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  • मखाना के 10 फायदे, उपयोग और नुकसान..?

    मखाना के 10 फायदे, उपयोग और नुकसान..?

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    सूखे मेवे में शामिल होने वाले मखाना को भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में इस्तेमाल में किया जाता है। बहुत से लोग इसे भून कर खाना पसंद करते हैं। वहीं, कई लोग इसे फ्राई कर इस्तेमाल में लाते हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जो इसकी खीर बनाकर इसका सेवन करते हैं। इन तीनों ही तरीकों से, इसके भिन्न-भिन्न स्वाद का लुत्फ उठाया जा सकता है। वहीं, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि स्वाद के साथ ही यह सेहत के लिए भी अत्यधिक लाभकारी है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम आपको मखाना के फायदे और उपयोग के बारे में विस्तार से बताएंगे। साथ ही इस बात की जानकारी भी विस्तार से देंगे कि मखाना खाने से क्या होता है।

    मखाना क्या है?

    मखाना, कमल के बीज को कहते हैं। यह एक स्वादिष्ट और पौष्टिक खाद्य पदार्थ है। इसे कई नामों से जाना जाता है, जैसे फॉक्स नट, फूल-मखाना, लोटस सीड और गोर्गन नट (1)। वहीं, इसके बीजों को भूनने के बाद इसका उपयोग कई प्रकार की खाद्य सामग्री में किया जाता है। इसके अलावा, यह कई प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। नीचे स्वास्थ्य के लिए मखाना के फायदों को विस्तार से बताया गया।

    मखाना में कौन से औषधीय गुण मौजूद हैं?

    मखाना में कई प्रकार के औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो स्वास्थ के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, मखाने में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी ट्यूमर प्रभाव पाए जाते हैं। इसके अलावा, इसका सेवन बुखार, पाचन तंत्र सुधारने में और दस्त के लिए भी किया जा सकता है। इसके अलावा, यह कई खास एल्कलॉइड से भी समृद्ध होता है। ये सभी गुण और प्रभाव मखाने को स्वास्थ्य के लिए उपयोगी बनाने का काम करते हैं (1)।

    मखाने के फायदे – Benefits of Makhana in Hindi

    नीचे हम शरीर के लिए मखाने के फायदे बता रहे हैं। जानिए मखाने का सेवन किस प्रकार स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने का काम कर सकता है। साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि मखाना लेख में शामिल किसी भी बीमारी का डॉक्टरी इलाज नहीं है। इसका सेवन केवल शारीरिक समस्या से बचाव और शरीर को स्वस्थ रखने का एक तरीका हो सकता है।

    1. वजन कम करने के लिए मखाने के लाभ

    वजन घटाने में मखाने के फायदे की बात करें, तो इसका उपयोग मोटापे की समस्या से छुटकारा दिलाने में मददगार साबित हो सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध के मुताबिक, कमल के बीज (मखाना) का एथेनॉल अर्क शरीर में फैट सेल्स को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकता है। साथ ही यह फैट सेल्स के वजन को भी कम कर सकता है। इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि इसका उपयोग वजन को कम करने में सहायक साबित हो सकता है

    2. ब्लड प्रेशर में लाभदायक मखाना के गुण

    बात करें, ब्लड प्रेशर में मखाने के फायदे की, तो माना जाता है कि मखाने के नियमित इस्तेमाल से इस गंभीर समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है। कारण यह है कि इसमें पाया जाने वाला एल्कलॉइड हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को नियंत्रित करने का काम कर सकता है। इसलिए, बीपी की समस्या को नियंत्रित करने के लिए मखाने का सेवन किया जा सकता है

    3. डायबिटीज में मखाने के फायदे

    डायबिटीज की समस्या से राहत पाने के लिए भी मखाने का उपयोग किया जा सकता है। एक शोध के आधार पर इस बात की पुष्टि की गई है कि मखाने में पाए जाने वाले रेसिस्टेंट स्टार्च में हाइपोग्लाइसेमिक (ब्लड शुगर को कम करने वाला) प्रभाव पाया जाता है। यह प्रभाव मधुमेह की समस्या को नियंत्रित करने में सहायक साबित हो सकता है। इसके अलावा, यह इंसुलिन को भी नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है

    4. हृदय के लिए मखाना का गुण

    जैसा कि हमने ऊपर बताया कि मखाने का सेवन उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने का काम कर सकता है (3)। इसके अलावा, यह मधुमेह और बढ़ते वजन को भी नियंत्रित कर सकता है (2) (4)। वहीं, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मोटापे को हृदय रोग का जोखिम कारक माना जाता है (5)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि मखाने का सेवन इन समस्याओं से बचाव कर इनसे होने वाले हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकता है। वहीं, एक अन्य शोध में जिक्र मिलता है कि कमल का बीज यानी मखाना कार्डियोवस्कुलर रोग (हृदय संबंधी) से बचाव का काम कर सकता है (1)।

    5. प्रोटीन का अच्छा स्रोत

    मखाने में प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है। 100 ग्राम मखाने में लगभग 10.71 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है (6)।इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि मखाना खाने के फायदों में प्रोटीन की कमी को पूरा करना भी शामिल है। इसके नियमित उपयोग से शरीर में प्रोटीन की आवश्यक मात्रा की पूर्ति के साथ, उसकी कमी से होने वाली कई समस्याओं को भी दूर किया जा सकता है।

