उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले से पति-पत्नी और अवैध प्रेम-प्रसंग का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां सैनी कोतवाली क्षेत्र में एक पति ने अपनी पत्नी पर संगीन आरोप लगाए हैं. पति ने पत्नी को उसके कथित प्रेमी के साथ अपने ही घर में आपत्तिजनक स्थिति में रंगे हाथों पकड़ने का दावा किया है. इस पूरी घटना के बाद मौके पर भारी हंगामा खड़ा हो गया. परिजनों ने प्रेमी को पकड़कर खंभे से बांध दिया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
पति की अनुपस्थिति में रचा गया खेल यह मामला सैनी कोतवाली इलाके के एक गांव का है. पीड़ित पति का आरोप है कि उसकी पत्नी का रोहित नाम के एक युवक के साथ काफी समय से प्रेम-प्रसंग चल रहा था. पति के मुताबिक, जब वह घर पर मौजूद नहीं था, तब उसकी पत्नी ने अपने प्रेमी को चोरी-छिपे घर बुला लिया. आरोप है कि दोनों घर के भीतर रंगरेलियां मना रहे थे और उनके बीच शारीरिक संबंध बनाए जा रहे थे. इसी बीच जब पति अचानक पहुंचा, तो कमरे का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए. उसने अपनी पत्नी को उसके कथित प्रेमी रोहित के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ लिया.
अचानक पहुंचे पति ने खोला राज पति के हंगामे के बाद परिजन भी तुरंत मौके पर एकत्र हो गए. मामला बिगड़ता देख प्रेमी ने भागने की कोशिश की, लेकिन परिजनों ने उसे मौके पर ही धर दबोचा. परिजनों ने कथित प्रेमी को पकड़ लिया और खंभे से बांध दिया. इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया. देखते ही देखते यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया, जो अब जमकर वायरल हो रहा है. वीडियो सामने आने के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
मामले की जांच में जुटी पुलिस इस घटना के बाद पीड़ित पति ने सैनी कोतवाली पहुंचकर अपनी पत्नी और उसके कथित प्रेमी के खिलाफ लिखित शिकायती पत्र दिया है. पति ने पुलिस से इस मामले में कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. जिसके बाद पुलिस शिकायती पत्र के आधार पर मामले की जांच में जुट गई है. जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
जयपाल/वाराणसी: वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र के शिवपुरवा इलाके से गत 6 अगस्त से लापता ईशू कन्नौजिया की उसके ही तीन दोस्तों ने बेरहमी से हत्या कर दी. आरोपियों ने शव की पहचान छिपाने और बदबू दबाने के लिए यूट्यूब पर वीडियो देखकर शव को 5 टुकड़ों में काटा और प्लास्टिक के बोरे में भरकर गोबर के गड्ढे में फेंक दिया. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी प्रदीप, उसके सगे भाई रामकृष्ण और उनके मित्र रोहित को गिरफ्तार कर लिया है.
जानिए हत्या की वजह गत 3 अगस्त को शराब पीने के दौरान ईशू ने आरोपी प्रदीप की पिटाई कर दी थी. इसी रंजिश का बदला लेने के लिए प्रदीप ने अपने भाई और दोस्त के साथ मिलकर हत्या की खौफनाक साजिश रची.
ऐसे दिया वारदात को अंजाम 7 अगस्त की रात तीनों ने ईशू को अधिक मात्रा में शराब पिलाई. इसके बाद रोहित और रामकृष्ण ने उसके हाथ पकड़े और प्रदीप ने चापड़ से वार कर उसका गला काट दिया. पहचान छिपाने के लिए सिर और धड़ अलग कर शव के 5 टुकड़े किए गए. 6 अगस्त से लापता ईशू की 17 अगस्त को परिजनों ने सिगरा थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी.
यूट्यूब से सीखा तरीका मुख्य आरोपी प्रदीप ने यूट्यूब पर वीडियो देखकर शव ठिकाने लगाने का तरीका सीखा था. पहचान छिपाने और बदबू दबाने के लिए तीनों ने शव को प्लास्टिक के बोरे में भरा और गोबर से ढके गड्ढे में फेंक दिया.
सीडीआर और सीसीटीवी से खुलासा लापता ईशू की कॉल डिटेल (CDR) निकालने पर अंतिम कॉल प्रदीप की पाई गई. पुलिसिया पूछताछ और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर प्रदीप ने अपना जुर्म कबूल कर लिया.
शव की बरामदगी शुक्रवार रात करीब 10 बजे पुलिस ने लहरतारा-छातडीह पोखरी के पास रेलवे के खंडहरनुमा क्वार्टर में बने गोबर के गड्ढे से सड़ चुका शव बरामद किया. बोरे में गोबर भरे होने और कई दिन बीत जाने के कारण शव काफी हद तक सड़ चुका था. शव को मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा स्थित मोर्चरी में रखवाया गया, सिगरा पुलिस अग्रिम कार्रवाई में जुटी है.
