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  • पार्लर जाने की जरूरत नहीं! घर बैठे इस फुट सोक से पैरों को बनाएं सॉफ्ट और खूबसूरत..

    पार्लर जाने की जरूरत नहीं! घर बैठे इस फुट सोक से पैरों को बनाएं सॉफ्ट और खूबसूरत..

    Pedicure Tips: घर बैठे मुलायम पैर चाहिए? तो ये खास फुट सोक करें ट्राई... बेजान पैरों में आ जाएगी जान!

    पेडीक्योर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में स्क्रबिंग और डेड स्किन हटाने की बात आती है. लेकिन पैरों की अच्छी देखभाल के लिए सिर्फ स्क्रबिंग ही जरूरी नहीं है. पेडीक्योर में फुट सोक भी एक अहम स्टेप माना जाता है. इसमें कुछ खास चीजों को गुनगुने पानी में मिलाकर पैरों को कुछ देर भिगोया जाता है.

    इससे पैरों की त्वचा मुलायम होती है और स्क्रबिंग के दौरान डेड स्किन और कैलस को हटाना आसान हो जाता है. इतना ही नहीं, सही फुट सोक पैरों की थकान और दर्द से राहत देने में भी मदद कर सकता है.फुट सोक क्या होता है और क्यों जरूरी है फुट सोक के लिए गुनगुने पानी में नमक, क्रिस्टल, जेली या अन्य सामग्री मिलाई जाती है. कई लोग पानी में सिर्फ शैंपू डालकर पैर भिगोते हैं, लेकिन इससे पैरों को खास फायदा नहीं मिलता.

    फुट सोक का इस्तेमाल करने से त्वचा ज्यादा मुलायम हो सकती है और पैरों की सफाई बेहतर तरीके से की जा सकती है.फुट सोक के फायदे ये हैं पैरों की त्वचा मुलायम होती है डेड स्किन हटाना आसान हो जाता है पैरों की थकान कम महसूस हो सकती है पैरों में आराम मिलता है हल्की सूजन में राहत मिल सकती है पैरों की बदबू कम करने में मदद मिल सकती है स्क्रबिंग के दौरान कैलस आसानी से हटाया जा सकता हैइप्सम सॉल्ट फुट सोक इप्सम सॉल्ट फुट सोक के लिए काफी लोकप्रिय है.

    गुनगुने पानी में करीब दो चम्मच इप्सम सॉल्ट डालकर लगभग 20 मिनट तक पैर भिगोए जा सकते हैं. इससे पैर मुलायम होने के साथ थकान कम महसूस हो सकती है. यह पैरों की मांसपेशियों को आराम देने और हल्की सूजन में राहत देने में भी मदद कर सकता है. जो लोग लंबे समय तक खड़े रहते हैं, जिम जाते हैं या ज्यादा शारीरिक मेहनत करते हैं, उनके लिए इप्सम सॉल्ट फुट सोक आराम देने वाला विकल्प हो सकता है.जेली पेडीक्योर जेली पेडीक्योर इन दिनों काफी पसंद किया जा रहा है.

    इसमें पानी में खास जेली सोक डालने पर पानी जेली जैसा हो जाता है. इसमें आमतौर पर सोडियम पॉलीएक्रिलेट के साथ ग्लिसरीन, एलोवेरा, एसेंशियल ऑयल और प्लांट एक्सट्रैक्ट जैसे तत्व हो सकते हैं. यह पैरों की त्वचा को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने और कैलस को मुलायम करने में मदद करता है. इससे स्क्रैपर की मदद से डेड स्किन हटाना आसान हो जाता है.किसके लिए है बेस्ट जिन लोगों के पैर बहुत रूखे रहते हैं या एड़ियां बार-बार फटती हैं,

    उनके लिए जेली पेडीक्योर एक अच्छा विकल्प हो सकता है. हालांकि फुट सोक अकेले कैलस या डेड स्किन को पूरी तरह नहीं हटाता. यह त्वचा को मुलायम करता है, जिसके बाद स्क्रबिंग से डेड स्किन हटाना आसान हो जाता है.

  • 16 साल की उम्र में तालाब ही बना घर! पानी के अंदर खाता-पीता और सोता है इकबाल, वजह चौंकाने वाली..

    16 साल की उम्र में तालाब ही बना घर! पानी के अंदर खाता-पीता और सोता है इकबाल, वजह चौंकाने वाली..

    5 साल से तालाब में रह रहा 16 साल का इकबाल, पानी से बाहर आते ही शरीर जलने लगता है; खाना-पीना और सोना सब पानी में

    इकबाल शेख के लिए पानी ही बन गया है जिंदगी

    इकबाल शेख के लिए पानी ही बन गया है जिंदगी

    शरीर में होती है जलन

    शरीर में होती है जलन

    मुर्शिदाबाद के बेलडांगा का रहने वाला 16 वर्षीय इकबाल शेख इन दिनों अपनी अनोखी जीवनशैली के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है. एक-दो दिन नहीं, बल्कि लगातार चार से पांच दिन, कभी-कभी सात दिनों तक भी वह पानी में ही रहकर समय बिताता है. इसलिए स्थानीय लोगों का कहना है कि उसके लिए “जल ही जीवन” नहीं, बल्कि “जल में ही जीवन” है.

    तालाब में 5 साल से रह रहा इकबाल स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले लगभग पांच वर्षों से इकबाल घर छोड़कर बेलडांगा शहर के विभिन्न तालाबों में दिन-रात पानी में तैरते हुए रहता है. यह न तो किसी शौक का परिणाम है और न ही किसी रिकॉर्ड बनाने की कोशिश.

    पानी से निकलने पर शरीर में होती है जलन इकबाल का कहना है कि उसके शरीर में लगातार जलन होती है. उसका दावा है कि उस पर जिन्न, परी या किसी अदृश्य शक्ति का साया है. जैसे ही वह पानी से बाहर निकलता है, शरीर में तेज जलन शुरू हो जाती है, जबकि पानी में उतरते ही उसे राहत मिलती है.

    इलाज में नहीं मिली मदद लगातार कई दिनों तक पानी में रहने के कारण उसके हाथ-पैर और पूरे शरीर की त्वचा सफेद पड़ गई है. लंबे समय तक पानी में रहने से वह सर्दी-खांसी से भी पीड़ित हो गया है. इकबाल का आरोप है कि इलाज के लिए वह स्थानीय ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गया था, लेकिन उसे उचित सहायता नहीं मिली. आर्थिक तंगी के कारण उसका परिवार निजी अस्पताल में इलाज कराने में भी असमर्थ है.

    हालांकि, स्थानीय लोग अब उसके इलाज के लिए आगे आ रहे हैं. रोज़ बड़ी संख्या में स्कूली छात्र और आम लोग तालाब के किनारे उसे देखने के लिए जुटते हैं. कई लोग उसे चिउड़ा, बिस्कुट और अन्य खाद्य सामग्री भी देते हैं. लेकिन कोई भी उसे घर में रोक नहीं पाता.

    चर्चा का विषय बनी इकबाल की कहानी इकबाल की यह असामान्य स्थिति देखकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है. उनका सवाल है कि आखिर इस तरह वह कब तक जीवित रह पाएगा. वहीं, 16 वर्षीय इकबाल की यह कहानी अब पूरे इलाके में कौतूहल और चर्चा का विषय बन गई है.

  • ग्रीन और ब्लैक टी में क्या है अंतर, रोज पीने के लिए कौन-सी चाय बेहतर?

    ग्रीन और ब्लैक टी में क्या है अंतर, रोज पीने के लिए कौन-सी चाय बेहतर?

    आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर काफी सजग हो गए हैं. लोग हेल्दी लाइफस्टाइल का ध्यान रख रहे हैं. फिटनेस बनाए रखने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं. वजन घटाना हो या इम्यूनिटी बेहतर करनी है, इसके लिए ग्रीन टी और ब्लैक टी इस समय काफी लोकप्रिय हो चुकी हैं. हालांकि, कई लोग इस बात को लेकर संशय में रहते हैं कि आखिर ग्रीन टी पिएं या ब्लैक टी. यदि आप भी किस चाय को पिएं, इसको तय नहीं कर पा रहे हैं तो हम आपको बता रहे हैं कि आखिर कौन-सी चाय ज्यादा फायदेमंद है.

    एक ही पौधे से तैयार होती हैं दोनों चाय आपको मालूम हो कि ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों ही एक ही पौधे से तैयार होती हैं. ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों कैमेलिया साइनेंसिस पौधे की पत्तियों से बनाई जाती हैं. बस इन्हें प्रोसेस करने का तरीका अलग होता है. इसी के चलते इन दोनों चाय का स्वाद, रंग से लेकर पोषक तत्वों में अंतर आ जाता है.

    ग्रीन टी कम प्रोसेस की जाती है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट खासकर कैटेचिन अधिक मात्रा में पाए जाते हैं. इसका स्वाद हल्का और थोड़ा कड़वा होता है. इस चाय में कैफीन की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है. उधर, ब्लैक टी पूरी तरह ऑक्सीडाइज की जाती है. इसका स्वाद गहरा होता है. इसमें कैफीन की मात्रा ग्रीन टी से अधिक होती है. ब्लैक टी में थियोफ्लेविन और थियोरूबिजिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं.

    ग्रीन टी पीने के फायदे ग्रीन टी वजन नियंत्रित करने में सहायक होती है. यह चाय एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है. ऐसे में दिल की सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है. ग्रीन टी त्वचा के लिए फायदेमंद होती है. यह चाय शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद करती है.

    ब्लैक टी पीने के फायदे ब्लैक टी शरीर में ऊर्जा और सतर्कता बढ़ाने में मदद करती है. यह चाय मानसिक फोकस बेहतर करने में सहायक हो सकती है. इस चाय को पीने से पाचन तंत्र ठीक रहता है. यह टी हृदय के अच्छी मानी जाती है. इस चाय को सुबह में पीने से शरीर को ऊर्जा मिलेती है. ऐसे लोग इस चाय को सुबह में पीना पसंद करते हैं. सुबह की शुरुआत के लिए अच्छा विकल्प मानी जाती है।

    किसे पीनी चाहिए ग्रीन टी और किसे ब्लैक टी अब सवाल उठ रहा है कि किसी ग्रीन टी और किसे ब्लैक टी पीनी चाहिए क्योंकि दोनों चाय में कुछ न कुछ विशेषताएं हैं. वैसे लोग जो अपना वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें ग्रीन टी पीनी चाहिए. वैसे लोग जो कम कैफीन पसंद करते हैं, उनके लिए ग्रीन टी अच्छी है. वैसे लोग जो एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर पेय लेना चाहते हैं, उनके लिए ग्रीन टी अच्छी हो सकती है. उधर, ब्लैट की वे लोग पी सकते हैं, जिन्हें सुबह अधिक ऊर्जा और ताजगी चाहिए. वैसे लोग जो स्ट्रॉन्ग फ्लेवर पसंद करते हैं, वे ब्लैक टी पी सकते हैं. वैसे लोग जिन्हें किसी काम में पूरे दिन फोकस बनाए रखना है, वे ब्लैक टी पी सकते हैं.

    ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों में से क्या पिएं यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं और एंटीऑक्सीडेंट लेना चाहते हैं तो आपके लिए ग्रीन टी बेहतर विकल्प है. उधर, यदि आपको पूरे दिन ऊर्जा और बेहतर फोकस चाहिए तो ब्लैक टी उपयुक्त हो सकती है. ऐसे में आप किसी भी चाय का चुनाव अपनी सेहत की स्थिति, कैफीन सहनशीलता और डॉक्टर की सलाह को ध्यान में रखकर कर सकते हैं.

  • एक बार घर पर बनाएं गुलाब की पंखुड़ियों से नेचुरल लिप बाम… मिनटों में पाएं मुलायम होंठ

    एक बार घर पर बनाएं गुलाब की पंखुड़ियों से नेचुरल लिप बाम… मिनटों में पाएं मुलायम होंठ

    गुलाबी होठ चाहिए? एक बार घर पर बनाएं गुलाब की पंखुड़ियों से नेचुरल लिप बाम... मिनटों में पाएं मुलायम होंठ

    बदलते मौसम में होंठों का सूखना, फटना और परतदार होना आम समस्या है. खासकर मौसम में नमी कम होने पर होंठ जल्दी ड्राई होने लगते हैं. ऐसे में बाजार के लिप बाम पर निर्भर रहने के बजाय आप घर पर ही गुलाब की पंखुड़ियों से नेचुरल लिप बाम बना सकते हैं.

    इसे बनाने के लिए गुलाब की पंखुड़ियां, नारियल या बादाम का तेल, शहद और विटामिन ई जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है.गुलाब की पंखुड़ियां होंठों को फायदा गुलाब की पंखुड़ियां सिर्फ खुशबू और खूबसूरती के लिए ही नहीं जानी जातीं, बल्कि इनमें ऐसे प्राकृतिक तत्व भी पाए जाते हैं जो त्वचा को नमी देने में मदद कर सकते हैं. गुलाब की पंखुड़ियों से बना लिप बाम होंठों को मुलायम रखने के साथ उन्हें ताजगी भरा और हेल्दी लुक देने में मदद कर सकता है.लिप बाम बनाने का सामान घर पर गुलाब का लिप बाम बनाने के लिए 1 कप ताजी गुलाब की पंखुड़ियां, 2 बड़े चम्मच नारियल या बादाम का तेल, 1 बड़ा चम्मच बीजवैक्स या पेट्रोलियम जेली, आधा चम्मच शहद और 1 विटामिन ई कैप्सूल की जरूरत होगी. विटामिन ई का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है,

    इसे आप अपनी पसंद के अनुसार डाल सकते हैं.ऐसे बनाएं लिप बाम सबसे पहले गुलाब की पंखुड़ियों को अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखा लें. अब इन्हें थोड़े से नारियल तेल या कच्चे दूध के साथ पीसकर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को नारियल तेल के साथ धीमी आंच पर डबल बॉयलर की मदद से करीब 10 से 12 मिनट तक गर्म करें. इसके बाद मिश्रण को छानकर गुलाब से तैयार तेल अलग कर लें. अब इस तेल में पेट्रोलियम जेली डालकर हल्का गर्म करें, ताकि यह अच्छी तरह पिघलकर तेल में मिल जाए. इसमें आधा चम्मच शहद और विटामिन ई कैप्सूल का तेल डालकर अच्छी तरह मिलाएं. तैयार मिश्रण को साफ कंटेनर में डालकर 20 से 30 मिनट के लिए फ्रिज में रखें. ठंडा होने के बाद आपका होममेड लिप बाम तैयार है.

    ऐसे करें इस्तेमाल लिप बाम बनाने के लिए हमेशा साफ और ताजी गुलाब की पंखुड़ियों का इस्तेमाल करें. इसे साफ और एयरटाइट डिब्बे में रखें. पहली बार इस्तेमाल करने से पहले थोड़ा सा प्रोडक्ट लगाकर पैच टेस्ट जरूर करें. अगर होंठों पर जलन, लालिमा या किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें.

  • लंच के बाद क्यों आने लगती है तेज नींद? जानिए इसकी वजह और सुस्ती दूर करने के आसान तरीके..?

    लंच के बाद क्यों आने लगती है तेज नींद? जानिए इसकी वजह और सुस्ती दूर करने के आसान तरीके..?

    लंच के बाद क्यों आने लगती है तेज नींद? जानिए इसकी वजह और सुस्ती दूर करने के आसान तरीके

    दोपहर का खाना खाने के बाद अगर आपकी आंखें भारी होने लगती हैं और काम करने का मन नहीं करता, तो आप अकेले नहीं हैं. कई लोगों को लंच के बाद अचानक नींद और सुस्ती महसूस होती है. इसे पोस्ट मील स्लीपिनेस कहा जाता है. आमतौर पर यह किसी बीमारी का संकेत नहीं होती. हालांकि, अब सवाल उठता है कि आखिर खाने के बाद भयंकर नींद क्यों आती है? चलिए आपको इसका सही जवाब बताते हैं…दोपहर में क्यों बढ़ जाती है नींद दरअसल, हमारे शरीर में 24 घंटे की एक प्राकृतिक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है. दोपहर के समय इस घड़ी में ऐसा बदलाव आता है, जिससे कुछ समय के लिए जागे रहने का संकेत कम हो जाता है. यही वजह है कि कई लोगों को बिना खाना खाए भी दोपहर में सुस्ती महसूस होती है.

    खाना खाने के बाद यह असर और ज्यादा महसूस हो सकता है.ज्यादा और भारी खाना भी है वजह अगर लंच बहुत ज्यादा या भारी है, तो उसके बाद नींद और सुस्ती बढ़ सकती है. खासकर बहुत ज्यादा कैलोरी, तली-भुनी चीजें, मीठी चीजें और सफेद आटे से बनी चीजें खाने पर यह असर ज्यादा महसूस हो सकता है. खाना खाने के बाद शरीर में पाचन से जुड़े कई बदलाव होते हैं. ब्लड ग्लूकोज और पोषक तत्वों में बदलाव के साथ दिमाग के जागने और नींद से जुड़े संकेत भी बदलते हैं. इन सभी प्रक्रियाओं का मिलाजुला असर सुस्ती के रूप में दिखाई दे सकता है.

    रात में नींद पूरी न होना भी कारण अगर रात में आपकी नींद पूरी नहीं हुई है, तो दोपहर के खाने के बाद सुस्ती ज्यादा महसूस हो सकती है. लंबे समय तक जागने पर शरीर की नींद की जरूरत बढ़ती जाती है. इसलिए दिनभर एक्टिव रहने के लिए रात में पर्याप्त और अच्छी नींद लेना जरूरी है.सुस्ती कम करने के लिए क्या करें दोपहर में जरूरत से ज्यादा खाना खाने से बचें और संतुलित भोजन लें. खाने के बाद कुछ देर हल्की चाल से टहलना भी मददगार हो सकता है.

    पर्याप्त पानी पीना और रात में अच्छी नींद लेना भी जरूरी है. अगर हर दिन खाना खाने के बाद बहुत ज्यादा नींद, चक्कर या कमजोरी महसूस होती है या इसका असर रोजमर्रा के काम पर पड़ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लें. लगातार ज्यादा नींद कभी-कभी नींद की समस्या, खून की कमी, थायराइड या ब्लड शुगर से जुड़ी परेशानी का संकेत भी हो सकती है.

  • लोगों के राज जानना बना कमाई का जरिया, महिला ने चुगली से खड़े कर लिए दो-दो मकान..

    लोगों के राज जानना बना कमाई का जरिया, महिला ने चुगली से खड़े कर लिए दो-दो मकान..

    चुगली कर महिला ने खरीद लिए दो-दो घर, बस पैसे लेकर लीक कर देती है मोहल्ले का सीक्रेट, लोग मुंह बंद करने के लिए देते हैं पैसे

    मोहल्ले में कोई खबर हो और आपको सबसे पहले पता चल जाए, तो अक्सर लोग आपको चुगलखोर कह देते हैं लेकिन कोलंबिया की 67 साल की मिरियम ने इसी आदत को कमाई का जरिया बना लिया. वो पड़ोस के लोगों की बातें सुनती हैं और जरूरत पड़ने पर इन्हें अच्छी कीमत पर बेचती हैं. मिरियम का दावा है कि इस अनोखे काम से उन्होंने दो घर तक खरीद लिए हैं.

    घर के बाहर बैठकर सुनती हैं मोहल्ले की खबरें मिरियम कोलंबिया की रहने वाली हैं और खुद को प्रोफेशनल चिसमोसा यानी गॉसिपर बताती हैं. उनका कहना है कि उन्हें बचपन से ही चुगली और लोगों की बातें सुनने का शौक है. इसी शौक को उन्होंने कारोबार में बदल दिया. मिरियम अक्सर अपने घर के बाहर बैठती हैं. यहां आने-जाने वाले लोगों की बातचीत पर कान लगाए रहती हैं. वह कहती हैं कि मोहल्ले की गॉसिपर को हर छोटी-बड़ी खबर पता होती है.

    हर खबर की कीमत 5 से 10 हजार रुपए तक मिरियम के मुताबिक साधारण और कम सनसनीखेज खबरों के लिए वह 5,000 से 10,000 कोलंबियन पेसो तक लेती हैं. हालांकि, अगर खबर ज्यादा बड़ी हो तो उसकी कीमत भी बढ़ जाती है. वह हर जगह अपने साथ एक नोटबुक रखती हैं. इसमें वह सुनी हुई बातों को लिख लेती हैं, ताकि बाद में कहानी बताते समय कोई गलती न हो. उनका कहना है कि वह बिना सबूत के किसी के बारे में कुछ नहीं कहतीं.

    सबूत के लिए तस्वीरें और पूरा रिकॉर्ड मिरियम ने एक इंटरव्यू के दौरान अपने घर में एक बोर्ड भी दिखाया. इसमें कई तस्वीरें और कंटेंट था. उनका दावा है कि ये उनके पास मौजूद सबूत हैं. इनमें कुछ तस्वीरें पड़ोसियों के अफेयर से जुड़ी हैं. कई लोग अपने राज सामने आने के डर से उन्हें पैसे देते हैं ताकि वह चुप रहें. उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का किस्सा भी बताया, जिससे पत्नी की गैरमौजूदगी में अफेयर की बात छिपाने के बदले उन्होंने 7 लाख कोलंबियन पेसो लिए थे.

    गॉसिप से जमा पैसों को रखती हैं गुल्लक में मिरियम ने अपनी एक बड़ी गुल्लक भी दिखाई, जिसमें सिक्कों और नोटों की भरमार थी. उनका दावा है कि यह एक सामान्य हफ्ते की कमाई है. वह कहती हैं कि इसी काम से जमा किए पैसों की मदद से उन्होंने दो घर खरीदे हैं. अब पड़ोस की दूसरी महिलाएं भी उनकी नकल करने लगी हैं. लेकिन मिरियम का कहना है कि असली गॉसिप क्वीन बनना इतना आसान नहीं है.

    दोस्तों के साथ बांटती हैं ताजा गॉसिप मिरियम सिर्फ अपने घर के बाहर बैठकर ही खबरें नहीं जुटातीं. वह अपने दूसरे घर में दोस्तों के साथ गेम खेलते हुए भी मोहल्ले की नई-नई खबरों का आदान-प्रदान करती हैं.

    हर मोहल्ले में एक चुगलखोर जरूर होता है मिरियम अपने काम को सिर्फ चुगली नहीं मानतीं. उनका कहना है कि वह किसी के बारे में बिना सबूत कुछ नहीं बोलतीं. इसी वजह से इलाके में उनकी पहचान क्वीन ऑफ गॉसिप के रूप में हो गई है. उनका मानना है कि जब तक लोग रहेंगे, तब तक खबरें और गॉसिप भी रहेंगी. वह मजाकिया अंदाज में कहती हैं, हर अच्छे मोहल्ले में एक चुगलखोर होता है और अगर आपको कोई चुगलखोर नहीं पता, तो शायद वह चुगलखोर आप ही हैं.

  • भूत-प्रेत का खौफ या रहस्यमयी सच्चाई? दिल्ली की इन जगहों पर रात होते ही बदल जाता है माहौल

    भूत-प्रेत का खौफ या रहस्यमयी सच्चाई? दिल्ली की इन जगहों पर रात होते ही बदल जाता है माहौल

    दिल्ली की इन जगहों पर जाने से पहले 10 बार सोचें, अंधेरा होते ही हो जाता है भूतों का बसेरा

    दिल्ली सिर्फ लाल किले, कुतुब मीनार और खूबसूरत ऐतिहासिक इमारतों के लिए ही मशहूर नहीं है. इस शहर की कुछ गलियां और पुरानी इमारतें ऐसी भी हैं, जिनसे डरावनी और रहस्यमय कहानियां जुड़ी हैं. कहीं रात के सन्नाटे में अजीब आवाजें सुनाई देती हैं, तो कहीं परछाइयां दिखाई देने की बातें कही जाती हैं. हालांकि, इन कहानियों में कितना सच है और कितना लोगों का डर येतो कोई नहीं जानता. चलिए जानते हैं दिल्ली की इन भूतियां जगहों के बारे में.

    जमाली-कमाली मस्जिद महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क में मौजूद जमाली-कमाली मस्जिद और मकबरा ऐतिहासिक होने के साथ अपनी रहस्यमय कहानियों के लिए भी मशहूर है. मान्यता है कि यहां सूफी संत जमाली और कमाली की आत्माओं का साया है. स्थानीय लोगों के बीच ऐसी कई कहानियां प्रचलित हैं, जिनमें रात के समय अजीब आवाजें और डरावने अनुभव होने का जिक्र मिलता है. इसी वजह से लोग सूरज ढलने के बाद यहां जाने से बचते हैं.

    दिल्ली की खूनी नदी दिल्ली की खूनी नदी का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है. इस जगह को लेकर लंबे समय से कई डरावनी कहानियां कही जाती रही हैं. स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, यहां अतीत में कई हिंसक घटनाएं हुई थीं. कुछ लोगों का दावा है कि रात में नदी के आसपास अजीब आवाजें सुनाई देती हैं और कभी-कभी किसी अनजान शख्स के दिखाई देने की बात भी कही जती है, जो अचानक गायब हो जाता है.

    अग्रसेन की बावली कनॉट प्लेस के पास स्थित अग्रसेन की बावली दिल्ली की मशहूर ऐतिहासिक जगहों में शामिल है. इसकी सीढ़ियां और गहरी संरचना पर्यटकों को आकर्षित करती हैं. लेकिन इस जगह से जुड़ी कुछ डरावनी मान्यताएं भी हैं. कहा जाता है कि पुराने समय में लोग बावली के गहरे पानी में कूदकर आत्महत्या करते थे. इसी वजह से इसके पानी को लेकर कई तरह की रहस्यमय कहानियां प्रचलित हो गईं. शाम के समय यहां का सन्नाटा इन कहानियों को और डरावना बना देता है.

    भूली भटियारी का महल दिल्ली के जंगल इलाके में स्थित भूली भटियारी का महल फिरोज शाह तुगलक के समय से जुड़ा माना जाता है. वीरान माहौल और पुरानी इमारत इसे बाकी ऐतिहासिक स्थलों से अलग बनाती है. इस जगह को लेकर मान्यता है कि यहां किसी महिला का साया भटकता है.

    दिल्ली कैंट में सफेद साड़ी वाली महिला की कहानी दिल्ली कैंट से जुड़ी सबसे चर्चित डरावनी कहानी एक सफेद साड़ी पहने महिला की है. लोगों के बीच यह दावा लंबे समय से सुनने को मिलता है कि रात में सड़क पर एक महिला दिखाई देती है और फिर अचानक गायब हो जाती है. कुछ कहानियों में उसे ब्रिटिश महिला की आत्मा बताया जाता है.

  • जिस गोबर को लोग समझते हैं बेकार, उसी से 71 साल का किसान कमा रहा लाखों?

    जिस गोबर को लोग समझते हैं बेकार, उसी से 71 साल का किसान कमा रहा लाखों?

    71 साल के किसान का कमाल! गोबर से हो रही लाखों की कमाई

    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के गांव महरवानी की रहने वाली 71 साल की किसान आदित्य त्यागी ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच नई हो तो गाय का गोबर भी लाखों की कमाई का जरिया बन सकता है. फॉरेस्ट रेंजर के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने देसी गायों का पालन शुरू किया, लेकिन केवल दूध बेचने से अपेक्षित मुनाफा नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने देसी गाय के गोबर का बेहतर उपयोग करने का निर्णय लिया और उससे सम्भरानी कप (धूनी कप) बनाने का काम शुरू किया. आज उनके बनाए गए उत्पाद देशभर में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बिक रहे हैं और उन्हें हर महीने लाखों रुपये की आय हो रही है.

    गोबर से बनाए संभरानी कप- आदित्य त्यागी ने देसी गाय के गोबर में गूगल और लोबान जैसी प्राकृतिक सामग्री मिलाकर ऐसे सम्भरानी कप तैयार किए हैं, जिनका उपयोग घरों में धूनी देने और वातावरण को सुगंधित बनाने के लिए किया जाता है. उनका कहना है कि बाजार में मिलने वाले अधिकांश सम्भरानी कप कोयले से बने होते हैं, जिनके जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है. वहीं देसी गाय के गोबर से बने इन कपों को पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में तैयार किया गया है.

    उनका उद्देश्य केवल व्यवसाय करना नहीं, बल्कि लोगों तक शुद्ध और प्राकृतिक उत्पाद पहुंचाना भी है.

    10 ग्राम गोबर में बनता है एक कप- उन्होंने बताया कि एक सम्भरानी कप बनाने में लगभग 10 ग्राम देसी गाय का गोबर लगता है, जबकि एक कप की कीमत करीब 10 रुपये पड़ती है. इस हिसाब से गोबर का मूल्य 400 रुपये प्रति किलो से भी अधिक हो जाता है. उनके उत्पाद होलसेल में करीब 90 रुपये और ऑनलाइन लगभग 220 रुपये में बिकते हैं.

    विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर देशभर से ऑर्डर मिल रहे हैं, जिनमें दक्षिण भारत से सबसे अधिक मांग आ रही है. इस वर्ष उन्होंने 20 हजार सम्भरानी कप तैयार किए, जिनमें से एक महीने के भीतर ही 7 से 8 हजार कप की बिक्री हो चुकी है.

  • सुंदर दिखने का ऐसा दबाव कि बच्चों तक की बदलवा देते हैं शक्ल! इस देश की कहानी हैरान कर देगी..

    सुंदर दिखने का ऐसा दबाव कि बच्चों तक की बदलवा देते हैं शक्ल! इस देश की कहानी हैरान कर देगी..

    इस देश में बदसूरत होना है गुनाह! खुद मां-बाप करवाते हैं बच्चे की प्लास्टिक सर्जरी... सुंदर दिखने का होता है दबाव

    दुनिया भर में लोग खूबसूरत दिखना चाहते हैं. कोई क्रीम और घरेलू नुस्खे अपनाता है, तो कोई जिम और डाइट के जरिए अपनी लुक बेहतर करने की कोशिश करता है. लेकिन साउथ कोरिया में खूबसूरती को लेकर सोच कुछ ज्यादा ही सख्त मानी जाती है. यहां प्लास्टिक सर्जरी करवाना काफी आम है और कई परिवार इसे बच्चों के बेहतर .

    भविष्य से जोड़कर देखते हैं. साउथ कोरिया दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां प्रति व्यक्ति प्लास्टिक सर्जरी की दर काफी ज्यादा बताई जाती है. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां हर एक हजार लोगों पर करीब 8.9 से 13.5 कॉस्मेटिक सर्जरी होती हैं. खासतौर पर युवा महिलाओं में कॉस्मेटिक प्रोसीजर का चलन ज्यादा देखने को मिलता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, 19 से 29 साल की करीब 25 प्रतिशत महिलाओं ने कम से कम एक

    कॉस्मेटिक प्रोसीजर कराया है.गंगनाम बना प्लास्टिक सर्जरी का हब सियोल का गंगनाम इलाका प्लास्टिक सर्जरी के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. यहां बड़ी संख्या में कॉस्मेटिक सर्जरी क्लिनिक मौजूद हैं. सबसे ज्यादा कराई जाने वाली प्रक्रियाओं में डबल आईलिड सर्जरी शामिल है. इसमें आंखों पर फोल्ड बनाया जाता है, जिससे आंखें बड़ी और अलग नजर आती हैं. इसके अलावा नाक की सर्जरी, वी-लाइन जबड़े की शेपिंग, लिपोसक्शन और बोटॉक्स भी काफी लोकप्रिय हैं.

    बच्चों की सर्जरी भी करवाते हैं माता-पिता साउथ कोरिया में कई माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें प्लास्टिक सर्जरी का तोहफा तक देते हैं. कुछ परिवारों का मानना है कि बेहतर लुक से नौकरी और शादी के मौके बढ़ सकते हैं. यहां जॉब एप्लिकेशन में फोटो लगाना भी आम है. इसी वजह से लुक को लेकर दबाव और भेदभाव की चर्चा अक्सर होती रहती है. हालांकि, हर कोरियाई व्यक्ति प्लास्टिक सर्जरी को जरूरी नहीं मानता, लेकिन वहां की ब्यूटी इंडस्ट्री और सामाजिक दबाव ने इसे काफी सामान्य जरूर बना दिया है.

  • भूतों से नहीं डरती थी, खौफनाक जगहों पर बनाती थी VIDEO; देवी की मूर्ति तोड़ी, फिर हुआ दर्दनाक हादसा..

    भूतों से नहीं डरती थी, खौफनाक जगहों पर बनाती थी VIDEO; देवी की मूर्ति तोड़ी, फिर हुआ दर्दनाक हादसा..

    भूत-प्रेत को कुछ नहीं समझती थी लड़की, डरावनी जगहों पर बनाती थी वीडियो, वीडियो बनाने के लिए तोड़ी थी देवी की मूर्ति, हुई मौत

    किसी को भूतों से डर लगता है तो कोई इनपर भरोसा ही नहीं करता. चीन की 24 साल की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जियांग शियाओरू भी दूसरी तरह की थीं. वह डरावनी जगहों पर रात बिताती थीं, अंधविश्वास को चुनौती देती थीं और अपने वीडियो में पैरानॉर्मल एक्टिविटी पर सवाल उठाती थीं. लेकिन जुलाई में हुए एक भीषण सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई. अब लोग इसे भूत-प्रेत से जोड़कर देख रहे हैं.

    24 साल की इन्फ्लुएंसर, लाखों लोग देखते थे वीडियो जियांग शियाओरू को चीन के Douyin प्लेटफॉर्म पर 姜小柔吖 नाम से जाना जाता था. उनके अकाउंट पर 12 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे. उनका कंटेंट मुख्य रूप से डरावनी जगहों की खोज, पैरानॉर्मल एक्टिविटी और अंधविश्वास के खिलाफ बनाए गए वीडियो पर बेस्ड था. वह खाली इमारतों में रात बिताती थीं और उन जगहों पर जाती थीं, जिन्हें लोग भूत-प्रेत या डरावनी कहानियों से जोड़ते थे. उनका मकसद इन मान्यताओं को गलत साबित करना था.

    मूर्ति तोड़ने वाले वीडियो से हुआ था विवाद अगस्त 2025 में उनका एक वीडियो काफी विवादों में रहा था. इसमें उन्होंने हथौड़े से मिट्टी की गुआनयिन प्रतिमा तोड़ दी थी. यह बौद्ध धर्म से जुड़ी धार्मिक प्रतिमा है. वीडियो में उन्होंने अपनी जान को लेकर भी एक चुनौतीपूर्ण बात कही थी. यह सब उन्होंने अंधविश्वास के खिलाफ स्टंट के तौर पर किया था. उनके कुछ पुराने वीडियो में कर्म और श्राप जैसी मान्यताओं पर भी सवाल उठाए गए थे. मौत के बाद इन्हीं पुराने वीडियो को सोशल मीडिया यूजर्स फिर से शेयर करने लगे.

    हादसे से पहले बोली थीं- कार एक्सीडेंट होगा सबसे ज्यादा चर्चा उनके एक पुराने वीडियो को लेकर है. रिपोर्टों के मुताबिक एक वीडियो में उन्होंने धूप जलाते हुए अपनी कार के एक्सीडेंट की बात कही थी. इसके बाद 9 जुलाई को उन्होंने अपना आखिरी वीडियो पोस्ट किया. इस वीडियो में वह फैंस की ओर से सुझाए गए कुछ फोन नंबरों पर कॉल करती नजर आई थीं. इनमें एक नंबर कथित तौर पर सड़क हादसे में मारे गए व्यक्ति से जुड़ा बताया गया. कॉल कनेक्ट होने पर उन्हें सिर्फ अपनी ही आवाज की गूंज सुनाई दी. इसके कुछ ही दिन बाद उनके साथ गंभीर सड़क हादसा हो गया.

    15 जुलाई को हुआ भीषण सड़क हादसा 15 जुलाई 2026 की सुबह जियांग शियाओरू लियूझोउ से गुआंगझोउ जा रही थीं. रास्ते में गुआंगडोंग के झाओकिंग इलाके में उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया. उन्हें गंभीर सिर की चोट लगी और इसके बाद कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया. उन्हें झोंगशान यूनिवर्सिटी सन यात-सेन मेमोरियल हॉस्पिटल के ICU में भर्ती कराया गया. करीब चार हफ्ते तक इलाज चलने के बाद 10 अगस्त को उनकी मौत हो गई. परिवार ने 11 अगस्त को उनके Douyin अकाउंट के जरिए इसकी पुष्टि की.लोग बोले-भविष्यवाणी सच हो गई मौत की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर ‘भविष्यवाणी सच हो गई’ और ‘कर्म का फल’ जैसी बातें वायरल होने लगीं. लोगों ने उनके पुराने वीडियो निकालकर हादसे से जोड़ना शुरू कर दिया. कुछ यूजर्स ने इसे अंधविश्वास को चुनौती देने का नतीजा बताया.