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  • Google पर महिलाओं की ये सर्च देखकर मचा हड़कंप! 16 करोड़ बार पूछा- मर्द को बिना सबूत कैसे मारें?

    Google पर महिलाओं की ये सर्च देखकर मचा हड़कंप! 16 करोड़ बार पूछा- मर्द को बिना सबूत कैसे मारें?

    आज के डिजिटल युग में छोटी-बड़ी हर जानकारी के लिए लोग सबसे पहले गूगल की शरण लेते हैं. चाहे मौसम हो, रेसिपी हो या कोई खबर, सर्च बार में टाइप करते ही जवाब मिल जाता है. लेकिन हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला दावा तेजी से वायरल हो रहा है. इस दावे के मुताबिक साल 2025 में महिलाओं ने गूगल पर सबसे ज्यादा “मर्द को बिना सबूत कैसे मारें” जैसे शब्द सर्च किए. कहा जा रहा है कि इस वाक्य को महिलाओं ने 16 करोड़ पचास लाख से अधिक बार सर्च किया.

    पोस्ट में अक्सर एक फाइल फोटो के साथ लिखा जाता है कि महिलाएं मर्दों को मारने के तरीके ढूंढती नजर आ रही हैं. यह दावा देखकर कई लोग हैरान और चिंतित हो गए. कुछ ने इसे समाज की सोच का आईना बताया तो कुछ ने इसे पुरुष विरोधी मानसिकता से जोड़ा. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गूगल ने ऐसा कोई आंकड़ा जारी नहीं किया है.

    फेक है खबर


    गूगल हर साल “Year in Search” रिपोर्ट जारी करता है जिसमें उस साल के टॉप ट्रेंडिंग सर्च बताए जाते हैं. 2025 की रिपोर्ट में भारत में टॉप सर्च में इंडियन प्रीमियर लीग यानी IPL सबसे ऊपर रहा. उसके बाद गूगल जेमिनी, एशिया कप, आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी, प्रो कबड्डी लीग, महाकुंभ, महिला विश्व कप, ग्रोक, सैयारा और धर्मेंद्र जैसे नाम शामिल थे. महिलाओं से जुड़ी सर्च में क्रिकेटर जेमिमा रोड्रिग्ज, स्मृति मंधाना जैसी हस्तियां टॉप पर रहीं. मर्डर या हिंसा के तरीकों से जुड़ी कोई भी क्वेरी टॉप लिस्ट में नहीं थी. वैश्विक स्तर पर भी चार्ली कर्क, के-पॉप, लैबुबू, आईफोन जैसे विषय छाए रहे. इस वायरल दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है. गूगल अपनी सर्च वॉल्यूम के सटीक आंकड़े इस तरह सार्वजनिक नहीं करता कि कोई विशेष वाक्य कितनी बार सर्च हुआ. गूगल ट्रेंड्स सिर्फ सापेक्ष रुचि दिखाता है, पूर्ण संख्या नहीं. इसलिए 16 करोड़ का आंकड़ा पूरी तरह निराधार है.

    फैक्ट चेक में सामने आई सच्चाई


    ब्राजील सहित कई देशों में “महिला को बिना निशान मारे कैसे” जैसे समान दावे पहले भी वायरल हुए थे. उन्हें फैक्ट-चेकर्स और खुद गूगल ने खारिज कर दिया था. उन मामलों में भी कहा गया था कि आंकड़े कंपनी के डेटा पर आधारित नहीं हैं. सोशल मीडिया पर ऐसे दावे फैलने की कई वजहें हैं. सबसे बड़ी वजह है क्लिक और इंगेजमेंट की होड़. चौंकाने वाले, डरावने या विवादित शीर्षक ज्यादा लाइक, शेयर और कमेंट पाते है. एल्गोरिदम ऐसे कंटेंट को आगे बढ़ाता है. कई बार बिना स्रोत के स्क्रीनशॉट या पोस्ट बनाकर फैला दिए जाते हैं. लोग उन्हें सच मानकर आगे शेयर कर देते हैं. कभी-कभी यह जेन्डर वॉर को भड़काने के लिए भी किया जाता है. एक तरफ महिला सुरक्षा और हिंसा के आंकड़े चर्चा में रहते हैं तो दूसरी तरफ पुरुषों के खिलाफ झूठे आरोपों की बातें भी उठती हैं. ऐसे में संतुलित और सत्यापित जानकारी की कमी और बढ़ जाती है.

