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  • गले में 10 फीट का किंग कोबरा लपेटकर निकलीं ‘स्नेक लेडी’, जहरीले सांप का ऐसा रेस्क्यू देख दंग रह गए लोग..

    गले में 10 फीट का किंग कोबरा लपेटकर निकलीं ‘स्नेक लेडी’, जहरीले सांप का ऐसा रेस्क्यू देख दंग रह गए लोग..

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      बिहार के बगहा स्थित वाल्मीकिनगर थाना क्षेत्र के विशाहा गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब मुन्नी लाल के घर के अंदर करीब 10 फीट लंबा जहरीला किंग कोबरा दिखाई दिया. विशालकाय सांप को देखते ही परिवार के लोग जान बचाने के लिए तुरंत घर से बाहर निकल आए. कुछ ही देर में पूरे गांव में खबर फैल गई और मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुट गई. लोग दूर खड़े होकर सांप को देखने लगे, जबकि परिवार दहशत में था.

      ‘स्नेक लेडी’ ने सुरक्षित किया रेस्क्यू
      घटना की सूचना मिलते ही वाल्मीकिनगर की प्रसिद्ध स्नेक रेस्क्यूअर जानकी देवी मौके पर पहुंचीं. इलाके में उन्हें ‘स्नेक लेडी’ के नाम से जाना जाता है. उन्होंने पूरी सावधानी और प्रशिक्षित तरीके से किंग कोबरा का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया. इसके बाद सांप को सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ दिया गया. समय रहते रेस्क्यू होने से किसी भी तरह की जनहानि या दुर्घटना नहीं हुई.

      बारिश में बढ़ जाती है सांपों की आवाजाही
      वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार के मुताबिक, बारिश और मौसम में बदलाव के दौरान जहरीले सांप अक्सर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे गांवों और रिहायशी इलाकों की ओर आ जाते हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि घर या आसपास सांप दिखाई दे तो घबराएं नहीं और न ही खुद उसे पकड़ने की कोशिश करें. इसकी सूचना तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को दें.

      दुनिया के सबसे विषैले सांपों में गिना जाता है किंग कोबरा
      किंग कोबरा दुनिया के सबसे विषैले सांपों में शामिल है. इसका न्यूरोटॉक्सिक जहर इंसान के तंत्रिका तंत्र पर तेजी से असर करता है. ऐसे सांप के काटने पर बिना समय गंवाए मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना और एंटी-वेनम उपचार शुरू करना जरूरी होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने से जान बचाई जा सकती है.

      12 साल की उम्र से कर रही हैं सांपों का रेस्क्यू
      वाल्मीकिनगर की रहने वाली जानकी देवी पिछले कई वर्षों से सांपों का रेस्क्यू कर रही हैं. उन्होंने महज 12 साल की उम्र में यह काम शुरू किया था. अब तक वह हजारों जहरीले और गैर-जहरीले सांपों को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ चुकी हैं. कई बार रेस्क्यू के दौरान उन्हें सांप ने काट भी लिया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने यह काम नहीं छोड़ा. आज वह लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण के लिए भी लगातार सक्रिय हैं.

    • पानी में गिरा डिलीवरी बॉय का मोबाइल, घंटों तलाशने पर भी नहीं मिला तो रो पड़ा, बोला- इसी फोन से चलता है घर..

      पानी में गिरा डिलीवरी बॉय का मोबाइल, घंटों तलाशने पर भी नहीं मिला तो रो पड़ा, बोला- इसी फोन से चलता है घर..

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      मुजफ्फरनगर में मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद शहर के शिव चौक पर भारी जलभराव हो गया. सड़कों पर भरे पानी के बीच एक डिलीवरी बॉय का मोबाइल फोन गिर गया. युवक घंटों तक पानी में अपना फोन तलाशता रहा. काफी कोशिश के बाद भी जब फोन नहीं मिला तो उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

      पानी में गिरा मोबाइल, घंटों तलाशता रहा युवक
      पीड़ित युवक की पहचान रामपुरी निवासी विशाल के रूप में हुई है. विशाल डिलीवरी बॉय का काम करता है और इसी से अपने परिवार का खर्च चलाता है. मंगलवार को वह खाना लेकर डिलीवरी के लिए जा रहा था. इसी दौरान शिव चौक पर जलभराव के बीच उसका मोबाइल फोन पानी में गिर गया. मोबाइल गिरते ही विशाल ने पानी में उसे तलाशना शुरू कर दिया. वह कभी पानी में हाथ डालकर फोन खोजता तो कभी सड़क किनारे खड़े होकर पानी को देखता रहा. काफी देर तक तलाश करने के बाद भी जब मोबाइल नहीं मिला तो वह रोने लगा.

      45 हजार का फोन अभी सिर्फ 3 किस्तें चुकाई थीं
      विशाल के लिए यह मोबाइल सिर्फ महंगा फोन नहीं था, बल्कि उसकी रोजी-रोटी का अहम साधन था. डिलीवरी के ऑर्डर इसी मोबाइल पर आते थे. इन्हीं ऑर्डर को पूरा करके वह कमाई करता था. जानकारी के मुताबिक, विशाल ने करीब तीन महीने पहले ही लगभग 45 हजार रुपए का मोबाइल किस्तों पर खरीदा था. अब तक वह इसकी सिर्फ तीन किस्तें जमा कर पाया है.

      फोन ढूंढते युवक का वीडियो हुआ वायरल
      विशाल को पानी में मोबाइल तलाशते देख वहां मौजूद एक व्यक्ति ने उसका वीडियो बना लिया. वीडियो में विशाल जलभराव के बीच फोन तलाशता नजर आ रहा है. काफी देर तक फोन नहीं मिलने के बाद वह परेशान होकर रोता दिखाई देता है. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों का ध्यान विशाल की परेशानी की ओर गया. जब उससे उसकी स्थिति के बारे में पूछा गया तो वह अपने आंसू नहीं रोक सका.

      नगरपालिका से आर्थिक मदद की गुहार
      विशाल ने बताया कि वह गरीब परिवार से है और डिलीवरी का काम करके घर चलाता है. मोबाइल उसके काम के लिए बेहद जरूरी है. फोन के बिना उसके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है. विशाल ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए नगरपालिका से भी मदद की गुहार लगाई है. उसका कहना है कि अगर मोबाइल वापस नहीं मिलता या उसकी भरपाई नहीं होती तो उसके लिए परिवार का खर्च चलाना और बाकी किस्तें चुकाना मुश्किल हो जाएगा.

    • खाने में मंडराती हैं मक्खियां? एक बार अपना लें ये आसान घरेलू उपाय… कभी नहीं आएंगी वापस..?

      खाने में मंडराती हैं मक्खियां? एक बार अपना लें ये आसान घरेलू उपाय… कभी नहीं आएंगी वापस..?

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      बारिश का मौसम आते ही घर में मक्खियों का आतंक बढ़ जाता है. किचन, डाइनिंग टेबल और खाने की चीजों के आसपास मंडराती मक्खियां सिर्फ परेशानी ही नहीं, बल्कि कई बीमारियों की वजह भी बन सकती हैं. अगर आप भी इनसे छुटकारा पाने के लिए केमिकल स्प्रे का इस्तेमाल करते-करते परेशान हो चुके हैं, तो कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी बड़ी समस्या को मिनटों में कम कर सकते हैं. तो चलिए आपको बताते हैं कुछ ऐसे उपायों के बारे में जिससे आपके घर से मक्खियां गायब हो जाएंगी.

      सिरका
      मक्खियां खमीर जैसी गंध की ओर जल्दी आकर्षित होती हैं. इसके लिए एक छोटे बर्तन में सेब का सिरका डालें और उसमें एक बूंद डिशवॉश लिक्विड मिला दें. अब बर्तन को प्लास्टिक रैप से ढककर उसमें छोटे-छोटे छेद कर दें. मक्खियां अंदर तो चली जाएंगी, लेकिन बाहर नहीं निकल पाएंगी.

      नींबू और लौंग
      एक नींबू को दो हिस्सों में काट लें और उसमें 6 से 10 लौंग लगा दें. इसे खिड़की, डाइनिंग टेबल या किचन काउंटर पर रखें. नींबू और लौंग की तेज खुशबू मक्खियों को दूर रखने में मदद करती है.

      तुलसी या पुदीना
      तुलसी और पुदीने की खुशबू मक्खियों को पसंद नहीं होती. इसलिए इन पौधों को घर के दरवाजों, खिड़कियों या रसोई के पास रखें. इससे मक्खियां कम आएंगी और घर का वातावरण भी ताजा बना रहेगा.

      कपूर
      कपूर की तेज गंध मक्खियों को दूर रखने में मदद करती है. इसे किसी कटोरी में रखकर या कपड़े में बांधकर खिड़कियों और दरवाजों के पास रखा जा सकता है. बरसात के मौसम में यह उपाय काफी उपयोगी माना जाता है.

