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  • दिल्ली-NCR में बिट्टू : तबाही का सफाई अभियान, 2 शहरों से 3,020 किलो कचरा हटाया

    सोशल मीडिया पर अपने सफाई अभियान को लेकर चर्चा में रहने वाले बिट्टू तबाही का #CleanWithBittu अभियान अब दिल्ली-NCR तक पहुंच गया है। मध्य प्रदेश से शुरू हुई उनकी सफाई मुहिम ने दिल्ली और गुरुग्राम में लोगों का ध्यान खींचा है। दो शहरों में चलाए गए अभियान के दौरान कुल 3,020 किलो कचरा हटाया गया।

    बिट्टू तबाही और उनकी टीम ने यह अभियान यमुना नदी और उसके आसपास के इलाकों में चलाया। इस दौरान बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, पूजा सामग्री, फूल और अन्य कचरा हटाया गया।

    दिल्ली में एक दिन में हटाया 585 किलो कचरा

    सफाई अभियान की शुरुआत 20 सितंबर को दिल्ली में यमुना नदी के किनारे से हुई। बिट्टू तबाही और उनकी टीम ने यहां करीब 585 किलो कचरा इकट्ठा किया।

    घाट और नदी के आसपास पड़े कचरे में प्लास्टिक के अलावा पूजा सामग्री और फूल भी शामिल थे। अभियान में स्थानीय लोगों ने भी हिस्सा लिया और सफाई में सहयोग किया।

    गुरुग्राम में 2,435 किलो कचरा साफ

    दिल्ली के बाद सफाई अभियान का अगला पड़ाव गुरुग्राम का खेड़की दौला रहा। यहां लोगों की मदद से बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाया गया और करीब 2,435 किलो कचरा हटाया गया।

    इस तरह दिल्ली और गुरुग्राम में दो दिनों के अभियान के दौरान कुल 3,020 किलो कचरा हटाया गया।

    नोएडा में भी सफाई अभियान की तैयारी

    गुरुग्राम के बाद बिट्टू तबाही नोएडा पहुंचे। उन्होंने सेक्टर-94 स्थित युवा शक्ति घाट पर सुबह 6 बजे से सफाई अभियान चलाने की घोषणा की और लोगों से भी इसमें शामिल होने की अपील की।

    इस अभियान का उद्देश्य यमुना के किनारे जमा कचरे को हटाने के साथ लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना भी है।

    मध्य प्रदेश से शुरू हुई थी सफाई की मुहिम

    बिट्टू तबाही का सफाई अभियान दिल्ली-NCR में पहली बार नहीं पहुंचा है। इससे पहले उन्होंने मध्य प्रदेश के ब्यावरा में अजनार नदी के आसपास सफाई का काम शुरू किया था।

    वह सफाई के दौरान खुद कचरा हटाते और इसका रिकॉर्ड सोशल मीडिया पर साझा करते थे। धीरे-धीरे उनके वीडियो लोगों तक पहुंचे और उनकी मुहिम को पहचान मिलने लगी। अब #CleanWithBittu के जरिए यह अभियान दूसरे शहरों तक भी पहुंच रहा है।

    कौन हैं बिट्टू तबाही?

    बिट्टू तबाही का असली नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी बताया जाता है। वह मध्य प्रदेश के ब्यावरा के रहने वाले हैं और BSc के छात्र हैं। अजनार नदी के आसपास सफाई अभियान चलाने के दौरान उन्होंने अपने काम के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए, जिसके बाद लोग उनके अभियान के बारे में जानने लगे।

    एक नदी के किनारे सफाई से शुरू हुई उनकी मुहिम अब बड़े सार्वजनिक सफाई अभियान का रूप ले रही है। दिल्ली-NCR में चलाया गया अभियान भी इसी मुहिम का हिस्सा है।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव भी कर चुके हैं मुलाकात

    बिट्टू तबाही पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी मुलाकात कर चुके हैं। नदी के आसपास सफाई के उनके प्रयासों को लेकर उन्हें सम्मानित किए जाने की बात भी सामने आई थी।

    बिट्टू की मुहिम में अब स्थानीय लोग भी जुड़ रहे हैं और सोशल मीडिया के जरिए स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

     

     

     

     

     

     

     

     

  • हथेली की रिंग फिंगर : के नीचे छिपा है सरकारी नौकरी का राज! चेक करें अपना हाथ- सूर्य पर्वत दबा है या उभरा.?

    हथेली की रिंग फिंगर : के नीचे छिपा है सरकारी नौकरी का राज! चेक करें अपना हाथ- सूर्य पर्वत दबा है या उभरा.?

    हथेली की रिंग फिंगर : के नीचे छिपा है सरकारी नौकरी का राज! चेक करें अपना हाथ- सूर्य पर्वत दबा है या उभरा.?

