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  • खांसी का घरेलू इलाज: सूखी, बलगम वाली और एलर्जी की खांसी में क्या करें? जानें डॉक्टर कब दिखाना जरूरी है

    खांसी का घरेलू इलाज: सूखी, बलगम वाली और एलर्जी की खांसी में क्या करें? जानें डॉक्टर कब दिखाना जरूरी है

    खांसी का घरेलू इलाज: सूखी, बलगम वाली और एलर्जी की खांसी में क्या करें? जानें डॉक्टर कब दिखाना जरूरी है

    खांसी (Cough) एक सामान्य समस्या है, लेकिन यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं होती। यह शरीर का एक सुरक्षा तंत्र (Protective Reflex) है, जो गले और श्वसन मार्ग में मौजूद धूल, वायरस, बैक्टीरिया या बलगम को बाहर निकालने का काम करता है। हालांकि, जब खांसी बार-बार होने लगे, कई दिनों तक बनी रहे या इसके साथ बुखार, सांस लेने में तकलीफ या खून आने जैसी समस्या हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    इस लेख में जानिए खांसी के प्रकार, घरेलू उपाय, क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए और किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

    खांसी कितने प्रकार की होती है?

    1. सूखी खांसी (Dry Cough)

    इस प्रकार की खांसी में बलगम नहीं निकलता। गले में खराश, खुजली या जलन महसूस होती है। यह वायरल संक्रमण, एलर्जी, धूल, धुएं या एसिड रिफ्लक्स के कारण हो सकती है।

    2. बलगम वाली खांसी (Wet/Productive Cough)

    इसमें खांसी के साथ बलगम निकलता है। यह वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण, ब्रोंकाइटिस या अन्य श्वसन संक्रमण के कारण हो सकती है।

    3. एलर्जिक खांसी

    यह धूल, परागकण (Pollen), पालतू जानवरों के बाल, धुआं या अन्य एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थों के संपर्क में आने से होती है।


    खांसी का घरेलू इलाज

    सूखी खांसी का घरेलू इलाज

    • 1 चम्मच शहद में चुटकीभर हल्दी मिलाकर लें। (एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शहद न दें।)
    • दिन में 2-3 बार भाप (Steam) लें।
    • गुनगुना पानी पीते रहें।
    • धूल, धुआं और ठंडी हवा से बचें।

    बलगम वाली खांसी का घरेलू इलाज

    • गुनगुने नमक वाले पानी से गरारे करें।
    • अदरक, तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा पी सकते हैं।
    • पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएं।
    • दिन में 2 बार भाप लें, जिससे बलगम पतला होकर आसानी से बाहर निकल सके।

    रात में खांसी ज्यादा क्यों होती है?

    कई लोगों की खांसी रात में बढ़ जाती है। इसके मुख्य कारण हैं—

    • लेटने पर गले में नाक का स्राव (Post Nasal Drip) आना।
    • एसिड रिफ्लक्स (Acid Reflux)।
    • कमरे की सूखी हवा।
    • एलर्जी।

    बचाव कैसे करें?

    • सिर थोड़ा ऊंचा रखकर सोएं।
    • सोने से पहले हल्का भोजन करें।
    • पर्याप्त पानी पिएं।
    • जरूरत हो तो कमरे में ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें।

    खांसी में क्या खाना चाहिए?

    ✔️ गुनगुना पानी

    ✔️ हल्दी वाला दूध (यदि दूध से परेशानी न हो)

    ✔️ अदरक

    ✔️ तुलसी

    ✔️ शहद (1 वर्ष से अधिक उम्र में)

    ✔️ गर्म सूप

    ✔️ विटामिन C युक्त फल


    खांसी में क्या नहीं खाना चाहिए?

    • बहुत ठंडा पानी
    • आइसक्रीम
    • कोल्ड ड्रिंक
    • अत्यधिक तला-भुना भोजन
    • ज्यादा मसालेदार खाना
    • धूम्रपान और शराब

    क्या खांसी में एंटीबायोटिक लेनी चाहिए?

    नहीं। अधिकांश मामलों में खांसी वायरल संक्रमण के कारण होती है, जिनमें एंटीबायोटिक असर नहीं करती। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेने से नुकसान हो सकता है और भविष्य में दवाएं कम प्रभावी हो सकती हैं।


    एलर्जी की खांसी का इलाज

    यदि खांसी बार-बार एलर्जी के कारण होती है, तो सबसे पहले एलर्जी के कारण की पहचान करना जरूरी है।

    • धूल और धुएं से बचें।
    • घर की नियमित सफाई करें।
    • आवश्यकता होने पर एलर्जी विशेषज्ञ से जांच कराएं।
    • डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लें।

    टीबी की खांसी कैसे पहचानें?

    यदि आपको निम्न लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें—

    • 2–3 सप्ताह से अधिक लगातार खांसी
    • खांसी में खून आना
    • रात में ज्यादा पसीना आना
    • लगातार बुखार
    • तेजी से वजन कम होना

    ऐसी स्थिति में जांच कराना जरूरी होता है।


    डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

    निम्न परिस्थितियों में घरेलू उपचार पर निर्भर न रहें—

    • खांसी 2–3 सप्ताह से अधिक रहे।
    • तेज बुखार हो।
    • सांस लेने में तकलीफ हो।
    • सीने में दर्द हो।
    • खून वाली खांसी आए।
    • छोटे बच्चों, बुजुर्गों या गर्भवती महिलाओं में लगातार खांसी हो।

    निष्कर्ष

    खांसी का सही इलाज उसकी वजह पर निर्भर करता है। सामान्य वायरल खांसी में आराम, पर्याप्त पानी, भाप और कुछ घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं। लेकिन यदि खांसी लंबे समय तक बनी रहे, बार-बार लौटे या गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत योग्य डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। बिना सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन करने से बचें।

    अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी भी दवा या उपचार को शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

  • रूममेट से हुआ झगड़ा, फिर सुई-धागे से सिल दिए महिला के होंठ! पीड़िता ने दुकान पहुंचकर लिखकर मांगी मदद..

    रूममेट से हुआ झगड़ा, फिर सुई-धागे से सिल दिए महिला के होंठ! पीड़िता ने दुकान पहुंचकर लिखकर मांगी मदद..

    रूममेट से हुआ झगड़ा, फिर सुई-धागे से सिल दिए महिला के होंठ! पीड़िता ने दुकान पहुंचकर लिखकर मांगी मदद..

    AI Image

    दुनिया भर में रूममेट्स के बीच छोटी-मोटी कहासुनी होना आम बात है. लेकिन जापान में सामने आया यह मामला लोगों को हैरान कर रहा है. यहां एक महिला पर आरोप है कि उसने अपने साथ रहने वाली दूसरी महिला के साथ ऐसा बर्ताव किया, जिसकी कल्पना भी करना मुश्किल है.

    साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना जापान के इबाराकी प्रांत की है. यहां रहने वाली 49 वर्षीय मसाए सकुराई को पुलिस ने 42 वर्षीय एक महिला को गंभीर रूप से घायल करने के आरोप में गिरफ्तार किया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने एक विवाद के बाद अपनी रूममेट के होंठ सुई और धागे से सिल दिए. इस घटना के बाद आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.

    पुलिस के मुताबिक सुई-धागे से सिल दिए होंठ

    जांच एजेंसियों का कहना है कि 29 जून को आरोपी महिला ने कथित तौर पर सुई और धागे की मदद से अपनी रूममेट के होंठ सिल दिए. यह घटना उस घर में हुई, जहां दोनों पिछले कुछ महीनों से साथ रह रही थीं. बताया जा रहा है कि पीड़ित महिला अप्रैल 2025 से आरोपी के साथ रह रही थी. हालांकि दोनों के बीच किस बात को लेकर विवाद हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना के पीछे की असली वजह पता लगाने की कोशिश कर रही है.

    किसी तरह भागकर दुकान पहुंची महिला

    घटना के बाद पीड़िता किसी तरह वहां से निकलने में सफल रही. वह पास की एक दुकान तक पहुंची, लेकिन उस समय बोलने की स्थिति में नहीं थी. रिपोर्ट के अनुसार, उसने दुकान के कर्मचारी से एक कागज पर लिखकर मदद मांगी. कर्मचारी ने तुरंत हालात की गंभीरता समझी और पुलिस को सूचना दी. अगले दिन दोपहर करीब डेढ़ बजे पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़िता को सुरक्षित बाहर निकाला.

    पहले भी भाग सकती थी, लेकिन डर की वजह से रुकी रही

    साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पुलिस पूछताछ के दौरान पीड़िता ने बताया कि वह पहले भी वहां से निकलना चाहती थी, लेकिन डर की वजह से ऐसा नहीं कर सकी. उसने अधिकारियों से कहा कि वह काफी समय से भय में जी रही थी और इसी कारण भागने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी. इस बयान के बाद पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या महिला लंबे समय से किसी तरह के मानसिक या शारीरिक दबाव में थी.

    आरोपी ने क्या कहा?

    अभी तक पुलिस ने यह साफ नहीं किया है कि आरोपी महिला ने आरोप स्वीकार किए हैं या नहीं. अधिकारियों ने इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. फिलहाल पुलिस उससे लगातार पूछताछ कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है.

    घर में और लोग भी रहते थे?

    जांच के दौरान एक और दिलचस्प बात सामने आई है. आरोपी महिला के एक परिचित ने मीडिया को बताया कि उसने पिछले साल नवंबर में उस घर का दौरा किया था. उसके मुताबिक, वहां सिर्फ दो महिलाएं ही नहीं, बल्कि कई और लोग भी रहते थे. उसने दावा किया कि घर में दो-तीन महिलाएं और एक किशोर उम्र का लड़का भी मौजूद था. इसी जानकारी के बाद पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय घर में और कौन-कौन मौजूद था और क्या किसी अन्य व्यक्ति की भी इसमें कोई भूमिका थी.

    जरूरतमंद महिलाओं की मदद करने का भी दावा

    मामले ने इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचा क्योंकि आरोपी महिला के बारे में कुछ अलग तरह की जानकारी भी सामने आई है. उसकी एक पूर्व सहकर्मी ने बताया कि करीब तीन साल पहले उसे पता चला था कि सकुराई उन लड़कियों की मदद करती थी, जिनके पास रहने की कोई जगह नहीं होती थी या जिनका परिवार से संपर्क टूट गया था. हालांकि पुलिस अभी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पीड़िता और आरोपी का रिश्ता वास्तव में क्या था और दोनों किस परिस्थिति में साथ रह रहे थे.

    कई सवालों के जवाब अभी बाकी

    इस पूरे मामले में अभी कई अहम सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि दोनों महिलाएं एक साथ क्यों रह रही थीं, उनके बीच किस बात को लेकर विवाद हुआ और क्या इस घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भी कोई भूमिका थी. अधिकारियों ने अभी तक हमले के पीछे की वजह सार्वजनिक नहीं की है. साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि आगे और लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी या नहीं.

    सोशल मीडिया पर भी हो रही चर्चा

    जापान की यह घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हो रही है. कई लोगों ने इसे बेहद डरावनी घटना बताया है, जबकि कुछ यूजर्स का कहना है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए. कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि अगर घर में और लोग मौजूद थे, तो उन्होंने पीड़िता की मदद क्यों नहीं की.

    जांच पूरी होने का इंतजार

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है. अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि घर के अंदर आखिर क्या हुआ था और क्या यह सिर्फ दो लोगों के बीच का विवाद था या इसके पीछे कोई बड़ी कहानी छिपी हुई है. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस मामले से जुड़े कई सवाल अनुत्तरित रहेंगे. हालांकि इतना तय है कि इस घटना ने जापान ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोगों को हैरान कर दिया है.

    जापान से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दो महिलाओं के बीच रहने के दौरान हुआ विवाद कथित तौर पर इतनी भयावह घटना में बदल गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा. आरोप है कि 49 साल की एक महिला ने अपनी रूममेट के होंठ सुई और धागे से सिल दिए. किसी तरह पीड़िता वहां से निकलकर एक दुकान तक पहुंची और लिखकर मदद मांगी.

    Written BySantosh Mishra

    Published: Jul 10, 2026, 04:18 PM IST|Updated: Jul 10, 2026, 04:18 PM IST

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    रूममेट से हुआ झगड़ा, फिर सुई-धागे से सिल दिए महिला के होंठ! पीड़िता ने दुकान पहुंचकर लिखकर मांगी मदद

    Image Credit: AI Image

    दुनिया भर में रूममेट्स के बीच छोटी-मोटी कहासुनी होना आम बात है. लेकिन जापान में सामने आया यह मामला लोगों को हैरान कर रहा है. यहां एक महिला पर आरोप है कि उसने अपने साथ रहने वाली दूसरी महिला के साथ ऐसा बर्ताव किया, जिसकी कल्पना भी करना मुश्किल है.

    साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना जापान के इबाराकी प्रांत की है. यहां रहने वाली 49 वर्षीय मसाए सकुराई को पुलिस ने 42 वर्षीय एक महिला को गंभीर रूप से घायल करने के आरोप में गिरफ्तार किया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने एक विवाद के बाद अपनी रूममेट के होंठ सुई और धागे से सिल दिए. इस घटना के बाद आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.

    पुलिस के मुताबिक सुई-धागे से सिल दिए होंठ

    जांच एजेंसियों का कहना है कि 29 जून को आरोपी महिला ने कथित तौर पर सुई और धागे की मदद से अपनी रूममेट के होंठ सिल दिए. यह घटना उस घर में हुई, जहां दोनों पिछले कुछ महीनों से साथ रह रही थीं. बताया जा रहा है कि पीड़ित महिला अप्रैल 2025 से आरोपी के साथ रह रही थी. हालांकि दोनों के बीच किस बात को लेकर विवाद हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना के पीछे की असली वजह पता लगाने की कोशिश कर रही है.

    किसी तरह भागकर दुकान पहुंची महिला

    घटना के बाद पीड़िता किसी तरह वहां से निकलने में सफल रही. वह पास की एक दुकान तक पहुंची, लेकिन उस समय बोलने की स्थिति में नहीं थी. रिपोर्ट के अनुसार, उसने दुकान के कर्मचारी से एक कागज पर लिखकर मदद मांगी. कर्मचारी ने तुरंत हालात की गंभीरता समझी और पुलिस को सूचना दी. अगले दिन दोपहर करीब डेढ़ बजे पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़िता को सुरक्षित बाहर निकाला.

    पहले भी भाग सकती थी, लेकिन डर की वजह से रुकी रही

    साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पुलिस पूछताछ के दौरान पीड़िता ने बताया कि वह पहले भी वहां से निकलना चाहती थी, लेकिन डर की वजह से ऐसा नहीं कर सकी. उसने अधिकारियों से कहा कि वह काफी समय से भय में जी रही थी और इसी कारण भागने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी. इस बयान के बाद पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या महिला लंबे समय से किसी तरह के मानसिक या शारीरिक दबाव में थी.

    आरोपी ने क्या कहा?

    अभी तक पुलिस ने यह साफ नहीं किया है कि आरोपी महिला ने आरोप स्वीकार किए हैं या नहीं. अधिकारियों ने इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. फिलहाल पुलिस उससे लगातार पूछताछ कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है.

    घर में और लोग भी रहते थे?

    जांच के दौरान एक और दिलचस्प बात सामने आई है. आरोपी महिला के एक परिचित ने मीडिया को बताया कि उसने पिछले साल नवंबर में उस घर का दौरा किया था. उसके मुताबिक, वहां सिर्फ दो महिलाएं ही नहीं, बल्कि कई और लोग भी रहते थे. उसने दावा किया कि घर में दो-तीन महिलाएं और एक किशोर उम्र का लड़का भी मौजूद था. इसी जानकारी के बाद पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय घर में और कौन-कौन मौजूद था और क्या किसी अन्य व्यक्ति की भी इसमें कोई भूमिका थी.

    जरूरतमंद महिलाओं की मदद करने का भी दावा

    मामले ने इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचा क्योंकि आरोपी महिला के बारे में कुछ अलग तरह की जानकारी भी सामने आई है. उसकी एक पूर्व सहकर्मी ने बताया कि करीब तीन साल पहले उसे पता चला था कि सकुराई उन लड़कियों की मदद करती थी, जिनके पास रहने की कोई जगह नहीं होती थी या जिनका परिवार से संपर्क टूट गया था. हालांकि पुलिस अभी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पीड़िता और आरोपी का रिश्ता वास्तव में क्या था और दोनों किस परिस्थिति में साथ रह रहे थे.

    कई सवालों के जवाब अभी बाकी

    इस पूरे मामले में अभी कई अहम सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि दोनों महिलाएं एक साथ क्यों रह रही थीं, उनके बीच किस बात को लेकर विवाद हुआ और क्या इस घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भी कोई भूमिका थी. अधिकारियों ने अभी तक हमले के पीछे की वजह सार्वजनिक नहीं की है. साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि आगे और लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी या नहीं.

    सोशल मीडिया पर भी हो रही चर्चा

    जापान की यह घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हो रही है. कई लोगों ने इसे बेहद डरावनी घटना बताया है, जबकि कुछ यूजर्स का कहना है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए. कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि अगर घर में और लोग मौजूद थे, तो उन्होंने पीड़िता की मदद क्यों नहीं की.

    जांच पूरी होने का इंतजार

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है. अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि घर के अंदर आखिर क्या हुआ था और क्या यह सिर्फ दो लोगों के बीच का विवाद था या इसके पीछे कोई बड़ी कहानी छिपी हुई है. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस मामले से जुड़े कई सवाल अनुत्तरित रहेंगे. हालांकि इतना तय है कि इस घटना ने जापान ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोगों को हैरान कर दिया है.

  • पारिवारिक विवाद में खूनी वारदात, चाचा की मौत के बाद आरोपी भतीजा गिरफ्तार..

    पारिवारिक विवाद में खूनी वारदात, चाचा की मौत के बाद आरोपी भतीजा गिरफ्तार..

    पारिवारिक विवाद में खूनी वारदात, चाचा की मौत के बाद आरोपी भतीजा गिरफ्तार..

    झालावाड़. जिले के सारोला थाना क्षेत्र के नूरजी गाडरवाड़ा गांव में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है. यहां आपसी पारिवारिक विवाद के चलते एक भतीजे ने अपने ही चाचा पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया. हमले में गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग की इलाज के दौरान मौत हो गई. घटना के बाद आरोपी भतीजा मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है.

    सारोला थाना पुलिस के अनुसार नूरजी गाडरवाड़ा गांव निवासी बुजुर्ग जगन्नाथ बैरवा का परिवार के कुछ सदस्यों के साथ किसी घरेलू बात को लेकर विवाद चल रहा था. इसी विवाद को लेकर परिवार के बीच बहस शुरू हो गई. देखते ही देखते कहासुनी इतनी बढ़ गई कि आरोपी भतीजे कुलदीप ने अपना आपा खो दिया और अपने काका जगन्नाथ बैरवा पर धारदार हथियार से हमला कर दिया. हमले के बाद जगन्नाथ बैरवा गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना के बाद आसपास के लोगों और परिजनों में हड़कंप मच गया. परिजन तत्काल घायल अवस्था में उन्हें उपचार के लिए झालावाड़ जिला अस्पताल लेकर पहुंचे.

    इलाज के दौरान बुजुर्ग ने तोड़ा दम

    जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने जगन्नाथ बैरवा की गंभीर हालत को देखते हुए उपचार शुरू किया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया. घटना की सूचना मिलते ही सारोला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है. मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा. पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि घटना के पीछे पारिवारिक विवाद मुख्य कारण हो सकता है. पुलिस घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है. फिलहाल सारोला थाना पुलिस आरोपी भतीजे कुलदीप की तलाश में जुटी हुई है. पुलिस का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों और पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

  • रात को दही खाना सही या गलत? फायदे, नुकसान और सही तरीका..

    रात को दही खाना सही या गलत? फायदे, नुकसान और सही तरीका..

    रात को दही खाना सही या गलत? फायदे, नुकसान और सही तरीका..

    भारतीय भोजन में दही को बहुत पौष्टिक माना जाता है। रायता, लस्सी और छाछ के रूप में लोग इसका सेवन रोजाना करते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या रात को दही खाना सही है?

    आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों के अनुसार, रात में दही खाने के कुछ फायदे भी हैं और कुछ नुकसान भी। आइए आसान भाषा में समझते हैं।

    रात को दही खाने के फायदे

    1. पाचन बेहतर बनाने में मददगार

    दही में प्रोबायोटिक्स यानी अच्छे बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो पेट को स्वस्थ रखने और भोजन पचाने में मदद करते हैं।

    2. कैल्शियम से भरपूर

    दही में कैल्शियम और फॉस्फोरस अच्छी मात्रा में होता है, जिससे हड्डियां और दांत मजबूत रहते हैं।

    3. अच्छी नींद में मदद

    दही में मौजूद पोषक तत्व शरीर को रिलैक्स महसूस कराने में मदद कर सकते हैं, जिससे नींद बेहतर हो सकती है।

    4. शरीर को ठंडक देना

    गर्मी के मौसम में सीमित मात्रा में दही खाने से शरीर को ठंडक मिल सकती है।

    रात को दही खाने के नुकसान

    1. सर्दी और बलगम बढ़ सकता है

    जिन लोगों को जल्दी सर्दी-जुकाम या खांसी होती है, उन्हें रात में दही खाने से परेशानी हो सकती है।

    2. पेट भारी लगना

    रात में ज्यादा मात्रा में दही खाने से अपच या पेट भारी होने की समस्या हो सकती है।

    3. जोड़ों के दर्द में परेशानी

    कुछ लोगों में रात के समय दही खाने से जोड़ों के दर्द या सूजन की समस्या बढ़ सकती है।

    रात में दही खाने का सही तरीका

    बहुत ठंडी दही न खाएं

    दही में भुना जीरा या काली मिर्च मिला सकते हैं

    कम मात्रा में सेवन करें

    खट्टा दही रात में खाने से बचें

    सर्दी-जुकाम होने पर दही न खाएं

    निष्कर्ष

    रात में दही खाना हर व्यक्ति के शरीर पर अलग असर कर सकता है। अगर आपको दही खाने से कोई परेशानी नहीं होती, तो सीमित मात्रा में सही तरीके से इसका सेवन किया जा सकता है। लेकिन जिन लोगों को खांसी, सर्दी या बलगम की समस्या रहती है, उन्हें रात में दही खाने से बचना चाहिए।

    नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  • बेटा दिलाने का झांसा, लाखों में नवजातों का सौदा… चाइल्ड ट्रैफिकिंग का खौफनाक खेल बेनकाब..

    बेटा दिलाने का झांसा, लाखों में नवजातों का सौदा… चाइल्ड ट्रैफिकिंग का खौफनाक खेल बेनकाब..

    बेटा दिलाने का झांसा, लाखों में नवजातों का सौदा… चाइल्ड ट्रैफिकिंग का खौफनाक खेल बेनकाब..

    दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय चाइल्ड ट्रैफिकिंग सिंडिकेट का खुलासा किया है, जो गरीब और मजबूर परिवारों से नवजात बच्चों को लेकर उन्हें लाखों रुपये में निसंतान दंपतियों या बेटा चाहने वाले परिवारों को बेचता था. पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें बिचौलिए, अस्पताल संचालक, लैब टेक्नीशियन, आशा वर्कर, ड्राइवर, बच्चों के सप्लायर, खरीदार दंपति और यहां तक कि कुछ मामलों में बच्चों के जैविक माता-पिता भी शामिल थे.

    दिल्ली पुलिस के मुताबिक इस मामले में अब तक 23 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें अस्पताल संचालक, बच्चे सप्लाई करने वाले एजेंट, खरीदार दंपति, बिचौलिए और जैविक माता-पिता शामिल हैं. वहीं, 9 मासूम बच्चों को इस नेटवर्क से मुक्त कराया गया है. पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

    एक आम नागरिक की सूचना से खुला पूरा नेटवर्क

    डीसीपी रोहित राजबीर सिंह के मुताबिक पूरे मामले की शुरुआत किसी बड़ी एजेंसी की सूचना से नहीं बल्कि एक आम नागरिक की सतर्कता से हुई. एक व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि पहाड़गंज इलाके में एक महिला अक्सर अलग-अलग नवजात बच्चों के साथ दिखाई देती है. कभी उसके पास लड़का होता, कभी लड़की. कुछ दिनों बाद वही महिला फिर किसी दूसरे बच्चे के साथ नजर आती थी. उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो सूचना पुलिस तक पहुंची.

    सूचना मिलते ही सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की ऑपरेशन यूनिट सक्रिय हो गई. पुलिस ने सबसे पहले पहाड़गंज और आसपास के इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की. कई दिनों तक फुटेज देखने के बाद महिला की पहचान ज्योति उर्फ कमलेश के रूप में हुई.

    सीसीटीवी के बाद शुरू हुई गुप्त निगरानी

    महिला की पहचान होने के बाद पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई नहीं की. उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई. उसके मिलने-जुलने वाले लोगों की जानकारी जुटाई गई और यह पता लगाने की कोशिश की गई कि वह बच्चों के साथ आखिर करती क्या है. जांच के दौरान पता चला कि वह नवजात बच्चों के सौदे में शामिल है. इसके बाद पुलिस ने उसे रंगे हाथों पकड़ने के लिए डिकॉय ऑपरेशन की योजना बनाई.

    पुलिस बनी ग्राहक, 20 हजार में तय हुई पहली डील

    एक पुलिसकर्मी को ग्राहक बनाकर ज्योति से संपर्क कराया गया. बातचीत के दौरान ज्योति ने दावा किया कि वह नवजात बच्चा उपलब्ध करा सकती है. दोनों के बीच सौदा तय हुआ और आरोपी ने 20 हजार रुपये एडवांस मांगे. इसके बाद पुलिस ने पूरी योजना तैयार की और तय समय पर आर.के. आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास जाल बिछा दिया.

    5 जून को रंगे हाथों पकड़े गए आरोपी

    5 जून 2026 को ज्योति उर्फ कमलेश अपने दो साथियों शालू और ललित के साथ चार से पांच दिन के एक नवजात लड़के को लेकर आर.के. आश्रम मेट्रो स्टेशन पहुंची. जैसे ही बच्चे को ग्राहक के हवाले किया जाने लगा, पहले से मौजूद पुलिस टीम ने तीनों को घेर लिया. मौके से चार-पांच दिन का नवजात सुरक्षित बरामद कर लिया गया. पुलिस ने 20 हजार रुपये की टोकन राशि भी बरामद की. इसी मामले में पहाड़गंज थाने में बीएनएस और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई.

    पूछताछ में खुला करोड़ों के नेटवर्क का राज

    शुरुआत में पुलिस को लगा कि यह सिर्फ एक बच्चे की खरीद-बिक्री का मामला है. लेकिन जैसे-जैसे तीनों आरोपियों से पूछताछ आगे बढ़ी, पुलिस के सामने हैरान करने वाली जानकारी आती गई. पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय है और पिछले करीब डेढ़ साल से बच्चों की खरीद-फरोख्त कर रहा है.

    इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल डीसीपी-2 प्रशांत चौधरी की अगुवाई में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया. इस टीम में एसीपी, एसएचओ, स्पेशल स्टाफ, महिला पुलिस अधिकारी और कानूनी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया, ताकि जांच के दौरान किसी भी कानूनी पहलू की अनदेखी न हो.

    सात राज्यों तक फैला था नेटवर्क

    एसआईटी ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में एक साथ जांच शुरू की. मोबाइल लोकेशन, बैंक खातों, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल भुगतान और तकनीकी निगरानी के जरिए एक-एक कड़ी जोड़ी गई धीरे-धीरे पुलिस के सामने पूरा नेटवर्क खुलता चला गया.

    हर सदस्य की अलग जिम्मेदारी

    जांच में पता चला कि गिरोह पूरी तरह संगठित तरीके से काम करता था.

    • कुछ लोग गरीब परिवारों की तलाश करते थे.
    • कुछ लोग गर्भवती महिलाओं पर नजर रखते थे.
    • कुछ लोग अस्पतालों से संपर्क रखते थे.
    • कुछ नवजात बच्चों को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाते थे.
    • कुछ लोग खरीदार ढूंढते थे.
    • कुछ बैंक खातों के जरिए पैसों का लेनदेन संभालते थे.
    • जबकि कुछ लोग फर्जी दस्तावेज तैयार कराने का काम करते थे.

    यानी पूरे नेटवर्क में हर व्यक्ति की भूमिका पहले से तय थी.

    ज्योति थी पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी

    पुलिस जांच में सामने आया कि ज्योति उर्फ कमलेश इस पूरे नेटवर्क की सबसे महत्वपूर्ण सदस्य थी. वह हरियाणा में आशा वर्कर के रूप में काम करती थी. लेकिन पुलिस के मुताबिक उसकी असली भूमिका बच्चों की खरीद-फरोख्त कराना थी. वह अलग-अलग राज्यों से बच्चों की व्यवस्था करती और फिर उन्हें खरीदने वाले परिवारों तक पहुंचाती थी. दिल्ली पुलिस के मुताबिक ज्योति पहले भी मानव तस्करी के मामलों में गिरफ्तार हो चुकी है. उसके खिलाफ पंजाबी बाग थाने में आईपीसी की धारा 363, 370, 370A और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज है.

    प्रतिभा और विपिन की गिरफ्तारी से मिले नए सुराग

    ज्योति से पूछताछ के बाद पुलिस ने प्रतिभा और विपिन को गिरफ्तार किया. दोनों एक और बच्चे की डील करने जा रहे थे. जब पुलिस ने उन्हें पकड़ा तो उनके पास से 2 लाख 92 हजार 400 रुपये नकद मिले. पूछताछ में पता चला कि यह रकम नवजात बच्चे की खरीद के लिए रखी गई थी.
    प्रतिभा पेशे से फ्रीलांस लैब टेक्नीशियन थी और हीरा मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल से जुड़ी हुई थी. वहीं विपिन पूरे नेटवर्क का ड्राइवर था. वह बच्चों और आरोपियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम करता था.

    अस्पताल से लेकर आदिवासी गांवों तक फैला था नेटवर्क

    जांच आगे बढ़ी तो पुलिस के सामने सबसे चौंकाने वाला खुलासा दिल्ली के बेगमपुर स्थित हीरा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल को लेकर हुआ. पुलिस का आरोप है कि यह अस्पताल सिर्फ इलाज का केंद्र नहीं था, बल्कि नवजात बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त के इस नेटवर्क की एक अहम कड़ी बन चुका था. जांच के मुताबिक अस्पताल की संचालक डॉ. विवेकी कपूर गिरोह के अन्य सदस्यों के संपर्क में थी. आरोप है कि अस्पताल में ऐसे नवजात बच्चों को रखा जाता था, जिन्हें गिरोह विभिन्न राज्यों से लेकर आता था.

    पुलिस का दावा है कि अस्पताल में इलाज या आईवीएफ और स्त्री रोग संबंधी परामर्श के लिए आने वाले निसंतान दंपतियों की पहचान की जाती थी और बाद में उन्हें अवैध तरीके से बच्चे उपलब्ध कराने की पेशकश की जाती थी. पुलिस का आरोप है कि अस्पताल के जरिए कई सौदे तय हुए और बच्चों के जन्म से जुड़े दस्तावेज, अस्पताल रिकॉर्ड और अन्य कागजात तैयार कर उनकी पहचान बदलने की कोशिश भी की गई. फिलहाल अस्पताल से बरामद दस्तावेजों, जन्म रिकॉर्ड और मेडिकल फाइलों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है.

    गुरुग्राम से गुजरात तक फैला था सप्लाई नेटवर्क

    जांच में सामने आया कि गिरोह का सबसे बड़ा सप्लायर साहिबा उर्फ कालिया गमार और उसका सहयोगी शंकर गमार थे. दोनों गुजरात और राजस्थान के गरीब तथा आदिवासी इलाकों में जाकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की तलाश करते थे. पुलिस के मुताबिक कई परिवारों को कुछ लाख रुपये का लालच देकर उनके नवजात बच्चे ले लिए जाते थे. इसके बाद बच्चों को दिल्ली और अन्य राज्यों में भेज दिया जाता था, जहां पहले से तैयार खरीदार उनका इंतजार करते थे.

    तकनीकी निगरानी और लगातार पीछा करने के बाद पुलिस ने शंकर गमार और अन्य आरोपियों तक पहुंच बनाई. गुजरात के साबरकांठा जिले से जैविक माता-पिता कांतीभाई गमार और सुग्नाबेन गमार को भी गिरफ्तार किया गया. जांच में सामने आया कि उन्होंने पैसों के बदले अपना नवजात बच्चा गिरोह को सौंप दिया था. बाद में उसी बच्चे को कई गुना अधिक कीमत पर दूसरे परिवार को बेच दिया गया. पुलिस का दावा है कि कालिया गमार अब तक 30 से अधिक बच्चों को इस नेटवर्क तक पहुंचा चुका है. उसके पूरे नेटवर्क की जांच अभी जारी है.

    गरीबी, मजबूरी और सामाजिक दबाव का उठाया जाता था फायदा

    जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह केवल गरीब परिवारों को ही निशाना नहीं बनाता था, बल्कि उन महिलाओं की भी पहचान करता था जो अविवाहित थीं या किसी कारणवश बच्चे का पालन-पोषण नहीं करना चाहती थीं. ऐसे ही एक मामले में दिल्ली की रहने वाली एक युवती ने अविवाहित होने के कारण बच्चा अपने पास रखने से इनकार कर दिया. पुलिस के मुताबिक डिलीवरी के बाद बच्चे को मां को वापस देने के बजाय गिरोह के कब्जे में रखा गया और बाद में उसे दूसरे परिवार को बेच दिया गया. जैविक मां को कोई पैसा भी नहीं दिया गया.

    डिमांड पहले, बच्चा बाद में

    पुलिस की जांच में सबसे अहम खुलासा यह हुआ कि यह गिरोह पहले बच्चे नहीं ढूंढता था, बल्कि पहले ग्राहक तलाशता था. जिन दंपतियों की संतान नहीं थी, या जिनके घर पहले से बेटियां थीं और वे बेटा चाहते थे, उनसे संपर्क किया जाता था. जब खरीदार तैयार हो जाता था, तब गिरोह अपने नेटवर्क के जरिए नवजात बच्चे की व्यवस्था करता था. यानी पूरा कारोबार डिमांड एंड सप्लाई के मॉडल पर चल रहा था.

    बच्चों की कीमत कैसे तय होती थी?

    पुलिस जांच के मुताबिक गिरोह गरीब परिवारों से नवजात बच्चों को डेढ़ से दो लाख रुपये में हासिल करता था. इसके बाद वही बच्चा 6 से 8 लाख रुपये में बेच दिया जाता था. कुछ मामलों में कीमत 9 लाख रुपये तक पहुंच जाती थी. कीमत इस बात पर निर्भर करती थी कि बच्चा कितना छोटा है, लड़का है या लड़की, खरीदार कितना संपन्न है और उसकी जरूरत कितनी ज्यादा है.

    बेटे की चाह में बने आरोपी

    पुलिस जांच में कई ऐसे परिवार सामने आए जो वर्षों से निसंतान थे, जबकि कुछ परिवारों के पास पहले से बेटी थी, लेकिन वे बेटा चाहते थे. रोहिणी निवासी गरिमा जैन और उसके परिवार पर आरोप है कि उन्होंने करीब 8 लाख रुपये देकर नवजात बच्चा लिया.

    • ऋषिकेश की केतकी गुप्ता ने कथित तौर पर लगभग 4 लाख रुपये देकर एक बच्चा खरीदा.
    • हरिद्वार के अमित प्रताप सिंह और उनकी पत्नी अभा सिंह पर लगभग 5 लाख रुपये देकर बेटा खरीदने का आरोप है.
    • ग्वालियर निवासी मुकेश पाल और रीमा पाल को दो बच्चों की खरीद के आरोप में गिरफ्तार किया गया.
    • पानीपत के सनी अरोड़ा, रितु अरोड़ा और सरिता के खिलाफ भी बच्चों की खरीद के आरोप में कार्रवाई की गई.
    • पुलिस ने साफ किया है कि बच्चों की खरीद-फरोख्त में शामिल खरीदारों को भी आरोपी बनाया गया है.

    चार और बच्चों का रेस्क्यू, कुल 9 मासूम सुरक्षित

    ताजा कार्रवाई में पुलिस ने चार और बच्चों को सुरक्षित बरामद किया. रोहिणी से 16 दिन का एक नवजात लड़का, ऋषिकेश से एक महीने का नवजात. मथुरा से लगभग एक साल एक महीने का बच्चा और हरिद्वार से करीब आठ महीने का बच्चा बरामद किया गया है.

    इससे पहले भी पांच बच्चों को हरियाणा, पानीपत और ग्वालियर समेत विभिन्न स्थानों से मुक्त कराया जा चुका था. इनमें 27 दिन के जुड़वां बच्चों सहित कई नवजात शामिल थे. पुलिस के अनुसार रेस्क्यू किए गए चार बच्चे आदिवासी परिवारों से जुड़े हुए हैं.

    अब तक कुल 9 बच्चों को सुरक्षित बचाया जा चुका है. सभी बच्चों को CWC की निगरानी में भेजा गया है. रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) के समक्ष पेश किया गया. समिति के निर्देश पर सभी बच्चों की देखभाल, चिकित्सा, सुरक्षा और पुनर्वास की व्यवस्था की गई है. पुलिस जैविक माता-पिता की पहचान, डीएनए मिलान और कानूनी प्रक्रिया भी पूरी कर रही है.

    IVF और सरोगेसी का एंगल नहीं मिला

    जांच के दौरान पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक आईवीएफ या सरोगेसी से जुड़े किसी संगठित रैकेट के सबूत नहीं मिले हैं. पुलिस के अनुसार आरोपी सीधे जैविक माता-पिता से बच्चे लेकर उन्हें जरूरतमंद दंपतियों को बेचते थे. यानी पूरा नेटवर्क केवल अवैध खरीद-फरोख्त पर आधारित था.

    बैंक खातों से खुल रही है करोड़ों की मनी ट्रेल

    पुलिस को जांच के दौरान कई बैंक खातों में लाखों रुपये के लेनदेन के सबूत मिले हैं. अब इन खातों की गहन जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे नेटवर्क से किसने कितना पैसा कमाया और रकम किन-किन लोगों तक पहुंची. मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट, डिजिटल पेमेंट, अस्पताल रिकॉर्ड और जन्म प्रमाणपत्र से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं.

    अभी और बढ़ सकती है गिरफ्तारियों की संख्या

    दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है. कई अन्य राज्यों में भी इस गिरोह के तार मिलने की संभावना है. पुलिस उन अस्पतालों, एजेंटों, ट्रांसपोर्टरों, दस्तावेज तैयार करने वालों और अन्य सहयोगियों की पहचान कर रही है जो इस नेटवर्क का हिस्सा रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. साथ ही कई और बच्चों को इस गिरोह के चंगुल से मुक्त कराए जाने की संभावना है.

    दिल्ली पुलिस का मानना है कि यह हाल के सालों में सामने आए नवजात बच्चों की तस्करी के सबसे संगठित और बड़े मामलों में से एक है, जिसमें गरीबी, सामाजिक दबाव, बेटे की चाह और अवैध कमाई की लालच ने मिलकर मासूम बच्चों को खरीद-फरोख्त का सामान बना दिया था.

  • अश्वगंधा के फायदे: तनाव कम करने और शरीर को ताकत देने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी..

    अश्वगंधा के फायदे: तनाव कम करने और शरीर को ताकत देने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी..

    अश्वगंधा के फायदे: तनाव कम करने और शरीर को ताकत देने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी..

    आजकल की तेज भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग तनाव, थकान और कमजोरी जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं। काम का दबाव, कम नींद और गलत खानपान धीरे-धीरे शरीर और दिमाग दोनों को कमजोर बना देते हैं। ऐसे समय में आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाली एक जड़ी-बूटी का नाम सबसे ज्यादा सुनने को मिलता है — अश्वगंधा

    सदियों से आयुर्वेद में अश्वगंधा का उपयोग शरीर को ताकत देने और मानसिक तनाव कम करने के लिए किया जाता रहा है। यही वजह है कि आज भी बहुत लोग इसे अपनी डेली लाइफ में इस्तेमाल करते हैं।


    अश्वगंधा क्या है?

    अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है, जिसकी जड़ का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है। इसे “इंडियन जिनसेंग” भी कहा जाता है। आयुर्वेद में इसे शरीर की ऊर्जा बढ़ाने और कमजोरी दूर करने वाली जड़ी-बूटी माना गया है।


    तनाव और चिंता कम करने में मददगार

    अगर कोई व्यक्ति ज्यादा तनाव, चिंता या मानसिक दबाव महसूस करता है, तो अश्वगंधा उसके लिए फायदेमंद हो सकता है।
    कुछ लोगों का मानना है कि इसके सेवन से दिमाग शांत महसूस करता है और स्ट्रेस कम करने में मदद मिल सकती है।


    शरीर को ताकत और ऊर्जा देने में सहायक

    बार-बार थकान महसूस होना, कमजोरी लगना या शरीर में एनर्जी कम महसूस होना आजकल आम समस्या बन चुकी है। अश्वगंधा शरीर की ताकत बढ़ाने और कमजोरी कम करने में मदद कर सकता है।
    इसी कारण कई लोग इसे दूध के साथ लेना पसंद करते हैं।


    अच्छी नींद लाने में मदद कर सकता है

    जिन लोगों को रात में ठीक से नींद नहीं आती या बार-बार नींद टूटती है, उनके लिए भी अश्वगंधा फायदेमंद माना जाता है।
    यह शरीर को रिलैक्स महसूस कराने में मदद कर सकता है।


    इम्यूनिटी मजबूत करने में सहायक

    अश्वगंधा में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।
    मौसम बदलने पर बार-बार बीमार पड़ने वाले लोग भी इसका सेवन करते हैं।


    पुरुषों की सेहत के लिए क्यों माना जाता है फायदेमंद?

    आयुर्वेद में अश्वगंधा को पुरुषों की ताकत और स्टैमिना बढ़ाने वाली औषधि माना गया है।
    कई लोग इसे शरीर की कमजोरी दूर करने के लिए इस्तेमाल करते हैं।


    अश्वगंधा लेने का सही तरीका

    •  अश्वगंधा पाउडर को गुनगुने दूध के साथ लिया जा सकता है
    •  रात को सोने से पहले इसका सेवन करना बेहतर माना जाता है
    •  जरूरत से ज्यादा मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए
    •  किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर होता है

    किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?

    •  गर्भवती महिलाएं
    •  हाई या लो ब्लड प्रेशर वाले लोग
    •  गंभीर बीमारी से परेशान लोग
    •  जो लोग रोजाना दवाइयां लेते हैं

    ऐसे लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए।


    निष्कर्ष

    अश्वगंधा आयुर्वेद की एक लोकप्रिय और उपयोगी जड़ी-बूटी मानी जाती है। सही तरीके और सही मात्रा में सेवन करने पर यह तनाव कम करने, शरीर को ताकत देने और ऊर्जा बढ़ाने में मदद कर सकती है।

    हालांकि, किसी भी आयुर्वेदिक चीज का सेवन करने से पहले अपनी सेहत के अनुसार सलाह लेना जरूरी होता है।

  • शादी से पहले हवस का खेल… 13 साल की मासूम से दुष्कर्म के आरोप में NRI अमन गिरफ्तार..

    शादी से पहले हवस का खेल… 13 साल की मासूम से दुष्कर्म के आरोप में NRI अमन गिरफ्तार..

    शादी से पहले हवस का खेल… 13 साल की मासूम से दुष्कर्म के आरोप में NRI अमन गिरफ्तार..

    शादी से पहले दुष्कर्म के आरोप में NRI गिरफ्तार, श्रीगंगानगर पुलिस का बड़ा एक्शन

    Sriganganagar minor rape case: श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय नाबालिगा के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म के मामले में स्थानीय पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. पुलिस ने इस सनसनीखेज प्रकरण के मुख्य आरोपी और NRI अमन रामगढ़िया को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी अमन रामगढ़िया पिछले कुछ समय से विदेश में रह रहा था और वह अपनी शादी के लिए करीब डेढ़ महीने पहले ही न्यूजीलैंड से लौटा था. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद था, क्योंकि आरोपी की शादी आगामी 14 जुलाई को तय थी, जिसके लिए तैयारियां भी चल रही थीं. हालांकि, अपराध की गंभीरता और पुलिस की सख्त कार्रवाई के चलते उसे शादी के बंधन में बंधने से पहले ही सलाखों के पीछे जाना पड़ा.

    पुलिस जांच के दौरान सामने आया है कि आरोपी अमन ने होटल में बतौर ग्राहक रुककर इस पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया था. उसने एक नाबालिग बच्ची को अपना शिकार बनाया, जो कानूनन एक बहुत ही गंभीर अपराध है. घटना की सूचना मिलने के बाद से ही पुलिस ने मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा था. होटल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों को जुटाने के बाद पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया.

    अब तक 20 गिरफ्तारियां, SIT कर रही जांच
    इस पूरे प्रकरण में श्रीगंगानगर पुलिस के द्वारा अब तक कुल 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. मामले की संवेदनशीलता और इसमें शामिल विभिन्न पहलुओं को देखते हुए, राजस्थान पुलिस ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है. यह SIT टीम लगातार जांच पड़ताल कर रही है ताकि घटना में संलिप्त हर एक चेहरे को बेनकाब किया जा सके. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले में साक्ष्यों के आधार पर सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे. आरोपी का NRI होना और विदेश से आना इस पूरे केस को और भी अधिक संवेदनशील बनाता है, लेकिन पुलिस की टीमें पूरी तरह से साक्ष्यों को मजबूत करने में लगी हैं ताकि न्यायालय में दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके.

  • सरकारी स्कूल के शिक्षक पर किशोर के यौन शोषण का आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार..

    सरकारी स्कूल के शिक्षक पर किशोर के यौन शोषण का आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार..

    सरकारी स्कूल के शिक्षक पर किशोर के यौन शोषण का आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार..

    बलिया जिले के सिकंदरपुर क्षेत्र के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को 14 वर्षीय लड़के से कुकर्म के प्रयास के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) मनीष सिंह ने बताया…

    Ballia News: बलिया जिले के सिकंदरपुर क्षेत्र के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को 14 वर्षीय लड़के से कुकर्म के प्रयास के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) मनीष सिंह ने बताया कि सिकंदरपुर शिक्षा क्षेत्र के सिसोटार गांव स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक गुलाम मुस्तफा उर्फ पप्पू (50) को गुरुवार को निलंबित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि इस मामले में अनुशासनात्मक जांच के आदेश दिए गए हैं और सीयर क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारी को जांच अधिकारी बनाया गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आरोपी शिक्षक के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस के अनुसार, सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर कस्बे के डोमनपुरा मोहल्ले के गुलाम मुस्तफा उर्फ पप्पू ने 5 जुलाई को अपने घर पर फर्नीचर का काम करने के बहाने किशोर को बुलाया। किशोर को घर बुलाकर गुलाम ने दरवाजा बंद कर उससे कुकर्म करने का प्रयास किया। इस मामले में पीड़ित किशोर की तहरीर पर गुलाम मुस्तफा के विरुद्ध बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की सुसंगत धारा में नामजद मुकदमा दर्ज किया गया तथा पुलिस ने आरोपी शिक्षक को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया।

  • 13 वर्षीय बच्ची को बंधक बनाकर किया दुष्कर्म, आरोपी को मरते दम तक जेल की सजा..

    13 वर्षीय बच्ची को बंधक बनाकर किया दुष्कर्म, आरोपी को मरते दम तक जेल की सजा..

    13 वर्षीय बच्ची को बंधक बनाकर किया दुष्कर्म, आरोपी को मरते दम तक जेल की सजा..

     बिहार के दरभंगा जिले में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो कोर्ट) के विशेष न्यायाधीश ने एक नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म करने के आरोप में एक दुष्कर्मी को जीवन पर्यंत सश्रम कारावास और एक लाख रूपया अर्थ दंड की सजा सुनाई है। 

    लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 अधिनियम के विशेष अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुलेखा झा ने 13 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म करने बाले सिंहवारा थाना क्षेत्र के पैगंबरपुर गांव निवासी दुष्कर्मी विवेक कुमार शर्मा को जीवन पर्यंत सश्रम आजीवन कारावास और एक लाख रूपया अर्थ दंड की सजा सुनाई है। प्रभारी विशेष लोक अभियोजक अमर प्रकाश ने बताया कि 21 सितंबर 2022 को दर्ज प्राथमिक संख्या 201/22 में आरोपी ने 13 वर्षीय बालिका को बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था और विरोध करने पर उसने पीड़िता के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया था, जिससे वह बेहोश हो गई अगले दिन उसके कराहने की आवाज सुनकर लोगों ने संज्ञान लिया और उसे पानी पिलाकर होश में लाया और उससे घटना की जानकारी ली। परिवार वालों के द्वारा पुलिस में दी गई सूचना के बाद अभियुक्त को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। 

    पीड़िता को मिलेगा 6 लाख मुआवजा
    प्रकाश ने बताया कि गुरुवार को अदालत ने सजा निर्धारण के बिंदु पर सुनवाई के दौरान इस सामाजिक अपराध बताते हुए दुष्कर्मी सिंहवारा थाना क्षेत्र के पैगंबरपुर गांव निवासी विवेक कुमार शर्मा को पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत जीवन पर्यंत सश्रम कारावास एवं 50 हजार रूपया अर्थदंड, पोक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत 25 वर्षों का सश्रत्म कारावास और 50 हजार रूपया अर्थ दंड तथा भारतीय दंड विधान की धारा 341 में एक माह का कारावास और धारा 342 में 6 माह के कारावास की सजा सुनाई है। वही अर्थ दंड नहीं देने पर दोषी को 6 माह का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतान पड़ेगी। इसके अतिरिक्त न्यायालय ने बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पीड़िता को सहायतार्थ 6 लाख रुपए मुआवजा भुगतान करने का आदेश भी पारित किया है। 

  • रोजगार के नाम पर लोगों को ठगने वाला गैंग गिरफ्तार, 5 आरोपी दबोचे गए..

    रोजगार के नाम पर लोगों को ठगने वाला गैंग गिरफ्तार, 5 आरोपी दबोचे गए..

    रोजगार के नाम पर लोगों को ठगने वाला गैंग गिरफ्तार, 5 आरोपी दबोचे गए..

    Moradabad : नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने और विरोध करने पर फायरिंग कर जान से मारने की कोशिश करने वाले गिरोह का सिविल लाइंस पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अवैध तमंचा, कारतूस, नकदी, मोबाइल फोन और घटना में प्रयुक्त कार बरामद की है।

    पुलिस के अनुसार, फतेहपुर निवासी महेंद्र कुमार को उनके परिचित ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर मुरादाबाद बुलाया था। यहां आरोपियों ने उन्हें अपनी कार में बैठाकर बंधक जैसा बना लिया और उनके खाते से जबरन रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा ली। जब पीड़ित ने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की, जान से मारने की धमकी दी और फायरिंग कर दी।

    घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइंस थाना पुलिस सक्रिय हो गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह और क्षेत्राधिकारी सिविल लाइंस अभिनव द्विवेदी के नेतृत्व में टीम गठित की गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए देर रात पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान काव्यांश शर्मा, अक्षय, दीपक, गुलशेर उर्फ इरशाद अली और सूरज बोहरा के रूप में हुई है। सभी आरोपी उत्तराखंड के जनपद ऊधम सिंह नगर के विभिन्न क्षेत्रों के निवासी बताए गए हैं। इनमें से चार आरोपी आईटीआई थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं।

    पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक अवैध तमंचा, दो जिंदा कारतूस, एक खोखा कारतूस, चार मोबाइल फोन, एक लाख आठ हजार रुपये नकद और उत्तराखंड नंबर की बलेनो कार बरामद की है। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और लेन-देन की भी जांच कर रही है, ताकि ठगी की रकम और अन्य पीड़ितों की जानकारी सामने आ सके।

    एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अक्षय पहले से पीड़ित महेंद्र कुमार को जानता था। इसी परिचय का फायदा उठाकर उसे नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से उसे बुलाकर ठगी और फायरिंग की वारदात को अंजाम दिया गया।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है। आशंका है कि यह गिरोह नौकरी दिलाने के नाम पर अन्य लोगों को भी निशाना बना चुका है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।