      सफाई का रखें खास ध्यान
      घरेलू उपाय तभी पूरी तरह असर दिखाते हैं, जब घर की साफ-सफाई का भी ध्यान रखा जाए. खाने को हमेशा ढककर रखें. किचन की सतहों को नियमित रूप से साफ करें और डस्टबिन समय पर खाली करें. इससे मक्खियां घर की ओर कम आकर्षित होंगी और परिवार भी संक्रमण के खतरे से सुरक्षित रहेगा.

    • पाइप में पानी का प्रेशर है कम, तो प्लंबर के खर्च को कहें टाटा..

      पाइप में पानी का प्रेशर है कम, तो प्लंबर के खर्च को कहें टाटा..

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      अगर घर के नल से पानी बहुत धीरे आने लगे, तो रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में कई लोग बिना वजह तुरंत प्लंबर को बुला लेते हैं. जबकि कई बार यह परेशानी बहुत छोटी होती है और इसे कुछ आसान तरीकों से घर पर ही ठीक किया जा सकता है. इन तरीकों से आप प्लंबर पर खर्च होने वाले पैसे भी बच सकते हैं और पानी का प्रेशर भी पहले जैसा कर सकते हैं.

      एयर बैंड से मिलेगी मदद

      अगर आपके घर की पाइपलाइन पहले से लगी हुई है और उसे बदलना नहीं चाहते, तो एयर बैंड एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. इसे पाइप के मोड़ वाली जगह पर लगाया जाता है. कई मामलों में इससे पानी का बहाव बेहतर हो जाता है और नल से पानी पहले की तुलना में तेज आने लगता है. यह तरीका आसान भी है और ज्यादा खर्चीला भी नहीं होता.

      वॉटर प्रेशर बूस्टर पंप

      अगर सिर्फ एयर बैंड से काम नहीं बनता, तो वॉटर प्रेशर बूस्टर पंप का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह एक ऑटोमैटिक मशीन होती है, जिसे पानी की लाइन या ओवरहेड टैंक से जोड़ा जाता है. जैसे ही आप नल खोलते हैं, यह अपने आप चालू हो जाती है और पानी का प्रेशर बढ़ाने में मदद करती है. इससे बाथरूम, किचन और दूसरे नलों में भी पानी का बहाव बेहतर हो सकता है.

      क्यों कम होता है पानी का प्रेशर?

      पानी का प्रेशर कम होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. सबसे आम कारण पाइपलाइन में लीकेज होना है. अगर कहीं से पानी बाहर निकल रहा है, तो नल तक पूरा प्रेशर नहीं पहुंच पाता.

      इसके अलावा पाइप के अंदर मिट्टी, कचरा या दूसरी गंदगी जमा होने से भी पानी का रास्ता रुक सकता है. कई बार नल का एरेटर जाम हो जाता है, जिससे पानी कम निकलता है. वहीं अगर घर की पानी की टंकी में पानी का लेवल कम हो, तब भी नल का प्रेशर घट सकता है.

      कब बुलाएं प्लंबर को?

      अगर बार-बार पानी का प्रेशर कम हो रहा है और आसान तरीके अपनाने  के बाद भी परेशानी लगातार बनी रहती है, तो प्लंबर की मदद लेना सही रहेगा. अगर पानी की मोटर ठीक से काम कर रही है, फिर भी नल से पानी कम आ रहा है, तो पाइपलाइन की जांच जरूरी हो सकती है. इसी तरह अगर पाइप में लीकेज हो या किसी हिस्से में बड़ी खराबी हो, तो खुद ठीक करने की बजाय किसी प्लंबर को बुलाना बेहतर रहेगा.

    • नारियल तेल असली है या मिलावटी? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान

      नारियल तेल असली है या मिलावटी? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान

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      नारियल तेल का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है, कोई इसे खाना बनाने के लिए रखता है, तो कोई बालों और त्वचा की देखभाल के लिए. लेकिन क्या जो नारियल तेल आप इस्तेमाल कर रहे हैं, वह वाकई शुद्ध है? बाजार में कई बार मिलावट वाला तेल भी मिल सकता है. तो चलिए आपको कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बताते हैं जिससे आप असली और नकली नारियल तेल की पहचान कर सकते हैं.

      फ्रिज टेस्ट से करें जांच
      नारियल तेल को आप फ्रिज टेस्ट कर सकते हैं. इसके लिए थोड़ा सा तेल साफ कांच की कटोरी में डालकर कुछ घंटों के लिए फ्रिज में रखें. शुद्ध नारियल तेल ठंडे तापमान में जमने लगता है और सफेद या ठोस दिखाई देता है. हालांकि, केवल इस टेस्ट से तेल की शुद्धता तय नहीं की जा सकती, क्योंकि तापमान और तेल की प्रोसेसिंग का भी असर पड़ता है.

      रंग और बनावट पर दें ध्यान
      नारियल तेल सामान्य तौर पर साफ और एक समान दिखाई देता है. ठंडे मौसम में यह सफेद और ठोस हो सकता है, जबकि गर्म वातावरण में पारदर्शी या हल्का पीला नजर आ सकता है. तेल को पारदर्शी कांच के बर्तन में डालकर रोशनी में देखें. अगर इसमें असामान्य कण, गंदगी या बहुत ज्यादा अलग-अलग परतें नजर आएं, तो सावधान रहें.

      खुशबू से भी मिल सकता है संकेत
      वर्जिन या अनरिफाइंड नारियल तेल में नारियल की प्राकृतिक खुशबू होती है. थोड़ी मात्रा हथेली पर लेकर हल्का गर्म करें और इसकी गंध महसूस करें. अगर तेल से तेज केमिकल जैसी गंध, बासीपन या कोई असामान्य महक आ रही है, तो इसकी क्वालिटी पर सवाल उठ सकता है. वहीं, रिफाइंड नारियल तेल की खुशबू काफी हल्की हो सकती है.

      कागज पर डालकर देखें
      एक साफ सफेद कागज पर नारियल तेल की कुछ बूंदें डालकर थोड़ी देर छोड़ दें. इसके फैलने और बचे हुए अवशेष को देखें. अगर असामान्य रंग या गंदा अवशेष नजर आए, तो यह गुणवत्ता को लेकर संकेत हो सकता है. हालांकि, यह भी केवल शुरुआती घरेलू जांच है.

      तेल खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
      नारियल तेल खरीदते समय पैकेट पर लिखे Ingredients जरूर पढ़ें. पैक की सील, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और FSSAI से जुड़ी जानकारी भी जांचें. सबसे जरूरी बात यह है कि घरेलू टेस्ट मिलावट की पक्की पुष्टि नहीं करते. अगर तेल की गंध, स्वाद या बनावट असामान्य लगे, तो खाने या त्वचा पर लगाने से बचें.

    • बहन की शादी के लिए कर्ज, मां बीमार, टीचर की नौकरी छोड़ी… नियुक्तियां रद्द होने से सड़क पर आने वालों का दर्द

      बहन की शादी के लिए कर्ज, मां बीमार, टीचर की नौकरी छोड़ी… नियुक्तियां रद्द होने से सड़क पर आने वालों का दर्द

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      रांची में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों के प्रदर्शन के बाद झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने TDPL समेत कई दूसरी परीक्षाओं को रद्द कर दिया. सरकार ने परीक्षाएं रद्द किए जाने की अधिसूचना भी जारी कर दी है. लेकिन अब परीक्षाओं में पास हुए अभ्यर्थी सड़क पर उतर गए हैं. झारखंड मंत्रालय के बाहर सरकार द्वारा TDPL समेत अन्य परीक्षाओं के रद्द किए जाने के अधिसूचना के बाद माहौल बिल्कुल गमगीन है.

      पास अभ्यर्थियों का रो रोहकर बुरा हाल
      एक उम्मीदवार मनीषा का रो रो कर बुरा हाल है. पहले स्टेशन मास्टर के पद पर रेलवे में नियुक्ति मिली थी. वहां से नौकरी छोड़कर आई. मनीषा हमारी टीम के कैमरे के सामने ही बेहोश होकर गिर पड़ी. उनको दोस्तों ने संभालने की कोशिश की. इनका महिला सुपरवाइजर में भी नियुक्ति मिली थी. फिलहाल ASO वित्त विभाग में हैं. मनीषा हजारीबाग की रहने वाली हैं. 15दिनों से तनाव में थी. कर्नाटक में नौकरी में थी. ट्रेनिंग कर रही हैं. मानसिक तनाव इसलिए भी कि आरोप गड़बड़ी के लगे थे. यानी कलंक लगे थे. ब उसे मिटाना है. इळ्जाम और कलंक को झेलने में मुश्किल है.

      भीड़तंत्र में आगे झुक गई सरकार- उम्मीदवार
      एक उम्मीदवार का कहना है कि प्रतिभा रो रही है और भीड़तंत्र के दबाव में सरकार झुक रही है. गुड्डू कुमार राय साहेबगंज से हैं और पुलिस मुख्यालय में कार्यरत थे. सहायक प्रशाखा अधिकारी थे. लेकिन अब उसी दफ्तर में नहीं घुसने दिया जा रहा है. भारतीय रेल में सीनियर गुड्स ट्रेन मैनेजर की नौकरी छोड़कर आए थे. शादी हो गई है. कोर्ट ने कहा था, जिसके खिलाफ सबूत होंगे, उन्हीं को नौकरी से निकाला जाएगा. ये कोर्ट की अवमानना है.

      नौकरी छोड़कर बने थे अधिकारी- उम्मीदवार
      एक  उम्मीदवार पहले 2014 से ही  शिक्षक थे. लेकिन नौकरी छोड़कर ग्रामीण विकास विभाग में सहायक प्रशाखा अधिकारी बने थे. ये सोचकर कि ये नौकरी को मिनी IAS कहा जाता है. अब तक सड़क पर हैं.

      बहन की शादी के  लिए लिया कर्ज- उम्मीदवार
      श्याम सुंदर मंडल कहते है कि वो भी रेलवे में ऑफिस सुपरिंटेंडेंट थे. यहां एग्जाम दिया कि रांची में रहेंगे, लेकिन अब तो कहीं नहीं है. सबको नौकरी से निकाला जाएगा. शादी हुई है, लेकिन आगे पूरी जिंदगी है, पूरे परिवार का बोझ है, कैसे जीवन चलेगा, पता नहीं. बहन की शादी के लिए कर्ज भी ले रखा है. कोर्ट के शरण में जाएंगे.

      मां को नहीं बता सकता नौकरी चली गई- विकास
      हज़ारीबगा के विकास कुमार की भी कहानी मिलती जुलती है. ये लेबर इन्फोर्समेंट ऑफिसर थे. इनकी माँ की तबियत खराब रहती है. लिहाजा मां को नौकरी जाने की बात बताई ही नहीं है. अगर उन्हें पता चला तो सदमा लगेगा. हार्ट अटैक भी आ सकता है. उसकी जिम्मेवारी क्या सरकार लेगी?

    • फिल्मों में ताजमहल बिकता था, प्रयागराज में तो पूरा पहाड़ ही बेच दिया… जानिए कैसे हुआ करोड़ों की सरकारी जमीन का खेल..

      फिल्मों में ताजमहल बिकता था, प्रयागराज में तो पूरा पहाड़ ही बेच दिया… जानिए कैसे हुआ करोड़ों की सरकारी जमीन का खेल..

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      • सरकारी रिकॉर्ड में कैसे हुई हेराफेरी?

      • ‘पहाड़’ की जमीन इतनी खास क्यों होती है?

      बॉलीवुड फिल्मों में आपने कई बार सुना होगा कि जालसाजों ने ताजमहल, लाल किला तक बेच दिया. ऐसी बातें पर्दे पर मजेदार लगती हैं, लेकिन प्रयागराज में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हकीकत और फिल्मों के बीच की दूरी कम कर दी. यहां भू-माफियाओं ने राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी ‘पहाड़’ के नाम दर्ज करोड़ों रुपये की जमीन को पहले अपने नाम कराया और फिर उसे बेच भी दिया. मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस दोनों हरकत में आ गए हैं.

      क्या है पूरा मामला?
      यह मामला प्रयागराज की बारा तहसील के गोल्हैया गांव का है. यहां आराजी संख्या-1 की करीब 83 बीघा 19 बिस्वा (लगभग 19.16 हेक्टेयर) जमीन राजस्व रिकॉर्ड में ‘पहाड़’ यानी सार्वजनिक सरकारी भूमि के रूप में दर्ज थी. आरोप है कि कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर इस सरकारी जमीन को अपने नाम दर्ज करा लिया. इसके बाद जमीन की खरीद-फरोख्त भी शुरू कर दी गई.

      सरकारी रिकॉर्ड में कैसे हुई हेराफेरी?
      जमीन किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि सरकारी खाते में दर्ज थी. लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर राजस्व अभिलेखों में बदलाव कर खुद को जमीन का मालिक दिखा दिया. जब रिकॉर्ड में नाम दर्ज हो गए, तो उसी आधार पर जमीन की रजिस्ट्री और बिक्री भी होती रही. यानी कागजों पर सरकारी पहाड़ निजी संपत्ति बन गया.

      मामला सामने कैसे आया?
      प्रशासन को जमीन में गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद जांच शुरू हुई. जांच में पाया गया कि जमीन को गलत तरीके से निजी खातों में दर्ज कराया गया था.इसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी फर्जी नाम निरस्त कर दिए और जमीन को दोबारा सरकारी खाते में दर्ज कर दिया.

      कितने लोगों पर केस दर्ज हुआ?
      लेखपाल प्राची सिंह परिहार की शिकायत पर लालापुर थाने में 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. इनमें पूर्व खाताधारक, जमीन खरीदने वाले लोग और एके ड्रीम सिटी प्राइवेट लिमिटेड नाम की निजी कंपनी के निदेशक भी शामिल हैं. पुलिस ने सभी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी संपत्ति से जुड़े गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया है.

      ‘पहाड़’ की जमीन इतनी खास क्यों होती है?
      राजस्व रिकॉर्ड में ‘पहाड़’ के रूप में दर्ज जमीन सार्वजनिक संपत्ति मानी जाती है. इसका इस्तेमाल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सार्वजनिक हित के लिए होता है. ऐसी जमीन को कोई व्यक्ति अपने नाम नहीं करा सकता और न ही उसकी खरीद-बिक्री की जा सकती है. इसलिए इस तरह की हेराफेरी को गंभीर अपराध माना जाता है.

      अब आगे क्या होगा?
      पुलिस का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है. जांच में राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण (म्यूटेशन), रजिस्ट्री, जमीन के हस्तांतरण और सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच होगी. यदि किसी सरकारी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है.

      पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
      देश के अलग-अलग राज्यों में पहले भी सरकारी जमीन, तालाब, चारागाह और ग्राम समाज की जमीन पर फर्जी तरीके से कब्जा करने या रिकॉर्ड बदलने के मामले सामने आते रहे हैं. हालांकि किसी ‘पहाड़’ को ही कागजों में निजी संपत्ति बनाकर बेचने का मामला बेहद दुर्लभ माना जा रहा है. यही वजह है कि प्रयागराज का यह मामला चर्चा में है.

    • प्राचीन काल की ईंटें, मिट्टी की सुराही, हैंडल वाली धूपदानी… रायबरेली में मिली रहस्यमयी सुरंग

      प्राचीन काल की ईंटें, मिट्टी की सुराही, हैंडल वाली धूपदानी… रायबरेली में मिली रहस्यमयी सुरंग

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      उत्तर प्रदेश में रायबरेली जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र के ओई गांव में मिली रहस्यमयी सुरंग और प्राचीन अवशेष मिले हैं. पिछले हफ्ते ओई गांव में बारिश के बाद अचानक जमीन धंस गई. जमीन धंसने से वहां एक रहस्यमयी सुरंग और पक्की दीवार जैसी संरचना दिखाई दी है. इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है.

      अचानक खेत में हो गया गड्ढा-
      मामला रायबरेली जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र का है, यहां स्थित ओई गांव में एक निजी खेत के अंदर अचानक एक मीटर चौड़ा गड्ढा हो गया. जब लोगों ने पास जाकर देखा, तो वहां पक्की दीवार से बनी एक प्राचीन सुरंग जैसी आकृति नजर आई. इस अनोखी संरचना को देखने के लिए देखते ही देखते पूरे गांव की भीड़ जमा हो गई.

      कई ऐतिहासिक चीजें मिली-
      मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन तुरंत एक्शन में आया. एसडीएम महराजगंज और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI लखनऊ मंडल की टीम मौके पर पहुंची. सहायक पुरातत्वविद डॉ. मनोज कुमार यादव के नेतृत्व में टीम सीढ़ी के सहारे इस रहस्यमयी सुरंग के अंदर उतरी. उन्हें बताया की सुरंग के अंदर जांच के दौरान पुरातत्व विभाग की टीम को कई ऐतिहासिक चीजें मिली हैं. यहां से प्राचीन काल की पुरानी ईंटें, मिट्टी की सुराही और एक हैंडल वाली धूपदानी बरामद की गई है.

      कुषाण कालीन अवशेष मिले-
      एक्सपर्ट्स के शुरुआती आकलन के मुताबिक, ये सभी अवशेष कुषाण कालीन बताए जा रहे हैं. इतना ही नहीं, इस मामले में आज एक बड़ा अपडेट सामने आया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लखनऊ मंडल की टीम ने आज गांव के ही निवासी अशोक प्रताप मौर्य के घर पहुंचकर उनके पास मौजूद प्राचीन अवशेषों का बारीकी से निरीक्षण किया. गौरतलब है कि अशोक प्रताप मौर्य 1985 से इन ऐतिहासिक अवशेषों को सहेज कर रख रहे हैं. उनके दावे के अनुसार, यह ओई भीट पुरातत्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज एक ऐतिहासिक स्थल है.

      फिलहाल, सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने पूरे इलाके को सील कर दिया है. मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और ग्रामीणों को गड्ढे के पास जाने से साफ मना किया गया है. एएसआई की विस्तृत वैज्ञानिक रिपोर्ट आने के बाद ही इस प्राचीन और ऐतिहासिक सुरंग का पूरा सच सामने आ सकेगा.


      डॉ कुमार ने बताया कि निरीक्षण के दौरान हम लोगों ने यहां पर देखा कि तकरीबन 15 से 20 फीट की जमीन धंसी हुई है. जिसके अंदर कुछ ईंटों के संरचना मिले, जिनका ओरियंटेशन उत्तर से लेकर दक्षिण की तरफ है और जब हम लोगों ने नीचे जाकर ईंटों को देखा तो उनकी साइज 40 /28 /8 सेंटीमीटर है, जो कुषाण कालीन संरचना से मिलती-जुलती है और बहुत सारे अवशेष देखने को मिले, जो सरफेस पर भी है और यहां के स्थानीय लोगों के द्वारा संग्रह भी किया गया है और इन्हें बनाने में जो ड्राइव है, जो मूर्तियां हैं, कुछ अवशेष हैं, जो यह सारी संरचनाओं हैं, कुषाण कल के समय जो बनती थी, यह उससे मिलती-जुलती हैं. यह 2000 साल पहले का है और अभी इसकी रिपोर्ट सबमिट की जाएगी. फिर उसके बाद जैसे शासन निर्देश करेगी, उसी हिसाब से कार्यवाही की जाएगी.

    • होटल और ट्रेन में हमेशा क्यों होती सफेद चादर… कोई दूसरे रंग से क्यों बचा जाता, जानिए इसके पीछे की असली वजह

      होटल और ट्रेन में हमेशा क्यों होती सफेद चादर… कोई दूसरे रंग से क्यों बचा जाता, जानिए इसके पीछे की असली वजह

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      अगर आपने कभी होटल में ठहरने या ट्रेन में सफर किया है, तो आपने एक बात जरूर नोटिस की होगी. ज्यादातर जगहों पर बिस्तर पर सफेद चादर ही बिछी होती है. रंगीन चादरें बहुत कम देखने को मिलती हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर सफेद चादर का ही इस्तेमाल क्यों किया जाता है. क्या यह सिर्फ देखने में अच्छी लगती है या इसके पीछे कोई और वजह भी है? सच यह है कि सफेद चादर चुनने के पीछे कई कारण होते हैं.

      तुरंत पता चल जाती है सफाई

      सफेद चादर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उस पर धूल, दाग या गंदगी तुरंत दिखाई देती है. इससे होटल और रेलवे के कर्मचारियों को भी आसानी से पता चल जाता है कि चादर पूरी तरह साफ है या नहीं. अगर उस पर हल्का सा भी दाग दिख जाए, तो उसे दोबारा धोया जाता है या नई चादर बिछा दी जाती है.

      धोने और साफ रखने में होती है आसानी

      होटलों और ट्रेनों में हर दिन बड़ी संख्या में चादरों की धुलाई होती है. सफेद चादरों को एक साथ मशीन में धोया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर उन पर ब्लीच का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे जिद्दी दाग आसानी से निकल जाते हैं. अगर रंगीन चादरों पर ब्लीच का इस्तेमाल किया जाए, तो उनका रंग फीका पड़ सकता है. यही वजह है कि सफेद चादरों को साफ रखना ज्यादा आसान और सस्ता पड़ता है.

      सफेद रंग देता है सुकून का एहसास

      रंगों का असर हमारे मन पर भी पड़ता है. सफेद रंग को साफ-सफाई, शांति और सादगी का प्रतीक माना जाता है. जब कोई व्यक्ति सफेद चादर वाला बिस्तर देखता है, तो उसे वह ज्यादा साफ और आरामदायक लगता है. इससे मन को सुकून मिलता है और ठहरने का अनुभव भी बेहतर बन जाता है. यही कारण है कि बड़े और लग्जरी होटल भी सफेद चादरों को ही पसंद करते हैं.

      रखरखाव में होती है समय और खर्च की बचत

      अगर होटल या रेलवे अलग-अलग रंगों की चादरें इस्तेमाल करें, तो उन्हें अलग-अलग धोना पड़ेगा. इससे समय, मेहनत और खर्च तीनों बढ़ जाएंगे. सफेद चादरों के साथ यह परेशानी नहीं होती. सभी चादरों को एक साथ धोया जा सकता है, जिससे काम आसान हो जाता है. इसके अलावा सफेद रंग रोशनी को अच्छी तरह लौटाता है, जिससे होटल का कमरा या ट्रेन का केबिन ज्यादा उजला और साफ दिखाई देता है.

    • Aadhaar Bometric Lock: कर लें इस सेटिंग को ऑन… नहीं कर पाएगा कोई आधार का गलत इस्तेमाल, बायोमेट्रिक रहेंगे पूरी तरह सेफ

      Aadhaar Bometric Lock: कर लें इस सेटिंग को ऑन… नहीं कर पाएगा कोई आधार का गलत इस्तेमाल, बायोमेट्रिक रहेंगे पूरी तरह सेफ

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      आधार कार्ड आज बैंक, सरकारी स्कीम, सिम कार्ड खरीदने और कई जरूरी कामों में इस्तेमाल होता है. ऐसे में अगर आपके आधार का गलत इस्तेमाल हो जाए तो बड़ी परेशानी हो सकती है. इसी खतरे को कम करने के लिए नए Aadhaar App में एक खास फीचर दिया गया है. अब यूजर अपने फिंगरप्रिंट और आइरिस (आंखों की पहचान) को जब चाहें लॉक और जरूरत पड़ने पर अनलॉक कर सकते हैं. इससे आपकी बायोमेट्रिक जानकारी ज्यादा सेफ रहती है.

      बायोमेट्रिक लॉक क्यों जरूरी है?

      आधार से जुड़ी बायोमेट्रिक जानकारी में आपके फिंगरप्रिंट और आइरिस की जानकारी होती है. अगर यह जानकारी लॉक रहती है, तो कोई भी व्यक्ति आपकी पर्मिशन के बिना बायोमेट्रिक से आधार का इस्तेमाल नहीं कर सकता. इससे धोखाधड़ी की आशंका काफी कम हो जाती है.

      नए Aadhaar App से कैसे करें लॉक?

      अगर आप अपने फिंगरप्रिंट और आइरिस को लॉक करना चाहते हैं, तो सबसे पहले नया Aadhaar App खोलें. इसके बाद अपने आधार खाते में लॉग इन करें. ऐप के होम पेज पर आपको Biometric Lock का ऑप्शन दिखाई देगा. इस पर टैप करें और स्क्रीन पर दी गई जानकारी को पूरा करें. प्रोसेस पूरा होते ही आपका बायोमेट्रिक डेटा लॉक हो जाएगा. इसके बाद किसी भी बायोमेट्रिक जांच के लिए पहले इसे अनलॉक करना जरूरी होगा.

      जरूरत पड़ने पर ऐसे करें अनलॉक

      जब आपको बैंक, आधार सेवा केंद्र या किसी अन्य जगह फिंगरप्रिंट या आइरिस से पहचान करानी हो, तब Aadhaar App खोलें. फिर Biometric Unlock ऑप्शन चुनें और पहचान की प्रोसेस पूरी करें. आपका बायोमेट्रिक कुछ समय के लिए अनलॉक हो जाएगा. काम पूरा होने के बाद आप इसे दोबारा लॉक भी कर सकते हैं.

      किनके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद?

      अगर आपका आधार कई सेवाओं से जुड़ा है, आप अक्सर बैंक या सरकारी काम करते हैं या आपको आधार के गलत इस्तेमाल की चिंता रहती है, तो यह सुविधा आपके लिए काफी फायदेमंद है. जरूरत न होने पर बायोमेट्रिक लॉक रखने से सेफ्टी बढ़ जाती है और आपकी निजी जानकारी सेफ रहती है. नए Aadhaar App में यह सुविधा अब पहले से ज्यादा आसान और तेज तरीके से होती है.