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  • अफ्रीका महाद्वीप के बीच फटी धरती, 60KM लंबी दरार, जन्म ले रहा छठा महासागर!..

    अफ्रीका महाद्वीप के बीच फटी धरती, 60KM लंबी दरार, जन्म ले रहा छठा महासागर!..

    अफ्रीका महाद्वीप के बीच फटी धरती, 60KM लंबी दरार, जन्म ले रहा छठा महासागर!..

    अदीस अबाबा. उत्तरी इथियोपिया के सुदूर अफार डिप्रेशन (Afar Depression) में प्रकृति का एक ऐसा दुर्लभ और अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है, जो अमूमन लाखों-करोड़ों सालों में घटित होता है. यहां अफ्रीकी महाद्वीप धीरे-धीरे दो हिस्सों में बंट रहा है और एक नए महासागर का जन्म हो रहा है. आमतौर पर नदियों, समुद्रों और पर्वतों के निर्माण जैसी भूगर्भीय प्रक्रियाएं बहुत धीमी गति से होती हैं, लेकिन हॉर्न ऑफ अफ्रीका के पास अफार ट्राएंगल में यह बदलाव बेहद हैरान करने वाली रफ्तार से देखने को मिला है. सितंबर 2005 में डब्बाहु ज्वालामुखी में हुए विस्फोट और उसके बाद आए तीव्र भूकंपीय झटकों ने पृथ्वी की ऊपरी परत को चीर दिया. इस दौरान जिपर की तरह खुलती हुई लगभग 60 किलोमीटर लंबी और 8 मीटर चौड़ी एक विशाल दरार महज कुछ ही दिनों के भीतर बन गई. यही नहीं, दोनों तरफ की जमीन के बीच का हिस्सा 2 मीटर तक नीचे धंस गया.

    इसके बाद के कुछ महीनों में रेगिस्तान की सतह पर सैकड़ों छोटी-बड़ी दरारें उभरीं और जमीन 100 मीटर तक नीचे धंस गई. इसी दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि धरती की गहराइयों से पिघला हुआ मैग्मा ऊपर आ रहा है, जो आगे चलकर बेसाल्टिक समुद्री तल का रूप ले रहा है. भूवैज्ञानिक इतिहास के पन्नों को पलटें तो लगभग 3 करोड़ साल पहले तक अफ्रीका एक ही बड़ी विवर्तनिक प्लेट (Tectonic Plate) हुआ करता था. तब पृथ्वी के भीतर से उठे पिघले पत्थरों के तेज बहाव ने अफ्रीकी प्लेट को चीरना शुरू किया, जिससे अरब प्रायद्वीप अफ्रीका से अलग हो गया और लाल सागर का निर्माण हुआ. वर्तमान में इस अफार ट्रिपल जंक्शन पर तीन अलग-अलग प्लेटें मिलती हैं, वो हैं अरेबियन, सोमालियन और अफ्रीकी प्लेट. ये तीनों प्लेटें हर साल लगभग 1 सेंटीमीटर की गति से एक-दूसरे से दूर खिसक रही हैं.

    हालिया अध्ययनों से पता चला है कि अफार और तुर्काना रिफ्ट क्षेत्र में पृथ्वी की ऊपरी परत खिंचकर बेहद पतली (लगभग 13 किमी) हो चुकी है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में नेकिंग कहा जाता है. यह इस बात का संकेत है कि महाद्वीप का विभाजन अब तय हो चुका है. जब अरेबियन और अफ्रीकी प्लेट के बीच का यह गैप पर्याप्त बड़ा हो जाएगा, तो लाल सागर और अदन की खाड़ी का पानी इस नए डिप्रेशन में समा जाएगा. दोनों महासागर आपस में मिलकर एक विशाल नए महासागर का निर्माण करेंगे. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस पूरी प्रक्रिया को मुकम्मल होने में लगभग 50 लाख से 1 करोड़ साल का समय लगेगा. आमतौर पर नए समुद्री तल बनने की प्रक्रिया समुद्र की गहराइयों में छिपी रहती है, लेकिन अफार में यह सब धरती की सतह पर प्रत्यक्ष रूप से हो रहा है, जिससे वैज्ञानिकों को एक नए महासागर के पैदा होने का अध्ययन करने का अनूठा अवसर मिला है.

  • सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी! पाकिस्तान कनेक्शन वाला तस्करी का मास्टरमाइंड दबोचा गया.

    सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी! पाकिस्तान कनेक्शन वाला तस्करी का मास्टरमाइंड दबोचा गया.

    सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी! पाकिस्तान कनेक्शन वाला तस्करी का मास्टरमाइंड दबोचा गया.

    Bikaner News : बीकानेर पुलिस ने पाकिस्तान से ड्रोन तस्करी के मास्टरमाइंड राकेश प्रजापत को अमृतसर से गिरफ्तार किया. उस पर 22 आपराधिक मामले दर्ज हैं. वह अपने साथियों के जरिए बॉर्डर पार से आने वाली हेरोइन और हथियारों की खेप उठवाता था. इसके बाद उन्हें पंजाब तक पहुंचाने का काम कराया जाता था. तस्करी से मिलने वाले पैसों से वह ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहा था.

    बीकानेर पुलिस के हत्थे चढ़ा राकेश प्रजापत. पंजाब से जोधपुर आने की तैयारी में था, कई राज्यों में दर्ज हैं 22 आपराधिक मामले

    बीकानेर. बीकानेर जिले के बॉर्डर पर पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हेरोइन और विदेशी हथियारों की तस्करी कराने वाले नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड माने जा रहे राकेश प्रजापत को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. बुधवार को पुलिस ने उसे पंजाब में अमृतसर के जामनगर हाईवे से दबोचा. बताया जा रहा है कि वह वहां से जोधपुर आने की तैयारी में था.

    सदर थाना सभागार में प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ने बताया कि राकेश लंबे समय से फरार चल रहा था. पिछले करीब 13 महीने से वह देश के अलग-अलग राज्यों में छिपकर रह रहा था. उससे पहले वह वर्ष 2024-25 के दौरान करीब एक साल तक पंजाब की फरीदकोट जेल में बंद रहा. पुलिस के अनुसार जेल में रहने के दौरान भी उसने अपना नेटवर्क बंद नहीं किया और वहीं से पूरे गिरोह को संचालित करता रहा.

    खुद सामने नहीं आता था, साथियों से उठवाता था खेप
    पुलिस की शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि राकेश खुद ज्यादा सामने नहीं आता था. वह अपने साथियों के जरिए बॉर्डर पार से आने वाली हेरोइन और हथियारों की खेप उठवाता था. इसके बाद उन्हें पंजाब तक पहुंचाने का काम कराया जाता था. तस्करी से मिलने वाले पैसों से वह ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहा था. पाली जिले के चौपड़ा गांव का रहने वाला राकेश सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय था. पुलिस के मुताबिक उसने ‘दुबई किंग’ और ‘सरकार’ नाम से ग्रुप बना रखे थे. इन ग्रुपों में वह हथियारों, पैसों और दूसरे सामान के साथ अपनी तस्वीरें और शायरी पोस्ट करता था.

    कई राज्यों की पुलिस को थी तलाश
    एसपी मृदुल कच्छावा ने बताया कि राकेश प्रजापत के खिलाफ राजस्थान, पंजाब, गोवा और कर्नाटक में कुल 22 आपराधिक मामले दर्ज हैं. उसकी तलाश बीकानेर, पाली, ब्यावर, पंजाब और गोवा पुलिस कर रही थी. उसकी गिरफ्तारी पर बीकानेर रेंज आईजी ने 50 हजार रुपए और पाली पुलिस ने 25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था.

    फरीदकोट जेल से चलता था पूरा सिंडिकेट
    पुलिस के मुताबिक इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी वीरेन्द्र राजपुरोहित से पूछताछ में कई अहम बातें सामने आईं. जांच में पता चला कि पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आने वाली ड्रग्स और हथियारों की तस्करी का पूरा नेटवर्क पंजाब की फरीदकोट जेल से संचालित किया जा रहा था. वहीं से पाकिस्तानी तस्करों तक हवाला के जरिए रकम पहुंचाने की तैयारी भी होती थी. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में राजस्थान के और कौन-कौन लोग शामिल हैं. पाली जिले के कई बदमाश भी पुलिस की निगरानी में बताए जा रहे हैं.

    50 करोड़ की खेप से खुली थी कड़ी
    एसपी ने बताया कि 2 अगस्त को खाजूवाला के चक 6 बीडी इलाके से पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए भेजी गई करीब 50 करोड़ रुपए कीमत की 10 किलो हेरोइन, 11 पिस्टल, 33 मैगजीन और 100 कारतूस बरामद किए गए थे. इस मामले में ब्यावर के जैतारण निवासी वीरेन्द्र राजपुरोहित को गिरफ्तार किया गया था, जो फिलहाल जोधपुर में रह रहा था. पूछताछ में वीरेन्द्र ने बताया कि उसे यह खेप लेने के लिए राकेश प्रजापत ने भेजा था. उसने बताया कि साल 2018 में बेंगलुरु में उसकी राकेश से पहचान हुई थी. 15 जुलाई 2026 को राकेश ने जलालाबाद से वर्चुअल नंबर के जरिए फोन कर उसे खाजूवाला बॉर्डर से हेरोइन और हथियारों की खेप उठाकर पंजाब पहुंचाने को कहा था. इसके बाद वह 18 जुलाई को इलाके की रेकी करने पहुंचा और 1 अगस्त को दोबारा वहां पहुंचकर खेप लेकर रवाना हुआ. लेकिन 32 हेड के पास पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

    पहले भी 70 करोड़ की हेरोइन मामले में आ चुका नाम
    पुलिस ने बताया कि राकेश प्रजापत का नाम अप्रैल 2026 में खाजूवाला-पूगल मार्ग पर स्कूटी से बरामद करीब 14 किलो हेरोइन, जिसकी कीमत लगभग 70 करोड़ रुपए आंकी गई थी, उस मामले में भी सामने आया था. अब हाल ही में ड्रोन के जरिए भेजी गई हेरोइन और विदेशी हथियारों की बरामदगी में भी उसे आरोपी बनाया गया है. पुलिस का मानना है कि राकेश की गिरफ्तारी से पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों, हवाला नेटवर्क, आर्थिक लेनदेन और भारत में सक्रिय पूरे तस्करी सिंडिकेट के बारे में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं. अब जांच एजेंसियां उसकी संपत्तियों, आर्थिक स्रोतों और उससे जुड़े अन्य लोगों की भी गहराई से पड़ताल कर रही हैं.

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    आनंद पाण्डेयContent Producer

    आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…

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    Location :

    Bikaner,Bikaner,Rajasthan

    First Published :

    August 06, 2026, 16:28 IST

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  • फेसबुक पर दोस्ती, निवेश का झांसा और 1.24 करोड़ की ठगी; कानपुर में बुजुर्ग रिटायर्ड इंजीनियर साइबर फ्रॉड का शिकार..

    फेसबुक पर दोस्ती, निवेश का झांसा और 1.24 करोड़ की ठगी; कानपुर में बुजुर्ग रिटायर्ड इंजीनियर साइबर फ्रॉड का शिकार..

    फेसबुक पर दोस्ती, निवेश का झांसा और 1.24 करोड़ की ठगी; कानपुर में बुजुर्ग रिटायर्ड इंजीनियर साइबर फ्रॉड का शिकार..

    कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां एक 72 वर्षीय रिटायर्ड मर्चेंट नेवी इंजीनियर को फेसबुक के जरिए जाल में फंसाकर ठगों ने करीब 1.24 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी कर दी। आरोपियों ने निवेश में भारी मुनाफे का लालच देकर बुजुर्ग से कई बार पैसे ट्रांसफर करवाए।

    पीड़ित ने मामले की शिकायत कानपुर के कोहना थाना पुलिस से की है। पुलिस ने साइबर ठगी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    फेसबुक पर हुई दोस्ती, फिर शुरू हुआ ठगी का खेल

    पीड़ित बुजुर्ग तिलक नगर इलाके में अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि फरवरी 2026 में फेसबुक के माध्यम से कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया। बातचीत के दौरान आरोपियों ने निवेश के जरिए कम समय में अच्छा रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाया।

    इसके बाद उन्हें ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए पैसे लगाने के लिए कहा गया। ठगों ने ऐसा माहौल बनाया कि पीड़ित को लगा कि उनका पैसा सुरक्षित है और जल्द ही बड़ा मुनाफा मिलेगा।

    19 ट्रांजैक्शन में ट्रांसफर कराए 1.24 करोड़ रुपये

    पुलिस शिकायत के मुताबिक, पीड़ित ने 15 फरवरी से 13 अप्रैल 2026 के बीच अलग-अलग किस्तों में कुल 1,24,10,805 रुपये ट्रांसफर कर दिए।

    शुरुआत में फर्जी वेबसाइट पर निवेश की रकम और कथित मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाया गया। जब पीड़ित ने अपनी रकम निकालने की कोशिश की तो उनसे अतिरिक्त पैसे जमा करने की मांग की गई। इसी दौरान उन्हें शक हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

    पुलिस ने 22 लाख रुपये फ्रीज कराए

    मामले की जानकारी मिलने के बाद कानपुर पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस ने ठगी से जुड़े बैंक खातों की जांच करते हुए करीब 22 लाख रुपये फ्रीज करा दिए हैं। अब पुलिस बाकी रकम की बरामदगी और आरोपियों की पहचान में जुटी है।

    हजारों खातों में भेजी गई ठगी की रकम

    जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए अलग-अलग जगहों पर भेजा गया। पुलिस को आशंका है कि इसके पीछे एक बड़ा साइबर ठगी नेटवर्क काम कर रहा है।

    फिलहाल पुलिस बैंक खातों, ऑनलाइन लेन-देन, मोबाइल नंबरों और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है, ताकि इस पूरे गिरोह तक पहुंचा जा सके।

  • देर रात सूने मकान को बनाया निशाना, लाखों की नकदी और सोने-चांदी के जेवर लेकर फरार हुए बदमाश..

    देर रात सूने मकान को बनाया निशाना, लाखों की नकदी और सोने-चांदी के जेवर लेकर फरार हुए बदमाश..

    देर रात सूने मकान को बनाया निशाना, लाखों की नकदी और सोने-चांदी के जेवर लेकर फरार हुए बदमाश..

    हरियाणा के नूंह शहर में एक वकील के घर हुई बड़ी चोरी की वारदात से इलाके में हड़कंप मच गया। बदमाश देर रात मकान का ताला तोड़कर अंदर घुसे और लाखों रुपये की नकदी के साथ भारी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण समेटकर फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची तथा जांच शुरू कर दी।

    जानकारी के अनुसार, वारदात देर रात करीब 1:30 बजे हुई। चोरों ने मकान का ताला तोड़कर घर में प्रवेश किया और वहां रखी करीब 100 ग्राम सोने के आभूषण, लगभग 1 किलो चांदी तथा करीब 20 लाख रुपये नकद पर हाथ साफ कर दिया।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है। फुटेज में कुछ संदिग्ध बाइक पर आते दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि दो बदमाशों ने घर का ताला तोड़ा, जबकि अन्य साथी बाहर निगरानी करते रहे। घर के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरे को भी नुकसान पहुंचाया गया, ताकि उनकी पहचान न हो सके।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने साक्ष्य जुटाए। आसपास के इलाकों में लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके।

    पुलिस का कहना है कि चोरी का मामला दर्ज कर लिया गया है और संदिग्धों की तलाश के लिए कई टीमें लगाई गई हैं। अधिकारियों का दावा है कि तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

    नोट: यह समाचार पुलिस को मिली प्रारंभिक जानकारी और जांच के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के अनुसार की जाएगी।

  • चार बेटियों की मां प्रेमी संग हुई फरार, बस स्टैंड पर पति और बच्चों को दिया चकमा; साथ ले गई नकदी और जमा रकम..

    चार बेटियों की मां प्रेमी संग हुई फरार, बस स्टैंड पर पति और बच्चों को दिया चकमा; साथ ले गई नकदी और जमा रकम..

    चार बेटियों की मां प्रेमी संग हुई फरार, बस स्टैंड पर पति और बच्चों को दिया चकमा; साथ ले गई नकदी और जमा रकम..

    रिश्तों को हैरान कर देने वाला एक मामला सामने आया है, जहां चार बेटियों की मां अपने कथित प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली गई। आरोप है कि महिला ने बस स्टैंड पर अपने पति और बच्चों को बहाना बनाकर चकमा दिया और मौके से फरार हो गई। पति का दावा है कि महिला अपने साथ नकदी और बैंक में जमा रकम भी लेकर चली गई।

    पीड़ित पति के अनुसार, उसकी शादी करीब 11 साल पहले हुई थी और उनके चार बेटियां हैं। परिवार का गुजारा मजदूरी से चलता है। वह लंबे समय से दूसरे शहर में काम कर रहा था, जबकि उसकी पत्नी का पिछले कुछ वर्षों से एक रिश्तेदार के साथ कथित प्रेम संबंध था।

    बताया गया कि परिवार दूसरे शहर से अपने गांव लौट रहा था। सुबह जब वे बस स्टैंड पहुंचे, तब महिला ने अपने पति से बच्चों को शौचालय ले जाने के लिए कहा। पति बच्चों को लेकर गया और कुछ देर बाद वापस लौटा तो उसकी पत्नी वहां नहीं थी। आरोप है कि वह पहले से इंतजार कर रहे अपने कथित प्रेमी के साथ चली गई।

    पति का कहना है कि महिला घर की करीब 24 हजार रुपये नकद और बैंक खाते में जमा लगभग 50 हजार रुपये भी अपने साथ ले गई। उसने जब पत्नी के मायके वालों से संपर्क किया तो उन्हें भी उसके ठिकाने की जानकारी नहीं मिली।

    इसके बाद पीड़ित ने स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि महिला की तलाश की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और पुलिस में दर्ज शिकायत पर आधारित है। मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

  • फुटबॉल जितना बड़ा था सिर, जानिए इस 1 साल के बच्चे को कैसे मिली नई जिंदगी?

    फुटबॉल जितना बड़ा था सिर, जानिए इस 1 साल के बच्चे को कैसे मिली नई जिंदगी?

    फुटबॉल जितना बड़ा था सिर, जानिए इस 1 साल के बच्चे को कैसे मिली नई जिंदगी?

    नेशविले (अमेरिका). दुनियाभर में कई ऐसी दुर्लभ बीमारियां हैं, जिनके बारे में जानकर हैरानी होती है. कभी कोई बिना हाथ-पैर के पैदा हो जाता है, तो कभी किसी के दिल में ही जन्मजात दोष होते हैं. जब मां-बाप को इन खामियों के बारे में पता चलता है, तो उनके होश उड़ जाते हैं. उन्हें समझ नहीं आता है कि आखिर कैसे वो अपने नवजात को सामान्य जिंदगी दें. ऐसा ही एक दुर्लभ मामला अमेरिका के नेशविले शहर से सामने आया है. यहां पर एक ऐसे बच्चे का जन्म हुआ, जिसके सिर का आकार सामान्य से दोगुना या यूं कहें कि फुटबॉल जितना बड़ा था. बच्चे का नाम नोआ बेकर है. नोआ की मां मैडिसन जब 4 महीने की गर्भवती थी, तभी उसे अपने होने वाले बच्चे की इस दुर्लभ बीमारी के बारे में पता चल गया था. लेकिन पैदा होने के बाद नोआ का सिर लगातार बढ़ता रहा.

    हालत ऐसी हो गई थी कि एक साल का मासूम नोआ न ठीक से बैठ पाता था, न अपना सिर संभाल पाता था और न ही सामान्य तरीके से खाना खा पाता था. उसकी जिंदगी बद से बदतर होती जा रही थी. आखिरकार डॉक्टरों ने एक बेहद जोखिम भरा फैसला लिया. उन्होंने नोआ के सिर की सर्जरी करने का फैसला किया. उन्होंने सर्जरी में नोआ की खोपड़ी का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा हटाकर उसका आकार कम कर दिया. नोआ की मां मैडिसन बेकर बताती हैं कि गर्भावस्था के दौरान ही डॉक्टरों ने उन्हें चेतावनी दे दी थी कि उनके होने वाले बच्चे को हाइड्रोसिफलस है. यह ऐसी स्थिति होती है, जिसमें दिमाग के भीतर जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ जमा होने लगता है. इसका दबाव बढ़ने पर शिशु का सिर तेजी से फैलने लगता है. इस तरह मार्च 2025 में जब नोआ का जन्म हुआ, तभी डॉक्टरों ने उसे नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती कर लिया.

    महज दो सप्ताह की उम्र में नोआ की पहली सर्जरी हुई. डॉक्टरों ने दिमाग में जमा अतिरिक्त तरल निकालने के लिए शंट लगाया, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई. अगले कुछ महीनों में उसे कई बार ऑपरेशन थिएटर जाना पड़ा. कुल मिलाकर छह ब्रेन सर्जरी करनी पड़ीं. समय के साथ नोआ का सिर इतना बड़ा हो गया कि उसकी परिधि करीब 26 इंच तक पहुंच गई. तुलना करें तो सामान्य नवजात के सिर की परिधि लगभग 13 से 14 इंच होती है. बढ़ते वजन की वजह से वह अपना सिर तक नहीं उठा पाता था. डॉक्टरों के मुताबिक अगर समय रहते इलाज नहीं किया जाता, तो आगे चलकर उसकी जान को भी खतरा हो सकता था. इसी वजह से 1 मई 2026 को डॉक्टरों की टीम ने क्रेनियल रिडक्शन सर्जरी की. यह बेहद जटिल प्रक्रिया थी, जिसमें खोपड़ी का बड़ा हिस्सा हटाकर उसका आकार कम किया गया, ताकि दिमाग पर पड़ने वाला दबाव नियंत्रित हो सके और बच्चे का शारीरिक विकास बेहतर हो.

    डॉक्टरों द्वारा की गई सफल सर्जरी के बाद अब एक साल का मासूम नोआ सामान्य जिंदगी जीने की ओर बढ़ रहा है. वह अब पहले की तुलना में ज्यादा सहज महसूस कर रहा है और धीरे-धीरे रिकवरी कर रहा है. हालांकि, उसकी मां कहती हैं कि बेटे का बदला हुआ चेहरा देखकर उन्हें अभी भी थोड़ा अलग महसूस होता है. वह प्यार से उसके बड़े सिर को “बिग नोगिन” कहकर बुलाती थीं. मैडिसन ने आगे कहा कि उन्हें अपने बच्चे के बड़े सिर वाले रूप के साथ जीने की आदत हो गई थी, इसलिए बदलाव को स्वीकार करने में थोड़ा समय लग रहा है. लेकिन सबसे बड़ी खुशी यह है कि अब मेरा बेटा सामान्य जिंदगी की ओर बढ़ रहा है. वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि हाइड्रोसिफलस का समय पर इलाज बेहद जरूरी है. सही इलाज मिलने पर कई बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं. नोआ का मामला भी इसी बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियों में भी समय पर चिकित्सा और लगातार देखभाल से उम्मीद कायम रह सकती है.

  • शर्म करो, पैर कब्र में लटके हैं… पूजा-पाठ किया करो’, आखिर एक बेटे ने मां को क्यों सुनाईं ये कड़वी बातें?

    शर्म करो, पैर कब्र में लटके हैं… पूजा-पाठ किया करो’, आखिर एक बेटे ने मां को क्यों सुनाईं ये कड़वी बातें?

    एक मां ने जब अपने बेटे से दिल का दर्द साझा किया, तो बदले में उसे ऐसे शब्द सुनने पड़े, जिन्होंने उनका दिल तोड़ दिया। बेटे ने कहा, ‘शर्म करो, पैर कब्र में लटके हैं। अब इस उम्र में पूजा-पाठ किया करो।’ आखिर मां ने ऐसी कौन-सी बात कह दी थी, जिसके जवाब में बेटे ने इतनी कड़वी बातें सुना दीं? आइए जानते हैं।

    शर्म करो, पैर कब्र में लटके हैं… पूजा-पाठ किया करो’, आखिर एक बेटे ने मां को क्यों सुनाईं ये कड़वी बातें?
    ‘ इस लेख में यूज की गईं सभी तस्‍वीरें सांके‍त‍िक हैं।

    एक मां अपने बच्चे के लिए क्या कुछ नहीं करती। उसकी परवरिश में अपनी इच्छाएं, सपने और पूरी जिंदगी तक समर्पित कर देती है। बच्चे की हर खुशी में खुश होती है और उसके हर दर्द को अपना दर्द मानती है। लेकिन कई बार जब वही मां अपने मन की बात या अपनी तकलीफ बच्चों के सामने रखती है, तो बदले में उसे ऐसे शब्द सुनने पड़ते हैं,

    जो उसके दिल को भीतर तक तोड़ देते हैं। ऐसा ही एक वाकया मोटिवेशनल स्पीकर और पर्सनल कोच जिज्ञासा सिंह ने साझा किया। उन्होंने बताया कि एक मां ने जब अपने बेटे से अपने दिल की बात कही, तो बेटे ने उन्हें समझने के बजाय ताना मारते हुए कहा, ‘शर्म करो, पैर कब्र में लटके हैं… अब इस उम्र में पूजा-पाठ किया करो।’ कोच जिज्ञासा सिंह का कहना है कि किसी की भावनाओं को जज करने से पहले उन्हें समझने की कोशिश करनी चाहिए। हर इंसान को अपनी बात कहने और अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का अधिकार है।

  • क्या Gen Z में बढ़ रहा है टाइप-2 डायबिटीज का खतरा? जानें कारण, जोखिम और बचाव के तरीके..

    क्या Gen Z में बढ़ रहा है टाइप-2 डायबिटीज का खतरा? जानें कारण, जोखिम और बचाव के तरीके..

    क्या Gen Z में बढ़ रहा है टाइप-2 डायबिटीज का खतरा? जानें कारण, जोखिम और बचाव के तरीके..

    एक समय था जब टाइप-2 डायबिटीज को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण Gen Z (करीब 1997–2012 के बीच जन्मी पीढ़ी) में प्री-डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ने की चिंता जताई जा रही है।

    युवाओं में क्यों बढ़ रहा है डायबिटीज का खतरा?

    विशेषज्ञों के अनुसार, आज की युवा पीढ़ी की कुछ आदतें इस जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इनमें शामिल हैं:

    • लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहना।
    • शारीरिक गतिविधि और नियमित व्यायाम की कमी।
    • फास्ट फूड, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन।
    • अनियमित नींद और देर रात तक जागना।
    • लगातार मानसिक तनाव और व्यस्त जीवनशैली।

    ये सभी कारक समय के साथ वजन बढ़ने, इंसुलिन रेजिस्टेंस और ब्लड शुगर के असंतुलन में योगदान दे सकते हैं।

    क्या शुगर-फ्री ड्रिंक्स पूरी तरह सुरक्षित हैं?

    कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि शुगर-फ्री या आर्टिफिशियल स्वीटनर वाले पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन हर व्यक्ति के लिए लाभकारी नहीं हो सकता। हालांकि, इनके प्रभावों को लेकर वैज्ञानिक शोध अभी जारी हैं और अलग-अलग अध्ययनों में अलग निष्कर्ष सामने आए हैं।

    इसलिए किसी भी पेय को “पूरी तरह सुरक्षित” या “पूरी तरह हानिकारक” मानने के बजाय संतुलित मात्रा में सेवन करना और डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

    डायबिटीज से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें

    विशेषज्ञ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हैं। इसके लिए आप ये कदम उठा सकते हैं:

    • रोज कम से कम 30–45 मिनट शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करें।
    • ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त संतुलित आहार लें।
    • फास्ट फूड, अत्यधिक मीठे पेय और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित करें।
    • रोज 7–9 घंटे की अच्छी नींद लेने की कोशिश करें।
    • स्क्रीन टाइम कम करें और तनाव कम करने के लिए योग, मेडिटेशन या अन्य रिलैक्सेशन तकनीक अपनाएं।
    • यदि परिवार में डायबिटीज का इतिहास है या वजन अधिक है, तो समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराते रहें।

    कब करानी चाहिए जांच?

    यदि आपको बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, बिना कारण वजन घटना, अत्यधिक थकान या धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षण महसूस हों, तो डॉक्टर से सलाह लेकर ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान और जीवनशैली में बदलाव से प्री-डायबिटीज को कई मामलों में नियंत्रित किया जा सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे चिकित्सीय सलाह का विकल्प न मानें। डायबिटीज या किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लक्षण होने पर योग्य डॉक्टर से परामर्श लेकर ही जांच और उपचार कराएं।

  • रुद्राक्ष कैसे धारण करें? जानें पहनने का सही तरीका, मंत्र, नियम और धार्मिक महत्व..

    रुद्राक्ष कैसे धारण करें? जानें पहनने का सही तरीका, मंत्र, नियम और धार्मिक महत्व..

    रुद्राक्ष कैसे धारण करें? जानें पहनने का सही तरीका, मंत्र, नियम और धार्मिक महत्व..

    हिंदू धर्म में रुद्राक्ष को भगवान शिव का प्रिय और अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं। शिव पुराण में भी रुद्राक्ष के महत्व का विस्तृत वर्णन मिलता है। हालांकि, इसे धारण करने से पहले सही विधि और नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है।

    रुद्राक्ष का भगवान शिव से क्या संबंध है?

    शिव पुराण के अनुसार, त्रिपुरासुर के वध के बाद भगवान शिव के नेत्रों से निकले अश्रु पृथ्वी पर गिरे और वहीं से रुद्राक्ष के वृक्ष की उत्पत्ति हुई। इसी कारण रुद्राक्ष को शिव का स्वरूप और उनकी कृपा का प्रतीक माना जाता है।

    रुद्राक्ष धारण करने का शुभ समय

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना रुद्राक्ष धारण करने के लिए सबसे शुभ माना जाता है। विशेष रूप से सोमवार, महाशिवरात्रि या किसी शुभ तिथि पर इसे पहनना उत्तम माना जाता है।

    रुद्राक्ष धारण करने की सही विधि

    रुद्राक्ष पहनने से पहले इन चरणों का पालन किया जाता है—

    • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
    • भगवान शिव की विधिवत पूजा करें।
    • रुद्राक्ष को पहले गंगाजल से शुद्ध करें।
    • इसके बाद पंचामृत से अभिषेक करें।
    • दोबारा गंगाजल से धोकर साफ कपड़े से पोंछ लें।
    • रुद्राक्ष हाथ में लेकर भगवान शिव का स्मरण करें।
    • कम से कम 11, 21, 51 या 108 बार मंत्र जाप करें।
    • इसके बाद लाल या पीले धागे अथवा उपयुक्त माला में रुद्राक्ष धारण करें।

    रुद्राक्ष धारण करने का मंत्र

    यदि मुखी के अनुसार विशेष मंत्र ज्ञात न हो, तो सामान्य रूप से भगवान शिव के इस मंत्र का जाप किया जा सकता है—

    “ॐ नमः शिवाय”

    धार्मिक मान्यता है कि इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप कर रुद्राक्ष धारण करना शुभ माना जाता है।

    रुद्राक्ष पहनने के नियम

    रुद्राक्ष धारण करने से जुड़े कुछ पारंपरिक नियम इस प्रकार बताए गए हैं—

    • मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से बचने की सलाह दी जाती है।
    • किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा पहना हुआ रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहिए।
    • अपना रुद्राक्ष भी किसी अन्य व्यक्ति को पहनने के लिए नहीं देना चाहिए।
    • रुद्राक्ष का सम्मानपूर्वक रख-रखाव करना चाहिए और उसे स्वच्छ बनाए रखना चाहिए।

    रुद्राक्ष धारण करने के धार्मिक लाभ

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष धारण करने से—

    • मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
    • भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
    • नकारात्मक विचारों और भय से राहत मिलती है।
    • ध्यान और एकाग्रता में सुधार होता है।
    • आध्यात्मिक उन्नति में सहायता मिलती है।
    • जीवन में आत्मविश्वास और संतुलन बढ़ता है।
    • ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होने की मान्यता है।

  • सूरत में दर्दनाक घटना: मोबाइल छोड़ने को कहा तो 13 वर्षीय छात्र ने उठाया खौफनाक कदम, परिवार सदमे में..

    सूरत में दर्दनाक घटना: मोबाइल छोड़ने को कहा तो 13 वर्षीय छात्र ने उठाया खौफनाक कदम, परिवार सदमे में..

    सूरत में दर्दनाक घटना: मोबाइल छोड़ने को कहा तो 13 वर्षीय छात्र ने उठाया खौफनाक कदम, परिवार सदमे में..

    गुजरात के सूरत से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है, जहां 13 वर्षीय छात्र की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बच्चे को मोबाइल छोड़कर पढ़ाई और होमवर्क करने के लिए कहा गया था, जिसके कुछ समय बाद उसने कथित तौर पर फांसी लगा ली।

    यह घटना सूरत के वड रोड स्थित लक्ष्मीनगर सोसाइटी की है। मृतक मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला था और सूरत महानगरपालिका के एक स्कूल में सातवीं कक्षा का छात्र था। उसके पिता लूम्स फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं।

    परिजनों के मुताबिक, बच्चे को मोबाइल गेम खेलने की आदत थी। घटना वाले दिन माता-पिता ने उसे डांटने के बजाय प्यार से मोबाइल बंद कर स्कूल का होमवर्क पूरा करने के लिए कहा। इसके बाद वह नाराज होकर अपने कमरे में चला गया। कुछ देर बाद परिजनों ने उसे फंदे से लटका हुआ पाया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    परिवार से जुड़े लोगों का कहना है कि बच्चा स्वभाव से जिद्दी था और पिछले कुछ समय से मोबाइल गेमिंग की वजह से उसके व्यवहार में बदलाव देखा जा रहा था। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है।

    घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लेने की जरूरत है। अभिभावकों को बच्चों के साथ अधिक समय बिताना चाहिए, उनकी भावनाओं को समझना चाहिए और मोबाइल के उपयोग के लिए संतुलित नियम बनाने चाहिए।