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  • Janmashtami 2026: 3 या 4 सितंबर, कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी? जानें रोहिणी नक्षत्र का समय और अयोध्या में कब होगा कृष्ण जन्मोत्सव..

    Janmashtami 2026: 3 या 4 सितंबर, कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी? जानें रोहिणी नक्षत्र का समय और अयोध्या में कब होगा कृष्ण जन्मोत्सव..

    Janmashtami 2026 Date: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी को लेकर इस बार तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है। कुछ लोग 3 सितंबर को जन्माष्टमी मनाने की बात कर रहे हैं, तो कुछ जगहों पर 4 सितंबर की तारीख बताई जा रही है। ऐसे में सवाल है कि आखिर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव किस दिन मनाना अधिक शुभ रहेगा?

    अयोध्या में इस वर्ष जन्माष्टमी को लेकर स्थिति स्पष्ट है। राम मंदिर सहित अयोध्या के प्रमुख मंदिरों में 4 सितंबर 2026 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। खास बात यह है कि इस बार जन्माष्टमी की तिथि और रोहिणी नक्षत्र को लेकर वैष्णव परंपरा में किसी बड़े मतभेद की बात सामने नहीं आई है।

    जन्माष्टमी के लिए रोहिणी नक्षत्र क्यों खास?

    धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। यही कारण है कि जन्माष्टमी के पर्व में अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र को भी विशेष महत्व दिया जाता है।

    भक्तों के लिए जन्माष्टमी केवल एक व्रत नहीं बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का उत्सव है। मंदिरों में आधी रात को भगवान के जन्म का विशेष पूजन किया जाता है। इसके बाद आरती, भजन और प्रसाद वितरण जैसे कार्यक्रम होते हैं।

    कब शुरू होगी अष्टमी तिथि?

    हनुमत संस्कृत महाविद्यालय के सेवानिवृत्त आचार्य हरफूल शास्त्री के अनुसार, इस वर्ष अष्टमी तिथि 3 सितंबर 2026, गुरुवार की रात करीब 1 बजकर 33 मिनट से शुरू होगी और 4 सितंबर 2026, शुक्रवार की रात करीब 11 बजकर 13 मिनट तक रहेगी।

    यानी 3 सितंबर की सुबह तक अष्टमी तिथि शुरू नहीं हुई होगी, जबकि 4 सितंबर को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के लिए जरूरी अष्टमी तिथि मध्यरात्रि के समय मौजूद रहेगी।

    इसी आधार पर 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाना अधिक श्रेयस्कर बताया जा रहा है।

    कब लगेगा रोहिणी नक्षत्र?

    जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र का भी विशेष महत्व है। दी गई पंचांग गणना के अनुसार, 3 सितंबर की रात 12 बजकर 46 मिनट पर कृतिका नक्षत्र समाप्त होगा और इसके बाद रोहिणी नक्षत्र शुरू होगा।

    रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर की रात करीब 11 बजकर 12 मिनट तक रहने की जानकारी दी गई है।

    इस तरह भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र की मौजूदगी भी बन रही है। यही वजह है कि अयोध्या में 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाने का निर्णय लिया गया है।

    4 सितंबर को ही क्यों मनाना उचित?

    जन्माष्टमी के लिए केवल तारीख देखना पर्याप्त नहीं माना जाता। अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के समय को विशेष महत्व दिया जाता है।

    इस बार अष्टमी तिथि 3 सितंबर की रात में शुरू होकर 4 सितंबर की रात तक रहेगी। वहीं रोहिणी नक्षत्र भी 4 सितंबर की रात तक रहने वाला है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में माना गया है।

    इसी वजह से 4 सितंबर 2026 की रात जन्माष्टमी मनाना अधिक उपयुक्त बताया जा रहा है।

    चंद्रमा कब वृष राशि में रहेगा?

    पंचांग गणना के अनुसार, 3 सितंबर की सुबह करीब 7 बजकर 49 मिनट पर चंद्रमा वृष राशि में प्रवेश करेगा और 5 सितंबर की पूर्वाह्न करीब 10 बजकर 22 मिनट तक इसी राशि में रहेगा।

    ज्योतिषीय मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़े समय में वृष राशि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष संबंध माना जाता है। इसलिए इस वर्ष जन्माष्टमी की गणना में इन दोनों का भी उल्लेख किया जा रहा है।

    जन्माष्टमी पर कब होगा मध्यरात्रि पूजन?

    भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय मध्यरात्रि माना जाता है। इस अवसर पर मंदिरों और घरों में रात के समय विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

    पंचांग गणना के अनुसार, इस वर्ष 4 सितंबर की रात करीब 11:50 बजे से 2:03 बजे तक मिथुन लग्न में पूजन का समय बताया गया है।

    इसी दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से जुड़े विशेष अनुष्ठान किए जा सकते हैं। हालांकि, पूजा का सटीक मुहूर्त स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

    अयोध्या में 4 सितंबर को मनेगी जन्माष्टमी

    अयोध्या में इस वर्ष जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। राम मंदिर समेत शहर के प्रमुख मंदिरों में 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने की तैयारी है।

    वैष्णव परंपरा में जन्माष्टमी को प्रमुख धार्मिक पर्व माना जाता है। रामनवमी, जानकी नवमी, जन्माष्टमी और हनुमान जयंती जैसे पर्वों का विशेष महत्व है। संत और साधक इन अवसरों पर उपवास, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

