Category: Gazab

  • दुनिया की सबसे चर्चित महिला जासूस: खूबसूरती, रहस्य और मौत की कहानी, लेकिन क्या सच में 50 हजार सैनिकों की मौत की जिम्मेदार थीं?

    दुनिया की सबसे चर्चित महिला जासूस: खूबसूरती, रहस्य और मौत की कहानी, लेकिन क्या सच में 50 हजार सैनिकों की मौत की जिम्मेदार थीं?

    दुनिया की सबसे चर्चित महिला जासूस: खूबसूरती, रहस्य और मौत की कहानी, लेकिन क्या सच में 50 हजार सैनिकों की मौत की जिम्मेदार थीं?

    जब भी दुनिया की सबसे मशहूर महिला जासूसों का जिक्र होता है, तो सबसे पहले नाम आता है माता हारी (Mata Hari) का। उनकी खूबसूरती, नृत्य कला और रहस्यमयी जिंदगी ने उन्हें इतिहास की सबसे चर्चित हस्तियों में शामिल कर दिया। लेकिन उनके बारे में कई ऐसी बातें भी कही जाती हैं, जिन पर इतिहासकार आज भी एकमत नहीं हैं।

    कौन थीं माता हारी?

    माता हारी का असली नाम गेरत्रुदा मार्गरेटा जेले (Margaretha Geertruida Zelle) था। उनका जन्म 7 अगस्त 1876 को नीदरलैंड में हुआ था। बाद में वह पेरिस पहुंचीं, जहां उन्होंने एक विदेशी नृत्यांगना के रूप में पहचान बनाई। “माता हारी” नाम उन्होंने इंडोनेशियाई भाषा के शब्द से अपनाया, जिसका अर्थ “सूर्य” या “दिन की आंख” माना जाता है।

    अपनी खूबसूरती और आकर्षक व्यक्तित्व की वजह से वह यूरोप के कई प्रभावशाली सैन्य अधिकारियों, राजनयिकों और उच्च पदस्थ लोगों के संपर्क में आईं।

    प्रथम विश्व युद्ध और जासूसी का आरोप

    प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने उन्हें धन के बदले खुफिया जानकारी जुटाने का प्रस्ताव दिया। बाद में फ्रांस को भी शक हुआ कि माता हारी दोहरा खेल खेल रही हैं और जर्मनी को सैन्य जानकारी पहुंचा रही हैं।

    साल 1917 में फ्रांसीसी अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन पर जर्मनी के लिए जासूसी करने और युद्ध के दौरान भारी नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया।

    क्या सच में उनकी वजह से 50 हजार सैनिक मारे गए?

    लोकप्रिय कहानियों और सोशल मीडिया पोस्ट में अक्सर दावा किया जाता है कि माता हारी की जासूसी के कारण 50 हजार फ्रांसीसी सैनिकों की मौत हुई थी।

    हालांकि, अधिकांश आधुनिक इतिहासकार इस दावे को प्रमाणित नहीं मानते। उनके खिलाफ पेश किए गए सबूत काफी कमजोर माने जाते हैं और कई विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें युद्धकालीन माहौल में बलि का बकरा बनाया गया। आज भी यह बहस जारी है कि वह वास्तव में कितनी प्रभावी जासूस थीं।

    मौत और रहस्य

    15 अक्टूबर 1917 को फ्रांस में फायरिंग स्क्वॉड द्वारा माता हारी को मृत्युदंड दिया गया।

    उनकी मृत्यु के बाद शव मेडिकल अध्ययन के लिए भेज दिया गया। कहा जाता है कि उनका संरक्षित सिर एक संग्रहालय में रखा गया था, लेकिन बाद में वह रहस्यमय तरीके से गायब हो गया और आज तक उसका पता नहीं चल पाया।

    फिल्मों में भी दिखाई गई कहानी

    माता हारी की जिंदगी पर कई किताबें और फिल्में बन चुकी हैं। सबसे प्रसिद्ध फिल्मों में 1931 की हॉलीवुड फिल्म “Mata Hari” शामिल है, जिसमें मशहूर अभिनेत्री ग्रेटा गार्बो ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

    निष्कर्ष

    माता हारी इतिहास की सबसे रहस्यमयी महिलाओं में गिनी जाती हैं। उनकी खूबसूरती, जासूसी के आरोप और रहस्यमयी मौत ने उन्हें अमर बना दिया। लेकिन यह दावा कि उन्होंने अकेले 50 हजार सैनिकों की मौत करवाई थी, इतिहास में विवादित है और इसके समर्थन में ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

  • मुर्दों का शहर’ देखकर उड़ जाएंगे होश! जहां लाशों का मेकअप होता है और परिजन कंकालों से करते हैं संवाद..

    मुर्दों का शहर’ देखकर उड़ जाएंगे होश! जहां लाशों का मेकअप होता है और परिजन कंकालों से करते हैं संवाद..

    मुर्दों का शहर’ देखकर उड़ जाएंगे होश! जहां लाशों का मेकअप होता है और परिजन कंकालों से करते हैं संवाद..