क्या कहती है पुलिस.. वैभव बांगर, ADCP, काशी जोन ने बताया कि ये सारे एक साथ शराब का सेवन कर रहे थे. प्रदीप और ईशू के बीच कहासुनी हो गई और किसी धारदार हत्या से हमला किया. पुलिस ने बताया कि शव को बरामद कर लिया गया है.तीनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है. पुलिस ने बताया कि ईशू के दोस्तों ने हत्या के बाद बड़े ही सफाई से शव को ठिकाने लगाया. ऐसी जगह चुनी जहां किसी को शंका तक न हो सके। गोबर के गड्ढे में शव को प्लास्टिक के बोरे में भरकर फेंका गया ताकि आसपास के लोगों को दुर्गंध न महसूस हो सके. रेलवे के पास शव को दफन कर दिया.
बेंगलुरु में 29 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर के साथ लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। उसने आरोप लगाया कि स्वघोषित आयुर्वेदिक हीलर ने उसे सेक्सुअल समस्याओं के इलाज के नाम पर महंगी और हानिकारक हर्बल प्रोडक्ट्स बेचे। इसके लिए उसे 48 लाख रुपये चुकाने पड़े। शिकायतकर्ता ने बताया कि इन दवाओं के सेवन से उसकी तबीयत बिगड़ गई और किडनी में समस्या आने लगी। पीड़ित ज्ञानभारती इलाके में रहता है और शिवमोग्गा जिले का मूल निवासी है। वह पिछले तीन वर्षों से एक निजी फर्म में नौकरी कर रहा है। उसने ज्ञानभारती पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, मार्च में उसकी शादी हुई। पति-पत्नी पहले बसवेश्वरनगर में रहते थे। शादी के शुरुआती महीनों में उसे सेक्सुअल समस्याएं होने लगीं। वह केंगरी में मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के लिए गया, जहां डॉक्टरों ने टेस्ट कराए और कुछ दवाएं लिखीं। इस साल मई को अस्पताल जाते समय उसने उल्लाल में लॉ कॉलेज के पास सड़क किनारे आयुर्वेदिक तंबू देखा। यहां लगे पोस्टर पर सेक्सुअल समस्याओं के तुरंत समाधान का दावा किया गया था। वह टेंट के अंदर चला गया, जहां उसे एक व्यक्ति मिला। पीड़ित ने अपनी समस्याएं उसे बताईं। उस शख्स ने कहा कि ‘विजय गुरुजी’ इसका तेजी से इलाज कर सकते हैं। उसने विजय से मिलने की व्यवस्था करने का वादा किया।
सड़क किनारे टेंट पर पड़ी नजर
रिपोर्ट के मुताबिक, उसी शाम एक व्यक्ति टेंट में आया और उसने खुद को विजय गुरुजी बताया। पीड़ित की जांच करने के बाद विजय ने कहा कि एक दुर्लभ दवा देवराज बूटि उसकी समस्या का इलाज कर देगी। उसने इसे यशवंतपुर में विजयलक्ष्मी आयुर्वेदिक मेडिसिन शॉप से खरीदने को कहा। उसने कहा कि यह दवा केवल उसी दुकान पर उपलब्ध है और वह इसे उत्तराखंड के हरिद्वार से लाता है। उसने कहा कि देवराज बूटि का एक ग्राम 1.6 लाख रुपये का है। उसने कहा कि दवा केवल नकद भुगतान से खरीदी जानी चाहिए। उसने सुझाव दिया कि पीड़ित अकेले जाए, क्योंकि दावा करते हुए कि अगर कोई साथ जाए तो उसकी शक्ति नष्ट हो जाएगी।
माता-पिता से उधार लिए पैसे
पीड़ित ने घर से नकद पैसे लिए और आयुर्वेदिक दुकान पर चला गया। वह दवा लेकर विजय के पास लौटा। स्वघोषित आयुर्वेदिक हीलर ने बताया कि देवराज बूटि का इस्तेमाल कैसे करना है और उसे खास तरह का तेल भी दिया। इस तेल की कीमत 76,000 रुपये प्रति ग्राम थी और 15 ग्राम तेल खरीदने को कहा। उसने हर हफ्ते अपनी पत्नी और माता-पिता से पैसे उधार लिए और कुल 17 लाख रुपये का भुगतान 15 ग्राम तेल और अन्य प्रोडक्ट्स के लिए किया।
मेडिकल जांच की रिपोर्ट से हैरान
विजय ने बाद में उसे अतिरिक्त 3 ग्राम देवराज बूटि’ खरीदने के लिए दबाव डाला। प्रत्येक ग्राम के लिए 1.6 लाख रुपये देने को कहा। पीड़ित ने बैंक से 20 लाख रुपये का लोन लिया और कुल 18 ग्राम देवराज बूटि खरीदी। बाद में उसे देवराज रसाबूटि नामक एक अन्य दवा खरीदने के लिए मनाया गया, जिसकी कीमत 2.6 लाख रुपये प्रति ग्राम थी। इसके लिए उसने दोस्त से 10 लाख रुपये उधार लिए और चार ग्राम देवराज रसाबूटि खरीदी। इस तरह पीड़ित ने विजयलक्ष्मी आयुर्वेदिक मेडिसिन शॉप से कुल 48 लाख रुपये देकर सभी दवाएं खरीदीं। सभी दवाओं का उपयोग करने के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ। जब पीड़ित ने मेडिकल जांच कराई तो ब्लड टेस्ट के नतीजे से किडनी में समस्याएं दिखीं। अब शिकायतकर्ता का आरोप है कि विजय गुरुजी की हर्बल दवाओं के सेवन से उसकी सेहत बिगड़ी। उसने विजय, दवा दुकान मालिक और उस टेंट वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जिसने उसे विजय से मिलवाया था।
दुनिया में शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जिसे जेल में रहना पसंद होगा. लेकिन एक व्यक्ति ऐसा है, जो दुनिया में सबसे लंबे वक्त से जेल में बंद आरोपी है. वह आरोपी हत्या के आरोप में 45 साल गुजार चुका है. उसे अब सरकार रिहा करना चाहती है लेकिन वह बाहर नहीं आना चाहता. वह सरकार से गुजारिश कर रहा है कि उसे बाहर न निकाला जाए, वरना वह फिर से मर्डर कर सकता है. अब उसकी अजीब गुजारिश के बाद सरकार असमंजस में है. उसे समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करे. वह उस अपराधी को रिहा करने पर विचार करे या जेल में ही सड़ता रहने दे.
ब्रिटेन में सबसे लंबे वक्त से बंद कैदी
डेली मिरर यूके की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में सबसे लंबे वक्त से कैद इस अपराधी का नाम रोबर्ट जॉन मॉड्सले (Robert Maudsley) है. वह एक ऐसा कैदी है, जिसके खौफ से आज भी ब्रिटेन वासी कांपते हैं. उसके बारे में कहा जाता था कि वह लोगों की हत्या करने के बाद उनका दिमाग खा जाता था. पुलिस की जांच में ऐसे दावे गलत साबित हुए, लेकिन इससे लोगों में उसके प्रति डर कम नहीं हुआ. ब्रिटिश मीडिया ने इन अफवाहों की वजह से उसे हैनिबल द कैनिबल यानी दिमाग खाने वाला दानव नाम दिया था.
करीब 5 दशक पहले पुलिस ने उसे जब पकड़ा तो उसके खौफ की वजह से उसे जेल के एकांतवास में डाल दिया. उसके लिए जेल के बेसमेंट में विशेष रूप से कांच का बुलेटप्रूफ कमरा बनाया गया, जहां पर वो दिन के 23 घंटे बिल्कुल अकेले गुजारते था और महज 1 घंटे के लिए उसे खुले में लाया जाता था.
नारकीय बचपन से कातिल बनने का सफर
रिपोर्ट के मुताबिक, रोबर्ट मॉड्सले का जन्म 1953 में लिवरपूल में हुआ था. उसके शुरुआती दिन अनाथालय और पिता के खौफनाक उत्पीड़न के बीच बीते. उसके पिता हफ़्तों तक अंधेरे कमरे में बंद रखकर बेरहमी से पीटता था. बचपन की इन्हीं कड़वी यादों ने आगे चलकर उनके अंदर विकृत और हिंसक प्रवृत्ति को जन्म दिया. जवान होते ही वो नशे और अनैतिक गतिविधियों में शामिल हो गया. वर्ष 1974 में, 21 साल की उम्र में उसने पहली हत्या की. उसने एक ऐसे व्यक्ति को जान से मार डाला, जिसने उन्हें बच्चों के यौन शोषण की तस्वीरें दिखाई थीं. हत्या के बाद रोबर्ट ने खुद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और कहा कि उसे मानसिक इलाज की ज़रूरत है.
रोबर्ट को इलाज के लिए मानसिक चिकित्सालय ब्रोडमूर हॉस्पिटल भेजा गया. Broadmoor Hospital) भेजा गया, लेकिन असली तबाही तो अभी शुरू होनी बाकी थी. वहां पर वर्ष 1977 में रोबर्ट ने एक अन्य कैदी डेविज फ्रांसिस के साथ मिलकर बच्चों का यौन शोषण करने वाले एक आरोपी की हत्या कर दी. उसे इतनी बेरहमी से मारा गया कि पुलिस समेत सब लोग सहम कर रह गए.
जेल पहुंचने पर एक ही दिन में 2 कत्ल
इन दो हत्याओं के बाद लोगों में रोबर्ट मॉड्सले को लेकर खौफ बैठ गया. पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर हाई सिक्योरिटी वाली वेकफील्ड जेल जेल में भेजा. वहां पर उसने एक ही दिन में 2 कैदियों को मौत के घाट उतार दिया. उनमें से एक अपनी पत्नी की हत्या करके जेल पहुंचा था, जबकि दूसरा आरोपी एक मासूम बच्ची का उत्पीड़न करने वाला दरिंदा था.
जब जेल के गार्डों ने उसे काबू करके हत्याओं की वजह पूछी तो रोबर्ट ने कहा कि वह केवल उन्हीं लोगों को मारता है, जो बच्चों या महिलाओं के खिलाफ घिनौने अपराध करता है. वे ऐसे शैतानों को जिंदा नहीं छोड़ सकता. ऐसा करके वो लोगों को न्याय देने वाला स्वयंभू सरकार मानने लगा था.
कांच के बने स्पेशल सेल में पिछले 5 दशक से बंद
चार-चार हत्याओं के बाद ब्रिटिश जेल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. उन्हें लगा कि रोबर्ट को सामान्य कैदियों या सुरक्षा गार्डों के पास रखना भी खतरे से खाली नहीं है. इसके बाद 1983 में वेकफील्ड जेल में उनके लिए एक विशेष व्यवस्था की गई. उसके लिए बेसमेंट तैयार करवाकर वहां पर 5×4 मीटर का एक ऐसा कमरा तैयार किया गया. जिसकी दीवारें बुलेटप्रूफ कांच की थीं.
कमरे में कंक्रीट का एक बेड, टेबल और टॉयलेट बना था. खाना देने के लिए दरवाजे में एक छोटा सा छेद बनाया गया था. जब भी रोबर्ट को कमरे से बाहर निकाला जाता, तो कम से कम 5 से 6 सुरक्षा गार्ड कड़े सुरक्षा कवच और ढालों के साथ उन्हें घेरकर रखते थे. एक घंटे तक बाहर रखने के बाद उन्हें फिर से कांच के बने उस कमरे में ठूंस दिया जाता था.
‘ऐसा लगता है कि मुझे ज़िंदा दफना दिया गया’
ब्रिटिश इतिहास में रोबर्ट मॉड्सले सबसे लंबे समय तक एकांत कारावास झेलने वाले कैदी हैं. इस कैद ने रोबर्ट को अंदर तक तोड़ दिया. उसके कई रिपोर्ट्स और इंटरव्यू सामने आए, जिसमें उसने अकेलेपन से जुड़ी पीड़ा जाहिर की. उसने कहा, ‘मुझे ऐसा लगता है कि मुझे ज़िंदा दफना दिया गया है. मैं बस किसी इंसान से बात करना चाहता हूं, पक्षियों की चहचहाहट सुनना चाहता हूं.’
कोर्ट को भेजी याचिका में रोबर्ट ने लिखा, ‘मुझे टीवी, रेडियो या कम से कम एक छोटा सा तोता पालने की इजाज़त दी जाए ताकि उनका अकेलापन दूर हो सके. यदि मुझे यह सुविधा नहीं दी जा सकती, तो साइनाइड की गोली देकर हमेशा के लिए सुला दिया जाए.’
‘मुझे जेल से कभी रिहा न किया जाए’
जेल में दशकों तक एकांत कारावास में रहने के दौरान अच्छे व्यवहार की वजह से प्रशासन ने उन्हें टीवी, रेडियो जैसी कुछ बुनियादी चीजें मुहैया करवाईं. हालांकि, जेल अधिकारियों के साथ तलाशी को लेकर हुए विवाद के बाद यह सुविधाएं बंद कर दी गई. इसके विरोध में रोबर्ट ने भूख हड़ताल शुरू की, जिस पर प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अप्रैल 2025 में वेकफील्ड से ‘एचएमपी व्हिटमूर’ नामक कैटगरी-ए जेल में शिफ्ट कर दिया गया. तब से रोबर्ट उसी जेल में बंद हैं.
अब रोबर्ट इसी जिंदगी को अपनी नियति मान चुके हैं. अपने वकीलों के जरिए दिए पत्र में रोबर्ट मॉड्सले (Robert Maudsley) ने खुद को जेल से रिहा न करने की मांग की है. रोबर्ट का कहना है कि अगर उन्हें सामान्य कैदियों के साथ रखा गया या रिहा कर समाज में जाने दिया गया, तो वे फिर से हत्या कर सकते हैं. उसके मुताबिक, ‘जब मेरा सामना बच्चों या महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले अपराधियों से होता है तो मैं खुद पर काबू नहीं रख पाता हूं. ऐसी स्थिति में मैं हिंसक हो जाता हूं, जिसका अंजाम कुछ भी हो सकता है.’
‘अकेलापन असहनीय हो जाए तो मुझे मार देना’
अपनी मानसिक स्थिति को भांपते हुए मॉड्सले ने न केवल अपनी रिहाई की अर्जी देने से इनकार किया, बल्कि बची जिंदगी में भी कांच से बने बुलेटप्रूफ कमरे में कैद रहने की इच्छा जताई. उसका मानना है कि वे बाहर की दुनिया के साथ-साथ जेल के भीतर भी अन्य लोगों के लिए एक निरंतर खतरा हैं. खुद को समाज और सामान्य दुनिया के लिए अनुपयुक्त मानते हुए उसने कहा कि अगर उसके अकेलेपन का दर्द असहनीय हो जाए, तो जेल से आजाद करने के बजाय साइनाइड की गोली देकर उनका जीवन समाप्त कर दी जाए.
रोबर्ट मॉड्सले की इस कहानी पर ब्रिटिश समाज दो हिस्सों में बंटा हुआ है. एक हिस्सा रोबर्ट को हीरो मानता है, जिसने महिलाओं-बच्चों पर अत्याचार करने वाले दरिंदों को मारकर सही काम किया. वहीं, दूसरा वर्ग उन्हें खतरनाक अपराधी मानता है, जो हिंसक होने पर किसी भी जान ले सकता है. इन सब चर्चाओं से परे रोबर्ट जेल के तहखाने में बने उस कांच के बंद कमरे में बिना किसी उम्मीद के अपनी बची जिंदगी को गुजार रहा है.
एक वक्त था जब नेहा पच्चीसिया आसमान में उड़ान भरती थीं. नौकरी थी एयर होस्टेस की. फिर उन्होंने MPPSC का एग्जाम दिया, पुलिस सेवा में आईं और खाकी वर्दी पहन ली. लेकिन अब कहानी का सीन पूरी तरह बदल गया है. मध्य प्रदेश के कटनी में पदस्थ CSP नेहा पच्चीसिया के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है. आरोप जमीन के एक सौदे में दबाव बनाने, धोखाधड़ी और आपराधिक सांठगांठ से जुड़े हैं. उनके साथ दो और लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है.
ये FIR कटनी के कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है. यह कार्रवाई विभागीय जांच के बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर हुई. कटनी SP अभिनय विश्वकर्मा ने FIR दर्ज होने की पुष्टि की है. यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई. इसके पीछे शिकायतों, विभागीय जांच और एक हत्या के केस से जुड़ी जमीन की पूरी कहानी है. एयर होस्टेस से DSP बनीं नेहा पच्चीसिया की कहानी FIR तक कैसे पहुंची? नेहा पच्चीसिया ने अपने करियर की शुरुआत पुलिस से नहीं की थी.
नेहा पहले एयर होस्टेस थीं. लेकिन बाद में उन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी का फैसला किया. MPPSC की परीक्षा पास की और पुलिस सेवा में आ गईं. साल 2016 में उन्होंने MPPSC में 20वीं रैंक हासिल की. इसके बाद उनका सफर पुलिस विभाग में आगे बढ़ता गया.
यानी एक तरफ एविएशन की ग्लैमर वाली नौकरी से खाकी वर्दी तक का सफर था. लेकिन साल 2026 आते-आते उनके नाम के साथ विवादों की खबरें जुड़ने लगीं. जुलाई में एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी ने नेहा पच्चीसिया पर अवैध वसूली का आरोप लगाया.
शिकायत के बाद कटनी पुलिस ने कार्रवाई की. उनके ड्राइवर केशव सिंह को सस्पेंड कर दिया गया. नेहा पच्चीसिया से तीन थानों का प्रभार भी वापस ले लिया गया. मामले की जांच एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को दी गई. अब तक कहानी एक शिकायत और विभागीय कार्रवाई तक थी. लेकिन इसके बाद एक दूसरा मामला सामने आया.
एक युवक की हत्या के मामले में आकाश लोधी नाम के शख्स को गिरफ्तार किया गया था. बाद में उसे डिफॉल्ट बेल मिल गई. आरोप लगा कि हत्या के मामले में समय सीमा के भीतर चालान पेश नहीं किया गया था. जेल से बाहर आने के बाद आकाश लोधी ने एक और गंभीर आरोप लगाया. उसका कहना था कि गिरफ्तारी के बाद उसकी जमीन को लेकर उसके परिवार पर दबाव बनाया गया. और यहीं से कहानी पुलिस की कार्रवाई से निकलकर जमीन के सौदे तक पहुंचती है.
82 लाख की जमीन, रजिस्ट्री 18 लाख में?
मामला कटनी के कुठला थाना क्षेत्र के कन्हवारा गांव की जमीन से जुड़ा है. शिकायत और विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, जमीन की सरकारी गाइडलाइन कीमत करीब 82 लाख 86 हजार रुपये थी. लेकिन आरोप है कि इसकी रजिस्ट्री सिर्फ 18 लाख 20 हजार रुपये में कराई गई. कागजों में करीब 15 लाख रुपये चेक से और 3.20 लाख रुपये नकद भुगतान दिखाया गया. अब यहां एक और रकम सामने आती है.
शिकायतकर्ता आकाश लोधी का दावा है कि जमीन का सौदा करीब 1 करोड़ 7 लाख रुपये में हुआ था. लेकिन रजिस्ट्री के वक्त उसे सिर्फ 15 लाख रुपये का चेक दिया गया और बाकी रकम सात दिन में देने की बात कही गई. लेकिन जब बाकी पैसा नहीं मिला तो परिवार ने शिकायत की.
आकाश लोधी का आरोप है कि उसके पिता रमेश लोधी को CSP नेहा पच्चीसिया के घर दो दिन तक बैठाकर रखा गया. इसके बाद सरकारी वाहन से उन्हें जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए ले जाया गया. परिवार का आरोप है कि पुलिसिया दबाव की वजह से जमीन का सौदा कराया गया. लेकिन जांच में पैसों का एक लेनदेन सामने आया, जिसने इस कहानी को और पेचीदा बना दिया.
जांच के मुताबिक, जमीन के खरीदार मारूफ अहमद हनफी के खाते में 15 लाख रुपये क्षितिज राज के अकाउंट से ट्रांसफर किए गए. शिकायत में क्षितिज राज को नेहा पच्चीसिया का कथित पार्टनर बताया गया है. यानी जमीन का खरीदार अलग, पैसा भेजने वाला अलग और आरोपों के केंद्र में पुलिस अधिकारी अलग. जांच करने वालों के सामने सवाल था- जमीन के इस सौदे में पैसा आखिर किसका था और किसके कहने पर ट्रांसफर हुआ?
रमेश लोधी ने पैसे नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की. जमीन के नामांतरण पर भी आपत्ति दर्ज कराई. इसके बाद शिकायतों का दायरा बढ़ा और मामले की जांच जबलपुर रेंज के IG के निर्देश पर IPS अनु बेनीवाल को सौंपी गई. जांच में जमीन के सौदे, पैसों के लेनदेन और दबाव बनाने के आरोपों को देखा गया. इसके साथ ही नेहा पच्चीसिया से जुड़े दूसरे मामलों की भी जांच चल रही थी.