    हस्तरेखा शास्त्र अनुसार रिंग फिंगर के नीचे स्थित सूर्य पर्वत ये बताता है कि आपकी किस्मत में सरकारी नौकरी का योग है या नहीं। चलिए जानते हैं कैसा सूर्य पर्वत शुभ माना जाता है तो कैसा अशुभ।

    ज्योतिष में सूर्य को सरकार पक्ष का प्रतिनिधि माना जाता है। इसी कारण से इस ग्रह की स्थिति देखकर आप ये आसानी से जान सकते हैं कि आपके जीवन में सरकारी नौकरी के योग हैं या नहीं। बता दें हथेली की अनामिका उंगली यानी रिंग फिंगर के नीचे सूर्य ग्रह का स्थान होता है जिसे सूर्य पर्वत के नाम से जाना जाता है। कहते हैं अगर यह स्थान सामान्य से थोड़ा ज्यादा उभरा हुआ है तो इससे सरकारी नौकरी प्राप्त होने के संकेत मिलते हैं। वहीं इस स्थान पर क्रास का चिन्ह होना अशुभ माना जाता है। चलिए जानते हैं हाथ का सूर्य पर्वत क्या संकेत देता है।

    सूर्य पर्वत से मिलते हैं सरकारी नौकरी के संकेत

    यदि सूर्य पर्वत का स्थान उभरा हुआ है तो यह शुभ संकेत है। इससे ये पता चलता है कि व्यक्ति को जीवन में सरकारी नौकरी मिलने के प्रबल योग हैं। साथ ही ऐसा व्यक्ति समाज में भी खूब मान-सम्मान प्राप्त करता है।

    सूर्य पर्वत का उन्नत होना व्यक्ति को बुद्धिमान और प्रभावशाली बनाता है। ऐसा व्यक्ति समाज में अपनी अलग पहचान बनाता है।

    सूर्य पर्वत उभरा होना ये भी बताता है कि व्यक्ति के अंदर नेतृत्व करने की अच्छी क्षमता है। ऐसा व्यक्ति जो काम करता है उसमें एक लीडर की भूमिका निभाता है।

    सूर्य पर्वत शुभ होने पर व्यक्ति में गजब का आकर्षण देखने को मिलता है।

    ऐसा व्यक्ति करियर में खूब ऊंचाइयां प्राप्त करता है।

    सूर्य पर्वत का दबा होना कैसा होता है?

    यदि हथेली में सूर्य पर्वत दबा हुआ है तो इसका अर्थ है कि आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में है। जिनकी हथेली में यह पर्वत दबा हुआ होता है ऐसा व्यक्ति अपनी प्रतिभा दिखा नहीं पाता और इनके अंदर आत्मविश्वास की भी कमी देखने को मिलती है।

    सूर्य पर्वत के खराब स्थिति में होने से किसी भी काम में सफलता पाने के लिए अधिक मेहनत और प्रयास करना पड़ता है।

    अगर हथेली में सूर्य पर्वत पर क्रास का चिन्ह बना हुआ है तो यह ओर भी कष्टकारी साबित होता है। इसका मतलब है कि व्यक्ति को सरकार की ओर से कष्ट मिल सकता है।

    ऐसे लोगों को सरकारी क्षेत्र में मान सम्मान की प्राप्ति नहीं होती। इसके अलावा सूर्य पर्वत पर किसी प्रकार का धब्बा या जाली बनी होना भी शुभ संकेत नहीं माना जाता।

    सूर्य रेखा का शुभ स्थिति में होना

    यदि सूर्य पर्वत पर बनने वाली रेखा यानी सूर्य रेखा साफ, सुंदर और लालिमा युक्त हो तो व्यक्ति को जीवन में खूब ख्याति और सफलता प्राप्त होती है। साथ ही ऐसा व्यक्ति सरकारी क्षेत्र में भी खूब लाभ प्राप्त करता है। वहीं अगर सूर्य रेखा स्पष्ट न हो या कटी फटी सी हो तो व्यक्ति को सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी से कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। क्या आप जानते हैं कि सूर्य और गुरु पर्वत पर कुछ खास निशानों का बनना भी सरकारी नौकरी प्राप्त होने के प्रबल संकेत देता है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • हरियाणा का अनोखा गांव: जहां उल्टा है घर और गाड़ी, हवा में लटकी दिखती है साइकिल; 50 तरह का खाना भी फ्री

    हरियाणा का अनोखा गांव: जहां उल्टा है घर और गाड़ी, हवा में लटकी दिखती है साइकिल; 50 तरह का खाना भी फ्री

    हरियाणा का अनोखा गांव: जहां उल्टा है घर और गाड़ी, हवा में लटकी दिखती है साइकिल; 50 तरह का खाना भी फ्री

    अगर कुछ अलग करने का जुनून हो तो इंसान अपनी कल्पना को हकीकत में बदल सकता है। हरियाणा में ऐसा ही एक अनोखा फार्म हाउस लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां पहुंचकर आपको कई चीजें सामान्य से बिल्कुल उल्टी नजर आती हैं।

    यहां घर का डिजाइन ही ऐसा बनाया गया है कि फर्नीचर से लेकर गाड़ी तक कई चीजें उल्टी दिखाई देती हैं। इतना ही नहीं, परिसर में हवा में लटकी हुई साइकिल भी लोगों का ध्यान खींचती है। इस अनोखी जगह को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं।

    उल्टा है पूरा घर का डिजाइन

    इस फार्म हाउस की सबसे बड़ी खासियत इसका अनोखा डिजाइन है। यहां घर को इस तरह तैयार किया गया है कि देखकर ऐसा लगता है जैसे पूरा मकान उल्टा खड़ा हो।

    अंदर जाने पर सोफा और दूसरी चीजें भी उल्टी लटकी हुई दिखाई देती हैं। यहां तक कि गाड़ी को भी ऐसे तरीके से लगाया गया है कि वह हवा में उल्टी टंगी हुई नजर आती है।

    यही वजह है कि यहां आने वाले लोगों के लिए यह जगह सामान्य फार्म हाउस के बजाय किसी अनोखी दुनिया जैसी लगती है।

    हवा में उड़ती नजर आती है साइकिल

    फार्म हाउस में सिर्फ उल्टा घर ही आकर्षण नहीं है। यहां एक साइकिल को भी इस तरह लगाया गया है कि वह हवा में उड़ती हुई नजर आती है।

