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  • क्या रोज एक सेब खाना सेहत के लिए फायदेमंद है? जानें डॉक्टर से डाइट में शामिल करने का सही तरीका..?

    क्या रोज एक सेब खाना सेहत के लिए फायदेमंद है? जानें डॉक्टर से डाइट में शामिल करने का सही तरीका..?

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    एन एप्पल ए डे, कीप्स द डॉक्टर अवे” (An Apple a Day Keeps the Doctor Away) बचपन से ही हम सब यह कहावत सुनते आ रहे हैं। लेकिन क्या वाकई रोजाना एक सेब खाने से शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं? क्या सेब में फाइबर, विटामिन सी, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं? क्या एक सेब हमारे पाचन को दुरुस्त रख सकता है और दिल की सेहत में सुधार कर सकता है… इन सब सवालों का जवाब है हां, एक सेब सचमुच इन सब बीमारियों से हमारा बचाव कर सकता है।

    कार्डियोलॉजिस्ट एवं SAAOL Heart Center के संस्थापक डॉ. विमल छाजेड़ ने बताया एक सेब रोज खाकर आप अपने दिल को हेल्दी रख सकते हैं। सेब को पौष्टिक फलों में गिना जाता है और इसे संतुलित डाइट का हिस्सा माना जाता है। डॉ. विमल छाजेड़ के अनुसार, सेब में विटामिन C, फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो ओवरऑल हेल्थ के लिए उपयोगी हैं। सेब के पोषक तत्वों की मात्रा सेब की किस्म और आकार के अनुसार अलग हो सकती है। सेब को छिलके सहित खाने पर फाइबर और कुछ पौधों से मिलने वाले यौगिकों का सेवन अधिक हो सकता है, लेकिन फल को अच्छी तरह धोकर खाना जरूरी है। सेब के फायदे तभी मिलते हैं जब उसका सेवन सही तरीके से सही समय पर किया जाए। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि रोज एक सेब का सेवन करने से सेहत पर कैसा होता है असर।

    दिल की सेहत के लिए उपयोगी हो सकता है सेब

    सेब में मौजूद फाइबर और पौधों से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट दिल की सेहत में सुधार करने में मददगार साबित हो सकते हैं। डॉ. विमल छाजेड़ के मुताबिक सेब का सेवन हार्ट हेल्दी डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। रोजाना एक सेब का सेवन, हेल्दी लाइफस्टाइल और हेल्दी डाइट आपके दिल की सेहत में सुधार कर सकती है।

    पाचन को बेहतर रखता है सेब

    सेब में घुलनशील फाइबर पाया जाता है, जिसमें पेक्टिन भी शामिल है। फाइबर आंतों के स्वास्थ्य और नियमित मल त्याग को बनाए रखने में मदद करता है। पर्याप्त फाइबर लेने से कब्ज की समस्या को मैनेज करने में मदद मिल सकती है। पाचन को दुरुस्त करने के लिए साबुत सेब, जूस की तुलना में बेहतर विकल्प हो सकता है।

    वजन कंट्रोल करने में मददगार

    सेब में पानी और फाइबर दोनों होते हैं, जिसकी वजह से इसे खाने के बाद पेट कुछ समय तक भरा हुआ महसूस हो सकता है। ऐसे में हाई-कैलोरी स्नैक्स की जगह पूरा सेब लेना वजन को कंट्रोल रखने में मददगार साबित होता है।

    शरीर को हाइड्रेट रखने में मिलती है मदद

    सेब में पानी की मात्रा अच्छी होती है, इसलिए यह रोजाना होने वाले कुल फ्लूड इनटेक में योगदान दे सकता है। इसका सेवन रोज करने से बॉडी हाइड्रेट रहती है और बॉडी में पानी की कमी पूरी होती है।

    सेब को किस तरह खा सकते हैं?

    सेब को सीधे फल के रूप में खाना सबसे आसान तरीका है। इसके अलावा इसे फ्रूट सलाद, रायता, स्मूदी या अन्य व्यंजनों में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, ऐसे व्यंजनों में अगर ज्यादा चीनी, शहद, क्रीम या घी मिलाया जाए तो उनकी कुल कैलोरी काफी बढ़ सकती है। इसलिए सेब के पोषण लाभ पाने के लिए कम अतिरिक्त चीनी वाले विकल्प बेहतर हैं।

    सेब का जूस या पूरा फल, क्या बेहतर?

    आमतौर पर पूरा सेब जूस की तुलना में बेहतर विकल्प है क्योंकि इसमें फाइबर बना रहता है। जूस में फल का फाइबर कम हो सकता है और इसे आसानी से अधिक मात्रा में पी लिया जाता है। पैकेज्ड या मीठे सेब के जूस में अतिरिक्त चीनी भी हो सकती है। इसलिए रोजाना फल खाने की बात हो तो साबुत सेब को प्राथमिकता देना बेहतर है।

    डायबिटीज में भी करें सेब का सेवन

    डायबिटीज वाले लोग भी आमतौर पर संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में पूरा सेब खा सकते हैं। इसमें मौजूद फाइबर ब्लड शुगर के तेजी से बढ़ने को कुछ हद तक धीमा करने में मदद कर सकता है। लेकिन सेब को चीनी, शहद या मीठे सिरप के साथ लेने से बचना चाहिए और कुल कार्बोहाइड्रेट सेवन का ध्यान रखना चाहिए।

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य शैक्षणिक जानकारी और डॉक्टरी सलाह पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या विशेष डाइट चार्ट को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या डायटीशियन से व्यक्तिगत परामर्श अवश्य लें।

  • न मसाज, न स्पा! लोगों की खुजली मिटाकर मालामाल हुआ बंदा, हर महीने 14 लाख कमाई..

    न मसाज, न स्पा! लोगों की खुजली मिटाकर मालामाल हुआ बंदा, हर महीने 14 लाख कमाई..

    OMG! न मसाज, न स्पा! लोगों की खुजली मिटाकर मालामाल हुआ बंदा, हर महीने 14 लाख कमाई

    चीन के शेनझेन में एक उद्यमी ने पीठ और शरीर खुजाने की सर्विस को बिजनेस बना दिया है. 300 युआन की एक घंटे की सर्विस से उसके दो स्टोर हर महीने करीब 14 लाख रुपये कमा रहे हैं.

    पीठ में खुजली हो और हाथ वहां तक न पहुंचे, तो आमतौर पर हम किसी करीबी से इसे खुजाने के लिए कहते हैं. लेकिन चीन के एक शख्स ने इसी रोजमर्रा की जरूरत को एक अनोखे बिजनेस आइडिया में बदल दिया है. अब लोग पैसे देकर अपनी खुजली किसी दूसरे से खुजवा रहे हैं और इस अजीबोगरीब सर्विस से हर महीने लाखों रुपये की कमाई हो रही है.

    चीन के शेनझेन शहर में 32 साल के झांग शियाओचियाओ ने इस खास तरह की सर्विस शुरू की है. उनकी कंपनी ‘सुमा’ के नाम से दो आउटलेट चला रही है, जहां ग्राहक आराम से बेड पर लेटते हैं और ट्रेनर कर्मचारी शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर हल्के हाथों से खुजाते हैं. ग्राहक खुद भी बता सकते हैं कि उन्हें किस जगह ज्यादा ध्यान चाहिए. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, एक घंटे की इस सर्विस के लिए करीब 300 युआन यानी लगभग 4,200 रुपये लिए जाते हैं. इसके लिए कर्मचारियों को खास तरीके से तैयार किए गए नुकीले नेल्स दिए जाते हैं, जिनकी मदद से वे धीरे-धीरे खुजाने का काम करते हैं.

    अब क्या है इनका टारगेट?

    इस सर्विस को सिर्फ खुजली मिटाने तक सीमित नहीं रखा गया है. इसे तनाव कम करने और रिलैक्स महसूस कराने वाले अनुभव के तौर पर पेश किया जा रहा है. कुछ ग्राहकों का कहना है कि इससे उन्हें आराम मिलता है और नींद आने में भी मदद हो सकती है. वहीं, शरीर के कुछ संवेदनशील हिस्सों पर खुजाने के दौरान कई ग्राहक हंसने भी लगते हैं, जिससे पूरा एक्सपीरियंस थोड़ा मजेदार हो जाता है.

    झांग के मुताबिक, इस बिजनेस को शुरू करना सुनने में जितना आसान लगता है, असल में उतना था नहीं. चीन में इस तरह की सर्विस का कोई तैयार मॉडल मौजूद नहीं था. इसलिए उन्होंने खुद शरीर के अलग-अलग हिस्सों और खुजाने की तकनीकों पर रिसर्च की. इसके बाद ऐसी तकनीक तैयार की गई जिसे कर्मचारियों को सिखाया जा सके और हर ग्राहक को एक जैसा अनुभव दिया जा सके. झांग को इस आइडिया का ख्याल पिछले साल सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक छोटे से वीडियो से आया. वीडियो में एक महिला अपने पति की पीठ खुजा रही थी. वीडियो पर आए कमेंट्स ने झांग का ध्यान खींचा, क्योंकि कई लोगों ने लिखा था कि वे किसी को पैसे देकर अपनी पीठ खुजवाना पसंद करेंगे.

    यहीं से झांग ने सोचना शुरू किया कि क्या इस छोटी सी जरूरत को बाकायदा एक बिजनेस में बदला जा सकता है. इस आइडिया के पीछे उनके बचपन की एक याद भी थी. झांग बताते हैं कि जब वह छोटे थे, तो उनके पिता उनकी पीठ खुजाया करते थे. उन्हें इससे काफी सुकून मिलता था और कई बार उन्हें नींद भी आ जाती थी. झांग ने मई की शुरुआत में शेनझेन के बाओआन जिले में पहला आउटलेट खोला. करीब एक महीने बाद फुतियान जिले में दूसरा स्टोर भी शुरू कर दिया गया. उनका दावा है कि दोनों आउटलेट अब अपनी लागत निकालने के बाद मुनाफा कमा रहे हैं और दोनों स्टोर्स से हर महीने करीब 100,000 युआन यानी लगभग 14 लाख रुपये की कमाई हो रही है.

    इस सर्विस को पुरुष और महिलाएं दोनों पसंद कर रहे हैं, हालांकि फिलहाल पुरुष ग्राहकों की संख्या ज्यादा है. झांग के अनुसार, करीब 70 फीसदी ग्राहक पुरुष हैं और 30 फीसदी महिलाएं. अब झांग की नजर बिजनेस को एक्सपेंड करने को लेकर है. उनका टारगेट है आने वाले समय में पूरे चीन में ऐसे 100 स्टोर खोलना है यानी जो काम लोग आमतौर पर घर पर किसी करीबी से करवाते हैं, उसे झांग ने बाकायदा एक पेड सर्विस बना दिया है.

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  • ये है गजब देसी जुगाड़… क्रेन बुलाई और दो मंजिला छत पर चढ़ा दी Scorpio, वजह जान आपको भी आ जाएगी हंसी..

    ये है गजब देसी जुगाड़… क्रेन बुलाई और दो मंजिला छत पर चढ़ा दी Scorpio, वजह जान आपको भी आ जाएगी हंसी..

    ये है गजब देसी जुगाड़... क्रेन बुलाई और दो मंजिला छत पर चढ़ा दी Scorpio, वजह जान आपको भी आ जाएगी हंसी

    Ajab Gajab Jugad: बिहार के गोपालगंज में इजरायल में नौकरी करने वाले शख्स ने अपनी नई स्कोर्पियो क्रेन से छत पर खड़ी करवाई. इसके पीछे की वजह काफी हैरान कर देने वाली है.

    बिहार के गोपालगंज जिले से सोशल मीडिया पर एक ऐसा बेहद अनोखा और हैरान कर देने वाला वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर कोई अपनी उंगलियां दबाने को मजबूर है. यहां एक मकान मालिक ने अपनी नई-नवेली Mahindra Scorpio Classic को चोरी होने से बचाने के लिए किसी गैरेज या पार्किंग का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि उसे सीधे क्रेन से उठवाकर अपने दो मंजिला घर की छत पर खड़ा करवा दिया.

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह अनूठी घटना गोपालगंज जिले के मांझा थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ‘मीरा टोला’ गांव की बताई जा रही है. यहाँ के निवासी मनोज यादव इजरायल में नौकरी करते हैं और घर पर परिवार में केवल पति-पत्नी ही रहते हैं.

    मनोज ने हाल ही में नई महिंद्रा स्कोर्पियो क्लासिक खरीदी थी. विदेश जाने के बाद गाड़ी की देखरेख और उसे चलाने के लिए उन्होंने एक ड्राइवर रखा था. हालांकि, कुछ समय बाद जब ड्राइवर को भी काम के सिलसिले में विदेश जाना पड़ा, तो परिवार के सामने कार की सुरक्षा को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई.

    क्रेन से उठाकर दो मंजिल ऊपर पार्क की गई SUV

    गाड़ी की सुरक्षा और चोरी होने के डर से मनोज यादव के परिवार ने एक अनोखा तरीका खोज निकाला. उन्होंने एक भारी-भरकम क्रेन बुलाई और बेहद सावधानी के साथ पूरी स्कोर्पियो को हवा में उठवाकर अपने दो मंजिला मकान की छत पर भिजवा दिया. वायरल हो रहे वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि कैसे क्रेन भारी गाड़ी को उठाकर धीरे-धीरे छत की ओर ले जाती है और सुरक्षित तरीके से उसे छत पर लैंड करा देती है.

    जैसे ही ‘छत पर पार्क स्कोर्पियो’ का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, यह तुरंत वायरल हो गया. लोग इसे देखकर तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं. जहां कुछ लोग इसे ‘देसी जुगाड़’ और गाड़ी की सुरक्षा का गजब का तरीका बता रहे हैं, वहीं कई लोग दो मंजिला मकान की छत की मजबूती और भार क्षमता (Load Capacity) को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं. हालांकि, छत की भार क्षमता को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन गोपालगंज का यह वीडियो पूरे इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है.

  • रातभर तांबे के गिलास में रखा पानी पीने से सेहत पर क्या असर पड़ता है? जानें आयुर्वेद और मेडिकल साइंस का नज़रिया..

    रातभर तांबे के गिलास में रखा पानी पीने से सेहत पर क्या असर पड़ता है? जानें आयुर्वेद और मेडिकल साइंस का नज़रिया..

    रातभर तांबे के गिलास में रखा पानी पीने से सेहत पर क्या असर पड़ता है? जानें आयुर्वेद और मेडिकल साइंस का नज़रिया

    सदियों से भारतीय रसोइयों और आयुर्वेद में धातु के बर्तनों में खाना पकाने और पानी पीने को सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता रहा है। लोग पीतल के बाद, तांबे के बर्तन (Copper Vessel) में रखा पानी पीने पर भी जोर दे रहे हैं। कई लोगों के दिन की शुरुआत रातभर तांबे के गिलास में रखे पानी को पीने से होती है। माना जाता है कि यह पानी शरीर के त्रिदोषों यानी वात, पित्त, कफ को संतुलित करने, पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है। लेकिन क्या रातभर तांबे के बर्तन में पानी रखना हर किसी के लिए सुरक्षित है?

    द गैस्ट्रो लिवर हॉस्पिटल, स्वरूप नगर, कानपुर में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, डॉ. वी.के. मिश्रा के मुताबिक तांबे के बर्तन में पानी पीने की परंपरा भारतीय घरों में लंबे समय से चली आ रही है। पहले घरों में तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल पानी रखने और खाना पकाने के लिए भी किया जाता था। आयुर्वेद में भी तांबे के बर्तन में पानी रखने और पीने का जिक्र किया गया है। आधुनिक समय में भी तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। एक्सपर्ट के मुताबिक तांबा (Copper) एक धातु है और शरीर के लिए जरूरी ट्रेस मिनरल्स में शामिल है। जब पानी इसमें 8 से 10 घंटे तक रहता है तो इसमें तांबे के कुछ गुण आ सकते हैं। एक्सपर्ट से जानते हैं कि रातभर तांबे के गिलास में पानी रखकर पीने से शरीर पर क्या असर पड़ता है, इसके सही नियम क्या हैं, किसे इसका सेवन करने से बचना चाहिए और कौन-सी गलतियां आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती हैं।

    तांबे के बर्तन में पानी रखकर पीने से सेहत पर कैसा होता है असर?

    डॉ. वी.के. मिश्रा के अनुसार, तांबे के बर्तन में पानी पीने की परंपरा भारत में लंबे समय से चली आ रही है। डॉक्टर वीके मिश्रा के मुताबिक अगर पानी को करीब 8 घंटे तक तांबे के बर्तन में रखा जाए, तो उसमें तांबे के एंटीमाइक्रोबियल गुण आ सकते हैं, जो कुछ बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने में मदद कर सकते हैं। तांबे को शरीर के लिए जरूरी ट्रेस मिनरल माना जाता है, जो इम्यून सिस्टम, आयरन मेटाबॉलिज्म, नर्वस सिस्टम और कई अन्य शारीरिक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है।

    डॉक्टर के मुताबिक, तांबे के बर्तन में रखा पानी पाचन और कब्ज में भी मदद कर सकता है तथा इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होने की बात कही जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि तांबा हृदय, थायराइड और मस्तिष्क के सामान्य कामकाज के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है और आयरन के उपयोग में भी भूमिका निभाता है। हालांकि, शरीर को तांबे की बहुत कम मात्रा की जरूरत होती है और इसकी अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है। अत्यधिक तांबा लेने से मतली, उल्टी और लिवर से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के तांबा सप्लीमेंट नहीं लेना चाहिए। उनके अनुसार, अगर कोई व्यक्ति तांबे के बर्तन का पानी पीना चाहता है, तो पानी को लगभग 8 घंटे तक बर्तन में रखकर सीमित मात्रा में सेवन किया जा सकता है।

    आयुर्वेद के मुताबिक तांबे के बर्तन का पानी पीने का सेहत पर असर

    तांबे के लोटे में रखा पानी किसे पीना चाहिए?

    तांबे के लोटे में रखा पानी पीना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं माना जाना चाहिए। जिन लोगों के शरीर में तांबे (Copper) की कमी है, उनके लिए तांबे के बर्तन में रखा पानी उपयोगी हो सकता है। वहीं, अगर कोई व्यक्ति स्वस्थ है और उसे किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या नहीं है, तो उसके लिए सामान्य सादा पानी ही पर्याप्त बताया गया है।

    शरीर के लिए क्यों जरूरी है तांबा?

    तांबा शरीर के लिए जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों (Trace Mineral) में से एक है। यह शरीर में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। शरीर में तांबे के अलावा आयरन, जिंक और अन्य कई खनिज तत्व भी मौजूद होते हैं, जो हमें भोजन के जरिए मिलते हैं। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट Rajiv Dixit ने एक वीडियो में बताया तांबा का पानी हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। जिन लोगों के बाल तेजी से झड़ते हैं या टूटते हैं, उनमें तांबे की कमी हो सकती है और ऐसे लोगों को तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से फायदा हो सकता है। हालांकि मेडिकल साइंस के मुताबिक बाल झड़ने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे पोषण संबंधी कमी, हार्मोनल बदलाव, तनाव, थायरॉइड से जुड़ी समस्या, आनुवंशिक कारण या स्कैल्प की बीमारी। इसलिए केवल बाल झड़ने को तांबे की कमी का संकेत मानना उचित नहीं है।

    आंखों की रोशनी और तांबे का क्या संबंध है?

    वीडियो में बताया गया है कि आंखों की रोशनी कम होने पर शरीर में तांबे की मात्रा कम हो सकती है और ऐसे लोगों के लिए तांबे के बर्तन में रखा पानी फायदेमंद हो सकता है।

    क्या तांबे के बर्तन का पानी रोज पीना चाहिए?

    राजीव दीक्षित ने तांबे के बर्तन में रखा पानी लगातार पीने के बजाय बीच-बीच में अंतर रखने की बात कही गई है। इसमें तीन महीने तक पानी पीने और फिर एक महीने का ब्रेक लेने की सलाह दी गई है।

    तांबे की अधिक मात्रा भी नुकसानदायक हो सकती है

    आयुर्वेद के मुताबिक तांबा शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए यह मानना सही नहीं है कि तांबे के बर्तन में रखा पानी जितना अधिक पिया जाए, उतना ही स्वास्थ्य के लिए अच्छा होगा। तांबे की कमी का संदेह होने पर डॉक्टर से सलाह लेकर उचित जांच कराना बेहतर है। तांबे के बर्तन में पानी रखना भारतीय परंपरा का हिस्सा रहा है, लेकिन इससे बाल झड़ना, आंखों की रोशनी कम होना या अन्य बीमारियां ठीक हो जाती हैं ऐसे दावों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

    डिस्क्लेमर: तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना एक पारंपरिक प्रचलन है, लेकिन इसके सभी बताए गए स्वास्थ्य लाभों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। तांबे की अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है। तांबे की कमी या किसी स्वास्थ्य समस्या में इसका सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।

  • मौत के बाद की दुनिया! क्या वाकई सच हैं स्वर्ग और नरक? इस मां की कहानी उड़ा देगी होश,,?

    मौत के बाद की दुनिया! क्या वाकई सच हैं स्वर्ग और नरक? इस मां की कहानी उड़ा देगी होश,,?

    मौत के बाद की दुनिया! क्या वाकई सच हैं स्वर्ग और नरक? इस मां की कहानी उड़ा देगी होश

    जानिए अमेरिका की कैट डंकल की हैरान कर देने वाली कहानी, जिन्होंने बेटे की मौत के बाद भगवान से नफरत की, लेकिन मौत के मुंह से लौटकर स्वर्ग-नरक का अनुभव किया और करोड़पति बन गईं.