    Image Social media

    दुनिया में एक ऐसा देश हैं जहां लोग अपने परिजन की लाशों को दफ्नाते नहीं है और ना ही जलाते हैं। मौत के बात लोग अपने परिजनों को घरों में ही रखते हैं और उनके साथ आम व्यवहार करते हैं। लोग उनके साथ बातचीत करते हैं और उनके खयाल रखते हैं।

    दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहां अजीबों गरीब प्रथाएं हैं, जिनके बारे में जानकर हमें यकीन नहीं होता कि यह सच भी या नहीं। आज हम आपको ऐसे ही एक देश के बारें में बताएंगे जहां की डरावनी प्रथा आपको चौंका देगी। दरअसल, दुनिया में एक ऐसा देश हैं जहां लोग अपने परिजन की लाशों को दफ्नाते नहीं है और ना ही जलाते हैं। मौत के बाद लोग अपने परिजनों को घरों में ही रखते हैं और उनके साथ आम व्यवहार करते हैं। लोग उनके साथ बातचीत करते हैं और उनका खयाल रखते हैं।

    इस देश में है मुर्दों का शहर

    आपको बता दें इंडोनेशिया का तारोजा गांव है जहां एक अजीब परंपरा है। इस गांव में अगर किसी की मौत हो जाती है तो उसका अंतिम संस्कार नहीं किया जाता बल्कि उसे ममी बना दिया जाता है। शवों को बहुत अच्छे से रखा जाता है। और उनसे बात की जाती है, उन्हें खाना खिलाया जाता है जैसे वो जिंदा हो।

    मृतकों के परिजनों को न सिर्फ घर में रखा जाता है बल्कि उन्हें पानी, खाना और यहां तक कि सिगरेट भी दी जाती है। ऐसा भी कहा जाता है कि हर साल अगस्त में ममी बनाकर कब्र में रखे गए शवों को बाहर निकाला जाता है। सभी शवों को साफ करके उनका मेकअप किया जाता है।

    मृतकों से बात करते हैं

    कब्र से बाहर निकालने के बाद शवों की तस्वीरें ली जाती हैं और लोग उनसे बात करते हैं। वहां के लोगों का मानना है कि इंसान कभी नहीं मरता बल्कि आराम करता है। जो इंसान आपसे प्यार करता है वो आपको कभी नहीं छोड़ता। ऐसा छोटे बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी के साथ होता है।

  • कहीं कदमों की आहट, कहीं चीखों की गूंज… भारत की 7 सबसे डरावनी जगहें, जहां रात होते ही बढ़ जाता है खौफ

    कहीं कदमों की आहट, कहीं चीखों की गूंज… भारत की 7 सबसे डरावनी जगहें, जहां रात होते ही बढ़ जाता है खौफ

    कहीं कदमों की आहट, कहीं चीखों की गूंज… भारत की 7 सबसे डरावनी जगहें, जहां रात होते ही बढ़ जाता है खौफ

    Haunted Places In India: सोचिए… आप किसी सुनसान किले के भीतर खड़े हैं. चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है. अचानक किसी के कदमों की आहट सुनाई देती है, लेकिन आसपास कोई दिखाई नहीं देता. हवा बिल्कुल शांत है, फिर भी खिड़की अपने आप बंद हो जाती है. दूर कहीं से चूड़ियों की खनक सुनाई देती है और ऐसा महसूस होता है जैसे कोई आपको लगातार देख रहा हो. यह किसी हॉरर फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि भारत की उन जगहों से जुड़ी कहानियां हैं जिन्हें लोग सालों से रहस्यमयी और भूतिया मानते आ रहे हैं.

    भारत अपने ऐतिहासिक किलों, प्राचीन मंदिरों और पुरानी इमारतों के लिए दुनियाभर में मशहूर है. लेकिन इन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों के बीच कुछ ऐसी जगहें भी मौजूद हैं, जिनका नाम सुनते ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं. इन स्थानों को लेकर कई रहस्यमयी किस्से प्रचलित हैं. दावा किया जाता है कि यहां अजीब आवाजें सुनाई देती हैं, परछाइयां दिखाई देती हैं और कई लोगों ने यहां किसी अनजान मौजूदगी को महसूस करने की बात भी कही है. हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन इन जगहों से जुड़ी कहानियां आज भी लोगों को रोमांचित और हैरान करती हैं.

    भानगढ़ का किला, राजस्थान

    राजस्थान का भानगढ़ किला देश की सबसे चर्चित रहस्यमयी जगहों में गिना जाता है. इस किले को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं. स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां रात के समय अजीब आवाजें सुनाई देती हैं. कभी किसी के चीखने जैसी आवाज आती है तो कभी चूड़ियों की खनक सुनाई देती है. इन्हीं वजहों से यहां सूर्यास्त के बाद प्रवेश की अनुमति नहीं है. हालांकि दिन के समय बड़ी संख्या में पर्यटक इस ऐतिहासिक किले को देखने पहुंचते हैं.

    कुलधरा गांव, राजस्थान

    जैसलमेर के पास स्थित कुलधरा गांव वर्षों से वीरान पड़ा हुआ है. कहा जाता है कि यहां रहने वाले पालीवाल ब्राह्मण एक ही रात में गांव छोड़कर चले गए थे. स्थानीय कथाओं के अनुसार, गांव छोड़ने से पहले उन्होंने इस जगह को श्राप दिया था कि यहां कभी कोई बस नहीं पाएगा. आज भी यह गांव पूरी तरह सुनसान है और इसे लेकर कई रहस्यमयी कहानियां सुनने को मिलती हैं. कई लोगों का दावा है कि यहां उन्हें किसी की मौजूदगी का एहसास हुआ है.

