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  • गुमशुदा पत्नी को सामने ‘देख’ फूट-फूटकर रोया पति, तीन महीने बाद हुआ भावुक मिलन.

    गुमशुदा पत्नी को सामने ‘देख’ फूट-फूटकर रोया पति, तीन महीने बाद हुआ भावुक मिलन.

    गुमशुदा पत्नी को सामने ‘देख’ फूट-फूटकर रोया पति, तीन महीने बाद हुआ भावुक मिलन.

    किसी अपने के अचानक लापता हो जाने के बाद परिवार किस तरह के इंतजार और चिंता से गुजरता है, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं है। ऐसे में वही व्यक्ति लंबे समय बाद अचानक सामने आ जाए तो उस पल की भावनाएं संभालना भी मुश्किल हो सकता है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में ऐसा ही भावुक पल दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि एक महिला करीब तीन महीने से लापता थी। जब वह लंबे समय बाद अपने पति के सामने पहुंची तो पति खुद को संभाल नहीं पाया और उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े।

    पत्नी को देखते ही भावुक हुआ पति

    वायरल वीडियो में आसपास कई लोग नजर आ रहे हैं। इसी दौरान महिला को देखकर उसका पति उसकी तरफ बढ़ता है। लंबे समय से इंतजार कर रहे शख्स की भावनाएं पत्नी को सामने देखते ही छलक पड़ती हैं।

    वह रोते हुए पत्नी के पास बैठ जाता है। आसपास मौजूद लोग भी इस पूरे पल के दौरान भावुक नजर आते हैं। पति के चेहरे पर राहत और खुशी साफ दिखाई देती है।

    यह मुलाकात उस परिवार के लिए कितनी अहम रही होगी, इसका अंदाजा पति की प्रतिक्रिया से लगाया जा सकता है।

    तीन महीने से लापता थी महिला

    सोशल मीडिया पर वीडियो के साथ साझा की गई जानकारी के मुताबिक, महिला लगभग तीन महीने से लापता थी। पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि महिला मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों से गुजर रही थी।

    हालांकि, वायरल वीडियो में महिला के लापता होने की पूरी वजह या इन तीन महीनों के दौरान वह कहां थी, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आती है। इसलिए सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावों को पूरी तरह सत्यापित जानकारी के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

    किसी परिवार के सदस्य के लंबे समय तक लापता रहने की स्थिति परिवार के लिए बेहद तनावपूर्ण हो सकती है। ऐसे में महीनों बाद सुरक्षित मिलना परिवार के लिए बड़ी राहत का पल हो सकता है।

    पति की आंखों से छलक पड़े आंसू

    वीडियो का सबसे भावुक हिस्सा उस समय दिखाई देता है जब पति अपनी पत्नी को सामने देखकर रोने लगता है। वह उसके पास बैठ जाता है और कुछ देर तक खुद को संभाल नहीं पाता।

    आसपास खड़े लोग भी इस भावुक मुलाकात को देखते हुए नजर आते हैं। वीडियो में किसी फिल्मी दृश्य की तरह कोई खास संवाद नहीं है, लेकिन पति की प्रतिक्रिया ही पूरे पल को भावुक बना देती है।

    सोशल मीडिया यूजर्स भी हुए भावुक

    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने कहा कि पति की खुशी और राहत देखकर उनकी आंखें भी नम हो गईं।

    कुछ यूजर्स ने पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर भावुक टिप्पणियां कीं, जबकि कई लोगों ने कमेंट सेक्शन में सिर्फ इमोशनल इमोजी के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी।

    एक यूजर ने लिखा कि वीडियो देखने के बाद वह बेहद भावुक हो गईं। वहीं कुछ लोगों ने इस मिलन को पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार और लगाव का भावुक पल बताया।

    वायरल वीडियो ने छू लिया लोगों का दिल

    सोशल मीडिया पर रोजाना हजारों वीडियो वायरल होते हैं, लेकिन रिश्तों से जुड़े भावुक पल अक्सर लोगों का ध्यान खींच लेते हैं। इस वीडियो में भी लंबे इंतजार के बाद पति और पत्नी की मुलाकात ने लोगों को भावुक कर दिया है।

    फिलहाल वायरल पोस्ट में महिला के लापता होने और वापस मिलने से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वीडियो को लेकर सामने आ रहे अतिरिक्त दावों की पुष्टि किए बिना उन पर भरोसा करना उचित नहीं होगा। लेकिन पति की भावुक प्रतिक्रिया ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय जरूर बना दिया है।

  • फरीदाबाद में जर्जर इमारत में 13 साल की लड़की से गैंगरेप, डरी-सहमी पीड़िता ने मां को बताई आपबीती; 3 लोग गिरफ्तार’

    फरीदाबाद में जर्जर इमारत में 13 साल की लड़की से गैंगरेप, डरी-सहमी पीड़िता ने मां को बताई आपबीती; 3 लोग गिरफ्तार’

    फरीदाबाद में जर्जर इमारत में 13 साल की लड़की से गैंगरेप, डरी-सहमी पीड़िता ने मां को बताई आपबीती; 3 लोग गिरफ्तार’

    हरियाणा के फरीदाबाद में एक जर्जर इमारत में 13-वर्षीय एक लड़की के साथ उसके दोस्त के सामने कुछ युवकों द्वारा कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किए जाने के मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। 

    ट्यूशन के बाद अपने दोस्त से मिलने गई थी पीड़िता

    पुलिस के अनुसार, लड़की और उसका 16-वर्षीय मित्र ग्रेटर फरीदाबाद क्षेत्र स्थित उक्त इमारत में गए थे, तभी आरोपियों ने उन्हें धमकाया और लड़की के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया। इस संबंध में 29 सितंबर को थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने बताया कि लड़की के माता-पिता की शिकायत के अनुसार, घटना 24 अगस्त की है, जब 13-वर्षीय लड़की ट्यूशन के बाद अपने 16-वर्षीय दोस्त से मिलने गई थी। इसी दौरान छह युवक कथित तौर पर दोनों का पीछा करते हुए जर्जर इमारत में पहुंचे और दोनों नाबालिगों को धमकाने के बाद लड़की का यौन उत्पीड़न किया। 

    पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों बच्चों ने करीब एक महीने तक घटना की जानकारी अपने माता-पिता से छिपाए रखी। बाद में लड़की में गंभीर मानसिक परेशानी के लक्षण दिखने पर उसकी मां ने उससे बात की, तब उसने घटना के बारे में बताया और परिवार ने पुलिस से संपर्क किया। आरोप है कि बदमाशों ने पीड़िता के पुरुष मित्र के साथ भी कुकर्म किया, लेकिन पुलिस ने इससे इनकार किया है। फरीदाबाद पुलिस के प्रवक्ता ने कहा कि शिकायत के आधार पर 29 सितंबर को दुष्कर्म संबंधी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है, लेकिन सामूहिक दुष्कर्म के आरोप की अभी पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि मामले में तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।

  • माता-पिता भगवान नहीं हैं, CEO की वायरल पोस्ट पर क्यों मचा हंगामा?

    माता-पिता भगवान नहीं हैं, CEO की वायरल पोस्ट पर क्यों मचा हंगामा?

    माता-पिता भगवान नहीं हैं, CEO की वायरल पोस्ट पर क्यों मचा हंगामा?

    भारत में माता-पिता को बेहद सम्मान देने की परंपरा रही है। बचपन से ही बच्चों को सिखाया जाता है कि मां-बाप का सम्मान करना चाहिए और उनके योगदान को कभी नहीं भूलना चाहिए। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पोस्ट ने इसी सोच के एक हिस्से को अलग नजरिए से देखने की कोशिश की है।

    पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि माता-पिता का सम्मान करना और उनकी हर बात को बिना सवाल किए सही मान लेना क्या एक ही बात है? इस विचार ने सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस छेड़ दी है।

    वायरल पोस्ट में तर्क दिया गया है कि माता-पिता भी इंसान होते हैं और उनसे भी गलतियां हो सकती हैं। इसलिए केवल माता-पिता होने के आधार पर उनकी हर राय या हर फैसला सही मानना जरूरी नहीं होना चाहिए।

    ‘माता-पिता भगवान के समान हैं’ वाली सोच पर सवाल

    वायरल पोस्ट का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा यही है। इसमें कहा गया है कि माता-पिता को सम्मान देना जरूरी हो सकता है, लेकिन उन्हें भगवान का दर्जा देना अलग बात है।

    पोस्ट के मुताबिक, माता-पिता अपने बच्चों के लिए बहुत कुछ करते हैं, उनका पालन-पोषण करते हैं और उन्हें जीवन में आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं। लेकिन इसके बावजूद वे भी इंसान हैं और उनसे गलत निर्णय या गलतियां हो सकती हैं।

    यही वजह है कि पोस्ट में सम्मान और अंधी आज्ञाकारिता के बीच अंतर करने की बात कही गई है।

    क्या माता-पिता बनने से हर फैसला सही हो जाता है?

    पोस्ट में एक उदाहरण के जरिए सवाल किया गया है कि किसी व्यक्ति के माता-पिता बन जाने से क्या उसकी पुरानी कमियां या गलतियां अपने आप खत्म हो जाती हैं?

    इस विचार के मुताबिक, पिता या मां बनना निश्चित रूप से एक बड़ी जिम्मेदारी है, लेकिन केवल यह भूमिका किसी व्यक्ति को हर परिस्थिति में सही साबित नहीं करती।

    वायरल पोस्ट इसी सवाल के जरिए लोगों को सोचने के लिए कहती है कि बच्चों को अपने माता-पिता का सम्मान करते हुए भी अपनी जिंदगी और भविष्य से जुड़े फैसलों पर सवाल पूछने या अपनी राय रखने का अधिकार होना चाहिए।

    ‘तुम्हारे लिए इतना किया’ वाली बात पर भी बहस

    पोस्ट में उस तर्क पर भी सवाल उठाया गया है, जो कई परिवारों में बच्चों से बातचीत के दौरान सुनने को मिलता है कि ‘हमने तुम्हारे लिए इतना कुछ किया है।’

    वायरल विचार में कहा गया है कि बच्चे ने खुद दुनिया में आने का फैसला नहीं किया था। उसे जन्म देने का निर्णय माता-पिता का था। इसलिए केवल जन्म देने के आधार पर बच्चे से जीवनभर बिना सवाल किए हर बात मानने की अपेक्षा करना उचित है या नहीं, इस पर विचार किया जाना चाहिए।

    हालांकि, इस तर्क का मतलब माता-पिता के त्याग, मेहनत और प्यार को नकारना नहीं है। बहस का मूल मुद्दा यह है कि पारिवारिक रिश्तों में सम्मान और प्यार के साथ-साथ बच्चों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राय की भी जगह होनी चाहिए।

    सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय

    पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग नजर आईं।

    कुछ यूजर्स ने कहा कि माता-पिता का सम्मान करना और अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेने की आजादी, दोनों बातें एक साथ संभव हैं। उनके मुताबिक, किसी रिश्ते में सम्मान का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि व्यक्ति अपनी सोच पूरी तरह छोड़ दे।

    वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने इस विचार से असहमति जताई। उनका कहना है कि भारतीय परिवारों में माता-पिता बच्चों के लिए वर्षों तक मेहनत और त्याग करते हैं, इसलिए उनके योगदान को केवल इस आधार पर कम करके नहीं देखा जा सकता कि वे भी इंसान हैं।

    सम्मान और सहमति में क्या अंतर है?

    इस वायरल पोस्ट ने असल में एक व्यापक सामाजिक सवाल को चर्चा में ला दिया है। क्या किसी का सम्मान करने का मतलब उसकी हर बात से सहमत होना भी है?

    एक नजरिए से सम्मान का अर्थ किसी व्यक्ति की भूमिका, उम्र और योगदान को महत्व देना हो सकता है। दूसरी ओर, व्यक्तिगत निर्णयों में अपनी राय रखना और असहमति व्यक्त करना भी रिश्तों का हिस्सा हो सकता है।

    हर परिवार की परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए माता-पिता और बच्चों के रिश्ते को केवल ‘आज्ञा मानने’ या ‘आज्ञा न मानने’ के नजरिए से देखना भी अधूरा हो सकता है।

    फिलहाल CEO की बताई जा रही यह सोशल मीडिया पोस्ट इसी सवाल को लेकर चर्चा में है कि माता-पिता का सम्मान जरूरी है, लेकिन क्या सम्मान का मतलब हर बात को बिना सवाल किए स्वीकार करना भी होना चाहिए? इस सवाल पर सोशल मीडिया यूजर्स अपनी-अपनी सोच के मुताबिक राय दे रहे हैं।

  • संदिग्ध परिस्थितियों में विवाहिता का शव फंदे से लटकता मिला, ससुरालियों पर मुकदमा दर्ज:

    संदिग्ध परिस्थितियों में विवाहिता का शव फंदे से लटकता मिला, ससुरालियों पर मुकदमा दर्ज:

    संदिग्ध परिस्थितियों में विवाहिता का शव फंदे से लटकता मिला, ससुरालियों पर मुकदमा दर्ज:

    स्थानीय थाना क्षेत्र के ग्राम चैनपुर टोला भुड़कुड़वा में संदिग्ध परिस्थितियों में नव विवाहिता की शव उसके कमरे में फंदे से लटकती हुई मिली।जिसे कोल्हुई पुलिस अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दी।इस मामले में कोल्हुई पुलिस ने नव विवाहिता की माँ के तहरीर पर पति समेत सास ससुर व देवर के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई में लग गई है।

    मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्र के ग्राम चैनपुर टोला भुड़कुड़वा में नव विवाहिता लक्ष्मी का शव उस के कमरे में लटकता हुआ मिला।सूचना पाकर कोल्हुई पुलिस और सीओ फरेंदा मौके पर पहुँच कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।सी ओ फरेंदा ने मामले की छानबीन शुरू कर दी। इस सम्बन्ध में कोल्हुई पुलिस ने मृतका लक्ष्मी की माता शीला पत्नी राम प्रसाद निवासिनी हरदी डाली थाना कोतवाली सोनौली की तहरीर पर ससुर चंद्र शेखर,पति विजय,सास सायना,देवर के विरुद्ध धारा 80(2),85,115(2),352,351(3) बी एन एस व दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज कर जाँच पड़ताल शुरू कर दी है।मामले की विवेचना सी ओ फरेंदा दीप शिखा वर्मा कर रही हैं।

    इस सम्बन्ध में थानाध्यक्ष आलोक कुमार सिंह ने बताया मृतका की माँ के तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।

  • मुंबई मेट्रो में ‘पीकदान’ देखकर चौंके लोग, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    मुंबई मेट्रो में ‘पीकदान’ देखकर चौंके लोग, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    मुंबई मेट्रो में ‘पीकदान’ देखकर चौंके लोग, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    मुंबई मेट्रो की एक तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। आमतौर पर मेट्रो स्टेशनों पर साफ-सफाई और यात्रियों की सुविधा से जुड़ी चीजें दिखाई देती हैं, लेकिन वायरल तस्वीर में एक ऐसी व्यवस्था नजर आई, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया।

    तस्वीर में थूकने के लिए एक खास ‘स्पिट बिन’ यानी थूकदान लगा दिखाई दे रहा है। इसे देखकर सोशल मीडिया यूजर्स के बीच बहस शुरू हो गई कि आखिर मेट्रो स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगह पर इस तरह की सुविधा की जरूरत क्यों पड़ी।

    तस्वीर में क्या नजर आ रहा है?

    सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही तस्वीर मुंबई मेट्रो के एक स्टेशन की बताई जा रही है। इसमें एक टचलेस स्पिट बिन दिखाई देता है। यानी इसे इस्तेमाल करने के लिए हाथ से किसी हिस्से को छूने की जरूरत नहीं पड़ती।

    इसके साथ लगे बोर्ड पर मुंबई मेट्रो से संबंधित लोगो और ‘Be Responsible’ संदेश दिखाई देता है। तस्वीर में इस व्यवस्था को ‘World’s First Defined Place to Spit’ के तौर पर भी पेश किया गया है।

    रिपोर्टों में इस तस्वीर को गुंडावली मेट्रो स्टेशन से जोड़कर बताया गया है। हालांकि, वायरल पोस्ट के आधार पर तस्वीर की पूरी परिस्थितियों और मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि अलग से नहीं की गई है।

    किस कंपनी ने बनाया है यह स्पिट बिन?

    वायरल खबरों के मुताबिक, इस तरह के स्पिट बिन को EzySpit नाम की कंपनी ने तैयार किया है। कंपनी के अनुसार, इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर खुले में थूकने से होने वाली गंदगी को कम करना और थूक के सीधे संपर्क में आने की संभावना घटाना है।

    इस व्यवस्था में थूक को एक निर्धारित और बंद सिस्टम में रखने का विचार है, ताकि लोग सार्वजनिक स्थान के फर्श, दीवार या दूसरी जगहों पर न थूकें।

    जब थूकना मना है तो फिर ऐसी सुविधा क्यों?

    यही सवाल इस तस्वीर के वायरल होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में है।

    लोगों का एक वर्ग सवाल उठा रहा है कि अगर मेट्रो परिसर में थूकना नियमों के खिलाफ है, तो फिर थूकने के लिए अलग डिब्बा लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?

    वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का तर्क है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी आदत के कारण थूकता ही है, तो कम से कम उसे एक निर्धारित स्थान उपलब्ध कराने से स्टेशन के दूसरे हिस्सों में गंदगी फैलने से रोका जा सकता है।

    यानी इस व्यवस्था को लेकर बहस केवल ‘पीकदान’ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठ रहा है कि सार्वजनिक स्वच्छता के लिए व्यवहार बदलना ज्यादा जरूरी है या व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराना।

    सोशल मीडिया पर दो तरह की राय

    तस्वीर वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई नजर आईं।

    कुछ यूजर्स ने इसे व्यावहारिक कदम बताया। उनका कहना है कि अगर किसी सार्वजनिक स्थान

  • उमेश पाल हत्याकांड में वांछित अभियुक्त खालिद जफर के कार्यालय पर गरजा बुलडोजर, PDA ने ध्वस्त कराया:

    उमेश पाल हत्याकांड में वांछित अभियुक्त खालिद जफर के कार्यालय पर गरजा बुलडोजर, PDA ने ध्वस्त कराया:

    उमेश पाल हत्याकांड में वांछित अभियुक्त खालिद जफर के कार्यालय पर गरजा बुलडोजर, PDA ने ध्वस्त कराया:

    चर्चित उमेश पाल हत्याकांड में वांछित अभियुक्त खालिद जफर की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने शुक्रवार को अवैध कब्जे में बने इसके कालिंदीपुरम स्थित कार्यालय को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया।

    पीडीए ने ध्वस्तीकरण कार्रवाई की

    पीडीए की करीब 200 वर्ग मीटर जमीन पर पिछले 10 वर्षों से कब्जा कर रियल एस्टेट से संबंधित कार्यालय संचालित किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान पीडीए की टीम ने तीन बुलडोजर लगाए। जोनल अधिकारी सूरज पटेल की अगुवाई में पीडीए का प्रवर्तन दल मौके पर पहुंचा और अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की।

    पीडीए की जमीन पर अवैध निर्माण था

    अधिकारियों के अनुसार, प्राधिकरण की जमीन पर बिना अनुमति कब्जा कर कार्यालय का निर्माण कराया गया था। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी मौजूद रहा। खालिद जफर को माफिया अतीक अहमद के करीबियों में बताया जाता रहा है।

    कसारी-मसारी में भी अवैध प्लाटिंग तोड़ा गया

    उमेश पाल हत्याकांड में उसका नाम वांछित अभियुक्त के रूप में सामने आया है। इसके अलावा पीडीए की ओर से कालिंदीपुरम और कसारी-मसारी इलाके में 30 बीघा से अधिक दायरे में भी अवैध प्लाटिंग को तोड़ा गया।

  • Reel बनाने का ऐसा क्रेज! ट्रेन के आगे पल्लू बांधकर महिला ने किया डांस, वीडियो वायरल.

    Reel बनाने का ऐसा क्रेज! ट्रेन के आगे पल्लू बांधकर महिला ने किया डांस, वीडियो वायरल.

    Reel बनाने का ऐसा क्रेज! ट्रेन के आगे पल्लू बांधकर महिला ने किया डांस, वीडियो वायरल.

    सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए लोग कई बार ऐसे वीडियो बना लेते हैं, जिन्हें देखकर यूजर्स हैरान रह जाते हैं। ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसमें साड़ी पहने एक महिला रेलवे ट्रैक पर खड़ी ट्रेन के सामने डांस करती दिखाई दे रही है। खास बात यह है कि महिला ने अपनी साड़ी का पल्लू ट्रेन के इंजन से बांधा हुआ नजर आ रहा है।

    वीडियो सामने आने के बाद लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ यूजर्स ने इसे रील बनाने की दीवानगी बताया, तो कुछ लोगों ने रेलवे ट्रैक जैसी जगह पर इस तरह का वीडियो शूट करने को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल उठाए हैं।

    ट्रेन के सामने खड़े होकर डांस करती दिखी महिला

    वायरल वीडियो में महिला साड़ी और सनग्लासेस पहने रेलवे ट्रैक पर दिखाई देती है। उसके पीछे एक ट्रेन खड़ी नजर आती है। वीडियो में महिला अपनी साड़ी के पल्लू का एक सिरा ट्रेन के इंजन की तरफ बांधती है और इसके बाद कैमरे के सामने डांस करने लगती है।

    डांस के दौरान महिला ट्रेन की ओर इशारे करती हुई और अलग-अलग एक्सप्रेशन देती नजर आती है। पूरा वीडियो किसी फिल्मी गाने के सीन जैसा दिखाई देता है, जिसे सोशल मीडिया Reel के लिए दोहराने की कोशिश की गई हो।

    हालांकि, वायरल वीडियो को देखकर यह स्पष्ट नहीं है कि इसे किस रेलवे स्टेशन या स्थान पर रिकॉर्ड किया गया था। वीडियो के साथ किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी सामने नहीं आई है।

    सोशल मीडिया पर छिड़ी चर्चा

    यह वीडियो X पर ‘The Nalanda Index’ नाम के अकाउंट से शेयर किए जाने के बाद चर्चा में आया। पोस्ट में रील के लिए Views और Likes हासिल करने की कोशिश को लेकर सवाल उठाया गया।

    इसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी वीडियो पर अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने इसे मजाकिया अंदाज में लिया और महिला के डांस पर टिप्पणी की, जबकि कुछ यूजर्स ने रेलवे ट्रैक पर इस तरह की शूटिंग को लेकर चिंता जताई।

    एक यूजर ने मजाक करते हुए लिखा कि क्या यहां Bollywood की शूटिंग चल रही है। वहीं कुछ लोगों ने पल्लू को ट्रेन से बांधने वाले सीन को लेकर भी अलग-अलग टिप्पणियां कीं।

    सुरक्षा को लेकर उठे सवाल

    वीडियो वायरल होने के बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने रेलवे से जुड़े आधिकारिक अकाउंट्स को टैग करते हुए मामले की जांच की मांग की। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर वीडियो कहां रिकॉर्ड किया गया और क्या शूटिंग के दौरान रेलवे की अनुमति ली गई थी।

    रेलवे ट्रैक और चलती या संचालन में रहने वाली ट्रेन के आसपास किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। ऐसे में सिर्फ सोशल मीडिया पर Views या Likes हासिल करने के लिए रेलवे परिसर में इस तरह की गतिविधियां करना सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय बन सकता है।

    फिलहाल वायरल वीडियो में दिखाई दे रही महिला की पहचान, वीडियो की सटीक लोकेशन और इसे रिकॉर्ड किए जाने की परिस्थितियों को लेकर पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए वीडियो से जुड़े दावों को पुष्टि किए गए तथ्य के बजाय वायरल सोशल मीडिया कंटेंट के तौर पर देखना उचित है।

  • हत्या या आत्महत्या? 12 साल के बच्चे का बाथरूम की चौखट से लटका मिला शव, जांच में जुटी ग्रेटर नोएडा पुलिस

    हत्या या आत्महत्या? 12 साल के बच्चे का बाथरूम की चौखट से लटका मिला शव, जांच में जुटी ग्रेटर नोएडा पुलिस

    हत्या या आत्महत्या? 12 साल के बच्चे का बाथरूम की चौखट से लटका मिला शव, जांच में जुटी ग्रेटर नोएडा पुलिस

    ग्रेटर नोएडा में ईकोटेक-3 कोतवाली क्षेत्र के हबीबपुर गांव में किराये के मकान में रहने वाले 12 वर्षीय किशोर का शव घर के बाथरूम की चौखट से नग्नावस्था में लटका मिला।

    किशोर के शरीर पर चोट के निशान मिलने से स्वजन ने हत्या की आशंका जताई है, जबकि पुलिस प्रथमदृष्टया इसे आत्महत्या बता रही है।

    जानकारी के मुताबिक, मूल रूप से ग्राम चूड़ा सकतपुर जिला पीलीभीत निवासी पातीराम परिवार के साथ हबीबपुर गांव में किराये के मकान में रहते हैं व कामगार हैं।

    शरीर पर चोट के निशान

    बुधवार दोपहर उनके बेटे आयुष (12) का शव बाथरूम की चौखट से लटका मिला। तब उसके शरीर पर कपड़े नहीं थे। पिता पातीराम का आरोप है कि बेटे के शरीर पर चोट के निशान थे, जिससे लग रहा है कि किसी ने उसकी हत्या कर शव को लटका दिया।

    पुलिस मौके पर पहुंची व घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरवाया। पुलिस ने पैनेल को द्वारा शव का पोस्टमार्टम कराया।

    मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका

    प्रभारी निरीक्षक मुनेंद्र सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। डाक्टरों ने विसरा सुरक्षित रख लिया है, जिसे जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी। पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है। फिलहाल स्वजन की तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।

  • कौन से मुस्लिम अपने नाम के साथ लिखते हैं ‘मुल्ला’, क्या होता है इसका मतलब?

    कौन से मुस्लिम अपने नाम के साथ लिखते हैं ‘मुल्ला’, क्या होता है इसका मतलब?

    कौन से मुस्लिम अपने नाम के साथ लिखते हैं ‘मुल्ला’, क्या होता है इसका मतलब?

    ‘मुल्ला’ शब्द इन दिनों एक बार फिर चर्चा में है। किसी व्यक्ति के नाम के साथ ‘मुल्ला’ लिखा देखकर अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर इस शब्द का मतलब क्या है और मुस्लिम समाज में इसे कौन लोग अपने नाम के साथ इस्तेमाल करते हैं।

    दरअसल, ‘मुल्ला’ शब्द का इस्तेमाल अलग-अलग समय और क्षेत्रों में अलग अर्थों और संदर्भों में हुआ है। कई जगह यह धार्मिक ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए सम्मानसूचक संबोधन रहा है, जबकि कुछ परिवारों में यह लंबे समय से उपनाम या पारिवारिक नाम के रूप में भी इस्तेमाल होता है।

    ‘मुल्ला’ शब्द का क्या अर्थ है?

    ‘मुल्ला’ शब्द का संबंध इस्लामी धार्मिक और विद्वत परंपरा से माना जाता है। दक्षिण एशिया, ईरान और मध्य एशिया समेत कई क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल ऐसे व्यक्ति के लिए किया जाता रहा है, जिसे धार्मिक शिक्षा या इस्लामी कानून का ज्ञान हो।

    हालांकि, इसकी व्युत्पत्ति को लेकर अलग-अलग भाषाई व्याख्याएं मिलती हैं। इसे सीधे तौर पर केवल ‘मौला’ शब्द से निकला हुआ बताना पूरी तरह निश्चित नहीं माना जाता। ऐतिहासिक रूप से ‘मुल्ला’ शब्द फारसी और अन्य भाषाई परंपराओं के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित हुआ।

    समय और स्थान के अनुसार इसका अर्थ भी बदलता रहा है। कहीं यह धार्मिक शिक्षक के लिए सम्मानसूचक शब्द रहा, तो कहीं इसका इस्तेमाल इस्लामी विद्वान या धार्मिक पद से जुड़े व्यक्ति के लिए किया गया।

    पहले किन लोगों के लिए इस्तेमाल होता था ‘मुल्ला’?

    ऐतिहासिक रूप से ‘मुल्ला’ शब्द का इस्तेमाल ऐसे लोगों के लिए किया जाता रहा है जिन्हें कुरान, हदीस, इस्लामी कानून और धार्मिक शिक्षा का ज्ञान होता था।

    कई मुस्लिम समाजों में धार्मिक शिक्षक, मदरसे के विद्वान या स्थानीय स्तर पर धार्मिक मार्गदर्शन देने वाले व्यक्ति को सम्मान के तौर पर ‘मुल्ला’ कहा जाता था।

    हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ‘मुल्ला’ कोई ऐसा एक समान आधिकारिक पद नहीं है, जिसकी योग्यता या नियुक्ति की पूरी दुनिया में एक जैसी व्यवस्था हो। अलग-अलग देशों और समुदायों में इस शब्द का इस्तेमाल अलग तरीके से हुआ है।

    धार्मिक संबोधन से सरनेम तक कैसे पहुंचा?

    समय के साथ कई ऐसे शब्द, जो कभी पेशे या सामाजिक भूमिका को बताते थे, बाद में परिवारों की पहचान का हिस्सा बन गए। ‘मुल्ला’ के साथ भी कुछ क्षेत्रों में ऐसा हुआ।

    जिन परिवारों के पूर्वज धार्मिक शिक्षा या धार्मिक सेवाओं से जुड़े रहे होंगे, उनमें यह शब्द पीढ़ियों के साथ पारिवारिक नाम के तौर पर इस्तेमाल होने लगा। इसके बाद जरूरी नहीं रहा कि उस परिवार का हर व्यक्ति धार्मिक विद्वान ही हो।

    आज किसी व्यक्ति के नाम में ‘मुल्ला’ लिखा होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह व्यक्ति मौलवी, इमाम या धार्मिक शिक्षक है। कई मामलों में यह केवल पारिवारिक उपनाम हो सकता है।

    क्या ‘मुल्ला’ कोई सरकारी उपाधि है?

    नहीं। ‘मुल्ला’ भारत में कोई सरकारी या कानूनी पदवी नहीं है।

    इसे पाने के लिए सरकार की ओर से कोई निर्धारित प्रमाणपत्र या आधिकारिक नियुक्ति प्रक्रिया नहीं होती। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक या पारिवारिक संदर्भों में हुआ है।

    यही वजह है कि किसी व्यक्ति के नाम के साथ ‘मुल्ला’ लिखा होने से उसकी सरकारी स्थिति, पेशा या धार्मिक पद अपने आप तय नहीं होता।

    भारत में कहां देखने को मिलता है यह सरनेम?

    भारत के अलग-अलग हिस्सों में मुस्लिम परिवारों के उपनाम अलग ऐतिहासिक और क्षेत्रीय परंपराओं से बने हैं। ‘मुल्ला’ भी कुछ क्षेत्रों और समुदायों में पारिवारिक नाम के तौर पर देखने को मिलता है।

    विशेष रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और कोंकण क्षेत्र में इस उपनाम का इस्तेमाल करने वाले परिवार मिलते हैं। कुछ अन्य राज्यों में भी यह नाम व्यक्तिगत या पारिवारिक पहचान के रूप में दिखाई देता है।

    इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि ‘मुल्ला’ केवल किसी एक मुस्लिम समुदाय या एक ही इलाके से जुड़े लोगों का नाम है।

    क्या हर ‘मुल्ला’ धार्मिक विद्वान होता है?

    यह जरूरी नहीं है।

    किसी व्यक्ति के नाम के साथ ‘मुल्ला’ लिखा होना दो अलग परिस्थितियों को दर्शा सकता है। एक स्थिति में यह धार्मिक ज्ञान या भूमिका से जुड़ा सम्मानसूचक संबोधन हो सकता है। दूसरी स्थिति में यह पीढ़ियों से चला आ रहा पारिवारिक उपनाम हो सकता है।

    इसलिए केवल नाम देखकर किसी व्यक्ति की धार्मिक शिक्षा या पेशे के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    ‘पंडित’ से तुलना क्यों की जाती है?

    भारतीय संदर्भ में कभी-कभी ‘मुल्ला’ की तुलना ‘पंडित’ जैसे शब्दों से की जाती है। दोनों शब्दों का इस्तेमाल कुछ संदर्भों में धार्मिक ज्ञान रखने वाले लोगों के लिए सम्मानसूचक रूप में हुआ है और दोनों ही शब्द कुछ परिवारों के नाम या उपनाम का हिस्सा भी बने हैं।

    लेकिन दोनों की ऐतिहासिक उत्पत्ति और धार्मिक-सामाजिक भूमिका अलग-अलग परंपराओं से जुड़ी हैं। इसलिए यह तुलना केवल समझाने के स्तर पर की जा सकती है, दोनों को पूरी तरह समान मानना सही नहीं होगा।

    नाम में ‘मुल्ला’ लिखने का मतलब क्या समझें?

    सीधी भाषा में कहें तो ‘मुल्ला’ एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल इतिहास में मुस्लिम धार्मिक विद्वानों और धार्मिक शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए सम्मानसूचक संबोधन के तौर पर हुआ है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल और अर्थ अलग रहा है।

    वर्तमान समय में यह कुछ लोगों के लिए धार्मिक संबोधन हो सकता है, जबकि कई परिवारों में यह केवल सरनेम या पारिवारिक पहचान के रूप में इस्तेमाल होता है।

    इसलिए किसी के नाम में ‘मुल्ला’ लिखा देखकर उसके धर्म, पेशे या धार्मिक ज्ञान के बारे में कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

  • आंध्र प्रदेश: जली हुई ‘बाइक’ ने खोला राज, पत्नी ने ही रची थी बीजेपी नेता के हत्या की खौफनाक साजिश:

    आंध्र प्रदेश: जली हुई ‘बाइक’ ने खोला राज, पत्नी ने ही रची थी बीजेपी नेता के हत्या की खौफनाक साजिश:

    आंध्र प्रदेश: जली हुई ‘बाइक’ ने खोला राज, पत्नी ने ही रची थी बीजेपी नेता के हत्या की खौफनाक साजिश:

    आंध्र प्रदेश से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक स्थानीय बीजेपी नेता की हत्या की साजिश का पर्दाफाश हुआ है।

    पुलिस ने जब एक मामूली सी घटना नेता की बाइक जलाने की जांच शुरू की, तो जो सच सामने आया उसने सबको चौंका दिया। इस मामले में पुलिस ने बीजेपी नेता की पत्नी समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

    क्या है पूरा मामला?

    बता दें कि यह पूरा वाकया 13 सितंबर की रात का है, जब आंध्र प्रदेश में बीजेपी के मंडल अध्यक्ष मुनिराजु की मोटरसाइकिल को कुछ लोगों ने आग के हवाले कर दिया था। शुरुआत में मुनिराजु की शिकायत पर पुलिस ने इसे सिर्फ संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का एक आम मामला मानकर जांच शुरू की।

    पुलिस ने पहले यह एंगल खंगाला कि कहीं यह किसी स्थानीय राजनीतिक विवाद या विनायक चविथी फ्लेक्सी विवाद से जुड़ा हुआ तो नहीं है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लगा।

    सीसीटीवी फुटेज से खुला साजिश का जाल

    इसके बाद पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की बारीकी से जांच की। इसके आधार पर पुलिस ने पांच युवकों साई, उदय किरण, लीला कृष्णा, पृथ्वीराज और हरीश की पहचान की और उन्हें हिरासत में ले लिया। पूछताछ में इन लोगों ने बाइक जलाने की बात कबूल कर ली। लेकिन, इस जांच में तब एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आया जब मुनिराजु की पत्नी प्रशांतिका का नाम इस साजिश से जुड़ गया।

    पत्नी और प्रेमी का खौफनाक प्लान

    इतना ही नहीं पुलिस जांच में सामने आया कि बीजेपी नेता की पत्नी प्रशांतिका के आरोपी साई के साथ करीबी संबंध थे। प्रशांतिका सोशल मीडिया के जरिए अपने पति की हर गतिविधि और लोकेशन की जानकारी साई के साथ शेयर करती थी।

    पुलिस के मुताबिक, प्रशांतिका और इन सभी आरोपियों ने कई बार मिलकर मुनिराजु की हत्या की साजिश रची थी, हालांकि वे अपने इस नापाक मकसद को अंजाम तक नहीं पहुंच पाए थे। बाइक जलाने की घटना भी इसी बड़ी साजिश का एक हिस्सा थी।

    सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में

    गौरतलब है कि पुलिस ने इस मामले में साजिश रचने वाली पत्नी प्रशांतिका और उसके आरोपी पांचों साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस इस मामले की और गहराई से जांच कर रही है।