    राम मंदिर अयोध्या का प्रमुख धार्मिक केंद्र होने के कारण यहां जन्माष्टमी के आयोजन को लेकर व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    अयोध्या में शुरू हुई जन्मोत्सव की तैयारी

    सावन झूला महोत्सव के बाद भाद्रपद मास में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्योत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां की जा रही हैं।

    धार्मिक परंपरा से जुड़े संतों का मानना है कि भारत में अलग-अलग पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि लोकमंगल और सामूहिक उत्सव की परंपरा का हिस्सा भी हैं। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भी इसी भावना के साथ मनाया जाता है।

    निष्कर्ष

    इस वर्ष जन्माष्टमी की तारीख को लेकर 3 और 4 सितंबर के बीच जो असमंजस है, उसमें दी गई पंचांग गणना के अनुसार 4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी मनाना अधिक श्रेयस्कर बताया जा रहा है। इस दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग मध्यरात्रि के आसपास बन रहा है।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध पंचांग गणनाओं पर आधारित है। अलग-अलग स्थानों के पंचांग में तिथि, नक्षत्र और पूजा के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। पूजा-व्रत से संबंधित निर्णय लेने से पहले स्थानीय पंचांग या संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

  • ‘मेरी गाड़ी रोकी कैसे?’ गर्लफ्रेंड के सामने गार्ड ने टोका तो भड़का आशिक, लौटकर SUV से कुचल दिया; शहर छोड़ने से पहले पकड़ा गया.

    ‘मेरी गाड़ी रोकी कैसे?’ गर्लफ्रेंड के सामने गार्ड ने टोका तो भड़का आशिक, लौटकर SUV से कुचल दिया; शहर छोड़ने से पहले पकड़ा गया.

    इंदौर में एक छोटी सी कहासुनी ने ऐसा खौफनाक रूप ले लिया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। गर्लफ्रेंड के साथ SUV से पहुंचा एक युवक कॉलोनी के गेट पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड से भिड़ गया। गार्ड ने तेज रफ्तार गाड़ी को रोककर सवाल किया तो युवक भड़क उठा। पहले दोनों के बीच बहस हुई, फिर आरोपी ने गार्ड को थप्पड़ मार दिया।

    मामला यहीं खत्म हो जाता तो शायद एक परिवार उजड़ने से बच जाता। लेकिन कुछ देर बाद आरोपी दोबारा लौटा और इस बार उसके हाथ में हथियार नहीं, बल्कि तेज रफ्तार SUV थी।

    गेट पर गाड़ी रोकते ही शुरू हुआ विवाद

    घटना इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र की द एक्सोटिका रेजिडेंशियल टाउनशिप की बताई जा रही है। बुधवार रात सिक्योरिटी गार्ड धर्मेंद्र मालवीय ड्यूटी पर मौजूद थे। उनके साथ उनकी पत्नी ज्योति और परिवार के कुछ लोग भी गेट के पास थे।

    इसी दौरान अरण्डिया गांव का रहने वाला राजा उर्फ कमल कुमावत अपनी महिला मित्र सीजल उर्फ शालिनी के साथ SUV लेकर टाउनशिप पहुंचा। वह तेज रफ्तार में गाड़ी अंदर ले जाने की कोशिश कर रहा था।

    गार्ड धर्मेंद्र ने उसे रोकते हुए तेज गाड़ी चलाने पर आपत्ति जताई। बस इतनी सी बात पर राजा का पारा चढ़ गया। दोनों के बीच बहस होने लगी और मामला इतना बढ़ गया कि आरोपी ने गार्ड को थप्पड़ तक मार दिया।

    ‘मेरी गाड़ी क्यों रोकी?’… गुस्से में चला गया आरोपी

    विवाद बढ़ने पर टाउनशिप के मालिक को फोन किया गया। उन्होंने राजा को वहां से चले जाने के लिए कहा। इसके बाद आरोपी अपनी महिला साथी के साथ वहां से निकल गया।

    लेकिन बताया जा रहा है कि जाते वक्त उसके मन में गुस्सा और बदले की भावना थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि वह कुछ ही देर बाद वापस आएगा और इस बार उसका गुस्सा एक परिवार की जिंदगी तबाह कर देगा।

    कुछ देर बाद फिर लौटा और SUV से मचा दिया तांडव

    आरोप है कि राजा कुछ समय बाद दोबारा SUV लेकर टाउनशिप पहुंचा। इस बार उसने गाड़ी नहीं रोकी। उसने तेज रफ्तार SUV सीधे गेट की तरफ दौड़ा दी, जहां धर्मेंद्र और अन्य लोग मौजूद थे।

    गाड़ी की जोरदार टक्कर से धर्मेंद्र गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। उनकी पत्नी ज्योति और परिवार के अन्य लोग भी इसकी चपेट में आ गए।

    लेकिन आरोपी यहीं नहीं रुका।

    बताया जा रहा है कि उसने SUV को वापस मोड़ा और जमीन पर पड़े धर्मेंद्र के ऊपर से दोबारा गाड़ी चढ़ा दी। गंभीर रूप से घायल धर्मेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। इस हमले में उनके रिश्तेदार गोविंद का पैर भी टूट गया।

