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  • पुरानी कब्ज और पाचन: से जुड़ी समस्याओं में राहत दे सकते हैं ये 5 फल, रिसर्च से समझें इनके फायदे.

    पुरानी कब्ज और पाचन: से जुड़ी समस्याओं में राहत दे सकते हैं ये 5 फल, रिसर्च से समझें इनके फायदे.

    पुरानी कब्ज और पाचन: से जुड़ी समस्याओं में राहत दे सकते हैं ये 5 फल, रिसर्च से समझें इनके फायदे.

    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं बेहद आम हो गई हैं। खासकर पुरानी कब्ज , गैस और अपच जैसी दिक्कतें न सिर्फ मानसिक सेहत पर असर करती हैं, बल्कि लंबे समय में शरीर में टॉक्सिन्स भी बढ़ाने लगती हैं। ऐसे में अक्सर लोग बिना सोचे-समझे दवाओं या चूर्ण का सहारा लेने लगते हैं, जिसके सेहत पर कई तरह के साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। आप जानते हैं कि हमारी फ्रिज में मौजूद कुछ फल ऐसे हैं जो हमारी क्रॉनिक कब्ज की परेशानी से निजात दिलाने में हमारी मदद कर सकते हैं। ICMR के तहत काम करने वाली संस्था NIN यानी राष्ट्रीय पोषण संस्थान ने भारतीय डाइटरी गाइडलाइंस में कुछ फलों पर विस्तृत न्यूट्रिशन डेटा और रिसर्च साझा की है जो कब्ज का इलाज करते हैं और पाचन को दुरुस्त करते हैं।

    WHO ने भी वैश्विक स्तर पर क्रोनिक बीमारियों जैसे पेट का कैंसर, मोटापा और कमजोर मेटाबॉलिज्म से बचने के लिए फलों के सेवन का पाचन पर असर के वैज्ञानिक प्रमाण पेश किए है। WHO के अनुसार, एक वयस्क को रोजाना कम से कम 400 ग्राम फल और सब्जियां खानी चाहिए। इसमें सेब, संतरा और पपीता जैसे फाइबर युक्त फल शामिल करने से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल यानी पाचन संबंधी कैंसर का खतरा 19% तक कम हो जाता है। आइए जानते हैं कि क्रोनिक कब्ज को कंट्रोल करने में कौन-कौन से ऐसे रिसर्च बेस्ड फल है जो मदद कर सकते हैं। कौन से फल पाचन को सपोर्ट करते हैं और बॉडी को हेल्दी रखने में मदद करते हैं।

    पपीता: पाचन सुधारने वाला सुपरफूड

    पपीता पाचन के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद पपेन एंजाइम प्रोटीन को पचाने में मदद करता है, जबकि फाइबर आंतों की कार्यप्रणाली बेहतर बनाता है। विटामिन A और C से भरपूर यह फल इम्यूनिटी भी मजबूत करता है। सुबह सीमित मात्रा में पपीता खाने से कब्ज और अपच की समस्या में राहत मिल सकती है। ICMR-NIN की रिसर्च के अनुसार पपीते में मौजूद कैरोटेनॉयड्स, फाइबर व विटामिन C शरीर में फ्री-रेडिकल्स को खत्म कर आंतों की अंदरूनी परत (Gut Lining) को मजबूत करते हैं।

    तरबूज: शरीर को हाइड्रेट रखने वाला फल

    तरबूज में पानी की मात्रा लगभग 90 प्रतिशत होती है, इसलिए यह गर्मी और उमस में शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसका सेवन शरीर में तरल संतुलन बनाए रखता है और ताजगी का एहसास कराता है। हल्का और आसानी से पचने वाला यह फल पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं डालता। NIN की भारतीय खाद्य संरचना तालिका के अनुसार, तरबूज का लाइकोपीन (Lycopene) एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो पाचन तंत्र की सूजन (Inflammation) को कम करता है।

    सेब: फाइबर से भरपूर हेल्दी विकल्प

    सेब में मौजूद घुलनशील फाइबर पेक्टिन पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है और मल त्याग को आसान बनाता है। छिलके सहित सेब खाने से फाइबर की मात्रा अधिक मिलती है, जिससे पेट लंबे समय तक स्वस्थ और संतुष्ट महसूस करता है।

    अनानास: एंजाइम से भरपूर पाचन साथी

    अनानास में पाया जाने वाला ब्रोमेलेन एंजाइम प्रोटीन के पाचन को आसान बनाता है। यह पेट में भारीपन और भोजन के बाद होने वाली असहजता को कम करने में मदद कर सकता है। साथ ही, इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो इम्यूनिटी को मजबूत रखने में सहायक माने जाते हैं।

    संतरा: विटामिन C और फाइबर का बेहतरीन स्रोत

    संतरा विटामिन C, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फल है। इसका नियमित सेवन पाचन तंत्र को सक्रिय रखने और शरीर को तरोताजा महसूस कराने में मदद करता है। फाइबर आंतों की सफाई में सहायक होता है, जबकि विटामिन C रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी फल का सेवन आपकी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और मेडिकल कंडीशन के अनुसार अलग-अलग प्रभाव डाल सकता है। यदि आपको डायबिटीज, किडनी रोग, पाचन संबंधी बीमारी या किसी अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या पंजीकृत डायटीशियन की सलाह अवश्य लें। यह सामग्री चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं है।

  • प्रेमी संग रंगरेलिया ‘मनाने’ में थी दिक्कत, 10 लाख में पति की हत्या की दी सुपारी, पत्नी ने प्रेमी संग रची साजिश, 4 गिरफ्तार

    प्रेमी संग रंगरेलिया ‘मनाने’ में थी दिक्कत, 10 लाख में पति की हत्या की दी सुपारी, पत्नी ने प्रेमी संग रची साजिश, 4 गिरफ्तार

    प्रेमी संग रंगरेलिया ‘मनाने’ में थी दिक्कत, 10 लाख में पति की हत्या की दी सुपारी, पत्नी ने प्रेमी संग रची साजिश, 4 गिरफ्तार

    मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में किसान प्रवीण उर्फ परविंदर हत्याकांड का पुलिस ने करीब 60 घंटे में खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, प्रवीण की हत्या की साजिश उसकी पत्नी रेखा ने अपने कथित प्रेमी विकास के साथ मिलकर रची थी। आरोप है कि दोनों ने प्रवीण को रास्ते से हटाने के लिए जमीन बेचकर हत्या के लिए 10 लाख रुपये जुटाने की योजना बनाई थी। पुलिस ने मामले में रेखा, उसके प्रेमी विकास, राजा उर्फ काला और कल्याण सिंह को गिरफ्तार किया है। घटना 27 सितंबर को रतनपुरी थाना क्षेत्र के अंबरपुर जंगल में हुई थी। यहां प्रवीण की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस के मुताबिक, पोस्टमार्टम में प्रवीण के शरीर पर गोली लगने की पुष्टि हुई।

    पति से विवाद के बाद प्रेमी के करीब आई महिला

    पुलिस के अनुसार, रेखा की शादी वर्ष 2006 में प्रवीण से हुई थी। पूछताछ में रेखा ने कथित तौर पर बताया कि उसका पति शराब पीता था और उसके साथ मारपीट करता था। इसी दौरान वर्ष 2018-19 में परिवार के परिचित विकास से उसकी पहचान हुई। पुलिस का दावा है कि समय के साथ दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए। पुलिस के मुताबिक, रेखा और विकास शादी करना चाहते थे। जब प्रवीण को दोनों के संबंधों की जानकारी हुई तो उसने इसका विरोध किया। इसके बाद कथित तौर पर दोनों ने प्रवीण की हत्या की योजना बनाई।

    10 लाख में हत्या का सौदा

    पुलिस के अनुसार, प्रवीण की हत्या के लिए 10 लाख रुपये देने की बात तय हुई थी। रेखा ने यह रकम जमीन बेचकर जुटाने की योजना बनाई थी। इसके बाद विकास ने राजा उर्फ काला और कल्याण सिंह से संपर्क किया। पुलिस का दावा है कि राजा के करीब डेढ़ लाख रुपये प्रवीण पर बकाया थे और वह काफी समय से रकम वापस मांग रहा था। इसी वजह से वह भी हत्या की योजना में शामिल होने के लिए तैयार हो गया। पुलिस के मुताबिक, विकास ने राजा और कल्याण सिंह को हत्या के बदले तीन-तीन लाख रुपये देने का लालच दिया था।

    जंगल में बुलाकर मारी गोली

    जांच के अनुसार, 27 सितंबर को प्रवीण को रतनपुरी थाना क्षेत्र के अंबरपुर जंगल में बुलाया गया। पुलिस का आरोप है कि वहां राजा उर्फ काला और कल्याण सिंह ने उसे गोली मार दी। दोनों ने कथित तौर पर बारी-बारी से एक-एक गोली चलाई। गोली लगने से प्रवीण की मौत हो गई और आरोपी मौके से फरार हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने खुलासे के लिए कई पुलिस टीमों का गठन किया। एसपी ग्रामीण, सीओ बुढ़ाना, रतनपुरी थाना पुलिस, SOG और सर्विलांस टीम को जांच में लगाया गया। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर करीब 60 घंटे में आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।

    दो तमंचे, कार और मोबाइल बरामद

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से दो अवैध 315 बोर के तमंचे, जिंदा और खोखा कारतूस, चार मोबाइल फोन, एक स्विफ्ट कार और मृतक की मोटरसाइकिल बरामद की गई है। जांच में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि वारदात के लिए एक छोटा मोबाइल फोन कुछ दिन पहले खरीदा गया था और उसमें नया सिम लगाया गया था। पुलिस के अनुसार, इस मोबाइल का इस्तेमाल हत्या की साजिश और वारदात से संबंधित संपर्क के लिए किया गया। मामले में शुरुआत में BNS की धारा 103(1), 3(5) और 61(2) के तहत केस दर्ज किया गया था। बाद में अवैध हथियारों की बरामदगी के आधार पर आर्म्स एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं।

    विकास करता है मिट्टी डालने का काम

    एसएसपी संजय कुमार वर्मा के मुताबिक, आरोपी विकास मिट्टी डालने और ठेकेदारी का काम करता है। उसका प्रवीण के परिवार में आना-जाना था। पुलिस का दावा है कि इसी दौरान उसकी रेखा से नजदीकी बढ़ी और बाद में दोनों के बीच कथित प्रेम संबंध बन गए। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में चारों आरोपियों ने मामले में अपनी भूमिका के संबंध में जानकारी दी है। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।

    पत्नी और प्रेमी समेत चार आरोपी गिरफ्तार

    मुजफ्फरनगर पुलिस ने इस हत्याकांड में प्रवीण की पत्नी रेखा, उसके कथित प्रेमी विकास, राजा उर्फ काला और कल्याण सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल पुलिस कथित सुपारी की रकम, जमीन बेचने की योजना, आरोपियों के बीच पैसों के लेन-देन, मोबाइल संपर्क और हत्या से पहले तथा बाद की गतिविधियों की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य तथ्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

  • आसनसोल के ‘बर्नपुर’ में 3 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार’

    आसनसोल के ‘बर्नपुर’ में 3 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार’

    आसनसोल के ‘बर्नपुर’ में 3 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार’

    आसनसोल: दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के हीरापुर थाना क्षेत्र के बर्नपुर में 3 साल की बच्ची से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। शंकर मंडल नामक व्यक्ति पर रेप का आरोप है। बच्ची के परिजनों का दावा है कि वह पड़ोस के एक घर में गई थी,जहां कथित तौर पर बच्ची के साथ गलत आचरण किया गया।

    मेडिकल जांच के बाद आरोपी गिरफ्तार

    बच्ची के पिता के मुताबिक, घर लौटने के बाद बच्ची के पेट में तेज दर्द हो रहा था। बच्ची ने अपनी मां को बताया कि शंकर मंडल ने उसके साथ कथित तौर पर गलत हरकत की है। इसके बाद परिजन बच्ची को अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसका इलाज कराया गया। पिता का कहना है कि अस्पताल से ही पुलिस को घटना की सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शंकर मंडल को गिरफ्तार कर लिया।

    शिकायत वापस लेने का बनाया दबाव

    बच्ची के पिता ने आरोप लगाया कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद संजय विश्वकर्मा और गुड्डू रजक नाम के दो लोगों ने उन पर पुलिस में दर्ज शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया। वहीं, बच्ची की मां ने भी बताया कि उनकी बेटी पड़ोस में खेलने गई थी और वापस लौटकर उसने शंकर मंडल द्वारा कथित तौर पर गलत आचरण किए जाने की बात बताई। मां ने शंकर मंडल पर इलाके में दबंगई करने और कई घरों पर अवैध रूप से कब्जा करने का भी आरोप लगाया है।

    हालांकि, शंकर मंडल के परिजनों ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि शंकर मंडल को मामले में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। बच्ची की पहचान उजागर नहीं की गई है। इससे पहले बारुईपुर में एक नाबालिग लड़की के रेप और मर्डर के आरोपी प्रभास मंडल का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया था।

    शख्स की हत्या

    वहीं, दक्षिण 24 परगना जिले में घर में हथियार लेकर घुसने पर व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान गोपाल हालदार के रूप में हुई है। उसने बताया कि यह घटना कोलकाता के दक्षिणी छोर पर स्थित सोनारपुर में बृहस्पतिवार को उस समय हुई जब हालदार और दो अन्य लोग कमराबाद फुलेर हाट के अंबेडकर नगर इलाके में स्थित एक घर में घुस गए और वहां रह रहे लोगों पर हमला कर दिया।

  • मंदिर में अश्लील डांस का Video Viral होते ही मचा हड़कंप, पुलिस बोली- ‘AI से बना है फर्जी वीडियो’

    मंदिर में अश्लील डांस का Video Viral होते ही मचा हड़कंप, पुलिस बोली- ‘AI से बना है फर्जी वीडियो’

    मंदिर में अश्लील डांस का Video Viral होते ही मचा हड़कंप, पुलिस बोली- ‘AI से बना है फर्जी वीडियो’

    Varanasi News: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में लाट भैरव मंदिर परिसर में एक धार्मिक आयोजन के दौरान 2 युवतियों के कथित अश्लील नृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उपजे विवाद के बीच पुलिस ने संबंधित सामग्री को मंगलवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) टूल से निर्मित बताया। पुलिस ने दावा किया कि भ्रामक वीडियो प्रसारित कर पुलिस की छवि खराब करने का प्रयास किया गया है और ऐसा करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। यह वीडियो बाबा लाट भैरव की वार्षिक बारात से जुड़े धार्मिक आयोजन का बताया गया है और इसके सामने आने के बाद विभिन्न वर्गों ने सवाल उठाए हैं। वीडियो में घाघरा और बिना आस्तीन वाली चोली पहने दो महिलाएं भोजपुरी गीतों पर कथित तौर पर अश्लील नृत्य करती दिखाई दे रही हैं। कुछ लोगों ने वीडियो में नजर आ रहे पुलिसकर्मियों के आचरण पर सवाल उठाए हैं।

    समाजवादी पार्टी के मीडिया प्रकोष्ठ ने भी वीडियो को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उसने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के शासन में मंदिर परिसरों और धार्मिक आयोजनों में भी अश्लील गीत, नृत्य और भद्दी प्रस्तुतियां हो रही हैं। सपा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जिन मूल्यों, परंपराओं, आचरण और चरित्र की बात करती है, उन पर ऐसे घटनाक्रमों से सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, मंदिर से जुड़े लोगों ने कहा कि ऐसा नृत्य पारंपरिक रूप से बाबा लाट भैरव की बारात का हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि वार्षिक आयोजन में नगर वधुओं के नृत्य प्रस्तुति देने की परंपरा रही है।

  • दो बार दिया गया ‘जानलेवा’ इंजेक्शन, फिर भी जिंदा रही कैदी; अमेरिका में फेल हुई फांसी की कोशिश से मचा हड़कंप.

    दो बार दिया गया ‘जानलेवा’ इंजेक्शन, फिर भी जिंदा रही कैदी; अमेरिका में फेल हुई फांसी की कोशिश से मचा हड़कंप.

    दो बार दिया गया ‘जानलेवा’ इंजेक्शन, फिर भी जिंदा रही कैदी; अमेरिका में फेल हुई फांसी की कोशिश से मचा हड़कंप.

    नई दिल्ली: अमेरिका के टेनेसी राज्य में मौत की सजा पाए एक कैदी की फांसी की कोशिश उस समय नाकाम हो गई, जब उसे जानलेवा दवा की दो डोज देने के बाद भी उसकी सांसें चलती रहीं। 50 वर्षीय क्रिस्टा पाइक को बाद में जेल से अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई गई है। उनके वकीलों के मुताबिक, वह अस्पताल में जीवन रक्षक चिकित्सा प्राप्त कर रही थीं।

    यह घटना 30 सितंबर 2026 को नैशविल स्थित रिवरबेंड मैक्सिमम सिक्योरिटी इंस्टीट्यूशन में हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पाइक को जानलेवा इंजेक्शन के लिए पेंटोबार्बिटल की दो डोज दी गईं, लेकिन इसके बावजूद उनकी मौत नहीं हुई।

    दो डोज के बाद भी चल रही थी सांस

    एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, फांसी की प्रक्रिया के दौरान पाइक के जीवित होने के संकेत काफी देर तक दिखाई देते रहे। उनके वकीलों ने अदालत में दाखिल दस्तावेजों में कहा कि इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी उनकी धड़कन चल रही थी और सांस लेने की आवाज सुनाई दे रही थी।