    अग्रसेन की बावली, दिल्ली

    दिल्ली के बीचों-बीच स्थित अग्रसेन की बावली अपनी ऐतिहासिक वास्तुकला के साथ-साथ रहस्यमयी कहानियों के लिए भी जानी जाती है. कहा जाता है कि इसकी 108 सीढ़ियां उतरते समय कुछ लोगों को अजीब बेचैनी और डर महसूस होता है. कई लोगों ने यहां फुसफुसाहट जैसी आवाजें सुनने और परछाइयां देखने का दावा भी किया है. यही वजह है कि इसे देश की सबसे चर्चित भूतिया जगहों में गिना जाता है.

    मुकेश मिल्स, मुंबई

    मुंबई की मुकेश मिल्स भी रहस्यमयी कहानियों के कारण काफी चर्चा में रहती है. यह मिल 1980 में आग लगने के बाद बंद हो गई थी. आज भी यहां फिल्मों और टीवी शो की शूटिंग होती है, लेकिन कई कलाकारों और तकनीशियनों ने यहां अजीब घटनाएं महसूस करने की बात कही है. कुछ लोगों का दावा है कि उन्हें शूटिंग के दौरान किसी अनजान मौजूदगी का एहसास हुआ.

    डुमस बीच, गुजरात

    अरब सागर के किनारे स्थित डुमस बीच अपनी काली रेत और रहस्यमयी कहानियों के लिए जाना जाता है. स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता काफी लोकप्रिय है कि यहां रात के समय अजीब फुसफुसाहट सुनाई देती है. इसी वजह से यह बीच देश की सबसे चर्चित डरावनी जगहों में शामिल किया जाता है. हालांकि दिन में यहां बड़ी संख्या में पर्यटक घूमने आते हैं.

    रामोजी फिल्म सिटी, हैदराबाद

    दुनिया के सबसे बड़े फिल्म स्टूडियो कॉम्प्लेक्स में शामिल रामोजी फिल्म सिटी भी कई रहस्यमयी कहानियों का हिस्सा रही है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जिस जमीन पर यह फिल्म सिटी बनी है वहां कभी युद्ध हुआ था. इसी वजह से यहां आत्माओं के भटकने की कहानियां सुनाई जाती हैं. कई लोगों ने यहां ड्रेसिंग रूम और शूटिंग सेट के आसपास अजीब घटनाएं महसूस करने का दावा किया है.

    रहस्य और रोमांच का अनोखा संगम

    भारत की ये जगहें इतिहास, लोककथाओं और रहस्यमयी किस्सों का अनोखा मिश्रण हैं. कुछ लोग इन्हें केवल अफवाह मानते हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने यहां खुद अजीब अनुभव किए हैं. सच चाहे जो भी हो, लेकिन इन जगहों से जुड़ी कहानियां आज भी लोगों के मन में उत्सुकता और रोमांच पैदा करती हैं. यही कारण है कि हर साल हजारों पर्यटक इन रहस्यमयी स्थलों को करीब से देखने पहुंचते हैं.

  • दुनिया के 13 ऐसे इंसान जिनके पास थीं असली ‘सुपरपावर’, जानकर रह जाएंगे हैरान

    दुनिया के 13 ऐसे इंसान जिनके पास थीं असली ‘सुपरपावर’, जानकर रह जाएंगे हैरान

    दुनिया के 13 ऐसे इंसान जिनके पास थीं असली ‘सुपरपावर’, जानकर रह जाएंगे हैरान

    क्या सुपरपावर सिर्फ फिल्मों और कॉमिक्स तक ही सीमित हैं? आमतौर पर हम सुपरहीरो को उड़ते, भारी वजन उठाते या असाधारण ताकत दिखाते हुए देखते हैं। लेकिन दुनिया में कुछ ऐसे वास्तविक लोग भी हुए हैं, जिनकी क्षमताएं किसी सुपरपावर से कम नहीं थीं। किसी को अत्यधिक ठंड का असर नहीं होता, कोई बिना आंखों के भी रास्ता पहचान लेता है, तो किसी की याददाश्त कंप्यूटर से भी तेज होती है।

    आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ असाधारण लोगों के बारे में।

    1. विम हॉफ (Wim Hof) – द आइसमैन

    नीदरलैंड के विम हॉफ को “द आइसमैन” के नाम से जाना जाता है। उन्होंने अत्यधिक ठंड में रहने के कई विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं। बर्फ से ढके वातावरण में लंबी दूरी तक दौड़ना, ठंडे पानी में लंबे समय तक रहना और कठिन परिस्थितियों में पर्वतारोहण करना उनकी पहचान है। उनकी विशेष श्वास तकनीक और मानसिक नियंत्रण ने उन्हें दुनिया भर में प्रसिद्ध बना दिया।

    2. वेलु रथाकृष्णन (Velu Rathakrishnan)

    मलेशिया के वेलु रथाकृष्णन ने अपने दांतों की ताकत से भारी ट्रेन खींचकर लोगों को हैरान कर दिया। उन्होंने अपने दांतों की मदद से सैकड़ों टन वजन वाली ट्रेन को कई फीट तक खींचने का रिकॉर्ड बनाया।

    3. बेन अंडरवुड (Ben Underwood)

    महज दो साल की उम्र में आंखों की रोशनी खोने के बावजूद बेन ने हार नहीं मानी। उन्होंने चमगादड़ों की तरह Echolocation तकनीक विकसित कर ली, जिसमें जीभ से आवाज निकालकर आसपास की वस्तुओं का पता लगाया जाता है। इसी क्षमता की मदद से वे साइकिल चलाते, फुटबॉल खेलते और सामान्य जीवन जीते थे।

    4. डेनियल ब्राउनिंग स्मिथ (Daniel Browning Smith)

    डेनियल को दुनिया का सबसे लचीला इंसान माना जाता है। उनका शरीर इतनी आसानी से मुड़ जाता है कि लोग उन्हें “रबर बॉय” के नाम से जानते हैं। यह क्षमता एक दुर्लभ चिकित्सीय स्थिति के कारण विकसित हुई।

    5. स्टीफन विल्टशायर (Stephen Wiltshire)

    ब्रिटेन के स्टीफन विल्टशायर की याददाश्त बेहद असाधारण है। वे किसी शहर को कुछ मिनट देखने के बाद उसकी बेहद सटीक और विस्तृत पेंटिंग बना सकते हैं। उनकी यह प्रतिभा पूरी दुनिया में सराही जाती है।

    6. लियाम होएक्स्ट्रा (Liam Hoekstra)

    अमेरिका के लियाम बचपन से ही असाधारण शारीरिक ताकत के लिए प्रसिद्ध हुए। कम उम्र में ही उनके शरीर में सिक्स-पैक दिखाई देने लगे थे। डॉक्टरों के अनुसार उन्हें एक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति थी, जिसके कारण उनके शरीर में सामान्य से अधिक मांसपेशियां विकसित होती थीं।

    7. मिशेल लोटिटो (Michel Lotito)

    फ्रांस के मिशेल लोटिटो अपनी अनोखी खाने की आदत के कारण दुनिया भर में मशहूर हुए। वे धातु, कांच, रबर और कई ऐसी चीजें खा लेते थे जिन्हें सामान्य इंसान खा ही नहीं सकता। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार उनके पाचन तंत्र की संरचना सामान्य लोगों से अलग थी।

    8. प्रहलाद जानी (Prahlad Jani)

    भारत के प्रहलाद जानी ने दावा किया था कि उन्होंने कई दशकों तक बिना भोजन और पानी के जीवन बिताया। इस दावे की जांच के लिए उन पर चिकित्सकीय निगरानी में कई परीक्षण किए गए, जिनकी काफी चर्चा हुई। हालांकि, उनके दावों को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में अलग-अलग मत रहे हैं।

    9. थाई न्गोक (Thai Ngoc)

    वियतनाम के थाई न्गोक ने दावा किया कि वे कई दशकों तक सोए बिना सामान्य जीवन जीते रहे। यह मामला चिकित्सा जगत में भी चर्चा का विषय बना रहा।

    10. शकुंतला देवी (Shakuntala Devi)

    भारत की महान गणितज्ञ शकुंतला देवी को “ह्यूमन कंप्यूटर” कहा जाता था। वे बेहद कठिन गणितीय सवालों का जवाब कुछ ही सेकंड में मानसिक गणना से दे देती थीं। उनकी इस अद्भुत प्रतिभा के कारण उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ।

    11. लियू थाउ लिन (Liew Thow Lin)

    मलेशिया के लियू थाउ लिन को “मैग्नेट मैन” कहा जाता था। वे अपने शरीर पर धातु की भारी वस्तुएं चिपका लेते थे। वैज्ञानिकों के अनुसार यह किसी चुंबकीय शक्ति की वजह से नहीं, बल्कि उनकी त्वचा की विशेष सतह के कारण संभव होता था।

    12. डीन कार्नाजेस (Dean Karnazes)

    अमेरिका के अल्ट्रा मैराथन धावक डीन कार्नाजेस अपनी अद्भुत सहनशक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने बिना रुके सैकड़ों किलोमीटर तक दौड़ पूरी कर दुनिया को चौंका दिया। उन्हें दुनिया के सबसे बेहतरीन एंड्यूरेंस एथलीट्स में गिना जाता है।

    13. वेरोनिका साइडर (Veronica Seider)

    जर्मनी की वेरोनिका साइडर की दृष्टि सामान्य इंसानों की तुलना में कई गुना अधिक तेज बताई जाती है। कहा जाता है कि वे बहुत दूर मौजूद वस्तुओं को भी स्पष्ट रूप से पहचान सकती थीं।

    क्या ये सचमुच सुपरपावर हैं?

    इन सभी लोगों की क्षमताएं किसी फिल्मी सुपरहीरो जैसी जरूर लगती हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश मामलों के पीछे जैविक विशेषताएं, वर्षों की मेहनत, अभ्यास या दुर्लभ चिकित्सीय स्थितियां थीं। इसलिए इन्हें जादुई शक्तियां नहीं, बल्कि असाधारण मानवीय क्षमताएं कहना अधिक उचित होगा।

    निष्कर्ष

    मानव शरीर और मस्तिष्क की क्षमता हमारी कल्पना से कहीं अधिक है। इतिहास में कई ऐसे लोग हुए हैं जिन्होंने अपनी अनोखी प्रतिभा, कड़ी मेहनत या दुर्लभ शारीरिक विशेषताओं से दुनिया को हैरान कर दिया। यही वजह है कि आज भी इन लोगों को वास्तविक जीवन के “सुपरह्यूमन” के रूप में याद किया जाता है।

  • रिंग सेरेमनी हुई, फिर दुल्हन पक्ष हुआ फरार! शादी के नाम पर 18 लाख और जेवर की ठगी..

    रिंग सेरेमनी हुई, फिर दुल्हन पक्ष हुआ फरार! शादी के नाम पर 18 लाख और जेवर की ठगी..

    रिंग सेरेमनी हुई, फिर दुल्हन पक्ष हुआ फरार! शादी के नाम पर 18 लाख और जेवर की ठगी..

    हिमाचल प्रदेश। शादी का रिश्ता तय कर परिवार का विश्वास जीतने के बाद करीब 18 लाख रुपये नकद और लाखों रुपये के सोने के आभूषण ठगने का मामला सामने आया है। शिकायत मिलने पर पुलिस चौकी अवाहदेवी ने जांच शुरू कर दी है।

    संगरोह गांव निवासी कुसुम लता ने पुलिस को बताया कि युवती के भाई ने अपना पता कांगड़ा बस स्टैंड के पास का बताया था। दोनों परिवारों की सहमति से 20 जून को चंडीगढ़ में रिंग सेरेमनी हुई, जिसमें वर पक्ष ने होने वाली दुल्हन को सोने के आभूषण और महंगे उपहार दिए। इसके बाद 12 जुलाई को शादी की तारीख तय की गई।

    आरोप है कि रिंग सेरेमनी के बाद दुल्हन पक्ष ने व्यापार में निवेश और अन्य जरूरी खर्चों का हवाला देकर अलग-अलग किस्तों में गूगल पे के जरिए करीब 18 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। सात जुलाई को युवती के भाई ने फोन कर बताया कि कनाडा में उनके मामा का निधन हो गया है और उन्हें तत्काल वहां जाना पड़ रहा है। इसके बाद उसका मोबाइल फोन बंद हो गया।

    11 जुलाई को जब वर पक्ष ने संबंधित मैरिज पैलेस में जानकारी ली तो पता चला कि 12 जुलाई के नाम से वहां कोई बुकिंग ही नहीं थी। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

    सात फेरे के कुछ घंटे बाद ही टूटा रिश्ता

    उधर, जिला ऊना के अंबोटा गांव में विवाह का एक अनोखा मामला सामने आया। बगलामुखी मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न होने के बाद दुल्हन ने ससुराल जाने से इनकार कर दिया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों परिवारों के बीच बातचीत कराई गई। काफी देर तक चली चर्चा के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया। मामला शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया।

  • कारपेंटर के बेटे के खाते में अचानक आए 759 करोड़ रुपये, घबराया परिवार सीधे पहुंचा पुलिस स्टेशन

    कारपेंटर के बेटे के खाते में अचानक आए 759 करोड़ रुपये, घबराया परिवार सीधे पहुंचा पुलिस स्टेशन

    कारपेंटर के बेटे के खाते में अचानक आए 759 करोड़ रुपये, घबराया परिवार सीधे पहुंचा पुलिस स्टेशन

    . पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में 10वीं का स्टूडेंट उस समय हैरान रह गया, जब उसे पता चला कि उसके अकाउंट में अचानक 759 करोड़ रुपए आ गए। जब उसने यह बात अपने परिवार को बताई तो सब डर गए और सीधे पुलिस के पास पहुंचे और पूरी जानकारी दी।

    स्टूडेंट चंद्रकांत देबनाथ कूचबिहार से 35 किलोमीटर दूर दिन्हाटा के अतियाबारी का रहने वाला है। उसके पिता कारपेंटर हैं। वह शनिवार को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में अपने अकाउंट से 500 रुपए निकालने पहुंचा था। पैसे निकालने के बाद चंद्रकांत ने अपने अकाउंट का बैलेंस चेक किया। वह यह देखकर चौंक गया कि उसके अकाउंट में 759 करोड़ रुपए जमा हैं।

    अकाउंट में इतने पैसे देखकर मैं डर गया- चंद्रकांत
    द टेलिग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रकांत डरकर अपने घर पहुंचा और परिवार के लोगों को इसकी जानकारी दी। उसने बताया- मुझे समझ नहीं आ रहा कि मेरे खाते में इतनी बड़ी रकम कैसे जमा हो गई। मैं बहुत डर गया हूं। मैंने शनिवार को पुलिस स्टेशन में इसकी जानकारी दी।

    उधर, चंद्रकांत और उसके परिवार के लोगों ने बैंक के भी संपर्क किया, लेकिन शनिवार और रविवार होने की वजह से बैंक बंद थी और संपर्क नहीं हो पाया। दिन्हाटा पुलिस ने चंद्रकांत से लिखित में शिकायत देने के लिए कहा है।

    पूरे जीवन में इतनी रकम नहीं देखी- स्टूडेंट के पिता
    चंद्रकांत के पिता नीलकंठ ने कहा- मैंने अपने जीवन में इतनी बड़ी रकम न देखी है और न ही सुनी है। इस घटना से हम सब घबराए हुए हैं। हम किसी भी तरह की कानूनी या आर्थिक परेशानी में नहीं पड़ना चाहते, इसीलिए हमने पुलिस से संपर्क किया है। हमने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दे दी है। परिवार ने इस बात की तुरंत जांच की मांग की है कि देबनाथ के अकाउंट में इतनी बड़ी रकम कैसे आई। कुछ लोगों का मानना ​​है कि किसी तकनीकी या सॉफ्टवेयर गड़बड़ी के चलते यह सब हुआ।

  • गामा पहलवान की कहानी: रोज 5,000 बैठक, 3,000 दंड और अभ्यास में 40 पहलवानों को पटकने वाला ‘रुस्तम-ए-हिंद’

    गामा पहलवान की कहानी: रोज 5,000 बैठक, 3,000 दंड और अभ्यास में 40 पहलवानों को पटकने वाला ‘रुस्तम-ए-हिंद’

    गामा पहलवान की कहानी: रोज 5,000 बैठक, 3,000 दंड और अभ्यास में 40 पहलवानों को पटकने वाला ‘रुस्तम-ए-हिंद’

    भारतीय कुश्ती के इतिहास में जब भी महान पहलवानों का जिक्र होता है, तो सबसे पहले जिन नामों में एक नाम लिया जाता है, वह है गामा पहलवान। उनका असली नाम गुलाम मोहम्मद बख्श बट (प्रचलित रूप से गुलाम हुसैन बख्श के नाम से भी उल्लेख मिलता है) था। अपनी असाधारण ताकत, अनुशासन और अजेय प्रदर्शन के कारण उन्हें ‘रुस्तम-ए-हिंद’, ‘रुस्तम-ए-जमां’ और ‘द ग्रेट गामा’ जैसे खिताब मिले।

    कहा जाता है कि अपने लंबे कुश्ती करियर में गामा पहलवान किसी भी आधिकारिक मुकाबले में पराजित नहीं हुए। यही वजह है कि आज भी उन्हें दुनिया के सबसे महान पहलवानों में गिना जाता है।

    बचपन से ही शुरू हो गई थी पहलवानी

    गामा पहलवान का जन्म 22 मई 1878 को तत्कालीन ब्रिटिश भारत के पंजाब क्षेत्र में हुआ था। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उनका पालन-पोषण परिवार के अन्य सदस्यों ने किया। कम उम्र से ही उन्हें कुश्ती और व्यायाम का प्रशिक्षण मिलने लगा। उनकी लगन और मेहनत ने उन्हें किशोरावस्था में ही पहचान दिलानी शुरू कर दी थी।

    ऐसी थी गामा पहलवान की ट्रेनिंग

    गामा की फिटनेस आज भी लोगों के लिए प्रेरणा है। विभिन्न ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, उनकी रोजाना की ट्रेनिंग बेहद कठिन होती थी।

    • प्रतिदिन लगभग 5,000 बैठक (Squats) लगाते थे।
    • करीब 3,000 दंड (Push-ups) करते थे।
    • अभ्यास के दौरान रोज लगभग 40 पहलवानों से कुश्ती लड़ते थे।
    • कई किलोमीटर दौड़ लगाना और भारी पत्थरों व लोहे के उपकरणों से अभ्यास उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।

    उनका मानना था कि लगातार अभ्यास ही किसी पहलवान की सबसे बड़ी ताकत होता है।

    गामा पहलवान की ताकत के चर्चे

    गामा की शारीरिक क्षमता को लेकर कई किस्से मशहूर हैं। कहा जाता है कि वे लगभग 95 किलोग्राम के भारी व्यायाम चक्र से अभ्यास करते थे। एक लोकप्रिय कथा के अनुसार, उन्होंने एक बार लगभग 1,200 किलोग्राम वजनी पत्थर को भी उठाया था। हालांकि, इस दावे के ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन यह उनकी असाधारण ताकत की लोकप्रिय कहानियों में शामिल है।

    क्या खाते थे गामा पहलवान?

    उनकी भारी-भरकम ट्रेनिंग के लिए भरपूर पोषण भी जरूरी था। विभिन्न स्रोतों में उनकी डाइट का उल्लेख इस प्रकार मिलता है—

    • कई लीटर दूध
    • देसी घी
    • मक्खन
    • मांस
    • बादाम और अन्य सूखे मेवे
    • ताजे मौसमी फल और फलों का रस

    उनका भोजन शरीर की ताकत और ऊर्जा बनाए रखने के लिए तैयार किया जाता था।

    विदेशी पहलवानों को भी दी मात

    गामा पहलवान ने भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इंग्लैंड सहित कई देशों में उन्होंने प्रसिद्ध पहलवानों को चुनौती दी और कई मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज की। उनकी तकनीक, ताकत और फुर्ती ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान दिलाया।

    क्यों कहलाए ‘रुस्तम-ए-हिंद’?

    भारत के कई दिग्गज पहलवानों को हराने के बाद गामा को ‘रुस्तम-ए-हिंद’ की उपाधि दी गई। यह सम्मान उस दौर में किसी भी पहलवान के लिए सबसे प्रतिष्ठित माना जाता था। इसके बाद उनका नाम पूरी दुनिया में ‘द ग्रेट गामा’ के रूप में प्रसिद्ध हो गया।

    विभाजन के बाद का जीवन

    भारत के विभाजन के बाद गामा पाकिस्तान चले गए। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बावजूद उन्होंने लंबे समय तक युवा पहलवानों को प्रशिक्षण दिया। बाद में उन्हें अस्थमा और हृदय रोग जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ा।

    23 मई 1960 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी उपलब्धियां आज भी कुश्ती प्रेमियों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।

    गामा पहलवान से जुड़ी रोचक बातें

    • अपने पूरे आधिकारिक कुश्ती करियर में अजेय रहने के लिए प्रसिद्ध हैं।
    • रोज हजारों दंड और बैठक लगाने के लिए जाने जाते थे।
    • अभ्यास के दौरान कई पहलवानों से लगातार कुश्ती लड़ते थे।
    • उनकी फिटनेस और अनुशासन आज भी पहलवानों के लिए प्रेरणा माने जाते हैं।
    • उन्हें भारतीय कुश्ती इतिहास के सबसे महान पहलवानों में गिना जाता है।

    निष्कर्ष

    गामा पहलवान सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास की जीती-जागती मिसाल थे। उनकी कड़ी ट्रेनिंग, अद्भुत ताकत और कभी हार न मानने वाले जज्बे ने उन्हें विश्वभर में पहचान दिलाई। आज भी जब महान पहलवानों की बात होती है, तो ‘द ग्रेट गामा’ का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।

  • चलो घर चलते हैं’… पति के इन शब्दों पर किया भरोसा, अगले ही पल हुआ कुछ ऐसा कि उड़ गए होश..

    चलो घर चलते हैं’… पति के इन शब्दों पर किया भरोसा, अगले ही पल हुआ कुछ ऐसा कि उड़ गए होश..

    चलो घर चलते हैं’… पति के इन शब्दों पर किया भरोसा, अगले ही पल हुआ कुछ ऐसा कि उड़ गए होश..

    उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खेरी जिले में एक अविश्वसनीय रूप से क्रूर घटना सामने आई है। एक पति ने अपनी पत्नी की नाक सिर्फ इसलिए काट दी क्योंकि वह अपने पैतृक स्थान जाने की जिद पर अड़ी थी। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। पत्नी के रिश्तेदार आए और बदले में पति की बहन की नाक भी (खेलते समय) काट दी गई, जिससे स्थानीय स्तर पर काफी हंगामा मच गया।

    पीड़िता की पत्नी प्रीति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उसने अपने पति श्रवण से कहा कि वह अपने पैतृक नगर जाएगी क्योंकि रविवार को उसकी चचेरी बहन की शादी है। हालांकि, पति ने मना कर दिया। जब प्रीति ने पैतृक नगर जाने की जिद की, तो क्रोधित श्रवण ने अपनी पत्नी पर हमला कर दिया और ब्लेड से उसकी नाक काट दी।

    दांतों से हमला… लड़की से बदला!

    प्रीति की नाक उसके पति के हमले में कटकर खून से लथपथ हो गई, जिसकी जानकारी उसके परिजनों को मिली। क्रोधित होकर प्रीति के परिवारवाले और रिश्तेदार बड़ी संख्या में श्रवण के घर पहुंचे। वहां उन्होंने श्रवण को सबक सिखाने के लिए उसकी बहन मोनी पर दांतों से बेरहमी से हमला किया। बाद में मोनी की नाक भी बेरहमी से काट दी गई। इस हिंसक झड़प के बाद दोनों पक्षों ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। गंभीर रूप से घायल पत्नी प्रीति और उसके पति की बहन मोनी दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल पुलिस इस नाक काटने के मामले में जांच तेज कर चुकी है।

  • हर मॉल, होटल और ऑफिस की लिफ्ट में शीशा क्यों होता है? जानिए इसका साइंस

    हर मॉल, होटल और ऑफिस की लिफ्ट में शीशा क्यों होता है? जानिए इसका साइंस

    हर मॉल, होटल और ऑफिस की लिफ्ट में शीशा क्यों होता है? जानिए इसका साइंस

    ऑफिस, अस्पताल, होटल, मॉल या किसी ऊंची इमारत की लिफ्ट में आपने एक बात जरूर नोटिस की होगी अंदर लगभग हमेशा शीशा लगा होता है। पहली नजर में यह केवल सजावट का हिस्सा लगता है, लेकिन वास्तव में इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। यह न सिर्फ लिफ्ट को आकर्षक बनाता है, बल्कि सुरक्षा, सुविधा और लोगों की मानसिक सहजता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है। आइए जानते हैं कि लिफ्ट में शीशा लगाने के पीछे क्या-क्या वजहें हैं।

    व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए आसान आवागमन

    छोटी लिफ्ट में व्हीलचेयर को घुमाना या पीछे की ओर निकालना आसान नहीं होता। ऐसे में शीशा पीछे का दृश्य दिखा देता है, जिससे बिना बार-बार मुड़े व्यक्ति आसानी से दिशा बदल सकता है और सुरक्षित तरीके से बाहर निकल सकता है। यह विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए काफी उपयोगी सुविधा है।

    बंद जगह का डर कम करने में मदद

    कुछ लोगों को बंद या संकरी जगहों में घबराहट महसूस होती है, जिसे क्लॉस्ट्रोफोबिया कहा जाता है। शीशा लिफ्ट के अंदर की जगह को देखने में अधिक बड़ी और खुली महसूस कराता है। इससे मानसिक दबाव कम होता है और यात्रा अधिक आरामदायक लगती है।

    बढ़ाता है सुरक्षा की भावना

    शीशे की मदद से लिफ्ट के भीतर मौजूद सभी लोगों और आसपास की गतिविधियों पर आसानी से नजर रखी जा सकती है। इससे पीछे खड़े व्यक्ति या दरवाजे के पास मौजूद लोगों को देखना आसान हो जाता है। यह पारदर्शिता लोगों को अधिक सुरक्षित महसूस कराती है और असहज परिस्थितियों की संभावना भी घटाती है।

    कम उबाऊ बनाता है सफर

    लिफ्ट की यात्रा भले ही कुछ सेकंड की हो, लेकिन कई बार यह लंबी लग सकती है। ऐसे में लोग अनायास ही अपने प्रतिबिंब को देखने लगते हैं, जिससे उनका ध्यान समय पर कम जाता है। परिणामस्वरूप सफर अधिक सहज और कम नीरस महसूस होता है।

    रोशनी और सुंदरता में इजाफा

    शीशा प्रकाश को परावर्तित करता है, जिससे लिफ्ट का केबिन अधिक उजला और खुला दिखाई देता है। इससे छोटी जगह भी बड़ी और साफ-सुथरी महसूस होती है। यही कारण है कि आधुनिक इमारतों में शीशे का उपयोग इंटीरियर को बेहतर बनाने के लिए भी किया जाता है।

    रोजमर्रा की छोटी जरूरतों में मददगार

    बहुत से लोग लिफ्ट में प्रवेश करते ही अपने कपड़े, बाल या चेहरे को एक बार देख लेते हैं। यह एक छोटी लेकिन उपयोगी सुविधा है। साथ ही, शीशे के कारण लोग एक-दूसरे की स्थिति आसानी से देख पाते हैं, जिससे टकराने या धक्का लगने की संभावना भी कम हो जाती है।

  • जोमैटो डिलीवरी पार्टनर की मजबूरी सुन भावुक हुआ ग्राहक, तुरंत बुक कर दी फ्लाइट टिकट..

    जोमैटो डिलीवरी पार्टनर की मजबूरी सुन भावुक हुआ ग्राहक, तुरंत बुक कर दी फ्लाइट टिकट..

    एक ग्राहक ने मां की गंभीर हालत से परेशान जोमैटो डिलीवरी पार्टनर के लिए 4 हजार रुपये का हवाई टिकट बुक कराया. यह मदद समय पर बेटे को मां तक पहुंचाने में काम आई और सोशल मीडिया पर खूब सराही गई.

    जोमैटो डिलीवरी पार्टनर की मजबूरी सुन भावुक हुआ ग्राहक, तुरंत बुक कर दी फ्लाइट टिकट..

     कभी-कभी इंसानियत का सबसे बड़ा परिचय किसी बड़ी दौलत से नहीं, बल्कि सही समय पर बढ़ाए गए एक छोटे से हाथ से मिलता है. ऐसा ही एक भावुक मामला सामने आया, जहां एक जोमैटो डिलीवरी पार्टनर अपनी मां की गंभीर हालत को लेकर परेशान था. उसी दौरान एक ग्राहक ने उसकी परेशानी समझी और बिना देर किए उसके लिए करीब 4 हजार रुपये का हवाई टिकट बुक कर दिया. यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हजारों लोगों का दिल जीत रही है.

    इस घटना को एक्स यूजर अंकित पांडे ने साझा किया. उन्होंने बताया कि डिलीवरी पार्टनर पहले भी कई बार उनके घर आ चुका था, इसलिए वह उसे पहचानते थे. खाना देने के बाद डिलीवरी पार्टनर ने झिझकते हुए एक गिलास पानी मांगा. अंकित ने उसे अंदर बुलाया. तभी उन्होंने देखा कि उसकी आंखें लाल थीं और वह काफी परेशान दिखाई दे रहा था.

    मां की हालत सुनकर लिया बड़ा फैसला

    बातचीत के दौरान डिलीवरी पार्टनर ने बताया कि सुबह उसकी मां सीढ़ियों से गिर गई थीं और आईसीयू में भर्ती हैं. उसके पास घर जाने के लिए सिर्फ रात की ट्रेन थी, जिससे पहुंचने में करीब 30 घंटे लगते. उसे डर था कि शायद वह समय पर मां से नहीं मिल पाएगा. यह सुनकर अंकित ने पहले उसे अपने साथ खाना खिलाया और फिर इंटरनेट पर फ्लाइट खोजनी शुरू कर दी.

      4 हजार रुपये का टिकट कराया बुक

      अंकित को करीब 4 हजार रुपये का हवाई टिकट मिला और उन्होंने तुरंत उसे बुक कर दिया. जब डिलीवरी पार्टनर ने कहा कि वह पहले कभी हवाई अड्डे नहीं गया, तो अंकित ने भरोसा दिलाया कि उनका एक दोस्त वहां उसकी मदद करेगा. कुछ घंटों बाद वह सुरक्षित अपने घर पहुंच गया और अपनी मां से मिल सका.

      अगले दिन आई खुशखबरी

      अगली सुबह डिलीवरी पार्टनर का फोन आया. उसने बताया कि डॉक्टरों के अनुसार उसकी मां अब खतरे से बाहर हैं और कुछ दिनों में अस्पताल से घर लौट सकती हैं. उसने टिकट पर खर्च हुए पूरे 4 हजार रुपये वापस भी भेज दिए. हालांकि अंकित ने वह रकम फिर लौटा दी और कहा कि इसका इस्तेमाल मां के इलाज और अस्पताल के खर्च में किया जाए.

      सोशल मीडिया पर मिली जमकर सराहना

      अंकित ने अपनी पोस्ट में लिखा कि किसी की जिंदगी बदलने के लिए हमेशा बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती. कई बार एक गिलास पानी, एक वक्त का खाना और घर पहुंचने का एक टिकट ही किसी के लिए सबसे बड़ी उम्मीद बन जाता है. यह कहानी वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अंकित की जमकर तारीफ की और इसे इंसानियत की मिसाल बताया.