साल की सभी मासिक शिवरात्रि में सावन शिवरात्रि सबसे खास है. इस दिन शिवलिंग पर कांवड़ में लाया गया गंगाजल अर्पित करने, विशेष पूजा-अर्चना करने की परंपरा है. साथ ही पूरी रात जागकर 4 प्रहर की पूजा भी की जाती है. क्या आप जानते हैं कि सावन शिवरात्रि की रात जागरण करने और 4 प्रहर की पूजा करने के पीछे क्या वजह है? साथ ही आज 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का समय क्या है?
4 प्रहर क्या हैं?
हिन्दू काल गणना के अनुसार, एक दिन और रात में कुल आठ प्रहर होते हैं, जिसमें दिन के 4 प्रहर और रात के 4 प्रहर होते हैं. इस तरह हर प्रहर में करीब 3 घंटे होते हैं, जिन्हें मिलाकर 24 घंटे बनते हैं. रात के 4 प्रहर का समय और उनके नाम.
पहला प्रहर (प्रदोष काल): शाम 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक
दूसरा प्रहर (निशिथ काल का पूर्व भाग): रात 9:00 बजे से रात्रि 12:00 बजे तक
तीसरा प्रहर (त्रियामा): रात्रि 12:00 बजे से तड़के 3:00 बजे तक
चौथा प्रहर (उषा काल): तड़के 3:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक
सावन शिवरात्रि पर 4 प्रहर की पूजा क्यों?
मान्यता है कि सावन शिवरात्रि पर रातभर जागकर 4 प्रहर की पूजा करने से शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि होती है. दरअसल, रात में शांति होती है, साथ ही व्यक्ति अपने अंदर के कोलाहल को भी शांत करके अपना ध्यान और आंतरिक ऊर्जा भगवान पर केंद्रित कर पाता है. साथ ही वह भगवान की भक्ति के लिए नींद का त्याग करता है. जो उसके संयम और धैर्य की परीक्षा है.
धार्मिक मान्यता है कि सावन शिवरात्रि की रात में जागकर की गई पूजा का कई गुना ज्यादा फल मिलता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
सावन शिवरात्रि 2026 के 4 प्रहर पूजा मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 04:53 बजे आरंभ होगी और 12 अगस्त को देर रात 01:52 बजे खत्म होगी. चूंकि सावन शिवरात्रि के दिन महाशिवरात्रि की तरह रात्रि के चारों प्रहर में पूजा की जाती है, जो कि 11 अगस्त की रात को ही मिल रहे हैं. इसलिए 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि मनाई जा रही है. इसके 4 प्रहर पूजा मुहूर्त –
प्रथम प्रहर की पूजा- शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक
द्वितीय प्रहर की पूजा- रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक
तृतीय प्रहर की पूजा- रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक
चतुर्थ प्रहर की पूजा- सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक
किस प्रहर में कैसी पूजा?
प्रथम प्रहर (प्रदोष काल) : रात के पहले प्रहर में सावन शिवरात्रि की रात शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करें. मान्यता है कि ऐसा करने से सुख-शांति और समृद्धि मिलती है.
दूसरा प्रहर (निशिथ काल का पूर्व भाग): दूसरे प्रहर में शिवलिंग पर दही अर्पित करें. ऐसा करने से धन-ऐश्वर्य मिलता है. साथ ही संतान सुख प्राप्त होता है.
तीसरा प्रहर (त्रियामा): तीसरे प्रहर में शिवलिंग पर गाय का घी अर्पित करें. ऐसा करने से बीमारियां दूर होती हैं, आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है. साथ ही पाप नष्ट करने और आध्यात्मिक ऊर्जा पाने के लिए भी यह कारगर है.
चौथा प्रहर (उषा काल): सुबह के इस प्रहर में शिवलिंग पर शहद या शक्कर अर्पित करें. इससे वाणी का प्रभाव और कोमलता बढ़ती है. जीवन में मिठास बढ़ती है. जो लोग कर्ज से परेशान हैं, उन्हें इस प्रहर की पूजा में कर्ज मुक्ति की प्रार्थना करें.
सावन शिवरात्रि जल टाइम
सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का समय बहुत ज्यादा सर्च किया जाता है. कई किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद पवित्र तीर्थों से लाए गए गंगाजल को शुभ मुहूर्त में शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है. इस साल सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक की कुल अवधि सुबह 04:54 बजे से देर रात 01:52 बजे तक है. इसमें 3 शुभ मुहूर्त प्रमुख हैं.
सर्वोत्तम ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:23 से 06:00 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 से 12:58 बजे तक
निशिता काल (रात्रि पूजा): रात 11:59 से 12:43 बजे तक
Disclaimer-यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं व पौराणिक परंपराओं पर आधारित है.
मॉड्युलर और आसानी से रिपेयर होने वाले लैपटॉप बनाने के लिए दुनियाभर में मशहूर कंपनी Framework के ग्राहकों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है. अगस्त की शुरुआत में कंपनी ने अपने सभी पंजीकृत यूजर्स को एक ईमेल भेजकर जानकारी दी कि उनके डेटाबेस में एक बड़ी सुरक्षा सेंधमारी (Data Breach) हुई है. अगर आपने कभी भी Framework से कोई प्रोडक्ट या एसेसरीज खरीदी है, तो आपकी निजी और संवेदनशील जानकारी अब हैकर्स के हाथ लग चुकी हो सकती है.
पहली नजर में ऐसा लग सकता है कि जब बैंक अकाउंट या पासवर्ड चोरी नहीं हुए, तो खतरा कैसा? लेकिन साइबर अपराध की दुनिया में केवल आपकी पहचान से जुड़ी जानकारी भी आपको आर्थिक रूप से कंगाल बनाने के लिए काफी होती है. आइए आसान और विस्तार से समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है, हैकिंग कैसे हुई, और बिना बैंक डेटा के भी आपके ऊपर क्या खतरे मंडरा रहे हैं.
हैकर्स के हाथ क्या लगा और क्या बच गया?
कंपनी द्वारा जारी आधिकारिक बयान और ईमेल के अनुसार, इस साइबर हमले में हैकर्स ग्राहकों के एक बड़े डेटाबेस को एक्सेस करने में कामयाब रहे हैं.
चुराई गई जानकारियां:
–
ग्राहकों का पूरा नाम (Full Name) –
ईमेल एड्रेस (Email Address) –
फोन नंबर (Phone Number) –
डिलीवरी और बिलिंग एड्रेस (Address) –
लॉगिन IP एड्रेस (Login IP Address)
सुरक्षित रही जानकारियां:
राहत की बात केवल इतनी है कि हैकर्स ग्राहकों के क्रेडिट/डेबिट कार्ड डिटेल्स, बैंक अकाउंट की जानकारी, यूपीआई आईडी या पासवर्ड तक नहीं पहुंच पाए हैं. यानी सीधे तौर पर हैकर्स आपके बैंक खाते से पैसे गायब नहीं कर सकते. लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप पूरी तरह सुरक्षित हैं.
हैकिंग कहां हुई: क्या Framework का खुद का सिस्टम कमजोर था?
इस पूरी घटना का सबसे अहम और तकनीकी पहलू यह है कि यह सेंधमारी सीधे Framework कंपनी के अपने प्राइमरी सर्वर पर नहीं हुई. Framework अपने बिजनेस डेटा एनालिसिस और रिपोर्टिंग के लिए ‘Metabase’ नाम की एक पॉपुलर थर्ड-पार्टी बिजनेस इंटेलिजेंस (Business Intelligence) कंपनी की सेवाओं का इस्तेमाल करता है. 3 अगस्त को Metabase के सिस्टम में एक बहुत ही गंभीर खामी का पता चला, जिसका फायदा उठाकर हैकर्स ने Metabase के क्लाउड पर मौजूद Framework के डेटाबेस में सेंध लगा दी. टेक और साइबर सिक्योरिटी की दुनिया में इस तरह के अटैक को ‘सप्लाई चेन अटैक’ (Supply Chain Attack) कहा जाता है. इसमें हैकर्स मुख्य कंपनी के मजबूत सिक्योरिटी वॉल को तोड़ने के बजाय, उससे जुड़े छोटे वेंडर्स, थर्ड-पार्टी ऐप्स या सर्विस प्रोवाइडर्स को निशाना बनाते हैं, जिनके पास मुख्य कंपनी का डेटा मौजूद होता है.
जीरो-डे (Zero-Day Vulnerability) क्या होता है?
Metabase के सिस्टम में जिस खामी के जरिए हैकर्स घुसे, उसे साइबर सुरक्षा में ‘जीरो-डे’ (Zero-Day) कहा जाता है. आसान शब्दों में समझें तो ‘जीरो-डे’ सॉफ्टवेयर या कोड में मौजूद एक ऐसी अज्ञात सुरक्षा खामी (Bug) होती है, जिसके बारे में खुद उस सॉफ्टवेयर को बनाने वाली कंपनी या उसकी सिक्योरिटी टीम को कोई जानकारी नहीं होती.
क्योंकि डेवलपर को इस कमी का पता ही नहीं होता, इसलिए इसके लिए कोई सुरक्षा पैच या अपडेट उपलब्ध नहीं होता. जब तक कंपनी को इस खामी की भनक लगती है और वे इसे ठीक करने का काम शुरू करते हैं, तब तक हैकर्स इसका फायदा उठाकर सिस्टम से डेटा चोरी कर चुके होते हैं. Metabase के वर्शन 1.58 और उससे ऊपर के सिस्टम इसी जीरो-डे की चपेट में आए थे.
बिना बैंक डिटेल चुराए भी आपको कंगाल कैसे बना सकते हैं हैकर्स?
कई लोगों को लगता है कि जब तक कार्ड नंबर या सीवीवी (CVV) लीक न हो, तब तक घबराने की जरूरत नहीं है. लेकिन हैकर्स के लिए नाम, पता, फोन नंबर और खरीदारी का इतिहास (Purchase History) सोने की खदान की तरह होता है.
चुराए गए डेटा के जरिए हैकर्स आपको इन तरीकों से नुकसान पहुंचा सकते हैं:
1. टारगेटेड फिशिंग अटैक (Targeted Phishing/Spear Phishing)
अब हैकर्स को पता है कि आपने Framework से लैपटॉप खरीदा है. वे आपको Framework की आधिकारिक दिखने वाली ईमेल आईडी से एक फर्जी ईमेल भेजेंगे. ईमेल में लिखा हो सकता है: “आपके लैपटॉप के मदरबोर्ड/बैटरी में खराबी पाई गई है, इसे मुफ्त में बदलने के लिए तुरंत अपनी डिटेल्स अपडेट करें.” इस तरह के ईमेल पर असली नाम और सही पते की वजह से कोई भी आसानी से विश्वास कर लेता है.
2. फेक डिलीवरी या कस्टम्स स्कैम
चूंकि हैकर्स के पास आपका डिलीवरी एड्रेस और फोन नंबर है, वे कूरियर कंपनी या कस्टम्स अधिकारी बनकर आपको एसएमएस या कॉल कर सकते हैं. वे दावा करेंगे कि आपका एक पार्सल अटका हुआ है और इसे री-रिलीज करने के लिए ₹50 या ₹100 की छोटी सी फीस देनी होगी. जैसे ही आप उस लिंक पर क्लिक करके पेमेंट करेंगे, आपकी बैंकिंग डिटेल्स उनके फर्जी पेमेंट पेज पर कैप्चर हो जाएंगी.
3. सोशल इंजीनियरिंग (Social Engineering)
हैकर्स आपके नाम, फोन नंबर और ईमेल का इस्तेमाल करके किसी टेलीकॉम कंपनी या बैंक के कस्टमर केयर को कॉल कर सकते हैं और आपकी पहचान बताकर आपका सिम कार्ड (SIM Swap) ब्लॉक या नया जारी कराने की कोशिश कर सकते हैं.
4. कस्टमाइज्ड मेलवेयर और फर्जी अपडेट
हैकर्स आपको Framework सपोर्ट टीम बताकर लैपटॉप का कोई “अति-आवश्यक सुरक्षा अपडेट” डाउनलोड करने के लिए कह सकते हैं. उस लिंक में छुपा मेलवेयर आपके लैपटॉप में इंस्टॉल होकर आपके पूरे कीबोर्ड (Keylogger) को ट्रैक कर सकता है, जिससे आपके सारे असली पासवर्ड और बैंकिंग पिन हैकर्स तक पहुँच जाएंगे.
अब आपको क्या करना चाहिए? (बचाव के जरूरी कदम)
अगर आपका अकाउंट भी इस डेटा लीक से प्रभावित हुआ है या आप Framework के यूजर हैं, तो तुरंत ये सावधानियां बरतें:
– संदिग्ध ईमेल से सावधान रहें:
Framework के नाम से आने वाले किसी भी ऐसे ईमेल पर भरोसा न करें जिसमें आपसे पासवर्ड, पर्सनल जानकारी या किसी लिंक पर क्लिक करने को कहा गया हो.
– सेंडर की ईमेल आईडी जांचें:
केवल Framework की आधिकारिक वेबसाइट या डोमेन से आए ईमेल ही सही होते हैं. किसी भी स्पेलिंग मिस्टेक वाले डोमेन से सतर्क रहें.
वसुरक्षा के लिहाज से अपने Framework अकाउंट का पासवर्ड तुरंत बदल दें और अगर आप वही पासवर्ड किसी दूसरी जगह इस्तेमाल करते हैं, तो उसे भी बदलें.
– टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) ऑन करें:
अपने सभी महत्वपूर्ण अकाउंट्स (जीमेल, बैंक ऐप्स आदि) पर 2FA चालू रखें.
– अज्ञात कॉल/एसएमएस पर प्रतिक्रिया न दें:
कूरियर, डिलीवरी या सपोर्ट के नाम से आने वाले किसी भी संदिग्ध फोन कॉल पर कोई व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी शेयर न करें.
महाभारत के समय महात्मा विदुर को अपनी बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता के लिए जाना जाता था. उनकी कही बातें आज के दौर में भी बिल्कुल सटीक बैठती हैं. महाभारत काल में जब राजा धृतराष्ट्र अपने मन की अशांति के कारण परेशान थे, तब उन्होंने विदुर जी से पूछा था कि इंसान की नींद किन वजहों से उड़ जाती है.
तब महात्मा विदुर ने नीति शास्त्र में ऐसी 5 परिस्थितियों का जिक्र किया था, जो इंसान का दिमागी सुकून छीन लेती हैं. अगर कोई व्यक्ति इन बातों को समझ ले, तो वह अपने जीवन में तनाव और चिंता से काफी हद तक बच सकता है.
कामुकता और अनियंत्रित वासना
महात्मा विदुर के अनुसार जब किसी इंसान के दिमाग पर कामुकता या वासना हावी हो जाती है, तो उसकी रातों की नींद गायब हो जाती है. ऐसा व्यक्ति हर वक्त उसी सोच में डूबा रहता है. वासना के हावी होने से इंसान का मन कभी शांत नहीं रह पाता है.
उसके सोचने समझने की क्षमता कम होने लगती है. मन की यह चंचलता और बेचैनी उसे पूरी रात सोने नहीं देती. इंसान अपनी इन इच्छाओं के चक्कर में दिन रात खुद को थकाता रहता है.
ताकतवर इंसान से दुश्मनी का डर
विदुर जी ने बताया कि अगर किसी कमजोर व्यक्ति की दुश्मनी अपने से बहुत ज्यादा शक्तिशाली इंसान से हो जाए, तो उसकी नींद उड़ जाती है. उसे हर पल यही डर सताता रहता है कि सामने वाला उस पर कब हमला कर दे.
अनहोनी का यह खौफ उसके दिमाग में हर समय चलता रहता है. इस डर और असुरक्षा के कारण वह रात भर करवटें बदलता रहता है. भय से भरा मन इंसान को कभी चैन की नींद सोने नहीं देता है.
सब कुछ खो देने का डर और चोरी का भय
जब कोई इंसान बहुत सारी धन दौलत जमा कर लेता है या उसकी तरक्की हो जाती है, तो उसे उसे खोने का डर सताने लगता है. जिस व्यक्ति के पास चोरों का डर होता है, वह रात भर जागकर अपने धन की चिंता करता रहता है.
उसे हर आहट पर लगता है कि कोई उसकी संपत्ति चुराने आ रहा है. महात्मा विदुर कहते हैं कि ज्यादा धन का मोह और उसे खोने का डर इंसान की सुख शांति को पूरी तरह से निगल जाता है.
चोरी की भावना या गलत नीयत
महात्मा विदुर के अनुसार जो व्यक्ति किसी दूसरे की चीज या धन हड़पने की नीयत रखता है, वह कभी शांति से नहीं सो सकता. किसी दूसरे का हक मारने या चोरी करने की योजना बनाने वाला इंसान हमेशा मानसिक तनाव में रहता है.
उसका दिमाग लगातार यही साजिश रचने में लगा रहता है कि काम को कैसे अंजाम दिया जाए. इस तरह का आपराधिक और गलत विचार इंसान के मन को अंदर ही अंदर बेचैन रखता है और उसकी नींद छीन लेता है.
बीमारी और शारीरिक पीड़ा
नींद न आने का पांचवां और सबसे बड़ा कारण इंसान का बीमार होना या किसी शारीरिक कष्ट से गुजरना है. जब शरीर किसी रोग की चपेट में आता है या इंसान अंदर से कमजोर हो जाता है, तो उसे रात में आराम नहीं मिलता.
बीमारी का दर्द और उससे जुड़ी चिंता इंसान को रात भर जगाए रखती है. विदुर जी के अनुसार एक स्वस्थ शरीर ही चैन की नींद का आधार होता है. बीमार व्यक्ति का मन और शरीर दोनों ही अशांत रहते हैं.
डिस्क्लेमर:
यह लेख महाभारत के विदुर नीति और धार्मिक पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है. इसे केवल पाठकों तक जीवन प्रबंधन और जीवन शैली से जुड़ी पौराणिक जानकारियों को पहुंचाने के उद्देश्य से लिखा गया है.
Sawan Shivratri 2026:
इस साल 11 अगस्त 2026 को मंगलवार के दिन सावन शिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा. सावन शिवरात्रि का व्रत रखने से शिव जी प्रसन्न होते हैं और जीवन के बड़े से बड़े कष्टों को दूर करते हैं. इस लेख में आइए उन 5 शक्तिशाली उपायों के बारे में जानें जिनको करने से सभी ग्रह के दोषों से मुक्ति मिलती है और कालसर्प दोष से लेकर मानसिक-आर्थिक दिक्कतें कोसों दूर हो जाती हैं.
शमी पत्र और अक्षत का उपाय
सावन शिवरात्रि पर शिव जी को जल अर्पित करें. इसके अलावा 5 या 11 शमी के पत्ते और अक्षत शिवलिंग पर चढ़ाएं. इस एक उपाय को करने से एक साथ शिव जी और शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त होगी. इस उपाय को करने से ग्रह दोष दूर होगा और धन प्राप्ति हो सकती है.
महामृत्युंजय मंत्र का जाप
सावन शिवरात्रि पर्व पर शिव मंदिर जाएं और शिवलिंग के सामने बैठ जाएं. इसके बाद ध्यान करते हुए 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप भी कर सकते हैं. इस उपाय को शाम के समय करने से कालसर्प दोष, पितृ दोष के साथ ही अकाल मृत्यु का भय दूर होता है. लंबी बीमारी भी ठीक हो जाती है.
धतूरा और भांग शिव जी को चढ़ाएं
सावन शिवरात्रि की पूजा करें और शिव जी को धतूरा, भांग और मदार के फूल चढ़ाएं. इस एक उपाय को करने से व्यक्ति के जीवन की सभी नकारात्मक ऊर्जा, भय और गुप्त शत्रुओं का नाश होता है. इस उपाय से जीवन में स्थिरता आती है.
नंदी जी के कान में करें प्रार्थना
सावन शिवरात्रि पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर अपना मुख करके शिव जी की पूजा करें और वहीं विराजमान नंदी महाराज को प्रणाम करें. इसके बाद नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना को कहें. इसके बाद जरूरतमंदों के बीच गरीबों को अन्न, वस्त्र और काले तिल का दान करें. इस उपाय को करने से शिव जी अति प्रसन्न होंगे और मनोकामना को पूर्ण करेंगे. इस उपाय से पाप और दरिद्रता का नाश होने लगता है.
पंचामृत और बेलपत्र का उपाय
सावन शिवरात्रि पर तांबे के लोटे से गंगाजल लें और उसमें मिश्रित शुद्ध जल, दूध, दही, घी, शहद व शक्कर मिलाकर पंचामृत बना लें. इसके बाद इसे शिवलिंग पर अर्पित करें. अब 11 या 21 साफ और साबूत बेलपत्र भी चढ़ा दें और मन ही मन अपनी मनोकामना को दोहराएं. मनोकामना पूरी होगी, मानसिक तनाव दूर होगा और मन शांत होगा. कुंडली में चंद्रमा और सभी नवग्रह शुभ प्रभाव देंगे.
(डिस्क्लेमर- यह जानकारी पारंपरिक धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है.
सोचिए अगर किसी अपने के गुजर जाने के बाद भी आपके मोबाइल की स्क्रीन पर उनका वीडियो कॉल आने लगे. वे स्क्रीन पर बिल्कुल उसी तरह मुस्कुराएं, उसी जानी-पहचानी आवाज में बात करें, आपकी पुरानी यादों को ताजा करें और आपके नए सवालों का जवाब भी दें. सुनने में यह किसी हॉलीवुड या साइंस फिक्शन फिल्म का सीन लग सकता है, लेकिन आज की आधुनिक दुनिया में यह एक ठोस हकीकत बन चुका है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से अब उन लोगों के भी डिजिटल रूप या ‘AI Avatars’ बनाए जा रहे हैं, जो इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं. इस पूरी तकनीक और बिजनेस को दुनिया भर में ‘Grief Tech’ (दुख से उबरने वाली तकनीक) या ‘Deadbots’ कहा जा रहा है. यह तकनीक जहां एक तरफ गहरे सदमे में डूबे परिजनों को सुकून और सहारा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ इंसान की प्राइवेसी, कानूनी अधिकारों, नैतिकता और मानसिक सेहत पर बेहद गंभीर सवाल भी खड़े कर रही है. आइए इस पूरे विषय को बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं….
AI कंपनियां मृत लोगों के डिजिटल अवतार कैसे तैयार करती हैं?
आज के डिजिटल दौर में जब भी कोई व्यक्ति जीवित रहता है, तो वह जाने-अनजाने में इंटरनेट की दुनिया में अपना एक बहुत बड़ा ‘डिजिटल नक्शा’ छोड़ जाता है. इसे तकनीकी भाषा में डिजिटल फुटप्रिंट (Digital Footprint) कहते हैं. इसमें उस व्यक्ति की तस्वीरें, इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब पर अपलोड किए गए वीडियो, वॉट्सएप चैट्स, ईमेल, वॉयस नोट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स शामिल होते हैं. AI कंपनियां इसी पूरे डेटा को जमा करके मृत व्यक्ति का एक रोबोटिक या वर्चुअल रूप तैयार करती हैं. यह पूरी प्रक्रिया मुख्य रूप से तीन बड़े स्टेप्स में काम करती है:
स्टेप 1: डेटा कलेक्शन (Data Collection)
सबसे पहले परिजन या टेक कंपनियां उस व्यक्ति का हर संभव डेटा जुटाती हैं. इसमें उसके बोलने के ऑडियो रिकॉर्डिंग्स, पुराने वीडियो क्लिप्स, लिखे हुए मैसेज और हाई-क्वालिटी तस्वीरें शामिल होती हैं. जितना ज्यादा डेटा मिलेगा, AI अवतार उतना ही असली और सटीक बनेगा.
स्टेप 2: वॉयस क्लोनिंग और जनरेटिव AI (Voice Cloning & LLM)
डेटा मिलने के बाद एडवांस्ड AI सॉफ्टवेयर उस इंसान की आवाज के पैटर्न को गहराई से समझता है. वह यह देखता है कि व्यक्ति बोलते समय कहां रुकता था, उसकी आवाज का उतार-चढ़ाव कैसा था और वह किन शब्दों का इस्तेमाल ज्यादा करता था. इसके बाद ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल’ (LLM) को व्यक्ति की पुरानी चैट्स से ट्रेन किया जाता है ताकि AI जब भी कोई जवाब लिखे, तो उसकी भाषा और सोचने का तरीका बिल्कुल उसी व्यक्ति जैसा लगे.
स्टेप 3: 3D अवतार क्रिएशन (3D Avatar Creation)
आखिरी स्टेप में तस्वीरों और वीडियो की मदद से 3D डिजिटल मॉडल तैयार किया जाता है. यह मॉडल स्क्रीन पर दिखने में बिल्कुल असली इंसान जैसा लगता है. जब AI बोलता है, तो इस डिजिटल मॉडल के होंठ और चेहरे के एक्सप्रेशन उसी के हिसाब से हिलते हैं.
सबसे हैरान करने वाली बात: यह AI अवतार सिर्फ पुरानी रिकॉर्ड की गई बातें ही नहीं दोहराता, बल्कि अगर आप उससे कोई बिल्कुल नया सवाल पूछेंगे, तो वह उस मृत इंसान की सोच और स्वभाव के हिसाब से सोचकर नया जवाब भी दे सकता है.
‘Grief Tech’ क्या है और यह इंडस्ट्री कितनी तेजी से बढ़ रही है?
जब किसी इंसान के किसी बेहद करीबी (जैसे माता-पिता, बच्चा या दोस्त) की मृत्यु हो जाती है, तो वह इंसान बेहद गहरे शोक और डिप्रेशन से गुजरता है. इस दुख (Grief) को कम करने और लोगों को भावनात्मक सहारा देने के नाम पर जो मार्केट खड़ा हुआ है, उसे ही ‘Grief Tech’ कहा जाता है.
आज दुनिया भर में कई ऐसे स्टार्टअप्स और टेक प्लेटफॉर्म्स आ चुके हैं जो यह सर्विस दे रहे हैं और इसका कारोबार अरबों डॉलर तक पहुंच रहा है:
StoryFile: यह एक बहुत ही अनोखा प्लेटफॉर्म है. यह लोगों के जीवित रहते ही उनके जीवन के अनुभव, यादें और जवाब वीडियो फॉर्मेट में रिकॉर्ड कर लेता है. व्यक्ति के जाने के बाद परिवार वाले स्क्रीन पर उससे कोई भी सवाल पूछ सकते हैं. AI उनके रिकॉर्डेड वीडियो में से सबसे सही जवाब निकालकर स्क्रीन पर प्ले कर देता है.
HereAfter AI: यह एक वॉयस-बेस्ड ऐप है. इसमें इंसान जीवित रहते अपनी आवाज में अपनी जीवन कहानी रिकॉर्ड करता है. उसके जाने के बाद बच्चे या पोते-पोतियाँ एक ऐप के जरिए उससे बातचीत कर सकते हैं और किस्से सुन सकते हैं.
Somnium Space: यह मेटावर्स की दुनिया का एक प्लेटफॉर्म है जो ‘Live Forever’ (हमेशा जीवित रहें) नाम के फीचर पर काम कर रहा है. इसमें इंसान के चलने-फिरने, हाथ हिलाने और बोलने के तरीके का पूरा 3D अवतार बना दिया जाता है, जिससे आप वर्चुअल रियलिटी (VR) हेडसेट पहनकर मिल सकते हैं.
लोग अपने खोए हुए प्रियजनों की कमी को पूरा करने के लिए भावनात्मक रूप से कुछ भी खर्च करने को तैयार हो जाते हैं, इसी वजह से यह इंडस्ट्री दुनिया भर में बहुत तेजी से पैर पसार रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्लोबल लेवल पर ‘ग्रीफ टेक’ (Grief Tech) और मृत्यु के बाद डिजिटल पहचान सुरक्षित रखने वाला ‘डिजिटल आफ्टरलाइफ’ मार्केट तेजी से बढ़ रहा है. इस पूरे बाजार का कुल वैल्यूएशन लगभग 123 अरब डॉलर से 126 अरब डॉलर (यानी 1,17,36,30,94,50,000 रुपये से ज्यादा) का हो चुका है. इसमें बड़ा हिस्सा डेथ-टेक और डिजिटल लेगेसी बनाने वाली इंडस्ट्री का है. वहीं दूसरी तरफ, तकनीक की मदद से दी जाने वाली पारंपरिक शोक परामर्श (Grief Counseling) सर्विसेज का बाजार करीब 4.03 अरब डॉलर (लगभग 3,84,53,11,14,500 करोड़ रुपये) का है.
मौत के बाद आपकी आवाज, फोटो और डेटा का असली मालिक कौन है?
यह इस पूरी बहस का सबसे उलझा हुआ, संवेदनशील और कानूनी रूप से पेचीदा हिस्सा है. जब तक हम जीवित रहते हैं, तब तक हमारी फोटो, आवाज और पर्सनल डेटा पर हमारा अपना मालिकाना हक होता है. लेकिन इंसान की मृत्यु के बाद उस डेटा का क्या होगा, इस पर दुनिया के ज्यादातर देशों में कोई साफ कानून नहीं है.
डिजिटल लेगेसी (Digital Legacy) का न होना
जैसे लोग अपनी जमीन, मकान या बैंक बैलेंस के लिए वसीयत (Will) बनाते हैं, वैसे डिजिटल जायदाद के लिए अभी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. ज्यादातर देशों के कानूनों में यह साफ नहीं है कि मौत के बाद किसी व्यक्ति के सोशल मीडिया अकाउंट्स, पर्सनल चैट्स और फोटोज का लीगल मालिक कौन बनेगा.
टेक कंपनियों की अपनी शर्तें
गूगल, मेटा (फेसबुक/इंस्टाग्राम) और एप्पल जैसी बड़ी कंपनियों की नीतियां अलग हैं. वे आमतौर पर मृत व्यक्ति के पासवर्ड या डेटा को उनके परिवार वालों को भी नहीं देतीं. वे सुरक्षा कारणों से उस अकाउंट को बंद कर देती हैं या उसे ‘मेमोरियलाइज्ड’ (यादगार) पेज में बदल देती हैं.
सबसे बड़ा सवाल: सहमति (Consent) का मुद्दा
सोचिए कि अगर कोई व्यक्ति जीते-जी यह बिल्कुल नहीं चाहता था कि उसकी मौत के बाद उसका कोई AI रोबोट बनाया जाए, लेकिन उसके जाने के बाद उसके परिवार वाले या दोस्त उसका AI अवतार बनवा लेते हैं – तो क्या यह सही है? किसी की मर्जी के बिना उसकी आवाज और चेहरे का इस्तेमाल करके AI अवतार बनाना उसकी प्राइवेसी और सम्मान का सीधा हनन माना जा रहा है.
AI अवतार से बात करना: दुख में राहत या दिमागी सेहत के लिए खतरा?
मनोवैज्ञानिकों (Psychologists) और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर बहुत तीखी बहस छिड़ी हुई है कि क्या मृत प्रियजनों से AI के जरिए बात करना मानसिक सेहत के लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह.
राहत देने वाले पहलू
अधूरेपन का अहसास खत्म होना: कई बार हादसों या अचानक हुई मौतों में लोग अपने प्रियजनों से आखिरी बार बात भी नहीं कर पाते. ऐसे में AI अवतार से बात करके वे अपनी भावनाएं जाहिर कर पाते हैं, जिससे उन्हें मन का बोझ हल्का महसूस होता है.
यादों को संजोकर रखना: छोटे बच्चों के लिए, जिन्होंने बहुत कम उम्र में अपने माता-पिता या दादा-दादी को खो दिया है, यह तकनीक उनके पूर्वजों को जानने और उनकी आवाज सुनने का एक माध्यम बन सकती है.
खतरे और मानसिक नुकस
सच को स्वीकार न कर पाना: मनोविज्ञान के नियम कहते हैं कि इंसान के मानसिक विकास के लिए यह बेहद जरूरी है कि वह ‘मौत’ के कड़वे सच को स्वीकार करे और अपनी जिंदगी में आगे बढ़े. लेकिन अगर सामने फोन पर वही इंसान रोज बात कर रहा हो, तो दिमाग इस सच को कभी स्वीकार ही नहीं कर पाएगा.
डिजिटल लत और आभासी दुनिया में खो जाना: लोग असली दुनिया के अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से कट सकते हैं और दिन-रात उस AI अवतार से बात करने के आदी हो सकते हैं. इससे वे बहुत गहरे अवसाद (Depression) और मानसिक भ्रम (Hallucinations) का शिकार हो सकते हैं.
गलत बातें बोलने का खतरा: AI आखिरकार एक सॉफ्टवेयर है. अगर बातचीत के दौरान वह अवतार कोई अजीब, डरावनी या गलत बात बोल दे, तो इससे परिजनों को ऐसा दिमागी सदमा लग सकता है जिससे उबरना नामुमकिन हो जाए.
इस टेक्नोलॉजी की भविष्य की चुनौतियां
‘Grief Tech’ सिर्फ एक भावुक सर्विस नहीं है, इसके पीछे कई बड़े नैतिक और सामाजिक खतरे छिपे हुए हैं:
Commercial Exploitation: कई AI कंपनियां लोगों के दुख और लाचारी का फायदा उठाकर उनसे भारी-भरकम सब्सक्रिप्शन फीस वसूल सकती हैं. सोचिए कितना अजीब और दर्दनाक होगा अगर कोई AI अवतार आपसे बात करते-करते बीच में किसी प्रोडक्ट का विज्ञापन (Advt) करने लगे.
Deepfake & Cyber Fraud: अगर किसी मृत व्यक्ति की आवाज और चेहरे का डेटा गलत हाथों में चला जाए, तो साइबर अपराधी उसका गलत वीडियो बनाकर रिश्तेदारों से पैसे ठग सकते हैं या कोई बड़ा अपराध अंजाम दे सकते हैं.
Digital Immortality का डर: क्या इंसान को हमेशा के लिए एक रोबोट के रूप में जीवित रखना सही है? कई दार्शनिकों और विचारकों का मानना है कि जीवन और मृत्यु प्रकृति का एक स्वाभाविक चक्र है. तकनीक के जरिए ‘डिजिटल आत्माएं’ बनाना प्रकृति के नियमों से खिलवाड़ करने जैसा है.
आज के समय में मार्केट में मिलने वाली मेहंदी का रंग बहुत ही आसानी से चढ़ जाता है. मेहंदी में केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है. केमिकल वाली मेहंदी लगाने से 2 दिन बाद मेहंदी पपड़ी की तरह हाथ से उतरने लगती है. जिसकी वजह से हाथ रफ हो जाते हैं. इस तरह उतरती हुई मेहंदी बेहद खराब लगती है. ऐसे में आप घर पर मेहंदी बना सकते हैं.
घर पर बनी मेहंदी का रंग नहीं चढ़ता है लेकिन इन चीजों को मिलाने से मेहंदी का रंग गहरा आएगा. होममेड मेहंदी को लगाने से हाथ पर चढ़ा रंग कई दिनों पर हल्का होता है. आइए जानते हैं घर पर कैसे बनाएं मेहंदी.
घर पर बनाएं मेहंदी कोन
तीन छोटे चम्मच चीनी
तीनी छोटे चम्मच चाय की पत्ती
2 छोटे चम्मच कॉफी
लौंग
मेहंदी का पाउडर
पानी
इस तरह बनाएं मेहंदी
एक बर्तन लें, इसमें पानी डालकर पानी को गर्म कर लें. इसके बाद इसमें चीनी, चाय की पत्ती, लौंग और कॉफी डाल दें.
अब इस पानी को अच्छे से उबाल लें, जैसे ही पानी डार्क ब्राउन हो जाए तो गैस बंद कर दें.
अब इस पानी को मेहंदी पाउडर में मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें. मेहंदी का घोल ना ज्यादा पतला और ना ही ज्यादा गाढ़ा होना चाहिए.
अब तैयार करें मेहंदी का कोन
मेहंदी का पेस्ट बनकर तैयार है. इसके बाद मेहंदी को कुछ घंटों के लिए ढककर रख दें. इसके बाद प्लास्टिक की शीट लें. इस को कोन की शेप दें. इस कोन में मेहंदी भर दें. लीजिए आपकी होममेड मेहंदी कोन बनकर तैयार है.
होममेड मेहंदी लगाने के फायदे
चाय की पत्ती और लौंग का पानी मिलाने से मेहंदी का रंग गाढ़ा आता है. कॉफी मिलाने से भी मेहंदी का रंग हाथों पर बेहद खूबसूरत आता है.
चीनी मिलाने से मेहंदी लगाने के बाद जल्दी सूखकर हटती नहीं है.
होममेड मेहंदी लगाने के बाद इसे जल्दी नहीं धोना चाहिए.
मेहंदी सूखने के बाद हल्के हाथों से मेहंदी हटाना चाहिए
हरियाली अमावस्या बेहद खास है. प्रकृति की रक्षा के इस पर्व के दिन भगवान शिव की पूजा करने और पितरों का तर्पण करने का विधान है. लेकिन इस साल इसी अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लग रहा है. हिंदू धर्म में ग्रहण काल और उसके सूतक में पूजा-पाठ, शुभ कार्य वर्जित होते हैं. लिहाजा लोग उलझन में हैं कि ग्रहण कब लगेगा, सूतक काल कब से कब तक होगा और पूजा-पाठ, स्नान-दान कब कैसे किया जाए? आइए जानते हैं 12 अगस्त 2026 को पड़ रही अमावस्या और सूर्य ग्रहण से जुड़े सारे सवालों के जवाब.
हरियाली अमावस्या कब है?
साल 2026 में श्रावण मास की अमावस्या तिथि द्रिक पंचांग के अनुसार 11 व 12 अगस्त की देर रात 01:52 बजे से प्रारंभ होगी और 12 अगस्त की रात 11:06 बजे तक रहेगी. लिहाजा 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या है.
…इसलिए भी खास है ये दिन
हरियाली अमावस्या इस साल इसलिए भी विशेष है क्योंकि इसी दिन 12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण भी लग रहा है.
सूर्य ग्रहण कब लगेगा?
भारतीय समय के अनुसार, 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और अगले दिन सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगा. करीब 7 घंटे के इस ग्रहण का पीक रात 11 बजकर 17 मिनट पर होगा.
भारत में ग्रहण दिखेगा?
भारत में साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देगा. लिहाजा इसका सूतक काल भी नहीं माना जाएगा. वरना हिंदू धर्म-शास्त्रों के अनुसार सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले लग जाता है और ग्रहण खत्म होने के साथ ही समाप्त होता है.
हरियाली अमावस्या के अनुष्ठानों पर क्या असर?
चूंकि सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा और सूतक काल भी नहीं माना जाएगा, लिहाजा हरियाली अमावस्या के दिन स्नान-दान, पितृ तर्पण, पौधारोपण और शिव पूजा जैसे तमाम अनुष्ठानों पर कोई असर नहीं होगा. बिना रुकावट के ये सारे कार्य किए जा सकेंगे.
सूर्य ग्रहण और अमावस्या साथ होने पर क्या करें?
सूर्य ग्रहण और अमावस्या दोनों एक साथ पड़ें तो इस दिन का महत्व बढ़ जाता है. लिहाजा अपनी सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को दान करें. जितना ज्यादा संभव हो सके मंत्र जाप करें, भगवान का ध्यान करें.
वहीं गलती से भी तामसिक चीजों का सेवन न करें, किसी का अपमान न करें, मन में नकारात्मक विचार न लाएं. कोई भी अनैतिक कार्य न करें. हरियाली अमावस्या के दिन किसी भी पौधे को नुकसान पहुंचाने की भारी भूल न करें.
(Disclaimer-यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग परंपराओं पर आधारित है. अलग-अलग स्थानों और पंचांगों के अनुसार नियम व मुहूर्त में अंतर हो सकता है.)
क्या आप मानसिक रूप से तैयार हैं यह सुनने के लिए कि केवल ₹50 की दैनिक बचत से ही नहीं, बल्कि ₹35 लाख का विशाल धनराशि जमा करने का जादू भी संभव है? यह कोई जादू नहीं, बल्कि वित्तीय विज्ञान की सच्चाई है जहाँ ‘कंपाउंडिंग’ (सूद) और ‘समय’ की ताकत मिलकर साधारण बचत को करोड़ों के बराबर धनराशि में बदल सकती है। यह केवल एक कथन नहीं, बल्कि वित्तीय विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई एक गणितीय वास्तविकता है।
₹50 से 35 लाख: गणितीय जादू का रहस्य
आपके सामने जो ‘जादुई सूत्र’ पेश किया जा रहा है, वह सीधा और सरल है। यदि आप रोजाना केवल ₹50 बचाकर या निवेश करके भी बड़े सपने सफ़लता पा सकते हैं, तो यह संभव है। गणित की भाषा में इसे समझें तो, यदि आप रोजाना ₹50 की बचत को मासिक स्तर पर ₹1,500 (₹50 x 30) के SIP (Systematic Investment Plan) में बदल दें, तो परिणाम चौकूर हो सकते हैं।
मान लीजिए आप एक ऐसे म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं जो ऐतिहासिक रूप से 15% वार्षिक रिटर्न देता है। ऐसे में, यदि आप लगातार 21 वर्षों तक हर महीने ₹1,500 का निवेश करते हैं, तो आपकी कुल जमा राशि (रू. 3,78,000) केवल एक छोटा हिस्सा होगी। वास्तविक जादिया तो तब पता चलता है जब आप 21 वर्ष बाद देखते हैं कि आपकी निवेश राशि 35.40 लाख रुपये से भी अधिक की हो गई है। यह अंतर ही ‘कंपाउंडिंग’ या ‘सूद-दर-सूद’ की ताकत है, जहाँ ब्याज भी ब्याज कमाता है।
कंपांडिंग और अनुशासन: असली जादू कहां है?
इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण तत्व है ‘अनुशासन’। रोजाना ₹50 बचाना किसी भी व्यक्ति के बस की बात है, लेकिन उसे निरंतरता से निवेश करना कठिन है। म्यूचुअल फंड की SIP विधि में ‘ Rupee लागत औसत’ (Rupee Cost Averaging) की तकनीक का भी उपयोग होता है, जिससे बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूक आपका औसत लागत कम रखी जा सकेती है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि यह आसानी से संभव है। म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं और 15% का वार्षिक रिटर्न गारंटी नहीं है। फिर भी, इतिहास गवाहिक है कि लंबी अवधि में इक्विटी बाजार ने अच्छा रिटर्न दिया है।
शुरुआत कैसे करें?
शुरुआत करने के लिए आपको किसी विशेष बैंक या ब्रोकरेज पर जमीन करने की आवश्यकता नहीं है। आप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे Groww, Zerodha, या सीधे ब्रोकरेज के माध्यम से भी SIP शुरू कर सकते हैं। कई वित्तीय प्लेटफॉर्म पर आप SIP कैल्कुलेटर का उपयोग करके अपनी लक्ष्य और निवेश राशि के आधार पर अनुमानित रिटर्न देख सकते हैं।
हालांकि, याद रखें कि यह एक दीर्कालीन निवेशक की रणनीति है। छोटी बचत को लंबे समय तक निवेशित रखने पर ही कंपाउंडिंग का जादू काम करता है।
एक शांत इलाके में मिले एक युवक के शव ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया था। शुरुआत में यह मामला एक रहस्यमयी ब्लाइंड मर्डर लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे एक ऐसी साजिश सामने आई जिसने सभी को हैरान कर दिया।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस हत्या की मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि मृतक की अपनी सास थी, जिसने अपने दामाद को रास्ते से हटाने की कथित साजिश रची। इस मामले में पुलिस ने सास, मृतक की पत्नी और दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, युवक का शव एक सुनसान जगह से बरामद हुआ था और उसकी पहचान छिपाने की भी कोशिश की गई थी। शुरुआती दौर में पुलिस के पास कोई ठोस सुराग नहीं था, जिससे केस बेहद पेचीदा बन गया था।
इसके बाद पुलिस ने विशेष टीम बनाकर जांच शुरू की और 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। साथ ही मुखबिरों से मिली जानकारी ने जांच को नई दिशा दी और धीरे-धीरे आरोपी पुलिस के शिकंजे में आते गए।
पूछताछ में जो कहानी सामने आई, उसने सभी को चौंका दिया। पुलिस के मुताबिक, मृतक पर शराब के नशे में अपनी पत्नी के साथ मारपीट करने के आरोप थे। लगातार घरेलू विवाद से परेशान होकर पत्नी ने यह बातें अपनी मां यानी सास को बताईं।
आरोप है कि इसी के बाद सास ने गुस्से और बदले की भावना में दामाद की हत्या की योजना बनाई। इसके लिए दो लोगों को कथित तौर पर एक लाख रुपये की सुपारी दी गई, जिसमें कुछ रकम पहले ही दे दी गई थी।
इसके बाद पूरी साजिश को अंजाम दिया गया और युवक की हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और मामले की आगे की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नोट: यह खबर पुलिस जांच और प्रारंभिक तथ्यों पर आधारित है। अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
राजस्थान के जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एक महिला पर अपने पति को कानूनी मामले में फंसाने और बदनाम करने के उद्देश्य से कथित तौर पर अपना निजी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कराने की साजिश रचने का आरोप है। मामले में पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
वीडियो वायरल होने के बाद पति पर लगाए आरोप
पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर एक निजी वीडियो वायरल होने के बाद महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति ने चोरी-छिपे वीडियो बनाकर उसे इंटरनेट पर साझा किया है। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की गई।
पति ने पुलिस से की निष्पक्ष जांच की मांग
पति ने आरोपों से इनकार करते हुए पुलिस से साइबर जांच कराने की मांग की। उसका कहना था कि उसे बदनाम करने और कानूनी कार्रवाई में फंसाने के लिए सुनियोजित साजिश रची गई है। उसने यह भी दावा किया कि पहले भी उसके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी थीं।
साइबर जांच में मिले अहम सुराग
पुलिस के अनुसार, तकनीकी जांच में पता चला कि वीडियो एक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से अपलोड किया गया था। जांच में इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड और डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल के बाद पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले।
प्रेमी की कथित भूमिका भी आई सामने
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान महिला और उसके कथित प्रेमी के बीच हुई ऑनलाइन बातचीत तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की गई। पूछताछ में प्रेमी ने कथित तौर पर साजिश में अपनी भूमिका स्वीकार की, जिसके बाद महिला को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
मामले की जांच जारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में सभी डिजिटल और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित षड्यंत्र में अन्य कोई व्यक्ति शामिल था या नहीं। पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।