    कुछ समय बाद जेल अधिकारियों ने प्रक्रिया रोक दी और पाइक को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। उनके वकीलों ने अगले दिन बताया कि वह गंभीर हालत में थीं और उन्हें जीवन बचाने वाली चिकित्सा दी जा रही थी।

    टेनेसी के प्रोटोकॉल में दूसरी डोज का प्रावधान

    इस मामले का एक अहम पहलू टेनेसी की फांसी की प्रक्रिया से जुड़ा है। राज्य के प्रोटोकॉल में पहली डोज प्रभावी न होने की स्थिति में दूसरी डोज देने का प्रावधान है। पाइक को भी पहली डोज के बाद दूसरी डोज दी गई, लेकिन इसके बाद भी उनकी मौत नहीं हुई।

    रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा प्रोटोकॉल में दूसरी डोज के बाद भी व्यक्ति के जीवित रहने जैसी असाधारण स्थिति से निपटने के लिए आगे क्या किया जाना चाहिए, इसे लेकर सवाल उठे हैं।

    टेनेसी डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शन ने कहा है कि अधिकारियों ने राज्य के स्वीकृत और कानूनी प्रोटोकॉल के अनुसार प्रक्रिया पूरी की। वहीं घटना के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की स्वतंत्र समीक्षा कराने का आदेश दिया है।

    1995 में हुई थी 19 वर्षीय युवती की हत्या

    क्रिस्टा पाइक को 1995 में 19 वर्षीय कोलीन स्लेमर की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। अपराध के समय पाइक 18 वर्ष की थीं।

    अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, पाइक और उनके तत्कालीन बॉयफ्रेंड टेडरिल शिप पर स्लेमर की हत्या का आरोप लगा था। पाइक को बाद में इस मामले में मौत की सजा सुनाई गई, जबकि मामले में शामिल अन्य लोगों को अलग-अलग सजा मिली।

    पाइक की फांसी से पहले उनके वकीलों ने कानूनी चुनौतियां भी उठाई थीं। आखिरकार अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ने की अनुमति दी।

    घटना के बाद टेनेसी ने रोकी बाकी फांसी

    इस असफल फांसी की कोशिश के बाद टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने राज्य में इस साल होने वाली बाकी फांसियों को रोकने और घटना की स्वतंत्र जांच कराने का आदेश दिया।

    गवर्नर ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि आखिर प्रक्रिया में क्या हुआ और ऐसा क्यों हुआ।

    रिपोर्टों के मुताबिक, यह 2026 में टेनेसी में फांसी की दूसरी असफल कोशिश है। इससे पहले मई में टोनी कैरथर्स की फांसी उस समय रोकनी पड़ी थी, जब अधिकारियों को जानलेवा दवा देने के लिए आवश्यक IV लाइन स्थापित करने में कठिनाई हुई थी।

    अब आगे क्या होगा?

    पाइक को फिलहाल अस्पताल में चिकित्सा दी जा रही है और उनकी हालत को लेकर उनके वकीलों ने गंभीर चिंता जताई है। घटना की जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि दो डोज दिए जाने के बावजूद फांसी की प्रक्रिया क्यों सफल नहीं हुई।

    इस घटना ने अमेरिका में मौत की सजा की प्रक्रियाओं और जानलेवा इंजेक्शन के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर कानूनी और सार्वजनिक बहस को जन्म दिया है। हालांकि, पाइक के मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और उनके स्वास्थ्य की स्थिति जांच के साथ बदल सकती है।

  • दो बार दिया गया जानलेवा इंजेक्शन, फिर भी जिंदा रही कैदी; अमेरिका में फेल हुई फांसी की कोशिश से मचा हड़कंप.

    दो बार दिया गया जानलेवा इंजेक्शन, फिर भी जिंदा रही कैदी; अमेरिका में फेल हुई फांसी की कोशिश से मचा हड़कंप.

    दो बार दिया गया जानलेवा इंजेक्शन, फिर भी जिंदा रही कैदी; अमेरिका में फेल हुई फांसी की कोशिश से मचा हड़कंप.

    नई दिल्ली: अमेरिका के टेनेसी राज्य में मौत की सजा पाए एक कैदी की फांसी की कोशिश उस समय नाकाम हो गई, जब उसे जानलेवा दवा की दो डोज देने के बाद भी उसकी सांसें चलती रहीं। 50 वर्षीय क्रिस्टा पाइक को बाद में जेल से अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई गई है। उनके वकीलों के मुताबिक, वह अस्पताल में जीवन रक्षक चिकित्सा प्राप्त कर रही थीं।

    यह घटना 30 सितंबर 2026 को नैशविल स्थित रिवरबेंड मैक्सिमम सिक्योरिटी इंस्टीट्यूशन में हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पाइक को जानलेवा इंजेक्शन के लिए पेंटोबार्बिटल की दो डोज दी गईं, लेकिन इसके बावजूद उनकी मौत नहीं हुई।

    दो डोज के बाद भी चल रही थी सांस

    एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, फांसी की प्रक्रिया के दौरान पाइक के जीवित होने के संकेत काफी देर तक दिखाई देते रहे। उनके वकीलों ने अदालत में दाखिल दस्तावेजों में कहा कि इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी उनकी धड़कन चल रही थी और सांस लेने की आवाज सुनाई दे रही थी।

    कुछ समय बाद जेल अधिकारियों ने प्रक्रिया रोक दी और पाइक को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। उनके वकीलों ने अगले दिन बताया कि वह गंभीर हालत में थीं और उन्हें जीवन बचाने वाली चिकित्सा दी जा रही थी।

    टेनेसी के प्रोटोकॉल में दूसरी डोज का प्रावधान

    इस मामले का एक अहम पहलू टेनेसी की फांसी की प्रक्रिया से जुड़ा है। राज्य के प्रोटोकॉल में पहली डोज प्रभावी न होने की स्थिति में दूसरी डोज देने का प्रावधान है। पाइक को भी पहली डोज के बाद दूसरी डोज दी गई, लेकिन इसके बाद भी उनकी मौत नहीं हुई।

    रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा प्रोटोकॉल में दूसरी डोज के बाद भी व्यक्ति के जीवित रहने जैसी असाधारण स्थिति से निपटने के लिए आगे क्या किया जाना चाहिए, इसे लेकर सवाल उठे हैं।

    टेनेसी डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शन ने कहा है कि अधिकारियों ने राज्य के स्वीकृत और कानूनी प्रोटोकॉल के अनुसार प्रक्रिया पूरी की। वहीं घटना के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की स्वतंत्र समीक्षा कराने का आदेश दिया है।

    1995 में हुई थी 19 वर्षीय युवती की हत्या

    क्रिस्टा पाइक को 1995 में 19 वर्षीय कोलीन स्लेमर की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। अपराध के समय पाइक 18 वर्ष की थीं।

    अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, पाइक और उनके तत्कालीन बॉयफ्रेंड टेडरिल शिप पर स्लेमर की हत्या का आरोप लगा था। पाइक को बाद में इस मामले में मौत की सजा सुनाई गई, जबकि मामले में शामिल अन्य लोगों को अलग-अलग सजा मिली।

    पाइक की फांसी से पहले उनके वकीलों ने कानूनी चुनौतियां भी उठाई थीं। आखिरकार अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ने की अनुमति दी।

    घटना के बाद टेनेसी ने रोकी बाकी फांसी

    इस असफल फांसी की कोशिश के बाद टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने राज्य में इस साल होने वाली बाकी फांसियों को रोकने और घटना की स्वतंत्र जांच कराने का आदेश दिया।

    गवर्नर ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि आखिर प्रक्रिया में क्या हुआ और ऐसा क्यों हुआ।

    रिपोर्टों के मुताबिक, यह 2026 में टेनेसी में फांसी की दूसरी असफल कोशिश है। इससे पहले मई में टोनी कैरथर्स की फांसी उस समय रोकनी पड़ी थी, जब अधिकारियों को जानलेवा दवा देने के लिए आवश्यक IV लाइन स्थापित करने में कठिनाई हुई थी।

    अब आगे क्या होगा?

    पाइक को फिलहाल अस्पताल में चिकित्सा दी जा रही है और उनकी हालत को लेकर उनके वकीलों ने गंभीर चिंता जताई है। घटना की जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि दो डोज दिए जाने के बावजूद फांसी की प्रक्रिया क्यों सफल नहीं हुई।

    इस घटना ने अमेरिका में मौत की सजा की प्रक्रियाओं और जानलेवा इंजेक्शन के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर कानूनी और सार्वजनिक बहस को जन्म दिया है। हालांकि, पाइक के मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और उनके स्वास्थ्य की स्थिति जांच के साथ बदल सकती है।

  • पेट में मिले अधपचे खाने: से खुला हत्या का राज, मां की हत्या कर भाइयों को फंसाना चाहता था बेटा; 26 महीने बाद ऐसे पकड़ा गया.

    पेट में मिले अधपचे खाने: से खुला हत्या का राज, मां की हत्या कर भाइयों को फंसाना चाहता था बेटा; 26 महीने बाद ऐसे पकड़ा गया.

    पेट में मिले अधपचे खाने: से खुला हत्या का राज, मां की हत्या कर भाइयों को फंसाना चाहता था बेटा; 26 महीने बाद ऐसे पकड़ा गया.

    बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के भमोरा क्षेत्र के कुड्डा गांव में करीब 26 महीने पहले हुई एक महिला की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, 55 वर्षीय रामबेटी की हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उनके बेटे महेंद्र सिंह ने ही की थी। आरोप है कि उसने राशन की दुकान को लेकर चल रही पारिवारिक रंजिश के चलते अपनी मां की हत्या की और शक अपने तहेरे भाइयों पर डालने की कोशिश की।

    करीब दो साल से ज्यादा समय तक चली जांच के बाद पुलिस ने वैज्ञानिक, चिकित्सकीय और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर महेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। गुरुवार को उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

    पेड़ के नीचे तख्त पर सो रही थीं रामबेटी

    पुलिस के मुताबिक, घटना 6 अगस्त 2024 की है। कुड्डा गांव में 55 वर्षीय रामबेटी पत्नी अमर सिंह यादव अपने बेटे महेंद्र के घर के बाहर पेड़ के नीचे रखे तख्त पर सो रही थीं। इसी दौरान सिर पर किसी भारी वस्तु से वार कर उनकी हत्या कर दी गई।

    घटना के बाद रामबेटी के बेटे गजेंद्र ने अपने तहेरे भाइयों नाथू सिंह, सर्वेश, सुरेंद्र, वीरेंद्र और छोटेलाल के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच आगे बढ़ने पर वीरेश उर्फ बाबा का नाम भी मुकदमे में शामिल किया गया।

    पॉलीग्राफ टेस्ट के बाद आरोपितों को मिली थी राहत

    मामले की जांच के दौरान पुलिस ने नामजद आरोपितों का दिल्ली में पॉलीग्राफ परीक्षण कराया था। पुलिस को महेंद्र पर भी संदेह था और उसका पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की कोशिश की गई, लेकिन उसने परीक्षण कराने से इनकार कर दिया था।

    उपलब्ध साक्ष्यों और पॉलीग्राफ परीक्षण के आधार पर मामले में नामजद आरोपितों को अदालत से राहत मिल गई। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले की दोबारा जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। टीम ने पुराने साक्ष्यों के साथ-साथ नए वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य पहलुओं पर भी काम शुरू किया।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिला अहम सुराग

    जांच के दौरान पुलिस की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज एक महत्वपूर्ण तथ्य पर गई। रामबेटी के पेट में अधपचा भोजन पाया गया था।

    विवेचना में इस तथ्य को उस दिन के घटनाक्रम से जोड़कर देखा गया। जांच के मुताबिक, रामबेटी ने रात करीब 7:30 बजे भोजन किया था। आम तौर पर वह अपने दूसरे बेटे के घर खाना खाने के बाद वहीं सो जाती थीं। लेकिन घटना वाली रात महेंद्र उन्हें अपने साथ गांव के बाहर स्थित घर पर ले गया।

    पुलिस के अनुसार, महेंद्र ने अपनी मां को पेड़ के नीचे तख्त पर सुलाया। इसके बाद उसने अपने बच्चों को रात करीब 10:30 बजे गांव के अंदर वाले घर भेज दिया। करीब 11:30 बजे उसने अपनी पत्नी को भी वहां से भेज दिया।

    पुलिस का दावा है कि इसके बाद महेंद्र ने मौका देखकर अपनी मां की हत्या कर दी और फिर वापस घर लौट गया।

    रात में अलग-अलग नंबरों से दी पुलिस को सूचना

    मामले में पुलिस के लिए एक और महत्वपूर्ण सुराग आपातकालीन नंबर पर की गई कॉल बनी। पुलिस के मुताबिक, महेंद्र ने सुबह करीब 4 बजे यूपी 112 पर हत्या की सूचना दी थी।

    जांच के दौरान पुलिस ने उन नंबरों की पड़ताल की, जिनसे घटना की सूचना दी गई थी। पुलिस का दावा है कि अलग-अलग नंबरों से की गई सूचनाओं के पीछे महेंद्र का ही इस्तेमाल सामने आया।

    जांच में घटनाक्रम, भोजन के समय, परिवार के सदस्यों की मौजूदगी और फोन संबंधी जानकारी को जोड़कर पुलिस ने हत्या का अनुमानित समय रात करीब 12 बजे के आसपास माना।

    राशन की दुकान को लेकर चल रही थी रंजिश

    पुलिस जांच में परिवार के भीतर चल रहे विवाद का पहलू भी सामने आया। अधिकारियों के मुताबिक, महेंद्र की अपने तहेरे भाइयों के साथ राशन की दुकान को लेकर रंजिश थी।

    पुलिस ने यह भी बताया कि घटना से करीब दो दिन पहले महेंद्र का भतीजा आशीष एक विवाद के मामले में जेल गया था। वहीं हत्या के मामले में नामजद किए गए आरोपितों में शामिल वीरेंद्र के घटना के समय एक अन्य स्थान पर मौजूद होने की जानकारी भी जांच में सामने आई थी।

    इन सभी तथ्यों को दोबारा जांच में शामिल किया गया और पुलिस ने महेंद्र को मुख्य संदिग्ध मानते हुए उसके खिलाफ उपलब्ध वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को एकत्र किया।

    26 महीने बाद हुई गिरफ्तारी

    एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा के मुताबिक, विशेषज्ञों की राय के साथ चिकित्सकीय, मौखिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने महेंद्र सिंह को 30 सितंबर 2026 को उसके घर से गिरफ्तार किया।

    पुलिस टीम में इंस्पेक्टर संजय धीर, उपनिरीक्षक अनीज कुमार और मुख्य आरक्षी सुंदरपाल सिंह शामिल रहे।

    करीब 26 महीने तक अनसुलझे रहे इस मामले में पुलिस का दावा है कि पोस्टमार्टम में मिले अधपचे भोजन से जुड़े समय-क्रम, फोन कॉल और परिवार के सदस्यों की गतिविधियों समेत कई साक्ष्यों को जोड़ने के बाद जांच एक नए निष्कर्ष तक पहुंची। अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

  • सगी मां से दुष्कर्म के प्रयास: के बाद की थी जघन्य हत्या, बंडा कोर्ट ने ‘जघन्यतम अपराध’ मानकर बेटे को सुनाया मृत्युदंड.

    सगी मां से दुष्कर्म के प्रयास: के बाद की थी जघन्य हत्या, बंडा कोर्ट ने ‘जघन्यतम अपराध’ मानकर बेटे को सुनाया मृत्युदंड.

    सगी मां से दुष्कर्म के प्रयास: के बाद की थी जघन्य हत्या, बंडा कोर्ट ने ‘जघन्यतम अपराध’ मानकर बेटे को सुनाया मृत्युदंड.
    -प्रतीकात्मक चित्र।

    प्रदेश के सागर जिले के बंडा कस्बे में मां की हत्या के मामले में अदालत ने बेटे को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। विनायका थाना क्षेत्र के रोड़ा गांव में जुलाई 2025 में 50 वर्षीय महिला की हत्या हुई थी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएल शाक्य ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए आरोपित बेटे संतोष लोधी (26) को दोषी ठहराया और अपराध को जघन्यतम श्रेणी का मानते हुए फांसी की सजा सुनाई।

    आंगन में मिला था खून से लथपथ शव

    अभियोजन के अनुसार घटना 20 जुलाई 2025 की है। इससे एक दिन पहले 19 जुलाई को सीताराम लोधी अपनी बेटी को लेने छतरपुर गए थे। घर में उनकी पत्नी और बेटा संतोष मौजूद थे।

    20 जुलाई को सीताराम घर लौटे तो आंगन में पत्नी का लहूलुहान शव पड़ा मिला, जबकि संतोष घर से गायब था। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

    विरोध करने पर पत्थर से हमला करने का आरोप

    जांच के दौरान पुलिस के सामने आया कि संतोष ने घर में अकेली मां के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया था। विरोध करने पर उसने पत्थर से हमला कर उनकी हत्या कर दी। घटना के बाद वह मौके से फरार हो गया था।

    पुलिस ने 25 जुलाई को बांदरी-मालथौन रोड से संतोष को गिरफ्तार किया। मामले में पुलिस ने करीब 150 पन्नों का आरोपपत्र अदालत में पेश किया।

    फिंगरप्रिंट और डीएनए रिपोर्ट बनी अहम कड़ी

    अभियोजन ने अदालत में घटनास्थल से मिले अंगुलियों के निशान और मृतका के शरीर से मिले जैविक नमूनों को अहम साक्ष्य के रूप में पेश किया। जांच में जैविक नमूनों से मिले डीएनए का मिलान आरोपित संतोष से होने की बात सामने आई।

    साक्ष्यों और अभियोजन की दलीलों के आधार पर अदालत ने संतोष लोधी को दोषी माना और उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई।

  • शादी का वादा किया, कई बार ‘संबंध’ बनाए युवती प्रेग्नेंट हो गई तो मुकर गया आरोपी कौशांबी में FIR दर्ज.

    शादी का वादा किया, कई बार ‘संबंध’ बनाए युवती प्रेग्नेंट हो गई तो मुकर गया आरोपी कौशांबी में FIR दर्ज.

    शादी का वादा किया, कई बार ‘संबंध’ बनाए युवती प्रेग्नेंट हो गई तो मुकर गया आरोपी कौशांबी में FIR दर्ज.

    उत्तर प्रदेश के कौशांबी में एक युवती ने गांव के ही युवक पर शादी का वादा कर कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है. युवती के मुताबिक, वह 4 महीने की प्रेग्नेंट हुई तो युवक ने शादी से इनकार कर दिया. परिजनों की शिकायत पर कड़ा धाम कोतवाली पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है. पुलिस ने पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भेजा है.

    यूपी के कौशांबी जिले से सनसनीखेज कहानी सामने आई है. यहां एक युवती को एक युवक ने अपने प्रेमजाल में फंसाया. फिर शादी का झांसा दिया और कई बार रेप किया. जब युवती 4 महीने की प्रेग्नेंट हो गई तो युवक ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया. जब इसकी जानकारी परिजनों को हुई तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. परिजन तत्काल युवती को लेकर कड़ा धाम थाने पहुंचे, जहां पुलिस ने पीड़ित युवती की तहरीर पर आरोपी युवक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया लिया है.

    इस मामले को लेकर डीएसपी का कहना है कि युवती को मेडिकल के लिए भेज दिया गया है. अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है. यह पूरा मामला कड़ा धाम कोतवाली क्षेत्र का है. पुलिस का कहना है कि गांव के रहने वाले एक युवक से युवती का काफी दिनों से प्रेम प्रसंग चल रहा था.

    दोनों एक दूसरे से चोरी छिपे मिलते थे. जब बातचीत आगे बढ़ी तो युवक ने युवती को झांसा दिया कि वह शादी करेगा. इसी के साथ उसने कई बार संबंध बनाए. जब युवती चार माह की प्रेग्नेंट हो गई तो युवक शादी से मुकर गया. जब इसकी जानकारी युवती के परिजनों को हुई तो वे सन्न रह गए.

    इसके बाद पीड़ित युवती के परिजन तत्काल थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने इस शिकायत पर आरोपी के खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर लिया है. पुलिस ने पीड़ित युवती को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल भेजा. इसी के साथ इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. जब इस मामले में डीएसपी सिराथू सत्येंद्र तिवारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस प्रकरण में युवक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है. मेडिकल के लिए पीड़िता को भेजा गया है. आगे जो भी कार्रवाई है, वह की जा रही है.

  • ड्रम में शव, ऊपर ‘सीमेंट’ और घर के आंगन में कब्र. 4 साल बाद ऐसे खुला 3 हत्याओं का राज.

    ड्रम में शव, ऊपर ‘सीमेंट’ और घर के आंगन में कब्र. 4 साल बाद ऐसे खुला 3 हत्याओं का राज.

    ड्रम में शव, ऊपर ‘सीमेंट’ और घर के आंगन में कब्र. 4 साल बाद ऐसे खुला 3 हत्याओं का राज.

    गुजरात के कोसंबा में चार साल पुराने हत्याकांड की जांच के दौरान तीन हत्याओं का राज खुला. पुलिस के मुताबिक, माधवदास ने अपनी पत्नी को हत्या के मामले में फंसाने के लिए पुलिस को सूचना दी थी, लेकिन पूछताछ आगे बढ़ी तो उसकी ही भूमिका सामने आ गई. जांच में पता चला कि एक महिला के शव को ड्रम में रखकर सीमेंट से सील किया गया और बाद में घर के आंगन में दफना दिया गया.

    गुजरात के सूरत जिले के कोसंबा में करीब चार साल पुराने एक हत्याकांड का राज खुला तो पुलिस भी हैरान रह गई. एक शख्स अपनी पत्नी और उसके रिश्तेदार पर हत्या का आरोप लगाकर पुलिस के पास पहुंचा था, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो शक की सुई उसी पर घूम गई. पूछताछ में उसने पत्नी के साथ मिलकर तीन महिलाओं की हत्या करने की बात कबूल की.

    आरोपी की निशानदेही पर पुलिस कोसंबा के पुराने मकान तक पहुंची. जमीन की खुदाई कराई गई तो सीमेंट से भरा एक ड्रम बरामद हुआ. ड्रम को तोड़ने पर उसके भीतर मानव अवशेष, खोपड़ी, हड्डियां और बाल मिले. कपड़ों और कंगन के आधार पर परिजनों ने अवशेषों की पहचान शांताबेन के तौर पर की. इन अवशेषों को फॉरेंसिक जांच और DNA परीक्षण के लिए भेजा गया है.

    पुलिस के मुताबिक, माधवदास भक्तिराम साधु ने शुरुआत में दावा किया था कि उसकी दादी सास शांताबेन गंभीरभाई वसावा की हत्या उसकी पत्नी उर्मिलाबेन उर्फ जया और एक रिश्तेदार ने की थी. उसने यह भी बताया था कि शव घर के अंदर सीमेंट के नीचे दफन है. पुलिस ने बताए गए रिश्तेदार से पूछताछ की, लेकिन उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला. इसके बाद जांच का रुख सूचना देने वाले माधवदास की तरफ हो गया.

    पत्नी को फंसाने की चाल, पूछताछ में खुला ट्रिपल मर्डर

    पूछताछ में माधवदास के बयानों में विरोधाभास सामने आए. पुलिस के मुताबिक, इसके बाद उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने पत्नी उर्मिला के साथ मिलकर शांताबेन की हत्या की थी. 7 अक्टूबर 2022 की रात शांताबेन घर में सो रही थीं. आरोप है कि दंपति ने तकिए से उनका मुंह दबाकर हत्या कर दी और शव को एक ड्रम में रख दिया.

    इसके बाद ड्रम में सीमेंट और पानी डालकर उसे पूरी तरह बंद कर दिया गया. करीब साढ़े तीन महीने तक शव इसी तरह घर में रखा रहा. मौका मिलने पर दंपति ने ड्रम को खोलकर शव और सीमेंट के अवशेषों को घर के आंगन में खोदे गए गड्ढे में दफना दिया. पुलिस के मुताबिक, ऊपर से सीमेंट की मोटी परत भी बना दी गई, ताकि किसी को शक न हो.

    शांताबेन की मौत को छिपाने के लिए रिश्तेदारों को अलग-अलग कहानी बताई गई. पुलिस के अनुसार, किसी को उनकी मौत कोरोना से होने की बात बताई गई तो किसी को दूसरी जगह मौत की जानकारी दी गई. जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि शांताबेन की हत्या के पीछे संपत्ति और कीमती सामान हासिल करने का इरादा होने का आरोप है.

    एक हत्या से खुला दूसरा और तीसरा राज

    पूछताछ आगे बढ़ी तो कहानी सिर्फ शांताबेन की हत्या तक सीमित नहीं रही. पुलिस के मुताबिक, माधवदास और उर्मिला ने वर्ष 2022 में दो और महिलाओं की जान ली थी. इनमें माधवदास की मां मंजुलाबेन भक्तिराम साधु और उर्मिला की बहन भारतीबेन उर्फ भगवती कमलेशभाई वसावा शामिल थीं. तीनों मृतक महिलाएं आरोपी दंपति के परिवार से जुड़ी थीं.

    पुलिस के अनुसार, मंजुलाबेन करीब 65 वर्ष की थीं और लंबे समय से लकवे की बीमारी से पीड़ित थीं. उनकी देखभाल और इलाज का खर्च उठाना आरोपी दंपति के लिए मुश्किल बताया गया. आरोप है कि 19 जुलाई 2022 की रात दोनों ने तकिए से उनका मुंह दबाकर हत्या कर दी. इसके बाद परिवार और गांव के लोगों को बीमारी से स्वाभाविक मौत की बात बताई गई और उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया.

    तीसरी मृतक भारतीबेन उर्फ भगवती थीं, जो उर्मिला की बहन थीं और टीबी से पीड़ित थीं. पुलिस के मुताबिक, उनके इलाज और देखभाल से बचने के लिए 25 फरवरी 2022 की रात उनकी भी कथित तौर पर तकिए से मुंह दबाकर हत्या की गई. बाद में उनकी मौत को बीमारी से जोड़ते हुए अंतिम संस्कार कर दिया गया.

    चार साल बाद जमीन के नीचे से निकला राज

    शांताबेन के शव की तलाश में पुलिस ने सरकारी पंचों, FSL अधिकारियों, मेडिकल टीम और स्थानीय प्रशासन की मौजूदगी में खुदाई कराई. करीब चार से पांच फीट तक जमीन खोदने के बाद सीमेंट से दबा अवशेष बरामद हुआ. कपड़े और कंगन मिलने के बाद रिश्तेदारों ने इसे शांताबेन के रूप में पहचाना, हालांकि पुलिस ने वैज्ञानिक पुष्टि के लिए अवशेष FSL और DNA जांच के लिए भेजे हैं.

    पुलिस के मुताबिक, माधवदास और उर्मिला पिछले कुछ समय से अलग रह रहे थे. इसी दौरान माधवदास ने पत्नी और उसके रिश्तेदार को हत्या में फंसाने के लिए कथित तौर पर पुलिस को सूचना दी थी. लेकिन जिस व्यक्ति का नाम उसने लिया, उसकी भूमिका नहीं मिली. यही जांच का वह मोड़ था, जिसने करीब चार साल पुराने तीन हत्याकांड की परतें खोल दीं.

    पुलिस ने माधवदास भक्तिराम साधु और उर्मिलाबेन उर्फ जया को गिरफ्तार किया है. दोनों से पूछताछ के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है. पुलिस तीनों मौतों से जुड़े बयानों, बरामद अवशेषों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और दूसरे साक्ष्यों को जोड़ रही है. जांच मांगरोल के डिप्टी एसपी बी.के. वनार के मार्गदर्शन में चल रही है.

    पुलिस के अनुसार, माधवदास मूल रूप से अहमदाबाद ग्रामीण के धोलका क्षेत्र के वालथेरा गांव का रहने वाला है और उसका कोई स्थायी व्यवसाय नहीं था. वह मजदूरी के लिए कभी कोसंबा तो कभी कलोल-छत्राल के औद्योगिक इलाके में रहता था. उर्मिला और माधवदास की शादी करीब 17 साल पहले हुई थी और उनके एक बेटा तथा एक बेटी हैं. पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है.

    फॉरेंसिक रिपोर्ट बताएगी अवशेषों का सच

    अब पुलिस की जांच का अहम हिस्सा बरामद मानव अवशेषों की वैज्ञानिक पहचान है. FSL जांच और DNA परीक्षण से यह स्पष्ट किया जाएगा कि सीमेंट से भरे ड्रम से मिले अवशेष शांताबेन के ही हैं या नहीं. इसके साथ ही पुलिस तीनों हत्याओं में आरोपियों की भूमिका और घटनाओं से जुड़े अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही है.

    इस केस में सबसे बड़ा मोड़ वही सूचना बनी, जिसके जरिए माधवदास ने कथित तौर पर अपनी पत्नी और उसके रिश्तेदार को फंसाने की कोशिश की. जिस हत्या का आरोप लेकर वह पुलिस के पास पहुंचा था, उसी की जांच ने उसके खिलाफ तीन हत्याओं की कहानी खोल दी. अब फॉरेंसिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अदालत में मामले की चार्जशीट मजबूत करने की तैयारी में है.