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  • अच्छी कमाई के बाद भी खाली हो जाता है बैंक अकाउंट? आजमाकर देखें वास्तु के ये आसान उपाय..

    अच्छी कमाई के बाद भी खाली हो जाता है बैंक अकाउंट? आजमाकर देखें वास्तु के ये आसान उपाय..

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    अगर कमाई अच्छी होने के बावजूद महीने के अंत तक पैसे खत्म हो जाते हैं, तो घर के माहौल पर भी ध्यान देना चाहिए। वास्तु शास्त्र में घर की व्यवस्था और कुछ दिशाओं को आर्थिक स्थिरता से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि कुछ आसान उपायों से घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    महीने की शुरुआत में सैलरी या कारोबार की कमाई खाते में आते ही आर्थिक स्थिति अच्छी नजर आती है, लेकिन कुछ दिनों बाद बचत के नाम पर कुछ नहीं बचता। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो केवल कम कमाई को इसकी वजह मानना सही नहीं है। खर्च करने की आदत और पैसों को संभालने की आदत भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। वहीं, वास्तु शास्त्र में घर की ऊर्जा और व्यवस्था को भी आर्थिक समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में कुछ आसान वास्तु उपाय आजमाए जा सकते हैं।

    आर्थिक समृद्धि के लिए अपनाएं ये वास्तु उपाय

    1. मुख्य द्वार: वास्तु शास्त्र
      में घर के मुख्य द्वार को खास महत्व दिया गया है। घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश यहीं से होता है। इसलिए दरवाजे के आसपास कूड़ा, पुराने जूते, टूटे सामान या कबाड़ जमा न होने दें। मुख्य द्वार को साफ और रोशन रखें।
    2. टूटी चीजें:
      घर में लंबे समय से पड़ी खराब या टूटी वस्तुओं को वास्तु की दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता। टूटे बर्तन, बंद घड़ी, खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान, टूटा शीशा और बेकार पड़ी चीजें समय-समय पर हटा दें। इससे घर व्यवस्थित रहेगा और अनावश्यक सामान भी जमा नहीं होगा।
    3. नमक:
      वास्तु और धार्मिक मान्यताओं में नमक को नकारात्मकता दूर करने से जोड़ा जाता है। कई लोग सप्ताह में एक बार पोछे के पानी में थोड़ा समुद्री नमक मिलाकर घर की सफाई करते हैं। हालांकि, इसे धन बढ़ाने का वैज्ञानिक उपाय नहीं माना जाता। इसे केवल पारंपरिक मान्यता के तौर पर ही अपनाएं।
    4. उत्तर दिशा:
      वास्तु में उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना जाता है और इसका संबंध धन-संपत्ति से जोड़ा जाता है। इसलिए इस हिस्से में भारी कबाड़ या अनुपयोगी सामान रखने से बचें। अगर यहां सामान रखा है तो उसे व्यवस्थित करें और बेकार चीजें हटा दें।
    5. तिजोरी की दिशा:
      वास्तु मान्यताओं के अनुसार धन रखने वाली तिजोरी या अलमारी को सही दिशा में रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। दक्षिण दिशा की दीवार के पास तिजोरी रखकर उसका मुंह उत्तर की ओर खुलना शुभ माना जाता है। हालांकि, घर की बनावट अलग-अलग होती है, इसलिए बड़ा बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। तिजोरी में फटे नोट, बेकार कागज और पुरानी रसीदें जमा न करें।
    6. शाम को जलाएं दीपक:
      सनातन परंपरा में शाम के समय घर में दीपक जलाने की परंपरा रही है। मान्यता है कि इससे घर का वातावरण सकारात्मक रहता है और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है। शाम के समय घर को साफ रखें और अनावश्यक अंधेरा न रहने दें।
  • मुंढे जी! अब तो कॉकरोच घर पर आ रहे हैं’, ग्रॉसरी डिलीवरी ऐप पर फूटा श्वेता तिवारी का गुस्सा, FDA कमिश्नर से लगाई गुहार..

    मुंढे जी! अब तो कॉकरोच घर पर आ रहे हैं’, ग्रॉसरी डिलीवरी ऐप पर फूटा श्वेता तिवारी का गुस्सा, FDA कमिश्नर से लगाई गुहार..

    shweta tiwari- India TV Hindi

    बॉलीवुड और टीवी जगत की जानी-मानी अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने हाल ही में ऑनलाइन ग्रॉसरी शॉपिंग के दौरान हुए एक बेहद अप्रिय अनुभव को प्रशंसकों के साथ साझा किया। अभिनेत्री ने जब क्विक-कॉमर्स डिलीवरी प्लेटफॉर्म से ड्रिंक मंगवाया तो उसके साथ एक जिंदा कॉकरोच भी उनके घर पहुंच गया। इस लापरवाही से नाराज श्वेता ने सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के कमिश्नर तुकाराम मुंढे का ध्यान इस ओर आकर्षित किया।

    सोफे पर टहलता दिखा कीड़ा, श्वेता ने शेयर किया वीडियो

    श्वेता तिवारी ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो पोस्ट कर पूरी घटना का खुलासा किया। वीडियो में एक छोटा कॉकरोच उनके घर के सोफे और फर्नीचर पर घूमता हुआ साफ नजर आ रहा है। वीडियो साझा करते हुए उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्होंने तो बस ड्रिंक का ऑर्डर दिया था, लेकिन साथ में यह बिन-बुलाया मेहमान भी आ गया, जो अब पूरे घर में भाग रहा है। जब उनके साथ मौजूद किसी शख्स ने उसे मारने की कोशिश की तो श्वेता ने उन्हें रोक दिया। इस पूरी स्थिति को उन्होंने और उनके दोस्तों ने थोड़े मजाकिया अंदाज में लिया, लेकिन खाद्य सुरक्षा पर सवाल भी उठाए।

    एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे से लगाई गुहार

    वीडियो के अंत में श्वेता ने सीधे एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे को टैग करते हुए उनसे इस लापरवाही पर कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अब ऑनलाइन डिलीवरी के जरिए घरों तक कॉकरोच पहुंच रहे हैं, इसलिए प्रशासन को इस दिशा में तुरंत ध्यान देना चाहिए। श्वेता के स्टाइलिस्ट विक्टर रोबिन्सन ने भी उनके साथ फोटो शेयर करते हुए इस घटना पर अपना विरोध दर्ज कराया।

