अफगानिस्तान के बाजार ने ताजा कर दीं 90 के दशक की यादें, आज भी बिक रही हैं ऑडियो कैसेट और वॉकमैन
एक समय था जब भारत में संगीत सुनने का मतलब होता था ऑडियो कैसेट और वॉकमैन। नई फिल्म रिलीज होते ही लोग उसकी कैसेट खरीदने के लिए दुकानों पर पहुंच जाते थे। लेकिन समय के साथ तकनीक बदलती गई। पहले सीडी आईं, फिर एमपी3 प्लेयर और अब स्मार्टफोन व ऑनलाइन म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने पूरी तरह बाजार पर कब्जा कर लिया। इसी वजह से ऑडियो कैसेट और वॉकमैन लगभग इतिहास बन चुके हैं।
अफगानिस्तान के बाजार में दिखा पुराना दौर
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक भारतीय ट्रैवल व्लॉगर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह अफगानिस्तान के एक स्थानीय बाजार की सैर करता नजर आता है। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि वहां की कई दुकानों पर आज भी बड़ी संख्या में ऑडियो कैसेट और वॉकमैन बिक्री के लिए सजे हुए दिखाई देते हैं।
यह नजारा देखकर व्लॉगर भी हैरान रह जाता है। वह कहता है कि भारत में अब ऐसी चीजें शायद ही कहीं देखने को मिलती हैं, जबकि अफगानिस्तान के इस बाजार में वे आज भी आसानी से उपलब्ध हैं।
बचपन की यादों में खो गया व्लॉगर
वीडियो में व्लॉगर अपने बचपन को याद करते हुए बताता है कि एक समय था जब लोग अपनी पसंदीदा फिल्मों और गानों की कैसेट खरीदकर वॉकमैन में घंटों संगीत सुना करते थे। दुकानों में सजी पुरानी कैसेटों को देखकर उसे अपने बचपन के सुनहरे दिन याद आ जाते हैं।
आज के दौर में भारत में ऐसी कैसेटें केवल किसी पुराने कलेक्शन या एंटीक सामान की दुकानों में ही देखने को मिलती हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों को पसंद आया वीडियो
इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो को हजारों लोग देख चुके हैं। बड़ी संख्या में यूजर्स इसे लाइक और शेयर कर रहे हैं। खासकर 90 के दशक में बड़े हुए लोगों के लिए यह वीडियो पुरानी यादों का खजाना बन गया है।
यूजर्स ने साझा की अपनी यादें
वीडियो पर कमेंट करते हुए कई लोगों ने लिखा कि कैसेट और वॉकमैन उनके बचपन का सबसे खूबसूरत हिस्सा थे। किसी ने बताया कि नई फिल्म की कैसेट खरीदने का अलग ही उत्साह होता था, तो किसी ने कहा कि रिवाइंड करने के लिए पेंसिल का इस्तेमाल करना आज भी याद है।
तकनीक भले ही बदल गई हो, लेकिन ऑडियो कैसेट और वॉकमैन से जुड़ी यादें आज भी लोगों के दिलों में उसी तरह बसी हुई हैं। यही वजह है कि अफगानिस्तान के बाजार का यह वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों को एक बार फिर अपने सुनहरे बचपन में ले गया है।
शिलाजीत ऊँचे पर्वतों पर पत्थर की दरारों में पाया जाना वाला गोंद जैसा पदार्थ है। साधारण जनता इसे केवल यौन क्षमता बढ़ाने की दवाई के नाम से जानती है जबकि यह बहुत से गंभीर रोगों की शानदार औषधि भी है। आजकल शिलाजीत के लिए बाजार में बहुत से विज्ञापन चल रहे हैं जिसमें शिलाजीत के बारे में अधूरी जानकारी दी जाती है। आज जानिये शिलाजीत के बारे सब बातें।
शिलाजीत कैसे पैदा होती है –
शिलाजीत उन पहाड़ी स्थानों पर होती है जहाँ डंडा थोर, तिपतिया, दाढ़ी घास, मोस प्रजाति के पौधे, थूजा, मर्केन्शिया , हार्न वेर्ट, रीसेल के पौधे बहुतायत में पाए जाते हैं। तेज धूप पड़ने पर इन पौधे से गोंद निकलता हैं जो पत्थर के ऊपर से बहता हुआ पहाड़ की दरारों में जाकर सूखकर जम जाता हैं। यह गोंद पत्थर के संपर्क में आकर पत्थर के अंदर मौजूद खनिज को अपने साथ ले लेती है। इसी गोंद की अशुद्ध शिला जीत कहते है। बाजार में इसे ही बेचा जाता है।
अशुद्ध शिलाजीत से शुद्ध शिलाजीत कैसे बनाते हैं?
अशुद्ध शिलाजीत में गोंद, मिटटी, पत्थर, घास, पौधे के अवशेष सहित तमाम गन्दगी रहती है। इसे त्रिफला के गर्म काढ़े में 12 से 18 घंटे तक भिगोया जाता है। जो हिस्सा पानी में घुलता है उसे बाद में पकाकर पानी समाप्त कर सूखा लिया जाता है। इसे शुद्ध शिलाजीत कहते हैं। सीस शुद्ध शिलाजीत में विभिन्न जड़ी बूटियां मिलाकर टेबलेट, सिरप, कैप्सूल, मलहम आदि बनाये जाते हैं।
शिलाजीत में क्या होता है?
