सनातन धर्म में गुरुवार का दिन गुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और कुछ विशेष उपाय करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और सम्मान के अवसर
बढ़ते हैं। नौकरी, व्यापार या करियर में उन्नति के लिए गुरुवार के दिन कुछ खास उपाय करना लाभकारी माना जाता है। तो चलिए जानते हैं इन आसान, लेकिन असरदार उपायों के बारे में।
पीला रंग
गुरुवार के दिन पीले रंग का विशेष महत्व है। इस दिन पीले कपड़े पहनकर विष्णु जी की पूजा करें। साथ ही केले के पेड़ की पूजा करें और उसकी जड़ में चना दाल और गुड़ अर्पित करें। 5 देसी घी के दीपक जलाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है।
नौकरी-व्यापार के लिए उपाय
अगर करियर में रुकावटें आ रही हैं या नौकरी में सफलता चाहते हैं, तो गुरुवार के दिन पूजा स्थान पर हल्दी की माला रखना शुभ माना जाता है। इस दिन हल्दी का छोटा सा तिलक लगाने और पीले वस्त्र धारण करने से गुरु ग्रह मजबूत होने की मान्यता है। साथ ही चने की दाल और गुड़ को घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर रखने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।
बिजनेस में तरक्की के लिए
गुरुवार के दिन विष्णु जी को चंदन का तिलक लगाएं और चंदन की सुगंध वाली धूप जलाएं। फिर अपने कारोबार की सफलता और विस्तार के लिए प्रार्थना करें। इससे व्यापार में आने वाली बाधाएं कम हो सकती हैं।
विष्णु पूजा
गुरुवार को सुबह स्नान करके विष्णु जी और मां लक्ष्मी की पूजा
करके पीले फूल अर्पित करें। केले, दाल और गुड़ का भोग लगाएं। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। इस दिन धन का लेन देन करने से बचें।
प्रमोशन के लिए करें ये उपाय
नौकरी में प्रमोशन, वेतन वृद्धि और रोजगार से जुड़ी परेशानियां दूर करने के लिए इस दिन पीले कपड़े में पीले फूल, नारियल, पीले फल, हल्दी और नमक बांधकर मंदिर की सीढ़ियों पर रखें। मान्यता है कि इससे तरक्की के रास्ते खुलते हैं।
हल्दी वाले पानी से स्नान
गुरुवार के दिन नहाने के पानी में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर स्नान करें। इस दौरान ‘ऊं नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहने की मान्यता है।
शत्रु बाधा निवारण उपाय
अगर शत्रु से परेशानी है, तो गुरुवार को पीले कपड़े पर हल्दी से उसका नाम लिखकर विष्णु जी के चरणों में अर्पित करें। वहीं संतान की चिंता दूर करने के लिए पीले कपड़े को संतान के हाथों से स्पर्श कराकर भगवान विष्णु को अर्पित करें और ‘ऊं ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का 11 बार जाप करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
आजकल मॉडर्न होम डेकोर में कांच से बनी चीजों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। डाइनिंग टेबल से लेकर बर्तन, शोपीस तक, कांच की चीजें लगभग हर घर का हिस्सा बन चुकी हैं। वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इनका जरूरत से ज्यादा उपयोग शुभ नहीं होता। क्योंकि कई बार कांच की वस्तुएं घर के माहौल, रिश्तों और मानसिक शांति पर नकारात्मक असर डालती हैं। अगर फिर भी आप इन चीजों का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ख्याल रखना जरूरी है। तो चलिए जानते हैं इससे जुड़े वास्तु नियम क्या है।
कांच का सीमित करें इस्तेमाल
वास्तु शास्त्र कहता है कि
घर में कांच की वस्तुओं का उपयोग जरूरत के हिसाब से ही करना चाहिए। अगर घर में हर जगह कांच का बहुत इस्तेमाल किया जाए, तो इसका असर परिवार के सदस्यों के स्वभाव पर पड़ सकता है। मान्यता है कि इससे लोग अधिक भावुक हो सकते हैं। ऐसे में छोटी-छोटी बातों पर गलतफहमियां या तनाव बढ़ने की संभावना रहती है।