    6. गर्भावस्था में मखाना खाने के फायदे

    गर्भावस्था में मखाना का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। गर्भावस्था में महिलाओं के लिए मखाने का उपयोग कई प्रकार के पकवानों में मिलाकर किया जाता है। एक शोध के अनुसार, मखाने का उपयोग गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद की होने वाली कमजोरियों को दूर करने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, इसमें कई प्रकार के पोषक तत्व जैसे की आयरन, प्रोटीन, मैग्नीशियम और पाेटेशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो गर्भावस्था के दौरान महिला को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं

    7. अनिद्रा में मखाने के लाभ

    अनिद्रा यानी नींद न आने की समस्या में मखाना के लाभ देखे जा सकते हैं।इससे जुड़े एक शोध में जिक्र मिलता है कि अनिद्रा की समस्या के लिए मखाने का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से किया जाता है (1)। हालांकि, इस लाभ के पीछे मखाने का कौन-सा गुण जिम्मेदार होता है, फिलहाल इससे जुड़ा सटीक वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है।

    8. मसूड़ों के लिए मखाना खाने के फायदे

    शोध में पाया गया है कि मखाने में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-माइक्रोबियल प्रभाव पाए जाते हैं (1) (8)। मखाने में पाए जाने वाले ये दोनों गुण मसूड़े संबंधित सूजन और बैक्टीरियल प्रभाव के कारण होने वाली दांतों की सड़न को रोकने में मददगार साबित हो सकते हैं। इस कारण माना जा सकता है कि मखाने में पाए जाने वाले ये गुण मसूड़ों की सूजन के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। हालांकि, इस विषय पर सीधे तौर पर कोई शोध उपलब्ध नहीं है।

    9. किडनी के लिए बेनिफिट्स ऑफ मखाना

    मखाने का उपयोग किडनी के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। एनसीबीआई के एक शोध में जिक्र मिलता है कि मखाने का सेवन अन्य समस्याओं जैसे दस्त के साथ किडनी से जुड़ी परेशानियों से बचाव का काम कर सकता है (9)। फिलहाल, यहां यह स्पष्ट नहीं है कि इसका कौन-सा गुण किडनी की समस्या को ठीक करने में लाभदायक हो सकता है।

    10. एंटी-एजिंग बेनिफिट्स ऑफ मखाना

    त्वचा से संबंधित समस्याओं में मखाने के उपयोग पर किए गए एक शोध में पता चला है कि मखाना एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है। यह गुण त्वचा पर आने वाले एजिंग के प्रभाव जैसे झुर्रियों को दूर करने में मददगार साबित हो सकता है

  • घर में हनुमान जी की ये 5 तस्वीरें लगाना माना जाता है बेहद शुभ, वास्तु के अनुसार जानें इनके फायदे..

    घर में हनुमान जी की ये 5 तस्वीरें लगाना माना जाता है बेहद शुभ, वास्तु के अनुसार जानें इनके फायदे..

    श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी को शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। मंगलवार, शनिवार समेत रामनवमी, हनुमान जन्मोत्सव जैसे खास मौकों पर मंदिर में उनके श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। वहीं, बात करें घर के देवस्थान की तो वास्तु में भी घर में हनुमान जी की तस्वीर रखना शुभ बताया है। घर में हनुमान जी की 5 तस्वीरें लगाना बहुत लाभदायी माना जाता है। चलिए जानते हैं कौन सी फोटो घर में रखना चाहिए और इसके क्या लाभ हैं।

    इस दिशा में लगाएं तस्वीर

    सबसे पहले जान लेते हैं कि हनुमान जी की फोटो किस दिशा में रखना फायदेमंद होता है। वास्तु शास्त्र  के अनुसार हनुमान जी की तस्वीर दक्षिण दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। खासतौर पर लाल रंग में बैठे हुए हनुमान जी का चित्र इस दिशा के लिए उपयुक्त माना जाता है। इससे दक्षिण दिशा से आने वाली नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होने की मान्यता है।

    राम भक्ति करते हनुमान

    भगवान राम की पूजा या भजन-कीर्तन करते हुए हनुमान जी की तस्वीर घर में लगाना पूरे परिवार के लिए शुभ होता है। मान्यता है कि इससे घर के सदस्यों के बीच प्रेम, आपसी समझ और अपनापन बढ़ता है और वातावरण में सुख-शांति बनी रहती है।

    पर्वत उठाए बजरंगबली

    हाथ में पर्वत उठाए हुए हनुमान जी का चित्र साहस और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वास्तु अनुसार ऐसी तस्वीर घर में रखने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और नई ऊर्जा का संचार होता है। इसे मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा से भी जोड़ा जाता है।

    उड़ते हुए हनुमान

    आकाश में उड़ते हुए हनुमान जी की तस्वीर को प्रगति और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इसे घर में रखने से व्यक्ति के लिए आगे बढ़ने के नए अवसर बनते हैं और मुश्किल कामों को पूरा करने का आत्मविश्वास मिलता है।

    लाल रूप में विराजमान

    दक्षिण दिशा में लाल रंग में बैठे हनुमान जी की तस्वीर लगाने की भी विशेष मान्यता है। इसे घर की परेशानियों और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने वाला माना जाता है। साथ ही, ऐसी तस्वीर घर में सुरक्षा और सकारात्मक माहौल बनाए रखने से जोड़ी जाती है।

    पंचमुखी हनुमान

    वास्तु में मुख्य दरवाजे पर पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर या प्रतिमा लगाना भी शुभ बताया है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियां घर में प्रवेश नहीं कर पातीं। इस स्वरूप को हनुमान जी का विराट स्वरूप माना जाता है।

  • ‘मैं नागिन, तू सपेरा’ पर जमकर नाचा युवक, अगली सुबह घर में घुसा जहरीला सांप और फिर जो हुआ…

    ‘मैं नागिन, तू सपेरा’ पर जमकर नाचा युवक, अगली सुबह घर में घुसा जहरीला सांप और फिर जो हुआ…

    कभी-कभी किसी घटना का संयोग इतना अजीब होता है कि लोगों को यकीन करना मुश्किल हो जाता है। उत्तर प्रदेश के एक गांव से सामने आया ऐसा ही मामला इन दिनों चर्चा में है। एक युवक ने गांव के एक कार्यक्रम में नागिन की धुन पर जमकर डांस किया। अगले ही दिन उसके साथ कुछ ऐसा हुआ कि पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

    दरअसल, गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान युवक ने नागिन की धुन पर खूब डांस किया था। वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने उसका वीडियो बना लिया और बाद में उसे सोशल मीडिया पर डाल दिया। वीडियो में युवक नागिन की तरह हरकतें करते हुए डांस करता नजर आ रहा था।

    लेकिन अगले दिन सुबह करीब 10 बजे युवक अपने घर में बिस्तर पर आराम कर रहा था। इसी दौरान अचानक एक जहरीला सांप उसके पास पहुंच गया और उसने युवक को डस लिया। सांप के काटने के बाद युवक की हालत बिगड़ने लगी।

    परिजनों ने बिना समय गंवाए उसे नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के दौरान एंटी-वेनम इंजेक्शन दिया। हालत गंभीर होने के कारण युवक को आगे के इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

    गांव में फैल गई तरह-तरह की बातें

    नागिन के गाने पर डांस करने और अगले दिन सांप के काटने की घटना का संयोग सामने आने के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोग इसे नाग के बदले से जोड़कर देखने लगे, तो कुछ लोगों ने इसे धार्मिक मान्यताओं से जोड़ दिया।

    हालांकि ऐसी बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। सांप के काटने की घटना को महज संयोग माना जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सांप के काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या अंधविश्वास के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना और उचित चिकित्सकीय उपचार कराना बेहद जरूरी है।

    फिलहाल युवक का इलाज चल रहा है। वहीं नागिन डांस का वीडियो और उसके अगले दिन हुई सांप के काटने की घटना को लेकर पूरे इलाके में चर्चा बनी हुई है। संयोग ऐसा है कि जिसने भी पूरी कहानी सुनी, वह एक पल के लिए जरूर हैरान रह गया।

  • ‘बॉस स्कैम’ का बढ़ा खतरा, WhatsApp के जरिए अफसरों को निशाना बना रहे साइबर ठग..

    ‘बॉस स्कैम’ का बढ़ा खतरा, WhatsApp के जरिए अफसरों को निशाना बना रहे साइबर ठग..

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    साइबर क्राइम लगातार बढ़ता जा रहा है. साइबर ठगी के एक से बढ़कर एक तरीके सामने आ रहे हैं. साइबर ठगी के एक नए और बेहद खतरनाक तरीके ने देशभर में कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, सीएफओ और वित्तीय विभाग से जुड़े कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है. साइबर ठग अब WhatsApp, SMS और ई-मेल के जरिए अकाउंट स्टेटमेंट या सरकारी नियामकीय नोटिस के नाम पर ऐसी फाइलें भेज रहे हैं, जिन्हें खोलते ही कंप्यूटर और WhatsApp अकाउंट उनके नियंत्रण में जा सकता है. इस पूरे खेल को साइबर सुरक्षा एजेंसियां ‘Boss Scam’ या CEO Impersonation Fraud के तौर पर देख रही हैं.

    भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी I4C, गृह मंत्रालय की साइबर अपराध नियंत्रण इकाई, ने इस खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है. हाल के दिनों में दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्यों से इस तरह के एक जैसे मामलों की शिकायतें सामने आई हैं. I4C के मुताबिक National Cyber Crime Reporting Portal यानी NCRP पर इस तरह की शिकायतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है.

    एक ZIP फाइल और पूरा WhatsApp अकाउंट खतरे में-
    इस साइबर ठगी की शुरुआत बेहद सामान्य दिखाई देने वाले संदेश से होती है. पीड़ित को WhatsApp, SMS या ई-मेल पर ‘Statement of Account.zip’, तारीख के साथ ‘0714 Statement of Account.zip’, ‘RBI.zip’ या ‘MCA.zip’ जैसी फाइल भेजी जाती है.

    कई मामलों में संदेश इस तरह तैयार किया जाता है कि वह किसी कंपनी के नियमित अकाउंट स्टेटमेंट जैसा लगे. वहीं कुछ संदेशों में RBI यानी भारतीय रिजर्व बैंक या MCA यानी कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की ओर से तत्काल अनुपालन करने का दावा किया जाता है. साइबर अपराधी जानबूझकर ऐसा माहौल बनाते हैं कि सामने वाला व्यक्ति बिना ज्यादा सोच-विचार किए फाइल खोल दे.

    I4C के मुताबिक इन ZIP फाइलों के भीतर एक खतरनाक Windows executable यानी .exe फाइल और उसके साथ एक .dll फाइल होती है। जैसे ही पीड़ित इसे Windows कंप्यूटर या लैपटॉप पर extract करके खोलता है, सिस्टम में Trojan प्रकार का malware सक्रिय हो जाता है.

    WhatsApp Web को बनाया जा रहा निशाना-
    इस हमले की सबसे गंभीर बात यह है कि malware सिर्फ कंप्यूटर को संक्रमित करने तक सीमित नहीं रहता. यह पीड़ित के सक्रिय WhatsApp Web session को hijack कर सकता है. इसके बाद साइबर अपराधी पीड़ित के WhatsApp अकाउंट का इस्तेमाल उसी व्यक्ति के संपर्कों और ग्रुपों तक पहुंचने के लिए करते हैं.

    संक्रमित WhatsApp अकाउंट से वही malicious file आगे दूसरे लोगों को भेजी जाती है. कई बार संदेश में लिखा होता है कि फाइल को कंपनी के Finance Manager से verification के लिए साझा करें और कंप्यूटर पर खोलें. इस तरह एक संक्रमित कंप्यूटर से शुरू हुआ हमला धीरे-धीरे पूरी कंपनी के नेटवर्क और कर्मचारियों तक पहुंच सकता है.

    यानी जिस व्यक्ति को फाइल भेजी गई, उसके भरोसेमंद WhatsApp अकाउंट से वही फाइल आगे भेजे जाने के कारण दूसरे लोग भी इसे असली समझकर खोल सकते हैं. यही इस पूरे अभियान को बेहद खतरनाक बनाता है.

    ‘बॉस’ बनकर होती है पैसे की मांग-
    साइबर ठगों का अंतिम लक्ष्य अक्सर वित्तीय धोखाधड़ी होता है. I4C के अनुसार इस चरण में अपराधी किसी वरिष्ठ अधिकारी या कंपनी के CEO के वास्तविक WhatsApp अकाउंट का इस्तेमाल कर सकते हैं. कुछ मामलों में हमलावर अपने नियंत्रण वाले नंबर को मोबाइल में ‘CEO’ के नाम से सेव कर देते हैं.

    इसके बाद कंपनी के अकाउंट्स या फाइनेंस कर्मचारियों को बेहद जरूरी और तत्काल भुगतान करने का निर्देश दिया जाता है. संदेश में कहा जा सकता है कि किसी खाते में तुरंत रकम ट्रांसफर करनी है या किसी विशेष बैंक अकाउंट में भुगतान करना है.

    कंपनी का कर्मचारी जब संदेश को अपने वरिष्ठ अधिकारी का समझकर निर्देश का पालन करता है तो रकम साइबर अपराधियों के mule bank accounts में पहुंच जाती है. इसीलिए इसे ‘Boss Scam’ कहा जा रहा है, क्योंकि अपराधी कंपनी के ‘बॉस’ या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का फायदा उठाकर कर्मचारियों को ठगी का शिकार बनाते हैं.

    22 जून को I4C ने जारी किया था एडवाइजरी-
    I4C ने इस उभरते खतरे को लेकर 22 जून 2026 को भी विस्तृत एडवाइजरी जारी की थी. इसका विषय “Regulatory and Executive Impersonation for WhatsApp Account Takeover using Malicious Windows Executables and High Value Financial Fraud” था.

    इस एडवाइजरी में बताया गया था कि किस तरह regulatory communication और executive impersonation की आड़ में WhatsApp अकाउंट takeover और उसके बाद high-value financial fraud को अंजाम दिया जा रहा है.

    हाल में दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित कई राज्यों से समान modus operandi सामने आने के बाद साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने इस खतरे को लेकर फिर से चेतावनी दी है.

    DLL Sideloading से बच निकलने की कोशिश-
    I4C की National Cybercrime Threat Analytics Unit यानी NCTAU की तकनीकी जांच में सामने आया है कि इस अभियान के पीछे संगठित नेटवर्क काम कर रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक ये नेटवर्क राष्ट्रीय सीमाओं के पार भी सक्रिय हो सकते हैं और अभियान में ऐसे advanced malware का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनमें propagation और detection-evasion की क्षमता है.

    इस malware में DLL Sideloading जैसी तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है. इसका उद्देश्य सुरक्षा प्रणालियों की नजर से बचते हुए malware को सिस्टम में सक्रिय करना और संक्रमण को आगे बढ़ाना है.

    इस मामले की जांच संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों और तकनीकी एजेंसियों के साथ समन्वय में की जा रही है.

    CA, CFO और Finance टीम सबसे ज्यादा जोखिम में-
    I4C ने विशेष रूप से उन लोगों को सावधान किया है जो कंपनियों के वित्तीय लेन-देन से जुड़े हैं. चूंकि malware Windows कंप्यूटरों को निशाना बनाता है और भेजी जाने वाली फाइलें अकाउंट स्टेटमेंट तथा regulatory compliance से जुड़ी होती हैं, इसलिए Chartered Accountants, Company Directors, CFOs और Finance & Accounts personnel विशेष जोखिम में हैं.

    कॉरपोरेट कंपनियों को सलाह दी गई है कि वे अपने कर्मचारियों, खासकर finance teams को तत्काल इस खतरे के बारे में जागरूक करें.

    सबसे महत्वपूर्ण सलाह यह है कि WhatsApp या ई-मेल पर किसी वरिष्ठ अधिकारी की ओर से आया urgent fund transfer या account-change request मिलने पर सिर्फ संदेश के आधार पर कार्रवाई न की जाए. ऐसे निर्देशों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि सीधे फोन कॉल या व्यक्तिगत रूप से बातचीत करके की जानी चाहिए.

    10 हजार से ज्यादा लोगों को बचाया गया-
    I4C ने इस अभियान से जुड़े malware के threat signals और technical indicators CERT-In, Microsoft Defender तथा भारतीय antivirus कंपनियों—Quick Heal, K7 Computing और Net Protector—के साथ साझा किए हैं।इसका उद्देश्य malicious files की तेजी से पहचान, blocking और removal सुनिश्चित करना है. I4C के मुताबिक इन coordinated interventions के जरिए अब तक 10,000 से अधिक भारतीयों को इस अभियान से सुरक्षित किया जा चुका है. इसके अलावा Sahyog Portal के जरिए malware को लगातार block किया जा रहा है.

    58 हजार से ज्यादा संभावित पीड़ितों को SMS अलर्ट-
    I4C की ओर से संभावित प्रभावित लोगों को ‘I4CMHA-G’ SMS header के जरिए अलर्ट भेजे जा रहे हैं. पिछले 30 दिनों में इस माध्यम से 58,000 से ज्यादा संभावित पीड़ितों को सूचना दी गई है. I4C ने नागरिकों से अपील की है कि अगर उन्हें ‘I4CMHA-G’ से कोई चेतावनी मिलती है तो उसे गंभीरता से लें और उसमें दिए गए सुरक्षा निर्देशों का पालन करें.

    RBI या कोई regulator WhatsApp पर ZIP फाइल नहीं भेजता-
    I4C ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अज्ञात या unverifed source से मिली .zip फाइल या executable को download, extract या open न करें. किसी regulatory communication के नाम पर भेजी गई फाइल को खोलने से पहले उसके स्रोत की पुष्टि जरूरी है. खास तौर पर वित्तीय और सरकारी संस्थाओं के नाम पर आने वाले ऐसे संदेशों से सावधान रहने की जरूरत है.

    WhatsApp की Settings > Linked Devices में जाकर समय-समय पर यह भी जांचना चाहिए कि कौन-कौन से डिवाइस WhatsApp अकाउंट से जुड़े हुए हैं. जिन sessions की जरूरत नहीं है, उन्हें तुरंत log out करना चाहिए.

    कंपनियों के सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर के लिए भी अलर्ट-
    I4C ने कंपनियों के system administrators को भी जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी है. Unknown .exe और .dll files को user profile directories से execute होने से रोकने के लिए software restriction policies लागू की जानी चाहिए. साथ ही सभी Windows endpoints पर updated anti-malware solutions सुनिश्चित किए जाने चाहिए. कर्मचारियों को यह भी समझाना जरूरी है कि सिर्फ antivirus installed होना पर्याप्त नहीं है; suspicious files को खोलने से बचना सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है.

    अगर WhatsApp अकाउंट हैक हो जाए तो क्या करें?
    अगर किसी व्यक्ति का WhatsApp अकाउंट compromised होने का संदेह है तो सबसे पहले सभी linked devices को log out करना चाहिए. इसके बाद अपने सभी contacts और WhatsApp groups को तुरंत चेतावनी दें कि उनके अकाउंट से भेजी गई किसी भी file को न खोलें. जिस Windows कंप्यूटर पर संदिग्ध ZIP या executable file खोली गई हो, उसे updated antivirus से तुरंत scan कराया जाना चाहिए. जरूरत पड़ने पर संबंधित तकनीकी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क करना चाहिए. अगर इस तरह की साइबर ठगी में आर्थिक नुकसान हुआ है या संदिग्ध communication मिला है तो तत्काल National Cyber Crime Helpline 1930 पर शिकायत करनी चाहिए या National Cyber Crime Reporting Portal के माध्यम से रिपोर्ट दर्ज करनी चाहिए.

    सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव-
    ‘Boss Scam’ की सबसे बड़ी ताकत तकनीक से ज्यादा भरोसा है. साइबर अपराधी किसी अजनबी नंबर से नहीं, बल्कि कई बार उसी WhatsApp अकाउंट से संदेश भेजते हैं, जिस पर कर्मचारी पहले से भरोसा करता है. यही वजह है कि कंपनी के भीतर cybersecurity awareness बेहद जरूरी हो गई है. अकाउंट स्टेटमेंट, RBI या MCA notice, Income Tax communication या CEO के नाम पर आया कोई भी urgent message हो, बिना स्वतंत्र पुष्टि के फाइल न खोलें और पैसे ट्रांसफर न करें. एक ZIP फाइल खोलने की छोटी-सी गलती न सिर्फ WhatsApp अकाउंट को खतरे में डाल सकती है, बल्कि पूरी कंपनी के वित्तीय नेटवर्क को साइबर अपराधियों के लिए खोल सकती है. ऐसे में I4C की चेतावनी साफ है- संदिग्ध फाइल से दूरी, हर वित्तीय निर्देश की दोहरी पुष्टि और समय रहते शिकायत ही इस नए साइबर खतरे से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है.

  • क्या सच में पूरा Golden Temple सोने का बना है? कीमत सुनकर उड़ जाएंगे होश! जानिए पूरी कहानी..?

    क्या सच में पूरा Golden Temple सोने का बना है? कीमत सुनकर उड़ जाएंगे होश! जानिए पूरी कहानी..?

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    भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल अमृतसर का Golden Temple अपनी खूबसूरती और आध्यात्मिक महत्व के लिए दुनियाभर में जाना जाता है. इसे श्री हरमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है. हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं. मंदिर की सुनहरी चमक देखकर अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या पूरा Golden Temple असली सोने से बना है? चलिए आपको बताते हैं इसका सही जवाब…

    महाराजा रणजीत सिंह ने कराई थी सोने की सजावट
    Golden Temple के स्वर्णीकरण में सिख साम्राज्य के संस्थापक महाराजा रणजीत सिंह की अहम भूमिका मानी जाती है. साल 1830 के आसपास उन्होंने मंदिर के प्रमुख हिस्सों को सोने से सजाने की पहल की थी. उस समय करीब 150 से 162 किलोग्राम 24 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया गया था. उस दौर में इस सोने की कीमत करीब 65 लाख रुपये बताई जाती है. खास बात यह है कि उस समय इस्तेमाल किया गया सोना 24 कैरेट था, जो सामान्य गहने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने से ज्यादा शुद्ध होता है.

