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  • जिस जिम में बना रहा था मस्कुलर बॉडी, वहीं जिंदगी ने छोड़ा साथ! पोज देते-देते आया हार्ट अटैक

    जिस जिम में बना रहा था मस्कुलर बॉडी, वहीं जिंदगी ने छोड़ा साथ! पोज देते-देते आया हार्ट अटैक

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    मसल्स दिखाने के दौरान आ गया हार्ट अटैक (इमेज- सोशल मीडिया)

    इन दिनों जिम में अचानक हार्ट अटैक आने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. सोशल मीडिया पर ऐसे कई सीसीटीवी और मोबाइल फुटेज वायरल हो रहे हैं जिनमें युवा वर्कआउट के दौरान या उसके तुरंत बाद बेहोश होकर गिरते दिखते हैं. इसी कड़ी में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. एक युवक जिम में अपने बाइसेप्स बनाकर पोज दे रहा था. वह अपनी मसल्स को फ्लेक्स करके कैमरे के सामने दिखा रहा था. अचानक उसे हार्ट अटैक आ गया और वह जिम के फर्श पर निढाल होकर गिर पड़ा।

    आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते उससे पहले ही उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी. इस घटना ने लोगों को हैरान कर दिया है. वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिखता है कि युवक अपनी बॉडी को फ्लेक्स कर रहा है. वह दोनों हाथों से बाइसेप्स को टाइट करके पोज दे रहा है. उसके चेहरे पर मेहनत और गर्व की भावना साफ झलक रही है. लेकिन कुछ ही सेकंड में उसका शरीर कांपने लगता है. वह संतुलन खो देता है और सीधे फर्श पर गिर जाता है.

    आ गया हार्ट अटैक
    वीडियो में देख सकते हैं कि मोमेंट को रिकॉर्ड कर रहा शख्स तुरंत उसके पास पहुंचता है. लेकिन बताया जा रहा है कि उसकी हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत पड़ गई. इस वीडियो को देखकर लोग हैरान रह गए हैं. कई लोगों ने कमेंट कर लिखा कि जिम अब सिर्फ फिटनेस की जगह नहीं रह गई बल्कि जानलेवा साबित हो रही है. विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे हादसों की संख्या इसलिए बढ़ रही है क्योंकि युवा भारी वर्कआउट के तुरंत बाद रील बनाने या फोटो खिंचवाने के लिए सांस रोककर लंबे समय तक मसल्स फ्लेक्स करते हैं. जब व्यक्ति भारी वजन उठाता है तो शरीर में ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाती है. वर्कआउट के दौरान दिल तेज धड़कता है और ब्लड प्रेशर बढ़ता है. ऐसे में अगर व्यक्ति सांस रोककर पोज लेने लगे तो शरीर और दिल पर अत्यधिक दबाव पड़ता है. इसे वाल्सल्वा मैन्यूवर कहा जाता है. इसमें सांस रोकने से ब्लड फ्लो प्रभावित होता है और दिल पर अचानक बोझ पड़ जाता है. कई युवा बिना वार्म-अप के या ओवरट्रेनिंग करके भी यही गलती करते हैं. फिटनेस जरूरी है लेकिन दिखावे और सोशल मीडिया के दबाव में शरीर की सीमाओं को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

     

     

    बदल रहा है फिटनेस वर्ल्ड


    आजकल इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर लाखों फॉलोअर्स वाले फिटनेस इंफ्लुएंसर अपनी परफेक्ट बॉडी दिखाते हैं. युवा उन्हें देखकर जल्दी रिजल्ट पाने की होड़ में लग जाते हैं. कई लोग सप्लीमेंट्स का अंधाधुंध इस्तेमाल करते हैं. कुछ स्टेरॉयड जैसी चीजों का सहारा लेते हैं जो दिल के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं. डिहाइड्रेशन, कम नींद, अनियमित खानपान और तनाव भी हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा देते हैं. जिम में एसी की ठंडक में पसीना नहीं आने पर कई लोग पानी कम पीते हैं जिससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है. डॉक्टरों का कहना है कि 20 से 35 साल की उम्र के युवाओं में हार्ट अटैक के मामले पहले कम होते थे लेकिन अब ये तेजी से बढ़ रहे हैं. एक अध्ययन के अनुसार जिम में होने वाले कई कार्डियक इवेंट्स में ओवरएक्सर्शन और गलत तकनीक मुख्य वजह होती है. जब व्यक्ति भारी वजन उठाकर तुरंत पोज लेता है तो कोरोनरी आर्टरीज पर दबाव बढ़ता है. अगर किसी को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल या फैमिली हिस्ट्री ऑफ हार्ट डिजीज है तो जोखिम और बढ़ जाता है. कई युवा नियमित चेकअप नहीं कराते. वे सोचते हैं कि जिम जाने से वे पूरी तरह स्वस्थ हैं. लेकिन जिम जाना स्वस्थ होने की गारंटी नहीं है.

  • मुंहासों पर लहसुन लगाना कितना सही? जानिए फायदे और जरूरी सावधानियां..

    मुंहासों पर लहसुन लगाना कितना सही? जानिए फायदे और जरूरी सावधानियां..

    मुंहासे यानी एक्ने त्वचा से जुड़ी बेहद आम समस्या है। हार्मोनल बदलाव, अतिरिक्त ऑयल, बंद पोर्स, तनाव और कई अन्य कारणों से चेहरे पर पिंपल्स हो सकते हैं। ऐसे में लोग घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं, जिनमें लहसुन का इस्तेमाल भी शामिल है।

    लहसुन में कुछ ऐसे यौगिक पाए जाते हैं जिनमें एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, लेकिन कच्चे लहसुन को सीधे चेहरे पर लगाने से मुंहासे 10 मिनट में खत्म हो जाएंगे—इस दावे के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। उल्टा, संवेदनशील त्वचा पर कच्चा लहसुन जलन, लालिमा या त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है।

    लहसुन का रस सीधे न लगाएं

    कच्चे लहसुन का रस त्वचा पर तेज जलन पैदा कर सकता है। इससे पिंपल ठीक होने के बजाय त्वचा पर लाल निशान या जलन बढ़ सकती है। इसलिए इसे सीधे चेहरे पर लगाने से बचना बेहतर है।

    लहसुन का पेस्ट भी जोखिम भरा हो सकता है

    लहसुन पीसकर चेहरे पर लगाने से भी त्वचा में irritation हो सकती है। खासकर संवेदनशील त्वचा या पहले से सूजन वाले मुंहासों पर इसका इस्तेमाल परेशानी बढ़ा सकता है।

    हल्दी, शहद या एलोवेरा के साथ मिलाने पर?

    लहसुन को हल्दी, शहद या एलोवेरा के साथ मिलाने से यह जरूरी नहीं कि मुंहासे तेजी से ठीक हो जाएं। प्राकृतिक चीजें होने का मतलब यह नहीं कि वे हर त्वचा के लिए सुरक्षित हों।

    मुंहासों के लिए क्या करें?

    हल्के मुंहासों में चेहरे को दिन में दो बार किसी सौम्य क्लींजर से साफ करना, पिंपल्स को न दबाना और नॉन-कॉमेडोजेनिक स्किनकेयर उत्पाद इस्तेमाल करना मददगार हो सकता है। जरूरत पड़ने पर त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेकर प्रमाणित एक्ने ट्रीटमेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    जरूरी सावधानी: अगर चेहरे पर दर्दनाक या गहरे मुंहासे हैं, बार-बार एक्ने हो रहा है या दाग पड़ रहे हैं, तो घरेलू नुस्खों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। खासकर कच्चा लहसुन सीधे चेहरे पर लगाने से बचें।

  • जिसे बेटी की तरह पाला, उसकी मौत पर किया 13वीं का भोज! 600 लोगों को बुलाकर किसान ने रचा अनोखा उदाहरण..

    जिसे बेटी की तरह पाला, उसकी मौत पर किया 13वीं का भोज! 600 लोगों को बुलाकर किसान ने रचा अनोखा उदाहरण..

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    मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने इंसानियत और बेजुबान जानवरों के प्रति अटूट प्रेम की एक अनूठी और भावुक मिसाल कायम कर दी है. अमूमन शोक सभाएं और तेहरवीं के आयोजन अपनों और परिजनों के जाने पर किए जाते हैं, लेकिन यहां एक किसान ने अपनी 20 साल पुरानी पालतू बकरी के लिए वो सब किया जो अमूमन सगे परिजनों के देहांत पर किया जाता है.

    सिरोंज के भवानी नगर निवासी किसान नवल सिंह मालवीय की पालतू बकरी, जिसे पूरा परिवार और गांव प्यार से ‘कटोरी’ उर्फ ‘चमेली’ कहता था, 3 अगस्त को इस दुनिया को अलविदा कह गई. किसान नवल सिंह मालवीय के लिए ‘कटोरी’ महज एक मवेशी या जानवर नहीं थी, बल्कि परिवार की एक सदस्य और औलाद जैसी थी. कटोरी बीते 20 सालों से नवल सिंह के घर का अहम हिस्सा बनी हुई थी.

    घर की रानी: वह आम मवेशियों की तरह खूंटे से नहीं बांधी जाती थी, बल्कि बाकायदा घर के अंदर पलंग पर सोती थी और पूरे परिवार के सुख-दुख की साझीदार थी. जब 3 अगस्त को उसकी सांसे थमीं, तो पूरा मालवीय परिवार गमगीन हो गया और घर में चूल्हा तक नहीं जला.

    प्रशासन से अनुमति लेकर अंतिम संस्कार, पवित्र गंगा में अस्थि विसर्जन

    नवल सिंह ने अपनी ‘कटोरी’ को अंतिम विदाई देने में कोई कमी नहीं छोड़ी. स्थानीय प्रशासन से बाकायदा अनुमति लेकर कटोरी का पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया. अंतिम संस्कार के बाद नवल सिंह खुद कटोरी की अस्थियां संचित कर पवित्र गंगा नदी पहुंचे और पूरे विधि-विधान के साथ अस्थि विसर्जन का कर्मकांड पूरा किया. रिश्तेदारों, परिचितों और ग्रामीणों को तेहरवीं में आमंत्रित करने के लिए बाकायदा शोक संदेश के कार्ड छपवाकर बांटे गए.

    तेहरवीं पर 600 लोगों का महाभोज, उमड़ा पूरा गांव

    13 दिनों के शोक के बाद 15 अगस्त को गंगाजली खोलने के साथ तेहरवीं का आयोजन किया गया. नवल सिंह ने अपनी प्यारी कटोरी की आत्मशांति और याद में एक विशाल भोज का आयोजन किया. इस तेहरवीं में रिश्तेदार, दोस्त और गांव के लगभग 600 लोग शामिल हुए. कार्यक्रम में पहुंचे हर एक व्यक्ति की आंखें इस दृश्य को देखकर नम हो गईं और सबने एक बेजुबान के प्रति नवल सिंह के इस असीम समर्पण और प्यार की जमकर तारीफ की.

    संवेदना की मिसाल बना नवल का यह कदम

    आज के आधुनिक दौर में जहां इंसान के पास इंसानों के लिए समय और संवेदनाएं कम पड़ती जा रही हैं, वहीं नवल सिंह मालवीय का यह कदम समाज के लिए एक आईना है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि नवल सिंह का यह प्रयास दिखाता है कि जब प्यार सच्चा हो, तो बेजुबान और इंसान का रिश्ता रूहानी बन जाता है.

  • क्या आपका दोस्त भी सिर्फ मतलब का साथी है? चाणक्य के इन 5 टेस्ट से तुरंत पहचानें

    क्या आपका दोस्त भी सिर्फ मतलब का साथी है? चाणक्य के इन 5 टेस्ट से तुरंत पहचानें

    क्या आपका दोस्त भी सिर्फ मतलब का साथी है? चाणक्य के इन 5 टेस्ट से तुरंत पहचानें

    आचार्य चाणक्य के मुताबिक सच्चे मित्र की पहचान सुख में नहीं, बल्कि विपत्ति, विवाद, कानूनी उलझन और आर्थिक तंगी जैसे कठिन समय में होती है.

    आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सोशल मीडिया पर सैकड़ों दोस्त होना बहुत आम बात है. किसी की पोस्ट पर लाइक करना या किसी पार्टी में शामिल होना बेहद आसान काम है.

    लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब आपकी जिंदगी में अचानक कोई बड़ी मुसीबत आ जाए. आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में साफ लिखा है कि सच्चे मित्र की पहचान सुख में नहीं बल्कि दुख और कठिन परिस्थितियों में होती है. आइए जानते हैं चाणक्य नीति के अनुसार वे कौन से 5 मौके हैं जो सच्चे दोस्त की पहचान कराते हैं.

    बड़े संकट और विपत्ति में न छोड़े साथ

    जिंदगी में मुसीबतें कभी भी बताकर नहीं आती हैं. अचानक नौकरी चले जाना, व्यापार में नुकसान होना या कोई पारिवारिक दुर्घटना इंसान को पूरी तरह से तोड़ देती है.

    ऐसे समय में ज्यादातर लोग धीरे धीरे दूरी बनाने लगते हैं. चाणक्य नीति कहती है कि जो मित्र आपकी विपत्ति सुनकर भागने के बजाय समस्या का समाधान खोजने में मदद करे, उसी पर आपको भरोसा करना चाहिए.

    किसी विवाद या शत्रु के संकट में बने ढाल

    जब आपके सामने कोई बड़ा विवाद या विरोधी खड़ा हो जाए, तब दोस्तों के असली चरित्र का पता चलता है. चाणक्य कहते हैं कि सच्चा दोस्त वह नहीं है जो आपकी हर गलत बात का समर्थन करे.

    सच्चा मित्र आपको सही और गलत का अंतर समझाता है. मुसीबत के समय वह आपके साथ खड़ा रहकर आपको सही मार्गदर्शन और संबल प्रदान करता है.

    कानूनी परेशानी में न मोड़े मुंह

    चाणक्य ने अपने श्लोक में राजद्वार का जिक्र किया है, जिसे आज के समय में कानूनी या कोर्ट कचहरी के मामलों से जोड़कर देखा जा सकता है.

    ऐसे मामलों में अक्सर लोग झंझट से बचने के लिए दूर भागते हैं. लेकिन जो दोस्त कानूनी उलझनों के दौरान सही सलाह दे और आपका मनोबल बनाए रखे, वही सच्चा दोस्त कहलाता है.

    आर्थिक तंगी में जब न बदले दोस्त का व्यवहार

    पैसा एक ऐसी चीज है जो किसी भी रिश्ते की असली सच्चाई सामने ला देती है. जब जेब भरी होती है तो दुनिया साथ खड़ी नजर आती है.

    लेकिन आर्थिक तंगी आते ही अक्सर परिचित लोग किनारा करने लगते हैं. चाणक्य के अनुसार सच्चा मित्र आपकी आर्थिक स्थिति देखकर अपना व्यवहार कभी नहीं बदलता. वह अपनी क्षमता के हिसाब से बिना किसी स्वार्थ के आपका साथ निभाता है.

  • इच्छा पूरी करने वाला पेड़! न जड़ दिखती न पत्तियों में स्वाद, लकवा में फायदेमंद..

    इच्छा पूरी करने वाला पेड़! न जड़ दिखती न पत्तियों में स्वाद, लकवा में फायदेमंद..

    बालाघाट. प्रकृति में कई ऐसे सवाल है, जिसका जवाब मिलना मुश्किल ही हो जाता है. ऐसे में हम उसे चमत्कार कहते हैं. एक ऐसा ही चमत्कार बालाघाट जिले के गढ़दा गांव की पहाड़ी पर देखने को मिलता है, जहां पर करीब चार किलोमीटर की चढ़ाई करने के बाद मां अन्नपूर्णा का धाम आता है. वहीं पर मां अन्नपूर्णा चट्टानों के बीज विराजित है. उसी विशाल चट्टान पर एक पेड़ है, जो काफी बड़ा है. ऐसे में उस पेड़ को देख लोग हैरान हो जाते हैं. वहीं, उस पेड़ की प्रजाति का है इसकी जानकारी बहुत नहीं थी. अब इस पेड़ को लेकर कई दावे किए जाते हैं.

    अब से कुछ साल पहले तक इस पेड़ की पहचान नहीं हो सकी थी. लेकिन काशी से कुछ लोग आए थे. ऐसे में उन्होंने बताया कि यह पेड़ की पहचान कल्पवृक्ष के रूप में किए थे. हालांकि, मंदिर के पुजारी बताते हैं कि इस पेड़ की उम्र का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. यह वृक्ष भी काफी विशाल है.

    दुर्लभ प्रजाति का है ये पेड़
    बालाघाट जिला एक वना आधारित जिला है. यहां पर कई प्रकार और कई प्रजाति की वनस्पति है. ऐसे में ज्यादातर पेड़ों या वृक्षों की पहचान हो चुकी है. लेकिन कई ऐसे पेड़ है, जिसे स्थानीय लोग भी नहीं पहचान पाते हैं. ऐसे में इसे दुर्लभ माना जाता है. यह वृक्ष इतना विशाल है कि इसका अंदाजा लगाना कठिन है कि वह कितना बड़ा है. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस वृक्ष का क्षेत्रफल करीब 100 वर्ग फीट से भी ज्यादा है.

    जड़ नहीं दिखती पत्तियों में स्वाद नहीं
    मां अन्नापूर्णा धाम के पुजारी बताते हैं कि इस पेड़ को देख हैरानी होती है. दरअसल, यह विशाल वृक्ष सिर्फ चट्टान तक ही दिखता है. इसकी जड़ें भूमि में मिलती हुई प्रतीत नहीं होती है. ऐसे में यह एक रहस्य है, जहां कि दुर्लभ प्रजाति के पेड़ को पोषण कैसे मिलता है. जहां एक ओर जंगल के सारे पेड़ हमेशा से गर्मी में सुख जाते हैं. लेकिन यह वृक्ष साल भर हरा भरा रहता है. ऐसे में इस बात से भी लोग हैरान हो जाते हैं.

    इच्छा पूरी करने वाला है पेड़!
    मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यह वृक्ष मनोकामनाएं पूरी करने वाला है. मां अन्नपूर्णा के गढ़दा धाम में प्रकट दिवस, नवरात्रि (शारदेय और चैत्र) में भक्तों की भारी भीड़ रहती है. ऐसे में आने वाले भक्त हमेशा अपनी मन्नत पूरी करने के लिए इस पेड़ मन्नत बांधते हैं. वहीं, मन्नत पूरी होने पर वह चुनरी भी छोड़ देते हैं. ऐसे में यहां नौकरी लगने से लेकर संतान प्राप्ति का कामना लेकर कठिन चढ़ाई चढ़ते हैं और इस इच्छा पूरी करने वाले कल्प वृक्ष की अर्चना भी करते हैं.

    सेहत के लिए भी है फायदेमंद
    गढ़दा मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सहदेव अड़मे बताते हैं कि इसकी पत्तियों की सेवन से गैस की समस्या से राहत मिलती है. वहीं, मंदिर के पुजारी ने दावा किया कि इस वृक्ष की पत्तियों का चूर्ण बनाकर शहद के साथ सेवन करने से लकवा जैसी गंभीर बीमारी से राहत मिलती है. वहीं, इसकी पत्तियों के सेवन से ब्लड पेशर, गैस और पेट की बीमारियों से राहत मिल सकती है. लेकिन, लोकल 18 इन दावों की पुष्टि नहीं करता है.

    हालांकि, यह वृक्ष काफी विशाल है और दुर्लभ प्रजाति का जरूर है. ऐसे में चट्टान के ऊपर होना और जड़ का नजर न आना प्रकृति प्रेमियों में रोमांच उत्पन्न करता है.

  • न बिजली, न कार और न आधुनिक गैजेट्स… फिर भी डेटिंग स्टाइल देखकर रह जाएंगे हैरान!

    न बिजली, न कार और न आधुनिक गैजेट्स… फिर भी डेटिंग स्टाइल देखकर रह जाएंगे हैरान!

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    सिर्फ अंधेरे में हो होता है दो लोगों का मिलन (इमेज- सोशल मीडिया)

    दुनिया में कई समुदाय ऐसे हैं जो आधुनिक सुविधाओं से दूर रहना पसंद करते हैं. इनमें से एक सबसे चर्चित समुदाय है एमिश. अमेरिका और कनाडा के कुछ हिस्सों में बसे ये लोग बिजली, कार, टेलीविजन और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल नहीं करते. उनके अनुसार इन चीजों का इस्तेमाल ईश्वर को नाराज कर सकता है. वे साधारण जीवन जीते हैं, घोड़ा-गाड़ी से चलते हैं, हाथ से खेती करते हैं और पारंपरिक कपड़े पहनते हैं.

    लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक एक्स-एमिश क्रिएटर ने उनके डेटिंग स्टाइल के बारे में ऐसे खुलासे किए हैं कि लोग हैरान रह गए हैं. लोविना हर्शबर्गर जूक नाम की यह युवती खुद एमिश समुदाय में पली-बढ़ी हैं. उन्होंने समुदाय छोड़ दिया है और अब सोशल मीडिया पर एमिश रेसिपीज, कहानियां और परंपराओं को शेयर करती हैं. उनके लाखों फॉलोअर्स हैं. हाल ही में उन्होंने एक पॉडकास्ट या इंटरव्यू में एमिश डेटिंग की परंपराओं के बारे में बताया.

    बेहद आधुनिक है डेटिंग रूल


    उनके मुताबिक, एमिश समुदाय में डेटिंग का तरीका काफी अलग और कुछ मायनों में आधुनिक भी है. एमिश लोग आधुनिक तकनीक से दूर रहते हैं. घरों में बिजली नहीं होती. रात में लालटेन या मोमबत्ती की रोशनी में काम चलता है. कार की जगह घोड़ा-गाड़ी का इस्तेमाल होता है. मोबाइल फोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया जैसी चीजें आमतौर पर वर्जित होती है. समुदाय के सख्त नियम होते हैं जिन्हें तोड़ने पर बहिष्कार तक हो सकता है. फिर भी डेटिंग के मामले में उनका तरीका अनोखा है. लोविना के अनुसार, एमिश युवक-युवतियां रात के अंधेरे में मिलते हैं. दिन में खुलेआम घूमना या डेट पर जाना आम नहीं है. रात को जब परिवार सो जाता है या काम खत्म हो जाता है तब दो लोग एकांत में बैठकर घंटों बातें करते हैं. यह बातचीत काफी लंबी होती है. वे एक-दूसरे को जानने की कोशिश करते हैं, भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हैं और रिश्ते को आगे बढ़ाने का फैसला करते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शादी से पहले शारीरिक संबंधों से पूरा परहेज रखा जाता है. समुदाय में शुद्धता और नैतिकता को बहुत महत्व दिया जाता है. सेक्स सिर्फ विवाह के बाद ही मान्य है.

     

     

    सख्ती से मनवाए जाते हैं नियम
    अगर कोई इस नियम को तोड़ता है तो सख्त सजा या सामाजिक बहिष्कार हो सकता है. इस लिहाज से उनकी डेटिंग स्टाइल पारंपरिक भी है और कुछ मायनों में आज के समय की “नो सेक्स बिफोर मैरिज” वाली सोच से मिलती-जुलती है. सोशल मीडिया पर लोविना के खुलासों ने काफी चर्चा पैदा कर दी है. लोग कमेंट कर रहे हैं कि तकनीक से इतने दूर रहने वाले लोगों की डेटिंग इतनी व्यवस्थित और सख्त कैसे हो सकती है. कुछ यूजर्स ने लिखा कि “अंधेरे में मिलना रोमांटिक लगता है” तो कुछ ने कहा कि “बिजली-कार नहीं चलानी लेकिन डेटिंग मॉडर्न है, अजीब विरोधाभास है.” कई लोगों ने एमिश जीवनशैली के बारे में और जानने की इच्छा जताई. एमिश समुदाय की जड़ें 17वीं-18वीं शताब्दी के यूरोपीय एनाबैप्टिस्ट आंदोलन में हैं. वे सादगी, समुदाय और धार्मिक नियमों को प्राथमिकता देते हैं. आधुनिक दुनिया की भागदौड़ और तकनीक को वे आत्मा के लिए हानिकारक मानते हैं. इसलिए बिजली के तार, कार के इंजन और स्क्रीन वाली चीजों से दूर रहते हैं. फिर भी मानव स्वभाव के अनुसार युवाओं में प्रेम और साथी चुनने की इच्छा स्वाभाविक है. समुदाय ने इसके लिए अपनी व्यवस्था बना रखी है.

  • शरीर में विटामिन की कमी के 5 संकेत, इन्हें नजरअंदाज न करें..

    शरीर में विटामिन की कमी के 5 संकेत, इन्हें नजरअंदाज न करें..

    आज की व्यस्त जीवनशैली और असंतुलित खान-पान के कारण शरीर को जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। विटामिन और मिनरल्स की कमी होने पर शरीर कई तरह के संकेत दे सकता है। हालांकि, इनमें से कोई भी लक्षण केवल विटामिन की कमी के कारण हो, यह जरूरी नहीं है। सही कारण जानने के लिए जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह और जांच जरूरी है।

    1. मसूड़ों से बार-बार खून आना

    ब्रश करते समय या बिना किसी स्पष्ट कारण के मसूड़ों से बार-बार खून आना कई वजहों से हो सकता है। विटामिन C की कमी भी इसका एक कारण हो सकती है, लेकिन मसूड़ों की बीमारी और खराब ओरल हाइजीन जैसी समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं।

    2. त्वचा में बदलाव

    त्वचा का अत्यधिक रूखा होना, घाव देर से भरना या त्वचा में असामान्य बदलाव पोषण की कमी समेत कई कारणों से हो सकते हैं। विटामिन A, C और कुछ अन्य पोषक तत्व त्वचा के सामान्य स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    3. लगातार बाल झड़ना

    बाल झड़ने के पीछे तनाव, हार्मोनल बदलाव, आनुवंशिक कारण, थायरॉइड की समस्या या आयरन और अन्य पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। केवल बाल झड़ने के आधार पर किसी एक विटामिन की कमी मान लेना सही नहीं है।

    4. हाथ-पैर में झुनझुनी

    हाथ-पैर में बार-बार झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होना विटामिन B12 की कमी से जुड़ा हो सकता है। इसके अलावा नसों से जुड़ी समस्या, डायबिटीज या अन्य कारण भी हो सकते हैं। अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

    5. कमजोरी और लगातार थकान

    बिना ज्यादा मेहनत के थकान, कमजोरी या ऊर्जा की कमी महसूस होना शरीर में आयरन, विटामिन B12, फोलेट समेत कई पोषक तत्वों की कमी का संकेत हो सकता है। लेकिन इसके पीछे नींद की कमी या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

    क्या करें?

    अगर इनमें से कोई लक्षण लगातार बना हुआ है, तो खुद से विटामिन की गोलियां लेना शुरू करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट के जरिए पोषक तत्वों की कमी का पता लगाया जा सकता है।

    ध्यान रखें: संतुलित आहार में हरी सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज, दूध-दही, अंडे या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत शामिल करना शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने में मदद करता है।

  • कपड़े धोएं और पाएं 90 लाख रुपये! साथ में विदेश घूमने का मौका, लेकिन नौकरी में हैं ये शर्तें..

    कपड़े धोएं और पाएं 90 लाख रुपये! साथ में विदेश घूमने का मौका, लेकिन नौकरी में हैं ये शर्तें..

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    कपड़े धोओ, विदेश घूमो और पाओ ₹90 लाख! लेकिन ये हैं शर्तें; इस वायरल 'ड्रीम जॉब' ने मचाया तहलका

    सोशल मीडिया पर आजकल लंदन की एक जॉब वैकेंसी को लेकर बड़ी चर्चा है. पहली नजर में सुनने में आता है कि कपड़े धोने की नौकरी के लिए सालाना 90 लाख रुपए मिल रहे हैं, तो हर कोई हैरान रह जाता है. ब्रिटेन की ‘द लेडी’ मैगजीन और ‘ब्यूचैम्प पार्टनर्स’ एजेंसी के जरिए आई यह वैकेंसी सुनने में जितनी आसान लगती है, असलियत में उतनी ही कड़ी है. आइए जानते हैं कि इस 90 लाख के पैकेज के पीछे आखिर माजरा क्या है.

    सिर्फ कपड़े धोना नहीं, फैब्रिक का रखना होगा हिसाब

    यह कोई आम नौकरी नहीं है. इसमें आपको दुनिया के सबसे महंगे और नाजुक डिजाइनर कपड़ों की देखभाल करनी होगी. कौन सा कपड़ा किस तरह धोना है, कैसे सुखाना है और उसे कैसे संभालकर रखना है, इसकी पूरी समझ होनी चाहिए. जरा सी गलती से लाखों रुपए के कपड़े खराब हो सकते हैं.

    लग्जरी गाड़ियों की ड्राइविंग और देखभाल

    इस जॉब में सिर्फ कपड़े धोने तक सीमित नहीं रहना है. आपको मालिक की लग्जरी कारों को भी चलाना होगा. उन्हें सही सलामत मीटिंग्स या इवेंट्स तक पहुंचाना और गाड़ियों की देखरेख करना भी इसी काम का हिस्सा है.

    पार्टियों और इवेंट्स का मैनेजमेंट

    मालिक के घर होने वाली बड़ी और हाई-प्रोफाइल पार्टियों की जिम्मेदारी भी आपको ही संभालनी होगी. मेहमानों का ध्यान रखना और घर की व्यवस्था को अच्छे से चलाना इसी रोल का हिस्सा है.

    लगातार विदेश यात्राएं

    मालिक साल में करीब 90 दिन ही लंदन में रहते हैं. बाकी पूरा साल वे दुनिया भर में घूमते रहते हैं. ऐसे में आपको भी उनके साथ हर जगह यात्रा करनी होगी. इसके लिए आपके काम करने के घंटे फिक्स नहीं होंगे, यानी आपको हर समय तैयार रहना होगा.

    इतनी बड़ी सैलरी का सच क्या है?

    यह 90 लाख रुपए का पैकेज सिर्फ कपड़े धोने के लिए नहीं है, बल्कि एक ही इंसान से कई सारे काम करवाने का है. इसमें आपको ड्राइवर, लॉन्ड्री एक्सपर्ट, केयरटेकर और पर्सनल हेल्पर, सबकी भूमिका एक साथ निभानी होगी. यह भी पढ़ें: 40 की उम्र में गई नौकरी, तो शख्स बोला- भैया, Layoff के तो बड़े फायदे हैं! वायरल हुआ वीडियो

    सबसे बड़ी शर्त यह है कि मालिक की पर्सनल लाइफ और प्राइवेसी से जुड़ी बातें पूरी तरह गोपनीय रखनी होंगी, यानी किसी को कुछ बताना नहीं है. यह भी पढ़ें: OMG! शख्स की चमकी किस्मतरातों-रात बदल गई जिंदगी, एक टिकट से मिला 13,357 करोड़ का इनाम

  • दुनिया का सबसे सुखी इंसान कौन? महात्मा विदुर ने बताए खुशहाल जीवन के 6 मूलमंत्र..?

    दुनिया का सबसे सुखी इंसान कौन? महात्मा विदुर ने बताए खुशहाल जीवन के 6 मूलमंत्र..?

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    हर इंसान अपनी जिंदगी में सच्चा सुख और शांति पाना चाहता है. इसके लिए वह दिन-रात कड़ी मेहनत भी करता है. महाभारत काल के महान ज्ञानी महात्मा विदुर ने सुखद जीवन के कई रहस्य बताए हैं.

    उनकी नीतियां आज के समय में भी उतनी ही सच साबित होती हैं. विदुर नीति के अनुसार दुनिया में सबसे सुखी इंसान वही है जिसके पास स्वास्थ्य, सम्मान और अपनों का प्यार है. आइए जानते हैं महात्मा विदुर के वे 6 नियम जो जीवन को खुशहाल बना सकते हैं.

    निरोगी शरीर ही सबसे बड़ा धन है

    जीवन में सबसे पहला और बड़ा सुख इंसान का सेहतमंद रहना है. अगर शरीर में कोई बीमारी है तो दुनिया की हर खुशी बेकार लगने लगती है. बीमारी की वजह से इंसान का मन हमेशा चिंताओं से घिरा रहता है.

    बिना अच्छी सेहत के इंसान अपनी धन-दौलत का आनंद भी नहीं ले पाता. इसलिए महात्मा विदुर कहते हैं कि अपने शरीर और सेहत का ध्यान रखना सबसे पहला और जरूरी काम है.

    कर्ज से आजादी दिलाती है सच्चा सुकून

    जीवन में दूसरा सबसे बड़ा सुख कर्ज से मुक्त होना है. किसी से उधार या कर्ज लेकर जीने वाला इंसान कभी चैन की नींद नहीं सो पाता. कर्ज का बोझ इंसान का मानसिक सुकून और शांति पूरी तरह छीन लेता है.

    कमाई कम हो तो भी अपने खर्चों को सीमित रखना ही सबसे बड़ी समझदारी है. कर्ज से दूर रहकर ही इंसान समाज में सम्मान के साथ सिर उठाकर जी सकता है.

    अपनों का साथ और प्यार है असली ताकत

    महात्मा विदुर के अनुसार इंसान का सच्चा सुख अपनों के साथ में ही छिपा है. जिस घर में परिवार के सदस्यों का प्यार और सहयोग मिलता है, वहाँ हमेशा खुशियाँ बनी रहती हैं.

    जब अपनों का साथ होता है तो जीवन के कठिन से कठिन रास्ते भी बेहद आसान हो जाते हैं. अपनों का साथ इंसान को हर दुख-दर्द से लड़ने की हिम्मत देता है.

    सही रास्ते से की गई कमाई देती है शांति

    इंसान का चौथा सुख उसकी मेहनत और ईमानदारी की कमाई है. गलत या धोखे के रास्ते से कमाया गया पैसा ज्यादा दिन नहीं टिकता और अशांति लाता है.

    ईमानदारी की कमाई से घर में बरकत आती है और मन हमेशा शांत रहता है. मेहनत की कमाई इंसान को समाज में मान-सम्मान दिलाती है. सही तरीके से कमाया हुआ धन ही जीवन को सुरक्षित बनाता है.

    समझदार और संस्कारी जीवनसाथी का होना

    जीवन में एक समझदार और गुणी जीवनसाथी का होना बेहद जरूरी है. अच्छा जीवनसाथी सुख और दुख दोनों में बराबर का भागीदार बनता है.

    अगर जीवनसाथी संस्कारी और सुलझा हुआ है तो घर का माहौल हमेशा सुखद बना रहता है. विपरीत परिस्थितियों में सही सलाह देने वाला जीवनसाथी ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत बनता है और जीवन को सफलता की ओर ले जाता है.

    ज्ञान और अच्छी संगति से मिलता है मान-सम्मान

    महात्मा विदुर के मुताबिक सही ज्ञान और अच्छी संगति जीवन का छठा सुख है. सही ज्ञान इंसान को सही और गलत का फर्क सिखाता है. अच्छे और सकारात्मक लोगों के साथ रहने से इंसान के विचार भी बेहतर बनते हैं.

    समझदार और सज्जन लोग समाज में हमेशा आदर पाते हैं. अपनी बुद्धि और अच्छी संगति के बल पर इंसान जीवन की हर बड़ी बाधा को आसानी से पार कर लेता है.

  • कुदरत का अनोखा करिश्मा! जमीन के अंदर दबकर भी सालों जिंदा रहती है ये मछली, जानिए इसका रहस्य?

    कुदरत का अनोखा करिश्मा! जमीन के अंदर दबकर भी सालों जिंदा रहती है ये मछली, जानिए इसका रहस्य?

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    दुनियाभर में कई ऐसे विचित्र जीव-जंतु हैं, जिनके बारे में जानकर हैरानी होती है. इनमें से कुछ जीव अपनी ही प्रजाति के दूसरे जीवों से बिल्कुल अलग होते हैं. अब मछली को ही ले लीजिए. बचपन से ही हम पढ़ते आ रहे हैं कि ‘मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है’, यानी बिना पानी के मछली का जिंदा रहना नामुमकीन है. वो तड़प-तड़प कर मर जाएगी. लेकिन एक मछली ऐसी भी है, जो पानी के बिना महीनों ही नहीं, बल्कि कई सालों तक जमीन पर जिंदा रह सकती है. इस अनोखी और रहस्यमयी मछली का नाम लंगफिश है, जिसे कई जगहों पर सालामैंडरफिश के नाम से भी पहचाना जाता है. यह मीठे पानी में पाई जाने वाली एक विशेष प्रकार की मछली है, जो जमीन पर रहने के अपने अद्भुत गुण के लिए दुनिया भर में मशहूर है.

    लंगफिश, इसके नाम से ही साफ पता चलता है, इस मछली के पास एक बहुत ही विकसित श्वसन तंत्र होता है. इंसानों और जमीनी जानवरों की तरह यह मछली भी सीधे हवा से ऑक्सीजन लेने में सक्षम होती है. लंगफिश का शरीर काफी लंबा और पतला होता है, जो देखने में बिल्कुल बाम मछली की तरह दिखाई देता है. इसके पास धागे जैसे पतले पंख होते हैं, जिनका उपयोग यह पानी में तैरने और सतह पर रेंगने के लिए करती है. यह मछली आमतौर पर उथले पानी के सोर्स जैसे दलदल, पोखर और झीलों में रहना पसंद करती है. जब तक पानी मौजूद रहता है, तब तक यह बाकी सामान्य मछलियों की तरह ही व्यवहार करती है और छोटे जीवों तथा केकड़ों को अपना भोजन बनाती है.

    सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि वयस्क होने पर इनमें से कुछ प्रजातियों के गलफड़े काम करना लगभग बंद कर देते हैं. ऐसे में पानी में रहते हुए भी इन्हें सांस लेने के लिए बार-बार सतह पर आना पड़ता है. अगर इस मछली को लंबे समय तक पानी के अंदर ही दबाकर रखा जाए, तो सांस न ले पाने के कारण यह पानी के भीतर ही डूबकर मर सकती है. यह बात इसे दुनिया की बाकी सभी मछलियों से एकदम अलग और अनोखा बनाती है. जब भीषण गर्मी और सूखे का मौसम आता है और नदियां-तालाब सूखने लगते हैं, तब लंगफिश अपनी जान बचाने का अनोखा तरीका अपनाती है. यह अपने मुंह में मिट्टी भरकर और उसे गलफड़ों से बाहर निकालकर कीचड़ के अंदर एक गहरा गड्ढा खोद लेती है.

    उस गड्ढे की गहराई में पहुंचने के बाद यह अपनी त्वचा से एक विशेष तरल पदार्थ (म्यूकस) छोड़ती है, जो सूखकर एक सुरक्षात्मक खोल बन जाता है. इस खोल के अंदर मछली का केवल मुंह सांस लेने के लिए खुला रहता है. सूखे के इस लंबे दौर में मछली अपनी मेटाबॉलिज्म को बहुत कम कर देती है और अपनी पूंछ के मांसपेशियों के ऊतकों को खाकर जीवित रहती है. जब दोबारा बारिश होती है और मिट्टी नरम पड़ती है, तो यह बाहर निकल आती है. यह मछली सूखे कीचड़ में 4 साल तक बिना पानी के जिंदा रह सकती है. यह मुख्य रूप से अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में पाई जाती है, जहां स्थानीय लोग सूखे के दौरान जमीन खोदकर इसे खाने के लिए निकालते हैं.