कांच के बर्तन
आजकल बहुत से घरों में लोग रोजाना ही भोजन के लिए कांच की प्लेट, कटोरी और गिलास का इस्तेमाल करते हैं। हर समय कांच के बर्तनों का उपयोग करने से जीवन में संतुष्टि और आनंद की भावना धीरे-धीरे कम हो सकती है। ऐसे में इनका इस्तेमाल समझदारी से करें, ताकि इसका बुरा प्रभाव आपके परिवार पर न पड़े।
मिरर लगाने की सही जगह
दर्पण को वास्तु में विशेष महत्व दिया गया है। इसे व्यक्ति की भावनाओं का भी रिफ्लेक्शन माना जाता है। इसलिए घर के हर हिस्से में आईना लगाने से बचना चाहिए। खासकर बेडरूम या सोने की जगह पर आईना लगाना सही नहीं माना जाता। सुबह उठते ही सबसे पहले नजर आईने पर नहीं पड़ना चाहिए। ऐसे में सुबह उठते ही दर्पण के सामने न खड़े होने की सलाह दी जाती है।
कांच की टेबल से जुड़ी मान्यता
कई घरों और ऑफिस में कांच की टेबल का चलन बढ़ गया है, लेकिन वास्तु की माने तो लंबे समय तक कांच की मेज पर काम करना उचित नहीं होता है। इससे एकाग्रता प्रभावित हो सकती है और करियर में रुकावटें आने की आशंका रहती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, डेस्क जॉब, खराब डाइट, बिगड़ता लाइफस्टाइल और निष्क्रिय जीवनशैली कम उम्र में ही लोगों को डायबिटीज का शिकार बना रही है। खराब डाइट का सेवन तेजी से ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ाता है। आमतौर पर माना जाता है कि ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए बॉडी को एक्टिव रखना, घंटों जिम में पसीना बहाना जरूरी है। वॉक को खासतौर पर शुगर कंट्रोल करने के लिए जरूरी माना जाता है। अक्सर लोग सीटिंग जॉब, वक्त की कमी और आलस की वजह से वॉक नहीं कर पाते और उनका शुगर का स्तर बढ़ने लगता है।
बोर्ड-प्रमाणित इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. पर्ल ने इंस्टाग्राम पोस्ट में डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि अगर हर 45 मिनट में सिर्फ 3 मिनट तक ये खास एक्सरसाइज की जाए तो आसानी से ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल किया जा सकता है। इस स्टडी में अधिक वजन वाले पुरुषों पर 8.5 घंटे तक बैठे रहने की स्थिति में अलग-अलग तरह की शारीरिक गतिविधियों के असर की तुलना की गई।
डॉ. पर्ल के मुताबिक हर 45 मिनट में बॉडी-वेट स्क्वाट्स (Body weight Squats) करने वाले लोगों में ब्लड शुगर का स्तर, उन लोगों की तुलना में बेहतर रहा जो 30 मिनट तक वॉक करते थे। एक्सपर्ट ने बताया इस एक्सरसाइज का असर सिर्फ ब्लड शुगर कंट्रोल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिमाग और ओवर ऑल हेल्थ के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।
3 मिनट की एक्सरसाइज कैसे असर करती है, रिसर्च से समझें
शोध में प्रतिभागियों को चार समूहों में बांटा गया। पहला समूह पूरे समय बैठा रहा जबकि दूसरे समूह ने एक बार 30 मिनट की वॉक की। तीसरे समूह ने हर 45 मिनट में 3 मिनट तक वॉक की। चौथे समूह ने हर 45 मिनट में लगभग 10 बॉडी-वेट स्क्वाट्स किए। डॉ. पर्ल मटर ने रिसर्च के निष्कर्ष का हवाला देते हुए बताया जिन लोगों ने हर 45 मिनट में थोड़ी-थोड़ी एक्सरसाइज, चाहे स्क्वाट्स हों या छोटी वॉक हो, की उनका ब्लड शुगर बेहतर तरीके से नॉर्मल रहा। एक्सपर्ट ने बताया साढ़े 8 घंटे बैठकर काम करने के बाद सिर्फ 30 मिनट की वॉक करने से बेहतर हर 45 मिनट में 3 मिनट की एक्सरसाइज है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि ब्लड शुगर कंट्रोल का संबंध ग्लूटियस मैक्सिमस (कूल्हों की बड़ी मांसपेशी) और क्वाड्रिसेप्स (जांघ की आगे की मांसपेशियां) के सक्रिय होने से था। इससे पता चलता है कि शरीर की ये बड़ी मांसपेशियां मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाए रखने में अहम किरदार निभाती हैं। डॉ. पर्ल मटर ने कहा हर किसी के लिए हर 45 मिनट में एक्सरसाइज करना संभव नहीं हो सकता। लेकिन इस स्टडी की खास बात यह है कि इसमें अलग-अलग तरह की छोटी-छोटी एक्सरसाइज को देखा गया। चाहे कुछ लोग स्क्वाट्स करें या थोड़ी देर टहलें, शरीर को इससे मेटाबॉलिक फायदे मिलते हैं। इसका सकारात्मक असर दिमाग की सेहत पर भी पड़ सकता है, क्योंकि मेटाबॉलिज्म और ब्रेन हेल्थ एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
बार-बार थोड़ा चलना-फिरना क्यों है जरूरी?
एलीट केयर क्लिनिक के कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. पल्लेटी शिवा कार्तिक रेड्डी (MBBS, MD, FAIG) ने बताया हर आधा से एक घंटे में थोड़ी देर चलना-फिरना लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के नुकसान को कम करता है। लगातार बैठे रहने से मांसपेशियां ब्लड से ग्लूकोज कम मात्रा में ले पाती हैं। जब स्क्वाट्स, तेज चाल से चलना या सीढ़ियां चढ़ने जैसी एक्टिविटी की जाती है तो शरीर की बड़ी मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, तो वे खून में मौजूद ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करती हैं। यह प्रक्रिया कुछ हद तक इंसुलिन पर निर्भर नहीं होती।
एक्सपर्ट ने बताया अगर कोई इंसान पूरा दिन 10 से 12 घंटे सिर्फ बैठा रहता है और फिर एक बार आधा घंटे वॉक कर लेता है तो ऐसे लोगों में ब्लड शुगर में उतार चढ़ाव बना रहता है। इसके विपरीत, दिनभर में बार-बार छोटे-छोटे मूवमेंट ब्रेक लेने से शरीर को लगातार मेटाबॉलिक फायदा मिलता है, जिससे ब्लड शुगर बेहतर तरीके से कंट्रोल रहता है और समय के साथ इंसुलिन सेंसिटिविटी भी सुधरती है।
शुगर कंट्रोल करने के लिए कौन-कौन सी एक्सरसाइज करें?
डॉ. रेड्डी के अनुसार बॉडी-वेट स्क्वाट्स इसलिए प्रभावी हैं क्योंकि ये पैरों की बड़ी मांसपेशियों को एक्टिव करती है, जो अधिक मात्रा में ग्लूकोज का उपयोग कर सकती हैं। एक्सपर्ट ने बताया हालांकि एक्सरसाइज करना सभी के लिए उपयुक्त नहीं है खासकर जिन बुजुर्गों को संतुलन बनाने में परेशानी होती है, घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित लोगों, गंभीर मोटापे से ग्रस्त लोगों या जिन्हें पहले से ही जोड़ों के दर्द की समस्या है उनके लिए एक्सरसाइज करना परेशानी का सबब बन सकता है। एक्सपर्ट ने बताया एक्सरसाइज हमेशा व्यक्ति की उम्र, फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।
सिटिंग जॉब करते हैं तो इस तरह रखें बॉडी को एक्टिव
फोन पर बात करते समय कुछ कदम टहलें इस तरह आपकी बॉडी एक्टिविटी बढ़ेगी और मसल्स की स्टिफनेस कम होगी और शुगर नॉर्मल रखने में भी मदद मिलेगी।
अगर आप ज्यादा मीटिंग करते हैं या सीटिंग जॉब करते हैं तो एक मीटिंग खत्म होने और दूसरी शुरू होने के बीच 2–3 मिनट चलें। इस तरह 2 से तीन मिनट की वॉक आपकी बॉडी के लिए असरदार साबित होगी।
हर 45–60 मिनट में उठकर थोड़ी देर चलें या कुछ स्क्वाट्स करें। नियमित रूप से ऐसा करने पर समय के साथ ब्लड शुगर कंट्रोल और मेटाबॉलिक हेल्थ में सुधार देखा जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है।
Bahubali Vijay Mishra Story: वे लोग जो समझते हैं कि वेब सीरीज मिर्जापुर के कालीन भैया, मुन्ना भैया और गुड्डू भैया का भौकाल ही सबसे बड़ा था, उन्हें पूर्वांचल की असली धरती का इतिहास जरूर जानना चाहिए. एक दौर था जब पूर्वांचल की सियासत और ठेकेदारी पर एक ऐसे ब्राह्मण बाहुबली का सिक्का चलता था जिसके आगे मिर्जापुर के सारे किरदार फेल थे, नाम था विजय मिश्रा.
भदोही और ज्ञानपुर के इलाके में कभी जिसकी तूती बोलती थी आज उसका अरबों का साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढह चुका है. ताजा खबर यह है कि मुंबई में बाहुबली विजय मिश्रा की 100 करोड़ रुपये की एक मिल को कुर्क कर लिया गया है. अपराध की दुनिया से राजनीति के शीर्ष तक पहुंचने वाले इस बाहुबली की कहानी जितनी आलीशान थी उसका अंत उतना ही दर्दनाक है. आज विजय मिश्रा खुद उम्रकैद काट रहे हैं, पत्नी-बेटा और बहू जेल में हैं, राजनीति खत्म हो चुकी है और संपत्ति लगातार जब्त हो रही है.
कोयले के धंधे से कोर्ट रूम मर्डर तक की कहानी
विजय मिश्रा की कहानी की शुरुआत भदोही और प्रयागराज से होती है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय जब पूर्वांचल में छात्र राजनीति और बाहुबल का केंद्र था, तब विजय मिश्रा विश्वविद्यालय से नहीं बल्कि कोयले और पेट्रोल पंप के अपने कारोबार से ताकत बटोर रहा था. बात साल 1980 की है, जब इलाहाबाद जिला अदालत परिसर में प्रकाश नारायण पांडे नाम के व्यक्ति की सरेआम गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई. इस सनसनीखेज कोर्ट रूम मर्डर में पहली बार विजय मिश्रा का नाम सामने आया. यह वही कांड था जिसने विजय मिश्रा को जरायम की दुनिया में पहचान दी और नियति का खेल देखिए कि इसी केस ने अंत में उसके पतन की स्क्रिप्ट भी लिखी.
आगरा में ताजमहल घूमने आईं फ्रांस की दो महिला पर्यटकों से कथित तौर पर ऑनलाइन कैब ड्राइवर ने अतिरिक्त किराये के नाम पर 500 रुपये की जगह 50 यूरो ले लिए.
Image- AI
उत्तर प्रदेश के आगरा में दुनिया का अजूबा ताजमहल देखने आईं फ्रांस की दो महिला पर्यटकों के साथ ऑनलाइन कैब बुकिंग के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है. दिल्ली एयरपोर्ट से आगरा तक का सफर तय करने के बाद, इन विदेशी सैलानियों को भारतीय मुद्रा की सही समझ न होने का फायदा उठाकर ठग लिया गया.
हालांकि, स्थानीय गाइडों की सूझबूझ और ताज सुरक्षा पुलिस की तत्परता ने यूपी पुलिस की छवि खराब होने से बचा ली. पुलिस ने न सिर्फ मुस्तैदी दिखाई बल्कि ठगे गए पूरे पैसे भी वापस कराए. लेकिन इस पूरी घटना के दौरान बीच सड़क पर कुछ ऐसा हुआ कि विदेशी सैलानी फूट-फूटकर रोने लगीं. आखिर उस वक्त वहां क्या हुआ था और ड्राइवर ने किस चालाकी से वारदात को अंजाम दिया? आइए आपको बताते हैं…
फ्लाइट लेट होने का बहाना और 500 की जगह ऐंठे ’50 यूरो’
फ्रांस की रहने वाली जूलियट ईवा और उनकी दोस्त वैरोनिका मंगलवार सुबह दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पहुंची थीं. उनकी फ्लाइट करीब डेढ़ घंटे लेट थी, जिसके बाद दोनों ने ऑनलाइन कैब बुक की और आगरा के लिए रवाना हुईं. उन्होंने कैब का तय किराया पहले ही ऑनलाइन दे दिया था.
Bihar News: बिहार में जुर्म का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा हैं. एक ताजा मामले में बिहार के बेगुसराय में एक नाबालिग लड़के को चोरी करने के शक में पेड़ से बांधकर बुरी तरह पीटा गया. इन सबके बीच नाबालिग लगातार उसे न पीटने की गुहार लगाता रहा. लेकिन नामुराद भीड़ ने उसकी एक न सुनी. और नाबालिग लड़के को जख्म पर जख्म देते रहें.
जुल्म की इंतहा इस कदर थी कि लड़का मार खाता रहा. और भीड़ उसे पीटकर मजा लेती रहीं. उसके हाथों को बांधकर उसे बंधक बनाकर तालिबानी सजा देते रहें. ऊँचे मकान वाले जो थे साफ़ बच गए. इल्ज़ाम-ए-क़त्ल सारा ग़रीबों के सर गया. चोरी के इल्जाम में नाबालिग को इस कदर पीटा गया कि वो अपने होशो-हवास खो बैठा. उसके बाद उसे छोड़ दिया गया.
बखरी थाना क्षेत्र का है मामला
बेगूसराय के बखरी थाना क्षेत्र में भीड़ की हैवानियत का मामला सामने आया है. आरोप है कि चोरी के संदेह में एक नाबालिग युवक को लोगों ने पकड़ लिया और उसे पेड़ से बांध दिया. इसके बाद उसकी जमकर पिटाई की गई. बताया जा रहा है कि नाबालिग युवक लगातार लोगों से रहम की गुहार लगाता रहा, लेकिन मौजूद लोगों ने उसकी एक नहीं सुनी.
लड़के को अर्धवस्त्र अवस्था में पीटा
जारी फोटो को आधार मानते हुए ये देखा जा सकता है कि लड़के को आधे कपड़़ो में पीटा और प्रताड़ित किया जा रहा है. जबकि आसपास लोगों की भीड़ जुटी हुई है. घटना के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा. लोग तमाशबीन बनकर तमाशा देखते रहें. और इंसानियत शर्मसार होती रहीं.
आरोप है कि महिला ने अपनी बच्ची को 2 लाख रुपये में बेच दिया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले का खुलासा होने के एक महीने बाद आरोपी मां को गिरफ्तार कर लिया गया है.
Bihar Crime: बिहार के किशनगंज से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक महिला पर अपनी ही बच्ची को बेचने का आरोप है. आरोप है कि एक कलयुगी मां ने पैसों के चलते अपनी 12 साल की नाबालिग बेटी को 2 लाख रुपये में बेच दिया. मां ने अपनी ही सगी बेटी को नर्क जैसी जिंदगी में धकेल दिया और बेचने वाले से पैसे ले लिए. यह मामला जिले के बहादुरगंज थाना क्षेत्र का है. पुलिस जांच में इस बात का पता लगा कि आरोपी महिला ने 9 जनवरी को मोतिहारी के नरकटिया गांव निवासी अमित राय से एक सौदा तय किया था.
आरोप है कि महिला ने अपनी बच्ची को 2 लाख रुपये में बेच दिया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले का खुलासा होने के एक महीने बाद आरोपी मां को गिरफ्तार कर लिया गया है.
पीड़िता के साथ होता था दुष्कर्म
आरोप है कि अमित राय (25) मां द्वारा बेटी को बेचने के बाद बच्ची को अपने दोस्तों के साथ बहला-फुसलाकर अपने साथ मोतिहारी लेकर चला गया. पीड़िता ने बताया कि अमित राय उसे जान से मारने की धमकी देता था साथ ही साथ उसके साथ दुष्कर्म भी करता था. विरोध करने पर उसके साथ बेरहमी से मारता-पीटता भी था. बच्ची के मुताबिक वह नशे की हालत में उसके साथ हैवानियत किया करता था. आरोप है कि पिछले महीने जब आरोपी बच्ची के साथ दुष्कर्म करने की कोशिश कर रहा था तब उसकी जेब से मोबाइल गिर गया था. इसके बाद उसने हिम्मत जुटाकर अपने पिता को फोन किया और इस बारे में पूरी सच्चाई बताई.
पिता ने पुलिस को दी जानकारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बच्ची द्वारा इस पूरी घटना की जानकारी जब पिता को दी गई तो उसके पिता ने मोतिहारी पुलिस से संपर्क किया. इसके बाद दोनों ने महिला थाने पहुंचकर लिखित में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने बयान पर आरोपी अमित राय समेत कुल 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है साथ ही साथ पीड़िता की मां को भी गिरफ्तार कर लिया है.
आयुर्वेद में ऋतु अनुसार खाने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार चरकसंहिता में बताया गया है कि दही को तीन ऋतुओं में नहीं खाना चाहिए। शरद्ग्रीष्मवसन्तेषु प्रायशो दधि गर्हितम्। अर्थात् शरद् यानि सितंबर-अक्टूबर, ग्रीष्म और बसंत यानि मार्च, अप्रैल, मई, जून में भी दही खाना निषेध बताया गया है। दही की तासीर गरम होती है, पर जब आप इसका मठ्ठा बनाकर पीते है या इसमें पानी मिलाकर पीते है तो यह आपके पेट को अंदर से ठंडा रखता है। दही को पतला करके खाने से एसिडिटी नहीं होती और डिहाइड्रेशन दूर होता है। इसलिए इसका सेवन गर्मियों में लाभदायक माना जाता है। लेकिन मानसून के मौसम में दही क्यों हानिकारक बन जाता है। आयुर्वेद क्या कहता है आइये डॉक्टर शर्मा से जानते हैं। मानसून में दही खानी चाहिए या नहीं?
क्या बारिश के मौसम में दही नहीं खानी चाहिए?
आशा आयुर्वेदा की डॉक्टर चंचल शर्मा ने बताया कि मॉनसून के दौरान हमारी पाचन शक्ति कम हो जाती है। इसका मतलब है कि बहुत ज़्यादा ठंडा और भारी दही खाने से गैस और कफ बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। दही की प्रकृति अम्लीय होती है और सादा दही का सेवन आपके खून को भी दूषित कर सकता है। अगर आप रात में दही खाते है तो अभी रुक जाइए, क्योंकि रात में दही खाने से बलगम बन सकता है और गले में खराश हो सकती है।
दही खाने के फायदे
दही हमारे पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है
दही खाने से इम्यून सिस्टम बेहतर होता है
दही से हड्डियों को भी स्वस्थ रख जाता है
वजन को नियंत्रित रखने में भी दही मदद करती है
मानसून में दही सेवन के नुकसान
अगर आप मानसून के मौसम में दही खा रहे हैं, तो इसे सीमित मात्रा में और सही तरीके से खाएं। आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार, गर्मी और मानसून के मौसम में दही में मीठा मिलाकर खाना चाहिए। इस तरह इसकी तासीर बहुत गर्म नहीं होगी और इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होगा। बरसातों में ज्यादा दही खाने से पेट से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे-
दही की तासीर एसिडिक होना, त्वचा से जुड़ी कुछ समस्याएं होने का खतरा, पाचन क्रिया की कमजोरी।
मानसून में दही खाने का सही तरीका
आयुर्वेद में दही को देर से पचने वाला आहार माना जाता है, लेकिन इसे दूसरी चीजों के साथ मिलाकर खाएं तो नुकसान कम होगा। दही में थोड़ा सा भुना जीरा पाउडर और काला नमक डालकर खाएं। इससे पाचन बेहतर होता है। घी, चीनी या आंवला जैसी चीजों के साथ खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। फ्रिज से निकालते ही न खाएं। इसे सामान्य तापमान पर आने के बाद खाएं। बारिश के मौसम में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और पाचन शक्ति कम हो जाती है। इससे दही देर से पचती है और इसका सेवन करने से अपच की समस्या हो सकती है। लोगों को बरसात में हल्का खाना खाना चाहिए, जो आसानी से पच जाए। जो लोग अपच की समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें दही से दूरी बना लेनी चाहिए।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
यह हैदराबाद की एक घटना , जिसमें एक पिता पर अपनी 19 साल की बेटी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है।
हैदराबाद: हैदराबाद पुलिस ने एक व्यक्ति के खिलाफ अपने ही घर में अपनी 19 वर्षीय बेटी का कथित रूप से यौन उत्पीड़न करने का मामला दर्ज किया है। आरोपी पर आरोप है कि वह लगातार लड़की को गलत तरीके से छूता था और उसका यौन उत्पीड़न करता था।
हैदराबाद की लड़की को दी गई धमकी
पीड़िता के अनुसार, उसके पिता ने धमकी दी थी कि अगर उसने इस शोषण के बारे में किसी को भी बताया तो वह उसे जान से मार देगा। यह मामला तब सामने आया जब लड़की ने अपनी माँ को इस कथित उत्पीड़न के बारे में जानकारी दी।
माँ ने दर्ज कराई शिकायत
जब लड़की की माँ ने आरोपी का सामना किया, तो आरोपी ने कथित तौर पर उसे भी धमकी दी। इसके बाद, पीड़िता की माँ ने बोराबंदा (Borabanda) पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग से लैंगिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाया जा रहा है. आरोप है कि फूड इंस्पेक्टर ने एक लड़की को नौकरी पर रखा था, जिसके बाद वह उसे ऑफिस का काम है बोलकर अपने घर पर बुलाने लगा था. जहां वह नाबालिग लड़की के साथ गलत हरकतें करता था. नाबालिग द्वारा विरोध करने पर उसे जान से मार देने की धमकी के साथ ही नौकरी से निकाल देने के लिए कहता था. आरोप है कि फूड इंस्पेक्टर द्वारा किए जाने वाले इस गलत काम में उसका ड्राइवर भी मदद करता था.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फूड इंस्पेक्टर निखिलेश टेम्भुने और उसके सहयोगी शाहरुख को दोषी ठहराते हुए 5-5 वर्ष की सजा सुनाई गई है. न्यायालय ने मामले से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए कलेक्टर को भी निर्देश दिए हैं.
2022 में दर्ज हुई थी शिकायत
जानकारी के मुताबिक यह मामला पीड़िता की मां ने 11 जनवरी 2022 रामानुजगंज थाने में दर्ज कराया था. मामले की जांच के बाद फूड इंस्पेक्टर द्वारा नाबालिग को अवैध रूप से नौकरी पर रखने एवं राशन कार्ड से जुड़े कार्यों में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को निर्देश दिए हैं. आरोप है कि लड़की को फूड इंस्पेक्टर के कार्यालय में काम पर रखा गया था, जहां उसके साथ लैंगिक उत्पीड़न किया गया था. पुलिस विवेचना के बाद मामला विशेष पॉक्सो न्यायालय में प्रस्तुत किया गया.
आरोपियों को सुनाई गई 5-5 साल की सजा
रिपोर्ट्स के मुताबिक विशेष न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट-POCSO) शुभ्रा पचौरी ने सुनवाई के बाद फूड इंस्पेक्टर निखिलेश टेम्भुने को पॉक्सो एक्ट के साथ ही साथ भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं में दोषी पाया है और उसे 5 साल तक के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. वहीं, उसके सह-आरोपी शाहरुख को पॉक्सो एक्ट की धारा 16/17 के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है