    घटना के बाद आरोपी अपनी महिला साथी के साथ मौके से फरार हो गया।

    शहर छोड़कर भागने की थी तैयारी

    घटना की सूचना मिलते ही लसूड़िया पुलिस सक्रिय हो गई। पुलिस ने हत्या समेत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की।

    जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि राजा और उसकी महिला साथी सीजल उर्फ शालिनी वारदात के बाद इंदौर छोड़कर भागने की तैयारी में हैं। पुलिस टीमों ने संभावित ठिकानों पर दबिश दी और दोनों को पकड़ लिया।

    पूछताछ के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

    एक साल से कर रहे थे गार्ड की नौकरी

    धर्मेंद्र मालवीय मूल रूप से देवास के रहने वाले थे और करीब एक साल से द एक्सोटिका टाउनशिप में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे थे। वह रोज की तरह उस रात भी अपनी ड्यूटी पर तैनात थे।

    किसी ने नहीं सोचा था कि गाड़ी की रफ्तार को लेकर एक युवक को रोकना उनकी जिंदगी का आखिरी फैसला साबित होगा।

    एक छोटी सी कहासुनी, कुछ मिनटों का गुस्सा और बदले की सनक ने धर्मेंद्र की जान ले ली। घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि आखिर मामूली विवाद कब और कैसे हिंसा में बदल जाता है और गुस्से में उठाया गया एक कदम कितने परिवारों की जिंदगी तबाह कर सकता है।

  • Har Chhath Vrat 2026: 1 या 2 सितंबर? जानें कब रखा जाएगा हलषष्ठी व्रत, 7 अनाज से क्यों होती है पूजा..

    Har Chhath Vrat 2026: 1 या 2 सितंबर? जानें कब रखा जाएगा हलषष्ठी व्रत, 7 अनाज से क्यों होती है पूजा..

    Hal Chhath 2026: हिंदू धर्म में हरछठ या हलषष्ठी का व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को बलराम जी का जन्म हुआ था। इसी कारण इस दिन बलराम जयंती के साथ हलषष्ठी का व्रत भी मनाया जाता है।

    कई जगहों पर इसे हरछठ, हलछठ, हल षष्ठी और ललही छठ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन महिलाएं संतान की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं।

    2026 में 1 या 2 सितंबर, कब है हलषष्ठी?

    पंचांग के अनुसार इस वर्ष भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 2 सितंबर 2026 को सुबह 6 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 3 सितंबर की सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर होगा।

    हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों की तिथि निर्धारित करने के लिए उदया तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में सूर्योदय के समय षष्ठी तिथि होने के कारण हलषष्ठी या हरछठ का व्रत 2 सितंबर 2026, बुधवार को रखा जाएगा।

    इस दिन जन्माष्टमी से दो दिन पहले होने वाला यह व्रत भगवान बलराम से जुड़ी धार्मिक परंपराओं के अनुसार मनाया जाएगा।

    संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है व्रत

    हरछठ का व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से रखती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से संतान पर भगवान बलराम और छठी माता की कृपा बनी रहती है।

    कुछ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि जिन दंपतियों को संतान प्राप्ति की इच्छा है, वे भी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस व्रत और पूजा में शामिल हो सकते हैं।

    हालांकि, संतान प्राप्ति से जुड़ी ऐसी मान्यताएं धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं।

    हल से जुड़ी चीजें क्यों नहीं खाई जातीं?

    हलषष्ठी व्रत में खान-पान को लेकर विशेष नियम बताए गए हैं। मान्यता के अनुसार इस दिन हल से जुती हुई जमीन में पैदा होने वाले अनाज और सब्जियों का सेवन नहीं किया जाता।

    कहा जाता है कि भगवान बलराम का प्रमुख अस्त्र हल था। इसलिए इस दिन हल से जुड़ी चीजों से दूरी रखने की परंपरा बनी।

    व्रत के दौरान तालाब या जलाशय के आसपास प्राकृतिक रूप से उगने वाली चीजों का सेवन करने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है। इनमें मखाना और सिंघाड़ा प्रमुख हैं।

    हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में हरछठ के व्रत के नियम अलग हो सकते हैं।

    पूजा में क्यों इस्तेमाल होते हैं सात अनाज?

    हरछठ की पूजा में सतअनाजा यानी सात प्रकार के अनाज का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के दौरान इन अनाजों को छठी माता को अर्पित करने की परंपरा है।

    क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार इनमें जौ, मक्का, धान, गेहूं, चना, मूंग और अरहर जैसी फसलें शामिल की जाती हैं। कुछ स्थानों पर सूची में स्थानीय उपलब्धता और परंपरा के अनुसार थोड़ा अंतर भी मिलता है।

    पूजा में सात अनाज रखना कृषि और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता से भी जोड़कर देखा जाता है।

    घर में बनाई जाती हैं छठी माता की आकृति

    हरछठ के दिन कई घरों में गोबर से छठी माता की आकृति बनाने की परंपरा है। इसके बाद विधि-विधान से पूजा की जाती है और सात प्रकार के अनाज अर्पित किए जाते हैं।

    महिलाएं व्रत रखकर छठी माता और भगवान बलराम का स्मरण करती हैं। पूजा के दौरान संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है।

    2 सितंबर को बनेंगे ये योग

    पंचांग के अनुसार, 2 सितंबर 2026 को दिन की शुरुआत से ध्रुव योग रहने की जानकारी दी गई है, जो रात करीब 9 बजकर 12 मिनट तक बताया गया है। इसके अलावा इस दिन व्याघात योग का भी उल्लेख किया गया है।

    धार्मिक मान्यताओं में शुभ योगों को पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    हरछठ व्रत में किन बातों का रखें ध्यान?

    हरछठ का व्रत रखने से पहले अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के नियमों को ध्यान में रखना चाहिए। खास तौर पर व्रत के दौरान क्या खाना है और क्या नहीं खाना है, इसमें अलग-अलग क्षेत्रों में अंतर हो सकता है।

    यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है या लंबे समय तक भोजन न करने की सलाह नहीं है, तो व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई धार्मिक और पंचांग संबंधी जानकारियां विभिन्न मान्यताओं और उपलब्ध पंचांग गणनाओं पर आधारित हैं। अलग-अलग स्थानों के पंचांग में तिथि या मुहूर्त में अंतर संभव है। व्रत और पूजा से जुड़े किसी भी निर्णय के लिए स्थानीय पंचांग या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

  • ‘अंकल’ बनकर किया फोन, नींद की गोलियां खिलाईं और फिर हथौड़े से कर दी हत्या… ब्यूटीशियन अनीता की ऐसी खौफनाक कहानी, घर के बाहर ही दफना दिए शव के टुकड़े..

    ‘अंकल’ बनकर किया फोन, नींद की गोलियां खिलाईं और फिर हथौड़े से कर दी हत्या… ब्यूटीशियन अनीता की ऐसी खौफनाक कहानी, घर के बाहर ही दफना दिए शव के टुकड़े..

    राजस्थान के जोधपुर में ब्यूटीशियन अनीता चौधरी की हत्या ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था। यह कोई अचानक हुआ अपराध नहीं था, बल्कि एक ऐसी साजिश थी जिसमें आरोपी ने पहले पहचान छिपाकर महिला को अपने जाल में फंसाया, फिर उसे बेहोश किया और हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की। मामले की जांच आगे बढ़ी तो इसमें लूट, प्रॉपर्टी विवाद और सुपारी जैसे कई गंभीर पहलू भी सामने आए।

    फोन पर खुद को बताया ‘अंकल’, फिर मिलने बुलाया

    जांच के मुताबिक, मुख्य आरोपी गुलामउद्दीन ने अनीता चौधरी से फोन पर संपर्क किया था। उसने खुद को उनका ‘अंकल’ बताया और बातचीत के जरिए उनका भरोसा जीतने की कोशिश की। बताया गया कि उसने अनीता को प्रॉपर्टी से जुड़े काम के बहाने जोधपुर के गंगाना इलाके में बुलाया था।

    अनीता को शायद अंदाजा भी नहीं था कि जिस शख्स से वह मिलने जा रही हैं, उसके मन में क्या चल रहा है। वह आरोपी के बताए स्थान पर पहुंचीं और यहीं से इस खौफनाक वारदात की शुरुआत हुई।

    शरबत में मिलाई नींद की गोलियां

    जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, 27 अक्टूबर 2024 की रात गुलामउद्दीन ने अनीता को शरबत दिया। आरोप है कि इसमें नींद की गोलियां मिलाई गई थीं। कुछ देर बाद अनीता गहरी नींद में चली गईं।

    इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर उनके गहने उतार लिए। अनीता के पास मौजूद मंगलसूत्र और अंगूठियां भी ले ली गईं। लेकिन मामला सिर्फ लूट तक सीमित नहीं रहा।

    अगली सुबह जब अनीता बेसुध थीं, तब आरोपी ने कथित तौर पर हथौड़े से हमला कर उनकी हत्या कर दी।

    हत्या के बाद भी नहीं रुका खौफनाक खेल

    अनीता की हत्या के बाद आरोपी ने शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। जांच के अनुसार, उसने शव के टुकड़े किए और उन्हें अपने घर के बाहर खोदे गए गड्ढे में दफना दिया।

    बताया जाता है कि गड्ढा खुदवाने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद एक मजदूर को पैसे देकर गड्ढा भरवाया गया। वारदात के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया।

    इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस को भी हैरान कर दिया, क्योंकि जिस घर के आसपास रोजमर्रा की गतिविधियां चल रही थीं, वहीं जमीन के नीचे हत्या का राज छिपा हुआ था।

    CCTV ने खोलना शुरू किया राज

    अनीता के पति मनमोहन चौधरी ने पत्नी के लापता होने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने इलाके के CCTV फुटेज खंगालने शुरू किए।

    जांच आगे बढ़ी तो गुलामउद्दीन पर शक गहराता गया। पुलिस उसके घर तक पहुंची और पूछताछ शुरू हुई। इसके बाद जांच टीम ने उसके घर के आसपास तलाशी ली।

    29 अक्टूबर की रात घर के बाहर से अनीता के शव के टुकड़े बरामद किए गए। इसके साथ ही वह रहस्य खुल गया, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।

    परिवार ने लूट की कहानी पर उठाए सवाल

    अनीता के परिवार ने शुरू से ही इस वारदात को महज लूट के लिए की गई हत्या मानने से इनकार किया। परिवार की ओर से प्रॉपर्टी विवाद और कथित सुपारी की आशंका भी जताई गई।

    परिजनों ने आरोप लगाया कि हत्या के पीछे करीब 10 लाख रुपये की सुपारी हो सकती है। प्रॉपर्टी कारोबारी तैयब अंसारी और अनीता की परिचित सुनीता उर्फ सुमन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए।

    मामला बढ़ने के बाद जांच में केंद्रीय जांच एजेंसी यानी CBI की भी एंट्री हुई। जांच में कॉल डिटेल्स, संपत्ति से जुड़े विवाद और आरोपियों के बीच कथित संपर्क जैसे पहलुओं को खंगाला गया।

    अब भी कई सवालों के जवाब तलाश रही जांच

    अनीता चौधरी हत्याकांड में पुलिस जांच से लेकर CBI जांच तक कई पहलू सामने आए हैं। हत्या की असली वजह क्या थी, क्या इसके पीछे केवल लूट थी या फिर किसी बड़े प्रॉपर्टी विवाद और कथित सुपारी का भी संबंध था—इन सवालों की जांच की गई।

    इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि किसी व्यक्ति पर भरोसा करने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी रखना कितना जरूरी है। एक सामान्य मुलाकात के बहाने शुरू हुई कहानी आखिरकार एक खौफनाक हत्याकांड में बदल गई और आरोपी ने सबूत मिटाने के लिए शव को घर के बाहर ही छिपाने की कोशिश की।

  • भगवान पर भरोसा रखिए और छोड़ दीजिए हर चीज को कंट्रोल करने की आदत, नीम करौली बाबा की सीख देगी सुकून..

    भगवान पर भरोसा रखिए और छोड़ दीजिए हर चीज को कंट्रोल करने की आदत, नीम करौली बाबा की सीख देगी सुकून..

    आज का सुविचार: इंसान की जिंदगी में चिंता की सबसे बड़ी वजह अक्सर परिस्थितियां नहीं, बल्कि उन्हें अपने हिसाब से चलाने की कोशिश होती है। पैसा, नौकरी, रिश्ते, परिवार और भविष्य को लेकर हम लगातार सोचते रहते हैं कि सब कुछ वैसा ही हो जैसा हमने तय किया है। लेकिन जिंदगी हमेशा हमारी योजना के मुताबिक नहीं चलती।

    यही वजह है कि कई बार बहुत कुछ हासिल करने के बाद भी मन बेचैन रहता है। नीम करौली बाबा यानी महाराजजी की शिक्षाओं में भी भगवान पर भरोसा रखने और जरूरत से ज्यादा आसक्ति से बचने पर जोर मिलता है। इस विचार का सीधा अर्थ है- अपना कर्म करते रहिए, लेकिन हर परिणाम को नियंत्रित करने की जिद छोड़ दीजिए।

    भगवान पर भरोसा रखें, लेकिन कर्म करना न छोड़ें

    भगवान पर विश्वास करने का मतलब यह नहीं है कि इंसान अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हट जाए। जीवन में मेहनत करना, सही फैसले लेना और अपने कर्तव्यों को पूरा करना जरूरी है।

    लेकिन मेहनत करने के बाद भी परिणाम हमेशा हमारे हाथ में नहीं होता। कई बार पूरी कोशिश के बावजूद काम मनमुताबिक नहीं होता और कभी-कभी बिना उम्मीद के रास्ते खुल जाते हैं।

    ऐसे में अगर व्यक्ति हर परिणाम को अपनी इच्छा के अनुसार बदलने की कोशिश करता रहे, तो उसके भीतर तनाव बढ़ता जाता है। इसके उलट, अगर वह अपना काम ईमानदारी से करके परिणाम को स्वीकार करना सीख जाए, तो मन का बोझ कम हो सकता है।

    कर्म आपके हाथ में है, लेकिन हर परिणाम पर आपका नियंत्रण नहीं। इस अंतर को समझ लेना ही मानसिक शांति की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।

    जरूरत और आसक्ति के बीच अंतर समझना जरूरी

    परिवार, पैसा, घर, नौकरी और रिश्ते हमारे जीवन का अहम हिस्सा हैं। इनकी जिम्मेदारियों को निभाना जरूरी है। समस्या तब शुरू होती है, जब किसी व्यक्ति या वस्तु के बिना खुश रहना असंभव लगने लगे।

    किसी से प्रेम करना और उसकी परवाह करना स्वाभाविक है। लेकिन अगर मन में लगातार यह डर बना रहे कि यह व्यक्ति दूर चला गया तो मैं खुश नहीं रह पाऊंगा, तो यह प्रेम धीरे-धीरे आसक्ति का रूप ले सकता है।

    इसी तरह पैसा भविष्य के लिए जरूरी है, लेकिन हर समय पैसे खोने का डर मन में बना रहे तो संपत्ति सुरक्षा देने के बजाय तनाव का कारण बन सकती है।

    इसलिए जीवन में चीजों की जरूरत और उनसे अत्यधिक जुड़ाव के बीच अंतर समझना जरूरी है।

    हर परिस्थिति को एक सीख की तरह देखें

    जिंदगी में हर दिन एक जैसा नहीं होता। कभी सफलता मिलती है और कभी असफलता का सामना करना पड़ता है। कभी रिश्ते मजबूत होते हैं तो कभी किसी अपने से दूरी बन जाती है।

    मुश्किल समय में अक्सर हमारा पहला सवाल होता है- “मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ?”

    लेकिन अगर इसी सवाल की जगह हम यह पूछना शुरू कर दें कि “मैं इस अनुभव से क्या सीख सकता हूं?”, तो परिस्थितियों को देखने का नजरिया बदल सकता है।

    असफलता हमें अपनी गलतियां समझा सकती है। मुश्किल दौर धैर्य सिखा सकता है। किसी रिश्ते का टूटना हमें अपनी भावनाओं को समझने का मौका दे सकता है। वहीं किसी चीज का हाथ से निकल जाना यह याद दिला सकता है कि जिंदगी में कुछ भी हमेशा के लिए स्थायी नहीं है।

    जो व्यक्ति हर अनुभव से सीखने की कोशिश करता है, वह मुश्किल परिस्थितियों से टूटने के बजाय धीरे-धीरे मजबूत हो सकता है।

    त्याग का मतलब सब कुछ छोड़ देना नहीं है

    आध्यात्मिक शिक्षाओं में जब आसक्ति छोड़ने की बात कही जाती है, तो उसका अर्थ यह नहीं कि इंसान अपना परिवार, नौकरी, घर या संपत्ति छोड़कर सब कुछ त्याग दे।

    असल बात मन की पकड़ को ढीला करने की है।

    आप परिवार से प्रेम कर सकते हैं, अपने करियर में आगे बढ़ने की कोशिश कर सकते हैं, पैसे बचा सकते हैं और भविष्य के लिए योजनाएं बना सकते हैं। लेकिन साथ ही यह स्वीकार करना भी जरूरी है कि परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहेंगी।

    आज जो आपके पास है, वह कल बदल सकता है। इसी सच्चाई को स्वीकार करने से व्यक्ति बदलाव के समय कम टूटता है।

    जिम्मेदारी निभाना जरूरी है, लेकिन हर चीज को हमेशा अपने पास रखने की जिद जरूरी नहीं।

    भविष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान पर ध्यान दें

    कई बार इंसान उस समस्या से ज्यादा परेशान होता है, जो अभी हुई ही नहीं है।

    अगर नौकरी चली गई तो क्या होगा? पैसा कम पड़ गया तो क्या होगा? रिश्ता टूट गया तो क्या होगा? भविष्य में सब ठीक रहेगा या नहीं?

    ऐसे सवाल लगातार मन में चलते रहें तो वर्तमान भी तनाव से भर जाता है। जबकि सच्चाई यह है कि भविष्य की हर परिस्थिति को पहले से नियंत्रित करना संभव नहीं है।

    इसलिए आज जो जिम्मेदारी सामने है, उस पर ध्यान देना ज्यादा बेहतर है। आने वाले समय के लिए योजना बनाएं, लेकिन हर संभावित घटना को लेकर डरते न रहें।

    पकड़ ढीली होगी तो मन हल्का लगेगा

    कई बार जिंदगी में शांति पाने के लिए कुछ नया हासिल करने की जरूरत नहीं होती। बल्कि उन चीजों को छोड़ना जरूरी होता है, जिन्हें हम जरूरत से ज्यादा कसकर पकड़े हुए हैं।

    दूसरों की राय, बीती हुई बातें, पुराने रिश्ते, असफलताएं या भविष्य को लेकर डर- इन सबको हमेशा अपने भीतर ढोते रहना मन को थका सकता है।

    नीम करौली बाबा से जुड़ी इस सीख का सार यही माना जा सकता है कि ईमानदारी से अपना कर्म करते रहें, भगवान पर विश्वास रखें और उन चीजों को स्वीकार करना सीखें जिन्हें आप बदल नहीं सकते।

    जब इंसान हर चीज को अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश छोड़ देता है, तो उसके भीतर धीरे-धीरे स्वीकार करने की क्षमता बढ़ती है। और कई बार यही स्वीकार्यता मन को वह सुकून देती है, जिसे हम पूरी जिंदगी बाहरी चीजों में तलाशते रहते हैं।

    आज की सीख:
    “मेहनत पूरी रखें, जिम्मेदारी निभाएं, लेकिन हर परिणाम को अपनी मुट्ठी में रखने की कोशिश न करें। जो आपके नियंत्रण में है, उसे बेहतर बनाइए और जो नियंत्रण से बाहर है, उसे भगवान पर छोड़ना सीखिए।”

  • Whales: Giants of the Ocean

    Whales: Giants of the Ocean

    Whales are among the largest and most remarkable animals on Earth. These marine mammals live in oceans around the world, from warm tropical waters to the cold seas surrounding the poles.

    Life Beneath the Surface

    Although whales spend their lives in water, they breathe air through blowholes located on top of their heads. They must regularly return to the surface to breathe before diving again in search of food or traveling through the ocean.

    Whales are warm-blooded, give birth to live young, and nurse their calves with milk. A thick layer of fat called blubber helps protect them from cold water and stores energy during long migrations.

    Two Main Groups

    Whales are generally divided into baleen whales and toothed whales. Baleen whales filter small animals from the water using flexible plates inside their mouths. This group includes blue whales, humpback whales, and gray whales.

    Toothed whales use teeth to catch fish, squid, and other prey. Many of them also use echolocation, producing sounds and listening for returning echoes to understand their surroundings. Sperm whales, belugas, and orcas belong to this group.

    The Blue Whale

    The blue whale is the largest known animal to have ever lived. An adult can grow longer than a city bus and weigh well over one hundred tonnes. Despite its enormous size, it feeds mainly on tiny crustaceans called krill.

    Communication and Migration

    Whales communicate using clicks, whistles, pulses, and complex songs. Some sounds can travel across great distances underwater. Humpback whales are especially famous for their long, patterned songs.

    Many species migrate thousands of kilometres each year. They often feed in cold, nutrient-rich waters before traveling to warmer regions where they mate and give birth.

    Protecting Whales

    Commercial hunting once caused severe declines in many whale populations. Today, whales also face threats from fishing gear, ship collisions, underwater noise, pollution, and changes to ocean ecosystems.

    Conservation programs, safer fishing practices, protected habitats, and international cooperation can help whale populations recover. Protecting whales also supports healthier oceans because these animals play an important role in marine food webs and nutrient cycles.

  • बंद मकान, किचन में नया प्लास्टर और फिर सामने आई खौफनाक सच्चाई; पुरी में बदबू से खुला मां की हत्या का राज​​​​​​

    बंद मकान, किचन में नया प्लास्टर और फिर सामने आई खौफनाक सच्चाई; पुरी में बदबू से खुला मां की हत्या का राज​​​​​​

    बंद मकान, किचन में नया प्लास्टर और फिर सामने आई खौफनाक सच्चाई; पुरी में बदबू से खुला मां की हत्या का राज - puri son kills mother hides body under kitchen slab

    पुरी में एक बेटे ने अपनी मां की हत्या कर शव को रसोईघर के स्लैब के नीचे छिपाकर प्लास्टर कर दिया। दुर्गंध आने पर पड़ोसियों को शक हुआ, जिसके बाद पुलिस ने शव बरामद किया; आरोपी बेटा फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

    पुरी शहर के कुंभाड़पड़ा थाना क्षेत्र में ‘दृश्यम’ फिल्म की कहानी जैसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है। आरोप है कि एक बेटे ने अपनी मां की हत्या करने के बाद शव को रसोईघर के स्लैब के नीचे छिपा दिया और उसके ऊपर प्लास्टर कर दिया। प्लास्टर वाली जगह से दुर्गंध आने पर पड़ोसियों को शक हुआ।

    पुलिस ने मौके पर पहुंचकर खुदाई कर शव बरामद किया। वारदात के बाद आरोपी बेटा मदन दलई (43) फरार है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए कई स्थानों पर छापेमारी कर रही है।

    किरायेदारों के आधार कार्ड नहीं

    पुलिस के अनुसार, मदन दलई और उसकी मां करीब दो महीने पहले कुंभाड़पड़ा थाना क्षेत्र में मस्जिद के पास एक गली में रविनारायण साहू के मकान में किराये पर रहने आए थे। इस मकान में आठ अन्य परिवार भी किराये पर रहते हैं।

    मकान मालिक ने किरायेदारों के आधार कार्ड नहीं लिए थे, जिसके कारण उनकी पहचान और पृष्ठभूमि की जानकारी पुलिस के सामने स्पष्ट नहीं हो सकी।

    पुलिस ने शुरू की जांच

    बताया जा रहा है कि शनिवार से मां-बेटे दिखाई नहीं दे रहे थे। इसी बीच रसोईघर में प्लास्टर किए गए हिस्से से तेज दुर्गंध आने लगी। इससे आसपास के लोगों को संदेह हुआ। मकान मालिक से सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।

    सिटी डीएसपी रश्मिरंजन महापात्र और कुंभाड़पड़ा थाना प्रभारी विजय केतन बेहरा ने मौके पर पहुंचकर पूछताछ की। पुलिस ने रसोईघर में प्लास्टर किए गए हिस्से को खोला तो अंदर से महिला का शव बरामद हुआ। इसके बाद मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने का काम शुरू कर दिया है।

  • बहन के साथ आपत्तिजनक हालत में था युवक, देखते ही भाई का खौल उठा खून और कर दी हत्या; हिमाचल के बद्दी में वारदात..​​​​​​

    बहन के साथ आपत्तिजनक हालत में था युवक, देखते ही भाई का खौल उठा खून और कर दी हत्या; हिमाचल के बद्दी में वारदात..​​​​​​

    हिमाचल प्रदेश के बद्दी में प्रेम प्रसंग के चलते एक युवक की हत्या कर दी गई। युवती के भाई ने आपत्तिजनक स्थिति में देखकर हमला किया, जिससे युवक की मौके पर ही मौत हो गई।

    हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-नालागढ़ के मानपुर थाना के तहत लोधी माजरा के समीप जट्टी माजरा गांव में प्रेम प्रसंग को लेकर एक युवक की हत्या कर दी गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार मृतक की पहचान 29 वर्षीय दीपक कुमार पुत्र लालटू सिंह, निवासी गांव दरौरा, तहसील व जिला अमरोहा, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दीपक शादीशुदा था और उसकी पत्नी, बेटा तथा माता-पिता उत्तर प्रदेश में ही रहते हैं। वह रोजगार के सिलसिले में बद्दी आया था और यहां एक कंपनी में काम कर रहा था। बद्दी में वह अकेला रहता था।

    भाई ने आपत्तिजनक हालत में देख लिया

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक दीपक का एक युवती के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। सोमवार को युवती के भाई ने कथित तौर पर दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया। इसके बाद विवाद बढ़ गया और युवक पर हमला कर दिया गया। बताया जा रहा है कि दीपक के सिर पर किसी भारी वस्तु से वार किया गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    घटना के बाद आरोपित हुआ फरार

    घटना के बाद आरोपित मौके से फरार हो गया। वारदात की सूचना मिलते ही मानपुर थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की है।

    फोरेंसिक टीम ने की पड़ताल

    मामले की गंभीरता को देखते हुए फोरेंसिक विशेषज्ञों को भी मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने पूछताछ और प्रारंभिक जांच के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपित की तलाश शुरू कर दी है।पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और पूछताछ के बाद ही हत्या के कारणों तथा वारदात में शामिल आरोपित की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। पुलिस फरार आरोपित की तलाश में जुटी हुई है।

  • दोस्त का कत्ल कर रची ‘आदमखोर तेंदुए’ की साजिश: गन्ने के खेत में फेंका शव, मुरादाबाद पुलिस ने ऐसे खोला राज..​​​​​​

    दोस्त का कत्ल कर रची ‘आदमखोर तेंदुए’ की साजिश: गन्ने के खेत में फेंका शव, मुरादाबाद पुलिस ने ऐसे खोला राज..​​​​​​

    दोस्त का कत्ल कर रची 'आदमखोर तेंदुए' की साजिश: गन्ने के खेत में फेंका शव, मुरादाबाद पुलिस ने ऐसे खोला राज - moradabad man kills friend over money dispute blames leopard attack

    शाहनवाज ने रुपयों के विवाद में दोस्त जानी की हत्या कर दी और शव को गन्ने के खेत में फेंक दिया ताकि यह तेंदुए का हमला लगे। मुरादाबाद पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया।

    रुपयों के लेनदेन का विवाद कुछ ऐसा बढ़ा कि शाहनवाज ने दोस्त जानी के सिर पर धारदार हथियार से हमला कर उसकी हत्या कर दी। चूंकि, ठाकुरद्वारा में तेंदुए के हमले में अब तक दो महिलाओं की मौत हो चुकी और कई घायल हो गए है। 16 अगस्त आरोपित शहनवाज ने भी जानी की हत्या करने के बाद शव इसलिए ही गन्ने के खेत में फेंका कि लोग तेंदुए के डर से खेतों पर नहीं जा रहे हैं।

    ऐसे में तेंदुआ या तो जानी का शव खा जाएगा और अगर किसी शव मिले भी तो लोग समझें कि तेंदुए ने शिकार किया है। हालांकि, 18 अगस्त को शव मिला। चप्पल व कपड़ों से शिनाख्त हुई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की वारदात सामने आ गई। पुलिस ने जांच के आधार पर सुराग जुटा आरोपित को दबोच लिया। 24 अगस्त को हकीकत पता चलने पर शाहनवाज को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया।

    ठाकुरद्वारा क्षेत्र के वार्ड नंबर-19, मोहल्ला बहेड़ा वाला निवासी शाहनवाज और डिलारी क्षेत्र के गांव बुढ़नपुर निवासी जानी एक साल से दोस्त थे। दोनों का एक-दूसरे के घर आना-जाना था। दोनों के बीच रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। शाहनवाज ने उधार के रुपये लौटाने के बहाने जानी को फोन कर बुलाया था।

    16 अगस्त की सुबह करीब 10 बजे जानी फोन पर बात करते हुए घर से निकला था, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटा। स्वजन ने काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। मोबाइल फोन भी बंद मिला। इसके बाद 17 अगस्त को जानी की मां संतोष ने थाना डिलारी में गुमशुदगी दर्ज कराई थी।

  • झारखंड के 45 साल पुराने मर्डर केस पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी, उम्रकैद के बुजुर्ग कैदी को दी जमानत​​​​​​

    झारखंड के 45 साल पुराने मर्डर केस पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी, उम्रकैद के बुजुर्ग कैदी को दी जमानत​​​​​​

    सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

    जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाई कोर्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि हाई कोर्ट को इस मामले की अपील पर फैसला सुनाने में ही दो दशक से ज्यादा का समय लग गया।

    पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि यह मामला दिखाता है कि कैसे एक संगीन अपराध बिना सजा के रह गया। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों को 22 साल तक लंबे ट्रायल की प्रताड़ना झेलनी पड़ी और उसके बाद सजा के खिलाफ की गई अपील को खारिज होने में भी 22 साल और लग गए।

    क्या है 1981 का यह मामला?

    यह पूरी घटना 18 अक्टूबर 1981 की है। घटना दुमका जिले के भुरुंडिया गांव में हुई। विभूति मंडल, बनारसी मंडल और उनके परिवार के सदस्य धान की कटाई के लिए गए थे। तभी तीर-कमान और कुल्हाड़ी से लैस लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया, जिसमें विभूति और बनारसी मंडल की हत्या कर दी गई।