कनाडा में एक शख्स के साथ जंगल में ऐसा खौफनाक हादसा हुआ था, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। साइकिल से जंगल के रास्ते से गुजर रहे इस व्यक्ति का सामना अचानक एक विशाल ग्रिजली भालू से हो गया था। देखते ही देखते भालू ने उस पर हमला कर दिया और शरीर को बुरी तरह जख्मी कर दिया था।
यह घटना ब्रिटिश कोलंबिया की बताई गई थी। 47 वर्षीय व्यक्ति जंगल के रास्ते पर साइकिल चला रहा था। वह पहले कई बार काले भालू देख चुका था और उसे लगा था कि शांत रहने पर भालू खुद वहां से चला जाएगा। इसलिए वह बिना घबराए खड़ा रहा था।
लेकिन इस बार सामने ग्रिजली भालू था। भालू धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा और कुछ ही दूरी पर आकर रुक गया। खतरा भांपते हुए उसने साइकिल को अपने और भालू के बीच कर लिया। उसके हाथ में एक डंडा भी था, जिसे उसने बचाव के लिए आगे कर रखा था।
भालू ने डंडे को मुंह से पकड़कर दूर फेंक दिया। इसके बाद शख्स ने अपने पास मौजूद खाने का बैग भी भालू की तरफ फेंक दिया, ताकि उसका ध्यान दूसरी तरफ चला जाए। लेकिन भालू खाने की तरफ नहीं गया और अचानक उस पर झपट पड़ा।
भालू ने घसीटकर झाड़ियों में पहुंचा दिया
हमले के दौरान भालू ने उसे बुरी तरह दबोच लिया और घसीटते हुए झाड़ियों की तरफ ले गया। उसके शरीर पर लगातार पंजों और दांतों से वार होते रहे। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि उसे लगा अब शायद वह जिंदा नहीं बच पाएगा।
उसी दौरान उसे अपनी जेब में रखे छोटे पॉकेट नाइफ का ध्यान आया। किसी तरह उसने चाकू निकाला और भालू की गर्दन पर वार कर दिया। चोट लगने के बाद भालू ने उसे छोड़ दिया और जंगल की तरफ चला गया।
लेकिन तब तक वह बुरी तरह घायल हो चुका था और शरीर से लगातार खून बह रहा था।
अपनी शर्ट फाड़कर रोका खून
मदद के लिए उसके पास कोई प्राथमिक उपचार का सामान नहीं था। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन फाड़ी और घायल हिस्से पर बांधकर खून रोकने की कोशिश की।
इसके बाद उसने अपनी क्षतिग्रस्त साइकिल उठाई और एक पैर के सहारे किसी तरह वहां से निकलने लगा। घायल होने के बावजूद उसने करीब 45 मिनट तक साइकिल चलाकर मदद की तलाश जारी रखी।
आखिरकार उसे लकड़हारों का एक केबिन दिखाई दिया। वहां मौजूद लोगों ने उसकी हालत देखी तो तुरंत उसकी मदद शुरू की और एयर एंबुलेंस को सूचना दी।
शरीर पर मिले 60 से ज्यादा घाव
अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने जब उसकी हालत देखी तो वे भी हैरान रह गए। उसके शरीर पर 60 से ज्यादा गहरे घाव थे। कुछ चोटें इतनी गंभीर थीं कि शरीर के अंदरूनी हिस्से तक दिखाई दे रहे थे।
डॉक्टरों ने कई घंटे तक ऑपरेशन किया और उसकी जान बचाई। इसके बाद उसे करीब 40 दिनों तक अस्पताल में इलाज कराना पड़ा।
इतनी गंभीर चोटों के बावजूद उसने जिंदगी की जंग जीत ली। इस हादसे के बाद भी उसने जंगल और साइकिलिंग से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई। हालांकि अब वह जंगल में पहले से कहीं ज्यादा सावधानी बरतता है।
यह घटना दिखाती है कि बेहद खतरनाक परिस्थिति में भी इंसान हिम्मत और सूझबूझ से काम ले तो बच निकलने की संभावना बनी रहती है। एक तरफ भालू का हमला, दूसरी तरफ शरीर पर दर्जनों गहरे घाव और फिर एक पैर से साइकिल चलाकर मदद तक पहुंचना—यह पूरा वाकया किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से शादी के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया था। दोनों परिवारों की सहमति से हुई शादी के बाद दूल्हे ने सोचा था कि नई जिंदगी की शुरुआत खुशियों के साथ होगी, लेकिन शादी की पहली ही रात हालात पूरी तरह बदल गए थे।
बताया गया था कि शादी धूमधाम से हुई थी। बारात, मेहमान और रस्मों के बाद दुल्हन को विदा कराकर घर लाया गया था। परिवार में नई बहू के आने की खुशी थी, लेकिन सुहागरात पर पति के सामने ऐसी स्थिति आ गई, जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।
चाकू दिखाकर पति को दी धमकी
पति का आरोप था कि सुहागरात के दौरान दुल्हन ने चाकू दिखाकर उसे धमकाया था। उसने कथित तौर पर पति को अपने करीब आने से मना किया और गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी थी।
दूल्हे के मुताबिक, यह स्थिति सिर्फ पहली रात तक सीमित नहीं रही थी। लगातार तीन रातों तक उसे इसी तरह डर और तनाव का सामना करना पड़ा था। इस वजह से वह इतना परेशान हो गया था कि शादी के बाद तय हनीमून की योजना भी रद्द करनी पड़ी थी।
दुल्हन ने बताया किसी और से प्रेम संबंध
कुछ दिनों बाद दुल्हन ने कथित तौर पर अपने परिवार और ससुराल वालों के सामने बताया था कि उसका पहले से किसी युवक के साथ प्रेम संबंध था। उसने पति के परिवार से उसे उसके प्रेमी के पास भेजने की मांग की थी।
इस बात को लेकर दोनों परिवारों में विवाद बढ़ गया था। मामला पंचायत तक पहुंचा और परिवार के लोगों ने आपसी बातचीत से विवाद सुलझाने की कोशिश की थी।
रात में घर से निकल गई दुल्हन
विवाद के बीच मामला थाने तक भी पहुंच गया था। परिवार के मुताबिक, इसी दौरान दुल्हन रात में घर से निकल गई थी। आरोप था कि वह घर की दीवार से बाहर निकली और अपने कथित प्रेमी के साथ चली गई।
इसके बाद पति और उसके परिवार ने पुलिस से संपर्क किया था। परिवार का कहना था कि शादी के बाद जो रिश्ता नई जिंदगी की शुरुआत माना जा रहा था, वह कुछ ही दिनों में विवाद और तनाव में बदल गया था।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती थी। शादी से पहले दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति और रिश्तों से जुड़ी जानकारी स्पष्ट होना कितना जरूरी है, यह घटना इसी ओर इशारा करती है।
शादी की खुशियां मातम में बदलीं, हल्दी की रस्म में डांस करते-करते दुल्हन की मौत
शादी वाले घर में चारों तरफ खुशियों का माहौल था। रिश्तेदार और मेहमान जुट चुके थे। घर में शादी की रस्में चल रही थीं और कुछ ही समय बाद बारात आने वाली थी। लेकिन अचानक ऐसा हादसा हुआ, जिसने पूरे परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं।
हल्दी की रस्म के दौरान होने वाली दुल्हन अपनी बहनों और रिश्तेदारों के साथ खुशी-खुशी डांस कर रही थी। इसी दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे घबराहट महसूस हुई और वह वॉशरूम चली गई। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर परिजनों को चिंता हुई।
परिवार के लोगों ने दरवाजा खोलकर देखा तो वह जमीन पर बेसुध पड़ी थी। आनन-फानन में स्थानीय डॉक्टर को बुलाया गया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। डॉक्टर ने शुरुआती तौर पर मौत की वजह हार्ट अटैक बताई।
बताया गया कि युवती पहले से हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रही थी और उसका इलाज भी चल रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही उसकी शादी होगी और बेटी को दुल्हन के रूप में विदा किया जाएगा, लेकिन एक पल में सारी खुशियां मातम में बदल गईं।
शादी की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। रिश्तेदार घर पहुंच चुके थे और हल्दी-मेहंदी की रस्में भी खुशी के साथ संपन्न हो रही थीं। दुल्हन ने शादी से पहले खूब फोटो खिंचवाए थे। तस्वीरों में उसके चेहरे पर शादी की खुशी साफ नजर आ रही थी। किसी ने सोचा भी नहीं था कि यही तस्वीरें परिवार के लिए उसकी आखिरी याद बन जाएंगी।
हादसे के बाद शादी वाले घर में चीख-पुकार मच गई। जिन घरातियों और रिश्तेदारों के बीच कुछ देर पहले हंसी-खुशी का माहौल था, वहां अब हर तरफ सन्नाटा पसरा था। जिस घर से बेटी की डोली उठनी थी, वहां उसकी अर्थी उठ गई।
परिवार ने इस दुखद घटना के बाद पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। अचानक हुई इस मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। हर कोई इस दर्दनाक हादसे को लेकर स्तब्ध है।
हार्ट अटैक क्यों आता है?
हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय की मांसपेशियों तक पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। आमतौर पर हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में प्लाक जमा होने से रास्ता संकरा हो जाता है। कई मामलों में प्लाक टूटने के बाद रक्त का थक्का बन सकता है, जिससे धमनी में रक्त का प्रवाह अचानक रुक जाता है और हार्ट अटैक की स्थिति पैदा हो सकती है।
हालांकि किसी भी अचानक हुई मौत की सही वजह डॉक्टर की जांच और आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होती है।
उत्तर प्रदेश के कुछ समय पहले स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया था। विभागीय रिकॉर्ड की जांच के दौरान एक ही नाम, पिता का नाम और जन्मतिथि वाले छह कर्मचारियों का अलग-अलग जिलों में तैनात होने का मामला सामने आया। इसके बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।
बताया गया था कि मामला एक्स-रे टेक्नीशियन के पद पर हुई नियुक्तियों से जुड़ा था। वर्ष 2016 में स्वास्थ्य विभाग की भर्ती प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में पदों पर नियुक्तियां की गई थीं। इसी सूची में एक व्यक्ति का नाम भी शामिल था, जिसे एक जिले में तैनाती मिली थी।
बाद में जब कर्मचारियों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज किया गया तो रिकॉर्ड में एक जैसी जानकारियां देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। अलग-अलग जिलों में तैनात छह कर्मचारियों के नाम एक जैसे बताए गए थे। उनके पिता के नाम और जन्मतिथि भी समान थी। इनमें से कुछ कर्मचारियों का स्थायी पता भी एक जैसा दर्ज होने की बात सामने आई थी।
रिकॉर्ड में इन कर्मचारियों की तैनाती फर्रुखाबाद, बांदा, बलरामपुर, बदायूं, रामपुर और शामली समेत अलग-अलग जिलों में बताई गई थी। ऐसे में सवाल उठने लगा कि क्या ये वास्तव में अलग-अलग व्यक्ति हैं या एक ही पहचान का इस्तेमाल करके कई जगह नौकरी हासिल की गई।
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब वेतन से जुड़े आंकड़ों की पड़ताल की गई। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित पद पर तैनात कर्मचारी को हर महीने करीब 69 हजार रुपये वेतन मिलता था। इसी आधार पर अलग-अलग जिलों में सरकारी खजाने से बड़ी रकम के भुगतान का अनुमान सामने आया।
हालांकि, यह रकम वास्तव में फर्जीवाड़े के जरिए निकाली गई या रिकॉर्ड में किसी तकनीकी अथवा दस्तावेजी गड़बड़ी की वजह से ऐसा हुआ, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होना था। केवल एक जैसे नाम और विवरण सामने आने से किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना भी उचित नहीं था।
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के लिए अधिकारियों की एक टीम गठित की थी। अधिकारियों ने रिकॉर्ड की जांच कर पूरे मामले की वास्तविक स्थिति पता लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही थी।
अब जांच में यह स्पष्ट होना था कि छह जिलों में एक जैसी पहचान वाले कर्मचारियों का रिकॉर्ड कैसे तैयार हुआ और वर्षों तक विभागीय स्तर पर इसकी जानकारी क्यों नहीं हो सकी। मामला सामने आने के बाद सरकारी नियुक्तियों और रिकॉर्ड सत्यापन की व्यवस्था पर भी सवाल उठे थे।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कुछ समय पहले भिखारियों को लेकर किए गए एक सर्वे के दौरान ऐसे आंकड़े सामने आए थे, जिन्होंने लोगों को हैरान कर दिया था। सर्वे में शहर के हजारों भिखारियों की स्थिति और उनकी आय से जुड़ी जानकारी जुटाई गई थी।
बताया गया था कि सर्वे का उद्देश्य भिक्षावृत्ति करने वाले लोगों की पहचान करना और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ उनकी वास्तविक स्थिति का पता लगाना था। इस दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों से जानकारी जुटाई गई थी।
सर्वे में सामने आया था कि भीख मांगने वाले सभी लोग आर्थिक रूप से बेहद कमजोर नहीं थे। कुछ लोग नियमित तौर पर भीख मांगते थे और उनकी रोजाना की कमाई भी अच्छी खासी बताई गई थी। कुछ मामलों में यह रकम नौकरीपेशा लोगों की मासिक आय के बराबर या उससे अधिक होने का दावा किया गया था।
महिलाओं की कमाई को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई थी। खास तौर पर छोटे बच्चों के साथ या गर्भवती महिलाओं द्वारा भीख मांगने पर लोगों की ओर से अधिक मदद मिलने की बात कही गई थी। कुछ मामलों में महिलाओं की रोजाना कमाई हजारों रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया था।
सर्वे के दौरान यह भी सामने आया था कि कुछ लोगों के पास मोबाइल फोन और पहचान से जुड़े दस्तावेज मौजूद थे। इससे यह सवाल भी उठा था कि शहर में भीख मांगने का काम कितने लोगों के लिए मजबूरी था और कितने लोग इसे नियमित कमाई के साधन के रूप में कर रहे थे।
लखनऊ के व्यस्त इलाकों में भीख मांगने वालों की संख्या अधिक होने की बात सामने आई थी। खासकर रेलवे स्टेशन और प्रमुख बाजारों के आसपास रोजाना बड़ी संख्या में लोग भीख मांगते दिखाई देते थे। ऐसे स्थानों पर लोगों की आवाजाही अधिक होने के कारण कमाई भी अपेक्षाकृत ज्यादा होने का दावा किया गया था।
हालांकि, इन आंकड़ों को किसी व्यक्ति की वास्तविक और स्थायी आय मानना उचित नहीं होगा। भीख मांगने वालों की आमदनी स्थान, दिन और परिस्थितियों के हिसाब से काफी बदल सकती है। सर्वे में सामने आए आंकड़ों के आधार पर ही उनकी आर्थिक स्थिति का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता।
भारत में किसी मिडिल क्लास फैमिली से जब आप उनके बड़े खर्चों के बारे में पूछेंगे तो बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर होने वाला खर्चा उसमें जरूर शामिल होगा। स्कूल की फीस, ट्यूशन की फीस और बच्चों के आने-जाने के लिए बस या फिर वैन पर होने वाले खर्चे का जिक्र जरूर किया जाएगा, लेकिन अगर आप दुबई में स्कूल की पढ़ाई पर होने वाले खर्च के बारे में जान लेंगे तो आपके होश उड़ जाएंगे।
जी हां, दुबई में रहने वाली एक महिली ने हाल फिलहाल में सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड कर अपनी बेटी के स्कूल खर्च की जानकारी सभी को दी है। महिला ने जो खर्चा बताया उसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया।
दुबई में रहने वाली इस महिला की बेटी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ती है और उसने बताया कि उसके ट्यूशन का सालाना खर्चा लगभग 14.34 लाख रुपये होता है। इसके अलावा बच्ची के ट्रांसपोर्ट पर वह महिला करीब 3.12 लाख रुपये खर्च करती है। महिला के इस दावे ने एक ऑनलाइन डिबेट शुरू कर दी है। लोगों का कहना है कि इससे अच्छा तो अपने बच्चों के यूएस या यूरोपीय देशों में पढ़ा लो।
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कौन सा स्कूल है इतना महंगा?
