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  • AI कैमरों को भी कर सकते हैं कन्फ्यूज ये खास कपड़े! आखिर क्यों बढ़ रही है इनकी चर्चा?

    AI कैमरों को भी कर सकते हैं कन्फ्यूज ये खास कपड़े! आखिर क्यों बढ़ रही है इनकी चर्चा?

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    सोचिए, आपने एक ऐसी टी-शर्ट या जैकेट पहन रखी हो जिसे देखकर AI कैमरे आपकी पहचान करने में मुश्किल महसूस करें. सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन अब ऐसे खास कपड़ों की चर्चा हो रही है. इन्हें Adversarial Clothing कहा जाता है. इन कपड़ों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि कुछ फेस रिकग्निशन सिस्टम के लिए किसी व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल हो सकता है.

    Adversarial Clothing ऐसे कपड़े होते हैं जिन पर खास तरह के पैटर्न और डिजाइन बनाए जाते हैं. इनका मकसद कुछ AI कैमरों और फेस रिकग्निशन सिस्टम को भ्रम में डालना है. कुछ डिजाइनर ऐसे जैकेट भी बना रहे हैं जिनमें इंफ्रारेड LED का इस्तेमाल किया जाता है. दावा है कि इससे कुछ कैमरों के लिए चेहरा साफ पहचानना कठिन हो सकता है. लेकिन, यह तकनीक हर जगह एक जैसी असरदार नहीं मानी जाती.

    आखिर लोग क्यों खरीदना चाहते हैं ऐसे कपड़े?

    आज दुनिया के कई शहरों में AI कैमरों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मॉल और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर फेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में कई लोग अपनी प्राइवेसी को लेकर चिंता जताते हैं. इसी वजह से कुछ लोग ऐसे कपड़ों को सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि अपनी निजता से जोड़कर भी देख रहे हैं.

    क्या सच में AI कैमरों को धोखा दे सकते हैं?

    इस सवाल का जवाब पूरी तरह ‘हां’ नहीं है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक अलग-अलग कंपनियों के कैमरे और AI सिस्टम अलग तरीके से काम करते हैं. इसलिए कोई भी कपड़ा हर जगह या हर सिस्टम को चकमा दे देगा, ऐसा कहना सही नहीं होगा. कई बार कैमरे फिर भी व्यक्ति की पहचान कर सकते हैं.

    क्या आगे बढ़ेगा यह ट्रेंड?

    फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर बड़े फैशन ब्रांड और मशहूर लोग ऐसे डिजाइन अपनाते हैं, तो यह ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो सकता है. वहीं, अगर भविष्य में ऐसे कपड़े निगरानी तकनीक को बड़े स्तर पर प्रभावित करने लगते हैं, तो सरकारें इनके इस्तेमाल को लेकर नए नियम भी बना सकती हैं.

  • शादी के दो साल बाद तक संबंध बनाने से कतराता रहा पति, स्पर्म जांच कराने ले गई पत्नी तो घर से पीट कर निकाला, सैंपल भी नहीं दिया,,?

    शादी के दो साल बाद तक संबंध बनाने से कतराता रहा पति, स्पर्म जांच कराने ले गई पत्नी तो घर से पीट कर निकाला, सैंपल भी नहीं दिया,,?

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    गोरखपुर में 30 वर्षीय महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई है. महिला का आरोप है कि शादी के बाद से उसके पति ने कभी भी उसके साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाए. जब भी उसने इसकी वजह पूछी, पति हर बार यह कहकर बात टाल देता था कि उसका दवा का कोर्स चल रहा है और कोर्स पूरा होने के बाद सब सामान्य हो जाएगा. महिला का कहना है कि इसी भरोसे में दो साल बीत गए, लेकिन पति का व्यवहार नहीं बदला.

    जांच कराने ले गई, पति ने सैंपल देने से किया इनकार
    शिकायत के मुताबिक, पति के व्यवहार पर शक होने के बाद महिला उसे एक निजी अस्पताल लेकर गई. वहां डॉक्टर ने जांच के लिए स्पर्म सैंपल देने को कहा, लेकिन पति ने सैंपल देने से साफ इनकार कर दिया. इसके बाद महिला ने दोबारा इलाज कराने की बात कही तो मामला और बिगड़ गया. महिला का आरोप है कि इसके बाद पति और ससुराल के अन्य लोगों ने मिलकर उससे 5 लाख लाने की मांग की. कहा गया कि इलाज तभी कराया जाएगा और अगर पैसे नहीं लाई तो घर में रहने की अनुमति भी नहीं मिलेगी.

    शादी में 15 लाख खर्च होने का भी दावा
    महिला ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी दो साल पहले नगर क्षेत्र निवासी युवक से हुई थी. शादी में उसके परिवार ने करीब 15 लाख रुपए खर्च किए थे. इसके बावजूद शादी के पहले दिन से ही उसे अनदेखा किया गया. आरोप है कि उसे जरूरत की चीजें तक नहीं दी जाती थीं और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था.

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  • धनबाद की दो बहनों ने गीता के श्लोक पाठ से बनाया विश्व रिकॉर्ड, Guinness World Records में नाम हुआ दर्ज..

    धनबाद की दो बहनों ने गीता के श्लोक पाठ से बनाया विश्व रिकॉर्ड, Guinness World Records में नाम हुआ दर्ज..

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    आज के दौर में बच्चों का काफी समय मोबाइल और सोशल मीडिया पर गुजर रहा है लेकिन धनबाद के धैय्या की रहने वाली दो बहनों ने अपनी प्रतिभा और संस्कारों के दम पर एक खास पहचान बनाई है. प्रांजल मित्तल और आन्या मित्तल ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का नियमित पाठ करते हुए विश्व स्तर पर अपनी पहचान कायम की है. दोनों बहनों की इस उपलब्धि को Guinness World Records में दर्ज किया गया है. इस खास सफलता के लिए उन्हें आधिकारिक प्रमाण पत्र के साथ गोल्ड मेडल भी प्रदान किया गया है. इस उपलब्धि के पीछे परिवार के संस्कार और उनकी मां प्रीति अग्रवाल की अहम भूमिका रही है.

    किया गया सम्मानित
    प्रांजल मित्तल और आन्या मित्तल ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों के नियमित पाठ को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया और इसी साधना ने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई. गीता के श्लोकों के पाठ में उनकी निरंतरता और लगन का परिणाम है कि दोनों बहनों की भागीदारी Guinness World Records में दर्ज हुई है. इस उपलब्धि के लिए उन्हें आधिकारिक प्रमाण पत्र और गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया है.

    सिर्फ 5 मिनट में पूरा किया पाठ
    प्रांजल और आन्या की इस सफलता में उनके परिवार के संस्कारों की बड़ी भूमिका रही है. खास तौर पर उनकी मां प्रीति अग्रवाल ने दोनों बेटियों को नियमित रूप से गीता पाठ के लिए प्रेरित किया और उनका हौसला बढ़ाया. आज दोनों बहनों की यह उपलब्धि सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि धनबाद के लिए भी गर्व का विषय है. आधुनिक दौर में जहां बच्चों का रुझान तेजी से दूसरी चीजों की ओर बढ़ रहा है, वहीं इन दोनों बहनों ने भारतीय संस्कृति, संस्कार और श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति अपनी आस्था को अपनी पहचान बनाया है. प्रांजल और आन्या की कहानी यह संदेश देती है कि अगर संस्कार, अनुशासन और निरंतर मेहनत साथ हों, तो छोटी-सी शुरुआत भी दुनिया के मंच तक पहुंच सकती है. प्रांजल मित्तल और प्रांजल मित्तल ने बताया कि उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय का पाठ करीब पांच मिनट में पूरा किया. गीता के श्लोकों का सही उच्चारण हो, इसके लिए उन्होंने लगातार अभ्यास किया. प्रांजल अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देती हैं. उनका कहना है कि मां बचपन से ही उन्हें गीता का पाठ सिखाती थीं. घर में गीता के श्लोकों की ऑडियो रिकॉर्डिंग चलती रहती थी और वह लगातार उन्हें सुनती थीं. इसी तरह सुनते-सुनते श्लोक याद होते चले गए.

    श्रीमद्भगवद्गीता सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं
    आन्या मित्तल ने कहा कि गीता का पाठ उनके लिए कोई नई चीज नहीं है. उन्होंने बचपन से ही अपनी मां से गीता के श्लोक सीखना शुरू कर दिया था. मां को देखकर उनमें भी गीता पढ़ने और उसके श्लोकों का सही उच्चारण करने की रुचि पैदा हुई.आज यही अभ्यास उनकी पहचान बन चुका है. प्रीति अग्रवाल का कहना है कि श्रीमद्भगवद्गीता में 700 श्लोक हैं और यह सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की सीख भी देती है. उनका मानना है कि बच्चों को गीता से जोड़ने से उनमें अनुशासन, संस्कार और अपनी संस्कृति के प्रति समझ विकसित होती है.पिता सुनील अग्रवाल के कहते हैं कि प्रांजल और आन्या की उपलब्धि आज उन अभिभावकों के लिए भी एक उदाहरण है, जो अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना चाहते हैं. मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में इन दोनों बहनों ने गीता के श्लोकों को अपना साथी बनाया और अपनी मेहनत के दम पर विश्व स्तर पर पहचान बनाई. धैय्या की गलियों से शुरू हुई यह यात्रा अब Guinness World Records तक पहुंच चुकी है.

  • रिश्ते में खुद को कम समझना छोड़ें, सीखें अपनी वैल्यू कराना दोबारा नहीं टूटेगा दिल, रिलेशनशिप वाले जरूर पढ़ें..?

    रिश्ते में खुद को कम समझना छोड़ें, सीखें अपनी वैल्यू कराना दोबारा नहीं टूटेगा दिल, रिलेशनशिप वाले जरूर पढ़ें..?

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    कुछ लोग बार-बार लोगों को माफ कर देते हैं, जो सबसे बड़ा कारण होता अपनी वैल्यू कम करवाने का. कई बार ऐसा भी होता है कि लोग आपकी माफी की इज्जत करते हैं, लेकिन कई बार ऐसा देखा गया है कि कुछ लोग इसे अपना हक समझकर आपको बार-बार परेशान करते हैं. वहीं बार-बार दिल टूटना सिर्फ रिश्ते को कमजोर नहीं करता, बल्कि इंसान का आत्मविश्वास और भरोसा भी कमजोर कर देता है. अगर आप चाहते हैं कि कोई आपको हल्के में न ले और आपकी भावनाओं से खिलवाड़ भी न करे, तो सबसे पहले आपको खुद की अहमियत समझनी होगी. रिश्ते तभी मजबूत रहते हैं, जब सामने वाला आपकी इज्जत करे और आप अपनी सीमाएं तय करना जानते हों.


    किसी भी रिश्ते में इतना भी मत खो जाइए कि सामने वाले को लगे आप उसके बिना नहीं रह सकते. अपनी भावना, समय और निजी जिंदगी की एक सीमा तय करें. जब लोग समझते हैं कि आप खुद की कद्र करते हैं, तो वे भी आपको हल्के में नहीं लेते.


    किसी दूसरे या तीसरे इंसान में भी अपनी खुशी ढूंढना बंद कर दें. जब दिल टूटता है तो दिल किसी और से वेलिडेशन चाहता है, ऐसे में आप फिर से गलत इंसान को चुन सकते हैं. जिससे बाहर के लोग ऐसे मौके का फायदा उठाते हैं. पहले खुद को वक्त दें. खुद को कभी भी किसी एक इंसान पर निर्भर मत होने दीजिए. जब आपकी दुनिया सिर्फ एक रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमने लगती है, तब दिल टूटने का असर सबसे ज्यादा होता है. अपनी फैमिली, दोस्तों, काम और खुद के साथ भी उतना ही जुड़ाव बनाए रखें.


    अगर किसी ने आपका भरोसा तोड़ा है, तो बार-बार उसे समझाने या मनाने की बजाय खुद को समय दें. कम से कम 30 दिनों तक उससे कोई संपर्क न रखें. फोन, मैसेज और सोशल मीडिया से दूरी बनाएं. इससे आपका मन भी शांत होगा और सामने वाले को आपकी अहमियत का एहसास भी होगा.

    दर्द को दबाएं नहीं, बाहर आने दें
    दिल टूटने के बाद मजबूत बनने का मतलब यह नहीं कि आप रोएं ही नहीं. अगर रोना आता है तो रोइए, गुस्सा है तो उसे स्वस्थ तरीके से बाहर निकालिए. भावनाओं को दबाने से दर्द समय के साथ बढ़ता है, जबकि उन्हें स्वीकार करना आगे बढ़ने की पहली सीढ़ी होती है.

    खुद पर समय और मेहनत लगाइए
    ब्रेकअप या रिश्ते की तकलीफ को अपनी जिंदगी का अंत मत मानिए. अपना फोकस करियर, पढ़ाई, फिटनेस और नई स्किल सीखने पर लगाइए. जिम जाएं, किताबें पढ़ें, यात्रा करें या कोई नया शौक अपनाएं. जब आप खुद को बेहतर बनाने में जुटते हैं, तो आपका आत्मविश्वास अपने आप लौट आता है.

    अपनी कीमत पहचानिए
    याद रखिए, आपकी पहचान किसी रिश्ते से नहीं, बल्कि आपके व्यक्तित्व से बनती है. अगर कोई आपको बार-बार नजरअंदाज करता है, आपकी भावनाओं की कद्र नहीं करता या सिर्फ जरूरत पड़ने पर याद करता है, तो ऐसे लोगों से दूरी बनाना ही बेहतर है. जो इंसान आपकी इज्जत नहीं कर सकता, उसे अपनी जिंदगी में जगह देने की जरूरत नहीं है.

    मजबूत बनिए, बदला लेना नहीं है
    किसी को उसकी औकात दिखाने का सबसे अच्छा तरीका लड़ाई या बदला नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाना है. जब आप खुद को महत्व देना शुरू कर देते हैं, तब वही लोग आपकी अहमियत समझने लगते हैं जिन्होंने कभी आपको हल्के में लिया था. सबसे बड़ा जवाब आपकी चुप्पी, सफलता, आत्मसम्मान और सुकून भरी जिंदगी होती है. एक बार ये ट्राय करें, आप खुश रहना सिख जाएंगे और खुद को जिम्मेदार मानना बंद कर देंगे. 

  • पहले असली सोना गिरवी रखकर जीता भरोसा, फिर नकली गहनों के बदले ले गए कैश और ज्वैलरी… ज्वैलर को ऐसे लगाया 8 लाख का चूना..

    पहले असली सोना गिरवी रखकर जीता भरोसा, फिर नकली गहनों के बदले ले गए कैश और ज्वैलरी… ज्वैलर को ऐसे लगाया 8 लाख का चूना..

    उत्तराखंड के पौड़ी जिले में पुलिस ने नकली सोने के जरिए ज्वैलर्स से ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने राजस्थान के अलवर निवासी तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 6 लाख रुपए नकद और 4 सोने की चेन बरामद की हैं. मामले में एक अन्य आरोपी अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है.

    कोटद्वार के जौनपुर निवासी ज्वैलर विभाष अग्रवाल ने को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने बताया कि आरोपी रघुवीर पहले कई बार असली सोने की अंगूठी गिरवी रखकर पैसे लेता और समय पर ब्याज सहित लौटाकर अंगूठी छुड़ा लेता था. इसी तरह कई लेन-देन के बाद उसने ज्वैलर का भरोसा जीत लिया.

    बेटी की शादी के लिए मांगे पैसे
    इसके बाद रघुवीर अपने एक साथी के साथ दुकान पहुंचा और बेटी की शादी के लिए पैसों की जरूरत बताई. उसने कुछ सोने के पेंडल देकर बदले में करीब 8 लाख रुपए नकद और तैयार सोने के आभूषण ले लिए. बाद में जांच कराने पर पता चला कि गिरवी रखे गए गहने नकली थे. आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उसका मोबाइल बंद मिला. इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की.

    170 CCTV फुटेज से मिला सुराग
    एसएसपी सर्वेश पंवार के निर्देश पर गठित पुलिस टीम ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे करीब 170 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. जांच में पता चला कि आरोपी बस से कोटद्वार आए थे और वारदात के बाद नजीबाबाद चले गए. सर्विलांस और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने रेलवे स्टेशन कोटद्वार से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

    पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पहले असली सोने के गहने गिरवी रखकर ज्वैलर्स का भरोसा जीतते थे. 5-6 बार सफल लेन-देन के बाद वे सोने की परत चढ़े नकली गहने गिरवी रखकर उनके बदले असली ज्वैलरी और नकदी लेकर फरार हो जाते थे. पुलिस के मुताबिक, आरोपी एक अन्य ज्वैलर को भी इसी तरह निशाना बनाने की तैयारी में थे, लेकिन उससे पहले ही गिरफ्तार कर लिए गए. फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की तलाश में जुटी है.

  • भूतिया माने जाने वाले घर खरीदने के लिए लग रही है लोगों की लाइन, जापान का नया ट्रेंड जानकर रह जाएंगे हैरान..

    भूतिया माने जाने वाले घर खरीदने के लिए लग रही है लोगों की लाइन, जापान का नया ट्रेंड जानकर रह जाएंगे हैरान..

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    क्या आप ऐसे घर में रहने की हिम्मत करेंगे, जहां कभी हत्या, आत्महत्या या किसी की रहस्यमयी मौत हुई हो? ज्यादातर लोगों का जवाब ‘नहीं’ होगा. लेकिन जापान में अब हजारों लोग ऐसे घरों को खुद खरीद रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि इसकी वजह कोई रोमांच नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई और महंगे घर हैं. तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर लोग ऐसा कर क्यों रहे हैं.

    बता दें कि, जापान में ऐसे घरों को जिको बुकेन कहा जाता है. ये वे प्रॉपर्टी होती हैं जहां कभी हत्या, आत्महत्या या किसी व्यक्ति की अकेले मौत हुई हो. लंबे समय तक जापानी समाज में इन घरों को अशुभ और डरावना माना जाता था. लोग इन्हें खरीदने या किराए पर लेने से बचते थे. लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और इन घरों की मांग तेजी से बढ़ रही है.

    महंगाई ने बदली लोगों की सोच
    जापान में रहने का खर्च लगातार बढ़ रहा है. खासकर टोक्यो जैसे बड़े शहरों में घर खरीदना आम लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में जिको बुकेन प्रॉपर्टी बाजार कीमत से करीब 20 से 50 प्रतिशत तक सस्ती मिल जाती हैं. यही वजह है कि युवा, पहली बार घर खरीदने वाले लोग और निवेशक इन घरों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. अब लोग अंधविश्वास से ज्यादा अपनी आर्थिक जरूरतों को महत्व दे रहे हैं.

    इस बदलते ट्रेंड को लोकप्रिय बनाने में जापानी कॉमेडियन तानीशी मात्सुबारा का भी बड़ा योगदान माना जाता है. वह पिछले कई वर्षों से जानबूझकर ऐसी प्रॉपर्टी में रह रहे हैं जहां पहले कोई दर्दनाक घटना हो चुकी थी. उन्होंने इसे अपने करियर का हिस्सा बना लिया है और लोगों के बीच यह संदेश देने की कोशिश की है कि हर ऐसी जगह डरावनी नहीं होती.

    बढ़ती बुजुर्ग आबादी भी बनी वजह
    जापान की बदलती आबादी भी इस ट्रेंड की एक बड़ी वजह है. वहां बड़ी संख्या में बुजुर्ग अकेले रहते हैं. कई बार उनकी मौत का पता कई दिनों बाद चलता है. ऐसे मामलों की संख्या बढ़ने से जिको बुकेन प्रॉपर्टी की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. इससे बाजार में ऐसे घरों की उपलब्धता पहले से ज्यादा हो गई है.

    इन घरों की मांग बढ़ने के साथ जापान में एक नया कारोबार भी तेजी से बढ़ रहा है. कई कंपनियां ऐसे घरों की सफाई, मरम्मत और रिनोवेशन का काम करती हैं. कुछ कंपनियां बौद्ध भिक्षुओं से विशेष धार्मिक अनुष्ठान भी कराती हैं ताकि घर को लेकर लोगों का डर कम हो सके. वहीं कुछ रियल एस्टेट एजेंट थर्मल कैमरे और सेंसर की मदद से यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि घर में किसी तरह की असामान्य गतिविधि नहीं है.

    आर्थिक मजबूरी ने बदली परंपरा
    जापानी संस्कृति में आत्माओं और भूत-प्रेत से जुड़ी मान्यताएं काफी पुरानी हैं. इसके बावजूद बढ़ती महंगाई और महंगे घरों ने लोगों की प्राथमिकताएं बदल दी हैं. अब कई लोग ऐसे घरों को डर की नजर से नहीं, बल्कि कम कीमत में अच्छा घर खरीदने का मौका मान रहे हैं. यही वजह है कि कभी बदनाम मानी जाने वाली ये प्रॉपर्टी आज जापान के रियल एस्टेट बाजार का नया ट्रेंड बनती जा रही हैं.

  • लोगों से कहा पति घर छोड़कर चला गया, बच्चों को भेजा मौसी के घर, और फिर प्रेमी संग मिलकर की पति की हत्या, 11 महीने बाद खुला राज..

    लोगों से कहा पति घर छोड़कर चला गया, बच्चों को भेजा मौसी के घर, और फिर प्रेमी संग मिलकर की पति की हत्या, 11 महीने बाद खुला राज..

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    नवी मुंबई के ऐरोली स्थित यादव नगर में करीब 11 महीने पहले हुई एक सनसनीखेज हत्या का राबले एमआईडीसी पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि दोनों ने मिलकर पति की हत्या की, शव के टुकड़े किए और सबूत मिटाने के लिए उन्हें जंगल में अलग-अलग जगह फेंक दिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुनीता कुशवाहा (40) और दशरथ प्रजापति (30) के रूप में हुई है. स्थानीय अदालत ने दोनों को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

    प्रेम संबंध का विरोध बना हत्या की वजह
    पुलिस जांच के अनुसार, मृतक बलिराम सूर्यनाथ कुशवाहा (50) अपनी पत्नी सुनीता और राहुल के कथित प्रेम संबंध का विरोध करता था. इसी कारण दोनों ने उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची. वारदात से पहले की रात दंपति के दोनों बच्चों को उनकी मौसी के घर भेज दिया गया ताकि हत्या के समय वे घर में मौजूद न रहें.

    सोते समय गला घोंटा, फिर सिर धड़ से अलग किया
    जांच में सामने आया कि बलिराम की पहले सोते समय गला घोंटकर हत्या की गई. इसके बाद तेज धारदार हथियार से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया गया. पहचान छिपाने और सबूत मिटाने के इरादे से शव के तीन टुकड़े किए गए. आरोपियों ने शव के हिस्सों को अलग-अलग बोरियों और चादरों में लपेटा और राहुल के ऑटो रिक्शा से गावली देव पहाड़ी के जंगल में तीन अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया.

    लोगों से कहा- पति घर छोड़कर चला गया
    हत्या के बाद सुनीता अपने बच्चों को लेकर घंसोली चली गई और राहुल के साथ रहने लगी. पड़ोसियों और परिचितों को बताया गया कि बलिराम घर छोड़कर कहीं चला गया है. इस कहानी के चलते कई महीनों तक किसी को हत्या की भनक नहीं लगी.


  • पत्थर पर चढ़ाए गए प्रसाद को अपनी जीभ से चाटते हैं इस गांव के लोग…बारिश लाने की इस परंपरा के बारे में सुना है आपने?

    पत्थर पर चढ़ाए गए प्रसाद को अपनी जीभ से चाटते हैं इस गांव के लोग…बारिश लाने की इस परंपरा के बारे में सुना है आपने?

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    तेलंगाना में कमजोर मानसून और सूखे जैसे हालात के बीच गांव ने सदियों पुरानी परंपरा को फिर से जीवित किया है. महबूबाबाद जिले के गुंडमराजुपल्ली गांव के लोगों ने अच्छी बारिश की कामना के लिए करीब 20 साल बाद ‘वरदापाशम’ नाम की अनोखी धार्मिक रस्म निभाई. इस परंपरा में गांव के बच्चे, महिलाएं और पुरुष एक बड़े पत्थर पर चढ़ाए गए प्रसाद को अपनी जीभ से चाटते हैं. ग्रामीणों का मानना है कि ऐसा करने से वर्षा के देवता प्रसन्न होते हैं और अच्छी बारिश होती है.

    20 साल बाद दोबारा निभाई गई परंपरा
    महबूबाबाद जिले के चिन्नागुडूर मंडल के गुंडमराजुपल्ली गांव में यह परंपरा तब निभाई जाती है, जब लंबे समय तक बारिश नहीं होती. ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले करीब 20 सालों से इस रस्म की जरूरत नहीं पड़ी थी, क्योंकि हर साल पर्याप्त बारिश हो जाती थी. लेकिन इस बार मानसून कमजोर रहने और फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ने के बाद गांव वालों ने फिर से इस प्राचीन परंपरा का सहारा लिया.

    पहले देवी की पूजा, फिर पत्थर पर चढ़ाया प्रसाद
    इस अनोखी रस्म की शुरुआत गांव के तालाब के पास स्थित कट्टा मैसम्मा देवी की विशेष पूजा-अर्चना से हुई. इसके बाद गांव वालों ने चावल, गुड़ और दूध से एक मीठा प्रसाद तैयार किया. इस प्रसाद को एक बड़े पवित्र पत्थर पर फैलाया गया. फिर गांव के पुरुष, महिलाएं और बच्चे बिना हाथ लगाए केवल अपनी जीभ से उस प्रसाद को चाटते हैं. ग्रामीणों का मानना है कि यह प्रकृति, धरती माता और वर्षा के देवता भगवान वरुण के प्रति श्रद्धा और विनम्रता प्रकट करने का प्रतीक है.

    पीढ़ियों से चली आ रही है मान्यता
    गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है. इसे केवल तब किया जाता है, जब गांव में लंबे समय तक बारिश नहीं होती और सूखे जैसी स्थिति बन जाती है. इस बार गांव के कई युवाओं ने पहली बार इस अनोखी रस्म को अपनी आंखों से देखा. उनके लिए यह सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपने गांव की सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का भी अवसर बना.

    गांव में आज भी जीवित हैं पारंपरिक रीति-रिवाज
    ग्रामीणों ने बताया कि ‘वरदापाशम’ के अलावा गांव में ‘वनभोजनालु’ की भी परंपरा है. इसमें अलग-अलग समुदाय जंगल में सामूहिक भोज का आयोजन करते हैं. यह आयोजन सामाजिक एकता और पारंपरिक संस्कृति को मजबूत करने का माध्यम माना जाता है.

  • वजन घटाने से लेकर मसल्स बनाने तक… सोया चंक्स की ये 4 हाई-प्रोटीन रेसिपीज करेंगी आपकी डाइट को बेहतर..

    वजन घटाने से लेकर मसल्स बनाने तक… सोया चंक्स की ये 4 हाई-प्रोटीन रेसिपीज करेंगी आपकी डाइट को बेहतर..

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    आजकल फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर लोगों की जागरूकता तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि लोग अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने पर खास ध्यान दे रहे हैं. खासकर जिम जाने वाले, वर्कआउट करने वाले, वजन नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे लोग और शाकाहारी भोजन करने वाले लोग ऐसे विकल्प तलाशते हैं जो प्रोटीन से भरपूर होने के साथ स्वादिष्ट भी हों. ऐसे में सोया चंक्स एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. इसमें प्रोटीन के अलावा फाइबर, आयरन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. अच्छी बात यह है कि इसे कई तरह की स्वादिष्ट और हेल्दी रेसिपीज में आसानी से शामिल किया जा सकता है.

    सोया चंक्स सलाद
    अगर आप हल्का और पौष्टिक स्नैक चाहते हैं तो सोया चंक्स सलाद अच्छा विकल्प है. उबले हुए सोया चंक्स में खीरा, टमाटर, प्याज, गाजर, शिमला मिर्च और हरा धनिया मिलाएं. ऊपर से नींबू का रस, काली मिर्च और थोड़ा काला नमक डालें. यह सलाद प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है.

    सोया चंक्स पुलाव
    सोया चंक्स का पुलाव स्वाद और पोषण दोनों का बेहतरीन मेल है. सबसे पहले सोया चंक्स को गर्म पानी में भिगोकर अच्छी तरह निचोड़ लें. इसके बाद चावल, मटर, गाजर, बीन्स और हल्के मसालों के साथ पुलाव तैयार करें. यह लंच या डिनर के लिए हेल्दी विकल्प है.

    सोया चंक्स टिक्की
    शाम की हल्की भूख के लिए सोया चंक्स टिक्की बनाई जा सकती है. उबले हुए सोया चंक्स को बारीक काटकर उसमें उबला आलू, गाजर, हरा धनिया और हल्के मसाले मिलाएं. टिक्की बनाकर तवे पर कम तेल में सेंक लें. इसे हरी चटनी या दही के साथ परोस सकते हैं.

    सोया चंक्स भुर्जी
    अगर जल्दी बनने वाली हाई-प्रोटीन डिश चाहिए तो सोया चंक्स भुर्जी बढ़िया विकल्प है. भीगे हुए सोया चंक्स को बारीक काटकर प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च और मसालों के साथ भूनें. यह रोटी, पराठे या ब्रेड के साथ स्वादिष्ट लगती है.

    सोया चंक्स बनाते समय रखें ये बातें
    सोया चंक्स को इस्तेमाल करने से पहले 10 से 15 मिनट तक गर्म पानी में भिगोना और फिर अच्छी तरह निचोड़ना जरूरी है. इससे इसका स्वाद और बनावट बेहतर हो जाती है. इसे ज्यादा तेल और मसालों में पकाने से बचें ताकि इसकी पौष्टिकता बनी रहे. साथ ही इसमें ताजी सब्जियां मिलाने से पोषण और बढ़ जाता है. बेहतर स्वाद और अधिक पोषण के लिए सोया चंक्स की रेसिपी हमेशा ताजा बनाकर ही खाएं.

  • बारिश में कमरे में है उमस और सीलन की बदबू? AC का Cool नहीं, ये Mode करेगा मिनटों में कमाल..

    बारिश में कमरे में है उमस और सीलन की बदबू? AC का Cool नहीं, ये Mode करेगा मिनटों में कमाल..

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    मानसून में बारिश भले ही गर्मी से राहत दिलाती है, लेकिन इसके साथ हवा में नमी भी काफी बढ़ जाती है. यही वजह है कि घर के अंदर चिपचिपाहट, सीलन की बदबू और घुटन जैसा माहौल बनने लगता है. ऐसे में ज्यादातर लोग AC को Cool Mode पर चलाते हैं, लेकिन कई बार कमरा ठंडा होने के बावजूद उमस कम नहीं होती. अगर आप भी बारिश के मौसम में इस परेशानी से जूझ रहे हैं, तो AC का एक खास मोड आपके काफी काम आ सकता है. आइए जानते हैं कि मानसून में AC को किस मोड पर चलाना सबसे सही रहता है और इसके क्या फायदे हैं.


    बारिश के मौसम में AC का Dry Mode सबसे ज्यादा उपयोगी माना जाता है. इस मौसम में असली परेशानी तेज गर्मी नहीं, बल्कि हवा में मौजूद अतिरिक्त नमी होती है. यही नमी कमरे को चिपचिपा बना देती है और सीलन की बदबू भी बढ़ा देती है. Dry Mode हवा से अतिरिक्त नमी को कम करने का काम करता है. इससे कमरे का वातावरण ज्यादा आरामदायक महसूस होता है और घुटन भी कम हो जाती है. अगर बाहर लगातार बारिश हो रही है या घर में सीलन महसूस हो रही है, तो यह मोड काफी फायदेमंद साबित हो सकता है.


    Dry Mode को खासतौर पर ज्यादा नमी वाले मौसम के लिए बनाया गया है. इस मोड में AC का कंप्रेसर और फैन लगातार तेज गति से नहीं चलते. जरूरत के अनुसार वे बीच-बीच में ऑन और ऑफ होते रहते हैं. इससे कमरे की नमी धीरे-धीरे कम होती है. साथ ही हल्की ठंडक भी बनी रहती है. इस वजह से कमरा आरामदायक महसूस होता है और हवा भी ताजा लगती है.


    Dry Mode का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कमरे को जरूरत से ज्यादा ठंडा नहीं करता. Cool Mode की तुलना में इसमें तापमान संतुलित बना रहता है. इसलिए लंबे समय तक AC चलाने पर भी ज्यादा ठंड महसूस नहीं होती. इसके अलावा, क्योंकि इस मोड में कंप्रेसर लगातार नहीं चलता, इसलिए कई स्थितियों में बिजली की खपत भी Cool Mode की तुलना में कम हो सकती है. हालांकि यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि कमरे में नमी कितनी है और बाहर का मौसम कैसा है.


    अगर बाहर हल्की या लगातार बारिश हो रही है, कमरे में उमस महसूस हो रही है या सीलन की बदबू आ रही है, तो AC का Dry Mode इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प हो सकता है. वहीं, अगर मौसम बहुत गर्म और उमस भरा है, तो पहले कुछ देर Cool Mode चलाकर कमरे का तापमान कम करें और बाद में Dry Mode का इस्तेमाल करें. इससे कमरा ठंडा भी रहेगा और नमी भी कम होगी.