  • यहां iPhone से भी सस्ता बिक रहा है बंगला, कौड़ियों के दाम खरीद रहे लोग…?

    यहां iPhone से भी सस्ता बिक रहा है बंगला, कौड़ियों के दाम खरीद रहे लोग…?

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    आईफोन से भी सस्ता मिल रहा जापान में घर (इमेज- सोशल मीडिया)

    दुनिया के कई देशों में घर खरीदना सपना बनकर रह जाता है. कीमतें आसमान छूती हैं और आम आदमी के लिए अपना घर बसाना मुश्किल हो जाता है. लेकिन जापान में एक बिल्कुल उलटी तस्वीर देखने को मिल रही है. यहां लाखों घर सालों से खाली पड़े हैं. इन्हें जापानी भाषा में “अकिया” कहा जाता है. अब इन अकिया घरों की बिक्री जोरों पर है और कुछ तो इतने सस्ते हैं कि उनकी कीमत एक अच्छे आईफोन से भी कम बैठ रही है.

    लोग कौड़ियों के दाम में ये घर खरीदने के लिए भाग-भाग कर रजिस्ट्री करवा रहे हैं. जापान में अकिया की समस्या पिछले कई वर्षों से चर्चा में है. देश की आबादी तेजी से बुजुर्ग हो रही है और ग्रामीण इलाकों से युवा शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं. नतीजा यह हुआ कि गांवों और छोटे कस्बों में लाखों घर खाली पड़ गए हैं. मालिक या तो गुजर चुके हैं या शहर में बस गए हैं और घर की देखभाल नहीं कर पा रहे. ऐसे में इन घरों को औने-पौने दामों में बेचा जा रहा है.

    लाखों घर हैं सुनसान
    अनुमान के मुताबिक जापान में ऐसे खाली घरों की संख्या कई लाखों में है और आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है. इन घरों की कीमत उनके आकार, लोकेशन और हालत पर निर्भर करती है. कुछ घर पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं तो कुछ में थोड़ी मरम्मत की जरूरत है. दूरदराज के इलाकों में जहां आबादी बहुत कम है वहां कुछ संपत्तियां बेहद कम कीमत पर उपलब्ध हो जाती हैं. सोशल मीडिया और खबरों में दावा किया जा रहा है कि कुछ बंगले या घर आईफोन की कीमत से भी सस्ते में बिक रहे हैं. यही वजह है कि लोग इन घरों को खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं. भारत सहित दुनिया के कई देशों में लोग इस खबर को पढ़कर हैरान हैं. कई भारतीय यूजर्स सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि वे जापान शिफ्ट होने के तरीके सर्च कर रहे हैं. सस्ता घर होने का लालच किसी को भी आकर्षित कर सकता है. लेकिन हकीकत सिर्फ कीमत तक सीमित नहीं है. इन घरों को खरीदने के बाद कई चुनौतियां भी आती है.

    कई को मरम्मत की जरुरत
    सालों से खाली पड़े इन घरों में सबसे बड़ी चुनौती मरम्मत की है. कई अकिया घर लंबे समय से बंद पड़े होने के कारण क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. छत लीक करती है, दीवारें कमजोर हो जाती हैं, पाइपलाइन और बिजली के तार पुराने पड़ जाते हैं. मरम्मत का खर्च कभी-कभी घर की कीमत से भी ज्यादा बैठ सकता है. इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में नौकरी, स्वास्थ्य सुविधाएं, स्कूल और परिवहन के विकल्प सीमित होते हैं. युवा पीढ़ी के लिए शहरों की सुविधाएं छोड़कर गांव में बसना आसान नहीं होता.

    जापानी सरकार और स्थानीय प्रशासन अकिया समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठा रहे हैं. कुछ जगहों पर खाली घरों को सस्ते में या कभी-कभी मुफ्त में देने की योजनाएं चलाई जाती हैं बशर्ते खरीदार वहां रहें और घर को ठीक रखें. कुछ स्थानीय निकाय विदेशी खरीदारों को भी आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि आबादी बढ़े और इलाका फिर से जीवंत हो जाए. फिर भी प्रक्रिया आसान नहीं है. कानूनी कागजी कार्रवाई, टैक्स और स्थानीय नियमों का पालन करना जरूरी होता है. सोशल मीडिया पर इस विषय ने खासी चर्चा पैदा कर दी है।. कुछ लोग इसे सुनहरा मौका बता रहे हैं तो कुछ चेतावनी दे रहे हैं कि सिर्फ सस्ता होने के चक्कर में फैसला ना करें.

  • बिहार के 4 कलाकार जिन्होंने बॉलीवुड में बनाई खास पहचान..

    बिहार के 4 कलाकार जिन्होंने बॉलीवुड में बनाई खास पहचान..

    बिहार को प्रतिभाओं की धरती कहा जाता है। कला, सिनेमा और मनोरंजन के क्षेत्र में भी बिहार से कई ऐसे कलाकार निकले हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और शानदार अभिनय के दम पर देशभर में पहचान बनाई। इनमें से कुछ कलाकारों ने बॉलीवुड में अपनी अलग छाप छोड़ी है।

    आइए जानते हैं बिहार से जुड़े उन 4 कलाकारों के बारे में, जिन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में खास मुकाम हासिल किया।

    1. प्रकाश झा

    बिहार के चंपारण क्षेत्र से जुड़े प्रकाश झा भारतीय सिनेमा के चर्चित फिल्म निर्देशक, निर्माता और अभिनेता हैं। सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों के लिए उन्हें खास पहचान मिली। गंगाजल, अपहरण, राजनीति, आरक्षण और सत्याग्रह जैसी फिल्मों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।

    2. सोनाक्षी सिन्हा

    सोनाक्षी सिन्हा का जन्म पटना, बिहार में हुआ था। उन्होंने दबंग से बॉलीवुड में शानदार शुरुआत की और इसके बाद राउडी राठौर, अकीरा, फोर्स 2 और इत्तेफाक जैसी फिल्मों में काम किया। अपने अलग अंदाज और अभिनय के कारण उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में मजबूत पहचान बनाई।

    3. मनोज बाजपेयी

    बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से आने वाले मनोज बाजपेयी हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेताओं में गिने जाते हैं। सत्या, गैंग्स ऑफ वासेपुर, अलीगढ़, स्पेशल 26 और सत्याग्रह जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहा गया। वे अपनी दमदार और सहज अदाकारी के लिए जाने जाते हैं।

    4. नेहा शर्मा

    भागलपुर, बिहार में जन्मी नेहा शर्मा ने हिंदी फिल्मों के साथ-साथ अन्य मनोरंजन परियोजनाओं में भी काम किया है। क्रुक, तेरी मेरी कहानी, जयंता भाई की लव स्टोरी और यमला पगला दीवाना 2 जैसी फिल्मों में नजर आ चुकी नेहा शर्मा ने बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई है।

    बिहार की प्रतिभा की अलग पहचान

    बिहार से आने वाले कलाकारों ने हिंदी सिनेमा में अपनी मेहनत, अभिनय और रचनात्मकता के दम पर जगह बनाई है। इन कलाकारों की सफलता यह दिखाती है कि छोटे शहर और साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली प्रतिभाएं भी बड़े मंच पर अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।

  • क्या शारीरिक संबंध बनाने से महिलाओं की त्वचा में बदलाव आता है? जानिए सच..

    क्या शारीरिक संबंध बनाने से महिलाओं की त्वचा में बदलाव आता है? जानिए सच..

    शारीरिक संबंध वयस्कों के जीवन का एक सामान्य हिस्सा हो सकता है। इससे भावनात्मक और शारीरिक अनुभव अलग-अलग लोगों में अलग हो सकते हैं। हालांकि, इंटरनेट पर इससे जुड़े कई ऐसे दावे मिलते हैं जिनमें कहा जाता है कि संबंध बनाने के बाद महिलाओं की त्वचा का रंग, चमक या बनावट स्थायी रूप से बदल जाती है। इन दावों को वैज्ञानिक तथ्यों की नजर से समझना जरूरी है।

    1. त्वचा का रंग गोरा होने का दावा सही नहीं

    शारीरिक संबंध बनाने से महिला की त्वचा स्थायी रूप से गोरी हो जाती है, इसका कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। संबंध बनाने के दौरान शरीर में रक्त प्रवाह और कुछ हार्मोनल बदलाव अस्थायी रूप से हो सकते हैं, जिससे चेहरे पर कुछ समय के लिए निखार या लालिमा दिखाई दे सकती है।

    2. तनाव और मूड पर असर

    सहमति से बनाए गए स्वस्थ शारीरिक संबंधों के दौरान शरीर में ऑक्सीटोसिन और एंडोर्फिन जैसे रसायनों का स्राव हो सकता है। इससे कुछ लोगों को आराम और अच्छा महसूस हो सकता है। तनाव कम महसूस होने से व्यक्ति का चेहरा भी कुछ समय के लिए ज्यादा रिलैक्स नजर आ सकता है।

    3. मुंहासे खत्म होने का दावा

    यह कहना सही नहीं है कि शारीरिक संबंध बनाने से मुंहासे अपने आप खत्म हो जाते हैं। एक्ने मुख्य रूप से हार्मोन, त्वचा में अतिरिक्त तेल, बंद पोर्स, आनुवंशिक कारण और अन्य कारकों से जुड़ा होता है। इसके लिए उचित स्किनकेयर और जरूरत पड़ने पर त्वचा विशेषज्ञ की सलाह ज्यादा प्रभावी है।

    4. ड्राई स्किन या डार्क सर्कल का इलाज नहीं

    शारीरिक संबंध बनाने से त्वचा की ड्राईनेस या आंखों के नीचे के काले घेरे स्थायी रूप से खत्म हो जाते हैं, इसका भी कोई मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इन समस्याओं के पीछे नींद की कमी, एलर्जी, आनुवंशिक कारण, डिहाइड्रेशन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी वजहें हो सकती हैं।

    5. शरीर के आकार में स्थायी बदलाव?

    शारीरिक संबंध बनाने के बाद शरीर की त्वचा के नीचे अचानक वसा जमा होने या शरीर का आकार स्थायी रूप से बदलने का दावा भी सही नहीं है। शरीर का वजन और आकार मुख्य रूप से आनुवंशिकता, हार्मोन, खान-पान, शारीरिक गतिविधि और अन्य कारकों से प्रभावित होते हैं।

    तो फिर संबंध बनाने के बाद चेहरे पर निखार क्यों दिख सकता है?

    कुछ लोगों को शारीरिक संबंध के बाद चेहरा ज्यादा चमकदार या रिलैक्स नजर आ सकता है। इसका संबंध अस्थायी रूप से बढ़े रक्त प्रवाह, शारीरिक गतिविधि, बेहतर मूड और तनाव में कमी से हो सकता है। लेकिन इसे त्वचा के स्थायी बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    निष्कर्ष: शारीरिक संबंध बनाने से महिलाओं की त्वचा गोरी होना, मुंहासे खत्म होना या शरीर का आकार बदलना जैसे दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं। त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, पानी, नियमित स्किनकेयर और जरूरत पड़ने पर त्वचा विशेषज्ञ की सलाह अधिक महत्वपूर्ण है।

  • क्या छोटी इलायची कम कर सकती है बढ़ा हुआ पेट? जानिए सही तथ्य..

    क्या छोटी इलायची कम कर सकती है बढ़ा हुआ पेट? जानिए सही तथ्य..

    बढ़ता वजन और पेट की चर्बी आज कई लोगों के लिए चिंता का विषय है। वजन कम करने के लिए लोग अलग-अलग घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। छोटी इलायची भी ऐसा ही एक मसाला है, जिसे पाचन और स्वाद के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

    हालांकि, सिर्फ इलायची खाने से पेट की चर्बी तेजी से कम होने या कुछ महीनों में कई किलो वजन घटने का दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है। इसे संतुलित डाइट और स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा जरूर बनाया जा सकता है।

    1. खाने में इलायची का इस्तेमाल

    छोटी इलायची को चाय, दूध, सब्जी या अन्य व्यंजनों में स्वाद और खुशबू के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें कुछ प्राकृतिक पौधीय यौगिक पाए जाते हैं, लेकिन यह कोई फैट-बर्निंग दवा नहीं है।

    2. पाचन के लिए हो सकती है उपयोगी

    इलायची का पारंपरिक रूप से पाचन संबंधी परेशानियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। संतुलित मात्रा में इसका सेवन भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ पाचन के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

    3. वजन घटाने में सीधे इलाज का विकल्प नहीं

    इलायची में कुछ पोषक तत्व और पौधीय यौगिक जरूर पाए जाते हैं, लेकिन रोजाना 2-3 इलायची खाने से निश्चित रूप से 3 से 5 किलो वजन कम होने का दावा सही नहीं माना जा सकता।

    4. पेट की चर्बी कैसे कम करें?

    पेट की चर्बी कम करने के लिए केवल किसी एक मसाले या घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय कुल कैलोरी सेवन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार पर ध्यान देना ज्यादा प्रभावी है।

    5. इलायची को डाइट में कैसे शामिल करें?

    आप छोटी इलायची को सीमित मात्रा में चाय, दूध या भोजन में शामिल कर सकते हैं। इसे वजन घटाने की दवा समझकर अधिक मात्रा में खाने की जरूरत नहीं है।

    निष्कर्ष: छोटी इलायची एक सुगंधित मसाला है और संतुलित आहार का हिस्सा बन सकती है, लेकिन इसे पेट की चर्बी घटाने का पक्का उपाय नहीं माना जाना चाहिए। अगर आपका वजन तेजी से बढ़ रहा है या पेट की चर्बी लगातार बढ़ रही है, तो डॉक्टर या डाइटिशियन से उचित सलाह लेना बेहतर है।

  • गर्भवती होने के शुरुआती संकेत कौन-कौन से हैं? जानिए जरूरी लक्षण..

    गर्भवती होने के शुरुआती संकेत कौन-कौन से हैं? जानिए जरूरी लक्षण..

    प्रेग्नेंसी हर महिला के लिए जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव हो सकता है। गर्भधारण के बाद शरीर में हार्मोनल बदलाव शुरू होते हैं, जिनकी वजह से कुछ शुरुआती लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, हर महिला में ये लक्षण एक जैसे नहीं होते और केवल लक्षणों के आधार पर प्रेग्नेंसी की पुष्टि नहीं की जा सकती।

    आइए जानते हैं गर्भावस्था के कुछ सामान्य शुरुआती संकेत।

    1. पीरियड्स मिस होना

    नियमित मासिक धर्म वाली महिला में पीरियड्स का समय पर न आना प्रेग्नेंसी का एक सामान्य शुरुआती संकेत हो सकता है। हालांकि, तनाव, हार्मोनल असंतुलन, वजन में बदलाव या अन्य कारणों से भी पीरियड्स देर से आ सकते हैं।

    2. बार-बार पेशाब आना

    गर्भावस्था के शुरुआती समय में हार्मोनल बदलाव और शरीर में रक्त प्रवाह बढ़ने के कारण कुछ महिलाओं को सामान्य से अधिक बार पेशाब आने की जरूरत महसूस हो सकती है।

    3. मतली या उल्टी

    प्रेग्नेंसी के शुरुआती हफ्तों में कई महिलाओं को मतली या उल्टी की समस्या हो सकती है। इसे आमतौर पर ‘मॉर्निंग सिकनेस’ कहा जाता है, हालांकि यह दिन के किसी भी समय हो सकती है।

    4. मूड में बदलाव

    गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव भावनाओं और मूड को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ महिलाओं को चिड़चिड़ापन, भावुकता या अचानक मूड बदलने जैसी समस्या महसूस हो सकती है।

    5. थकान और कमजोरी

    शुरुआती गर्भावस्था में हार्मोनल बदलावों के कारण सामान्य से ज्यादा थकान या नींद महसूस हो सकती है। पर्याप्त आराम के बावजूद अगर थकान बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    6. स्तनों में बदलाव

    कुछ महिलाओं को शुरुआती गर्भावस्था में स्तनों में दर्द, संवेदनशीलता, भारीपन या निप्पल के आसपास बदलाव महसूस हो सकते हैं।

    प्रेग्नेंसी की पुष्टि कैसे करें?

    इनमें से कोई भी लक्षण अकेले गर्भावस्था की पक्की पुष्टि नहीं करता। अगर पीरियड्स मिस हो गए हैं और गर्भधारण की संभावना है, तो होम प्रेग्नेंसी टेस्ट किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से आगे की जांच कराई जा सकती है।

    जरूरी बात: अगर प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो डॉक्टर से संपर्क करके उचित प्रेग्नेंसी केयर शुरू करना महत्वपूर्ण है। तेज पेट दर्द, अधिक रक्तस्राव या चक्कर जैसी गंभीर समस्या होने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लें।

  • बारिश में बेजान हो गया है चेहरा? अपनाएं ये आदतें… त्वचा रहेगी हेल्दी और ग्लोइंग!

    बारिश में बेजान हो गया है चेहरा? अपनाएं ये आदतें… त्वचा रहेगी हेल्दी और ग्लोइंग!

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    देश के कई राज्यों में इस समय मानसून का असर देखने को मिल रहा है. बारिश जहां गर्मी से राहत देती है, वहीं बढ़ी हुई नमी त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं की वजह भी बन सकती है. इस मौसम में पसीना, तेल और धूल-मिट्टी त्वचा पर जल्दी जमा हो जाती है. इससे ऑयली स्किन, पिंपल्स, रैशेज, खुजली और फंगल इंफेक्शन जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं. ऐसे में सिर्फ चेहरा धोना ही काफी नहीं है, बल्कि सही स्किनकेयर रूटीन, संतुलित खानपान और साफ-सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है. कुछ आसान आदतें अपनाकर मानसून में भी त्वचा को स्वस्थ, साफ और चमकदार रखा जा सकता है. चलिए जानते हैं कैसे…

    मानसून में ऐसे रखें त्वचा का ख्याल
    बारिश के मौसम में दिन में दो बार हल्के फेस वॉश से चेहरा साफ करें. इससे त्वचा पर जमा पसीना, अतिरिक्त तेल और गंदगी आसानी से हट जाती है. चेहरा धोने के बाद हल्का मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं, क्योंकि ऑयली स्किन को भी नमी की जरूरत होती है. बाहर निकलते समय सनस्क्रीन लगाना ना भूलें.

    अगर ज्यादा पसीना आता है, तो चेहरे को साफ टिश्यू या मुलायम कपड़े से हल्के हाथों से पोंछें. बारिश में भीगने के बाद चेहरा और शरीर साफ पानी से धो लें. साथ ही लंबे समय तक मेकअप लगाए रखने से बचें और रात में सोने से पहले मेकअप पूरी तरह साफ कर लें.

    इन गलतियों से करें परहेज
    मानसून में गंदे तौलिये, मेकअप ब्रश और तकिए के कवर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इनमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे स्किन इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़ों में ज्यादा देर तक न रहें. चेहरे पर बार-बार हाथ लगाने या पिंपल्स फोड़ने से भी बचें, क्योंकि इससे संक्रमण और दाग की समस्या हो सकती है. बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी क्रीम या दवा का इस्तेमाल न करें.

    डाइट का भी रखें ध्यान
    स्वस्थ त्वचा के लिए मौसमी फल, हरी सब्जियां, सलाद, दालें, दही और सूखे मेवे अपनी डाइट में शामिल करें. संतरा, अमरूद और आंवला जैसे विटामिन सी से भरपूर फल त्वचा के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. दिनभर पर्याप्त पानी पीएं और तली-भुनी व ज्यादा मीठी चीजों का सेवन कम करें.

    कब लें डॉक्टर की सलाह
    अगर त्वचा पर लगातार खुजली, लालपन, रैशेज, सूजन, दर्द, पानी वाले दाने या बार-बार इंफेक्शन हो रहा है, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है. वहीं, यदि पिंपल्स लगातार बढ़ रहे हों या घरेलू देखभाल के बाद भी समस्या ठीक न हो, तो समय रहते डॉक्टर से जांच कराना बेहतर रहता है. इससे त्वचा की परेशानी गंभीर होने से बच सकती है.

  • बारिश में अचानक क्यों निकल आते हैं सांप? सावन से जुड़ी इस वजह से 90% लोग हैं अनजान

    बारिश में अचानक क्यों निकल आते हैं सांप? सावन से जुड़ी इस वजह से 90% लोग हैं अनजान

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    सावन का महीना शुरू होते ही खेतों, सड़कों और कई बार घरों के आसपास भी सांप दिखाई देने की घटनाएं बढ़ जाती हैं. सोशल मीडिया पर भी इस मौसम में सांपों के वीडियो और तस्वीरें खूब वायरल होती हैं. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या सावन में सचमुच सांप ज्यादा निकलते हैं और क्या इसका संबंध नाग पंचमी से है? तो चलिए आपको बताते हैं इसका सही जवाब…

    बारिश के कारण बिलों से बाहर आते हैं सांप
    सांप आमतौर पर जमीन के अंदर बने बिलों, दरारों, झाड़ियों और घास के बीच छिपकर रहते हैं. सावन के दौरान तेज बारिश होने से इनके बिलों में पानी भर जाता है. ऐसे में सांप सुरक्षित जगह की तलाश में बाहर निकलने को मजबूर हो जाते हैं. यही वजह है कि इस मौसम में खेतों, सड़कों और रिहायशी इलाकों में इनके दिखने की घटनाएं बढ़ जाती हैं.

    तापमान और नमी बनाते हैं अनुकूल माहौल
    सांप ठंडे खून वाले जीव होते हैं. उनके शरीर का तापमान वातावरण के अनुसार बदलता रहता है. गर्मियों में तेज गर्मी और डिहाइड्रेशन के खतरे की वजह से वे कम सक्रिय रहते हैं. वहीं बरसात के मौसम में तापमान कम और नमी अधिक होने से उनके लिए बाहर निकलना आसान हो जाता है. इसलिए सावन में उनकी गतिविधियां सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा दिखाई देती हैं.

    भोजन की तलाश भी है बड़ी वजह
    मानसून में मेंढक, चूहे और कीड़े-मकोड़े तेजी से बढ़ते हैं. यही जीव सांपों का मुख्य भोजन हैं. जब भोजन आसानी से मिलने लगता है तो सांप भी ज्यादा सक्रिय होकर शिकार की तलाश में बाहर निकलते हैं. इसलिए बारिश के मौसम में उनका दिखना स्वाभाविक माना जाता है.

    प्रजनन काल का भी पड़ता है असर
    जानकारों के मुताबिक कई प्रजातियों के सांपों का प्रजनन काल भी मानसून के दौरान होता है. इस समय वे साथी की तलाश में अधिक दूरी तय करते हैं. इससे भी लोगों को सांप पहले की तुलना में ज्यादा नजर आते हैं.

    नाग पंचमी और धार्मिक मान्यता
    सावन में ही नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है, जो नाग देवता और भगवान शिव को समर्पित है. इस दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे सर्पदंश के भय से रक्षा होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. हालांकि, इसी समय सांप प्राकृतिक कारणों से ज्यादा दिखाई देते हैं, इसलिए लोगों को लगता है कि उनका संबंध सीधे नाग पंचमी से है.

  • सुबह खाली पेट फल खाना पड़ सकता है भारी! इन फलों से बनाएं दूरी, जानें क्यों..

    सुबह खाली पेट फल खाना पड़ सकता है भारी! इन फलों से बनाएं दूरी, जानें क्यों..

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    फल शरीर के लिए जरूरी विटामिन, मिनरल, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत हैं. इसलिए डॉक्टर और एक्सपर्ट रोजाना फल खाने की सलाह देते हैं. लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर फल को खाली पेट खाना सभी लोगों के लिए फायदेमंद हो. कुछ फलों में मौजूद प्राकृतिक एसिड या ज्यादा मात्रा में प्राकृतिक शुगर कुछ लोगों में एसिडिटी, गैस, पेट फूलने, सीने में जलन या ब्लड शुगर में तेजी से उतार-चढ़ाव जैसी दिक्कतें पैदा कर सकती है. आइए जानते हैं ऐसे 6 फलों के बारे में जिन्हें भूलकर भी खाली पेट नहीं खाना चाहिए.

    संतरा और खट्टे फल
    संतरा, मौसंबी और दूसरे खट्टे फलों में विटामिन C भरपूर मात्रा में होता है. हालांकि इनमें प्राकृतिक एसिड भी मौजूद होता है. जिन लोगों को एसिडिटी या गैस्ट्रिक समस्या रहती है, उन्हें खाली पेट इनका सेवन करने से सीने में जलन या पेट में असहजता महसूस हो सकती है.

    इमली
    इमली का स्वाद खट्टा होता है और इसमें एसिड की मात्रा अधिक होती है. खाली पेट इमली खाने से कुछ लोगों में एसिडिटी बढ़ सकती है और सीने में जलन की शिकायत हो सकती है.

    कच्चा अमरूद
    अमरूद पोषण से भरपूर फल है, लेकिन बिल्कुल कच्चा या अधिक मात्रा में खाली पेट खाने से कुछ लोगों को गैस, पेट फूलने या भारीपन की समस्या हो सकती है.

    लीची
    लीची स्वादिष्ट और रसीला फल है, लेकिन इसे खाली पेट ज्यादा मात्रा में खाने से बचना चाहिए. खासकर बच्चों के लिए इसे सीमित मात्रा में और भोजन के साथ या बाद में खाना बेहतर माना जाता है.

    अनानास
    अनानास में ब्रोमेलैन नाम का एंजाइम और प्राकृतिक एसिड मौजूद होते हैं. कुछ लोगों को खाली पेट इसका सेवन करने से पेट में जलन, बेचैनी या असहजता महसूस हो सकती है.

    अंगूर
    अंगूर में प्राकृतिक शुगर अच्छी मात्रा में होती है. खाली पेट ज्यादा अंगूर खाने से कुछ लोगों का ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है, जिससे थोड़ी देर बाद फिर से भूख महसूस होने लगती है.

  • एक साल से सरकारी रिकॉर्ड में ‘मुर्दा’ था शख्स, कलेक्टर के पास पहुंचकर बोला- साहब, मैं जिंदा हूं..

    एक साल से सरकारी रिकॉर्ड में ‘मुर्दा’ था शख्स, कलेक्टर के पास पहुंचकर बोला- साहब, मैं जिंदा हूं..

    मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक अनोखा मामले सामने आया है. मर चुका युवक एक अचानक जिंदा हो गया और कलेक्ट्रेट ऑफिस पहुंच गया. युवक ने कलेक्टर से गुहार लगाई कि साहब, मैं जिंदा हूं. दरअसल ये शख्स जिंदा हैं, लेकिन कागजों में इनको मृत घोषित कर दिया गया है. जिसकी वजह से इनको तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. इतना ही नहीं, जमीन जायदाद का काम भी अटका हुआ है.

    पिता की जगह बेटे का मृत्यु प्रमाण पत्र-
    शिवपुरी जिले की रन्नौद नगर परिषद की एक लापरवाही ने जिंदा इंसान को कागजों में मृत घोषित कर दिया. मामला सेसई निवासी गिटला आदिवासी का है. पिता के निधन के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने गए तो अधिकारियों ने पिता की जगह बेटे गिटला का ही मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिया.

    ‘साहब, मैं जिंदा हूं…’
    गिटला ने शिवपुरी कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर को आवेदन सौंपा. उसने बताया कि मेरे पिताजी का निधन 2022 में हो गया था. नामांतरण करवाने गया तो पता चला कि नगर परिषद रन्नौद ने गलती से मेरा मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिया है. ये प्रमाण पत्र 1 साल पहले बना था. गिटला का कहना है कि नगर परिषद में कई बार शिकायत की, सुनवाई नहीं हुई. अब जमीन-जायदाद के काम अटक गए हैं. बैंक, राशन, सरकारी योजनाएं सब बंद. जिंदा होते हुए भी सिस्टम ने उसे मृत मान लिया. बड़ा सवाल यह है कि रन्नौद नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों की गलती का खामियाजा पीड़ित युवक भुगत रहा है.

    उचित कार्रवाई होगी- एडीएम
    हालांकि प्रशासन भी इस मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिला रहा है. लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इस पूरे मामले को लेकर एडीएम दिनेश चंद शुक्ला का कहना है कि यह पूरा मामला मीडिया के द्वारा उनके संज्ञान में लाया गया है इस पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी.