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  • घुमक्कड़ माने जाते हैं : इन 3 राशियों के लोग, नई जगहों की सैर और दुनिया देखने का होता है सपना

    घुमक्कड़ माने जाते हैं : इन 3 राशियों के लोग, नई जगहों की सैर और दुनिया देखने का होता है सपना

    घुमक्कड़ माने जाते हैं : इन 3 राशियों के लोग, नई जगहों की सैर और दुनिया देखने का होता है सपना

    ज्योतिष शास्त्र में राशियों के आधार पर व्यक्ति के स्वभाव, पसंद और रुचियों के बारे में कई तरह की मान्यताएं बताई जाती हैं। कुछ राशियों को यात्रा और रोमांच से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि इन राशि के लोगों को नई जगहों पर जाना, अलग-अलग लोगों से मिलना और नए अनुभव हासिल करना पसंद होता है।

    इसी वजह से ज्योतिषीय मान्यताओं में कुछ राशियों के जातकों को घुमक्कड़ स्वभाव वाला बताया जाता है। आइए जानते हैं उन 3 राशियों के बारे में।

    1. मेष राशि

    मेष राशि के स्वामी मंगल माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस राशि के लोग ऊर्जावान और उत्साही स्वभाव के होते हैं। इन्हें घूमना-फिरना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना पसंद हो सकता है।

    मेष राशि के जातक समय मिलने पर अचानक यात्रा की योजना भी बना सकते हैं। खास बात यह मानी जाती है कि इन्हें घूमने के लिए हमेशा किसी साथी की जरूरत नहीं होती। ये अकेले यात्रा करने का आनंद भी ले सकते हैं।

    2. मिथुन राशि

    मिथुन राशि के स्वामी बुध माने जाते हैं। ज्योतिष में बुध को जिज्ञासा, सीखने और संवाद से जोड़कर देखा जाता है। इसी आधार पर माना जाता है कि मिथुन राशि के लोगों को नई जगहों और नए अनुभवों को जानने में रुचि हो सकती है।

    प्रकृति के बीच समय बिताना, अलग-अलग स्थानों की सैर करना और नए लोगों से बातचीत करना इन्हें पसंद आ सकता है। इसी वजह से मिथुन राशि को भी यात्रा पसंद करने वाली राशियों में शामिल किया जाता है।

    3. धनु राशि

    धनु राशि को ज्योतिष में सबसे अधिक यात्रा और रोमांच से जुड़ी राशियों में गिना जाता है। इस राशि के लोगों को नई जगहों की यात्रा करने, अलग-अलग संस्कृतियों को जानने और नए लोगों से मिलने का शौक होने की मान्यता है।

    धनु राशि के जातकों को लंबी यात्राएं और एडवेंचर पसंद आ सकते हैं। छुट्टियों के दौरान भी ये नए स्थानों की तलाश में निकलना पसंद कर सकते हैं। इनके लिए यात्रा सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि नए अनुभव हासिल करने का जरिया भी मानी जाती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं में यात्रा से जुड़ी ये राशियां

    ज्योतिष के अनुसार मेष, मिथुन और धनु राशि के लोगों को यात्रा और नई जगहों की खोज से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, किसी व्यक्ति का वास्तविक स्वभाव केवल उसकी राशि से तय नहीं होता। व्यक्तिगत रुचियां, परिस्थितियां और जीवनशैली भी यात्रा करने की पसंद को प्रभावित करती हैं।

    नोट: राशियों से जुड़े ये विवरण ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित व्यक्तित्व-विश्लेषण नहीं माना जाता।

  • नीचे नदी, बीच में सुरंग और ऊपर पुल-मंदिर! प्रकृति का ऐसा अनोखा नजारा देखकर रह जाएंगे हैरान..

    नीचे नदी, बीच में सुरंग और ऊपर पुल-मंदिर! प्रकृति का ऐसा अनोखा नजारा देखकर रह जाएंगे हैरान..

    नीचे नदी, बीच में सुरंग और ऊपर पुल-मंदिर! प्रकृति का ऐसा अनोखा नजारा देखकर रह जाएंगे हैरान..

    भारत में ऐसी कई जगहें हैं, जहां प्रकृति और इंसानी आस्था का अनोखा मेल देखने को मिलता है। ऐसी ही एक जगह का जिक्र सामने आया है, जहां नीचे नदी बहती है, चट्टानों के बीच सुरंग दिखाई देती है और उसके ऊपर बना रास्ता किसी प्राकृतिक पुल जैसा नजर आता है।

    इस जगह के आसपास बना मंदिर और पहाड़ों के बीच से गुजरता रास्ता इसे और भी खास बना देता है। ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सामने फैले विशाल पहाड़, खुले मैदान और बादलों का नजारा ऐसा लगता है जैसे आप किसी दूसरी ही दुनिया में पहुंच गए हों।

    नीचे बहती है सरस्वती नदी

    इस जगह की सबसे खास बात इसके नीचे बहने वाली नदी है। चट्टानों के बीच से नदी का पानी लगातार बहता रहता है और आसपास का प्राकृतिक वातावरण इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देता है।

    नदी के बीच या आसपास बनी प्राकृतिक संरचनाएं लोगों के लिए किसी रहस्य से कम नहीं लगतीं। पानी, चट्टानों और पहाड़ों का यह मेल इस जगह को बेहद अनोखा रूप देता है।

    चट्टानों के बीच बनी है रहस्यमयी सुरंग

    नदी के ऊपर और आसपास चट्टानों के बीच एक सुरंग जैसी संरचना भी दिखाई देती है। इसके ऊपर से गुजरने वाला रास्ता देखने में किसी प्राकृतिक पुल जैसा लगता है।

    यही वजह है कि यहां पहुंचने वाले लोगों को ऐसा अनुभव होता है जैसे प्रकृति ने खुद अपनी इंजीनियरिंग से इस जगह को तैयार किया हो।

    ऊपर बना मंदिर बढ़ाता है खूबसूरती

    इस प्राकृतिक संरचना के पास एक मंदिर भी स्थित है। नदी, चट्टानों और मंदिर का एक साथ दिखाई देना इस जगह को धार्मिक और प्राकृतिक दोनों नजरिए से खास बना देता है।

    मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों और ऊंचे रास्ते से गुजरना पड़ता है। जैसे-जैसे कोई ऊपर की ओर बढ़ता है, आसपास का नजारा भी बदलता जाता है।

    सीढ़ियां चढ़ते ही बदल जाता है पूरा नजारा

    ऊंचाई पर पहुंचने के बाद नीचे की नदी और आसपास के पहाड़ों का दृश्य बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। साफ मौसम में दूर-दूर तक फैली पर्वत श्रृंखलाएं और आसमान में तैरते बादल इस जगह को और आकर्षक बना देते हैं।

    सुबह या शाम के समय सूर्य की रोशनी पहाड़ों और बादलों पर पड़ती है तो पूरा वातावरण और भी मनमोहक नजर आता है।

    क्यों कहा जाता है ‘धरती का स्वर्ग’?

    चारों तरफ पहाड़, बादल, हरियाली और प्राकृतिक शांति होने की वजह से इस तरह की जगहों को लोग अक्सर ‘धरती का स्वर्ग’ कहकर संबोधित करते हैं।

    यहां का वातावरण शहरों की भीड़ और शोर से बिल्कुल अलग महसूस होता है। प्रकृति के करीब समय बिताने और पहाड़ों की खूबसूरती देखने के लिए लोग दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं।

    प्रकृति और आस्था का अनोखा संगम

    इस जगह की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां प्राकृतिक सुंदरता के साथ धार्मिक आस्था भी जुड़ी हुई है। नीचे बहती नदी, चट्टानों की संरचना, ऊंचाई पर बने मंदिर और चारों तरफ फैले पहाड़ मिलकर इसे एक अलग पहचान देते हैं।

    यही वजह है कि यह गांव और इसके आसपास का इलाका प्रकृति प्रेमियों के साथ-साथ धार्मिक यात्रियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

    भारत की भौगोलिक विविधता को देखें तो ऐसी जगहें यह एहसास कराती हैं कि प्रकृति ने देश के अलग-अलग हिस्सों में कितने अद्भुत नजारे संजोकर रखे हैं।

  • पेट के अंदर छिपा : था बच्चा! ‘प्रेग्नेंट गुड़िया’ का अनोखा डिजाइन देखकर हैरान रह गए लोग, इंटरनेट पर छिड़ी बहस..

    सोशल मीडिया पर इन दिनों एक अनोखे खिलौने ने लोगों का ध्यान खींच लिया है। यह गुड़िया देखने में सामान्य लगती है, लेकिन इसके डिजाइन की खासियत जानकर लोग हैरान रह गए। गुड़िया के पेट के अंदर एक छोटा सा बेबी टॉय रखा गया है, जिसे बाहर निकालकर गुड़िया की गोद में रखा जा सकता है।

    इस अलग तरह के कॉन्सेप्ट ने लोगों के बीच बहस छेड़ दी है। कुछ लोग इसे क्रिएटिव और मजेदार खिलौना बता रहे हैं, तो कई लोगों को इसका डिजाइन अजीब और थोड़ा असहज करने वाला लग रहा है।

    क्या है इस ‘प्रेग्नेंट डॉल’ की कहानी?

    सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही जानकारी के मुताबिक, इस खिलौने को ‘Zuru Mini Baby Mom & Baby Surprise’ कहा जाता है। यह एक डॉल और छोटे बेबी के सेट के रूप में तैयार किया गया है।

    इस खिलौने की सबसे खास बात इसका डिजाइन है। गुड़िया के पेट के अंदर एक छोटा बेबी टॉय फिट किया गया है। पेट का हिस्सा खोलने पर यह छोटा बेबी बाहर निकाला जा सकता है। इसके बाद उसे गुड़िया की गोद में रखकर अलग से इस्तेमाल किया जा सकता है।

    गुड़िया के पेट से निकलता है छोटा बेबी

    इस खिलौने को इस तरह डिजाइन किया गया है कि गुड़िया के पेट के अंदर रखा छोटा बेबी आसानी से बाहर निकाला जा सके। इसके बाद बच्चे को गुड़िया की गोद में रखने का विकल्प दिया गया है।

    यही फीचर इसे बाकी सामान्य डॉल्स से अलग बनाता है और इसी वजह से इंटरनेट पर लोग इसके डिजाइन को लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं।

    किसी को पसंद आया डिजाइन, तो किसी को लगा अजीब

    खिलौने को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग हैं। कुछ लोगों ने इसे अनोखा और क्रिएटिव बताया। उनका कहना है कि बच्चों के खिलौनों में इस तरह के नए कॉन्सेप्ट लोगों की जिज्ञासा बढ़ाते हैं।

    वहीं, कई लोगों को गुड़िया के पेट के अंदर से बच्चे को निकालने का कॉन्सेप्ट थोड़ा अजीब लगा। कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि बच्चों के लिए खिलौने का ऐसा डिजाइन कितना सामान्य माना जाए।

    कमेंट्स में लोगों ने जमकर लिए मजे

    इस खिलौने को लेकर लोगों ने मजेदार टिप्पणियां भी कीं। किसी ने मजाक में कहा कि अगर गुड़िया के साथ बच्चा मिल रहा है तो अब उसके पिता को भी पैकेज में शामिल कर देना चाहिए था।

    वहीं, कुछ लोगों ने मजाक करते हुए कहा कि काश असल जिंदगी में भी बच्चे का जन्म इतना आसान होता।

    ऐसी टिप्पणियों ने इस अनोखे खिलौने को लेकर चर्चा को और बढ़ा दिया।

    क्या यह सच में ‘प्रेग्नेंट’ गुड़िया है?

    दरअसल, इसे असली प्रेग्नेंसी से जोड़कर देखने की जरूरत नहीं है। यह सिर्फ एक खिलौना है, जिसे मां और बेबी के कॉन्सेप्ट पर डिजाइन किया गया है।

    गुड़िया के पेट के अंदर रखा छोटा बेबी उसके डिजाइन का हिस्सा है। सोशल मीडिया पर इसे आसान भाषा में ‘प्रेग्नेंट डॉल’ कहा जा रहा है, जिसकी वजह से यह लोगों के बीच ज्यादा चर्चा में आ गई।

    बच्चों के लिए खरीदते समय रखें ध्यान

    अगर माता-पिता इस तरह का खिलौना खरीदने की सोच रहे हैं तो निर्माता की ओर से दी गई उम्र सीमा और सुरक्षा संबंधी जानकारी जरूर देखनी चाहिए। छोटे हिस्सों वाले खिलौनों के मामले में खास तौर पर यह देखना जरूरी है कि वे बच्चे की उम्र के हिसाब से उपयुक्त हैं या नहीं।

    फिलहाल इस अनोखी डॉल के डिजाइन ने इंटरनेट पर लोगों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। कोई इसे क्रिएटिव खिलौना मान रहा है, तो किसी को इसका कॉन्सेप्ट अजीब लग रहा है। यही अलग-अलग प्रतिक्रियाएं इस खिलौने को सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना रही हैं।

  • विदेश जाने की जरूरत : नहीं भारत का ये खूबसूरत द्वीप देखकर भूल जाएंगे विदेशी बीच, प्रकृति का दिखेगा अनोखा नजारा

    विदेश जाने की जरूरत : नहीं भारत का ये खूबसूरत द्वीप देखकर भूल जाएंगे विदेशी बीच, प्रकृति का दिखेगा अनोखा नजारा

    विदेश जाने की जरूरत : नहीं भारत का ये खूबसूरत द्वीप देखकर भूल जाएंगे विदेशी बीच, प्रकृति का दिखेगा अनोखा नजारा

    विदेशों के खूबसूरत बीच और द्वीपों पर घूमने का सपना बहुत से लोग देखते हैं, लेकिन बजट की वजह से हर किसी के लिए विदेश यात्रा करना आसान नहीं होता। हालांकि, अगर आप प्राकृतिक खूबसूरती और शांत माहौल वाली जगह पर घूमना चाहते हैं तो इसके लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं है।

    भारत में भी कई ऐसी जगहें हैं, जहां की खूबसूरती किसी विदेशी डेस्टिनेशन से कम नहीं लगती। ऐसी ही एक खास जगह है असम का माजुली द्वीप, जो ब्रह्मपुत्र नदी के बीच बसा हुआ है।

    ब्रह्मपुत्र नदी के बीच बसा है माजुली

    माजुली असम के जोरहाट क्षेत्र के पास ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित एक प्रसिद्ध नदी द्वीप है। अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, हरियाली और शांत वातावरण की वजह से यह जगह देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित करती है।

    यहां पहुंचने के बाद आपको चारों तरफ नदी, हरियाली और ग्रामीण जीवन का खूबसूरत मेल देखने को मिलता है। शहरों की भीड़भाड़ से दूर कुछ समय सुकून से बिताने वालों के लिए यह जगह अलग अनुभव देती है।

    प्राकृतिक खूबसूरती देखकर रह जाएंगे हैरान

    माजुली की सबसे बड़ी खासियत इसका प्राकृतिक वातावरण है। ब्रह्मपुत्र नदी के विस्तृत जल क्षेत्र, हरे-भरे इलाके और खुले आसमान का नजारा यहां आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करता है।

    खासकर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय नदी किनारे का दृश्य बेहद खूबसूरत नजर आता है। अगर आपको प्रकृति के बीच फोटोग्राफी करना पसंद है तो यहां कई शानदार तस्वीरें क्लिक की जा सकती हैं।

    सिर्फ घूमने की जगह नहीं, संस्कृति का भी केंद्र

    माजुली सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही मशहूर नहीं है। यह असम की सांस्कृतिक और वैष्णव परंपरा से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

    द्वीप पर मौजूद कई सत्र (Satras) असम की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को समझने का मौका देते हैं। यहां पारंपरिक कला, संगीत, नृत्य और स्थानीय जीवन की झलक भी देखने को मिलती है।

    विदेश जैसा अनुभव, लेकिन देश में

    अगर आप कम बजट में किसी शांत और प्राकृतिक जगह की यात्रा करना चाहते हैं, तो माजुली आपके लिए एक अलग तरह का अनुभव हो सकता है। यहां आपको समुद्र का बीच नहीं, बल्कि विशाल ब्रह्मपुत्र नदी के बीच बसे द्वीप की खूबसूरती देखने को मिलेगी।

    यानी खूबसूरत द्वीप और प्राकृतिक नजारों का आनंद लेने के लिए हमेशा विदेश जाने की जरूरत नहीं। असम का माजुली अपने शांत वातावरण, हरियाली, नदी के नजारे और समृद्ध संस्कृति के कारण भारत के खास ट्रैवल डेस्टिनेशंस में अपनी अलग पहचान रखता है।

  • पितृपक्ष में घर लाएं:  ये 3 चीजें, पितरों की कृपा से जीवन में आ सकती हैं खुशियां, जानें धार्मिक मान्यताएं.

    पितृपक्ष में घर लाएं: ये 3 चीजें, पितरों की कृपा से जीवन में आ सकती हैं खुशियां, जानें धार्मिक मान्यताएं.

    पितृपक्ष में घर लाएं:  ये 3 चीजें, पितरों की कृपा से जीवन में आ सकती हैं खुशियां, जानें धार्मिक मान्यताएं.

    पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में कुछ विशेष वस्तुओं को घर लाना और पूजा-पाठ में उनका इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है।

    साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से होगी। ऐसे में आइए जानते हैं उन 3 चीजों के बारे में, जिन्हें पितृपक्ष के दौरान घर लाने की परंपरा बताई जाती है।

    1. तांबे, कांसे या पीतल के बर्तन

    पितृपक्ष के दौरान तांबे, कांसे और पीतल के बर्तन खरीदना कुछ धार्मिक मान्यताओं में शुभ माना जाता है। इन धातुओं के बर्तनों का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में भी किया जाता है। मान्यता है कि इन बर्तनों से पितरों का तर्पण करने से पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त होती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    2. घर लाएं गंगाजल

    हिंदू धर्म में गंगाजल को पवित्र माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान इसे घर लाना और धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। मान्यता के अनुसार, गंगाजल से तर्पण करने और पूजा के दौरान इसका उपयोग करने से धार्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है। कुछ परिवार इस अवधि में गंगाजल का छिड़काव भी करते हैं।

    3. काले तिल का करें इस्तेमाल

    पितृपक्ष में काले तिल का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। श्राद्ध और तर्पण के दौरान काले तिल का इस्तेमाल करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काले तिल का दान करना भी शुभ माना जाता है। कई लोग पितृपक्ष के दौरान इन्हें घर लाकर पूजा और तर्पण से जुड़े कार्यों में इस्तेमाल करते हैं।

    पितृपक्ष में इन बातों का भी रखें ध्यान

    पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों का स्मरण करना, श्रद्धापूर्वक श्राद्ध और तर्पण करना तथा जरूरतमंदों की सहायता करना धार्मिक परंपराओं का हिस्सा है। इन दिनों सात्विक आचरण और परिवार की परंपराओं के अनुसार पूजा-पाठ करने पर भी जोर दिया जाता है।

    ध्यान दें: तांबे, कांसे या पीतल के बर्तन, गंगाजल और काले तिल से जुड़ी बातें धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें जीवन में खुशियां आने या पितृदोष दूर होने की वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।

  • 308 पहिए और 200 : टन की मशीनरी! बिहार की सड़क पर दिखा विशाल ट्रक, देखने के लिए उमड़ी भीड़

    308 पहिए और 200 : टन की मशीनरी! बिहार की सड़क पर दिखा विशाल ट्रक, देखने के लिए उमड़ी भीड़

    308 पहिए और 200 : टन की मशीनरी! बिहार की सड़क पर दिखा विशाल ट्रक, देखने के लिए उमड़ी भीड़

    बिहार के कैमूर जिले के कुदरा में इन दिनों एक विशाल ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस खास ट्रक को देखकर सड़क से गुजर रहे लोग भी कुछ देर के लिए रुक गए। वजह थी इसका बेहद बड़ा आकार और इस पर लदी करीब 200 टन वजनी भारी मशीनरी।

    बताया जा रहा है कि यह विशाल वाहन बेल्जियम से लाई गई मशीनरी को लेकर भारत के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जा रहा है। कुदरा से गुजरते समय इसे देखने के लिए सड़क के दोनों ओर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    308 पहियों वाले ट्रक को देखकर लोग रह गए हैरान

    इस भारी-भरकम ट्रक की सबसे बड़ी खासियत इसके पहिए हैं। जानकारी के मुताबिक, पूरे वाहन में 308 पहिए लगाए गए हैं, ताकि इतनी भारी मशीनरी को सुरक्षित तरीके से सड़क के रास्ते ले जाया जा सके।

    इतने बड़े आकार का वाहन इलाके के लोगों के लिए रोज-रोज देखने वाली चीज नहीं है। यही वजह रही कि जैसे ही ट्रक सड़क से गुजरने लगा, आसपास मौजूद लोगों की नजरें उस पर टिक गईं।

    बेल्जियम से भारत लाई गई है मशीनरी

    इस ट्रक पर करीब 200 टन की भारी मशीनरी लदी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मशीनरी को बेल्जियम से भारत लाया गया है।

    यह मशीनरी समुद्री रास्ते से ओडिशा के पारादीप पोर्ट पहुंची थी। इसके बाद इसे सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश के बलरामपुर स्थित एक चीनी मिल तक ले जाया जा रहा है।

    इतने भारी सामान को सड़क के रास्ते एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना अपने आप में चुनौतीपूर्ण काम है।

    रेल ओवरब्रिज के नीचे से निकालना था चुनौती

    कुदरा में इस विशाल वाहन को निकालते समय कई जगहों पर विशेष सावधानी बरती गई। खासकर रेल ओवरब्रिज के नीचे

  • बंदर ने सैलून में कराई :मजेदार बॉडी मसाज, वायरल हुआ ‘मोंकेश भाई’ का क्यूट अंदाज; देखें वीडियो

    बंदर ने सैलून में कराई :मजेदार बॉडी मसाज, वायरल हुआ ‘मोंकेश भाई’ का क्यूट अंदाज; देखें वीडियो

    बंदर ने सैलून में कराई :मजेदार बॉडी मसाज, वायरल हुआ ‘मोंकेश भाई’ का क्यूट अंदाज; देखें वीडियो

    सोशल मीडिया पर एक बंदर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह नाई की दुकान पर कुर्सी पर बैठकर मजे से बॉडी मसाज करवा रहा है. आप भी देखिए ये मजेदार वीडियो.

    अक्सर लोग दिनभर की भागदौड़ और थकान मिटाने के लिए सैलून जाकर सुकून भरी मसाज करवाते हैं. लेकिन जरा सोचिए, अगर कोई जानवर वो भी बंदर नाई की कुर्सी पर आराम से बैठकर बॉडी मसाज लेने लगे तो क्या होगा? सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा ही बेहद प्यारा और हैरान करने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर आपकी भी हंसी छूट जाएगी. वायरल वीडियो में एक बंदर सैलून की कुर्सी पर ऐसे बैठा है, मानों वो शहर का कोई बहुत बड़ा VIP ग्राहक हो.

    सैलून की कुर्सी पर राजा बाबू की तरह बैठा बंदर

    वायरल हो रहे इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक बंदर अचानक से किसी नाई की दुकान में दाखिल होता है. उसे देखकर ऐसा लगता है जैसे आज उसका मूड पूरी तरह से रिलैक्स करने का था. वह बिना किसी डर या झिझक के सीधे सैलून की कुर्सी पर जाकर आराम से बैठ गया. उसके हाव-भाव और शरीर की ढीली पोजीशन यह चीख-चीख कर कह रही थी कि उसे आज बस जमकर मसाज चाहिए.

    नाई ने भी बिना किसी झिझक के शुरू कर दी स्पेशल मसाज

    बंदर के इस अनोखे अंदाज को देखकर नाई भी हैरान रह गया, लेकिन उसने बंदर को भगाने के बजाय उसके साथ दोस्ताना व्यवहार किया. नाई ने बड़े प्यार से बंदर की बॉडी मसाज करना शुरू कर दिया. वीडियो में बंदर आंखें बंद करके इस मुफ्त के स्पा ट्रीटमेंट का पूरा लुत्फ उठाते हुए नजर आ रहा है. नाई भी पूरी शिद्दत से उसकी मालिश करने में जुटा हुआ है.

    ‘मोंकेश भाई’ के नाम से सोशल मीडिया पर मचा तहलका

    यह वीडियो इंस्टाग्राम पर @divya177kumari नाम की यूजर द्वारा शेयर किया गया है. इसके कैप्शन में लिखा है- मोंकेश भाई मसाज का आनंद ले रहे हैं. जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर आया, यह आग की तरह फैल गया. लोग इस वीडियो को बार-बार देख रहे हैं और इसपर जमकर मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

    लोगों ने पूछा- बिल कौन चुकाएगा?

    इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने मजे लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी. जनता के मन में सबसे बड़ा और मजेदार सवाल यही था कि इस शानदार सर्विस का बिल आखिर कौन चुकाएगा? कई यूजर्स ने चुटकी लेते हुए कहा कि मोंकेश भाई ने बिना एक भी रुपया खर्च किए फुल-बॉडी मसाज का लुत्फ उठा लिया. कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में यह भी लिखा कि अगर नाई अपनी टिप की उम्मीद कर रहा है, तो उसे मोंकेश भाई के बटुए के साथ लौटने का लंबा इंतजार करना पड़ेगा.

    अब देखिए ये वायरल वीडियो

     

     

     
     
  • गरबा पंडालों में 4.5 : लाख लड़कियों के दावे से मचा विवाद, BJP विधायक उषा ठाकुर ने कही ये बात.

    गरबा पंडालों में 4.5 : लाख लड़कियों के दावे से मचा विवाद, BJP विधायक उषा ठाकुर ने कही ये बात.

    गरबा पंडालों में 4.5 : लाख लड़कियों के दावे से मचा विवाद, BJP विधायक उषा ठाकुर ने कही ये बात.

    मध्य प्रदेश में नवरात्रि से पहले गरबा आयोजनों में एंट्री को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री उषा ठाकुर के एक बयान ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को और बढ़ा दिया है। उन्होंने दावा किया कि हर साल करीब 4.5 लाख हिंदू लड़कियां गरबा पंडालों से गैर-हिंदू युवकों के साथ चली जाती थीं।

    उषा ठाकुर ने इस दावे को जनसांख्यिकी से जोड़ते हुए करीब 9 लाख बच्चों का भी जिक्र किया। हालांकि, उनके बताए इन आंकड़ों के समर्थन में किसी सरकारी आंकड़े, आधिकारिक सर्वे या अन्य प्रमाणित स्रोत का उल्लेख सामने नहीं आया है। इसलिए इन संख्याओं को उनके दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक की मांग

    उषा ठाकुर ने गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि आयोजनों में आने वाले लोगों की पहचान सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग अपनी पहचान छिपाकर गरबा पंडालों में प्रवेश करते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने ऐसे लोगों को रोकने की बात कही, जो उनकी नजर में धार्मिक पहचान छिपाकर आयोजन में शामिल होते हैं।

    4.5 लाख लड़कियों और 9 लाख बच्चों का दावा

    उषा ठाकुर ने कहा कि उनके अनुसार हर साल बड़ी संख्या में हिंदू लड़कियां गरबा आयोजनों के दौरान दूसरे समुदाय के युवकों के साथ चली जाती थीं। उन्होंने करीब 4.5 लाख लड़कियों का आंकड़ा बताया और इसके बाद करीब 9 लाख बच्चों का जिक्र किया।

    हालांकि, इस दावे को साबित करने के लिए उन्होंने कोई आधिकारिक आंकड़ा या जनसांख्यिकीय अध्ययन पेश नहीं किया। उपलब्ध रिपोर्टों में भी इन संख्याओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    गरबा के धार्मिक स्वरूप पर भी जोर

    उषा ठाकुर ने गरबा को धार्मिक परंपरा और शक्ति की आराधना से जुड़ा आयोजन बताते हुए इसके पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि गरबा केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसके पीछे धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा भी जुड़ी हुई है।

    उन्होंने आयोजनों में बढ़ते फैशन और दिखावे का जिक्र करते हुए पारंपरिक स्वरूप पर ध्यान देने की बात कही।

    रामेश्वर शर्मा के बयान से भी गरबा पर विवाद

    गरबा में एंट्री को लेकर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा का बयान भी चर्चा में है। भोपाल के हुजूर से विधायक शर्मा ने कहा कि मुस्लिम युवक गरबा में अकेले क्यों आते हैं और उन्हें अपनी बहन-बेटियों को भी साथ लाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने आपत्ति जताई।

    इस पूरे मामले के बीच मध्य प्रदेश में नवरात्रि और गरबा आयोजनों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ आयोजनों की धार्मिक पहचान और सुरक्षा को लेकर तर्क दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नेताओं के बयानों पर राजनीतिक दलों के बीच विरोध और बहस भी सामने आ रही है।

    आंकड़ों को लेकर क्या है स्थिति?

    उषा ठाकुर द्वारा बताए गए 4.5 लाख लड़कियों और 9 लाख बच्चों के आंकड़ों का कोई आधिकारिक स्रोत सामने नहीं आया है। इसलिए इन आंकड़ों को प्रमाणित तथ्य के बजाय भाजपा विधायक के दावे के रूप में ही रिपोर्ट किया जाना चाहिए।

  • गणेश विसर्जन के बाद : कलश के नारियल का क्या करें? जानें 4 धार्मिक मान्यताएं और सही तरीका.

    गणेश विसर्जन के बाद : कलश के नारियल का क्या करें? जानें 4 धार्मिक मान्यताएं और सही तरीका.

    गणेश विसर्जन के बाद : कलश के नारियल का क्या करें? जानें 4 धार्मिक मान्यताएं और सही तरीका.

    गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणेश की स्थापना के साथ कई घरों में कलश भी स्थापित किया जाता है। कलश के ऊपर नारियल रखा जाता है, जिसे पूजा में शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। लेकिन जब गणपति बप्पा को विदाई देने का समय आता है, तो भक्तों के मन में सवाल उठता है कि कलश पर रखे नारियल और उसके जल का क्या करना चाहिए।

    इस साल 25 सितंबर 2026 को गणेश विसर्जन किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विसर्जन के बाद कलश के नारियल और जल का इस्तेमाल कुछ विशेष तरीकों से किया जा सकता है। आइए जानते हैं इनके बारे में।

    1. नारियल को फोड़कर प्रसाद के रूप में बांटें

    अगर कलश पर रखा नारियल अच्छी स्थिति में है और खराब नहीं हुआ है, तो उसे फोड़कर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जा सकता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, पूजा में चढ़ाई गई सामग्री को श्रद्धापूर्वक प्रसाद के रूप में स्वीकार किया जाता है। परिवार के सदस्य इसे आपस में बांट सकते हैं।

    2. लाल कपड़े में बांधकर रख सकते हैं नारियल

    कुछ धार्मिक मान्यताओं में कलश के नारियल को लाल कपड़े में बांधकर घर के पूजा स्थल या तिजोरी में रखने का सुझाव दिया जाता है। इसे भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा और आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में रखा जाता है। यदि आप ऐसा करते हैं, तो नारियल को साफ और सुरक्षित स्थान पर रखें।

    3. गणपति प्रतिमा के साथ विसर्जित करने का विकल्प

    कुछ परिवार अपनी परंपरा के अनुसार कलश के नारियल को गणपति प्रतिमा के साथ विसर्जित करते हैं। हालांकि, विसर्जन की विधि स्थानीय धार्मिक परंपराओं और पर्यावरण संबंधी नियमों के अनुसार अपनानी चाहिए। प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषित करने से बचें और जहां संभव हो, निर्धारित कृत्रिम विसर्जन स्थल का उपयोग करें।

    4. कलश के जल का क्या करें?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के बाद कलश के जल को श्रद्धापूर्वक इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ लोग इस जल का घर में छिड़काव करते हैं और बचा हुआ पानी किसी पौधे या गमले में डाल देते हैं। ऐसा करते समय ध्यान रखें कि जल में ऐसी सामग्री न मिली हो जो पौधों या मिट्टी को नुकसान पहुंचा सकती हो।

    धार्मिक मान्यताओं का रखें ध्यान

    गणेश विसर्जन के बाद नारियल और कलश के जल के इस्तेमाल की विधियां परिवारों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए अपने घर की परंपरा और पूजा कराने वाले पुरोहित के निर्देशों का पालन कर सकते हैं। इन उपायों को धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में समझें।

  • हिंदू परिवार में जन्मे : रुद्र सेन वर्मा, 16 सालों से सिख गेटअप में रहते हैं; लोग प्यार से बुलाते हैं ‘सरदार जी’

    हिंदू परिवार में जन्मे : रुद्र सेन वर्मा, 16 सालों से सिख गेटअप में रहते हैं; लोग प्यार से बुलाते हैं ‘सरदार जी’

    हिंदू परिवार में जन्मे : रुद्र सेन वर्मा, 16 सालों से सिख गेटअप में रहते हैं; लोग प्यार से बुलाते हैं ‘सरदार जी’

    उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के रुद्र सेन वर्मा की पहचान अपने आप में काफी अलग है। नाम और सरनेम से उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि का अंदाजा लगाया जा सकता है, लेकिन पिछले करीब 16 वर्षों से वह पगड़ी, दाढ़ी और मूंछों के साथ सिख गेटअप में नजर आते हैं।

    इलाके में अब उनकी यह पहचान इतनी मशहूर हो चुकी है कि लोग उन्हें उनके नाम से ज्यादा प्यार से ‘सरदार जी’ या ‘पंजाबी वाले’ कहकर बुलाते हैं।

    आर्थिक परेशानियों के बीच छोड़ा घर

    रुद्र सेन वर्मा के मुताबिक, उनके जीवन का एक दौर काफी मुश्किलों से भरा रहा। पारिवारिक परिस्थितियों और आर्थिक तंगी के कारण उन्हें रोजगार की तलाश में अपना घर छोड़ना पड़ा।

    कमाई के लिए वह पहले हरियाणा पहुंचे और इसके बाद पंजाब के लुधियाना चले गए। पंजाब में रहने के दौरान उनका वहां के माहौल और लोगों से गहरा जुड़ाव हुआ।

    कब बदला पहनावा?

    पंजाब में रहने के दौरान रुद्र ने सिख समुदाय की वेशभूषा को अपनाना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने पगड़ी बांधना, दाढ़ी और मूंछें रखना शुरू कर दिया।

    समय के साथ यह पहनावा उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया। आज करीब 16 साल बाद भी वह इसी अंदाज में रहते हैं।

    इलाके में बन गई अलग पहचान

    रुद्र जब अपने क्षेत्र में लौटे तो उनका बदला हुआ पहनावा लोगों के लिए आकर्षण का विषय बन गया। शुरुआत में लोग उन्हें देखकर हैरान होते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनका यह अंदाज उनकी पहचान बन गया।

    अब स्थानीय लोग उन्हें सम्मान और अपनापन दिखाते हुए ‘सरदार जी’ या ‘पंजाबी वाले’ कहकर बुलाते हैं।

    सिर्फ पहनावा नहीं, जुड़ाव की भी कहानी

    रुद्र सेन वर्मा की कहानी सिर्फ अलग तरह के पहनावे तक सीमित नहीं है। इसके पीछे उनके जीवन का वह दौर भी जुड़ा है, जब रोजगार की तलाश उन्हें हरियाणा और पंजाब तक ले गई।

    पंजाब में बिताए समय और वहां मिले अनुभवों ने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला। इसी दौरान उन्होंने ऐसा पहनावा अपनाया, जिसे वह आज भी अपनी पहचान का हिस्सा मानते हैं।

    16 साल बाद भी कायम है वही अंदाज

    समय बदल गया, परिस्थितियां बदलीं और रुद्र अपने क्षेत्र में वापस आ गए, लेकिन उनका पहनावा आज भी वैसा ही है। पगड़ी और दाढ़ी-मूंछ के साथ उनका अलग अंदाज उन्हें आसपास के लोगों के बीच आसानी से पहचान दिला देता है।

    उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि इंसान के जीवन में अलग-अलग जगहों और अनुभवों का कितना गहरा प्रभाव पड़ सकता है। रुद्र ने पंजाब में बिताए वर्षों की यादों और वहां से जुड़े अपने अनुभवों को अपनी रोजमर्रा की पहचान में शामिल कर लिया है।