    इस पूरे परिसर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि हर कोने में कुछ न कुछ ऐसा दिखाई दे, जो लोगों को हैरान करे और उनकी नजरें रोक दे।

    हरियाणा और राजस्थान की संस्कृति की झलक

    इस अनोखे फार्म हाउस की एक और खासियत यहां दिखाई देने वाली ग्रामीण संस्कृति है। परिसर में हरियाणा और राजस्थान की पारंपरिक संस्कृति की झलक देखने को मिलती है।

    स्थानीय अंदाज की सजावट और अलग-अलग चीजों को इस तरह शामिल किया गया है कि यहां आने वाले लोगों को ग्रामीण परिवेश और पारंपरिक रंग-रूप का अनुभव मिल सके।

    50 तरह के व्यंजन भी मिलते हैं

    इस जगह की चर्चा सिर्फ उल्टे घर और अनोखे डिजाइन की वजह से नहीं है। यहां आने वाले लोगों के लिए खाने-पीने का भी खास इंतजाम बताया जाता है।

    जानकारी के मुताबिक, यहां करीब 50 तरह के व्यंजन परोसे जाते हैं और इसके साथ DJ कार्यक्रम जैसी मनोरंजन की व्यवस्था भी रहती है। यही वजह है कि यह जगह परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने वालों के लिए भी आकर्षण बन गई है।

    आखिर क्यों बनाया गया ऐसा अनोखा फार्म हाउस?

    इस फार्म हाउस के पीछे एक युवक की कुछ अलग करने की सोच बताई जाती है। सामान्य फार्म हाउस बनाने के बजाय उन्होंने ऐसा स्थान तैयार करने का फैसला किया, जहां लोगों को कुछ नया देखने और अनुभव करने को मिले।

    उल्टा घर, हवा में लटकी साइकिल, उल्टा फर्नीचर और अलग-अलग सांस्कृतिक सजावट इसी सोच का हिस्सा हैं।

    लोगों के लिए बना आकर्षण का केंद्र

    आज यह अनोखा फार्म हाउस आसपास के लोगों के साथ-साथ दूसरे इलाकों से आने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

    यहां पहुंचने वाले लोग उल्टे घर और अनोखे डिजाइन को देखकर हैरान रह जाते हैं। बच्चों से लेकर बड़े तक इस जगह की अलग-अलग चीजों को उत्सुकता से देखते हैं।

    हरियाणा की इस अनोखी जगह ने यह दिखा दिया है कि किसी स्थान को खास बनाने के लिए सिर्फ बड़ा या महंगा होना जरूरी नहीं है। अगर सोच अलग हो तो एक साधारण फार्म हाउस भी लोगों के लिए यादगार जगह बन सकता है।

  • कौन है Jay Singh Rathore: जिसके फ्रॉड से हिला सोशल मीडिया? लोग जमकर उतार रहे गुस्सा

    कौन है Jay Singh Rathore: जिसके फ्रॉड से हिला सोशल मीडिया? लोग जमकर उतार रहे गुस्सा

    कौन है Jay Singh Rathore: जिसके फ्रॉड से हिला सोशल मीडिया? लोग जमकर उतार रहे गुस्सा

    जानिए कौन हैं जय सिंह राठौर और वे X (पहले ट्विटर) पर ट्रेंड क्यों कर रहे हैं? इंटरनेट यूजर्स जमकर उन पर गुस्सा निकाल रहे हैं. सोशल मीडिया पर विजय माल्या से जुड़े मीम्स की बाढ़ आ गई है.

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर इन दिनों जय सिंह राठौर (Jay Singh Rathore) नाम का शख्स चर्चा का केंद्र बना हुआ है. मदद की गुहार लगाकर लोगों की भावनाओं से खेलने और क्राउडफंडिंग के नाम पर ठगी करने का यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है. आइए जानते हैं कि आखिर पूरा विवाद क्या है और क्यों लोग इस आदमी पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं.

    कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

    इस पूरे मामले की शुरुआत X पर एक इमोशनल पोस्ट से हुई. जय सिंह राठौर नाम के यूजर ने अपनी बहन की आंखों की सर्जरी के लिए आर्थिक मदद की अपील की थी. लोगों ने भी दरियादिली दिखाते हुए दिल खोलकर दान दिया और उसने देखते ही देखते 1.5 लाख रुपए से ज्यादा की रकम जुटा ली. लेकिन कुछ ही समय बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उसके द्वारा शेयर किए गए मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन और दस्तावेजों में कई कमियां पकड़ लीं, जिससे शक गहराने लगा.

    अस्पताल का खुलासा: फर्जी हैं दस्तावेज

    जिस ‘श्राफ आई सेंटर’ (Shroff Eye Centre) अस्पताल के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा था, उस अस्पताल ने आगे आकर स्पष्ट किया कि उनके लेटरहेड और दस्तावेजों का दुरुपयोग करके फर्जी पर्चियां बनाई गई हैं. अस्पताल ने इंस्टाग्राम स्टोरी में साफ किया कि ऐसा कोई भी मरीज वहां इलाज नहीं करवा रहा है और यह लोगों को ठगने का एक सुनियोजित तरीका है.

    दबाव बढ़ने पर जय सिंह राठौर ने सफाई देने के लिए ‘एक्स स्पेसेस’ (X Spaces) का सहारा लिया. पूछताछ के दौरान वह रोता हुआ नजर आया और अपनी गलती कबूल की. उसने अजीबोगरीब सफाई देते हुए कहा कि पैसे उसकी बहन के लिए नहीं, बल्कि उसके बीमार पिता के इलाज के लिए थे.

    गुस्साए दानदाताओं ने जब उससे तुरंत पैसे वापस करने को कहा, तो उसने रिफंड के स्क्रीनशॉट साझा करने शुरू कर दिए. एक यूजर द्वारा शेयर किए गए बैंक स्क्रीनशॉट से यह भी सामने आया कि उसके खाते से कुछ पैसे कम हुए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि उसने कुछ रिफंड किए हैं.

    अब सुनिए क्या कह रहा है आरोपी जय सिंह राठौर

    अन्य यूजर पर भी उठे सवाल

    इस वायरल पोस्ट को प्रमोट करने वाली एक अन्य यूजर ‘@Raniisaa_’ पर भी इस घोटाले में मिलीभगत का शक जताया गया. हालांकि, उन्होंने तुरंत ट्वीट कर इस पूरे मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया और जय सिंह राठौर से किसी भी तरह के रिश्ते से साफ इनकार कर दिया.

  • भारत का इकलौता रेलवे : प्लेटफॉर्म, जिसमें 14 फुटबॉल मैदान समा सकते हैं; गिनीज बुक में भी दर्ज है नाम

    भारत का इकलौता रेलवे : प्लेटफॉर्म, जिसमें 14 फुटबॉल मैदान समा सकते हैं; गिनीज बुक में भी दर्ज है नाम

    भारत का इकलौता रेलवे : प्लेटफॉर्म, जिसमें 14 फुटबॉल मैदान समा सकते हैं; गिनीज बुक में भी दर्ज है नाम

    सोशल मीडिया पर आपने भारत के कई अनोखे रेलवे स्टेशनों के बारे में पढ़ा होगा। मगर, क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा रेलवे प्लेटफॉर्म भी है जिसमें फुटबॉल के 14 मैदान आराम से समा सकते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में:

    भारत में मौजूद लगभग हर रेलवे स्टेशन अपनी किसी न किसी खूबी के लिए जाना जाता है। कई रेलवे स्टेशन तो ऐसे भी हैं जो भारत के गौरवशाली इतिहास को विरासत के तौर पर संजोए हुए हैं। भारतीय रेलवे स्टेशनों की खूबियों के चलते ही कई लोग इनके रिकॉर्ड्स को जानने के बाद आश्चर्य व्यक्त करते हैं। यही वजह है कि विदेशी टूरिस्ट भी ऐसे रेलवे स्टेशनों को देखने के बाद दूसरे देशों से तुलना कर इनकी तारीफ करते हैं। क्या आप जानते हैं कि, भारत में एक ऐसा ही रेलवे प्लेटफॉर्म है जिसकी लंबाई इतनी ज्यादा है कि उस लंबाई में करीब फुटबॉल के 14 मैदान आसानी से समा सकते हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात तो ये है कि, इस रेलवे स्टेशन की लंबाई का रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है।

    भारत ही नहीं दुनिया का सबसे लंबा प्लेटफॉर्म

    बता दें कि, कर्नाटक प्रांत का श्रीसिद्धारूढ़ स्वामीजी हुबली जंक्शन का प्लेटफॉर्म भारत का ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे लंबा प्लेटफॉर्म है। सबसे खास बात तो ये है कि, इस रेलवे स्टेशन की लंबाई 1507 मीटर है। इसने 2023 में गोरखपुर के स्टेशन को पीछे छोड़ते हुए रिकॉर्ड बनाया। इस रेलवे स्टेशन का उद्घाटन 2023 में किया गया था और प्रसिद्ध हिन्दू संत सिद्धारूढ़ स्वामीजी के नाम पर ‘श्री सिद्धारूढ़ स्वामीजी रेलवे स्टेशन हुब्बल्ली’ रखा गया है। इसे पश्चिम रेलवे का सबसे व्यस्त रेलवे जंक्शन भी कहा जाता है।

    क्या वाकई इसमें फुटबॉल के 14 मैदान समा सकते हैं?

    श्रीसिद्धारूढ़ स्वामीजी हुबली जंक्शन के प्लेटफॉर्म के बारे में सुनते ही कई लोगों के मन में प्रश्न आता है कि, क्या सच में इसमें फुटबॉल के 14 मैदान समा सकते हैं? तो जवाब है- हां!! चूंकि फुटबॉल के मैदान की लंबाई आमतौर पर 105 मीटर होती है और इस हिसाब से देखा जाए तो कर्नाटक के इस रेलवे स्टेशन की लंबाई में आराम से 14-15 फुटबॉल के मैदान समा सकते हैं।

    क्यों बना पड़ा इतना लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म

    हुबली स्टेशन दक्षिण भारत का काफी बड़ा रेलवे स्टेशन है। यहां पर उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम यानी चारों दिशाओं से ट्रेनों का आवागमन होता है। ऐसा माना जाता है कि, पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से कई बार बहुत से ट्रेन आउटर पर सिग्नल न मिलने के कारण रुक जाती थीं जिससे यात्रियों को लेटलतीफी सरीखी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इससे पूरे रूट की ट्रेनों बुरी तरह प्रभावित होती थीं।

    गिनीज बुक में भी दर्ज है नाम

    गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में ‘श्रीसिद्धारूढ़ स्वामीजी हुबली जंक्शन’ को लिस्टेड किया है। गिनीज बुक में इसके बारे में लिखा है कि, ‘सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म 1,507 मीटर है और इसे दक्षिण पश्चिम रेलवे हुबली डिवीजन (भारत) द्वारा हुबली रेलवे स्टेशन, कर्नाटक, भारत में 12 जनवरी 2023 को सत्यापित किया गया था। सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म का निर्माण हुबली रेलवे स्टेशन पर रेलवे यार्ड के पुनर्निर्माण परियोजना के हिस्से के रूप में किया गया था, जिसका उद्देश्य बेहतर परिचालन दक्षता, ट्रेन संचालन सुरक्षा और यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं और आराम प्रदान करना था।’

  • भाद्रपद पूर्णिमा स्नान और : व्रत क्या एक दिन हैं? यहां दूर करें कंफ्यूजन, जानें सही तारीख और स्नान-दान का मुहूर्त.

    भाद्रपद पूर्णिमा स्नान और : व्रत क्या एक दिन हैं? यहां दूर करें कंफ्यूजन, जानें सही तारीख और स्नान-दान का मुहूर्त.

    भाद्रपद पूर्णिमा स्नान और : व्रत क्या एक दिन हैं? यहां दूर करें कंफ्यूजन, जानें सही तारीख और स्नान-दान का मुहूर्त.

    हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन स्नान-दान करने से पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन से पितृ पक्ष भी आरंभ हो रहे हैं। बता दें कि पितृ पक्ष के दौरान पितरों का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किया जाता है। पितृ पक्ष में पूर्वजों को याद करने से पितृ दोष दूर होता है और पितरों की कृपा प्राप्त होती है। तो चलिए जानते हैं कि इस भाद्रपद पूर्णिमा कब मनाई जाएगी और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

    भाद्रपद पूर्णिमा 2026 व्रत और स्नान दान डेट

    पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 25 सितंबर को रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि का समापन 26 सितंबर को रात 10 बजकर 18 मिनट पर होगा। भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। इसी दिन स्नान-दान किया जाएगा। पूर्णिमा का व्रत भी 26 सितंबर को ही रखा जाएगा।

    भाद्रपद पूर्णिमा 2026 स्नान-दान मुहूर्त

    भाद्रपद पूर्णिमा के दिन स्नान दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 53 मिनट से सुबह 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। ये दोनों ही समय स्नान-दान के लिए उत्तम रहेगा। हालांकि पूर्णिमा का पूरा दिन स्नान-दान के लिए अच्छा माना जाता है।

    भाद्रपद पूर्णिमा 2026 के दिन चंद्रोदय का समय

    भाद्रपद पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम 6 बजकर 18 मिनट पर होगा। बता दें कि जो श्रद्धालु पूर्णिमा का व्रत करते है वो रात में चंद्र देव की पूजा करते हैं और अर्घ्य देते हैं। इसके बाद ही पूर्णिमा व्रत का पारण (व्रत खोलते हैं) करते हैं।

    भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व

    यह दिन धार्मिक दृष्टि से भाद्रपद पूर्णिमा को अत्यंत पवित्र माना जाता है। व्रत, पूजा, दान आदि कार्यों के लिए यह पूर्णिमा श्रेष्ठ माना गया है। भविष्यपुराण, स्कन्दपुराण और पद्मपुराण आदि धर्मग्रंथों में भाद्रपद पूर्णिमा के पुण्य महत्व का विस्तृत वर्णन किया गया है। इस दिन गंगा स्नान, दान, व्रत, पूर्णिमा कथा श्रवण और भगवान विष्णु का पूजन करने से कई गुना अधिक शुभ फल प्राप्त होता है। अगर आप कहीं गंगा स्नान के लिए नहीं जा पा रहे हैं तो घर पर ही नहाने वाले में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें। ऐसा करने से भी गंगा स्नान जितना पुण्य फल मिलता है।

  • तोहफा हो तो ऐसा! AI लव स्टोरी देखकर छलके दुल्हन के आंसू..?

    तोहफा हो तो ऐसा! AI लव स्टोरी देखकर छलके दुल्हन के आंसू..?

    तोहफा हो तो ऐसा! AI लव स्टोरी देखकर छलके दुल्हन के आंसू..?

    कजाकिस्तान की एक शादी इन दिनों इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोर रही है, और वजह है दूल्हे के दोस्तों का दिया एक अनोखा तोहफा. आमतौर पर शादियों में लोग महंगे गिफ्ट्स, ज्वेलरी या शगुन का लिफाफा देते हैं, लेकिन इन दोस्तों ने कुछ ऐसा सोचा जिसने शादी में मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया. दरअसल, दोस्तों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की मदद से दूल्हा-दुल्हन की एक बेहद खूबसूरत एनिमेटेड लव स्टोरी बनाई, जिसकी चर्चा अब सोशल मीडिया के जरिए पूरी दुनिया हो रही है.

    टाइम-ट्रैवल करती एक अनोखी लव स्टोरी

    इस छोटी सी एनिमेटेड फिल्म में उनके प्यार को सदियों पुराना दिखाया गया था. वीडियो की शुरुआत एक पुराने युद्ध के मैदान से होती है, जहां दोनों योद्धा बनकर आमने-सामने खड़े होते हैं. अगले ही पल सीन बदलता है और दोनों पुराने दौर के काउबॉय लुक में नजर आते हैं. इसी तरह कई दौर और सदियां बदलती रहती हैं, लेकिन हर युग में किस्मत उन्हें फिर से मिला देती है. मैसेज एकदम क्लियर था कि यह रिश्ता सिर्फ आज का नहीं, बल्कि जन्मों-जन्मों का है.

    जब फंतासी से टकराई हकीकत

    सदियों के इस जादुई सफर के बाद वीडियो का अंत बेहद भावुक मोड़ पर होता है. फिल्म के आखिर में वह सीन दिखाया गया, जब दोनों असल जिंदगी में पहली बार मिले थे. इस एक सीन ने पूरी काल्पनिक कहानी को एकदम सच्चा और दिल के करीब बना दिया.

    दुल्हन के छलके आंसू

    शादी में जैसे ही बड़ी स्क्रीन पर यह वीडियो प्ले हुआ, दुल्हन का रिएक्शन देखने लायक था. वह इतनी सरप्राइज्ड और खुश हुई कि चेहरे पर हाथ रख लिया और उसकी आंखों से आंसू निकल आए. वीडियो खत्म होने पर दुल्हन ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह उसकी लाइफ का सबसे बेहतरीन वेडिंग गिफ्ट है.

  • सड़क पर भिड़े दो सांड, अचानक दौड़ते हुए स्कूटी से टकराया एक, पलभर में हुआ बड़ा हादसा.

    सड़क पर भिड़े दो सांड, अचानक दौड़ते हुए स्कूटी से टकराया एक, पलभर में हुआ बड़ा हादसा.

    सड़क पर भिड़े दो सांड, अचानक दौड़ते हुए स्कूटी से टकराया एक, पलभर में हुआ बड़ा हादसा.

    उत्तराखंड के ऋषिकेश से एक हैरान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें सड़क पर दो सांड आपस में भिड़ते दिखाई दे रहे हैं। दोनों के बीच चल रही लड़ाई अचानक उस वक्त खतरनाक हो जाती है, जब एक सांड तेजी से सड़क की ओर दौड़ता है और वहां से गुजर रही स्कूटी सवार महिला से टकरा जाता है।

    सड़क पर आपस में भिड़े सांड

    वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि सड़क किनारे दो सांड आमने-सामने खड़े हैं और उनके सींग आपस में उलझे हुए हैं। दोनों एक-दूसरे को पीछे धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। सड़क पर सांडों की लड़ाई देखकर आसपास मौजूद लोग भी दूरी बनाए हुए नजर आते हैं।

    इसी दौरान एक व्यक्ति दोनों सांडों को अलग करने की कोशिश करता है। वह उन्हें वहां से हटाने का प्रयास करता है, लेकिन तभी एक सांड अचानक दूसरी दिशा में भागने लगता है।

    अचानक स्कूटी से टकराया सांड

    सांड तेजी से सड़क की तरफ दौड़ता है। उसी समय एक महिला स्कूटी पर सवार होकर वहां से गुजर रही होती है। महिला को शायद अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही सेकंड में उसके साथ हादसा होने वाला है।

    सांड सीधे स्कूटी से जा टकराता है। अचानक हुई टक्कर से महिला का संतुलन बिगड़ जाता है और वह स्कूटी समेत सड़क पर गिर जाती है। इसके बाद स्कूटी सड़क किनारे खड़ी एक कैब से भी टकरा जाती है।

    पूरी घटना कुछ ही सेकंड में कैमरे में रिकॉर्ड हो जाती है। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोग महिला की मदद के लिए आगे आते दिखाई देते हैं।

    सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स महिला की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं। कई लोगों ने सड़क पर खुले घूम रहे पशुओं और ऐसी घटनाओं से जुड़े खतरे पर सवाल उठाए हैं।

    यह घटना दिखाती है कि सड़क पर जानवरों के बीच अचानक होने वाली लड़ाई कितनी तेजी से राहगीरों के लिए खतरा बन सकती है। खासकर दो बड़े सांडों के बीच चल रही लड़ाई से दूरी बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि उनके अचानक दौड़ने की दिशा का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है।

    फिलहाल इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे देखकर लोग हादसे की गंभीरता पर चर्चा कर रहे हैं।

     

     

     

     

  • ‘नौकरी गई तो तुरंत छोड़ें अमेरिका:’ अब नहीं मिलेंगे 60 दिन, ट्रंप का H-1B वीजा होल्डर्स को बड़ा झटका!

    ‘नौकरी गई तो तुरंत छोड़ें अमेरिका:’ अब नहीं मिलेंगे 60 दिन, ट्रंप का H-1B वीजा होल्डर्स को बड़ा झटका!

    अमेरिका में नौकरी की तलाश कर रहे और वहां आईटी या अन्य क्षेत्रों में कार्यरत विदेशी नागरिकों, खासकर भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद से अमेरिकी आव्रजन नीतियों (immigration policies) में लगातार कड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसी कड़ी में अब एच-1बी (H-1B) वीजा धारकों को लेकर एक बड़ा और सख्त फैसला लिया जाने की तैयारी है, जिसके तहत नौकरी छूटने पर मिलने वाली राहत की अवधि को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।

    अब तक के नियमों के मुताबिक, अगर किसी एच-1बी वीजा धारक की नौकरी अचानक चली जाती थी, तो उसे देश छोड़ने या नई नौकरी तलाशने के लिए ‘ग्रेस पीरियड’ के रूप में पूरे 60 दिनों का समय मिलता था। लेकिन नए प्रस्तावित नियमों के तहत इस ग्रेस पीरियड को या तो पूरी तरह हटाया जा सकता है या फिर इसे बेहद कम किया जा सकता है, जिससे अमेरिका में रह रहे प्रवासियों की मुश्किलें अचानक कई गुना बढ़ गई हैं।

    किस पर पड़ेगा ज्यादा असर?

    इस बदलाव का सबसे बुरा और सीधा असर भारत से अमेरिका गए उन लाखों टेक प्रोफेशनल्स, इंजीनियरों और कॉर्पोरेट कर्मचारियों पर पड़ेगा जो सिलिकॉन वैली या अन्य तकनीकी केंद्रों में बड़ी कंपनियों के साथ काम कर रहे हैं। वर्तमान समय में जब अमेरिकी टेक सेक्टर में छंटनी (layoffs) का दौर रुकने का नाम नहीं ले रहा है, ऐसे में 60 दिन की समयसीमा का हटना किसी बड़े झटके से कम नहीं है। पहले जब किसी कर्मचारी की नौकरी जाती थी, तो उसे दो महीने का वक्त मिल जाता था जिसके भीतर वह या तो किसी दूसरी अमेरिकी कंपनी से स्पॉन्सरशिप हासिल कर लेता था या कानूनी रूप से अपने परिवार के साथ भारत लौट सकता था। लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद अगर नौकरी गई, तो वीजा धारक को बिना किसी अतिरिक्त समय के तुरंत अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है, जिससे उनके करियर और अमेरिका में बसाए गए आशियाने के लिए एक गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

    अमेरिका फर्स्ट एजेंडा मजबूत हो

    विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की यह नीतियां ‘अमेरिका फर्स्ट’ के एजेंडे को मजबूत करने और स्थानीय अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसरों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से बनाई जा रही हैं। इस तरह के कड़े प्रावधानों से अमेरिकी कंपनियों के लिए भी विदेशी प्रतिभाओं को नियुक्त करना और उन्हें बनाए रखना अधिक जटिल हो जाएगा। कई आव्रजन वकीलों का यह भी कहना है कि इस प्रकार के अचानक और सख्त निर्णयों से न केवल कर्मचारियों बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के तकनीकी विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर कुशल कामगारों का आना-जाना प्रभावित होता है। इसके बावजूद, नीतिगत स्तर पर हो रहे इन बदलावों को देखते हुए अमेरिका में काम कर रहे प्रवासियों के लिए अब वित्तीय सुरक्षा और बैकअप प्लान तैयार रखना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।

    परिस्थितियों की गंभीरता को भांपते हुए अमेरिका में मौजूद एच-1बी वीजा धारकों और वहां जाने की योजना बना रहे लोगों को अब अपनी रणनीतियों में बदलाव करने की जरूरत है। अगर आप भी इस वीजा श्रेणी के अंतर्गत अमेरिका में कार्यरत हैं, तो किसी भी संभावित छंटनी या अनिश्चितता से निपटने के लिए अपने कानूनी विकल्पों और बचत को मजबूत रखना समझदारी होगी। हालांकि अभी इन नए नियमों के पूर्ण क्रियान्वयन को लेकर आधिकारिक और अंतिम रूप से दिशा-निर्देश आने बाकी हैं, लेकिन इस तरह की चर्चाओं ने ही प्रवासी समुदाय के बीच खलबली मचा दी है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि अमेरिकी प्रशासन इस नियम को किस रूप में लागू करता है और इसका भारतीय टेक समुदाय पर दीर्घकालिक रूप से कितना गहरा प्रभाव पड़ता है।

  • क्या हर 45 मिनट बाद 3 मिनट की हल्की कसरत से कंट्रोल रह सकता है ब्लड शुगर? एक्सपर्ट्स से जानिए इसके पीछे का विज्ञान..?

    क्या हर 45 मिनट बाद 3 मिनट की हल्की कसरत से कंट्रोल रह सकता है ब्लड शुगर? एक्सपर्ट्स से जानिए इसके पीछे का विज्ञान..?

    क्या हर 45 मिनट बाद 3 मिनट की हल्की कसरत से कंट्रोल रह सकता है ब्लड शुगर? एक्सपर्ट्स से जानिए इसके पीछे का विज्ञान..?

    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, डेस्क जॉब, खराब डाइट, बिगड़ता लाइफस्टाइल और निष्क्रिय जीवनशैली कम उम्र में ही लोगों को डायबिटीज का शिकार बना रही है। खराब डाइट का सेवन तेजी से ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ाता है। आमतौर पर माना जाता है कि ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए बॉडी को एक्टिव रखना, घंटों जिम में पसीना बहाना जरूरी है। वॉक को खासतौर पर शुगर कंट्रोल करने के लिए जरूरी माना जाता है। अक्सर लोग सीटिंग जॉब, वक्त की कमी और आलस की वजह से वॉक नहीं कर पाते और उनका शुगर का स्तर बढ़ने लगता है।

    बोर्ड-प्रमाणित इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. ऑस्टिन पर्ल मटर ने इंस्टाग्राम पोस्ट में डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि अगर हर 45 मिनट में सिर्फ 3 मिनट तक ये खास एक्सरसाइज की जाए तो आसानी से ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल किया जा सकता है। इस स्टडी में अधिक वजन वाले पुरुषों पर 8.5 घंटे तक बैठे रहने की स्थिति में अलग-अलग तरह की शारीरिक गतिविधियों के असर की तुलना की गई।

    डॉ. पर्ल मटर के मुताबिक हर 45 मिनट में बॉडी-वेट स्क्वाट्स (Body weight Squats) करने वाले लोगों में ब्लड शुगर का स्तर, उन लोगों की तुलना में बेहतर रहा जो 30 मिनट तक वॉक करते थे। एक्सपर्ट ने बताया इस एक्सरसाइज का असर सिर्फ ब्लड शुगर कंट्रोल  तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिमाग और ओवर ऑल हेल्थ के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

    3 मिनट की एक्सरसाइज कैसे असर करती है, रिसर्च से समझें

    शोध में प्रतिभागियों को चार समूहों में बांटा गया। पहला समूह पूरे समय बैठा रहा जबकि दूसरे समूह ने एक बार 30 मिनट की वॉक की। तीसरे समूह ने हर 45 मिनट में 3 मिनट तक वॉक की। चौथे समूह ने हर 45 मिनट में लगभग 10 बॉडी-वेट स्क्वाट्स किए। डॉ. पर्ल मटर ने रिसर्च के निष्कर्ष का हवाला देते हुए बताया जिन लोगों ने हर 45 मिनट में थोड़ी-थोड़ी एक्सरसाइज, चाहे स्क्वाट्स हों या छोटी वॉक हो, की उनका ब्लड शुगर बेहतर तरीके से नॉर्मल रहा। एक्सपर्ट ने बताया साढ़े 8 घंटे बैठकर काम करने के बाद सिर्फ 30 मिनट की वॉक करने से बेहतर हर 45 मिनट में 3 मिनट की एक्सरसाइज है।

    अध्ययन में यह भी पाया गया कि ब्लड शुगर कंट्रोल का संबंध ग्लूटियस मैक्सिमस (कूल्हों की बड़ी मांसपेशी) और क्वाड्रिसेप्स (जांघ की आगे की मांसपेशियां) के सक्रिय होने से था। इससे पता चलता है कि शरीर की ये बड़ी मांसपेशियां मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाए रखने में अहम किरदार निभाती हैं। डॉ. पर्ल मटर ने कहा हर किसी के लिए हर 45 मिनट में एक्सरसाइज करना संभव नहीं हो सकता। लेकिन इस स्टडी की खास बात यह है कि इसमें अलग-अलग तरह की छोटी-छोटी एक्सरसाइज को देखा गया। चाहे कुछ लोग स्क्वाट्स करें या थोड़ी देर टहलें, शरीर को इससे मेटाबॉलिक फायदे मिलते हैं। इसका सकारात्मक असर दिमाग की सेहत पर भी पड़ सकता है, क्योंकि मेटाबॉलिज्म और ब्रेन हेल्थ एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

    बार-बार थोड़ा चलना-फिरना क्यों है जरूरी?

    एलीट केयर क्लिनिक के कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. पल्लेटी शिवा कार्तिक रेड्डी (MBBS, MD, FAIG) ने बताया हर आधा से एक घंटे में थोड़ी देर चलना-फिरना लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के नुकसान को कम करता है। लगातार बैठे रहने से मांसपेशियां ब्लड से  ग्लूकोज कम मात्रा में ले पाती हैं। जब स्क्वाट्स, तेज चाल से चलना या सीढ़ियां चढ़ने जैसी एक्टिविटी की जाती है तो शरीर की बड़ी मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, तो वे खून में मौजूद ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करती हैं। यह प्रक्रिया कुछ हद तक इंसुलिन पर निर्भर नहीं होती।

    एक्सपर्ट ने बताया अगर कोई इंसान पूरा दिन 10 से 12 घंटे सिर्फ बैठा रहता है और फिर एक बार आधा घंटे वॉक कर लेता है तो ऐसे लोगों में ब्लड शुगर में उतार चढ़ाव बना रहता है।  इसके विपरीत, दिनभर में बार-बार छोटे-छोटे मूवमेंट ब्रेक लेने से शरीर को लगातार मेटाबॉलिक फायदा मिलता है, जिससे ब्लड शुगर बेहतर तरीके से कंट्रोल रहता है और समय के साथ इंसुलिन सेंसिटिविटी भी सुधरती है।

    शुगर कंट्रोल करने के लिए कौन-कौन सी एक्सरसाइज करें?

    डॉ. रेड्डी के अनुसार बॉडी-वेट स्क्वाट्स इसलिए प्रभावी हैं क्योंकि ये पैरों की बड़ी मांसपेशियों को एक्टिव करती है, जो अधिक मात्रा में ग्लूकोज का उपयोग कर सकती हैं। एक्सपर्ट ने बताया हालांकि एक्सरसाइज करना सभी के लिए उपयुक्त नहीं है खासकर जिन बुजुर्गों को संतुलन बनाने में परेशानी होती है, घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित लोगों, गंभीर मोटापे से ग्रस्त लोगों या जिन्हें पहले से ही जोड़ों के दर्द की समस्या है उनके लिए एक्सरसाइज करना परेशानी का सबब बन सकता है। एक्सपर्ट ने बताया एक्सरसाइज हमेशा व्यक्ति की उम्र, फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

    सिटिंग जॉब करते हैं तो इस तरह रखें बॉडी को एक्टिव

    • फोन पर बात करते समय कुछ कदम टहलें इस तरह आपकी बॉडी एक्टिविटी बढ़ेगी और मसल्स की स्टिफनेस कम होगी और शुगर नॉर्मल रखने में भी मदद मिलेगी।
    • अगर आप ज्यादा मीटिंग करते हैं या सीटिंग जॉब करते हैं तो एक मीटिंग खत्म होने और दूसरी शुरू होने के बीच 2–3 मिनट चलें। इस तरह 2 से तीन मिनट की वॉक आपकी बॉडी के लिए असरदार साबित होगी।
    • हर 45–60 मिनट में उठकर थोड़ी देर चलें या कुछ स्क्वाट्स करें। नियमित रूप से ऐसा करने पर समय के साथ ब्लड शुगर कंट्रोल और मेटाबॉलिक हेल्थ में सुधार देखा जा सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है।