    चर्चा में हैं एफडीए कमिश्नर ‘असली सिंघम’ तुकाराम मुंढे

    आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे इन दिनों खाद्य सुरक्षा और नियमों के सख्त पालन को लेकर पूरे महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर अभियान चला रहे हैं। होटलों, रेस्टोरेंटों और क्विक-कॉमर्स कंपनियों के वेयरहाउस में मिली कमियों के बाद वह लगातार कड़े कदम उठा रहे हैं। हाल ही में एफडीए की टीमों ने लाखों रुपये मूल्य के मिलावटी डेयरी उत्पाद और प्रतिबंधित सामग्रियां जब्त की थीं, जिसके चलते आम जनता उन्हें सोशल मीडिया पर ‘असली सिंघम’ कहकर बुला रही है।

    श्वेता तिवारी के आगामी प्रोजेक्ट्स

    काम की बात करें तो श्वेता तिवारी इन दिनों ओटीटी प्लेटफॉर्म के लोकप्रिय रियलिटी शो ‘द ट्रेटर्स इंडिया’ के दूसरे सीजन में नजर आ रही हैं। इससे पहले वह साल 2024 में ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘सिंघम अगेन’ और वेब सीरीज ‘इंडियन पुलिस फोर्स’ में अहम भूमिकाएं निभा चुकी हैं। आने वाले समय में वह सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया और सुनील ग्रोवर जैसे सितारों के साथ थ्रिलर फिल्म ‘वन – फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ में दिखाई देंगी।

  • दिवाली-छठ पर दोगुने-तिगुने नहीं होंगे फ्लाइट टिकट के दाम, हवाई किराये पर सरकार ला रही नया प्‍लान.

    दिवाली-छठ पर दोगुने-तिगुने नहीं होंगे फ्लाइट टिकट के दाम, हवाई किराये पर सरकार ला रही नया प्‍लान.

    फेस्टिव सीजन और छुट्टियों में फ्लाइट के टिकट के दाम अप्रतयाशित रूप से न बढ़ें, इसके लिए केंद्र सरकार नियम बनाने की तैयारी में है. केंद्र के मुताबिक, एयर फेयर यानी हवाई किराये और चार्जेस से जुड़े नियम बनाने की प्रक्रिया चल रही है और इसे तैयार होने में 3 हफ्ते का समय लग सकता है. इन नियमों में हवाई किराये और चार्जेस से जुड़े ऐसे प्रावधान शामिल होंगे, जिनसे हवाई यात्रियों को राहत मिलेगी. दरअसल, फ्लाइट्स टिकटों के दाम अचानक बढ़ने को लेकर एयर पैसेंजर्स लंबे समय से शिकायतें करते रहे हैं. जैसे कि नॉर्मल डेज यानी सामान्‍य दिनों में दिल्‍ली में मुंबई का किराया 6,000 रुपये है तो गर्मी की छुट्टियों या फिर दिवाली जैसे फेस्टिवल के टाइम यही टिकट 12 से 14 हजार रुपये का हो जाता है.

    ऐसे मामलों की एक शिकायती याचिका पहुंची, सुप्रीम कोर्ट के पास और फिर कोर्ट ने सख्‍ती दिखाते हुए सरकार से रुख स्‍पष्‍ट करने को कहा. कोर्ट में सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने बताया कि सरकार इस पर नियम बना रही है.

    नियम नहीं मानें एयरलाइंस तो फ्लाइट्स रोक दें: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों में टिकटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी को लेकर सख्‍ती से कहा है कि एयरलाइंस अगर नियम नहीं मानतें तो उनकी उड़ाने रोक दी जाएं. त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों के दाम अचानक बढ़ने पर दायर सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई की. उन्‍होंने कहा कि यात्रियों के हित में जो व्यवस्थाएं बनाई गई हैं, उसके पालन और नियमन को लेकर फिलहाल स्थिति साफ नहीं है.

    याचिकाकर्ता ने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने संसद में कहा है कि हम कुछ नहीं कर सकते. हम कोई कैपिंग नहीं लगा सकते. पिछली सुनवाई में पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किराया तय करने में एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी यात्रियों का शोषण करने जैसा है और सरकार को यात्रियों को राहत देने के लिए कदम उठाने चाहिए.

    7 सितंबर को अगली सुनवाई, सामने आ सकता है नियम

    कोर्ट में सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल कौशिक ने बताया कि हवाई किराये और शुल्क से जुड़े नियम बनाने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है. इसे पूरा होने में 3 हफ्तों का समय लगेगा. उन्होंने कहा कि अंतिम रूप में तैयार नियमों को कोर्ट के सामने रखा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ्ते की मांग की दलील स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर तय कर दी है.

    सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर एयरलाइंस पर किराया तय करने में मनमानी का आरोप लगाते हुए कोर्ट के दखल की मांग की थी. याचिका में कहा गया है कि प्राइवेट एयरलाइंस कंपनियां अनुचित तरीके से हवाई किराया तय करती हैं. उनकी तरफ से कई अतिरिक्त शुल्क लगाए जाते हैं. इस बारे में स्पष्ट नियम बनाने और उन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक नियामक संस्था के गठन की जरूरत है.

  • 12 साल की मेहनत, 40 परीक्षाओं में फेल, कहानी मनोज पाल के अफसर बनने की..

    12 साल की मेहनत, 40 परीक्षाओं में फेल, कहानी मनोज पाल के अफसर बनने की..

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    Success Story: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के ग्राम खपरिया निवासी मनोज पाल की कहानी उन अभ्यर्थियों के लिए मिसाल है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार असफल होने के बाद हार मान लेते हैं. मनोज पाल ने करीब 12 सालों तक लगातार प्रतियोगी परीक्षाएं दीं. इस दौरान उन्होंने लगभग 40 परीक्षाओं में किस्मत आजमाई, लेकिन लंबे समय तक अंतिम सफलता उनके हाथ नहीं लगी. आखिरकार मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा 2024 में उनका चयन सहायक संचालक, वित्त विभाग के पद पर हुआ. मनोज की यह सफलता वर्षों के संघर्ष, आर्थिक मुश्किलों और लगातार असफलताओं के बीच खुद पर विश्वास बनाए रखने का परिणाम है.

    12वीं में मिले सिर्फ 50 प्रतिशत अंक

    मनोज पाल की शुरुआती पढ़ाई गांव में ही हुई. उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई गांव से की और परीक्षा करीब 50 प्रतिशत अंकों के साथ पास की. सीमित संसाधनों वाले परिवार से आने वाले मनोज के सामने आगे की पढ़ाई जारी रखना भी आसान नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और नर्मदापुरम जाकर कॉलेज की पढ़ाई शुरू की. पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने बच्चों को पढ़ाकर अपनी जरूरतों के लिए पैसे जुटाए और खुद भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते रहे.

    मनोज पाल की शुरुआती पढ़ाई गांव में ही हुई. उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई गांव से की और परीक्षा करीब 50 प्रतिशत अंकों के साथ पास की.

    मनोज कहते हैं कि परिवार ने उनकी मेहनत पर हमेशा भरोसा रखा. सफलता के बाद परिवार की पहली प्रतिक्रिया थी. भगवान के यहां देर है, अंधेर नहीं. मेहनत की है तो सफलता मिलनी ही थी. अंतिम चयन की खबर परिवार के लिए भावुक कर देने वाली थी.

    कोरोना काल में मजदूरी कर जुटाए पैसे

    मनोज के संघर्ष का सबसे कठिन दौर कोरोना महामारी के दौरान आया. महामारी के कारण काम और आय के साधन प्रभावित हुए और उनके पास जो कुछ था, वह भी खत्म हो गया. आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखना मुश्किल हो गया. ऐसे समय में मनोज ने गांव लौटकर मजदूरी की और पैसे जुटाए. इसके बाद उन्होंने इंदौर जाकर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की तैयारी शुरू की. वहां भी उन्होंने बच्चों को पढ़ाया और कोचिंग में काम किया, ताकि अपनी पढ़ाई का खर्च निकाल सकें.

    लगभग 40 परीक्षाएं दीं, लेकिन सफलता नहीं मिली

    मनोज ने अपने लंबे सफर में लगभग 40 प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लिया. इनमें विभिन्न भर्ती परीक्षाएं शामिल रहीं. उन्होंने पुलिस आरक्षक, वनरक्षक, पटवारी, लेखापरीक्षक और संचालक जैसी परीक्षाएं दीं. इसके अलावा कर्मचारी चयन आयोग की बहु-कार्य कर्मचारी, संयुक्त उच्चतर माध्यमिक और संयुक्त स्नातक स्तर की परीक्षाओं में भी प्रयास किया. मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा, पंजीयक, सहायक प्राध्यापक सहित अन्य परीक्षाओं में भी उन्होंने किस्मत आजमाई. कई परीक्षाओं में वह आगे तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया.

    MPPSC परीक्षा में मनोज ने नौ प्रयास किए. इन नौ प्रयासों में वह नौ बार प्रीलिम्स परीक्षा में सफल हुए.

    MPPSC परीक्षा में नौ प्रयास

    MPPSC परीक्षा में मनोज ने नौ प्रयास किए. इन नौ प्रयासों में वह नौ बार प्रीलिम्स परीक्षा में सफल हुए. आठ बार मुख्य परीक्षा पास कर इंटरव्यू तक पहुंचे और सात बार इंटरव्यू भी दिया. इसके बावजूद अंतिम चयन नहीं हो पाया. लगातार परिणाम अपने पक्ष में न आने के बावजूद मनोज ने तैयारी जारी रखी. आखिरकार राज्य सेवा परीक्षा 2024 में उनका चयन हुआ और वर्षों की मेहनत का परिणाम सामने आया.

    परिवार कहता था-अब कुछ काम करके घर संभालो

    मनोज निम्न-मध्यमवर्गीय कृषक परिवार से आते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी. परिवार ने तैयारी के दौरान उनका पूरा साथ दिया, लेकिन लंबे समय तक नौकरी नहीं मिलने के कारण घरवालों की चिंता भी बढ़ती जा रही थी. मनोज बताते हैं कि परिवार की चिंता थी कि उम्र बढ़ रही है और बहनों की शादी भी करनी है, इसलिए उन्हें कोई काम करके कमाई शुरू करनी चाहिए. परिवार चाहता था कि वह कुछ छोटा-मोटा काम शुरू करें, जिससे घर की आर्थिक स्थिति थोड़ी बेहतर हो सके.

    समाज के तानों के बीच खुद को संभाला

    लगातार असफलताओं के बीच मनोज को सामाजिक दबाव का भी सामना करना पड़ा. उनका कहना है कि वह पशुपालक गड़रिया समाज से आते हैं और उनके आसपास के लोगों को उनसे बहुत बड़ी उम्मीद भी नहीं थी. कई बार परीक्षा का परिणाम नकारात्मक आने पर उन्हें लगा कि शायद आगे भी सफलता नहीं मिलेगी, लेकिन उनके पास पीछे हटने का विकल्प नहीं था. वह कहते हैं कि गांव लौटकर खेती या मजदूरी करने के साथ-साथ वह यह भी नहीं चाहते थे कि उनके परिवार को लोगों के ताने सुनने पड़ें. यही सोच उन्हें आगे बढ़ाती रही.

    मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा 2024 में उनका चयन सहायक संचालक, वित्त विभाग के पद पर हुआ.

    6 से 8 घंटे पढ़ाई, मॉक टेस्ट और आत्मविश्लेषण पर जोर

    मनोज की तैयारी का तरीका बेहद अनुशासित रहा. वह सुबह 6 बजे उठकर लाइब्रेरी चले जाते थे. दिन में खाना बनाने और खाने के लिए लौटते और फिर लाइब्रेरी चले जाते थे. रात 12 से 1 बजे तक लाइब्रेरी में पढ़ाई करने के बाद वह सुबह कोचिंग में बच्चों को पढ़ाने चले जाते थे. वह रोजाना लगभग 6 से 8 घंटे पढ़ाई करते थे. तैयारी के दौरान उन्होंने बड़ी संख्या में मॉक टेस्ट दिए, अपनी गलतियों का आत्मविश्लेषण किया और दोस्तों के साथ विषयों पर चर्चा की. पुराने प्रश्नपत्रों के आधार पर उन्होंने परीक्षा की रणनीति तैयार की.

