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  • 27 साल बाद खुला बचपन का खौफनाक सच! जिन्हें माता-पिता माना, वो निकले अपहरणकर्ता..​​​​

    27 साल बाद खुला बचपन का खौफनाक सच! जिन्हें माता-पिता माना, वो निकले अपहरणकर्ता..​​​​

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    मात्र तीन साल की उम्र में जुआना रामिरेज को मेक्सिको सिटी के विशाल बोस्के दे चापुल्टेपेक पार्क से दिनदहाड़े किडनैप कर लिया गया था. परिवार पार्क में घूम रहा था. माता-पिता ने क्षणभर के लिए हाथ छोड़ा और बच्ची गायब हो गई. किडनैपर्स ने उसे नया नाम रोसियो दिया और नया जन्मदिन बताकर अपने साथ रख लिया.

    27 लंबे सालों तक जुआना उन्हें अपनी असली मां-बाप समझती रही. फिर एक तस्वीर ने सब कुछ बदल दिया. घटना 1 अक्टूबर 1995 की है. लोरेना रामिरेज अपने पति, तीन बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ पार्क घूमने गई थी. चिड़ियाघर देखकर जब वे विदाई ले रहे थे तभी छोटी जुआना बीच से गायब हो गई. लोरेना ने बताया कि उन्होंने और पति ने क्षणभर के लिए हाथ छोड़ा था. जब मुड़े तो बच्ची वहां नहीं थी. उन्होंने तुरंत खोज शुरू की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई. लोरेना ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी थी. 24 साल तक वे बेटी को खोजती रहीं.

    बदल दी थी पहचान
    किडनैपर्स ने जुआना को टोलुका ले जाकर रखा. उन्होंने उसे बताया कि उसका जन्मदिन 1 अक्टूबर 1995 है यानी जिस दिन उसे उठाया गया. असली जन्मदिन 16 जून था. नया नाम रोसियो रखा गया. पड़ोसियों ने बाद में बच्ची को बताया कि ये लोग उसके जैविक माता-पिता नहीं हैं. जब उसने पूछा तो “मां” ने कहा कि उन्होंने उसे पार्क में अकेला घूमते पाया और गोद ले लिया. जुआना ने बताया कि उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता था. 17 साल की उम्र में वह घर छोड़कर भाग निकली और बाद में शादी कर ली. सालों बाद सोशल मीडिया और मिसिंग पर्सन पोस्टर की मदद से राज खुला. जुआना (रोसियो) ने अपनी बचपन की तस्वीर अपलोड की थी. लोरेना की दूसरी बेटी मारिया जोस ने वह फोटो देखी और समानता देखकर संपर्क साधा. डीएनए टेस्ट में 99.99 प्रतिशत मैच पाया गया. 2022 में मां-बेटी का भावुक पुनर्मिलन हुआ.

    मिल गई खोई बेटी
    लोरेना ने कहा, “मैंने तीन साल की बच्ची खोई और 30 साल की महिला को पाया. उसके जीवन के कई पड़ाव मुझसे छीन लिए गए.” जुआना ने मां को देखते ही कहा, “आप मेरी मां हैं.” दोनों ने गले लगाया. लोरेना ने बताया कि 27 साल की पीड़ा अकल्पनीय थी लेकिन भगवान ने फिर मिलने का मौका दिया. दोनों ने खोया समय पूरा करने का संकल्प लिया. जुआना अब शादीशुदा हैं और खुद मां बन चुकी हैं. इस मामले में किडनैपर्स की बाद में गिरफ्तारी भी हुई. मेक्सिको की अधिकारियों ने जोड़ी को गिरफ्तार किया. लंबे समय तक चले इस अपराध ने पूरे समाज को झकझोर दिया. यह कहानी बाल अपहरण के खतरे को रेखांकित करती है. दिनदहाड़े भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भी बच्चे असुरक्षित हो सकते हैं. माता-पिता को बच्चों पर निरंतर नजर रखनी चाहिए. पार्क, मेले या बाजार में हाथ कभी ना छोड़ें. मिसिंग चाइल्ड के मामलों में तुरंत रिपोर्ट दर्ज कराएं और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें.

  • नेपालियों की आंखों का आकार ऐसा क्यों होता है? जानें इस खास फीचर के पीछे की वैज्ञानिक वजह​​​​

    नेपालियों की आंखों का आकार ऐसा क्यों होता है? जानें इस खास फीचर के पीछे की वैज्ञानिक वजह​​​​

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    दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों की शारीरिक बनावट में फर्क साफ दिखता है. त्वचा का रंग, बालों की बनावट, नाक की शक्ल और आंखों का आकार—ये सब प्रकृति और पर्यावरण के लंबे असर का नतीजा होते हैं. इन्हीं में से एक खास फीचर है पूर्वी एशियाई लोगों की आंखें. कोरियाई, चीनी, जापानी, मंगोलियाई और नेपाली समुदायों में आंखों का आकार आम यूरोपीय या दक्षिण एशियाई लोगों से अलग दिखता है.

    इन्हें आम भाषा में “खींची हुई आंखें” या वैज्ञानिक भाषा में मोनीलिड और एपिकैंथिक फोल्ड कहा जाता है. कई लोग इस फर्क को सिर्फ सुंदरता या फैशन से जोड़कर देखते हैं. कुछ सेलिब्रिटी डबल आईलिड सर्जरी करवाकर अपनी आंखों का आकार बदलवा लेते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि प्रकृति ने इन इलाकों में रहने वाले लोगों की आंखें ऐसी क्यों बनाईं?

    प्रकृति की समझदारी
    इसका जवाब पर्यावरणीय अनुकूलन यानी एवोल्यूशनरी एडाप्टेशन में छिपा है. ठंड, तेज हवा, बर्फ की चमक और कठोर जलवायु से बचाव के लिए प्रकृति ने यह अनोखा फीचर विकसित किया है. मोनीलिड आंखों में ऊपरी पलक पर एक अतिरिक्त त्वचा की परत होती है जो आंख के भीतरी कोने को ढक लेती है. इसे एपिकैंथिक फोल्ड कहते हैं. इससे आंखें थोड़ी संकरी और खींची हुई दिखती हैं. यह फीचर सिर्फ पूर्वी एशिया तक सीमित नहीं है. कुछ मूल अमेरिकी जनजातियों, दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ समूहों और मध्य एशिया के लोगों में भी यह पाया जाता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह फीचर हजारों साल पहले विकसित हुआ जब मनुष्य कठोर ठंडे इलाकों में रहने लगे. सबसे प्रचलित सिद्धांत यह है कि एपिकैंथिक फोल्ड ठंडी और हवा वाली जलवायु में फायदेमंद साबित हुआ. साइबेरिया, मंगोलिया, उत्तरी चीन और कोरिया जैसे इलाकों में सर्दियां बहुत कठोर होती हैं. तेज ठंडी हवा आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है. बर्फ और बर्फीली धरती से परावर्तित होने वाली तेज रोशनी यानी स्नो ग्लेयर से आंखें प्रभावित हो सकती हैं. इस फोल्ड की वजह से आंख का खुला हिस्सा कम हो जाता है. इससे ठंडी हवा का सीधा संपर्क कम होता है और तेज रोशनी से भी बचाव मिलता है. आंखों के आसपास की वसा की परत भी अतिरिक्त सुरक्षा देती है.

    रिसर्चर्स भी इम्प्रेस
    कई शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अनुकूलन अंतिम हिम युग के दौरान और उसके बाद मजबूत हुआ है. जब मनुष्य समूह उत्तर की ओर बढ़े और ठंडे मैदानों में बसने लगे तो जिन लोगों में यह फीचर था उन्हें जीवित रहने में फायदा मिला. धीरे-धीरे यह जेनेटिक रूप से उन आबादियों में आम हो गया. नेपाल के ऊंचाई वाले इलाकों में भी ठंड और तेज हवा आम है. इसलिए वहां के कई समुदायों में भी इसी तरह की आंखों की बनावट दिखती है. यह समझना जरूरी है कि आंखों का यह आकार किसी भी तरह की कमी या कमजोरी नहीं है. यह शुद्ध रूप से पर्यावरण के अनुकूल ढलने का नतीजा है. जैसे अफ्रीकी क्षेत्रों में गहरी त्वचा सूरज की तेज किरणों से बचाव करती है, वैसे ही पूर्वी एशियाई आंखें ठंड और चमक से बचाव करती हैं. प्रकृति ने हर इलाके की जरूरत के हिसाब से फीचर दिए हैं.

     
  • राखी भी, हरियाली भी! मथुरा जेल की महिला कैदियों की अनूठी पहल, राखी के बाद बन जाएगी पौधा​​​​

    राखी भी, हरियाली भी! मथुरा जेल की महिला कैदियों की अनूठी पहल, राखी के बाद बन जाएगी पौधा​​​​

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    मथुरा जिला कारागार में बंदियों के सुधार और उनके पुनर्वास के लिए अलग-अलग तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इसी कड़ी में आगामी रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए महिला बंदियों को इको-फ्रेंडली राखियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. एक सामाजिक संस्था की ओर से महिला बंदियों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

    20 महिला बंदियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
    इस कार्यक्रम में जिला कारागार की 20 महिला बंदियां शामिल हैं. इन्हें इको-फ्रेंडली राखियां तैयार करना सिखाया जा रहा है. राखियां बनाने को लेकर महिला बंदियों में भी काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. इस बार राखियां तैयार करने में एक खास तरह का प्रयोग भी किया जा रहा है. इनमें फूलों और सब्जियों के बीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे राखी रक्षाबंधन के बाद भी उपयोगी बनी रहे.

    राखी से तैयार हो सकेगा पौधा
    इन इको-फ्रेंडली राखियों की खासियत यह है कि त्योहार के बाद इन्हें फेंकने की जरूरत नहीं होगी. राखी में इस्तेमाल किए गए फूल और सब्जियों के बीजों को घर के गमले या गार्डन में लगा कर नया पौधा उगाया जा सकता है. ऐसा करने पर समय के साथ इन बीजों से फूल या सब्जियों का पौधा तैयार हो सकेगा. इस तरह राखी का इस्तेमाल होने के बाद भी उससे पौधा तैयार करने की कोशिश की जा रही है.