    बाद में फिर चढ़ाया गया सैकड़ों किलो सोना
    समय के साथ मंदिर की मरम्मत और सजावट का काम भी किया गया. साल 1995 से 1999 के बीच Golden Temple के नवीनीकरण के दौरान करीब 500 किलोग्राम अतिरिक्त 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई गई. यह सोना मंदिर के गुंबद, दरवाजों, दीवारों और अंदर की छत जैसे कई हिस्सों पर लगाया गया.

    पूरा मंदिर सोने का है?
    Golden Temple की पूरी इमारत सोने से नहीं बनी है. इसमें संगमरमर और तांबे का भी इस्तेमाल हुआ है. सोने की परत इसकी सुंदरता और भव्यता को बढ़ाती है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार मंदिर में कुल मिलाकर करीब 662 से 750 किलोग्राम तक 24 कैरेट सोने के इस्तेमाल का अनुमान लगाया जाता है. आज के समय में इसकी कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये हो सकती है. यही सुनहरी आभा Golden Temple को दुनिया के सबसे आकर्षक और आध्यात्मिक धार्मिक स्थलों में खास पहचान देती है.

  • पीले पड़ चुके हैं पुराने स्विच बोर्ड? अपनाएं ये आसान घरेलू तरीके.. फिर दिखेंगे नए जैसे..?

    पीले पड़ चुके हैं पुराने स्विच बोर्ड? अपनाएं ये आसान घरेलू तरीके.. फिर दिखेंगे नए जैसे..?

    पीले पड़ चुके हैं पुराने स्विच बोर्ड? अपनाएं ये आसान घरेलू तरीके.. फिर दिखेंगे नए जैसे..?

    घर की सफाई करते समय लोग फर्श, फर्नीचर और खिड़कियों पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन स्विच बोर्ड अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं. समय के साथ इन पर धूल, उंगलियों के निशान, तेल और पीलेपन की परत जम जाती है, जिससे पूरा कमरा साफ होने के बावजूद गंदा दिखने लगता है. अच्छी बात यह है कि इन्हें चमकाने के लिए महंगे क्लीनर खरीदने की जरूरत नहीं है. घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों की मदद से ही स्विच बोर्ड को आसानी से साफ किया जा सकता है. चलिए जानते हैं कैसे…

    सफेद टूथपेस्ट से करें सफाई
    अगर स्विच बोर्ड पर हल्की गंदगी या पीलेपन की परत जम गई है, तो साधारण सफेद टूथपेस्ट सबसे आसान उपाय है. पुराने टूथब्रश पर थोड़ा-सा टूथपेस्ट लगाकर स्विच बोर्ड के किनारों और कोनों को धीरे-धीरे साफ करें. इसके बाद सूखे और साफ कपड़े से पोंछ लें. इससे स्विच बोर्ड पहले की तुलना में ज्यादा साफ और चमकदार नजर आएगा.

    नींबू और नमक हटाएंगे जिद्दी गंदगी
    अगर स्विच बोर्ड पर काफी समय से गंदगी जमी हुई है, तो नींबू और नमक का मिश्रण मददगार साबित हो सकता है. आधे कटे नींबू पर थोड़ा नमक छिड़ककर दाग वाली जगह पर हल्के हाथों से रगड़ें. नींबू का प्राकृतिक एसिड मैल को ढीला करता है, जबकि नमक हल्के स्क्रबर की तरह काम करता है. सफाई के बाद सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछ लें.

    नेल पॉलिश रिमूवर से हटाएं दाग
    स्याही के निशान या पुराने काले दाग हटाने के लिए कॉटन पर थोड़ी-सी नेल पॉलिश रिमूवर लेकर दाग वाली जगह को धीरे-धीरे साफ करें. इसमें मौजूद एसीटोन जिद्दी दाग हटाने में मदद करता है. हालांकि इसका इस्तेमाल बहुत कम मात्रा में करें और पहले किसी छिपी हुई जगह पर टेस्ट जरूर कर लें, ताकि प्लास्टिक की फिनिश खराब न हो.

    इन बातों का रखें ध्यान
    स्विच बोर्ड की सफाई शुरू करने से पहले बिजली सप्लाई बंद कर दें. हमेशा सूखे हाथों और सूखी जगह पर खड़े होकर ही सफाई करें. गीले कपड़े या ज्यादा पानी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें. किसी भी तरल पदार्थ का उपयोग करने के बाद स्विच बोर्ड पूरी तरह सूखने दें, उसके बाद ही बिजली चालू करें. साथ ही गीले हाथों या नंगे पैर कभी भी स्विच बोर्ड, प्लग या बिजली के तारों को न छुएं. इससे सफाई भी सुरक्षित रहेगी और किसी दुर्घटना का खतरा भी नहीं होगा.

  • जमीन की खुदाई में मिले 29 गोले, पुरातत्व विभाग की जांच से खुलेगा राज

    जमीन की खुदाई में मिले 29 गोले, पुरातत्व विभाग की जांच से खुलेगा राज

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    उत्तर प्रदेश के जनपद अमेठी में घर के लिए टैंक बनाने के लिए कराई जा रही जमीन की खुदाई के दौरान 29 धातु के गोले मिलने से हड़कंप मच गया. गोले मिलने की सूचना मिलते ही प्रशासन ने मौके कर पहुंचकर जमीन को बैरिकेडिंग कर पुरातत्व विभाग को सूचना देकर पूरे मामले में जांच पड़ताल शुरू कर दी है.

    जमीन की खुदाई में मिले 29 गोले-
    पूरा मामला जनपद के मुसाफिरखाना थाना क्षेत्र के भनौली गांव का है, जहां बताया जा रहा है कि घर में टैंक निर्माण के लिए जमीन की खुदाई कराई जा रही थी. इसी दौरान मजदूरों को जमीन के अंदर धातु के कई गोले दिखाई दिए. जिसके बाद जमीन की खुदाई करते हुए सभी गोलों को निकाल दिया गया. अधिकारियों ने जब इसकी गिनती की तो ये कुल 29 गोले थे.

    कितने पुराने हैं गोले? जांच के बाद पता चलेगा-
    वहीं, गोले मिलने की सूचना के बाद राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जिस स्थान पर ये धातु के गोले मिले हैं, उस जमीन की बैरिकेडिंग कराकर उसे अपने कब्जे में ले लिया. प्रशासन ने मामले की जानकारी पुरातत्व विभाग को भी दे दी है. अब पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर इन धातु के गोलों की जांच करेगी. जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि ये गोले कितने पुराने हैं और इनका ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व क्या है.

    वहीं, जमीन की खुदाई के दौरान एक साथ 29 धातु के गोले मिलने की खबर गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है. स्थानीय लोगों में भी इन गोलों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं. फिलहाल प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षित कर लिया है और पुरातत्व विभाग की जांच का इंतजार किया जा रहा है.

    प्रशासन ने काम रुकवा दिया- इकबाल
    ग्रामीण मो. इकबाल ने बताया कि हमारे घर पर एक ठेकेदार काम करवा रहे थे. उस दौरान खुदाई के समय कुछ दिखाई दिया. जिसके बाद देखा गया तो वह गोला निकला. इसके बाद कुल 29 गोले निकाले गए. जिसके बाद मौके पर पहुंची प्रशासन की टीम ने घर पर हो रहे काम को रुकवा दिया.

    वहीं, इसको लेकर उपजिलाधिकारी नितेश राज ने बताया की गांव में गड्ढा खुदाई के दौरान कुल 29 गोले मिले हैं. जिसके बाद पुरातत्व विभाग को सूचना दे दी गई है. अभी टीम पहुंची नहीं है. बाकी जांच के बाद ही पता चल पाएगा.

  • ‘साहब चले गए हैं…’, पिछले एक साल से ट्राई साइकिल के लिए ऑफिसों के चक्कर लगा रहा दिव्यांग

    ‘साहब चले गए हैं…’, पिछले एक साल से ट्राई साइकिल के लिए ऑफिसों के चक्कर लगा रहा दिव्यांग

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    उत्तर प्रदेश में एक ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जो सरकारी सिस्टम से जुड़ा है. इस वीडियो में एक दिव्यांग है, जो ट्राई साइकिल के लिए पिछले एक साल से कलेक्ट्रेट का चक्कर लगा रहा है. लेकिन अब तक उसको सिर्फ आश्वासन ही मिला है. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. ये वायरल वीडियो सरकारी सिस्टम पर एक सवाल बन गया है.

    ‘साहब चले गए गए हैं’
    इस वायरल वीडियो में दिव्यांग अपना दर्द सुना रहा है. इस दिव्यांग का मानना है कि अधिकारियों की तरफ से सिर्फ आश्वासन मिलता है. दिव्यांग का आरोप है कि हर बार ऑफिस पहुंचने पर उसे एक ही जवाब मिलता है कि “साहब चले गए हैं”.

    एक साल पहले किया था आवेदन- दिव्यांग
    ये मामला कौशांबी जिलाधिकारी अमित पाल कार्यालय के बाहर की हैं, जहां एक दिव्यांग व्यक्ति अपनी परेशानी वीडियो में बयां कर रहा है. सिराथू तहसील के निजामपुर नौगिरा निवासी दीनानाथ मिश्र का कहना है कि उसने ट्राई साइकिल के लिए करीब एक साल पहले आवेदन किया था, लेकिन अभी तक उसे ट्राई साइकिल नहीं मिल सकी.

    वायरल वीडियो में दिव्यांग दीनानाथ कहते नजर आ रहे हैं कि वह कई बार कलेक्ट्रेट आ चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ यही कहा जाता है कि अधिकारी मौजूद नहीं हैं या साहब चले गए हैं.

    8 साल पहले मिली थी ट्राई साइकिल-
    दीनानाथ का कहना है कि करीब 8 साल पहले तत्कालीन डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने उन्हें ट्राई साइकिल दी थी, जो अब खराब हो चुकी है. मजबूरी में वह नई ट्राई साइकिल के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं.

    जल्द उपलब्ध कराई जाएगी ट्राई साइकिल- प्रशासन
    इस मामले में ज़ब विकलांग कल्याण अधिकारी विकास वर्मा से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया की 13/7/2026 को इनका फॉर्म भरवा दिया गया था और 3 अगस्त को इनका शारीरिक परीक्षण करवाया गया है. जैसे ही हमें साइकिल प्राप्त होती है, इन्हें सबसे पहले उपलब्ध कराई जाएगी.

  • सुहागरात पर दुल्हन ने पति से कहा- ‘मैं किसी और की अमानत हूं…फिर पति ने जो किया वो कोई नहीं कर पाता

    सुहागरात पर दुल्हन ने पति से कहा- ‘मैं किसी और की अमानत हूं…फिर पति ने जो किया वो कोई नहीं कर पाता

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    उत्तर प्रदेश में पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है. शादी के बाद पहली ही रात दुल्हन ने अपने पति को बताया कि वह किसी और से प्यार करती है और परिवार के दबाव में उसकी शादी हुई है. उसने पति के साथ वैवाहिक जीवन बिताने से इनकार कर दिया. इसके बाद दोनों परिवारों ने आपसी बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश की. आखिरकार तीन दिन बाद युवती को उसके प्रेमी के साथ भेज दिया गया.

    25 जू. को हुई थी शादी, सुहागरात पर खुला राज
    जानकारी के अनुसार, युवक और युवती की शादी 25 जू. 2026 को परिवार की मौजूदगी में पूरे रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुई थी. शादी के बाद सुहागरात पर दुल्हन ने पति से साफ शब्दों में कहा कि वह किसी और की अमानत है. उसका कहना था कि परिवार की इच्छा के कारण उसे यह शादी करनी पड़ी और वह इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाना चाहती.

    पति ने विवाद करने के बजाय परिवार को दी पूरी जानकारी
    दुल्हन की बात सुनने के बाद पति ने कोई हंगामा या विवाद नहीं किया. उसने पूरे मामले की जानकारी अपने परिजनों और पत्नी के परिवार को दी. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत हुई. परिवारों ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन युवती अपने फैसले पर कायम रही और प्रेमी के साथ ही रहने की इच्छा जताई.

    दोनों परिवारों की सहमति से प्रेमी को बुलाया गया
    जब बातचीत से कोई समाधान नहीं निकला तो 28 जू. को दोनों परिवारों की सहमति से युवती के प्रेमी को बुलाया गया. सभी पक्षों की मौजूदगी में निर्णय लिया गया कि युवती अपनी इच्छा के अनुसार प्रेमी के साथ जाएगी. इसके बाद वह उसके साथ चली गई.

    कानूनी विवाद से बचने के लिए महिला थाने पहुंचे परिजन
    भविष्य में किसी तरह की कानूनी परेशानी से बचने के लिए दूल्हे और उसके पिता ने हापुड़ महिला थाने में लिखित शिकायत दी. शिकायत में पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई, ताकि बाद में किसी प्रकार का आरोप-प्रत्यारोप या कानूनी विवाद खड़ा न हो.

    पुलिस बोली- दोनों पक्षों की सहमति से सुलझा मामला
    महिला थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अरुणा राय के अनुसार, युवक के परिजनों की ओर से शिकायत प्राप्त हुई थी. जांच के दौरान सामने आया कि युवती विवाह के बाद पति के साथ नहीं रहना चाहती थी और किसी अन्य युवक से प्रेम करती थी. दोनों परिवारों की सहमति से मामले का शांतिपूर्ण निस्तारण करा दिया गया. फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से कोई आपराधिक आरोप नहीं लगाया गया है और मामला आपसी सहमति से समाप्त हो गया है.

  • सूरत में नकली घी बनाने वाले नेटवर्क का भंडाफोड़, पाम ऑयल और वनस्पति तेल से तैयार कर रहे थे ‘गाय का घी’

    सूरत में नकली घी बनाने वाले नेटवर्क का भंडाफोड़, पाम ऑयल और वनस्पति तेल से तैयार कर रहे थे ‘गाय का घी’

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    सूरत ग्रामीण पुलिस ने नकली घी बनाने और उसे असली गाय का घी बताकर बेचने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. कामरेज तहसील के धोरण पारडी गांव स्थित एक इंडस्ट्रियल यूनिट में पाम ऑयल, वनस्पति तेल और सोयाबीन तेल से घी तैयार किया जा रहा था. पुलिस ने छापेमारी कर 52.79 लाख रुपये से अधिक का सामान जब्त किया है.

    गुप्त सूचना पर पुलिस ने मारा छापा
    सूरत ग्रामीण पुलिस अधीक्षक राजेश गढिया के मार्गदर्शन में लोकल क्राइम ब्रांच की टीम नकली और मिलावटी उत्पादों के खिलाफ अभियान चला रही थी. इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि धोरण पारडी गांव की सीमा में हिंदवा ड्रीम्स इंडस्ट्रीज के प्लॉट नंबर G-01 में संदिग्ध घी बनाने और पैक करने का काम चल रहा है. सूचना के आधार पर PSI जे.एल. पटेल के नेतृत्व में टीम ने 15 अगस्त को यूनिट पर छापेमारी की.

    लाइसेंस लेकर कर रहा था मिलावट का कारोबार
    छापेमारी के दौरान यूनिट का मालिक अंकितकुमार राजेशकुमार मोदी मौके पर मिला. पूछताछ में उसने बताया कि उसने ‘कैवल फूड प्रोडक्ट’ के नाम से घी बनाने का लाइसेंस लिया था. पुलिस के मुताबिक, इसी लाइसेंस की आड़ में वह डेयरी प्रोडक्ट की जगह पाम ऑयल, वनस्पति घी और सोयाबीन तेल को मिलाकर संदिग्ध घी तैयार करता था. इसके बाद इस उत्पाद को ‘Shri ANMOL RATNA COW’s GHEE’ के नाम से अलग-अलग पैकिंग में गाय का घी बताकर बेचा जाता था.

    5 टन से ज्यादा माल बरामद
    पुलिस ने मौके से पाम ऑयल, वनस्पति तेल और संदिग्ध घी समेत 5 टन से ज्यादा सामग्री बरामद की. जब्त किए गए पूरे मुद्दामाल की कीमत करीब 52,79,761 रुपये बताई गई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए फूड एंड ड्रग्स विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया. अधिकारियों ने जरूरी सैंपल लेकर उन्हें लैब जांच के लिए भेज दिया है.

    एक साल से चल रहा था कारोबार
    प्राथमिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी करीब एक साल से यह कारोबार कर रहा था और तैयार माल आसपास के इंडस्ट्रियल इलाकों में सप्लाई करता था. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ फूड सेफ्टी एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज किया है. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नकली घी किन-किन इलाकों और दुकानों तक पहुंचाया गया.