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  • भारत का ऐसा इलाका जहां भरोसे पर टिका है कारोबार, दुकानों में नहीं बैठता कोई दुकानदार..?

    भारत का ऐसा इलाका जहां भरोसे पर टिका है कारोबार, दुकानों में नहीं बैठता कोई दुकानदार..?

    जहां आज के समय में धोखधड़ी के मामले इतने बढ़ गए हैं कि लोगों को अपनों पर भी विश्वास नहीं होता, वहीं भारत के नागालैंड में आज भी राम राज्य चल रहा है. यहां लोग इतने ईमानदार हैं कि दुकानों में दुकानदार के रहने की जरुरत नहीं होती. लोग अपनी जरुरत की चीजों को उठाकर स्कैनर में या कैशबॉक्स में पैसे डाल देते हैं.

    भारत का ऐसा इलाका जहां भरोसे पर टिका है कारोबार, दुकानों में नहीं बैठता कोई दुकानदार..?

    आज कलियुग चल रहा है. राम राज्य में लोग काफी ईमानदार होते थे. उस समय चोरी, धोखेबाजी जैसी चीजें नहीं थी. लेकिन अब इसकी बस कल्पना ही की जा सकती है. लेकिन भारत के नागालैंड में आपको ऐसा नजारा देखने को मिलेगा, जिसके बाद लगेगा कि यहां आज भी राम राज्य चल रहा है. यहां लोग इतने ईमानदार हैं कि दुकानों में दुकानदार के रहने की जरुरत नहीं होती.

    सोशल मीडिया पर नागालैंड घूमने आए कई टूरिस्ट्स इसका वीडियो बनाकर शेयर करते हैं. यहां आपको कई दुकानें मिल जाएगी, जहां सामान रखा है लेकिन कोई दुकानदार नहीं है. लोग अपनी जरुरत की चीजों को उठाकर स्कैनर में या कैशबॉक्स में पैसे डाल देते हैं. नागालैंड की यह अनोखी ईमानदारी पूरे देश के लिए मिसाल है. खासकर छोटे गांवों और कुछ शहरों की दुकानों में यह व्यवस्था आम है. पर्यटक जब यहां घूमने जाते हैं तो इस सिस्टम को देखकर हैरान रह जाते हैं/

    कैसे चलती है दुकान?
    यहां कई दुकानें हैं जो दिनभर खुली रहती है. यहां सामान रखा रहता है. ग्राहक खुद दुकान में घुसकर सामान चुनता है. कीमत चेक करने के लिए स्कैनर या प्राइस लिस्ट का इस्तेमाल करता है. इसके बाद पैसे कैशबॉक्स में डालता है या ऑनलाइन पेमेंट करता है. अगर जरूरत हो तो चेंज खुद ले लेता है. दुकानदार आसपास के काम में व्यस्त रहता है. शाम को गिनती करके देखता है कि सब ठीक है. चोरी के मामले बेहद कम या ना के बराबर होते हैं.

    नागालैंड की संस्कृति और ईमानदारी
    नागालैंड पूर्वोत्तर भारत का एक सुंदर राज्य है. यहां की जनजातियां अपनी परंपराओं, ईमानदारी और सामुदायिक जीवन के लिए जानी जाती हैं. लोग एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं. सामुदायिक मूल्य इतने मजबूत हैं कि कोई गलत काम करने से पहले दस बार सोचता है. यहां अपराध दर भी कम है. पर्यटक बताते हैं कि ना सिर्फ दुकानें बल्कि अन्य सेवाओं में भी यह भरोसा दिखता है. टैक्सी वाले सही किराया लेते हैं, होमस्टे मालिक अतिरिक्त चार्ज नहीं करते. यह व्यवस्था आधुनिक दुनिया में विरले ही देखने को मिलती है.

  • आपने कुछ नहीं पहना है…’ फिटनेस इन्फ्लुएंसर के कपड़ों पर भद्दे कमेंट्स, अंडरगारमेंट्स तक पर उठाए सवाल…

    आपने कुछ नहीं पहना है…’ फिटनेस इन्फ्लुएंसर के कपड़ों पर भद्दे कमेंट्स, अंडरगारमेंट्स तक पर उठाए सवाल…

    आपने कुछ नहीं पहना है…’ फिटनेस इन्फ्लुएंसर के कपड़ों पर भद्दे कमेंट्स, अंडरगारमेंट्स तक पर उठाए सवाल…

    25 वर्षीय इस पर्सनैलिटी एड्डा एलिसा पिल्ज़ ने टिकटॉक पर कंपनी की आलोचना की और बताया कि उन्हें एयरपोर्ट पर गेट पर रोका गया और कहा गया कि वह ‘नग्न’ लग रही थीं

    ‘आपने कुछ नहीं पहना है, बिल्कुल… लग रही हो’ खूबसूरत फिटनेस इन्फ़्लुएंसर के अंडरगारमेंट्स तक पर उठाए सवाल

    Edda Elisa Pilz: जर्मन फ़िटनेस इन्फ़्लुएंसर ने लुफ़्थान्सा एयरलाइन की यह कहते हुए आलोचना की है कि उन्हें कम कपड़े वाली स्पोर्ट्स ब्रा पहनने के कारण प्लेन में चढ़ने से रोका गया. यहां तक कहा गया कि आप नग्न हैं! जर्मन फ़िटनेस इन्फ़्लुएंसर एड्डा एलिसा पिल्ज़ ने सोशल मीडिया पर लुफ़्थान्सा की आलोचना करते हुए कहा कि स्पोर्ट्स ब्रा और बाइकर शॉर्ट्स पहने होने के कारण उन्हें एयरलाइन के प्लेन में चढ़ने से रोक दिया गया. सोशल मीडिया टिकटॉक पर कंपनी की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें एयरपोर्ट पर गेट पर ही रोक दिया गया और कहा गया कि वह ‘नग्न’ लग रही हैं.

    स्पोर्ट्स ड्रेस में थीं इन्फ़्लुएंसर

    जर्मन भाषा में अपने ऑनलाइन दर्शकों से बात करते हुए 25 वर्षीय जर्मन फ़िटनेस इन्फ़्लुएंसर ने दावा किया कि लुफ़्थान्सा के एक कर्मचारी ने उन्हें प्लेन में चढ़ने से मना कर दिया. जब उन्होंने कारण पूछा, तो प्रतिनिधि ने जवाब दिया ‘आपने कुछ नहीं पहना है. आप नग्न हैं!’  एड्डा एलिसा पिल्ज़ यात्रा के क्रम में सुनहरे बालों के साथ स्किन-टाइट काले शॉर्ट्स और काली ट्रिम वाली लो-कट सफ़ेद ब्रा पहने पहुंची थीं. उन्होंने ग्रे रंग की क्रॉप्ड स्वेटशर्ट भी पहनी थी.

    प्लेन में चढ़ने से रोका

    एड्डा एलिसा पिल्ज़ का कहना है कि उनकी पोशाक सामान्य एथलेटिक-वियर थी, लेकिन उन्हें जैकेट पहनने और उसे पूरी तरह से ज़िप करने के लिए कहा गया. इसके बाद सोशल मीडिया पर लुफ़्थान्सा की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि स्पोर्ट्स ब्रा और बाइकर शॉर्ट्स पहने होने के कारण उन्हें एयरलाइन के प्लेन में चढ़ने से रोक दिया गया.

    सामने आई लुफ्थांसा एयरलाइंस की सफाई

    एड्डा ने बताया कि जहां वह थीं, वहां पर अधिकतम  तापमान 30 डिग्री सेल्सियस या लगभग 86 डिग्री फ़ारेनहाइट था. उन्होंने कहा कि उन्हें गेट एजेंट के ड्रेस कोड बताने के तरीके से दिक्कत थी, न कि खुद ड्रेस कोड से. उन्होंने तर्क दिया, ‘अगर नियम हैं, तो मैं उन्हें मानती हूँ। लेकिन फिर मुझे नियम दिखाए भी जाएं.

    वहीं, ‘मिरर’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, लुफ्थांसा ने जवाब दिया कि कर्मचारी द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए शब्द ‘हमारे मानकों के अनुरूप नहीं हैं’ और ‘उनके स्टाफ द्वारा इस्तेमाल नहीं किए गए होंगे.’ एयरलाइंस की ओर से यह भी कहा गया कि  कर्मचारियों को अपनी नौकरी में पॉलिसी लागू करते समय समझदारी से काम लेने की ट्रेनिंग दी जाती है. एयरलाइन ने कहा कि यात्रियों को ऐसे कपड़े पहनने चाहिए जो सार्वजनिक यात्रा के माहौल के अनुकूल हों. एड्ड के टिकटॉक पर 639,000 और इंस्टाग्राम पर 555,000 फॉलोअर्स हैं, उन्हें आखिरकार फ्लाइट में चढ़ने की इजाज़त मिल गई.