दुबई में रहने वाली इस महिला का नाम वेरोनिका है, महिला अपने इंस्टाग्राम पर रेगुलर तौर पर अपनी फैमिली लाइफ की कुछ बातें शेयर करती हैं। हाल ही में एक इंस्टाग्राम वीडियो में उसने अपनी बेटी को दुबई के GEMS इंटरनेशनल स्कूल में भेजने में आने वाले अलग-अलग खर्चों के बारे में बताया। उसने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चे के असेसमेंट से पहले लगभग 13,000 रुपये की असेसमेंट फीस देनी होती है। फिर सालाना ट्यूशन लगभग 14.34 लाख रुपये है जिसे वह किस्तों में चुकाती है।
26 हजार यूनिफॉर्म का खर्चा
महिला ने बताया कि उसके यह खर्चे यहीं खत्म नहीं होते। स्कूल ट्रांसपोर्ट का खर्च भी 3.12 लाख रुपये सालाना होता है। वेरोनिका ने कहा कि बस सर्विस बच्चों को घर से पिक करती है और स्कूल के बाद उन्हें वापस छोड़ती है। इसके अलावा यूनिफॉर्म की कीमत भी लगभग 26 हजार रुपये है।
खाने के लिए स्कूल से कुछ नहीं मिलता
रजिस्ट्रेशन, री-एनरोलमेंट और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज से कुल बिल में और खर्च जुड़ सकता है। एक खर्च जिसने उन्हें खास तौर पर हैरान किया है बच्ची का खाना जिसे ट्यूशन फीस में शामिल नहीं किया है। वह रोजना अपनी बेटी का लंच घर पर बनाती है और उसे हर दिन लंच बॉक्स साथ में देती है।
लोगों की प्रतिक्रियाएं
वेरोनिका के इस वीडियो ने लोगों को हैरान करने का काम किया है। इस वीडियो को देखने के बाद दुबई में इंटरनेशनल एजुकेशन के महंगे खर्च पर बहस शुरू हो गई है। एक यूजर ने लिखा है, “सिर्फ एक बच्चे के लिए यह बहुत सारा पैसा है; यह ऐसा है जैसे आप यूनिवर्सिटी ट्यूशन के लिए पैसे दे रहे हों।”
एक और अन्य यूजर ने लिखा, “क्रेजी, इससे तो USA में पढ़ाई करना सस्ता है, कभी-कभी तो यह फ्री भी होता है।” एक तीसरे ने कमेंट किया, “खाड़ी देशों में पढ़ाई बहुत महंगी है, इसीलिए हर कोई अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए यूरोप और US जा रहा है।”
कुछ यूजर्स ने इस खर्चे को सही ठहराया है। एक यूजर ने लिखा है कि इस तरह के स्कूल से निकलने वाले बच्चे कर्मचारी नहीं बनते या वो नौकरी नहीं करते बल्कि वह भविष्य के लिए एंटरप्रेन्योर और साइंटिस्ट बनाते हैं, यही हमारे बच्चों में असली इन्वेस्टमेंट है।
मुलायम, गुलाबी और हेल्दी होंठ चेहरे की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं. हालांकि धूप, डिहाइड्रेशन, धूल-मिट्टी और बार-बार लिप प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से होंठ रूखे और बेजान नजर आने लगते हैं. ऐसे में महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स की जगह, आसान घरेलू नुस्खे भी कमाल कर सकते हैं. ग्लोबल आइकन प्रियंका चोपड़ा भी अपने होंठों की देखभाल के लिए एक आसान DIY लिप स्क्रब का इस्तेमाल करती हैं, जिसे समुद्री नमक, ग्लिसरीन और गुलाब जल से तैयार किया जाता है, लेकिन क्या सच में होंठों को मुलायम और गुलाबी बनाने में मदद कर सकता है. चलिए आपको बताते हैं इस DIY लिप स्क्रब के फायदे.
प्रियंका चोपड़ा का DIY लिप स्क्रब
इस आसान स्क्रब को बनाने के लिए समुद्री नमक, ग्लिसरीन और गुलाब जल को मिलाया जाता है. समुद्री नमक होंठों पर जमी मृत त्वचा को हटाने में मदद करता है, जबकि ग्लिसरीन नमी बनाए रखने का काम करती है. वहीं, गुलाब जल होंठों को ताजगी और हल्की ठंडक देने में मदद कर सकता है.
स्किन एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
स्किन एक्सपर्ट डॉ. रुचि अग्रवाल ने बताया कि मैं न तो पूरी तरह इसके पक्ष में हूं और न ही इसके खिलाफ, लेकिन इसे समझदारी से इस्तेमाल करना चाहिए. सी सॉल्ट होंठों की ऊपरी डेड स्किन को हटाता है, ग्लिसरीन नमी को बनाए रखता है और गुलाब जल होंठों को आराम और हाइड्रेशन देता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, इससे होंठ कुछ समय के लिए मुलायम और चमकदार लग सकते हैं, लेकिन लिप स्क्रब आपके होंठों का नेचुरल रंग नहीं बदलते. वे सिर्फ होंठों की ऊपरी सूखी और डेड स्किन को हटाते हैं. इसलिए अगर आपके होंठ काले हैं, तो इसकी वजह धूप में ज्यादा रहना, जेनेटिक्स या लगातार होने वाली जलन हो सकती है. स्क्रबिंग से यह ठीक नहीं होगा. असल में ज्यादा स्क्रबिंग से जलन बढ़ सकती है और पिगमेंटेशन भी और खराब हो सकता है. इसलिए अगर आप लिप स्क्रब का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इसे हर दो हफ्ते में सिर्फ एक बार ही करें.