    जिंदगी में कभी-कभी ऐसे झटके लगते हैं जो इंसान को अंदर तक हिलाकर रख देते हैं. अमेरिका के कंसास सिटी की रहने वाली कैट डंकल (Kat Dunkle) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. गरीबी और बेघर होने का दर्द झेल चुकीं कैट आज एक कामयाब करोड़पति हैं और उनके इस बदलाव के पीछे की कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है.

    जब सात साल के बेटे को खो दिया

    नीड टू नो यूके की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1967 में कैट की जिंदगी में ऐसा भूचाल आया जिससे सब कुछ बिखर गया. एक भयानक कार हादसे में उनके सात साल के बेटे मार्क की मौत हो गई. इस सदमे ने उन्हें तोड़ दिया. इसके बाद उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा. पिता का निधन हो गया, वे दिवालिया हो गईं और नौबत यहां तक आ गई कि उन्हें सड़क पर बेघर होकर दिन गुजारने पड़े. इस सबके चलते उनका भगवान से भरोसा उठ चुका था और वह ईश्वर से नफरत करने लगी थीं.

    ऑपरेशन टेबल पर मौत को छूकर लौटीं

    कैट की जिंदगी में असली टर्निंग पॉइंट तब आया जब एक बार फिर वह एक गंभीर कार दुर्घटना का शिकार हो गईं. उनके शरीर के अंदर ब्लीडिंग शुरू हो गई और हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा. ज्यादा खून बहने की वजह से वह बेहोश हो गईं और मौत के बेहद करीब पहुंच गईं. उन्होंने महसूस किया कि वह किसी काली सुरंग से होते हुए अंतरिक्ष और समय की यात्रा पर निकल पड़ी हैं. उन्होंने अपनी सर्जरी के दौरान परिवार वालों को रोते और दुआ मांगते हुए भी देखा.

    स्वर्ग और नरक का रहस्यमयी अनुभव

    कैट का कहना है कि इस दौरान उन्होंने शांति की एक ऐसी दुनिया यानी स्वर्ग देखी जहां वह हमेशा रहना चाहती थीं. लेकिन इसके ठीक बाद उन्हें नरक के दर्शन भी हुए, जहां उन्होंने चीखती हुई आत्माओं से भरा एक जलता हुआ गड्ढा देखा. इस खौफनाक अनुभव से डरकर उन्होंने फौरन भगवान से माफी मांगी और उन पर अपना विश्वास जताया. तभी उन्हें एक आवाज सुनाई दी जिसने कहा कि उन्हें लोगों को ईश्वर के करीब लाना है और इसके साथ ही वह वापस अपने होश में लौट आईं.

    अर्श से फर्श तक का सफर

    अस्पताल से ठीक होने के बाद कैट का पूरा नजरिया बदल चुका था. उन्हें एक सपना आया जिसने उन्हें बिजनेस शुरू करने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने एक कंसल्टिंग एजेंसी शुरू की, जो चल पड़ी. आज 83 साल की उम्र में कैट करोड़पति हैं. वह दुनिया को यह संदेश देती हैं कि मौत अंत नहीं है, बल्कि यह एक नया पड़ाव है जहां इंसान को अपने कर्मों के हिसाब से रास्ता मिलता है.

  • जलेबी-रबड़ी खाने के बाद 33 साल के युवक को हुआ ‘अस्थाई पैरालिसिस’, डॉक्टरों ने बताई वजह, आप भी बरतें सावधानी,,

    जलेबी-रबड़ी खाने के बाद 33 साल के युवक को हुआ ‘अस्थाई पैरालिसिस’, डॉक्टरों ने बताई वजह, आप भी बरतें सावधानी,,

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    जलेबी और रबड़ी को देखकर अक्सर लोगों की लार टपकने लगती है। मीठा खाने के शौकीनों का ये फूड कॉम्बिनेशन खास पसंद में शामिल है। मीठा खाने का ये शौक एक शख्स को इतना भारी पड़ा कि उनकी बॉडी में अस्थाई लकवा हो गया। मामला है हैदराबाद के 33 साल के रवि (बदला हुआ नाम) का जिन्हें जलेबी और रबड़ी खाने की मामूली सी क्रेविंग सेहत पर बेहद भारी पड़ी। रवि ने बताया जब भी वो इस मीठे कॉम्बिनेशन का सेवन करते, उनके हाथों और पैरों में अचानक कमजोरी महसूस होने लगती। पहली बार ऐसा एक शादी समारोह में हुआ, तब रवि ने इसे फूड पॉइजनिंग  और शादी की थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया। लेकिन जब घर की बनी जलेबी और रबड़ी खाने के बाद भी वही समस्या दोबारा रिपीट हुई तो रवि परेशान हो गए। परेशानी का इलाज कराने डॉक्टर के पास गए तो एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी का पता चला। आइए डॉक्टर से जानते हैं रवि को इस मीठे फूड कॉम्बिनेशन के सेवन से क्यों परेशानी होती है?

    रवि को कौन सी परेशानी है?

    रवि ने हैदराबाद के एक अस्पताल में डॉक्टरों से सलाह ली तो पता चला कि उन्हें हाइपोकॅलेमिक पीरियोडिक पैरालिसिस (Hypokalemic Periodic Paralysis ) नामक एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है। इस स्थिति में ब्लड में पोटैशियम का स्तर अचानक गिर जाता है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी या अस्थायी लकवा के दौरे पड़ते हैं। उनकी इस बीमारी का जिक्र एक डॉक्टर ने सोशल मीडिया पोस्ट में किया। डॉक्टर ने कहा ऐसा भोजन के बाद इंसुलिन के अचानक बढ़ने के कारण होता है, जिसके परिणामस्वरूप कोशिकाओं में पोटैशियम का अवशोषण बढ़ जाता है, जिससे सीरम पोटैशियम का स्तर कम हो जाता है। इस स्थिति में मांसपेशियों में कमजोरी या अस्थायी लकवा (पैरालिसिस) जैसे दौरे पड़ सकते हैं।

    क्या जलेबी और रबड़ी सच में पैरालिसिस ट्रिगर कर सकते हैं?

    आर्टेमिस हॉस्पिटल्स के न्यूरोलॉजी और एपिलेप्सी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. विवेक बरुन के अनुसार यह मामला असामान्य है लेकिन चिकित्सकीय रूप से इसकी व्याख्या की जा सकती है। डॉ. बरुन कहते हैं कि Hypokalemic Periodic Paralysis (HPP) से पीड़ित लोगों के शरीर में पहले से ही खून में पोटैशियम का स्तर सामान्य बनाए रखने में समस्या होती है। जलेबी और रबड़ी में चीनी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इन्हें खाने के बाद शरीर ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए बड़ी मात्रा में इंसुलिन रिलीज करता है।

    यह इंसुलिन पोटैशियम को बहुत तेजी से खून से कोशिकाओं के अंदर पहुंचा देता है। इससे खून में पोटैशियम का स्तर अचानक गिर जाता है। पोटैशियम मांसपेशियों के सही काम करने के लिए जरूरी होता है, इसलिए इसकी कमी से मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं या अस्थायी लकवा तक हो सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से HPP की प्रवृत्ति हो।

    कौन से इंडियन फूड इस समस्या को ट्रिगर कर सकते हैं?

    डॉ. बरुण ने कहा कि सिर्फ जलेबी और रबड़ी ही नहीं, बल्कि कई अन्य हाई-कार्ब फूड्स भी ऐसे अटैक को ट्रिगर कर सकते हैं। एक्सपर्ट ने बताया ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ इंसुलिन को तेजी से बढ़ाते हैं। HPP वाले लोगों में यह इंसुलिन पोटैशियम को सामान्य से ज्यादा तेजी से कोशिकाओं में भेज देता है, जिससे खून में पोटैशियम खतरनाक स्तर तक कम हो सकता है। उन्होंने कहा कि सफेद चावल, गुलाब जामुन और रसगुल्ले जैसी मिठाइयां, मीठे पेय पदार्थ, आलू, मैदे से बनी चीजें जैसे नान और भटूरे और बहुत ज्यादा मिठाई खाना भी ऐसे अटैक का कारण बन सकता है।डॉक्टर ने चेतावनी दी कि एक बार में बहुत ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाना, खासकर लंबे समय तक भूखे रहने के बाद, इस जोखिम को बढ़ा सकता है।

    शुरुआती लक्षण जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं

    डॉ. बरुण के अनुसार HPP के शुरुआती लक्षण छोटे और सामान्य लग सकते हैं, इसलिए लोग अक्सर उन्हें गंभीरता से नहीं लेते। एक्सपर्ट ने बताया कि शुरुआत में व्यक्ति को असामान्य थकान, पैरों में भारीपन, सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई, पकड़ कमजोर होना, मांसपेशियों में ऐंठन या हल्की जकड़न महसूस हो सकती है। एक्सपर्ट ने बताया कमजोरी आमतौर पर पैरों से शुरू होती है और धीरे-धीरे हाथों तक पहुंच सकती है। इसमें दर्द या सुन्नपन नहीं होता, जो इसे दूसरी बीमारियों से अलग बनाता है। ये लक्षण अक्सर भारी भोजन के बाद, एक्सरसाइज के बाद आराम करने पर, भावनात्मक तनाव या लंबे समय तक भूखे रहने के बाद दिखाई देते हैं। डॉ. बरुण ने कहा अगर इस पैटर्न को समय रहते पहचान लिया जाए और इलाज कराया जाए, तो गंभीर पैरालिसिस और अन्य जटिलताओं से बचा जा सकता है।

    अचानक होने वाले पैरालिसिस अटैक से कैसे बच

    पैरालिसिस यानी लकवा मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी या नसों को नुकसान होने के कारण शरीर के किसी हिस्से की मांसपेशियों के काम करना बंद करने या हिलाने-डुलाने में असमर्थ होने की स्थिति है। यह अस्थायी या स्थायी हो सकता है, जो शरीर के एक हिस्से या अंगों को प्रभावित कर सकता है। इसका मुख्य कारण स्ट्रोक, रीढ़ की हड्डी में चोट, या तंत्रिका संबंधी विकार हैं। डॉ. बरुण के अनुसार, HPP से पीड़ित लोगों को अपनी खाने की आदतों को नियमित रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि बहुत ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले बड़े भोजन की बजाय छोटे और संतुलित भोजन करें, जिनमें प्रोटीन, फाइबर और नियंत्रित मात्रा में कार्बोहाइड्रेट शामिल हों।

    एक्सपर्ट ने बताया हर दिन लगभग एक ही समय पर खाना खाना जरूरी है। ज्यादा चीनी और रिफाइंड कार्ब्स वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। डॉक्टर ने यह भी बताया कि शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। कुछ मामलों में डॉक्टर पोटैशियम सप्लीमेंट या दवाइयां भी दे सकते हैं। डॉक्टर ने बताया कि पोटैशियम से भरपूर चीजें या सप्लीमेंट केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने लंबे समय तक भूखे रहने, जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करने और तनाव को कंट्रोल करने की सलाह दी, क्योंकि ये सभी चीजें ऐसे अटैक को ट्रिगर कर सकती हैं।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी रिपोर्ट किए गए एक विशेष मामले और सामान्य डॉक्टरी परामर्श पर आधारित है। पैरालिसिस या किसी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के पीछे कई जटिल मेडिकल कारण हो सकते हैं। लेख में बताए गए खाद्य पदार्थों का प्रभाव हर व्यक्ति के शरीर और स्वास्थ्य स्थिति पर अलग हो सकता है। जनसत्ता इसकी पुष्टि नहीं करता कि ये खाद्य पदार्थ सभी के लिए हानिकारक हैं। किसी भी लक्षण के दिखने पर स्वयं उपचार करने के बजाय तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें।

  • जमीन खोदते ही निकला 8 लाख का खजाना! हाथी वाली छाप के 14 सोने के सिक्के मिले, मजदूरों ने दिखाई ईमानदारी..

    जमीन खोदते ही निकला 8 लाख का खजाना! हाथी वाली छाप के 14 सोने के सिक्के मिले, मजदूरों ने दिखाई ईमानदारी..

    कर्नाटक के बेलगावी जिले से ईमानदारी और इतिहास से जुड़ी एक दिलचस्प खबर सामने आई है। सवादत्ती तालुका के इंचाल गांव में निर्माण कार्य के दौरान कुछ मजदूरों को जमीन के अंदर से 14 सोने के पुराने सिक्के मिले। इन सिक्कों की अनुमानित कीमत करीब 8.27 लाख रुपये बताई जा रही है।

    इतनी बड़ी रकम और ऐतिहासिक महत्व वाली चीज हाथ लगने के बावजूद मजदूरों ने इसे अपने पास रखने के बजाय तुरंत प्रशासन को सूचना दी और सभी सिक्के अधिकारियों को सौंप दिए। मजदूरों की इस ईमानदारी की स्थानीय प्रशासन ने भी सराहना की है।

    काम करते वक्त जमीन से निकला सोने का खजाना

    मामला सवादत्ती तालुका के इंचाल गांव का है। बताया गया कि कुछ निर्माण मजदूर BCM हॉस्टल के पास काम कर रहे थे।

    काम के दौरान अचानक उन्हें जमीन के भीतर कुछ धातु जैसी वस्तुएं दिखाई दीं। जांच करने पर पता चला कि वहां पुराने सोने के सिक्के दबे हुए थे।

    मजदूरों ने जब सिक्कों की संख्या देखी तो उन्होंने मामले की जानकारी स्थानीय अधिकारियों को देने का फैसला किया।

    14 सिक्कों का वजन 54.8 ग्राम

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जमीन से मिले कुल 14 सोने के सिक्कों का वजन करीब 54.8 ग्राम है।

    मौजूदा बाजार मूल्य के आधार पर इनकी अनुमानित कीमत करीब 8.27 लाख रुपये बताई गई है। हालांकि, इन सिक्कों का वास्तविक ऐतिहासिक और पुरातात्विक मूल्य अलग से निर्धारित किया जाएगा।

    क्योंकि पुराने सिक्कों की कीमत सिर्फ उनमें मौजूद सोने के आधार पर तय नहीं होती। उनका दौर, शासक, दुर्लभता और ऐतिहासिक महत्व भी बेहद महत्वपूर्ण होता है।

    सिक्कों पर बनी है हाथी की आकृति

    इन सिक्कों को खास बनाने वाली एक और बात सामने आई है। बताया गया कि सिक्कों पर हाथी की आकृति बनी हुई है।

    हाथी का चिह्न देखकर इतिहास से जुड़े जानकारों की दिलचस्पी इस खोज में बढ़ गई है। शुरुआती अनुमान में इन्हें दक्षिण भारत के पुराने राजवंशों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि तलकाड़ के गंगा राजवंश के राजचिह्न के रूप में भी हाथी का इस्तेमाल होता था।

    हालांकि, केवल हाथी की आकृति के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि ये सिक्के गंगा राजवंश के ही हैं।

    10वीं से 15वीं सदी के होने का अनुमान

    प्रारंभिक तौर पर इन सिक्कों को 10वीं से 15वीं शताब्दी के बीच का होने की संभावना जताई जा रही है।

    लेकिन इनकी सही उम्र, किस शासक ने इन्हें जारी किया था और ये किस राजवंश से संबंधित हैं, इसका पता विशेषज्ञ जांच के बाद ही चलेगा।

    पुरातत्व विभाग द्वारा सिक्कों की बनावट, धातु, आकृतियों, लिपि और अन्य विशेषताओं का अध्ययन किया जा सकता है। इसके बाद ही इनके इतिहास को लेकर कोई ठोस निष्कर्ष सामने आएगा।

    मजदूरों ने नहीं दिखाया लालच

    इस पूरी घटना में सबसे ज्यादा चर्चा मजदूरों की ईमानदारी की हो रही है।

    लाखों रुपये मूल्य के सोने के सिक्के मिलने के बाद भी उन्होंने इन्हें अपने पास नहीं रखा। उन्होंने पंचायत विकास अधिकारी और तालुका पंचायत के कर्मचारियों की मौजूदगी में सिक्कों को सवादत्ती के तहसीलदार मल्लिकार्जुन हेगन्नवर को सौंप दिया।

    इसके बाद प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए सभी सिक्कों को सुरक्षित रूप से सरकारी कोषागार में जमा करा दिया।

    प्रशासन ने की मजदूरों की तारीफ

    सवादत्ती तालुका प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने मजदूरों की ईमानदारी की सराहना की।

    अक्सर जमीन के अंदर से कीमती वस्तु मिलने पर लोग उसे छिपाने या अपने पास रखने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन इन मजदूरों ने सीधे अधिकारियों को इसकी जानकारी देकर मिसाल पेश की।

    उनकी इस पहल की वजह से सिक्के सुरक्षित सरकारी संरक्षण में पहुंच गए और अब उनकी ऐतिहासिक पहचान की जांच की जा सकेगी।

    क्या जमीन के नीचे और भी खजाना हो सकता है?

    14 पुराने सोने के सिक्के मिलने के बाद स्वाभाविक रूप से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या उस स्थान पर कभी कोई बड़ा खजाना या पुराने समय की कोई अन्य वस्तु दबाई गई थी।

    हालांकि, अभी ऐसी किसी अतिरिक्त वस्तु की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए केवल इन सिक्कों के आधार पर जमीन के नीचे और खजाना होने का दावा करना जल्दबाजी होगी।

    अगर पुरातत्व विशेषज्ञ आगे उस स्थान की जांच करते हैं तो इस खोज से जुड़े इतिहास के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।

    सोने से ज्यादा कीमती है इन सिक्कों का इतिहास

    इन 14 सिक्कों की बाजार कीमत भले ही लाखों रुपये बताई जा रही हो, लेकिन अगर ये वास्तव में सदियों पुराने ऐतिहासिक सिक्के साबित होते हैं तो इनका महत्व सिर्फ सोने की कीमत तक सीमित नहीं रहेगा।

    ऐसे सिक्के किसी दौर की अर्थव्यवस्था, शासन व्यवस्था, कला और संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये सिक्के किस राजा या राजवंश के थे और इन्हें जमीन के अंदर किसने छिपाया था?

    इन सवालों का जवाब पुरातात्विक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी और प्रशासन से जुड़े विवरणों पर आधारित है। सिक्कों की सही उम्र, राजवंश और ऐतिहासिक पहचान की आधिकारिक पुष्टि विशेषज्ञ या पुरातत्व विभाग की जांच के बाद ही मानी जानी चाहिए। Satyareport.com किसी भी प्रारंभिक अनुमान को अंतिम ऐतिहासिक तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।

  • 400 साल पुरानी बावड़ी में नहाते ही दूर हो जाते हैं रोग? रहस्यमयी कुएं का इतिहास जानकर रह जाएंगे हैरान..

    400 साल पुरानी बावड़ी में नहाते ही दूर हो जाते हैं रोग? रहस्यमयी कुएं का इतिहास जानकर रह जाएंगे हैरान..

    भारत में ऐसी कई प्राचीन जल संरचनाएं हैं, जिनका इतिहास सिर्फ पानी जमा करने तक सीमित नहीं है। इनके साथ धार्मिक आस्था, लोककथाएं और सदियों पुरानी परंपराएं भी जुड़ी हुई हैं। तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में स्थित करीब 400 साल पुरानी पुष्करिणी भी ऐसी ही ऐतिहासिक धरोहर है।

    सदाशिवपेट के राघवेंद्रनगर इलाके में स्थित यह प्राचीन सीढ़ीदार जल संरचना आज भी पानी से भरी रहती है। स्थानीय लोग इसे बेहद पवित्र मानते हैं और ऐसी मान्यता है कि इसके पानी में स्नान करने या इसे ग्रहण करने से रोग दूर हो जाते हैं। हालांकि, रोग ठीक होने का यह दावा धार्मिक और स्थानीय मान्यता पर आधारित है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

    400 साल पुरानी है यह ऐतिहासिक पुष्करिणी

    बताया जाता है कि यह प्राचीन पुष्करिणी करीब 400 वर्ष पुरानी है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इतने लंबे समय बाद भी इसकी संरचना काफी हद तक सुरक्षित है और इसमें पानी मौजूद रहता है।

    सीढ़ियों से नीचे उतरकर जल तक पहुंचने वाली इस संरचना को देखकर उस दौर की जल-संरक्षण व्यवस्था और निर्माण तकनीक का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ एक पुरानी बावड़ी नहीं, बल्कि उनके क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।

    श्री जानकी रघुनाथस्वामी मंदिर से जुड़ा है संबंध

    इस पुष्करिणी का संबंध पास स्थित श्री जानकी रघुनाथस्वामी मंदिर से बताया जाता है।

    स्थानीय परंपरा के अनुसार, इस क्षेत्र में भगवान रघुनाथ स्वामी और जनकम्मा से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं सदियों से प्रचलित हैं। मंदिर और पुष्करिणी दोनों को इसी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    यही वजह है कि धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की मौजूदगी बढ़ जाती है।

    जनकम्मा और रघुनाथ महाराज की कहानी

    स्थानीय कथाओं के मुताबिक, सदाशिवपेट से कुछ किलोमीटर दूर एनीकेपल्ली गांव के आसपास जनकम्मा और रघुनाथ महाराज धार्मिक अनुष्ठान और यज्ञ किया करते थे।

    कहा जाता है कि कार्तिक बहुला एकादशी के दिन रघुनाथ स्वामी का निधन हुआ। इसके बाद उनकी पत्नी जनकम्मा ने भी चिता में प्रवेश किया।

    स्थानीय मान्यता में कहा जाता है कि जहां अंतिम संस्कार हुआ था, वहां बाद में राख के बजाय फूल मिले। इसी स्थान से जुड़ी धार्मिक आस्था के आधार पर आगे मंदिर का निर्माण कराया गया और दोनों की पूजा की जाने लगी।

    हालांकि, इस कथा के अलग-अलग स्थानीय संस्करण मिल सकते हैं और इसे ऐतिहासिक तथ्य के बजाय स्थानीय धार्मिक परंपरा के रूप में देखना उचित है।

    करोड़पति की बीमारी और सपने से जुड़ी कहानी

    इस पुष्करिणी के निर्माण से जुड़ी एक और दिलचस्प कहानी स्थानीय तौर पर सुनाई जाती है।

    कहा जाता है कि पुराने समय में एक बेहद धनवान व्यक्ति कुष्ठ रोग से पीड़ित था। वह इस इलाके में आया और एक अंजीर के पेड़ के नीचे आराम करने लगा।

    लोककथा के अनुसार, रात में भगवान रघुनाथ स्वामी ने उसे सपने में दर्शन दिए और पास के एक छोटे तालाब में स्नान करने की बात कही।

    मान्यता है कि उस व्यक्ति ने अगले दिन वहां स्नान किया और इसके बाद उसकी बीमारी ठीक हो गई।

    इससे प्रभावित होकर उसने भगवान के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए एक विशाल पुष्करिणी का निर्माण करवाया।

    यह रोग ठीक होने वाली कहानी लोकमान्यता है, इसे चिकित्सकीय प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    क्या सच में यहां स्नान करने से रोग दूर हो जाते हैं?

    यही इस जगह से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता है।

    स्थानीय श्रद्धालुओं का विश्वास है कि पुष्करिणी का पानी पवित्र है और इसमें स्नान करने से बीमारियां दूर होती हैं तथा जीवन में शुभता आती है।

    लेकिन किसी भी बीमारी को सिर्फ इस पानी में स्नान करने या उसे पीने से ठीक होने का दावा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है।

    अगर किसी व्यक्ति को कोई बीमारी है तो उसे उचित चिकित्सकीय जांच और डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए। धार्मिक आस्था अपनी जगह है, लेकिन गंभीर बीमारी में चिकित्सा उपचार को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।

    400वीं वर्षगांठ पर हुआ भव्य आयोजन

    हाल ही में इस ऐतिहासिक पुष्करिणी की 400वीं वर्षगांठ के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

    कार्यक्रम की शुरुआत पुष्करिणी तीर्थ में स्नान से हुई। इसके बाद महाभिषेकम और रुद्राभिषेकम जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए गए। श्रद्धालुओं के लिए अन्नप्रसादम का भी आयोजन किया गया।

    इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

    हर साल लगते हैं धार्मिक आयोजन

    स्थानीय जानकारी के मुताबिक, पुष्करिणी और मंदिर परिसर में सालभर अलग-अलग धार्मिक आयोजन होते रहते हैं।

    कार्तिक महीने में विशेष उत्सव, श्रावण में रुद्राभिषेकम और करीब 41 दिनों तक चलने वाला पारंपरिक मेला यहां की प्रमुख गतिविधियों में शामिल बताए जाते हैं।

    मेले के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जिनमें हैदराबाद के कलाकार हिस्सा लेते हैं।

    जल संरक्षण की मिसाल भी है यह बावड़ी

    इस पुष्करिणी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसका ऐतिहासिक जल-संरक्षण स्वरूप है।

    सदियों पहले जब आधुनिक पाइपलाइन और जलापूर्ति व्यवस्था मौजूद नहीं थी, तब ऐसी बावड़ियां और जल संरचनाएं लोगों के लिए पानी का महत्वपूर्ण स्रोत हुआ करती थीं।

    इस लिहाज से यह संरचना केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की पारंपरिक जल-संरक्षण तकनीक और वास्तुकला की विरासत का भी उदाहरण है।

    आस्था और इतिहास का अनोखा संगम

    सदाशिवपेट की यह 400 साल पुरानी पुष्करिणी आज भी इसलिए खास है क्योंकि यहां इतिहास, लोककथा, धार्मिक विश्वास और जल-संरक्षण—चारों पहलू एक साथ दिखाई देते हैं।

    इसके पानी को लेकर भले ही रोग दूर होने की मान्यता प्रचलित हो, लेकिन इस जगह की वास्तविक ऐतिहासिक अहमियत इसकी प्राचीन संरचना और उससे जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं में भी है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध जानकारी और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। पुष्करिणी के पानी से रोग ठीक होने या किसी बीमारी से मुक्ति मिलने के दावों का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। किसी बीमारी की स्थिति में योग्य चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है। Satyareport.com किसी भी अप्रमाणित धार्मिक या चिकित्सकीय दावे की पुष्टि नहीं करता।

  • चीन में अब बैंक, नाइटक्लब और अस्पतालों में भी हो रही शादी, जानिए क्यों?

    चीन में अब बैंक, नाइटक्लब और अस्पतालों में भी हो रही शादी, जानिए क्यों?

    OMG! चीन में अब बैंक, नाइटक्लब और अस्पतालों में भी हो रही शादी, जानिए क्यों?

    चीन में घटती शादियों और जन्मदर को संभालने के लिए सरकार ने बैंक, नाइटक्लब और अस्पतालों में मैरिज रजिस्ट्रेशन शुरू किया है. पढ़ें पूरी खबर.

    क्या आपने कभी सोचा है कि जहां लोग इलाज कराने या पार्टी करने जाते हैं, वहां शादी का सर्टिफिकेट भी मिल सकता है? सुनकर भले ही अजीब लगे, लेकिन पड़ोसी मुल्क चीन में इन दिनों ऐसा सचमुच हो रहा है. आखिर चीन की सरकार युवाओं को ऐसे अनोखे अंदाज में मैरिज सर्टिफिकेट क्यों बांट रही है? आइए समझते हैं इस पूरे मामले को.

    आखिर क्यों अजीबोगरीब कदम उठा रही है चीनी सरकार?

    दरअसल, चीन की घटती जन्मदर और तेजी से बूढ़ी होती आबादी ने सरकार की नींद उड़ा रखी है. युवाओं को शादी के बंधन में बांधने के लिए सरकार ने अब बैंक, एयरपोर्ट, मेट्रो स्टेशन, अस्पताल और यहां तक कि नाइटक्लबों में भी मैरिज रजिस्ट्रेशन काउंटर खोल दिए हैं.

    बैंक, एयरपोर्ट और नाइटक्लब में शादी का रजिस्ट्रेशन

    साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, शांडोंग प्रांत के एक मैटरनल और चाइल्ड अस्पताल में कपल एक ही छत के नीचे शादी का रजिस्ट्रेशन कराने के साथ-साथ अपना प्री-मैरिटल हेल्थ चेकअप भी करवा रहे हैं. शंघाई के एक नाइटक्लब में डीजे की धुन और पार्टी के बीच अधिकारी कपल को मैरिज सर्टिफिकेट बांट रहे हैं. वहीं, ग्वांगझोउ एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स के टेकऑफ और लैंडिंग के बीच तियानजिन के एक बैंक में बैंकिंग सर्विसेज के साथ-साथ शादी के कागजात भी तैयार हो रहे हैं.

    प्रक्रिया आसान, फिर भी घट रही हैं शादियां

    लेकिन मजेदार पहलू ये है कि सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी चीन के युवा पिघल नहीं रहे हैं. इस साल की पहली छमाही में ही वहां मैरिज रजिस्ट्रेशन में 7.5% की गिरावट दर्ज की गई है.

    सोशल मीडिया पर वहां के युवा साफ कह रहे हैं कि असली समस्या शादी के रजिस्ट्रेशन की जटिल प्रक्रिया नहीं है, बल्कि महंगाई, बेरोजगारी, महंगे घर और बच्चों की पढ़ाई का भारी-भरकम खर्च है. सरकार चाहे काउंटर कहीं भी खोल ले, जब तक युवाओं की जेब और आर्थिक असुरक्षा का हाल नहीं सुधरेगा, तब तक बात बनना मुश्किल है.

  • हाई ब्लड प्रेशर के शरीर में दिख सकते हैं ये 9 संकेत, जानें BP चेक करने का सही तरीका और कब लें डॉक्टर की सलाह..

    हाई ब्लड प्रेशर के शरीर में दिख सकते हैं ये 9 संकेत, जानें BP चेक करने का सही तरीका और कब लें डॉक्टर की सलाह..

    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, अनियमित खान-पान, कम शारीरिक गतिविधि और बढ़ते वजन जैसी वजहों से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या आम होती जा रही है। इसे अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि कई लोगों में BP बढ़ने के बावजूद कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।

    हालांकि, जब ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तब कुछ लोगों में सिरदर्द, चक्कर, धुंधला दिखाई देना या सीने में परेशानी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर हाई BP को पहचानने के बजाय नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    सह्याद्री ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के इंटरवेंशनल एवं कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अभिजीत पालशीकर के अनुसार, हाई BP को नियंत्रित रखने के लिए इसकी नियमित निगरानी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार जरूरी है।

    हाई BP बढ़ने पर कौन-कौन से लक्षण दिख सकते हैं?

    बहुत ज्यादा ब्लड प्रेशर होने की स्थिति में कुछ लोगों में निम्न समस्याएं दिखाई दे सकती हैं:

    • तेज सिरदर्द
    • चक्कर आना
    • धुंधला दिखाई देना
    • सीने में दर्द या दबाव महसूस होना
    • सांस लेने में परेशानी
    • दिल की धड़कन तेज या अनियमित महसूस होना
    • नाक से खून आना
    • अत्यधिक बेचैनी या घबराहट
    • असामान्य कमजोरी या थकान

    कुछ मामलों में मतली या उल्टी जैसी परेशानी भी हो सकती है। हालांकि, इन लक्षणों का मतलब हमेशा हाई BP होना नहीं है। इनकी दूसरी वजहें भी हो सकती हैं।

    सिर्फ लक्षणों का इंतजार करना सही नहीं

    हाई ब्लड प्रेशर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रह सकता है। व्यक्ति सामान्य महसूस कर सकता है, लेकिन BP लगातार बढ़ा हुआ हो सकता है।

    इसीलिए यह सोचना सही नहीं है कि अगर सिरदर्द या चक्कर नहीं हो रहे हैं तो BP सामान्य ही होगा। नियमित BP जांच से ही वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

    लंबे समय तक हाई BP रहने से क्या नुकसान हो सकता है?

    अगर ब्लड प्रेशर लंबे समय तक नियंत्रित नहीं रहता, तो शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर इसका असर पड़ सकता है। लगातार हाई BP हृदय और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ाता है और समय के साथ हृदय रोग, स्ट्रोक तथा किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।

    इसलिए BP को सिर्फ तब नियंत्रित करना जरूरी नहीं है जब कोई लक्षण दिखाई दें। नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार भी जरूरी है।

    BP की दवा शुरू होने के बाद खुद से बंद न करें

    अगर दवा लेने के बाद ब्लड प्रेशर सामान्य आने लगे तो इसका मतलब यह नहीं है कि समस्या हमेशा के लिए खत्म हो गई है। कई बार दवा के कारण BP नियंत्रित रहता है।

    इसलिए BP की रीडिंग सामान्य आने पर भी दवा अपने मन से बंद नहीं करनी चाहिए। कुछ मरीजों में वजन कम करने, खान-पान सुधारने, नियमित व्यायाम और अन्य लाइफस्टाइल बदलावों के बाद दवा की जरूरत या खुराक में बदलाव किया जा सकता है, लेकिन इसका फैसला डॉक्टर ही करते हैं।

    घर पर BP नापने का सही तरीका क्या है?

    घर पर ब्लड प्रेशर मापते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। गलत तरीके से BP मापने पर रीडिंग वास्तविक स्थिति से अलग आ सकती है।

    BP जांच से पहले आराम करें

    BP मापने से करीब 30 मिनट पहले चाय-कॉफी, धूम्रपान और एक्सरसाइज से बचें। जांच से पहले लगभग 5 मिनट शांत होकर बैठें।

    बैठने की सही स्थिति रखें

    पीठ को कुर्सी का सहारा दें और दोनों पैर जमीन पर सीधे रखें। पैरों को क्रॉस करके BP न मापें।

    हाथ को सही स्थिति में रखें

    जिस हाथ में BP कफ लगाया गया है, उसे टेबल पर इस तरह रखें कि हाथ लगभग हृदय के स्तर पर रहे।

    कफ सीधे बाजू पर लगाएं

    BP मशीन का कफ कपड़ों के ऊपर लगाने के बजाय नंगे बाजू पर, कोहनी के ऊपर सही तरीके से लगाएं। कफ का आकार भी बाजू के लिए उपयुक्त होना चाहिए।

    BP लेते समय शांत रहें

    रीडिंग लेते समय बात करने, हिलने-डुलने या किसी अन्य गतिविधि से बचें। इससे माप प्रभावित हो सकता है।

    दो रीडिंग लेना बेहतर

    एक बार BP मापने के बजाय लगभग 1 मिनट के अंतर से दो रीडिंग लें और जरूरत के अनुसार उनका औसत नोट करें।

    रोजाना लगभग एक ही समय पर जांच करें

    अगर डॉक्टर ने घर पर नियमित BP मॉनिटर करने की सलाह दी है, तो हर दिन लगभग एक ही समय पर रीडिंग लेना और उसे लिखकर रखना उपयोगी हो सकता है।

    BP के मरीज किन बातों का रखें ध्यान?

    हाई BP में केवल लक्षणों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। नियमित मॉनिटरिंग, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा को सही तरीके से लेना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना महत्वपूर्ण है।

    अगर घर पर BP की रीडिंग लगातार सामान्य सीमा से अधिक आ रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। वहीं अगर बहुत ज्यादा BP के साथ सीने में दर्द, सांस लेने में गंभीर परेशानी, अचानक कमजोरी, बोलने में दिक्कत, भ्रम या दृष्टि में अचानक बदलाव जैसे गंभीर लक्षण हों, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। हाई ब्लड प्रेशर की जांच, निदान और इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है। अपनी BP की दवा डॉक्टर से पूछे बिना बंद या उसकी खुराक में बदलाव न करें।