  • भारत के शहरों जैसे नाम, लेकिन देश है दूसरा! जानिए कहां बसे हैं आगरा-लखनऊ.?

    भारत के शहरों जैसे नाम, लेकिन देश है दूसरा! जानिए कहां बसे हैं आगरा-लखनऊ.?

    अगर आप दिल्ली-कोलकाता का नाम सुनेंगे, तो आपको लगेगा कि ये तो भारत के शहर हैं. आगरा, लखनऊ, मेरठ आदि भी भारत में मौजूद हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के अलावा एक ऐसा देश भी है, जहां ये सारे शहर आपको मिल जाएंगे. सोशल मीडिया पर मेलबर्न की सड़कों पर लगे बोर्ड्स देख हर भारतीय हैरान है.

    भारत के शहरों जैसे नाम, लेकिन देश है दूसरा! जानिए कहां बसे हैं आगरा-लखनऊ.?

    अगर आप दिल्ली-कोलकाता का नाम सुनेंगे, तो आपको लगेगा कि ये तो भारत के शहर हैं. आगरा, लखनऊ, मेरठ आदि भी भारत में मौजूद हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के अलावा एक ऐसा देश भी है, जहां ये सारे शहर आपको मिल जाएंगे. सोशल मीडिया पर मेलबर्न की सड़कों पर लगे बोर्ड्स देख हर भारतीय हैरान है.

    ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में भारतीय शहरों के नाम वाली कई सड़कें, सबर्ब्स और जगहें मौजूद हैं. दिल्ली रोड, कोलकाता स्ट्रीट, आगरा एवेन्यू, लखनऊ लेन, मेरठ क्रिसेंट जैसी जगहों के नाम भारतीयों को चौंकाते हैं. सोशल मीडिया पर इन बोर्ड्स की तस्वीरें वायरल हो रही हैं. इन नामों को देखकर कई भारतियों को जो वहां बसे हैं, उन्हें घर जैसा महसूस होता है.

    क्यों पड़े भारतीय नाम?
    मेलबर्न और आसपास के इलाकों में 19वीं और 20वीं सदी में ब्रिटिश काल के दौरान कई जगहों का नामकरण भारतीय शहरों के नाम पर किया गया था. ऑस्ट्रेलिया में ब्रिटिश सेना के कई सैनिक भारत में तैनात रहे थे. उन्होंने अपनी यादों में इन नामों को रखा था. कुछ जगहों का नामकरण भारतीय मूल के प्रवासियों या व्यापारिक संबंधों के कारण भी हुआ. आज मेलबर्न में भारतीय समुदाय काफी बड़ा है. ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लाखों लोग रहते हैं. वे इन नामों को देखकर सांस्कृतिक जुड़ाव महसूस करते हैं. मेलबर्न के विभिन्न इलाकों में घूमने वाले भारतीय पर्यटक और छात्र इन बोर्ड्स की तस्वीरें खींचकर पोस्ट करते हैं. एक यूजर ने लिखा, “आगरा तो भारत में है, यहां आगरा रोड देखकर लगा जैसे टाइम मशीन में आ गया.” दूसरे ने कहा, “लखनऊ का स्वाद याद आ गया.”

    दोनों देशों का गहरा संबंध
    भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक संबंध मजबूत हैं. ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा है. मेलबर्न विश्वविद्यालय जैसे संस्थान भारतीय छात्रों से भरे रहते हैं. क्रिकेट, फूड और बॉलीवुड के जरिए भी कनेक्शन बढ़ा है. भारतीय रेस्टोरेंट, फेस्टिवल और दीवाली-होली के आयोजन मेलबर्न को भारत जैसा बना देते हैं.

  • झारखंड के स्कूल हॉस्टल में घुसा सांप, सो रही 4 छात्राओं को काटा; 1 की मौत, 1 की हालत नाजुक..

    झारखंड के स्कूल हॉस्टल में घुसा सांप, सो रही 4 छात्राओं को काटा; 1 की मौत, 1 की हालत नाजुक..

    झारखंड के स्कूल हॉस्टल में घुसा सांप, सो रही 4 छात्राओं को काटा; 1 की मौत, 1 की हालत नाजुक..

    झारखंड के लोहरदगा जिले में एक दुखद घटना घटी है। यहां एक प्राइवेट बोर्डिंग स्कूल के गर्ल्स हॉस्टल में रात को सोते समय 4 छात्राओं को सांप ने काट लिया। जहरीले करैत सांप के काटने से 13 साल की छात्रा की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य छात्राओं की हालत गंभीर है। यह घटना मंगलवार की रात को रोचो महुआटोली के सनवसिरा हायर सेकेंडरी रेजिडेंशियल स्कूल में हुई।

    रात के अंधेरे में कमरे में घुसा सांप

    अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, मंगलवार रात सभी छात्राएं रोजाना की तरह रात का खाना खाकर अपने कमरों में सोने चली गई थीं। रात करीब 11 बजे एक अत्यधिक जहरीला करैत सांप उनके कमरे में घुस गया और गहरी नींद में सो रही चार छात्राओं को डस लिया।

    एक की मौत, एक की हालत गंभीर

    छात्राओं के चिल्लाने पर स्कूल के शिक्षक तुरंत मौके पर पहुंचे और आनन-फानन में चारों को रात में ही लोहरदगा सदर अस्पताल ले गए। हालांकि, डॉक्टरों ने वर्षा नाम की 13 वर्षीय छात्रा को देखते ही मृत घोषित कर दिया। अन्य तीन घायल छात्राओं में से एक, फुलमनिया की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। उसे बेहतर इलाज के लिए रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) रेफर किया गया है। वहीं, बाकी दो छात्राओं का इलाज फिलहाल लोहरदगा सदर अस्पताल में ही चल रहा है, जहां डॉक्टर उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

    जमशेदपुर में गोली मारकर शख्स की हत्या

    एक अन्य खबर में, झारखंड के जमशेदपुर में बुधवार रात एक शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना आमगो थाना क्षेत्र के मुंशी मोहल्ला में हुई। पुलिस अधीक्षक (नगर) ललित मीणा ने बताया कि राहुल नाम का व्यक्ति इलाके में टहल रहा था, तभी कुछ लोग वहां पहुंचे और उस पर गोली चला दी। पुलिस ने बताया कि वारदात को अंजाम देने के बाद समूह मौके से फरार हो गया।

    पुलिस ने बताया कि राहुल को तुरंत टाटा मेन अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक, हत्या के पीछे का असल कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि राहुल के साथियों के अनुसार, इस घटना को प्रेम संबंध के कारण अंजाम दिए जाने की आशंका है। घटना के बाद, परिवार के सदस्यों और स्थानीय निवासियों ने अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और हमले में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस ने बताया कि अपराध में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज की जांच-पड़ताल की जा रही है।

  • आनंद महिंद्रा की ये प्रेरणादायक बातें बदल सकती हैं आपकी सोच, जीवन को मिल सकती है नई दिशा…

    आनंद महिंद्रा की ये प्रेरणादायक बातें बदल सकती हैं आपकी सोच, जीवन को मिल सकती है नई दिशा…

    आनंद महिंद्रा की ये प्रेरणादायक बातें बदल सकती हैं आपकी सोच, जीवन को मिल सकती है नई दिशा…

    आनंद महिंद्रा भारत के जाने माने उद्योगपति हैं। वे महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन हैं। यह ग्रुप भारत के सबसे बड़े और प्रमुख बिजनेस घरानों में से एक है, जो गाड़ियां, ट्रैक्टर, आईटी और रियल एस्टेट जैसे कई क्षेत्रों में काम करता है। आनंद महिंद्रा सिर्फ अपने बिजनेस के लिए ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने के लिए भी जाने जाते हैं। वे अक्सर भारत के टैलेंट, नए इनोवेशन्स और प्रेरणादायक वीडियो शेयर करते रहते हैं। वे देश में छिपे हुए हुनर की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। कई बार उन्होंने सोशल मीडिया पर दिखे किसी प्रतिभाशाली व्यक्ति की आर्थिक मदद की है। उनके विचार लोगों को प्रेरित करने का भी काम कर सकते हैं। ऐसे में यहां हम आनंद महिंद्रा के मोटिवेशनल कोट्स लेकर आए हैं जो आपको जीवन में सही दिशा दिखा सकते हैं।

    • यदि आपके सपने आपको डराते नहीं हैं, तो वे उतने बड़े नहीं हैं।
    • आप जितने सकारात्मक बदलाव करे हैं, उतना ही आप अपने व्यापार को बढ़ा रहे होते हैं।
    • स्थिरता हमारी तरक्ती का हिस्सा है। अगर आप समाज को देने की जगह लेने पर विश्वास रखते हैं तो सफल नहीं हो पाएंगे।
    • जिंदगी के पास सबसे ताकतवर लोगों को भी ये सिखाने का दिलचस्प तरीका है कि दौलत की खुशी पल भर की है।
    • जो व्यक्ति आज की बात को कल पर टाल देता है, वो संभवत पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहा है।
    • नेता पीछे नहीं देखते, वे बगले नहीं झांकते हैं- वे आगे की ओर देखते हैं।
    • लीडर्स पीछे पलटकर नहीं देखते, वो अपने ईर्द-गिर्द भी नहीं देखते-वो आगे देखते हैं।
    • कभी भी सपने की शक्ति को कम मत समझो। इसमें जीवन को बदलने और भविष्य को आकार देने की क्षमता है।
    • अपनी वर्तमान परिस्थितियों तक सीमित न रहें। बड़े सपने देखें, कड़ी मेहनत करें और कभी हार न मानें।
    • दुनिया उन्हीं की है जो सपने देखने की हिम्मत रखते हैं और अपने सपनों को लगातार पूरा करने का साहस रखते हैं।

  • वायरल रील ने पहुंचाया सलाखों तक! थाने में रौब झाड़ने वाले युवक की पुलिस ने कराई परेड

    वायरल रील ने पहुंचाया सलाखों तक! थाने में रौब झाड़ने वाले युवक की पुलिस ने कराई परेड

    वायरल रील ने पहुंचाया सलाखों तक! थाने में रौब झाड़ने वाले युवक की पुलिस ने कराई परेड

     सोशल मीडिया पर रील बनाना और दबंगई दिखाने का काफी ट्रेंड चल रहा है लेकिन कई बार दबंगई दिखाना काफी भारी पड़ जाता है. झारखंड के चुटिया थाना क्षेत्र में भी कुछ ऐसा ही हुआ. यहां सोशल मीडिया पर ‘दबंग’ बनने का शौक एक युवक को महंगा पड़ गया. रांची के चुटिया थाना परिसर को फिल्मी सेट समझकर बनाई गई एक रील वायरल क्या हुई, पुलिस सीधे एक्शन में आ गई. जिस थाने में युवक ने हीरो वाली एंट्री मारकर रील शूट की थी, उसी थाने में पुलिस ने उसकी परेड कराई और आखिरकार उसे हाथ जोड़कर माफी मांगनी पड़ी.

    कैमरे के सामने फिल्मी अंदाज

    मामला झारखंड के चुटिया थाना क्षेत्र का है. यहां साहिल महतो नाम का युवक थाना परिसर में दबंग स्टाइल में एंट्री करता है. कैमरे के सामने फिल्मी अंदाज में रील शूट होती है और फिर उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया जाता है. देखते ही देखते वीडियो वायरल हो गया. रील वायरल होने के बाद चुटिया थाना पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लिया. थाना प्रभारी पूनम कुजूर के निर्देश पर युवक की पहचान कर उसे हिरासत में लिया गया. जिस परिसर में वह रील बनाकर रौब झाड़ रहा था, वहीं पुलिस ने उसकी परेड कराई. पुलिस की सख्ती के आगे युवक की सारी हेकड़ी निकल गई.

    पुलिस से हाथ जोड़कर मांगी माफी

    पूछताछ के दौरान साहिल महतो ने अपनी गलती स्वीकार की और पुलिस से माफी मांगी. थाना प्रभारी पूनम कुजूर ने कार्रवाई करते हुए युवक की परेड कराई और उसे गलती का एहसास कराया. बाद में पीआर बॉन्ड पर छोड़ा गया. युवक ने माफी मांगते हुए दोबारा ऐसी गलती नहीं करने की बात कही है. इसके बाद पुलिस ने कड़ी चेतावनी देते हुए उसे पीआर बॉन्ड पर छोड़ दिया. 

    कानून के साथ खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त

    पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि सोशल मीडिया पर लाइक्स और फॉलोअर्स के लिए सरकारी संस्थानों की गरिमा से खिलवाड़ या कानून की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कुछ सेकेंड की रील ने युवक को ऐसा सबक सिखाया, जिसे वह शायद लंबे समय तक नहीं भूल पाएगा.

  • एक झटके में उजड़ गया परिवार! टेबल फैन गिरने से करंट की चपेट में आए पति-पत्नी, दोनों की मौत..

    एक झटके में उजड़ गया परिवार! टेबल फैन गिरने से करंट की चपेट में आए पति-पत्नी, दोनों की मौत..

    एक झटके में उजड़ गया परिवार! टेबल फैन गिरने से करंट की चपेट में आए पति-पत्नी, दोनों की मौत..

    उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एक दुखद घटना सामने आई है. यहां बिलसंडा थाना क्षेत्र में देर रात पति हरिशंकर कुशवाहा और पत्नी कमला देवी अपने कमरे में सो रहे थे. इसी दौरान दोनों की करंट लगने से मौत हो गई. जानकारी के अनुसार, बता दें कि 52 वर्षीय हरिशंकर और 50 वर्षीय कमला देवी देर रात एक विवाह समारोह से लौटने के बाद घर के सामने बनी अपनी किराना दुकान से सटे कमरे में सोने चले गए थे. भीषण गर्मी के चलते उन्होंने पास में टेबल फैन चलाकर रखा था. देर रात अचानक फैन उनके ऊपर गिर पड़ा. आशंका है कि फैन में करंट उतरने से दोनों उसकी चपेट में आ गए और सोते-सोते ही उनकी मौत हो गई.

    दुकान खोलने पहुंचा बेटो, तो उड़े होश

    मंगलवार सुबह करीब 7 बजे जब उनका बेटा संत कुमार दुकान खोलने पहुंचा तो कमरे का दृश्य देखकर उसके होश उड़ गए. इसके बाद घटना की जानकारी पुलिस को दी गई. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों का पता लगाने में जुटी है.

    मां के चेहरे से चिपका था टेबल फैन

    दंपति के बेटे संत कुमार ने इस बारे में बताया कि जब वे कमरे में पहुंचे, तो उनके माता-पिता जमीन पर मृत पड़े हैं. मृतक के बेटे ने देखा कि टेबल फैन उसकी मां के चेहरे पर चिपका हुआ था. पुलिस को आशंका है कि रात में सोते समय टेबल फैन खराब हो गया होगा, उसमें कुछ इलेक्ट्रिक फॉल्ट आई होगी, जिसके कारण दोनों को करंट लगा होगा. दंपति के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.

    घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल

    वहीं दंपति के मरने की खबर सुनकर पूरे इलाके में मातम छा गया. घर वालों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. वहीं मामले की सूचना मिलने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी. इस मामले में लेखपाल राज कुमार ने कहा कि पीड़ित परिवार को राज्य सरकार की योजना के तहत उचित सरकारी मुआवजा दिया जाएगा. 

  • स्विफ्टलेट: लार से तैयार होता है बेशकीमती घोंसला, दुनिया भर में है जबरदस्त मांग..

    स्विफ्टलेट: लार से तैयार होता है बेशकीमती घोंसला, दुनिया भर में है जबरदस्त मांग..

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    प्रकृति में कई ऐसे जीव-जंतु हैं, जो अपनी अनोखी विशेषताओं के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। कोई अपनी ताकत के लिए जाना जाता है तो कोई अपनी सुंदरता के लिए। इसी तरह एक छोटी-सी पक्षी स्विफ्टलेट अपने बेहद अनोखे घोंसले के कारण चर्चा में रहती है। इस पक्षी का घोंसला इतना कीमती होता है कि इसकी कीमत लाखों रुपये तक पहुंच सकती है।

    लार से तैयार होता है घोंसला

    अधिकांश पक्षी अपने घोंसले तिनकों, पत्तियों और छोटी टहनियों की मदद से बनाते हैं, लेकिन स्विफ्टलेट का तरीका बिल्कुल अलग है। यह अपने मुंह से निकलने वाली विशेष लार का उपयोग करके घोंसला तैयार करती है। हवा के संपर्क में आने पर यह लार धीरे-धीरे सख्त होकर मजबूत संरचना का रूप ले लेती है। कई दिनों की लगातार मेहनत के बाद कप के आकार जैसा मजबूत घोंसला बनकर तैयार होता है। यह पक्षी आमतौर पर समुद्र के किनारे मौजूद गुफाओं, ऊंची चट्टानों और अंधेरी जगहों को घोंसला बनाने के लिए चुनती है, जिससे उसके घोंसले सुरक्षित रह सकें।

    आखिर इतनी ज्यादा क्यों है कीमत ?

    स्विफ्टलेट के घोंसले की मांग खासकर एशियाई देशों में बहुत अधिक है। चीन, हांगकांग और सिंगापुर जैसे देशों में इसका उपयोग प्रसिद्ध बर्ड नेस्ट सूप बनाने में किया जाता है। इसे एक प्रीमियम और लग्जरी लग्जरी फूड बनता है, इसलिए कई आलीशान रेस्तरां अपने मेन्यू में इसे विशेष व्यंजन के रूप में शामिल करते हैं। शुद्ध घोंसले का एक किलो वजन लाखों रुपये में बिक सकता है।

    स्वास्थ्य लाभ को लेकर क्या है दावा ?

    कई लोगों का मानना है कि स्विफ्टलेट के घोंसले में प्रोटीन, अमीनो एसिड और कई प्रकार के खनिज पाए जाते हैं। दावा किया जाता है कि इसका सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकता है। हालांकि, इन दावों को लेकर वैज्ञानिकों की राय एक जैसी नहीं है और अभी भी इस विषय पर शोध जारी है।

    संरक्षण भी है जरूरी

    बर्ड नेस्ट सूप कई सदियों से चीनी संस्कृति का हिस्सा रहा है। बढ़ती मांग के कारण कई क्षेत्रों में स्विफ्टलेट और उसके घोंसलों की सुरक्षा के लिए विशेष संरक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, ताकि इस अनोखी पक्षी की संख्या और प्राकृतिक आवास सुरक्षित रह सकें।

  • कूवर की Sam Kee Building क्यों है इतनी पतली? इसके पीछे छिपी है हैरान कर देने वाली वजह…

    कूवर की Sam Kee Building क्यों है इतनी पतली? इसके पीछे छिपी है हैरान कर देने वाली वजह…

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    Sam Kee Building कनाडा के Vancouver शहर में स्थित एक अनोखी इमारत है, जो अपनी असाधारण पतली बनावट के कारण दुनियाभर में मशहूर है। पेंडर स्ट्रीट पर बनी यह इमारत Guinness World Records में दुनिया की सबसे संकरी व्यावसायिक इमारत के रूप में दर्ज है। इसकी चौड़ाई मात्र 4 फीट 11 इंच है, जो इसे एक अनोखा वास्तु उदाहरण बनाती है। बता दें कि एक चीनी व्यापारी के अपमान और गुस्से से उपजा विरोध का प्रतीक है, जिसने सरकार को अपनी जिद के आगे झुकने पर मजबूर कर दिया।

    जानें इस इमारत की कहानी

    इस इमारत की कहानी 1902 से शुरू होती है, जब चीनी मूल के व्यापारी Chang Toy, जिन्हें सैम की के नाम से जाना जाता था, ने एक बड़ा प्लॉट खरीदा था, लेकिन 1912 में नगर प्रशासन ने सड़क चौड़ीकरण के लिए उनकी जमीन का बड़ा हिस्सा अधिग्रहित कर लिया। मुआवजा न मिलने पर टॉय ने इसे अपमान माना और बची हुई बेहद पतली जमीन पर ही इमारत बनाने का निश्चय किया। Chang Toy आर्किटेक्ट ब्राउन और गिलम की मदद से एक स्टील-फ्रेम संरचना तैयार करवाई, जो सीमित जगह में भी खड़ी हो सके। इमारत का निचला हिस्सा बेहद संकरा है, जबकि ऊपर की मंजिल पर बाहर की ओर निकली खिड़कियों (बे विंडो) के कारण चौड़ाई करीब 6 फीट तक पहुंच जाती है। इसके अलावा, इसका बेसमेंट फुटपाथ के नीचे तक फैला हुआ है, जिससे उपयोगी जगह बढ़ाई गई।

    दुकानों के रूप में किया जाता है उपयोग

    शुरुआत में ऊपरी मंजिलों का इस्तेमाल रहने के लिए और निचले हिस्से का उपयोग दुकानों के रूप में किया जाता था। बेसमेंट खासतौर पर स्थानीय चीनी समुदाय के लिए उपयोगी था, जहां सार्वजनिक स्नानघर और नाई की सेवाएं उपलब्ध थीं। समय के साथ इस इमारत से जुड़ी कई अफवाहें भी फैलीं, जैसे कि इसके नीचे गुप्त सुरंगें हैं, हालांकि इसका कोई प्रमाण नहीं मिला।

    पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र

    यह इमारत न केवल अपने अनोखे डिजाइन के लिए, बल्कि चाइनाटाउन के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसे 1966 और 1986 में पुनर्स्थापित किया गया। आज भी यह इमारत पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है और वास्तुकला की दुनिया में एक अनोखी मिसाल मानी जाती है।

  • इतिहास की अनोखी खोज! चार पंखों वाले डायनासोर से सुलझ सकती है उड़ान की पहेली..

    इतिहास की अनोखी खोज! चार पंखों वाले डायनासोर से सुलझ सकती है उड़ान की पहेली..

    इतिहास की अनोखी खोज! चार पंखों वाले डायनासोर से सुलझ सकती है उड़ान की पहेली..

    चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे प्राचीन डायनासोर का जीवाश्म खोजा है जिसने जीवों में उड़ने की क्षमता के विकास को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस अनोखी खोज ने वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि इस डायनासोर के केवल आगे के अंगों पर ही नहीं, बल्कि पीछे के पैरों पर भी पंख मौजूद थे। इस वजह से इसके शरीर में कुल चार पंखों जैसी संरचना दिखाई देती थी।

    विशेषज्ञों ने कही ये बात

    विशेषज्ञों के अनुसार यह जीवाश्म पंखों वाले छोटे डायनासोरों के समूह ड्रोमियोसॉर से संबंधित है, जिसका संबंध वेलोसिरैप्टर जैसे शिकारी डायनासोरों से भी माना जाता है। इसके शरीर की बनावट यह संकेत देती है कि पक्षियों की उड़ान क्षमता कैसे विकसित हुई होगी, इसे समझने में यह खोज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    शोध में ये बात आई सामने

    शोधकर्ताओं का मानना है कि यह जीव आधुनिक पक्षियों की तरह लंबी दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम नहीं था। हालांकि इसके चारों पंख पेड़ों के बीच फिसलकर जाने, ऊंचाई से नीचे उतरते समय संतुलन बनाए रखने और हवा में दिशा नियंत्रित करने में सहायक रहे होंगे। घने जंगलों में चलते समय यह अपने अतिरिक्त पंखों का उपयोग किसी स्टीयरिंग सिस्टम की तरह करता होगा, जिससे गिरने का खतरा कम होता था और दिशा बदलना आसान हो जाता था।

    डायनासोरों के व्यवहार को समझने में चीन सबसे आगे

    डायनासोरों के विकास और उनके व्यवहार को समझने के लिए चीन आज दुनिया के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है। यहां से प्राप्त कई जीवाश्म असाधारण रूप से सुरक्षित अवस्था में मिले हैं, जिनमें पंखों की संरचना, त्वचा के निशान और कुछ मामलों में कोमल ऊतकों के अवशेष भी संरक्षित पाए गए हैं।

    नई खोज ने बदले डायनासोरों के पारंपरिक धारणा को

    हाल के वर्षों में हुई ऐसी खोजों ने वैज्ञानिकों की उस पारंपरिक धारणा को बदल दिया है, जिसमें डायनासोरों को केवल विशाल और रेंगने वाले जीव माना जाता था। अब पर्याप्त प्रमाण सामने आ चुके हैं कि कई डायनासोर रंगीन पंखों से ढके हुए थे और वर्तमान पक्षियों के विकासक्रम से उनका गहरा संबंध था।