अब 22 अगस्त से पहले की कार्रवाई में कहानी यहां पहुंची कि कटनी के कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई. नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज और मारूफ अहमद हनफी को भी आरोपी बनाया गया है. कटनी SP अभिनय विश्वकर्मा ने FIR दर्ज होने की पुष्टि की है.
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर दुनिया के सबसे पवित्र शिव धामों में गिना जाता है.मान्यता है कि यहां दर्शन और गंगा स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.सावन, महाशिवरात्रि और देव दीपावली के दौरान लाखों श्रद्धालु यहां बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भी प्रतीक है.
नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है.यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल यह मंदिर बागमती नदी के किनारे स्थित है और यहां केवल हिंदू श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति है.महाशिवरात्रि के अवसर पर दुनियाभर से साधु-संत और लाखों भक्त यहां पहुंचते हैं.इसकी भव्य वास्तुकला और धार्मिक महत्व इसे वैश्विक पहचान दिलाते हैं.
नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है.यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल यह मंदिर बागमती नदी के किनारे स्थित है और यहां केवल हिंदू श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति है.महाशिवरात्रि के अवसर पर दुनियाभर से साधु-संत और लाखों भक्त यहां पहुंचते हैं.इसकी भव्य वास्तुकला और धार्मिक महत्व इसे वैश्विक पहचान दिलाते हैं.
अमरनाथ गुफा भगवान शिव के सबसे चमत्कारी धामों में मानी जाती है.यहां प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है.हर वर्ष सीमित समय के लिए खुलने वाली अमरनाथ यात्रा में देश-विदेश से लाखों भक्त शामिल होते हैं.धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य इसी गुफा में सुनाया था.
अरब सागर के किनारे स्थित मुरुदेश्वर मंदिर अपनी विशाल शिव प्रतिमा के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है.यहां स्थापित भगवान शिव की करीब 123 फीट ऊंची प्रतिमा दूर-दूर से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है.समुद्र के सुंदर नजारों के बीच स्थित यह मंदिर आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है.
चिदंबरम का नटराज मंदिर भगवान शिव के नटराज स्वरूप को समर्पित है, जहां उन्हें सृष्टि के दिव्य नर्तक के रूप में पूजा जाता है.द्रविड़ शैली की भव्य वास्तुकला, विशाल गोपुरम और सदियों पुरानी परंपराएं इस मंदिर को विशेष बनाती हैं.यहां का ‘चिदंबरम रहस्य’ आज भी श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के बीच जिज्ञासा का विषय बना हुआ है.
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित लिंगराज मंदिर भगवान हरिहर (शिव और विष्णु के संयुक्त स्वरूप) को समर्पित है.लगभग एक हजार वर्ष पुराने इस मंदिर को कलिंग वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है.इसकी भव्य नक्काशी, विशाल परिसर और धार्मिक महत्व इसे दुनिया के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में शामिल करते हैं.महाशिवरात्रि के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और पूरा मंदिर ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठता है.
पुलिस ने आरोपी के पास से वह मोबाइल फोन भी बरामद किया है, जिसका इस्तेमाल वीडियो डाउनलोड करने, अपलोड करने और दूसरे लोगों के साथ शेयर करने के लिए किया जाता था. पूछताछ के दौरान आरोपी ने 1200 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो की खरीद-बिक्री करने की बात स्वीकार की है.
कब हुई कार्रवाई?
साइबर डीएसपी सह थानाध्यक्ष संगीता कुमारी के अनुसार, दिल्ली स्थित सीसीयूएस से पटना सीसीयूएस को एक युवक द्वारा आपत्तिजनक वीडियो डाउनलोड किए जाने की सूचना मिली थी.
इसके साथ संबंधित लिंक भी पुलिस को भेजा गया था. सूचना मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की. जांच के आधार पर पुलिस टीम ने पालीगंज के धरहरा इलाके में छापेमारी की और अशोक कुमार को गिरफ्तार कर लिया.
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कहां से हुई इसकी शुरूआत?
आरोप है कि वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड या शेयर करने के बदले भी उसे पैसे मिलते थे. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं.
कितने वीडियो की हुई खरीद-बिक्री?
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने अब तक 1200 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो की खरीद-बिक्री की बात स्वीकार की है. एक वीडियो अपलोड या शेयर करने पर उसे कथित तौर पर 20 से 30 रुपये मिलते थे. वीडियो की बिक्री से भी वह कमाई करता था.
पुलिस उसके बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच कर रही है. इसका उद्देश्य इस गतिविधि से हुई कुल कमाई और लेनदेन से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाना है.
पुलिस ने क्या बताया?
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी कब से इस गतिविधि में शामिल था और पटना के अलावा बिहार के दूसरे जिलों में इसका नेटवर्क कितना फैला हुआ है. जांच एजेंसियां इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड और अन्य सहयोगियों की तलाश कर रही हैं.
पुलिस के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि कथित नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए अलग-अलग उम्र के लोगों को निशाना बनाने की कोशिश करता था. फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और डिजिटल सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है.
आगरा के ताजगंज थाना क्षेत्र में 16 वर्षीय छात्र और उसकी 38 वर्षीय ट्यूशन शिक्षिका के एक साथ लापता होने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. छात्र 11वीं कक्षा में पढ़ता है, जबकि शिक्षिका विवाहित हैं और उनके दो बच्चे हैं. दोनों की उम्र में करीब 22 साल का अंतर है. परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने अलग-अलग पहलुओं से मामले की जांच शुरू की.
स्कूल प्रोजेक्ट के नाम पर निकला था छात्र
परिजनों के अनुसार, चार अगस्त को छात्र स्कूल प्रोजेक्ट से जुड़े काम के लिए करीब तीन हजार रुपये लेकर घर से निकला था. उसने अपनी साइकिल एक दोस्त के घर खड़ी कर दी थी. काफी देर तक घर नहीं लौटने पर परिवार ने उसकी तलाश शुरू की. इसी दौरान पता चला कि जिस शिक्षिका से वह ट्यूशन पढ़ता था, वह भी अपने घर पर मौजूद नहीं थीं. इसके बाद मामला और गंभीर हो गया.
कॉल डिटेल से मिली अहम कड़ी
छात्र के परिजनों ने ताजगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने अपहरण की धाराओं में जांच शुरू की. शिक्षिका के पति ने भी उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने दोनों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल खंगाली तो उनके बीच लंबे समय तक बातचीत होने की जानकारी मिली. इससे जांचकर्ताओं को दोनों के एक साथ निकलने की आशंका हुई.
रेलवे स्टेशन की फुटेज ने बदली जांच
पुलिस ने संभावित रास्तों और स्थानों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए. आगरा कैंट रेलवे स्टेशन की फुटेज में दोनों ट्रेन में सवार होते नजर आए. इसके बाद पुलिस ने रेलवे रूट और मोबाइल लोकेशन के आधार पर तलाश तेज कर दी. जांच में सामने आया कि छात्र ग्वालियर पहुंचा और बाद में बयाना होते हुए कैलादेवी गया. कुछ समय बाद दोनों अलग-अलग स्थानों पर चले गए.
नोएडा और मथुरा से सुरक्षित बरामद
तकनीकी निगरानी के जरिए पुलिस ने छात्र को नोएडा और शिक्षिका को मथुरा से बरामद कर लिया. पूछताछ में शिक्षिका ने बताया कि छात्र पढ़ाई को लेकर घर में डांट से परेशान था और चार अगस्त को फोन पर उसने आत्महत्या की बात कही थी. उनका दावा है कि उसे रोकने के लिए वह साथ चली गई थीं. बाद में उन्हें अपने फैसले पर पछतावा हुआ, लेकिन लौटने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं. पुलिस ने दोनों के बयान दर्ज करने के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया. थाना प्रभारी नीरज कुमार शर्मा के मुताबिक, फिलहाल परिवारों ने आगे कानूनी कार्रवाई से इनकार किया है.
उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को सामने आई दो अलग अलग घटनाओं ने लोगों को झकझोर दिया. पीलीभीत में एक पिता पर अपनी 20 वर्षीय बेटी की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगा है. बताया जा रहा है कि आरोपी घटना के समय शराब के नशे में था. विवाद के दौरान उसने कथित तौर पर अवैध तमंचे से बेटी के सिर से सटाकर गोली मार दी. गोली लगने के बाद युवती की मौके पर ही मौत हो गई. दूसरी घटना सहारनपुर की है, जहां 19 वर्षीय युवक का शव आम के बाग में फंदे से लटका मिला. परिजनों ने हत्या के बाद शव को आत्महत्या का रूप देने की आशंका जताते हुए पड़ोस के सात लोगों के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है.
पीलीभीत में नशे में घर पहुंचा पिता
पहली घटना पीलीभीत के बीसलपुर थाना क्षेत्र के रामपुरा नौगवां गांव की बताई जा रही है. पुलिस के अनुसार अजय पाल गंगवार शुक्रवार शाम कथित तौर पर शराब के नशे में घर पहुंचा. इसी दौरान किसी बात को लेकर उसकी 20 वर्षीय बेटी अंशिका से कहासुनी हो गई. देखते ही देखते विवाद बढ़ गया. आरोप है कि इसके बाद पिता ने अवैध तमंचा निकाला और बेटी के सिर से सटाकर गोली चला दी. गोली लगते ही अंशिका की मौके पर ही मौत हो गई. गोली चलने की आवाज सुनकर परिवार के लोग और आसपास के ग्रामीण घटनास्थल की ओर पहुंचे, लेकिन तब तक आरोपी वहां से फरार हो चुका था.
पुलिस ने शुरू की आरोपी की तलाश
घटना की सूचना मिलने के बाद बीसलपुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने युवती के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य भी जुटाए गए हैं. क्षेत्राधिकारी राहुल पांडे के मुताबिक परिजनों की तहरीर के आधार पर आरोपी पिता के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है. आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं. पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है. घटना के बाद गांव में शोक के साथ आक्रोश का माहौल है.
सहारनपुर में आम के बाग में मिला युवक का शव
दूसरी घटना सहारनपुर जिले से सामने आई है. यहां 19 वर्षीय आयुष का शव आम के बाग में फंदे से लटका मिला. युवक के गले में रस्सी बंधी थी और उसका दूसरा सिरा पेड़ से बंधा हुआ था. आयुष जिले के डकरावर कलां के मजरे जटियाखेड़ी का रहने वाला था. जानकारी के मुताबिक वह शुक्रवार सुबह घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा. दोपहर करीब 1.30 बजे परिवार को उसके शव के आम के बाग में मिलने की जानकारी मिली. शव मिलने की खबर के बाद परिवार और ग्रामीण मौके पर पहुंचे. घटना की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की.
परिवार ने सात लोगों पर लगाया हत्या का आरोप
आयुष के पिता कंवरपाल ने आरोप लगाया कि पड़ोस के सात लोग पहले उनके घर आए थे और आयुष के बारे में पूछताछ कर रहे थे. इसके बाद परिवार को संदेह हुआ और उन्होंने युवक की तलाश शुरू की. परिजनों ने आरोप लगाया कि आयुष की हत्या करने के बाद उसके शव को पेड़ से लटकाकर घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई. परिवार की शिकायत पर पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ नामजद तहरीर ली है. पुलिस ने हत्या से जुड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है. प्राथमिक जांच में मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा होने की बात सामने आ रही है. हालांकि, घटना की वास्तविक वजह और इसमें शामिल लोगों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.
पश्चिमी दिल्ली के निहाल विहार इलाके से पति-पत्नी के विवाद में एक इंजीनियर की मौत का मामला सामने आया है। आरोप है कि पत्नी के परिवार के कुछ लोगों ने घर में घुसकर विनय गुप्ता के साथ बेरहमी से मारपीट की। गंभीर चोट लगने के बाद उनकी मौत हो गई। घटना के बाद विनय की मां ने रोते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने बेटे को पिटते देखा, लेकिन हमलावरों ने उनकी एक नहीं सुनी।
पति-पत्नी के बीच चल रहा था विवाद
मामला निहाल विहार थाना क्षेत्र के लक्ष्मी पार्क का बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार को एक दंपति के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद पत्नी ने अपने परिवार के लोगों को ससुराल बुलाया।
आरोप है कि महिला के रिश्तेदार घर पहुंचे और विनय गुप्ता के साथ मारपीट शुरू कर दी। इस हमले में उन्हें गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मौत हो गई।
मां ने बताया- समझाने की कोशिश करती रही
विनय की मां रेणु गुप्ता ने घटना को याद करते हुए बताया कि उन्हें घर में किसी बड़े विवाद की जानकारी नहीं थी। उनके मुताबिक, बहू सुबह अपने भाइयों को बुलाने के लिए बच्चों को घर पर छोड़कर चली गई थी।
कुछ समय बाद महिला के परिवार के लोग घर पहुंचे। रेणु का आरोप है कि उन्होंने पानी देने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने पानी लेने से इनकार कर दिया और सीधे विनय को पकड़ लिया।
मां के मुताबिक, उनके पति लगातार हमलावरों से शांत रहने और बातचीत से मामला सुलझाने की अपील करते रहे। लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद विनय के साथ मारपीट जारी रही।
मां बोलीं- बाल पकड़कर घसीटा, छाती पर पैर मारे
रेणु गुप्ता ने आरोप लगाया कि बहू के एक भाई ने विनय के बाल पकड़ लिए और उसके साथ मारपीट की। उन्होंने बेटे को बचाने की कोशिश की तो उन्हें भी धक्का देकर अलग कर दिया गया।
मां का दावा है कि विनय को जमीन पर गिराने के बाद भी उसके साथ मारपीट होती रही। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने उसके सीने पर पैर तक मारे।
बेटे को बचाने के लिए रेणु ने कथित तौर पर एक डंडा उठाया, लेकिन उनके साथ मौजूद एक व्यक्ति ने वह डंडा भी छीन लिया।
मारपीट के दौरान बंद थे सिक्योरिटी कैमरे
विनय की मां ने घर में लगे सिक्योरिटी कैमरों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जिस समय उनके बेटे के साथ मारपीट हुई, उस वक्त घर के सिक्योरिटी कैमरे बंद थे।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह इस बात की पुष्टि नहीं कर सकतीं कि कैमरे जानबूझकर बंद किए गए थे या नहीं।
भाई ने कहा- बहुत बुरी तरह की गई मारपीट
विनय के भाई प्रदीप ने बताया कि जब वह मौके पर पहुंचे तो विनय गंभीर हालत में पड़े थे। उनके मुताबिक, विनय को जिस तरह से पीटा गया, वह बेहद गंभीर था।
प्रदीप का कहना है कि अगर विनय को समय रहते अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी। उन्होंने इस घटना को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पुलिस ने क्या बताया?
आउटर डिस्ट्रिक्ट के DCP विक्रम मीणा के मुताबिक, एक दंपति के बीच विवाद के बाद पत्नी ने अपने परिवार के लोगों को ससुराल बुलाया था। आरोप है कि वहां पहुंचे रिश्तेदारों ने विनय गुप्ता के साथ मारपीट की, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने निहाल विहार थाने में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों की पहचान और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है।
नोएडा में इंजीनियर थे विनय
जानकारी के मुताबिक, विनय गुप्ता नोएडा में इंजीनियर के तौर पर काम करते थे, जबकि उनकी पत्नी गृहिणी थीं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और मारपीट की पूरी घटना के पीछे की वजह का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
नोट: इस मामले में सामने आए आरोप संबंधित परिवार के सदस्यों के बयान और पुलिस की शुरुआती जानकारी पर आधारित हैं। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।