्रेवाल द्वारा दोबारा साझा किए जाने के बाद उनकी कहानी ने लोगों का ध्यान खींचा।

    उनका दावा कि उन्होंने मौत के दौरान खुद को शरीर से अलग महसूस किया और चांद व उल्कापिंड देखे, लोगों के बीच स्वाभाविक रूप से कौतूहल पैदा करता है।

    लेकिन इस पूरी कहानी को एक व्यक्ति के मृत्यु-समीप अनुभव के रूप में देखना ज्यादा उचित है, न कि मृत्यु के बाद की दुनिया का प्रमाण मानना।

    डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और शिव ग्रेवाल द्वारा साझा किए गए व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। परलोक, पुनर्जन्म या मृत्यु के बाद किसी अन्य दुनिया को देखने जैसे दावों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। Satyareport.com किसी भी अप्रमाणित दावे की पुष्टि नहीं करता।

  • गर्मी में खजूर खाएं या छुहारा? जानें दोनों में अंतर, सही मात्रा और खाने का बेहतर तरीका

    गर्मी में खजूर खाएं या छुहारा? जानें दोनों में अंतर, सही मात्रा और खाने का बेहतर तरीका

    Dry Dates vs Fresh Dates: गर्मियों में खान-पान को लेकर लोग अक्सर सोचते हैं कि खजूर और छुहारा जैसे मीठे ड्राई फ्रूट्स का सेवन करना चाहिए या नहीं। खजूर और छुहारा दोनों एक ही फल से मिलते हैं, लेकिन इनमें नमी की मात्रा काफी अलग होती है। ताजा या नरम खजूर में पानी ज्यादा होता है, जबकि छुहारा सूखने के बाद तैयार होता है और उसमें प्राकृतिक शुगर व कैलोरी ज्यादा केंद्रित हो सकती है।

    पोषण के लिहाज से दोनों में फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम और दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं। गर्मियों में भी इन्हें खाया जा सकता है, लेकिन मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।

    खजूर और छुहारे में क्या अंतर है?

    खजूर एक फल है जिसे अलग-अलग स्तर की पकावट और सुखाने के साथ खाया जाता है। वहीं छुहारा आमतौर पर ज्यादा सूखा और कम नमी वाला रूप होता है।

    छुहारे में पानी कम होने के कारण उसके पोषक तत्व और प्राकृतिक शुगर प्रति 100 ग्राम अधिक केंद्रित हो सकते हैं। इसलिए इसे खजूर की तुलना में कम मात्रा में खाना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है।

    क्या गर्मी में छुहारा खा सकते हैं?

    आयुर्वेद और पारंपरिक खान-पान में छुहारे को अक्सर ‘गर्म तासीर’ वाला माना जाता है। हालांकि, आधुनिक पोषण विज्ञान खाद्य पदार्थों को इस तरह ‘गर्म’ या ‘ठंडी तासीर’ में वर्गीकृत नहीं करता।

    इसलिए केवल गर्मी का मौसम होने की वजह से छुहारे को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है। इसमें प्राकृतिक शुगर, फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और अन्य मिनरल्स पाए जाते हैं।

    प्राकृतिक शुगर शरीर को ऊर्जा देने में मदद करती है, जबकि फाइबर पाचन और पेट की नियमितता के लिए उपयोगी हो सकता है।

    गर्मी में छुहारा खाने का सही तरीका

    अगर छुहारा ज्यादा सख्त लगता है तो इसे कुछ घंटों या रातभर पानी में भिगोकर नरम किया जा सकता है। इससे इसे चबाना और खाना आसान हो सकता है।

    आमतौर पर 1-2 छुहारे जैसी छोटी मात्रा ली जा सकती है, लेकिन यह व्यक्ति की पूरी डाइट और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

    यह ध्यान रखना जरूरी है कि छुहारे को पानी में भिगोने से उसकी प्राकृतिक शुगर खत्म नहीं हो जाती। इसलिए इसे भिगोने को ब्लड शुगर कम करने का तरीका नहीं माना जाना चाहिए।

    खजूर गर्मी में क्यों हो सकता है बेहतर विकल्प?

    खजूर में प्राकृतिक शुगर के साथ कार्बोहाइड्रेट, डाइटरी फाइबर और कई विटामिन व मिनरल्स पाए जाते हैं। इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को सपोर्ट कर सकता है।

    गर्मी में अगर आप खजूर खाना चाहते हैं तो इसे सीमित मात्रा में डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। डायटीशियन की बताई सामान्य सलाह के अनुसार दो खजूर एक छोटी सर्विंग हो सकती है, लेकिन व्यक्ति की कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट जरूरत के अनुसार मात्रा बदल सकती है।

    क्या खजूर खाने से कमजोरी दूर होती है?

    खजूर में प्राकृतिक शुगर और कार्बोहाइड्रेट होते हैं, इसलिए यह शरीर को ऊर्जा उपलब्ध करा सकता है। यही वजह है कि थकान या कमजोरी महसूस होने पर कुछ लोग इसे स्नैक के तौर पर लेते हैं।

    लेकिन लगातार कमजोरी रहना केवल पोषण की कमी की वजह से नहीं होता। अगर कमजोरी बार-बार होती है तो इसका कारण जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    डायबिटीज वालों को खजूर से क्यों सावधान रहना चाहिए?

    खजूर और छुहारा दोनों में प्राकृतिक शुगर होती है। इसलिए डायबिटीज वाले लोगों को इन्हें बिना मात्रा का ध्यान रखे नहीं खाना चाहिए।

    यह कहना भी सही नहीं है कि खजूर को पानी में भिगोने से उसकी शुगर कम हो जाती है। भिगोने से खजूर की प्राकृतिक शुगर खत्म नहीं होती।

    अगर ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं है या HbA1c ज्यादा है, तो खजूर या छुहारे की मात्रा तय करने से पहले डॉक्टर या रजिस्टर्ड डायटीशियन से सलाह लेना बेहतर है।

    खजूर कब खाना बेहतर है?

    खजूर को नाश्ते के साथ या भोजन के हिस्से के रूप में सीमित मात्रा में लिया जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति शाम को जल्दी खाना खाता है और रात में भूख लगती है, तो छोटी मात्रा में खजूर लिया जा सकता है।

    हालांकि, सोने से ठीक पहले मीठी चीजें खाने की आदत बनाने के बजाय पूरे दिन की डाइट को संतुलित रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    खजूर या छुहारा, किसे चुनें?

    अगर गर्मियों में दोनों में से किसी एक को चुनना हो तो नरम खजूर छोटी मात्रा में लेना आसान विकल्प हो सकता है, क्योंकि उसमें छुहारे की तुलना में नमी ज्यादा होती है।

    वहीं छुहारा भी पौष्टिक आहार का हिस्सा बन सकता है, लेकिन यह ज्यादा सूखा और पोषक तत्वों व प्राकृतिक शुगर से अधिक केंद्रित होता है, इसलिए इसकी मात्रा सीमित रखना जरूरी है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी खाद्य पदार्थ को सिर्फ उसकी ‘तासीर’ के आधार पर अच्छा या खराब न मानें। आपकी पूरी डाइट, स्वास्थ्य स्थिति और मात्रा ज्यादा मायने रखती है।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। खजूर या छुहारा किसी बीमारी का इलाज नहीं है। डायबिटीज, वजन प्रबंधन या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या वाले लोगों को अपनी डाइट में इनकी मात्रा तय करने से पहले डॉक्टर या योग्य डायटीशियन की सलाह लेनी चाहिए।

  • Bigg Boss 20 के पहले दिन ही छलका पंजाबी एक्ट्रेस Love Gill का दर्द, बोलीं- मोटी होने पर मिले ताने, पतली हुई तब भी नहीं छोड़ा

    Bigg Boss 20 के पहले दिन ही छलका पंजाबी एक्ट्रेस Love Gill का दर्द, बोलीं- मोटी होने पर मिले ताने, पतली हुई तब भी नहीं छोड़ा

    Bigg Boss 20 के पहले दिन ही छलका पंजाबी एक्ट्रेस Love Gill का दर्द, बोलीं- मोटी होने पर मिले ताने, पतली हुई तब भी नहीं छोड़ा

    Love Gill in Bigg Boss 20 : विवादित रियलिटी शो “बिग बॉस 20” का यह पहला ही दिन है और ड्रामा शुरू हो चुका है। कंटेस्टेंट लव गिल ने अपने साथी कंटेस्टेंट अमन गांधी को अपनी जिंदगी के बारे में बताया और बॉडी-शेमिंग का सामना करने के अपने अनुभव को साझा किया।

    Love Gill in Bigg Boss 20 : विवादित रियलिटी शो “बिग बॉस 20” का यह पहला ही दिन है और ड्रामा शुरू हो चुका है। कंटेस्टेंट लव गिल ने अपने साथी कंटेस्टेंट अमन गांधी को अपनी जिंदगी के बारे में बताया और बॉडी-शेमिंग का सामना करने के अपने अनुभव को साझा किया।

    अमन के साथ अपना अनुभव साझा करते हुए, उन्होंने बताया कि बड़े होने के दौरान अपने शरीर को लेकर की जाने वाली टिप्पणियों का सामना करना कितना मुश्किल था। अमन ने भी बताया कि बहुत ज़्यादा दुबले होने के कारण उन्हें भी बॉडी-शेमिंग का सामना करना पड़ा था।

    शो में लव को यह कहते हुए सुना जाएगा: “जब मेरा वज़न थोड़ा ज़्यादा था, तो लोग मेरे शरीर पर कमेंट करते थे। फिर मैंने वजन कम किया, लेकिन उसके बाद भी लोगों के पास कहने के लिए कुछ न कुछ होता था।” “वे मुझसे कहते थे कि मैं बहुत दुबली दिखती हूं या पूछते थे कि क्या मैं कुछ खाती भी हूं। ऐसा लगता था कि मैं चाहे कुछ भी करूं, लोग मेरे लुक के बारे में अपनी राय रखते ही थे। लव एक पंजाबी एक्ट्रेस और मॉडल हैं, जिन्होंने म्यूजिक वीडियो, टेलीविजन और फिल्मों में काम किया है। वह 2019 में पंजाबी सिंगर करण औजला के एक लोकप्रिय म्यूज़िक वीडियो में नजर आई थीं। इसके बाद उन्होंने टीवी में भी हाथ आजमाया। वह पंजाबी शो ‘तू पतंग मैं डोर’ में नजर आईं, जिसमें उन्होंने ज़रीना का किरदार निभाया था।

    उन्होंने 2021 में कुरियां जवान बापू परेशान के साथ पंजाब में सिनेमा की दुनिया में कदम रखा और फिर ‘हेटर्स’, ‘कुलचे छोले’, ‘गदर 1947: इक्क विछोड़ा’ और ‘वेखी जा छेड़ी ना’ जैसी फिल्मों में नजर आईं।

    4 दिन से गायब थे पंजाबी सिंगर Baljit Singh, अब घर के बेड पर पड़ा मिला सड़ा हुआ शव…ऐसी हालत देख…

    बिग बॉस की बात करें तो यह भारत में बिग बॉस फ़्रैंचाइज़ी का एक भारतीय हिंदी-भाषा का रियलिटी टेलीविज़न शो है जो कलर्स टीवी पर प्रसारित होता है। यह ‘बिग ब्रदर’ के डच फ़ॉर्मेट पर आधारित है। 20वां संस्करण 6 सितंबर को शुरू हुआ। इसमें 16 सेलिब्रिटी प्रतियोगियों की एक विविध लाइनअप है, जिसमें एमसी मैरी कॉम, कनिका मान, माही विज, कुशल तंवर, अमन गांधी, ईशा रिखी, अरिश्फा खान, काजी तौकीर, आसिफ खान, आम्रपाली दुबे, रीति तिवारी, उदिति सिंह, तन्मय सिंह उर्फ ​​स्काउटओपी, रोहेद खान, युंग डीएसए और लव गिल जैसे नाम शामिल हैं। यह शो JioHotstar और Colors TV पर प्रसारित होता है।

  • ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखने के लिए कितनी देर वॉक करना जरूरी है, एक्सपर्ट से जानिए..

    ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखने के लिए कितनी देर वॉक करना जरूरी है, एक्सपर्ट से जानिए..

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    हाई ब्लड प्रेशर आज के समय में एक ‘साइलेंट किलर’ बन चुका है, जो बिना किसी बड़े लक्षण के शरीर को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाता है। बीपी को कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर दवाओं के साथ-साथ बॉडी को एक्टिव रखने की भी सलाह देते हैं। बॉडी को एक्टिव रखने में वॉक बेहद असरदार एक्सरसाइज है जिसे आप कभी भी कहीं भी कर सकते हैं। रोज वॉक करने से मांसपेशियां स्ट्रांग रहती है,ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, दिल की सेहत में सुधार होता है और बीपी नॉर्मल रहता है। Quora पर किसी ने सवाल पूछा कि बीपी को नॉर्मल रखने में वॉक असरदार है लेकिन सवाल ये उठता है कि कितनी देर वॉक करने से बीपी को नॉर्मल रखने में मदद मिलती है।

    ठाणे के जुपिटर अस्पताल के आंतरिक चिकित्सा विभाग के निदेशक डॉ. अमित सराफ ने वॉक करने के फायदे बताते हुए कहा कि अधिकांश वयस्कों के लिए, सप्ताह में कम से कम 5 दिन 30 मिनट तेज चलना काफी फर्क ला सकता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि रोजाना कितनी वॉक करने से कैसे बीपी नॉर्मल रहता है और बॉडी को फायदा होता है।

    कितनी देर वॉक करने से बीपी नॉर्मल रहता है?

    चलना (Walking) ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने का सबसे आसान और प्रभावी तरीकों में से एक है। लेकिन इसका असर दिखने के लिए रोज कितना चलना जरूरी है ये जानना जरूरी है। एक्सपर्ट ने बताया ज्यादातर वयस्कों के लिए हफ्ते में कम से कम 5 दिन, रोज 30 मिनट तेज चलना काफी फायदेमंद हो सकता है। यह कुल मिलाकर हफ्ते में लगभग 150 मिनट होता है, जो हार्ट हेल्थ के लिए सुझाया गया बेसलाइन है। एक्सपर्ट ने बताया हार्ट हेल्थ को दुरुस्त करने के लिए गति से ज्यादा जरूरी है नियमितता और सही तीव्रता। तेज चलने का मतलब है इतना तेज चलना कि आपके दिल की धड़कन और सांस थोड़ी बढ़ जाए, लेकिन आप बातचीत कर सकें। डॉ. सराफ ने बताया अगर एक बार में 30 मिनट चलना मुश्किल लगता है, तो इसे 10–15 मिनट के हिस्सों में दिनभर में बांट सकते हैं। वॉक को नियमित रूप से किए जाने पर  छोटे-छोटे सेशन भी उतने ही प्रभावी हो  सकते हैं।

    जिन्हें पहले से बीपी है उन्हें कितनी देर पैदल चलना चाहिए?

    जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर है, उनके लिए भी रोजाना थोड़ी-सी शारीरिक गतिविधि बहुत फायदेमंद हो सकती है। डॉ. सराफ के अनुसार कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि वॉक करने से सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 4 से 9 mmHg तक कम हो सकता है, जो कई शुरुआती लाइफस्टाइल बदलावों के बराबर प्रभावी है। हाई बीपी के मरीज रोजाना मध्यम रफ्तार से 15 से 20 मिनट तक वॉक करें।

    रोजाना वॉक करने से सेहत पर कैसा होता है असर

    रोजाना वॉक करना एक साधारण आदत जरूर है, लेकिन इसके फायदे बेहद गहरे और लंबे समय तक असर करने वाले होते हैं। नियमित रूप से चलने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे ऑक्सीजन और पोषक तत्व हर अंग तक सही तरीके से पहुंचते हैं। इसका सीधा फायदा दिल को मिलता है, हार्ट ज्यादा कुशलता से काम करता है, धमनियां लचीली बनी रहती हैं और ब्लड प्रेशर संतुलित रहता है। वॉक करने से शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) बढ़ता है और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) कम होता है, जिससे धमनियों में प्लाक जमा होने का खतरा घटता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम भी कम होता है।

    मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी वॉक बेहद फायदेमंद है। चलने के दौरान शरीर में एंडोर्फिन (feel-good hormones) रिलीज होते हैं, जो मूड को बेहतर बनाते हैं और चिंता व डिप्रेशन को कम करने में मदद करते हैं। रोजाना कुछ समय खुली हवा में या हरियाली के बीच चलना दिमाग को शांत करता है और मानसिक थकान को दूर करता है।

    तनाव (Stress) को कंट्रोल करने में वॉक एक प्राकृतिक और असरदार तरीका है। जब आप नियमित रूप से चलते हैं, तो शरीर में कॉर्टिसोल (stress hormone) का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है। इससे नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है, दिमाग शांत रहता है और ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है।

    छोटी-छोटी आदतें भी असर बढ़ा सकती हैं

    • एक्सपर्ट ने बताया अगर आप चाहते हैं कि बीपी नॉर्मल रहे तो आप अपनी छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करें। आप लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करना शुरु कर दें।
    • खाने के बाद टहलना शुरु कर दें आपका बीपी नॉर्मल रहेगा।
    • शाम को हल्की वॉक जरूर करें।
    • खासकर हरियाली में चलना तनाव कम करने में और मदद कर सकता है। हालांकि, सबसे जरूरी चीज है इसे लंबे समय तक बनाए रखना ।
    • डॉ. सराफ ने सलाह दी, धीरे-धीरे शुरुआत करें और समय व गति को बढ़ाएं। अचानक बहुत ज्यादा कठिन एक्सरसाइज शुरू करने से बचें।
    • जिन लोगों को बहुत ज्यादा हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी है, उन्हें नई एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। नियमित और मध्यम गति से की गई वॉक ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में काफी मददगार है। यह एक आसान आदत है, जिसे अपनाकर लंबे समय तक सेहत को  बेहतर किया जा सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। ब्लड प्रेशर एक गंभीर स्थिति है; इसलिए पैदल चलने या किसी भी नए व्यायाम को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।

  • भरोसेमंद पत्नी नहीं मिली तो शख्स ने कुकर को ही बना लिया दुल्हन! 4 दिन बाद हुआ ऐसा कि खुद ले लिया तलाक.

    भरोसेमंद पत्नी नहीं मिली तो शख्स ने कुकर को ही बना लिया दुल्हन! 4 दिन बाद हुआ ऐसा कि खुद ले लिया तलाक.

    सोशल मीडिया की दुनिया में वायरल होने के लिए लोग तरह-तरह के अजीबोगरीब प्रयोग करते रहते हैं। कई बार ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं, जिन्हें देखकर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है। ऐसी ही एक अजीब कहानी इंडोनेशिया के एक शख्स की है, जिसने कथित तौर पर चावल पकाने वाले कुकर से शादी कर ली थी।

    शख्स ने शादी के दौरान बाकायदा दूल्हे की तरह कपड़े पहने और अपने कुकर को भी दुल्हन की तरह सजाया। शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट होते ही तेजी से वायरल हो गईं। लेकिन कहानी का सबसे मजेदार हिस्सा शादी नहीं, बल्कि उसके सिर्फ चार दिन बाद लिया गया तलाक का फैसला था।

    कौन है कुकर से शादी करने वाला शख्स?

    वायरल पोस्ट के मुताबिक, इस शख्स का नाम खोइरुल अनम है और वह इंडोनेशिया का रहने वाला है। वह सोशल मीडिया पर अपने मजाकिया और अजीबोगरीब कंटेंट के लिए चर्चा में रहा है।

    साल 2021 में उसने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ ऐसी तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वह एक चावल पकाने वाले कुकर के साथ शादी करता दिखाई दिया।

    तस्वीरों में वह पारंपरिक शादी के कपड़ों में नजर आया, जबकि कुकर को सफेद कपड़े और घूंघट जैसी पोशाक से दुल्हन का रूप दिया गया था।

    कुकर को क्यों बनाया जीवनसाथी?

    खोइरुल अनम ने अपनी पोस्ट में इस अनोखी शादी की वजह भी बताई थी। उसका कहना था कि उसने कुकर से शादी करने का फैसला इसलिए किया क्योंकि वह निष्पक्ष, आज्ञाकारी, प्रेमपूर्ण और खाना पकाने में माहिर है।

    यही वजह थी कि उसकी पोस्ट सोशल मीडिया पर लोगों के लिए मनोरंजन का विषय बन गई।

    तस्वीरों में वह कुकर के साथ शादी की रस्म निभाता दिखाई दिया। एक तस्वीर में वह कुकर को चूमता नजर आया, जबकि दूसरी तस्वीर में वह शादी से जुड़े कागज पर हस्ताक्षर करता हुआ दिखाई दिया।

    दुल्हन बनी कुकर और दूल्हा बना शख्स

    वायरल तस्वीरों में सबसे ज्यादा ध्यान उस दृश्य ने खींचा जिसमें कुकर को बाकायदा दुल्हन की तरह तैयार किया गया था।

    कुकर को सफेद कपड़े से ढका गया था और उसके ऊपर घूंघट जैसा कपड़ा भी रखा गया था। वहीं खोइरुल पारंपरिक दूल्हे की पोशाक में उसके पास बैठा नजर आया।

    इन तस्वीरों को देखकर सोशल मीडिया यूजर्स ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। किसी ने इसे मजाक बताया तो किसी ने इसे वायरल होने का अनोखा तरीका कहा।

    लेकिन सिर्फ 4 दिन चली ये ‘शादी’

    कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

    शादी के महज चार दिन बाद खोइरुल ने कुकर से अलग होने की घोषणा कर दी। उसने सोशल मीडिया पर मजाकिया अंदाज में तलाक की वजह बताते हुए कहा कि कुकर सिर्फ खाना बना सकता है।

    यानी जिस कुकर को उसने कुछ दिन पहले अपना आदर्श जीवनसाथी बताया था, उसी से चार दिन बाद रिश्ता खत्म करने का ऐलान कर दिया।

    इस घटनाक्रम के बाद लोगों को और ज्यादा यकीन होने लगा कि यह पूरी कहानी मनोरंजन और सोशल मीडिया कंटेंट के लिए किया गया एक स्टंट थी।

    क्या यह सच में कानूनी शादी थी?

    यहां सबसे जरूरी बात समझना जरूरी है।

    कुकर और इंसान के बीच हुई इस ‘शादी’ को कानूनी विवाह नहीं माना जा सकता। उपलब्ध सामग्री में इसे सोशल मीडिया पर किए गए मजाकिया प्रदर्शन के तौर पर ही देखा जाता है।

    शादी की तस्वीरों में कागज पर हस्ताक्षर करते हुए दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि किसी सरकारी या कानूनी संस्था ने इस विवाह को मान्यता दी थी।

    सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हुई कहानी?

    इंसान और एक घरेलू उपकरण के बीच शादी की तस्वीरें अपने आप में इतनी असामान्य थीं कि लोगों का ध्यान तुरंत इस ओर गया।

    इसके अलावा शादी के चार दिन बाद तलाक की घोषणा ने कहानी को और मजेदार बना दिया। सोशल मीडिया पर पोस्ट दोबारा शेयर होने लगी और देखते ही देखते यह मामला कई प्लेटफॉर्म पर चर्चा का विषय बन गया।

    कई लोगों ने मजाकिया कमेंट करते हुए कहा कि आज के दौर में इंसान को जीवनसाथी के बजाय घरेलू उपकरण में भी ‘भरोसेमंद पार्टनर’ नजर आने लगा है।

    क्या थी इस पूरी कहानी की असलियत?

    खोइरुल अनम की सोशल मीडिया गतिविधियों को देखते हुए यह मामला गंभीर वैवाहिक घटना के बजाय मनोरंजन और सोशल मीडिया स्टंट के रूप में ज्यादा समझ आता है।

    कुकर से शादी और फिर चार दिन बाद तलाक की कहानी ने भले ही लोगों को खूब हंसाया हो, लेकिन इसका कोई सामान्य सामाजिक या कानूनी विवाह वाला अर्थ नहीं है।

    यह घटना इस बात का भी उदाहरण है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर तस्वीर को उसके दिखाई देने वाले रूप में सच मान लेना सही नहीं है। कई बार लोग जानबूझकर ऐसा कंटेंट तैयार करते हैं, जिसका उद्देश्य सिर्फ लोगों का मनोरंजन करना और ज्यादा से ज्यादा ध्यान आकर्षित करना होता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सोशल मीडिया पर वायरल हुई घटना और उपलब्ध विवरणों पर आधारित है। ‘कुकर से शादी’ को वास्तविक कानूनी विवाह न समझें। सोशल मीडिया पर मौजूद सामग्री की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में संभव नहीं होती। Satyareport.com किसी भी अप्रमाणित दावे की पुष्टि नहीं करता।

  • रोज कितने कद्दू के बीज खाने चाहिए? आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने बताया सही तरीका और समय..

    रोज कितने कद्दू के बीज खाने चाहिए? आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने बताया सही तरीका और समय..

    गर्मियों में कद्दू के बीज खाने से सेहत को कौन-कौन से फायदे होते हैं, आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से जानिए खाने का सही तरीका

    पोषक तत्वों से भरपूर कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds) सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। इनमें प्रोटीन, हेल्दी फैट, मैग्नीशियम, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। लेकिन गर्मियों में अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या इस मौसम में कद्दू के बीज खाना सही है? कुछ लोग इनकी ‘तासीर गर्म’ मानकर गर्मियों में इनका सेवन कम कर देते हैं।

    आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सलीम जैदी के मुताबिक, गर्मियों में भी कद्दू के बीजों का सेवन किया जा सकता है, बशर्ते इन्हें उचित मात्रा में लिया जाए। इन्हें कुछ समय के लिए भिगोकर खाने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। कद्दू के बीजों में मौजूद मैग्नीशियम शरीर के सामान्य कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि जिंक इम्यूनिटी मजबूत करने और सामान्य कामकाज के लिए जरूरी पोषक तत्व है। इनमें मौजूद हेल्दी फैट और एंटीऑक्सीडेंट्स भी संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि कद्दू के बीज का सेवन गर्मी में करने से सेहत को कौन-कौन से फायदे हो सकते हैं।

    दिल की सेहत के लिए फायदेमंद

    कद्दू के बीजों में मैग्नीशियम, पॉलीअनसैचुरेटेड फैट और एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं, जो संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। मैग्नीशियम ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखने में भूमिका निभाता है। इनमें मौजूद हेल्दी फैट भी दिल की सेहत के लिए बेहतर माना जाता हैं। हालांकि, कद्दू के बीज सीधे तौर पर ब्लड प्रेशर या LDL कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवा नहीं हैं।

    प्रोटीन से भरपूर

    कद्दू के बीजों में अच्छी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है, जो शरीर में मांसपेशियों के निर्माण और उनके रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इनमें मौजूद प्रोटीन और फैट पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकते हैं, जिससे बार-बार भूख लगने की संभावना कम हो सकती है।

    मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत

    कद्दू के बीज मैग्नीशियम के अच्छे स्रोतों में शामिल हैं। मैग्नीशियम शरीर में मांसपेशियों और तंत्रिकाओं के सामान्य कामकाज के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी पोषक तत्व है। पर्याप्त मैग्नीशियम लेना अच्छी नींद और ओवर ऑल हेल्थ को सपोर्ट कर सकता है।

    बेहतर नींद और मूड में मदद

    कद्दू के बीजों में ट्रिप्टोफेन नामक अमीनो एसिड पाया जाता है, जिसका इस्तेमाल शरीर कुछ जरूरी रसायनों को बनाने में करता है, जो नींद और मूड से जुड़े होते हैं। इनमें मैग्नीशियम भी होता है, जो शरीर के सामान्य तंत्रिका और मांसपेशी कार्यों में भूमिका निभाता है।

    फाइबर से भरपूर

    कद्दू के बीजों में डाइटरी फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र के लिए उपयोगी है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है, जिससे भूख और अनावश्यक स्नैकिंग को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा पर्याप्त फाइबर का सेवन आंतों की सामान्य गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

    मांसपेशियों के लिए उपयोगी

    कद्दू के बीजों में मौजूद मैग्नीशियम शरीर में मांसपेशियों के सामान्य संकुचन और उनके कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा इनमें प्रोटीन भी पाया जाता है, जो मांसपेशियों के निर्माण और मरम्मत के लिए जरूरी है। इसलिए इन्हें संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    पुरुषों की सेहत के लिए उपयोगी

    कद्दू के बीज जिंक का अच्छा स्रोत हो सकते हैं और जिंक पुरुषों के सामान्य प्रजनन स्वास्थ्य के लिए जरूरी पोषक तत्व है। शरीर में जिंक की पर्याप्त मात्रा सामान्य हार्मोनल और प्रजनन कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होती है। कुछ शोधों में कद्दू के बीजों और प्रोस्टेट स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंधों पर अध्ययन किया गया है। रिसर्च के मुताबिक इनका सेवन करने से प्रोस्टेट की समस्या और स्पर्म क्वालिटी में सुधार हो सकता है।

    वजन कंट्रोल करने में है मददगार

    कद्दू के बीजों में प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट पाए जाते हैं, जो भोजन के बाद पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकते हैं। इससे बार-बार भूख लगने और अनावश्यक स्नैकिंग को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।

    कितनी मात्रा में खाएं?

    कद्दू के बीजों की मात्रा व्यक्ति की कुल डाइट और कैलोरी जरूरतों पर निर्भर करती है। आमतौर पर लगभग 30 ग्राम कद्दू के बीज एक उचित सर्विंग मानी जा सकती है। इसे करीब एक छोटी मुट्ठी के बराबर समझ सकते हैं। इनमें कैलोरी और फैट की मात्रा अधिक होती है, इसलिए जरूरत से ज्यादा खाने से अतिरिक्त कैलोरी का सेवन हो सकता है। बिना नमक वाले बीजों को प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प हो सकता है।

    कद्दू के बीज खाने का सही तरीका

    कद्दू के बीजों को हल्का भूनकर स्नैक के तौर पर खाया जा सकता है। इन्हें सलाद, दलिया, ओट्स या स्मूदी में मिलाकर भी डाइट में शामिल किया जा सकता है। भिगोने से इन्हें खाना कुछ लोगों के लिए आसान हो सकता है। बाजार में मिलने वाले ज्यादा नमक या चीनी वाले फ्लेवर्ड बीजों के बजाय सादे बीज बेहतर विकल्प हैं।

    किन लोगों को इसका सेवन करने से बचना चाहिए?

    पाचन से जुड़ी समस्या जैसे आईबीएम (IBS) या ब्लोटिंग और गैस की समस्या वाले लोगों को इसका अत्यधिक सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पेट दर्द या कब्ज हो सकता है।

    जिन लोगों का ब्लड प्रेशर कम रहता है उन्हें भी इसका सेवन करने से परहेज करना चाहिए। कद्दू के बीजों का असर ब्लड प्रेशर को और कम कर सकता है, इसलिए हाई ब्लड प्रेशर या दिल की दवा लेने वालों को डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करना चाहिए।

    गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी डॉक्टर से पूछकर सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए।

    डिस्क्लेमर: कद्दू के बीज पौष्टिक आहार का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन इनके सेवन से किसी बीमारी का इलाज या बचाव साबित नहीं होता। इन्हें संतुलित मात्रा में ही लें। किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या या एलर्जी की स्थिति में डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।

  • शादी और संतान की मनोकामना पूरी करता है ये रहस्यमयी कुआं! जानिए ‘बोटानी बावी’ से जुड़ी मान्यता और इतिहास..

    शादी और संतान की मनोकामना पूरी करता है ये रहस्यमयी कुआं! जानिए ‘बोटानी बावी’ से जुड़ी मान्यता और इतिहास..

    भारत में ऐसी कई ऐतिहासिक जगहें हैं, जिनसे जुड़ी कहानियां आज भी लोगों के बीच कौतूहल पैदा करती हैं। कहीं किसी मंदिर को लेकर चमत्कार की मान्यता है तो कहीं किसी प्राचीन कुएं या बावड़ी को मनोकामना पूरी करने वाला माना जाता है। ऐसी ही एक जगह है ‘बोटानी बावी’, जिसके बारे में स्थानीय स्तर पर कई तरह की धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।

    कहा जाता है कि इस बावी से जुड़ी आस्था के कारण लोग यहां शादी और संतान की इच्छा लेकर पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से यहां प्रार्थना करने पर मनोकामना पूरी हो सकती है। हालांकि, इन दावों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इनके पीछे किसी वैज्ञानिक प्रमाण की पुष्टि नहीं हुई है।

    क्या है बोटानी बावी?

    ‘बावी’ दक्षिण भारत में प्राचीन कुएं या बावड़ी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। पुराने समय में ऐसी बावड़ियां सिर्फ पानी के स्रोत नहीं होती थीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करती थीं।

    बोटानी बावी को लेकर भी स्थानीय लोगों में खास आस्था देखने को मिलती है। इसकी प्राचीन संरचना और इससे जुड़ी लोककथाएं इसे सामान्य कुएं से अलग पहचान देती हैं।

    शादी की मनोकामना से क्यों जुड़ी है मान्यता?

    बोटानी बावी के बारे में प्रचलित मान्यता के अनुसार, जिन लोगों की शादी में देरी हो रही हो या जो अपने लिए मनचाहा जीवनसाथी चाहते हों, वे यहां आकर पूजा या प्रार्थना करते हैं।

    स्थानीय आस्था में माना जाता है कि बावी के सामने श्रद्धा से की गई प्रार्थना भगवान तक पहुंचती है और विवाह से जुड़ी मनोकामना पूरी हो सकती है।

    इसी विश्वास के चलते कई लोग इस स्थान पर पहुंचकर अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं। हालांकि, यह कहना संभव नहीं है कि यहां आने से विवाह निश्चित रूप से हो जाता है। इसे धार्मिक विश्वास और लोकपरंपरा के रूप में ही समझना चाहिए।

    संतान प्राप्ति को लेकर भी है खास मान्यता

    बोटानी बावी से जुड़ी एक और चर्चित मान्यता संतान प्राप्ति को लेकर है। कहा जाता है कि जिन दंपतियों को संतान की इच्छा होती है, वे यहां आकर पूजा-अर्चना और प्रार्थना करते हैं।

    मान्यता रखने वाले लोगों का विश्वास है कि इस स्थान पर श्रद्धा से मांगी गई संतान की इच्छा पूरी हो सकती है। यही वजह है कि इस बावी का संबंध केवल विवाह की इच्छा से ही नहीं, बल्कि परिवार और संतान की कामना से भी जोड़कर देखा जाता है।

    लेकिन यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संतान प्राप्ति से संबंधित ऐसी मान्यताओं का कोई स्थापित वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। संतान संबंधी किसी समस्या के लिए चिकित्सकीय सलाह और उचित उपचार जरूरी है।

    सदियों पुरानी जल संरचनाओं की कहानी

    भारत में प्राचीन कुएं और बावड़ियां हमारी स्थापत्य और जल-संरक्षण परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। कई जगहों पर सीढ़ियों से नीचे उतरकर पानी तक पहुंचने की व्यवस्था बनाई जाती थी।

    इन संरचनाओं को इस तरह तैयार किया जाता था कि गर्मी के मौसम में भी पानी तक पहुंच बनी रहे। कई बावड़ियों के आसपास धार्मिक गतिविधियां और सामाजिक आयोजन भी होते थे।

    इसी कारण किसी प्राचीन बावी को केवल पानी का स्रोत मानना सही नहीं होगा। वह अपने समय की वास्तुकला, जल प्रबंधन और स्थानीय संस्कृति का हिस्सा भी हो सकती है।

    क्या सच में मनोकामना पूरी होती है?

    यही सबसे बड़ा सवाल है।

    बोटानी बावी को लेकर शादी और संतान की मनोकामना पूरी होने की बातें मुख्य रूप से लोकविश्वास और धार्मिक आस्था से जुड़ी हैं। किसी व्यक्ति की मनोकामना पूरी होने की व्यक्तिगत कहानी उसके विश्वास को मजबूत कर सकती है, लेकिन इससे यह वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं होता कि बावी में कोई अलौकिक शक्ति मौजूद है।

    इसलिए बोटानी बावी को लेकर सबसे दिलचस्प बात इसका रहस्य ही नहीं, बल्कि इतिहास, स्थानीय परंपरा और लोगों की आस्था का मेल है।

    पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए क्यों खास है?

    ऐसी ऐतिहासिक जगहें उन लोगों को आकर्षित करती हैं, जो प्राचीन स्थापत्य, लोककथाओं और धार्मिक परंपराओं को करीब से समझना चाहते हैं।

    बोटानी बावी से जुड़ी कहानियां पीढ़ियों से लोगों के बीच चर्चा का विषय रही हैं। यही लोककथाएं किसी ऐतिहासिक स्थल को स्थानीय संस्कृति में एक अलग पहचान देती हैं।

    आस्था के साथ इतिहास को भी समझना जरूरी

    भारत की प्राचीन जल संरचनाएं सिर्फ धार्मिक मान्यताओं के कारण महत्वपूर्ण नहीं हैं। वे उस दौर की इंजीनियरिंग और जल संरक्षण की समझ का भी प्रमाण हैं।

    बोटानी बावी से जुड़ी शादी और संतान की मान्यताएं लोगों की आस्था का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन इसके ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    यही वजह है कि बोटानी बावी की कहानी को सिर्फ ‘चमत्कारी कुएं’ की कहानी के तौर पर नहीं, बल्कि इतिहास, लोकविश्वास और भारतीय जल-संस्कृति के अनोखे मेल के रूप में देखना ज्यादा दिलचस्प है।

  • 500 करोड़ की Toxic का बुरा हाल, OTT राइट्स के लिए मिल रहा सिर्फ 30 करोड़ का ऑफर..

    500 करोड़ की Toxic का बुरा हाल, OTT राइट्स के लिए मिल रहा सिर्फ 30 करोड़ का ऑफर..

    500 करोड़ की Toxic का बुरा हाल, OTT राइट्स के लिए मिल रहा सिर्फ 30 करोड़ का ऑफर

    यश की फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। यश स्टारर अब सिनेमाघरों में अपने सफर के आखिरी दौर में है और बड़ी फ्लॉप साबित हुई। इसके बाद अब इस फिल्म को ओटीटी राइट्स को लेकर भी बड़ा झटका लगा है।

    ये गैंगस्टर ड्रामा फिल्म फिल्म करीब 500 करोड़ रुपये के बजट में तैयार की गई है। फिल्म ने शुरुआत में शानदार कमाई की थी, लेकिन दर्शकों से मिली खराब प्रतिक्रिया के बाद इसकी कमाई तेजी से गिर गई। जिसके बाद एक और बड़ी खबर सामने आई कि एक ओटीटी प्लेटफॉर्म अब फिल्म के डिजिटल राइट्स के लिए सिर्फ 30 करोड़ रुपये देने का ऑफर दिया है। जबकि फिल्म की रिलीज से पहले एक प्लेटफॉर्म ने इसके लिए 150 करोड़ रुपये का ऑफर दिया था।

    बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म रिलीज होने से पहले मेकर्स को ओटीटी राइट्स के लिए 150 करोड़ रुपये का ऑफर मिला था। हालांकि, मेकर्स इससे ज्यादा रकम चाहते थे और उन्होंने 200 करोड़ रुपये से अधिक की उम्मीद की थी।

    इसके साथ ही यश ने भी भरोसा जताया था कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित होगी और इसके ओटीटी राइट्स की कीमत 200 करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो जाएगी।

    लेकिन फिल्म की बॉक्स ऑफिस पर खराब हालत का असर अब इसके ओटीटी राइट्स पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सभी भाषाओं में फिल्म के पोस्ट-थियेट्रिकल स्ट्रीमिंग राइट्स के लिए अब 30 करोड़ रुपये तक का ही ऑफर मिल रहा है।

    OTT के लिए फिल्म का नया वर्जन बनाने पर विचार

    रिपोर्ट के मुताबिक, ‘Toxic’ की कहानी और इसके एडल्ट ट्रीटमेंट को देखते हुए मेकर्स ओटीटी के लिए फिल्म का एक अलग वर्जन तैयार करने पर विचार कर रहे हैं। सूत्र ने बताया, “मेकर्स अब डिजिटल वर्जन के लिए पूरी तरह से नया एडिट तैयार करने पर विचार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इससे मौजूदा ऑफर से ज्यादा रकम मिल सकती है। नुकसान को कम करने के लिए कई विकल्पों पर चर्चा चल रही है, जिसमें ओटीटी के लिए नया कट तैयार करना भी शामिल है।”

    गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी ‘टॉक्सिक’ एक पीरियड गैंगस्टर एक्शन ड्रामा है, जिसकी कहानी गोवा की कहानी पर आधारित है। फिल्म में यश के साथ कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्माण केवीएन प्रोडक्शंस और मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स ने किया है।

  • सूखा पेड़ काटने से पहले भी जान लें वास्तु का नियम, इस काम के लिए ये 10 नक्षत्र माने जाते हैं शुभ..

    सूखा पेड़ काटने से पहले भी जान लें वास्तु का नियम, इस काम के लिए ये 10 नक्षत्र माने जाते हैं शुभ..

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    वास्तु शास्त्र में पेड़-पौधों को प्रकृति और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि किसी पेड़ को काटने से पहले समय और विधि का ध्यान रखने की बात कही गई है। खासतौर पर सूखे, अनुपयोगी या ऐसी जगह पर लगे पेड़ जो किसी तरह की अड़चन पैदा कर रहे हों, उन्हें हटाने के लिए भी वास्तु शास्त्र  में कुछ नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि किसी भी समय पेड़ पर कुल्हाड़ी नहीं चलानी चाहिए।आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए सूखा पेड़ काटने से पहले किन नियमों का ध्यान जरूरी माना गया है।

    पेड़ काटने के लिए शुभ बताए हैं ये 10 नक्षत्र

    लोग अवांछित वृक्षों को काट देते हैं, लेकिन अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय इन पेड़ों को काटना अनुचित माना जाता है। इसके लिये एक सही समय होता है, जिसका पालन जरूर करना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार पेड़ काटने के लिए मृगशिरा, पुनर्वसु, अनुराधा, हस्त, मूल, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, स्वाति और श्रवण नक्षत्र को अनुकूल माना गया है।

    पेड़ काटने से पहले करें पूजा-प्रार्थना

    पेड़ काटने से पहले उसकी विधि पूर्वक पूजा करनी चाहिए। इसके लिए गंध, पुष्प और नैवेद्य से वृक्ष का पूजन करने की बात कही गई है। इसके बाद उसके तने को साफ कपड़े से ढककर सफेद सूत लपेटने का विधान है। पूजा के दौरान वृक्ष से जुड़े जीवों और उसमें रहने वाले प्राणियों के कल्याण की कामना करें। साथ ही उनसे दूसरे स्थान पर चले जाने की प्रार्थना की जाती है। वहीं, वृक्ष से अपने कार्य के लिए पूजा स्वीकार करने की विनती करने की परंपरा बताई गई है।

    इस दिशा से काटें वृक्ष

    पूजा और प्रार्थना के बाद वृक्ष को जल से सींचने की बात कही गई है। इसके बाद मधु और घी लगाए हुए कुल्हाड़े से वृक्ष को काटने का विधान है। वास्तु अनुसार, पेड़ को पूर्व से उत्तर दिशा की ओर बढ़ते हुए उसके चारों तरफ घूमकर काटना चाहिए। वृक्ष को गोलाई में काटने की बात कही गई है।

    जरूरी बात

    पेड़ काटना पर्यावरण से जुड़ा गंभीर विषय है। किसी भी वृक्ष को हटाने से पहले स्थानीय कानून और अनुमति से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी है।