    ‘अपनी स्थिति बदलनी है तो पूरी ताकत से मेहनत करें’

    मनोज पाल उन अभ्यर्थियों के लिए संदेश देते हैं जो लगातार असफलताओं से निराश हो जाते हैं. उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने अपनी स्थिति बदलने का फैसला किया है, तो उसे पूरी ताकत के साथ मेहनत करनी होगी. अपनी ताकत और कमजोरियों को पहचानना होगा और लगातार खुद में सुधार करते रहना होगा. उनका मानना है कि असफलताओं के बावजूद खुद पर विश्वास बनाए रखना जरूरी है. करीब 40 परीक्षाओं में प्रयास करने के बाद मिली यह सफलता मनोज के लिए सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि सालों के संघर्ष और धैर्य की जीत है.

  • EMI, घर के खर्चे, किराया और बिलों की टेंशन कर सकती है बीमार, ऐसे करें फाइनेंशियल स्ट्रेस कम..

    EMI, घर के खर्चे, किराया और बिलों की टेंशन कर सकती है बीमार, ऐसे करें फाइनेंशियल स्ट्रेस कम..

    सैलरी आते ही घर की ईएमआई, रेंट, क्रेडिट कार्ड्स के बिल और रोजमर्रा के खर्चे जोड़-जोड़कर लोग अक्सर परेशान हो जाते हैं. कई बार लोग बढ़ती महंगाई को देखकर अपने घर की रोजमर्रा के खर्चों के बारे में बार-बार सोचते रहते हैं, जिसका असर न सिर्फ हमारी सेहत पर भी पड़ने लगता है. कई हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि लंबे समय तक अगर आप आर्थिक तनाव से जूझते हैं, तो इससे शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है. ऐसी स्थिति में नींद, कमजोर इम्यूनिटी और मेंटल हेल्थ प्रभावित हो सकता है. यह हम आपको विस्तार से समझाएंगे कि फाइनेंशियल हेल्थ आपके शरीर को किस तरह से प्रभावित करता है?

    फाइनेंशियल स्ट्रेस शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

    एक्सपर्ट का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति पैसों को लेकर परेशान रहता है, तो उसके शरीर में कॉर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है. कुछ समय में य जाता है. थोड़े समय के लिए बाद ये नॉर्मल हो जाता है, लेकिन आप लंबे समय तक पैसों को लेकर सोचते रहते हैं, तो इसकी वजह से कई तरह की परेशानियां होने का खतरा रहता है, जैसे-

    • अनिद्रा की होती है शिकायत
    • कमजोर हो सकती है इम्यूनिटी
    • एसिडिटी, ब्लोटिंग और मतली जैसी पाचन से जुड़ी परेशानी
    • लगातार थकान होना
    • बार-बार सिरदर्द की शिकायत

    तनाव न सिर्फ हेल्थ बल्कि फाइनेंशियल डिसीजन पर भी डालता है असर

    फाइनेंशियल प्रेशर न सिर्फ हेल्थ पर असर डालती है, बल्कि फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता पर भी असर डाल सकती है. दरअसल, स्ट्रेस की वजह से अक्सर लग खर्चों को इग्नोर करने लग जाते हैं, वो डर की वजह से अकाउंट या बिल चेक करने से बचते हैं और कई बार जरूरी फैसले भी टाल देते हैं. इससे फाइनेंशियल स्थिति और खराब हो सकती है, जो फिर स्ट्रोस को बढ़ा सकती है.

    फाइनेंशियल स्ट्रेस को कैसे करें कम?

    अगर आप फाइनेंशियल स्ट्रेस को कम करना चाहते हैं, तो आपको कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है, जैसे-

    महीने के शुरुआत में बनाएं बजट

    जब भी सैलरी आए या फिर आने वाली हो, तो सबसे पहले एक बजट तैयार कर लें. हर व्यक्ति को अपने महीनेभर का हिसाब अच्छे से पता होना चाहिए. कोशिश करें कि हर महीने आने और जाने वाले पैसों का रिकॉर्ड रखें. इससे आपको ये समझने में आसानी होती है कि आपका पैसा कहां और कितना खर्च हो रहा है और आप कहां के खर्चों की कटौती कर सकते हैं.

    इमरजेंसी फंड करें तैयार

    सैलरी कम हो या ज्यादा हर किसी को इमरजेंसी फंड तैयार करके रखनी चाहिए. भले ही इसकी शुरुआत छोटी रकम से करें. अगर आप हर महीने धीरे-धीरे महीनों के खर्च से बचत करके इमर्जेंसी फंड जमा करते हैं, तो फ्यूचर में अचानक से होने वाली परेशानी से निपटना आसान हो जाता है.

    हर सप्ताह करें फाइनेंशियल रिव्यू

    अधिकतर एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि अगर आप फाइनेंशियल स्ट्रेस से बचना चाहते हैं, तो हर सप्ताह फाइनेंशियल रिव्यू करने की आदत डालें. कोशिश करें कि सप्ताह में एक बार अपने बैंक खाते, खर्चों और बचत के रिव्यू के लिए कुछ समय निकालें. इससे अनिश्चितता कम होती है और फाइनेंशियल कंट्रोल महसूस होता है

    समय पर भरें बिल

    कभी भी बिल भरने में टाल-मटोल न करें. हमेशा किराया, ईएमआई, बिजली का बिल समय पर भरें. कोशिश करें कि ऑटो-पे जैसी सुविधा का इस्तेमाल करें. इससे आप लेट फीस और अतिरिक्त स्ट्रेस से बच सकते हैं.

    उपलब्ध सुविधाओं का पूरा करें इस्तेमाल

    हेल्थ इंश्योरेंस, फाइनेंशियल एडवाइजरी सर्विसेज और बैंकिंग ऐप्स में उपलब्ध बजटिंग टूल्स का इस्तेमाल करें. ऐसा करने से आर्थिक और मानसिक तनाव कम करने में मददगार मिल सकती है.