    रोज बन रही हैं 200 राखियां
    जिला कारागार अधीक्षक अंशुमान गर्ग के मुताबिक, इस समय महिला बंदियों को इको-फ्रेंडली राखियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि 20 महिला बंदियां इस काम को सीख रही. फिलहाल प्रतिदिन करीब 200 राखियों का निर्माण किया जा रहा है. इस बार राखियों को पहले से अलग बनाने के लिए नया प्रयोग भी किया गया. इसमें मोतियों की मदद से आकर्षक राखियां तैयार की जा रही हैं.

    जेल के बाहर लगेगा राखियों का स्टॉल
    महिला बंदियों द्वारा तैयार की जा रही राखियों को आम लोगों तक पहुंचाने की भी व्यवस्था बनाई गई है. इन राखियों की बिक्री के लिए जिला कारागार के गेट के बाहर स्टॉल लगाया जाएगा. जिला कारागार अधीक्षक अंशुमान गर्ग ने बताया कि राखियों का स्टॉल मुलाकात घर के बाहर लगाया जाएगा. यहां आम जनमानस इन राखियों को खरीद सकेगा. राखियां लागत मूल्य पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी.

  • घर में चोरी और खुद बेहोश होने का किया नाटक, प्रेमी संग भागने की थी प्लानिंग! पुलिस ने ऐसे पकड़ा झूठ..​​​​

    घर में चोरी और खुद बेहोश होने का किया नाटक, प्रेमी संग भागने की थी प्लानिंग! पुलिस ने ऐसे पकड़ा झूठ..​​​​

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    उत्तर प्रदेश से रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ भागने के लिए अपने ही घर में लाखों रुपये के गहने और नकदी चोरी कराने की साजिश रच डाली. इतना ही नहीं, घटना को असली चोरी दिखाने के लिए उसने बेहोश होने का नाटक भी किया. लेकिन पुलिस की बारीकी से की गई जांच में पूरी सच्चाई सामने आ गई. पुलिस ने महिला और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर चोरी का सामान भी बरामद कर लिया है.

    पति ने दर्ज कराई थी चोरी की शिकायत
    यह मामला गोंडा जिले के खरगूपुर थाना क्षेत्र के विशुनापुर बाजार का है. पीड़ित लवकुश ने पुलिस को सूचना दी कि रात में अज्ञात चोर उनके घर में घुस आए. चोर सोने-चांदी के आभूषण, नकदी, मोबाइल और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी.

    पूछताछ में पत्नी पर हुआ शक
    जांच के दौरान पुलिस ने घर के सभी लोगों से अलग-अलग पूछताछ की. इसी दौरान लवकुश की पत्नी पूनम कसौधन की गतिविधियां संदिग्ध लगीं. महिला पुलिसकर्मियों ने जब पूनम से अलग से पूछताछ की तो वह ज्यादा देर तक अपनी कहानी पर कायम नहीं रह सकी और पूरी साजिश कबूल कर ली.

    मौसेरे भाई से था प्रेम संबंध
    पुलिस जांच में पता चला कि पूनम का अपनी मौसी के बेटे विकास कसौधन से प्रेम संबंध था. दोनों साथ भागकर नई जिंदगी शुरू करना चाहते थे. इसके लिए उन्हें पैसों की जरूरत थी. इसी वजह से दोनों ने अपने ही घर में चोरी की योजना बनाई. योजना के मुताबिक, रात में पूनम ने विकास को घर बुलाया. दोनों ने मिलकर संदूक और बक्सों में रखे सोने-चांदी के आभूषण, नकदी और मोबाइल निकाल लिए. इसके बाद कमरे का सामान बिखेर दिया ताकि मामला असली चोरी जैसा लगे. चोरी का पूरा सामान विकास अपने साथ लेकर चला गया.

    बेहोशी का ड्रामा भी नहीं आया काम
    चोरी के बाद पूनम ने खुद को पीड़ित दिखाने के लिए बेहोश होने का नाटक किया. वह घर के बेड के नीचे जाकर लेट गई. अगली सुबह उसने परिवार वालों को बताया कि कुछ अज्ञात बदमाश घर में घुसे, उसके साथ मारपीट की और चोरी करके फरार हो गए. हालांकि पुलिस को उसकी कहानी पर शुरू से ही शक था. पूछताछ और घटनास्थल की जांच में कई ऐसे सुराग मिले, जिन्होंने पूरे मामले का खुलासा कर दिया.

    50 हजार नकद और गहने बरामद
    सीओ सिटी योगेश्वर सिंह ने बताया कि चोरी का पूरा सामान विकास कसौधन के घर से बरामद कर लिया गया है. पुलिस ने दोनों आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण और 50 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं. पुलिस ने पूनम कसौधन और विकास कसौधन को गिरफ्तार कर लिया है. दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर न्यायालय भेजा जा रहा है.

  • गणित के सवाल का अनोखा जवाब! छात्र की कॉपी में लिखा ये पढ़कर लोग बोले- ‘भाई ने दिल की बात कह दी’​​​​

    गणित के सवाल का अनोखा जवाब! छात्र की कॉपी में लिखा ये पढ़कर लोग बोले- ‘भाई ने दिल की बात कह दी’​​​​

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    सोशल मीडिया पर आए दिन ऐसी तस्वीरें वायरल होती रहती हैं, जो पढ़ाई से जुड़ी होने के बावजूद लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला देती हैं. इन दिनों एक कॉपी का पन्ना इंटरनेट पर खूब चर्चा में है. इसमें एक छात्र ने गणित की परिभाषा पूछे जाने पर ऐसा जवाब लिखा कि पढ़ने वाला अपनी हंसी रोक नहीं पा रहा है.

    तस्वीर में परीक्षा का एक सवाल दिखाई दे रहा है. सवाल है- Explain the meaning of Mathematics in your own words. यानी अपने शब्दों में गणित का अर्थ समझाइए. इसके जवाब में छात्र ने लिखा कि गणित ही ऐसा विषय है जिसे वह अब तक समझ नहीं पाया है. इसके बाद छात्र ने गुणा के नियम को लेकर एक मजेदार सवाल खड़ा कर दिया.

    छात्र का तर्क है कि अगर 1,000 लोगों को शून्य से गुणा किया जाए और जवाब शून्य लोग आएं, तो आखिर वे 1,000 लोग गए कहां? यही मासूम और मजाकिया सवाल इस तस्वीर को खास बना रहा है. जवाब के नीचे कॉपी पर शिक्षक की तरफ से 0/20 भी लिखा नजर आ रहा है, जिससे तस्वीर का हास्य और बढ़ जाता है.

    गणित के सवाल पर छात्र की मजेदार सोच

    असल में गणित के नियम के अनुसार किसी भी संख्या को शून्य से गुणा करने पर परिणाम शून्य ही होता है. उदाहरण के लिए 1,000 × 0 = 0. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि 1,000 लोग कहीं गायब हो गए. यह केवल गणितीय गुणा का नियम है, जिसमें शून्य से गुणा करने पर परिणाम शून्य आता है.

    लेकिन छात्र ने इसी नियम को आम जिंदगी की स्थिति से जोड़कर ऐसा सवाल बना दिया, जिसे देखकर लोग हंसने लगे. यही वजह है कि तस्वीर को सोशल मीडिया पर मजेदार और क्रिएटिव जवाब के तौर पर शेयर किया जा रहा है.

    शिक्षक ने दिए कितने नंबर?

    तस्वीर में छात्र के जवाब के नीचे लाल पेन से 0/20 अंक दिखाई दे रहे हैं. हालांकि, तस्वीर किस परीक्षा, स्कूल या छात्र से जुड़ी है, इसकी स्वतंत्र जानकारी उपलब्ध नहीं है. इसलिए इसे वास्तविक परीक्षा की घटना मानने के बजाय वायरल सोशल मीडिया पोस्ट के रूप में देखना बेहतर है. यह खबर भी वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर है. न्यूज18 इस वीडियो में किए गए दावों और घटना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है.

    सोशल मीडिया यूजर्स भी ऐसे जवाबों को पढ़कर अक्सर कहते हैं कि पढ़ाई में कभी-कभी बच्चों की मासूम सोच ही सबसे ज्यादा मनोरंजन करती है. फिलहाल यह तस्वीर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. गणित का एक साधारण-सा नियम और उसे लेकर छात्र का अनोखा सवाल इंटरनेट पर लोगों को खूब गुदगुदा रहा है.

  • हिमालय का रहस्यमयी ‘डायमंड’, ट्रेकिंग करने वालों को दिख जाए तो सौभाग्य..​​​​

    हिमालय का रहस्यमयी ‘डायमंड’, ट्रेकिंग करने वालों को दिख जाए तो सौभाग्य..​​​​

    हिमालयन डायमंड ट्रेकर्स को दिखना सौभाग्य की बात है (AI कॉन्सेप्ट इमेज)

    हिमालय की बर्फीली और सुनसान चोटियों पर एक बहुत ही अनोखा और रहस्यमयी ‘डायमंड’ उगता है. ये इतना बड़ा होता है कि इंसान से भी ऊंचा निकल जाता है. सुनने में ये भले ही किसी पौराणिक कहानी जैसा लगे, लेकिन कुदरत का ये करिश्मा कोई पत्थर नहीं, बल्कि एक बेहद कीमती फूल है. इसे ‘हिमालयन डायमंड’ कहा जाता है. समुद्र तल से करीब 13,000 फीट की ऊंचाई पर उगने वाला यह फूल रोज-रोज नजर नहीं आता. ये जमा देने वाली ठंड को 7 से 15 साल तक सहता है और अपनी पूरी जिंदगी में सिर्फ एक ही बार खिलता है. पहाड़ों में ट्रेकिंग करने वालों के लिए इस खिलते हुए फूल को देखना किसी बहुत बड़े सौभाग्य से कम नहीं होता.

    ‘केनजो’ या ‘पदमचाल’ कैसे खिलता है?

    स्थानीय लोग इस अनोखे पौधे को ‘केनजो’ या ‘पदमचाल’ कहते हैं. यह आम रंग-बिरंगे जंगली फूलों जैसा बिल्कुल नहीं दिखता. पहाड़ों के पथरीले ढलानों और ग्लेशियरों के पास उगने वाला ये पौधा बेहद सब्र वाला है.

    ये रातों-रात या हर मौसम में नहीं उगता. इसे खिलने में 7 से 15 साल का लंबा वक्त लगता है. इतने सालों तक ये पौधा बर्फीली चट्टानों में खुद को बचाकर रखता है, फिर अपनी जिंदगी में केवल एक बार खिलता है. जैसे ही फूल खिलता है, ये अपने बीज हवा में बिखेर देता है और फिर इसका जीवन खत्म हो जाता है.

    इसे क्यों कहते हैं ‘हिमालयन डायमंड’?

    • गजब की ताकत: हीरा दुनिया की सबसे सख्त चीज मानी जाती है. ठीक वैसे ही ये फूल धरती के सबसे कठिन मौसम में मुस्कुराता है. इतनी ऊंचाई पर जहां ऑक्सीजन 40 फीसदी तक कम होती है और हाड़-कांपने वाली हवाएं चलती हैं, वहां यह सीना ताने खड़ा रहता है.
    • कुदरती शील्ड: इस फूल के चारों तरफ पारदर्शी पत्तियों की एक परत होती है. ये धूप की गर्मी को अंदर सोख लेती है और बर्फीली हवाओं को रोकती है. बर्फ के बीच जब धूप इस पर पड़ती है तो ये बिल्कुल हीरे की तरह जगमगाता है.

    अगर आप इस अजूबे को अपनी आंखों से देखना चाहते हैं तो जुलाई के अंत से सितंबर की शुरुआत का समय सबसे अच्छा माना जाता है. मानसून में जब पहाड़ियों पर हल्की बारिश और धुंध होती है, तब ये पौधे खिलते हैं.

    कहां-कहा पाया जाता है ये रहस्यमयी फूल?

    1. वैली ऑफ फ्लावर्स (उत्तराखंड): यूनेस्को की इस विश्व धरोहर में जुलाई और अगस्त के महीने में यह दुर्लभ पौधा देखा जा सकता है.
    2. हेमकुंड साहिब और गंगोत्री: हेमकुंड के कठिन रास्तों और गोमुख-तपोवन की घाटियों में जहां का मौसम बेहद सख्त होता है, वहां ये केनजो उगता है.
    3. नॉर्थ सिक्किम: लाचेन, लाचुंग और जीरो पॉइंट जैसे बेहद ऊंचे इलाकों में भी इसके खिलने की खबरें आती हैं.
    4. भूटान का हिमालय: हाल ही में माउंट जोमोलहारी के बेस कैंप (4,300 मीटर) पर वैज्ञानिकों ने इसकी शानदार तस्वीरें ली हैं.

    आयुर्वेद का अनोखा खजाना

    हिमालय के वैद्यों और स्थानीय लोगों के लिए ये पौधा किसी वरदान से कम नहीं है. सदियों से इसका इस्तेमाल जड़ी-बूटी के रूप में होता आ रहा है.

    • हड्डियों के फ्रैक्चर और गहरे जख्मों को भरने में
    • सिरदर्द और शरीर की सूजन कम करने में
    • पेट दर्द और बदहजमी से राहत दिलाने में
    • खतरे में है ‘हिमालयन डायमंड’

    ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ते तापमान की वजह से ऊंचे पहाड़ों का बर्फीला माहौल बदल रहा है. इस वजह से ‘हिमालयन डायमंड’ के उगने की जगहें लगातार कम हो रही हैं. इसलिए पर्यावरण विशेषज्ञ पर्यटकों से अपील करते हैं कि अगर वो इस दुर्लभ फूल को देखें तो इसे सिर्फ दूर से निहारें. इसे तोड़ने या नुकसान पहुंचाने की भूल बिल्कुल न करें, क्योंकि इसे उगने में कई साल लगते हैं.

  • सुहागरात के बाद दुल्हन ने दिया बड़ा झटका..जिसे जिंदगी भर का हमसफर समझा, वो एक रात बाद ही भाग गई! जेवर-नकदी लेकर दुल्हन फरार.​​​​

    सुहागरात के बाद दुल्हन ने दिया बड़ा झटका..जिसे जिंदगी भर का हमसफर समझा, वो एक रात बाद ही भाग गई! जेवर-नकदी लेकर दुल्हन फरार.​​​​

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    उत्तर प्रदेश के हापुड़ से शादी के बाद दुल्हन के कथित तौर पर घर से जेवर और नकदी लेकर फरार होने का मामला सामने आया है. सिंभावली थाना क्षेत्र के लिसड़ी गांव में एक युवक ने पुलिस से शिकायत कर आरोप लगाया है कि शादी के अगले ही दिन उसकी नवविवाहिता पत्नी घर से लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवर और नकदी लेकर चली गई. सुबह जब परिवार के लोगों की नींद खुली तो दुल्हन घर में नहीं थी. काफी तलाश करने के बाद भी उसका पता नहीं चला.

    मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. पुलिस दुल्हन की तलाश के साथ शादी कराने वाले लोगों और पूरे घटनाक्रम की भी पड़ताल कर रही है. इस बीच एक CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें महिला जाती हुई दिखाई दे रही है.

    मंदिर में हुई थी शादी
    पीड़ित युवक विनोद के मुताबिक, उसकी शादी रामपुर स्थित एक मंदिर में हुई थी. उसका कहना है कि मंदिर के पंडित के कहने पर उसने युवती से शादी की थी. पंडित से उसकी मुलाकात करीब दो-तीन महीने पहले हुई थी. शादी के बाद वह अपनी पत्नी को लेकर हापुड़ के लिसड़ी गांव स्थित अपने घर पहुंचा. शादी के बाद उसकी पत्नी घर में सिर्फ एक रात और एक दिन रही. इसके बाद रात में जब परिवार के लोग सो रहे थे, वह घर से निकल गई.

    जेवर और नकदी लेकर जाने का आरोप
    विनोद ने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी शादी के दौरान पहने हुए सोने-चांदी के जेवर अपने साथ ले गई. इसके अलावा घर में मौजूद नकदी भी लेकर जाने का आरोप है. सुबह परिवार के लोगों को उसके घर से गायब होने की जानकारी हुई. इसके बाद आसपास और रिश्तेदारी में उसकी तलाश की गई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली. पीड़ित के अनुसार, शादी के सिलसिले में युवती की मां को एक लाख रुपये नकद भी दिए गए थे.

    CCTV फुटेज में जाती दिखी महिला
    घटना के बाद सामने आए CCTV फुटेज में एक महिला तेज कदमों से जाती हुई नजर आ रही है. पुलिस इस फुटेज की भी जांच कर रही है. हालांकि, फुटेज में दिखाई दे रही महिला वही नवविवाहिता है या नहीं, इसकी पुलिस की ओर से अभी पुष्टि नहीं की गई है. पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है. पुलिस शादी से जुड़े लोगों, मंदिर में मौजूद लोगों और दुल्हन के बारे में मिली जानकारी जुटा रही है.

  • नहीं हो रहे जीवन में सफल? तो इन 5 बातों की बांध लें गांठ… कोई रोड़ा नहीं रोक पाएगा..?​​​​

    नहीं हो रहे जीवन में सफल? तो इन 5 बातों की बांध लें गांठ… कोई रोड़ा नहीं रोक पाएगा..?​​​​

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    क्या आप भी सोचते हैं कि आप जिंदगी में सफल क्यों नहीं हो रहे? दरअसल आपकी जिंदगी से जुड़ी कुछ ऐसी सच्चाइयां भी है, जिन्हें आप मानते नहीं क्योंकि वो कड़वी होती है. लेकिन अक्सर यही कड़वे सच हमें मजबूत बनाते हैं और आगे बढ़ने की ताकत देते हैं. अगर आप भी अपनी सोच और जीवन में अच्छा बदलाव लाना चाहते हैं, तो कुछ बातों को समझना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.

    जिंदगी की जिम्मेदारी केवल आपकी

    कई लोग सही मौके या किसी की मदद का इंतजार करते रहते हैं. लेकिन सच यह है कि आपकी जिंदगी बदलने की शुरुआत आपको खुद करनी होगी. जब आप अपनी जिम्मेदारी खुद लेते हैं, तभी असली बदलाव शुरू होता है.

    हर आलोचना गलत नहीं होती

    अगर कोई आपकी कमी बताता है, तो तुरंत नाराज होने की बजाय उसकी बात पर शांत होकर सोचें. हर आलोचना बुरी नहीं होती. कई बार यही बातें हमें अपनी गलतियां सुधारने और बेहतर इंसान बनने का मौका देती हैं.

    लोगों को बनाएं दूरियां

    हर रिश्ता हमेशा अच्छा नहीं होता. अगर कोई व्यक्ति बार-बार आपको दुख, तनाव या परेशानी दे रहा है, तो उससे दूरी बनाना गलत नहीं है. अपनी मानसिक शांति को सबसे पहले रखना भी जरूरी है.

    हर कदम एक नई शुरुआत की ओर

    कोई भी इंसान पहली बार में सब कुछ नहीं सीखता. नई चीज सीखते समय गलतियां होना बिल्कुल आम बात है. जो लोग लगातार कोशिश करते रहते हैं, वही आगे चलकर सफलता हासिल करते हैं. इसलिए शुरुआत करने से कभी न डरें.

    खुशी लक्ष्य में नहीं, मिलती सफर में

    अक्सर लोग सोचते हैं कि अच्छी नौकरी, ज्यादा पैसा या बड़ा घर मिलने के बाद ही खुशी मिलेगी. लेकिन सच यह है कि खुशी छोटी-छोटी बातों में भी छिपी होती है. परिवार के साथ बिताया समय, दोस्तों से बातचीत और रोज की छोटी सफलताएं भी जिंदगी को खुशहाल बनाती हैं.

    जिंदगी से जुड़ी ये बातें पहली नजर में मुश्किल लग सकती हैं, लेकिन इन्हें अपनाने से सोच मजबूत होती है और जीवन आसान बनता है. अपनी जिम्मेदारी लेना, सीखने के लिए तैयार रहना, सही लोगों के साथ रहना और छोटी-छोटी खुशियों की कद्र करना आपको लंबे समय तक सफल और खुश रहने में मदद कर सकता है.

  • कुदरत का अनोखा कमाल! आसमान से बिल्कुल फिंगरप्रिंट जैसा दिखता है ये टापू, पत्थरों की दीवार 23 KM लंबी..​​​​

    कुदरत का अनोखा कमाल! आसमान से बिल्कुल फिंगरप्रिंट जैसा दिखता है ये टापू, पत्थरों की दीवार 23 KM लंबी..​​​​

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    दुनियाभर में प्रकृति और इंसानों की बनाई कई ऐसी अजीबोगरीब रचनाएं मौजूद हैं, जो अपनी अनूठी बनावट से लोगों को हैरान कर देती हैं. ऐसा ही एक अद्भुत नजारा एड्रियाटिक सागर में क्रोएशिया के तट के पास देखने को मिलता है. यहां शिबेनिक द्वीपसमूह के पास स्थित बाल्जेनाक नाम का एक छोटा सा टापू इन दिनों काफी सुर्खियां बटोर रहा है. इस टापू की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जब आप इसे आसमान से देखेंगे, तो यह इंसान के अंगूठे के निशान यानी एक विशाल फिंगरप्रिंट की तरह दिखाई देता है. महज 1.4 वर्ग किमी में फैला यह अंडाकार टापू दूर से किसी अजूबे से कम नहीं लगता. इसके फिंगरप्रिंट जैसा दिखने की वजह कोई कुदरती करिश्मा नहीं, बल्कि इस पर बनी सूखी पत्थरों की दीवारों का एक बहुत बड़ा जाल है. ये छोटी-छोटी दीवारें और उनके बीच की लकीरें दूर से देखने पर बिल्कुल इंसानी त्वचा की रेखाओं और झुर्रियों जैसी नजर आती हैं.

    बता दें कि आयरलैंड, इंग्लैंड और स्कॉटलैंड जैसे कई पश्चिमी यूरोपीय देशों की तरह क्रोएशिया के ग्रामीण इलाकों और तटीय क्षेत्रों में भी पत्थरों की ऐसी दीवारें बनाने की सदियों पुरानी परंपरा रही है. इतिहास में इन दीवारों का निर्माण खेतों की सीमाओं को तय करने के लिए किया जाता था. इनको बनाने की सबसे खास बात यह है कि इन्हें जोड़ने के लिए सीमेंट, चूने या किसी भी तरह के गारे का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया गया है. इसके बजाय, पुराने जमाने के कुशल कारीगर और किसान पत्थरों को बहुत ध्यान से चुनते थे और उन्हें पहेली के टुकड़ों की तरह एक-दूसरे के ऊपर इतनी मजबूती से सेट करते थे कि वे सदियों तक हिले बिना टिकी रहें. क्रोएशिया का ज्यादातर तटीय इलाका पथरीला है, यानी जमीन पर हर तरफ चट्टानें और पत्थर बिखरे पड़े हैं. खेती करने लायक जमीन तैयार करने के लिए किसानों ने मिट्टी में से इन पत्थरों को चुनकर बाहर निकाला और खेतों के चारों तरफ चौकोर और जालीदार दीवारें खड़ी कर दीं.

    महज आधा किलोमीटर लंबे बाल्जेनाक टापू पर इन दीवारों की कुल लंबाई 23 किलोमीटर से भी ज्यादा है. साल 2018 में यूनेस्को से इस अनोखे आईलैंड और इसकी सूखी पत्थरों की दीवारों को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में शामिल कर लिया. बता दें कि खेतों की सीमाएं तय करने के अलावा इन पत्थरों की दीवारों का एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक फायदा भी था. क्रोएशिया के तटीय इलाकों में ‘बुरा’ नाम की बहुत ही तेज और बर्फीली हवाएं चलती हैं, जो फसलों को पूरी तरह तबाह कर देती थीं. पत्थरों की ये ऊंची दीवारें इन तेज हवाओं को रोककर एक सुरक्षा कवच का काम करती थीं, जिससे पथरीले इलाकों में भी खेती करना मुमकिन हो पाता था. बाल्जेनाक के अलावा एड्रियाटिक सागर के सबसे लंबे तटीय क्षेत्र वाले ‘पाग’ नाम के आईलैंड पर भी किसानों ने पत्थरों की ऐसी दीवारें बनाई हैं, जिनकी कुल लंबाई 1,000 किमी से भी ज्यादा है. इंसानों और प्रकृति के इस अनोखे तालमेल को देखने के लिए आज दुनिया से लोग खिंचे चले आ रहे हैं.

  • पूरी बिल्डिंग में सिर्फ एक किराएदार! 126 फ्लैटों के बीच अकेले रहने की जिद, वजह बेहद दिलचस्प..​​​​

    पूरी बिल्डिंग में सिर्फ एक किराएदार! 126 फ्लैटों के बीच अकेले रहने की जिद, वजह बेहद दिलचस्प..​​​​

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    जब किसी हंसते-खेलते मोहल्ले से लोग धीरे-धीरे जाने लगते हैं और पूरी इमारत खाली हो जाती है, तो वहां का सन्नाटा भी इंसान को डराने लगता है. लेकिन ब्रिटेन के ग्रेटर मैनचेस्टर में स्थित रोचडेल के लोअर फालिंगे इलाके में 126 खाली पड़े फ्लैट्स की पूरी इमारत में सिर्फ एक अकेला परिवार रहता है. इतना ही नहीं, वो अपने इस घर को खाली भी नहीं करना चाहते हैं. इस परिवार के प्रमुख 51 साल के एंडी रोश हैं. प्रशासन इस पूरी जगह को जमींदोज करने की तैयारी में है, लेकिन एंडी अपने 28 साल पुराने आशियाने को छोड़कर कहीं भी जाने को तैयार नहीं हैं. बता दें कि जिस जगह पर एंडी रोश अपनी पार्टनर के साथ रहते हैं, उसके आसपास 1960 के दशक की छह बड़ी टावर ब्लॉक इमारतें मौजूद हैं. प्रशासन ने इन सभी इमारतों को खाली कराकर उनके दरवाजों और खिड़कियों पर प्लाइवुड के बड़े-बड़े तख्ते ठोक दिए हैं.

    रोचडेल बरोवाइडे हाउसिंग (RBH) नाम की हाउसिंग संस्था इस जर्जर हो चुकी जगह को बुलडोजर से गिराकर यहां 270 नए घर बनाना चाहती है. लेकिन लगभग 50 हजार रुपए महीने वाले इस किराए के फ्लैट में पिछले 28 सालों से रह रहे एंडी ने अपना घर खाली करने से साफ मना कर दिया है. एंडी का कहना है कि वे बचपन से इसी इलाके में रहे हैं और उन्हें यहां का हरा-भरा माहौल बहुत पसंद है. हालांकि, समस्या सिर्फ घर न छोड़ने की नहीं है, बल्कि एंडी और उनकी पार्टनर दोनों ऑटिज्म से जूझ रहे हैं. ऑटिस्टिक होने के कारण उन्हें तेज आवाज, अजीब महक और तेज रोशनी से बहुत ज्यादा परेशानी होती है. एंडी का आरोप है कि RBH उनकी इन खास जरूरतों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहा है. संस्था ने उन्हें जो नए मकान ऑफर किए हैं, वे या तो किसी शराबखाने के बगल में हैं या फिर किसी शोर-शराबे वाली फैक्ट्री के पास, जहां रहना उनके लिए नामुमकिन है. उन्होंने प्रशासन को अपनी जरूरतों की एक पूरी लिस्ट दी थी, लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

    एक बिल्कुल सुनसान और खाली पड़ी विशाल इमारत में अकेले रहना एंडी और उनकी पार्टनर के लिए किसी बुरे सपने जैसा बन गया है. आसपास के सभी पड़ोसी फ्लैट्स खाली होने के कारण वहां हीटिंग बंद पड़ी है, जिससे कड़ाके की ठंड में उनका अपना घर भी बर्फ की तरह ठंडा हो जाता है. इसके अलावा, खाली पड़े इलाके में अपराधियों और चोरों का डर भी बना रहता है. एंडी बताते हैं कि जब भी बाहर से किसी गाड़ी या इंसान की आवाज आती है, तो दिल दहल जाता है कि कहीं बुलडोजर इमारत गिराने तो नहीं आ गया. जब भी उनके लेटरबॉक्स में कोई चिट्ठी गिरती है, तो उन्हें लगता है कि यह कोर्ट से बेदखली का नोटिस होगा. प्रशासन से लगातार मिल रहे कानूनी नोटिसों ने एंडी को तोड़कर रख दिया है. उन्होंने रोते हुए बताया कि यह स्थिति उनके लिए इतनी ज्यादा तनावपूर्ण है कि इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, यह उनके लिए जिंदगी और मौत की लड़ाई बन चुकी है.

    वहीं, पास के इलाकों में रहने वाले पड़ोसी भी इस स्थिति से हैरान हैं. एक स्थानीय महिला ने ब्रिटेन में चल रहे हाउसिंग संकट पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश में घर ढूंढने की इतनी बड़ी किल्लत है, तो इतनी बड़ी-बड़ी इमारतों को खाली कराकर गिराने के बजाय लोगों को रहने के लिए क्यों नहीं दिया जा रहा. दूसरी तरफ, RBH के प्रवक्ता का कहना है कि ये 1960 की बनी जर्जर इमारतें अब अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं और इंसानों के रहने के लिए सुरक्षित नहीं हैं. उन्होंने दावा किया कि वे जून 2025 से लेकर अब तक एंडी को 5 अलग-अलग जगहों पर नए घर ऑफर कर चुके हैं. संस्था का कहना है कि वे एंडी और उनकी पार्टनर की मदद करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं और उन्हें नया घर ढूंढने में पूरी आर्थिक और व्यावहारिक मदद देंगे. लेकिन फिलहाल, एंडी रोश ब्रिटेन के सबसे अकेले किराएदार बनकर बुलडोजर के खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं.