सावन के महीने में बारिश का सिलसिला जारी है। बारिश मौसम को खुशनुमा बनाती है और सूखे धरती को राहत देकर उसे हरा-भरा करती है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में बारिश के पानी को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि बरसात के साफ पानी को जमा करके किए गए कुछ उपायों से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। तो चलिए जानते हैं बारिश के पानी से जुड़े कुछ आसान उपाय।
आर्थिक स्थिति से राहत का उपाय
अगर आप लंबे समय से आर्थिक तंगी से परेशान हैं, तो बारिश के पानी से जुड़ा यह उपाय कर सकते हैं। इसके लिए बारिश का पानी मिट्टी के घड़े या तांबे के बर्तन में इकट्ठा करें। बर्तन में रखें इस पानी में एक चुटकी हल्दी मिला दें। अब इसे घर की उत्तर दिशा में रख दें। सनातन धर्म
की मान्यताओं के अनुसार, 11 दिनों तक सुबह और शाम इसके पास दीपक जलाने से आर्थिक स्थिति में सुधार के योग बन सकते हैं।
अच्छी सेहत के लिए उपाय
हालांकि, बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह और सही इलाज लेना जरूरी है। लेकिन अगर परिवार में कोई व्यक्ति लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहा है तो बारिश पानी का यह उपाय राहत दे सकता है। इसे स्टील या तांबे के बर्तन में रखकर भगवान शिव की पूजा करें। इसके बाद शिवलिंग पर यह जल अर्पित करें और महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे मन को शांति और सकारात्मकता मिलने की मान्यता है।
इस उपाय से चंद्रमा को करें मजबूत
ज्योतिष में कमजोर चंद्रमा को मानसिक अशांति, अनिद्रा और आत्मविश्वास में कमी से जोड़ा जाता है। इसके लिए बारिश का पानी हरे रंग की कांच की बोतल में भरकर घर के किसी शांत स्थान पर रख सकते हैं। इसे पूरे साल स्टोर करके रखने की मान्यता है। इसके बाद आने वाले साल में पुराने पानी की जगह फिर से बारिश का नया पानी भरने की मान्यता है।
साफ पानी का करें इस्तेमाल
बारिश के पानी से जुड़े ये आसान उपाय ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन उपायों के लिए हमेशा साफ और स्वच्छ बारिश के पानी का ही इस्तेमाल करें।
डालडा और ट्रांस फैट से बढ़ सकता है हार्ट डिजीज का खतरा
दिल को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि सही खानपान भी बेहद जरूरी है। कई लोग आज भी वनस्पति घी (डालडा) से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसमें मौजूद ट्रांस फैट (Trans Fat) दिल की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है?
डाइटीशियन के अनुसार, ट्रांस फैट का अधिक सेवन हृदय रोग, खराब कोलेस्ट्रॉल और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए रोजमर्रा के भोजन में इसकी मात्रा कम रखना जरूरी है।
ट्रांस फैट क्या होता है?
ट्रांस फैट एक प्रकार की अस्वस्थ वसा (Unhealthy Fat) है, जो मुख्य रूप से वनस्पति तेल को हाइड्रोजनेशन प्रक्रिया से ठोस रूप यानी वनस्पति घी (डालडा) में बदलने पर बनती है।
हालांकि दूध और मांस जैसे कुछ खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से भी थोड़ी मात्रा में ट्रांस फैट पाया जाता है, लेकिन कृत्रिम (Artificial) ट्रांस फैट को स्वास्थ्य के लिए अधिक हानिकारक माना जाता है।
WHO क्या कहता है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार—
यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 2000 कैलोरी का भोजन करता है, तो उसके आहार में 2 ग्राम से कम ट्रांस फैट होना चाहिए।
ट्रांस फैट की मात्रा कुल दैनिक कैलोरी के 1 प्रतिशत से भी कम रखने की सलाह दी जाती है।
जितना कम ट्रांस फैट का सेवन किया जाएगा, दिल की सेहत के लिए उतना ही बेहतर होगा।
ट्रांस फैट दिल पर कैसे असर डालता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक ट्रांस फैट का सेवन—
खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ा सकता है।
अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को कम कर सकता है।
हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकता है।
रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है।
लंबे समय में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकता है।
किन चीजों में ज्यादा होता है ट्रांस फैट?
ट्रांस फैट अक्सर इन खाद्य पदार्थों में पाया जा सकता है—
वनस्पति घी (डालडा)
बेकरी प्रोडक्ट्स
पफ, पेस्ट्री और कुकीज़
नमकीन और पैकेज्ड स्नैक्स
बार-बार गर्म किए गए तेल में तले खाद्य पदार्थ
कुछ फास्ट फूड और स्ट्रीट फूड
पैकेट खरीदते समय क्या देखें?
यदि आप पैकेज्ड फूड खरीद रहे हैं, तो सबसे पहले उसका Nutrition Label और Ingredients List जरूर पढ़ें।
ध्यान रखें—
ट्रांस फैट की मात्रा जितनी कम हो, उतना बेहतर।
यदि सामग्री (Ingredients) में Hydrogenated Vegetable Oil, Partially Hydrogenated Oil या Vanaspati लिखा हो, तो ऐसे उत्पादों का सेवन सीमित करें।
केवल “0% Trans Fat” लिखे होने पर भरोसा न करें, सामग्री सूची भी अवश्य जांचें।
तेल का दोबारा इस्तेमाल क्यों नहीं करना चाहिए?
एक ही तेल को बार-बार गर्म करने से उसकी गुणवत्ता खराब हो सकती है और हानिकारक यौगिक बनने लगते हैं।
ऐसे तेल की पहचान—
तेल का रंग गहरा हो जाना।
तेल का गाढ़ा या चिपचिपा होना।
बार-बार झाग बनना।
लगातार धुआं निकलना।
ऐसे तेल में बना भोजन खाने से बचना चाहिए।
घर में रखें ये सावधानियां
वनस्पति घी के बजाय स्वस्थ तेलों का सीमित मात्रा में उपयोग करें।
तली हुई चीजें कम खाएं।
एक बार इस्तेमाल किए गए तेल को बार-बार गर्म न करें।
पैकेज्ड फूड खरीदते समय लेबल पढ़ने की आदत डालें।
ताजे और घर के बने भोजन को प्राथमिकता दें।
निष्कर्ष
दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए ट्रांस फैट का सेवन जितना संभव हो कम करना चाहिए। वनस्पति घी (डालडा), बार-बार गर्म किए गए तेल और अत्यधिक तले हुए खाद्य पदार्थों से दूरी बनाकर हृदय रोग के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली बेहतर हृदय स्वास्थ्य की कुंजी है।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी बीमारी, आहार या उपचार से जुड़ा निर्णय लेने से पहले योग्य डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह अवश्य लें।
मुगल बादशाह अकबर के दरबार में कई विद्वान थे. इन लोगों को बाद में अकबर के नवरत्न कहा गया. इन नवरत्नों में बीरबल का नाम सबसे अलग दिखाई देता है. बीरबल केवल एक दरबारी नहीं थे. वह अकबर के करीबी दोस्त थे. कवि थे. बुद्धिमान सलाहकार थे. हाजिर-जवाब इंसान थे. अकबर को उनकी बातें बहुत पसंद थीं. बीरबल का असली नाम महेश दास था. उनका जन्म उत्तर भारत के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनके जन्म-स्थान को लेकर इतिहासकारों में अलग-अलग मत मिलते हैं. कुछ लोग उन्हें कालपी का रहने वाला मानते हैं. कुछ स्रोत उन्हें कन्नौज या आसपास के क्षेत्र से जोड़ते हैं. महेश दास को बचपन से ही कविता और भाषा में रुचि थी. वह संस्कृत, हिंदी और फारसी का अच्छा ज्ञान रखते थे. उनकी बातों में सरलता थी. उनकी समझ बहुत तेज थी. भारत में अगस्त के पहले रविवार को मित्रता दिवस के रूप में मनाने का चलन है.
आइए, मित्रता दिवस के बहाने अकबर-बीरबल की दोस्ती की कहानियां जानते-समझते हैं? यह भी जानेंगे कि कैसे एक कवि बादशाह अकबर का न केवल दरबारी बना बल्कि नवरत्नों में शामिल हुआ और फिर दोनों गहरे दोस्त हो गए.
पहली मुलाकात ने बदल दी जिंदगी
कहा जाता है कि महेश दास की मुलाकात अकबर से तब हुई, जब वह दरबार में अपनी कविता सुनाने पहुंचे थे. उनकी कविता से अकबर बहुत प्रभावित हुए. अकबर उस समय ऐसे लोगों की तलाश में रहते थे, जो केवल उनकी प्रशंसा न करें. वह चाहते थे कि उनके आसपास समझदार और सच बोलने वाले लोग रहें. महेश दास ने अपनी बात बहुत आत्मविश्वास से रखी. उनकी भाषा में मिठास थी. उनकी बुद्धि में गहराई थी. अकबर ने उन्हें अपने दरबार में रख लिया. कुछ समय बाद अकबर ने उन्हें कविराय की उपाधि दी. बाद में वह राजा बीरबल के नाम से प्रसिद्ध हुए. माना जाता है कि बीरबल नाम अकबर ने ही उन्हें दिया था.
बीरबल का असली नाम महेश दास था.
दोस्ती की असली वजह क्या थी?
अकबर और बीरबल की दोस्ती केवल मजाक और हंसी पर आधारित नहीं थी. इसके पीछे कई बड़ी वजहें थीं. बीरबल अकबर को सही सलाह देते थे. वह कठिन सवालों का आसान जवाब खोज लेते थे. वह बिना डरे बादशाह की गलतियों की ओर भी इशारा कर देते थे. अकबर को बीरबल की यही बात सबसे अच्छी लगती थी. दरबार में बहुत से लोग बादशाह की बात पर तुरंत सहमति जता देते थे. बीरबल ऐसा नहीं करते थे. वह अकबर का सम्मान करते थे. लेकिन जरूरत पड़ने पर असहमति भी जताते थे. यही वजह थी कि अकबर उन्हें केवल दरबारी नहीं, बल्कि दोस्त मानते थे.
लाजवाब थी बीरबल की हाजिर-जवाबी
बीरबल की सबसे बड़ी ताकत उनकी हाजिर-जवाबी थी. वह किसी भी परिस्थिति में शांत रहते थे. सामने चाहे बादशाह हों या कोई बड़ा सेनापति, वह अपनी बात समझदारी से रखते थे. एक प्रसिद्ध कथा में अकबर ने बीरबल से पूछा-दुनिया में सबसे ज्यादा कौवे कहां हैं? बीरबल ने तुरंत जवाब दिया-जहांपनाह, आपके राज्य में. अकबर ने पूछा-अगर कौवों की संख्या इससे कम निकली तो? बीरबल बोले-तो कुछ कौवे अपने रिश्तेदारों से मिलने दूसरे राज्यों में गए होंगे. अकबर ने फिर पूछा-अगर संख्या ज्यादा निकली तो? बीरबल ने कहा-तो दूसरे राज्यों के कौवे यहां मेहमान बनकर आए होंगे. यह लोककथा है. इसका पक्का ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता, लेकिन यह बीरबल की तेज बुद्धि और हास्यबोध को दिखाती है.
बीरबल की खिचड़ी वाली कहानी
बीरबल और अकबर से जुड़ी एक और बहुत प्रसिद्ध कहानी है. इसमें एक गरीब आदमी ठंडे पानी में खड़े होकर इनाम पाने की कोशिश करता है. गरीब आदमी कहता है कि वह केवल दूर जल रहे दीपक को देखकर ठंडे पानी में खड़ा रहा. अकबर को लगता है कि दीपक की गर्मी से उसे सहारा मिला होगा. इसलिए वह उसे इनाम नहीं देते. बीरबल इस फैसले से दुखी होते हैं. अगले दिन वह दरबार में नहीं आते. अकबर उनके बारे में पूछते हैं. बीरबल संदेश भेजते हैं कि खिचड़ी पक रही है. लेकिन हांडी आग से बहुत दूर टंगी है. अकबर समझ जाते हैं कि इतनी दूर रखी हांडी में खिचड़ी नहीं पक सकती. तब बीरबल कहते हैं-अगर दूर का दीपक गरीब आदमी को गर्मी दे सकता है, तो दूर की आग खिचड़ी भी पका सकती है. अकबर को अपनी गलती समझ आती है. वह गरीब आदमी को उसका इनाम दे देते हैं. यह कहानी भी लोक प्रचलित है. इसका उद्देश्य न्याय और तर्क की बात समझाना है.
जब बीरबल ने बादशाह को आईना दिखाया
बीरबल अकबर की गलतियों पर सीधे हमला नहीं करते थे. वह अपनी बात कहानी या मजाक के जरिए कहते थे. एक कथा के अनुसार, अकबर ने कभी कहा कि उनके राज्य में सभी लोग बहुत समझदार हैं. बीरबल ने मुस्कुराकर कहा कि यह बात तभी साबित होगी, जब लोग बिना सोचे बादशाह की हर बात को सही न मानें. अकबर ने पूछा-क्या तुम मेरी बात को गलत कह रहे हो? बीरबल ने उत्तर दिया-मैं आपकी बात को गलत नहीं कह रहा. मैं केवल यह कह रहा हूं कि समझदार लोग सवाल भी पूछते हैं. अकबर को यह जवाब पसंद आया. वह जानते थे कि बीरबल उनका अपमान नहीं कर रहे. वह उन्हें बेहतर शासक बनने में मदद कर रहे हैं.
धर्म और अकबर की समझदारी
अकबर के शासनकाल में अलग-अलग धर्मों के लोग रहते थे. अकबर ने धार्मिक सहिष्णुता की नीति अपनाने की कोशिश की. बीरबल भी इस माहौल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे. बीरबल हिंदू धर्म से जुड़े थे. फिर भी वह मुगल दरबार में सम्मानित थे. अकबर उनकी धार्मिक पहचान का सम्मान करते थे. कहा जाता है कि बीरबल ने कई बार अकबर को समझाया कि किसी भी धर्म या समुदाय के बारे में फैसला करने से पहले उसके विचारों को समझना जरूरी है. अकबर के धार्मिक विचारों में समय के साथ बदलाव आया. वह अलग-अलग धर्मों के विद्वानों से चर्चा करते थे. बीरबल भी ऐसे संवादों में शामिल रहते थे.
नवरत्नों में बीरबल का स्थान
अकबर के दरबार में अबुल फजल, फैजी, तानसेन, राजा टोडरमल, राजा मान सिंह और अब्दुर्रहीम खानखाना जैसे महान लोग थे. इन लोगों को लोकप्रिय रूप से अकबर के नवरत्न कहा जाता है. इतिहासकारों का मानना है कि नवरत्न की यह सूची बाद की परंपराओं में अधिक प्रसिद्ध हुई. अकबर के समय सभी नौ लोगों की एक आधिकारिक सूची का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलता. फिर भी बीरबल का महत्व इसमें कम नहीं होता. वह अकबर के भरोसेमंद सलाहकार थे. वह सैनिक अभियानों में भी शामिल हुए. उन्हें ऊंचा पद मिला. उनकी पहचान एक प्रभावशाली दरबारी के रूप में बनी.
यह भी पढ़ें:भाई की हत्या, बाप को सज़ा, औरंगज़ेब ने शाहजहां को कैसे याद दिलाया गद्दी के लिए कत्लेआम का इतिहास?
बीरबल की मृत्यु और अकबर का दुख
बीरबल की मृत्यु वर्ष 1586 में हुई. वह उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में एक सैन्य अभियान पर गए थे. यह अभियान यूसुफजई कबीलों के खिलाफ था. युद्ध में बीरबल और उनके साथ बड़ी संख्या में सैनिक मारे गए. यह अकबर के शासनकाल की बड़ी सैन्य त्रासदियों में से एक थी. इतिहास में यह भी मिलता है कि अकबर को बीरबल की मृत्यु से गहरा दुख हुआ. बीरबल उनके सबसे करीबी लोगों में थे. दरबार में उनकी जगह कोई आसानी से नहीं ले सका. उनकी मृत्यु के बाद अकबर के जीवन से हंसी का एक बड़ा स्रोत चला गया. बीरबल के साथ अकबर को केवल एक मंत्री नहीं, बल्कि अपना सच्चा मित्र खोना पड़ा.
क्यों लोकप्रिय हैं बीरबल की कहानियां?
बीरबल की कहानियां बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आती हैं. इनमें मनोरंजन भी है और सीख भी. इन कहानियों में बीरबल कमजोर व्यक्ति की मदद करते हैं. वह लालची लोगों को सबक सिखाते हैं. झूठे लोगों का पर्दाफाश करते हैं. वह अकबर को भी तर्क के जरिए समझाते हैं. इनमें से कई कहानियां लोककथाएं हैं. उन्हें इतिहास का पक्का दस्तावेज नहीं माना जा सकता. फिर भी वे बीरबल की लोकप्रिय छवि को समझने में मदद करती हैं. बीरबल की असली महानता उनकी बुद्धि में थी. उन्होंने साबित किया कि दरबार में स्थान केवल ताकत से नहीं मिलता. ज्ञान, विनम्रता और सही समय पर सही बात कहने की क्षमता भी बहुत जरूरी होती है. अकबर और बीरबल की दोस्ती इसी विश्वास पर टिकी थी. एक बादशाह था. दूसरा उसका समझदार सलाहकार, लेकिन दोनों के बीच रिश्ता दोस्ती का था. यही वजह है कि सैकड़ों साल बाद भी बीरबल और अकबर की जोड़ी लोगों के दिलों में जिंदा है.
आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
यानी AI हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. ऑफिस का काम हो, ई-मेल लिखना हो या कोई आइडिया सोचना हो, हर जगह लोग धड़ल्ले से AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को से सोशल मीडिया पर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसके बारे में जानकर हर कोई दंग रह गया है. दरअसल, यहां एक शख्स ने अपनी लव लाइफ को ही ऑटोमेट कर दिया. जब इस बात का खुलासा हुआ, तो उसकी गर्लफ्रेंड ने फौरन ब्रेकअप कर लिया. आइए जानते हैं इस दिलचस्प कहानी के बारे में.
क्या है पूरा मामला?
यह अनोखी लव स्टोरी X (पहले ट्विटर) पर डेलिया लाजारेस्कु (Delia Lazarescu
) नाम की एक यूजर की पोस्ट के जरिए वायरल हुई. सैन फ्रांसिस्को की एक महिला को लंबे समय तक यह लगता रहा कि उसका बॉयफ्रेंड उससे बेपनाह मोहब्बत करता है. वह उसकी दिन भर परवाह करता है. हर पल प्यारे-प्यारे मैसेज भेजता है. लेकिन जब इसके पीछे का सच सामने आया, तो महिला के पैरों तले मानो जमीन खिसक गई. असल में महिला जिससे हर दिन बातें कर रही थी, वो कोई इंसान नहीं बल्कि एक AI चैटबॉट था.
AI चैटबॉट संभाल रहा था रिश्ते की हर जिम्मेदारी
वायरल दावे के अनुसार, शख्स ने अपने इस रिलेशनशिप के लगभग सारे काम AI चैटबॉट को सौंप रखे थे. गुड मॉर्निंग मैसेज से लेकर दिनभर हालचाल पूछने तक, सब कुछ AI चैटबॉट ही करता था. यहां तक कि छोटी-मोटी बहस के दौरान क्या जवाब देना है, यह भी AI चैटबॉट ही तय करता था. डिनर डेट और घूमने-फिरने की प्लानिंग भी शख्स ने ऑटोमेट कर रखा था. यानी महिला जिसे सच्ची मोहब्बत समझ रही थी, असल में वह कोडिंग और एल्गोरिदम था. यह भी पढ़ें:Viral Video: तोहफा हो तो ऐसा! AI लव स्टोरी देखकर छलके दुल्हन के आंसू; देखें ये वायरल वीडियो
इंटरनेट पर लोगों के मजेदार रिएक्शन
इस अजब प्रेम की गजब कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई. एक यूजर ने मजाकिया लहजे में लिखा, भाई ने अपनी पूरी लव लाइफ ही आउटसोर्स कर दी और अंत में ब्रेकअप का तोहफा मिल गया. दूसरे ने कहा कि इस शख्स ने हर चीज ऑटोमेट करने के आइडिया को कुछ ज्यादा ही सीरियसली ले लिया था. यह भी पढ़ें: वो मेरी जिंदगी है 72 की बुजुर्ग महिला के प्यार में पागल हुआ 22 साल का लड़का, रचा ली शादी; चर्चा में अजब प्रेम की गजब कहानी
Disclaimer: यह खबर वायरल सोशल मीडिया पोस्ट और नेटिजन्स की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है.
बालाघाट.
प्रकृति में कई ऐसे सवाल है, जिसका जवाब मिलना मुश्किल ही हो जाता है. ऐसे में हम उसे चमत्कार कहते हैं. एक ऐसा ही चमत्कार बालाघाट जिले के गढ़दा गांव की पहाड़ी पर देखने को मिलता है, जहां पर करीब चार किलोमीटर की चढ़ाई करने के बाद मां अन्नपूर्णा का धाम आता है. वहीं पर मां अन्नपूर्णा चट्टानों के बीज विराजित है. उसी विशाल चट्टान पर एक पेड़ है, जो काफी बड़ा है. ऐसे में उस पेड़ को देख लोग हैरान हो जाते हैं. वहीं, उस पेड़ की प्रजाति का है इसकी जानकारी बहुत नहीं थी. अब इस पेड़ को लेकर कई दावे किए जाते हैं.
अब से कुछ साल पहले तक इस पेड़ की पहचान नहीं हो सकी थी. लेकिन काशी से कुछ लोग आए थे. ऐसे में उन्होंने बताया कि यह पेड़ की पहचान कल्पवृक्ष के रूप में किए थे. हालांकि, मंदिर के पुजारी बताते हैं कि इस पेड़ की उम्र का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. यह वृक्ष भी काफी विशाल है.
दुर्लभ प्रजाति का है ये पेड़
बालाघाट जिला एक वना आधारित जिला है. यहां पर कई प्रकार और कई प्रजाति की वनस्पति है. ऐसे में ज्यादातर पेड़ों या वृक्षों की पहचान हो चुकी है. लेकिन कई ऐसे पेड़ है, जिसे स्थानीय लोग भी नहीं पहचान पाते हैं. ऐसे में इसे दुर्लभ माना जाता है. यह वृक्ष इतना विशाल है कि इसका अंदाजा लगाना कठिन है कि वह कितना बड़ा है. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस वृक्ष का क्षेत्रफल करीब 100 वर्ग फीट से भी ज्यादा है.
जड़ नहीं दिखती पत्तियों में स्वाद नहीं
मां अन्नापूर्णा धाम के पुजारी बताते हैं कि इस पेड़ को देख हैरानी होती है. दरअसल, यह विशाल वृक्ष सिर्फ चट्टान तक ही दिखता है. इसकी जड़ें भूमि में मिलती हुई प्रतीत नहीं होती है. ऐसे में यह एक रहस्य है, जहां कि दुर्लभ प्रजाति के पेड़ को पोषण कैसे मिलता है. जहां एक ओर जंगल के सारे पेड़ हमेशा से गर्मी में सुख जाते हैं. लेकिन यह वृक्ष साल भर हरा भरा रहता है. ऐसे में इस बात से भी लोग हैरान हो जाते हैं.
इच्छा पूरी करने वाला है पेड़!
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यह वृक्ष मनोकामनाएं पूरी करने वाला है. मां अन्नपूर्णा के गढ़दा धाम में प्रकट दिवस, नवरात्रि (शारदेय और चैत्र) में भक्तों की भारी भीड़ रहती है. ऐसे में आने वाले भक्त हमेशा अपनी मन्नत पूरी करने के लिए इस पेड़ मन्नत बांधते हैं. वहीं, मन्नत पूरी होने पर वह चुनरी भी छोड़ देते हैं. ऐसे में यहां नौकरी लगने से लेकर संतान प्राप्ति का कामना लेकर कठिन चढ़ाई चढ़ते हैं और इस इच्छा पूरी करने वाले कल्प वृक्ष की अर्चना भी करते हैं.
सेहत के लिए भी है फायदेमंद
गढ़दा मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सहदेव अड़मे बताते हैं कि इसकी पत्तियों की सेवन से गैस की समस्या से राहत मिलती है. वहीं, मंदिर के पुजारी ने दावा किया कि इस वृक्ष की पत्तियों का चूर्ण बनाकर शहद के साथ सेवन करने से लकवा जैसी गंभीर बीमारी से राहत मिलती है. वहीं, इसकी पत्तियों के सेवन से ब्लड पेशर, गैस और पेट की बीमारियों से राहत मिल सकती है. लेकिन, लोकल 18 इन दावों की पुष्टि नहीं करता है.
हालांकि, यह वृक्ष काफी विशाल है और दुर्लभ प्रजाति का जरूर है. ऐसे में चट्टान के ऊपर होना और जड़ का नजर न आना प्रकृति प्रेमियों में रोमांच उत्पन्न करता है.
सपनों को भविष्य में होने वाली कुछ घटनाओं के संकेत के रूप में भी देखा जाता है। मान्यता है कि व्यक्ति को सपनों के माध्यम से शुभ और अशुभ संकेत मिलते हैं। सपने में कुछ खास चीजें दिखाई दें, तो वे आने वाले समय में आर्थिक चुनौतियों का संकेत हो सकती हैं। ऐसे संकेतों को समझना जरूरी हो जाता है, ताकि व्यक्ति समय रहते आर्थिक मामलों में सावधानी बरत सके। जानिए किस तरह के संकेत आने वाले आर्थिक समस्याओं या धन हानि की तरफ इशारा करते हैं।
बिखरे पैसे या खाली तिजोरी
स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर सपने में नोट या सिक्के इधर-उधर बिखरे हुए दिखाई दें, तो यह अनावश्यक खर्च बढ़ने का संकेत होता है। वहीं सपने में खाली तिजोरी, अलमारी या खाली पर्स दिखाई देना भी भविष्य में आर्थिक तंगी की ओर इशारा करता है। ऐसे समय में फिजूलखर्ची से बचने, बजट बनाकर चलने और किसी भी निवेश से पहले अच्छी तरह सोचने की सलाह दी जाती है।
सोना या गहने खोना
अगर सपने में सोना, चांदी या अन्य कीमती आभूषण खोते हुए दिखाई दें, तो इसे धन या मूल्यवान वस्तुओं के नुकसान का संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में अपनी आर्थिक योजनाओं पर विशेष ध्यान देना और लेनदेन के मामलों में सतर्क रहना बेहतर माना जाता है।
धुंधला या अंधेरा रास्ता
सपने में धुंधला या अंधेरे से भरा रास्ता दिखाई देना इस बात का संकेत माना जाता है कि जल्दबाजी में लिया गया कोई आर्थिक फैसला नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए किसी भी बड़े निवेश, साझेदारी या वित्तीय निर्णय से पहले सभी पहलुओं पर विचार करना जरूरी माना जाता है।
पानी का बह जाना
अगर सपने में लगातार बहता हुआ पानी दिखाई दे या ऐसा महसूस हो कि धन हाथ से निकल रहा है, तो स्वप्न शास्त्र में इसे अचानक बढ़ने वाले खर्च या आर्थिक हानि का संकेत माना गया है। ऐसी स्थिति में धन का सही प्रबंधन करना और अनावश्यक खर्चों से बचना लाभदायक माना जाता है। ऐसे सपने बार-बार दिखाई दें, तो इन्हें सतर्क रहने और आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।
डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
डायबिटीज (मधुमेह) एक ऐसी मेटाबॉलिक बीमारी है, जिसमें शरीर में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। यह बीमारी पूरी तरह खत्म नहीं की जा सकती, लेकिन समय पर पहचान और सही इलाज से इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की मेडिकल जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज के कई शुरुआती संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें अक्सर लोग सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यदि इन लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो बीमारी को बढ़ने से काफी हद तक रोका जा सकता है।
डायबिटीज के 11 वॉर्निंग साइन
ICMR की रिपोर्ट के अनुसार, निम्नलिखित लक्षण डायबिटीज के शुरुआती संकेत हो सकते हैं—
बिना किसी स्पष्ट कारण के तेजी से वजन कम होना।
हर समय थकान और कमजोरी महसूस होना।
बार-बार चिड़चिड़ापन या मूड में बदलाव होना।
त्वचा, जननांग, मूत्र मार्ग या मुंह में बार-बार संक्रमण होना तथा घाव का देर से भरना।
मुंह का बार-बार सूखना।
पैरों में जलन, दर्द, झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होना।
शरीर में लगातार खुजली रहना।
खाना खाने के कुछ घंटे बाद ब्लड शुगर का अचानक कम हो जाना।
गर्दन, बगल या जननांगों के आसपास त्वचा का काला पड़ना, जो इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है।
धुंधला दिखाई देना या नजर कमजोर होना।
पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (स्तंभन संबंधी समस्या) होना।
डायबिटीज के सामान्य लक्षण भी जान लें
इन शुरुआती संकेतों के अलावा डायबिटीज में कुछ सामान्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं, जैसे—
बार-बार पेशाब आना।
जरूरत से ज्यादा प्यास लगना।
बार-बार भूख लगना।
ब्लड शुगर का लगातार बढ़ा रहना।
शरीर में दर्द और बेचैनी महसूस होना।
प्री-डायबिटीज को पहचानना भी जरूरी
प्री-डायबिटीज वह अवस्था है, जिसमें ब्लड शुगर सामान्य से अधिक होता है लेकिन डायबिटीज की सीमा तक नहीं पहुंचता। इस दौरान शरीर में इंसुलिन का असर कम होने लगता है।
यदि खाना खाने के 2–3 घंटे बाद ब्लड शुगर अचानक गिरने लगे, तो यह इंसुलिन मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में ब्लड शुगर की जांच और डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
किन लोगों में डायबिटीज का खतरा ज्यादा होता है?
कुछ लोगों में डायबिटीज होने का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है, जैसे—
परिवार में किसी सदस्य को डायबिटीज होना।
35 वर्ष या उससे अधिक उम्र।
अधिक वजन या मोटापा।
कमर और पेट के आसपास अधिक चर्बी होना।
हाई ब्लड प्रेशर की समस्या।
हाल के समय में तेजी से वजन बढ़ना।
शारीरिक गतिविधि की कमी।
महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज (Gestational Diabetes) का इतिहास।
समय पर जांच क्यों है जरूरी?
डायबिटीज कई वर्षों तक बिना स्पष्ट लक्षणों के भी शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए यदि ऊपर बताए गए संकेत बार-बार दिखाई दें या आपके पास जोखिम कारक मौजूद हों, तो ब्लड शुगर की जांच कराना और डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय पर पहचान और जीवनशैली में बदलाव से डायबिटीज को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से परामर्श लें और आवश्यक जांच अवश्य कराएं।
मुगलों के हरम में सख़्त पाबंदियां थीं. आमतौर पर इन पर किन्नरों का पहरा था. फिर भी भीतर की कहानियां बाहर निकलती थीं. शहजादियों के प्रेम -प्रसंग खुसर-पुसुर और लुका-छिपी के बीच एक कान से दूसरे कान के बीच से गुजरते दूर तक उड़ान भर लेते थे. दरबारी इतिहासकारों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे इसे दर्ज करेंगे. लेकिन उस दौर में दरबार के नजदीक पहुंचे यूरोपीय यात्रियों और इतिहासकारों ने इसे कलमबंद किया. पकड़े जाने पर प्रेमियों को अपनी जान गंवानी पड़ी.
शहजादियों पर पहरा और कड़ा हुआ या कैद में डाली गईं. लेकिन अनेक शाहजादियां अविवाहित क्यों रहीं? असलियत में उनकी शादियों पर पाबंदी का चलन अकबर के समय शुरू हुआ, जिसकी सोच थी कि शाही परिवार में शादियां तख़्त के नए दावेदार खड़े कर समस्याएं बढ़ाएंगी. पढ़िए मुग़ल शहजादियों से जुड़े कुछ रोचक किस्से.
तख़्त के दावेदारों से बचने के लिए शहजादियां रखीं गईं कुंवारी
बाबर और हुमायूं के समय कुछ शहजादियों की शादियां मुगल दरबार के ऊंचे ओहदेदारों के साथ हुईं. लेकिन अकबर के समय से यह सिलसिला लगभग थम गया. इस रोक का मकसद सियासी माना जाता है. सोच थी कि मुगल खानदान से जुड़ने वाले दूसरे कुल के लोग शाही उत्तराधिकार के नए दावेदार के तौर पर न खड़े हो जाएं. दिलचस्प है कि इन शहजादियों को खूब धन-दौलत और नियमित आमदनी के लिए जागीरें सौंपी गईं.
हरम की महिलाओं का बाग, दरगाह, या रिश्तेदारों के घर तक ही जाना होता था.
ऊंचे खिताब दिए गए. उनकी बाहरी दुनिया चमक-दमक से रोशन थी लेकिन निजी जिंदगी अंधेरों से भरी और बेड़ियों से जकड़ी हुई थी. असलियत में शाही हरम के ठाठ-बाट बीच एक अलग दुनिया भी थी, जिसमें अनुशासन के नाम पर मन से रहने-जीने की गुंजाइश नहीं थी. अपनी मर्जी से शादी न करने का फैसला अलग मसला होता है. लेकिन जब यह पाबंदी पिता और परिवार की ओर से होती हैं , तो खतरों के बीच भी प्यार-मुहब्बत के अंकुर फूटते हैं.
कई शहजादियों के साथ भी ऐसा ही हुआ है. बात अलग है कि इश्क-मुश्क छिपाये नहीं छिपता. वहां के खतरों का क्या कहना जहां यह बादशाह की बेटियों के साथ हो. भांडा जब भी फूटा तो आमतौर पर आशिकों ने जान देकर कीमत चुकाई. उधर शहजादियों पर बंदिशें और बढ़ीं. लेकिन तमाम रोक-टोक बीच यह सिलसिला चलता रहा.
जहांआरा से मोहब्बत की सजा मौत
मुगल इतिहास की शहजादियों में शाहजहां की बेटी जहांआरा बेगम का ऊंचा मुकाम है. मुमताज़ महल की मौत के बाद वही “पादशाह बेगम” बनी और पूरा हरम उसी के जिम्मे था. औरंगज़ेब द्वारा शाहजहां को बंदी बनाए जाने और फिर उसकी मौत तक जहांआरा पिता की खिदमत में रही. बाद में औरंगज़ेब ने भी उसे दरबार में ऊंचा दर्जा दिया. लेकिन शादी उसकी किस्मत में नहीं थी. बेहद जहीन जहांआरा खूब पढ़ती और लिखती थी. माना जाता है कि एक अत्यंत सुंदर एवं प्रभावशाली ईरानी अमीर नज़र ख़ां से उसका प्रेम प्रसंग चल रहा था. इसकी जानकारी मिलने पर शाहजहां कुपित हुआ.
नज़र ख़ां को विष देकर मरवा दिया गया. फ्रांसीसी यात्री फ़्रांस्वा बर्नियर और इतालवी यात्री निकोलाओ मनुच्ची दोनों ही ने इसका उल्लेख किया है.अंग्रेज चिकित्सक गैब्रियल बॉटन से जुड़ा जहाँआरा का दूसरा प्रेम प्रसंग भी काफी चर्चित रहा है. हालांकि फारसी इतिहासकारों के ब्यौरों में उल्लेख न होने के कारण आधुनिक इतिहासकार इसकी प्रमाणिकता पर सवाल करते हैं.
रोशनारा के इश्क का सिलसिला
तख़्त की जंग में अगर जहांआरा बड़े भाई दारा के साथ थी तो उसकी बहन रोशन आरा छोटे भाई औरंगज़ेब के साथ. बादशाह बनने पर औरंगज़ेब ने रोशन आरा को मल्लिका-ए-जहां बनाया. इस हैसियत में रोशन आरा के खिलाफ तमाम शिकायतें थीं लेकिन औरंगज़ेब के सब्र का प्याला तब छलक गया, जब हरम में रोशन आरा के इश्क में गिरफ्तार मर्दों की आमद की जानकारी उस तक पहुंचीं. औरंगजेब ने खुद ही असलियत जानने का फैसला किया.
शाही फ़ौज की एक टुकड़ी ने हरम से किसी के बाहर निकलने की गुंजाइश नहीं छोड़ी. औरंगजेब हरम में पहुंचा और रोशनारा को अपने ईरानी आशिक के साथ पकड़ लिया. मल्लिका की बदनामी हरम से निकल दूर तक फैली. ईरानी को मौत की सजा हुई. असलियत में रोशन आरा का यह इश्क वालिद शाहजहां के वक्त से चल रहा था. वह आशिक नाना आसफजहां का दूर का रिश्तेदार था. शाहजहां को जब इसकी जानकारी हुई तो उसने रियायत की और सजा के तौर पर ईरानी को काबुल रवाना कर दिया था.
औरंगज़ेब की बादशाहत के दौरान मजबूत होने पर रोशन आरा ने उस अमीर को वापस बुला लिया था. वालिद के वक्त में ही कम उम्र मे रोशन आरा दरबार के एक ऊंचे ओहदेदार अधिक उम्र के राजपूत अमीर पर फिदा हो गई थी. यह राजपूत मंसबदार शाहजहां की एक राजपूत बेगम के घराने का था. जागीर में वापस भेजकर शाहजहां ने उसे रोशनारा से दूर किया था.
मुगल बादशाह औरंगजेब.
बहन के बाद भतीजी की निगरानी में रोशन आरा
वालिद के दौर में दोनों बहनों जहांआरा और रोशन आरा में दूरियां काफी बढ़ गई थीं. बड़ी बहन के अख्तियार से वह रोशन आरा को डांटती और टोकती रहती थी. उसकी हरकतों पर निगाह के लिए कई लड़कियां लगा दी थीं. औरंगजेब के यहां रोशन आरा के रास्ते में बहन का कांटा तो नहीं था लेकिन ईरानी आशिक के साथ पकड़े जाने के बाद
औरंगजेब चौकन्ना था. उसने रोशन आरा की जासूसी की जिम्मेदारी अपनी बेटी जेबुन्निसा को सौंपी. उसने जो जानकारी जुटाई , उसके मुताबिक फूफी रोशनारा के एक-दो नहीं पूरे नौ आशिक हैं. वे समय-समय पर उससे मिलते रहते हैं. औरंगजेब ने रोशन आरा से सफाई मांगी. पलटवार में उसने जेबुन्निसा को ही कसूरवार ठहराया और अपने एक आशिक के जेबुन्निसा से नाजायज रिश्ते बताए. फिर ये आशिक पकड़े गए. काजी के सामने पेश किया गया.
इन नौ में पांच जिनका गुनाह साबित हो गया था, उन्हें हनफ़ी कानून के तहत मौत की सजा दे दी गई. भारी फजीहत और बदनामी के चलते रोशन आरा ने जहर पीकर जान देने की नाकाम कोशिश की. उसके सारे शरीर में सूजन आ गई. हकीम, वैद्य और फिरंगी डॉक्टरों ने इस सूजन को धीमे जहर का असर बताया. जहाँआरा को शक था कि रोशन आरा ने जहर खुद नहीं पिया बल्कि यह औरंगज़ेब की करतूत थी.
ज़ेबुन्निसा को मिली जेल
औरंगज़ेब की बेहद खास बेटी ज़ेबुन्निसा फ़ारसी की शायरा थीं और “मख़्फ़ी” उपनाम शायरी करती थी. चर्चा थी कि उसका इश्क लाहौर के सूबेदार अक़ील ख़ां रज़ी से हुआ. दोनों के बीच शायरी का आदान-प्रदान भी होता था. रोशन आरा के दरबार से हटाए जाने के बाद एक बार फिर मल्लिका-ए-जहां बनी जहांआरा भी भतीजी के इस प्रेम प्रसंग से अनजान नहीं थी, पर उसने इस मसले पर चुप रहना बेहतर समझा. बात फिर भी औरंगज़ेब तक पहुंची और खूब गुस्सा हुआ.
ज़ेबुन्निसा को उसने लंबे समय तक क़ैद में रखा. गुलबदन बेगम, सलीमा सुल्तान बेगम, ज़ीनत-उन-निसा आदि की प्रेम कथाएं भी चर्चा में रहीं. ऐसे प्रेम प्रसंगों का भांडा फूटने पर आशिकों को भारी कीमत चुकानी पड़ी. किसी को जहर दिया गया तो किसी का गला घोंटा गया. कोई हाथी से कुचला गया तो कोई ऐसा गायब हुआ कि फिर कभी पता नहीं चला. खुशनसीब वे थे , जिनकी जान बची और सजा के तौर पर सिर्फ मुग़ल सल्तनत से दूर कहीं और भेज दिए गए.
वाशिंगटन.
जीवन में जब इंसान को एक बार भी कैंसर जैसी घातक और खौफनाक बीमारी का सामना करना पड़ता है, तो उसकी पूरी दुनिया हिल जाती है. लेकिन अमेरिका के कंसास राज्य स्थित ओवरलैंड पार्क की रहने वाली 53 वर्षीय लिज बैंडिट की कहानी इंसान की अटूट इच्छाशक्ति की एक ऐसी मिसाल है, जिसे सुनकर पूरी दुनिया हैरान है. लिज ने अपने जीवन में एक या दो बार नहीं, बल्कि पूरे छह बार कैंसर जैसे जानलेवा दुश्मन को पटकनी दी है. जब डॉक्टरों ने उनके पास महज एक साल का समय बचने की आशंका जताई थी, तब दो छोटे बच्चों की मां लिज ने हार मानने के बजाय हर बार मौत के मुंह से वापसी की और आज वे पूरी तरह स्वस्थ होकर हाफ मैराथन दौड़ रही हैं. लिज की यह खौफनाक यात्रा साल 2009 में शुरू हुई थी, जब वे 36 साल की थीं और दो छोटे बच्चों (3 साल की बेटी ईव और 1 साल के बेटे एलेक्स) की मां थीं.
स्विमिंग पूल के पास टहलते समय उनकी मां की नजर लिज के पैर पर मौजूद एक अजीब तिल पर पड़ी. मां के बार-बार ज़िद करने पर जब लिज ने डर्मेटोलॉजिस्ट को दिखाया, तो रिपोर्ट में स्किन कैंसर यानी मेलानोमा की पुष्टि हुई. डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि अगर यह कैंसर शरीर में फैल गया, तो उनके पास जीने के लिए एक साल से भी कम वक्त बचा है. दो मासूम बच्चों के सिर से मां का साया उठने का डर लिज के दिल में बैठ गया था, लेकिन पहली सर्जरी के जरिए उनका मेलानोमा ट्यूमर निकाल दिया गया. हालांकि, यह तो 15 साल लंबे दर्दनाक सिलसिले की महज शुरुआत थी. साल 2010 में लिज को थायरॉयड कैंसर हो गया, जिसके लिए उनकी सर्जरी कर थायरॉयड ग्रंथि हटानी पड़ी. इसके बाद 2015 में उनकी नाक पर बैसल सेल कार्सिनोमा का पता चला, जिससे उनकी चेहरे की सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी करनी पड़ी.
दुख का पहाड़ तब और टूट पड़ा जब 2017 में उनके बाएं ब्रेस्ट में कैंसर पाया गया, जिसके लिए 35 बार रेडिएशन थेरेपी और सर्जरी झेलनी पड़ी. हद तो तब हो गई जब 2023 में उनके दाहिने ब्रेस्ट में भी कैंसर की पुष्टि हुई और 2024 में एक बार फिर उनके पैर में मेलानोमा लौट आया. इतनी भयावह और बार-बार टूटने वाली परिस्थितियों के बावजूद लिज ने हिम्मत नहीं हारी. वे लगातार इलाज कराती रहीं और आखिरकार 2025 में डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह कैंसर-मुक्त घोषित कर दिया. छह बार मौत को चकमा देने के बाद लिज ने अपनी इस जीत का जश्न हाफ मैराथन दौड़कर मनाया. अपने दर्दनाक अनुभवों का इस्तेमाल दूसरों की मदद के लिए करते हुए लिज ने 2020 में द बाम बॉक्स नाम से एक कंपनी शुरू की, जो कैंसर मरीजों को उनके इलाज के हिसाब से जरूरी राहत सामग्री के केयर पैकेज बनाकर देती है. आज 53 साल की उम्र में लिज बेहद फिट हैं, हर हफ्ते अपने दोस्तों के साथ दौड़ती हैं और हर पल को खुशी-खुशी जी रही हैं.
आजकल हर कोई अच्छी जिंदगी जानी चाहता है, जिसके लिए अच्छी कमाई की जरूरत होती है। बहुत बार लोग पैसा तो कमा लेते हैं, लेकिन वो कहां जाता पता ही नहीं चलता। अगर अच्छी कमाई के बावजूद घर में पैसा टिक नहीं रहा या बार-बार आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, तो वास्तु शास्त्र में कुछ आसान उपाय बताए गए हैं। इन्हीं में से एक नमक और लौंग का उपाय भी है, जिसे घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि बढ़ाने वाला माना जाता है। जानिए इस उपाय के बारे में।
नमक और लौंग का महत्व
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की ऊर्जा का असर परिवार की सुख-शांति और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। मान्यता है कि नमक नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मदद करता है, जबकि लौंग की सुगंध घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने का प्रतीक मानी जाती है।
ऐसे करें यह उपाय
इस उपाय के लिए एक कांच की कटोरी लें और उसमें थोड़ा-सा मोटा नमक भर दें। अब उसमें चार या पांच लौंग रखकर घर के किसी ऐसे कोने में रखें, जहां वह सुरक्षित रहे। कई लोग इस उपाय को घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखने के लिए अपनाते हैं।
क्या है मान्यता?
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, इस उपाय से घर में नकारात्मकता कम होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। माना जाता है कि इससे आर्थिक स्थिति में सुधार, धन की आवक और घर में सुख-शांति बनी रहने में मदद मिल सकती है। साथ ही लौंग की खुशबू से घर का वातावरण भी ताजगी भरा महसूस होता है।
बाथरूम के लिए भी उपाय
अगर बाथरूम से जुड़ा कोई वास्तु दोष माना जाता है, तो वहां एक कटोरी में क्रिस्टल नमक भरकर किसी सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी जाती है। ध्यान रखें कि समय-समय पर उस नमक को बदलते रहें। मान्यता है कि इससे वहां की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और वातावरण अधिक संतुलित बना रहता है।