इस्तेमाल करते समय किन बातों का रखें ध्यान
हफ्ते में 1 से 2 बार से ज्यादा स्क्रब न करें.
स्क्रब को हल्के हाथों से लगाएं.
स्क्रब के बाद लिप बाम जरूर लगाएं.
अगर होंठ पहले से कटे-फटे या बहुत संवेदनशील हैं, तो स्क्रब करने से बचें.
अजमेर के गोविंदगढ़ में रहने वाले दर्जी रेखराज ठाड़ा (62) को आयकर विभाग से 974 करोड़ 97 लाख 25 हजार 457 रुपये की टैक्स रिकवरी का नोटिस मिला. जिसे देखकर उनका सर चकरा गया. उन्होंने कहा कि महीने में 15 हजार रुपये कमाने वाला इतना टैक्स कैसे देगा. उनके पास नोटिस सूरत आयकर विभाग से आया. उन्होंने पुलिस से इसकी शिकायत की है.
पैन कार्ड का किया दुरुपयोग
जांच कराने पर खुलासा हुआ कि शातिर जालसाजों ने उनके पैन कार्ड का दुरुपयोग कर वर्ष 2011 से उन्हें ‘रूप रजत डायमंड प्राइवेट लिमिटेड’ का डायरेक्टर बना रखा था. पीड़ित का दावा है कि वे कभी गुजरात गए ही नहीं, और ना ही उन्हें इन कंपनियों की कोई जानकारी थी. यह मामला सीधे तौर पर पहचान की चोरी और बड़े पैमाने पर चल रहे सेल कंपनियों के नेटवर्क की पोल खोलता है.
पुलिस ने शुरू की जांच
आयकर नोटिस मिलने के बाद जब परिजनों ने एक सीए की मदद से पड़ताल कराई, तो रेखराज का नाम ‘जय बाबेरी डायम प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक और फर्जी कंपनी में भी डायरेक्टर के तौर पर सामने आया. इसके बाद रेखराज ने पीसांगन थाने और अजमेर एसपी कार्यालय पहुंचकर एडिशनल एसपी ग्रामीण लालचंद कयाल को पूरी आपबीती सुनाई. पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए परिवाद दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. रेखराज ने नोटिस का स्पष्टीकरण ईमेल के जरिए आयकर विभाग को भेज दिया है.
जब आप गर्मियों की छुट्टियों में पॉकेट मनी कमाने के लिए मजदूरी कर रहे हों, और अचानक फावड़े के नीचे से ऐसा खजाना निकल आए, जिसकी आपने सपने में भी कल्पना न की हो तो सोचिए आपका क्या हाल होगा? बेल्जियम में एक 18 साल के छात्र के साथ बिल्कुल ऐसा ही हुआ हैय सीवेज खोदते वक्त इस लड़के के हाथ ऐसा खजाना लगा कि उसकी रातों-रात किस्मत ही चमक गई.
क्या है पूरा मामला?
द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, बेल्जियम के सिंट-गिलिस-डेंडर्मोंडे शहर में एक पूर्व शराब बनाने वाली पुरानी फैक्ट्री की जमीन पर री-डेलवपमेंट का काम चल रहा था. गर्मियों की छुट्टियों में कोबे नाम का 18 साल का एक छात्र वहां मजदूरी कर रहा था. वह सीवेज सिस्टम के लिए जमीन में गड्ढे खोद रहा था, तभी उसे जमीन के नीचे कुछ अजीब सी चीज दिखाई दी.
शुरुआत में कोबे और उसके साथियों को लगा कि शायद ये आम 1 यूरो के सिक्के हैं. लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने मिट्टी हटाई और गहराई से खुदाई की, तो उनके होश उड़ गए. वहां ईंटों से बंद एक पुराने तहखाने की दीवार के अंदर छिपा हुआ सोने का भारी-भरकम जखीरा मिला. इस खजाने में सोने के सिक्के, सोने के टुकड़े और कई सोने की छड़ें शामिल थीं. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस पूरे खजाने की कीमत करीब 90 लाख यूरो यानी लगभग 90 करोड़ रुपए है.
क्यों और कैसे छिपाया गया था यह खजाना?
जांच में सामने आया कि यह जगह 19वीं शताब्दी के अंत में फैक्ट्री के मालिक थियोफिलस वैन एशे के लिए बनाई गई थी. इतिहास के पन्नों को खंगालने पर पता चला कि यह पुरानी शराब की फैक्ट्री 1899 से 1970 के बीच चलती थी. अधिकारियों का मानना है कि सोने को किसी आम तिजोरी में रखने के बजाय जानबूझकर ईंटों की दीवार के पीछे बेहद चालाकी से सील किया गया था ताकि कोई इसे ढूंढ न सके.
अब आगे क्या होगा? कानूनी पेंच में फंसा खजाना
इस ऐतिहासिक और चौंकाने वाली खोज के बाद कोबे और उसके साथियों ने बिना देर किए तुरंत पुलिस और निर्माण कार्य की देखरेख कर रही संस्था को इसकी सूचना दी. फिलहाल, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने सारा सोना ब्रुसेल्स की एक सुरक्षित जगह पर शिफ्ट कर दिया है.
अब अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यह सोना किसी पुरानी चोरी, किसी आपराधिक गतिविधि या फिर किसी अनसुलझे वारिस के दावों से जुड़ा हुआ है. इतनी बड़ी रकम सामने आने के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि इस खजाने के कानूनी मालिक को लेकर एक लंबी और पेचीदा कानूनी लड़ाई छिड़ने वाली है.
स्वस्थ रहने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार बेहद जरूरी है। हमारी रसोई में मौजूद कई मसाले स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ अपने संभावित स्वास्थ्य लाभों के लिए भी जाने जाते हैं। कलौंजी भी ऐसा ही एक मसाला है, जिसे लंबे समय से पारंपरिक घरेलू नुस्खों में इस्तेमाल किया जाता रहा है।
छोटे आकार और काले रंग वाली कलौंजी में कई जैविक सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। शोधों में इसके एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी और अन्य संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है। हालांकि, कलौंजी को किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह और उचित उपचार जरूरी है।
कलौंजी के फायदे
1. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद
कलौंजी का सेवन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में मदद कर सकता है। कुछ शोधों में पाया गया है कि नियमित रूप से कलौंजी का सेवन करने से अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी HDL में सुधार हो सकता है, जबकि कुल कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड और खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL के स्तर में कमी देखने को मिल सकती है।
हालांकि, शोधों में इस्तेमाल की गई मात्रा को देखकर खुद से कलौंजी की खुराक तय नहीं करनी चाहिए। कोलेस्ट्रॉल की समस्या होने पर डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर है।
2. वजन कम करने में सहायक
वजन नियंत्रित करने में भी कलौंजी संभावित रूप से मददगार हो सकती है। कुछ अध्ययनों में इसके एंटी-ओबेसिटी प्रभाव का उल्लेख किया गया है।
इसके सेवन से शरीर के वजन, बॉडी मास इंडेक्स और कमर की चौड़ाई में कुछ कमी देखने को मिली है। हालांकि, सिर्फ कलौंजी खाने से वजन कम नहीं किया जा सकता। इसके लिए संतुलित डाइट और नियमित एक्सरसाइज जरूरी है।
3. एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर
शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और फ्री रेडिकल्स कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं। कलौंजी में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।
कलौंजी में मौजूद थाइमोक्विनोन इसके प्रमुख सक्रिय यौगिकों में से एक है, जिस पर वैज्ञानिक अध्ययनों में काफी ध्यान दिया गया है।
4. ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद
कलौंजी के संभावित एंटीडायबिटिक प्रभावों का भी अध्ययन किया गया है। कुछ शोधों के अनुसार, इसका सेवन फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज को कम करने और लिपिड प्रोफाइल को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं की जगह कलौंजी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ब्लड शुगर कम करने वाली दवाओं के साथ इसका सेवन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
5. ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में सहायक
कलौंजी में एंटी-हाइपरटेंसिव प्रभाव होने की बात कुछ शोधों में सामने आई है। इसके सेवन से सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में संभावित मदद मिल सकती है।
इसमें मौजूद थाइमोक्विनोन अपने एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव के कारण भी शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में भूमिका निभा सकता है।
6. सूजन कम करने में मदद
शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है। कलौंजी में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण यह सूजन को कम करने में सहायक हो सकती है।
कलौंजी के तेल में भी ऐसे सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जिनके सूजनरोधी प्रभावों का अध्ययन किया गया है।
7. इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करे
कलौंजी के बीजों में मौजूद कुछ यौगिक प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं। शोधों में इसके इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुणों का उल्लेख किया गया है।
इसका मतलब यह है कि कलौंजी शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सपोर्ट करने में भूमिका निभा सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी और व्यापक मानव शोध की आवश्यकता है।
8. लिवर और किडनी के लिए संभावित लाभ
ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस लिवर और किडनी सहित शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। कलौंजी में मौजूद थाइमोक्विनोन और एंटीऑक्सीडेंट गुणों का लिवर की सुरक्षा के संदर्भ में अध्ययन किया गया है।
कुछ शोधों में किडनी की पथरी के आकार पर भी कलौंजी के संभावित प्रभाव देखे गए हैं। हालांकि, इसे लिवर या किडनी की बीमारी का इलाज नहीं माना जा सकता।
9. पुरुषों की प्रजनन क्षमता में संभावित मदद
कलौंजी के एंटीऑक्सीडेंट गुणों को पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य के संदर्भ में भी अध्ययन किया गया है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस स्पर्म की गुणवत्ता और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।
कुछ शोधों के आधार पर कलौंजी के सेवन से स्पर्म काउंट और उसकी गुणवत्ता में संभावित सुधार की बात सामने आई है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए और बेहतर मानव अध्ययनों की आवश्यकता है।
10. त्वचा के लिए फायदेमंद
कलौंजी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं में किया जाता रहा है। इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल, एंटीइंफ्लेमेटरी और घाव भरने में मदद करने वाले संभावित गुण पाए जाते हैं।
मुंहासे, त्वचा की सूजन, घाव और कुछ संक्रमणों में इसके उपयोग पर शोध किया गया है। त्वचा पर कलौंजी या इसका तेल लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें, क्योंकि संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को एलर्जी हो सकती है।
कलौंजी में पाए जाने वाले पोषक तत्व
कलौंजी में ऊर्जा, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 100 ग्राम कलौंजी में लगभग:
ऊर्जा: 400 कैलोरी
प्रोटीन: 16.67 ग्राम
वसा: 33.33 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट: 50 ग्राम
आयरन: 12 मिलीग्राम
ध्यान रखें कि सामान्य तौर पर कलौंजी का सेवन इतनी बड़ी मात्रा में नहीं किया जाता है।
कलौंजी का सेवन कैसे करें?
कलौंजी को रोजमर्रा के भोजन में आसानी से शामिल किया जा सकता है।
सब्जियों में मसाले के रूप में इस्तेमाल करें।
दाल या पुलाव में थोड़ी मात्रा डाल सकते हैं।
नान, ब्रेड और अन्य बेक्ड फूड में इस्तेमाल कर सकते हैं।
अचार में कलौंजी मिलाई जा सकती है।
नमकीन या कुछ स्नैक्स में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।
कलौंजी को पीसकर मसाले के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
कलौंजी कितनी मात्रा में खानी चाहिए?
कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में अलग-अलग स्वास्थ्य स्थितियों के लिए प्रतिदिन लगभग 2 ग्राम कलौंजी का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को रोज इतनी ही मात्रा लेनी चाहिए।
कलौंजी की सही मात्रा व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और दवाओं पर निर्भर कर सकती है। इसलिए इसे औषधीय मात्रा में लेने से पहले डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
कलौंजी के नुकसान
कलौंजी सामान्य भोजन की मात्रा में कई लोगों के लिए ठीक हो सकती है, लेकिन अधिक मात्रा में या गलत तरीके से सेवन करने पर कुछ लोगों को परेशानी हो सकती है।
गर्भावस्था में सावधानी
गर्भावस्था के दौरान कलौंजी की अधिक या औषधीय मात्रा लेने की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
ब्लीडिंग का जोखिम
कलौंजी में मौजूद थाइमोक्विनोन रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसलिए जो लोग खून पतला करने वाली दवाएं लेते हैं, उन्हें कलौंजी का अधिक सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
एलर्जी की संभावना
कुछ लोगों को कलौंजी या इसके तेल से एलर्जी हो सकती है। त्वचा पर लगाने पर लालिमा, खुजली या जलन महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें।
निष्कर्ष
कलौंजी आकार में छोटी जरूर है, लेकिन इसमें कई जैविक सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। शोधों के अनुसार यह कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, वजन, सूजन और सामान्य इम्यून सपोर्ट के लिए संभावित रूप से फायदेमंद हो सकती है।
फिर भी इसे किसी बीमारी की दवा नहीं समझना चाहिए। संतुलित मात्रा में भोजन का हिस्सा बनाकर कलौंजी का सेवन करें और किसी बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।