शिलाजीत में पौधे के गोंद के अनुरूप विभिन्न पदार्थ होते हैं। जटिल रूप से इसके अंदर केल्सियम अधिक मात्रा में होता है। साथ ही फुलविक एसिड, हुमिक एसिड, प्राकृतिक स्टेरॉयड, चिकनाई , प्रोटीन , विटामिन, एलुमिनियम, मेगनीसियम, आयरन पाया जा सकता है। अच्छी शिलाजीत उसे कहते हैं जो ऐसे स्थान से ली गयी हो जहाँ ऊपर बताये गए पौधे अच्छी मात्रा में हो और पहाड़ पर सीधी धूप पड़ती हो।
शिलाजीत कहाँ पैदा होती है ?
शिलाजीत की सबसे अधिक प्राप्ति रूस से होती है उसके बाद पकिस्तान के हिस्से वाले कश्मीर, तिब्बत में होती है। बहुत थोड़ी मात्रा में लदाख, कश्मीर में मिलती है। वर्तमान में भारत में शिलाजीत पाकिस्तान से चीन के रास्ते आती है।
शिलाजीत को किन रोगों में उपयोग करते हैं?
शिलाजीत को पथरी, सूजन, डाइबिटीज, पेट और आँतों के घाव, शुक्राणु समस्या में अन्य दवाइओं के साथ मिश्रण के रूप में प्रयोग करते हैं। इसके अतिरिक्त यह इम्युनिटी बढ़ाने, शरीर को पोषण देने, कमजोरी दूर करने, यौन शक्ति वर्धन, सप्लीमेंट के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
कितनी मात्रा में सेवन करना चाहिए?
शिलाजीत की मात्रा प्रत्येक व्यक्ति की उम्र, बीमारी, प्रकृति (तासीर ) के अनुसार निर्धारित की जाती है। जिसे केवल पंजीकृत आयुर्वेद चिकित्सक ही निर्धारत कर सकता है। मोटे तौर पर 250 मिलीग्राम से लेकर 1500 मिलीग्राम प्रतिदिन के बीच में निर्धारत की जा सकती है।
शिलाजीत के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं ?
प्रत्येक औषधि या पदार्थ के अपने साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। शिलाजीत के उपयोग से पेट में जलन, दिल धड़कन का का अनियमित होना, पेट में भारीपन, बदहजमी, दस्त, छाती में दर्द, चक्कर, चेहरे के अंगों में सूजन आदि अनुभव हो सकते हैं। यदि ऐसा कोई लक्षण अनुभव हो रहा है तो औषध उपयोग को बंद कर तत्काल चिकित्सक परामर्श लिया जांचा चाहिए। इनमे से अधिकतर लक्षण ख़राब क्वालिटी की शिलाजीत या शिलाजीत के तत्वों से एलर्जी होने पर देखे गए हैं।
शिलाजीत के सेवन के समय कोई परहेज आवश्यक होता है ?
शिलाजीत के उपयोग के दौरान कुलथी दाल, शराब, अधिक मात्रा में चाय / काफी, अचार, सिरका से बने पदार्थ उपयोग नहीं किये जाने चाहिए।
शिलाजीत के सेवन से कितने समय में लाभ प्राप्त होता है ?
स्वस्थ व्यक्तियों को योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के परामर्श से इसका सेवन कम से कम छह माह तक करना चाहिए। रोगियों में सेवन अवधि केवल आयुर्वेद चिकित्सक तय कर सकते हैं।
शिलाजीत कहाँ से लेनी चाहिए ?
शिलाजीत वास्तव में एक औषधि है। साइड इफेक्ट रहित, उचित लाभ के लिए अच्छी क्वालिटी, सही शुद्धिकरण, सही मात्रा आदि का निर्धारण बहुत आवश्यक है। यह वास्तव में एक सप्लीमेंट नहीं है। इसलिए किसी योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श के पश्चात ही उचित औषध को खरीदना एवं प्रयोग करना चाहिए।
Bhagalpur : बिहार के भागलपुर जिले से एक रूह कंपा देने वाली सनसनीखेज वारदात सामने आई है। पीरपैंती थाना क्षेत्र में मोबाइल पर पब्जी (PUBG) गेम खेल रहे एक युवक पर घात लगाकर बैठे बदमाशों ने तलवारों से जानलेवा हमला कर दिया। हमलावरों ने इस खौफनाक वारदात को इतनी बेरहमी से अंजाम दिया कि युवक का कान कटकर शरीर से अलग हो गया। लहूलुहान होकर वह बेसुध हालत में पास के नाले में जा गिरा। फिलहाल, युवक की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और वह अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।
साजिश के तहत बुझाया बल्ब, फिर किया ताबड़तोड़ वार
यह खौफनाक वारदात बीती रात की है। घटना को लेकर घायल युवक की मां महमुर निशा और जीजा मोहम्मद कासिम आलम ने बताया कि बदमाशों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत इस खूनी खेल को अंजाम दिया। घायल युवक की पहचान मोहम्मद रमजान मंसूरी के रूप में हुई है।
परिजनों के मुताबिक, रमजान घर के बाहर पड़ोस में बैठकर अपने मोबाइल पर PUBG गेम खेल रहा था। इसी दौरान दयानंद, सूरज और राहुल समेत पांच की संख्या में आए हथियारबंद बदमाशों ने अचानक वहां लगे बिजली के बल्ब को बुझा दिया। चारों तरफ अंधेरा छाते ही इन बदमाशों ने रमजान पर तलवार से ताबड़तोड़ वार करना शुरू कर दिया।
गला काटने की थी तैयारी, बचाव में कटा कान
बताया जा रहा है कि बदमाशों ने सीधा रमजान के गले पर वार कर उसे जान से मारने की कोशिश की थी। हालांकि, रमजान ने फुर्ती दिखाते हुए खुद को बचाने का प्रयास किया, जिससे तलवार उसके कान पर जा लगी और कान कटकर अलग हो गया। सिर, हाथ और पैर पर कई गहरे जख्म होने के कारण वह बेसुध होकर पास के नाले में गिर गया।
पुणे लौटने वाला था रमजान, 5 दिन पहले ही रची गई थी साजिश
पीड़ित परिवार ने इस हमले के पीछे एक बड़ी और सोची-समझी साजिश का अंदेशा जताया है। रमजान महाराष्ट्र के पुणे में बिजली वायरिंग (इलेक्ट्रीशियन) का काम करता है। वह बकरीद के त्योहार पर छुट्टी मनाने अपने घर भागलपुर आया हुआ था। दुखद बात यह है कि अगले ही दिन उसे वापस काम पर पुणे लौटना था, लेकिन उसकी रवानगी से ठीक पहले इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया गया।
घायल की मां महमुर निशा का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया, “हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। उन लोगों ने 5 दिन पहले से ही मेरे बेटे को जान से मारने का प्लान बना रखा था। साजिश के तहत पहले उसे फुसलाकर वहां पब्जी खेलने के लिए बिठाया गया और फिर मौका पाकर सबने मिलकर हमला कर दिया। जब हम चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे, तो बेटा नाले में खून से लथपथ पड़ा तड़प रहा था।”
मायागंज अस्पताल में भर्ती, आरोपियों की तलाश में छापेमारी तेज
घटना के तुरंत बाद आनन-फानन में परिजन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और रमजान को बेहद गंभीर हालत में भागलपुर के मायागंज स्थित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JLNMCH) ले गए। अस्पताल के सर्जरी विभाग में युवक को भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, अत्यधिक खून बह जाने और गहरे जख्मों के कारण युवक की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
इस सनसनीखेज हमले के बाद पूरे इलाके में तनाव और दहशत का माहौल व्याप्त है। घटना की सूचना मिलते ही पीरपैंती थाना पुलिस मामले की तफ्तीश में जुट गई है। पुलिस ने पीड़ित परिवार और चश्मदीदों के बयान दर्ज कर लिए हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि फरार आरोपियों दयानंद, सूरज, राहुल और उनके अन्य साथियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी तेज कर दी गई है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपी सलाखों के पीछे होंगे
17 साल की सारिका पढ़ाई के लिए दिल्ली के एक पीजी में रहती है। उसके साथ रहने वाले लोग जानते हैं कि उसे साफ-सफाई का बेहद ध्यान रहता है। वह दिन में कई बार हाथ धोती है, बार-बार किचन में जाकर गैस सिलेंडर चेक करती है और घर का ताला दो-तीन बार खींचकर देखने के बाद ही उसे तसल्ली मिलती है। आसपास के लोग उसकी इन आदतों को ‘परफेक्शनिज्म’ (हर काम एकदम सही करना) मानते हैं। लेकिन आप जानते हैं कि इस तरह का व्यवहार और विचार कोई आदत नहीं बल्कि एक मानसिक विकार Obsessive-Compulsive Disorder (OCD) हो सकता है जो प्रभावित इंसान की पढ़ाई, नौकरी या सामाजिक रिश्तों में बाधा बनता है। इस परेशानी से ग्रसित इंसान को किसी काम को बार-बार दोहराने के बाद भी मानसिक संतुष्टि महसूस नहीं होती?
फोर्टिस हेल्थकेयर में अदायु माइंडफुलनेस हॉस्पिटल में सलाहकार मनोचिकित्सक डॉ. नेहा अग्रवाल ने बताया अक्सर लोग इसे केवल एक आदत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक विकार है, जो समय के साथ व्यक्ति के आत्म-विश्वास और कार्यक्षमता को कमजोर कर देता है। आखिर OCD क्या है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं, यह क्यों होता है और मेडिकल साइंस में इसका क्या इलाज है? आइए मानसिक रोग विशेषज्ञ (Psychologist) से जानते हैं इसके पीछे की पूरी सच्चाई।
OCD क्या है?
डॉ. अग्रवाल ने बताया Obsessive–compulsive disorder (OCD) यानी ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर एक ऐसा मानसिक विकार है जिसमें व्यक्ति के मन में बार-बार ऐसे अनचाहे विचार (Obsessions), तस्वीरें या आशंकाएं आती हैं, जिन्हें वह चाहकर भी रोक नहीं पाता। इन विचारों से होने वाली घबराहट और बेचैनी को कम करने के लिए वह कुछ काम बार-बार करता है, जिन्हें कम्पल्शन (Compulsions) कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर बार-बार हाथ धोना, ताला जांचना या गैस बंद है या नहीं, इसे बार-बार चेक करना।
आदत और OCD में क्या अंतर है?
हर व्यक्ति में कुछ न कुछ आदतें या परफेक्शनिस्ट व्यवहार हो सकते हैं, लेकिन इससे यह नहीं कहा जा सकता कि उसे OCD है। डॉक्टर के अनुसार, जब ये विचार और व्यवहार इतने बढ़ जाएं कि व्यक्ति की पढ़ाई, नौकरी, सामाजिक जीवन या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तभी इसे बीमारी माना जाता है।
क्या परफेक्शनिज्म भी OCD का हिस्सा है?
परफेक्शनिज्म OCD का एक लक्षण हो सकता है, लेकिन हर परफेक्शनिस्ट व्यक्ति OCD का मरीज नहीं होता। यदि परफेक्शनिज्म के साथ अन्य ऑब्सेसिव विचार और बार-बार किए जाने वाले व्यवहार भी मौजूद हों, तो डॉक्टर OCD की संभावना पर विचार करते हैं।
भारत में OCD कितना आम है?
डॉक्टर के अनुसार, OCD एक आम मानसिक स्वास्थ्य विकार है। मनोचिकित्सा विभागों में इसके मरीज अक्सर देखने को मिलते हैं। हालांकि, लोगों में अभी भी इसके सभी लक्षणों के बारे में पर्याप्त जागरूकता नहीं है। अधिकांश लोग केवल बार-बार हाथ धोने को ही OCD समझते हैं, जबकि इसके और भी कई लक्षण हैं।
OCD के सामान्य लक्षण क्या हैं?
OCD के लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। कुछ सामान्य लक्षण हैं
बार-बार हाथ धोना।
बार-बार ताला, गैस या बिजली का स्विच चेक करना।
चीजों को बार-बार गिनना।
पढ़ाई करते समय एक ही पैराग्राफ को बार-बार पढ़ना।
किसी काम को बार-बार दोहराना क्योंकि तसल्ली नहीं होती।
मन में लगातार अनचाहे और परेशान करने वाले विचार आना।
OCD किस उम्र के लोगों में हो सकता है?
डॉक्टर के मुताबिक, OCD के लक्षण अक्सर किशोरावस्था (Teenage) में दिखाई देने लगते हैं, जब व्यक्तित्व का विकास हो रहा होता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह बचपन में भी शुरू हो सकता है और कुछ लोगों में वयस्क होने के बाद भी इसकी शुरुआत होती है।
OCD होने के पीछे क्या कारण हैं?
OCD के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इसमें आनुवंशिक (Genetic), पारिवारिक (Hereditary) और पर्यावरणीय (Environmental) कारकों की भूमिका होती है। इसके अलावा मस्तिष्क में सेरोटोनिन (Serotonin) और नोरएपिनेफ्रीन (Norepinephrine) जैसे रसायनों का असंतुलन भी इस बीमारी से जुड़ा माना जाता है।
क्या हल्के OCD को नजरअंदाज करना चाहिए?
यदि किसी व्यक्ति में OCD के हल्के लक्षण हैं और वह अपनी दिनचर्या सामान्य रूप से संभाल पा रहा है, तब भी उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर का कहना है कि समय के साथ यह समस्या बढ़ सकती है। शुरुआती अवस्था में इलाज शुरू करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
OCD का रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ता है?
OCD व्यक्ति की एकाग्रता (Concentration), याददाश्त (Memory) और कार्यक्षमता (Productivity) को प्रभावित कर सकता है। मरीज का काफी समय बार-बार एक ही काम करने या एक ही विचार में उलझे रहने में निकल जाता है। गंभीर मामलों में इसका असर पारिवारिक रिश्तों, नौकरी और पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।
क्या OCD सिर्फ साफ-सफाई तक सीमित है?
अक्सर लोगों का मानना है कि OCD सिर्फ साफ-सफाई तक ही सीमित है लेकिन ऐसा नहीं है। OCD केवल हाथ धोने या सफाई से जुड़ा नहीं है। कुछ लोगों को बार-बार यह डर सताता है कि उन्होंने कोई गलती कर दी है, किसी को नुकसान पहुंचा दिया है या कोई काम ठीक से नहीं हुआ। कुछ मरीजों में धार्मिक, नैतिक या हिंसक विचार भी बार-बार आ सकते हैं, जिन्हें वे खुद भी गलत मानते हैं।
OCD का इलाज कैसे किया जाता है?
यदि बीमारी शुरुआती या हल्की अवस्था में है, तो मनोवैज्ञानिक (Psychologist) द्वारा दी जाने वाली काउंसलिंग और साइकोथेरेपी से काफी लाभ मिल सकता है। लेकिन यदि बीमारी मध्यम या गंभीर हो जाए और व्यक्ति अपने विचारों या व्यवहार पर नियंत्रण न रख पाए, तो मनोचिकित्सक (Psychiatrist) दवाइयों की सलाह देते हैं।
क्या OCD पूरी तरह ठीक हो सकता है?
डॉक्टर के अनुसार अधिकांश मरीज सही इलाज से काफी हद तक ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में OCD दवाइयों से भी नियंत्रित नहीं हो पाता, जिसे ‘रेजिस्टेंट OCD’ कहा जाता है। ऐसे मामलों में rTMS (Repetitive Transcranial Magnetic Stimulation) और Modified ECT जैसी न्यूरो मॉड्यूलेशन तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
यदि बार-बार आने वाले विचार, डर या दोहराए जाने वाले व्यवहार आपकी पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगें, तो उन्हें सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से OCD को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी विशेषज्ञ से हुई बातचीत पर आधारित है और यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान (Diagnosis) या उपचार (Treatment) का विकल्प नहीं है।
मौत एक ऐसा सच है जिसे कोई टाल नहीं सकता। यह जीवन का अंतिम नियम है, लेकिन ज्यादातर लोग इसके बारे में सोचने से बचते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरी समय में इंसान के मन और चेतना में क्या चलता है?
Death Dreams Study:
इटली के रेज्जियो एमिलिया स्थित IRCCS के विशेषज्ञों ने इसी रहस्य को समझने के लिए गहन अध्ययन किया। उन्होंने 239 विशेषज्ञों से बातचीत कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। इस रिसर्च में ‘एंड ऑफ लाइफ ड्रीम्स’ का जिक्र किया गया है, यानी वे अनुभव जो इंसान अपने जीवन के अंतिम चरण में महसूस कर सकता है।
अंत समय में क्या दिखता है?
रिसर्च के अनुसार, आखिरी समय में कई लोगों को अपने दिवंगत प्रियजन दिखाई देते हैं। किसी को पुराने रिश्ते याद आते हैं तो किसी को मां या करीबियों की छवि दिखाई देती है। कुछ मरीजों ने बताया कि उन्हें अपने दिवंगत परिजन यह कहते सुनाई देते हैं कि “मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं।” ऐसे अनुभव डर पैदा नहीं करते, बल्कि शांति और सुकून देते हैं, जैसे आगे का रास्ता आसान हो।
सपनों में रोशनी और डरावने दृश्य
कई लोगों को तेज रोशनी, खुले दरवाजे, ऊंची सीढ़ियां या सुंदर जगहें भी दिखाई देती हैं, जैसे कोई नई दुनिया सामने हो। वहीं कुछ मामलों में लोगों ने सफेद घोड़ा, खूबसूरत नजारे या शांत दृश्य देखने की बात कही है। लेकिन इसके उलट कुछ मरीजों को डरावने साये या भयानक दृश्य भी नजर आए, जिन्हें विशेषज्ञ इंसान के भीतर छिपे डर और अधूरी इच्छाओं का असर मानते हैं।
मौत के करीब अनुभव का सच
अक्सर लोग इन अनुभवों के बारे में खुलकर बात नहीं करते, क्योंकि उन्हें गलत समझे जाने का डर रहता है। लेकिन इन घटनाओं से यह समझ आता है कि इंसान मानसिक रूप से मौत को कैसे स्वीकार कर रहा है। अगर अनुभव शांत और सुकून भरे हों तो माना जाता है कि विदाई आसान होती है। विज्ञान इसे यादों और मानसिक तनाव का प्रभाव मानता है, जबकि कुछ लोग इसे आध्यात्मिक अनुभव भी समझते हैं।
पेट की रहस्यमयी गांठें, अगर पेट में बार बार दर्द, दस्त होना, पेट खराब रहना, बार बार जुकाम -बुखार – खांसी – गले की समस्या रहती है और पेट का अल्ट्रासाउंड कराने पर mesenteric lymphedinitis (पेट में गांठे) आती हैं। आइए जानते इस बीमारी की विस्तृत जानकारी।
लिम्फ़ सिस्टम क्या होती है शरीर में जिस तरह रक्त के संचरण के लिए नसों का नेटवर्क होता है उसी तरह शरीर में लिम्फ के संचार के लिए लिम्फ सिस्टम होता है। इस सिस्टम में पूरे शरीर में जगह जगह गांठें होती हैं। जिनमें लिम्फ़ इकट्ठा रहता है। इन गांठों को lymph nodes कहते हैं।
लिम्फ़ क्या होता है यह एक सफेद गाढ़ा तरल होता है जिसमें शरीर को विभिन्न वायरस, बैक्टीरिया, फंगस से बचाती है। यह एक प्रकार से शरीर के रोग से लड़ने के तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पूरे शरीर में बहता है।
लिम्फ नोड्स क्या होते हैं? लिम्फ नोड्स शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली (immune system) का हिस्सा होते हैं। ये छोटे-छोटे, बीज के आकार की ग्रंथियाँ होती है जो शरीर मे संक्रमण से लड़ने मे सहायता करती हैं। पेट में जो लिंफ नोड्स होते हैं, उन्हें मेसेंटरिक लिम्फ नोड्स कहा जाता है।
लिम्फ़ नोड्स में सूजन lymphadinitis के कौन कौन से कारण होते हैं
घर से बाहर का खाना।
अस्वच्छ भोजन। •बहुत ठंडा पानी पीना •देर से तथा असमय भोजन करना
रात को देर तक जागना, नींद की कमी, अत्यधिक चिंता और तनाव •एलोपैथिक दवाओं का निरंतर प्रयोग करना
वायरल संक्रमण
बैक्टेरियल संक्रमण
श्वास प्रणाली में संक्रमण
टॉन्सिल या गले का संक्रमण
मेसेंटरिक लिम्फैडेनाइटिस – मेसेंटरिक लिम्फैडेनाइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें पेट में मौजूद लिंफ नोड्स (गाँठें) सूज जाती हैं। यह समस्या अक्सर बच्चों और किशोरों में देखी जाती है, लेकिन कभी-कभी युवाओं को भी हो सकती है।
मेसेंटरिक लिम्फैडेनाइटिस के लक्षण –
पेट दर्द,
बुखार,
उल्टी, जी मचलना,
खांसी और गले में खराश होना,
दस्त या कब्ज़ का होना
क्या यह कैंसर हो सकता है? सामान्यतया यह कैंसर नहीं होता है लेकिन इलाज में लापरवाही, बिना चिकित्सक की सलाह के दवाईयां लेना, परहेज नहीं करना, इम्यून सिस्टम का अधिक कमजोर होने से यह कैंसर में बदल सकती हैं।
इसकी जांच कैसे होती है। इस रोग की जांच सामान्यतया अनुभवी चिकित्सक क्लीनिक में ही कर लेते हैं। आवश्यकता पड़ने पर रोग के निश्चितीकरण के लिए पेट का अल्ट्रासाउंड समुचित होता है। यदि चिकित्सक को किसी अन्य रोग स्थिति का संदेह होता है तो अन्य जांचों की तरफ जाना पड़ता है।
क्या इससे बचाव संभव है?
जी हाँ, बच्चों में स्वर्णप्राशन संस्कार द्वारा इससे बचाव संभव है।
व्यस्कों में खान-पान सही रखने और नियमित व्यायाम करने से इससे बचाव किया जा सकता है।
क्या यह ठीक हो सकती है? यह रोग पूरी तरह ठीक हो सकता अगर रोगी समय रहते अनुभवी और योग्य चिकित्सक से सलाह और चिकित्सा ले, चिकित्सक के निर्देशों का पालन करें।
क्या इसमें आपरेशन कराना जरूरी है? नहीं यह कोई आवश्यक नहीं कि सर्जरी से ही इस रोग का इलाज होता है लेकिन यदि गांठ का साइज एक निश्चित सीमा से अधिक बढ़ जाए तब सर्जरी एक उचित विकल्प हो सकता है।
क्या इसकी चिकित्सा संभव है?
जी हाँ,आयुर्वेद क्लिनिक के चिकित्सक इस रोग की चिकित्सा में विशेषज्ञ हैं।
समय रहते इलाज शुरू करने से रोग जड़ से समाप्त हो सकता है।
मध्य प्रदेश के दमोह में पुलिस ने गुरुवार देर शाम अनैतिक गतिविधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन गुल्ली क्षेत्र स्थित यूनिक द थाई स्पा सेंटर पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान स्पा सेंटर के संचालक सहित सात लोगों को हिरासत में लिया। मामले में अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस के अनुसार, स्पा सेंटर में लंबे समय से अनैतिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों के सत्यापन के बाद पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से दबिश दी। कार्रवाई के दौरान स्पा सेंटर के भीतर से तीन ग्राहक, तीन वयस्क युवतियां और संचालक को हिरासत में लिया गया। इसके बाद सभी को पूछताछ के लिए पुलिस अभिरक्षा में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई प्रारंभ की गई।
नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) एच.आर. पांडे ने बताया कि स्पा सेंटर का संचालन रीवा निवासी मोहम्मद आफताब अली कर रहा था। मौके से भगवानदास, अंकुर और पप्पू नामक तीन ग्राहक भी मिले। इसके अलावा तीन वयस्क युवतियां भी स्पा सेंटर से मिली हैं, जिनमें एक जबलपुर और एक कोलकाता की निवासी बताई गई है। सभी से विस्तृत पूछताछ की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि कार्रवाई के दौरान मिले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि स्पा सेंटर की आड़ में यह गतिविधि कब से संचालित हो रही थी और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका रही है।
सीएसपी एच.आर. पांडे ने कहा कि दमोह शहर में संचालित अन्य स्पा सेंटरों और ऐसे प्रतिष्ठानों पर भी पुलिस की निगरानी बनी हुई है। यदि किसी स्थान पर अनैतिक गतिविधियों की सूचना मिलती है तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी रहेगा।
घाटकेसर क्राइम न्यूज़: पोचारम आईटी कॉरिडोर पुलिस स्टेशन क्षेत्र में एक घटना सामने आई है, जिसमें अस्पताल जाने के लिए ऑटो में सवार एक महिला को ऑटो चालक ने नशीली दवा देकर प्रताड़ित किया और उसके साथ बलात्कार किया। पीड़िता उप्पल के भरतनगर में एक ऑटो में सवार हुई और उसने घाटकेसर क्षेत्र के एक अस्पताल जाने का अनुरोध किया। हालांकि, ऑटो चालक उसे सीधे अस्पताल ले जाने के बजाय, रास्ते में भरतनगर के ताटिकल्लू डिपो पर रुका और टोल वसूला। इसके बाद उसने ऑटो को घाटकेसर आउटर रिंग रोड (ओआरआर) सर्विस रोड के पास एक सुनसान इलाके में मोड़ दिया।
घाटकेसर क्राइम न्यूज़: कोल्ड ड्रिंक में नशीली दवा मिलाकर हत्या
सुनसान इलाके में पहुँचने के बाद, आरोपी ने योजना के अनुसार स्प्राइट की बोतल में नशीला पदार्थ मिलाया और महिला को जबरन पिला दिया। पीते ही वह बेहोश हो गई। पीड़िता की बेहोशी का फायदा उठाते हुए ऑटो चालक ने उसके साथ बेरहमी से बलात्कार किया। इतना ही नहीं, उसने महिला का मोबाइल फोन और नकदी भी छीन ली, उसे वहीं छोड़कर ऑटो लेकर फरार हो गया।
आरोपी को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया।
कुछ समय बाद पीड़िता को होश आया और धीरे-धीरे उसकी हालत में सुधार हुआ। उसने पोचारम आईटी कॉरिडोर पुलिस स्टेशन में इस भयावह घटना की शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए एक विशेष पुलिस टीम ने घटनास्थल तक जाने वाले रास्तों के तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की। प्राप्त मुख्य साक्ष्यों और अन्य जानकारियों का विश्लेषण करने के बाद पुलिस ने आरोपी ऑटो चालक को मात्र 24 घंटों के भीतर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
जहां आज के समय में धोखधड़ी के मामले इतने बढ़ गए हैं कि लोगों को अपनों पर भी विश्वास नहीं होता, वहीं भारत के नागालैंड में आज भी राम राज्य चल रहा है. यहां लोग इतने ईमानदार हैं कि दुकानों में दुकानदार के रहने की जरुरत नहीं होती. लोग अपनी जरुरत की चीजों को उठाकर स्कैनर में या कैशबॉक्स में पैसे डाल देते हैं.
आज कलियुग चल रहा है. राम राज्य में लोग काफी ईमानदार होते थे. उस समय चोरी, धोखेबाजी जैसी चीजें नहीं थी. लेकिन अब इसकी बस कल्पना ही की जा सकती है. लेकिन भारत के नागालैंड में आपको ऐसा नजारा देखने को मिलेगा, जिसके बाद लगेगा कि यहां आज भी राम राज्य चल रहा है. यहां लोग इतने ईमानदार हैं कि दुकानों में दुकानदार के रहने की जरुरत नहीं होती.
सोशल मीडिया पर नागालैंड घूमने आए कई टूरिस्ट्स इसका वीडियो बनाकर शेयर करते हैं. यहां आपको कई दुकानें मिल जाएगी, जहां सामान रखा है लेकिन कोई दुकानदार नहीं है. लोग अपनी जरुरत की चीजों को उठाकर स्कैनर में या कैशबॉक्स में पैसे डाल देते हैं. नागालैंड की यह अनोखी ईमानदारी पूरे देश के लिए मिसाल है. खासकर छोटे गांवों और कुछ शहरों की दुकानों में यह व्यवस्था आम है. पर्यटक जब यहां घूमने जाते हैं तो इस सिस्टम को देखकर हैरान रह जाते हैं/
कैसे चलती है दुकान? यहां कई दुकानें हैं जो दिनभर खुली रहती है. यहां सामान रखा रहता है. ग्राहक खुद दुकान में घुसकर सामान चुनता है. कीमत चेक करने के लिए स्कैनर या प्राइस लिस्ट का इस्तेमाल करता है. इसके बाद पैसे कैशबॉक्स में डालता है या ऑनलाइन पेमेंट करता है. अगर जरूरत हो तो चेंज खुद ले लेता है. दुकानदार आसपास के काम में व्यस्त रहता है. शाम को गिनती करके देखता है कि सब ठीक है. चोरी के मामले बेहद कम या ना के बराबर होते हैं.
नागालैंड की संस्कृति और ईमानदारी नागालैंड पूर्वोत्तर भारत का एक सुंदर राज्य है. यहां की जनजातियां अपनी परंपराओं, ईमानदारी और सामुदायिक जीवन के लिए जानी जाती हैं. लोग एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं. सामुदायिक मूल्य इतने मजबूत हैं कि कोई गलत काम करने से पहले दस बार सोचता है. यहां अपराध दर भी कम है. पर्यटक बताते हैं कि ना सिर्फ दुकानें बल्कि अन्य सेवाओं में भी यह भरोसा दिखता है. टैक्सी वाले सही किराया लेते हैं, होमस्टे मालिक अतिरिक्त चार्ज नहीं करते. यह व्यवस्था आधुनिक दुनिया में विरले ही देखने को मिलती है.
हमारे देश में देवी देवताओं के कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपने चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं. ऐसा ही एक बेहद रहस्यमयी और अनोखा मंदिर देवभूमि हिमाचल प्रदेश में स्थित है. कुल्लू घाटी में पहाड़ों के ऊंचे शिखर पर बने इस मंदिर को बिजली महादेव के नाम से पुकारा जाता है.
ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यहां का नजारा बेहद खूबसूरत है. लेकिन इस मंदिर की सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि यहां हर 12 साल में आसमान से भयंकर बिजली गिरती है.
ये बिजली सीधे मंदिर के भीतर स्थापित शिवलिंग पर आकर गिरती है, जिसके बाद का नजारा किसी को भी हैरत में डाल सकता है.
हर 12 साल में आसमान से बरसती है शिव पर आकाशीय बिजली
जब इस मंदिर पर आकाशीय बिजली गिरती है, तो जोरदार धमाका होता है. बिजली के इस तगड़े झटके को झेलते ही गर्भगृह में मौजूद शिवलिंग पूरी तरह से चकनाचूर हो जाता है.
शिवलिंग के टुकड़े टुकड़े होकर पूरे मंदिर में बिखर जाते हैं. आम तौर पर अगर किसी पत्थर पर इतनी भारी बिजली गिरे, तो वह नामोनिशान खो देता है. लेकिन यहां भगवान शिव का ऐसा अनूठा चमत्कार होता है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी कोई नुकसान नहीं होता.
स्थानीय लोगों का मानना है कि महादेव अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए इस आकाशीय बिजली के झटके को खुद अपने ऊपर झेल लेते हैं.
मक्खन का लेप लगते ही चमत्कारी रूप से जुड़ जाते हैं टुकड़े
शिवलिंग के टूटने के बाद मंदिर के पुजारी एक खास परंपरा को निभाते हैं. वो बिखरे हुए शिवलिंग के सभी टुकड़ों को इकट्ठा करते हैं. इसके बाद एक अनोखा मरहम तैयार किया जाता है, जो पूरी तरह से मक्खन, सत्तू और अनसाल्टेड बटर से बनता है.
पुजारी इन टुकड़ों को आपस में मिलाकर उस पर मक्खन का गाढ़ा लेप लगाते हैं. जैसे ही ये लेप शिवलिंग पर लगाया जाता है, चमत्कार देखना शुरू हो जाता है. कुछ ही दिनों के भीतर वह टूटा हुआ शिवलिंग वापस अपने पुराने और ठोस रूप में आ जाता है.
ये देखकर डॉक्टर और वैज्ञानिक भी हैरान रह जाते हैं कि बिना किसी सीमेंट या गोंद के पत्थर आपस में कैसे पक्के जुड़ जाते हैं.
दैत्य कुलांत का वध करने के लिए शिव ने बनाया ये स्थान
इस अनोखे चमत्कार के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प पौराणिक कहानी जुड़ी हुई है. कहते हैं कि बहुत समय पहले इस घाटी में कुलांत नाम का एक भयंकर राक्षस रहता था.
वो राक्षस बहुत विशाल था और अजगर का रूप धारण कर सकता था. एक बार उसने पूरी घाटी को पानी में डुबोकर यहां के जीव जंतुओं को मारने की साजिश रची. भगवान शिव ने जब उसका यह रूप देखा, तो उन्होंने राक्षस का वध कर दिया.
राक्षस का विशाल शरीर एक बड़े पहाड़ में बदल गया, जिसे आज हम कुल्लू घाटी के नाम से जानते हैं. दैत्य के मरने के बाद शिव ने इंद्र देव से कहा कि वे हर 12 साल में यहां बिजली गिराया करें ताकि धरती पर कोई और संकट न आए.
विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया इस रहस्यमयी चुंबकीय पहाड़ी की गुत्थी
बिजली महादेव का यह रहस्य आज के आधुनिक विज्ञान के लिए भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. वैज्ञानिकों ने कई बार इस जगह की जांच की है. उनका कहना है कि इस ऊंचे पहाड़ के नीचे भारी मात्रा में चुंबकीय तत्व यानी आयरन ओर्स मौजूद हो सकते हैं.
इस वजह से जब भी आसमान में बिजली कड़कती है, तो वह इस पहाड़ी की तरफ तेजी से खिंची चली आती है. लेकिन विज्ञान के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि बिजली हमेशा सिर्फ शिवलिंग पर ही क्यों गिरती है.
साथ ही मक्खन लगाने से पत्थर का खुद ब खुद जुड़ जाना किसी दैवीय शक्ति से कम नहीं लगता. यही वजह है कि हर साल हजारों श्रद्धालु इस अद्भुत चमत्कार को देखने यहां खींचे चले आते हैं.