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  • लिवर खराब होने से पहले शरीर में दिखते हैं ये 7 संकेत..?

    लिवर खराब होने से पहले शरीर में दिखते हैं ये 7 संकेत..?

    लिवर खराब होने से पहले शरीर में दिखते हैं ये 7 संकेत, डॉक्टर से जानें शुरुआती लक्षण और बचाव

    मानव शरीर में लिवर (Liver) दूसरा सबसे बड़ा और बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो भोजन को पचाने से लेकर शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने तक 500 से अधिक काम करता है। लेकिन आजकल के बिगड़ते लाइफस्टाइल, जंक फूड, शराब का अत्यधिक सेवन और शारीरिक निष्क्रियता के कारण लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। लिवर की सबसे खास और चिंताजनक बात यह है कि शुरुआती चरणों में इसमें परेशानी होने पर बॉडी में किसी तरह के कोई लक्षण आसानी से नहीं दिखते। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और हेपेटोलॉजिस्ट्स के अनुसार, लिवर में कोई भी समस्या शुरू होने पर शरीर स्किन के जरिए, पाचन और एनर्जी लेवल के स्तर के माध्यम से कुछ शुरुआती वार्निंग साइन देने लगता है। अगर इन लक्षणों को सही समय पर पहचान लिया जाए, तो लिवर को गंभीर क्षति या लिवर सिरोसिस जैसी जानलेवा स्थिति में पहुंचने से पहले पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

    जनरल फिजिशियन, कंसल्टेंट फिजिशियन और इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. शालिनी सिंह सालुंके ने बताया बॉडी में दिखने वाले लिवर की खराबी के लक्षणों को अगर शुरुआत में ही पहचान लिया जाए तो आसानी से इस परेशानी को समय रहते दुरुस्त किया जा सकता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि लिवर में खराबी होने पर बॉडी में कौन कौन से लक्षण दिखते है।

    खाना खाने के बाद पेट फूलना

    डॉक्टर ने बताया खाना खाने के बाद पेट फूलना या ब्लोटिंग फैटी लिवर से जुड़ा संकेत हो सकता है। हालांकि, पेट फूलने के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल इस लक्षण के आधार पर फैटी लिवर की पुष्टि नहीं की जा सकती। लिवर का मुख्य काम भोजन को पचाने के लिए पित्त (Bile) का निर्माण करना है। जब लिवर की कोशिकाओं में अत्यधिक वसा (Fat) जमा हो जाती है, तो इसका असर पाचक एंजाइम और पित्त के स्राव पर पड़ सकता है। इससे खाना सही तरीके से नहीं पचता, जिससे पेट में गैस और ब्लोटिंग महसूस होती है।

    पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में भारीपन

    लिवर शरीर के दाहिने ऊपरी हिस्से में, पसलियों के ठीक नीचे स्थित होता है। लिवर से जुड़ी कुछ समस्याओं में इस हिस्से में दर्द, दबाव, भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है। हालांकि, हर बार इस तरह का दर्द लिवर की बीमारी का संकेत नहीं होता। लगातार या बार-बार होने वाली परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

    अत्यधिक थकान और कमजोरी

    लिवर की कुछ बीमारियों में व्यक्ति को लगातार थकान, कमजोरी और ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। पर्याप्त नींद लेने के बाद भी अगर शरीर में सुस्ती बनी रहती है और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होने लगे, तो इसके कई कारण हो सकते हैं। केवल थकान के आधार पर लिवर की बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, इसलिए लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

    स्किन और आंखों का पीला पड़ना

    लिवर से जुड़ी समस्या में पीलिया एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। इसमें आंखों का सफेद हिस्सा और स्किन पीली दिखाई देने लगती है। ऐसा शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने के कारण हो सकता है। पीलिया के लिए और भी कई हेल्थ कंडीशन जिम्मेदार हो सकती हैं। इसलिए स्किन या आंखों में पीलापन नजर आने पर इसे नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से उचित जांच कराएं।

    भूख कम होना और वजन घटना

    लिवर की कुछ बीमारियों के दौरान भूख कम लगना या खाने में रुचि घट जाना जैसी समस्या हो सकती है। लंबे समय तक भूख कम रहने से व्यक्ति का वजन भी कम हो सकता है। अगर बिना किसी खास कोशिश के लगातार वजन घट रहा है और इसके साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    मतली या उल्टी होना

    लिवर की कुछ समस्याओं में मतली, उल्टी या पेट संबंधी परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों को खाने के बाद पेट भारी लगना या असहजता भी महसूस हो सकती है। हालांकि, मतली और उल्टी के पीछे अपच, संक्रमण, गैस्ट्रिक समस्या समेत कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए केवल इस लक्षण के आधार पर लिवर की बीमारी मान लेना सही नहीं है।

    पेशाब और मल का रंग गहरा होना

    पेशाब और मल का रंग सामान्य से अधिक गहरा पीला या भूरा होना कुछ मामलों में लिवर या पित्त संबंधी समस्या से जुड़ा हो सकता है, खासकर जब इसके साथ पीलिया जैसे लक्षण भी मौजूद हों। हालांकि, शरीर में पानी की कमी होने पर भी पेशाब गहरा दिखाई दे सकता है। अगर यह बदलाव लगातार बना रहे या अन्य लक्षणों के साथ हो, तो डॉक्टर से जांच कराएं।

    लिवर को हेल्दी रखने के लिए डाइट और लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव

    लिवर को हेल्दी रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। पानी शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ लिवर के कामों को सुचारू रूप से चलाने में भी मदद करता है।

    लिवर को हेल्दी रखने के लिए अनहेल्दी और ट्रांस फैट की बजाय हेल्दी फैट का सेवन करें। डाइट में एवोकाडो, जैतून का तेल, नट्स और फैटी फिश का सेवन करें।

    नट्स और सीड्स को बनाएं डाइट का हिस्सा। इसमें हेल्दी फैट, फाइबर, प्रोटीन तथा एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो सेहत को हेल्दी रखते हैं। डाइट में बादाम, अखरोट, चिया सीड्स, अलसी के बीज और कद्दू के बीज का सेवन करें।

    डाइट में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं। फाइबर युक्त भोजन पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के साथ-साथ लिवर की सेहत को भी सपोर्ट करता है।

    लिवर को स्वस्थ रखने के लिए डाइट में रंग-बिरंगे फल और सब्जियां जरूर शामिल करें।

    वजन को कंट्रोल करें और बॉडी को एक्टिव रखें। रोजाना वॉक और एक्सरसाइज करें।

    शराब का सेवन लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है इसलिए उससे परहेज करें।

    कोल्ड ड्रिंक, मीठे पैकेज्ड जूस, एनर्जी ड्रिंक और ज्यादा चीनी वाली चीजों का सेवन सीमित करें।

    ब्लड शुगर, ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन फैटी लिवर से जुड़ा हो सकता है। नियमित जांच और डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार का पालन करना जरूरी है।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। लिवर से जुड़ी किसी बीमारी या समस्या के निदान और इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह और जरूरी जांच कराएं।

  • हेलिकॉप्टर के घूमते पंखे पर खड़े होकर रूसी शख्स ने किया स्टंट..

    हेलिकॉप्टर के घूमते पंखे पर खड़े होकर रूसी शख्स ने किया स्टंट..

    हेलिकॉप्टर के घूमते पंखे पर खड़े होकर रूसी शख्स ने किया स्टंट, VIDEO देख कांप जाएगी रूह!

    रूस के मशहूर स्टंटमैन येवगेनी चेबोटारेव ने हेलिकॉप्टर के घूमते पंखे पर खड़े होकर हैरान करने वाला स्टंट किया है. देखिए वायरल वीडियो और लोगों के रिएक्शन.

    Russian Daredevil Viral Stunt Video: सोशल मीडिया पर आपने एक से बढ़कर एक स्टंट वीडियो देखे होंगे, लेकिन रूस के डेयरडेविल येवगेनी चेबोटारेव (Yevgeny Chebotarev) ने इस बार जो कारनामा किया है उसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है. इस शख्स ने अपनी जान को जोखिम में डालकर जो स्टंट किया है, उसे देखकर अच्छे-अच्छे दिग्गजों की सांसें थम गईं.

    कौन हैं येवगेनी चेबोटारेव? (Who is Yevgeny Chebotarev?)

    रूस के रोस्तोव-ऑन-डॉन के रहने वाले येवगेनी एक मशहूर स्टंटमैन हैं. वह अपने खतरनाक और जानलेवा कारनामों के लिए सोशल मीडिया पर जाने जाते हैं. उनके स्टंट में अक्सर हाई-स्पीड गाड़ियां और भारी मशीनरी शामिल होती हैं. वह कई बार गंभीर हादसों और टूटी हुई हड्डियों का सामना कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके हौसले और पागलपन में कोई कमी नहीं आई है.

    चलते हेलिकॉप्टर के पंखे पर खड़े होने का सनसनीखेज कारनामा

    वायरल हो रहे इस वीडियो में येवगेनी किसी फिल्म के खूंखार सीन की तरह हवा में उड़ रहे हेलिकॉप्टर के चलते हुए रोटर ब्लेड (पंखे) पर खड़े नजर आ रहे हैं. इस जानलेवा स्टंट को अंजाम देने के लिए उन्हें एक क्रेन की मदद से हार्नेस के जरिए ऊपर लटकाया गया था. जरा सी भी चूक उनकी जान ले सकती थी और हेलिकॉप्टर के पंखों के बीच आने से उनके परखच्चे उड़ सकते थे.

    सोशल मीडिया यूजर्स की हैरान करने वाली प्रतिक्रियाएं

    इस रोमांचक वीडियो को इंस्टाग्राम पर अब तक 72 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है. वीडियो शेयर करते हुए येवगेनी ने कैप्शन लिखा, मैंने हमेशा एक हेलिकॉप्टर खरीदने का सपना देखा था, अब मुझे एक प्लेन चाहिए. साथ ही उन्होंने अपने फैंस को चेतावनी दी है कि बिना ट्रेनिंग के इस तरह के खतरनाक स्टंट को बिल्कुल न दोहराएं. कमेंट बॉक्स में यूजर्स जमकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

    एक यूजर ने लिखा, ये बंदा एकदम सनकी है. दूसरे यूजर ने कहा, भाई पागलपन की भी कोई हद होती है. तीसरे यूजर ने लिखा, स्टंट ये कर रहा है, रोंगटे मेरे खड़े हो रहे हैं.

    यहां देखिए वायरल वीडियो

    अभिषेक राय (Abhishek Roy) अभी TV9 भारतवर्ष के डिजिटल विंग में असिस्टेंट न्यूज एडिटर (Assistant News Editor) हैं. पत्रकारिता में उन्हें 14 साल से ज्यादा का अनुभव है और इस फील्ड में उनकी अपनी एक अलग पहचान है. अपने करियर में उन्होंने कई बड़े मीडिया संस्थानों में काम किया है. शुरुआत में वे भोपाल के ‘पीपुल्स समाचार’ अखबार (Peoples Samachar) से जुड़े. यहां उन्होंने प्रिंट मीडिया का काम सीखा. इसके बाद वे दैनिक भास्कर (Dainik Bhaskar) ग्रुप में लंबे समय तक रहे. खास बात ये कि उन्होंने भास्कर के अखबार और वेबसाइट, दोनों जगह काम किया. इससे उन्हें पुरानी और नई, दोनों तरह की पत्रकारिता का अनुभव मिला. अभिषेक ने अहमदाबाद के ‘जानो दुनिया’ (Jano Duniya) न्यूज चैनल में भी काम किया. यहां उन्होंने टीवी मीडिया में अपनी काबिलियत दिखाई. अभिषेक को राजनीति और विदेशी मामलों की अच्छी समझ है. वे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक कूटनीति को बहुत ही बारीकी से समझते हैं. हालांकि, वर्तमान में डिजिटल मीडिया की बदलती मांग को देखते हुए वे अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं. इन दिनों वे ट्रेंडिंग खबरों, वायरल टॉपिक्स और हटके कंटेंट पर काम कर रहे हैं. अभिषेक के लिए पत्रकारिता महज एक पेशा या सिर्फ पाठकों तक सूचनाएं या खबरें पहुंचाना नहीं है. उनका विजन और उद्देश्य इससे कहीं अधिक व्यापक है. वे मानते हैं कि एक पत्रकार के रूप में उनकी जिम्मेदारी है कि पाठकों को हर बार कुछ नया और अनूठा पढ़ने को मिले. कंटेंट ऐसा हो जो पाठकों की सोच के दायरे को विस्तृत करे और उन्हें एक नया नजरिया दे. अभिषेक को पत्रकारिता के साथ-साथ ट्रैवलिंग का भी शौक है. भागदौड़ भरी जिंदगी से जब भी फुर्सत मिलती है, वे पहाड़ों की तरफ निकल जाते हैं और सुकून के पल बिताते हैं.

     

     

     
  • हार्दिक पांड्या संग अमीषा पटेल की नजदीकियों पर मचा बवाल, एक्ट्रेस ने कहा- दोस्ती को रोमांस क्यों समझते हो?..

    हार्दिक पांड्या संग अमीषा पटेल की नजदीकियों पर मचा बवाल, एक्ट्रेस ने कहा- दोस्ती को रोमांस क्यों समझते हो?..

    हार्दिक पांड्या संग अमीषा पटेल की नजदीकियों पर मचा बवाल, एक्ट्रेस ने कहा- दोस्ती को रोमांस क्यों समझते हो?

    बॉलीवुड एक्ट्रेस अमीषा पटेल और क्रिकेटर हार्दिक पांड्या इन दिनों अपने एक वायरल वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दोनों के रिश्ते को लेकर तरह-तरह की बातें होने लगीं। अब अमीषा पटेल ने इन अफवाहों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए एक यूजर को जवाब दिया है।

    हाल ही में अमीषा और हार्दिक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें दोनों एक पार्टी के दौरान बातचीत करते नजर आए। वीडियो में अमीषा क्रिकेटर को अपने दोस्तों से मिलवाती भी दिखाई दीं। इसके बाद सोशल मीडिया पर दोनों के अफेयर की अटकलें लगने लगीं।

    एक यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि अमीषा ने पार्टी के दौरान हार्दिक के कंधे पर हाथ रखा था। यूजर ने इसे दोनों के बीच रिश्ते से जोड़ते हुए लिखा कि रेडिट पर चल रही अफवाहें सच होती नजर आ रही हैं।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह पोस्ट अमीषा पटेल तक भी पहुंची। एक्ट्रेस ने इसका स्क्रीनशॉट अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया और यूजर को जवाब दिया। अमीषा ने तंज कसते हुए कहा कि अगर किसी दोस्त के कंधे पर हाथ रखना रोमांटिक है, तो फिर यूजर की बात सही है।

    इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि दोस्तों के बीच होने वाली सामान्य बातचीत को रोमांस का नाम क्यों दिया जा रहा है। एक्ट्रेस ने आगे कहा कि वह उस यूजर को जानती तक नहीं हैं, लेकिन उनकी पोस्ट देखकर ऐसा लगता है कि शायद उनकी कोई लड़की दोस्त नहीं है। अमीषा ने यह भी कहा कि ऐसी बातें पोस्ट करने से पहले लोगों को दोस्ती को समझना चाहिए।

    हार्दिक के साथ रिश्ते की अफवाहों पर लगा विराम?

    अमीषा और हार्दिक के इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर उनके रिश्ते को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। हालांकि, अमीषा के जवाब से साफ है कि वह दोनों के बीच के रिश्ते को सिर्फ दोस्ती के तौर पर देख रही हैं और वायरल वीडियो को लेकर बनाई जा रही रोमांटिक अटकलों से सहमत नहीं हैं।

    माहीका शर्मा को डेट कर रहे हैं हार्दिक

    वहीं, हार्दिक पांड्या की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उनका नाम मॉडल माहीका शर्मा के साथ जुड़ता रहा है। हार्दिक ने साल 2025 में इंस्टाग्राम पर माहीका के साथ अपने रिश्ते को सार्वजनिक किया था। इससे पहले क्रिकेटर की शादी एक्ट्रेस नताशा स्टैनकोविक से हुई थी। दोनों का एक बेटा भी है।

  • हाइपोथायराइड में दवाई लेने के बाद भी थकान, वजन बढ़ना और Low Energy? जानिए तिल और अलसी की इस आसान Remedy के बारे में..?

    हाइपोथायराइड में दवाई लेने के बाद भी थकान, वजन बढ़ना और Low Energy? जानिए तिल और अलसी की इस आसान Remedy के बारे में..?

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    अगर आपको Hypothyroidism है और दवाई लेने के बाद भी दिनभर थकान रहती है, वजन कम नहीं हो रहा या शरीर में Energy बिल्कुल Low महसूस होती है, तो कई लोग सिर्फ दवाई को इसका कारण मान लेते हैं।

    लेकिन कुछ लोगों में Selenium और Zinc जैसे Minerals की कमी भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

    आज इस पोस्ट में हम आसान भाषा में समझेंगे:

    • Hypothyroidism क्या है?
    • T3 और T4 क्या होते हैं?
    • Selenium और Zinc की क्या भूमिका बताई जाती है?
    • तिल और अलसी से बनने वाली यह आसान remedy कैसे तैयार करें?
    • इसे कब और कैसे लेना बताया गया है?
    • Thyroid medicine लेने वालों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

    सबसे पहले समझते हैं T3 और T4 को

    हमारा Thyroid gland मुख्य रूप से T4 और T3 hormones बनाता है।

    T4 को अक्सर कम सक्रिय hormone और T3 को अधिक सक्रिय form के रूप में समझाया जाता है। T3 शरीर के metabolism को regulate करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    T4 से T3 के conversion की प्रक्रिया में शरीर को कई nutrients की आवश्यकता होती है, जिनमें Selenium और Zinc भी महत्वपूर्ण nutrients माने जाते हैं।

    यही कारण है कि diet में इन nutrients की पर्याप्त मात्रा होना महत्वपूर्ण हो सकता है।

    इस Remedy में इस्तेमाल होंगी सिर्फ 2 चीजें

    1. तिल

    आप सफेद या काले तिल में से कोई भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

    तिल में कई nutrients पाए जाते हैं, जिनमें minerals और healthy fats शामिल हैं।

    2. अलसी

    अलसी यानी Flax Seeds में:

    • Omega-3 fatty acids
    • Lignans
    • Fiber

    जैसे nutrients पाए जाते हैं।

    इसी वजह से इसे भी balanced diet का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    तिल और अलसी की Remedy कैसे बनाएं?

    इसे बनाना बहुत आसान है।

    Step 1

    एक teaspoon अलसी लें।

    Step 2

    एक teaspoon तिल लें।

    Step 3

    दोनों को अलग-अलग तवे पर हल्का भूनें।

    जब हल्की खुशबू आने लगे तो गैस बंद कर दें।

    Step 4

    इन्हें पूरी तरह ठंडा होने दें।

    Step 5

    अब दोनों को mixer में डालकर हल्का पीस लें।

    बहुत बारीक powder बनाने की जरूरत नहीं है। इसे थोड़ा दरदरा रखा जा सकता है।

    Step 6

    तैयार powder को गुनगुने पानी के साथ रात को सोने से पहले लेने की बात इस remedy में बताई गई है।

    इस remedy को लगातार 6–8 सप्ताह लेने की सलाह दी जाती है।

    इसे रात में ही क्यों लेने की बात कही गई है?

    अगर आप Levothyroxine/Thyroxine जैसी thyroid medicine लेते हैं, तो इस तरह की high-fiber चीजों को दवा के तुरंत बाद लेना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि fiber दवा के absorption को प्रभावित कर सकता है।

    इसलिए thyroid medicine और इस तरह के fiber-rich food के बीच पर्याप्त अंतर रखना जरूरी है।

    एक बहुत जरूरी बात

    यह तिल और अलसी की remedy Thyroid medicine का replacement नहीं है।

    अगर डॉक्टर ने आपको thyroid की दवा दी है, तो उसे अपनी इच्छा से बंद नहीं करना चाहिए।

    साथ ही अपनी thyroid reports, खासकर TSH, को डॉक्टर के साथ review करते रहना चाहिए।

    अगर आपकी dose में बदलाव की जरूरत होगी, तो वह डॉक्टर आपकी reports और आपकी स्थिति के आधार पर तय करेंगे।

    आखिर में

    Hypothyroidism को सिर्फ एक remedy या एक food से ठीक करने की बजाय medicine + balanced diet + proper lifestyle + regular monitoring पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    अगर आप तिल और अलसी को अपनी diet में शामिल करना चाहते हैं, तो इसे एक nutritional addition की तरह देख सकते हैं।

    क्या आपको भी thyroid की दवा लेने के बावजूद थकान, वजन बढ़ने या low energy की समस्या रहती है?

    डिस्क्लेमर: इस लेख में बताए गए आयुर्वेदिक उपाय और घरेलू नुस्खे सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए हैं। इनसे कब्ज या पाचन संबंधी समस्या का इलाज होने का दावा नहीं किया जा सकता। हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी नुस्खे या हर्बल उत्पाद का सेवन शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लें।

  • भारत के ‘चंगू-मंगू’ और पाकिस्तान के ‘चंगा-मंगा’ में क्या है कनेक्शन? एक काल्पनिक जोड़ी से लेकर मशहूर जंगल तक की कहानी..

    भारत के ‘चंगू-मंगू’ और पाकिस्तान के ‘चंगा-मंगा’ में क्या है कनेक्शन? एक काल्पनिक जोड़ी से लेकर मशहूर जंगल तक की कहानी..

    भारत में आपने बचपन से ‘चंगू-मंगू’ शब्द जरूर सुना होगा। आमतौर पर दो शरारती बच्चों या ऐसे लोगों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल मजाकिया अंदाज में किया जाता है, जो मिलकर कोई शरारत करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी ‘चंगा-मंगा’ नाम बेहद मशहूर है?

    पहली नजर में दोनों नाम इतने मिलते-जुलते हैं कि लगता है जैसे इनके पीछे कोई पुराना कनेक्शन होगा। लेकिन असल कहानी इससे बिल्कुल अलग है।

    भारत के चंगू-मंगू जहां आम बोलचाल और लोककथाओं में इस्तेमाल होने वाला नाम है, वहीं पाकिस्तान का चंगा-मंगा एक प्रसिद्ध वन क्षेत्र का नाम है। इसके नाम के पीछे दो लोगों की कहानी भी बताई जाती है।

    भारत में चंगू-मंगू का मतलब क्या है?

    भारत में ‘चंगू-मंगू’ किसी एक वास्तविक व्यक्ति का नाम नहीं है। यह मुख्य रूप से बोलचाल, हास्य और बच्चों की कहानियों में इस्तेमाल होने वाला एक काल्पनिक या सामान्य संबोधन है।

    जब दो लोग साथ मिलकर शरारत करते हैं या कोई मजेदार हरकत करते हैं तो उन्हें मजाक में ‘चंगू-मंगू’ कह दिया जाता है।

    समय के साथ यह नाम भारतीय लोकप्रिय संस्कृति और बोलचाल का हिस्सा बन गया। हालांकि, इसकी कोई एक प्रमाणित ऐतिहासिक कहानी नहीं है कि चंगू और मंगू नाम के दो वास्तविक व्यक्ति ही इस मुहावरे के मूल पात्र थे।

    अब जानिए पाकिस्तान के चंगा-मंगा की कहानी

    पाकिस्तान में ‘चंगा-मंगा’ शब्द सुनते ही सबसे पहले एक बड़े जंगल का नाम सामने आता है।

    चंगा मंगा जंगल पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित एक मानव-निर्मित वन क्षेत्र है। यह लाहौर के आसपास के इलाके से जुड़ा हुआ है और पाकिस्तान के प्रमुख कृत्रिम वनों में गिना जाता है।

    इस जंगल का नाम दो कथित डाकुओं—चंगा और मंगा—से जोड़ा जाता है। लोकप्रिय इतिहास और स्थानीय कथाओं में इन्हें ब्रिटिश काल के आसपास पंजाब क्षेत्र में सक्रिय डाकू बताया जाता है।

    कहा जाता है कि दोनों के नाम और उनके अपराधों से जुड़ी कहानियां इतनी चर्चित हुईं कि बाद में इसी इलाके के जंगल को भी ‘चंगा-मंगा’ के नाम से जाना जाने लगा।

    हालांकि, चंगा और मंगा की व्यक्तिगत जीवनी तथा जंगल के नामकरण को लेकर लोकप्रिय कथाओं और ऐतिहासिक स्रोतों में पूरी तरह एक जैसी जानकारी नहीं मिलती। इसलिए इससे जुड़ी कई बातें लोकप्रचलित कहानी के रूप में देखी जाती हैं।

    चंगा-मंगा जंगल असल में है क्या?

    चंगा-मंगा कोई प्राकृतिक रूप से सदियों से मौजूद जंगल नहीं था। इसे बड़े पैमाने पर मानव द्वारा विकसित वन क्षेत्र के रूप में तैयार किया गया था।

    ब्रिटिश शासन के दौरान पंजाब क्षेत्र में रेलवे और दूसरे कामों के लिए लकड़ी की जरूरत बढ़ रही थी। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने और वन क्षेत्र विकसित करने की योजनाएं शुरू की गईं।

    इसी क्रम में चंगा-मंगा क्षेत्र में भी वृक्षारोपण किया गया।

    कब शुरू हुआ था जंगल विकसित करने का काम?

    ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, चंगा-मंगा में वनरोपण का काम 1870 के दशक में शुरू हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य लकड़ी और ईंधन की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ एक व्यवस्थित वन क्षेत्र विकसित करना था।

    धीरे-धीरे यहां पेड़ों की संख्या बढ़ती गई और यह क्षेत्र एक बड़े मानव-निर्मित जंगल के रूप में विकसित हो गया।

    सिर्फ जंगल ही नहीं, वन्यजीवों का भी घर बना

    समय के साथ चंगा-मंगा केवल लकड़ी उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाला क्षेत्र नहीं रहा। यहां अलग-अलग प्रकार के पेड़-पौधे और वन्यजीव भी पाए जाने लगे।

    जंगल को एक पर्यटन और वन्यजीव क्षेत्र के रूप में भी विकसित किया गया। यहां आने वाले लोगों के लिए प्राकृतिक वातावरण के साथ-साथ मनोरंजन से जुड़ी सुविधाएं भी बनाई गईं।

    क्या आज भी चंगा-मंगा पहले जितना बड़ा है?

    नहीं। समय के साथ पेड़ों की कटाई, मानवीय गतिविधियों और पर्यावरणीय दबावों का इस वन क्षेत्र पर असर पड़ा है।

    जिस विशाल वन क्षेत्र के लिए चंगा-मंगा कभी प्रसिद्ध था, उसकी स्थिति समय के साथ बदली है। जंगल के संरक्षण और दोबारा हरियाली बढ़ाने की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही है।

    यानी आज चंगा-मंगा का नाम सुनकर जितने विशाल जंगल की तस्वीर दिमाग में आती है, उसकी वास्तविक स्थिति को समझने के लिए इसके इतिहास और वर्तमान पर्यावरणीय हालात दोनों को देखना जरूरी है।

    क्या भारत के चंगू-मंगू और पाकिस्तान के चंगा-मंगा एक ही हैं?

    नहीं।

    नामों में समानता जरूर है, लेकिन दोनों के बीच कोई प्रमाणित सीधा संबंध नहीं है।

    • चंगू-मंगू — भारत में प्रचलित हास्य/लोकभाषा का नाम या संबोधन।
    • चंगा-मंगा — पाकिस्तान में प्रसिद्ध वन क्षेत्र का नाम।
    • चंगा-मंगा नाम को दो कथित डाकुओं से जोड़ने वाली लोकप्रिय कहानी भी प्रचलित है।
    • दोनों नामों की समान ध्वनि को ऐतिहासिक रिश्ता मानने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता।

    एक नाम, दो देशों की बिल्कुल अलग कहानियां

    यह कहानी इसलिए दिलचस्प है क्योंकि भारत में ‘चंगू-मंगू’ सुनते ही लोगों के दिमाग में दो शरारती किरदारों की छवि बनती है, जबकि पाकिस्तान में ‘चंगा-मंगा’ एक ऐतिहासिक वन क्षेत्र की पहचान है।

    एक नाम जहां हंसी-मजाक और बोलचाल का हिस्सा बन गया, वहीं दूसरा नाम वन, इतिहास और स्थानीय लोककथाओं से जुड़ गया।

    इसलिए अगली बार जब आपको ‘चंगू-मंगू’ या ‘चंगा-मंगा’ सुनाई दे, तो दोनों को एक ही कहानी के पात्र समझने की गलती मत कीजिए। नाम भले ही मिलते-जुलते हों, लेकिन उनकी कहानियां बिल्कुल अलग हैं।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में चंगा-मंगा नाम और इससे जुड़ी डाकुओं की कहानी के संबंध में प्रचलित ऐतिहासिक एवं स्थानीय विवरणों का उल्लेख किया गया है। अलग-अलग स्रोतों में नामकरण और पात्रों से जुड़ी जानकारी में अंतर मिल सकता है। इसलिए लोककथाओं को प्रमाणित इतिहास से अलग समझना जरूरी है। Satyareport.com किसी भी अप्रमाणित लोककथा को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।

  • राजस्थान की ‘नाटा’ प्रथा क्या है? शादी के बाद भी बदल सकता है जीवनसाथी, जानिए इस परंपरा का पूरा सच.

    राजस्थान की ‘नाटा’ प्रथा क्या है? शादी के बाद भी बदल सकता है जीवनसाथी, जानिए इस परंपरा का पूरा सच.

    राजस्थान अपनी समृद्ध संस्कृति, लोककलाओं, किलों और अनोखी परंपराओं के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। यहां अलग-अलग समुदायों में समय के साथ कई सामाजिक रीति-रिवाज विकसित हुए हैं। इनमें कुछ परंपराएं आज भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। ऐसी ही एक सामाजिक प्रथा है ‘नाटा’ या ‘नातरा’, जिसका उल्लेख राजस्थान के कुछ समुदायों के सामाजिक जीवन के संदर्भ में मिलता है।

    नाटा प्रथा को लेकर इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें कही जाती हैं। कहीं इसे शादी के बाद दूसरा रिश्ता बनाने की व्यवस्था बताया जाता है तो कहीं इसे विधवा या परित्यक्त महिलाओं के पुनर्विवाह से जोड़कर देखा जाता है। वास्तव में इसके स्वरूप और नियम अलग-अलग समुदायों तथा क्षेत्रों में भिन्न हो सकते हैं।

    क्या है नाटा या नातरा प्रथा?

    ‘नाटा’ या ‘नातरा’ को सामान्य तौर पर ऐसी पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था के रूप में वर्णित किया जाता है, जिसमें किसी महिला या पुरुष के पहले वैवाहिक संबंध के समाप्त होने या अलगाव के बाद वह दूसरे साथी के साथ रहने का संबंध बना सकता है।

    कुछ समुदायों में यह व्यवस्था पारंपरिक सामाजिक सहमति के माध्यम से होती रही है। इसे आधुनिक अर्थों में सामान्य विवाह की तरह समझना ठीक नहीं होगा, क्योंकि इसके सामाजिक नियम और प्रक्रियाएं अलग रही हैं।

    इसका एक प्रमुख संदर्भ विधवा, परित्यक्त या अलग रह रही महिलाओं को दोबारा जीवनसाथी चुनने का सामाजिक रास्ता देना भी माना जाता है।

    क्या शादीशुदा महिला दूसरे पुरुष के साथ रह सकती है?

    नाटा प्रथा से जुड़ी चर्चाओं में यह बात सामने आती है कि किसी महिला के अपने मौजूदा पति से अलग होने के बाद वह दूसरे पुरुष के साथ रह सकती है। इसी तरह पुरुष भी नया संबंध बना सकता है।

    परंपरागत व्यवस्था में परिवार और समुदाय की सहमति की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती थी। कई जगहों पर पहले संबंध से जुड़े आर्थिक या पारिवारिक मामलों को भी सुलझाया जाता था।

    हालांकि, इसे यह कहकर समझाना कि “कोई भी शादीशुदा व्यक्ति जब चाहे किसी दूसरे व्यक्ति के साथ रहने लगता है”, इस प्रथा की पूरी तस्वीर नहीं बताता। इसके सामाजिक नियम क्षेत्र और समुदाय के अनुसार अलग हो सकते हैं।

    पैसे देने की बात क्यों आती है?

    नाटा प्रथा के बारे में उपलब्ध विवरणों में एक आर्थिक लेन-देन का उल्लेख मिलता है। कई जगह इसे ‘झगड़ा’ या पहले पति-पक्ष के साथ आर्थिक समझौते के रूप में बताया गया है।

    ऐतिहासिक रूप से ऐसी व्यवस्था में महिला के पहले संबंध से जुड़े अधिकारों और आर्थिक जिम्मेदारियों को लेकर परिवारों के बीच समझौता किया जाता था।

    इसे आधुनिक कानूनी अर्थों में “शादी खरीदना या रिश्ता खरीदना” समझना सही नहीं होगा। अलग-अलग इलाकों में इसके स्थानीय नियम अलग रहे हैं।

    क्या यह विधवा महिलाओं के लिए दोबारा घर बसाने का रास्ता था?

    नाटा प्रथा को समझने के लिए यह पहलू महत्वपूर्ण है।

    पारंपरिक ग्रामीण समाज में विधवा या पति द्वारा छोड़ी गई महिला के लिए दोबारा विवाह करना कई सामाजिक परिस्थितियों में आसान नहीं था। ऐसे माहौल में कुछ समुदायों ने दूसरी साझेदारी या साथ रहने की स्थानीय सामाजिक व्यवस्था विकसित की।

    इस नजरिए से नाटा को कुछ मामलों में विधवा या परित्यक्त महिला को दोबारा परिवार और सामाजिक जीवन से जोड़ने वाली व्यवस्था के रूप में देखा जाता है।

    हालांकि, यह भी जरूरी है कि हर मामले को महिला की स्वतंत्र पसंद और सहमति के नजरिए से देखा जाए।

    क्या नाटा में कोई रस्म नहीं होती?

    नाटा संबंध सामान्य हिंदू विवाह संस्कार से अलग पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था हो सकता है। कई विवरणों में बताया गया है कि इसमें विवाह जैसी लंबी धार्मिक रस्में आवश्यक नहीं होती थीं।

    लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि कोई सामाजिक प्रक्रिया ही नहीं होती थी। कई मामलों में परिवार, समुदाय या बुजुर्गों की सहमति और आर्थिक समझौते महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।

    बच्चों को ‘बकरा’ कहने का दावा कितना सही है?

    नाटा प्रथा से जुड़े लेखों में अक्सर दावा किया जाता है कि इस संबंध से जन्म लेने वाले बच्चों को ‘बकरा’ कहा जाता है।

    हालांकि, इस शब्द को पूरे राजस्थान या नाटा प्रथा से जुड़े हर समुदाय के लिए सामान्य नियम मानना सही नहीं होगा। स्थानीय बोलियों और समुदायों में रिश्तों तथा बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले शब्द अलग-अलग हो सकते हैं।

    इसलिए इस दावे को सार्वभौमिक तथ्य की तरह प्रस्तुत करने से बचना चाहिए।

    क्या नाटा प्रथा आज भी मौजूद है?

    नाटा को मुख्य रूप से राजस्थान और आसपास के कुछ समुदायों की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था के संदर्भ में जाना जाता है। आधुनिक समय में शिक्षा, शहरीकरण, कानूनी जागरूकता और सामाजिक बदलावों के कारण ऐसी पारंपरिक व्यवस्थाओं का स्वरूप काफी बदल चुका है।

    जहां कहीं ऐसी परंपराओं का उल्लेख मिलता है, वहां यह समझना जरूरी है कि परंपरागत सामाजिक व्यवस्था और वर्तमान भारतीय कानून एक ही चीज नहीं हैं।

    आज किसी भी रिश्ते में व्यक्ति की स्वतंत्र सहमति, विवाह की कानूनी स्थिति, तलाक, भरण-पोषण और बच्चों के अधिकार जैसे मुद्दे कानून के तहत आते हैं।

    क्या नाटा प्रथा कानूनी विवाह के बराबर है?

    नहीं, केवल किसी पारंपरिक सामाजिक प्रथा का अस्तित्व अपने आप उसे आधुनिक कानूनी विवाह के बराबर नहीं बना देता।

    भारत में विवाह और वैवाहिक संबंधों से जुड़े अधिकार अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों तथा लागू कानूनी प्रावधानों से निर्धारित होते हैं। इसलिए किसी पारंपरिक प्रथा के आधार पर यह मान लेना कि हर स्थिति में कानूनी विवाह, तलाक या उत्तराधिकार के सभी अधिकार अपने आप लागू हो जाएंगे, सही नहीं है।

    इस प्रथा को सिर्फ ‘अजीब परंपरा’ कहना क्यों अधूरा है?

    नाटा प्रथा को देखकर आज के नजरिए से कई लोगों को यह असामान्य लग सकती है। लेकिन किसी भी पुरानी सामाजिक व्यवस्था को समझने के लिए उस समय की सामाजिक परिस्थितियों को भी देखना जरूरी है।

    ग्रामीण समाज में विधवा महिलाओं, पति से अलग हो चुकी महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने अलग तरह की चुनौतियां थीं। कुछ समुदायों में विकसित स्थानीय व्यवस्थाएं उन्हीं परिस्थितियों का सामाजिक समाधान रही होंगी।

    वहीं दूसरी तरफ, किसी भी परंपरा का मूल्यांकन करते समय महिला की इच्छा, सहमति और सम्मान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    नाटा प्रथा हमें क्या बताती है?

    नाटा या नातरा जैसी परंपराएं बताती हैं कि भारत के अलग-अलग समुदायों ने विवाह, परिवार और रिश्तों को लेकर अलग-अलग सामाजिक व्यवस्थाएं विकसित की थीं।

    इसलिए इसे केवल “शादी के बाद दूसरा रिश्ता बनाने की प्रथा” कहना अधूरा होगा। इसके पीछे विधवा पुनर्विवाह, अलगाव, परिवार की सहमति, आर्थिक समझौते और स्थानीय सामाजिक नियम जैसे कई पहलू जुड़े हो सकते हैं।

    ध्यान देने वाली बात: नाटा प्रथा के नियम और स्वरूप अलग-अलग समुदायों में अलग हो सकते हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर चलने वाले हर दावे को पूरे राजस्थान पर लागू करना सही नहीं है। इसे राजस्थान के कुछ समुदायों से जुड़ी ऐतिहासिक/सामाजिक परंपरा के रूप में समझना अधिक उचित है।

    डिस्क्लेमर: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह बताना जरूरी है कि Satyareport.com किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

  • चना, ओट्स और दही… डायबिटीज में फायदेमंद हो सकते हैं ये 5 फाइबर रिच फूड्स, डायटीशियन ने बताई हेल्दी लिस्ट.

    चना, ओट्स और दही… डायबिटीज में फायदेमंद हो सकते हैं ये 5 फाइबर रिच फूड्स, डायटीशियन ने बताई हेल्दी लिस्ट.

    Diabetes Diet: डायबिटीज में सिर्फ दवाइयों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता। ब्लड शुगर को मैनेज करने के लिए खान-पान, शारीरिक गतिविधि और लाइफस्टाइल का भी अहम योगदान होता है। खासकर फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ भोजन के बाद ब्लड शुगर बढ़ने की रफ्तार को धीमा करने में मदद कर सकते हैं।

    चना, ओट्स, बीन्स, सब्जियां और बिना चीनी वाला दही जैसे विकल्प डाइट को ज्यादा पौष्टिक और संतुलित बना सकते हैं। हालांकि, डायबिटीज में हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है और किसी भी फूड का असर उसकी मात्रा, पूरी डाइट और दवाओं पर निर्भर कर सकता है।

    चना और चिकन का सलाद

    चना और चिकन का सलाद प्रोटीन और फाइबर का अच्छा कॉम्बिनेशन हो सकता है। उबले चने, पका हुआ चिकन, बिना चीनी वाला दही और हरी सब्जियों से इसे तैयार किया जा सकता है।

    चना फाइबर और प्लांट प्रोटीन देता है, जबकि चिकन प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। यह कॉम्बिनेशन लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है।

    डायबिटीज वाले लोग इसे लंच या हल्के डिनर के रूप में ले सकते हैं। सलाद में मीठी ड्रेसिंग या ज्यादा नमक डालने से बचना बेहतर है।

    भुना चना है अच्छा स्नैक विकल्प

    शाम की भूख लगने पर चिप्स, बिस्किट या दूसरे ज्यादा रिफाइंड स्नैक्स की जगह भुना चना लिया जा सकता है।

    इसमें फाइबर और प्लांट प्रोटीन पाया जाता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद कर सकता है। बाजार से भुना चना खरीदते समय कम नमक वाला विकल्प चुनें।

    ध्यान रखें कि हेल्दी फूड भी जरूरत से ज्यादा मात्रा में खाने पर अतिरिक्त कैलोरी दे सकता है, इसलिए पोर्शन का ध्यान रखना जरूरी है।

    चिकन, बीन्स और सब्जियों का सूप

    चिकन, बीन्स और अलग-अलग सब्जियों से तैयार सूप प्रोटीन और फाइबर से भरपूर भोजन बन सकता है।

    इसमें पालक, गाजर, बीन्स, लौकी या दूसरी कम स्टार्च वाली सब्जियां शामिल की जा सकती हैं। चिकन से प्रोटीन और बीन्स व सब्जियों से फाइबर मिलता है।

    डायबिटीज के लिए सूप बनाते समय मैदा, ज्यादा क्रीम, अतिरिक्त नमक और मीठी सॉस का इस्तेमाल सीमित रखना बेहतर है।

    नमकीन ओट्स बाउल भी है बढ़िया विकल्प

    ओट्स को सिर्फ मीठे नाश्ते के तौर पर खाने की जरूरत नहीं है। इन्हें सब्जियों, अंडे, दही या दूसरे प्रोटीन स्रोतों के साथ नमकीन बाउल के रूप में भी खाया जा सकता है।

    ओट्स में घुलनशील फाइबर, खासकर बीटा-ग्लूकान, पाया जाता है। फाइबर युक्त भोजन ब्लड शुगर मैनेजमेंट में मदद कर सकता है।

    डायबिटीज में ओट्स बनाते समय चीनी, फ्लेवर्ड सिरप या ज्यादा मीठी चीजें डालने के बजाय सब्जियों और प्रोटीन को प्राथमिकता देना बेहतर है।

    दही और फलों का पारफे

    बिना चीनी वाला गाढ़ा दही या ग्रीक-स्टाइल योगर्ट लेकर उसमें थोड़ी मात्रा में फल और मेवे मिलाकर पौष्टिक स्नैक तैयार किया जा सकता है।

    दही से प्रोटीन और कैल्शियम मिलता है, जबकि फल और मेवे फाइबर तथा दूसरे पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं। बेरीज उपलब्ध हों तो उन्हें शामिल किया जा सकता है।

    अगर केला इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसकी मात्रा का ध्यान रखें। साथ ही चीनी, शहद, मीठी सिरप और ज्यादा मीठी ग्रेनोला डालने से बचें, क्योंकि इनसे भोजन में कुल शुगर और कैलोरी बढ़ सकती है।

    डायबिटीज में फाइबर क्यों जरूरी है?

    फाइबर शरीर में पचने की प्रक्रिया को धीमा करता है और भोजन के बाद ब्लड शुगर के तेजी से बढ़ने को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है, जिससे ओवरईटिंग से बचने में सहायता मिल सकती है।

    हालांकि, अचानक बहुत ज्यादा फाइबर खाना शुरू करने से कुछ लोगों को गैस, पेट फूलना या दूसरी पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है। इसलिए फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाना और पर्याप्त पानी पीना बेहतर होता है।

    सिर्फ इन फूड्स से डायबिटीज कंट्रोल नहीं होती

    चना, ओट्स, दही या कोई अन्य ‘सुपरफूड’ डायबिटीज का इलाज नहीं है। ब्लड शुगर मैनेजमेंट के लिए पूरी डाइट, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन प्रबंधन, पर्याप्त नींद और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का पालन जरूरी हो सकता है।

    डायबिटीज की दवा लेने वाले लोगों को अपनी डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या रजिस्टर्ड डायटीशियन से सलाह लेनी चाहिए।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। डायबिटीज में फाइबर और कार्बोहाइड्रेट की जरूरत हर व्यक्ति के ब्लड शुगर, दवाओं, उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। किसी भी फूड को इलाज न समझें और दवा की खुराक में बदलाव खुद से न करें। डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या रजिस्टर्ड डायटीशियन की सलाह लें।

  • 5 साल तक खर्च चलाने के लिए पैसे, फिर भी नहीं मिली चैन की नींद! नौकरी गई तो 1049 रुपये घंटे में बर्तन धोने लगा शख्स.

    5 साल तक खर्च चलाने के लिए पैसे, फिर भी नहीं मिली चैन की नींद! नौकरी गई तो 1049 रुपये घंटे में बर्तन धोने लगा शख्स.

    4 महीने नहीं मिली नौकरी, कॉरपोरेट कर्मचारी ने शुरू किया बर्तन धोने का काम

    नौकरी जाना आमतौर पर लोगों के लिए आर्थिक चिंता की वजह बनता है। लेकिन क्या हो अगर किसी के पास कई साल तक बिना कमाए आराम से जिंदगी चलाने जितनी बचत हो और फिर भी बेरोजगारी उसे परेशान करने लगे?

    अमेरिका के एक 29 वर्षीय कॉरपोरेट कर्मचारी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। अप्रैल में उसकी नौकरी चली गई थी। कंपनी ने उसे करीब 9 महीने का सेवरेंस पैकेज दिया था और उसके पास इतनी बचत भी थी कि वह लगभग 5 साल तक अपने खर्च आसानी से चला सकता था। यानी तत्काल पैसों की कोई बड़ी परेशानी नहीं थी।

    इसके बावजूद नौकरी जाने के बाद उसकी जिंदगी अचानक बदल गई।

    200 से ज्यादा आवेदन, 15 से ज्यादा इंटरव्यू

    नौकरी छूटने के बाद उसने दोबारा काम तलाशने में कोई कमी नहीं छोड़ी। उसने 200 से अधिक कंपनियों में आवेदन किया और 15 से ज्यादा इंटरव्यू दिए। लेकिन लगातार कोशिशों के बावजूद उसे कोई पक्की नौकरी नहीं मिली।

    धीरे-धीरे इसका असर उसके आत्मविश्वास पर पड़ने लगा।

    उसने अपनी कहानी सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बताया कि बेरोजगारी के दौरान सबसे मुश्किल चीज पैसों की कमी नहीं थी, बल्कि जिंदगी से रूटीन का गायब हो जाना था। सुबह उठने के बाद कोई तय काम नहीं होता था और दिन कब शुरू हुआ और कब खत्म, इसका एहसास तक नहीं रहता था।

    उसे लगने लगा कि वह खुद को बेकार समझने लगा है।

    जिस नौकरी से खुश नहीं था, उसी को पाने की बेचैनी

    इस कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि जिस तरह की कॉरपोरेट नौकरी में वह पहले काम करता था, उससे वह पूरी तरह खुश नहीं था। इसके बावजूद बेरोजगार होने के बाद उसका ध्यान बार-बार उसी नौकरी की तरफ जाने लगा।

    उसे सिर्फ सैलरी की तलाश नहीं थी। वह उस रूटीन को वापस चाहता था जिसमें सुबह उठने के बाद पता हो कि दिन में क्या करना है, लोगों से बातचीत हो और कुछ घंटे किसी काम में व्यस्त रहने का मौका मिले।

    यानी नौकरी उसके लिए कमाई से ज्यादा एक उद्देश्य और पहचान का हिस्सा बन चुकी थी।

    फिर लिया ऐसा फैसला, जिसने सबको चौंका दिया

    जब लंबे समय तक नौकरी नहीं मिली तो उसने कुछ अलग करने का फैसला किया। उसने पार्ट-टाइम डिशवॉशर यानी बर्तन धोने का काम शुरू करने का फैसला किया।

    इस काम के लिए उसे करीब 11 डॉलर यानी लगभग 1049 रुपये प्रति घंटे मिलने वाले थे।

    हालांकि, उसने साफ किया कि वह यह काम पैसों की जरूरत के कारण नहीं कर रहा है। उसके पास पर्याप्त इमरजेंसी फंड मौजूद है। उसका असली मकसद अपने दिन को एक रूटीन देना और खुद को किसी उपयोगी काम में व्यस्त रखना है।

    उसके लिए कुछ घंटे बर्तन धोना भी उस खालीपन से बेहतर था, जिसमें पूरा दिन बिना किसी उद्देश्य के गुजर रहा था।

    क्या रिटायरमेंट के बाद भी इंसान खालीपन महसूस करता है?

    इस अनुभव ने उसे अपने भविष्य के बारे में सोचने पर भी मजबूर कर दिया।

    उसने सवाल उठाया कि अगर भविष्य में उसके पास इतना पैसा हो जाए कि काम करने की जरूरत ही न पड़े, तब क्या वह खुश रहेगा? अगर आर्थिक चिंता न हो, शौक पूरे करने के लिए पर्याप्त पैसे हों और फिर भी दिन का बड़ा हिस्सा खाली बचा रहे, तो क्या वह उसी तरह बेचैनी महसूस करेगा?

    उसने अपने पिता का उदाहरण भी दिया। उसके पिता करीब 30 साल तक कॉरपोरेट क्षेत्र में काम कर चुके हैं और कुछ समय बाद रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में उसे चिंता है कि रिटायरमेंट के बाद उनके सामने भी यही सवाल खड़ा हो सकता है कि रोजमर्रा की जिंदगी को किस तरह व्यवस्थित रखा जाए।

    लोगों ने कहा- इंसान सिर्फ अपनी नौकरी नहीं होता

    सोशल मीडिया पर उसकी कहानी सामने आने के बाद कई लोगों ने अपने अनुभव भी साझा किए।

    कुछ यूजर्स ने बताया कि नौकरी जाने के बाद उन्होंने छोटे-मोटे काम किए और इससे उन्हें मानसिक तौर पर काफी मदद मिली। एक व्यक्ति ने बताया कि अच्छी सैलरी वाली टेक कंपनी की नौकरी जाने के बाद वह लंबे समय तक बेरोजगार रहा और उसे ऐसे दौर से गुजरना पड़ा जब मुफ्त भोजन के लिए भी लाइन में खड़ा होना पड़ा।

    एक अन्य यूजर ने बताया कि उसने भी कॉरपोरेट नौकरी छोड़ने के बाद बिल्कुल अलग तरह के छोटे काम किए। उसके मुताबिक, काम की प्रतिष्ठा से ज्यादा जरूरी यह था कि वह खुद को सक्रिय रखे।

    एक बात कई लोगों की प्रतिक्रियाओं में बार-बार सामने आई—इंसान की पूरी पहचान उसकी नौकरी नहीं होती, लेकिन नौकरी से बनी दिनचर्या और उद्देश्य की भावना को अचानक खो देना बेहद मुश्किल हो सकता है।

    इस 29 वर्षीय शख्स का बर्तन धोने का फैसला भी इसी बात की ओर इशारा करता है। कभी-कभी अच्छी जिंदगी के लिए सिर्फ पैसा पर्याप्त नहीं होता। इंसान को अपने दिन में किसी काम, जिम्मेदारी और उद्देश्य का एहसास भी चाहिए होता है।

  • किडनी खराब होने से पहले शरीर में दिखते हैं ये 10 शुरुआती संकेत, जानिए समय पर पहचान क्यों है जरूरी?

    किडनी खराब होने से पहले शरीर में दिखते हैं ये 10 शुरुआती संकेत, जानिए समय पर पहचान क्यों है जरूरी?

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    किडनी हमारी बॉडी का एक अहम अंग है। इसका मुख्य काम खून को फिल्टर करना और शरीर से अतिरिक्त पानी, नमक व अपशिष्ट पदार्थों को यूरिन के जरिए बाहर निकालना है। किडनी शरीर में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आसान भाषा में कहें तो किडनी शरीर की एक प्राकृतिक फिल्टर मशीन की तरह काम करती है, जो खून से अपशिष्ट पदार्थों को अलग करके उन्हें पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करती है। बॉडी की ये फिल्टर मशीन  शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम, पोटैशियम का संतुलन बनाए रखने और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में भी अहम भूमिका निभाती है।

    हरिद्वार में आदर्श आयुर्वेदिक फार्मेसी में आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर दीपक कुमार ने बताया किडनी की कार्यक्षमता में आ रही गिरावट को समय पर पहचानना बेहद जरूरी है। खराब डाइट, बिगड़ता लाइफस्टाइल, जरूरत से ज्यादा दवाओं का सेवन हमारी किडनी की सेहत को बिगाड़ रहा है। किडनी की बीमारी को मेडिकल साइंस में साइलेंट किलर माना जाता है क्योंकि किडनी की कार्यक्षमता 60-70% तक घटने के बाद ही इसमें होने वाली खराबी के लक्षण दिखते हैं।

    डॉक्टर ने बताया जब किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है, तो शरीर में कई तरह के बदलाव दिखाई दे सकते हैं। हालांकि इनमें से कई लक्षण दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम से जुड़े भी हो सकते हैं इसलिए समय पर जांच कराना जरूरी है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि किडनी में खराबी होने पर हमारी बॉडी में कौन-कौन से लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

    1. सुबह चेहरे और आंखों के आसपास सूजन को न करें इग्नोर:
      सुबह उठने पर चेहरे, खासकर आंखों के आसपास सूजन या भारीपन दिखाई देना शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने का संकेत हो सकता है। किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर से अतिरिक्त सोडियम और पानी बाहर निकालने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, चेहरे की सूजन के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
    2. लगातार थकान महसूस होना
      : बिना ज्यादा मेहनत के लगातार थकान, कमजोरी या काम करने की क्षमता कम होना भी किडनी की बीमारी का संकेत हो सकते हैं। जब  किडनी ठीक तरह से काम नहीं करती तो शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा हो सकते हैं। इसके अलावा, किडनी की बीमारी से एनीमिया भी हो सकता है, जिससे कमजोरी और थकान बढ़ सकती है। हालांकि, थकान के पीछे एनीमिया, नींद की कमी और दूसरी कई वजहें भी हो सकती हैं लेकिन तो भी ऐसी परेशानी दिखने पर आप तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
    3. एनीमिया या त्वचा का रंग पीला पड़ना:
      हमारी किडनी एरिथ्रोपोइटिन (Erythropoietin) नामक हार्मोन बनाती है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। किडनी की गंभीर बीमारी में इस हार्मोन का उत्पादन कम हो सकता है और एनीमिया की समस्या हो सकती है। इससे कमजोरी, थकान और त्वचा का रंग फीका दिखाई दे सकता है। कमजोरी,थकान और आंखों में सूजन के साथ ही अगर स्किन की रंगत पीली पड़ने लगे तो आप तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
    4. पैरों और टखनों में सूजन:
      पैरों, टखनों या पैरों के आसपास बार-बार सूजन होना शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने से जुड़ा हो सकता है। किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर शरीर अतिरिक्त नमक और पानी को पर्याप्त मात्रा में बाहर नहीं निकाल पाता। अगर पैर दबाने पर कुछ देर के लिए गड्ढा बनता है और सूजन नियमित रूप से बनी रहती है। बॉडी में लम्बे समय तक होने वाली सूजन को इग्नोर नहीं करें तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
    5. भूख कम लगना और जी मिचलाना:
      किडनी की गंभीर समस्या में भूख कम लगना, खाने से अरुचि, मतली या उल्टी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसा शरीर में अपशिष्ट पदार्थों के जमा होने के कारण हो सकता है। भूख कम लगने के लक्षण पेट, लिवर, संक्रमण या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी हो सकते हैं। इसलिए इन्हें केवल किडनी की बीमारी से जोड़ना सही नहीं है। आप ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
    6. एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता में कमी:
      किडनी की गंभीर बीमारी में शरीर में अपशिष्ट पदार्थों का स्तर बढ़ने से कुछ लोगों को ध्यान लगाने, सोचने या चीजों को याद रखने में परेशानी हो सकती है। इसे यूरेमिक एन्सेफैलोपैथी जैसी गंभीर स्थिति से जोड़ा जा सकता है। लेकिन सामान्य भूलने की समस्या या कभी-कभार एकाग्रता कम होने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।
    7. पेशाब बार-बार आना या कम आना:
      किडनी की बीमारी में पेशाब के रंग और मात्रा में बदलाव हो सकता है। कुछ लोगों के पेशाब की मात्रा कम हो सकती है। पेशाब में बदलाव, बार-बार पेशाब आना या रात में अधिक पेशाब आना भी कुछ किडनी और यूरिनरी समस्याओं में देखा जा सकता है। हालांकि पेशाब का रंग गहरा होना या उसमें तेज गंध आना हमेशा किडनी की बीमारी का संकेत नहीं होता। पानी की कमी, कुछ खाद्य पदार्थ, दवाएं और संक्रमण भी इसकी वजह हो सकते हैं।
    8. सांस फूलना:
      किडनी की गंभीर बीमारी में शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने पर फेफड़ों पर भी असर पड़ सकता है और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। किडनी की बीमारी से जुड़ा एनीमिया भी सांस फूलने का कारण बन सकता है। हालांकि, सांस फूलने के पीछे हृदय, फेफड़ों और एनीमिया से जुड़ी दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। अचानक या गंभीर सांस फूलने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
    9. झागदार पेशाब आना:
      पेशाब में बार-बार और ज्यादा झाग दिखाई देना कभी-कभी प्रोटीन यूरिया (Proteinuria) का संकेत हो सकता है। जब किडनी के फिल्टर यानी ग्लोमेरुली को नुकसान पहुंचता है, तो प्रोटीन पेशाब के रास्ते बाहर निकल सकता है। हालांकि, हर बार झागदार पेशाब का मतलब किडनी की बीमारी नहीं होता। लगातार ऐसा होने पर यूरिन टेस्ट और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
    10. पेशाब पर कंट्रोल कम होना:
      पेशाब का अचानक लीक हो जाना या पेशाब करने से पहले निकल जाना यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस कहलाता है। हालांकि यह किडनी की बीमारी का सीधा और विशिष्ट लक्षण नहीं है। इसके पीछे मूत्राशय की समस्या, उम्र, प्रोस्टेट की समस्या, न्यूरोलॉजिकल बीमारी, संक्रमण या अन्य कारण हो सकते हैं। इसलिए पेशाब पर नियंत्रण कम होने की समस्या को किडनी की बीमारी मानकर खुद इलाज करने के बजाय चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

    किडनी की सेहत का ध्यान कैसे रखें

    शुरुआती दौर में सही लाइफस्टाइल, सही खान-पान और मेडिकल गाइडेंस से किडनी को आगे नुकसान पहुंचने से रोका जा सकता है। डॉक्टर दीपक ने बताया किडनी की सेहत के लिए सबसे जरूरी है कि पानी का सेवन अधिक किया जाएं,  ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को कंट्रोल रखा जाए, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि की जाए और संतुलित आहार का सेवन किया जाए। बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द की दवाओं पर कंट्रोल करना, धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचना किडनी की सेहत के लिए जरूरी है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता  के लिए प्रकाशित किया गया है। इसे किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह या निदान का विकल्प न मानें। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श लें।

  • उम्र के हिसाब से कितना होना चाहिए Vitamin B12? डॉक्टर से समझें सही लेवल, कमी के लक्षण और बचाव

    उम्र के हिसाब से कितना होना चाहिए Vitamin B12? डॉक्टर से समझें सही लेवल, कमी के लक्षण और बचाव

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    विटामिन B12 शरीर के लिए जरूरी विटामिन है। शरीर इसे पर्याप्त मात्रा में खुद नहीं बना पाता, इसलिए इसकी जरूरत पूरी करने के लिए B12 से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन जरूरी होता है। विटामिन बी 12 के कामों की बात करें तो ये नर्वस सिस्टम, रेड ब्लड सेल्स (RBC) के निर्माण और ब्रेन फंक्शन को सुचारू रखने के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है। मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल द्वारका में डायरेक्टर एंड यूनिट हेड इंटरनल मेडिसिन में डॉक्टर प्रभात रंजन सिन्हा ने बताया वयस्कों को रोजाना करीब 2.4 माइक्रोग्राम B12 की जरूरत होती है।

    इसकी कमी होने पर थकान, मानसिक धुंधलापन (Brain Fog),हाथ-पैर में सुन्नता या झुनझुनी, कमजोरी और एनीमिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक शरीर में B12 के स्तर की सही समय पर पहचान करना और उसके कारणों को समझना बेहद जरूरी है। आइए मेडिकल एक्सपर्ट्स से समझते हैं कि उम्र के हिसाब से शरीर में विटामिन B12 का कितना स्तर होना सामान्य माना जाता है, इसकी कमी के मुख्य कारण क्या हैं और इसे डाइट के जरिए कैसे संतुलित रखा जा सकता है।

    शरीर में Vitamin B12 का सामान्य स्तर कितना होना चाहिए?

    विटामिन B12 की जांच आमतौर पर ब्लड टेस्ट के जरिए की जाती है। हालांकि, B12 की सामान्य सीमा अलग-अलग लैब की टेस्टिंग विधि और रेफरेंस रेंज के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। इसलिए रिपोर्ट को समझते समय उस लैब द्वारा दी गई सामान्य सीमा को ध्यान में रखना चाहिए। आमतौर पर 200 pg/mL से कम B12 स्तर को कमी का संकेत माना जा सकता है, जबकि 200 से 300 pg/mL के बीच का स्तर बॉर्डर लाइन हो सकता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति के लक्षणों और अन्य जांच के आधार पर डॉक्टर आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में डॉक्टर methylmalonic acid (MMA) और homocysteine जैसी जांचों को भी देखते हैं, खासकर जब B12 का स्तर बॉर्डर लाइन हो और कमी के लक्षण मौजूद हों।

    उम्र के हिसाब से Vitamin B12 की जरूरत

    शरीर में B12 का ब्लड लेवल और रोजाना B12 की जरूरत दो अलग-अलग चीजें हैं। इसलिए उम्र के अनुसार B12 की दैनिक आवश्यकता को इस तरह समझा जा सकता है: आयु/स्थितिरोजाना Vitamin B12 की जरूरत0–6 महीने के शिशु0.4 माइक्रोग्राम7–12 महीने0.5 माइक्रोग्राम1–3 वर्ष0.9 माइक्रोग्राम4–8 वर्ष1.2 माइक्रोग्राम9–13 वर्ष1.8 माइक्रोग्राम14 वर्ष और उससे अधिक2.4 माइक्रोग्रामगर्भावस्था2.6 माइक्रोग्रामस्तनपान कराने वाली महिलाएं2.8 माइक्रोग्रामउम्रमात्रा 0 से 12 महीने के शिशु में200-800 pg/mL1 से 17 वर्ष के बच्चे में300-900 pg/mL18 और उससे अधिक वर्ष के लोगों में200-900 pg/mL

    किसी व्यक्ति के शरीर में B12 का स्तर जानने के लिए ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट देखी जाती है, जबकि शरीर को रोज कितनी मात्रा चाहिए, यह उम्र और शारीरिक अवस्था पर निर्भर करता है।

    Vitamin B12 की कमी क्यों हो सकती है?

    B12 की कमी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। मांस, मछली, अंडे और दूध जैसे B12 के स्रोतों का कम सेवन करने वाले लोगों में इसका जोखिम बढ़ सकता है। वहीं कुछ लोगों में पर्याप्त B12 लेने के बावजूद शरीर इसे ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता।उम्र बढ़ने के साथ भी B12 के अवशोषण में समस्या हो सकती है। इसके अलावा पेट या आंतों से जुड़ी कुछ स्थितियां, गैस्ट्रिक सर्जरी और कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल भी B12 की कमी का कारण बन सकता है।

    Vitamin B12 कम होने पर कौन से लक्षण दिखाई दे सकते हैं?

    • B12 लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर एनीमिया हो सकता है, जिसके कारण व्यक्ति को जल्दी थकान, कमजोरी और एनर्जी  की कमी महसूस हो सकती है।
    • B12 की कमी से होने से आंखों में हल्का पीलापन दिखाई दे सकता है।
    • B12 की लंबे समय तक कमी रहने पर हाथ-पैर में झनझनाहट, सुन्नपन या संतुलन बिगड़ने जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं।
    • B12 की कमी होने पर कुछ लोगों को सिरदर्द, चक्कर या सांस फूलने जैसी शिकायत हो सकती है।
    • B12 की कमी वाले कुछ लोगों में भूख कम लगना, जीभ में दर्द या सूजन और अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं दिखाई हो सकती हैं।
    • गंभीर या लंबे समय तक रहने वाली B12 की कमी नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकती है।

    Vitamin B12 की कमी को नजरअंदाज न करें

    अगर लगातार थकान, कमजोरी, हाथ-पैर में झनझनाहट, सुन्नपन, चक्कर या एनीमिया जैसी समस्या बनी हुई है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर B12 की जांच कराना बेहतर है। बिना जांच के लंबे समय तक B12 सप्लीमेंट लेना भी उचित नहीं है, क्योंकि लक्षणों के पीछे कोई दूसरा कारण हो सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। Vitamin B12 का सामान्य स्तर लैब और जांच की विधि के अनुसार अलग हो सकता है। किसी भी सप्लीमेंट या उपचार को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।