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  • रोज पपीता खाना वरदान या नुकसान? जानें आयुर्वेदिक एक्सपर्ट  की राय.

    रोज पपीता खाना वरदान या नुकसान? जानें आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की राय.

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    पपीता एक ऐसा फल है जो साल के अधिकांश समय आसानी से उपलब्ध रहता है। स्वाद में मीठा होने के साथ-साथ यह कई जरूरी पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। पपीते में विटामिन C, विटामिन A, फोलेट, फाइबर और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो संतुलित डाइट का हिस्सा बनकर सेहत को सपोर्ट कर सकते हैं। इसमें पपेन (Papain) नामक एक पाचक एंजाइम भी पाया जाता है, जो प्रोटीन के पाचन में भूमिका निभाता है। पर्याप्त फाइबर होने के कारण पपीता पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद माना जाता है और नियमित मल त्याग में मदद कर सकता है। आयुर्वेद में भी पपीते का इस्तेमाल पाचन से जुड़ी समस्याओं के लिए पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। हालांकि, किसी भी फल को किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जा सकता और इसके फायदे व्यक्ति की डाइट और हेल्थ कंडीशन पर निर्भर करता हैं।

    फोर्टिस अस्पताल वसंत कुंज में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में वरिष्ठ सलाहकार डॉ. शुभम वत्स्या ने बताया पपीते में पपेन (Papain) नामक एंजाइम पाया जाता है, जो प्रोटीन को तोड़ने में मदद करता है। इसी वजह से यह अपच, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत दे सकता है। आइए एक्सपर्ट से जानते है कि पपीता का सेवन करने से सेहत पर कैसा होता है असर। पाचन को करता है बेहतर

    पपीता पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद फल माना जाता है। इसमें पपेन (Papain) नामक एंजाइम पाया जाता है, जो प्रोटीन के पाचन में मदद करता है। इसके अलावा, पपीते में मौजूद फाइबर मल को नरम रखने और बाउल मूवमेंट को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। इसलिए संतुलित डाइट में पपीते को शामिल करना कब्ज की समस्या में मददगार हो सकता है।

    इम्यूनिटी को देता है सपोर्ट

    पपीता विटामिन C और विटामिन A जैसे पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। ये पोषक तत्व शरीर की इम्यूनिटी को सपोर्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित और संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर पपीता शरीर को जरूरी पोषण देने में मदद कर सकता है।

    वजन कंट्रोल करने में भी है मददगार

    वजन कंट्रोल करने वालों के लिए पपीता एक अच्छा फल हो सकता है। इसमें पानी और फाइबर की मात्रा अच्छी होती है, जिससे खाने के बाद पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है। इसे ज्यादा कैलोरी वाले मीठे स्नैक्स की जगह लिया जाए तो कुल कैलोरी सेवन को मैनेज करने में मदद मिल सकती है।

    दिल की सेहत के लिए उपयोगी

    पपीते में फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट पोषक तत्व पाए जाते हैं। पोटैशियम सामान्य ब्लड प्रेशर को बनाए रखने में भूमिका निभाता है, जबकि पर्याप्त फाइबर वाला आहार हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। हालांकि, केवल पपीता खाने से कोलेस्ट्रॉल कम होने का दावा नहीं किया जा सकता।

    आंखों के लिए देता है पोषण

    पपीते में बीटा-कैरोटीन और अन्य कैरोटेनॉयड्स पाए जाते हैं, जिन्हें शरीर विटामिन A में बदल सकता है। विटामिन A सामान्य दृष्टि और आंखों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। हालांकि, पपीता खाने से चश्मे का नंबर कम होना या आंखों की रोशनी तेजी से बढ़ना साबित नहीं हुआ है।

    पपीता कैसे सेहत को कर सकता है नुकसान

    आयुर्वेदिक एक्सपर्ट नित्यानंद श्री ने बताया पपीता फायदेमंद है लेकिन रोज इसका सेवन सेहत के लिए ठीक नहीं है। कभी कभी पपीता का सेवन ठीक है लेकिन रोज पपीता खाने से आपका पाचन कमजोर हो जाएगा। जिस दिन आपको पेट भारी लगे या आप हैवी डिनर करें और आपको पाचन खराब होने का डर लगे उस दिन आप पपीता खाएं ये आपके पाचन को फायदा पहुंचाएगा। रोज बिना वजह पपीता का सेवन नहीं करें। इसे बैलेंस डाइट के रूप में खाएं।

    कुछ स्थितियों में पपीते का सेवन सावधानी से करना चाहिए। खासकर कच्चे पपीते में लेटेक्स की मात्रा अधिक होती है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान इसे लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। पपीते में मौजूद पपेन और लेटेक्स कुछ लोगों में एलर्जिक रिएक्शन भी पैदा कर सकते हैं। वहीं, पपीते में विटामिन C की अच्छी मात्रा होती है, लेकिन सामान्य मात्रा में इसका सेवन आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। बहुत अधिक मात्रा में पपीता खाने से कुछ लोगों को पेट दर्द, दस्त, गैस या अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल परेशानी हो सकती है। किडनी स्टोन की समस्या वाले लोगों को भी किसी विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही अपनी डाइट में इसकी मात्रा तय करनी चाहिए।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। पपीता किसी बीमारी का इलाज या दवा का विकल्प नहीं है। गर्भवती महिलाएं, किडनी स्टोन या एलर्जी जैसी समस्या से जूझ रहे लोग पपीते का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें। किसी भी खाद्य पदार्थ का अधिक सेवन करने से बचें।

  • 26 सितंबर को बुध और शुक्र बनाएंगे लक्ष्मी नारायण राजयोग, कन्या, तुला, कुंभ और मेष राशि वालों को आर्थिक उन्नति के योग

    26 सितंबर को बुध और शुक्र बनाएंगे लक्ष्मी नारायण राजयोग, कन्या, तुला, कुंभ और मेष राशि वालों को आर्थिक उन्नति के योग

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    Lakshmi Narayan Rajyog 2026: ज्योतिष शास्त्र में बुध और शुक्र की युति को बेहद शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार 26 सितंबर 2026 को बुध और शुक्र तुला राशि में एक साथ आकर लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण करेंगे। आपको बता दें कि तुला राशि में बनने वाला यह योग कुछ राशियों के लिए धन, करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान निवेश, व्यापारिक फैसलों और आय के नए स्रोतों से लाभ के अवसर बन सकते हैं।

    कैसे बनेगा लक्ष्मी नारायण राजयोग?

    ज्योतिष में बुध को बुद्धि, वाणी, व्यापार, तर्क और संचार का कारक माना जाता है, जबकि शुक्र धन, सुख-सुविधा, भौतिक संपन्नता, कला और ऐश्वर्य से जुड़े ग्रह हैं। जब कुंडली में बुध और शुक्र की विशेष युति बनती है तो इसे लक्ष्मी नारायण योग के नाम से जाना जाता है। फ्यूचर पंचांग के अनुसार 26 सितंबर को बुध ग्रह तुला राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पर शुक्र ग्रह पहले से ही विराजमान हैं। ऐसे में ये दोनों ग्रह तुला राशि में साथ आएंगे, जिससे इस योग का निर्माण होगा।

    इस योग का प्रभाव सभी राशियों पर एक जैसा नहीं होता। जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति के आधार पर परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं। हालांकि, गोचर की स्थिति के अनुसार कन्या, तुला, कुंभ और मेष राशि के जातकों के लिए आर्थिक उन्नति और करियर से जुड़े अच्छे अवसर बनने की संभावना मानी जा रही है।

    कन्या राशि पर लक्ष्मी नारायण राजयोग का प्रभाव (Virgo Zodiac)

    कन्या राशि के जातकों के लिए लक्ष्मी नारायण राजयोग आर्थिक दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकता है। आय बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं और रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना बन सकती है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी या बेहतर अवसर मिल सकते हैं। व्यापार करने वाले जातकों को नए संपर्कों से फायदा हो सकता है। आर्थिक मामलों में लिए गए समझदारी भरे फैसले भविष्य में लाभ दे सकते हैं।

    तुला राशि पर लक्ष्मी नारायण राजयोग का प्रभाव (Libra Zodiac)

    तुला राशि में ही बुध और शुक्र की युति बनने से इस राशि के जातकों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद की जा सकती है। आत्मविश्वास बढ़ेगा और करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। व्यापार में नए सौदे या साझेदारी से फायदा हो सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ सुख-सुविधाओं पर खर्च बढ़ सकता है। लंबे समय से चली आ रही किसी आर्थिक योजना में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

    कुंभ राशि पर लक्ष्मी नारायण राजयोग का प्रभाव (Aquarius Zodiac)

    कुंभ राशि के जातकों के लिए यह राजयोग आय और पेशेवर जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। नौकरी में पदोन्नति या वेतन वृद्धि के अवसर बन सकते हैं। कारोबारियों को नए ग्राहक और नए प्रोजेक्ट मिल सकते हैं। अचानक आर्थिक लाभ के अवसर भी बन सकते हैं। सामाजिक और पेशेवर स्तर पर आपकी प्रतिष्ठा बढ़ सकती है।

    मेष राशि पर लक्ष्मी नारायण राजयोग का प्रभाव (Aries Zodiac)

    मेष राशि के जातकों को लक्ष्मी नारायण राजयोग के दौरान आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। व्यापार में विस्तार की योजना सफल हो सकती है और नए लोगों से संपर्क भविष्य में लाभ पहुंचा सकता है। नौकरी करने वालों को करियर में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं। निवेश से जुड़े मामलों में लाभ के योग बन सकते हैं, हालांकि किसी भी निवेश से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

    किन मामलों में मिल सकता है फायदा?

    लक्ष्मी नारायण राजयोग के प्रभाव से इन राशियों के जातकों को धन लाभ, आय में वृद्धि, नौकरी में तरक्की, व्यापार में विस्तार, नए अवसर और आर्थिक योजनाओं में सफलता जैसे परिणाम मिलने की संभावना मानी जा रही है। हालांकि, वास्तविक परिणाम व्यक्ति की जन्मकुंडली और दशा-अंतर्दशा पर भी निर्भर करते हैं।मेष राशि का वर्षफल 2026वृष राशि का वर्षफल 2026मिथुन राशि का वर्षफल 2026कर्क राशि का वर्षफल 2026सिंह राशि का वर्षफल 2026कन्या राशि का वर्षफल 2026तुला राशि का वर्षफल 2026वृश्चिक राशि का वर्षफल 2026धनु राशि का वर्षफल 2026मकर राशि का वर्षफल 2026कुंभ राशि का वर्षफल 2026मीन राशि का वर्षफल 2026

  • इलाज के बहाने बेहोशी का इंजेक्शन, महिला ने डॉक्टर पर लगाए गंभीर आरोप..

    इलाज के बहाने बेहोशी का इंजेक्शन, महिला ने डॉक्टर पर लगाए गंभीर आरोप..

    UP जिले के एक गांव में रहने वाली महिला की तबीयत कुछ दिनों से खराब चल रही थी। इलाज की उम्मीद में वह स्थानीय स्तर पर मरीजों को देखने वाले एक डॉक्टर के पास पहुंची। महिला का आरोप है कि डॉक्टर ने जांच के नाम पर उसे एक इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद वह बेहोश हो गई।

    महिला के मुताबिक, जब उसे होश आया तो वह खुद को असहज स्थिति में पाकर घबरा गई। उसके कपड़े अस्त-व्यस्त थे और उसे शक हुआ कि बेहोशी की हालत में उसके साथ गलत काम किया गया है। उसने डॉक्टर से इस बारे में सवाल किया और विरोध जताया।

    महिला का आरोप है कि डॉक्टर ने अपनी गलती मानने के बजाय उसे धमकाना शुरू कर दिया। कथित तौर पर उसे कहा गया कि अगर उसने किसी को कुछ बताया, तो उसे और उसके पति को जान से मार दिया जाएगा। इस धमकी के बाद महिला काफी डर गई और उसने तुरंत पुलिस से संपर्क नहीं किया।

    कुछ समय तक वह इस घटना को लेकर चुप रही। बाद में उसने हिम्मत जुटाकर अपने पति को पूरी बात बताई। इसके बाद दोनों ने अधिकारियों से संपर्क करने का फैसला किया। करीब एक महीने बाद महिला ने क्षेत्राधिकारी के सामने शिकायत दर्ज कराते हुए मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की।

    शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि महिला के आरोपों की जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी में महिला और आरोपी के बीच पहले से परिचय होने की बात भी सामने आई है, हालांकि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के समय वास्तव में क्या हुआ था और आरोपों में कितनी सच्चाई है।

    फिलहाल महिला ने निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। वहीं, इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में बिना उचित योग्यता के इलाज करने वाले लोगों की भूमिका और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • पेरिस का पहला भव्य हिंदू मंदिर तैयार, सितंबर में 13 दिन के महाउत्सव के साथ होगा उद्घाटन, जानें क्यों खास है यह धाम..

    पेरिस का पहला भव्य हिंदू मंदिर तैयार, सितंबर में 13 दिन के महाउत्सव के साथ होगा उद्घाटन, जानें क्यों खास है यह धाम..

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    पेरिस के बुसी-सेंट-जॉर्जेस में बीएपीएस (BAPS) स्वामीनारायण हिंदू मंदिर का भव्य उद्घाटन होने जा रहा है। यह मंदिर भारत-फ्रांस के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक संबंधों का बड़ा प्रतीक है। यह केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामुदायिक जुड़ाव और विभिन्न धर्म  के लोगों के बीच आपसी सौहार्द का प्रमुख केंद्र भी बनेगा। लगभग 5,000 वर्ग मीटर में फैला यह पूरा मंदिर परिसर इस सितंबर में आयोजित होने वाले 13 दिवसीय ऐतिहासिक ‘संस्कृति महोत्सव’ के साथ आधिकारिक तौर पर खुलने जा रहा है, जिसका उद्घाटन महंत स्वामी महाराज जी करेंगे। इस महोत्सव में फ्रांस और दुनिया भर से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    13 दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव के साथ खुलेगा मंदिर

    मंदिर के भव्य उद्घाटन के उपलक्ष्य में 2 से 14 सितंबर तक 13 दिनों का भव्य सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित किया जाएगा। महंत स्वामी महाराज के पावन कर-कमलों द्वारा 6 सितंबर को मंदिर का उद्घाटन और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह संपन्न होगा। इस भव्य सांस्कृतिक महोत्सव में कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होंगे जो इस प्रकार हैं:

    • पालकी यात्रा – 2 सितंबर
    • वैदिक महायज्ञ – 2 से 13 सितंबर
    • जल यात्रा – 3 सितंबर
    • नगर यात्रा – 5 सितंबर
    • मूर्ति प्रतिष्ठा – 6 सितंबर
    • समर्पण सभा – 6 सितंबर
    • महंत स्वामी महाराज जन्म जयंती – 13 सितंबर
    • हिंदू सांस्कृतिक उत्सव – 14 सितंबर

    मंदिर की खासियतें

    • यह भव्य मंदिर पारंपरिक भारतीय वास्तुकला और आधुनिक फ्रेंच इंजीनियरिंग का एक अनूठा उदाहरण है।
    • ऊपरी तल पर पारंपरिक मंदिर और निचले तल पर ‘मारू गुर्जर’ शैली में निर्मित भव्य सांस्कृतिक हवेली बनाई गई है।
    • परिसर में 5 भव्य शिखर, 10 विशाल गुंबद, बारीक नक्काशी वाले 20 स्तंभ, 120 नक्काशीदार खिड़कियां, 49 मूर्तिकला पैनल और 4 सुंदर छतरियां शामिल हैं।
    • मंदिर के निर्माण के लिए ग्रीस, इटली, वियतनाम और भारत से विशेष संगमरमर और ग्वालियर से बलुआ पत्थर मंगाए गए हैं।
    • भारत में कुशल कारीगरों ने इन पत्थरों को हाथों से तराशा और फिर इन्हें फ्रांस भेजकर मंदिर में स्थापित किया गया।

    महंत स्वामी महाराज4

    इस मंदिर को लेकर महंत स्वामी महाराज का प्रेरणादायक संदेश

    महंत स्वामी महाराज जी ने कहा कि इस मंदिर का निर्माण किसी एक समुदाय की पहचान स्थापित करने के लिए नहीं, बल्कि विभिन्न पहचान वाले लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने के लिए हुआ है। हमारे रास्ते भले ही अलग हों, लेकिन सम्मान और सहअस्तित्व की जमीन एक हो सकती है।

  • जीवन में ज्ञान की कमी से ज्यादा समस्या कई बार नकारात्मकता होती है, इसलिए दूसरों को बदलने से पहले अपनी बुराइयां दूर करें.

    जीवन में ज्ञान की कमी से ज्यादा समस्या कई बार नकारात्मकता होती है, इसलिए दूसरों को बदलने से पहले अपनी बुराइयां दूर करें.

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    लोक कथा है- पुराने समय में एक साधु रोज भिक्षा मांगने एक गांव में जाता था। एक दिन वह एक घर के सामने पहुंचा। उस घर से एक महिला बाहर आई और बोली, “महाराज, आज कोई ज्ञान की बात बताइए, तभी मैं आपको भिक्षा दूंगी।”

    साधु मुस्कुराया और बोला, “आज नहीं, कल बताऊंगा।” इतना कहकर वह बिना भिक्षा लिए ही वहां से चला गया।

    अगले दिन महिला ने स्वादिष्ट खीर बनाई। कुछ देर बाद वही साधु भिक्षा मांगने उसके दरवाजे पर आया। महिला ने प्रसन्न होकर एक कटोरे में खीर ली। साधु ने अपना कमंडल उसके सामने रख दिया।

    महिला खीर डालने ही वाली थी कि उसकी नजर कमंडल के अंदर गई। उसमें धूल, कंकड़ और गंदगी भरी थी। उसने कहा, “महाराज, आपका कमंडल तो बहुत गंदा है। इसमें खीर डालूंगी तो खीर भी खराब हो जाएगी।”

    साधु ने कहा, “तुम इसकी चिंता मत करो, बस खीर डाल दो।”

    महिला ने उत्तर दिया, “नहीं महाराज। पहले इसे साफ करना जरूरी है। अगर पात्र ही गंदा होगा तो उसमें रखा अच्छा भोजन भी दूषित हो जाएगा।”

    साधु ने मुस्कुराकर पूछा, “अगर कमंडल साफ कर दिया जाए और फिर उसमें खीर डाली जाए तो?”

    महिला बोली, “तब खीर खराब नहीं होगी। आप आराम से उसे खा सकेंगे।”

    साधु ने कहा, “यही वह ज्ञान है जो मैं तुम्हें देने आया हूं।”

    महिला आश्चर्य से साधु को देखने लगी।

    साधु ने कहा, “कल तुमने ज्ञान पाने से पहले मुझे परखना चाहा था। तुम्हारे मन में संदेह, अहंकार और पूर्वाग्रह की गंदगी थी। ऐसे मन में दिया गया ज्ञान भी टिक नहीं सकता। जिस प्रकार गंदे कमंडल में खीर नहीं डाली जा सकती, उसी प्रकार अशांत और नकारात्मक मन में अच्छी सीख अपना प्रभाव नहीं छोड़ सकती।”

    महिला को अपनी गलती समझ में आ गई। उसने साधु से क्षमा मांगी और मन को शुद्ध रखने का संकल्प लिया।

    जीवन में ज्ञान की कमी से ज्यादा समस्या कई बार हमारे भीतर जमा नकारात्मकता होती है। इसलिए दूसरों को बदलने से पहले अपने मन को साफ करना जरूरी है।

    प्रसंग की सीख

    • रोज मन की सफाई करें:
      जैसे हम रोज शरीर और घर की सफाई करते हैं, वैसे ही मन की भी सफाई जरूरी है। दिन के अंत में कुछ देर शांत जगह बैठकर सोचें कि आज किस बात ने आपको परेशान किया और क्यों। गलत बातों को दूर करने का संकल्प लें।
    • पूर्वाग्रहों को पहचानें:
      किसी व्यक्ति या परिस्थिति के बारे में बिना पूरी जानकारी के राय बना लेना सही नहीं है। कोई निर्णय लेने से पहले तथ्यों को समझने की आदत डालें।
    • अहंकार को नियंत्रित करें:
      “मुझे सब पता है” वाली सोच सीखने के दरवाजे बंद कर देती है। जीवन में हर व्यक्ति और हर परिस्थिति हमें कुछ न कुछ सिखा सकती है।
    • नकारात्मक विचारों को चुनौती दें:
      जब मन कहे, “मैं यह नहीं कर सकता,” तो खुद से पूछें-“क्या यह सच है या सिर्फ मेरा डर है?” विचारों को सच मानने से पहले उनकी जांच करें। अपने डर को दूर करें और नकारात्मकता से बचें।
    • माफी मांगना सीखें:
      गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं है। अपनी गलती समझ आने पर ईमानदारी से माफी मांगने से रिश्ते सुधरते हैं और मन भी हल्का होता है।
    • अच्छी संगति चुनें:
      जिन लोगों के साथ हम समय बिताते हैं, उनके विचार हमारे व्यवहार को प्रभावित करते हैं। सकारात्मक, ईमानदार और सीखने की इच्छा रखने वाले लोगों की संगति मन को स्वस्थ रखती है।
    • हर दिन कुछ नया सीखें:
      ज्ञान तभी उपयोगी है जब हम उसे खुले मन से स्वीकार करें। किताब पढ़ें, अनुभवी लोगों से सीखें और अपनी गलतियों से भी सबक लें।
    • प्रतिक्रिया देने से पहले रुकें:
      गुस्से या तनाव में तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ क्षण रुकना सीखें। कई समस्याएं केवल इसलिए बड़ी हो जाती हैं, क्योंकि हमने बिना सोचे जवाब दे दिया।
    • कृतज्ञता का अभ्यास करें:
      रोज तीन ऐसी चीजें याद करें जिनके लिए आप आभारी हैं। इससे आपका ध्यान कमी और शिकायत से हटकर उपलब्धियों और सकारात्मक पहलुओं पर चला जाता है।
    • खुद को समय दें:
      मानसिक शांति कोई एक दिन में मिलने वाली चीज नहीं है। ध्यान, प्रार्थना, प्रकृति के बीच समय बिताना या शांत बैठना मन को धीरे-धीरे स्थिर कर सकता है।

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  • आंतों में मल सूखने पर शरीर में दिखते हैं ये 10 लक्षण? आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के बताए 4 घरेलू नुस्खे, जो दिला सकते हैं कब्ज से राहत..

    आंतों में मल सूखने पर शरीर में दिखते हैं ये 10 लक्षण? आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के बताए 4 घरेलू नुस्खे, जो दिला सकते हैं कब्ज से राहत..

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    असंतुलित खान-पान, पानी की कमी और सुस्त लाइफस्टाइल का सीधा असर हमारे पाचन तंत्र (Digestive System) पर पड़ता है। जब पाचन धीमा हो जाता है, तो आंतों में मल सूखने लगता है, जिससे न केवल पेट में भारीपन रहता है बल्कि शरीर कई तरह के संकेत और लक्षण भी देने लगता है। समय रहते ध्यान न देने पर यह समस्या क्रोनिक कब्ज का रूप ले सकती है। मेडिकल साइंस और आयुर्वेद दोनों का मानना है कि आंतों में नमी की कमी के कारण मल कड़ा और शुष्क हो जाता है। अगर शरीर में इसके लक्षण शुरुआती चरण में ही पहचान लिए जाएं, तो गंभीर पेट संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है। आयुर्वेद में आंतों की नमी बनाए रखने और पाचन क्रिया को दुरुस्त करने के कई पारंपरिक उपाय मौजूद हैं। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के मुताबिक, रसोई में मौजूद कुछ प्राकृतिक चीजें पाचन अग्नि को संतुलित कर कब्ज में राहत दे सकती हैं।

    वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अखिलेश शर्मा (BAMS, ND, PhD) के मुताबिक, कब्ज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि कब्ज से तुरंत राहत दिलाने वाली कोई ‘जादुई पुड़िया’ नहीं होती। सही खानपान, पर्याप्त पानी, नियमित शारीरिक गतिविधि और कुछ घरेलू उपायों को अपनाकर अधिकांश लोगों को आंतों में जमा सूखे मल से राहत मिल सकती है। आइए डॉ. अखिलेश शर्मा से जानते हैं कि कब्ज से राहत पाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

    लंबे समय तक कब्ज या आंतों में मल जमा होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण

    • बार-बार कब्ज होना और कई दिनों तक पेट साफ न होना।
    • पेट में भारीपन या फूलने की शिकायत रहना।
    • पेट में दर्द या ऐंठन महसूस होना।
    • मल त्याग के दौरान जोर लगाना और फिर भी पूरी तरह पेट साफ न होने का एहसास।
    • भूख कम लगना या खाना खाने का मन न करना।
    • मतली आना और गंभीर मामलों में उल्टी होना।
    • बार-बार गैस बनना या पेट में असहजता महसूस होना।
    • हर समय थकान या सुस्ती महसूस होना।
    • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, चिड़चिड़ापन या मूड खराब रहना।
    • सांस से बदबू आना या मुंह का स्वाद खराब रहना शामिल है।

    सौंफ वाला दूध पिएं

    आयुर्वेद विशेषज्ञ के मुताबिक, लंबे समय से कब्ज की समस्या होने पर सौंफ वाला दूध फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए एक गिलास दूध में 1 चम्मच हल्की कुटी हुई सौंफ डालकर 2–3 बार उबालें। इसके बाद दूध को छान लें और स्वाद के लिए चीनी की जगह थोड़ा-सा गुड़ मिला सकते हैं। सौंफ पाचन को बेहतर बनाने और गैस व पेट फूलने की समस्या कम करने में मदद कर सकती है। बायोमेडिसिन एंड फार्माकोथेरेपी में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार सौंफ में एनेथोल नामक एक खास कम्पाउंड पाया जाता है। यह पेट और आंतों की मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है, जिससे पेट की ऐंठन और गैस कम होती है। सौंफ पाचन एंजाइम्स के स्राव को बढ़ाती है। जब इसे गर्म दूध के साथ लिया जाता है, तो दूध में मौजूद फैट और सौंफ के वोलेटाइल ऑयल आंतों में लुब्रिकेशन पैदा करते हैं, जिससे सुबह मल त्याग (Stool Pass) आसानी से होता है।

    हल्दी और काली मिर्च वाला दूध

    अगर कब्ज के साथ पाचन भी कमजोर रहता है, तो एक गिलास दूध में आधा चम्मच हल्दी और 3–4 कुटी हुई काली मिर्च डालकर उबालें। गुनगुना होने पर इसका सेवन किया जा सकता है। हल्दी और काली मिर्च में मौजूद प्राकृतिक तत्व पाचन तंत्र को सहारा देने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, यह कब्ज का इलाज नहीं बल्कि एक सहायक उपाय है। बायोमेडिसिन एंड फार्माकोथेरेपी में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, सौंफ में एनेथोल नामक एक खास कम्पाउंड पाया जाता है। यह पेट और आंतों की मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है, जिससे पेट की ऐंठन और गैस कम होती है। सौंफ पाचन एंजाइम्स के स्राव को बढ़ाती है। जब इसे गर्म दूध के साथ लिया जाता है, तो दूध में मौजूद फैट और सौंफ के वोलेटाइल ऑयल आंतों में लुब्रिकेशन यानी चिकनाहट पैदा करते हैं, जिससे सुबह मल त्याग आसानी से होता है।

    एलोवेरा जेल का सीमित मात्रा में सेवन करें

    एक्सपर्ट के अनुसार, ताजा एलोवेरा जेल का सीमित मात्रा में सेवन कुछ लोगों में कब्ज से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। इसके लिए एलोवेरा की पत्ती से लगभग 20–25 मि.ली. जेल निकालकर सुबह खाली पेट या रात को सोने से पहले लिया जा सकता है। हालांकि, एलोवेरा का अधिक सेवन दस्त, पेट दर्द या इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का कारण बन सकता है। गर्भवती महिलाओं और कुछ बीमारियों से पीड़ित लोगों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) की रिसर्च के मुताबिक, एलोवेरा में एन्थ्राक्विनोन और ऐलोइन नाम के तत्व होते हैं। ये तत्व शक्तिशाली ‘लैक्सेटिव के रूप में काम करते हैं। एलोवेरा जेल आंतों में पानी की मात्रा को बढ़ाता है (Hydration), जिससे सूखा मल नरम हो जाता है और आंतों की सफाई (Detoxification) बहुत आसानी से हो जाती है।

    फाइबर से भरपूर हल्की सब्जियां खाएं

    कब्ज से राहत पाने के लिए रोजाना फाइबर युक्त और आसानी से पचने वाली सब्जियों को भोजन में शामिल करें। जैसे

    • तोरी
    • टिंडा
    • कद्दू
    • शलजम
    • ग्रीन बीन्स
    • पालक और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां

    इन सब्जियों में मौजूद फाइबर मल को मुलायम बनाने और आंतों की सामान्य गति बनाए रखने में मदद करता है। बेहतर परिणाम के लिए इनके साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है। द अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन की एक बड़ी रिसर्च के अनुसार, लौकी, तोरी, कद्दू, टिंडा और शलजम जैसी सब्जियों में पानी की मात्रा 90%+ और सॉल्यूबल फाइबर भरपूर होता है। फाइबर मल में भारीपन (Bulk) और नमी लाता है। यह आंतों के लिए ‘झाड़ू’ की तरह काम करता है, जो दीवारों पर चिपकी पुरानी गंदगी को खुरचकर बाहर निकाल देता है। इन सब्जियों में मौजूद प्रीबायोटिक (Prebiotics) पेट के अच्छे बैक्टीरिया का पोषण करते हैं, जिससे पाचन क्रिया परमानेंटली मजबूत होती है।

    डिस्क्लेमर :यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है, इसे मेडिकल सलाह न मानें। किसी भी नुस्खे या डाइट को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

  • 3 सितंबर को गुरु करेंगे अश्लेषा नक्षत्र के दूसरे पद में प्रवेश, मकर, सिंह और तुला राशि पर पड़ सकता है सकारात्मक असर

    3 सितंबर को गुरु करेंगे अश्लेषा नक्षत्र के दूसरे पद में प्रवेश, मकर, सिंह और तुला राशि पर पड़ सकता है सकारात्मक असर

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    Guru Gochar 2026: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, देव गुरु बृहस्पति 19 अगस्त को अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश कर गए हैं। बुध के नक्षत्र में 31 अक्टूबर तक रहने वाले हैं। इस अवधि में गुरु सिंह राशि में प्रवेश करने के साथ-साथ नक्षत्र पद परिवर्तन भी करेंगे जिसका असर 12 राशियों के साथ-साथ वैश्विक स्तर में देखने को मिलने वाला है। ऐसे में कुछ राशि के जातकों को लाभ मिल सकता है, तो कुछ राशियों के लंबे समय से रुके काम पूरे हो सकते हैं। बता दें कि गुरु 3 सितंबर को अश्लेषा नक्षत्र के दूसरे पद में प्रवेश करने वाले हैं, जिससे 12 राशियों में से इन तीन राशि के जातकों को सर्वाधिक लाभ मिल सकता है। ये विश्लेषण चंद्र राशि के आधार पर किया जा रहा है। आइए जानते हैं गुरु बृहस्पति के अश्लेषा नक्षत्र के दूसरे पद में जाने से किन राशि के जातकों के लिए लाभकारी हो सकता है…

    द्रिक पंचांग के अनुसार, भाग्य के कारक गुरु बृहस्पति 3 सितंबर 2026, बृहस्पतिवार को 07:02 पी एम बजे प्रवेश कर जाएंगे और इस नक्षत्र पद में 20 सितंबर को 08:53 ए एम बजे तक रहेंगे। इसके बाद तृतीय पद में प्रवेश कर जाएंगे। अश्लेषा नक्षत्र के देवता नाग हैं और स्वामी बुध हैं। इस नक्षत्र का प्रतीक कुंडली मारे हुए सर्प का है।

    मकर राशि गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में जाने का असर (Capricorn Zodiac)

    मकर राशि के जातकों के लिए गुरु का अश्लेषा नक्षत्र के दूसरे पद में जाना सकारात्मक असर डाल सकता है। गुरु बारहवें और तीसरे भाव के स्वामी होकर सातवें भाव में गोचर करेंगे। इस भाव में रहकर गुरु की पंचम दृष्टि 11वें भाव पर, सप्तम दृष्टि लग्न पर और नवम दृष्टि तीसरे भाव पर पड़ेगी। ऐसे में इस राशि के जातकों के जीवन में कई महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं। इस राशि के जातकों की बौद्धिक क्षमता में तेजी से वृद्धि हो सकती है। आपकी छुपी हुई प्रतिभा सामने आ सकती है। इसके साथ ही निर्णय लेने की क्षमता में भी तेजी से वृद्धि हो सकती है।

    सातवां भाव विवाह का माना जाता है। ऐसे में विवाह से संबंधित लंबे समय से रुका हुआ कार्य पूरा हो सकता है। अविवाहितों का विवाह हो सकता है। दांपत्य जीवन में चली आ रही समस्या भी समाप्त हो सकती है। नौकरीपेशा जातकों के साथ-साथ बिजनेसमैन के लिए ये समय काफी अच्छा हो सकता है। आप अपनी प्रतिभा से कोई बड़ी डील पा सकते हैं। आपकी नेगोशिएशन पावर बढ़ेगी। ऐसे में जो काम केवल बातचीत के कारण रुके हुए थे, उनमें गति प्राप्त हो सकती है। आपकी कोई इच्छा भी पूरी हो सकती है। जीवन में सकारात्मक परिवर्तन हो सकते हैं।

    नौकरीपेशा जातकों के लिए ये समय अच्छा हो सकता है। इंक्रीमेंट और प्रमोशन का योग है। इसके साथ ही वेतन में वृद्धि के भी योग बन रहे हैं। आपको नए प्रोजेक्ट्स या फिर क्लाइंट मिल सकते हैं, जिससे आपके काम की सराहना हो सकती है। छात्रों के लिए भी ये समय अच्छा जा सकता है। समाज में मान-सम्मान की वृद्धि हो सकती है।

    तुला राशि गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में जाने का असर (Libra Zodiac)

    इस राशि के जातकों के लिए गुरु का अश्लेषा नक्षत्र के दूसरे चरण में जाना अनुकूल हो सकता है। इस राशि की गोचर कुंडली के दसवें भाव में गुरु विराजमान है। ऐसे में इस राशि के जातकों को मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा के साथ करियर में काफी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। नौकरीपेशा जातकों को इस अवधि में अच्छा लाभ मिल सकता है। लंबे समय से रुका हुआ काम में एक बार फिर से गति आएगी। इसके साथ ही प्रमोशन, इंक्रीमेंट के भी अवसर बन रहे हैं। आपकी मेहनत, आपके कार्य और आपकी परफॉर्मेंस अगर आपके बॉस या सीनियर्स को नजर आ सकती है।

    व्यापार की दृष्टि से बात करें, तो गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में जाना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। आपके मन में अपने व्यापार के विस्तार को लेकर जो प्लानिंग चल रही हैं, तो वह अब आरंभ करना लाभकारी हो सकती है। बिजनेस के दृष्टिकोण से कोई प्रॉपर्टी खरीदनी थी या सेल्स बढ़ाने के लिए कोई नई स्ट्रेटजी बनानी थी, तो उसमें सफलता हासिल हो सकती है। नए काम का आरंभ कर सकते हैं। आय के नए स्त्रोत खुल सकते हैं।

    अगर परिवार में काफी समय से कोई समस्या चल रही थी, कोई आपसी तनाव था या कोई प्रॉपर्टी का मामला लटका हुआ था, तो उसमें अब लाभ मिल सकता है। आपकी वाणी का प्रभाव देखने को मिल सकता है। वाहन, प्रॉपर्टी खरीदने या फिर बेच सकते हैं। कोर्ट-कचहरी के मामलों में भी सफलता हासिल हो सकती है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं अगर आपको परेशान कर रही थी, तो उसमें भी सुधार देखने को मिल सकता है।

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    सिंह राशि पर पर गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में जाने का असर (Leo Zodiac)

    सिंह राशि के जातकों के लिए गुरु का अश्लेषा नक्षत्र के दूसरे पद में जाना कई मायनों में खास हो सकता है। इस राशि की गोचर कुंडली के बारहवें भाव में गुरु रहने वाले हैं। ऐसे में वह इस राशि में विपरीत राजयोग का निर्माण कर रहे है। विदेश से जुड़े कामों में सफलता हासिल हो सकती है। विदेश से धन प्राप्ति के योग बन रहे हैं। अगर आप विदेश जाने का मौका मिल सकता है। आपकी लंबे समय से कोई सरकारी फाइल रुकी हुआ है, तो उसमें सफलता हासिल हो सकती है।

    प्रॉपर्टी और विदेश से जुड़े व्यापार में लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। चौथे भाव पर गुरु की दृष्टि है। ऐसे में आप विदेश में घर या फिर प्रापर्टी लेने का प्रयास कर रहे हैं, तो उसमें सफलता हासिल हो सकती है। आयात निर्यात के व्यापार में भी लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। गुरु बुध के नक्षत्र में होने के कारण आपको नए कॉन्टैक्ट्स बन सकते हैं। पुराने रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं और विदेश से जुड़े हुए कार्य में अचानक कोई बड़ी सफलता आपको मिल सकती है,

    कोर्ट-कचहरी के मामलों में भी सफलता हासिल हो सकती है। स्वास्थ्य अच्छा रहने वाला है। इसके साथ ही घर में कोई सदस्य लंबे समय से अस्पताल में भर्ती है, तो उसे भी लाभ मिल सकता है। आपको अचानक धन लाभ भी हो सकता है।

    विदेश में काम करने वाले या विदेश से जुड़कर बिजनेस करने वाले लोगों को अचानक कोई ऐसा लाभ मिल सकता है, जिसकी शायद उन्होंने पहले उम्मीद भी नहीं की होगी। पैतृक संपत्ति से संबंधित कोई विवाद अगर चल रहा है या प्रॉपर्टी को लेकर कोर्ट में कोई केस चल रहा है, तो वह भी अचानक आपके पक्ष में आ सकता है। पैतृक संपत्ति मिलने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे जातकों को इस अवधि में सफलता हासिल हो सकती है।

  • संत के मंत्र की वजह सांप ने डंसना छोड़ दिया:  प्रेरक कथा:

    संत के मंत्र की वजह सांप ने डंसना छोड़ दिया: प्रेरक कथा:

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    पुरानी लोक कथा है, एक गांव के बाहर एक सांप रहता था। वह रास्ते से गुजरने वाले लोगों को वह डंस लेता था। धीरे-धीरे उसका इतना आतंक फैल गया कि लोगों ने उस रास्ते से गुजरना लगभग बंद कर दिया।

    एक दिन गांव में एक विद्वान संत आए और वहां ठहर गए। कुछ दिन बाद उन्हें दूसरे गांव जाना था और उनका रास्ता उसी स्थान से होकर गुजरता था, जहां सांप रहता था। गांव वालों ने उन्हें सावधान किया, लेकिन संत ने कहा कि मुझे एक मंत्र मालूम है, जिससे सांप नहीं डंसेगा, इतना बोलने के बाद संत निडर होकर आगे बढ़ गए।

    उस रास्ते पर पहुंचते ही सांप फुफकारता हुआ उनके सामने आ गया। उसने संत को डंसने की कोशिश की। संत ने एक मंत्र का जप किया। सांप शांत होकर उनके चरणों में आ गया। संत ने उसे समझाया, “अब किसी को मत डंसना। हिंसा छोड़कर भक्ति और अच्छे कर्मों का मार्ग अपनाओ।”

    इस घटना के बाद सांप ने लोगों को डराना और डंसना बंद कर दिया, कुछ समय बाद गांव वालों को समझ आ गया कि सांप अब किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है। अब वे उसे कमजोर समझकर परेशान करने लगे। कोई उस पर पत्थर फेंकता, कोई उसे छेड़ता और एक दिन एक व्यक्ति ने उसकी पूंछ पकड़कर उसे जमीन पर पटक दिया। सांप बुरी तरह घायल हो गया।

    डर और चोट के कारण उसने बिल से बाहर निकलना बंद कर दिया। वह कमजोर होता गया। कुछ समय बाद वही संत फिर गांव आए। उन्हें सांप की हालत का पता चला तो वे उसे खोजते हुए उसके बिल तक पहुंचे। संत की आवाज सुनकर सांप बिल से बाहर आया।

    संत ने उसकी दशा देखकर कहा, “मैंने तुम्हें किसी को डंसने से मना किया था, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं था कि तुम अपनी रक्षा करना भी छोड़ दो। तुम्हें अपनी रक्षा के लिए फुफकारना चाहिए था। लोगों को यह संकेत देना चाहिए था कि तुम्हारे साथ गलत व्यवहार न करें। बस किसी को डंसना नहीं है।”

    प्रसंग की सीख

    • अपनी सीमाएं स्पष्ट करें

    हर रिश्ते में कुछ सीमाएं जरूरी हैं। कोई बार-बार आपका समय, सम्मान या भावनाओं का गलत फायदा उठा रहा है, तो शांत शब्दों में अपनी सीमा स्पष्ट करें। “मैं इस तरह की बात स्वीकार नहीं करूंगा” कहना बदतमीजी नहीं, आत्मसम्मान है।

    • हर बात सहना अच्छाई नहीं है

    कई लोग अच्छे बनने के नाम पर गलत व्यवहार भी सहते रहते हैं। उन्हें डर होता है कि विरोध करने से रिश्ता खराब हो जाएगा, लेकिन लगातार अपमान सहना समस्या का समाधान नहीं है। विनम्र रहते हुए असहमति जताना सीखिए।

    • प्रतिक्रिया और प्रतिशोध में अंतर समझिए

    आत्मरक्षा का उद्देश्य खुद को सुरक्षित रखना है, बदला लेना नहीं। किसी ने आपको चोट पहुंचाई, तो उसका नुकसान करना जरूरी नहीं। बेहतर रास्ता है- स्थिति से दूरी बनाना, स्पष्ट चेतावनी देना और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता लेना।

    • “ना” कहना सीखिए

    हर अनुरोध स्वीकार करना आपकी जिम्मेदारी नहीं है। यदि कोई काम आपके समय, मूल्यों या क्षमता के विरुद्ध है, तो विनम्रता से “नहीं” कह सकते हैं। एक स्पष्ट “नहीं” कई बड़ी परेशानियों से बचा सकता है।

    • अपनी आवाज का इस्तेमाल करें

    कभी-कभी सामने वाले को यह पता नहीं होता कि उसका व्यवहार आपको परेशान कर रहा है। शांत, लेकिन दृढ़ आवाज में अपनी बात कहिए। कमजोर होकर चुप रहने और आक्रामक होकर लड़ने के बीच का रास्ता अपनाइए।

    • सही लोगों से मदद लें

    यदि कोई व्यक्ति लगातार धमका रहा है, परेशान कर रहा है या नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है, तो अकेले सब कुछ संभालने की कोशिश न करें। परिवार, मित्र, संस्था या जरूरत के अनुसार संबंधित अधिकारियों की मदद लें।

    • भावनाओं पर नियंत्रण रखें

    गुस्से में लिया गया फैसला अक्सर स्थिति को और बिगाड़ देता है। पहले खुद को शांत करें, फिर जवाब दें। आपकी सबसे बड़ी ताकत कई बार आपकी प्रतिक्रिया पर नियंत्रण होती है।

    • हर लड़ाई लड़ना जरूरी नहीं

    सीमा तय करने का अर्थ हर बात पर बहस करना नहीं है। कुछ परिस्थितियों में वहां से हट जाना ही सबसे समझदारी भरा कदम होता है। अपनी ऊर्जा उन चीजों के लिए बचाइए जो वास्तव में महत्वपूर्ण हैं।

    • आत्मसम्मान और अहंकार को अलग रखें

    आत्मसम्मान कहता है, “मेरे साथ गलत व्यवहार मत करो।” अहंकार कहता है, “मेरी बात हर हाल में मानो।” दोनों में अंतर समझना जरूरी है। आत्मसम्मान दूसरों का सम्मान करते हुए अपनी गरिमा बनाए रखता है। किसी को नुकसान न पहुंचाएं, लेकिन जरूरत पड़ने पर फुफकारना मत भूलिए यानी किसी को नुकसान पहुंचाए बिना अपनी सुरक्षा, सम्मान और सीमाओं की रक्षा कीजिए। शांत स्वभाव बहुत अच्छी बात है, लेकिन अपनी भलमनसाहत को कमजोरी बनने न दें।

  • क्या 100g सत्तू से पूरी हो सकती है पोस्ट-वर्कआउट प्रोटीन की जरूरत? डॉक्टर सरीन से जानिए.

    क्या 100g सत्तू से पूरी हो सकती है पोस्ट-वर्कआउट प्रोटीन की जरूरत? डॉक्टर सरीन से जानिए.

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    जिम या वर्कआउट के बाद मसल रिकवरी के लिए प्रोटीन बेहद जरूरी माना जाता है। ज्यादातर लोग प्रोटीन की बॉडी डिमांड को पूरा करने के लिए कई तरह के प्रोटीन पाउडर का सेवन करते हैं जो काफी महंगे होते हैं, साथ ही इसका ज्यादा सेवन सेहत पर कई तरह  के साइड इफेक्ट भी कर सकता है। प्रोटीन पाउडर का ज्यादा सेवन सेहत को नुकसान पहुंचाता है इसके बावजूद भी लोग धड़ल्ले से इसका सेवन कर रहे है, लेकिन इस सबके बीच सोशल मीडिया पर सत्तू के शेक को प्रोटीन पाउडर का विकल्प बताया जा रहा है। अब सवाल ये उठता है कि सच में सत्तू का शेक प्रोटीन पाउडर की जगह ले सकता है?

    प्रो.डॉ. शिव कुमार सरीन, प्रोफेसर ऑफ एमिनेंस (हेपेटोलॉजी), चांसलर एवं डायरेक्टर, ILBS, नई दिल्ली ने सत्तू को एक बेहतरीन प्राकृतिक प्रोटीन स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि आजकल लोग महंगे प्रोटीन सप्लीमेंट्स और विदेशी सुपरफूड्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जबकि सत्तू जैसे देसी खाद्य पदार्थ पोषण के मामले में बेहद समृद्ध हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि प्रोटीन के लिए सत्तू का सेवन कैसे प्रोटीन पाउडर से ज्यादा बेहतर है।

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    प्रोटीन पाउडर कैसे सेहत पर करता है असर?

    सत्तू भुने हुए चने से बनता है, इसलिए यह हाई क्वलिटी वाला प्लांट-बेस्ड प्रोटीन प्रदान करता है, जो खासकर शाकाहारी लोगों के लिए अच्छा विकल्प है। इसमें केवल प्रोटीन ही नहीं, बल्कि फाइबर, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं, जिससे यह एक संतुलित खाद्य पदार्थ बन जाता है। सत्तू लंबे समय तक ऊर्जा देता है, पाचन को बेहतर बनाता है, पेट को देर तक भरा रखता है और ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से बचाने में मदद कर सकता है।

    सत्तू में भरपूर फाइबर होता है, जो ब्लड शुगर और पाचन को हेल्दी रखने में मदद करता है। इसका सेवन करने से कब्ज से निजात मिलती है। इसमें आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और मैंगनीज जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स प्रचुर मात्रा में होते हैं जो बॉडी को हेल्दी रखते हैं। इसकी तासीर ठंडी होने के कारण यह पेट की गर्मी और ब्लोटिंग को शांत करता है। ये शरीर में नेचुरल कूलिंग एजेंट का काम करता है। इसमें कोई आर्टिफिशियल फ्लेवर, प्रिजर्वेटिव या प्रोसेस्ड शुगर नहीं होती जो बॉडी के लिए उपयुक्त है और बजट फ्रेंडली भी है। सत्तू वर्कआउट के बाद की प्रोटीन की जरूरतों को अकेले पूरा कर सकता है।

    100 ग्राम सत्तू में कितना प्रोटीन होता है?

    भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) के अनुसार, 100 ग्राम चने के सत्तू में लगभग 20 से 22 ग्राम प्रोटीन होता है। वहीं बाजार में मिलने वाले अधिकांश व्हे प्रोटीन पाउडर में 100 ग्राम में करीब 70 से 90 ग्राम प्रोटीन हो सकता है। इसलिए केवल प्रोटीन की मात्रा के हिसाब से सत्तू व्हे प्रोटीन की बराबरी नहीं करता, लेकिन यह एक प्राकृतिक और पोषक विकल्प जरूर है।

    क्या सत्तू पोस्ट-वर्कआउट रिकवरी में मदद करता है?

    Montenegrin Journal of Sports Science and Medicine में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, सत्तू में मौजूद अमीनो एसिड और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट वर्कआउट के बाद शरीर को रिकवर करने में मदद कर सकते हैं। सत्तू का सेवन करने से शरीर को दोबारा से रिकवर होने में मदद मिलती है। सत्तू का शेक मांसपेशियों में ग्लाइकोजन स्टोर को रीफिल करने में मददगार हो सकता है। गर्म मौसम में ये शेक शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसमें फाइबर अधिक होने से लंबे समय तक पेट भरा रहता है और अनहेल्दी स्नैक्स खाने की इच्छा कंट्रोल रहती है। इसमें मैग्नीशियम, पोटैशियम और दूसरे जरूरी मिनरल्स भी मौजूद होते हैं जो बॉडी को हेल्दी रखते हैं। वर्कआउट करने वाले लोगों में सत्तू का सेवन बेहतरीन विकल्प है। शाकाहारी लोग अगर वर्कआउट करते हैं, रनिंग करते हैं तो रोजाना सत्तू के शेक का सेवन कर सकते हैं बॉडी को पर्याप्त प्रोटीन और पोषण मिलेगा।

    प्रोटीन पाउडर का सेवन सिर्फ इन कारणों से करें

    फिटनेस एक्सपर्ट के मुताबिक सत्तू में व्हे प्रोटीन की तुलना में ल्यूसिन (Leucine) कम होता है, जो मसल प्रोटीन सिंथेसिस के लिए महत्वपूर्ण अमीनो एसिड है। जो लोग बॉडीबिल्डिंग या हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग करते हैं, उन्हें अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है। बहुत अधिक मात्रा में सत्तू खाने से कुछ लोगों को गैस, पेट फूलना या पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है ऐसे लोग प्रोटीन पाउडर का सेवन कर सकते हैं।

    वर्कआउट के बाद सत्तू कैसे लें?

    • वर्कआउट के बाद सत्तू का सेवन पानी और नींबू के साथ सत्तू का शरबत बनाकर किया जा सकता है।
    • दूध के साथ सत्तू स्मूदी बनाकर भी इसका सेवन किया जा सकता है।
    • दही और फलों के साथ सत्तू का सेवन फायदेमंद होता है।
    • नट्स और बीज मिलाकर सत्तू प्रोटीन बाउल तैयार कर सकते हैं और उसका सेवन कर सकते हैं।

    क्या कहती है रिसर्च?

    Archives of Current Research International में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि लगभग 100 ग्राम सत्तू शरीर को प्रोटीन, फाइबर और ऊर्जा देने के लिहाज से पोस्ट-वर्कआउट डाइट का अच्छा हिस्सा बन सकता है। हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि यह हर स्थिति में व्हे प्रोटीन शेक का पूरी तरह विकल्प है। विशेष रूप से एथलीट्स और बॉडीबिल्डर्स के लिए व्हे प्रोटीन की जैव उपलब्धता (Bioavailability) और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यदि आप प्रोफेशनल एथलीट हैं, बॉडी बिल्डिंग करते हैं या किसी बीमारी से पीड़ित हैं, तो अपनी प्रोटीन की आवश्यकता और सप्लीमेंट्स के बारे में डॉक्टर या स्पोर्ट्स न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह अवश्य लें।

  • क्या सिर्फ 12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग से घट सकता है वजन, वेट लॉस से लेकर मेटाबॉलिज्म तक पर कैसा होता है असर, डायटीशियन से जानिए..

    क्या सिर्फ 12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग से घट सकता है वजन, वेट लॉस से लेकर मेटाबॉलिज्म तक पर कैसा होता है असर, डायटीशियन से जानिए..

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    बढ़ता वजन कई क्रॉनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर,थायराइड और दिल के रोगों का जोखिम पैदा कर सकता है, इसलिए हर उम्र में वजन को कंट्रोल रखना बेहद जरूरी है। वजन को कंट्रोल रखने के लिए डाइट का ध्यान रखना, बॉडी को एक्टिव रखना और तनाव को कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। डाइट में जंक फूड,फास्ट फूड,फ्रोजन फूड,लेट नाइट स्नैकिंग हमारा वेट गेन करने में अहम रोल निभाती है। फिटनेस फ्रीक लोगों में वजन घटाने के कई ट्रेंड चलन में है जैसे इंटरमिटेंट फास्टिंग, 12-घंटे ओवरनाइट फास्टिंग,टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग, कैलोरी डेफिसिट डाइट, हाई-प्रोटीन डाइट, लो-कार्ब डाइट, कीटो , DASH और मेडिटेरेनियन डाइट समेत 15 से 20 तरीके लोग वेट लॉस करने में ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इन सब में आजकल लोग 12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। डाइट और न्यूट्रिशन विशेषज्ञों के अनुसार, 12 घंटे का यह सिंपल गैप न केवल वजन कंट्रोल करने में मदद कर सकता है, बल्कि आपके मेटाबॉलिज्म को भी दुरुस्त रखता है। आइए डायटीशियन से जानते हैं कि ओवरनाइट फास्टिंग आपके शरीर पर कैसे काम करती है और किसे इसे अपनाना चाहिए।

    बढ़ता वजन कई क्रॉनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर,थायराइड और दिल के रोगों का जोखिम पैदा कर सकता है, इसलिए हर उम्र में वजन को कंट्रोल रखना बेहद जरूरी है। वजन को कंट्रोल रखने के लिए डाइट का ध्यान रखना, बॉडी को एक्टिव रखना और तनाव को कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। डाइट में जंक फूड,फास्ट फूड,फ्रोजन फूड,लेट नाइट स्नैकिंग हमारा वेट गेन करने में अहम रोल निभाती है। फिटनेस फ्रीक लोगों में वजन घटाने के कई ट्रेंड चलन में है जैसे इंटरमिटेंट फास्टिंग, 12-घंटे ओवरनाइट फास्टिंग,टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग, कैलोरी डेफिसिट डाइट, हाई-प्रोटीन डाइट, लो-कार्ब डाइट, कीटो , DASH और मेडिटेरेनियन डाइट समेत 15 से 20 तरीके लोग वेट लॉस करने में ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इन सब में आजकल लोग 12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। डाइट और न्यूट्रिशन विशेषज्ञों के अनुसार, 12 घंटे का यह सिंपल गैप न केवल वजन कंट्रोल करने में मदद कर सकता है, बल्कि आपके मेटाबॉलिज्म को भी दुरुस्त रखता है। आइए डायटीशियन से जानते हैं कि ओवरनाइट फास्टिंग आपके शरीर पर कैसे काम करती है और किसे इसे अपनाना चाहिए।

    ओवरनाइट फास्टिंग से क्या मतलब है?

    ओवरनाइट फास्टिंग का मतलब है रात का खाना खाने के बाद अगले दिन नाश्ता करने तक कुछ भी कैलोरी वाली चीज़ न खाना। यानी रात और सुबह के बीच के समय में खाने से परहेज करना, जैसे रात 8:00 बजे डिनर किया। इसके बाद रातभर कुछ नहीं खाया सिर्फ पानी, बिना चीनी की चाय या ब्लैक कॉफी लिया। अगले दिन सुबह 8:00 बजे नाश्ता किया। इस तरह डिनर और ब्रेकफास्ट के बीच 12 घंटे का अंतर ही 12-घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग कहलाता है। यह इंटरमिटेंट फास्टिंग का सबसे आसान और व्यावहारिक रूप माना जाता है, क्योंकि इसमें आपको पूरे दिन भूखे रहने की जरूरत नहीं होती। इसका मुख्य उद्देश्य देर रात की स्नैकिंग से बचना और शरीर को रात में भोजन पचाने तथा आराम करने का पर्याप्त समय देना है।

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    12 घंटों की फास्टिंग कैसे वजन घटाने में मदद करती है?

    इंटरमिटेंट फास्टिंग आजकल वजन घटाने के सबसे लोकप्रिय तरीकों में से एक बन चुकी है। कुछ  लोग 14 घंटे का उपवास और 10 घंटे का खाने का समय रखते हैं तो कुछ लोग 16 घंटे का उपवास और 8 घंटे के खाने के समय जैसा पैटर्न अपनाते हैं। हालांकि ये तरीके हर किसी के लिए जरूरी या व्यावहारिक नहीं होते। असल में रात के खाने और अगले दिन के नाश्ते के बीच सिर्फ 12 घंटे का अंतर रखना भी सेहत के लिहाज से फायदेमंद हो सकता है। यदि इसे संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद के साथ अपनाया जाए, तो यह लंबे समय तक हेल्दी तरीके से वजन कंट्रोल रखने में मदद कर सकता है। इस तरह की फास्टिंग का उद्देश्य शरीर को भूखा रखना नहीं है, बल्कि पाचन तंत्र को आराम देना, शरीर की सामान्य मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं को सुचारु रूप से काम करने का समय देना और नियमित खानपान की आदत विकसित करना है, जिसे लंबे समय तक आसानी से अपनाया जा सके।

    12 घंटों की फास्टिंग करने से सेहत को कौन-कौन से होते हैं फायदे

    1. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इस लेख को लिखने वाली क्लीनिकल डायटीशियन बताती है कि जब भी हम कुछ खाते हैं, शरीर इंसुलिन नामक हार्मोन रिलीज करता है, जो खून में मौजूद ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाकर ऊर्जा बनाने में मदद करता है। अगर आप बार-बार स्नैकिंग करते हैं या देर रात तक खाते रहते हैं, तो इंसुलिन का स्तर लंबे समय तक ऊंचा बना रहता है। इससे शरीर को भोजन पचाने और जमा ऊर्जा का उपयोग करने के बीच संतुलन बनाने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
    2. 12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग के दौरान भोजन पचने के बाद इंसुलिन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है। हालांकि यह बदलाव लंबी अवधि की फास्टिंग जितना गहरा नहीं होता, फिर भी इससे शरीर को जमा ऊर्जा का उपयोग करने का मौका मिलता है और समय के साथ ऊर्जा संतुलन बेहतर हो सकता है।
    3. 12 घंटों की फास्टिंग शरीर की जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) के अनुरूप काम करती है। हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म 24 घंटे की प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी सर्कैडियन रिद्म के अनुसार काम करता है। कई रिसर्च में ये बात सामने आ चुकी है कि शरीर दिन के शुरुआती समय में भोजन को देर रात की तुलना में अधिक प्रभावी ढंग से पचाता और उपयोग करता है। अगर आप रात का खाना शाम 7:30 से 8 बजे तक खा लेते हैं और लगभग 12 घंटे बाद नाश्ता करते हैं, तो यह शरीर की प्राकृतिक लय के अनुरूप होता है। इसके विपरीत, देर रात खाना खाने से ब्लड शुगर कंट्रोल बिगड़ सकता है, कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है और नींद प्रभावित हो सकती है। ये सभी कारण धीरे-धीरे वजन बढ़ने का जोखिम बढ़ाते हैं।
    4. अधिकांश लोगों में वजन बढ़ने की बड़ी वजह मुख्य भोजन नहीं, बल्कि रात के खाने के बाद की स्नैकिंग, मीठे ड्रिंक और टीवी देखते समय बिना सोचे-समझे खाना होता है। 12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग इस आदत को अपने आप सीमित कर देती है। कई लोगों को इससे सुबह पेट हल्का महसूस होता है और गैस, एसिडिटी व भारीपन जैसी समस्याओं में भी राहत मिल सकती है।
    5. बहुत लंबे समय तक उपवास रखने से कुछ लोगों को अत्यधिक भूख, थकान या सामाजिक गतिविधियों में असुविधा महसूस हो सकती है, जिससे बाद में जरूरत से ज्यादा खाने का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन 12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, माता-पिता और बुजुर्गों सहित अधिकांश लोगों की दिनचर्या में आसानी से फिट हो जाती है। वजन कंट्रोल रखने के लिए लंबे समय तक अपनाई जा सकने वाली आदतें अक्सर कठोर नियमों से अधिक प्रभावी साबित होती हैं।
    6. 12 घंटों की फास्टिंग मेटाबॉलिक हेल्थ में सुधार करती है।  ओवरनाइट फास्टिंग के फायदे केवल वजन घटाने तक सीमित नहीं हैं बल्कि इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर हो सकती है, ब्लड शुगर कंट्रोल में सुधार आ सकता है और संपूर्ण मेटाबॉलिक हेल्थ को स्पोर्ट मिल सकती है। ये फायदे विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं जो मोटापे, प्रीडायबिटीज या मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जूझ रहे हैं। डायटीशियन के मुताबिक फास्टिंग को किसी चमत्कारी उपाय के हेल्दी लाइफस्टाइल का एक हिस्सा ही माना जाना चाहिए।
    7. फास्टिंग का मतलब यह नहीं कि खाने के समय आप कुछ भी खा लें। आपको फास्टिंग के साथ ही हेल्दी डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना भी जरूरी है। भोजन में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन, हेल्दी फैट और फाइबर शामिल करना जरूरी है। ये डाइट लंबे समय तक पेट भरा रखती हैं, ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में मदद करती हैं और शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करती हैं। इसके विपरीत, तली-भुनी चीजें, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, मीठे पेय और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन फास्टिंग के फायदों को कम कर सकता है। इसके साथ ही, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है। इससे पाचन बेहतर रहता है, शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और अनावश्यक भूख कम लग सकती है।

    किन लोगों को फास्टिंग से बचना चाहिए?

    हालांकि 12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग अधिकांश हेल्दी लोगों के लिए सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन यह हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। इन लोगों को फास्टिंग शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए

    • गर्भवती महिलाएं
    • स्तनपान कराने वाली महिलाएं
    • किशोर, जिनकी पोषण संबंधी जरूरतें अधिक होती हैं
    • डायबिटीज की दवा लेने वाले लोग
    • ईटिंग डिसऑर्डर का इतिहास रखने वाले लोग
    • किसी गंभीर या पुरानी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति

    इंटरमिटेंट फास्टिंग के फायदे पाने के लिए जरूरी नहीं कि आप 16 घंटे तक उपवास करें। कई लोगों के लिए रात के खाने और नाश्ते के बीच 12 घंटे का अंतर रखना ही एक आसान, व्यावहारिक और लंबे समय तक अपनाई जा सकने वाली आदत है।

    डिस्क्लेमर: – यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी तरह से पेशेवर चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी तरह का डाइट प्लान, फास्टिंग या लाइफस्टाइल में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या डायटीशियन से परामर्श अवश्य लें। स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के आधार पर इसके परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं।