आंखों के नीचे काले घेरे यानी डार्क सर्कल एक आम समस्या है। इसके पीछे नींद की कमी, आनुवंशिकता, बढ़ती उम्र, एलर्जी, डिहाइड्रेशन, आंखों को बार-बार रगड़ना और धूप में ज्यादा रहना जैसे कई कारण हो सकते हैं। इसलिए इन्हें कम करने के लिए सबसे पहले संभावित कारण पर ध्यान देना जरूरी है।
1. रोज पर्याप्त नींद लें
नींद पूरी न होने पर आंखों के नीचे की त्वचा अधिक थकी हुई और गहरी दिखाई दे सकती है। रोज करीब 7 घंटे या उससे अधिक की अच्छी नींद लेने की कोशिश करें। सोने और जागने का समय भी नियमित रखना फायदेमंद हो सकता है।
2. आंखों पर ठंडी पट्टी रखें
ठंडी पट्टी कुछ समय के लिए आंखों के आसपास की सूजन और डार्कनेस की उपस्थिति को कम करने में मदद कर सकती है। इसे बंद आंखों पर कुछ मिनट हल्के तरीके से रखा जा सकता है।
3. आंखों को बार-बार न रगड़ें
आंखों को लगातार रगड़ने या खुजाने से आसपास की त्वचा में सूजन और जलन हो सकती है। इससे आंखों के नीचे का हिस्सा और ज्यादा गहरा दिखाई दे सकता है। अगर एलर्जी के कारण आंखों में खुजली रहती है, तो उसके इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह लें।
4. धूप से त्वचा की सुरक्षा करें
अत्यधिक धूप त्वचा में पिगमेंटेशन बढ़ा सकती है, जिससे आंखों के नीचे का हिस्सा ज्यादा गहरा दिखाई दे सकता है। चेहरे पर सनस्क्रीन लगाने और धूप में सनग्लास पहनने की आदत मददगार हो सकती है।
5. शरीर को हाइड्रेट रखें
पर्याप्त पानी न पीने पर त्वचा रूखी और फीकी दिखाई दे सकती है, जिससे डार्क सर्कल अधिक नजर आ सकते हैं। पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य स्वस्थ तरल पदार्थ लेते रहें।
6. कैफीन या अन्य उपयुक्त स्किनकेयर वाले प्रोडक्ट पर विचार करें
कुछ अंडर-आई उत्पादों में कैफीन या रेटिनॉल जैसे ingredients होते हैं, जो कुछ लोगों में सूजन या डार्क सर्कल की appearance को कम करने में मदद कर सकते हैं। आंखों के आसपास की त्वचा संवेदनशील होती है, इसलिए कोई भी नया प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले सावधानी बरतें।
7. ज्यादा नमक और अस्वस्थ आदतों पर नियंत्रण रखें
आंखों के आसपास सूजन और पफीनेस में कुछ lifestyle factors भूमिका निभा सकते हैं। संतुलित डाइट लेना, धूम्रपान से बचना और शराब का अधिक सेवन न करना त्वचा और सामान्य स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर काले घेरे अचानक दिखाई देने लगे हों, सिर्फ एक आंख के नीचे हों, या उनके साथ ज्यादा सूजन, दर्द अथवा आंखों से जुड़ी दूसरी समस्या हो, तो डॉक्टर या आई स्पेशलिस्ट से जांच कराना बेहतर है।
निष्कर्ष: डार्क सर्कल को पूरी तरह हटाना हर व्यक्ति में संभव नहीं होता, क्योंकि आनुवंशिकता और उम्र जैसे कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। लेकिन पर्याप्त नींद, धूप से बचाव, हाइड्रेशन और सही स्किनकेयर से उनकी appearance को कम करने में मदद मिल सकती है।
इतिहास की परतों में न जाने कितने ऐसे रहस्य दबे हैं, जो आज भी इंसानी दिमाग को चकरा देते हैं. हाल ही में मिस्र के अल-बहासा में पुरातत्वविदों को एक ऐसी ममी मिली है, जिसने अब तक की सभी मान्यताओं को हिलाकर रख दिया है. आमतौर पर जब भी कोई प्राचीन ममी मिलती है, तो उसके साथ जादुई मंत्र या धार्मिक ग्रंथ पाए जाते हैं, ताकि परलोक में उसकी आत्मा को शांति मिले. इसके अलावा सोने-चांदी के गहने-जेवरात भी होते हैं. लेकिन इस बार वैज्ञानिकों के हाथ कुछ ऐसा लगा, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी. इस ममी के पेट के अंदर से एक प्राचीन कागज (पपायरस) निकला, जिस पर दुनिया की सबसे मशहूर युद्ध कथाओं में से एक का हिस्सा लिखा हुआ था. जांच के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि ममी के पेट में दबा यह कागज असल में महान कवि होमर की सुप्रसिद्ध रचना ‘इलियड’ का एक अंश है.
इसमें प्राचीन यूनानी सेनाओं और उनके जहाजों का विस्तृत विवरण दिया गया है, जो पौराणिक ट्रोजन युद्ध की ओर बढ़ रहे थे. पुरातत्वविदों के लिए यह खोज किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि पूरी दुनिया में यह अपनी तरह का पहला मामला है, जहां किसी ममी के शरीर के भीतर से कोई साहित्यिक कृति बरामद हुई हो. इस खोज ने प्राचीन काल में शवों को दफनाने की परंपराओं पर एक नई बहस छेड़ दी है. इस रहस्यमयी पपायरस को हाल ही में की गई खुदाई के दौरान निकाला गया था. वैज्ञानिकों की टीम ने जब ग्रीक भाषा में लिखे इस पाठ का अध्ययन किया, तो वे दंग रह गए कि हजारों साल बाद भी यह सुरक्षित कैसे रहा. आमतौर पर ममी बनाने की प्रक्रिया के दौरान शरीर को रसायनों से भरा जाता है, लेकिन इस ममी को अनोखे तरीके से दफनाया गया.
ममी के अंदर किसी साहित्यिक कविता का होना यह संकेत देता है कि उस समय के लोगों के लिए साहित्य का महत्व सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं था, बल्कि उसे परलोक की यात्रा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता था. इस खुदाई के दौरान सिर्फ यह अनोखी ममी ही नहीं मिली, बल्कि कई और चौंकाने वाले राज भी सामने आए हैं. पुरातत्वविदों को ऐसी ममी भी मिली हैं, जिनकी जीभ सोने की बनी हुई थी. प्राचीन मिस्र के लोगों का मानना था कि सोने की जीभ लगाने से मृत व्यक्ति मरने के बाद देवताओं से बात कर पाएगा. इसके अलावा वहां से सजे हुए ताबूत और कई प्राचीन कलाकृतियां भी बरामद की गई हैं, जो उस दौर की आलीशान जीवनशैली और उनकी अजीबोगरीब धार्मिक मान्यताओं को उजागर करती हैं. यह ऐतिहासिक मिशन बार्सिलोना विश्वविद्यालय के नेतृत्व में चलाया गया था, जो काहिरा से करीब 190 किलोमीटर दूर ऑक्सीरहिन्चस नामक प्राचीन शहर में स्थित है.
दुनियाभर में अक्सर खूबसूरती के चर्चे होते हैं, लेकिन कैलिफोर्निया में एक ऐसा कंपटीशन (competition) होता है, जहां डॉग्स की अनोखी बनावट और उनकी सादगी को सेलिब्रेट किया जाता है. कैलिफोर्निया (California) के सांता रोजा (Santa Rosa) में 14 अगस्त को आयोजित 50वें ‘वर्ल्ड्स अग्लिएस्ट डॉग कॉन्टेस्ट’ में 6 साल की पग ‘जिनी लू’ ने बाजी मारते हुए ये खिताब अपने नाम कर लिया है.
जिनी लू (Jinny Lu) की मालकिन मिशेल ग्रेडी (Michelle Grady) के मुताबिक, जिनी लू पिछले तीन सालों से इस कंपटीशन में हिस्सा ले रही थी, लेकिन जीत उसे फोर्थ अटेम में मिली. कंपटीशन में दूसरा स्थान चिहुआहुआ-पोमेरेनियन मिक्स (Chihuahua-Pomeranian mix) ‘पिंकी’ (Pinky) को मिला, जबकि तीसरा स्थान ‘ऑटो’ (Otto) नाम के डॉगी ने हासिल किया.
जिनी लू को करीब 4 साल पहले पग रेस्क्यू के जरिए गोद लिया गया था, तब से वो अपनी मालकिन मिशेल की लाइफ में खुशियां भर रही है. कंपटीशन के ऑर्गनाइजरों का कहना है कि, ‘इस कॉन्टेस्ट का मकसद किसी जानवर का मजाक उड़ाना नहीं, बल्कि पालतू जानवरों को गोद लेने के प्रति जागरूकता फैलाना है.’
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक महिला ने डेटिंग ऐप के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनको ब्लैकमेल किया और उनसे करोड़ों रुपये वसूले. पल्लवी सिंह राजपूत नाम की महिला पर आरोप है कि वह डेटिंग ऐप टिंडर और सोशल मीडिया के जरिए पुरुषों से दोस्ती करती थी. बातचीत और मुलाकात के बाद आपत्तिजनक फोटो-वीडियो के जरिए उनको ब्लैकमेलिंग करती थी. रकम देने से इनकार करने पर रेप और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मुकदमों में उनको फंसाने की धमकी देती थी. इस कथित नेटवर्क के जरिए 5 लोगों को जेल भिजवाने और 6 करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली का दावा किया गया है.
टिंडर पर दोस्ती, फिर ब्लैकमेलिंग का खेल
आरोपों है कि पल्लवी सिंह राजपूत डेटिंग ऐप पर पुरुषों से संपर्क करती थी. बातचीत के जरिए पहले दोस्ती और फिर नजदीकी बढ़ाती थी. अपनी कोई न कोई मजबूरी बता कर आर्थिक लाभ उठाती रहती थी. इसके बाद मुलाकात के दौरान फोटो और वीडियो बना लेती थी. पीड़ित पक्ष का दावा है कि इन्हीं फोटो और वीडियो को बाद में ब्लैकमेलिंग का हथियार बनाया जाता था. वह कथित तौर पर पीड़ितों से बड़ी रकम मांगती थी. पैसे देने से इनकार करने पर उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने का दबाव बनाती थी.
नोटों के बिस्तर पर सोती थी
मामले से जुड़ी कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें बड़ी संख्या में नोटों के बंडल दिखाई दे रहे हैं. एक तस्वीर में महिला के पास असलहा भी नजर आ रहा है. इन तस्वीरों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, तस्वीरों में मौजूद रकम, असलहे और उनके पूरे संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है.
5 लोगों को जेल भेजने का आरोप
पीड़ित पक्ष ने दावा किया है कि महिला की शिकायतों के बाद अब तक खुद पीड़ित समेत कुल 5 लोग जेल जा चुके हैं. कई लोग बदनामी और मुकदमे के डर से पैसे देने को मजबूर हो गए. उन्होंने कहा कि इस पूरे खेल में डेटिंग ऐप के जरिए बनाए गए रिश्ते, आपत्तिजनक सामग्री और कानूनी कार्रवाई की धमकी को कथित तौर पर वसूली के लिए इस्तेमाल किया जाता था.
प्रयागराज के अलावा लखनऊ में भी मुकदमों का दावा
शिकायत के मुताबिक, मामला सिर्फ प्रयागराज तक सीमित नहीं है. लखनऊ के विभूतिखंड और सुशांत गोल्फ सिटी थानों में भी महिला द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमों का जिक्र किया गया है.वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि पल्लवी सिंह राजपूत के खिलाफ 14 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं. आरोप है कि अलग-अलग मामलों में कानूनी कार्रवाई को कथित तौर पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया.
कई नामों से सोशल मीडिया अकाउंट चलाने का आरोप
यह भी आरोप लगाया गया है कि महिला सोशल मीडिया पर अलग-अलग नामों से अकाउंट बनाकर लोगों से संपर्क करती थी. इनमें ‘स्वीटी तिवारी’ समेत दूसरे नामों का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है. आरोप है कि इन्हीं सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप अकाउंट के जरिए नए लोगों को संपर्क में लाया जाता था. कुल 5 लोग ग्राउंड पर गिरोह को ऑपरेटर करते है. पीड़ित के दावे के मुताबिक, पल्लवी के साथ 2 अन्य लड़कियां और दो और लड़के भी शामिल हैं.अधिवक्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कथित सिंडिकेट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
पीड़ितों से करोड़ों रुपये वसूलने का आरोप
मामले में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं. एक तरफ पीड़ित पक्ष करोड़ों रुपये की वसूली, ब्लैकमेलिंग और फर्जी मुकदमों के जरिए लोगों को फंसाने का आरोप लगा रहा है. वहीं पूरे मामले में पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी.
Erectile Dysfunction: इरेक्टाइल डिस्फंक्शन यानी इरेक्शन हासिल करने या उसे बनाए रखने में परेशानी पुरुषों की सेक्सुअल हेल्थ से जुड़ी एक आम समस्या है। खराब खान-पान, अनहेल्दी लाइफस्टाइल और तनाव जैसी कई वजहें यौन स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। ऐसे में अपनी डाइट पर ध्यान देना भी जरूरी हो जाता है।
कुछ पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ शरीर में बेहतर ब्लड फ्लो और सामान्य हार्मोनल हेल्थ को सपोर्ट कर सकते हैं। हालांकि, इन्हें किसी दवा या वियाग्रा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। अगर इरेक्शन की समस्या लगातार बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
ये 8 फूड्स डाइट में कर सकते हैं मदद
1. पालक
पालक फोलेट और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। ये पोषक तत्व शरीर में सामान्य रक्त संचार और ओवरऑल हेल्थ को सपोर्ट करने में भूमिका निभाते हैं। संतुलित डाइट का हिस्सा बनाकर पालक को पुरुषों की हेल्दी डाइट में शामिल किया जा सकता है।
2. एवोकाडो
एवोकाडो में हेल्दी फैट के साथ कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें मौजूद जिंक पुरुषों की रिप्रोडक्टिव हेल्थ और सामान्य हार्मोन फंक्शन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए एवोकाडो को संतुलित डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।
3. सेब
सेब सिर्फ सामान्य सेहत के लिए ही नहीं, बल्कि प्रोस्टेट हेल्थ के लिहाज से भी चर्चा में रहता है। इसके छिलके में उर्सोलिक एसिड जैसे कंपाउंड पाए जाते हैं। फल और सब्जियों से भरपूर डाइट पुरुषों की ओवरऑल हेल्थ के लिए बेहतर मानी जाती है।
4. कद्दू के बीज
कद्दू के बीजों में जिंक और ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जिंक पुरुषों की रिप्रोडक्टिव हेल्थ और सामान्य हार्मोन फंक्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन्हें सलाद, ओट्स या स्नैक के तौर पर डाइट में शामिल किया जा सकता है।
5. तरबूज
तरबूज में पानी की मात्रा अधिक होने के साथ-साथ सिट्रुलिन नामक अमीनो एसिड पाया जाता है। शरीर में सिट्रुलिन से आर्जिनिन बनने की प्रक्रिया होती है, जो नाइट्रिक ऑक्साइड से जुड़ी होती है और रक्त वाहिकाओं के सामान्य फंक्शन में भूमिका निभाती है।
6. केला
केले में पोटैशियम और विटामिन B6 जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। पोटैशियम शरीर में सामान्य ब्लड प्रेशर और मांसपेशियों के कामकाज के लिए जरूरी है। हेल्दी डाइट में केला एक आसान और पौष्टिक विकल्प हो सकता है।
7. अनार
अनार एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल है। इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाने से शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। मूल स्रोत में अनार को ब्लड फ्लो और सेक्सुअल हेल्थ से जोड़कर बताया गया है, हालांकि इसे वियाग्रा का प्राकृतिक विकल्प मानना सही नहीं होगा।
8. डार्क चॉकलेट
कम मात्रा में डार्क चॉकलेट का सेवन एक संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है। इसमें मौजूद कोकोआ फ्लेवोनॉइड्स और अन्य कंपाउंड्स पर हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़े संभावित प्रभावों को लेकर अध्ययन हुए हैं। तनाव भी सेक्सुअल परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकता है, इसलिए तनाव कम रखने वाली स्वस्थ जीवनशैली महत्वपूर्ण है।
क्या ये फूड्स वियाग्रा की जगह ले सकते हैं?
नहीं। इन खाद्य पदार्थों को वियाग्रा या ED की दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए। इनका फायदा मुख्य रूप से संतुलित और पौष्टिक डाइट के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन बार-बार हो रहा है तो इसके पीछे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी समस्या, तनाव या अन्य कारण हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे किसी चिकित्सकीय जांच, निदान या उपचार का विकल्प न मानें। इरेक्शन से जुड़ी समस्या लगातार बनी रहती है या अचानक शुरू हुई है, तो योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
एक परिवार की इज्जत बचाने की सोच ने ऐसी खौफनाक वारदात को जन्म दिया, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। एक युवती अपने जीजा से प्यार करने लगी थी और उसी के साथ जिंदगी बिताना चाहती थी। परिवार इस रिश्ते के सख्त खिलाफ था और चाहता था कि उसकी शादी किसी दूसरे युवक से कर दी जाए। लेकिन युवती अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं थी।
बताया जाता है कि युवती कुछ समय तक अपने जीजा के साथ भी रही थी। जब परिवार को इसकी जानकारी मिली तो घर में लगातार विवाद होने लगा। काफी समझाने-बुझाने के बाद भी युवती ने किसी और से शादी करने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद परिवार ने उसे घर बुलाने के बहाने एक ऐसी साजिश रची, जिसका अंत बेहद दर्दनाक निकला।
योजना के तहत युवती को रिश्तेदारों के यहां बुलाया गया। वहां पहले से परिवार के कई लोग मौजूद थे। जैसे ही युवती को अपनी जान का खतरा महसूस हुआ, उसने वहां से भागने की कोशिश की। लेकिन आरोप है कि उसे पकड़ लिया गया और धारदार हथियार से उस पर हमला कर दिया गया। गंभीर रूप से घायल युवती को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना की जांच में पुलिस को कई ऐसे सुराग मिले, जिनसे मामला सम्मान के नाम पर हत्या (ऑनर किलिंग) की ओर जाता दिखाई दिया। पूछताछ और सबूतों के आधार पर परिवार के कुछ सदस्यों को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया कि परिवार युवती के प्रेम संबंध और उसकी शादी की जिद से नाराज था।
फिलहाल मामले की जांच पूरी होने तक अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया और न्यायिक निर्णय पर निर्भर करेगा। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि रिश्तों और सामाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर किसी की जिंदगी छीन लेना कभी भी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में कुछ समय पहले एक अनोखा चाय का स्टॉल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ था। यहां चाय की कीमत ग्राहक की ‘लव स्टोरी’ के हिसाब से तय होती थी। प्रेमी जोड़ों के लिए अलग रेट था, जबकि प्यार में धोखा खा चुके लोगों को चाय पर खास छूट दी जाती थी।
शाहजहांपुर के एक कस्बे में पढ़ाई करने वाले एक युवक ने अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए चाय का स्टॉल शुरू किया था। उसने अपने छोटे से कारोबार को अलग पहचान देने के लिए दुकान का नाम ही ‘बेवफा चायवाला’ रख दिया।
स्टॉल की सबसे खास बात इसकी चाय की कीमत थी। अगर कोई प्रेमी जोड़ा चाय पीने पहुंचता था तो उसे दूध से बनी स्पेशल चाय 15 रुपये में दी जाती थी। वहीं, जो ग्राहक खुद को प्यार में धोखा खाया हुआ बताता था, उसे 10 रुपये में मसालेदार चाय मिलती थी।
इस अनोखे ऑफर की वजह से देखते ही देखते स्टॉल पर युवाओं की भीड़ बढ़ने लगी। कई लोग मजाक-मजाक में खुद को ‘बेवफा’ बताकर सस्ती चाय का आनंद लेने लगे। खास तौर पर युवा वर्ग इस अनोखे अंदाज को काफी पसंद कर रहा था।
स्टॉल चलाने वाले युवक का कहना था कि उसने पढ़ाई के साथ अपना छोटा कारोबार शुरू करने का फैसला किया, ताकि अपनी जरूरतों और फीस का खर्च खुद उठा सके। उसका मानना था कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए नौकरी के साथ-साथ छोटे कारोबार के विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए।
कुछ ही समय में स्टॉल का नाम इतना लोकप्रिय हो गया कि आसपास के लोग युवक को उसके असली नाम से ज्यादा ‘बेवफा चायवाला’ के नाम से पहचानने लगे। चाय पीने आने वाले ग्राहकों को दुकान का नाम और उसका अनोखा रेट दोनों पसंद आ रहे थे।
इस तरह एक छोटे से चाय के स्टॉल ने अपने अलग अंदाज की वजह से पूरे इलाके में पहचान बना ली थी। प्रेमी जोड़ों से लेकर मजाकिया अंदाज में खुद को ‘दिलजला’ बताने वाले युवाओं तक, हर किसी के लिए यहां चाय पीना एक अलग अनुभव बन गया था।
Wife Caught With Boyfriend: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे उत्तर प्रदेश के हमीरपुर के सुमेरपुर कस्बे का बताया जा रहा है. v में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति अपनी पत्नी को उसके बॉयफ्रेंड के साथ पकड़ लेता है, जिसके बाद हंगामा देखने को मिलता है. वो पत्नी और उसके बॉयफ्रेंड को पकड़ता है लेकिन दोनों रुकने की बजाय एक दूसरे का हाथ पकड़ते हैं और वहां से चले जाते हैं. जाते-जाते लड़की कहती है कि उनका तलाक होने वाला है और कोर्ट में केस चल रहा है.
शादी के बाद भी रहा बॉयफ्रेंड से रहा संबंध
इस मामले में पुलिस का कहना है कि ये वायरल वीडियो 2 जुलाई की रात 9 बजे का है. इस मामले में सुमेरपुर कस्बे के रहने वाले एक युवक ने पुलिस को शिकायत पत्र दिया था, जिसमें उसने बताया था कि उसकी शादी 2021 में मौदहा की एक युवती से हुई थी. शादी के बाद भी उसका संबंध उसके बॉयफ्रेंड से रहा. विरोध करने पर दोनों के बीच विवाद बढ़ता गया.
थाने के बाहर जमकर हुआ हंगामा
एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के विवाद के कारण हो रहे झगड़े को महिला ने दहेज उत्पीड़न, गुजारा भत्ता और तलाक का रूप दिया. इस मामले में कोर्ट में केस चल रहा है. इसके बावजूद पत्नी खुलेआम अपने बॉयफ्रेंड के साथ घूम रही थी. शिकायत में बताया गया कि महिला के पति को 2 जुलाई को सूचना मिली कि उसकी पत्नी सुमेरपुर की सब्जी मंडी क्षेत्र में अपने बॉयफ्रेंड के साथ घूम रही है. वो मौके पर पहुंचा और दोनों को पकड़ लिया और थाने ले गया. इस दौरान थाने के बाहर काफी देर तक हंगामा हुआ. किसी ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो जमकर वायरल हो रहा है.
Success Story:
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के ग्राम खपरिया निवासी मनोज पाल की कहानी उन अभ्यर्थियों के लिए मिसाल है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार असफल होने के बाद हार मान लेते हैं. मनोज पाल ने करीब 12 सालों तक लगातार प्रतियोगी परीक्षाएं दीं. इस दौरान उन्होंने लगभग 40 परीक्षाओं में किस्मत आजमाई, लेकिन लंबे समय तक अंतिम सफलता उनके हाथ नहीं लगी. आखिरकार मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा 2024 में उनका चयन सहायक संचालक, वित्त विभाग के पद पर हुआ. मनोज की यह सफलता वर्षों के संघर्ष, आर्थिक मुश्किलों और लगातार असफलताओं के बीच खुद पर विश्वास बनाए रखने का परिणाम है.
12वीं में मिले सिर्फ 50 प्रतिशत अंक
मनोज पाल की शुरुआती पढ़ाई गांव में ही हुई. उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई गांव से की और परीक्षा करीब 50 प्रतिशत अंकों के साथ पास की. सीमित संसाधनों वाले परिवार से आने वाले मनोज के सामने आगे की पढ़ाई जारी रखना भी आसान नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और नर्मदापुरम जाकर कॉलेज की पढ़ाई शुरू की. पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने बच्चों को पढ़ाकर अपनी जरूरतों के लिए पैसे जुटाए और खुद भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते रहे.
मनोज पाल की शुरुआती पढ़ाई गांव में ही हुई. उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई गांव से की और परीक्षा करीब 50 प्रतिशत अंकों के साथ पास की.
मनोज कहते हैं कि परिवार ने उनकी मेहनत पर हमेशा भरोसा रखा. सफलता के बाद परिवार की पहली प्रतिक्रिया थी. भगवान के यहां देर है, अंधेर नहीं. मेहनत की है तो सफलता मिलनी ही थी. अंतिम चयन की खबर परिवार के लिए भावुक कर देने वाली थी.
कोरोना काल में मजदूरी कर जुटाए पैसे
मनोज के संघर्ष का सबसे कठिन दौर कोरोना महामारी के दौरान आया. महामारी के कारण काम और आय के साधन प्रभावित हुए और उनके पास जो कुछ था, वह भी खत्म हो गया. आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखना मुश्किल हो गया. ऐसे समय में मनोज ने गांव लौटकर मजदूरी की और पैसे जुटाए. इसके बाद उन्होंने इंदौर जाकर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की तैयारी शुरू की. वहां भी उन्होंने बच्चों को पढ़ाया और कोचिंग में काम किया, ताकि अपनी पढ़ाई का खर्च निकाल सकें.
लगभग 40 परीक्षाएं दीं, लेकिन सफलता नहीं मिली
मनोज ने अपने लंबे सफर में लगभग 40 प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लिया. इनमें विभिन्न भर्ती परीक्षाएं शामिल रहीं. उन्होंने पुलिस आरक्षक, वनरक्षक, पटवारी, लेखापरीक्षक और संचालक जैसी परीक्षाएं दीं. इसके अलावा कर्मचारी चयन आयोग की बहु-कार्य कर्मचारी, संयुक्त उच्चतर माध्यमिक और संयुक्त स्नातक स्तर की परीक्षाओं में भी प्रयास किया. मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा, पंजीयक, सहायक प्राध्यापक सहित अन्य परीक्षाओं में भी उन्होंने किस्मत आजमाई. कई परीक्षाओं में वह आगे तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया.
MPPSC परीक्षा में मनोज ने नौ प्रयास किए. इन नौ प्रयासों में वह नौ बार प्रीलिम्स परीक्षा में सफल हुए.
MPPSC परीक्षा में नौ प्रयास
MPPSC परीक्षा में मनोज ने नौ प्रयास किए. इन नौ प्रयासों में वह नौ बार प्रीलिम्स परीक्षा में सफल हुए. आठ बार मुख्य परीक्षा पास कर इंटरव्यू तक पहुंचे और सात बार इंटरव्यू भी दिया. इसके बावजूद अंतिम चयन नहीं हो पाया. लगातार परिणाम अपने पक्ष में न आने के बावजूद मनोज ने तैयारी जारी रखी. आखिरकार राज्य सेवा परीक्षा 2024 में उनका चयन हुआ और वर्षों की मेहनत का परिणाम सामने आया.
परिवार कहता था-अब कुछ काम करके घर संभालो
मनोज निम्न-मध्यमवर्गीय कृषक परिवार से आते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी. परिवार ने तैयारी के दौरान उनका पूरा साथ दिया, लेकिन लंबे समय तक नौकरी नहीं मिलने के कारण घरवालों की चिंता भी बढ़ती जा रही थी. मनोज बताते हैं कि परिवार की चिंता थी कि उम्र बढ़ रही है और बहनों की शादी भी करनी है, इसलिए उन्हें कोई काम करके कमाई शुरू करनी चाहिए. परिवार चाहता था कि वह कुछ छोटा-मोटा काम शुरू करें, जिससे घर की आर्थिक स्थिति थोड़ी बेहतर हो सके.
समाज के तानों के बीच खुद को संभाला
लगातार असफलताओं के बीच मनोज को सामाजिक दबाव का भी सामना करना पड़ा. उनका कहना है कि वह पशुपालक गड़रिया समाज से आते हैं और उनके आसपास के लोगों को उनसे बहुत बड़ी उम्मीद भी नहीं थी. कई बार परीक्षा का परिणाम नकारात्मक आने पर उन्हें लगा कि शायद आगे भी सफलता नहीं मिलेगी, लेकिन उनके पास पीछे हटने का विकल्प नहीं था. वह कहते हैं कि गांव लौटकर खेती या मजदूरी करने के साथ-साथ वह यह भी नहीं चाहते थे कि उनके परिवार को लोगों के ताने सुनने पड़ें. यही सोच उन्हें आगे बढ़ाती रही.
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा 2024 में उनका चयन सहायक संचालक, वित्त विभाग के पद पर हुआ.
6 से 8 घंटे पढ़ाई, मॉक टेस्ट और आत्मविश्लेषण पर जोर
मनोज की तैयारी का तरीका बेहद अनुशासित रहा. वह सुबह 6 बजे उठकर लाइब्रेरी चले जाते थे. दिन में खाना बनाने और खाने के लिए लौटते और फिर लाइब्रेरी चले जाते थे. रात 12 से 1 बजे तक लाइब्रेरी में पढ़ाई करने के बाद वह सुबह कोचिंग में बच्चों को पढ़ाने चले जाते थे. वह रोजाना लगभग 6 से 8 घंटे पढ़ाई करते थे. तैयारी के दौरान उन्होंने बड़ी संख्या में मॉक टेस्ट दिए, अपनी गलतियों का आत्मविश्लेषण किया और दोस्तों के साथ विषयों पर चर्चा की. पुराने प्रश्नपत्रों के आधार पर उन्होंने परीक्षा की रणनीति तैयार की.
‘अपनी स्थिति बदलनी है तो पूरी ताकत से मेहनत करें’
मनोज पाल उन अभ्यर्थियों के लिए संदेश देते हैं जो लगातार असफलताओं से निराश हो जाते हैं. उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने अपनी स्थिति बदलने का फैसला किया है, तो उसे पूरी ताकत के साथ मेहनत करनी होगी. अपनी ताकत और कमजोरियों को पहचानना होगा और लगातार खुद में सुधार करते रहना होगा. उनका मानना है कि असफलताओं के बावजूद खुद पर विश्वास बनाए रखना जरूरी है. करीब 40 परीक्षाओं में प्रयास करने के बाद मिली यह सफलता मनोज के लिए सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि सालों के संघर्ष और धैर्य की जीत है.
एक युवती रोज शाम घर से निकलती थी। परिवार को बताया गया था कि वह कॉल सेंटर में काम करती है और उसकी ड्यूटी रात में होती है। सुबह होने से पहले वह घर लौट आती थी। परिवार को लंबे समय तक उसके साथ हो रही ज्यादती की भनक तक नहीं लगी।
दरअसल, युवती को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर एक ऐसे गिरोह के चंगुल में फंसा दिया गया था, जहां उससे जबरन देह व्यापार कराया जा रहा था। पीड़िता के मुताबिक, उसे रोज कई ग्राहकों के पास भेजा जाता था और मना करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती थी।
बताया गया कि करीब एक साल पहले उसकी एक परिचित युवती ने उसे ज्यादा पैसे कमाने का लालच दिया था। उसे भरोसा दिलाया गया कि एक व्यक्ति उसकी आर्थिक परेशानियां दूर कर सकता है। इसी भरोसे में वह उसके संपर्क में पहुंची, लेकिन बाद में उसे समझ आया कि वह एक खतरनाक जाल में फंस चुकी है।
पीड़िता ने बाहर निकलने की कोशिश की तो कथित तौर पर उसे रिकॉर्ड किए गए आपत्तिजनक वीडियो दिखाकर डराया गया। उसे धमकी दी गई कि अगर उसने विरोध किया या वहां से भागने की कोशिश की तो वीडियो सार्वजनिक कर दिए जाएंगे।
पीड़िता के मुताबिक, काम के दौरान तबीयत खराब होने और दर्द की शिकायत करने पर उसे दवाइयां दी जाती थीं और फिर दोबारा ग्राहकों के पास भेज दिया जाता था। उसे पैसों का लालच दिया गया था, लेकिन कथित तौर पर तय रकम भी नियमित रूप से नहीं दी जाती थी।
घर पर उसकी जिंदगी की दूसरी ही तस्वीर थी।
उसकी मां की पहले ही मौत हो चुकी थी और वह अपने पिता के साथ रहती थी। पिता को वह यही बताती थी कि वह कॉल सेंटर में नौकरी करती है। रोज शाम घर से निकलने और सुबह लौटने की वजह से परिवार को भी यही लगता रहा कि उसकी रात की नौकरी है।
लेकिन उसके पीछे चल रही सच्चाई बेहद अलग थी।
मामले की जानकारी मिलने के बाद एक संस्था की टीम ने गिरोह तक पहुंचने की कोशिश शुरू की। बताया गया कि टीम ने ग्राहक बनकर संपर्क किया और काफी समय तक भरोसा कायम करने की कोशिश की। इसके बाद एक ठिकाने की जानकारी मिली।
सूचना पुलिस तक पहुंचाई गई और टीम ने मौके पर कार्रवाई की।
वहां से शराब की खाली बोतलों के अलावा कई तरह की दवाइयां भी बरामद होने की बात सामने आई। कार्रवाई के दौरान एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर संकेत दिया कि इस पूरे मामले में वह अकेला नहीं है और इसके पीछे अन्य लोगों की भूमिका भी हो सकती है। इसके बाद पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े दूसरे संदिग्धों की तलाश और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी।
इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि नौकरी और आर्थिक मदद का झांसा देकर युवतियों को फंसाने वाले गिरोह किस तरह उनके भरोसे का फायदा उठा सकते हैं। पीड़िता को लंबे समय तक डर और धमकियों के बीच रखा गया, जबकि परिवार को उसकी असली स्थिति की जानकारी तक नहीं थी।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और इसके जरिए और कितने लोगों को निशाना बनाया गया।