  • अदरक के फायदे: पाचन से लेकर इम्युनिटी और वजन घटाने तक, जानें इसके 16 जबरदस्त फायदे

    अदरक के फायदे: पाचन से लेकर इम्युनिटी और वजन घटाने तक, जानें इसके 16 जबरदस्त फायदे

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    अदरक में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल जैसे कई गुण पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे पारंपरिक रूप से पाचन, मतली, दर्द, सर्दी-जुकाम और कई अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं में इस्तेमाल किया जाता रहा है।

    हालांकि, अदरक किसी बीमारी का इलाज नहीं है। इसे केवल एक सहायक घरेलू उपाय के तौर पर देखा जाना चाहिए। गंभीर बीमारी या लगातार बने रहने वाले लक्षणों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

    अदरक खाने के फायदे

    1. पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मदद

    अदरक का सबसे चर्चित फायदा पाचन से जुड़ा है। इसमें ऐसे गुण पाए जाते हैं जो गैस्ट्रिक एसिड और पाचन एंजाइम की गतिविधि को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

    इसकी वजह से अपच, गैस, पेट की ऐंठन, मरोड़ और कब्ज जैसी सामान्य परेशानियों में राहत मिल सकती है। यानी भोजन को पचाने और पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में अदरक सहायक हो सकता है।

    2. कैंसर के जोखिम से बचाव में संभावित मदद

    अदरक में एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटी-कैंसर गुण पाए जाने की बात शोधों में सामने आई है। कुछ अध्ययनों में इसके सक्रिय यौगिकों को कैंसर कोशिकाओं की गतिविधि पर संभावित प्रभाव डालते हुए देखा गया है।

    हालांकि, ये परिणाम मुख्य रूप से शुरुआती या पशु अध्ययनों पर आधारित हैं। इसलिए अदरक को कैंसर की दवा या इलाज नहीं माना जा सकता।

    ध्यान दें: कैंसर गंभीर बीमारी है। इसके इलाज के लिए योग्य डॉक्टर की सलाह और निर्धारित चिकित्सा जरूरी है।

    3. अल्जाइमर में संभावित रूप से मददगार

    अल्जाइमर एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जिसमें याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    अदरक में जिंजरोल, शोगोल और जिंजरोन जैसे फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं। शोधों में इन यौगिकों के एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी प्रभावों का अध्ययन किया गया है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में संभावित भूमिका निभा सकते हैं।

    हालांकि, अल्जाइमर के इलाज के लिए अदरक की प्रभावशीलता साबित करने के लिए अभी और मानव अध्ययनों की जरूरत है।

    4. मतली और उल्टी से राहत

    अदरक का इस्तेमाल मतली और उल्टी की समस्या में लंबे समय से किया जाता रहा है। इसमें एंटीमेटिक प्रभाव पाया जाता है, जिसके कारण यह कुछ परिस्थितियों में मतली कम करने में मदद कर सकता है।

    विशेष रूप से गर्भावस्था के दौरान होने वाली सामान्य मतली और कुछ मामलों में कीमोथेरेपी के बाद होने वाली मतली में अदरक के संभावित लाभ देखे गए हैं।

    5. दर्द कम करने में सहायक

    अदरक में दर्द कम करने और सूजन घटाने वाले गुण पाए जाते हैं। इसी वजह से यह व्यायाम या अधिक शारीरिक मेहनत के बाद होने वाले मांसपेशियों के दर्द में कुछ राहत दे सकता है।

    अदरक का इस्तेमाल मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द को कम करने में भी मददगार पाया गया है।

    6. पीरियड्स के दर्द में राहत

    मासिक धर्म के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द और ऐंठन की समस्या कई महिलाओं को होती है। अदरक में मौजूद एंटीइंफ्लेमेटरी और दर्द निवारक गुण इस तरह के दर्द को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

    हालांकि, बहुत ज्यादा या असामान्य दर्द होने पर डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

    7. माइग्रेन में संभावित राहत

    अदरक के दर्दनिवारक गुण माइग्रेन से जुड़े दर्द में भी कुछ लोगों को राहत दे सकते हैं। कुछ शोधों में अदरक के सेवन को माइग्रेन के तीव्र दर्द को कम करने में संभावित रूप से प्रभावी पाया गया है।

    लेकिन बार-बार माइग्रेन होने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

    8. दिल की सेहत के लिए फायदेमंद

    अदरक में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। इसके अलावा यह ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल और रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया पर भी प्रभाव डाल सकता है।

    इन गुणों की वजह से संतुलित मात्रा में अदरक का सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए सहायक हो सकता है।

    9. कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद

    कुछ शोधों में अदरक के सेवन को ब्लड प्रेशर और रक्त में मौजूद लिपिड यानी वसा के स्तर को नियंत्रित करने में संभावित रूप से उपयोगी पाया गया है।

    इससे बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को मैनेज करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अगर आप इन समस्याओं की दवा लेते हैं तो अदरक को दवा का विकल्प न समझें।

    10. गठिया और जोड़ों के दर्द में सहायक

    गठिया में जोड़ों के आसपास सूजन और दर्द की समस्या हो सकती है। अदरक के एंटीइंफ्लेमेटरी और दर्दनिवारक गुण इन लक्षणों को कम करने में कुछ हद तक मदद कर सकते हैं।

    हालांकि, इस संबंध में अभी और बेहतर शोध की आवश्यकता है।

    11. ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में संभावित मदद

    कुछ अध्ययनों में अदरक के सेवन से ब्लड शुगर और इंसुलिन की सक्रियता पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है।

    इस वजह से अदरक डायबिटीज मैनेजमेंट में सहायक हो सकता है। लेकिन डायबिटीज के मरीज इसे अपनी दवाओं का विकल्प बिल्कुल न बनाएं और नियमित रूप से ब्लड शुगर की निगरानी करते रहें।

    12. वजन घटाने में मददगार

    वजन कम करने के लिए भी अदरक का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ शोधों में अदरक को शरीर के मेटाबॉलिज्म, भूख और फैट मेटाबॉलिज्म पर संभावित प्रभाव डालते हुए देखा गया है।

    हालांकि, केवल अदरक खाने या अदरक की चाय पीने से वजन कम नहीं होगा। इसके लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम भी जरूरी है।

    13. इम्युनिटी को सपोर्ट करे

    अदरक में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं। इसके कुछ सक्रिय यौगिक शरीर की सामान्य प्रतिरोधक क्षमता को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं।

    इसी वजह से अदरक को चाय, काढ़े या भोजन में शामिल किया जाता है।

    14. संक्रमण से बचाव में संभावित मदद

    अदरक में एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं। प्रयोगशाला अध्ययनों में इसके कुछ यौगिकों को विभिन्न सूक्ष्मजीवों के खिलाफ सक्रिय पाया गया है।

    इससे यह संकेत मिलता है कि अदरक कुछ संक्रमणों से बचाव में भूमिका निभा सकता है। हालांकि, किसी संक्रमण के इलाज के लिए केवल अदरक पर निर्भर रहना उचित नहीं है।

    15. त्वचा के लिए उपयोगी

    अदरक के एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण त्वचा के स्वास्थ्य के लिए भी संभावित रूप से फायदेमंद हो सकते हैं।

    हालांकि, त्वचा पर सीधे अदरक लगाने से जलन या एलर्जी हो सकती है। इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका सीधे त्वचा पर इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है।

    16. बालों के लिए संभावित फायदा

    अदरक में एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं और कुछ लोगों द्वारा इसका इस्तेमाल बालों की देखभाल में भी किया जाता है।

    हालांकि, बाल झड़ने को रोकने या नए बाल उगाने के लिए अदरक के प्रभाव के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। बाल झड़ने की समस्या लगातार बनी रहे तो इसके पीछे पोषण की कमी, हार्मोनल समस्या या अन्य कारण हो सकते हैं, इसलिए विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

    अदरक का सेवन कैसे करें?

    अदरक को अपनी रोजमर्रा की डाइट में कई तरीकों से शामिल किया जा सकता है।

    • चाय में अदरक डालकर
    • सब्जी और दाल में मसाले के रूप में
    • अदरक की चटनी बनाकर
    • गुनगुने पानी में थोड़ी मात्रा मिलाकर
    • सर्दियों में अदरक वाली चाय या काढ़े के रूप में

    अदरक की मात्रा हमेशा संतुलित रखें। अधिक मात्रा में सेवन करने से फायदा होने के बजाय नुकसान हो सकता है।

    अदरक खाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

    अगर आपको पित्ताशय की पथरी, ब्लीडिंग की समस्या है या आप खून पतला करने वाली दवाएं लेते हैं, तो अदरक का अधिक सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

    गर्भावस्था या किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में भी चिकित्सकीय सलाह के बाद ही इसे औषधीय मात्रा में इस्तेमाल करना बेहतर है।

    निष्कर्ष

    अदरक सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने वाला मसाला नहीं है, बल्कि इसमें कई ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं जो शरीर के लिए उपयोगी हो सकते हैं। पाचन, मतली, मांसपेशियों के दर्द, पीरियड्स के दर्द और सामान्य स्वास्थ्य को सपोर्ट करने में अदरक मददगार हो सकता है।

    फिर भी यह समझना जरूरी है कि अदरक किसी बीमारी का इलाज नहीं है। इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर ही इस्तेमाल करें और किसी गंभीर या लगातार बनी रहने वाली समस्या में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  • शाम होते ही क्यों खुला रखना चाहिए घर का दरवाजा? न करें वास्तु का ये नियम नजरअंदाज, रुक सकती है बरकत

    शाम होते ही क्यों खुला रखना चाहिए घर का दरवाजा? न करें वास्तु का ये नियम नजरअंदाज, रुक सकती है बरकत

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    घर के मुख्य दरवाजा सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि वास्तु शास्त्र में इसे ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान माना गया है। मान्यता है कि शाम का समय घर में शुभता के आगमन का होता है। ऐसे में इस समय मुख्य द्वार से जुड़ी छोटी-छोटी गलतियां घर की सुख-समृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं। आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार शाम को घर का दरवाजा बंद रखना क्यों शुभ नहीं माना जाता है।

    शाम के समय क्यों नहीं बंद करते मुख्य द्वार

    • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शाम का समय बेहद शुभ माना जाता है। इस समय मां लक्ष्मी के घर में आगमन की मान्यता है। कहते हैं कि अगर इस समय मुख्य द्वार बंद रखा जाए तो घर की समृद्धि और शुभ ऊर्जा के प्रवेश में बाधा आ सकती है।
    • वास्तु की माने तो लंबे समय तक शाम के समय मुख्य द्वार बंद रखने से घर में नकारात्मकता बढ़ सकती है और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    सकारात्मक ऊर्जा के लिए जरूरी

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, सूर्यास्त के समय वातावरण में ऊर्जा का बदलाव होता है। ऐसे में घर का मुख्य द्वार कुछ समय के लिए खुला रखने से सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश की मान्यता है। माना जाता है कि इससे घर का माहौल शांत और खुशहाल बना रहता है।

    मुख्य द्वार पर करें ये उपाय

    शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा काफी पुरानी है। मान्यता है कि दीपक की रोशनी से घर में शुभता आती है।

    इसके अलावा मुख्य द्वार पर गंगाजल या साफ जल का छिड़काव करना शुभ माना जाता है। इससे नेगेटिविटी दूर होने और घर में सकारात्मक माहौल बने रहने की मान्यता है।

    ध्यान रखें ये बातें

    घर के मुख्य द्वार पर गंदगी, अव्यवस्था और अंधेरा नहीं रखना चाहिए। वास्तु अनुसार, साफ-सुथरा और रोशनी से भरा मुख्य द्वार घर में शुभ ऊर्जा को आकर्षित करता है, इसलिए इस स्थान को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। शाम के समय इन नियमों का ध्यान रखना घर-परिवार की बरकत और खुशहाली के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है।

  • कमाई नहीं, आदत पर डिपेंड करता है बचत, सैलरी कम हो फिर भी ऐसे बचा सकते हैं पैसे..

    कमाई नहीं, आदत पर डिपेंड करता है बचत, सैलरी कम हो फिर भी ऐसे बचा सकते हैं पैसे..

    Money Saving Tips : बदलते लाइफस्टाइल और भागदौड़ भरी जिंदगी की वजह से अच्छी से अच्छी कमाई करने वाले लोग भी महीने के अंत तक पैसों की कमी महसूस करने लग जाते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है, कमाई के साथ बढ़ता खर्च. ऐसे में अगर आप ये सोच रहे हैं कि जब आपकी कमाई अच्छी होगी, तब ही बचत होगा, तो आप गलत हो सकते हैं. क्योंकि बचत कमाई पर डिपेंड नहीं करता है, बल्कि बचत करने की आदत होती है. जिस भी व्यक्ति में बचत की आदत विकसित हो जाए, वह खर्च से पहले बचत करता है. इससे फ्यूचर में छोटे-छोटे बचत से एक अच्छी खासी रकम जमा होने लगती है. ऐसे में बचत करने की आदत डालें, भले ही आपकी कमाई कम हो. यहां जानते हैं बचत करने में क्यों होती है परेशानी और कैसे करें बचत?

    क्यों होती है बचत करने में परेशानी?

    बचत की सबसे बड़ी चुनौती कम कमाई नहीं होती, बल्कि हमारी मानसिकता होती है. अक्सर लोगों को लगता है कि बचत करने से उनका प्रसेंट लाइफ प्रभावित होगी और वे अपनी पसंद की चीजों पर खर्च नहीं कर पाएंग. लेकिन अगर आप लंबे समय के फायदों पर ध्यान देंगे, तो बचत आपको इकोनॉमिक फ्रीडम देती है.

    खर्च करने की आदतों को समझें

    बचत शुरू करने से पहले हर किसी को ये जानना जरूरी होता है कि पैसा कहां और कितना खर्च हो रहा है. इसके लिए आपको हर 1-2 महीने तक अपने खर्चों पर नजर रखने की जरूरत होती है. इसके लिए अपने बैंक स्टेटमेंट और क्रेडिट कार्ड बिल को अच्छे देखिए, कहां और कितना खर्च हो रहा है. इससे आपको समझ आएग, कौन सा खर्च कितना जरूरी है और कौन सा फिजूलखर्ची.

    कर्ज से पहले पाएं छुटकारा

    अगर आपके पास किसी तरह का लोग है, जैसे- पर्सनल लोन, क्रेडिक कार्ड लोन या फिर एजुकेशन लोन, इन्हें सबसे पहले प्राथमिकता के आधार पर चुकाएं. दरअसल, कर्ज पर लगने वाला ब्याज आपकी बचत की क्षमता पर असर डाल सकती हैं. इसे चुकाने के लिए आप बोनस और अतिरिक्त इनकम का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे आपका कर्ज जल्द से जल्द चुक सकता है.

    छोटी-छोटी फिजूलखर्ची पर लगाएं रोक

    रोजाना कैब का इस्तेमाल, बार-बार ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना या अनावश्यक खरीदारी जैसे खर्च समय के साथ बड़ी रकम में बदल जाते हैं. अगर आप कारपूलिंग, घर का खाना या जरूरत के अनुसार खरीदारी जैसी आदतें अपनाते हैं, तो हर महीने अच्छी-खासी बचत कर सकते हैं. हालांकि, सभी आदतें एक साथ बदलने की बजाय धीरे-धीरे बदलाव करना अधिक प्रभावी माना जाता है.

    मासिक बजट बनाना है जरूरी

    बजट बनाना बचत की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है. आप स्प्रेडशीट, मोबाइल ऐप या डायरी की मदद से अपने खर्चों का रिकॉर्ड रख सकते हैं. महीने के अंत में रिव्यू करने से पता चलता है कि किन खर्चों में कटौती की जा सकती है और कितनी बचत संभव है.

    अपनाएं 50-30-20 नियम

    फाइनेंशियल प्लानिंग की दुनिया में 50-30-20 नियम काफी ज्यादा मशहूर है. इसके तहत 50 प्रतिशत जरूरतें,  30 प्रतिशत इच्छाएं और 20 प्रतिशत बचत-निवेश में करना चाहिए. इस नियम का पालन करने से बजट संतुलित रहता है और नियमित बचत की आदत भी बनती है.

    बचत की शुरुआत कहां से करें?

    बचत की शुरुआत किस तरह करें, अगर आप इस बात को लेकर कंफ्यूज हैं, तो यहां जानते हैं इस बारे में-

    1. इमरजेंसी फंड बनाएं

    बचत की शुरुआत सबसे पहले इमरजेंसी फंड से करें. दरअसल, किसी भी व्यक्ति को कभी भी आर्थिक संकट या नौकरी छूटने जैसी स्थितियों से जूझना पड़ सकता है. इस संकट से बचने के लिए सबसे पहले करीब 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड रखें. ये फंड मुश्किल समय में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है.

    2. रिटायरमेंट प्लानिंग जल्द शुरू करें

    कई युवा रिटायरमेंट को बहुत दूर की बात मानकर इसकी योजना टाल देते हैं. लेकिन निवेश और बचत की दुनिया में समय सबसे बड़ा हथियार होता है. जितनी जल्दी रिटायरमेंट फंड बनाना शुरू करेंगे, कंपाउडिंग का उतना अधिक लाभ मिलेगा. सिर्फ EPF या EPS पर निर्भर रहने की बजाय अन्य इंवेस्टमेंट विकल्प पर जोर दें.

  • 58 लाख का पैकेज, अपना घर और कार फिर भी नहीं मिला कोई दूल्हा…’दुल्हन की मंडी’ में फूट-फूटकर रोई महिला..

    58 लाख का पैकेज, अपना घर और कार फिर भी नहीं मिला कोई दूल्हा…’दुल्हन की मंडी’ में फूट-फूटकर रोई महिला..

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    आज के समय में भले ही महिलाएं अपने दम पर हर मुकाम हासिल कर रही हैं, लेकिन शादी के मार्केट में आज भी पुरानी सोच का दबदबा कायम है. चीन के एक फेमस ब्राइड मार्केट से सामने आए इस वीडियो ने इसी कड़वी सच्चाई को दिखाया है. यहां एक 38 साल की महिला अपने लिए लाइफ पार्टनर ढूंढने आई थी, लेकिन स्ट्रांगली फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट होने के बाद भी उसका दिल टूट ही गया.

    58 लाख का पैकेज भी नहीं दिला पाया जीवनसाथी (High Salary of 58 Lakhs Fails to Find Match)

    वायरल वीडियो में दिखाया गया है कि, महिला काफी एजुकेटेड है और एक बड़ी कंपनी में काम करती है. उसके पास अपना घर, शानदार कार और करीब 58 लाख रुपये का सालाना पैकेज है, लेकिन जब वो अपनी डिटेल्स लेकर मंडी में पहुंची, तो वहां मौजूद लड़कों और उनके फैमिली मेंबर्स ने उसकी एज सुनते ही शादी से मना कर दिया. इस सोशल शेमिंग (Social Shaming) और रिजेक्शन से दुखी होकर वो सबके सामने ही फफक-फफक कर रो पड़ी.

    ये भी पढ़ें:-सिर्फ 5 मिनट नहाना पड़ा इतना महंगा! महिला को लगा 1.30 लाख का जुर्माना, जानिए पूरा माजरा

    क्या है चीन का ‘ब्राइड मार्केट’ और कैसे करता है काम? (What is China’s ‘Bride Market’ and How Does Work?)

    चीन का ब्राइड मार्केट (Marriage Market) पब्लिक पार्कों में लगने वाला एक ट्रेडिशनल मार्केट है, जहां पैरेंट्स अपने बैचलर (Bachelor) बच्चों (खासकर 25 से 30 साल से अधिक उम्र के) के लिए लाइफ पार्टनर की तलाश करते हैं. सबसे फेमस ब्राइड मार्केट शंघाई के पीपुल्स पार्क (People’s Park) में हर वीकेंड को ये लगता है. यहां काम करने का तरीका बेहद यूनिक है. पैरेंट्स एक छाते पर अपने बेटे या बेटी का पूरा बायोडाटा (जैसे एज, हाइट, एजुकेशन, जॉब, सैलरी, घर और कार की डिटेल) कागज पर लिखकर टांग देते हैं. इसके बाद वो पार्क में घूम-घूमकर दूसरे बायोडाटा पढ़ते हैं. आपस में बातचीत करते हैं और सब कुछ मैच होने पर ही बात आगे बढ़ाते हैं, लेकिन यहां यूथ और कम उम्र की महिलाओं को पहली प्राथमिकता मिलती है, जबकि 30 पार कर चुकी सक्सेस महिलाओं को शेंग नू (Sheng Nu) यानी ‘लेफ्टओवर वुमन’ मानकर अक्सर रिजेक्ट कर दिया जाता है.

    इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस छिड़ गई कि, ‘समाज में महिलाओं की सक्सेस को शादी के बीच क्यों लाया जाता है. कई लोगों ने महिला का सपोर्ट करते हुए कहा कि, ‘एज के आधार पर किसी की कैपेबिलिटी को रिजेक्ट गलत है.’ वहीं कुछ लोग ट्रेडिशन सोच का बचाव करते दिखे कि, ‘शादी में उम्र और परिवार बसाने की कैपेसिटी सबसे ज्यादा मायने रखती है.’

     

     

  • अब ज्यादा SIM रखने वालों पर लगाम कसेगी DoT, आपकी ये 1 गलती कनेक्शन कर सकती है सस्पेंड.

    अब ज्यादा SIM रखने वालों पर लगाम कसेगी DoT, आपकी ये 1 गलती कनेक्शन कर सकती है सस्पेंड.

    क्या आपके पास 1 से ज्यादा सिम है? क्या आप जानते हैं कि एक व्यक्ति अपने पास कितनी सिम रख सकता है? अगर नहीं, तो इस बारे में जरूर जान लें. दरअसल, दूरसंचार विभाग (DoT) ने साइबर फ्रॉड, डिजिटल धोखाधड़ी और फर्जी मोबाइल कनेक्शन पर लगाम कसने के लिए सिम कार्ड नियमों के सख्त पालन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है.

    विभाग की ओर से टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि निर्धारिक सीमा पूरी कर चुके ग्राहकों को नया मोबाइल कनेक्शन जारी न किया जाए. इसके लिए डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) का इस्तेमाल किया जाएगा, जहां सीमा तक पहुंच चुके ग्राहकों की पहचान और फोटो उपलब्ध रहेगी.

    क्या है DoT का नया नियम?

    हमारे देश में मोबाइल कनेक्शनों की अधिकतम सीमा पहले से ही तय है. सामान्य राज्यों में एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है. वहीं, असम, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में ये सीमा 6 तय की गई है. अब DoT ने इस नियम को सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए नया मॉनिटरिंग मैकेनिज्म लागू करने का फैसला किया है.

    कैसे काम करेगा नया सिस्टम?

    दूरसंचार विभाग के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) में विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए ग्राहक डेटा का विश्लेषण किया जाता है. इससे पता चलता है कि किसी व्यक्ति के नाम पर कुल कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं. अब इस प्लेटफॉर्म पर उन ग्राहकों की प्रतिनिधि तस्वीर भी उपलब्ध कराई जाएगी, जो तय सीमा तक पहुंच चुके हैं. इससे नया सिम जारी करने से पहले ग्राहक की पहचान आसान हो जाएगी.

    लिमिट से ज्यादा सिम होने पर क्या होगा?

    DoT ने इस बारे में स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी व्यक्ति का लिमिट से ज्यादा सिम है और कोई नया कनेक्शन एक्टिव हो गया है, तो उसे तुरंत सस्पेंड कर दिया जाए. ये कनेक्शन तब तक बंद रहेगा, जब तक अतिरिक्त सिम से जुड़े मामले का समाधान नहीं हो जाता.

    30 नवंबर तक पूरा होगा इंटीग्रेशन

    सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे 30 नवंबर 2026 तक इस व्यवस्था को अपने सब्सक्राइबर एनरोलमेंट और सिम एक्टिवेशन सिस्टम के साथ पूरी तरह जोड़ दें. इसके बाद नया सिम जारी करने की प्रक्रिया में रियल टाइम जांच की जा सकेगी.

    क्यों उठाया जा रहा है ये कदम

    पिछले कुछ सालों में फर्जी सिम कार्ड के जरिए बैंकिंग फ्रॉड, साइबर ठगी, फर्जी कॉल और ऑनलाइन क्रिमिनल तेजी से बढ़े हैं. कई मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम पर बड़ी संख्या में मोबाइल कनेक्शन लेकर उनका गलत इस्तेमाल किया गया. सरकार का मानना है कि मोबाइल कनेक्शनों पर बेहतर निगरानी से ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी.